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शपथग्रहण समारोह का मिला था न्योता लेकिन शामिल नहीं हुए शरद पवार

लोकसभा चुनाव में प्रचंड जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके मंत्रिमंडल ने गुरुवार (मई 30, 2019) को राष्ट्रपति भवन में पद और गोपनीयता की शपथ ली। इस शपथ ग्रहण समारोह में देश और दुनियाभर से तकरीबन 8000 मेहमानों ने हिस्सा लिया। इनमें यूपीए अध्यक्ष सोनिया गाँधी, कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी समेत विपक्षी दलों के तमाम वरिष्ठ नेता भी शामिल हुए। मगर इस समारोह में नेशनलिस्ट कॉन्ग्रेस पार्टी (एनसीपी) अध्यक्ष शरद पवार शामिल नहीं हुए। जानकारी के मुताबिक, प्रधानमंत्री के दफ्तर से शरद पवार को शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए न्यौता भी भेजा गया था, लेकिन वो इस समारोह में नहीं पहुँचे।

दरअसल, तय प्रोटोकॉल के अनुसार सीट न मिलने की वजह से शरद पवार प्रधानमंत्री के शपथ ग्रहण कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए। राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी के प्रवक्ता नवाब मलिक ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि 78 वर्षीय पवार वरिष्ठ राष्ट्रीय नेता हैं और वह मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री के रूप में कार्य कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी के कार्यालय कर्मियों को जानकारी मिली कि पवार को बैठने के लिए जो सीट दी गई है, वह प्रोटोकॉल के अनुरुप नहीं है। इसलिए वो कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए। बताया जा रहा है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री पवार को पाँचवीं पंक्ति में सीट दी गई थी।

इससे पहले, गुरुवार (मई 30, 2019) को शरद पवार और कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने मुलाकात की थी। इस मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में यह अटकलें शुरू हो गई हैं कि दोनों पार्टियों का विलय हो सकता है, हालाँकि शरद पवार ने इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि मुलाकात में इस तरह की कोई बातचीत नहीं हुई। उन्होंने इस बारे में ट्वीट करते हुए लिखा कि राहुल उनके आवास पर उनसे मिलने आए। इस दौरान लोकसभा चुनाव के परिणाम और महाराष्ट्र में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर चर्चा हुई। एनसीपी और कॉन्ग्रेस के विलय की खबर अफवाह है।

मोदी सरकार 2.0 में जानिए किसको मिला कौन-सा मंत्रालय

मोदी सरकार 2.0 में कैबिनेट विभागों की घोषणा की जा चुकी है। इस लेख में जानिए किन मंत्रियों को कौन-सा मंत्रालय दिया गया। भारत के राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री की सलाह पर निम्नलिखित सदस्यों के बीच पोर्टफोलियो के आवंटन का निर्देश दिया।

