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ईदगाह पर नमाज के बाद लहराया गया एक साथ तिरंगा और भाजपा का झंडा

आज देशभर में ईद हर्षोउल्लास मनाई जा रही है| हालाँकि कहीं-कहीं जैसे कश्मीर में नमाज के बाद पत्थर बाज सक्रीय हो गए। वहीं यूपी के मुजफ्फरनगर जो अक्सर कभी तनाव पूर्ण स्थितियों की वजह से चर्चा में रहता था आज ईद-उल-फितर के दिन एक नजारा ऐसा भी दिखा जो आज तक संभवतः पहले नहीं देखा गया।

हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, पहली बार अमन के प्रतीक रूप में राष्ट्रीय ध्वज के साथ भाजपा का झंडा भी नमाजियों के बीच ईद के मौके पर लहराता हुआ दिखाई दिया। जिससे कुछ समय के लिए असमंजस की स्थिति भी बन गई और इसे देखकर सभी आश्चर्यचकित भी हुए। इस झंडे को फहराने पर कुछ आपत्ति हो सकती थी किंतु आज जब नमाज के दौरान झंडे को कुछ मुस्लिम बच्चों द्वारा लहराया गया तो सबने इसे खुशी से स्वीकार किया और माहौल अमन और सद्भाव भरा बना रहा।

वैसे तो उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के ईदगाह में आज ईद उल फितर पर हजारों लोगों ने ईद की नमाज अदा की। तिरंगा के साथ बीजेपी का झंडा भी फहरा दिया गया। ये प्रतीक रूप में ही सही लेकिन इसमें भाजपा के नाम पर मुस्लिमों को डराने वालों के लिए एक बड़ी नसीहत भी छुपी है।

जबकि नमाज के दौरान वहाँ कोई भी भाजपा नेता या जनप्रतिनिधि ईदगाह पर मौजूद नहीं था। हालाँकि इस बार प्रधानमंत्री के ट्विटर हैंडल से हिंदी, उर्दू और अंग्रेजी तीनों भाषाओं में सभी नमाजियों को ईद की मुबारकबाद दी गई। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मुजफ्फरनगर ईदगाह पर जिलाधिकारी अजय शंकर पांडे एसएसपी सुधीर कुमार सिंह के अलावा नगर पालिका परिषद की चेयरमैन अंजू अग्रवाल मुख्य रूप से मौजूद रही।

EID मुबारक के बदले ममता-केजरीवाल को मिले अतरंगी जवाब – ऑपइंडिया इसकी कड़ी निंदा करती है

आज पूरे देश भर में ईद-उल-फितर का त्यौहार बड़ी धूम-धाम से मनाया जा रहा है। सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म पर लोग बढ़-चढ़ कर ईद मुबारक कह रहे है। ऐसे में बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी पीछे नहीं हैं। अब चूँकि ममता बनर्जी बनाम ‘जय श्री राम-नारे’ और केजरीवाल बनाम चुनाव का मुद्दा गर्माया हुआ है, तो लोगों ने मौक़े का फायदा उठाकर उनके ट्विट्स पर जमकर दोनों नेताओं की चुटकी ली है।

ममता बनर्जी के ईद मुबारक कहते ही यूजर्स ने उनके ट्वीट पर जय श्री राम लिखना शुरू कर दिया और ऐसा एक बार नहीं बल्कि कई-कई बार किया गया। ममता ने अपने ट्वीट में लिखा, “ईद-उल-फितर की सभी को मुबारकबाद, धर्म इंसान का निजी विश्वास है लेकिन त्यौहार सभी के हैं। आइए इस सोच को एकता के साथ मजबूत करते है और शांति और भाइचारे से रहते हैं।”

ममता के इस पोस्ट पर यूजर्स द्वारा उन्हें ट्रोल किए जाने का मुख्य कारण स्पष्ट है कि वो जय श्री राम बोलने वाले के प्रति इतनी नफरत रखती हैं कि चलते काफिले को रोककर उस आवाज को चुप करवाती हैं, जो राम के नाम पर निकली हो और ईद के त्यौहार पर वह खुद धर्म और त्यौहार के बीच फर्क़ समझाती हैं। ममता के इस ट्वीट पर अधिकांश कमेंट आपको सिर्फ़ ‘………जय श्री राम~’ के ही देखने को मिलेंगे।

