प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मंत्र है- ‘सबका साथ-सबका विकास’। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार इस मूल मंत्र को साकार करने में लगी है। हाल ही में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नक़वी ने कहा था कि अगले पाँच वर्षों में पाँच करोड़ छात्रों को आर्थिक सहायता (प्रधानमंत्री छात्रवृति) प्रदान की जाएगी। इसमें अहम बात यह थी कि आर्थिक सहायता पाने वालों में 50 फ़ीसदी बालिकाएँ होंगी।
बुधवार (12 जून) को वक़्फ़ परिषद की बैठक में मुस्लिम लड़कियों की बेहतरी के लिए केंद्रीय मंत्री नक़वी ने कई महत्वपूर्ण ऐलान किए। इन्हीं ऐलानों में से एक ऐलान मुस्लिम लड़कियों को लेकर किया गया था। ANI के हवाले से मिली सूचना के मुताबिक नक़वी ने कहा, “मुस्लिम लड़कियों को UPSC, राज्य सेवाओं और बैंकिंग सेवाओं के लिए मुफ़्त कोचिंग दी जाएगी। हमने कई संस्थानों से बात की है। पूरा खाका तैयार होने के बाद इस योजना को इसी वर्ष लागू कर दिया जाएगा।”
Union Minister Mukhtar Abbas Naqvi: Muslim girls will be given free coaching for UPSC, state services and banking services. We have talked to a few institutes, the process of this coaching will begin this year after talking to all of them. (12.06.2019) https://t.co/oSnONs4rDA
केंद्रीय मंत्री ने देश भर में मौजूद वक़्फ़ सम्पतियाँ मुस्लिम समाज की बेहतरी के काम आ सकें इसके लिए 100 फ़ीसदी जियो टैगिंग और डिजिटलाइजेशन की बात भी की। वक़्फ़ परिषद की इस बैठक में केंद्रीय मंत्री नक़वी ने इस बात का भी ज़िक्र किया कि प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम के तहत वक़्फ़ की प्रॉपर्टी पर कॉलेज, अस्पताल आदि बनवाने के लिए 100 फ़ीसदी फंडिंग की जाएगी। ख़बर के अनुसार, देश में क़रीब 5.77 लाख वक़्फ़ सम्पत्तियाँ रजिस्टर्ड हैं। इन्हें डिजिटल किया जा रहा है ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
Union Minister Mukhtar Abbas Naqvi: All Waqf properties will be geo-tagged & digitised. Schools, colleges, hospitals, community centers, common centers, hostels will be built on them & under Pradhan Mantri Jan Vikas Karyakram, 100% funding will be given for them. (12.06.2019) pic.twitter.com/rHdfS2ssVr
हाल ही में, मुख्तार अब्बास नक़वी ने एक और बड़ा ऐलान किया था कि देश भर के मदरसों में मुख्यधारा की शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए मदरसा शिक्षकों को विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों से प्रशिक्षण दिलाया जाएगा ताकि वे मदरसों में मुख्यधारा की शिक्षा- हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान, कंप्यूटर आदि- दे सकें. यह काम अगले महीने से शुरू कर दिया जाएगा।
#WATCH Union Minister of Minority Affairs Mukhtar Abbas Naqvi: Madrasas which are there in large number across the country are to be connected with the formal education & mainstream education so that those children in Madrasas can also contribute in the development of the society pic.twitter.com/wHPO9zed4N
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से सटे राजगढ़ जिले में एक बेहद ही असंवेदनशील मामला सामने आया है। यहाँ पर एक रेप पीड़िता के परिवार को समाज से बहिष्कृत कर दिया गया है। दरअसल, जिले के नरसिंहगढ़ ब्लॉक के डूंगरपुरा गाँव में कुछ महीने पहले एक किशोरी के साथ रेप हुआ था। इस किशोरी के साथ दलित जाति के युवक ने रेप किया था। अब इस मामले पर गाँव के सामाजिक पंचायत ने एक अजीबोगरीब फैसला सुनाया है। पंचों ने पीड़िता के शुद्धिकरण के लिए उसके परिवार को भंडारा कराने का आदेश दिया है। पंचायत का कहना है कि रेप करने वाला आरोपी दलित जाति का था, इसलिए पीड़िता का परिवार अछूत हो गया है।
#बलात्कारी पीड़ित नाबालिक बालिका दलित जाति होने के कारण गावों के पंचों ने न्याय की जगह उसका शुद्धिकरण कराने का दबाव बनाया और गांव में मांसाहारी भंडारा कराने का दबाव बनाया ऐसे गांव के पंचायत को बहिष्कार करना चाहिए। और उनके खिलाफ कार्रवाई करना चाहिए। pic.twitter.com/ny92WLegQM
इस अजीबोगरीब फैसले से पीड़िता का परिवार परेशान है। परिवार को न तो सामाजिक कार्यक्रमों में बुलाया जा रहा है और न ही कोई उनके घर में किसी कार्यक्रम में शामिल हो रहा है। ऐसे में पीड़िता के माता-पिता ने राजगढ़ पहुँचकर अधिकारियों से इंसाफ की गुहार लगाई। गाँव वालों के इस अजीब फैसले की शिकायत मानवाधिकार आयोग में भी की गई है।
पंचायत द्वारा जारी किए गए फरमान में कहा गया है कि इस भंडारे में गाँव के ही नहीं, बल्कि आस-पास के ग्रामीण भी शामिल हों। इसके लिए लिखित में पंचनामा तैयार किया गया। जिस पर पंचों के साथ-साथ पीड़िता के माता-पिता से भी हस्ताक्षर करवाए गए। हालाँकि, पीड़िता के पिता ने भंडारा करवाने की कोशिश की, मगर गरीबी के कारण वे भंडारा नहीं करा पाए। जिसके बाद गाँव के साथ ही आस-पास के लोगों ने भी उनका बहिष्कार कर दिया है। हाल ही में पीड़ित परिवार के घर एक आयोजन हुआ था, जिसका कार्ड गाँव के किसी भी व्यक्ति ने स्वीकार नहीं किया।