केंद्रीय मंत्रिपरिषद: –

मंत्रियों का नाम                                                  किस मंत्रालय की दी गई ज़िम्मेदारी      
1. नरेंद्र मोदी (प्रधानमंत्री)प्रधानमंत्री के पद के साथ कार्मिक, जन शिकायत और पेंशन, परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष मंत्रालय। इसके अलाव वो सभी मंत्रालय जो किसी भी मंत्री को अलॉट न हुए हों।
2. राजनाथ सिंह (कैबिनेट मंत्री)रक्षा मंत्रालय
3. अमित शाह (कैबिनेट मंत्री)गृह मंत्रालय
4. नितिन गडकरी (कैबिनेट मंत्री)सड़क परिवहन एवं राजमार्ग और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय
5. सदानंद गौड़ा (कैबिनेट मंत्री)रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय
6. निर्मला सीतारमण (कैबिनेट मंत्री)वित्त एवं कॉरपोरेट मामले का मंत्रालय
7. राम विलास पासवान (कैबिनेट मंत्री)उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय
8. नरेंद्र सिंह तोमर (कैबिनेट मंत्री)कृषि एवं किसान कल्याण, ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्रालय
9. रविशंकर प्रसाद (कैबिनेट मंत्री)क़ानून एवं न्याय, संचार और इलेक्ट्रानिक एवं सूचना मंत्रालय
10. हरसिमरत कौर बादल (कैबिनेट मंत्री)खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय
11. एस. जयशंकर (कैबिनेट मंत्री)विदेश मंत्रालय
12. रमेश पोखरियाल निशंक (कैबिनेट मंत्री)मानव संसाधन विकास मंत्रालय
13. थावर चंद गहलोत (कैबिनेट मंत्री)सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण मंत्रालय
14. अर्जुन मुंडा (कैबिनेट मंत्री)आदिवासी मामलों का मंत्रालय
15. स्मृति ईरानी (कैबिनेट मंत्री)महिला एवं बाल विकास और कपड़ा मंत्रालय
16. हर्षवर्धन (कैबिनेट मंत्री)स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, विज्ञान और प्रोद्योगिकी, भूविज्ञान मंत्रालय
17. प्रकाश जावड़ेकर (कैबिनेट मंत्री)पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय
18. पीयूष गोयल (कैबिनेट मंत्री)रेलवे और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय
19. धर्मेंद्र प्रधान (कैबिनेट मंत्री)पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस और इस्पात मंत्रालय
20. मुख्तार अब्बास नकवी (कैबिनेट मंत्री)अल्पसंख्यक मामलों का मंत्रालय
21. प्रह्लाद जोशी (कैबिनेट मंत्री)संसदीय मामले, कोयला और खान मंत्रालय
22. महेंद्र नाथ पांडेय (कैबिनेट मंत्री)कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय
23. अरविंद सावंत (कैबिनेट मंत्री)भारी उद्योग एवं सार्वजनिक उद्यम मंत्रालय
24. गिरिराज सिंह (कैबिनेट मंत्री)पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन मंत्रालय
25. गजेंद्र सिंह शेखावत (कैबिनेट मंत्री)जल शक्ति मंत्रालय
26. संतोष गंगवार (राज्य मंत्री-स्वतंत्र प्रभार)श्रम एवं रोजगार मंत्रालय
27. राव इंद्रजीत सिंह (राज्य मंत्री-स्वतंत्र प्रभार)सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन और नियोजन मंत्रालय
28. श्रीपद नाईक (राज्य मंत्री-स्वतंत्र प्रभार)आयुष मंत्रालय (स्वतंत्र प्रभार), रक्षा मंत्रालय (राज्य मंत्री)
29. जितेंद्र सिंह (राज्य मंत्री-स्वतंत्र प्रभार)पूर्वोत्तर विकास (स्वतंत्र प्रभार), पीएमओ, कार्मिक, जनशिकायत और पेंशन, परमाणु उर्जा, अंतरिक्ष मंत्रालय (राज्य मंत्री)
30. किरण रिजिजू (राज्य मंत्री-स्वतंत्र प्रभार)युवा मामले एवं खेल (स्वतंत्र प्रभार), अल्पसंख्यक मामले (राज्य मंत्री)
31. प्रह्लाद सिंह पटेल (राज्य मंत्री-स्वतंत्र प्रभार)संस्कृति और पर्यटन (स्वतंत्र प्रभार)
32. आरके सिंह (राज्य मंत्री-स्वतंत्र प्रभार)बिजली, नवीन एवं नवीकरणीय उर्जा (स्वतंत्र प्रभार), कौशल विकास एवं उद्यमिता (राज्य मंत्री)
33. हरदीप सिंह पुरी (राज्य मंत्री-स्वतंत्र प्रभार)शहरी विकास और नागरिक उड्डयन मंत्रालय (स्वतंत्र प्रभार), वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय (राज्य मंत्री)
34. मनसुख मंडावतिया (राज्य मंत्री-स्वतंत्र प्रभार)जहाजरानी (स्वतंत्र प्रभार), रसायन एवं उर्वरक (राज्य मंत्री)
35. फग्गन सिंह कुलस्ते (राज्य मंत्री)इस्पात राज्य मंत्री
36. अश्विनी चौबे (राज्य मंत्री)स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री
37. जनरल (रिटायर) वीके सिंह (राज्य मंत्री)सड़क, परिवहन और राजमार्ग राज्य मंत्री
38. कृष्ण पाल गुज्जर (राज्य मंत्री)सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण राज्य मंत्री
39. दानवे रावसाहेब दादाराव (राज्य मंत्री)उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री
40. जी. किशन रेड्डी (राज्य मंत्री)गृह राज्य मंत्री
41. पुरुषोत्तम रुपाला (राज्य मंत्री)कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री
42. रामदास आठवले (राज्य मंत्री)सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण राज्य मंत्री
43. साध्वी निरंजन ज्योति (राज्य मंत्री)ग्रामीण विकास राज्य मंत्री
44. बाबुल सुप्रियो (राज्य मंत्री)पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री
45. संजीव कुमार बलियान (राज्य मंत्री)पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन राज्य मंत्री
46. धोत्रे संजय शमराव (राज्य मंत्री)मानव संसाधन विकास, संचार और इलेक्ट्रानिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री
47. अनुराग सिंह ठाकुर (राज्य मंत्री)वित्त और कॉरपोरेट मामले राज्य मंत्री
48. सुरेश अंगादि (राज्य मंत्री)रेल राज्य मंत्री
49. नित्यानंद राय (राज्य मंत्री)गृह राज्य मंत्री
50. वी मुरलीधरन (राज्य मंत्री)विदेश, संसदीय कार्य राज्य मंत्री
51. रेणुका सिंह (राज्य मंत्री)आदिवासी मामलों की राज्य मंत्री
52. सोम प्रकाश (राज्य मंत्री)वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री
53. रामेश्वर तेली (राज्य मंत्री)खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री
54. प्रताप चंद्र सारंगी (राज्य मंत्री)सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम और पशुपालन, डेयरी एवं मत्स्य पालन राज्य मंत्री
55. कैलाश चौधरी (राज्य मंत्री)कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री
56. देबाश्री चौधरी (राज्य मंत्री)महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री
57. अर्जुन राम मेघवाल (राज्य मंत्री)संसदीय कार्य, भारी उद्योग एवं सार्वजनिक उद्यम राज्य मंत्री
58. रतन लाल कटारिया (राज्य मंत्री)जलशक्ति और सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण राज्य मंत्री