या कहें कि शायद ही आपको ममता बनर्जी की मुबारकबाद के बदले किसी की मुबारकबाद देखने को मिले, क्योंकि लगभग हर यूजर ने उन्हें जवाब में एक ही नाम लिखा है। ममता बनर्जी का ट्विट और उस पर कमेंट देखकर ऐसा लगता है जैसे पूरी ट्विटर यूजर्स की भीड़ उन्हें चिढ़ाने के लिए तत्पर हो।

इसी तरह अरविंद केजरीवाल ने भी जब सोशल मीडिया पर लोगों को ईद मुबारक कहा, तो लोगों ने उन्हें बदले में मुबारकबाद देने की बजाय आने वाले चुनावों की याद दिला दी।

किसी ने उन्हें आने वाले चुनावों में दिल्ली में सूपड़ा साफ़ होने की बधाई दी तो किसी ने ईद के त्यौहार पर भी उन्हें झूठा और फ्रॉड करार दे दिया।

इस ट्वीट पर लोगों ने महिलाओं को डीटीसी और मेट्रो में मुफ्त सफ़र करने के फैसले की भी आलोचना की। एक शख्स ने तो केजरीवाल को यहाँ तक कह दिया, “मौलाना जी कभी इतनी जल्दी दीपावली या होली की बधाई भी देते हो??? इस बार हिन्दू तुम्हें बाबाजी का ठुल्लू ही देने वाला है, जाओ और इफ्तार में हड्डी चुसो समय हो गया है।”

ऑपइंडिया का मानना है कि जब केजरीवाल और ममता बनर्जी ईद की बधाई दे रहे थे, तो लोगों को बदले में ‘जय श्री राम’ और ‘चुनाव’ कहकर चिढ़ाने की क्या जरूरत थी। सेकुलर देश में रहकर भले ही ये नेता हिंदू त्यौहारों के प्रति इतने सजग न हों लेकिन समुदाय विशेष के प्रति और उनके पर्वों के प्रति उनकी जागरूकता सराहनीय है। दोनों नेताओं के पोस्ट पर यूजर्स के ऐसे रिएक्शन की हम कड़ी निंदा करते हैं। आप भी उत्सव के इस माहौल में शामिल होकर सहृदयता का परिचय दीजिए।

3 वर्षीय ‘सोनम’ की जाहिद और असलम ने की निर्मम हत्या, 3 दिन तक सड़ता रहा शव

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में जाहिद नाम के व्यक्ति ने अपने साथी के साथ मिलकर ‘सोनम’ (बदला हुआ नाम) नामक 3 साल की बच्ची की निर्मम हत्या कर डाली। हत्या के पीछे का कारण बच्ची के परिवार से हुई एक बहस थी, जो 10,000 के लोन के कारण हुई थी।

2 जून को बच्ची का शव बरामद करने के बाद अलीगढ़ पुलिस ने जाहिद और उसके दोस्त असलम को गिरफ्तार कर लिया है। जाँच में पता चला है कि जाहिद ने मासूम का गला दुपट्टे से दबाया और फिर उसे अपने घर मेंं
भूसे की ढेर में छिपा दिया। 3 दिन बाद जब शव से गंध आने लगी तो शव को बाहर लाकर फेंक दिया। पुलिस को बरामद हुआ ‘सोनम’ का शव पूरी तरह सड़ चुका है।

अमर उजाला में प्रकाशित खबर के मुताबिक सर्कल ऑफिसर पंकज श्रीवास्तव ने बताया है कि 2 जून की सुबह 3 दिन से लापता बच्ची के शव बरामद होने के बाद एसएसपी के निर्देश पर एसओजी, सर्विलांस, फील्ड यूनिट, थाना पुलिस मामले की जाँच में जुटी हुई थी।

