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ईंट-पत्थर, लाठी-डंडे, ‘अल्लाह-हू-अकबर’ के नारे… नेपाल में रामनवमी की शोभा यात्रा पर मुस्लिम भीड़ का हमला, मंदिर में घुस कर बच्चे के सिर पर मारी तलवार

अयोध्या में भगवान राम के मंदिर में मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा के बाद बुधवार (17 अप्रैल, 2024) को दुनिया भर के हिन्दुओं ने रामनवमी का पर्व विशेष हर्षोल्लास से मनाया। इस अवसर पर भारत के अलग-अलग हिस्सों में शोभा यात्राओं पर हमले की खबरें आईं जिसमें पश्चिम बंगाल प्रमुख रहा। शोभा यात्राओं पर उन्मादी और नफरती हमलों की घटनाएँ भारत की सीमा के बाहर भी हुईं। नेपाल के मोरांग जिले में भी रामनवमी की शोभायात्रा पर हमले हुए।

इस दौरान कई हिन्दू घायल हो गए। घायलों में एक नाबालिग बच्चा भी है जिसके सिर पर तलवार मारी गई है। ऑपइंडिया ने घटना के चश्मदीदों से इस पूरे मामले की जानकारी ली।

यह घटना नेपाल के मोरांग जिले के विराट नगर इलाके में हुई। ऑपइंडिया ने हिंसा के चश्मदीद रहे विराटनगर के हिन्दू संगठन पदाधिकारियों से पूरे मामले की जानकारी हासिल की। हमें बताया गया कि रामनवमी के अवसर पर हिन्दू समाज के सैकड़ों युवा शोभायात्रा निकाल रहे थे। शोभायात्रा का आयोजन राजन और रितेश नाम के 2 हिन्दुओं ने किया था। दोपहर के समय यह यात्रा विराटनगर के वार्ड नंबर 17 से गुजरने वाली थी। यह वार्ड मुस्लिम बाहुल्य माना जाता है। इस वार्ड में रहने वाला मजहर आलम आए दिन हिन्दुओं के खिलाफ कोई न कोई विवाद करने की वजह से चर्चा में रहता है।

मुस्लिम बाहुल्य वार्ड से हिंसा की शुरुआत

हमें बताया गया कि वार्ड नंबर 17 के पास मजहर आलम दर्जनों मुस्लिमों को ले कर खड़ा था। उसने हिन्दू संगठनों की रैली को रोक दिया और आगे न ले जाने की चेतावनी दी। इस बीच मौके पर पुलिस बल पहुँचा। आरोप है कि पुलिस ने भी मजहर आलम का ही साथ दिया। जब हिन्दू संगठन के सदस्यों ने खुद को रोक रहे मुस्लिमों की ज़िद का विरोध किया तो उन पर पत्थरबाज़ी शुरू हो गई। आरोप है कि मुस्लिमों ने पहले से हमले की तैयारी कर रखी थी।

घटनास्थल पर न सिर्फ ईंटें जमा कर के रखी गई थीं बल्कि भीड़ के हाथों में लाठी-डंडे और तलवारें भी लहरा रहीं थीं। ‘हिन्दू सम्राट सेना’ के एक पदाधिकारी ने ऑपइंडिया को बताया को हिंसक भीड़ हमले के दौरान ‘अल्लाह-हू-अकबर’ और ‘नारा ए तकबीर’ चिल्ला रही थी।

अचानक हुए इस हमले से अफरातफरी का माहौल हो गया। इसी अफरातफरी के बीच शोभा यात्रा में शामिल कुछ वाहनों में मुस्लिम भीड़ ने तोड़फोड़ की। पुलिस के आगे ही पत्थरबाजी हुई। पुलिस को बैकफुट पर देख कर दोनों तरफ से आमना-सामना होने जैसे हालात बन गए। इसी बीच कुछ कट्टरपंथियों की भीड़ पास के ही एक मंदिर में घुस गई। मंदिर में एक बच्चा डर कर बैठा हुआ था जिसके सिर पर तलवार मारी गई। तलवार के वार से बच्चे की खोपड़ी में गहरा घाव हो गया।ऑपइंडिया के पास अस्पताल में भर्ती पीड़ित बच्चे का वीडियो है। वीडियो में बच्चे की खोपड़ी खुल गई है।

हिन्दू पर ही हमला, हिन्दू ही गिरफ्तार

खून को रोकने की बहुत कोशिश की जा रही है। इस बीच हिंसक भीड़ कुछ देर हमले के बाद वार्ड नंबर 17 की तरफ भाग निकली। घायल श्रद्धालुओं को अस्पताल में भर्ती करवाया गया है जहाँ उनका इलाज चल रहा है। हिन्दू संगठन के सदस्यों ने हमें बताया कि प्रशासन ने परमिशन न होने की बात कह कर शोभायात्रा के ही आयोजक रितेश और राजन को गिरफ्तार कर लिया था। राजन और रितेश को जेल भी भेजने की तैयारी हो चुकी थी।

हालाँकि हिन्दू समाज ने एकजुट हो कर प्रदर्शन किया तो दोनों को रिहा कर दिया गया। स्थानीय हिन्दुओं ने हमसे बात करते हुए यह भी बताया है कि अभी तक मुस्लिम पक्ष के किसी भी आरोपित को गिरफ्तार नहीं किया गया है। दावा है कि मुख्य आरोपित मजहर आलम के साथ इस हमले में असलम सैफी और शाजिद हुसैन भी शामिल थे।

2 देशों की नागरिकता का आरोप है मजहर पर

ऑपइंडिया द्वारा जुटाई गई जानकारी के मुताबिक, हिन्दुओं पर हुए हमले के मुख्य आरोपित मजहर आलम का नेपाल में बड़ा व्यापार है। उस पर नेपाल में 2 देशों की नागरिकता अवैध तौर पर लेने का केस भी चल चुका है। ऑपइंडिया को मजहर आलम के 2 पहचान पत्र मिले। पहला नेपाल का है तो दूसरे भारत का पैन कार्ड। हालाँकि, नेपाल के हिन्दू संगठनों को इस बात की जानकारी नहीं है कि अवैध तौर पर दो देशों की नागरिकता लेने वाले केस में मज़हर का क्या हुआ।

