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CJI यौन शोषण मामला: SC के वकीलों ने की निष्पक्ष जाँच की माँग, सभी 27 जज मुख्य न्यायाधीश के साथ खड़े

बीते शनिवार (अप्रैल 20, 2019) को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के ख़िलाफ़ न्यायालय की पूर्व कर्मचारी ने एक हलफनामा दर्ज कराया था। इसमें CJI रंजन गोगोई पर यौन शोषण का आरोप लगाया गया था। मामले के मद्देनजर रंजन गोगोई ने शनिवार को एक बैठक की थी। जिसमें उन्होंने अपने ऊपर लगे हुए इल्जामों को खारिज करते हुए न्यायपालिका को खतरे में बताया था।

अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की दो शीर्ष संस्थाओं ने रंजन गोगोई द्वारा खुद के ख़िलाफ़ लगे आरोपों से निपटने के तरीके को अनुचित ठहराया है। संगठन ने इसे “प्रक्रियात्मक असंगतता (procedural impropriety)” और प्रक्रिया का ‘उल्लंघन’ करार दिया है। सर्वोच्च न्यायालय बार एसोसिएशन और सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड एसोसिएशन ने पीठ से चीफ जस्टिस पर लगे आरोपों की निष्पक्ष जाँच के लिए आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया है।

एससीबीए (सर्वोच्च न्यायालय बार एसोसिएशन) ने अपनी कार्यकारी समिति की इमरजेंसी बैठक के बाद मामले की जाँच को निष्पक्षता के साथ शुरू करने के लिए फुल कोर्ट से इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट, सोशल मीडिया और अन्य स्रोतों पर आरोपों के संबंध में उपलब्ध सभी सामग्रियों और तथ्यों को अगली बैठक में सुनवाई के लिए एक साथ देखने का आग्रह किया।

दैनिक जागरण में छपी रिपोर्ट के मुताबिक एससीबीए के सचिव विक्रांत यादव ने बताया कि कार्यकारी समिति का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट की पूर्व कर्मचारी द्वारा सीजेआई पर लगाए गए आरोपों की सुनवाई के लिए 20 अप्रैल को अपनाई गई प्रक्रिया, कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया के साथ ही साथ स्वाभाविक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ भी है।

वहीं एससीएओआरए (सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड एसोसिएशन) ने सोमवार(अप्रैल 22, 2019) को पारित प्रस्ताव में कहा कि सुप्रीम कोर्ट की पूर्व कर्मचारी द्वारा लगाए गए आरोपों पर स्थापित प्रक्रिया के तहत सुनवाई होनी चाहिए और प्रत्येक मामले में समान रूप से कानून को लागू किया जाना चाहिए।

इसके साथ ही एसोसिएशन ने आरोपों की निष्पक्ष जाँच के लिए फुल कोर्ट की अध्यक्षता में कमिटी गठन करने की माँग की है। वहीं दूसरी ओर न्यायालय के कर्मचारी कल्याण संगठन ने प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई का समर्थन किया है।

गौरतलब है कि इन दो शीर्ष संस्थाओं के अलावा मेधा पाटकर, अरुंधति रॉय, अरुणा रॉय सहित लगभग 33 हस्तियों ने एक बयान में भारत के मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ आरोपों की जाँच के लिए एक उच्च स्तरीय स्वतंत्र समिति द्वारा एक स्वतंत्र जाँच की माँग की है।

वकीलों की माँग से उलट सुप्रीम कोर्ट के सभी 27 जज मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई पर लगे यौन शोषण के आरोप मामले में उनके साथ हैं। सुबह की चाय (जो सुप्रीम कोर्ट में जजों की हर दिन की अनौपचारिक मीटिंग होती है) पर सभी 27 जज मुख्य न्यायाधीश के पक्ष में खड़े दिखे। यह मीटिंग आज 15 मिनट देर तक चली और 10:30 पर शुरू होने वाली हियरिंग भी इसी वजह से 10:45 पर शुरू हुई।

इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट के मुताबिक रंजन गोगोई ने सोमवार को हुई एक बैठक के बाद न्यायाधीश एस ए बोबडे को इस मामले में अगला कदम लेने के लिए कहा है। बता दें कि चीफ जस्टिस पर लगे इस आरोप के बाद अन्य जजों ने अपने आवासीय दफ्तरों में पुरुष कर्मचारियों की तैनाती की माँग की है। गौरतलब है कि सोमवार को हुई जजों से मुलाकात में उन्हें अपनी पीड़ा से अवगत कराया था। जिसके बाद अन्य जजों ने उनके साथ मज़बूती से खड़े रहने पर सहमति जताई थी।

