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सिगरेट से दागा और पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगवाए: YouTuber रोहित का आरोप- PM मोदी की तारीफ में गाने बनाए, इसलिए मुस्लिमों ने पीटा; पुलिस बोली- जाँच करेंगे

कर्नाटक के मैसूर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ में वीडियो बनाने वाले यूट्यूबर रोहित को कुछ कट्टरपंथी मुस्लिमों ने बुरी तरह से पीटा है। इतना ही नहीं, उसके ऊपर बीयर डाला गया और ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाने के लिए मजबूर किया गया। युवक का आरोप है कि उसके साथ ऐसा इसलिए किया गया, क्योंकि उसने पीएम मोदी की तारीफ में एक वीडियो बनाया था।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, रोहित मैसूर के मेल्लाहल्ली गाँव के रहने वाले हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ में एक गाना कंपोज किया था। इस गाने को उन्होंने सरकारी गेस्ट हाउस के पास एक युवक को दिखाया। इस दौरान कुछ लोगों ने गाने पर आपत्ति जताई और फिर उनकी पिटाई कर दी। उनके ऊपर बीयर डालने की बात भी कही जा रही है।

रोहित का कहना है कि जिन लोगों ने उनके साथ मारपीट की, उन्होंने उनसे ‘पाकिस्तान जिंदाबाद‘ और ‘अल्लाह हू अकबर’ के नारे लगाने के लिए भी मजबूर किया। इस घटना के दौरान नजराबाद पुलिस ने हस्तक्षेप किया और उन्हें मेडिकल चेकअप के लिए अस्पताल ले जाया गया है। पुलिस ने इस घटना की जाँच की बात कही है।

रोहित का कहना है, “मैंने पिछले सप्ताह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ में एक गाना जारी किया था। मैं अपने चैनल का लिंक साझा कर रहा था और सभी को इसे सब्सक्राइब करने के लिए कह रहा था। इसी दौरान एक लड़का सरकारी गेस्ट हाउस के पास से निकला। मुझे नहीं पता था कि वह मुस्लिम है। मैंने उनसे गाना देखने, इसे शेयर करने और चैनल को सब्सक्राइब करने के लिए कहा।”

रोहित ने आगे बताया, “उन्होंने इसे देखा और कहा कि यह अच्छा है। उन्होंने मुझसे कहा कि वह मुझे अपने दोस्तों से मिलवाने के लिए अंदर ले जाएगा, ताकि इसे साझा किया जा सके। जैसे ही मैं कमरे में दाखिल हुआ, उसी दौरान एक लड़के ने मेरा मुँह बंद कर दिया और पीछे से हाथ पकड़ लिए।”

अपने आरोपों में रोहित ने आगे बताया, “उन्होंने पीएम मोदी पर गाना बनाने के लिए मुझे गालियाँ देनी शुरू कर दीं। उसके मुझसे पाकिस्तान जिंदाबाद का नारा लगाने को कहा। उन्होंने मेरे हाथ से भगवान राम की फोटो छीनकर उसके साथ अभद्रता भी की। इसके बाद मेरे सिर पर बीयर डाल दी और सिगरेट से मेरे हाथ जलाए। उन्होंने मुझे पीटा भी।”

मैसुरु के पुलिस कमिश्नर रमेश ने कहा, “शख्स ने केवल दावे किए हैं। हम इनकी पुष्टि करने का प्रयास कर रहे हैं। सरकारी गेस्ट हाउस में CCTV कैमरे लगे हैं। उन CCTV कैमरों के फुटेज की जाँच की जाएगी। इसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। जाँच के बाद आगे की जानकारी साझा की जाएगी।”

कौन थी वो राष्ट्रभक्त तिकड़ी, जो अंग्रेज कलक्टर ‘पंडित जैक्सन’ का वध कर फाँसी पर झूल गई: नासिक का वो केस, जिसने सावरकर भाइयों को पहुँचाया कालापानी

तारीख : 21 दिसंबर 1909, जगह : विजयानंद थिएटर, नासिक। शाम का समय और संगीत शारदा मंडली द्वारा नाटक का मंचन। इस नाटक का मंचन किया जा रहा था नासिक के कलेक्टर अर्थर मेसन टिप्पेट्स जैक्सन (ए.एम.टी. जैक्सन) को विदाई देने के लिए। इस नाटक के मंचन के दौरान ही अनंत लक्ष्मण कन्हेरे ने नासिक के कलेक्टर ए.एम.टी. जैक्सन के सीने में 4 गोलियाँ उतार दी। अनंत लक्ष्मण कन्हेरे के साथ ही बैकअप के तौर पर कृष्णाजी गोपाल कर्वे और विनायक नारायण देशपांडे भी थे। अगर अनंत जैक्सन को नहीं मार पाते, तो ये काम कृष्णजी गोपाल कर्वे करते और वो भी चूक जाते तो विनायक नारायण देशपांडे। हालाँकि अनंत लक्ष्मण कन्हेरे चूके नहीं।

इस बात का जिक्र अब क्यों?

अनंत लक्ष्मण कन्हेरे, कृष्णाजी गोपाल कर्वे और विनायक नारायण देशपांडे को आज ही की तारीख यानी 19 अप्रैल 1910 को फाँसी पर लटका दिया गया था। इन तीनों ही क्रांतिकारियों की उम्र उस समय 18 से 20 वर्ष के बीच थी। इन तीनों को कितने लोग जानते हैं? महाराष्ट्र में जरूर अनंत लक्ष्मण कन्हेरे के बारे में लोगों को जानकारी है, लेकिन पूरे भारत में? इसीलिए उपरोक्त जानकारी दी गई। आज (19 अप्रैल) को तीनों हुतात्माओं का बलिदान दिवस है। इन तीनों हुतात्माओं के शरीर को उनके परिजनों को देने की जगह जेल में ही जला दिया गया और अवशेषों (अस्थियों) थाणे के पास में ही समंदर में फेंक दिया गया। ऐसा इसलिए किया गया, ताकि विद्रोह की ज्वाला भड़कने की जगह विद्रोहियों की मन में अंग्रेजी हुकूमत का खौफ कायम रहे।

ये पूरा मामला नासिक षड्यंत्र केस के नाम से जाना जाता है। इस केस में कुल अभिनव भारत सोसायटी के 27 सदस्यों को सजा सुनाई गई, जिसमें कई लोगों को कालेपानी की सजा भी शामिल है। इसी केस को आधार बनाकर वीर सावरकर को अंडमान निकोबार द्वीप समूह पर बनाए गए सेल्यूलर जेल में कालेपानी की सजा के लिए भेजा गया था। इसी मामले में वीर सावरकर के बड़े भाई गणेश सावरकर को भी कालेपानी की सजा हुई थी। यही नहीं, इस केस में शंकर रामचंद्र सोमण, वामन उर्फ दाजी नरायण और गणेश बालाजीवैद्य को भी कालेपानी की सजा हुई।

अभिनव भारत का क्या था रोल?