मजहर आलम पर है भारत और नेपाल दोनों की नागरिकता के आरोप

ख़ास बात ये है कि हिन्दुओं पर हमले का आरोपित मजहर आलम अब नेपाली प्रशासन के साथ मिल कर दोनों पक्षों में शांति वार्ता करवा रहा है।

ताजा जानकारी के मुताबिक प्रभावित इलाके में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। घायल बच्चे का अस्पताल में इलाज चल रहा है जहाँ उसकी स्थिति गंभीर बनी हुई है। हालात तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में हैं।

‘भारत बदल रहा है, आगे बढ़ रहा है, नई चुनौतियों के लिए तैयार’: मोदी सरकार के लाए कानूनों पर खुश हुए CJI चंद्रचूड़, कहा – पीड़ितों की होगी सुरक्षा, तकनीक का इस्तेमाल

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश DY चंद्रचूड़ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार द्वारा लाए जा रहे नए कानूनों की तारीफ़ की है। उन्होंने कहा कि नए आपराधिक कानून देश में तभी सकारात्मक बदलाव लाएँगे, जब बुनियादी ढाँचे के अलावा फॉरेंसिक विशेषज्ञों और जाँच अधिकारियों को क्षमतावान बनाने के लिए निवेश किया जाएगा। उन्होंने भारत की आपराधिक न्याय व्यवस्था में इंफ़्रास्ट्रक्चर के त्वरित निर्माण पर बल देते हुए कहा कि ऐसा होता है तो नए कानूनों से हुए बदलावों का देश को फायदा मिलेगा।

उन्होंने फॉरेंसिक विशेषज्ञों और जाँच अधिकारियों के अलावा न्यायिक व्यवस्था में भी प्रशिक्षण पर जोर दिया। उन्होंने ये स्वीकार किया कि नए आपराधिक कानून अभी के समय के हिसाब से हैं। उन्होंने बताया कि कैसे ‘भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS)’ के तहत 3 साल के भीतर सुनवाई पूरी करने और फैसला सुरक्षित रखने के 45 मिनट के भीतर सुनाने का प्रावधान है। हालाँकि, उन्होंने आशंका भी जताई कि अदालत के बुनियादी ढाँचे के निर्माण के साथ-साथ अभियोजन पक्ष को तकनीक और भौतिक संसाधन भी मुहैया कराने होंगे।

केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्रालय द्वारा ‘आपराधिक न्याय प्रणाली के प्रशासन में भारत का प्रगति पथ’ विषय पर आयोजित कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि हमारे समाज के लिए ये नए आपराधिक कानून एक ऐतिहासिक मोड़ हैं। बता दें कि भारत सरकार ‘भारतीय न्याय संहिता (BNS)’, BNSS और ‘भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA)’ लेकर आई है। IPC और CrPc के अलावा इंडियन एविडेंस एक्ट अब बीते जमाने की बात होगा। उन्होंने कहा कि भारत अपनी न्याय प्रणाली में महत्वपूर्ण बदलाव के लिए तैयार है।

उन्होंने कहा कि इन तीनों कानूनों का संसद के माध्यम से अस्तित्व में आना इसका स्पष्ट संकेत है कि भारत बदल रहा है, हमारा देश आगे बढ़ रहा है और हमें नई चुनौतियों और समाज के लिए आगे आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए नए उपकरणों की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि पीड़ितों के हित का बचाव करने के लिए नए प्रावधान लाए गए हैं, BNSS के तहत अपराध स्थलों पर तलाशी एवं जब्ती की प्रक्रिया की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य है, वो भी फॉरेंसिक विशेषज्ञों की उपस्थिति में।

उन्होंने कहा कि आयकर छापों के मामलों में अक्सर कोर्ट में कुछ का कुछ बताया जाता था, अब ये खत्म होगा। उन्होंने बताया कि BNS की धारा-532 के तहत सारी प्रक्रिया इलेक्ट्रॉनिक रूप से पूरी करने को कहा गया है। हालाँकि, उन्होंने इस दौरान नागरिकों की प्राइवेसी पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि ये कानून लागू होने के बाद इसकी खामियाँ पता चलेंगी जिन पर काम किया जाएगा। CJI डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि हमारे कानून और उसे लागू करने की प्रक्रियाएँ, समय के साथ दोनों आगे बढ़ रहे हैं।

संगरूर जेल में भिड़े कैदियों के 2 गुट: 10 ने धारदार हथियारों के साथ 4 कैदियों पर बोला धावा, 2 की चली गई जान, तीन की हालत गंभीर

पंजाब की संगरूर जेल में कैदियों के दो गुटों खूनी झड़प हो गई, जिसमें दो कैदियों की मौत हो गई। ये घटना शुक्रवार (19 अप्रैल 2024) की रात करीब 8.30 बजे की है। उस समय सभी कैदी सोने के लिए अपनी बैरकों में जा रहे थे, तभी करीब 10 की संख्या में कैदियों के गुट ने 4 कैदियों के गुट पर हमला बोल दिया। उनके हाथों में धारदार चीजें थी। इस हमले के दौरान चीख-पुकार सुनकर जेल प्रशासन ने उन्हें बचाने की कोशिश की, और घायलों को लेकर पटियाला के अस्पताल ले गए, जहाँ 2 कैदियों को मृत घोषित कर दिया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, संगरूर जेल में कैदियों के कई गुट हैं। इन्हीं में से दो गुट आपस में भिड़ गए। हमलावर गैंग का मुखिया सिमरनजीत जुझार है। वो अमृतसर का रहने वाला है। उस पर हत्या सहित 18 मुकदमे दर्ज हैं। जुझार करीब 6 साल से जेल में बंद है। उसके गुट ने मोहम्मद शाहबाज और उसके गुट के कैदियों पर हमला कर दिया। इस हमले में हर्ष और धर्मेंद्र नाम के कैदियों की मौत हो गई, तो गगनदीप सिंह, मोहम्मद हारिश और सिमरन घायल हो गए। घायल कैदियों को पटियाला के राजेंद्र मेडिकल हॉस्पिटल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है।

