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‘आतंकी हमले’ से ऑस्ट्रेलिया में भड़का दंगा, जख्मी बिशप बोले – हमलावर के लिए प्रार्थना करो: अरबी बोलने वाले ने चर्च में घुसकर घोंप दिया था चाकू

ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में सोमवार (15 अप्रैल, 2024) को चर्च में हमले में 4 लोग घायल हो गए, जिसमें एक पादरी भी शामिल है। उक्त पादरी लोकप्रिय है और दुनिया भर में उसके अनुयायी हैं। चाकूबाजी की इस घटना के बाद स्थानीय लोगों और पुलिस में बहस भी हुई। सिडनी के डाउनडाउन से 30 किलोमीटर पश्चिम में स्थित सबअर्ब वेकले में हुए इस हमले के मामले में एक 15 वर्षीय किशोर को गिरफ्तार किया गया है। उसे एक चर्च में छिपाया गया, क्योंकि भीड़ उसे बाहर निकालने की माँग कर रही थी।

बोंडी क्षेत्र में बीचसाइड मॉल में हुए हमले की वारदात के बाद ये 3 दिनों में ऑस्ट्रेलिया में चाकूबाजी की दूसरी बड़ी वारदात थी। चर्च के सोशल मीडिया पेज पर लाइवस्ट्रीम से कैप्चर किए गए घटना के वीडियो में देखा जा सकता है कि ‘असीरियन क्राइस्ट द गुड शेफर्ड चर्च’ के बिशप मार मारी इमैनुएल सोमवार को एक शाम के परयर के दौरान बोल रहे थे, तभी एक व्यक्ति उनकी ओर आया और चाकू से हमला कर दिया। उसने पादरी के सिर और छाती में कई बार वार किया।

इस घटना से वहाँ मौजूद लोग चिल्लाने लगे। एक वीडियो में हमलावर को अरबी में चिल्लाते हुए सुना जा सकता है, जिसमें वो कह रहा है – “अगर वो हमारे पैगंबर का अपमान नहीं करते, तो मैं यहाँ नहीं आता। अगर वो हमारे मजहब में दखल नहीं देते, मैं यहाँ नहीं आता।” अब तक इस आतंकी वारदात के पीछे की मंशा का पता नहीं लगाया जा सका है। नाराज़ लोगों ने पुलिस पर पत्थरबाजी की। 100 से अधिक पुलिस अधिकारियों को मामले को सँभालने के लिए बुलाया गया, जिनमें 2 घायल हुए। अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है।”

2 लोगों ने तो मिर्च पाउडर भी स्प्रे किया। चूँकि घायल बिशप के अनुयायियों की संख्या काफी है, इसीलिए लोग गुस्से में थे। कैनी नाम के एक स्थानीय व्यक्ति ने कहा कि वो उक्त बिशप से प्यार करता है, क्योंकि वो लॉर्ड के बारे में बताते हैं। हमलावर को एक गुप्त स्थान पर ले जाया गया है। घायलों में फादर आइजैक रॉयल भी शामिल हैं। चर्च ने अपने एक पोस्ट में कहा है कि ये प्रार्थनाओं का समय है, बिशप और फादर की इच्छा है कि आप सब हमलावर के लिए भी प्रार्थना करें।

इमैनुएल को 2009 में प्रीस्ट और 2011 में बिशप की पदवी मिली थी। YouTube और TikTok पर उनके वीडियो क्लिप्स को लाखों व्यूज मिलते हैं। कोरोना के दौरान लॉकडाउन को उन्होंने ‘सामूहिक दासता’ करार दिया था। वो कह चुके हैं कि UN (संयुक्त राष्ट्र) की स्थापना शैतान ने की थी। न्यू साउथ वेल्स में इन हमलों को लेकर बैठक भी हुई है, जिसमें कई मजहबी नेता शामिल रहे। ऑस्ट्रेलिया के यहूदी संगठनों ने भी सिडनी पर चर्च के हमले की निंदा की है।

वहीं कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि हमलावर ने ‘अल्लाह-हू-अकबर’ भी बोला और पुलिस ने इसे आतंकी हमला घोषित किया है। NSW के पुलिस कमिश्नर करेन वेब्ब ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया में कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं है। उन्होंने कहा कि इस हमले के बाद अगर बदले में हमले होते हैं तो कानून इससे निपटेगा। घटना के बाद हुई हिंसा में पुलिस की 20 कार क्षतिग्रस्त हुई है। भीड़ रोकने के लिए पुलिस को हेलीकॉप्टर तक लगाने पड़े।

धनंजय सिंह की 3 पत्नी… पहली ने की ‘सुसाइड’, दूसरी ने पहुँचाया जेल, तीसरी जौनपुर से BSP कैंडिडेट: कौन हैं श्रीकला रेड्डी जिनके पास बाहुबली पति से भी अधिक प्रॉपर्टी

लोकसभा चुनाव 2024 में उत्तर प्रदेश की जौनपुर सीट से बहुजन समाज पार्टी के बाहुबली नेता धनंजय सिंह की पत्नी श्रीकला रेड्डी को बीएसपी ने चुनावी मैदान में उतारा है। बसपा द्वारा जारी की गई पाँचवी लिस्ट में उनका नाम है। पहले इस सीट से धनंजय खुद खड़े होने वाले थे। हालाँकि रंगदारी के केस में जेल जाने के बाद उनकी पत्नी श्रीकला रेड्डी चुनावी मैदान में उतरीं।

श्रीकला रेड्डी धनंजय सिंह की तीसरी पत्नी हैं। उनकी पहली पत्नी ने शादी के 9 महीने बाद संदिग्ध परिस्थितियों में सुसाइड कर ली थी। इसके बाद डॉ जागृति सिंह सिंह से उनकी शादी हुई, लेकिन जागृति पर नौकरानी की हत्या का आरोप लग गया और उन्हें 2013 में जेल जाना पड़ा। इसके बाद साल 2017 में धनंजय सिंह की शादी तलाकशुदा श्रीकला रेड्डी से बेहद भव्य ढंग से पेरिस में हुई थी, जिसकी चर्चा हर जगह थी। इस शादी में बड़े बड़े सुपरस्टार्स तक पहुँचे थे। वहीं लखनऊ में हुए रिसेप्शन में कई बड़े नेता आए थे।

आइए अब जब श्रीकला इन चुनावों के कारण चर्चा में हैं तो आपको बताते हैं कि उनकी पहचान सिर्फ धनंजय सिंह की पत्नी होने के नाते नहीं है बल्कि वो एक बड़ी बिजनेस फैमिली से ताल्लुक रखती हैं। फिलहाल श्रीकला जौनपुर की जिला पंचायत अध्यक्ष हैं जिसे लेकर बातें होती हैं कि धनंजय सिंह ने अपने रसूख पर उन्हें पद दिलाया था। हालाँकि, एक सच यह भी है कि राजनीति से सिर्फ श्रीकला का ससुराल पक्ष ही नहीं बल्कि मायका पक्ष भी शुरू से सक्रिय था। उनके पिता जितेंद्र रेड्डी 1969 में तेलंगाना की कोदद से निर्दलीय विधायक रह चुके हैं। वहीं उनकी माँ ललिता रेड्डी भी अपनी गाँव की सरपंच हैं।

इसके अलावा अगर केवल श्रीकला रेड्डी की संपत्ति की बात करें तो मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि धनंजय सिंह द्वारा दिए गए चुनावी हलफनामे के मुताबिक श्रीकला के पास 6.71 करोड़ से ज्यादा की चल संपत्ति है, जबकि 780 करोड़ रुपए की अचल संपत्ति है। इतनी संपत्ति धनंजय सिंह के पास भी नहीं है। कुल 5.31 करोड़ की अचल संपत्ति और 3.56 करोड़ की चल संपत्ति है।