सोमवार को यह बैठक लगभग 20 मिनट तक चली। रंजन गोगोई की मानें तो इस दौरान कई जजों ने उनके आवासीय दफ्तरों में सिर्फ पुरूष कर्मियों की तैनाती का आग्रह किया, जिससे ऐसी स्थिति से बचा जा सके। इस दौरान चीफ़ जस्टिस ने यह भी कहा कि पुरुष कर्मियों की माँग पूरी करना मुश्किल है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट में 60 फीसदी महिला स्टाफ हैं।

रहमत अली ने दलित किशोरी से 2 बार की अश्लील हरकत: मुस्लिम गुंडों ने तोड़ी अम्बेदकर मूर्ति, महिलाओं को पीटा

उत्तर प्रदेश के देवरिया से बड़ी ख़बर सामने आई है। जनपद स्थित गौरीबाजार थाना क्षेत्र के करजवाँ महुअवाँ दलित बस्ती में मुस्लिम दबंगों ने जम कर उत्पात मचाया। दरअसल, मामला शुरू हुआ रहमत अली द्वारा दलितों के घर में घुसकर लड़की से छेड़छाड़ करने पर। जब दलितों ने इस बात की शिकायत पुलिस से की तो मुस्लिम दबंगों ने गुस्से में दलित बस्ती में घुसकर न सिर्फ़ पीड़िता के परिवार वालों की पिटाई की बल्कि वहाँ लगी अम्बेदकर की मूर्ति को भी तोड़-ताड़ दिया। घटना के बाद दलित महिलाओं में भय का माहौल है। पूछने पर महिलाएँ रो पड़ती हैं। डरी, सहमी और बदहवास महिलाओं ने पुलिस पर ढिलाई बरतने का आरोप लगाया है। घर में बदहवास बैठी महिलाएँ किसी अनहोनी की आशंका से अभी भी घबराई हुई हैं।

अमर उजाला के स्थानीय संस्करण में छपी ख़बर

रहमत अली द्वारा लड़की से दुर्व्यवहार करने का जब विरोध किया गया तो वो शमशेर, इशराद, नौशाद, अताउल, फ़ैसल, जहाँगीर समेत अपने दर्जन भर गुंडे साथियों के साथ वापस दलित बस्ती में पहुँचा और तांडव मचाया। ‘समुदाय विशेष’ के गुंडों द्वारा खुलेआम तलवारें लहराई गईं, जिसके कारण बच्चों में अभी तक भय व्याप्त है। दलितों का कहना है कि छेड़खानी के अगले ही दिन पुलिस से मामले की शिकायत की गई थी। अगर समय रहते पुलिस सक्रिय हो जाती तो गुंडों की इतनी हिम्मत नहीं होती। घटना के बाद पीड़ितों ने थाने पहुँच कर विरोध प्रदर्शन किया। गाँव में तनाव का माहौल है।

दरअसल, रहमत अली ने 2 बार किशोरी से छेड़खानी की। जब वो पहली बार उसके घर में घुसा तो रात का समय था। किशोरी द्वारा शोर मचाए जाने के बाद घरवालों की नींद खुली, जिसके बाद रहमत भाग खड़ा हुआ। गुरुवार (अप्रैल 18, 2019) की इस घटना के बाद शुक्रवार को रहमत अली फिर से उक्त किशोरी के घर में घुस गया।परिवार के लोगों द्वारा दौड़ाए जाने के बाद वो भाग खड़ा हुआ। इसके बाद बौखलाए रहमत ने लाठी-डंडे और तलवारों से लैस होकर बस्ती में साथियों सहित पहुँच कर कहर बरपाया। गुंडों ने दिव्यांग तक को नहीं बख्शा। किशोरी की माँ को भी घायल कर दिया गया। पीड़िता के सीने पर ईंट से वार किया गया, जिसके कारण उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

मुस्लिम दबंगों द्वारा किए गए इस हमले में 20 दलितों के घायल होने की सूचना है। उपद्रवी फ़रार हैं। अभी तक सिर्फ़ एक आरोपित रहमत अली की गिरफ़्तारी की सूचना है। ग्रामीणों की माँग है कि पहले सभी आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की जाए और उसके बाद बाबासाहब अम्बेदकर की प्रतिमा की अच्छी तरह मरम्मत कराई जाए। उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने इस घटना का संज्ञान लिया है। उन्होंने कहा कि इस तरह से किसी के घर में घुसकर शर्मनाक हरकत करने का किसी को भी अधिकार नहीं है। उन्होंने प्रशासन को निष्पक्ष जाँच एवं कार्रवाई के लिए कहा है।

दैनिक जागरण के देवरिया संस्करण में छपी पीड़ितों की दास्तान

एक और चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि पुलिस के सामने ही अम्बेदकर की प्रतिमा तोड़ी गई। जब मुस्लिम दबंग डाली बस्ती में हंगामा मचा रहे थे, तभी पुलिस को सूचना दे दी गई थी और पुलिस मौके पर पहुँच भी गई थी। लेकिन गुंडों ने मूकदर्शक बनी पुलिस के सामने ही बाबासाहब भीमराव अम्बेदकर की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त कर दिया। एक दलित महिला के हाथ पर तलवार से प्रहार भी किया गया।