डॉ. कर्मदीप सिंह काहल ने बताया कि शाम साढ़े सात बजे जेल से चार लोगों को अस्पताल लाया गया था, जिनमें दो की पहले ही मौत हो चुकी थी। उन्होंने बताया कि सभी के शरीर पर तेजधार व नुकीली चीज से मारे जाने के कई निशान थे। झगड़ा का कारण पता नहीं चल पाया है। पुलिस विभाग के सूत्रों के मुताबिक जेल में ये झड़प किसी गैंग के आदेश पर हर्ष और धर्मेंद्र को जान से मारने के मकसद से ही हुई।

बताया जा रहा है कि जेल में करीब रात 8.30 बजे सिमरनजीत सिंह जुझार ने 8-10 कैदियों के साथ हमला कर दिया। जिन दो कैदियों की मौत हुई है, उनकी गर्दन, मुँह, छाती और शरीर के अन्य हिस्सों में मेडिकल जाँच के दौरान घाव के निशान पाए गए हैं। इस हिंसक झड़प के बाद संगरूर जेल प्रबंधन ने दोनों गुटों के कैदियों को अलग-अलग बैरकों डाल दिया।

गिफ्ट पैक से चॉकलेट निकालकर खाते ही होने लगी खून की उल्टी, 1.5 साल की बच्ची की मौत: पटियाला में ही केक खाने से 10 साल की बच्ची की हो गई थी मौत

पंजाब के लुधियाना में चॉकलेट खाने से डेढ़ साल की बच्ची को खून की उल्टियाँ हुईं और आखिरकार उसकी मौत हो गई। इसकी जानकारी मिलते ही अधिकारी उस दुकान पर पहुँचे, जहाँ से चॉकलेट खरीदी गई थी। जाँच में पता चला कि बच्ची को दी गई चॉकलेट एक्सपायरी डेट की थी। इसके पहले पटियाला में केक खाने से 10 साल की एक बच्ची की मौत हो गई थी।

बच्ची का नाम राबिया था। उसकी दादी अंजू देवी ने बताया कि राबिया और उसकी 22 साल की बुआ ने चॉकलेट, कोल्ड ड्रिंक और कुरकुरे खाए थे। पहले बुआ की तबीयत खराब हुई, लेकिन उसने दवाई खाई और वह ठीक हो गई। इस बीच राविया का पेट खराब हो गया और नाक से खून बहने लगा। उसे खून की उल्टियाँ होने लगी। आखिरकार लुधियाना के सीएमसी अस्पताल में उसकी मौत हो गई।

बच्ची के रिश्तेदार विक्की का कहना है कि राबिया लुधियाना से कुछ दिन पहले पटियाला में उनके घर आई थी। जब बच्ची वापस लुधियाना जाने लगी तो उन्होंने एक दुकान से गिफ्ट पैक लिया, जिसमें कुरकुरे, जूस और चॉकलेट थे। लुधियाना पहुँचकर बच्ची ने चॉकलेट खा लिया। इसके बाद उसे खून की उल्टियाँ होने लगीं। बच्ची की हालत बिगड़ती गई तो परिजन उसे डॉक्टर के पास ले गए।

इस घटना के बारे में जब विक्की को पता चला तो उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से इसकी शिकायत की। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की टीम के साथ वे उस दुकान पर गए, जहाँ से बच्ची के लिए गिफ्ट की पैक खरीदी गई थी। जब अधिकारियों ने जाँच-पड़ताल की तो पता चला कि जो चॉकलेट दी गई थी, वह एक्सपायरी डेट की थी। विभाग ने एक्सपायरी डेट वाले अन्य सामान को भी जब्त कर लिया।

स्वास्थ्य विभाग ने पुलिस को भी बुला लिया। पुलिस ने परिवार के लोगों के बयान दर्ज करके मामले की जाँच शुरू कर दी है। वहीं सेहत विभाग ने एक्सपायरी डेट का सामान बेचने की जाँच शुरू कर दी है। वहीं, इस घटना के बच्ची के परिजनों में गुस्सा है। उन्होंने उस डिपार्टमेंटल स्टोर को सील करने की माँग की है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस दुकान में 90 प्रतिशत माल पुराना होता है।

बता दें कि इसी साल मार्च के अंतिम सप्ताह में पटियाला में ही एक दुकान से खरीदकर लाए गए केक को खाने से 10 साल की लड़की मानवी की मौत हो गई थी। केक खाने से पूरे परिवार की तबीयत ख़राब हो गई थी। यह केक उसके जन्मदिन 24 मार्च पर काटा गया था। अदालत बाजार के ‘कान्हा केक’ दुकान से मँगाकर केक शाम के 7 बजे काटा गया था।

केक खाने के बाद मानवी को उल्टियाँ होने लगीं। पूरे परिवार की तबीयत बिगड़ गई। मानवी रात को उल्टी करके सो गई। तड़के सुबह 4 बजे उसका शरीर ठंडा पड़ गया था। आनन-फानन में परिजन उसे अस्पताल लेकर भागे, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। शिकायत मिलने के बाद पुलिस इस पूरे मामले की जाँच कर रही है।

परिवार ने केक ऑनलाइन ऑर्डर करके मँगवाया था। इसके लिए फ़ूड एग्रीगेटर एप Zomato का इस्तेमाल किया गया था। परिवार का कहना था कि बेकरी शॉप वाले ने गड़बड़ी की है और उसके प्रोडक्ट्स की जाँच कर के कार्रवाई की जाए। इस मामले में पुलिस ने IPC की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज करके कार्रवाई शुरू कर दी थी।