बता दें कि श्रीकला रेड्डी की शिक्षा की बात करें तो श्रीकला ने 12वीं तक पढ़ाई चेन्नई से की है। इसके बाद उन्होंने हैदराबाद से बीकॉम किया। ग्रेजुएशन के बाद वह अमेरिका से आर्किटेक्चर इंटीरियर डिजाइनिंग का कोर्स करके बिजनेस में आ गईं। कुछ समय उन्होंने बिजनेस भी किया, लेकिन उनका राजनीति में रुझान शादी के बाद दिखा जब पहले उन्होंने भाजपा ज्वाइन की और पंचायत सदस्य भी बनीं। अब वह जौनपुर से प्रत्याशी हैं।

कपड़े उतार कर फिलिस्तीन के समर्थन नारेबाजी, रोकने पर सिक्योरिटी स्टाफ का सिर फोड़ा: गुजरात के वॉटर पार्क में हिंसा के बाद 15 हिरासत में, बाकी की तलाश जारी

गुजरात के सूरत शहर में फिलिस्तीन के समर्थन में नारेबाजी का मामला सामने आया है। यह नारेबाजी एक वॉटर पार्क में तब की गई जब वहाँ बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। नारेबाजी कर रही भीड़ को जब सिक्योरिटी स्टाफ ने रोकने की कोशिश की तब उन्हें भी पीट-पीट कर घायल कर दिया गया। मामले में FIR दर्ज कर के पुलिस ने 15 आरोपितों को हिरासत में लिया है। CCTV फुटेज के आधार पर अन्य संदिग्धों की तलाश की जा रही है। घटना शनिवार (13 अप्रैल, 2024) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना सूरत शहर के थाना क्षेत्र पूना की है। यहाँ ‘इमैजिका वॉटर पार्क’ स्थित है जिसमें शनिवार को बड़ी संख्या में लोग घूमने-फिरने आए थे। इस दौरान फिलिस्तीन के झंडे वाली टी-शर्ट पहन कर 2 युवक अंदर आए। उन्होंने जोर-जोर से ‘फिलिस्तीन जिंदाबाद’ के नारे लगाने शुरू कर दिए। थोड़ी देर में दोनों युवकों ने टी-शर्ट उतार कर हाथ में ले कर लहराना शुरू कर दिया। आरोप यह भी है कि सभी युवक वाटर पार्क के प्रतिबंधित क्षेत्र में घुसना चाहते थे। इस हरकत से पार्क में मौजूद लोगों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

वॉटर पार्क में मौजूद सुरक्षा गार्डों ने जब यह हरकत देखी तो वो रोकने के लिए आगे बढ़े। इस दौरान दोनों युवकों की सिक्योरिटी गार्डों से बहस हो गई। आरोप है कि इस दौरान लगभग 1 दर्जन अन्य युवक गार्डों की तरफ दौड़ पड़े। इन सभी ने मिल कर सिक्योरिटी अफसर मेहुल देसाई की पिटाई कर दी। मेहुल देसाई के सिर में चोटें आई हैं। उनको बचाने आए दूसरे सुरक्षाकर्मी को भी हमलावरों ने पीटा जिसके हाथ में घाव हो गया। हंगामे की सूचना पुलिस को दी गई।

घटनास्थल पर पहुँची पुलिस ने लगभग 15 लोगों को हिरासत में लिया है। इन सभी को थाने लाया गया। कुछ अन्य हमलावर फरार हो गए थे जिनकी CCTV फुटेज के आधार पर तलाश की जा रही है। पुलिस का कहना है कि आरोपितों के खिलाफ FIR दर्ज कर के कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

लालू-राबड़ी के ‘लालटेन युग’ पर PM मोदी का अटैक, कहा- बिहार को RJD की केवल दो देन- जंगलराज और भ्रष्टाचार: घमंडिया गठबंधन की पोल खोल गिनाए NDA के काम

लोकसभा चुनाव 2024 में एनडीए के लिए 400+ सीटों पर जीत का लक्ष्य लेकर बिहार पहुँचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गया और पूर्णिया में रैली की। उन्होंने इंडी गठबंधन के सभी दलों पर चुन-चुन कर करारे हमले किए। पीएम मोदी ने गया में कहा कि सूर्य की किरणें कल गया में रामलला के मस्तक का विशेष अभिषेक करेंगी। लेकिन घमंडिया गठबंधन के लोगों को राम मंदिर से भी परेशानी है। आरजेडी पर निशाना साधते हुए पीएम मोदी ने कहा कि राजद के कार्यकाल में चारा चोरी किया गया, गरीबों को लूटा गया। पीएम मोदी ने आरजेडी पर तंज कसते हुए कहा कि ‘क्या लालटेन से मोबाइल चार्ज होगा?’ ये चुनाव विकसित भारत, विकसित बिहार के उसी संकल्प का चुनाव है। गया की धरती पर उमड़ा ये जनसैलाब, ये अपार जनसमर्थन साफ बता रहा है – फिर एक बार मोदी सरकार।

पीएम मोदी ने कहा कि 25 करोड़ देशवासियों को आपके इस सेवक ने गरीबी से बाहर निकाला है। दशकों तक गरीबों को रोटी, मकान के सपनें दिखाए कॉन्ग्रेस और उनके साथियों ने, लेकिन, 4 करोड़ गरीबों को पक्के मकान दिए NDA सरकार ने। पीएम मोदी ने कहा कि दलित, वंचित और पिछड़ों के नाम पर कॉन्ग्रेस और राजद ने सिर्फ अपना राजनीतिक स्वार्थ साधा। दलितों वंचितों और पिछड़ों को अधिकार और सम्मानपूर्ण जीवन NDA ने दिया है।

संकल्प पत्र ही गारंटी कार्ड

पीएम मोदी ने कहा, “अभी 2 दिन पहले BJP ने अपना संकल्प पत्र जारी किया है। ऐसा पहली बार है, जब किसी पार्टी के संकल्प पत्र को गारंटी कार्ड बोला जा रहा है। क्योंकि 10 वर्षों में सबने देखा है कि मोदी की गारंटी यानी गारंटी पूरा होने की भी गारंटी। अब अगले 5 वर्षों के लिए मोदी का गारंटी कार्ड अपडेट हो गया है। गरीबों के लिए 3 करोड़ पक्के घर बनाए जाएंगे, ये मोदी की गारंटी है। गरीबों को अगले 5 साल तक मुफ्त राशन मिलेगा, ये मोदी की गारंटी है।” पीएम मोदी ने आगे कहा, “70 वर्ष की आयु से ऊपर के हर बुजुर्ग को 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलेगा, ये मोदी की गारंटी है। किसान सम्मान निधि आगे भी जारी रहेगी, ये मोदी की गारंटी है।”

पीएम मोदी ने पूर्णिया में कहा कि ‘आपके सपने ही मोदी का संकल्प है।’ हमारी सरकार ने सीमांचल इलाके की कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए वंदे भारत और नमो भारत जैसी ट्रेनें दी।