वहीं इस बारे में जिले की पुलिस का कहना है कि ये मामला उनके संज्ञान में आया है, लेकिन पीड़ित परिवार की तरफ से अभी तक कोई लिखित शिकायत नहीं आई है। शिकायत आने के बाद कार्रवाई की जाएगी। जानकारी के मुताबिक, इसी साल मार्च में 17 साल की नाबालिग के साथ गाँव के ही दलित युवक सियाराम ने रेप किया था। जिसकी रिपोर्ट पीड़ित परिवार ने पुलिस में की। एफआईआर के लगभग आठ दिन बाद आरोपित को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया।
पश्चिम बंगाल में अपने डॉक्टर साथी परिबाह मुखोपाध्याय पर किए गए घातक हमले को लेकर न्याय की उम्मीद पाले डॉक्टरों ने हड़ताल की। दो दिन की हड़ताल के बाद न्याय तो दूर, बदले में उन्हें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मिली धमकी – 4 घंटे में काम पर लौटो। ऐसे में 7 डॉक्टरों ने एक साथ इस्तीफा दे कर राज्य सरकार को यह संदेश दे दिया है कि उन्हें हल्के में ना लिया जाए। जाहिर सी बात है, वो न्याय की बात कर रहे हैं, जो कि उनका या किसी का भी लोकतांत्रिक हक है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने इनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया है।
इससे पहले पश्चिम बंगाल में अपने सहयोगी डॉक्टर पर हमला होने के विरोध में डॉक्टर्स की चल रही हड़ताल पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने डॉक्टरों को चार घंटे का अल्टीमेटम जारी किया था। मुख्यमंत्री ने कोलकाता के राजकीय SSKM अस्पताल का दौरा करने के बाद आंदोलनरत जूनियर डॉक्टरों को 4 घंटे के भीतर काम पर लौटने के लिए कहा था। लेकिन, डॉक्टरों ने उनके समक्ष ही ‘हम न्याय चाहते हैं’ के नारे लगा दिए थे।
कोलकाता के नील रतन सरकार (NRS) मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में जूनियर डॉक्टर्स की हड़ताल की वजह से मरीज़ों को दूसरे दिन (बुधवार, जून 12, 2019) भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इससे लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए काफ़ी परेशानियाँ आ रही हैं।
इस समस्या के निदान के लिए कॉन्ग्रेस के सांसद अधीर रंजन चौधरी ने इस संबंध में पीएम मोदी को पत्र लिखा है। अपने पत्र के माध्यम से उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को कोलकाता में मेडिकल कॉलेज और अस्पतालों के डॉक्टर्स की हड़ताल मामले में हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है।
आपको बता दें कि कोलकाता स्थित नील रतन सरकार मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में सोमवार (10 जून) को एक बुजुर्ग मरीज मोहम्मद शाहिद की मौत के बाद उसके परिजनों ने डॉक्टर परिबाह मुखोपाध्याय पर घातक हमला किया। डॉक्टरों की मानें तो करीब 200 की भीड़ ने मोहम्मद शाहिद की मौत के बाद अस्पताल में जमकर उत्पात मचाया। इस घटना के बाद राज्य के विभिन्न अस्पतालों के डॉक्टर न्याय की माँग करते हुए हड़ताल पर चले गए।
बंगाल में हड़ताल पर बैठे जूनियर डॉक्टरों की दो सीधी-सी माँगें हैं- उन्हें सुरक्षा दी जाए, और उनके साथी को मौत के मुहाने तक पहुँचा देने वालों को जेल भेजा जाए। किसी भी सामान्य नागरिक का किसी भी सभ्य देश और समाज में यह अधिकार होता है कि वह अपने पेशे का बिना किसी भय या प्रताड़ना के अभ्यास कर सके। डॉ. परिबोहो मुखोपाध्याय को भी यह अधिकार था- जिसका उल्लंघन उनका सर फोड़ कर किया गया। यही हक़ डॉ. यश तेकवानी का भी था, जो उनकी रीढ़ में गंभीर चोट पहुँचाकर छीन लिया गया। ममता बनर्जी जिन डॉक्टरों को भाजपा की साजिश का हिस्सा बता रहीं हैं, वह केवल सुरक्षा और न्याय माँग रहे हैं।
हर मरीज की मौत के लिए क्या बलि चढ़ेगा एक डॉक्टर?
मोहम्मद सईद की मौत यकीनन उनके परिवार वालों के लिए दुःखद रही होगी- रिश्तों की पहचान में से एक होता है किसी की मौत पर दुःख होना। लेकिन अपने घर पर किसी के मर जाने के बदले क्या किसी की भी बलि ले लोगे? कोई डॉक्टर किसी मरीज को जान-बूझकर मरने नहीं देता है- उसी का ‘ट्रैक रिकॉर्ड’ ख़राब हो जाता है कि फलाना डॉक्टर नहीं यमदूत है; उसके पास मत जाना। और इस मामले में तो मरीज को तीमारदारों के सामने ही (टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार) दिल का दौरा पड़ा, सामने ही डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, और सामने ही सामने वह कोशिश असफल रही, और शाहिद चल बसे।
अपने प्रियजन को अपनी आँखों के सामने दम तोड़ते देखना किसी के भी लिए तकलीफ़देह होगा, लेकिन दो ट्रक भरकर, 200 लोगों को लाकर 20 डॉक्टरों को पीटने का क्या मतलब था? क्या गलती थी परिबोहो मुखोपाध्याय और यश तेकवानी की जिसके लिए उनपर ईंटों से हमला किया गया? क्या उनकी जान सस्ती थी?
ममता बनर्जी, अल्पसंख्यकों के वोट के लिए आप किस हद तक गिरेंगी?