परिजनों से पूछताछ में मोहल्ले से सटे कस्बे के एक मोहल्ले ऊपरकोट में रहने वाले जाहिद और उसके दोस्त असलम का नाम सामने आया। ‘सोनम’ के पिता ने बताया कि जाहिद ने उनसे दस हजार रुपए लिए थे। जिसको लेकर काफी बहस भी हुई थी।

पूछताछ में जाहिद ने स्वीकारा कि उसने बेइज्जती का बदला लेने के लिए असलम संग मिलकर साजिश रची। 30 मई को जब बच्ची खेलते हुए जाहिद के दरवाजे पर पहुँची तो वो उसे बिस्कुट के बहाने अपने घर में ले गया। अपने घर ले जाकर उसने पूरी घटना को अंजाम दिया। पुलिस के अनुसार दोनों आरोपितों को अपहरण, हत्या व साक्ष्य छिपाने के आरोप में जेल भेज दिया गया है। इससे घटना से पहले जाहिद पर एक दुष्कर्म का मामला भी दर्ज है।

आर्थिक कंगाली की ओर पाकिस्तान, फौज ने की रक्षा बजट में कटौती

पस्त अर्थव्यवस्था के कारण कंगाली की ओर बढ़ रहे पाकिस्तान में सेना के बजट में कटौती की गई है। हालाँकि, यह कटौती सेना ने ख़ुद की है। प्रधानमंत्री इमरान खान ने देश की ऐसी हालत को देखते हुए सभी मंत्रालयों का बजट कम करना शुरू कर दिया है। सुरक्षा की दृष्टि से पाकिस्तान में तमाम चुनौतियाँ हैं और आतंकवादियों का लगातार पोषण करने वाले पाकिस्तान के कई इलाकों में अशांति का माहौल है। ऐसे में भी अगर सेना अगले वित्त वर्ष के लिए रक्षा बजट में कटौती के लिए तैयार हो गई है, यह पाकिस्तान की हालत को दिखाता है। सेना के इस फ़ैसले का स्वागत करते हुए पाक प्रधानमंत्री इमरान खान ने लिखा:

“मैं विभिन्न सुरक्षा चुनौतियों के बावजूद आर्थिक संकट की घड़ी में सेना की ओर से अपने ख़र्चे में कटौती के फ़ैसले का स्वागत करता हूँ। हम इन बचाए गए रुपयों को बलूचिस्तान और क़बायली इलाक़ों में ख़र्च करेंगे।”

इमरान खान ने बचाए गए रुपयों को बलूचिस्तान में ख़र्च करने की बात कही है। हालाँकि, इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस, सैन्य मीडिया विंग, ISPR के मेजर जनरल आसिफ गफूर ने कहा कि यह कटौती रक्षा और सुरक्षा की कीमत पर नहीं होगी। यह कटौती सेना के तीनों अंगों द्वारा की जाएगी। पाकिस्तान की आर्थिक वृद्धि दर लगातार गिरती जा रही है। पिछले वर्ष 5.2% रही आर्थिक वृद्धि दर अब बुरी तरह गिर कर 3.4% पर आ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसमें गिरावट जारी रहेगी। अगले वर्ष गिर कर इसके 2.7% हो जाने की संभावना है, जो देश के लिए एक भयावह स्थिति होगी।

कहा जा रहा है कि बचाए गए रुपयों को जनजातीय इलाक़ों में ख़र्च की जाएगी। पाकिस्तान के सूचना एवं प्रसारण मंत्री फवाद चौधरी ने पुलवामा हमले के बाद उपजे भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच कहा था कि पाकिस्तान का रक्षा बजट पहले ही बहुत कम है और इसे घटाने-बढ़ाने की कोई ज़रूरत नहीं है। देश में स्थिति इतनी ख़राब है कि मार्च में मँहगाई दर बढ़कर 9.41% हो गई, जो नवंबर 2013 के बाद से सबसे अधिक है। पाकिस्तान में पेट्रोल 112.68 रुपए, डीजल 126.82 रुपए और किरोसिन तेल 96.77 रुपए प्रति लीटर बिक रहा है।