हनुमान मंदिर को बना दिया कूड़ेदान, साफ़-सफाई कर पीड़ा दिखाई तो पत्रकार पर ही FIR: हैदराबाद के अक्सा मस्जिद के पास स्थित है धर्मस्थल, माधवी लता बोलीं – ज़रूरत पड़ी तो…

तेलंगाना के हैदराबाद में एक पत्रकार पर पुलिस ने FIR दर्ज की है। ‘जर्नलिस्ट सिद्धू’ नाम से सोशल मीडिया पर सक्रिय पत्रकार श्रीधरन सिद्धू ने बताया कि एक मंदिर की दुर्दशा दिखाने के कारण उन पर मामला दर्ज कर लिया गया है। ये पूरा मामला पुराने हैदराबाद शहर के काला पत्थर स्थित एक हनुमान मंदिर का है, जो 70 साल पुराना बताया जा रहा है। सिद्धू का कहना है कि हिन्दुओं के लगातार पलायन के कारण वो मंदिर वीरान पड़ा हुआ था, साथ ही वहाँ आसपास मुस्लिमों की जनसंख्या अधिक है।

सिद्धू ने ऑपइंडिया से बात करते हुए बताया कि हनुमान जी की उक्त प्रतिमा शंख-चक्र के साथ वहाँ विद्यमान है। मूर्ति एक पत्थर पर उकेरी गई है। बकौल सिद्धू, वहाँ से हिन्दुओं के जाने के बाद वहाँ आसपास कई मस्जिदें बन गईं, वहीं हनुमान मंदिर में कोई पूजा करने नहीं जाता था। उन्होंने बताया कि वहाँ के स्थानीय लोगों ने मंदिर को कूड़ेदान बना दिया था, इससे हनुमान जी की प्रतिमा नीचे चली गई थी और उसके ऊपर 4 फ़ीट कूड़ा जमा हो गया था। प्रतिमा दब गई थी।

हालाँकि, हिन्दू कार्यकर्ताओं ने मिल कर इस मंदिर की साफ़-सफाई का बीड़ा उठाया। गुड़ी-बड़ी नाम की एक संस्था ने इसकी साफ़-सफाई की। बता दें कि तेलुगु में ‘गुड़ी’ का अर्थ होता है मंदिर और ‘बड़ी’ अर्थात विद्यालय। सिद्धू ने बताया कि साफ़-सफाई होने के बाद फिर से वहाँ कूड़ा डालना शुरू कर दिया गया। रामनवमी के दिन बुधवार (17 अप्रैल, 2024) को पत्रकार सिद्धू अपनी टीम के साथ वहाँ पहुँचे, फिर से कूड़ा-कचरा हटाया। उनके कैमरामैन ने वीडियो भी बनाया।

सिद्धू लंबे समय तक ‘महा न्यूज़’ नामक चैनल के साथ जुड़े रहे हैं, अब वो खुद के नाम से ही सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं। बकौल सिद्धू, लोगों ने कहा कि इस मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए पहल होनी चाहिए। यही बात वो अपने वीडियो में बता रहे थे। इसके बाद काला पत्थर पुलिस थाने से उन्हें फोन कॉल कर के तलब किया गया। FIR दायर की जा चुकी हैं। बता दें कि सिद्धू तेलंगाना के भैंसा में हुए दंगों के दौरान भी सक्रियता से सच्चाई को सामने लाने के लिए काम कर चुके हैं।

सिद्धू ने कहा कि काला पत्थर क्षेत्र AIMIM के प्रभाव वाला है और पुलिसकर्मी भी उनकी बात मानते होंगे, लेकिन फ़िलहाल असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी का कोई हाथ इस प्रकरण में सामने नहीं आया है। सिद्धू ने हैदराबाद लोकसभा क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार माधवी लता से बात की है। माधवी लता ने उन्हें आश्वासन दिया है कि जब भी आवश्यक होता वो उपस्थित रहेंगी और वो इस मामले में उनके साथ हैं। गोशमहल से भाजपा विधायक T राजा सिंह ने भी साथ देने का आश्वासन दिया है।

पत्रकार सिद्धू ने बताया कि वहाँ रमेश नाम के स्थानीय लड़के की उन्होंने बाइट ली थी, उस पर भी केस कर दिया गया है। रमेश ने ही मंदिर की इस हालत को लेकर सिद्धू को बताया था। यही कारण है कि मंदिर की साफ़-सफाई करने वाले भी मीडिया से बात करने के लिए तैयार नहीं हो रहे, क्योंकि डर का माहौल है। तेलंगाना में फ़िलहाल कॉन्ग्रेस की सरकार है और रेवंत रेड्डी मुख्यमंत्री हैं। हालाँकि, हैदराबाद में AIMIM का ही समांनातर प्रशासन चलता रहा है।

ऑपइंडिया के पास इस मामले की FIR कॉपी मौजूद है, जो सेक्शन इंचार्ज A सत्यनारायण की शिकायत पर दर्ज की गई है। बताया गया है कि सिद्धू और रमेश बिलाल नगर स्थित अक्सा मस्जिद के पास स्थित हनुमान मंदिर की शूटिंग कर रहे थे। FIR में कहा गया है कि इस तेलुगु वीडियो में मुस्लिम समुदाय पर जानबूझकर मंदिर में कूड़ा-कचरा फेंकने और एक साजिश के तहत इस पर कब्ज़ा करने का आरोप लगाया गया है। FIR के अनुसार, हिन्दू-मुस्लिम सद्भाव भंग करने और सांप्रदायिक तनाव भड़काने के लिए ये वीडियो बनाया गया है।

