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सिडनी में एक बार फिर चाकूबाजी: चर्च में हमलावर ने पादरी सहित 4 को मारा छुरा, 2 दिन पहले शहर के मॉल में 6 लोगों की कर दी गई थी हत्या

ऑस्ट्रलिया में सोमवार (15 अप्रैल 2024) को एक बार फिर से चाकूबाजी की खबर है। इस बार चाकू एक चर्च में प्रार्थना के दौरान चली है। हमलावर ने पादरी सहित 4 लोगों को निशाना बनाया है। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। पुलिस ने हमलावर को गिरफ्तार कर लिया है। हमले के बाद ईसाई समुदाय के कई लोगों ने चर्च के बाहर जमा होकर नारेबाजी की।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना ऑस्टेलिया के सिडनी की है। सोमवार को यहाँ के ‘गुड शेफर्ड चर्च’ में लोग साप्ताहिक प्रार्थना के लिए जमा हुए थे। पादरी मेरी एमैन्युएल प्रार्थना करवा रहे थे। इसी दौरान भीड़ में से एक युवक निकला और पादरी की तरफ बढ़ा। कोई कुछ समझ पाता इससे पहले युवक ने कोट से चाकू निकालकर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। हालाँकि, वहाँ मौजूद लोगों ने हमलावर को पकड़ लिया।

पादरी को बचाने के दौरान 4 अन्य लोगों को चाकू लग गई और वो घायल हो गए। आखिरकार लोगों ने हमलावर को पकड़ लिया। इसका एक वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में दिख रहा है कि पकड़े जाने के बाद भी हमलावर हँस रहा है। इस घटना की जानकारी कुछ ही देर में सिडनी शहर में फ़ैल गई। सैकड़ों की संख्या में लोग चर्च पहुँचकर नारेबाजी करने लगे। वो हमलावर को सौंपने की माँग करने लगे।

हालात की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में पुलिस बल भी मौके पर पहुँचा और हालात को सामान्य किया। पुलिस ने हमलावर को लोगों से छुड़ाकर अपने कब्जे ले लिया। फिलहाल पुलिस उससे पूछताछ कर जा रही है। जिस समय 50 वर्षीय पादरी पर हमला हुआ था, उस समय प्रार्थना सभा चर्च के यूट्यूब पर LIVE चल रही थी। घायल पादरी और अन्य लोगों का इलाज अस्पताल में चल रहा है।

अभी तक हमलावर की पहचान और उसके मकसद की जानकारी सामने नहीं आई है। जिस स्थान पर यह चर्च बना है, उसके आसपास इराक और सीरिया युद्ध के दौरान भागकर ऑस्ट्रेलिया आए कई शरणार्थियों को जगह देकर बसाया गया था। पुलिस इस बात की भी जानकारी जुटा रही है कि इस ताजा हमले का सिडनी के मॉल में हुई चाकूबाजी की घटनाओं से कोई कनेक्शन तो नहीं है।

बता दें कि सिडनी के बॉन्डी जंक्शन पर खचाखच भरे वेस्टफील्ड शॉपिंग मॉल में एक शख्स ने 13 अप्रैल 2024 को लोगों को अंधाधुन चाकू मारने लगा था। इस हमले में 6 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई लोग घायल हो गए था। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना था कि एक शख्स, जिसकी पहचान सामने नहीं आई है, उसने एक महिला और उसके बच्चे के अलावा एक दुकानदार को चाकू मार दिया।

प्रत्यक्षदर्शियों का कहना था कि अपनी जान बचाने के लिए लोग को कई दुकानों में घुसते हुए देखा गया। मॉल में हर तरफ खून बिखरा हुआ था। घटना की जानकारी मिलते ही सिडनी पुलिस घटनास्थल पर पहुँची थी और उसने हमलावर पर गोली चलाई थी। हमलावर की जानकारी और पहचान सामने नहीं आई थी।

‘वित्त मंत्री रहते RBI पर दबाव बनाते थे P चिदंबरम, सरकार के लिए माहौल बनाने को कहते थे’: बैंक के पूर्व गवर्नर ने खोली UPA की पोल

रिजर्व बैंक के गवर्नर रहे पी सुब्बाराव ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उन्होंने यूपीए सरकारों के समय दो वित्तमंत्रियों के साथ काम किया था। इसमें प्रणब मुखर्जी और पी चिदंबरम का नाम है। पी सुब्बाराव ने अपनी किताब में दावा किया है कि यूपीए सरकारों में वित्त मंत्री रहे प्रणब मुखर्जी और पी चिदंबरम रिजर्व बैंक पर दबाव डालते थे कि वो सरकार के पक्ष में माहौल बनाने वाले आँकड़ें जारी करे। यही नहीं, वो अपने मनमुताबिक आरबीआई की नीतियों को बदलने का दबाव भी डालते थे। पी सुब्बाराव ने अपनी किताब में लिखा है कि प्रणब मुखर्जी तो अपनी बात शालीन तरीके से रखते थे, लेकिन पी चिदंबरम अपनी बात मनवाने के लिए बहस करते थे।

भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर दुव्वुरी सुब्बाराव ने अपनी किताब में दावा किया है कि यूपीए सरकारों के दौरान प्रणब मुखर्जी और पी. चिदंबरम के नेतृत्व वाला वित्त मंत्रालय ब्याज दरों में नरमी लाने के लिए रिजर्व बैंक पर दबाव डालता था और आम जनमानस में सरकार के प्रति सकारात्मक भावनाओं को बनाए रखने के लिए वृद्धि की बेहतर तस्वीर पेश करने के लिए कहता था। सुब्बाराव ने अपनी हालिया किताब ‘जस्ट ए मर्सिनरी: नोट्स फ्रॉम माई लाइफ एंड करियर’ में यह भी लिखा है कि सरकार में केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता के महत्व को लेकर ‘समझ और संवेदनशीलता’ कम है।

‘रिजर्व बैंक सरकार की चीयरलीडर?’ नाम के अध्याय में सुब्बाराव ने बताया है कि सरकार का दबाव सिर्फ रिजर्व बैंक के ब्याज दर के रुख तक सीमित नहीं था। केंद्रीय बैंक पर इस बात के लिए भी दबाव बनाया गया कि वह मूल्यांकन के विपरीत विकास और मुद्रास्फीति के बेहतर अनुमान पेश करे। उन्होंने कहा, ‘मुझे एक ऐसा अवसर याद है जब प्रणब मुखर्जी वित्त मंत्री थे। वित्त सचिव अरविंद मायाराम और मुख्य आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु ने अपने अनुमानों के साथ हमारे अनुमानों का विरोध किया, जो मुझे लगा कि बहुत ज्यादा था।

