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हर केंद्रीय संस्थान के समीप 2 संस्कृत बोलने वाले गाँव बनाए जाने चाहिए: निशंक

केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक ने गुरूवार (13 जून) को दिल्ली में केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थानों के प्रमुखों की बैठक में कहा कि केंद्रीय शिक्षण संस्थानों के समीप कम से कम दो गाँवों को संस्कृत भाषा बोलने वाले गाँव बनाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय भाषाओं को सशक्त बनाना उनका लक्ष्य है। इस अवसर पर केंद्रीय राज्यमंत्री संजय धोत्रे भी मौजूद थे।

ख़बर के अनुसार, केंद्रीय मंत्री निशंक ने कहा कि मानव संसाधन मंत्रालय के अधिकारियों के साथ केंद्रीय भाषा से जुड़े संस्थानों के प्रमुखों की लगातार समीक्षा बैठक आयोजित होती रहनी चाहिए। इससे भारतीय भाषाओं के विकास को दिशा मिल सकेगी।

उन्होंने कहा कि संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए अधिक से अधिक शिक्षकों की भर्तियों को बढ़ाने की भी बात कही, जिससे संस्कृत भाषा सीखने वालों की संख्या बढ़ सके। ऐसा करके संस्कृत भाषा को विश्व स्तर पर प्रचारित-प्रसारित करने में सफलता मिलेगी। केंद्रीय मंत्री निशंक ने इस बात पर ज़ोर देते हुए कहा कि देश में केंद्रीय संस्कृत शिक्षण संस्थानों के आसपास कम से कम दो ऐसे गाँव बनाने का लक्ष्य रखा जाए, जहाँ के लोग आम बोलचाल की भाषा के लिए संस्कृत भाषा का प्रयोग करते हों।

केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थानों के प्रमुखों की बैठक में निशंक ने संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए और भी कई महत्वपूर्ण बातें कही। उन्होंने कहा कि भारतीय भाषाओं के विकास के लिए नए तरीके खोजने की ज़रूरत है। भारतीय भाषाओं में नए शोध और उन्हें वैज्ञानिक दृष्टि प्रदान करने की भी आवश्यकता है। इससे संस्कृत भाषा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकेगी।

इसी तरह के एक प्रयास में, फरवरी 2019 में उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य का बजट पेश करते हुए संस्कृत भाषा को बढ़ावा देने पर विशेष ज़ोर दिया था। इसके तहत राज्य में संस्कृत पाठशालाओं को अनुदान के लिए 242 करोड़ रुपए आवंटित किए गए थे। अनुदानित संस्कृत स्कूलों और डिग्री कॉलेजों को अनुदान प्रदान करने के लिए 30 करोड़ रुपए और आवंटित किए गए थे।

संस्कृत में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए काशी विद्यापीठ को 21 करोड़ रुपए दिए गए। वहींं, सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय को 21.51 करोड़ रुपए और काशी हिंदू विश्वविद्यालय में वैदिक विज्ञान केंद्र को 16 करोड़ रुपए दिए गए। पिछले एक दशक में राज्य सरकार द्वारा किसी भी अनुसंधान केंद्र को दिया गया यह सबसे बड़ा आवंटन था।


इसके अलावा उन्होंने अनुवाद पर भी ज़ोर दिया और कहा कि भारतीय भाषाओं के साहित्य का दूसरी भाषाओं में अनुवाद होना चाहिए, जिससे सभी लोग साहित्य जगत में अधिक से अधिक अपनी पहुँच बना सकें और उसका लाभ उठा सकें। इससे भाषा के प्रचार-प्रसार का मार्ग प्रशस्त होगा।  उन्होंने बताया कि जल्द ही भाषा भवन की स्थापना की जाएगी, जहाँ भारतीय भाषाओं से संबंधित सभी संस्थान एक साथ भाषाओं के विकास के लिए काम करेंगे।

दरअसल, भारतीय भाषा संस्थान भारतीय भाषाओं के विकास के लिए काम करता है। भारतीय भाषा संस्थान भारत सरकार की भाषा नीति को तैयार करने और उसके कार्यान्वयन के अलावा भाषा विश्लेषण, भाषा शिक्षा शास्त्र, भाषा प्रौद्योगिकी और समाज में भाषा के इस्तेमाल पर रिसर्च करता है। वर्ष 1969 में मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अधीन मैसूर में केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थान की स्थापना की गई थी। इसके अलावा क्षेत्रीय भाषा केंद्र भुवनेश्वर, पुणे, मैसूर, पटियाला, गुवाहाटी, सोलन और लखनऊ में हैं।