गुरुवार (30 मई) की शाम को 7 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंत्रिमंडल के 57 सहयोगियों के साथ पद और गोपनीयता की शपथ ली थी। आज यानी शुक्रवार को शाम 5 बजे मोदी कैबिनेट की पहली बैठक भी है। इस दौरान मोदी सरकार कई अहम फ़ैसले ले सकती है।

एयरफ़ोर्स चीफ़ के घर के बाहर लगा राफ़ेल, कॉन्ग्रेस दफ़्तर है बगल में

ANI के हवाले से खबर है कि वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ के दिल्ली आवास के बाहर राफेल जेट का मॉडल स्थापित किया गया है। मजेदार बात यह है कि भारतीय राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस का हेडक्वाटर उनके घर के बगल में ही स्थित है।

2019 लोकसभा चुनावों में राफेल का मुद्दा काफ़ी गर्म रहा था। कॉन्ग्रेस अध्यक्ष बार-बार राफेल जैसे मुद्दे को जनता के बीच उछालकर प्रधानमंत्री की छवि बिगाड़ने की लगातार कोशिश करते रहे, लेकिन परिणाम स्वरूप उन्हें कुछ हासिल नहीं हुआ। इसके अलावा इस चुनाव में प्रधानमंत्री मोदी के लिए ‘चौकीदार चोर हैं’ के नारे भी कॉन्ग्रेस की रैलियों में खूब सुनने को मिले, लेकिन इससे भी कॉन्ग्रेस को कोई फायदा नहीं मिला।

मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने रिकॉर्ड तोड़ जीत के साथ कॉन्ग्रेस समेत सभी पार्टियों को हार का मुँह दिखाया और एक बार फिर से देश की बागडोर नरेंद्र मोदी के हाथ में आई। बड़े-बड़े दावे और वादे करने वाली कॉन्ग्रेस पार्टी को 17वें लोकसभा चुनाव में सिर्फ़ 52 सीटों पर संतोष करना पड़ा। हास्यास्पद ये है कि जिस राफेल के नाम पर मोदी सरकार को लगातार कॉन्ग्रेस घेरती रही उसी का मॉडल उनके हेडक्वाटर के बगल में स्थापित हो चुका है।