उन्होंने कहा, “मायाराम ने एक बैठक में यहाँ तक कह दिया कि दुनिया में हर जगह, सरकारें और केंद्रीय बैंक आपस में सहयोग कर रहे हैं, यहाँ भारत में रिजर्व बैंक बहुत बदमाश है।” सुब्बाराव ने कहा कि वे उनकी इस उम्मीद से हमेशा परेशान और नाराज रहे कि आरबीआई को सरकार के लिए चीयरलीडर के रूप में काम करना चाहिए। आरबीआई के पूर्व गवर्नर ने कहा कि वह इस बात को लेकर सख्त थे कि रिजर्व बैंक अपने बेहतरीन पेशेवर फैसले में सिर्फ जनता के बीच सकरात्मक भावनाएँ बनाने न भटके।

उन्होंने यह भी याद किया कि आरबीआई के नीतिगत रुख को लेकर चिदंबरम और मुखर्जी दोनों के साथ उनका टकराव हुआ था क्योंकि दोनों हमेशा नरम दरों पर जोर देते थे, हालांकि दोनों की शैली अलग थी। सुब्बाराव ने लिखा, “चिदंबरम आमतौर पर वकील की तरह अपने मामले में बहस करते थे, वहीं मुखर्जी प्रतिष्ठित और सर्वोत्कृष्ट राजनेता थे। वे अपना नजरिया जाहिर करने के बाद मामले में बहस करने का काम अपने अधिकारियों पर छोड़ देते थे। उन्होंने साल 2012 में वित्त मंत्री बनने के फिजूलखर्ची पर भी रोक लगाने की कोशिश की थी।

बता दें कि डी सुब्बाराव 5 सितंबर, 2008 को पाँच साल के लिए आरबीआई के गवर्नर के रूप में कार्यभार संभालने से पहले वित्त सचिव (2007-08) थे। उनके आरबीआई गवर्नर का पद संभालने के कुछ दिन बाद ही 16 सितंबर को अमेरिका का लेहमैन ब्रदर्स दिवालिया हो गया था और यह 2008 की वैश्विक आर्थिक मंदी का कारण बना था। यह इतिहास की सबसे बड़ी कॉरपोरेट विफलता भी मानी जाती है।

‘इलेक्टोरल बॉन्ड्स सफलता की कहानी, पता चलता है पैसे का हिसाब’: PM मोदी ने ANI को इंटरव्यू में कहा – हार का बहाना ढूँढने के लिए की जा रही ED-CBI-EVM की बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा चुनाव 2024 से पहले ANI को दिए गए इंटरव्यू में कहा है कि हमारे देश में लंबे अर्से से चर्चा चली है कि चुनावों में कालेधन का बहुत बड़ा खतरनाक खेल हो रहा है। उन्होंने कहा कि देश के चुनावों को कालेधन से मुक्ति मिलनी चाहिए। उन्होंने 1000-2000 के नोटों को खत्म किए जाने को इसी दिशा में उठाया गया कदम बताया। उन्होंने ध्यान दिलाया कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि 20 हजार रुपए तक पार्टियाँ कैश ले सकती है।

इलेक्टोरल बॉन्ड्स और ED-CBI पर भी बोले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

बकौल पीएम नरेंद्र मोदी, उन्होंने नियम बनाकर 20 हजार को ढाई हजार कर दिया, क्योंकि वो नहीं चाहते थे कि ये कैश वाला कारोबार चले। पीएम ने आलोचनाओं का जवाब देते हुए कहा कि तक इलेक्टोरल बॉन्ड की बात है तो ये उसकी सक्सेस स्टोरी है, क्योंकि इससे मनी का ट्रेल मिल रहा है कि किस कंपनी ने दिया, कैसे दिया, कहाँ दिया। पीएम मोदी ने कहा कि जहाँ तक ED-CBI की बात है तो इसमें एक भी कानून मेरी सरकार ने नहीं बनाया है।

पीएम मोदी ने बताया कि उनकी सरकार ने तो इलेक्शन कमीशन में सुधार किए हैं, पहले तो प्रधानमंत्री एक साइन करके इलेक्शन कमीशन बना देते थे, आज तो उसमें विपक्ष भी रहता है। उन्होंने ‘नाच न जाने आँगन टेढ़ा’ कहावत का जिक्र करते हुए कहा कि ये कभी ED, कभी CBI, कभी EVM का बहाना निकालेंगे, मूलत: वो अपनी पराजय के लिए रीजनिंग पहले से सेट करने में लगे हैं, ताकि पराजय उनकी खाते में ना चली जाए। प्रधानमंत्री ने जानकारी दी कि भारत में पिछले 10 साल से हर क्षेत्र में दुनिया भर से निवेश आ रहे हैं।

उन्होंने कहा, “मैं चाहता हूँ कि हिंदुस्तान में निवेश आना चाहिए। पैसा किसी का भी लगा हो, पसीना मेरे देश का लगना चाहिए, उसके अंदर सुगंध मेरे देश की मिट्टी की आनी चाहिए, ताकि मेरे देश के नौजवान को रोजगार मिले। आज का फर्स्ट टाइम मतदाताओं 2047 का सबसे बड़ा लाभार्थी बनने वाला है। आज का फर्स्ट टाइम वोटर्स परंपरागत चीजों से बाहर आना चाहता है। विपक्ष का घोषणा-पत्र इकोनॉमी को पूरी तरह फेल करने वाला घोषणा पत्र है।”

पीएम मोदी ने ये भी कहा कि एक प्रकार से विपक्ष का घोषणा पत्र देश के फर्स्ट टाइम वोटर्स (जिनकी उम्र 25 साल से कम है) के भविष्य को रौंदने वाला घोषणा पत्र है। ‘एक राष्ट्र एक चुनाव’ के प्रतिबद्धता जताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि उन्होंने संसद में भी बोला है, हमने कमिटी भी बनाई हुई है, उसकी रिपोर्ट भी आई है। उन्होंने बताया कि बहुत सकारात्मक और नवोन्मेषी सुझाव आए हैं, अगर हम इस रिपोर्ट को लागू कर पाए तो देश को बहुत फायदा होगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि वोट बैंक की राजनीति को मज़बूत करने के लिए राम मंदिर मुद्दे को हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया गया और बार-बार इसे भड़काया गया। उन्होंने कहा कि जब यह मामला अदालत में चल रहा था तब कोशिश की गई कि फैसला ना आए। उन्होंने कहा कि ये मुद्दा विपक्ष के लिए एक राजनीतिक हथियार था, अब राम मंदिर बन गया तो उनके हाथ से यह मुद्दा ही चला गया है। बता दें कि कॉन्ग्रेस पार्टी ने राम मंदिर का न्योता ठुकरा दिया था।