10 साल की बच्ची को बनाया हवस का शिकार, 55 वर्षीय कलाम अंसारी गिरफ़्तार

नाबालिग बच्चियों के साथ बलात्कार की घटनाएँ लगातार सामने आ रही हैं। ऐसा ही एक शर्मनाक मामला बिहार में शिवहर क्षेत्र का है जहाँ 10 साल की हिन्दू बच्ची का बलात्कार 55 साल के कलाम अंसारी ने किया। उसे लोगों ने रंगे हाथों पकड़ा और पुलिस के हवाले कर दिया।

यह मामला हिरम्मा थाना क्षेत्र में दर्ज किया गया है। इसकी पुष्टि करते हुए, एसडीपीओ राकेश कुमार ने बताया कि आरोपी का नाम कलाम अंसारी है, जो मस्जिद टोला का निवासी है, उसे पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया है और नाबालिग बच्ची को मेडिकल के लिए भेज दिया गया है।

शिवहर के निवासी अनीस झा ने बताया कि उन्होंने शिवहर के वकीलों से अपील की है कि वो कलाम अंसारी का केस न लड़ें। साथ ही बलात्कारी अंसारी के ख़िलाफ़ कठोर कार्रवाई की माँग भी की।

इस घटना से नाराज़ ग्रामीणों ने अंसारी को कड़ी से कड़ी सज़ा देने की माँग की है। शिवहर क्षेत्र की सांसद रमा देवी, पूर्व सांसद लवली आनंद, पूर्व विधायक ठाकुर रत्नाकर, जेडीयू नेता विजय विकास, फॉरवर्ड ब्लॉक के बिहार प्रदेश महासचिव धर्मेंद्र कुमार, श्री राजपूत करणी सेना के ज़िलाध्यक्ष राजेश टाइगर, बीजेपी युवा मोर्चा के ज़िला मंत्री छोटे कुमार साह ने इस दुष्कर्म मामले को धरती का कलंक कहा और ये पुरज़ोर माँग उठाई कि स्पीडी ट्रायल कराकर दोषी को जल्द से जल्द फाँसी की सज़ा दी जाए।

जानकारी के अनुसार, 12 जून को विश्व हिन्दू परिषद ज़िला कार्यालय में एक बैठक का आयोजन किया गया जिसमें अलीगढ़ और शिवहर में बच्चियों के साथ हुए बलात्कार की घटना की कड़ी निंदा की गई। शिवहर के सभी सामाजिक संगठन के कार्यकर्ताओं के द्वारा सर्व सहमति से यह निर्णय लिया गया कि देश में सुनियोजित तरीके से लड़कियों के साथ जो बलात्कार कि घटना हो रही है, इसके लिए सरकार क़ानून बना कर 30 दिनों के अंदर बलात्कारी को फाँसी की सज़ा का प्रावधान करे। साथ ही यह निर्णय भी लिया गया कि बच्ची को न्याय दिलाने के लिए 14 जून को पूरे शिवहर के बजार पूर्णतः बंद रखे जाएँगे।

सामाजिक संगठन के कार्यकर्ताओं ने सभी व्यापारी बंधुओं से एक दिन के बंद का अनुरोध किया है और कहा है कि इस बंद को सफल बनाएँ, जिससे ज़िला प्रशासन और कोर्ट इसे गंभीरता से ले और बलात्कारी को जल्द से जल्द सज़ा मिले। ऐसा होने से भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर लगाम लग सकेगी। इस बैठक में उपस्थित कार्यकर्ताओं में अशोक उपाध्याय, कमलेश्वरीनंदन सिंह, संजय सिंह, माधुरेंद्र कुमार, संदीप कुमार, कुणाल गुप्ता, संजय गुप्ता, अजय कुमार, अजय आर्य, शिवम सिंह, संतु कुमार, अनिल पटेल, छोटेलाल साह, पंडित वेदप्रकाश शास्त्री के अलावा दर्जनों कार्यकर्ता मौजूद थे।

इसके अलावा, 12 जून को बिहार के बेगूसराय में हुई एक अन्य घटना में, मुस्लिम भीड़ ने एक हिंदू परिवार के घर में घुसकर दो महिलाओं से छेड़छाड़ की और उस समय वहाँ मौजूद अकेले पुरुष सदस्य को मारने की कोशिश की। दूसरे मजहब वाले चाहते थे कि हिंदू अपनी ज़मीन और घर बेचकर इलाक़े को छोड़ दें।