अभिनव भारत सोसायटी की स्थापना वीर सावरकर और उनके भाई गणेश सावरकर ने नासिक में मित्र मेला के रूप में साल 1899 में की थी। तब वीर सावरकर खुद छात्र थे। साल 1904 में मित्र मेला का नाम बदलकर अभिनव भारत कर दिया गया था। वीर सावरकार साल 1906 में लंदन चले गए और एक ब्रांच वहाँ भी खुली। वीर सावरकर ने लंदन से 20 पिस्टल भेजे थे, उन्हीं में से एक पिस्टल का इस्तेमाल अनंत लक्ष्मण कन्हेरे ने नासिक के कलेक्टर ए.एम.टी. जैक्सन का वध करने के लिए किया था।

कौन था ए.एम.टी. जैक्सन? क्यों क्रांतिकारियों ने किया वध?

ए.एम.टी. जैक्सन का वध जब हुआ, तब उसकी उम्र 47 वर्ष थी। वो संस्कृत और मराठी का भी जानकार था। उसे पंडित जैक्सन भी कहा जाने लगा था, क्योंकि वो दावा करता था कि वो पिछले जन्म में हिंदू संत था और इस जन्म में वो क्रिश्चियन है। वो सनातन परंपरा के खिलाफ षड्यंत्र कारी बातें करता था और लोगों के बीच आराम से घुलमिल जाता था। उसे स्थानीय स्तर पर पसंद भी किया जाता था, क्योंकि उसने स्वयं को कुछ इस तरह से पेश किया था कि वो लोगों का उद्धार कर रहा है। उसकी जहरीली नीतियों की वजह से अभिनव भारत सोसायटी से जुड़े क्रांतिकारियों ने उसके वध की योजना बनाई थी।

इन तीनों क्रांतिकारियों ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ युद्ध को अंजाम दिया। उन्होंने सनातन को बचाने के लिए भी ये कदम उठाया, क्योंकि उस समय जैक्सन भारी मात्रा में नासिक में धर्मांतरण कर रहा था। उसका कोई विरोध नहीं करता था। उसे इन कामों के लिए प्रमोशन मिला और उसे बॉम्बे का कमिश्नर बनाया गया था। उसने गणेश सावरकर की गिरफ्तारी के बाद उन्हें कालेपानी की सजा दिलवाने में भी अहम भूमिका निभाई थी, इसलिए भी क्रांतिकारियों के निशाने पर था। इन क्रांतिकारियों ने जैक्सन को मारने के बाद जहर खाकर या खुद को गोली मारकर खत्म करने का फैसला भी किया था, लेकिन इस हमले के बाद वो तुरंत पकड़ लिए गए और स्वयं को खत्म करने का मौका नहीं मिल पाया।

खैर, अनंत लक्ष्मण कन्हेरे, कृष्णाजी गोपाल कर्वे और विनायक नारायण देशपांडे को जितना सम्मान मिलना चाहिए था, वो तो नहीं मिला। क्यों नहीं मिला? क्योंकि इससे कम्युनिष्टों और कॉन्ग्रेसियों को दिक्कत हो जाती। महज 18-20 साल के इन बलिदानियों ने जो योगदान दिया, वो बाकियों पर भारी पड़ जाती। अब जब नरेंद्र मोदी सरकार ने आजादी के 75 वर्ष के मौके पर ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ मनाया है, तो ऐसे भूल-बिसार दिए गए अनन्य बलिदानियों की कथा भी सामने आ रही है। इन शहीदों को शत् शत् नमन

‘हिंदू मंदिर खुलने की वजह से दुबई में आया तूफान’ : UAE में भारी बारिश देख इस्लामी कट्टरपंथी दिखा रहे घृणा, बोले- जहाँ बुत की पूजा बंद हो, वहाँ इसे क्यों बनवाया

संयुक्त राज्य अमीरात (यूएई) के कई इलाकों में हुई भारी बारिश ने वहाँ बाढ़ जैसे हालातों को पैदा कर दिया है। बताया जा रहा है कि वहाँ इतनी तबाही मची है कि 19 लोग अपनी जान गँवा चुके हैं। ऐसे में सोशल मीडिया पर जहाँ हर कोई दुबई के हालात सुधरने की दुआ कर रहा है तो वहीं इस्लामी कट्टरपंथियों ने इसे अलग एंगल दे दिया है। उन्होंने यहाँ भी हिंदुओं के लिए अपनी घृणा दिखानी शुरू कर दी है।

सोशल मीडिया पर इस संबंध में एक रील वायरल हो रही है। इस रील में दुबई में हुई बारिश के कुछ सीन लगाकर पीछे से AI वॉयस लगाकर कहा जा रहा है- “दुबई में मंदिर खुलते ही आया तूफान और हुई तेज बारिश। जिस जगह अल्लाह पाक ने पैगंबर को भेजकर बुतों की पूजा रुकवाई थी। आज वहीं बुतों की पूजा शुरू करवाई जा रही हैं। दरअसल दुबई में टूरिज्म को बढ़ाने के लिए एक मंदिर बनवाया गया है जिसका उद्घाटन 14 फरवरी को हुआ था।”

इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर @ISLAMIC_BOY345 नाम के अकॉउंट से साझा की गई थी जो अब हर जगह वायरल है। इसके नीचे कट्टरपंथी मुस्लिमों ने भी दुबई में हिंदू मंदिर बनने का विरोध किया है। बोला जा रहा है कि अरब मुल्क को अल्लाह पाक हिदायत दें और वो ऐसा काम न करें। कोई कह रहा है कि क्या अरब को पैसों की कमी पड़ कही है जो अपने लिए जहन्नुम का दरवाजा खोल रहे हैं।