अगर भारत और पाकिस्तान के सैन्य ख़र्च की तुलना करें तो 2018 में जहाँ भारत का सैन्य ख़र्च 66.5 अरब डॉलर रहा था, पाकिस्तान का कुल सैन्य ख़र्च 11.4 अरब डॉलर रहा था। पाकिस्तान में क़र्ज़ और जीडीपी का अनुपात 70% पहुँच गया है। सबसे बड़ी बात यह है कि पाकिस्तान में विदेशी निवेश नहीं आ रहा है। मँहगाई दर अगले वित्त वर्ष में 14% तक पहुँचने की उम्मीद है। चुनावी अभियान के दौरान विदेशी मदद को भीख बताते हुए आत्महत्या को बेहतर विकल्प कहने वाले इमरान खान अब हर देश में वित्तीय मदद के लिए गुहार लगाते फिर रहे हैं।

पाकिस्तान ने चीन से उच्च दर पर क़र्ज़ भी लिया हुआ है। इसे भी चुकाने में उसकी हालत ख़ासी पतली होने वाली है। अब देखना यह है कि मंत्रालयों का बजट काट कर और अन्य देशों से मदद माँग-माँग कर कितना रुपया बचा पाते हैं।

ED ने ₹2.9 करोड़ में बेच दी भगोड़ा हीरा कारोबारी नीरव मोदी की 5 लक्ज़री गाड़ियाँ

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भगोड़ा कारोबारी नीरव मोदी की ज़ब्त की गई लक्ज़री गाड़ियों में से 2 को बेच डाला है। नीरव मोदी की सिल्वर रोल्स रायस घोस्ट को 1.7 करोड़ रुपए में बेचा गया जबकि पोरसे कार को 60 लाख रुपए में बेचा गया। कुल मिलाकर इन दोनों कारों को बेचने के बाद ईडी के पास 2.3 करोड़ रुपए आए हैं। नीरव मोदी की अन्य गाड़ियाँ भी ईडी के शिकंजे में है और उन्हें भी बेचा जाएगा। इससे पहले भी नीरव मोदी के कारों की नीलामी रखी गई थी, लेकिन पहली बार में अच्छी क़ीमत न मिल पाने के चलते कारों की नीलामी नहीं हो पाई थी। इस बार प्रवर्तन निदेशालय को उम्मीद थी कि उसे कारों की अच्छी कीमत मिलेगी।

कुल 12 कारों को नीलामी के लिए रखा गया था, जिनमें से कई गाड़ियों को लेकर बोली लगाने वाले लोग डिपॉजिट राशि जमा कराने में नाकाम रहे। नीरव मोदी की गाड़ियों की नीलामी के लिए मेटल एंड स्क्रैप ट्रेडिग कार्पोरेशन ने 25 अप्रैल की तारीख तय की थी। ये नीलामी ऑनलाइन की जानी थी। कुल 10 गाड़ियों के लिए तीन करोड़ 29 लाख की बोली लगाई गई थी। यह राशि इन कारों के लिए ईडी की ओर से तय की गई क़ीमत से ज्यादा थी। फिर भी ईडी ने कारों की इस नीलामी को मंजूरी नहीं प्रदान की क्योंकि इन कारों से और अधिक रुपए मिलने की उम्मीद थी।

13,000 करोड़ रुपए के बैंक फ्रॉड में आरोपित नीरव मोदी अभी लन्दन में रह रहा है। 48 वर्षीय हीरा कारोबारी अभी साउथ-वेस्ट लंदन के वांड्सवर्थ जेल में बंद है। वहाँ उसकी हिरासत अवधि 27 जून तक बढ़ा दी गई है। उसे 19 मार्च को गिरफ्तार किया गया था। इकनोमिक टाइम्स के अनुसार, नीरव मोदी की कुल 5 गाड़ियों की नीलामी की गई है, जिससे ईडी को 2.9 करोड़ रुपए मिले हैं।

ईद की नमाज पढ़कर शुरू किया सेना पर पथराव, क्या ये होता है जश्न मनाने का तरीका?