Forbes: दुनिया की शीर्ष 500 कंपनियों में भारत की 10 कम्पनियाँ शामिल, Reliance टॉप 100 में

गुरुवार (जून 14, 2019) को फोर्ब्स की ग्लोबल 2000 लिस्ट 2019 की रिपोर्ट सामने आई। इस रिपोर्ट में दुनिया की 2000 सबसे बड़ी कंपनियों की सूची में भारत की 57 कंपनियों को जगह मिली है। इनमें रिलायंस एक मात्र ऐसी कंपनी है जो शीर्ष 100 कंपनियों में जगह बना पाई है। रिलायंस को इस सूची 71वाँ स्थान प्राप्त हुआ है, जबकि ऑयल एंड गैस सेक्टर की कंपनियों में रिलायंस 11वें नंबर पर है। इसके बाद इस सूची में एचडीएफसी बैंक का नाम है, जिसे 209वाँ स्थान प्राप्त हुआ है। सूची में ओएनजीसी 220वें स्थान पर है, जबकि इंडियन ऑयल 288वें और एचडीएफसी लिमिटेड 332 वें पायदान पर है।

इसके अलावा टीसीएस (374), आईसीआईसीआई बैंक (400), एलएंडटी (438), भारतीय स्टेट बैंक (460) और एनटीपीसी (492) का नाम शीर्ष 500 कंपनियों में शुमार है। इस सूची में कोल इंडिया, कोटक महिंद्रा बैंक, भारत पेट्रोलियम, महिंद्रा एंड महिंद्रा, इंडसइंड बैंक, बजाज फिनसर्व, टाटा स्टील, इंफोसिस, एक्सिस बैंक, टाटा मोटर्स, आईटीसी, भारती एयरटेल, विप्रो, जेएसडब्ल्यू स्टील, पावर ग्रिड, हिंडाल्को, एचसीएल टेक, गेल, पंजाब नेशनल बैंक, ग्रासिम, बैंक ऑफ बड़ौदा, पावर फाइनेंस और केनरा बैंक शामिल हैं।

इस लिस्ट में 61 देशों की कंपनियाँ शामिल है, जिसमें सबसे ज्यादा जगह अमेरिका की कंपनी को मिली है। इस सूची में 575 नाम अमेरीका की कंपनी के हैं। जबकि चीन और हांगकांग की 309 और जापान की 223 कंपनियाँ शामिल हैं। फोर्ब्स ने बिक्री, मुनाफा, संपत्ति और शेयर बाजार के चार पैमानों पर इन कंपनियों की रैंकिंग की है।

टॉप 10 में चीन की आईसीबीसी(1), चाइना कंस्ट्रक्शन बैंक(3), एग्रीकल्चर बैंक ऑफ चाइना (5), पिंग एन इंश्योरेंस ग्रुप(7), बैंक ऑफ चाइना अमेरिका(8); अमेरिका की जेपी मॉर्गन(2), बैंक ऑफ अमेरिका(5), एपल(3), वेल्स फार्गो(10); और नीदरलैंड की रॉयल डच शैल शामिल हैं।

बंगाल में एक साथ 69 डॉक्टरों ने सौंपा इस्तीफा, ममता से बिना शर्त माफ़ी की माँग

पश्चिम बंगाल में डॉक्टरों के हड़ताल का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। राज्य में जूनियर डॉक्टर के साथ हुई मारपीट के बाद साथी डॉक्टरों ने विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और अपनी सुरक्षा की माँग कर रहे हैं। कोलकाता में एनआरएस मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में डॉक्टरों के खिलाफ हिंसा को लेकर बंगाल में दो प्रोफेसरों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। प्रोफेसर सैबाल कुमार मुखर्जी ने एनआरएस मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल कोलकाता के प्रिंसिपल और मेडिकल सुपरिटेंडेंट के पद से इस्तीफा दिया तो वहीं, प्रोफेसर सौरभ चट्टोपाध्याय ने वाइस-प्रिंसिपल पद से इस्तीफा दे दिया था और अब डॉक्टर्स के इस्तीफे की झड़ी सी लग गई है। सीनियर डॉक्टर भी ममता बनर्जी के विरोध में उतर आए हैं।