इस वीडियो और इसमें दिए गए तर्क को सुनकर पाकिस्तान की पत्रकार तंज कसते हुए कहती हैं- ये इस्लामिक ‘मौसम विशेषज्ञ’ बताते हैं कि कैसे एक नवनिर्मित हिंदू मंदिर दुबई में बारिश का कारण है। जैसे महिलाओं को लेकर कहते हैं कि महिलाओं का जींस पहनना भूकंप आने की वजह है। इस वीडियो को देखने के बाद अब सोशल मीडिया पर कुछ भारतीय भी कमेंट कर रहे हैं। उनका कहना है कि आखिर जिन बाकी देशों में बारिश होती है उसका कारण भारत होता है।

भारत विरोधी और इस्लामी प्रोपगेंडा से भरी है पाकिस्तानी ‘पत्रकार’ की डॉक्यूमेंट्री… मोहम्मद जुबैर और कॉन्ग्रेसी इकोसिस्टम प्रचार में जुटा

फेक न्यूज फैक्ट्री होने के बावजूद खुद को ‘फैक्ट चेकर’ कहने वाला मोहम्मद जुबैर पाकिस्तानी ‘पत्रकार’ की डॉक्यूमेंट्री का प्रचार कर रहा है। उसने बुधवार (17 अप्रैल 2024) को शहजाद हमीद अहमद नाम के एक पाकिस्तानी ‘पत्रकार’ द्वारा निर्मित दुष्प्रचार भरी डॉक्यूमेंट्री को प्रमोट किया।

ये डॉक्यूमेंट्री चैनल न्यूजएशिया (NCA) ने 12 अप्रैल 2024 को प्रसारित की थी, जिसका मालिकाना हक सिंगापुर की कंपनी मीडिया कॉर्प के पास है। इस 46 मिनट की डॉक्यूमेंट्री में दावा किया है कि वो भारत की ‘फेक न्यूज इंडस्ट्री’ को एक्सपोज करती है। इस डॉक्यूमेंट्री का शीर्षक है ‘इंडियाज वॉर ऑन फेक न्यूज: कैसे गलत जानकारियाँ भारत के लिए खतरा नंबर 1’ है। पाकिस्तानी पत्रकार अहमद की बनाई इस डॉक्यूमेंट्री को भारत में इस्लामिक और कॉन्ग्रेसी इकोसिस्टम के रूप में कई खरीदार मिले हैं।

मोहम्मद जुबैर, जो फेक न्यूज फैक्ट्री अल्ट न्यूज चलाता है, उसने इस डॉक्यूमेंट्री की एक क्लिप को ट्वीट किया और लिखा, ‘इंडियन फेक न्यूज इंडस्ट्री पर सिंगापुर बेस्ड @चैनलन्यूजएशिया द्वारा प्रसारित एक मस्ट वॉच डॉक्यूमेंट्री।’

उसने आगे लिखा, “इस वीडियो में दिखे वाला व्यक्ति (इंटरनेट ट्रोल/साइबर सिपाही) दावा कर रहा है कि बीजेपी आईटी सेल ने 40 से 50 हजार रुपए महीने की पगार पर फ्रीलांसर्स को तैनात किया है, जो सरकार समर्थित प्रोपेगेंडा को बढ़ाने और विपक्षी नेताओं को बदनाम करने में जुटे हैं।”

कॉन्ग्रेस की प्रवक्ता लावण्या बल्लाल जैन, जो फेक न्यूज फैलाने के लिए मशहूर है। उसके जुबैर के ट्वीट को रीट्वीट किया और जुबैर के दावे को आगे बढ़ाने में मदद की कि बीजेपी आईटी सेल अपने विरोधियों के बारे में फेक न्यूज फैलाने में जुटी है।

लावण्या बल्लाल द्वारा रीट्वीट का स्क्रीनग्रैब (फोटो साभार X/ @Iyervval के माध्यम से)

इस विवादास्पद डॉक्टूमेंट्री को बनाने वाले व्यक्ति शहजाद हमीद अहमद की लिंक्डइन प्रोफाइल के मुताबिक, वो स्टार एशिया प्राइवेट लिमिलेड. डॉन न्यूज, एल्लाइनेट कॉरपोरेशन, कैपिटल टीवी और इस्लामाबाद की यू-ट्रेड प्राइवेट लिमिटेड जैसी कंपनियों के लिए काम कर चुका है।

कथित पाकिस्तानी पत्रकार शहजाद हमीद अहमद भारत में सालों से ‘सेकुलरिज्म’ का ‘प्रचार’ करता रहा है। उसने साल 2021 में ‘इन बैड फेथ‘ नाम की तीन हिस्सों की डॉक्यूमेंट्री भी प्रसारित की थी। उसका एक एपिसोड(50 मिनट) में भारत में भगवाकरण के उभार पर केंद्रित था।

उसके डॉक्यूमेंट्री में दावा किया गया था कि भारत देश राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रभाव में आकर ‘धर्मनिरपेक्षता’ से हिंदू-प्रथम बहुसंख्यकवाद की ओर जा रहा है।

इस भारत विरोधी डॉक्यूमेंट्री के लिए उसे लंडन फिल्म फेस्टिवल में एसोसिएशन ऑफ इंटरनेशनल ब्रॉडकास्टिंग अवॉर्ड 2022 भी मिला था। इसकी कवरेज पाकिस्तानी मीडिया ने भी की थी।

दिलचस्प बात यह है कि वह 2016 में पाकिस्तान का ‘अगाही’ जर्नलिस्ट ऑफ द ईयर पुरस्कार भी पा चुका है।

लोकप्रिय ओपन सोर्स इंटेलिजेंस हैंडल ‘OSINTwa_com’ के अनुसार, अहमद ने आज तक कभी पाकिस्तान में उत्पीड़ित धार्मिक अल्पसंख्यकों (हिंदू, ईसाई और सिख) की दुर्दशा पर कोई बात नहीं की है।

हाँ, ये जरूर है कि वो भारतीत क्रिकेट टीम को फेसबुक पर ‘पुसी कैट’ बता चुका है और साल 2022 में ब्रिटेन के लीचेस्टर में हुए हिंदुओं के खिलाफ हुए दंगों की सूचना को इस्लामिक नेरेटिव के हिसाब से आगे बढ़ा रहा था।

शहजाद हमीद अहमद को विवादास्पद संयुक्त राज्य धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (यूएससीआईआरएफ) द्वारा भारत को काली सूची में डालने की वकालत करते हुए भी देखा गया था।