वरिष्ठता को दरकिनार कर प्रतिभा के आधार पर एडमिरल करमबीर सिंह बने नए नौसेना प्रमुख

वाइस एडमिरल करमबीर सिंह ने शुक्रवार (31 मई) को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एक औपचारिक सैन्य समारोह में वर्तमान नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा से भारतीय नौसेना के 24वें प्रमुख के रूप में पदभार ग्रहण किया।

वाइस एडमिरल करमबीर सिंह ने कहा, “मेरे पूर्ववर्तियों ने यह सुनिश्चित किया कि नौसेना के पास एक ठोस आधार है और वो नई ऊँचाइयों पर पहुँच गया है। यह मेरा प्रयास रहेगा कि हम उनके प्रयासों को जारी रखें और राष्ट्र को एक मज़बूत, विश्वसनीय नौसेना प्रदान करें और समुद्री क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हैं।”

इस महीने की शुरुआत में, रक्षा मंत्रालय ने सिंह की नियुक्ति को चुनौती देने वाली वाइस एडमिरल बिमल वर्मा की याचिका को ख़ारिज कर दिया था। 10 अप्रैल को दायर की गई अपनी याचिका में, वर्मा ने वरिष्ठता को नज़रअंदाज़ करने और अगले नौसेना प्रमुख के रूप में अपने कनिष्ठ को नियुक्त करने के सरकार के फ़ैसले पर सवाल उठाया था। रक्षा मंत्रालय ने एक आदेश में वाइस एडमिरल वर्मा की याचिका को ख़ारिज करते हुए उन्हें ‘योग्यता से रहित’ करार दिया था। मंत्रालय ने कहा था कि केंद्र चयन के मापदंडों से संतुष्ट था और एक आकलन के आधार पर वर्मा पर विचार किया गया था, लेकिन वो इस पद के लिए अनुपयुक्त पाए गए।

दरअसल, अंडमान निकोबार के फ्लैग ऑफिसर कमांडर इन चीफ वाइस एडमिरल बिमल वर्मा 5 महीने सीनियर हैं। ऐसे में केंद्र सरकार ने वरिष्ठता के मापदंड को नज़रअंदाज़ करके वाइस एडमिरल सिंह के हाथों में नौसेना प्रमुख की ज़िम्मेदारी सौंपने का निर्णय लिया, उसके पीछे वजह प्रतिभा है, जिसे अवसर देने का अधिकार सरकार के पास सैद्धांतिक तौर पर है। थल सेना प्रमुख जनरल रावत की नियुक्ति के समय भी सरकार ने यही मापदंड अपनाया था और तब विपक्ष ने इसको मुद्दा भी बनाया था।

वाइस एडमिरल सिंह की प्रतिभा की बात करें तो वे एक कुशल नौसेना अधिकारी हैं। उनके पास चेतक, कामोव-25 और कामोव-28 जैसे ऐंटी-सबमरीन युद्धक हेलीकॉप्टर उड़ाने का अनुभव प्राप्त है। अपने 39 साल के करियर में उन्होंने कई बड़ी ज़िम्मेदारियों को बख़ूबी निभाया और अपनी विलक्षण प्रतिभा का प्रदर्शन किया। उन्होंने विजयदुर्ग, INS राणा, INS दिल्ली की कमान संभालते हुए अपनी पूरी ईमानदारी से कर्तव्यों का पालन किया। इसके अलावा वे महाराष्ट्र और गुजरात में भी कमांडिंग ऑफिसर के तौर पर अपनी सेवाएँ दे चुके हैं। वाइस एडमिरल सिंह की नियुक्ति दो साल के लिए की गई है। इसके तहत वे नवंबर 2021 तक नौसेना प्रमुख रहेंगे।

वाइस एडमिरल सिंह की नियुक्ति से पहले भी केंद्र सरकार ने ऐसे ठोस क़दम उठाए हैं, जिनसे यह साफ झलकता है कि महत्वपूर्ण पदों पर सिर्फ वरिष्ठता को आधार न मानते हुए प्रतिभा को प्राथमिकता दिया जाना चाहिए। थल सेना प्रमुख की नियुक्ति के समय भी वरिष्ठता को एक तरफ रखते हुए जनरल प्रवीण बख्शी और पीएम हारिज की जगह सरकार ने जनरल बिपिन रावत को ज़िम्मेदारी सौंपी थी।