सारे तीमारदारों का मानसिक संतुलन, अगर मान भी लिया जाए, एक साथ बिगड़ गया, वे शरीफ शहरी से खून के प्यासे पागल बन गए, तो आखिर पुलिस क्या कर रही थी? पथराव शुरू हुआ, डॉक्टरों पर जानलेवा हमले हुए तो पुलिस ने क्यों नहीं रोका? क्यों डॉक्टरों की जान बचाने के लिए दंगाईयों पर नियंत्रण के लिए कड़ी कार्रवाई नहीं की गई? जवाब हम सब को पता है।
क्योंकि हमलावर मजहब विशेष से थे- अगर उन्हें कुछ हो जाता तो ममता के वोट बैंक को खतरा था। और सीएम के वोट बैंक को खतरा मतलब गोली चलाने वाले, दंगाईयों का हाथ पकड़ने वाले का कैरियर खत्म। ममता बनर्जी अल्पसंख्यकों को वोटों के लालच में लुभाने के लिए कुछ भी करने की कमर कस चुकीं हैं- रोहिंग्याओं को हिंदुस्तानी बनाया जा रहा है ताकि उनके वोट से ममता बनर्जी को बहुमत मिलता रहे, ‘जय श्री राम’ को ‘बाहरी नारा’ बताया गया और ‘रामधोनु’ को ‘रॉन्गधोनु’ इसीलिए किया गया, और इसीलिए ममता बनर्जी आरोपियों पर कार्रवाई करने में हिचकिचा रहीं हैं।
देश की बिगड़ी स्वास्थ्य व्यवस्था में कोढ़ में खाज होगी डॉक्टरों की नाराजगी
डॉक्टरों की कमी से वैसे ही देश जूझ रहा है। सरकार कोई भी हो, यह समझ नहीं पा रही कि शिक्षा की गुणवत्ता घटाए बिना डॉक्टर कैसे बढ़ाए जाएँ। अस्पतालों के ओपीडी के बाहर लाइन में खड़े-खड़े लोग मर जाते हैं, क्योंकि अस्पतालों में न तो मरीजों के लिए बिस्तर होते हैं न डबल शिफ्ट कर-कर के थके हुए डॉक्टरों में इलाज करने की ताकत। 2017 की डेंगू महामारी की तरह जब अचानक से कोई बीमारी फैलने लगती है तो मुसीबत और बढ़ जाती है। ऐसे में डॉक्टरों को नाराज करना किस दृष्टिकोण से समझदारी है?
कानून व्यवस्था बनाए रखना ज़िम्मेदारी है
ममता बनर्जी इमोशनल ब्लैकमेलिंग और धमकी का डबल डोज़ इस्तेमाल कर रहीं हैं- एक तरफ डॉक्टरों को बीमार मरीजों की जान का हवाला दे रहीं हैं, और दूसरी ओर धमकी कि जो काम पर नहीं लौटा उसकी (जान-माल की?) जिम्मेदारी सरकार की नहीं है, और हॉस्टल भी खाली करा लिए जाएँगे। इस नरम-गरम नौटंकी से अच्छा 20 डॉक्टरों को पीटने 2 ट्रक भरकर आए लोगों को पकड़कर जेल में क्यों नहीं डाल देतीं? 53 डॉक्टरों ने संयुक्त इस्तीफ़ा मुँह पर मार दिया तो अपना-सा मुँह लेकर लौटा दिया। कुल मिलाकर विशुद्ध अव्यवस्था का माहौल है- क्लासिकल एनार्की, जो हर कम्युनिस्ट के दिल का ख्वाब होती है। (विडंबना यह है कि ‘दीदी’ इन्हीं कम्युनिस्टों से लड़कर सत्ता में आईं थीं)
हर राज्य में हर हाथापाई को मॉब-लिंचिंग बता कर मोदी के इस्तीफे की माँग करने वालीं ममता बनर्जी अगर कानून व्यवस्था नहीं संभाल सकतीं तो इस्तीफा दे देना चाहिए।
शायद अब समय आसन्न है कि गृह मंत्रालय राजधर्म का पालन करे, और ममता बनर्जी को चेतावनी दे कि इतने घंटों में उन गुंडों को जेल में बंद कर दिया जाए वरना उसकी सरकार बर्खास्त कर दी जाएगी। अगर भाजपा राजनीतिक नफे-नुकसान, ‘संघीय ढाँचे’ या ममता बनर्जी को विक्टिम कार्ड न खेलने देने के चक्कर में बेगुनाहों के उत्पीड़न की मूकदर्शक बनी रहेगी तो वह भी इस राजनीतिक पाप की दोषी होगी।
केरल की सीपीएम सरकार ने कार्टूनिस्ट सुभाष केके द्वारा बनाए गए उस कार्टून की फिर से समीक्षा करने का निर्णय लिया है, जिसे सरकार ने हाल ही में ‘केरल ललितकला अकादमी अवॉर्ड’ से नवाजा है। कारण है- चर्चों द्वारा किया गया विरोध। केरल सरकार चर्चों व पादरियों द्वारा किए जा रहे विरोध के सामने झुकती हुई नज़र आ रही है। यह कार्टून यौन शोषण के आरोपित पादरी फ्रैंको मुलक्कल का है। केरल चर्च बिशप काउंसिल (KCBC) ने कहा है कि इस कार्टून में बिशप मुलक्कल को बुरे तरीके से दिखाया गया है और इसीलिए यह धार्मिक संवेदनाओं को चोट पहुँचाने वाला है।
दरअसल, इस कार्टून में बिशप फ्रैंको को एक मुर्गे के रूप में चित्रित किया गया है, जिसे विधायक पीसी जॉर्ज का सहारा मिल रहा है। इस कार्टून में पीड़ित ननों को भी दिखाया गया है, वह डर कर कहीं भाग रही हैं और व्यथित हैं। इस कार्टून में पुलिस की टोपी को दिखाया गया है, जिस पर बिशप मुलक्कल मुर्गे के रूप मे खड़ा है। इसमें यह दिखाने की कोशिश की गई है कि किस तरह कुछ राजनेताओं व पुलिस अधिकारियों की मदद से पीड़ित ननों को न्याय नहीं मिल पा रहा है और मुलक्कल कानून की गिरफ़्त में नहीं आ रहा है। अभी हाल ही में केरल सरकार ने मुलक्कल के ख़िलाफ़ बलात्कार की जाँच कर रहे दो अधिकारियों का ट्रान्सफर कर दिया था।
Kerala govt under church pressure, to re-examine award for ‘Bishop Franco’ cartoon. The Kerala Catholic Bishops’ Council (KCBC) had strongly objected to the ‘panty’ in the cartoon and criticised the LDF government. https://t.co/PMZe9yrCR1