पीए मोदी ने कॉन्ग्रेस और इंडी अलायंस पर बोला हमला

पीएम मोदी ने कॉन्ग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर हमला बोला। उन्होंने कहा, “कल रामनवमी का पावन पर्व है। सूर्य की किरणें कल अयोध्या में रामलला के मस्तक का विशेष अभिषेक करेंगी, लेकिन घमंडिया गठबंधन के लोगों को राम मंदिर से भी परेशानी है। जो लोग कभी भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाते थे, वो आज राम मंदिर पर कैसी-कैसी भाषाएं बोल रहे हैं। एक समुदाय के वोटबैंक के लिए इन्होंने प्राण प्रतिष्ठा का निमंत्रण ठुकरा दिया। ये हमारे देश के संस्कार और परंपरा नहीं है। पीएम मोदी ने कहा, “कॉन्ग्रेस के युवराज तो खुलेआम कहते हैं कि, वो हिन्दू धर्म की शक्ति का विनाश कर देंगे। इनके दूसरे साथी हमारे सनातन धर्म को डेंगू, मलेरिया कहते हैं।”

जंगलराज का सबसे बड़ा चेहरा राजद, दूसरों के काम को अपना कहते हैं

पीएम मोदी ने कहा, “RJD ने बिहार को केवल दो ही चीजें दी हैं- जंगलराज, और भ्रष्टाचार! इन्हीं का दौर था, जब बिहार में अपहरण और फिरौती एक उद्योग बन गया था। हमारी बहन-बेटियाँ घर से बाहर नहीं निकल पाती थी, हमारे गया जैसे इलाके नक्सली हिंसा की आग में जलते रहते थे। RJD ने बिहार के कितने ही परिवारों को बिहार छोड़कर जाने पर मजबूर कर दिया था।”

पीएम मोदी ने कहा कि बिहार में जंगलराज का सबसे बड़ा चेहरा राजद है। बिहार में भ्रष्टाचार का दूसरा नाम राजद है। बिहार की बर्बादी की सबसे बड़ी गुनाहगार राजद है। उन्होंने कहा, “घमंडिया अलायंस के पास न कोई विजन है, न कोई विश्वास है। ये लोग जब वोट मांगने जाते हैं, तो भी नीतीश जी के कामों पर वोट मांगते हैं। ये लोग क्यों नीतीश जी और केंद्र सरकार के कामों का क्रेडिट खाते हैं, वो पूरा बिहार जानता है। RJD ने भी इतने वर्षों तक बिहार पर राज किया है। लेकिन इनकी हिम्मत नहीं है कि अपनी सरकारों ने क्या काम किए, उसकी चर्चा कर लें।”

क्या शशि थरूर हैं ‘गंदा शशि’? करण थापर ने ‘इज्जत’ बचाने को किया था मैसेज, महुआ मोइत्रा के पूर्व बॉयफ्रेंड का दावा: होटल में यौन शोषण का मामला

अधिवक्ता जय अनंत देहाद्राई कुछ दिनों पहले तक खासे चर्चा में थे, कारण थीं – महुआ मोइत्रा। TMC नेता महुआ मोइत्रा की सांसदी जाने और उनके खिलाफ CBI व ED की जाँच शुरू होने का कारण जय अनंत देहाद्राई ही थे जो उनके पूर्व प्रेमी हैं। महुआ मोइत्रा ने उनका कुत्ता तक चुरा लिया था, लेकिन कई बार चेतावनी के बाद उन्होंने ‘हेनरी’ को लौटा दिया। शशि थरूर के साथ पार्टी करते हुए उनकी तस्वीर भी सामने आई थी। अब इन सब प्रकरण में करण थापर का नाम आया है।

जय अनंत देहाद्राई ने नया खुलासा किया है। असल में जय अनंत देहाद्राई ने बताया है कि ‘The Wire’ में काम करने वाले वरिष्ठ एजेण्डाबाज करण थापर ने उन्हें मैसेज भेजा है। करण थापर को विकृत एवं भ्रष्ट शैतान बताते हुए अधिवक्ता ने कहा कि 11 अक्टूबर, 2022 को होटल में यौन शोषण के मामले में ‘गंदे शशि’ को बचाने के लिए उन्होंने पूरा जोर लगा दिया था, जबकि उन्हें पीड़िता का समर्थन करना चाहिए था। जय अनंत देहाद्राई ने कहा कि लुटियंस दिल्ली की गंदगी हैरान करने वाली है।

उन्होंने जो स्क्रीनशॉट शेयर किया है, उसमें करण थापर ने उन्हें लिखा है, “जय, चूँकि तुम मुझसे बात नहीं करते हो इसीलिए मैंने सोचा कि मैं तुम्हें टेक्स्ट करूँ। अगर तुम सब कुछ सार्वजनिक कर देते हो और उनकी प्रतिष्ठा व राजनीतिक करियर को हानि पहुँचाओगे, तबाह करोगे तो इसका शशि पर कोई असर नहीं पड़ेगा क्योंकि वो चुनाव हारने जा रहे हैं। तुमने मुझे बताया है कि उन्होंने इससे पहले कई बार ऐसा किया, तो मुझे लगता है कि लोग इस बारे में जानते हैं।”

इसके बाद करण थापर किसी महिला को लेकर बात करने लगे और कहने लगे, “तुम उनसे पागलपन की हद तक ___ करते हो तो फिर कुछ ऐसा क्यों करना जिससे उसकी इज्जत जाए? इस बारे में सावधानी से सोचो। कम से कम उससे इस बारे में चर्चा तो करो, सब कुछ सार्वजनिक करने से पहले। तुम शशि को लेकर उसे खतरे में नहीं डालोगे। कृपया रुको और फिर से सोचो।” CNN-IBN के साथ लंबे समय तक सक्रिय रहे करण थापर जवाहरलाल नेहरू के भी रिश्तेदार हैं।

असल में जय अनंत देहाद्राई ने इस मामले को लेकर पहले भी बताया था। अधिवक्ता ने दावा किया था कि उन्होंने और महुआ मोइत्रा ने दिल्ली के ताज चैम्बर्स में शशि थरूर को एक महिला का यौन शोषण करते हुए देखा था। हालाँकि, ‘X’ पर किया गया ये पोस्ट उन्होंने डिलीट कर लिया था। महुआ मोइत्रा पर सांसद रहते कारोबारी दर्शन हीरानंदानी से पैसे और तोहफे लेकर संसद में अडानी को नुकसान पहुँचाने के लिए सवाल पूछने के आरोप हैं। उन्होंने पैसे लेकर अपने सरकारी आवास की मरम्मत कराई, कारोबारी की गाड़ियों का यात्रा के लिए इस्तेमाल किया।

हमास का समर्थन, PM मोदी को गाली, हिंदुओं से घृणा… अमेरिकी संस्था ने रिद्धि पटेल को नौकरी से निकाला, हत्या की धमकी के बाद हुई थी जेल

अमेरिका में रहने वाली भारतीय मूल की फिलीस्तीन समर्थक और हिंदू विरोधी रिद्धि पटेल को उनकी नौकरी से निकाल दिया गया है। वह ‘सेंटर ऑफ रेस, पावर्टी एन्ड एनवायरनमेंट’ संस्था में काम करती थीं। अब इसी संस्था ने अपने एक्स अकॉउंट पर रिद्धि को जॉब से निकालने की जानकारी दी है।

एक्स पर एक पोस्ट में सीआरपीई ने कहा कि वे हिंसा या अनैतिक व्यवहार की किसी भी धमकी की निंदा करते हैं। सीआरपीई ने कहा, “इस घटना के परिणामस्वरूप, हमने रिद्धि पटेल को बर्खास्त करने का निर्णय लिया है।”