बंगाल: वोटिंग से पहले BJP कार्यकर्ता पर बम से हमला, तृणमूल के गुंडो पर शक की सुई

पश्चिम बंगाल में सोमावार (अप्रैल 22, 2019) को इटाहर विधानसभा क्षेत्र के चाकला में मतदान से कुछ घंटों पहले बम से हमले की घटना सामने आई है। इस हमले में 2 लोगों के गंभीर रूप से घायल होने की खबर है।

प्रभात खबर में छपी रिपोर्ट के मुताबिक घायलों को रायगंज जिला अस्पताल में इलाज के लिए भेजा गया है। सुबह 7 बजे क्षेत्र में मतदान शुरू होने से पूर्व इस घटना के कारण स्थानीय लोगों में डर का माहौल बन गया है।

बम हमले की खबर सुनते ही घटनास्थल पर बड़ी संख्या में ईटाहर थाना पुलिस के साथ केंद्रीय बल भी पहुँचे। अस्पताल में भर्ती हुए दो घायलों में से एक ने अपना नाम लालन चौधरी बताते हुए खुद को भाजपा का कार्यकर्ता बताया है।

लालन की मानें तो उन पर यह हमला बाजार से लौटने के दौरान हुआ। एक ओर जहाँ इस हमले का आरोप तृणमूल के बदमाशों पर लगाया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर तृणमूल इस घटना में अपना हाथ होने से इनकार कर रही है।

गौरतलब है कि चुनावों के चलते भाजपा के कार्यकर्ताओं पर होती हिंसा दिन पर दिन बढ़ती ही जा रही है। पश्चिम बंगाल में तो TMC का राजनीतिक दुश्मनी भरा व्यवहार आम हो गया है। 11 अप्रैल को सम्पन्न हुए लोकसभा चुनाव के पहले चरण के दौरान भी पश्चिम बंगाल में हिंसा की कई घटनाएँ दर्ज की गईं थी।

BJD के ‘गुंडा’ विधायक ने छापा मारने आई EC की टीम पर किया हमला, समर्थकों से पिटवाया – हुए गिरफ़्तार

ओडिशा में सत्ताधारी पार्टी बीजू जनता दल के विधायक प्रदीप महारथी ने अपने ठिकानों पर छापा मारने आई चुनाव आयोग की टीम पर समर्थकों सहित हमला बोल दिया। दरअसल, मेजिस्ट्रेट के नेतृत्व में निर्वाचन आयोग की टीम विधायक के ठिकानों पर छापा मारने आई थी। टीम विधायक के फ़ार्म हाउस पर छापेमारी करने गई थी। पिपिल विधायक महारथी ने छापा मारने आई फ्लाइंग स्क्वाड टीम पर अपने समर्थकों सहित धावा बोल दिया, जिसमें मजिस्ट्रेट को भी चोट पहुँची और वो घायल हो गए। प्रदीप महारथी बीजद सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं और इस चुनाव में पिपिल विधानसभा क्षेत्र से पार्टी के उम्मीदवार भी हैं। ताज़ा सूचना के अनुसार, पूर्व मंत्री महारथी को गिरफ़्तार कर लिया गया है।

मामले की छानबीन के लिए उन्हें पूछ्ताछ हेतु थाना बुलाया गया, जहाँ उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया। घायल मजिस्ट्रेट रवि नारायण पात्रा सहित अन्य कर्मचारियों को इलाज के लिए भुवनेश्वर के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस मामले में अधिक जानकारी देते हुए मजिस्ट्रेट पात्रा ने कहा:

“मुझे महारथी के फार्म हाउस पर शराब और पैसे बाँटे जाने की सूचना मिली थी। इसके बाद मैं स्टेटिक सर्विलांस टीम के अधिकारियों को लेकर छानबीन करने के लिए विधायक के फार्म हाउस पर गया। जैसे ही हम सब वहाँ पहुँचे, वहाँ पहले से ही मौजूद विधायत महारथी ने पहले तो हमसे अपशब्द कहे, फिर मेरे और मेरे टीम पर समर्थकों सहित हमला बोल दिया।”

फ़्लाइंग टीम के सदस्यों के बयान दर्ज कर लिए गए हैं। पिपिल विधानसभा क्षेत्र पुरी के अंतर्गत आता है। पुरी लोकसभा क्षेत्र से भाजपा के प्रवक्ता संबित पात्रा चुनाव लड़ रहे हैं। ओडिशा में विधानसभा और लोकसभा चुनाव एक साथ हो रहे हैं। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रदीप महारथी को गुंडा बताते हुए कहा कि उन्होंने अब सारी हदें पार कर दी हैं। प्रधान ने प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने पर गुंडा निरोध क़ानून लाने का वादा किया। उन्होंने कहा कि ऐसे सभी गुंडों को सलाख़ों के पीछे पहुँचाया जाएगा। धर्मेंद्र प्रधान ने महारथी को बलात्कारियों का रक्षक भी कहा।