‘ईद मुबारक’ के मौक़े पर भी जम्मू-कश्मीर में शांति नहीं है। बुधवार को सुबह 8 बजे ईद की नमाज पढ़ने वाले लोगों ने 11 बजे उपद्रवी बनकर सेना पर पत्थरबाजी की। साथ ही पाकिस्तान का झंडा भी फहराया।

खबरों के मुताबिक उपद्रवियों की भीड़ खतरनाक आतंकी जाकिर मूसा के समर्थन में सड़कों पर उतरी हुई है। भीड़ के हाथ में मूसा के पोस्टर है, जिन पर मूसा आर्मी लिखा हुआ है। साथ में इन पोस्टरों पर मसूद अजहर की तस्वीर भी बनी हुई है।

बता दें जिस जाकिर मूसा के समर्थन में भीड़ सेना पर पथराव कर रही है, वो पिछले महीने आतंकियों और सुरक्षाबल के बीच हुई एक मुठभेड़ में मारा गया है। जाकिर ए डबल प्लस (A++) कैटेगरी का आतंकी था, जिसके ऊपर 20 लाख रुपए का इनाम रखा गया था। 

सेना पर पत्थरबाजी की खबर सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म पर आते ही लोगों का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा है। लोगों का कहना है कि इस तरह की हरकत के बावजूद भी लोग इन पत्थरबाजों को ‘भटके हुए लोग’ और ‘आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता’ जैसी बातें करेंगे। कुछ लोग सरकार से जल्द से जल्द 370 और 35 ए को खत्म करने की बात कह रहे हैं, तो कुछ गृह मंत्री अमित शाह से उम्मीद लगाए बैठे हैं कि इन पत्थरबाजों को जल्द से जल्द सबक सिखाया जाएगा।

ट्विटर पर ही एक शख्स ने इस घटना के बारे में पढ़कर लिखा है कि उसका मन करता है कि वो ईद मनाए लेकिन ये सब देखकर वो ईद कैसे मनाए? बबलू पाठक नामक ट्विटर यूजर का कहना है कि भाईचारे की बात सब करते हैं, लेकिन ताली कभी एक हाथ से नहीं बजती है। हम साथ की बात करते है वो अलगवाद की बात करता है फिर बोलते है हमें कि हम मुस्लिम विरोधी हैं।

ट्विटर पर लोगों ने महबूबा और उमर फारूक़ पर भी सवाल उठाए हैं, जिन्हें ये पत्थरबाज मासूम लगते हैं। यूजर्स ने पूछा है, “क्या ये है शान्ति का त्यौहार? अगर शान्ति इसे कहते हैं तो आतंकवाद किसे कहते हैं। ऐसा क्या सिखाते हैं जो मस्जिदों से बाहर निकलते ही आतंक फैलाना शुरू करा देते हैं।”

लाउडस्पीकर पर भजन-कीर्तन से नमाज़ में दिक्कत! मुस्लिम गुंडों ने की पुजारी की पिटाई, उठा ले गए मूर्ति

पीलीभीत में समुदाय विशेष के लोगों को भजन-कीर्तन इतना नागवार गुजरा कि उन्होंने मंदिर में पहुँच कर तोड़फोड़ की। घटना उत्तर प्रदेश के पीलीभीत स्थित रौहनिया गाँव की है। मंगलवार को जब वहाँ स्थित एक मंदिर में भजन-कीर्तन चल रहा था, तब समुदाय विशेष के लोग वहाँ पहुँच गए और पूजा में विघ्न डाला। बेख़ौफ़ आरोपितों ने न सिर्फ़ लाउडस्पीकर को तोड़ डाला बल्कि धार्मिक कैलेंडर को भी फाड़ डाला। वहाँ भजन-कीर्तन करते लोग असहाय बने रहे और बदमाश वहाँ से देवी-देवताओं की प्रतिमाएँ उठा कर ले गए। पुलिस ने भी इस बात की पुष्टि की है।