एक्स पर साझा किए गए बयान में कहा गया है, “सेंटर ऑन रेस, पॉवर्टी एंड द एनवायरनमेंट (सीआरपीई) को 10 अप्रैल, 2024 को बेकर्सफील्ड सिटी काउंसिल की बैठक में हमारे पूर्व कर्मचारी रिद्धि पटेल से जुड़ी एक घटना के बारे में पता चला। हम हिंसा या अनैतिक व्यवहार की किसी भी धमकी की स्पष्ट रूप से निंदा करते हैं। हम पिछले 35 वर्षों से हमारे सभी कार्यों और संबंधों में सत्यनिष्ठा, व्यावसायिकता और सम्मान के उच्चतम मानकों को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। इस घटना के परिणामस्वरूप, हमने रिद्धि पटेल को बर्खास्त करने का निर्णय लिया। हम मानते हैं कि यह एक कठिन स्थिति है, और हम इसे अत्यंत सावधानी और संवेदनशीलता के साथ संभालने में लगे हुए हैं।”

बयान में आगे बताया गया कि सीआरपीई अपने मिशन पर ध्यान केंद्रित करना जारी रखेगा, वह जिनकी सेवा करते हैं उनकी सेवा भी करते रहेंगे। संस्था ने कहा कि वह अहिंसा, समावेशिता और सम्मान की संस्कृति को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता पर कायम हैं।

बता दें कि रिद्धि पटेल 28 वर्षीय भारतीय मूल की हिंदू विरोधी, हमास समर्थक हैं। पूर्व में अच्छी एथलीट होने के कारण उन्हें सीआरपीई में नौकरी मिली थी। हालाँकि, उससे हाथ उन्हें इसलिए धोना पड़ा क्योंकि कुछ दिन पहले ही उन्होंने कैलिफोर्निया स्थित बेकर्सफील्ड में वहाँ के मेयर को मारने की धमकी दी थी जिसके फौरन बाद मेयर करेन गोह ने उन्हें हिरासत में लेने के लिए पुलिस से कहा था। पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद जब उन्हें कोर्ट ले जाया गया तो वहाँ रोने लगी थी। इसकी वीडियो भी सोशल मीडिया पर आई थी, जिसे देखते हुए लोग बोल रहे थे कि पहले धमकी देते हुए रोना नहीं आया, अब सजा मिलने पर क्यों रो रही हो।

मालूम हो कि पटेल का हिंदू विरोधी इतिहास रहा है। उसने हमास के समर्थन में ही नहीं, बल्कि पीएम मोदी के लिए अकसर उलटा सीधा कहा है। रिद्धि पटेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा और ‘हिन्दू फासीवाद’ को ‘फक यू’ कहते हुए अपशब्दों का इस्तेमाल किया था। वो फिलिस्तीन के समर्थन में अक्सर प्रदर्शन करती रही हैं।

बंगाल में रामनवमी शोभायात्रा निकालने के लिए भी हिंदुओं को जाना पड़ा हाई कोर्ट, ममता सरकार कह रही थी- रास्ता बदलो: HC ने कहा- उसी रूट से निकलेगी

कोलकाता हाईकोर्ट ने मंगलवार (16 अप्रैल 2024) को दो हिंदू संगठनों को बंगाल के हावड़ा में राम नवमी के मौके पर शोभा यात्रा निकालने की अनुमति दी है। इन संगठनों के नाम अंजनी पुत्र सेना और विश्व हिंदू परिषद हैं। ये संगठन हावड़ा में 17 अप्रैल को शोभा यात्रा निकालेंगे।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, कोलकाता हाईकोर्ट के जस्टिस जय सेन गुप्ता ने हिंदू संगठनों को शोभा यात्रा निकालने की अनुमति दी। अनुमति में ये भी कहा गया कि ये शोभा यात्रा उसी रास्ते से होकर निकलेगी जिस रास्ते से पिछले 15 सालों से निकलती है।

बता दें कि पिछले साल इसी क्षेत्र में शोभा यात्रा के दौरान हावड़ा मैदान पर हिंसा हुई थी। इसके कारण बंगाल सरकार ने हिंदुओं से कहा था कि वो शोभा यात्रा के लिए अलग-अलग रास्तों का इस्तेमाल करें। हालाँकि हिंदू संगठनों को ये नागवार गुजरा और उन्होंने कोर्ट से गुहार लगाई।

अब कोर्ट ने हिंदुओं के पक्ष को सुनते हुए इस शोभा यात्रा की अनुमति दे दी है, लेकिन साथ ही कोर्ट ने कहा है कि जुलूस में 200 लोगों से ज्यादा लोग शामिल नहीं होने चाहिए। इसके अलावा किसी भी तरह से किसी भी समुदाय के लिए कोई भड़काऊ बयानबाजी या नारेबाजी भी नहीं होनी चाहिए। कोर्ट ने राज्य सरकार से कहा है कि वो राम नवमी की शोभा यात्रा आराम से निकले, इसके लिए राज्य पुलिस के साथ केंद्रीय बलों की सहायता भी ले सकती है।

गौरतलब है कि साल 2023 में रामनवमी के दिन पश्चिम बंगाल में कई जगहों पर हिंसा हुई थी। इसके कई वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए थे। रामनवमी पर शोभायात्रा के दौरान असामाजिक तत्वों ने पत्थरबाजी की थी और फिर कई वाहनों में आग लगा दी गई थी। इसके बाद कोलकाता हाईकोर्ट ने इस मामले को राष्ट्रीय जाँच एजेंसी को सौंपा था। बाद में 11 लोग गिरफ्तार हुए थे।

सोई रही सरकार, संतों को पीट-पीटकर मार डाला: 4 साल बाद भी न्याय का इंतजार, उद्धव के अड़ंगे से लेकर CBI जाँच तक जानिए कहाँ तक पहुँचा पालघर का केस

महाराष्ट्र के पालघर में साधुओं की निर्मम हत्या मामले में हाल में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ। मुख्यमंत्री शिंदे वाली शिवसेना के एक नेता ने दावा कर बताया कि पालघर में हिंदू साधुओं की हत्या पर सीबीआई की जाँच इसलिए नहीं हुई थी क्योंकि उद्धव ठाकरे उस समय सो रहे थे और राहुल गाँधी के दबाव में उन्होंने इस मामले में एक्शन नहीं लिया था। आज उस मॉब लिंचिंग की घटना को 4 वर्ष बीत गए हैं। साल 2022 में जब महाराष्ट्र में NDA सरकार बनी तो ये मामला सीबीआई को सौंपा गया, लेकिन जाँच एजेंसी के पास जाने से पहले इस मामले में क्या-क्या हुआ था… आइए जानते हैं।

16 अप्रैल 2020- पालघर में साधुओं की हत्या

16 अप्रैल 2020 को पालघर में कल्पवृक्ष गिरि और सुशील गिरि नाम के दो साधुओं और उनके ड्राइवर को पालघर में भीड़ ने पीट-पीट कर मार डाला गया था। जब यह घटना हुई थी, तब दोनों साधु मुंबई से सूरत की यात्रा कर रहे थे। इस दौरान 200 से अधिक लोगों की भीड़ ने उन्हें रोक लिया था और पथराव करने के बाद उनकी कार को उलट दिया था। भीड़ ने साधुओं की इतनी पिटाई की थी कि उन्होंने अपना दम तोड़ दिया था।