कोलकाता के आर जी कर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पीटल के 80 डॉक्टर्स के इस्तीफा देने की खबर आ रही थी, लेकिन जानकारी के मुताबिक, अब तक कम से कम 69 डॉक्टरों ने अपना इस्तीफा सौंप दिया और साथ ही उन्होंने ममता बनर्जी से कल दिए बयान के लिए के लिए बिना शर्त माफी माँगने की भी बात कही है। आर जी कर कॉलेज के डॉक्टरों का इस्तीफा यहाँ पढ़ा जा सकता है।

बता दें कि, कल ममता बनर्जी ने डॉक्टरों को अल्टीमेटम देते हुए 4 घंटे में वापस काम करने पर लौटने के लिए कहा था और साथ ही कहा था कि अगर वो ऐसा नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी। वहीं, पश्चिम बंगाल में हो रहे विरोध प्रदर्शन का समर्थन करते हुए बेंगलुरु, हैदराबाद, दिल्ली और मुंबई में भी डॉक्टर्स विरोध प्रदर्शन पर उतर आए हैं।

जिस तरह से पिछले पाँच दिनों से यह सब घटित हो रहा है, और ममता सरकार का जो रवैया रहा है, लगता ही नहीं कि उन्हें सिवाय अपनी राजनीति और वोट बैंक के, डॉक्टरों की सुरक्षा या आम मरीज़ के जीवन की कोई चिंता है। ममता ने न सिर्फ इस मुद्दे को राजनैतिक रंग देने की कोशिश की, बल्कि एक आसान सी माँग पर अभी तक कुछ भी ढंग का नहीं बोल पाई है कि क्या उनकी सरकार डॉक्टरों के काम करने हेतु सुरक्षित माहौल दे सकेगी?

जब कोई व्यक्ति अपने बूढ़े अब्बू की हॉस्पिटल में हुई मौत पर 200 लोगों की भीड़ ले आता है, तो पता चलता है कि प्रशासन को समाज का एक हिस्सा कैसे देखता है। उसके बाद ममता का यह कहना कि ‘पुलिस वाले भी तो मरते हैं ड्यूटी पर लेकिन उनके सहकर्मी हड़ताल नहीं करते’, एक मूर्खतापूर्ण बयान है। या फिर यह बयान उस नेत्री का है जो सोचता है कि वो कुछ भी कह सकती है क्योंकि वो चुनी हुई सरकार चला रही है।

डॉक्टरों का इस तरह से हड़ताल पर जाना और दसियों की संख्या में इस्तीफ़ा देना बताता है कि ममता सरकार में काम करते हुए सुरक्षा की उम्मीद उन्हें नहीं दिख रही। जब सरकार आपको धमकाने पर उतर आए और बुनियादी सुविधा मुहैया न करा सके तो फिर डॉक्टरों के पास ज्यादा विकल्प नहीं दिखते।

बशीरहाट में महिला BJP कार्यकर्ता की निर्मम हत्या, लोगों का गुस्सा अब BJP पर फूटा

पश्चिम बंगाल में गुरुवार (मार्च 13, 2019) को नॉर्थ 24 परगना जिले के बशीरहाट इलाके में महिला भाजपा कार्यकर्ता की गोली मारकर निर्मम हत्या कर दी गई। कार्यकर्ता की पहचान सरस्वती दास के रूप में हुई है। भाजपा ने सरस्वती की हत्या के लिए टीएमसी के गुंडों को ज़िम्मेदार बताया है।

गुरुवार की रात को बंगाल भाजपा इकाई ने ट्विटर पर इस घटना की जानकारी दी। उन्होंने लिखा, “बशीरहाट में तृणमूल के गुंडों ने सरस्वती दास की निर्मम हत्या कर दी। बंगाल में कानून व्यवस्था पूरी तरह ढह चुकी है, यहाँ कोई भी सुरक्षित नहीं हैं।”

गौरतलब है सरस्वती दास ने लोकसभा चुनावों में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई थी। भाजपा द्वारा इस घटना की जानकारी ट्विटर पर दिए जाने के बाद यूजर्स ममता बनर्जी के साथ भाजपा पर भी जमकर बरस रहे हैं।

लोग बंगाल में राष्ट्रपति शासन गुहार लगाने की माँग कर रहे हैं। कुछ का ये भी कहना है कि पार्टी के शीर्ष नेताओं को जमीनी स्तर पर पार्टी के लिए कार्य करने वालों की अब कदर नहीं रही हैं, तो कुछ का कहना है कि इसके लिए भाजपा पर ऊँगली क्यों उठाई जा रही है, सवाल ममता बनर्जी और बंगाल पुलिस से होना चाहिए।