अपनी डॉक्यूमेंट्री में, पाकिस्तानी ‘पत्रकार’ ने अपने हालिया एक्स (पूर्व में ट्विटर) पोस्ट में मोहम्मद जुबैर द्वारा समर्थित इस्लामवादी रकीब हमीद नाइक को भी दिखाया है।

एक शातिर फेक न्यूज पेडलर राकिब हमीद नाइक हिंदू विरोधी दुष्प्रचार करने वाले संस्थान ‘हिंदुत्व वॉच’ का संस्थापक है। वो 1990 के दशक की शुरुआत में कश्मीर घाटी में कट्टरपंथी इस्लामिक आतंकियों द्वारा हिंदुओं के नरसंहार को भी खारिज कर चुका है। यही नहीं, नाइक ने काशी में ज्ञानवापी मस्जिद के अंदर मिले ‘शिवलिंग’ का भी  मजाक उड़ाया था।

मूल रूप से यह लेख अंग्रेजी में लिखा गया है। मूल खबर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

‘लव जिहाद तेजी से बढ़ रहा, अपनी बेटियों को संभाल कर रखें’ : फयाज ने की बेटी की हत्या तो बोले कॉन्ग्रेस पार्षद, कर्नाटक के मंत्री ने ‘लव जिहाद’ नकारा

कर्नाटक के हुबली के हीरेमठ में फयाज ने नेहा नाम की एक युवती की चाकुओं से गोद कर हत्या कर दी। नेहा के पिता निरंजन हिरेमठ कॉन्ग्रेस नेता और पार्षद हैं। उन्होंने कहा है कि देश में लव जिहाद तेजी बाद बढ़ रहा है। उन्होंने महिलाओं से अपील की है कि वह बच कर रहें।

मृतका नेहा के पिता ने मीडिया से कह़ा, “इस तरह की घटनाएँ तेजी से हो रही हैं। युवा गलत रास्ता पकड़ रहे हैं। किसी के साथ नहीं होना चाहिए। मुझे लगता है कि लव जिहाद तेजी से फ़ैल रहा है और माताओं बहनों को संभल कर बाहर जाना होगा। मेरे एक ही बेटा बेटी थे। यह मेरी आँखों की तरह थे। अब मेरी हालत खराब है।”

उन्होंने आगे कहा, “मैं सभी माताओं से अपील करता हूँ कि अगर आपकी बेटी कॉलेज जाती है तो उसके साथ जाइए और इस बात को पक्का कीजिए कि कोई उसका पीछा ना कर रहा हो।हमारे साथ जो हुआ किसी के साथ ना हो। आसपास की स्थिति बहुत खराब है। मैं राज्य सरकार समेत अन्य सभी नेताओं से इस मामले में कड़ा एक्शन लेने की माँग करता हूँ।”

जहाँ नेहा के पिता ने इस मामले को लव जिहाद बताया है तो वहीं राज्य के गृह मंत्री और उनकी ही पार्टी के नेता जी परमेश्वरा ने कहा है कि यह मामला लव जिहाद का नहीं है। उन्होंने मीडिया को बताया, “शायद फयाज ने नेहा को चाकू इसलिए मार दिया क्योंकि उसे लगता था कि नेहा किसी और से शादी कर लेगी। अभी मुझ ज्यादा जानकारी नहीं मालूम है। लेकिन इस मामले में दोंनो तरफ ही लोग जुड़े हुए थे इसलिए यह लव जिहाद का मामला नहीं है।”

गौरतलब है कि कर्नाटक के हुबली में गुरुवार (18 अप्रैल, 2024) को फयाज नाम के एक युवक ने नेहा नाम की हिन्दू युवती की चाकुओं से गोद कर हत्या कर दी। वह नेहा का पहले इन्तजार कर रहा था और जब वह कॉलेज से बाहर आई तो उसने चाकुओं से हमला कर दिया। नेहा की इस हमले में मौत हो गई। फयाज को इस हमले के बाद पकड़ लिया गया है।

 बताया जा रहा है कि फयाज युवती पर उसके साथ रिलेशनशिप में आने का दबाव बना रहा था और लड़की ने इससे इनकार कर दिया। ऐसे में फयाज उसका महीनों पीछा करता था। घटना वाले दिन जब नेहा उसके सामने आई तो उसने उसके गले पर वार किए, जो बताते हैं कि उसकी मंशा नेहा को जान से ही मारने की थी।

पुलिस की जाँच में भी सामने आया है कि फयाज अपने दोस्तों से बोलते हुए फिरता था कि जिस लड़की ने उसका ऑफर ठुकराया है वो उसे खत्म कर देगा। मामले के बारे में बताते हैं सिटी पुलिस कमिशनर रेणुका एस सुकुमार ने कहा वे दोनों (पिछले साल तक) बीसीए साथ में पढ़ रहे थे। लेकिन, बीसीए के बाद नेहा ने अपनी पढ़ाई जारी रखी और फयाज ने छोड़ दी।

दमोह में पड़ोसी देश पर पीएम मोदी ने बोला हमला, कहा- पाकिस्तान पहले भेजता था आतंकी, अब आटे तक को तरस रहा

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि पाकिस्तान पहले भारत के भीतर आतंक भेजता था लेकिन अब आटे को तरस रहा है। पीएम मोदी ने मध्य प्रदेश के दमोह में कॉन्ग्रेस समेत अन्य विपक्षी पार्टियों पर हमला बोला। उन्होंने सनातन धर्म को डेंगू मलेरिया बताए जाने पर भी द्रमुक समेत अन्य पार्टियों को घेरा।

पीएम मोदी दमोह में भाजपा प्रत्याशी राहुल लोधी के लिए वोट जुटाने पहुँचे थे। यहाँ उन्होंने कहा कि विश्व भर में युद्ध के बादल छाए हुए हैं लेकिन भारत में युद्ध स्तर पर काम करने वाली सरकार है। उन्होंने कहा आगे ऐसा ही हो इसके लिए भाजपा को वोट देना आवश्यक है। पीएम मोदी ने पाकिस्तान पर हमला करते हुए कहा कि जो देश पहले भारत में आतंक की सप्लाई करता था आज आटे को तरस रहा है। उन्होंने कहा की इसके उलट भारत का डंका दुनिया में बज रहा है जिससे लोगों को गर्व हो रहा है।