घटना की एक वीडियो भी सामने आई थी। इस वीडियो में साधुओं को निर्ममता से पीटते देखा गया था। वीडियो दिल दहलाने वाली थी। साधु पुलिस के भरोसे भीड़ के बीच तक आए थे। उन्हें लगा था कि शायद पुलिस उन्हें बचा लेगी, लेकिन हुआ क्या? एकदम उलटा। जब भीड़ ने साधुओं के ऊपर हमला किया तो उनके बचाव की जगह हर कोई मूकदर्शक बन गया। आज भी बुजुर्ग साधु की उस वीडियो को शेयर करके कहा जा रहा है कि इन साधुओं को 4 साल बाद भी न्याय नहीं मिला है।।

उद्धव सरकार ने सीबीआई जाँच का किया विरोध, शिंदे सरकार मानी

साल 2023 में एकनाथ शिंदे की सरकार ने इस मसले पर सीबीआई जाँच कराने का फैसला लिया। बात सुप्रीम कोर्ट तक पहुँची तो सुप्रीम कोर्ट ने भी सीबीआई जाँच को मंजूरी दी और कहा कि राज्य सरकार ने फैसला ले लिया है तो इस पर कोर्ट के किसी प्रकार के निर्देश की आवश्यकता नहीं है। कोर्ट का ये कहना दिखाता है कि अगर उद्धव सरकार भी चाहती तो इस मामले में वो सीबीआई की जाँच करवा सकते थे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ क्योंकि उन्होंने इस दिशा में कदम ही आगे नहीं बढ़ाए।

इस मामले में उन्होंने बाकायदा सुप्रीम कोर्ट में जाकर सीबीआई जाँच का विरोध किया था। उद्धव ठाकरे सरकार की ओर से यह दलील दी गई थी कि महाराष्ट्र पुलिस ने इस मामले में चार्जशीट दाखिल की है। साथ ही, जिन पुलिसकर्मियों ने इसकी जाँच में लापरवाही की थी, उनके खिलाफ एक्शन भी लिया जा चुका है।

ईसाई मिशनरियों का हाथ

गौरतलब है कि एक तरफ जहाँ इस हत्या मामले से उद्धव सरकार का हिंदूविरोधी चेहरा उजागर हुआ था। वहीं पड़ताल के दौरान कुछ एंगल भी सामने आए थे जो बेहद चौंकाने वाले थे। पालघर में साधुओं की लिंचिंग के बाद मीडिया रिपोर्ट में यह बात सामने आई थी कि आदिवासी इलाकों में हिंदू संतों के खिलाफ एक हवा बनाई गई और इसी कारण संतों की मॉब लिंचिंग हुई। उस साजिश में ईसाई मिशनरियों के हाथ होने के भी संकेत मिले थे।

बताया गया था कि इलाके में सक्रिय ईसाई मिशनरियों को राजनैतिक संरक्षण प्राप्त है और उन्हीं लोगों ने भीड़ को साधुओं के खिलाफ भड़काया। इसके अलावा ये रिपोर्ट भी सामने आई थी कि घटना के वक्त भीड़ के साथ एनसीपी नेता और सीपीएम नेता भी मौजूद थे।

धीरे-धीरे आरोपितों को मिली जमानत

हिंदू संगठनों ने इस मुद्दे को जगह-जगह उठाया था। मीडिया से लेकर सोशल मीडिया पर इसकी कवरेज लगातार होने पर प्रशासन ने इसमें अपनी जो कार्रवाई की। उसमें कुछ डिटेल्स सामने आई। ये पता चला कि उस दिन साधुओं को मारने में 400-500 लोग भीड़ का हिस्सा थे। बाद में पुलिस ने इनमें से 180 लोगों को सीसीटीवी फुटेज के आधार पर गिरफ्तार किया था। लेकिन इनमें से कई आरोपितों को जमानत मिलती गई।

2020 के लिंचिंग मामलें में 2021 में विशेष अदालत ने 89 लोगों को जमानत दी। इसके बाद 2022 में 10 और लोगों को जमानत दे दी गई। जस्टिस ने कर्क दिया कि घटनास्थल पर मौजूद लोगों, वीडियो फुटेज में मृतक के साथ करने वाले हमलावरों और उकसाने वाले लोगों में अंतर होता है।

यूपी में होता तो उलटा टंगवा देता- सीएम योगी

हाल में पालघर का यह मामला महाराष्ट्र में दोबारा तब गरमाया जब एकनाथ शिंदे की सरकार बनी और उन्होंने इसे गंभीरता से लिया। सीबीआई जाँच को अनुमति तो मिली ही। साथ ही शिंदे गुट के विधायक प्रताप सरनाईक अपनी ओर से दोनों संतों के परिजनों को 5-5 लाख रुपए दिए गए। मालूम हो कि इस एक घटना ने देश के हर हिंदू को झकझोर दिया था। कुछ दिन पहले वर्धा में चुनावी सभा के दौरान यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना पर कहा भी था कि यहाँ पालघर में साधुओं की पीट-पीटकर हत्या कर दी जाती है। उत्तर प्रदेश में ऐसा होता तो मैं आरोपितों को उल्टा टंगवा देता।

‘मोदी की गारंटी’ भी होगी पूरी: 2014 और 2019 में किए इन 10 बड़े वादों को मोदी सरकार ने किया पूरा, पढ़ें- क्यों जनता चाहती है ‘तीसरी बार मोदी सरकार’

भारतीय जनता पार्टी ने 14 अप्रैल 2024 को लोकसभा चुनाव 2024 के लिए अपना ‘संकल्प पत्र’ यानी चुनाव के लिए अपना घोषणापत्र जारी किया। भाजपा का घोषणापत्र “मोदी की गारंटी” टैगलाइन के साथ जारी किया गया है। ‘मोदी की गारंटी’ शब्द का इस्तेमाल बीजेपी लोकसभा चुनाव के शंखनाद से कई माह पहले से कर रही है। बीजेपी ने अपने घोषणा पत्र में कई अहम वादे किए हैं, जिसमें यूसीसी, वन नेशन-वन इलेक्शन, महिला सशक्तिकरण, युवाओं और गरीबों का उत्थान प्रमुख है।

बीजेपी के नए चुनावी घोषणा पत्र को देखने के साथ ही ये जान लेना भी जरूरी है कि मोदी सरकार ने अपने पिछले 2 कार्यकाल में कौन से बड़े चुनावी वादे किए थे और उनमें से कितने पूरे हुए। हम यहाँ उन 10 बड़े वादों को रख रहे हैं, जिन्हें मोदी सरकार ने साल 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में किए थे और वो पूरे हो चुके हैं।

राम मंदिर निर्माण

भाजपा ने साल 2014 और 2019 दोनों घोषणापत्रों में अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण की बात कही थी और सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर निर्भरता की बात कही थी। साल 2014 में बीजेपी ने कहा था कि “भाजपा अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण की सुविधा के लिए संविधान के ढाँचे के भीतर सभी संभावनाओं का पता लगाने के लिए अपना रुख दोहराती है”। साल 2019 के घोषणापत्र में भाजपा ने कहा, “हम राम मंदिर पर अपना रुख दोहराते हैं। हम संवैधानिक ढाँचे के भीतर सभी संभावनाओं का पता लगाएँगे और अयोध्या में राम मंदिर के शीघ्र निर्माण की सुविधा के लिए सभी आवश्यक प्रयास करेंगे।” ये वो मुद्दा है, जिसपर विपक्ष लगातार बीजेपी का मजाक उड़ाता रहा है। ये कहते हुए कि ‘मंदिर वहीं बनाएँगे, लेकिन तारीख नहीं बताएँगे।’