केंद्र सरकार ने सत्ता पर क़ाबिज़ होते ही इस तरह के फ़ैसलों को तरजीह दी थी, जिसमें वरिष्ठता के पुराने ढर्रे को त्यागकर प्रतिभा को प्राथमिकता देना शामिल था। सरकार अपने द्वारा उठाए गए इन क़दमों से देश में यह संदेश देना चाहती थी कि किसी भी पद पर क़ायम होने के लिए वरिष्ठता को आधार नहीं बनाना चाहिए बल्कि प्रतिभा की प्राथमिकता को महत्व देना चाहिए।

कॉन्ग्रेस समर्थक गौरव पांधी ने डिलीट किए ट्वीट्स, UP पुलिस ने कहा- ‘छोड़ेंगे नहीं’

अमेठी में भाजपा कार्यकर्ता सुरेंद्र सिंह की हत्या को लेकर बीते दिनों कुछ अफवाहें फैलाई गईं। इन अफवाहों को फैलाने में कॉन्ग्रेस समर्थक शमा मोहम्मद, गौरव पांधी और कॉन्ग्रेस सेवादल ने भी ट्वीट करके अपना योगदान दिया। इन्होंने यूपी पुलिस के महानिदेशक के बयान को गलत तरीके से पेश किया था।

हालाँकि उत्तर प्रदेश पुलिस की सख्ती देखते हुए गौरव पांधी ने अपना ट्वीट डिलीट कर दिया, लेकिन यूपी पुलिस ने ट्वीट करके स्पष्ट किया है कि ये हथकंडा आजमा कर वह बच नहीं सकते हैं। अमेठी पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। इस मामले की आगे जाँच की जाएगी और कानूनी कार्रवाई भी होगी।

गौरतलब है कि अमेठी हत्याकांड मामले में कुछ लोगों द्वारा यह अफवाह फैलाई गई थी कि सुरेंद्र सिंह की हत्या भाजपा के ही किसी कार्यकर्ता ने करवाई है। कुछ लोग यहाँ तक कहने लगे कि उत्तर प्रदेश पुलिस के महानिदेशक ने बयान दिया है कि भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा ही सुरेंद्र सिंह की हत्या करवाई है।

इस अफवाह को आगे बढ़ाने का काम कॉन्ग्रेस के कुछ आधिकारिक ट्विटर हैंडल ने भी करना चालू कर दिया। दरअसल, इकनोमिक टाइम्स ने एक खबर छापी थी कि यूपी पुलिस के डीजी ने बयान दिया था कि सुरेंद्र सिंह की हत्या लोकल स्तर पर दुश्मनी के चलते हुई। इसी बयान को तोड़ मरोड़कर कॉन्ग्रेस सोशल मीडिया की नेशनल कन्वीनर रुचिरा चतुर्वेदी ने अपने ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया कि सुरेंद्र सिंह की हत्या लोकल भाजपा के किसी कार्यकर्ता ने की है।

इसी प्रकार खबरदार डॉट कॉम नामक किसी वेबसाइट के लिंक को शेयर करते हुए कॉन्ग्रेस के समर्थक शमा मोहम्मद, गौरव पांधी और सेवादल ने भी ट्वीट किए। इसके बाद दी उत्तर प्रदेश पुलिस ने इन ट्वीट का संज्ञान लिया और कहा कि DGP के बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है और इस पर क़ानूनी कार्रवाई की होगी।

UPPSC पेपर लीक: पहले सॉल्वड पेपर दिए गए, फिर वापस लेकर जला दिए गए, ऐसे रची गई थी साज़िश

