Saturday, October 24, 2020
442 कुल लेख

अनुपम कुमार सिंह

चम्पारण से. हमेशा राइट. भारतीय इतिहास, राजनीति और संस्कृति की समझ. बीआईटी मेसरा से कंप्यूटर साइंस में स्नातक.

IIT का वो इंजीनियर, जो चाहता था सड़कें चकाचक बने, सड़क पर मारा गया: भ्रष्टाचार को लेकर PM को लिखा था पत्र

इंजीनियर सत्येंद्र दुबे की क्या गलती थी, जो उनकी हत्या हुई? उन्होंने भ्रष्टाचार और ठेकेदारी में हो रही गड़बड़ियों को लेकर शिकायत भर की थी।

₹10 लाख नगद, ₹15 लाख की FD..गाँव में जमीन व पक्का घर: मृतक पुजारी के परिवार की कुछ यूँ मदद कर रहे कपिल मिश्रा

BJP नेता कपिल मिश्रा ने राजस्थान के दिवंगत पुजारी बाबूलाल वैष्णव के पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए एक कैम्पेन शुरू किया। अब तक जुटे 30 लाख रुपए।

जब पैदा होते ही अपराधी घोषित हो जाते थे बच्चे… अंग्रेजों का वो कानून, जिसने 160 जनजातियों को हाशिए पर धकेला

अंग्रेजों के 'आपराधिक जनजाति अधिनियम (Criminal Tribes Act, 1871)' के तहत भारत की कई जनजातियों को 'आदतन अपराधी' घोषित कर दिया गया।

मंदिर में छेड़खानी, मस्जिद मतलब शांति: सलीम-जावेद का रामगढ़, जहाँ ‘रहीम चाचा’ ही एकलौते बेदाग मानुष

1975 में आई रमेश सिप्पी की बॉलीवुड फिल्म 'शोले', जिसकी कहानी सलीम-जावेद ने लिखी थी। यहाँ हम इसी फिल्म का पोस्टमॉर्टम करेंगे।

जब प्रतापपुर में गिरी थीं 13 लाशें: लालू के लाडले शहाबुद्दीन के घर छापेमारी की कीमत पुलिस को ही चुकानी पड़ी थी

बिहार सरकार ने ने इसे 'कोल्ड ब्लडेड मर्डर' करार दिया और एनकाउंटर को फेक बताया। मंत्री ने ने पुलिस को ही क्रूर बता दिया और दावा किया कि पुलिसकर्मियों ने अपने वरिष्ठों के आदेश की अवहेलना की।

सिंहासन खाली हुई लेकिन जनता नहीं, सत्तालोलुप नेता आए: जेपी के वो चेले, जिन्होंने उड़ा दी गुरु की ही ‘धज्जियाँ’

यूपी-बिहार ही नहीं, पूरे देश में कई ऐसे बड़े नेता हैं, जो आज राजनीति के इस मुकाम पर इसीलिए हैं क्योंकि उन पर कभी जयप्रकाश नारायण का हाथ था। लेकिन, इन नेताओं की प्राथमिकता में जनता कभी रही ही नहीं।

2 बेटों को तेजाब से नहला कर मार डाला, गवाह बनने पर तीसरे की भी कर दी हत्या: आज भी शहाबुद्दीन के भय के...

आज हम चंदा बाबू की बात करने जा रहे हैं, जिनके दो बेटों को तेज़ाब से नहला कर मार डाला गया। तीसरा गवाह था, लेकिन उसकी भी हत्या हो गई। बुजुर्ग दम्पति आज भी शहाबुद्दीन के खौफ के बीच जीते हैं।

जब सीमा पार किए बिना ही भारतीय वायुसेना ने दुश्मन के छक्के छुड़ा दिए: कहानी अनूठे ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ की

कारगिल की विषम परिस्थितियाँ, सीमित संसाधनों के प्रयोग का दबाव, सीमा पार न करने का आदेश और छोटे लक्ष्यों को भेदने की चुनौती - भारतीय वायुसेना के शौर्य की एक अनूठी गाथा।

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