डॉक्टरों के साथ खड़ा हुआ ममता बनर्जी का भतीजा, हाइकोर्ट पहुँचा हड़ताल का मामला

पश्चिम बंगाल में पिछले चार दिनों से अस्पतालों में ताला लटका हुआ है। डॉक्टरों की हड़ताल जारी है। राज्य में जूनियर डॉक्टर पर हमले के बाद सभी जूनियर डॉक्टर मंगलवार (जून 11, 2019) से आंदोलन कर रहे हैं। डॉक्टरों ने मुख्यमंत्री की अल्टीमेटम को खारिज करने और अपनी माँग पूरी होने तक हड़ताल जारी रखने का भी फैसला किया है। ममता सरकार ने डॉक्टरों की माँग पर अब तक फैसला नहीं किया है।

इस हमले के बाद, देश भर के लाखों डॉक्टरों ने पश्चिम बंगाल में अपने प्रदर्शनकारी सहयोगियों के साथ एकजुटता व्यक्त करने के लिए एक दिन के लिए अपने काम को बहिष्कार करने का फैसला किया है। इंडिया मेडिकल एसोसिएशन ने इस घटना के खिलाफ शुक्रवार को “ऑल इंडिया प्रोटेस्ट डे” घोषित किया है और हड़ताली डॉक्टरों के साथ एकजुटता व्यक्त की है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस मामले पर असंवेदनशीलता जाहिर करते हुए डॉक्टरों को चार घंटे का अल्टीमेटम दिया था। जिसमें डॉक्टरों को 4 घंटे के भीतर काम पर लौटने के लिए और ऐसा न करने पर कार्रवाई का सामना करने की बात कही थी। कथित तौर पर, टीएमसी के समर्थक भी इस घटना से नाखुश हैं और ममता बनर्जी के खिलाफ डॉक्टरों के साथ मिलकर प्रदर्शन कर रहे हैं।

हैरानी की बात तो ये है कि ममता बनर्जी डॉक्टरों को धमकी दे रही हैं और उनके भतीजे आबेष बनर्जी डॉक्टरों के समर्थन में प्रदर्शन उतर आए हैं। आबेश बनर्जी, ममता के भाई कार्तिक बनर्जी के बेटे हैं, केपीसी मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर हैं। आबेश ने बुधवार को केपीसी अस्पताल से एनआरएस अस्पताल तक विरोध रैली का नेतृत्व किया।

शब्बा हकीम के फेसबुक पोस्ट का स्क्रीनशॉट

पश्चिम बंगाल में मंत्री फिरहाद हकीम की बेटी शब्बा हकीम ने भी डॉक्टरों के प्रदर्शन का समर्थन किया है। शब्बा हकीम खुद भी डॉक्टर हैं और उन्होंने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा कि शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करना अधिकार है। साथ ही शब्बा ने ये भी कहा कि टीएमसी समर्थक होने के रुप में ममता सरकार की निष्क्रियता और नेताओं की चुप्पी पर शर्म आती है।

इस आंदोलन की आग दिल्ली तक पहुँच गई है। एम्स के डॉक्टर भी अब बंगाल के डॉक्टरों के समर्थन में आ गए हैं। वहीं, कोलकाता के एसएसकेएम अस्पताल के चार प्रोफेसरों ने इस्तीफा दे दिया तो सागर दत्ता मेडिकल कॉलेज के 18 डॉक्टरों ने भी इस्तीफा दे दिया और जिस एनआरएस मेडिकल कॉलेज में हंगामा हुआ उसके प्रिंसिपल ने भी इस्तीफा सौंप दिया है। एम्स के रेजिडेंट डॉक्टरों ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन से मुलाकात की।

जानकारी के मुताबिक, डॉक्टर कुणाल साहा ने डॉक्‍टरों की हड़ताल के खिलाफ कोलकाता हाईकोर्ट में गुरुवार (जून 13, 2019) को याचिका दायर की है। दायर की गई याचिका में हड़ताली डॉक्‍टरों के खिलाफ कड़े कदम उठाने की अपील की गई है। कोलकाता हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश की डिवीजन बेंच में इसकी सुनवाई होगी।