ANI से इंटरव्यू में PM मोदी ने बताया तीसरे कार्यकाल का प्लान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2024 लोकसभा चुनाव से पहले ANI को सवा घंटा से भी अधिक का इंटरव्यू दिया है, जिसमें उन्होंने कई मुद्दों पर बात की। पीएम मोदी ने कहा कि 2047, यानीदेश की आज़ादी के 100 साल जैसे मील के पत्थर लोगों में नया जोश भरते हैं, नए संकल्प होते हैं। उन्होंने इसके लिए लक्ष्य बनाने की बात की, गाँव के प्रधान से लेकर RBI तक। उन्होंने कहा कि 2024 चुनावी क्रम का हिस्सा हैं, लोकतंत्र में चुनाव को हमें हल्के में नहीं लेना चाहिए बल्कि ये महापर्व है, इसे उत्सव के रूप में मनाना चाहिए।

पीएम मोदी ने इसकी तुलना स्पोर्ट्स टूर्नामेंट्स से की, जिसमें प्रतिस्पर्धा होती है। उन्होंने इसे लोकोत्सव बनाने की बात करते हुए कहा कि लोकतंत्र संविधान की सीमाओं में नहीं बल्कि हमारी रगों में दौड़ना चाहिए और संस्कार में होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगले कार्यकाल में उन्हें विकास की गति और स्केल दोनों बढ़ानी है। पीएम मोदी ने कहा कि पहले की राजनीतिक संस्कृति में परिवार को मजबूत बनाने और परिवार की जड़ों को कोई उखाड़ न दे इसमें शक्ति लगाईं गई, जबकि वो देश मजबूत करने के लिए काम कर रहे हैं जिसका फायदा सबको मिलता है।

ANI की संपादक स्मिता प्रकाश के सवालों का जवाब करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उनके पास तीसरे कार्यकाल के लिए बहुत सी योजनाएँ हैं, लेकिन उनके निर्णय किसी को डराने-दबाने के लिए नहीं बल्कि जन-कल्याण और सर्वांगीण विकास के लिए हैं। बकौल पीएम मोदी, बहुत कुछ अभी भी करना है। उन्होंने कहा कि अब तक जो हुआ वो ट्रेलर है, उन्हें बहुत अधिक अभी करना है। पीएम मोदी ने इस दौरान ‘एक देश, एक चुनाव’ की बात करते हुए कहा कि राज्यों में चुनाव होते रहते हैं और आचार संहिता लगती रहती है जिससे व्यवधान पैदा होता है।

उन्होंने कहा कि वो चुनाव को छुट्टियों की तरह नहीं लेते हैं और अधिकारियों को 100 दिन की योजनाएँ बनाने के लिए कह दिया जाता है। उन्होंने बताया कि रिसर्च के आधार पर अधिकारियों की टीम बना कर प्रेजेंटेशन लिए गए, AI की मदद ली गई, अगले 25 वर्षों की योजनाएँ बन रही हैं। उन्होंने कहा कि ये उनका विजन नहीं है बल्कि 15-20 लाख लोगों के विचार इसमें समाहित हैं, ये देश का इनपुट है। इसे दस्तावेज के रूप में बनाया जा रहा है, जिसे राज्यों को भेज दिया जाएगा और राज्य इस पर काम करेंगे कि क्या हो सकता है क्या नहीं।

फिर ‘नीति आयोग’ की बैठक में मुख्यमंत्रियों के साथ चर्चा होगी। 25 साल को पीएम मोदी ने 3 हिस्सों में बाँटा है, जिसमें उनके अगले 5 वर्ष हैं और उसका एक हिस्सा उनके पहले 100 दिन हैं। पीएम मोदी ने कहा कि 2019 में भी वो काम करके चुनाव मैदान में गए थे और जब वो वापस आए तो अनुच्छेद 370, ट्रिपल तलाक से बहनों को मुक्ति, बैंकों का मर्जर – ये सब काम उन्होंने 100 दिन के अंदर कर दिए। बकौल पीएम मोदी, आज जो शब्दों का कमिटमेंट होना चाहिए, लगता है उसकी कोई जिम्मेदारी नहीं है – कोई कुछ भी बोल देता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जैसे अभी कुछ दिन पहले ही एक नेता ने कहा – मैं एक झटके में ग़रीबी खत्म कर दूँगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि जिनको 5-6 दशक तक देश में राज करने को मिला, वो जब आज ऐसा कहेंगे तो देश सोचेगा कि ये क्या बोल रहे हैं। बकौल पीएम मोदी, वो जो कमिटमेंट करते हैं, उसकी ऑनरशिप भी लेते हैं और जब ऑनरशिप लेते हैं तो देश को भरोसा होता है। पीएम मोदी ने कहा कि आज हम जो बात कहते हैं उस पर देश को भरोसा है।

उदाहरण के तौर पर उन्होंने गिनाया कि जब कहा गया कि जम्मू-कश्मीर से 370 हटाएँगे तो हटाया, ट्रिपल तलाक से बहनों को मुक्ति दिलाई। प्रधानमंत्री ने दोहराया – ये मोदी की गारंटी है। पीएम मोदी ने कहा कि जहाँ तक रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की बात है तो उन्हें न्योता मिला, लेकिन उन्होंने ठुकरा दिया, जबकि उन्हें गर्व होना चाहिए था। बकौल पीएम नरेंद्र मोदी, इससे स्पष्ट होता है कि उनके लिए वोट बैंक ही सबसे जरूरी है और ये किसी को नीचा दिखाना अपना अधिकार मानते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ANI की स्मिता प्रकाश से कहा, “ये तो नामदार हैं और मैं कामदार हूँ। लोकतंत्र में इतनी नफरत नहीं होनी चाहिए। हमारे लिए ये न राजनीति का विषय है, न कभी होना चाहिए और न कभी होगा। हमारे लिए ये आस्था का विषय है। मेरे पास बड़ी योजनाएँ हैं, किसी को डरने की जरूरत नहीं है। मेरे निर्णय किसी को डराने, दबाने के लिए नहीं हैं। मेरे निर्णय देश के सर्वांगीण विकास के लिए हैं। सवाल कॉन्ग्रेस से पूछना चाहिए कि आपकी क्या मजबूरी है। सनातन के खिलाफ इतना जहर उगलने वाले लोगों के साथ बैठना उनकी क्या मजबूरी है? कॉन्ग्रेस की मानसिकता में ये कौन सी विकृति है।”

तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि DMK का तो जन्म ही शायद इस नफरत के लिए हुआ होगा। उन्होंने कहा कि भारत को टुकड़ों में देखना, ये भारत के प्रति नासमझी का परिणाम है। पीएम मोदी ने पूछा कि अगर आप हिंदुस्तान में देखें प्रभु राम के नाम से जुड़े हुए गाँव सबसे ज्यादा कहाँ है? तो वह तमिलनाडु में है। अब आप इसको कैसे अलग कर सकते हैं। पीएम मोदी ने कहा कि विविधता हमारी ताकत है, हमें इसको सेलिब्रेट करना चाहिए।