इन सबके अलावा उक्त कार्टून में बिशप मुलक्कल की लाठी के ऊपर महिलाओं के अंगवस्त्र टंगे हुए हैं और उसके ऊपर लिखा है- “विश्वासम रक्षतिः (आपका विश्वास ही आपको बचाएगा)”। इसके अलावा उस कार्टून में सीपीएम नेता पाइक शाही का भी चित्र है, जिन पर यौन शोषण के आरोप लगे हुए हैं। बिशप मुलक्कल और पीके शाही अपने सिरों पर एक ही प्रकार की टोपी पहने हुए हैं, जिसका अर्थ यह हुआ कि दोनों एक ही थाली के चट्टे-बट्टे हैं, भले ही दोनों अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रहे हों।
केरल बिशप काउंसिल ने कहा है कि सीपीएम को ऐसा लगता है कि ईसाईयों ने हालिया लोकसभा चुनाव में उसे वोट नहीं दिया, इसीलिए शायद केरल सरकार ने इस कार्टून को अवॉर्ड देने का निर्णय लिया। काउंसिल का कहना है कि ईसाईयों के पवित्र प्रतीक के ऊपर महिला के अंगवस्त्र को दिखाना ग़लत है। काउंसिल ने कहा कि ऐसे कार्टून को सरकार द्वारा पुरस्कृत करना अजीब विषय है। अब चर्चों के विरोध के बाद केरल सरकार ने इस अवॉर्ड की समीक्षा करने का निर्णय लिया है। केरल के संस्कृति मंत्री एके बालन ने कहा, “हालाँकि, सरकार इस कार्टून की थीम की प्रशंसा करती है लेकिन हम धार्मिक प्रतीक के अपमान को गंभीरतापूर्वक ले रहे हैं। इसीलिए हमने ललित कला आकादमी को इस वर्ष दिए गए अवार्डों की समीक्षा करने को कहा है।“
बता दें कि केरल में तब सीपीएम की ही सरकार थी, जब हिन्दू देवी-देवताओं की नंगी तस्वीरें बनाने वाले चित्रकार एमएफ हुसैन को ‘राजा रवि वर्मा अवॉर्ड’ देने का निर्णय लिया गया था। इसे लेकर केरल की वामपंथी सरकार की काफ़ी आलोचना भी की गई थी। सोशल मीडिया पर लोगों ने भी पूछा कि एमएफ हुसैन को अवॉर्ड देने वाली सरकार चर्चों के विरोध के सामने क्यों झुक गई?
तीन तलाक मामले में यूपी पुलिस ने जीकरू रहमान को गिरफ्तार किया। ये गिरफ्तारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश पर हुई। आरोपित मालपुरा इलाके का रहने वाला है। जानकारी के अनुसार जीकरू (Zikru Rehman) की पत्नी तरन्नूम बेगम ने मुख्यमंत्री से इस मामले पर शिकायत की थी कि उसके पति ने उसे तीन तलाक दे दिया है।
शिकायत के मुताबिक, तरन्नुम ने बताया था कि उनका निकाह जीकरू से 5 साल पहले हुआ था। उसके तीन बच्चे हैं। शादी के बाद से ही रहमान उनके साथ बदसलूकी करता था। पिछले हफ्ते मदरसे में पढ़ने वाले एक लड़की से निकाह करने के बाद जीकरू ने तरन्नूम को तलाक दे दिया था। ये लड़की उसी मदरसे में पढ़ती थी, जिसमें जीकरू न सिर्फ पढ़ाता था बल्कि वहाँ का डायरेक्टर भी वही था।
Zikru Rahman gave triple talaq to Tarannum Begum. She complained to @myogiadityanath and @Uppolice after verification of her complaint arrested Zikru Mian as he married another girl he taught at a madrassa. Some progressive Muslims have hailed the move https://t.co/0nprog70im
तरन्नूम का आरोप है कि तलाक देने के बाद उसे घर से बाहर निकाल दिया गया। जिसके बाद उसने मदद के लिए योगी आदित्यनाथ का दरवाजा खटखटाया। शिकायत लेकर वह योगी आदित्यनाथ से मिली। तथ्यों की जाँच के बाद स्थानीय पुलिस को मामले पर तुरंत एक्शन लेने की बात कही गई। मुस्लिम मैरिज प्रोटेक्शन एक्ट के अंतर्गत जीकरू को तुरंत गिरफ्तार किया गया। बता दें कि कानून के प्रभाव में आने के बाद ये पहला मामला है जिसमें गिरफ्तारी हुई है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा दिलाए इंसाफ़ को लेकर तरन्नूम बहुत खुश है। तरन्नुम ने इंडिया टुडे से हुई बातचीत में अपनी खुशी जाहिर की। महिला ने कहा कि उसे हमेशा से योगी आदित्यनाथ पर भरोसा था कि वो इस मामले में जरूर कार्रवाई करेंगे। महिला ने बताया कि इस तुरंत कार्रवाई के लिए वो हमेशा योगी आदित्यनाथ की आभारी रहेंगी।
तीन तलाक मामले में पुलिस की इस कार्रवाई पर सोशल एक्टिविस्ट आमिर कुरैशी ने कहा कि यह देखना बेहद खुश करने वाला है कि अब आखिरकार सरकार देश में रह रही करोड़ों मुस्लिम महिलाओं का भरोसा जीतने के लिए उचित कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि ये नया कानून मुस्लिम पुरूषों को सबक सिखाएगा कि महिलाएँ उनकी संपत्ति नहीं हैं। उन्हें भी इज्जत और सम्मान से रहने का अधिकार है।