पीएम मोदी ने कहा कि कॉन्ग्रेस सेनाओं के लिए हथियार खरीदने में अपना फायदा देखती थी। उन्होंने कहा कि तेजस जैसा विमान कॉन्ग्रेस के राज में नहीं बन पाता, उन्होंने वायु सेना को मिले राफेल में भी अडंगा लगाया। पीएम मोदी ने फिलिपिन्स को बेचीं गई ब्रम्होस मिसाइल का भी जिक्र किया, इसके पहली खेप शुक्रवार (19 अप्रैल) को पहुँची है।

पीएम मोदी ने कहा कि वह तीसरी बार सरकार बनने पर 3 करोड़ नए घर बनवाएँगे। उन्होंने कहा इस इलाके में केन बेतवा लिंक परियोजना को पूरा किया जा रहा है। इससे किसानों को भी पानी मिलेगा। पीएम मोदी ने अपने भाषण के दौरान उनका एक बच्चे से उनकी पेंटिंग भी ली। पीएम ने कहा कि वह इस पेंटिंग के बाद पत्र लिख कर भेजेंगे। उनकी माँ की पेंटिंग भी एक शख्स बना कर लाया था। पीएम मोदी ने इसे भी मंच पर मंगाया।

सनातन धर्म पर टिप्पणियों को लेकर पीएम मोदी ने यहाँ कॉन्ग्रेस पर हमला बोला। पीएम मोदी ने कहा कि INDI गठबंधन वाले सनातन धर्म को डेंगू मलेरिया बताते हैं। यह लोग राम मंदिर के भी विरोधी हैं और पूजा को पाखंड बताते हैं। पीएम मोदी ने कह़ा कि यह बुलाने के बाद भी अयोध्या नहीं गए, यह सब वोट बैंक के लिए किया गया। उन्होंने कहा कि परिवारवादी और भ्रष्टाचारी नेताओं को मोदी की गारंटी बेचैन कर रही है। उन्होंने कहा यह लोग देश में आग लगने की धमकी दे रहे हैं। पीएम मोदी ने कहा कि मोदी किसी की धमकी से नहीं डरेगा।

EVM से भाजपा को अतिरिक्त वोट: मीडिया ने इस झूठ को फैलाया, प्रशांत भूषण ने SC में दोहराया, चुनाव आयोग ने नकारा… मशीन बनाने वाली कंपनी ने बताई असली वजह

लोकसभा चुनाव से पहले इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) को बदनाम करने और मतदाताओं में शंका पैदा करने की कोशिश की जा रही है। ऐसा ही एक प्रयास केरल के कासरगोड शहर में किया गया था, जहाँ कॉन्ग्रेस और CPIM ने मॉक पोल के दौरान एक तकनीकी गड़बड़ी का फायदा उठाते हुए अफवाह फैलाना शुरू कर दिया कि किसी को भी वोट देने पर वोट भाजपा को जा रही है।

बुधवार (17 अप्रैल 2024) को ऑनमनोरमा ने एक विवादास्पद रिपोर्ट प्रकाशित की। इस रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि केरल के कासरगोड शहर में एक मॉक पोल के दौरान चार इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) ने भाजपा के पक्ष में वोट दर्ज किए। इसके बाद CPIM नेता एमवी बालाकृष्णन और कॉन्ग्रेस उम्मीदवार राजमोहन उन्नीथन उर्फ नासर चेरकलाम ने चुनाव आयोग से शिकायत की थी।

ऑनमनोरमा की रिपोर्ट की स्क्रीनशॉट

ऑनमनोरमा की रिपोर्ट के अनुसार, “नासर चेरकलाम ने कहा कि कासरगोड विधानसभा क्षेत्र में मतदान केंद्रों के लिए मशीनों के चालू होने के दौरान भाजपा के कमल को अतिरिक्त वोट मिल रहे थे। उन्होंने यह भी बताया कि कॉन्ग्रेस का ‘हाथ’ चिन्ह वोटिंग मशीनों पर मौजूद अन्य चिन्हों से छोटा है और उन्होंने अधिकारियों से इसे बदलने के लिए कहा।”

नासर चेरकलाम ने वोटिंग मशीनों की अखंडता पर संदेह जताया और पूछताछ की कि मॉक ट्रायल के दौरान ईवीएम ने गलती से सीपीआईएम या कॉन्ग्रेस पार्टी का पक्ष क्यों नहीं लिया। रिपोर्ट में इस बात पर भी प्रकाश डाला गया है कि कैसे 228 में से 6 मशीनों में तकनीकी खराबी थी। आयोग से मशीनों को बदलने की भी माँग की गई थी।

सुप्रीम कोर्ट का चुनाव आयोग को निर्देश

अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने गुरुवार (18 अप्रैल 2024) को सुप्रीम कोर्ट में चल रही ईवीएम-वीवीपीएटी मामले की सुनवाई के दौरान मनोरमा की रिपोर्ट का हवाला दिया। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से वीवीपैट पर्चियों के 100% सत्यापन की माँग की। उन्होेंने कोर्ट में कहा, “केरल के कासरगोड में एक मॉक पोल हुआ था, जिसमें 4 ईवीएम और वीवीपैट में बीजेपी के लिए एक अतिरिक्त वोट रिकॉर्ड हो रहा था।”

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने भारत के चुनाव आयोग (ECI) को इस मामले की जाँच करने का निर्देश दिया। सुप्रीम कोर्ट जज न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ ने कहा, ”श्रीमान मनिंदर सिंह (ECI के वकील), कृपया इसे क्रॉसचेक करें।”

इस षडयंत्र में द न्यूज मिनट भी शामिल

इस बीच वामपंथी प्रोपेगेंडा आउटलेट द न्यूज मिनट ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसमें ईवीएम के गलत तरीके से भाजपा को वोट देने के बारे में ऑनमनोरामा की रिपोर्ट में किए गए दावों को दोहराया गया था।रिपोर्ट में आरोप लगाया गया, “बुधवार, 17 अप्रैल को केरल के कासरगोड में एक मॉक पोल के दौरान तीन वीवीपीएटी मशीनों ने भाजपा के कमल के चिन्ह के साथ एक अतिरिक्त पर्ची छापी।”

रिपोर्ट में आगे दावा किया गया है, “मशीनों पर सबसे ऊपर विकल्प के रूप में बीजेपी का चिन्ह था। मॉक पोल के दूसरे दौर के दौरान भी उन्हीं तीन खराब वीवीपैट मशीनों ने एक बार फिर कमल के निशान वाली एक अतिरिक्त पर्ची छाप दी। समस्या को केवल तीसरे दौर के दौरान ठीक किया गया था।”