विधायक की गिरफ़्तारी के लिए संबित पात्रा, बसंत पांडा और समीर मोहंती के नेतृत्व में भाजपा के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य चुनाव आयोग से मुलाक़ात की। पुरी के पुलिस अधीक्षक ने कहा कि पुलिस अन्य आरोपितों की गिरफ़्तारी के लिए भी लगातार प्रयास कर रही है।

श्री लंका में बढ़ रहा पाकिस्तानी आतंकी संगठनों का प्रभाव, भारत ने कई बार किया था आगाह

श्री लंका में हुए बम धमकों में वहाँ के चर्चों को मुख्य रूप से निशाना बनाया गया और इसमें 300 के क़रीब लोगों की जानें गईं। इन वीभत्स हमलों में 500 से भी अधिक लोग अभी भी घायल हैं और कुछ गिरफ्तारियाँ भी हुई हैं। दूसरी तरफ़ लगातार सवाल उठ रहे हैं कि क्या प्रशासन ने उचित सतर्कता नहीं बरती या फिर इंटेलिजेंस इनपुट की तरफ़ ठीक से ध्यान नहीं दिया गया? प्रारंभिक जाँच में इस्लामिक कट्टरपंथी आतंकी संगठन का हाथ सामने आ रहा है और ये दिखाता है कि श्री लंका में भी वैश्विक आतंकी संगठन आईएस अपना पाँव पसार रहा है। अब ख़बर आई है कि भारत ने श्री लंका को ऐसे किसी संभावित हमले की आशंका को लेकर पहले ही आगाह किया था। भारत ने श्री लंका को कई बार आगाह करते हुए कहा था कि नेशनल तौहीद जमात से जुड़े कई लोग पाकिस्तान में सक्रिय हैं।

भारत ने श्री लंका को आगाह किया था कि राष्ट्र का पूर्वी प्रदेश लश्कर-ए-तैयबा जैसे खूँखार पाकिस्तानी आतंकी संगठनों के लिए एक ऑपरेशनल जोन बनता जा रहा है। इस्लामिक कट्टरपंथ और जिहाद के बढ़ते प्रभाव को लेकर भी भारत ने श्री लंका को चेतावनी दी थी। लश्कर के चैरिटी समूह फलाह-ए-इंसानियत ने 2016 में ही दावा किया था कि अफ़ग़ानिस्तान, सीरिया और श्री लंका सहित कई देशों में उसकी उपस्थिति है। लश्कर के एक अन्य चैरिटी विंग इदारा ख़िदमत-ए-ख़ल्क़ के भी यहाँ तौहीद के साथ मिलकर काम करने की बात सामने आई थी। 2004 में श्री लंका और मालदीव में सुनामी आने के बाद ये संगठन बचाव कार्यों में काफ़ी सक्रिय रहा था और उसके बाद इसने धीरे-धीरे वहाँ पैठ बनानी शुरू कर दी।

लश्कर लगातार भारत को चारों ओर से घेरने की कोशिश में पड़ोसी देशों में अपना आधार मज़बूत करने के लिए बेस कैम्प बनाता रहा है। श्री लंका में भी उसने ऐसा ही किया। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि लश्कर के इन प्रयासों से स्थानीय आतंकी संगठन तोहीद को मदद मिली हो। तोहीद द्वारा तमिलनाडु में भी कट्टरपंथी अभियान चलाए जाने की सूचना है। भारत ने 4 अप्रैल को भी ऐसे किसी संभावित हमले को लेकर श्री लंका को आगाह किया था लेकिन द्वीपीय देश ने भारत की चेतावनी को नज़रअंदाज़ कर दिया। श्री लंकाई विशेषज्ञ अमरनाथ अमरसिंगम ने अंदेशा जताया है कि ये हमला स्थानीय संगठन द्वारा बिना किसी बाहरी मदद के किया गया लगता है।

आपको बता दें कि लश्कर-ए-तैयबा और श्री लंका को सालों तक सिविल वॉर में घेरे रखने वाले लिट्टे के बीच 1992 से ही सम्बन्ध स्थापित हो गए थे। उस दौरान लिट्टे ने कुछ मुस्लिम कट्टरवादियों को हथियारों की सप्लाई की थी। इसमें से कुछ हथियार अभी भी मौजूद हैं। चेन्नई में अमेरिकी उच्चायोग को निशाना बनाने की कोशिश कर रहे आतंकी साकिर हुसैन को गिरफ़्तार किया गया। आईएसआई एजेंट साकिर कोलंबो में पाकिस्तानी विदेश सेवा के अधिकारी आमिर सिद्दीकी के कहने से काम करता था। अब तक दर्जनों श्री लंकाई युवाओं द्वारा आईएस जॉइन करने की ख़बर आ चुकी हैं। मालदीव के भी 50 से भी अधिक युवाओं को पाकिस्तानी आतंकी कैम्पों में प्रशिक्षित किया जा रहा है, ऐसा वहाँ की एजेंसियों ने सूचना दी है।