हालिया लोकसभा निर्वाचन के दौरान विभिन्न विवादों के केंद्र में रहा फ़ेसबुक एक और संभावित रूप से विवादास्पद ऍप लेकर हाज़िर है। यूज़र्स की निजी जानकारी आधिकारिक रूप से हासिल करने के लिए फेसबुक ने ‘स्टडी’ नामक एक ऍप लॉन्च किया है, जिससे वह उपभोक्ता की सहमति से उनकी ब्राउज़िंग हिस्ट्री, वह कौन-कौन से ऍप इस्तेमाल करना पसंद करते हैं, कितनी देर तक करते हैं आदि इकठ्ठा करेगा। इस जानकारी का वह क्या करने वाला है इसका तो उसने खुलासा नहीं किया है, लेकिन इसके लिए $20 अर्थात लगभग 1390 रुपए तक यूज़र्स को मासिक भुगतान मिलेगा। फ़िलहाल इस ‘स्टडी’ प्रोग्राम में भागीदारी सीमित भौगोलिक क्षेत्र में रह रहे लोगों की ही होगी।
वेबसाइट पर घोषणा, जानकारी फेसबुक के बाहर साझा न करने का वादा
फेसबुक ने अपनी वेबसाइट पर इस कार्यक्रम की घोषणा करते हुए वादा किया है कि स्टडी ऍप के ज़रिए इकट्ठा जानकारी का वह न तो यूज़र्स को कौन से विज्ञापन दिखाए जाने हैं, इसका निर्धारण करने के लिए करेगा, न ही इस डाटा को वह किसी अन्य थर्ड पार्टी के साथ बाँटेगा। उसने यह भी वादा किया है कि वह अति-संवेदनशील जानकारियाँ जैसे आपका यूज़रनेम, पासवर्ड, फ़ोटो/वीडियो या आपके एसएमएस/अन्य किसी ऍप (वॉट्सऍप, ट्विटर आदि) से आए संदेश आदि नहीं पढ़ेगा या एक्सेस करेगा। इसके अलावा यूज़र्स के पास इस कार्यक्रम से बाहर निकलने का विकल्प हमेशा रहेगा- यानि किसी भी समय आप अपनी जानकारी देना बंद करने का अधिकार सुरक्षित रखेंगे।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इसके लिए आपको $20 तक का मासिक शुल्क मिलेगा, और अगर आप किसी अन्य व्यक्ति को भी अपना डाटा देने के लिए मना लें तो आपको रेफरल बोनस भी मिलेगा। फ़िलहाल यह प्रोग्राम केवल अमेरिका और भारत के उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध होगा। इसके अलावा यह केवल एंड्राइड यूज़र्स के लिए है, क्योंकि एप्पल के ऑपरेटिंग सिस्टम आईओएस के सुरक्षा प्रबंधन एक ऍप को किसी दूसरी ऍप तक इतनी पहुँच बहुत आसानी से नहीं दे देते।
निजता को लेकर चिंता बरकरार, फ़ेसबुक का इतिहास नहीं रहा है बहुत आशाजनक
फेसबुक के लाख वादों के बावजूद निजता को लेकर शंकाएँ उठना लाज़मी है। न केवल इसलिए कि यह ‘स्टडी’ प्रोग्राम अपने आप में, अपनी प्रकृति में ही किसी अनजाने व्यक्ति को अपने घर में केवल यह देखने के लिए बैठा लेने जैसा है कि आप घर में कौन से कपड़े पहनते हैं, क्या खाते या टीवी पर देखते हैं आदि, बल्कि इसलिए भी कि फेसबुक का अपने यूज़र्स की निजता, और यहाँ तक कि उनकी निजी जानकारी, को लेकर इतिहास बहुत उजला नहीं है।
कैम्ब्रिज एनालिटिका तो सभी के जेहन में ताज़ा है कि कैसे फेसबुक ने अपने उपभोक्ताओं की जानकारी कैम्ब्रिज एनालिटिका कम्पनी को सौंप दी थी। इसके अलावा पिछले साल एक और ‘स्कैंडल’ सामने आया जब यह खुलासा हुआ कि नेटफ्लिक्स, स्पॉटीफाई जैसी कम्पनियाँ फेसबुक को खिड़की की तरह इस्तेमाल कर आपके सन्देशों में झाँक सकतीं हैं, माइक्रोसॉफ्ट और अमेज़न यह देख सकतीं हैं कि आपकी कॉन्टैक्ट लिस्ट में कौन-कौन है आदि। यही नहीं, फ़ेसबुक पर पहले भी एप्पल ने सीमित प्रतिबंध लगाया था प्राइवेसी के हनन और उसके सुरक्षा प्रबंधों को चकमा देने के कारण। इसके अलावा फेसबुक इस इकठ्ठा हुई जानकारी का क्या करने वाला है, इसका बहुत अस्पष्ट सा ‘बेहतर उत्पाद और सेवाएँ विकसित करने के लिए’ जवाब दिया गया है।
नफ़ा बनाम नुकसान
इस प्रोग्राम में हिस्सा लेने के नफ़े हैं:
$20 की बैठे-बिठाए कमाई
अपनी निजी जानकारी के नुकसान/संभावित खतरे हैं:
आपकी जानकारी गलत हाथों में पड़ने का संभावित खतरा
फेसबुक द्वारा (या किसी कर्मचारी द्वारा निजी रूप से भी) थर्ड-पार्टियों को अवैध तरीके से आपकी जानकारी बेचे जाने के बाद आपको ‘ध्यान में रखकर’/निशाना बनाकर दिखाए गए राजनीतिक और कॉर्पोरेट विज्ञापन
फ़ेसबुक को वह जानकारियाँ भी प्राप्त हो जाना जो शायद आप न देना चाहें (खासकर कि यदि आप राजनीतिक रूप से सक्रिय हैं तो यह दीर्घकालिक रूप से शर्तिया खतरे से खाली नहीं है)
‘स्टडी’ प्रोग्राम से पूरी तरह हटने के लिए केवल ऍप अनइंस्टाल कर लेना काफी नहीं होगा- आपको इसकी बाकायदा सूचना देनी होगी। यह सूचना कैसे देनी होगी, फेसबुक ने यह साफ़ नहीं किया है।
एक लम्बे अंतराल के बाद भारत एक बार फिर चंद्रमा के लिए उड़ान भरने को तैयार है। देश की अंतरिक्ष एजेंसी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने ऐलान किया है कि 15 जुलाई को चंद्रयान-2 लॉन्च होगा। इसरो के अध्यक्ष श्री के सिवन ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि चंद्रमा के लिए आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से सुबह 2 बजकर 51 मिनट पर भारत के दूसरे मिशन चंद्रयान-2 को 15 जुलाई को प्रक्षेपित किया जाएगा।