पीएम मोदी ने कहा, “जो व्यक्ति UN में जाकर दुनिया की सबसे पुरानी भाषा तमिल भाषा का गुणगान करता है, उस व्यक्ति पर आप ऐसे आरोप कैसे लगा सकते हैं? विपक्ष की मुसीबत है कि वे देश को एक ही साँचे में ढालना चाहते हैं। हम विविधता की पूजा करते हैं, हम इसको सेलिब्रेट करते हैं।” बता दें कि भाजपा ने इस बार ‘400 पार’ का नारा दिया है। इससे पहले पीएम मोदी ने इस चुनाव से पहले अपना पहला इंटरव्यू तमिल चैनल ‘Thanthi TV’ को दिया था।

‘मस्जिद के सामने से नहीं ले जा सकते’: डॉ. आम्बेडकर के जुलूस पर पथराव, धुले पुलिस ने इसाक-कल्लू-कौसर सहित 7 को किया गिरफ्तार, 21 पर FIR

महाराष्ट्र पुलिस ने रविवार (14 अप्रैल) को डॉक्टर बाबासाहेब अम्बेडकर की जयंती के अवसर पर निकाले गए एक जुलूस को जानबूझकर निशाना बनाया गया। इस मामले में विशेष समुदाय के 21 लोगों पर मामला दर्ज किया है और इस मामले में अब तक 7 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। बताया जाता है कि आरोपितों ने 14 अप्रैल को जुलूस में शामिल लोगों पर पथराव किया था।

गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान साहिल लाला बागवान, समीर लाला बागवान, इसाक मिस्त्री, कल्लू पठान, विहान बागवान, कौसर मुस्सा खटीक और अज्या खटीक के रूप में हुई है। इस मामले में 21 लोगों पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 143, 146, 147, 149, 295 और 296 के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसके अलावा, कई अन्य प्रासंगिक धाराएँ भी लगाई गई हैं।

धुले में हिंसा की खबर सामने आई है

स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना 14 अप्रैल की शाम को हुई। बाबासाहेब डॉक्टर भीमराव आम्बेडकर की जुलूस जब स्थानीय जामा मस्जिद के पास से गुजर रहा था, उसी दौरान एक समुदाय के लोगों ने जुलूस को उस रास्ते से गुजरने से रोक दिया। बाद में उन्होंने जुलूस में शामिल लोगों पर पथराव शुरू कर दिया।

इस पथराव में कई लोग घायल हो गए। पथराव होता देख कुछ लोगों ने फोन करके इसकी सूचना तुरंत स्थानीय पुलिस स्टेशन को दी। इसके बाद एसपी श्रीकांत धीवरे अपने दल के साथ मौके पर पहुँचे और स्थिति को नियंत्रित किया। बाद में गोविंदा गुलाब नागराले की शिकायत के आधार पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली।

नागराले ने अपनी शिकायत में कहा, “जुलूस शांतिपूर्वक जामा मस्जिद के पास से गुजर रहा था, तभी समुदाय विशेष के कुछ लोगों ने जुलूस में शामिल लोगों को रुकने की धमकी दी। उन्होंने कहा कि कोई भी जुलूस मस्जिद के पास से नहीं गुजरेगा। बाद में उन्होंने जुलूस में शामिल लोगों पर पथराव शुरू कर दिया। पथराव के दौरान नारेबाजी भी की। इस हमले में कई लोग घायल हो गए।”

स्थानीय मीडिया में धुले में हिंसा की आईं खबरें

इस बीच पुलिस ने मामले को शांत कराने की कोशिश की और कहा कि कोई बड़ी घटना नहीं हुई है। स्थानीय रिपोर्ट में कहा गया है, “यह एक छोटी सी घटना है। इस पर हल्ला मचाने की कोई जरूरत नहीं है। अफवाहों पर विश्वास न करें। मामले की एफआईआर दर्ज कर ली गई है। जाँच चल रही है।”

पुलिस ने जुलूस में शामिल लोगों पर पथराव करने वाले कुछ लोगों की पहचान की है। जिन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है, उनमें कुछ व्यक्तियों की पहचान पापा शाह, सादिक शाह, वसीम पठान, सुल्तान बिल्डर, जुनैद शाह, तौफिक, शोएब के रूप में की गई है।

‘कॉन्ग्रेस देती है सनातन के खिलाफ ज़हर उगलने वालों का साथ, DMK का जन्म ही इसीलिए’: ANI से इंटरव्यू में बोले PM मोदी – मेरे निर्णय किसी को डराने-दबाने के लिए नहीं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2024 लोकसभा चुनाव से पहले ANI को सवा घंटा से भी अधिक का इंटरव्यू दिया है, जिसमें उन्होंने कई मुद्दों पर बात की। पीएम मोदी ने कहा कि 2047, यानीदेश की आज़ादी के 100 साल जैसे मील के पत्थर लोगों में नया जोश भरते हैं, नए संकल्प होते हैं। उन्होंने इसके लिए लक्ष्य बनाने की बात की, गाँव के प्रधान से लेकर RBI तक। उन्होंने कहा कि 2024 चुनावी क्रम का हिस्सा हैं, लोकतंत्र में चुनाव को हमें हल्के में नहीं लेना चाहिए बल्कि ये महापर्व है, इसे उत्सव के रूप में मनाना चाहिए।

पीएम मोदी ने इसकी तुलना स्पोर्ट्स टूर्नामेंट्स से की, जिसमें प्रतिस्पर्धा होती है। उन्होंने इसे लोकोत्सव बनाने की बात करते हुए कहा कि लोकतंत्र संविधान की सीमाओं में नहीं बल्कि हमारी रगों में दौड़ना चाहिए और संस्कार में होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगले कार्यकाल में उन्हें विकास की गति और स्केल दोनों बढ़ानी है। पीएम मोदी ने कहा कि पहले की राजनीतिक संस्कृति में परिवार को मजबूत बनाने और परिवार की जड़ों को कोई उखाड़ न दे इसमें शक्ति लगाईं गई, जबकि वो देश मजबूत करने के लिए काम कर रहे हैं जिसका फायदा सबको मिलता है।

ANI की संपादक स्मिता प्रकाश के सवालों का जवाब करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उनके पास तीसरे कार्यकाल के लिए बहुत सी योजनाएँ हैं, लेकिन उनके निर्णय किसी को डराने-दबाने के लिए नहीं बल्कि जन-कल्याण और सर्वांगीण विकास के लिए हैं। बकौल पीएम मोदी, बहुत कुछ अभी भी करना है। उन्होंने कहा कि अब तक जो हुआ वो ट्रेलर है, उन्हें बहुत अधिक अभी करना है। पीएम मोदी ने इस दौरान ‘एक देश, एक चुनाव’ की बात करते हुए कहा कि राज्यों में चुनाव होते रहते हैं और आचार संहिता लगती रहती है जिससे व्यवधान पैदा होता है।