उक्त पुलिस स्टेशन का इंचार्ज SI शेख सलीम है। ये FIR रामनवमी के 1 दिन बाद दर्ज की गई। ऑपइंडिया ने जब सत्यनारायण से इस बाबत बात की तो उन्होंने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वो फ़िलहाल ड्यूटी पर नहीं हैं, इंस्पेक्टर से बात कीजिए। वो बात का जवाब नहीं दे पाए कि क्या किसी मंदिर की पीड़ा दिखाना अपराध है? हैदराबाद में इस लोकसभा चुनाव में भाजपा आक्रामकता से हिन्दुओं के मुद्दे उठा रही है। जब हमने SI सलीम शेख से बात की तो उन्होंने कहा कि उनके सीनियर इस मामले को देख रहे हैं, वही कुछ बता पाएँगे।

पत्रकार सिद्धू के बारे में बता दें कि पूर्व की KCR सरकार ने भी उन्हें खासा प्रताड़ित किया था। आदिलाबाद के भैंसा में दंगों के बाद सच्चाई दिखाने पर उन पर FIR दर्ज कर लिया गया था। जनवरी 2020 में उन्होंने 27 मिनट की वीडियो रिपोर्ट के जरिए दंगा पीड़ितों से बात की थी। सिद्धू ने सरकार से पीड़ितों की मदद की अपील की थी। तब ASI S सुदर्शन की शिकायत पर मामला दर्ज हुआ था। उसके बाद उन्हें तेलंगाना छोड़ना पड़ा था। अब सरकार BRS नहीं बल्कि कॉन्ग्रेस की है, लेकिन हालात वही हैं।

‘परशोत्तम रुपाला चुनाव जीत भी गया, तब भी जिंदा नहीं बचेगा’: राजपूतों के प्रदर्शन के बाद महिला नेता ने दी जान से मारने की धमकी

केंद्रीय मंत्री एवं बीजेपी नेता परशोत्तम रुपाला के एक बयान के बाद शुरु हुआ आंदोलन अब जान से मारने की धमकी तक पहुँच चुका है। उनके खिलाफ आंदोलन करने वालों में से एक महिला नेता ने उन्हें लेकर विवादित बयान तो दिया ही, साथ ही जान से मारने की धमकी भी दे दी। इन महिलाओं में से एक प्रजना बा ने कहा कि ‘अगर वो चुनाव जीत भी गए, तो भी जिंदा नहीं बचेगा। एक यूट्यूब चैनल से बातचीत में उन्होंने रुपाला को लेकर ये बातें कही।

यूट्यूब चैनल ‘जमावत’ से प्रजना की बातचीत का वीडियो शनिवार (20 अप्रैल 2024) को चैनल के फेसबुक पेज पर अपलोड किया गया। इस बातचीत में वह पत्रकार के सवालों का जवाब देते हुए कहती हैं कि हमारे पास बहुत से लोग हैं, जो एक इशारे पर रुपाला को उड़ा देंगे।

उन्होंने कहा, “अगर रुपाला जिंदा रहना चाहते हैं, तो टिकट वापस लेने के बारे में विचार करें।” उन्हें राजनीति में रहने और न रहने पर भी विचार करना चाहिए. उन्होंने आगे कहा, “अगर रुपाला के लोगों ने उसे बचा भी लिया, तो भी वो ज्यादा दिनों तक जिंदा नहीं रह पाएगा।” इस बात को वीडियो में 2.48 मिनट पर सुना जा सकता है।

प्रजना बा ने इस चैनल से 19 अप्रैल 2024 को बातचीत की, जब वो राजपूत संगठनों के कोर्डिनेशन कमेटी की बैठक से बीच में निकल आईं। राजपूत संगठनों के 19वें अल्टीमेटम के बाद राजपूत संगठनों ने एक और मीटिंग की और ये तय किया गया कि बीजेपी उम्मीदवारों का सभी सीटों पर विरोध किया जाएगा।

मीटिंग से बाहर निकले के बाद उन्होंने कहा, “मुझे ठीक नहीं लग रहा था, इसलिए बीच में निकल आई। अंदर बैठकर दिमाग नहीं खराब करना था, तो निकल आई। मैं फालतू जगहों पर अपनी उर्जा व्यर्थ नहीं करती। हम रुपाला को हटाने आए हैं, तो हम उसे हटाकर रहेंगे।”

आखिर में उन्होंने फिर से अपनी धमकी को दोहराया और कहा, ‘रुपाला चुनाव जीत भी जाएगा और राजनीति करता रहेगा फिर भी वो राजपूतों की नजरों में गिर जाएगा। अब रुपाला ज्यादा दिन जिंदा नहीं रहेगा।’

ये समाचार मूल रूप से गुजराती भाषा में लिखा गया है। मूल खबर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

ख़ारिज हुई 15 साल की लड़की से निकाह करने वाले मुस्लिम शख्स की बेल अर्जी, हाईकोर्ट ने पॉक्सो एक्ट को माना सही: इस्लामी कानून का हवाला देकर ठहरा रहा था जायज

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने नाबालिग लड़की से निकाह करने वाले एक मुस्लिम व्यक्ति की अग्रिम जमानत अर्जी ख़ारिज कर दी है। 15 साल की लड़की से निकाह करने वाले आरोपित ने इसे मुस्लिम पर्सनल लॉ के हिसाब से सही ठहराने की कोशिश की थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपित पर पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई जायज है क्योंकि उसने जून 2023 में 18 साल से कम उम्र की लड़की से निकाह किया है। यह फैसला मंगलवार (2 अप्रैल, 2024) को सुनाया गया है।

‘लाइव लॉ’ के मुताबिक, हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई जस्टिस हरप्रीत कौर की बेंच में हुई। आरोपित ने जून 2023 को 15 साल की एक लड़की से निकाह किया था। तब लड़की के पिता ने आरोपित पर FIR दर्ज करवाई थी। शिकायत में पीड़िता के पिता ने आरोपित पर अपनी बेटी को घर से बोलेरो वाहन में अपहरण कर के ले जाने का आरोप भी लगाया था। पुलिस ने यह FIR अपहरण और IPC की अन्य धाराओं के अलावा पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज किया था।