गौरतलब है कि, कोलकाता स्थित नील रतन सरकार मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में सोमवार (10 जून) को एक बुजुर्ग मरीज मोहम्मद शाहिद की मौत के बाद उसके परिजनों ने डॉक्टर परिबाह मुखोपाध्याय पर घातक हमला किया। डॉक्टर्स के मुताबिक, करीब 200 की भीड़ ने मोहम्मद शाहिद की मौत के बाद अस्पताल में जमकर उत्पात मचाया। इस घटना के बाद राज्य के विभिन्न अस्पतालों के डॉक्टर न्याय की माँग करते हुए हड़ताल पर चले गए।

मालेगाँव ब्लास्ट: बॉम्बे हाईकोर्ट ने चार आरोपितों को दी ज़मानत

मालेगाँव ब्लास्ट मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने चार आरोपितों को ज़नानत दे दी है। इन चार आरोपितों में लोकेश शर्मा, धन सिंह, राजेंद्र चौधरी और मनोहर नरवरिया के नाम शामिल हैं। इससे पहले, राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत ने सोमवार (3 जून) को मालेगाँव विस्फोट मामले के इन चारों आरोपितों की ज़मानत याचिका ख़ारिज कर दी थी।

स्पेशल जज वीवी पाटिल ने ज़मानत याचिका यह कहते हुए ख़ारिज कर दी थी कि अपराध की गंभीरता और आरोपी व्यक्तियों के ख़िलाफ़ लगाए गए आरोपों को ध्यान में रखते हुए, वे ज़मानत के लायक नहीं हैं।

अदालत ने इन आरोपितों के संदर्भ में कहा था कि NIA द्वारा एकत्र किए गए सबूतों को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि ये सभी आरोपी, फरार अभियुक्तों के साथ बम तैयार करते थे, जो 8 सितंबर 2006 को मालेगाँव में लगाए गए। इस विस्फोट में 31 लोगों ने अपनी जान गंवाई और 312 लोग घायल हुए थे। वहीं, बचाव पक्ष के अधिवक्ता जेपी मिश्रा और प्रशांत माघुल ने इन चारों के शामिल होने का कोई ठोस सबूत नहीं होने का हवाला दिया था।

हाल ही में, मुंबई की विशेष NIA कोर्ट ने मालेगाँव ब्लास्ट के आरोपितों के ख़िलाफ़ सख़्त रवैया अपनाया था। दरअसल, कोर्ट का यह सख़्त रवैया आरोपितों के कोर्ट में उपस्थित न होने के लिए था। पिछले काफ़ी समय से आरोपित कोर्ट में लगातार अनुपस्थित रहे थे, इसलिए कोर्ट ने सभी आरोपितों को सुनवाई के दौरान सप्ताह में एक बार कोर्ट रूम में हाज़िरी लगाने का निर्देश दिया था।

हलाल बैंकिंग फर्म के सात निदेशक गिरफ्तार, सरगना ‘जगुआर’ से पहुँचा एयरपोर्ट, फरार

बेंगलुरु में ‘आई मॉनेटरी एडवाइजरी’ (I Monetary Advisory) के नाम से फर्जी इस्लामिक बैंक चलाने वाले मोहम्मद मंसूर खान की फर्म के सात निदेशकों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इन निदेशकों को पुलिस ने बुधवार (जून 12, 2019) को अलग-अलग जगहों से गिरफ्तार किया। इस दौरान पुलिस को एक निदेशक के घर के बाहर से सफेद रंग की एसयूवी बरामद हुई है, जिसके बारे में बताया जा रहा है कि ये मंसूर खान की है। फर्म का मालिक मंसूर खान अभी भी फरार चल रहा है।

खबर के मुताबिक, कल शाम 6:45 तक खान का इमिग्रेशन क्लियर हो गया था और 8:45 पर उसने दुबई के लिए उड़ान भरी। इस दौरान खान अकेला था। इससे पहले, शनिवार (जून 8, 2019) को खुद अपनी पसंदीदा जगुआर से केम्पेगौड़ा हवाई अड्डे पर पहुँचा था। पुलिस ने बताया कि खान ने बिज़नेस क्लास की सीट बुक की थी। खान के जगुआर (KA 05 MW 41) और रेंज रोवर (PY 05 C777) को बुधवार को गिरफ्तार किए गए सात IMA निदेशकों में से एक, निजामुद्दीन अज़ीमुद्दीन के शिवाजीनगर निवास से जब्त किया गया।

