ऐसे मामलों में न केवल आरोपी की प्रतिष्ठा और गरिमा को बहाल करना मुश्किल हो जाता है बल्कि अपमान, दुख, संकट और आर्थिक नुकसान की भरपाई करना भी काफी मुश्किल हो सकता है, लेकिन बरी किए जाने से उसे कुछ सांत्वना मिल सकती है और वह नुकसान के लिए मामला दर्ज करा सकता है।
जयपुर में सैम पित्रोदा के बुद्धिजीवी संवाद कार्यक्रम से पहले तैयारियाँ की जा रही थीं। उसी दौरान वहाँ एक मजदूर के पीएम नरेन्द्र मोदी के नाम की टी-शर्ट पहनकर कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी का बैनर लगाते देख, वहाँ के नेताओं के लिए असमंजस की स्थिति बन गई।
भले ही यह बात रघुराम राजन ने एक मज़ाकिया लहज़े में कही, लेकिन इस बात से यह तो स्पष्ट हो गया कि वो फ़िलहाल तो राजनीति में अपने क़दम नहीं रखने वाले हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वो जहाँ हैं वहीं ख़ुश हैं, लेकिन भविष्य में अगर उन्हें कोई योग्य ऑफ़र मिला तो वो उस पर विचार ज़रूर करेंगे।
साध्वी प्रज्ञा के अलावा सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी, शशि थरूर, कम्युनिस्टों के चहेते कन्हैया कुमार और पप्पू यादव भी जमानत पर रिहा होकर भी चुनाव लड़ रहे हैं।
2019 के लोकसभा चुनावों के रुझानों से पता चलता है कि एनडीए सरकार सत्ता में वापस आ रही है, कॉन्ग्रेस समर्थित मीडिया पारिस्थितिकी तंत्र नरेंद्र मोदी के साथ तालमेल बिठाने का मौका खोजने की कोशिश में अपने पुराने आकाओं गिरोहों को छोड़ने का यह एक संकेत है। या इस बात का डर कि अब और कॉन्ग्रेसी या देश विरोधी एजेंडा चलाना संभव नहीं।