न्यूज मिनट में कॉन्ग्रेस और CPIM नेता का हवाला देते हुए कहा गया कि ईवीएम फुलप्रूफ नहीं है और केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा सरकार द्वारा इसमें किसी तरह से छेड़छाड़ की गई है। वामपंथी प्रोपगेंडा आउटलेट की प्रधान संपादक धान्या राजेंद्रन ने भी अपने आधिकारिक एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल से इसे पोस्ट किया है।

चुनाव आयोग का स्पष्टीकरण

चुनाव आयोग ने गुरुवार (18 अप्रैल 2024) को ईवीएम द्वारा एक राजनीतिक दल को फायदा पहुँचाने को लेकर ऑनमनोरमा न्यूज और द न्यूज मिनट के दावों को खारिज कर दिया। वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त नितेश कुमार व्यास ने कहा, “ये खबरें झूठी हैं। हमने जिला कलेक्टर से आरोपों की पुष्टि की है और ऐसा प्रतीत होता है कि वे झूठे हैं। हम अदालत को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपेंगे।”

चुनाव आयोग के वकील मनिंदर सिंह ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि भारत में वीवीपैट की शुरुआत के बाद से 118 करोड़ से अधिक लोगों ने वोट डाला है। इस दौरान 4 करोड़ वीवीपैट पर्चियों की गिनती की गई और आयोग को केवल 25 शिकायतें मिलीं, जो झूठी निकलीं। इसको लेकर केरल में मुख्य निर्वाचन अधिकारी संजय कौल ने X पर एक पोस्ट किया।

उन्होंने कहा, “भ्रम तब पैदा हुआ जब आरोप लगाया गया कि कासरगोड निर्वाचन क्षेत्र में कमीशनिंग के हिस्से के रूप में किए गए मॉक पोल के दौरान अतिरिक्त वीवीपीएटी पर्चियाँ निकलीं। दरअसल चुनाव चिन्ह लोड करने के बाद परीक्षण मतपत्र पर्चियों की छपाई के समय, कुछ मशीनों को वीवीपैट परीक्षण पर्चियों का पूरा प्रिंट लिए बिना ही कमीशनिंग टेबल पर ले जाया गया था।”

इस बीच ईवीएम बनाने वाली भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) ने कहा, “कासरगोड में चार वीवीपैट में जो अधूरे चुनाव चिन्हों की लोडिंग हुई थी, वह केबल के डिस्कनेक्ट होने या प्रिंट पूरा होने से पहले वीवीपैट को अगले चरण में जाने के कारण हो सकती है।”

(यह लेख मूल रूप से अंग्रेजी में लिखा गया है। इसे आप इस लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं।)

‘कॉन्ग्रेस-CPI(M) पर वोट बर्बाद मत करना… INDI गठबंधन मैंने बनाया था’: बंगाल में बोलीं CM ममता, अपने ही साथियों पर भड़कीं

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक चुनावी रैली में इंडी गठबंधन को लेकर बड़ा दावा किया है। ममता बनर्जी ने गुरुवार (18 अप्रैल 2024) को मुर्शिदाबाद में इंडी गठबंधन के अपने साथियों- कॉन्ग्रेस और सीपीएम के विरोध में ही बयानबाजी करते हुए लोगों से अपील की कि इन दलों को बिलकुल वोट न दिया जाए।

उन्होंने मुर्शिदाबाद में जनसभा को संबोधित करते हुए अपने साथियों की आलोचना की। आरोप लगाया कि सीपीआई (एम) और कॉन्ग्रेस ने भाजपा से हाथ मिलाया हुआ है, इसलिए उन्हें वोट देकर बर्बाद न किया जाए।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने इस रैली में ये भी कहा कि इंडी गठबंधन उन्होंने बनाया है। वह बोलीं, “बंगाल में कोई इंडी गठबंधन नहीं है। मैं इस गठबंधन को बनाने में मुख्य भूमिका निभाई थी। यहाँ तक कि इसे जो नाम दिया गया है वो भी मैंने ही दिया है। लेकिन बंगाल में सीपीआई (एम) और कॉन्ग्रेस भाजपा के लिए काम कर रही हैं।”

ममता बनर्जी ने जनता से कहा- अगर आप लोग भारतीय जनता पार्टी को हराना चाहते हो तो किसी कीमत पर कॉन्ग्रेस-सीपीआई (एम) को वोट मत देना।

बंगाल में हिंसा

गौरतलब है कि ममता बनर्जी ने जनवरी में घोषणा की थी कि उनकी पार्टी लोकसभा चुनाव अकेले लड़ेगी। किसी के साथ सीट शेयर नहीं करेंगी। आज बंगाल के कुछ इलाकों में प्रथम चरण की वोटिंग संपन्न हुई। इस दौरान बंगाल के कई इलाकों से हिंसा की खबरें आईं। भाजपा कार्यकर्ता के घर के बाहर जहाँ जिंदा बम रखा पाया गया। वहीं दूसरी ओर कूचबिहार चंदाबारी में भाजपा के बूथ अध्यक्ष की भी बुरी तरह पिटाई हुई है। हालाँकि ममता बनर्जी का अभी तक इन मुद्दों पर कोई बयान नहीं आया है।

इससे पहले उन्होंने रामनवमी पर हुई हिंसा के लिए हिंदुओं को जिम्मेदार ठहराया था और पूछा था कि वो लोग जुलूस में हथियार लेकर क्यों गए। इसके अलावा उन्होंने भाजपा पर भी सवाल खड़े किए थे। सीएम ममता ने कहा था कि बीजेपी की मंशा थी कि लोग हुड़दंग करें।

1200 निर्दोषों के नरसंहार पर चुप्पी, जवाबी कार्रवाई को ‘अपराध’ बताने वाला फोटोग्राफर TIME का दुलारा: हिन्दुओं की लाशों का ‘कारोबार’ करने वाले को भी ऐसे ही मिला था ‘अवॉर्ड’