विपक्ष द्वारा मजाक उड़ाने के बावजूद बीजेपी ने इस मुद्दे पर कोई हड़बड़ी नहीं की। सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2019 में जब हिंदुओं के पक्ष में फैसला सुनाया, तो राम मंदिर का मार्ग प्रशस्त हुआ। और अब नतीजा देखिए कि बीजेपी सरकार ने बेहद तेजी से काम किया और इस साल के पहले माह में ही रामलला की प्राण प्रतिष्ठा भगवान राम के भव्य मंदिर में हो चुकी है।

खास बात ये है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंदिर निर्माण की निगरानी की और हर काम से जुड़े रहे, इस बात के बावजूद कि मंदिर में एक भी पैसा सरकार का नहीं लगा, बल्कि करोड़ों भक्तों द्वारा दिए गए दान से हुआ। अब हजारों श्रद्धालु प्रतिदिन रामलला के दर्शन कर रहे हैं और खास मौकों पर ये संख्या लाख को पार कर जाती है।

अनुच्छेद 370 और 35 ए को हटाना

बीजेपी ने साल 2014 के अपने घोषणापत्र में अनुच्छेद 370 को खत्म करने का वादा किया था, साल 2019 के घोषणापत्र में पार्टी ने न सिर्फ बेहतर दूरदर्शिता दिखाई बल्कि अनुच्छेद 35ए को खत्म करने की भी बात कही। साल 2014 के घोषणापत्र में कहा गया था, “बीजेपी अनुच्छेद 370 पर अपना रुख दोहराती है, और सभी हितधारकों के साथ इस पर चर्चा करेगी और इस अनुच्छेद को निरस्त करने के लिए प्रतिबद्ध है।” दूसरी ओर 2019 के घोषणापत्र में बताया गया कि कैसे सत्तारूढ़ दल ने निर्णायक कार्यों और दृढ़ नीति के माध्यम से जम्मू-कश्मीर में शांति सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक प्रयास किए।

साल 2019 में मोदी सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल में संसद के पहले पूर्ण सत्र में ही अपना सबसे बड़ा वादा पूरा किया और बता दिया कि देश में ‘एक देश-एक संविधान और एक विधान’ का समय आ चुका है। मोदी सरकार ने अनुच्छेद 370 को निरस्त कर दिया और अनुच्छेद 35ए को भी। इसे सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती दी गई, जिसे खारिज कर दिया गया। आज जम्मू-कश्मीर में भी देश के अन्य राज्यों की तरह केंद्र के सभी कानून लागू होते हैं। जम्मू-कश्मीर में विकास की नई बयार चली है।

‘मेक इन इंडिया इन डिफेंस’ और रक्षा बुनियादी ढांचा

बीजेपी के साल 2014 और साल 2019 के दोनों घोषणापत्रों में रक्षा क्षेत्र में ‘मेक इन इंडिया’ की अहम जगह थी। बीजेपी ने सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण, रक्षा क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास में वृद्धि और स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकियों के विकास की घोषणा की थी, जिसे मोदी सरकार ने पूरा किया। आज भारत के रक्षा निर्यात में 20 गुना की बढ़ोतरी हुई है। भारत के हथियारों का इस्तेमाल दुनिया के तमाम देश कर रहे हैं।

भारत में रक्षा क्षेत्र में विदेशी निवेश भी कई गुना बढ़ा है। भारत में फाइटर जेट के इंजन तक बनने का काम शुरू हो रहा है, तो ड्रोन से लेकर तोप, तेजस विमान, पनडुब्बियाँ जैसी तमाम भारी मशीनरी भारत में ही बन रहे हैं। भारत सरकार ने 928 सामानों की खरीदी पर बैन लगा दिया है और उन्हें भारत में ही उत्पादित किया जा रहा है। आपात स्थिति में छोड़कर गोला बारूद की खरीदारी पर भी रोक लग गई है।

इसके अलावा कई परियोजनाएं जो वर्षों से रुकी हुई थीं, मोदी सरकार के तहत तेजी से आगे बढ़ी हैं। उदाहरण के लिए, इसका एक प्रमुख उदाहरण भारत का स्वदेशी लड़ाकू विमान, एलसीए तेजस है। तेजस को 1980 के दशक में मंजूरी दी गई थी, इसकी पहली सफल उड़ान 2001 में वाजपेयी सरकार के दौरान हुई थी। इसके बाद, परियोजना धीमी गति से आगे बढ़ती रही।

मोदी सरकार के तहत इस परियोजना को गति मिली। 2015 में तेजस को पहली बार वायुसेना में शामिल किया गया था. वर्तमान में, भारतीय वायु सेना के पास लगभग 40 तेजस एमके1 विमान हैं, जबकि उसने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को लगभग 83 और तेजस एमके1 (तेजस मार्क-1ए का उन्नत संस्करण) का ऑर्डर दिया है। हाल ही में भारतीय वायु सेना ने खतरनाक लड़ाकू हेलीकॉप्टरों को शामिल किया, जिनकी लंबे समय से प्रतीक्षा थी। इसके अलावा सेना ने 550 अर्जुन मार्क-1 टैंक का ऑर्डर दिया है।

सड़क और राजमार्ग

2014 के घोषणापत्र में, भाजपा ने पूर्वोत्तर और जम्मू-कश्मीर में विश्व स्तरीय राजमार्गों, तटीय राजमार्गों और बेहतर सड़क बुनियादी ढांचे की बात की थी। 2019 के घोषणापत्र में, भाजपा ने कहा कि उसने गाँवों को ग्रामीण सड़कों से जोड़ने के लिए 60,000 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग बनाने की योजना बनाई है। ये राजमार्ग गोदामों और अन्य जैसी बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं का हिस्सा हैं। पार्टी ने 2022 तक राष्ट्रीय राजमार्ग की लंबाई दोगुनी करने का भी वादा किया। देश की प्रगति में सड़क बुनियादी ढाँचा सबसे महत्वपूर्ण है और मोदी सरकार ने इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर काम किया है।

बीजेपी ने वादा किया था कि 2023 तक 99% गाँव सड़कों से जुड़ जाएँगे। 2013-14 में सड़क निर्माण 11.6 किमी/प्रतिदिन था। उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार, उस अवधि में केवल 4,300 किलोमीटर राजमार्गों का निर्माण किया गया था। हालाँकि मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद गति तेजी से बढ़ी और 2022-23 में यह 28.3 किमी/दिन तक पहुँच गई। अगर कुल सड़क निर्माण की बात करें तो जुलाई 2023 तक यह 91 किमी प्रति दिन की दर से 7,42,398 किमी थी। मार्च 2014 तक कुल सड़कें 80 किमी प्रति दिन की दर से 3,81,393 किमी थीं।

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के सचिव अनुराग जैन के अनुसार, पिछले दशक में देश भर में 95,000 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण हुआ है । 2014 के आंकड़ों की तुलना करने पर, यह 28.3 किमी से अधिक राजमार्गों के औसत दैनिक निर्माण का अनुवाद करता है, जो 143% की पर्याप्त वृद्धि दर्शाता है। 

रेलवे

साल 2014 के घोषणापत्र में भाजपा ने तीर्थयात्रा रेल, रेलवे मॉडरेशन और आवश्यक बुनियादी ढाँचे और सार्वजनिक उपयोगिताओं के साथ सभी स्टेशनों के आधुनिकीकरण का वादा किया था। 2019 में, भाजपा ने रेलवे स्टेशनों के आधुनिकीकरण, वंदे भारत एक्सप्रेस जैसी नई संस्करण ट्रेनों और बहुत कुछ का वादा किया। आज देश भर में 51 वंदे भारत ट्रेनें चल रही हैं। पिछले एक दशक में भारतीय रेलवे नेटवर्क में  व्यापक परिवर्तन हुए हैं। रेलवे में आधुनिकीकरण के प्रयास जारी हैं और मोदी सरकार ने इस प्रयास के लिए पर्याप्त धनराशि आवंटित की है। रेल बजट में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है, जिससे देश भर में तेजस, वंदे भारत और गतिमान एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों की शुरुआत संभव हो सकी है।