फरवरी 2024 में पुलिस ने पीड़िता को बरामद कर लिया था। तब पीड़िता का मजिस्ट्रेट के आगे 164 का बयान हुआ था। पीड़िता ने अपने माता-पिता के साथ घर जाने से इनकार कर दिया था। आखिरकार लड़की की उम्र देखते हुए उसे पंजाब सरकार के चिल्ड्रन होम में भेज दिया गया। पढ़ाई के कागजातों में लड़की की जन्मतिथि 2008 निकली। हालाँकि अपने बचाव में आरोपित ने पीड़िता का एक निजी डायगोनस्टिक सेंटर से मेडिकल परीक्षण भी करवाया था। इस रिपोर्ट के हवाले उसने पीड़िता के बालिग होने का भी दावा किया था।

तब से आरोपित फरार चल रहा है। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस दबिश दे रही है। इसी गिफ्तारी से बचने के लिए आरोपित ने पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दाखिल की। 2 अप्रैल को मामले की सुनवाई हुई। आरोपित ने अपना वकील मोहम्मद सलीम को किया था। सरकार की तरफ से एडवोकेट हिमानी अरोड़ा ने बहस की। लड़की के पिता ने भी बिक्रमजीत सिंह को अपना निजी वकील बना कर खड़ा किया और आरोपित की जमानत अर्जी का विरोध किया।

एडवोकेट मोहम्मद सलीम ने उस केस का जिक्र करना चाहा जिसमें कभी पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने ही मुस्लिम लड़की के वयस्क हो जाने पर उसे निकाह की छूट दी थी। साथ ही उन्होंने आरोपित की तरफ से 15 साल की लड़की की शादी मुस्लिम पर्सनल लॉ के मुताबिक जायज करार दिया। दोनों पक्षों की बहस सुन कर आखिरकार न्यायमूर्ति हरप्रीत कौर ने अपना फैसला सुनाया। उन्होंने आरोपित को अग्रिम जमानत जैसी राहत देने से साफ़ इंकार कर दिया।

अपने फैसले में अदालत ने साफ कहा कि लड़की की उम्र 15 साल होने की वजह से आरोपित पर पॉक्सो एक्ट की धारा के तहत हुई कार्रवाई जायज है। लड़की की उम्र के सबूत के तौर पर भी कोर्ट ने पीड़िता के पिता द्वारा पेश किए गए पढ़ाई के सर्टिफिकेट को सही माना है। आरोपित द्वारा प्राइवेट डायगोनस्टिक संस्थान द्वारा पेश किए गए मेडिकल रिपोर्ट को अदालत ने विचार करने योग्य नहीं माना।

‘शहजादे को वायनाड में भी दिख रहा संकट, मतदान बाद तलाशेंगे सुरक्षित सीट’: महाराष्ट्र में PM मोदी ने पूछा- CAA न होता तो हमारे सिख भाई-बहनों का क्या होता?

लोकसभा चुनाव 2024 के पहले चरण का मतदान खत्म हो चुका है। अगले चरण का मतदान 26 अप्रैल 2024 को है। इसको लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महाराष्ट्र के नाँदेड़ में शनिवार (20 अप्रैल 2024) को एक विशाल जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने CAA की जरूरत बताई और कॉन्ग्रेस एवं राहुल गाँधी पर जमकर हमला बोला।

कॉन्ग्रेस पर हमला पर बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा, “वोटर भी देख रहे हैं कि कैसे INDI अलायंस के लोग अपने स्वार्थ में, अपने भ्रष्टाचार को बचाने के लिए एक साथ आए हैं।” उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस जो भी दावे करे, लेकिन सच्चाई यही है कि चुनाव की घोषणा से पहले से ही उसके नेता हार मान चुके हैं। इसीलिए लोकसभा में जीत कर जो कुछ नेता आते थे, वो इस बार राज्यसभा के रास्ते जाकर बैठ गए।

प्रधानमंत्री ने कहा, “INDI अलायंस वालों को इस चुनाव में लड़ने के लिए उम्मीदवार ही नहीं मिल रहे हैं। ज्यादातर सीटों पर इनके नेता प्रचार करने ही नहीं जा रहे। कॉन्ग्रेस के शहजादे को भी वायनाड में संकट दिख रहा है। शहजादे और उनकी टोली 26 अप्रैल को वायनाड में वोटिंग का इंतजार कर रही है। जैसे ही वहाँ वोटिंग पूरी हो जाएगी, वे शहजादे के लिए एक और सुरक्षित सीट घोषित करेंगे।”

उन्होंने आगे कहा, “कॉन्ग्रेस का ये परिवार आजादी के बाद पहली बार खुद कॉन्ग्रेस को ही वोट नहीं देगा, क्योंकि जहाँ वो रहते हैं वहाँ कॉन्ग्रेस का उम्मीदवार ही नहीं है। जिस परिवार के भरोसे कॉन्ग्रेस चलती है, वो परिवार खुद कॉन्ग्रेस को वोट नहीं दे पाएगा।” उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस पार्टी गरीब, दलित, वंचित, मजदूर, किसान के विकास के सामने हमेशा दीवार बनकर खड़ी रही है।

कॉन्ग्रेस की पूर्ववर्ती सरकारों द्वारा महाराष्ट्र के इलाकों की उपेक्षा करने की बात कहते हुए पीएम मोदी ने कहा, “कॉन्ग्रेस ने दशकों तक महाराष्ट्र और खासकर विदर्भ एवं मराठवाड़ा के विकास का दम घोंटने का काम किया है। कॉन्ग्रेस के रवैये के कारण यहाँ किसान गरीब होते गए। उद्योगों से जुड़ी संभावनाएँ खत्म होती चली गईं। लाखों युवाओं को पलायन करना पड़ा।”

एनडीए सरकार के कामों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “करतारपुर साहिब कॉरिडोर का काम पूरा होने के बाद लाखों श्रद्धालुओं को वहाँ दर्शन में मदद मिल रही है। हुजूर साहिब और हेमकुंड साहिब के दरबार तक बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर का इंतजाम करना हो… NDA सरकार ने सिख परंपरा से जुड़े हर तीर्थ के विकास के लिए पूरी शक्ति और भक्ति से काम किया है।”