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) की एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती परीक्षा के पेपर लीक मामले में यूपी स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। एसटीएफ ने पेपर लीक करने वाले गैंग के सरगना कौशिक कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी के बाद आरोपी से पूछताछ की गई, जिससे टीम को कई अहम जानकारियाँ मिलीं। दरअसल, कोलकाता में पेपर छापने वाली प्रिटिंग प्रेस का मालिक कौशिक कुमार ही पेपर लीक करने वाले गैंग का सरगना निकला जिसे, एसटीएफ ने वाराणसी के चोलापुर इलाके से मंगलवार (मई 28, 2019) को गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तारी के बाद कौशिक कुमार से पूछताछ की गई और उसके बयान, मोबाइल डिटेल और व्हाट्सएप मैसेजे से मिले सबूतों के आधार पर क्राइम ब्रांच टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए परीक्षा नियंत्रक अंजू लता कटियार को गुरुवार (मई 30, 2019) को प्रयागराज से गिरफ्तार कर लिया। अंजू लता से क्राइम ब्रांच ने गोपनीय स्‍थान पर गहन पूछताछ की। उनके मोबाइल और लैपटॉप को सील कर दिया गया। इसके साथ ही अंजू लता को विशेष न्यायाधीश के समक्ष पेश करने के बाद 14 दिनों की रिमांड पर जेल भेज दिया गया।

गौरतलब है कि, 29 जुलाई 2018 को आयोजित यूपीपीएससी की एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती परीक्षा के हिंदी और सामाजिक विज्ञान विषय का पेपर एग्जाम से एक दिन पहले आउट हुआ था। कोलकाता निवासी अशोक देव ने इसकी शिकायत पश्चिम बंगाल की सीआईडी से की थी।

एसटीएफ वाराणसी यूनिट के प्रभारी विनोद कुमार सिंह के मुताबिक, जाँच में सामने आया कि 5 परीक्षार्थियों को परीक्षा से एक दिन पहले वाराणसी के यूपी कॉलेज बुलाया गया और वहाँ से दस किलोमीटर दूर कौशल विकास मिशन केंद्र ले जाया गया था जहाँ पर सभी को प्रश्‍न पत्रों के उत्तर की प्रतियाँ दी गईं और फिर कुछ देर बाद वापस लेकर जला दी गईं। शिकायत करने वाले आशोक देव ने इसका वीडियो बनाने के साथ फोटो भी लिए थे। पेपर लीक करवाने के लिए कौशिक ने अंजू लता को ₹10 लाख दिए थे, जबकि उसने अभ्‍यर्थियों से 20-20 लाख रुपए लिए थे।

UAE ने भी नरेंद्र मोदी के PM बनने पर जताई ख़ुशी, ADNOC टॉवर तिरंगे में रंगा

कल (मई 30, 2019) राष्ट्रपति भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ 57 मंत्रियों ने पद और गोपनीयता की शपथ ली। इसका जश्न पूरे देश में मनाया गया। भारत के अलावा अबु धाबी में भी मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल की शुरूआत का जश्न अलग ही ढंग से ही मनाया गया।

मोदी सरकार के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबू धाबी की आलीशान एडनॉक ग्रुप टॉवर बिल्डिंग भारत और अबु धाबी के झंडे में रंगी नजर आई। दोनों देशों के झंडों के अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूएई के शेख मोहम्मद बिन जायद की पोट्रेट भी बिल्डिंग पर देखने को मिली।

इस वीडियो को भारतीय उच्चायुक्त (इंडियन हाई कमिश्नर) नवदीप सिंह सूरी द्वारा शेयर किया गया है। नवदीप सूरी ने ट्वीट करते हुए लिखा, “यह सच्ची दोस्ती है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जहाँ दूसरे कार्यकाल के लिए शपथ ली, आइकॉनिक एडनॉक ग्रुप टावर भारत और यूएई के झंडों और हमारे पीएम और शेख मोहम्मद बिन जायद के पोट्रेट से रोशन हो गया।”

एडनॉक टावर के बारे में बता दें कि ये अबू धाबी की सबसे ऊँची इमारतों में से एक है। इस इमारत की ऊँचाई 342 मीटर है। इस बिल्डिंग में 65 मंजिलें हैं। यह अबू धाबी की राष्‍ट्रीय तेल कंपनी (एडनॉक) का मुख्‍यालय है। यह दुनिया की 57वीं सबसे ऊँची इमारत है।


भारतीय मीडिया की गलती पर भड़के भूटान के पूर्व PM, कहा: ‘ये देश का घोर अपमान है’