मंसूर खान निवेशकों का सैकड़ों करोड़ रुपया लेकर फरार हो गया है। उसके फरार होने के बाद महज 5 घंटों के अंदर 3300 शिकायतें दर्ज की गई थी, जिसमें से अधिकतर शिकायतकर्ता बेंगलुरु के मुस्लिम समुदाय के लोग थे। वहीं, मामला के सामने आने के बाद  तीसरे दिन भी काफी संख्या में लोग शिवाजीनगर स्थित फर्म के ऑफिस पहुँचे और फर्म के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई। अब तक इस फर्म के खिलाफ 26 हजार लोगों ने शिकायत दर्ज करवाई है। इस शिकायत में मालिक और निदेशकों पर सख्त कार्रवाई की माँग की गई है।

गौरतलब है कि, साल 2006 में खाड़ी से लौटे मोहम्मद मंसूर खान ने इस्लामिक बैंकिंग और हलाल निवेश के नाम पर एक फर्म बनाई जिसका नाम रखा ‘आई मॉनेटरी एडवाइजरी’ (I Monetary Advisory)। इस्लामिक बैंकिंग के नाम पर मंसूर खान ने अपने समुदाय के लोगों से इस फर्म में निवेश करने को कहा। मंसूर खान ने लोगों को बड़े रिटर्न का वादा करके निवेश करने का लालच दिया और जब लोगों ने बड़ी संख्या में निवेश किया, तो उसने उस पैसे से ज्वेलरी, रियल एस्टेट, बुलियन ट्रेडिंग, फार्मेसी, प्रकाशन, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में जमकर व्यवसाय किया और धन कमाया और फिर देश छोड़कर फरार हो गया। फर्म में तकरीबन 10 हजार निवेशकों ने 2,000 करोड़ रुपये का निवेश किया था। मंसूर खान ने लोगों से 14% से 18% तक के रिटर्न का वादा किया था।

मंसूर के फरार होने के 24 घंटे बाद ही एक ऑडियो क्लिप वायरल हो गई जिसमें मंसूर खान कह रहा था कि वो भ्रष्ट नेताओं और नौकरशाहों को रिश्वत देते-देते थक चुका है, इसलिए आत्महत्या करने जा रहा है। साथ ही इस ऑडियो क्लिप में मंसूर खान ने ये भी कहा कि बेंगलुरु के एक कॉन्ग्रेसी विधायक रोशन बेग ने उसके 400 करोड़ रुपए हड़प लिए हैं। ऑडियो क्लिप के वायरल होने के बाद सैकड़ों की संख्या में निवेशक आईएमए के ऑफिस पहुँचे और हमला करने की कोशिश की। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने काफी संख्या में जवानों को तैनात किया, जिसके बाद स्थिति नियंत्रण में आई।

साल के अंत तक अमित शाह ही रहेंगे BJP अध्यक्ष, ये है वजह

भाजपा ने घोषणा की है कि साल के अंत में होने वाले तीन राज्यों (महाराष्ट्र, झारखंड व हरियाणा) के विधानसभा चुनाव तक अमित शाह ही संगठन की कमान संभालेंगे। खबरों के अनुसार इन तीन राज्यों के विधानसभा चुनाव बेहद महत्वपूर्ण हैं, जिसके कारण पार्टी किसी तरह का कोई खतरा नहीं उठा सकती। जरूरत पड़ने पर अमित शाह की सहायता के लिए पार्टी किसी को कार्यकारी अध्यक्ष भी बना सकती है।

अमर उजाला में प्रकाशित खबर के मुताबिक पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा है कि 3 राज्यों (जिनमें विधानसभा चुनाव होने वाले हैं) में अमित शाह की जमीनी स्तर पर मजबूत पकड़ है। ऐसे में अगर संगठन की जिम्मेदारी किसी नए चेहरे को सौंपी जाएगी, तो उसे माहौल समझने में समय लगेगा, जबकि पार्टी के पास इसके लिए बिलकुल वक्त नहीं है।

भारतीय जनता पार्टी की बैठक का ब्यौरा देते हुए भूपेंद्र यादव ने बताया कि अमित शाह ने 2014 में अध्यक्ष बनते हुए कहा था कि पार्टी का सबसे अच्छा समय अभी नहीं आया है और आज एक बार फिर उन्होंने अपनी बात को दोहराया है। भूपेंद्र यादव के अनुसार अमित शाह ने फिर कहा है कि पार्टी का ‘पीक’ अभी नहीं आया है, जिन क्षेत्रों में पार्टी अभी नहीं पहुँची है उन सबमें पार्टी पहुँचेगी।