उन्होंने कहा कि वो चुनाव को छुट्टियों की तरह नहीं लेते हैं और अधिकारियों को 100 दिन की योजनाएँ बनाने के लिए कह दिया जाता है। उन्होंने बताया कि रिसर्च के आधार पर अधिकारियों की टीम बना कर प्रेजेंटेशन लिए गए, AI की मदद ली गई, अगले 25 वर्षों की योजनाएँ बन रही हैं। उन्होंने कहा कि ये उनका विजन नहीं है बल्कि 15-20 लाख लोगों के विचार इसमें समाहित हैं, ये देश का इनपुट है। इसे दस्तावेज के रूप में बनाया जा रहा है, जिसे राज्यों को भेज दिया जाएगा और राज्य इस पर काम करेंगे कि क्या हो सकता है क्या नहीं।

फिर ‘नीति आयोग’ की बैठक में मुख्यमंत्रियों के साथ चर्चा होगी। 25 साल को पीएम मोदी ने 3 हिस्सों में बाँटा है, जिसमें उनके अगले 5 वर्ष हैं और उसका एक हिस्सा उनके पहले 100 दिन हैं। पीएम मोदी ने कहा कि 2019 में भी वो काम करके चुनाव मैदान में गए थे और जब वो वापस आए तो अनुच्छेद 370, ट्रिपल तलाक से बहनों को मुक्ति, बैंकों का मर्जर – ये सब काम उन्होंने 100 दिन के अंदर कर दिए। बकौल पीएम मोदी, आज जो शब्दों का कमिटमेंट होना चाहिए, लगता है उसकी कोई जिम्मेदारी नहीं है – कोई कुछ भी बोल देता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जैसे अभी कुछ दिन पहले ही एक नेता ने कहा – मैं एक झटके में ग़रीबी खत्म कर दूँगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि जिनको 5-6 दशक तक देश में राज करने को मिला, वो जब आज ऐसा कहेंगे तो देश सोचेगा कि ये क्या बोल रहे हैं। बकौल पीएम मोदी, वो जो कमिटमेंट करते हैं, उसकी ऑनरशिप भी लेते हैं और जब ऑनरशिप लेते हैं तो देश को भरोसा होता है। पीएम मोदी ने कहा कि आज हम जो बात कहते हैं उस पर देश को भरोसा है।

उदाहरण के तौर पर उन्होंने गिनाया कि जब कहा गया कि जम्मू-कश्मीर से 370 हटाएँगे तो हटाया, ट्रिपल तलाक से बहनों को मुक्ति दिलाई। प्रधानमंत्री ने दोहराया – ये मोदी की गारंटी है। पीएम मोदी ने कहा कि जहाँ तक रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की बात है तो उन्हें न्योता मिला, लेकिन उन्होंने ठुकरा दिया, जबकि उन्हें गर्व होना चाहिए था। बकौल पीएम नरेंद्र मोदी, इससे स्पष्ट होता है कि उनके लिए वोट बैंक ही सबसे जरूरी है और ये किसी को नीचा दिखाना अपना अधिकार मानते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ANI की स्मिता प्रकाश से कहा, “ये तो नामदार हैं और मैं कामदार हूँ। लोकतंत्र में इतनी नफरत नहीं होनी चाहिए। हमारे लिए ये न राजनीति का विषय है, न कभी होना चाहिए और न कभी होगा। हमारे लिए ये आस्था का विषय है। मेरे पास बड़ी योजनाएँ हैं, किसी को डरने की जरूरत नहीं है। मेरे निर्णय किसी को डराने, दबाने के लिए नहीं हैं। मेरे निर्णय देश के सर्वांगीण विकास के लिए हैं। सवाल कॉन्ग्रेस से पूछना चाहिए कि आपकी क्या मजबूरी है। सनातन के खिलाफ इतना जहर उगलने वाले लोगों के साथ बैठना उनकी क्या मजबूरी है? कॉन्ग्रेस की मानसिकता में ये कौन सी विकृति है।”

तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि DMK का तो जन्म ही शायद इस नफरत के लिए हुआ होगा। उन्होंने कहा कि भारत को टुकड़ों में देखना, ये भारत के प्रति नासमझी का परिणाम है। पीएम मोदी ने पूछा कि अगर आप हिंदुस्तान में देखें प्रभु राम के नाम से जुड़े हुए गाँव सबसे ज्यादा कहाँ है? तो वह तमिलनाडु में है। अब आप इसको कैसे अलग कर सकते हैं। पीएम मोदी ने कहा कि विविधता हमारी ताकत है, हमें इसको सेलिब्रेट करना चाहिए।

पीएम मोदी ने कहा, “जो व्यक्ति UN में जाकर दुनिया की सबसे पुरानी भाषा तमिल भाषा का गुणगान करता है, उस व्यक्ति पर आप ऐसे आरोप कैसे लगा सकते हैं? विपक्ष की मुसीबत है कि वे देश को एक ही साँचे में ढालना चाहते हैं। हम विविधता की पूजा करते हैं, हम इसको सेलिब्रेट करते हैं।” बता दें कि भाजपा ने इस बार ‘400 पार’ का नारा दिया है। इससे पहले पीएम मोदी ने इस चुनाव से पहले अपना पहला इंटरव्यू तमिल चैनल ‘Thanthi TV’ को दिया था।

‘मैंने रामलला की मूर्ति बनाई, दिव्य आँखें तो खुद श्रीराम जी ने बनाई’ : अरुण योगीराज बोले, ‘आज तक किसी ने भी नहीं की बुराई, पूरे देश से मिल रहा प्यार’

इस साल 22 जनवरी को सारी दुनिया की निगाहें अयोध्या पर थी। भगवान राम के भव्य मंदिर के गर्भगृह में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होनी थी। प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दौरान जब भगवान राम के चेहरे को दुनिया ने देखा, तो बस देखती रह गई। हर कोई टकटकी लगाए रामलला की आँखों में खो गया। चहुँओर प्रभु राम की जय जय कार होने लगी और बाल रामलला पर माताएँ अपना प्यार लुटाने लगीं। कोई उनके चेहरे की तारीफ कर रहा था, कोई नाक की, तो अधिकतम रामलला की दिव्य आँखों की। अब 17 अप्रैल 2024 को जब रामनवमी मनाई जाने वाली है, तो रामलला की दिव्य मूर्ति बनाने वाले मूर्तिकार अरुण योगीराज का एक इंटरव्यू सामने आया है, जिसमें वो बोल रहे हैं कि उन्होंने तो भगवान राम की मूर्ति ही बनाई, उनकी दिव्य आँखों को तो स्वयं भगवान राम ने ही बनाया।

समाचार एजेंसी एएनआई के साथ बातचीत में मूर्तिकार अरुण योगीराज ने कहा कि उनके द्वारा बनाई गई राम लला की मूर्ति अयोध्या में भक्तों के भगवान राम के प्रति प्रेम के कारण सुंदर है। योगीराज ने कहा, मैं अयोध्या में बहुत सारे भक्तों से मिला और उन्होंने अपना दर्द, बलिदान और कभी-कभी भगवान राम लला के प्रति प्रेम साझा किया…मैंने सब कुछ सुना… भगवान राम लला के प्रति प्रेम के कारण मूर्ति सुंदर है।

रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद उनके जीवन में काफी बदलाव आ गया है। उन्होंने कहा कि अब लोग मुझे देखते ही पहचान जाते हैं। हर जगह मुझे प्यार मिलता है। लोग मुझसे भगवान श्री राम की मूर्ति के बारे में बात करना चाहते हैं। लोगों के सबसे ज्यादा सवाल भगवान श्रीराम की आँखों को लेकर होते हैं।

अरुण योगीराज ने कहा कि भगवान श्री राम की आँखों को देखने के बाद हर किसी को ऐसा लगता है कि वे उस पल उनसे बात करेंगे। यह एक जीवित मूर्ति की तरह प्रतीत होती है। तो वे मुझसे पूछते हैं कि मैंने भगवान श्री राम की आँखें कैसे बनाईं। मेरा हमेशा यही जवाब होता है कि ये मैंने नहीं बनाई, भगवान राम ने बनाई हैं। बहुत से लोग जानना चाहते हैं कि भगवान रामलला की मूर्ति बनाने के पीछे की पूरी प्रक्रिया क्या थी।

योगीराज ने बताया कि जब वह मूर्ति बना रहे थे, तो कुछ लड़के कहते थे कि ऐसा लग रहा है जैसे भगवान राम उनसे बात कर सकते हैं और अब हर भक्त अयोध्या मंदिर में भगवान राम लला के दर्शन के बाद यही बात कहता है। योगीराज ने कहा, जब मैं श्री राम की मूर्ति बना रहा था तो चार-पांच लड़के जो लगभग 18-19 साल के थे, कहते थे कि ऐसा लगता है कि भगवान राम बस उनसे बात करने जा रहे हैं। ऐसी ही प्रतिक्रिया अब लोगों की मिलती हैं, मानों उन लड़कों की बात सच हो गयी। अब पूरा देश भी यह कहता है कि भगवान श्री राम की आँखों को देखकर ऐसा लगता है कि भगवान उस वक्त उनसे बात करेंगे। उनकी आँखें बहुत जीवंत हैं, यह एक कलाकार के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है।

किसी ने नहीं निकाला खोट, सबने दिया प्यार : योगीराज

मूर्तिकार अरुण योगीराज ने कहा कि आर्टवर्क में हर काम की आलोचना होती है। पिछले कई कामों में मेरी भी आलोचना हुई, लेकिन भगवान राम लला की मूर्ति तैयार के लिए किसी ने मेरे काम की बुराई नहीं की। मुझसे जो भी मिला, सभी ने मुझे प्यार और सराहनी दी। योगीराज ने कहा कि हर काम को लगभग 70 प्रतिशत लोग पसंद करते हैं, लेकिन 30 प्रतिशत लोग बुराई भी करते हैं, लेकिन इस काम में मुझे 100 प्रतिशत लोगों का प्यार मिला। एक प्रतिशत लोगों ने भी मेरी बुराई नहीं की। योगीराज ने कहा कि वो स्वयं को भाग्यशाली पाते हैं कि उन्हें भगवान रामलला की मूर्ति बनाने का अवसर मिला।

‘स्टार प्रचारक हूँ, चुनाव प्रचार करना है’: तेलंगाना के पूर्व CM की बेटी को कोर्ट ने नहीं दी जमानत, इससे पहले बेटे की परीक्षा के नाम पर माँगी थी बेल

दिल्ली के शराब घोटाले में गिरफ्तार के. कविता की याचिका पर दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने सोमवार (15 अप्रैल 2024) को सुनवाई की। याचिका में कविता ने यह कहते हुए अंतरिम जमानत की माँगी थी कि उनके पिता की पार्टी भारतीय राष्ट्र समिति (BRS) ने उन्हें लोकसभा चुनाव 2024 में अपना ‘स्टार प्रचारक’ घोषित किया है। उनके लिए 20 अप्रैल से 11 मई तक चुनाव ड्यूटी निर्धारित की है।

हालाँकि, कोर्ट ने राहत देने से इनकार करते हुए इस मामले की अगली सुनवाई 22 अप्रैल 2024 तय की है। इसके साथ ही राऊज एवेन्यू कोर्ट ने तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री BRS प्रमुख के. चंद्रशेखर राव की बेटी कविता द्वारा दायर जमानत याचिका पर केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) को नोटिस जारी किया है। कविता फिलहाल 23 अप्रैल तक न्यायिक हिरासत में हैं।

इसके पहले कविता ने 8 अप्रैल 2024 को अपने बेटे की परीक्षाओं को आधार बना कर जमानत माँगी थी। हालाँकि, कोर्ट में ED ने उनकी जमानत का विरोध किया था और कहा था कि उन्होंने इस मामले में सबूत मिटाए हैं। इसलिए उन्हें जमानत नहीं मिलनी चाहिए। इसके बाद कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी।

कविता की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए सीबीआई की स्पेशल जज कावेरी बावेजा ने यह निर्णय सुनाया था। कविता को 26 मार्च 2024 को न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। उनकी न्यायिक हिरासत मंगलवार (9 मार्च 2024) को खत्म हो रही थी। कविता की तरफ से उनके वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने यह याचिका लगाई थी।

कविता ने यह कहते हुए अदालत से राहत की माँग की थी कि उनके बेटे की अगले माह से परीक्षाएँ शुरू हो रही हैं और उनका इस दौरान उसके साथ रहना जरुरी है। उन्होंने जमानत के लिए PMLA कानून के कुछ नियमों का भी सहारा लिया था। कविता ने कोर्ट में कहा कि उनके बेटे की तैयारी में उनकी जगह कोई नहीं ले सकता।

ED ने कोर्ट में उनकी जमानत का विरोध किया था। ED की तरफ से पेश वकील जोहेब हसन ने कहा था कि PMLA कानून में महिलाओं के लिए राहत का प्रावधान है, लेकिन कविता को सामान्य महिला नहीं माना जा सकता। ED ने कहा कि वह कोई सामान्य महिला नहीं बल्कि बड़ी राजनेता हैं।

ED ने कहा था, ”इस मामले में आरोपित (के कविता) रिश्वत देने के मामले में सबसे प्रमुख किरदार है। उन्होंने सिर्फ रिश्वत ही नहीं दी है, बल्कि इंडोस्पिरिट्स के माध्यम से इस मामले में फायदा भी लिया है। मैं सिर्फ बयानों पर विश्वास नहीं कर रहा। हमारे पास इस मामले में सबूत, व्हाट्सएप डॉक्यूमेंट सब हैं। इस मामले में उन खातों से लेनदेन हुआ और यह उनकी लाभार्थी हैं।”

मेन बात ये है कि गुड्डू मुस्लिम… हत्या के वक्त अधूरे रह गए थे जो माफिया ब्रदर्स के शब्द, 1 साल बाद अतीक अहमद के बेटे अली ने उसे पूरा किया