खौस तौर पर रेलवे क्षेत्र में मोदी सरकार की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि  94% नेटवर्क का विद्युतीकरण है । 2014 में, जब मोदी सरकार ने सत्ता संभाली, तब देश का केवल 21,801 किलोमीटर रेलवे नेटवर्क विद्युतीकृत था। वर्तमान में देश के 61,000 किमी से अधिक रेलवे नेटवर्क का विद्युतीकरण किया जा चुका है । यूपीए सरकार के तहत, दैनिक विद्युतीकरण दर 1.42 किलोमीटर थी, जबकि मोदी सरकार के तहत यह बढ़कर 14 किलोमीटर प्रति दिन हो गई है। मोदी प्रशासन ने विद्युतीकरण प्रयासों के लिए ₹43,346 करोड़ आवंटित किए हैं।

इसके अलावा न केवल विद्युतीकरण बल्कि नई रेलवे लाइनें बिछाने में भी महत्वपूर्ण प्रगति हुई है, मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान कुल 25,871 किलोमीटर नई लाइनें स्थापित की गईं। मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान रेलवे को पर्याप्त मात्रा में धन आवंटित किया गया है। 2014 में रेलवे को लगभग ₹29,000 करोड़ का बजट मिला था। साल 2024-25 तक यह बजट लगभग आठ गुना बढ़कर ₹2.90 लाख करोड़ हो गया है। नई लाइनों और विद्युतीकरण परियोजनाओं में निवेश के अलावा, मोदी सरकार स्टेशन पुनर्विकास पहल पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है।

ऊर्जा

ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोतों के प्रति भाजपा की प्रतिबद्धता पिछले दस वर्षों में किए गए कार्यों से दिखाई देती है। साल 2014 के घोषणापत्र में ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोतों को भारत के ऊर्जा मिश्रण के एक महत्वपूर्ण घटक के रूप में उल्लेख किया गया था। 2019 तक, इस क्षेत्र में बहुत काम किया गया था और घोषणापत्र में भविष्य के लिए एक स्पष्ट रोडमैप था।

साल 2019 के घोषणापत्र में भाजपा ने उल्लेख किया कि भारत प्रभावी और व्यवहार्य हस्तक्षेपों के माध्यम से जलवायु परिवर्तन को संबोधित करने में एक वैश्विक चैंपियन बन गया है। उस समय तक, भारत ने 76.87 गीगावॉट की संचयी स्थापित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल कर ली थी, साथ ही 175 गीगावॉट का अपना घोषित लक्ष्य भी हासिल कर लिया था।

नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा 6 दिसंबर 2023 को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 31 अक्टूबर 2023 तक देश में गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा संसाधनों से कुल 186.46 गीगावॉट क्षमता स्थापित की गई थी। इसमें 178.98 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा शामिल थी। ऊर्जा और 7.48 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा। इसके अलावा, 114.08 गीगावॉट क्षमता कार्यान्वयनाधीन है और 55.13 गीगावॉट क्षमता निविदा के अधीन है।

स्वास्थ्य देखभाल

सत्तारूढ़ पार्टी के 2014 के घोषणापत्र में टेलीमेडिसिन, मोबाइल हेल्थकेयर और योग और आयुष सहित भारतीय चिकित्सा प्रणाली के बारे में बात की गई थी। 2019 तक, आयुष्मान भारत के तहत प्रधान मंत्री जन आरोग्य योजना ने 10.74 करोड़ गरीब परिवारों को स्वास्थ्य कवर प्रदान किया। इसके अलावा, एमबीबीएस सीटों में 18,000 और पीजी मेडिकल सीटों में 12,000 की बढ़ोतरी की गई। नये एम्स स्थापित किये गये।

साल 2019 के घोषणापत्र में बीजेपी ने फिर टेलीमेडिसिन की बात की। विशेष रूप से साल 2020 में जब COVID-19 महामारी आई, तो स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे में अचानक बदलाव आया। टेलीमेडिसिन एक आवश्यकता बन गई। भारत सरकार ने मरीजों को डॉक्टरों से जोड़ने के लिए ईसंजीवनी ऐप लॉन्च किया। फरवरी 2023 तक, ऐप पर 10 करोड़ टेली-परामर्श हुए, जिससे यह एक बड़ी सफलता बन गई। इसके अलावा, जनऔषधि केंद्र में सस्ती दवाओं ने विशेष रूप से गरीब परिवारों के लिए स्वास्थ्य पर खर्च को प्रभावी ढंग से कम कर दिया। 31 जनवरी 2024 तक देश में 10,607 जनऔषधि केंद्र कार्यरत हैं। इन दुकानों में किफायती कीमतों पर लगभग 1,965 दवाएं और 293 सर्जिकल आइटम उपलब्ध हैं।

न्यायिक सुधार

साल 2014 और साल 2019 के दोनों घोषणापत्रों में भाजपा ने न्यायिक सुधारों की बात की। 2014 में, इसने न्याय वितरण को सरल, त्वरित और अधिक प्रभावी बनाने के लिए आपराधिक न्याय प्रणाली में सुधार करने की प्रतिबद्धता जताई। साल 2019 में इसने प्रक्रियात्मक कानूनों के सरलीकरण की दिशा में काम करने का वादा किया।

भारत सरकार ने ब्रिटिश काल के आईपीसी, सीआरपीसी और साक्ष्य अधिनियम की जगह नए आपराधिक कानून पेश किए। वे 1 जुलाई 2024 को मौजूदा प्रणाली को बदल देंगे। भारतीय न्याय (द्वितीय) संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा (द्वितीय) संहिता, और भारतीय साक्ष्य (द्वितीय) भारतीय दंड संहिता 1860, आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की जगह ले लेंगे। 1973 का, और भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 का।

तीन विधेयक पहली बार 11 अगस्त, 2023 को भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य विधेयक के रूप में लोकसभा में पेश किए गए थे। उन्हें आगे की जांच के लिए बृज लाल की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति के पास भेजा गया। 21 दिसंबर को राज्यसभा द्वारा पारित होने से पहले उन्हें 20 दिसंबर को लोकसभा द्वारा पारित किया गया था। 25 दिसंबर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मंजूरी मिलने के बाद तीन नए आपराधिक संहिता विधेयक कानून बन गए। ब्रिटिश काल के कानूनों से छुटकारा पाने में भारत को 75 साल लग गए। कानूनों के बारे में अधिक जानकारी यहां जाँची जा सकती है ।

नागरिकता संशोधन कानून या CAA

बीजेपी ने अपने 2019 के घोषणापत्र में नागरिकता संशोधन बिल लाने का वादा किया था. घोषणापत्र में कहा गया है, “हम उत्पीड़न से बचने वाले पड़ोसी देशों के धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों के व्यक्तियों की सुरक्षा के लिए नागरिकता संशोधन विधेयक को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम पूर्वोत्तर राज्यों की आबादी के उन वर्गों के मुद्दों को स्पष्ट करने के लिए सभी प्रयास करेंगे जिन्होंने कानून के बारे में आशंकाएँ व्यक्त की हैं। हम पूर्वोत्तर के लोगों की भाषाई, सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान की रक्षा के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हैं। भारत के पड़ोसी देशों से उत्पीड़न से बचकर आने वाले हिंदू, जैन, बौद्ध, सिख और ईसाइयों को भारत में नागरिकता दी जाएगी।