राजनीति में ओपनिंग के लिए तैयार गौतम गंभीर, ईस्ट दिल्ली से BJP के टिकट पर इनसे होगा मुकाबला

भाजपा ने नई दिल्ली से पूर्व भारतीय सलामी बल्लेबाज़ गौतम गंभीर को टिकट दिया है। भारतीय क्रिकेट जगत में नाम कमाने वाले गौतम गंभीर का मुक़ाबला यहाँ कॉन्ग्रेस प्रत्याशी और दिल्ली कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष रहे अरविंदर सिंह लवली से होगा। कॉन्ग्रेस-आप गठबंधन के फाइनल न होने के बाद आज कॉन्ग्रेस ने भी दिल्ली की 6 सीटों के लिए प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। पिछली बार इस सीट से महेश गिरी ने जीत दर्ज की थी। इस बार उनकी जगह गंभीर ताल ठोकेंगे। वहीं नई दिल्ली से मीनाक्षी लेखी को टिकट दिया गया है। उनका मुक़ाबला दिल्ली कॉन्ग्रेस के एक और पूर्व अध्यक्ष अजय माकन से होगा। गौतम गंभीर और अजय माकन के नाम का ऐलान आज सोमवार (अप्रैल 22, 2019) को देर शाम किया गया।

गौतम गंभीर और मीनाक्षी लेखी के नाम की घोषणा

आज कॉन्ग्रेस ने ईस्ट दिल्ली से अरविंदर सिंह लवली के नाम की घोषणा की। दिल्ली कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष रहे अरविंदर सिंह लवली शीला दीक्षित की कैबिनेट में कई अहम मंत्रालय संभाल चुके हैं। बीच में उन्होंने कॉन्ग्रेस छोड़ दी थी और भाजपा में शामिल हो गए थे लकिन अब वो फिर से अपनी पुरानी पार्टी कॉन्ग्रेस में लौटे हैं और इनाम स्वरूप उन्हें लोकसभा टिकट थमाया गया है। अब गौतम गंभीर और लवली के बीच कड़ा मुक़ाबला होगा।

कल रविवार को भाजपा ने दिल्ली की अन्य 4 सीटों के लिए उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की थी। चाँदनी चौक से 2014 के आम चुनाव में तत्कालीन केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल को हराने वाले डॉक्टर हर्षवर्धन का टिकट बरकरार रखा गया है। भाजपा ने एक बार फिर उनकी साफ़-सुथरी छवि और सौम्य व्यक्तित्व के आधार पर इस सीट को जीतने की उम्मीद लगाई है। दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष मनोज तिवारी नार्थ-ईस्ट दिल्ली से चुनाव लड़ेंगे। इस सीट पर पूर्वांचलवासियों की अच्छी-ख़ासी तादाद है और पूर्वांचल के लोगों के बीच लोकप्रिय भोजपुरी गायक-अभिनेता के लिए ये सुरक्षित सीट मानी जा रही है।

वेस्ट दिल्ली से वर्तमान सांसद प्रवेश साहिब सिंह वर्मा पर ही भरोसा जताया गया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा के बेटे प्रवेश वर्मा ने पिछले आम चुनाव में रिकॉर्ड 2,68,586 वोटों से जीत दर्ज की थी। ये दिल्ली आम चुनाव में जीत का सबसे बड़ा अंतर था। प्रवेश ने इसका श्रेय अपने पिता द्वारा किए गए कार्यों और मोदी लहर को दिया था। साउथ दिल्ली से वर्तमान सांसद रमेश बिधूड़ी को टिकट दिया गया है। अभी एक दिन पहले ही आम आदमी पार्टी ने उन पर वादाख़िलाफ़ी का आरोप लगाया था। पार्टी ने बिधूड़ी का रिपोर्ट कार्ड जारी कर उन पर कई आरोप लगाए थे।

दिल्ली की सात में से 6 सीटों पर अपने उम्मीदवारों के नामों की घोषणा भाजपा और कॉन्ग्रेस ने कर दी है। अब देखना यह है कि 2014 में सातों सीटों पर जीत चुकी भाजपा इस बार अपना किला बचाने में कामयाब होती है या नहीं।

तीसरा चरण: कहीं चाचा-भतीजा की लड़ाई, कहीं सबरीमाला का मुद्दा, कहीं 3 यादवों की ज़ंग