ताज़ा सूचना के अनुसार, किसी भी प्रकार की सांप्रदायिक तनाव की स्थिति से बचने के लिए पुलिस ने मौके पर कैम्प किया हुआ है। लोगों को समझा-बुझा कर स्थिति को शांत कराया गया। ये घटना रौहनिया गाँव के बाहर स्थित एक देवस्थान की है, जहाँ रोज भजन-कीर्तन होता है। ऐसा पहली बार नहीं था, जब लाउडस्पीकर से भजन गया जा रहा हो। शाम के शाम वहाँ लोग धार्मिक कार्यक्रमों में व्यस्त रहते हैं। गाँव में हिन्दू और मुस्लिम, दोनों ही समुदाय के लोग रहते हैं। इसके बावजूद मुस्लिम गुंडों ने पुजारी की पिटाई भी की

रात के करीब 9 बजे समुदाय विशेष के लोगों ने लाउडस्पीकर से भजन-कीर्तन किए जाने का विरोध शुरू कर दिया। भजन-कीर्तन कर रहे लोगों में कई साधू भी शामिल थे। समुदाय विशेष के लोगों ने ईद होने और नमाज़ का समय हो जाने की बात करते हुए कहा कि अब उनका त्यौहार आ गया है, इसीलिए लाउडस्पीकर पर भजन नहीं होना चाहिए। श्रद्धालुओं का तर्क था कि वे गाँव के बाहर आकर भजन-कीर्तन कर रहे हैं, जबकि नमाज़ गाँव के भीतर पढ़ी जाती है। इसी बात को लेकर कहासुनी हुई और फिर उत्पात मचाया गया।

पुलवामा: आतंकियों ने घर में घुसकर मारी महिला को गोली, 2 साल पहले पति भी हुआ था आतंक का शिकार

जम्मू-कश्मीर में पुलवामा जिले के काकापोरा में बुधवार (जून 5, 2019) को आतंकवादियों ने एक स्थानीय महिला की गोली मारकर हत्या कर दी। प्राप्त जानकारी के मुताबिक महिला के घर पर हमला किया गया था।

इस हमले में एक अन्य निवासी मोहम्मद सुल्तान के गंभीर रूप से घायल होने की भी खबर मिली है। जिसको फिलहाल अस्पताल में भर्ती करवा दिया गया है। हमले का शिकार हुई महिला का नाम नगीना बानो बताया जा रहा है। ये मामला पुलवामा के नरबल गाँव का है।

खबरों के मुताबिक जब आतंकवादियों ने नगीना पर गोली चलाई, उस समय आतंकी उसके घर में घुसने का प्रयास कर रहे थे। पुलिस ने आतंकियों को ढूँढने के लिए तलाशी अभियान चालू कर दिया है। बताया जा रहा है कि दो साल पहले मई महीने में अज्ञात हमलावरों ने नगीना के पति युसूफ लोन को भी मार दिया था।

Pellet Guns कश्मीरी पत्थरबाज़ों के भले के लिए… लेकिन शेहला रशीद और The Wire चला रहे प्रोपेगेंडा

‘द वायर’ ने कश्मीर में सुरक्षा बलों द्वारा प्रयोग किए जाने वाले पैलेट गन को लेकर एक लेख लिखा है, जिसमें दावा किया गया है कि बिहार का एक लड़का इसका शिकार हो गया हो गया और इसीलिए इसे बैन किया जाना चाहिए। ‘द वायर’ के इस लेख में शेहला रशीद ने ट्विट करते हुए लिखा कि पैलेट गन का प्रयोग कश्मीर की आम जनता पर बुरा प्रभाव डाल रहा है और रोज़ लोग अंधे हो रहे हैं। किसी एक व्यक्ति की आपबीती सुना कर इमोशनल ब्लैकमेल की कोशिश में लगे मीडिया के प्रोपगंडाबाजों को जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट का निर्णय भी पढ़ना चाहिए।

जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट ने पैलेट गन के प्रयोग को लेकर कहा था कि वो इस पर रोक नहीं लगा सकती। उन्होंने कहा था कि वे एक्सट्रीम स्थिति में सुरक्षा बलों द्वारा पैलेट गन के प्रयोग को प्रतिबंधित नहीं कर सकते। सुप्रीम कोर्ट ने भी पैलेट गन पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। हालाँकि, भारत सरकार को पैलेट गन का विकल्प खोजने के लिए एक कमिटी गठित करने को ज़रूर कहा गया था लेकिन सुरक्षा बल मजबूरी में ही पैलेट गन का प्रयोग करते हैं, जब स्थिति बदतर हो जाती है। पैलेट गन को एक ‘Non-Lethal’ हथियार माना गया है, जिसे घातक बन्दूंकों की जगह प्रयोग किया जाता है।