Indian Space Research Organisation Chairman Dr. K Sivan: ISRO has firmed up that Chandrayaan 2 Mission will be launched on July 15 early morning at 2 hours 51 minutes. pic.twitter.com/E64eBaZfu7
क्या आपको पहला चंद्रयान मिशन याद है? कब लॉन्च हुआ था? दूसरे की कब तैयारी थी? क्यों देर हुआ? क्या इसके लिए कोई राजनीतिक हस्तक्षेप ज़िम्मेदार है? इन सभी सवालों के साथ ही इस समय किस तरह से इसरो प्रगति पथ पर है इन सब का जवाब कुछ सनसनी खेज खुलासों के साथ दिया है इसरो के पूर्व चेयरमैन जी माधवन नायर ने।
#LIVE | ‘Lost time due to political reasons’: Former ISRO Chief G Madhavan Nair makes big revelation over Chandrayaan-2’s delay during UPA 2. Tune in to watch the exclusive newsbreak here – https://t.co/LGCyJUEBn5pic.twitter.com/G4q1oZqDzL
रिपब्लिक टीवी को दिए एक विशेष इंटरव्यू में इसरो के पूर्व चेयरमैन जी माधवन नायर ने कुछ चौकाने वाले खुलासे किए कि क्यों चंद्रयान-2 को लॉन्च होने में इतना समय लगा। इस सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि देरी का मुख्य कारण उस समय कि UPA-2 है। मनमोहन सिंह सरकार ने मार्स मिशन से लोकसभा चुनाव में अधिक फायदे की आस में चंद्रयान-2 की तैयारियों को जानबूझकर डाइवर्ट करने के लिए कहा।
Dr Subramanian Swamy is #LIVE on Republic TV following the big revelations by former ISRO chief G Madhavan Nair regarding the UPA 2 delaying the Chandrayaan-2 mission. Tune in to watch here – https://t.co/LGCyJUEBn5pic.twitter.com/BHoGXxMRKc
चंद्रयान-1 मिशन 22 अक्टूबर 2008 को लॉन्च किया गया था। माधवन नायर ने कहा, जब चंद्रयान-1 लॉन्च किया गया और चंद्रयान-2, 2012 में लॉन्च के लिए लगभग तय था। और इसरो इसके लिए तैयार भी था, ज़रूरत केवल राजनीतिक सहमति की थी। लेकिन, लोकसभा चुनाव में अधिक लाभ और क्रेडिट के लिए मनमोहन सिंह सरकार ने उसे डिले कर मार्स मिशन को आगे बढ़ाने के लिए कहा जबकि इसरो ऐसी संस्था है जो दोनों मिशन पर एक साथ काम करने में सक्षम है। लेकिन उस समय कि सभी तैयारियों को सिर्फ चुनावी फायदे के लिए मनमोहन सिंह सरकार ने नज़रअंदाज़ कर दिया और चंद्रयान मिशन लम्बे समय के लिए टल गया।
#LIVE | ‘I am not surprised,’ says Dr Subramanian Swamy alleging ‘UPA’s complicity with foreign powers’ following former ISRO chief G Madhavan Nair’s revelations regarding UPA 2 delaying Chandrayaan-2 mission. Tune in to watch here – https://t.co/LGCyJUEBn5pic.twitter.com/AzRY6ELd8A
इतना ही नहीं, माधवन नायर ने प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि उनके आने से अब इसरो फ़ास्ट ट्रैक मोड में काम कर रही है। चन्द्रमा के लिए मानव मिशन एक रिस्की मिशन है, जो सफल होने पर देश को दूसरे देशों से बहुत आगे ले जाएगा, जिसके लिए इसरो तेजी से प्रयासरत है। राजनीतिक नेतृत्व में बदलाव के बाद, मोदी जी ने पहल करते हुए इसरो जैसी संस्था को अपने टॉप पर परफॉर्म करने का मौका दिया। इस समय इसरो के सभी मिशन फ़ास्ट ट्रैक मोड में चल रहे हैं। माधवन ने बताया कि इस समय इसरो में हर साल लगभग 28 मिशन पर कार्य हो रहा है। लगातार इसरो नए-नए शोध और तकनीक को बढ़ावा दे रहा है। और इस सब के पीछे है मजबूत राजनीतिक नेतृत्व।
यह पहली बार नहीं है जब कॉन्ग्रेस ने चुनावी लाभ के राष्ट्रीय हितों से समझौता करते हुए महज चुनावी लाभ के लिए संस्थाओं को अपने तरीके से चलाया है। यहाँ भी यह साबित हो रहा है कि संस्थाओं की कार्यशैली में जितना हस्तक्षेप कर कॉन्ग्रेस ने देश की तरक्की को नुकसान पहुँचाया है उतना किसी ने नहीं।
और अब जब चंद्रयान-2 मिशन लॉन्च के लिए पूरी तरह तैयार है तो जान लीजिए कि यह मिशन है क्या। चंद्रयान-2 मिशन पूरी तरह से स्वदेशी मिशन है। इस मिशन में चंद्रयान-2, 3 लाख 84 हज़ार किलोमीटर की उड़ान भरेगा। यान को चाँद पर पहुँचने में 55 दिन लगेंगे।
इसरो के मुताबिक, चंद्रयान-2 दूसरा चंद्र अभियान है और इसमें तीन मॉडयूल हैं ऑर्बिटर, लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान)। लैंडर रोवर में समाहित रहेगा और चंद्रमा पर लैंडर के उतरने के बाद रोवर सतह पर बाहर आ जाएगा। इसरो की जानकारी के अनुसार मिशन के समय ऑर्बिटर सर्वप्रथम चंद्रमा के मंडल का चक्कर लगाएगा और फिर चंद्रमा के दक्षिण भाग पर लैंडिंग करेगा।