लोकसभा के तीसरे चरण के लिए चुनाव प्रचार का शोर थम चुका है। अब गेंद पूरी तरह से जनता के पाले में है। तीसरे चरण में 14 राज्यों की 116 सीटों पर मतदान होना है। इसमें चुनावी रूप से महत्वपूर्ण राज्य उत्तर प्रदेश की 10 सीटें भी शामिल हैं। जहाँ इस चुनाव में एक तरफ़ समाजवादी पार्टी की प्रतिष्ठा का सवाल है, वहीं दूसरी तरफ़ कर्णाटक-महाराष्ट्र में भाजपा की गढ़ बचाने की चुनौती है। सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की किस्मत का फ़ैसला भी इसी चुनाव में होगा। आइए एक नज़र डालते हैं इस चुनाव में हिस्सा ले रहे दिग्गज उम्मीदवारों का, जिसकी किस्मत का फैसला जनता को कल मंगलवार (अप्रैल 23, 2019) को करना है।

गाँधीनगर से भाजपा अध्यक्ष अमित शाह

गाँधीनगर से भाजपा अध्यक्ष इस बार ख़ुद चुनाव लड़ रहे हैं। भाजपा की पारम्परिक सीट रही गाँधीनगर से पूर्व भाजपा अध्यक्ष लालकृष्ण अडवाणी जीतते रहे हैं। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहार वाजपेयी भी यहाँ से जीत दर्ज कर चुके हैं। अगर अमित शाह को यहाँ से जीत मिलती है तो वो तीसरे ऐसे सांसद होंगे, जो भाजपा अध्यक्ष भी रहे। हालाँकि अमित शाह नामांकन के बाद से सिर्फ़ 2 बार ही गाँधीनगर जा पाए हैं लेकिन वहाँ उनके प्रचार अभियान का संचालन एक विश्वस्त टीम कर रही है। अमित शाह की लड़ाई गाँधीनगर से दो बार विधायक रहे सीजे चावड़ा से है। जब अडवाणी 2009 में भारत भर में प्रचार में व्यस्त थे, गाँधीनगर में उनके प्रचार अभियान की ज़िम्मेदारी शाह ने ही संभाली थी।

मैनपुरी से सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव

मैनपुरी सपा के प्रमुख परिवार की पारम्परिक सीट रही है। सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव ने मैनपुरी से पहली बार 1996 में चुनाव लड़ा था। उसके बाद से अभी तक इस सीट पर सपा का ही कब्ज़ा रहा है। पिछले चुनाव में भी मुलायम ने यहाँ से जीत दर्ज की थी लेकिन दो सीटों से चुनाव लड़ने के कारण उन्हें ये सीट छोड़नी पड़ी थी। उपचुनाव में तेज प्रताप सिंह यादव ने जीत दर्ज की। वो मुलायम के बड़े भाई के पोते हैं और लालू यादव के दामाद हैं। मुलायम 2004 और 2009 में भी यहाँ से जीत दर्ज कर चुके हैं। 28 वर्ष की उम्र में 1967 में वे पहली बार विधायक यहीं की सीट (जसवंतनगर) से बने थे। उनका मुक़ाबला इस बार भाजपा के प्रेम सिंह शाक्य से होना है।

रोम पोप का, मधेपुरा गोप का

बिहार की मधेपुरा सीट पर भी इस बार रोचक लड़ाई है। दिग्गज नेता पप्पू यादव की किस्मत का भी कल फ़ैसला होना है। यहाँ से 4 बार सांसद रहे शरद यादव ने कभी इस सीट पर लालू यादव को हरा दिया था। पप्पू यादव इस सीट से शरद यादव को हरा चुके हैं। पिछले 40 वर्षों से इस सीट पर किसी न किसी यादव का ही कब्ज़ा रहा है। इस बार महागठबंधन में स्थान पाने में असफल रहे पप्पू यादव अपनी जन अधिकार पार्टी से मैदान में हैं। उनका मुक़ाबला राजद के सिंबल पर लड़ रहे पूर्व जदयू अध्यक्ष शरद यादव और जदयू के दिनेश चंद्र यादव से होगा। बिहार में मंत्री रह चुके दिनेश के लिए ख़ुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने चुनाव प्रचार किया है।

फ़िरोज़ाबाद में चाचा-भतीजा की लड़ाई

फ़िरोज़ाबाद सीट से इस बार शिवपाल सिंह यादव और उनके भतीजे अक्षय यादव में लड़ाई है। अक्षय रामगोपाल यादव के पुत्र हैं। भाजपा नेता डॉ चंद्रसेन जादौन के कारण त्रिकोणीय बने इस मुक़ाबले को लेकर ख़ुद मुलायम सिंह यादव ख़ामोश हैं। सपा के कई नेताओं को अपने पाले में कर के शिवपाल ने अपने भतीजे के लिए ऐसा चक्रव्यूह रच दिया है, जिससे वो बहार नहीं निकल पा रहे। हालाँकि, अक्षय को 2014 में इस सीट से जीत मिली थी लेकिन जो नेता उस वक़्त अक्षय के साथ थे, वो अब शिवपाल के लिए प्रचार कर रहे हैं। माया-अखिलेश-चौधरी अजीत की साझा रैली के बावजूद यहाँ शिवपाल डटे हुए हैं। चाचा-भतीजे की इस लड़ाई में भाजपा की जीत के लिए शाह और योगी ने यहाँ रैलियाँ भी कीं। यही वो सीट है जहाँ से कभी राज बब्बर ने डिंपल यादव को हरा दिया था।