Time मैगजीन ने 2024 में सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों की सूची जारी की है, जिसमें ‘आइकॉन्स’ वाली केटेगरी में फिलिस्तीन के फोटोग्राफर मोताज़ अज़ैज़ा को भी जगह दी गई है। मीडिया संस्थान का कहना है कि मोताज़ अज़ैज़ा गाजा में 108 दिनों तक दुनिया की आँख और कान बन कर रहे। कहा गया है कि कैमरा और PRESS लिखे सुरक्षा जैकेट से लैस 25 वर्षीय फोटोग्राफर ने लगभग 4 महीने गुजार कर गाजा में इजरायली बमबारी को कवर किया, पलायन को दिखाया, अपने सगों की मौत पर रोती महिलाओं को दिखाया और मलबे में फँसे व्यक्ति को दिखाया।

फोटोग्राफर मोताज़ अज़ैज़ा बना Time का दुलारा

मोताज़ अज़ैज़ा ने खुद को फिलिस्तीनी बताए जाने पर ख़ुशी जताते हुए कहा कि उन्हें अपने देश का नाम अपनी उपलब्धि के साथ साझा करने पर गर्व है। इस दौरान इस मंच का इस्तेमाल वो अंतरराष्ट्रीय प्रोपेगंडा के लिए करना नहीं भूले और उन्हें ललकारा जो लोग फिलिस्तीन को अलग मुल्क की मान्यता नहीं देते या जो इसे अपनी जमीन बताते हैं। मोताज़ अज़ैज़ा ने कहा कि फिलिस्तीन ‘यहूदी कब्जे’ से एक दिन मुक्त होगा और इसमें सब अपना किरदार अदा कर रहे हैं और उनका किरदार अभी खत्म नहीं हुआ है।

क्या आपने कभी देखा है कि ‘Time’ मैगजीन ने किसी ऐसे फोटोग्राफर को प्रभावशाली लोगों की सूची में डाला हो, जिसने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में हो रह बर्बरता की तस्वीरें खींची हो? जिसने ISIS, अलकायदा या बोको हराम जैसे क्रूर इस्लामी आतंकी संगठनों द्वारा पीड़ित लोगों की तस्वीरें खींची हों? जिसने म्यांमार में रोहिंग्या द्वारा किए जाने वाले हिन्दुओं और बौद्धों के नरसंहार को दिखाया हो? शायद ऐसी तस्वीरें Time के एजेंडा को सूट नहीं करती, इसीलिए ऐसे फोटोग्राफरों को इनाम नहीं दिया जाता।

Time ने बड़ी चालाकी से लिखा है कि 7 अक्टूबर, 2024 से लेकर अब तक गाजा में 95 पत्रकार मारे जा चुके हैं, लेकिन उसने ये नहीं बताया कि उससे पहले क्या हुआ था। फोटोग्राफर मोताज़ अज़ैज़ा की तारीफ़ करते हुए कहा गया है कि वो गाजा में युद्ध रुकवाने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यानाकर्षण चाहते हैं, उन्हें सोशल मीडिया पर लाइक-शेयर की चिंता नहीं है, बल्कि वो चाहते हैं कि दुनिया अब एक्शन ले। इंस्टाग्राम पर उनके 1.82 करोड़ फॉलोवर्स हैं।

Time पर उक्त फोटोग्राफर का प्रोफाइल उसकी पत्रकार यास्मीन सेरहन ने लिखा है, जो सोशल मीडिया पर इजरायल विरोधी प्रोपेगंडा के लिए कुख्यात हैं। Time पर उनके लेख आप देखेंगे तो किसी में इजरायल और उसके साथी देशों पर युद्ध अपराधी होने का आरोप मढ़ा गया है, किसी में कहा गया है कि इजरायल वैश्विक विश्वसनीयता खो चुका है, किसी में राम मंदिर को सांप्रदायिक बताया गया है। बड़ी बात तो ये है कि 7 अक्टूबर को इजरायल पर हुए जिस हमले में 1200 लोग मारे गए, उस पर उन्होंने चुप्पी साध ली।

हर जगह वामपंथी-इस्लामी गिरोह की वही फितरत

वामपंथी-इस्लामी गिरोह की 3 प्रमुख खासियत है – उनके कनेक्शंस बहुत मजबूत होते हैं, वो जिस जनसमूह को अपना विरोधी मानते हैं उसका नरसंहार भी हो जाए तो चूँ तक नहीं करते और वो नए-नए किस्म के शब्द गढ़ कर खुद को बुद्धिजीवी दिखाते हैं। भारत में भी असहिष्णुता, मॉब लिंचिंग, भगवा आतंकवाद, हिन्दू नेशनलिस्ट जैसे शब्द गढ़े गए, ‘जय श्री राम’ को वॉर कराई बताया गया। सेक्युलरिज्म जैसे शब्द तो अक्सर उनके मुँह पर ही रहता है। भारत में आजकल ये गिरोह ‘संविधान बचाओ’ नारे के साथ चुनावी मैदान में है।

अगर कनेक्शन मजबूत नहीं होते तो मोताज़ अज़ैज़ा Time में न आ जाता। इसका एक और उदाहरण देखिए, हाल ही में उसने राशिदा तलैब से मिला था। वो फिलिस्तीनी मूल की अमेरिकी सांसद हैं, इजरायल के खिलाफ अमेरिकी नीति को प्रभावित करने की कोशिश में लगी रहती हैं। दूसरी बात, 7 अक्टूबर को इस गिरोह ने पूरी तरह छिपा दिया। आइए, जानते हैं कि 7 अक्टूबर को ऐसा क्या हुआ था कि इजरायल को जवाबी कार्रवाई के लिए मजबूर होना पड़ा।

7 अक्टूबर को भुलाया: ‘क्रिया’ गायब, ‘प्रतिक्रिया’ की कवरेज

उस दिन हमास के आतंकी बड़ी संख्या में इजरायल में घुसे और 1200 लोगों का नरसंहार किया, जिसमें महिलाएँ-बच्चे शामिल थे। पालतू जानवरों तक को गोली मारी गई। घरों को लूट कर फूँक दिया गया। मजहबी नारे लगाए गए। रीम में ‘सुपरनोवा’ म्यूजिक फेस्टिवल में शामिल महिलाओं का अपहरण किया गया, उनके साथ बलात्कार हुआ। वहाँ 300 के करीब लाशें मिलीं। शानी लॉक नाम की जर्मन महिला को किस तरह नग्न कर के परेड निकाला गया, इसका वीडियो भी सबने देखा।

क्या आपने इस ‘क्रिया’ की कवरेज देखी? नहीं। लेकिन, अपने हजार से अधिक लोगों का बेरहमी से क़त्ल किए जाने और पूरी जनता के भयाक्रांत होने के बाद एक छोटे से मुल्क ने जवाबी कार्रवाई कर दी तो उस ‘प्रतिक्रिया’ को युद्ध अपराध बता कर कथित पीड़ितों की तस्वीरें लेने वालों को प्रभावशाली लोगों की सूची में डाला जाने लगा। हमास ने जो आतंकी हमला किया, उन 1200 लाशों में से किसी एक की भी तस्वीर Time ने लगाईं, अपने फोटोग्राफर भेजे?