800 करोड़ रुपए की लगत वाला चंद्रयान-2 मिशन 3890 किलोग्राम का एक स्पेसक्राफ्ट है। जिसे GSLV-मार्क-3 द्वारा लॉन्च किया जाएगा। इस मिशन का उद्देश्य चाँद की टोपोग्राफी, कंडीशन और एक्सोस्फीयर का स्टडी करना और उससे सम्बंधित डाटा इकट्ठा करना है।
भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सदस्य रहे राजनाथ सिंह सूर्य का आज सुबह निधन हो गया। 84 वर्षीय राजनाथ सिंह ने गोमतीनगर के पत्रकारपुरम स्थित अपने निवास स्थान पर अंतिम साँस ली। वो पिछले काफ़ी समय से शरीर में कंपन की दिक्कत झेल रहे थे। प्रख्यात चिंतक और विचारक के रूप में अपनी पहचान बनाने वाले राजनाथ सिंह सूर्य के निधन की सूचना पाते ही उनके आवास पर पत्रकार और राजनेताओं के पहुँचने का सिलसिला शुरू हो गया। ख़बर के अनुसार, काफ़ी समय पहले ही उन्होंने मेडिकल कॉलेज को अपनी देहदान की घोषणा कर दी थी। अब उनका पार्थिव शरीर किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ में रखा जाएगा।
आज वरिष्ठ पत्रकार एवं पूर्व राज्य सभा सांसद श्री राजनाथ सिंह ‘सूर्य’ जी के निधन पर उनके आवास पत्रकारपुरम गोमतीनगर, लखनऊ पर जाकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और ईश्वर से प्रार्थना की कि उनकी आत्मा को वे अपने श्रीचरणों में स्थान दें। pic.twitter.com/76oEYq0j4X
उनके देहांत पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि राजनाथ सिंह ‘सूर्य’ ने हमेशा जन सरोकारों को प्राथमिकता दी। उन्होंने अपनी कलम के ज़रिए जनहित और समाज हित से जुड़े मुद्दों को निर्भिकता और निष्पक्षता के साथ व्यक्त किया। मुख्यमंत्री आदित्यनाथ के अलावा उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा, चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन, लखनऊ की मेयर संयुक्ता भाटिया, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों समेत कई नेताओं ने उन्हें अंतिम विदाई दी।
वरिष्ठ पत्रकार एवं पूर्व राज्य सभा सांसद श्री राजनाथ सिंह ‘सूर्य’ जी के निधन की खबर सुनकर दुःख हुआ।
उन्होंने सदैव समाज से जुड़ें मुद्दों को निर्भीकता और निष्पक्षता से व्यक्त किया। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दें शोक संतप्त परिजनों को इस दुःख से उबरने के लिए संबल दें।
दिवंगत राजनाथ सिंह सूर्य ने पत्रकार के तौर पर कई समाचार पत्रों में काम किया था। इसके अलावा, वो एक समाचार पत्र के संपादक के रूप में भी काम कर चुके हैं। उनकी पहचान एक स्तंभकार के रूप में भी विख्यात थी। पत्रकारिता जगत में उनकी भरपाई करना बेहद कठिन है।
राजनाथ सिंह सूर्य का जन्म 03 मई 1937 को अयोध्या से छ: किलोमीटर दूर जनवौरा गाँव में एक किसान के घर हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा आर्यसमाज के विद्यालय से हुई थी। वो बचपन में वो राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़ गए थे। अपनी राजनीतिक सोच और वैचारिक स्पष्टता के चलते वो राजनीति और पत्रकारिता दोनों क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाने में सफल रहे।
बंगाली अभिनेत्री और सासंद नुसरत जहान का इंटरव्यू लेते हुए इंडिया टुडे ग्रुप के पत्रकार राहुल कँवल ने उनके साथ अच्छा-ख़ासा समय गुज़ारा। इसमें उन्होंने नुसरत के सुबह उठ कर जिम में एक्सरसाइज करने से लेकर अपने बॉयफ्रेंड निखिल के साथ समय गुज़ारने तक को कैप्चर किया। राहुल ख़ुद भी नुसरत के साथ जिम में एक्सरसाइज करते दिखे। कँवल ने ‘कूल’ पत्रकारिता करते हुए उन सभी चीजों में नुसरत का साथ दिया, जो नुसरत की दैनिक दिनचर्या का हिस्सा है या फिर जो नुसरत ने इंटरव्यू के दौरान किया। ज़मीन पर लेटने से लेकर बॉयफ्रेंड के साथ गाड़ी में सफ़र करने तक, कुछेक कैमरों के साथ कँवल ने हर जगह उनका साथ दिया और इसे इंटरव्यू की बजाय फ़िल्मफेयर का शो बना दिया।
देश के भविष्य को लेकर नुसरत जहान की राय जानते राहुल कँवल
पत्रकारिता अब अपना रूप बदल रही है। श्रीदेवी की मृत्यु अगर बाथ टब में डूबने के कारण होती है तो एंकरों को स्टूडियो में बाथ टब लाकर उसमें डूब कर दिखाना ज़रूरी है। असंवेदनशीलता भी चरम पर है। बहुत सारे प्रसिद्ध लोगों की मृत्यु ह्रदय गति रुकने के कारण होती है। वो तो भला हो कि नए जमाने के पत्रकारिता के पुरोधा साँस रोक कर स्टूडियो में नहीं लेटते, ताकि दिखा सकें कि सेलेब्रिटी कैसे मरते हैं? मीडिया संस्थानों को स्पष्ट करना चाहिए कि उनके नए नियम के मुताबिक़ अगर कोई पत्रकार सड़क किनारे मजदूरी कर रहे किसी मजदूर से इंटरव्यू लेने जाता है तो वह क्या करेगा और क्या नहीं – हथौड़ा उठाएगा या फावड़ा? सीमा पर गोलीबारी कवर करने जाने वाले पत्रकार भी लगे हाथ दो-चार गोलियाँ दागेंगे क्या?