नागरिकता संशोधन विधेयक (CAB) पहली बार 15 जुलाई 2016 को संसद में पेश किया गया था। बीजेपी सरकार बनने के सात महीने के भीतर इसे 11 दिसंबर 2019 को लोकसभा और राज्यसभा में पारित किया गया था। भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द से मंजूरी मिलने के बाद नागरिकता संशोधन कानून लागू हो गया। कोविड-19 महामारी के बाद हुए विरोध प्रदर्शनों के कारण सीएए नियमों को अधिसूचित करना संभव नहीं था। भारत सरकार विशेष रूप से गृह मंत्री अमित शाह ने वादा किया कि सीएए नियमों को जल्द से जल्द अधिसूचित किया जाएगा। नियमों को अंततः 11 मार्च 2024 को अधिसूचित किया गया।

सीएए पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश सहित भारत के पड़ोसी तीन मुस्लिम-बहुल देशों के प्रताड़ित अल्पसंख्यकों यानी हिंदू, सिख, बौद्ध, ईसाई और जैनियों को भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन करके भारत में शरण लेने की अनुमति देगा। जो लोग 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आए थे, वे सीएए के तहत नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं। एक समर्पित पोर्टल है जिसका उपयोग वे नागरिकता के लिए आवेदन करने के लिए कर सकते हैं।

महिला आरक्षण

भाजपा ने साल 2014 और साल 2019 के दोनों घोषणापत्रों में संवैधानिक संशोधन के माध्यम से संसदीय और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का वादा किया था। 2014 के घोषणापत्र में कहा गया था, “महिलाओं के कल्याण और विकास को सरकार के भीतर सभी स्तरों पर उच्च प्राथमिकता दी जाएगी, और भाजपा संवैधानिक संशोधन के माध्यम से संसदीय और राज्य विधानसभाओं में 33% आरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है।” साल 2019 के घोषणापत्र में लिखा था, “सरकार के भीतर सभी स्तरों पर महिलाओं के कल्याण और विकास को उच्च प्राथमिकता दी जाएगी, और भाजपा संवैधानिक संशोधन के माध्यम से संसद और राज्य विधानसभाओं में 33% आरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है।”

महिला आरक्षण विधेयक 19 सितंबर 2023 को संसद में पेश किया गया और इसे दोनों सदनों ने पारित कर दिया। कानून के अनुसार, निचले सदन या लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33% सीटें। इसमें एससी/एसटी समुदाय की महिलाओं के लिए आरक्षित सीटें शामिल होंगी। हालाँकि यह संसद में पारित हो गया, आरक्षण का 2024 के चुनावों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। हालाँकि, इसका असर 2029 के चुनावों पर पड़ेगा। यह विधेयक 2027 के बाद लागू होगा जब जनगणना की जाएगी और मौजूदा निर्वाचन क्षेत्रों का फिर से निर्धारण किया जाएगा।

ये लेख मूल रूप से अंग्रेजी भाषा में अनुराग ने लिखी है। मूल लेख पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

रामपुर से सपा प्रत्याशी मोहिबुल्लाह नदवी ने आम्बेडकर की चित्र पर नहीं चढ़ाया फूल: सोशल मीडिया पर उठ रहे सवाल, दलित-मुस्लिम एकता में आयोजित हुई थी सभा

उत्तर प्रदेश के रामपुर से समाजवादी पार्टी से प्रत्याशी मोहिबुल्लाह नदवी का सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में दिख रहा है कि मोहिबुल्लाह नदवी ने डॉक्टर भीमराव आम्बेडकर के चित्र पर फूल नहीं चढ़ाया। सोशल मीडिया पर इसे डॉक्टर आम्बेडकर का अपमान बताया जा रहा है। वीडियो में नदवी कहते हुए दिख रहे हैं कि उन्होंने अपने अंदाज में माल्यार्पण कर दिया है।

वीडियो के अंत में दिख रहा है कि इसके बाद नदवी वहाँ से तेजी से निकल गए। फूल चढ़ाने से इनकार करने से संबंधित जब पत्रकारों ने सवाल पूछा तो पुलिस का एक जवान और एक टोपी वाला व्यक्ति उसे मोहिबुल्लाह तक पहुँचने से रोकता है। यह वीडियो रविवार (14 अप्रैल 2024) को BK स्पीड न्यूज़ नाम के एक यूट्यूब चैनल पर शेयर हुआ है।

इस वीडियो की शुरुआत में पत्रकार ने बताया है कि रामपुर में 14 अप्रैल को डॉक्टर भीमराव आम्बेडकर की जयंती पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इसमें समाजवादी पार्टी के तमाम नेता शामिल हुए थे। आयोजन का मकसद भी दलित-मुस्लिम एकता को मजबूती देना था। तमाम मंचासीन वक्ताओं ने अपने सम्बोधन दिए। कार्यक्रम के दौरान डॉक्टर आम्बेडकर के चित्र पर माल्यार्पण किया गया।

बताया जा रहा है कि तमाम नेताओं ने बारी-बारी से डॉक्टर अम्बेडकर की मूर्ति पर फूल चढ़ाए, लेकिन समाजवादी प्रत्याशी मोहिबुल्लाह नदवी ने इससे किनारा कर लिया। कार्यक्रम के समापन के बाद समाजवादी पार्टी प्रत्याशी मीडिया से रूबरू हुए। इसी दौरान एक पत्रकार ने उनसे पूछ लिया कि ‘आपने बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर के चित्र पर फूल क्यों नहीं चढ़ाए।’

इस सवाल पर मोहिबुल्लाह थोड़ा असहज हो गए। उन्होंने बस इतना कहा, “मैंने अपने तरीके से माल्यार्पण किया है।” हालाँकि, पत्रकार मोहिबुल्लाह नदवी के इस जवाब से संतुष्ट नहीं हुए। उन्होंने अपने सवाल को जारी रखा। महज कुछ ही सेकेंड के बाद मोहिबुल्लाह नदवी वीडियो में भागते नजर आए। वो फूल चढ़ाने वाले सवाल पर जवाब देने के लिए तैयार ही नहीं थे।

पत्रकारों ने भी उनका पीछा करना जारी रखा। पत्रकारों को पीछे पड़ा देखकर मोहिबुल्लाह नदवी की सुरक्षा में तैनात एक पुलिसकर्मी बीच में आ गया। उसने सवाल पूछ रहे मीडियाकर्मियों को रोक दिया। इस रोकटोक में नमाजी टोपी पहने एक अन्य व्यक्ति को भी देखा जा सकता है, जो मोहिबुल्लाह का सहयोगी बताया जा रहा है।

यह आयोजन रामपुर के बिलासपुर थाना क्षेत्र में पड़ने वाले गुजरेला गाँव में हुआ था। आयोजक INDI गठबंधन के घटक कॉन्ग्रेस पार्टी के नेता संजय कपूर थे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोई भी पदाधिकारी इस मामले पर बोलने के लिए तैयार नहीं है। सोशल मीडिया पर तमाम लोग इसे इस्लामी और शरिया कानून से जोड़ रहे हैं। हालाँकि, ऑपइंडिया इस वीडियो की पुष्टि नहीं करता है।