भारत के दुर्दांत माफियाओं की लिस्ट में शुमार अतीक अहमद की मौत हुए 1 साल पूरे हो चुके हैं। ठीक 1 साल पहले 15 अप्रैल 2023 को प्रयागराज में 3 हमलावरों ने मीडियाकर्मी बन कर अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ को गोलियों से भून दिया था। हत्या के ठीक पहले अतीक ने गुड्डू मुस्लिम के बारे में कुछ बोलना चाहा था लेकिन गोली लगने की वजह से शब्द अधूरे रह गए थे। अब अतीक के जेल में बंद बेटे अली ने बताया है कि उसके अब्बा गुड्डू मुस्लिम के बारे में क्या बताना चाह रहे थे। वहीं उस कब्रिस्तान की सुरक्षा भी कड़ी कर दी गई है जहाँ अतीक अपने भाई अशरफ और बेटे असद के साथ दफन है।

एक साल पहले अतीक अपने भाई अशरफ के साथ प्रायगराज के मेडिकल कॉलेज में पुलिस कस्टडी में लाया गया था। तब, पत्रकारों ने उस से असद के जनाजे में न जाने को ले कर सवाल किया था। इसके जवाब में अतीक बोला कि वह इसलिए नहीं गया था क्योंकि उसे ले ही नहीं जाया गया था, तभी बीच में अशरफ ने टोकते हुए कहा, “मेन बात ये है कि गुड्डू मुस्लिम…।” इसके बाद दोनों भाइयों की हत्या हो गई थी। तब से लोगों में यह जानने की इच्छा थी कि आखिर गुड्डू मुस्लिम के बारे में अशरफ क्या बोलना चाहता था। मीडिया रिपोर्ट्स में पुलिस सूत्रों से बताया गया है कि अतीक अहमद के बेटे अली ने बताया है कि अशरफ कहना चाहता था कि गुड्डू मुस्लिम गद्दार है।

अतीक और अशरफ का मानना था कि उमेश पाल की हत्या के दौरान असद को गाड़ी के बाहर नहीं निकलना था लेकिन उसे गुड्डू मुस्लिम ने ही इशारा कर कर बाहर निकलवाया था। बकौल अली उसके अब्बा अतीक और चाचा अशरफ नहीं चाहते थे कि उमेश पाल की हत्या के दौरान असद गाड़ी से बाहर निकले। अतीक ये मान कर चल रहा था कि गुड्डू मुस्लिम ने ही उसके बेटे को गाड़ी से बाहर आने का इशारा किया था। इसी वजह से दोनों गैंगस्टर भाइयों का मानना था कि गुड्डू मुस्लिम ने उनके साथ गद्दारी की है।

अतीक अहमद को इस बात का भी शक था कि उनके बेटे असद की पुलिस को मुखबिरी गुड्डू मुस्लिम ने की है। वह मानता था कि असद की लोकेशन गुड्डू के अलावा और किसी को भी नहीं पता थी। आखिरकार 13 अप्रैल 2023 को UP STF ने असद को झाँसी में मार गिराया था। बमबाज गुड्डू मुस्लिम अभी भी फरार चल रहा है। वहीं अतीक की मौत के 1 साल पूरे होने पर प्रयागराज के उस कब्रिस्तान में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है जहाँ वो अपने भाई अशरफ और बेटे असद के साथ दफन है।

कालिंदीपुरम में पड़ने वाले इस कब्रिस्तान के आसपास सादे वेश में पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। आशंका इस बात की भी जताई गई है कि फरार चल रही अतीक की बीवी शाइस्ता और अशरफ की बीवी जैनब अपने बेटों सहित कब्रिस्तान आ सकते हैं।

कौन है कॉन्ग्रेस का वो नेता, जिसने कन्हैया कुमार को किया नंगा, सारे पुराने पाप एक साथ लाया सामने: ‘सेना बलात्कारी’, ‘गरीबों को हटाओ’ वाले वीडियो किए शेयर

कॉन्ग्रेस पार्टी ने रविवार (14 अप्रैल 2024) को दिल्ली में अपने तीन प्रत्याशियों के नामों की घोषणा की। कॉन्ग्रेस की ओर से दिल्ली की चाँदनी चौक सीट से जेपी अग्रवाल, उत्तर पूर्वी दिल्ली से कन्हैया कुमार, उत्तर पश्चिम दिल्ली से उदित राज को टिकट दिया गया है। इसमें सबसे चौंकाने वाला नाम उत्तर पूर्वी दिल्ली से कन्हैया कुमार का है। कम्युनिष्ट पार्टी सीपीआई के नेता रहे कन्हैया ने पिछला लोकसभा चुनाव सीपीआई के टिकट पर बिहार के बेगूसराय से लड़ा था, जो उनका गृहजिला है, लेकिन उसमें उन्हें करारी हार मिली थी। इस बार वो कॉन्ग्रेस के टिकट पर वहीं से चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन आरजेडी ने खेल कर दिया। खैर, उत्तर-पूर्वी दिल्ली लोकसभा सीट से जैसे ही कन्हैया कुमार के नाम का ऐलान हुआ, कॉन्ग्रेस के भीतर से ही कन्हैया का विरोध होने लगा। दिल्ली में कॉन्ग्रेस के नेता ने कन्हैया कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल किया है।

कौन हैं कन्हैया कुमार के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले कॉन्ग्रेस नेता?

कन्हैया कुमार की उम्मीदवारी के खिलाफ कॉन्ग्रेस के संगठन केकेसी-असंगठित कामगार एवं कर्मचारी कॉन्ग्रेस के प्रवक्ता सुभरांश कुमार राय हैं। उन्होंने कन्हैया कुमार के विवादित बयानों का वीडियो पोस्ट किया और कन्हैया कुमार का खुला विरोध किया। सुभरांश कुमार राय ने कन्हैया की उम्मीदवारी की घोषणा के बाद एक्स पर लिखा, “भारत तेरे टुकड़े होंगे? ये कहने वाला या नारेबाजी करती हुई भीड़ की साथ मौन रह कर खड़ा रहना दोनों अपराध है। और एक तरफ राहुल गाँधी न्याय की बात करते है, देश जोड़ने की बात करते है और दूसरी तरफ़ देश को तोड़ने वालों को टिकट? क्या CEC सच में है?”