सिख धर्म के गुरुओं का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा, “खालसा पंथ की गुरु परंपरा और गुरु गोबिंद सिंह की सीख हमारी सरकार के लिए प्रेरणा रही है। हमारी सरकार को गुरु नानक देव जी का 550वाँ प्रकाशोत्सव मनाने का… गुरु तेगबहादुर जी का 400वाँ प्रकाश पर्व मनाने का… गुरु गोबिंद सिंह का 350वाँ प्रकाश पर्व मनाने का सौभाग्य मिला।”

सिख समुदाय को लेकर उन्होंने आगे कहा, “ये हमारी सरकार है जो बँटवारे के पीड़ितों के लिए CAA लेकर आई है। CAA न होता तो हमारे सिख भाई-बहनों का क्या होता? उनका क्या गुनाह है? लेकिन कॉन्ग्रेस इसका भी विरोध कर रही है। ऐसा लगता है कि 1984 का बदला कॉन्ग्रेस सिखों से अब तक ले रही है।”

प्रधानमंत्री ने कहा, “आज परभणी के 12 लाख से ज्यादा गरीबों को बिना भेदभाव मुफ्त राशन मिल रहा है, ताकि उनके घर का चूल्हा जलता रहे और ये सुविधा आने वाले 5 वर्षों में भी जारी रहेगी। आज परभणी में 17 जनऔषधि केंद्रों से सभी को 80% छूट पर दवाएँ मिल रही हैं। यहाँ बिना भेदभाव सवा लाख से ज्यादा महिलाओं को उज्ज्वला गैस कनेक्शन दिया गया है।”

पिता कह रहे ‘लव जिहाद’ फिर भी ख़ारिज कर रही कॉन्ग्रेस सरकार: फयाज की करतूत CM सिद्धारमैया के लिए ‘निजी वजह’, मारी गई लड़की का ही हो रहा चरित्र हनन

कर्नाटक के हुबली में नेहा नाम की कॉलेज स्टूडेंट की सरेआम चाकुओं से गोदकर हत्या कर दी जाती है। हत्या को अंजाम देने वाला फैयाज पिछले साल तक नेहा के साथ ही पढ़ता था। वो नेहा का पहले दोस्त था, लेकिन नेहा ने आगे किसी भी तरह के संबंध से इनकार कर दिया था, जिसके बाद उसने नेहा की सरेराह हत्या कर दी। इस मामले को नेहा के पिता, जो कॉन्ग्रेस के नेता भी हैं, उन्होंने लव जिहाद बताते हुए लोगों से अपने बच्चों को लेकर सावधान रहने की अपील की है, तो दूसरी तरफ कॉन्ग्रेसी इकोसिस्टम, जिसमें मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री से लेकर राज्य की टॉप लीडरशिप है, वो फैयाज को लव जेहाद का आरोपित बताने की जगह ‘निजी मामला’ बताने में जुट गए हैं और पीड़ित नेहा का ही चरित्र हनन करने की कोशिश कर रहे हैं।

फैयाज के हाथों मारी गई नेहा के पिता और कॉन्ग्रेस नेता तथा मौजूदा पार्षद निरंजन हिरेमठ जोर देकर कह रहे हैं कि उनकी बेटी लव जिहाद की शिकार हुई है। उन्होंने कहा है कि देश में लव जिहाद तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने महिलाओं से अपील की है कि वह बच कर रहें। उन्होंने अपनी बेटी के मामले में पूछा कि ये ‘लव जिहाद नहीं तो और क्या है?’

नेहा की माँ गीता द्वारा दी गई शिकायत से यह भी पता चलता है कि नेहा के पिता ने चार महीने पहले हत्यारे फैयाज से बात की थी और उससे कहा था कि वह उनकी बेटी से शादी के लिए संपर्क न करें क्योंकि वह पढ़ना चाहती है। अपनी शिकायत में नेहा की माँ ने यह भी खुलासा किया कि नेहा ने अपने माता-पिता को बताया था कि फैयाज ने उसे धमकी दी थी कि अगर उसने उसका प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

मृतका नेहा के पिता ने मीडिया से कह़ा, “मुझे लगता है कि लव जिहाद तेजी से फ़ैल रहा है और माताओं बहनों को संभल कर बाहर जाना होगा। मेरे एक ही बेटा बेटी थे। यह मेरी आँखों की तरह थे। अब मेरी हालत खराब है। मैं सभी माताओं से अपील करता हूँ कि अगर आपकी बेटी कॉलेज जाती है तो उसके साथ जाइए और इस बात को पक्का कीजिए कि कोई उसका पीछा ना कर रहा हो।हमारे साथ जो हुआ किसी के साथ ना हो। आसपास की स्थिति बहुत खराब है। मैं राज्य सरकार समेत अन्य सभी नेताओं से इस मामले में कड़ा एक्शन लेने की माँग करता हूँ।”

जहाँ नेहा के पिता ने इस मामले को लव जिहाद बताया है तो वहीं राज्य के गृह मंत्री और उनकी ही पार्टी के नेता जी परमेश्वरा ने कहा है कि यह मामला लव जिहाद का नहीं है। उन्होंने मीडिया को बताया, “शायद फयाज ने नेहा को चाकू इसलिए मार दिया क्योंकि उसे लगता था कि नेहा किसी और से शादी कर लेगी। अभी मुझे ज्यादा जानकारी नहीं मालूम है। लेकिन इस मामले में दोंनो तरफ ही लोग जुड़े हुए थे इसलिए यह लव जिहाद का मामला नहीं है।”