भूटान के पूर्व प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे (Tshering Tobgay) ने भारतीय मेनस्ट्रीम मीडिया के प्रति गहरी नाराज़गी जताई है। उन्होंने भारतीय मीडिया द्वारा भूटान के ‘वर्तमान प्रधानमंत्री’ की गलत तस्वीर इस्तेमाल किए जाने पर गुरुवार (मई 30, 2019) को ट्वीट किया है। उन्होंने कहा कि ये उनके देश के लिए घोर अपमान की बात है। भले ही भूटान छोटा देश है, लेकिन वह भारत का एक अच्छा दोस्त है।

दरअसल, भूटान के वर्तमान प्रधानमंत्री लोटे शेरिंग हैं और उन्हें नरेंद्र मोदी के शपथग्रहण समारोह में आना था लेकिन इसके मीडिया कवरेज में दो मीडिया संस्थान NEWS 9 और WION TV ने भूटान के प्रधानमंत्री की तस्वीर को गलत दिखाया। उन्होंने ट्वीट में भूटान के वर्तमान प्रधानमंत्री की जगह भूतपूर्व प्रधानमंत्री की तस्वीर लगाई। WION TV ने गलत तस्वीर लगाई लेकिन प्रधानमंत्री का नाम सही लिखा, लेकिन NEWS 9 ने तो पूर्व प्रधानमंत्री तोबगे को ही भूटान का वर्तमान प्रधानमंत्री बनाकर पूरी खबर को चलाया।

अपनी इस गलती के कारण भारतीय मीडिया को काफ़ी आलोचनाओं का सामना कर पड़ रहा है। सोशल मीडिया पर नाराज़ भूटान के पूर्व प्रधानमंत्री से भारतीय मीडिया की जगह भारतीय लोग माफ़ी माँग रहे हैं। कुछ कह रहे हैं कि पूरा भारत भारतीय मीडिया जैसी सोच नहीं रखता है। भारत देश नेपाल की तरह भूटान को भी छोटे भाई की तरह मानता है।

वहीं कुछ लोग पूर्व प्रधानमंत्री को ये कहकर समझा रहे हैं कि भारतीय मीडिया की गलतियों के कारण देश के लोग खुद ही बहुत परेशान है, इसलिए इस बात को वो दिल पर न लें। वो भारत के दोस्त हैं और शुभ चिंतक भी।

‘बंगाली और बिहारी में भेदभाव नहीं करती हूँ’ कहकर जय श्री राम नारा लगाने वालों को ममता ने फिर किया गिरफ्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण में ना जाने के बाद ममता बनर्जी एकबार फिर ‘राम भक्तों‘ पर अपनी भड़ास निकालते हुए देखी गई हैं। कुछ दिनों पहले मेदनीपुर में ममता बनर्जी के काफिले के सामने जय श्री राम का नारा देने वाले लोगों पर न केवल ममता बनर्जी भड़की थी, बल्कि गाड़ी रोक कर गाली-गलौज देने का आरोप लगा दिया था। यही नहीं, बाद में उन्हें गिरफ्तार भी करवा दिया गया था।

इसी तरह का एक मामला कोलकाता के बैरकपुर इलाके से सामने आया है। बृहस्पतिवार शाम को ममता बनर्जी नैहाटी में आयोजित होने वाले धरना प्रदर्शन में भाग लेने जा रही थी। रास्ते में रिलायंस जूट मिल के सामने कुछ लोगों ने ममता बनर्जी के काफिले के सामने जय श्री राम का नारा लगाया।

ममता बनर्जी के काफिले के सामने लगे जय श्रीराम के नारे के बाद ममता दीदी भड़क उठी और उन्होंने नारा लगाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश पुलिस को दिया। बाद में धरना स्थल पर पहुँची ममता बनर्जी ने कहा, “मैं बंगाली और बिहारी में भेदभाव नहीं करती हूँ, लेकिन कुछ लोग भाजपा से पैसे लेकर आज मुझ पर हमला कर रहे थे।”

ममता बनर्जी ने भाजपा को चैलेंज करते हुए कहा, “बैरकपुर सीट से दिनेश त्रिवेदी महज कुछ वोटों से हारे हैं, और मैं भाजपा को चैलेंज देती हूँ कि अगर मैं जिंदा रही, तो आने वाले विधानसभा चुनाव में वह यहाँ से एक भी सीट नहीं जीत पाएँगे।”