असल में, पैलेट गन का प्रयोग ही इसीलिए किया जाता है ताकि सुरक्षा बलों द्वारा की जाने वाली कार्रवाई में आम जनता की जान नहीं जाए। सोचिए, अगर सुरक्षा बल सीधा एके-47 का प्रयोग करने लगें तो क्या होगा? कश्मीर में पत्थरबाज़ी कर रहे लोग, जिन्हें शेहला रशीद के ब्रिगेड के लोग निर्दोष नागरिक बताते हैं, वे सभी मारे जाएँगे। पैलेट गन का प्रयोग भीड़ को तितर-बितर करने और पत्थरबाजों के लिए किया जाता है। मीडिया उनमें से किसी एक को ढूँढ कर लाता है और ऐसा नैरेटिव तैयार किया जाता है, जिससे यह लगे कि निर्दोष लोग इसका शिकार बन रहे हैं।

आमिर अली भट द्वारा लिखित ‘द वायर’ के इस लेख में कहा गया है कि एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच जैसी संस्थाओं ने पैलेट गन को प्रतिबंधित करने की बात की है। अगर सुरक्षा बल पत्थरबाज़ी कर रही भीड़ पर ख़ुद के बचाव के लिए पैलेट गन का प्रयोग करती है तो उस भीड़ में अगर एक-दो ‘निर्दोष’ भी शामिल हैं तो उनके चोटिल होने की संभावना है ही – इसे गेहूँ के साथ घून पीसने वाली कहावत के तौर पर देखा जाना चाहिए।

समस्या यह है कि कश्मीर के लोग अपने बच्चों को ऐसी भीड़ से दूर रहने की सलाह नहीं देते। जिस राज्य में बच्चों से लेकर बूढ़ों तक को पत्थरबाज़ी करते देखा गया हो, वहाँ अपवादस्वरूप अगर कोई निर्दोष व्यक्ति घायल भी होता है तो इसे लेकर बड़ा हंगामा नहीं खड़ा करना चाहिए। आम जगहों पर माँ-बाप अपने बच्चों को बताते हैं कि जहाँ दंगा-फसाद होता है, वहाँ मत जाओ। कश्मीरी माँ-बाप को भी यह सीख अपने बच्चों को देनी चाहिए।

पैलेट गन का प्रयोग घातक हथियारों के विकल्प के रूप में किया जाता है क्योंकि सेना पत्थरबाज़ी कर के सुरक्षा बलों के जवानों को चोट पहुँचाने वाले नागरिकों को आतंकी नहीं मानती। अगर उन्हें आतंकी की तरह देखा जाता तो और भी घातक हथियार प्रयोग किए जा सकते थे। अगर पैलेट गन की बात होती है तो यह भी लिखा जाना चाहिए कि उसका प्रयोग किसके लिए किया जा रहा है, कब किया जाता है? सीआरपीएफ ने जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट को बताया था कि अगर पैलेट गन प्रतिबंधित किए जाते हैं तो सुरक्षा बल के जवान ऐसी परिस्थितियों में बंदूकों का इस्तेमाल करेंगे और इससे नुकसान और बढ़ जाएगा।

क्योंकि आतंकियों को मरना ही होगा – यही सत्य है। वो कश्मीर के हों या बिहार के या फिर केरल के – देश की सुरक्षा और निहत्थे नागरिकों की जान को गाजर-मूली समझने वाले इन आतंकियों को मरना ही होगा। जो इनके बचाव में ‘सुपर कमांडो ध्रुव’ बनकर पत्थरबाजी करेंगे, उन पर पैलेट गन का प्रयोग भी होगा – यह भी सत्य है। इसलिए सरकार के साथ-साथ सेना से पैलेट गन पर रोक लगाने के निवेदन से बेहतर है कि अपने बच्चों को हिंसा वाली संभावित जगहों से दूर रहने की सलाह दीजिए।