सुभरांश कुमार राय ने कन्हैया कुमार की सेना को बलात्कारी कहने वाला वीडियो भी पोस्ट किया और अपना जबरदस्त विरोध दर्ज कराया। उन्होंने लिखा, “‘सेना कश्मीर में बलात्कार कर रही है’ -कन्हैया कुमार। जिस सेना ने कश्मीर को आज सही मायने में धरती का स्वर्ग बनाया है उसे ही गली? ये कैसा सम्मान है और कैसी न्याय का हक मिलने तक की बात हो रही है राहुल गाँधी जी? देश और देश रक्षक प्रथम।”

कॉन्ग्रेस नेता राय ने एक वीडियो भी रीट्वीट किया है, जिसमें कन्हैया कुमार पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी पर चुटकी लेते दिख रहे हैं।

इस वीडियो में कन्हैया कुमार बोल रहे हैं, “श्रीमती इंदिरा जी ने कहा था कि ‘गरीबी हटाओ’। कुछ दिन में जब गरीबी नहीं हटा, तो कहा-‘गरीबों को भगाओ।'”

राय के एक्स हैंडल का स्क्रीनशॉट

इस मुद्दे पर ऑपइंडिया ने सुभरांश कुमार राय से संपर्क कर बातचीत की। उन्होंने कहा कि वो कॉन्ग्रेस के समर्पित कार्यकर्ता हैं। उन्होंने ऑपइंडिया से बातचीत में कहा, “कॉन्ग्रेस एक लोकतांत्रिक पार्टी है, जहाँ पर सभी को अपने विचार और बात रखने का हक है।” उन्होंने आगे कहा, ‘मैं ये नहीं कहता कि ‘भारत तेरे टुकड़े होंगे’ कन्हैया कुमार ने कहा या नहीं कहा। इस बात से भी कोई मतलब नहीं है कि कोर्ट में ये केस पेंडिंग है, ऐसे लाखों केस अदालतों में पेंडिंग है। लेकिन आपने कहा या आप वहाँ परोक्ष रूप से मौजूद थे, उस समय अगर आपने प्रतिरोध नहीं किया, तो इसका मतलब आपका समर्थन ही है।

कॉन्ग्रेस नेता सुभरांश कुमार राय ने किया कन्हैया का तीखा विरोध

राय ने कहा, “जो हमसे हर बात से आजादी माँगता है, और टुकड़े-टुकड़े गैंग का समर्थन करता है, मेरा उससे विरोध है।” सुभरांश कुमार ने बताया कि वो केकेसी के प्रवक्ता हैं और अन-ऑर्गनाइज सेक्टर में काम कर रहे लोगों के हक के लिए काम करते हैं। केकेसी के अध्यक्ष अदित राज हैं, उन्हें भी कॉन्ग्रेस ने टिकट दिया है। उन्होंने कहा कि ‘मैं सही को सही और गलत को गलत कहने की हिम्मत रखता हूँ। राहुल गाँधी जी भी यही बोलते हैं कि हमें डरना नहीं है।’

बता दें कि कन्हैया कुमार जेएनयू में छात्रसंघ अध्यक्ष के पद पर चुनाव जीतने के बाद रातों-रात चर्चा में आ गए थे। इस दौरान ‘भारत तेरे टुकड़े होंगे’ और ‘हम लेकर रहेंगे आजादी’ जैसे स्लोगनों से उनका नाम जुड़ा। इस लोकसभा चुनाव में उन्हें कॉन्ग्रेस ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली लोकसभा सीट से चुनाव मैदान में उतारा है, जहाँ उनका मुकाबला बीजेपी के दो बार के सांसद और दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष रहे भोजपुरी अभिनेता-गायक मनोज तिवारी से है। मनोज तिवारी मौजूदा सांसद भी हैं। उत्तर-पूर्वी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र में ही साल 2020 के हिंदू-विरोधी दंगे हुए थे, जिसमें हिंदुओं की काफी संपत्ति को नुकसान पहुँचा था और कई लोगों की जान गई थी। इस दौरान आईबी अधिकारी की भी हत्या कर दी गई थी। कन्हैया कुमार के साथी उमर खालिद भी इन दंगों का आरोपित है। वो अभी जेल में बंद है।

टाटा की बनाई सेमीकंडक्टर चिप खरीदेगी टेस्ला, दोनों कम्पनियों के बीच हुआ समझौता: एलन मस्क जल्द भारत आकर कर सकते हैं ऐलान

अमेरिका की इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता कम्पनी टेस्ला ने भारत की टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स से सेमीकंडक्टर चिप को लेकर एक रणनीतिक समझौता किया है। टेस्ला, भारत में बनी हुई सेमीकंडक्टर चिप को अपनी गाड़ियों में लगाएगी। अभी इसका आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है। यह जानकारी एक रिपोर्ट में दी गई है।

द इकॉनोमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी कम्पनी के साथ भारत के बड़े कारोबारी समूह का यह समझौता कुछ महीने पहले हुआ है लेकिन इसकी जानकारी मीडिया को नहीं दी गई है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि टाटा से खरीदी हुई चिप को टेस्ला विश्व भर में बेचे जाने वाले वाहनों में लगाएगी।

टाटा सेमीकंडक्टर निर्माण के क्षेत्र में उतर रही है। उसने हाल ही में असम, गुजरात और तमिलनाडु में अपने सेमीकंडक्टर प्लांट लगाने का काम चालू किया है। जल्द ही इन प्लांट में चिप का निर्माण चालू हो जाएगा। उधर टेस्ला लम्बे समय से भारत में एंट्री को लेकर योजना बना रही है।

टेस्ला के भारतीय बाजार में आने को लेकर पहले कुछ नीतिगत अड़चने सामने आ रही थी। अब सरकार ने वाहन आयात की नीतियाँ बदली हैं जिससे टेस्ला की गाड़ियाँ अब भारत में आयात हो सकेंगी और उन पर ज्यादा इम्पोर्ट ड्यूटी भी नहीं लगेगी। हालाँकि , इसके लिए टेस्ला को भारत में कम से कम लगभग ₹4000 करोड़ का निवेश करना होगा।

टेस्ला के मुखिया एलन मस्क के अप्रैल माह के अंत तक भारत आने की भी सूचना है। इसी दौरान वह भारतीय बाजार में टेस्ला की एंट्री, भारत में उनकी कंपनी के निवेश और साथ ही अन्य भारतीय कम्पनियों के साथ सहयोग को लेकर घोषणाएं करेंगे। इससे पहले उनके प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मिलने की चर्चा है।

बताया जा रहा है कि टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स अब तक देश में सेमीकंडक्टर के निर्माण के लिए ₹1 लाख करोड़ से अधिक का निवेश कर चुकी है। यह सेमीकंडक्टर क्षेत्र के विशेषज्ञों को दुनिया भर से बुला रही है। टाटा आने वाले कुछ सालों में भारत में सेमीकंडक्टर क्षेत्र की सबसे अग्रणी कम्पनी बनने के प्रयास में है।

टेस्ला के टाटा से समझौता करने के पीछे उसकी चीन पर निर्भरता को भी कारण माना जा रहा है। टेस्ला अधिकाँश सामान चीन से आयात करती है। हालाँकि, कोविड महामारी के बाद से उसने अपने स्रोतों को बढ़ाना चालू कर दिया है। इसी क्रम में उसने भारत से भी सेमीकंडक्टर खरीदने की योजना बनाई है।