श्रीदेवी की मृत्यु के बाद अज़ीबोग़रीब तरीके से चलाए गए शो
टाइटल में बताया जाता है कि पत्रकार देश की राजनीतिक दशा-दिशा एवं भविष्य पर एक सांसद की राय लेने गया है। यह पढ़ कर लगता है कि अभिनेत्री से नेत्री बनी नुसरत जहान से भारत की नीतियों, योजनाओं व समस्याओं के बारे में बात की गई होगी और इन सबके बारे में उनकी राय जानी जाएगी। लेकिन, वीडियो खोलने पर पत्रकार अभिनेत्री के साथ ज़मीन पर लेटा होता है। क्या यही भारत के राजनीतिक भविष्य को लेकर एक नेता की दृष्टि है? प्रधानमंत्री का इंटरव्यू लेने वाले एक बड़ा पत्रकार जब इस तरह की हरकतें करने जाता है तो उसे इस बात को पहले ही वीडियो के टाइटल में बता देना चाहिए- “नुसरत जहान के साथ एक्सरसाइज, उनके बॉयफ्रेंड के साथ सुहाना सफ़र”।
बाथरूम टब में लेट कर ‘क्रन्तिकारी’ रिपोर्टिंग
अगर कोई सेलेब्रिटी आत्महत्या करता है तो क्या पत्रकार स्टूडियो में पंखे से लटक कर न्यूज़ पढ़ेगा? क्या संसाधन और रुपए होने का मतलब यह है कि न्यूज़ शो को टीवी सीरियल और फ़िल्म की तरह पेश किया जाए? इस पर आश्चर्य नहीं होना चाहिए अगर कोई एंकर कल को स्टूडियो में नंगा दौड़ता मिले, वो भी यह दिखाने के लिए कि दिल्ली में गर्मी काफ़ी बढ़ गई है। यह सर्कस नहीं है, एक न्यूज़ चैनल पर चल रहा शो है, जिसमें ख़बरें बताई जाती है, उनका विश्लेषण किया जाता है। हर चीज में ग्लैमर ठूँसने वाले ‘कूल’ पत्रकार कल को पूर्व में हुए भारत-पाकिस्तान युद्ध की जानकारी देने के लिए स्टूडियो में आपस में ही सिर-फुटव्वल न कर बैठें। ऐसा हो भी रहा है, अब एक प्रवक्ता दूसरे के मुँह पर पानी का ग्लास फेंक देता है और एंकर को कोई फर्क नहीं पड़ता।
अगर केवल यही सब करना है तो इसे सर्कस ही घोषित कर दिया जाए। न्यूज़ चैनलों पर ऐसे कार्यक्रमों से पहले बता दिया जाए कि यह सर्कस है, न्यूज़ शो नहीं है। इससे दर्शक भी पहले से मन बना कर देख सकेंगे। लेकिन, देश की राजनीति पर किसी नेत्री के विचार जानने गया पत्रकार अगर ज़मीन पर लेट कर अजीब हरकतें करता दिखे, तो दर्शकों को दुःख होगा ही। दरअसल, ऐसे पत्रकार अपनी फैंटसी को पूरा कर रहे हैं, पत्रकारिता नहीं कर रहे। इन्हें अभिनेत्रियों के साथ दिन गुज़ार कर दर्शकों के सामने एक ऐसी इमेज बनानी है, जैसी फ़िल्मी हीरो की होती है। अगर ऐसा है तो इन्हें सच में बॉलीवुड में कोशिश करनी चाहिए।
राहुल कँवल द्वारा लिए इंटरव्यू का एक दृश्य
किसको इस बात में इंटरेस्ट है कि फलाँ सेलेब्रिटी ने मरने के पहले 1 दिन तक क्या-क्या किया? किसने कब चाय की चुस्कियाँ ली? कैसे ग्लास में पानी पिया, क्या खाया, क्या नहीं खाया? किसी सेलेब्रिटी ने मरने से पहले कितनी बार कपड़े बदले और उसने कैसे कपड़े पहन रखे थे, इस बात में किसी की क्या दिलचस्पी हो सकती है? दुबई के डॉक्टरों और जाँच एजेंसियों ने ज़रूरी प्रक्रिया वहाँ पूरी की, तब तक यहाँ बेवजह ऐसा मीडिया ट्रायल हुआ, जिससे लोगों को ऐसा लगा जैसे कि वे कोई सस्पेंस थ्रिलर फ़िल्म देख रहे हों। जब कोई विमान गायब हो जाता है, जो कि एक संवेदनशील मुद्दा है, जिस पर 13 लोग सवार थे, तब ये एक एनीमेशन बना कर बताते हैं कि कैसे स्पेससिप से आकर एलियन विमान को उठा कर ले जा रहा है।
ऐसे सैकड़ों उदाहरण हैं, जहाँ मीडिया ने न्यूज़ को सर्कस बनाया। सब्जी में मसाला उतना ही अच्छा लगता है, जितनी मात्र में वह होनी चाहिए। अगर एक कड़ाही मसाले में पाँव भर भिन्डी की सब्जी बनाई जाए, तो उसका ख़राब होना तय है। आज मीडिया में यही हो रहा है। मसाला पहले तैयार किया जाता है, ख़बरों के बारे में अपडेट बाद में लिए जाते हैं। छौंक पहले लगाया जाता है, दाल बाद में तैयार होता है। ऐसी चीजें कूड़ेदान की शोभा बढ़ाने के लिए होती है, डाइनिंग टेबल पर नहीं रखी जाती। ठीक उसी तरह, आजकल मीडिया में तैयार किए जा रहे शो किसी कार्टून चैनल या मनोरंजन वाले चैनल पर दिखाने लायक हैं, ख़बरों वाले चैनल पर नहीं। सारी ख़बरें मनोरंजन के लिए नहीं होती, असल में न्यूज़ का मतलब मनोरंजन होता ही नहीं।
नुसरत जहान के साथ राहुल कँवल का इंटरव्यू इसका ताज़ा उदाहरण है। ‘बताना कुछ और दिखाना कुछ’ वाले रोग से ग्रसित इन पत्रकारों, मीडिया संस्थानों और न्यूज़ चैनलों ने हिटलर का लिंग मापने से लेकर ख़ुद से ट्वीट करवाई गई चीजों का फैक्ट चेक भी कर बैठते हैं। किसी की मौत का मज़ाक बनाने से लेकर सेना के जवानों को असंवेदनशीलता दिखाने तक, मनोरंजन के क्षेत्र में काफ़ी आगे आ चुके ये पत्रकार शायद यही कारण है कि एक उम्र के बाद नेता बन जाते हैं। इसके लिए ज़रूरी नाटकीयता तो ये विकसित कर ही चुके होते हैं। आश्चर्य नहीं कल को अगर आपके सामने स्क्रीन पर न्यूज़ स्टूडियो में कोई एंकर उल्टा लटक कर न्यूज़ पढ़ रहा हो।