इसलिए कश्मीरी भाइयो-बहनो… द वायर और शेहला रशीद जैसे प्रोपेगेंडाबाजों से बचिए। ये धूर्त लोग आपको घटना के बाद के समाधान (पैलेट गन पर रोक) सुझा कर अपनी राजनीतिक रोटी सेंक रहे हैं। आपको घटना से पहले का समाधान (जहाँ मुठभेड़ चल रही हो, वहाँ जाएँ ही नहीं) चाहिए। पैलेट गन कश्मीर की जनता के भले के लिए है। यह उनके भले के लिए भी है, जो अपनी ही रक्षा करने वाले सुरक्षा बलों के जवानों को चोट पहुँचाते हैं, वरना अगर इसकी जगह अन्य हथियारों का प्रयोग किया जाए तो जैसा कि सीआरपीएफ ने अदालत में कहा, लोगों के मरने की संभावनाएँ बढ़ जाएँगी।

क्रिकेट वर्ल्ड कप में ‘मैच फिक्सिंग’: जीत को लेकर Pak खिलाड़ी की फिसली जुबान

आप अक्सर देखते और महसूस करते होंगे कि कई बार लोग अपनी जुबान फिसल जाने के कारण मन की वो बात भी कह डालते हैं, जो उनके जहन में तो होती है, लेकिन वो उसे जुबां पर कभी नहीं लाना चाहते। कुछ ऐसा ही हुआ है पाकिस्तान मूल के बॉक्सर आमिर खान के साथ।

दरअसल, ऑन कैमरा आमिर से जब वर्ल्ड कप 2019 में पाकिस्तान के जीतने की संभावनाओं के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बड़े ही आत्मविश्वास के साथ एक हास्यास्पद जवाब देते हुए कहा, “वर्ल्ड कप में पाकिस्तान के जीतने की बहुत बढ़िया संभावना है। ये निर्भर करता है कि कैसे ‘मैच फिक्सिंग’ की गई है और उन्होंने खेल को कैसे फिक्स किया है।”

जी हाँ, आमिर खान ने पाकिस्तान की जीत के लिए ‘मैच फिक्सिंग’ को एक जरूरी कारक माना है। अब इस बयान के बाद उनकी सोशल मीडिया बहुत फजीहत हो रही है। इस शब्द का प्रयोग करने के कारण सोशल मीडिया पर लोग उन्हें बोल रहे हैं कि जो तरीका उन्होंने क्रिकेट टीम के लिए सुझाया है, हो सकता है वो उसी तरह अपने मैच भी जीतते होंगे।

पाकिस्तानी टीम के फैन जहाँ आमिर के इस बयान से नाराज़ है, वहीं कुछ लोग इस बयान पर खूब चुटकी ले रहे हैं। लोग कह रहे हैं कि जब आमिर उर्दू बोलने में सहज हैं, तो फिर उन्हें अंग्रेजी में बयान देने की क्या जरूरत थी, बेवजह एक्सेंट सुधारने के चक्कर में मन की बात बाहर निकल कर आ गई।

वहीं, एक शख्स ने आमिर को ट्विटर पर नसीहत दी है कि जब इंसान को क्रिकेट के बारे में कुछ न पता हो, तो उसे एक्पर्ट लोगों की तरह अपना ओपिनियन नहीं देना चाहिए।

बता दें, इन दिनों वर्ल्ड कप का पारा हर जगह गरमाया हुआ है। 24 मई से शुरू हुए वर्ल्ड कप में 13 दिन हो चुके हैं। ‘वार्म अप’ मैचों में अफगानिस्तान ने पाकिस्तान को 3 विकेट से हराया था। 31 मई को पाक-वेस्ट इंडीज के मैच में पाकिस्तान की टीम वेस्ट इंडीज से 7 विकेट से हारी थी। जबकि 3 जून को हुए इंग्लैंड-पाकिस्तान के बीच मैच में पाकिस्तान ने 14 रनों से अपने नाम जीत हासिल की थी।