शशि थरूर के ख़िलाफ़ इस बार मज़बूत उम्मीदवार

कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर के ख़िलाफ़ इस बार भाजपा ने केरल में पार्टी के अध्यक्ष रहे पुराने संघी कुमानम राजशेखरन को उतारा है। राजशेखरन ने मिजोरम के राज्यपाल पद से इस्तीफा देकर लोकसभा चुनाव में कूदने का फ़ैसला लिया है। स्थानीय ओपिनियन पोल्स में राजशेखरन को बढ़त मिलती दिख रही है। पिछले 2 चुनावों से यहाँ से जीत रहे थरूर को पहली बार कड़ी चुनौती मिल रही है। पिछले चुनाव में अंतिम राउंड में थरूर को जीत तो मिल गई थी लेकिन उनका मत प्रतिशत अच्छा-ख़ासा गिरा था। सबरीमाला के मुद्दे पर चुनाव लड़ रहे अनुभवी राजशेखरन कॉन्ग्रेस और लेफ्ट के विकल्प के रूप में उभरने की कोशिश कर रहे हैं। जहाँ 2009 में थरूर की जीत का अंतर क़रीब 1 लाख था, 2014 में यह घटकर सिर्फ़ 15,000 रह गया था।

उपर्युक्त उम्मीदवारों के अलावा पुरी से संबित पात्रा, अनंतनाग से महबूबा मुफ़्ती, पीलीभीत से वरुण गाँधी और पश्चिम बंगाल में पूर्व राष्ट्रपति के पुत्र अभिजीत मुख़र्जी के भाग्य का भी फ़ैसला होना है।

केन्द्रीय मंत्री महेश शर्मा से ₹2 करोड़ का ब्लैकमेल, मीडिया में काम कर चुकी लड़की गिरफ्तार

लोकसभा निर्वाचन के तीसरे चरण के ठीक पहले केन्द्रीय संस्कृति व पर्यटन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) महेश शर्मा को ब्लैकमेल कर उनसे पैसे ऐंठने की कोशिश का मामला सामने आया है। मंत्री की कुछ व्यक्तियों के साथ निजी बातचीत को सार्वजनिक करने की धमकी दे उनसे ₹2 करोड़ की राशि माँगी गई थी।

पुलिस को दी सूचना, बिछा जाल

समाचार पत्र दैनिक जागरण के पोर्टल के अनुसार महेश शर्मा ने लड़की के धमकी भरे पत्र की तहरीर गौतम बुद्धनगर के एसएसपी वैभव कृष्ण को दी। सोमवार को ₹45 लाख की किश्त लेने जब लड़की कैलाश अस्पताल पहुँची तो उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

चुनाव से पहले की बातचीत, मीडिया में काम कर चुकी है लड़की

अब तक प्राप्त जानकारी के अनुसार गिरफ्तार लड़की मीडिया में काम कर चुकी है। यही नहीं, साजिश में कुल 6-7 लोगों के शामिल होने की आशंका जताई जा रही है, जिनमें एक किसी निजी चैनल का मालिक भी हो सकता है। हिंदी दैनिक अमर उजाला ने यह भी दावा किया है कि यह गैंग पहले भी कई लोगों को अपना शिकार बना चुका है।

बातचीत किस बारे में थी, यह तो पता नहीं चला है पर मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बातचीत चुनावों के पहले की है।

पश्चिम उत्तर प्रदेश के कद्दावर नेता माने जाते हैं महेश शर्मा

महेश शर्मा को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा का कद्दावर चेहरा माना जाता है। मंत्री बनने के पहले भी वह नोएडा के विधायक रह चुके हैं। इस बार वह पुनः निर्वाचित होने के लिए उम्मीदवार हैं। 2009 में पहला चुनाव गौतमबुद्ध नगर लोकसभा का लड़ने वाले महेश शर्मा 2012 में पहली बार नोएडा से विधायक निर्वाचित हुए, और 2014 में सांसद व मंत्री बने।

FT संपादक ने किया आजम खान के बेहूदा बयान का समर्थन, दक्षिणपंथी पत्रकार ने लताड़ा

जहाँ आजम खान के जयाप्रदा पर दिए गए अश्लील बयान की पूरे देश में आलोचना हो रही है, वहीं एक विदेशी पत्रकार ने इसका समर्थन करने की कोशिश की है। फाइनेंशियल टाइम्स के संपादक लायोनेल बार्बर ने आजम खान के वक्तव्य को “कोई बुरा कथन नहीं” कहकर उसे हल्का करने की कोशिश की है।