याद दिला दें कि लोकसभा चुनाव में 300 का आँकड़ा पार करके ऐतिहासिक जीत दर्ज कराने वाली भाजपा ने जीत का पूरा श्रेय अमित शाह की रणनीति और उनकी रणनीति को दिया था। गृह मंत्री पद संभालते ही ऐसी अटकलें लगनी शुरू हो गई थी कि उनके लिए अब मंत्रालय और पार्टी दोनों का कार्यभार संभाल पाना थोड़ा मुश्किल होगा। लेकिन फिर भी आगामी चुनावों को देखते हुए ये बड़ा फैसला लिया गया।

हालाँकि, बता दें भाजपा अध्यक्ष के रूप में अमित शाह का 3 वर्षीय कार्यकाल इस साल की शुरुआत में ही समाप्त हो गया था, लेकिन तब भी पार्टी ने उनसे चुनाव तक पद पर बने रहने को कहा था। भाजपा के संविधान के अनुसार किसी व्यक्ति को लगातार 2 कार्यकाल के लिए अध्यक्ष चुना जा सकता है। उस हिसाब से अभी शाह के पास 1 कार्यकाल बाकी है।

हड़ताल पर बैठे डॉक्टरों को मिला दिल्ली से समर्थन, सफदरजंग और AIIMS भी ‘बंद’

पश्चिम बंगाल में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल का असर देश के अन्य राज्यों में भी दिखने लगा है। दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन (DMA) ने भी शुक्रवार (जून 14, 2019) को बंद रखने का फैसला किया है, वहीं महाराष्ट्र के रेजीडेंट डॉक्टर भी शुक्रवार को सांकेतिक हड़ताल पर रहेंगे।

हड़ताल के चलते मरीजों और उनके परिजनों को संकट का सामना करना पड़ रहा है। बंगाल में डॉक्टरों द्वारा की जा रही हड़ताल को हर ओर से समर्थन प्राप्त हो रहा है। इस हड़ताल के कारण कई सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में हड़ताल के तीसरे दिन भी ओपीडी सेवाएँ, पैथोलॉजिकल इकाइयाँ और आपातकालीन वार्ड बंद रहे। इसके अलावा निजी अस्पतालों में भी हड़ताल के चलते चिकित्सीय सेवाएँ बंद रहीं।

बंगाल के डॉक्टर कोलकाता में एनआरएस मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में एक 75 वर्षीय मरीज की मौत के बाद, 200 लोगों की भीड़ द्वारा डॉक्टरों पर हमले के मद्देनजर प्रदर्शन कर रहे हैं। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने भी घटना के ख़िलाफ़ हड़ताल कर रहे डॉक्टरों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए शुक्रवार को अखिल भारतीय विरोध दिवस घोषित किया है।

दिल्ली में एम्स और सफदरजंग हॉस्पिटल के रेजिडेंट डॉक्टरों के साथ कई संस्थाओं ने शुक्रवार को हड़ताल का आह्वान किया है। सफदरजंग अस्पताल की रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन (RDA) ने भी बंद का आह्वान किया है। आरडीए के अध्यक्ष डॉ. प्रकाश ठाकुर के मुताबिक, डॉक्टरों के खिलाफ हिंसा नहीं रुकी तो वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने को मजबूर होंगे। हालाँकि एम्स के महासचिव डॉक्टर के अनुसार इस बीच आपातकालीन सेवाएँ जारी रहेंगी, लेकिन ओपीडी, रूटीन सर्जरी और लैब में होने वाली जाँच बंद रहेगी।

बता दें बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के तानाशाही रवैये के बाद भी डॉक्टर अपने काम पर नहीं लौटे। गुरुवार को दोपहर 2 बजे की समय सीमा ममता बनर्जी ने डॉक्टरों के काम पर लौटने के लिए रखी थी, लेकिन डॉक्टर फिर भी हड़ताल पर बैठे रहे। इस हड़ताल के लिए ममता सरकार और भाजपा एक दूसरे पर आरोप मढ़ने में लगे हैं। ममता बनर्जी ने जहाँ डॉक्टरों के इस हड़ताल की निंदा करते हुए इसे माकपा और भाजपा का षडयंत्र बताया, वही विपक्ष का भी कहना है कि ममता हिटलर की तरह काम करती हैं।