अनुभव और युवा शक्ति है मोदी 2.0 कैबिनेट में, देखें मंत्रियों की पूरी लिस्ट

लोकसभा चुनाव में प्रचंड जीत के बाद आख़िरकार वो दिन आ गया जब राष्ट्रपति द्वारा नरेंद्र मोदी को दूसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई गई। आज शाम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में 17वीं लोकसभा के लिए नरेंद्र मोदी को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इसके अलावा राजनाथ सिंह, अमित शाह, सदानंद गौड़ा, निर्मला सीतारामण और नितिन गडकरी ने भी नवगठित केंद्र सरकार में केंद्रीय मंत्री के रूप में शपथ ली।

पीएम मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में 6 हजार से ज्यादा लोग देश-विदेश से पहुँचे हैं। पीएम मोदी के कैबिनेट में इस बार अनुभव के साथ ही युवा शक्ति का मिश्रण नजर आएगा। शपथ ग्रहण से पहले पीएम मोदी और अमित शाह की बैठक के बाद संभावित मंत्रियों को फोन करके पीएम मोदी से मिलने के लिए बुलाया गया। पीएम मोदी के दूसरे कार्यकाल के लिए कैबिनेट में रविशंकर प्रसाद, सदानंद गौड़ा, पीयूष गोयल, प्रकाश जावेड़कर, जी किशन रेड्डी, साध्वी निरंजन ज्योति, पुरुषोत्तम रुपाला, राम विलास पासवान, रमेश पोखरियाल और मुख्तार अब्बास नकवी मंत्री बनेंगे।

25 कैबिनेट मंत्री और 24 राज्य मंत्रियों ने ली शपथ

कैबिनेट मंत्री (24)

  1. राजनाथ सिंह
  2. अमित शाह
  3. नितिन गडकरी
  4. सदानंद गौड़ा
  5. निर्मला सीतारमण
  6. राम विलास पासवान
  7. रविशंकर प्रसाद
  8. हरसिमरत कौर बादल
  9. नरेंद्र तोमर
  10. थावरचंद गहलोत
  11. एस जयशंकर
  12. रमेश पोखरियाल निशंक
  13. अर्जुन मुंडा
  14. स्मृति ईरानी
  15. डॉक्टर हर्षवर्धन
  16. प्रकाश जावड़ेकर
  17. पीयूष गोयल
  18. धर्मेंद्र प्रधान
  19. मुख्तार अब्बास नकवी
  20. प्रह्लाद जोशी
  21. महेंद्र नाथ पांडेय
  22. अरविंद सावंत
  23. गिरिराज सिंह
  24. गजेंद्र सिंह शेखावत

राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)

  1. संतोष गंगवार
  2. राव इंद्रजीत सिंह
  3. श्रीपद नायक
  4. जितेंद्र सिंह
  5. किरन रिजिजू
  6. प्रह्लाद सिंह पटेल
  7. राज कुमार सिंह
  8. हरदीप सिंह पुरी
  9. मनसुख मांडविया

राज्य मंत्री

  1. फग्गन सिंह कुलस्ते
  2. अश्विनि कुमार चौबे
  3. अर्जुन राम मेघवाल
  4. वीके सिंह
  5. कृष्णपाल गुर्जर
  6. राव साहेब दानवे
  7. जी किशन रेड्डी
  8. परषोत्तम रुपाला
  9. रामदास अठावले
  10. निरंजन ज्योति
  11. बाबुल सुप्रियो

जिन लोगों को प्रधानमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में बुलाया गया है, उनमें BIMSTEC देशों के नेता, विपक्ष के सभी राजनेता, खेल की दुनिया के सितारे और बॉलीवुड के बड़े चेहरे शामिल हैं। इससे पहले शपथ ग्रहण समारोह में 3500 से 5 हजार मेहमानों को ही निमंत्रण दिया जाता था।

शपथ ग्रहण में उपस्थित उद्योगपतियों में मुकेश अंबानी, रतन टाटा, एन चंद्रा, उदय कोटक, आनंद महिंद्रा, सज्जन जिंदल, दीपक पारेख, अनिल अग्रवाल, अजय पिरामल आदि भी शामिल हैं।