और हाँ, हमास खुद ही अपने लोगों का इस्तेमाल खुद को पीड़ित दिखाने के लिए करता रहा है। एक बार इजरायल की सेना फिलिस्तीन में घुसी थी तो वहाँ महिलाओं-बच्चों को एक इमारत में वहीं की फ़ौज ने बंधक बना कर रखा था। इजरायली सेना ने उन्हें छुड़ा कर निकाला, फिर इमारत को उड़ाया। हमास जब खुद ऐसी हरकतें करता है, फिर फिलिस्तीन के लोगों की इस हालत के लिए इजरायल कैसे जिम्मेदार हुआ, यहूदी कैसे दोषी हुए? वामपंथी-इस्लामी कौन सा गणित पढ़ कर ये गणनाएँ करते हैं?

दानिश सिद्दीकी: जिन आतंकियों का था हमदर्द, उन्होंने ही मार डाला

दानिश सिद्दीकी आपको याद हैं? वही Reuters का फोटोग्राफर, जो कोरोना के दौरान हिन्दुओं की जलती चिताओं की तस्वीरें बेच-बेच कर कमाई करता था। उसने इस्लामी कब्रिस्तानों की एक भी तस्वीर नहीं ली, हिन्दुओं की लाशों का सौदा किया। इसके लिए उसे दोबारा पुलित्जर पुरस्कार तक से सम्मानित कर दिया गया। कंधार के स्पिन बोल्डक में अफगानिस्तान फौजियों और तालिबान के बीच युद्ध को कवर करते समय आतंकियों ने उसे भी मार डाला, उसकी लाश के साथ बदतमीजी की।

ये वही इस्लामी आतंकी थे, जिनकी वो पैरवी करता था। रोहिंग्यों की तस्वीरें खींचने के लिए उसे पहली बार पुलित्जर इनाम मिला था। वही रोहिंग्या, जो भारत में घुसपैठ करते हैं, अवैध रूप से रह कर अपराधों को अंजाम देते हैं। वही रोहिंग्या, जिन्होंने अगस्त 2017 में म्यांमार में 100 से भी अधिक हिन्दुओं का नरसंहार किया। महिलाओं के सामने ही पुरुषों को काट डाला गया। महिलाओं-बच्चों को भी काटा गया। दानिश सिद्दीकी इन्हीं आतंकियों की पैरवी करता था, उसके ही वैचारिक भाइयों ने उसकी जान ले ली।

‘7 बच्चे अल्लाह की देन, लेकिन गरीबी मोदी की’ वोट देकर निकली मुस्लिम महिला ने दिया तर्क, बताया हिन्दुओं में होते 2-3 लेकिन मुस्लिमों में 5-6

शुक्रवार (19 अप्रैल, 2024) से देश में लोकसभा चुनाव 2024 की शुरुआत हो गई। शुक्रवार को वोटिंग का पहला चरण चालू हुआ है। पहले चरण से ही मतदान के बाद देश के मूड का अंदाज लगाया जा रहा है। इस बीच एक वीडियो वायरल हुआ है जहाँ वोट देकर निकली मुस्लिम महिलाएँ राजद को वोट देने के पीछे अपने तर्क बता रही हैं। इस बीच एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें एक मुस्लिम महिला कह रही है कि बच्चे अल्लाह की देन हैं, जबकि महंगाई पीएम मोदी की।

बिहार के गया में चुनाव पर रिपोर्टिंग कर रही एक महिला रिपोर्टर ने जब मतदान के बाद मुस्लिम महिलाओं से वोट करने के विषय में पूछा तो उन्होंने काफी चौंकाने वाले जवाब दिए। एक मुस्लिम महिला रज़ा खातून ने महंगाई का जिम्मेदार पीएम मोदी को बताया। महिला के सात बच्चे थे।

रिपोर्टर ने बुर्का पहने मुस्लिम महिला से पूछा कि वह वोट किन मुद्दों पर करके आई है। महिला ने जवाब दिया कि वह महंगाई पर वोट करके आई है और उनसे तेजस्वी यादव की पार्टी को वोट दिया है। महिला ने महंगाई को चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा बताया। महिला ने बताया वह अब बदलाव चाहती है।

महिला ने कहा महंगाई बहुत ज्यादा है, गरीब आदमी को रोजगार नहीं है इसलिए वह तेजस्वी को वोट देकर आई है। महिला ने कहा कि यदि राहुल गाँधी प्रधानमंत्री बनते हैं तो वह देश बदल देंगे। महिला ने इसके बाद प्रश्न पर बताया कि उसके सात बच्चे हैं। जब उससे ज्यादा बच्चों के बारे में पूछा गया तो उसने कहा कि बच्चे अल्लाह की देन हैं। इसके बाद उससे पूछा गया कि जब बच्चे ज्यादा हैं तो घर चलाने में परेशानी आना लाजमी बात है तो उसने कहा कि बच्चे अल्लाह की देन हैं लेकिन गरीबी मोदी जी कि देन है।

एक महिला ने बताया कि उनके 10 बच्चे हुए। एक युवती ने बताया कि उसके 6 बच्चे हैं। ज्यादा बच्चों पर उससे प्रश्न पूछा गया तो उसने बताया कि हिन्दुओं में कम बच्चे होते हैं, मुस्लिमों में बच्चे ज्यादा होते हैं। उसने इसे किस्मत की बात बताया। रिपोर्टर ने अन्य मुस्लिम महिलाओं से भी बात की जिन्होंने तेजस्वी यादव् के समर्थन की बात कही। उन्होंने कहा कि कुछ भी तेजस्वी उनका (मुस्लिमों का) साथ देंगे। यह वीडियो आप नीचे लगे लिंक पर देख सकते हैं।

शुक्रवार को देश के 21 राज्यों-केन्द्रशासित प्रदेशों में मतदान हो रहा है। इस चरण में 102 सीटों पर मतदान हो रहा है।