भारत के निर्वाचन दौरे के दौरान किया लज्जाजनक बचाव

लायोनेल बार्बर अपने समाचारपत्र फाइनेंशियल टाइम्स की ओर से भारत के आम चुनावों को कवर कर रहे हैं। केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी के बीच अमेठी के चुनावी मुकाबले के बारे में लिखते हुए उन्होंने प्रदेश के अपने अनुभव साझा किए। इसी दौरान अपने एक दौरे पर, जिसमें वह खुद आजम खान के मेहमान थे, लिखते हुए उन्होंने जयाप्रदा पर आजम की टिप्पणी का उल्लेख किया और लिखा, “Not a bad line, though Khan was temporarily banned for it।(अनुवाद: कोई बुरा कथन नहीं है, हालाँकि इसके लिए खान पर अस्थाई प्रतिबंध लगा दिया गया।”)

सोशल मीडिया पर कड़ी प्रतिक्रिया

बार्बर के इस कथन को सोशल मीडिया पर दक्षिणपंथी और राष्ट्रवादी धड़ों ने आड़े हाथों लिया। नवम कैपिटल के संस्थापक और कार्यकारी निदेशक राजीव मंत्री ने ट्विटर पर लिखा:

उन्हें रीट्वीट करते हुए प्रख्यात पत्रकार और स्तंभकार शेफ़ाली वैद्य ने बार्बर को आड़े हाथों लिया, और उनके दोहरे मापदंडों को उजागर करते हुए उनसे पूछा कि अगर जयाप्रदा पर आजम खान की बातें बुरी नहीं हैं तो ब्रिटेन की प्रधानमंत्री थेरेसा मे की आलोचना करने वाला नारीद्वेषी कैसे हो जाता है?

RaGa के सिर फिर चढ़ी ‘गर्मी’ कहा, ‘कमलछाप चौकीदार…’ – लोगों ने कमजोरी-कबूतर शब्द फेंक कर मारा

चुनावी दौर के बीच सियासी घमासान की रफ़्तार ज़ोरों पर है। आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने अपने ट्विटर हैंडल से पीएम मोदी के ख़िलाफ़ फिर से निशाना साधा है। अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा कि 23 मई को जनता की अदालत में फैसला होकर रहेगा कि कमलछाप चौकीदार ही चोर है। साथ ही चौकीदार को सज़ा मिलेगी जैसी बात भी लिखी।

‘चौकीदार चोर है’ की टिप्पणी के लिए 10 अप्रैल को भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी ने राहुल गाँधी के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की थी। इस याचिका पर कार्रवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गाँधी को नोटिस जारी कर 22 अप्रैल तक जवाब देने को कहा था।

सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के जवाब में राहुल गाँधी ने आज जो हलफ़नामा दाखिल किया उसमें उन्होंने अपनी टिप्पणी के लिए चुनावी जोश यानी चुनावी गर्मी को इसका कारण बताया। राहुल ने अपने हलफ़नामे में यह भी स्पष्ट किया वो भविष्य में कोर्ट का हवाला देकर ऐसा कुछ नहीं कहेंगे जो कोर्ट ने न कहा हो।

कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी का यह चेहरा समझ से परे है, वो स्वांग रचने में माहिर हैं। एक तरफ तो कोर्ट में वो अपनी ग़लती के लिए हाथ जोड़कर माफ़ी माँगने का स्वांग रचते दिखते हैं, तो दूसरे ही पल कोर्ट से बाहर आते ही फिर से अपना वही हमलावर रुख़ अख़्तियार करते हैं। अपने माफ़ीनामे के बाद भी आदतन पीएम मोदी को आड़े हाथों लेना उनकी कुंठित मानसिकता और हताशा को दर्शाता है।

जनता को बरगलाने के लिए राहुल गाँधी जिन ज़ुबानी अल्फ़ाज़ों का इस्तेमाल करते हैं वो सब धरे के धरे ही रह जाते हैं, जब सोशल मीडिया पर यूज़र्स उन्हें आईना दिखाते हैं।

एक यूज़र ने तो यह तक लिख दिया कि राहुल जी, अब आपके पास बोलने को बचा क्या है?

एक अन्य यूज़र ने अपने ट्वीट में लिखा कि कमलछाप का तो पता नहीं लेकिन 281 करोड़ रुपए वाला कमलनाथ जरूर चोर है, और जिसको 20 करोड़ रुपए पहुँचे वो भी !!!

राहुल गाँधी अगर चाहें भी तो भी वो पीएम मोदी को बेवजह घेरने से बाज नहीं आएँगे। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि उनके पास कोई दूसरा चारा या बहाना ही नहीं है जिसके दम पर वो अपनी राजनीतिक रोटियाँ सेंक सकें। अब वो इसे अगर चुनावी गर्मी का नाम देना चाहते हैं तो यह उनका भ्रम है, जिसमें वो बने रहना चाहते हैं।