यही नहीं, पूरा कॉन्ग्रेसी इकोसिस्टम ही फैयाज को ‘आम कातिल’ बताते हुए ‘लव जिहाद’ को क्लीन-चिट देने में जुट गया है। राज्य के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने ‘लव जिहाद’ के दावों को खारिज करते हुए कहा कि यह हत्या निजी कारणों से की गई है और राज्य में कानून व्यवस्था बिल्कुल दुरुस्त है। मुख्यमंत्री, गृहमंत्री के साथ ही उप-मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने भी वही राह पकड़ी और लव जिहाद की जगह बीजेपी पर आरोप मढ़ने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि बीजेपी कर्नाटक में राज्यपाल शासन लाना चाहती है, इसलिए ये नाटक कर रही है।

इस बीच, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने शनिवार (20 अप्रैल 2024) को कर्नाटक के गृह मंत्री जी परमेश्वरा के घर का घेराव किया। एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने गृह मंत्री पर इस मामले को हल्के में लेने का आरोप लगाया है। वहीं, प्रदर्शनकारी छात्रों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है।

गौरतलब है कि कर्नाटक के हुबली में गुरुवार (18 अप्रैल, 2024) को फयाज नाम के एक युवक ने नेहा नाम की हिन्दू युवती की चाकुओं से गोद कर हत्या कर दी। वह नेहा का पहले इन्तजार कर रहा था और जब वह कॉलेज से बाहर आई तो उसने चाकुओं से हमला कर दिया। नेहा की इस हमले में मौत हो गई। फयाज को इस हमले के बाद पकड़ लिया गया है।

बताया जा रहा है कि फयाज युवती पर उसके साथ रिलेशनशिप में आने का दबाव बना रहा था और लड़की ने इससे इनकार कर दिया। ऐसे में फयाज उसका महीनों पीछा करता था। घटना वाले दिन जब नेहा उसके सामने आई तो उसने उसके गले पर वार किए, जो बताते हैं कि उसकी मंशा नेहा को जान से ही मारने की थी।

पुलिस की जाँच में भी सामने आया है कि फयाज अपने दोस्तों से बोलते हुए फिरता था कि जिस लड़की ने उसका ऑफर ठुकराया है वो उसे खत्म कर देगा। मामले के बारे में बताते हैं सिटी पुलिस कमिशनर रेणुका एस सुकुमार ने कहा वे दोनों (पिछले साल तक) बीसीए साथ में पढ़ रहे थे। लेकिन, बीसीए के बाद नेहा ने अपनी पढ़ाई जारी रखी और फयाज ने छोड़ दी।

गोपाल स्वामी, जगदीश्वर… खालसा फ़ौज के 200 साल पुराने हथियार पर भगवान विष्णु का मंत्र, खालिस्तानी प्रोपेगंडा को ध्वस्त करती है गुरु अर्जुन देव जी की रचना

सोशल मीडिया पर सिख इतिहास के विशेषज्ञ पुनीत साहनी ने एक तस्वीर शेयर की है। उन्होंने बताया कि ये सिखों की खालसा फ़ौज का हथियार है, जिसे चक्कर कहते हैं। ये लगभग 200 वर्ष पुराना है। साथ ही इस पर सोने से एक मंत्र अंकित है, जो गुरु अर्जुन देव द्वारा रचित है। इसे ‘रक्षा मंत्र’ कहा जाता है, अर्थात रक्षा के लिए इसमें प्रार्थना की गई है। ये सहस्कृति भाषा में रचित है, जो संस्कृत का ही एक रूप है। गुरु नानक देव जी ने इसका इस्तेमाल शुरू किया था।

पुनीत साहनी ने बताया कि इस मंत्र में भगवान विष्णु से प्रार्थना की गई है। बता दें कि खालिस्तानी अक्सर हिन्दुओं और सिखों को विभाजित करने में लगे रहते हैं। वो सिख धर्म को सनातन का हिस्सा नहीं मानते और इसे हिन्दू विरोधी बता कर प्रचारित करने में लगे रहते हैं। जबकि सच्चाई ये है कि सिखों के सभी गुरु हिन्दू देवी-देवताओं की उपासना करते थे। गुरु गोविन्द सिंह माँ दुर्गा की पूजा करते थे, उन्होंने रामकथा भी लिखी। उक्त चक्कर पर अंकित मंत्र है:

सिर मस्तक रख्या पारब्रहमं हस्त काया रख्या परमेस्वरह॥
आतम रख्या गोपाल सुआमी धन चरण रख्या जगदीस्वरह॥
सरब रख्या गुर दयालह भै दूख बिनासनह॥
भगति वछल अनाथ नाथे सरणि नानक पुरख अचुतह ॥५२॥

ये मंत्र सिखों की सबसे पवित्र पुस्तक गुरु ग्रन्थ साहिब में लिखा हुआ है। इसका अर्थ है – “सिर, माथा, हाथ, शरीर, जीवात्मा, पैर, धन-पदार्थ -जीवों की हर तरह से रक्षा करने वाला परमब्रह्म परमेश्वर गोपाल, स्वामी, जगदीश्वर, सबसे बड़ा दया का घर परमात्मा ही है। वही सारे दुःखों का नाश करने वाला है। हे नानक! वह प्रभु निआसरों का आसरा है, भक्ति को प्यार करने वाला है। उस अविनाशी सर्व-व्यापक प्रभु का आसरा ले।” बता दें कि गोपाल और जगदीश्वर भगवान श्रीकृष्ण/विष्णु को कहा जाता है।

‘विष्णु सहस्रनाम’ में भगवान विष्णु के जो नाम दर्ज हैं, उन्हीं का यहाँ इस्तेमाल किया गया है। इस इतिहास को जानने के बाद लोगों ने लिखा कि खालिस्तानी अपनी जड़ों को नकार तो सकते हैं, उन्हें मिटा नहीं सकते। हालाँकि, पुनीत साहनी का मानना है कि ये सब खालिस्तानी गुरुद्वारों द्वारा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ये बिलकुल उन पाकिस्तानियों की तरह है जिन्हें न सिर्फ अपने इतिहास को नकारना, बल्कि मिटाना भी सिखाया जाता है।