Home Blog Page 1060

अल्लारखा बने ‘विजय चौहान’, अजीजुल जाने जाएँगे ‘अनय ठाकुर’ के नाम से: हनुमान मंदिर में 2 मुस्लिम युवकों की घर-वापसी, वेदमंत्रों के साथ गूँजे ‘जय श्री राम’ के नारे

मध्य प्रदेश के जबलपुर में 2 मुस्लिमों युवकों ने सनातन धर्म में ‘घर-वापसी’ की है। घर-वापसी के बाद अब अजीजुल हसन अब ‘अनय ठाकुर’ के नाम से जाने जाएँगे। वहीं अल्लारखा खाँ अब ‘विजय चौहान’ बन चुके हैं। शनिवार (30 मार्च, 2024) को आयोजित इस घर वापसी के कार्यक्रम में इन दोनों युवकों ने अपने पूर्वजों को हिन्दू बताया। इन दोनों ने विधि-विधान से एक हिन्दू मंदिर में पूजा अर्चना की और भविष्य में सदा सनातनी ही बने रहने का संकल्प लिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुतबिक, घर-वापसी का यह कार्यक्रम जबलपुर शहर के सदर थाना क्षेत्र में सम्पन्न हुआ। यहाँ के दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर में 30 मार्च को हिन्दू संगठन से जुड़े सदस्यों का जमावड़ा रहा। यहाँ चंदेरी जिला निवासी अजीजुल हसन और जबलपुर के ही अल्लारखा घर वापसी करने पहुँचे थे। मंदिर के पुजारी अनिल शर्मा ने इन दोनों की विधि-विधान से घर वापसी करवाई। दोनों ने वैदिक मंत्रों के बीच हवन और पूजन किया। बाद में वहाँ मौजूद धर्मसेना संगठन के सदस्यों में जय श्रीराम के नारे लगाए।

घर-वापसी करने वाले अजीजुल ने खुद को सनातन धर्म में वापस आ कर बेहद खुश बताया। सनातनी बनने प्रेरणा की वजह के पीछे अजीजुल ने अपने पूर्वजों का हिन्दू होना कहा। अजीजुल ने शुरुआत से ही खुद को हिन्दू धर्म की तरफ आकर्षित बताया। उन्होंने कहा, “मैं कभी कुरान नहीं पढ़ा। मैंने कभी नमाज नहीं पढ़ी। मैं हिंदी माध्यम से सरस्वती विद्या मंदिर का छात्र रहा हूँ।” वहीं जबलपुर के अल्लारखा ने भी अपने पूर्वजों को सनातनी बताया। उन्होंने कहा कि वो अपने पूर्वजों के धर्म में पुनः आ गए हैं।

अल्लारखा बचपन से ही अनाथ हो गए थे। अल्लारखा के बारे में भी बताया जा रहा है कि उसने कभी किसी मौलवी आदि से सम्पर्क नहीं रखा था। अल्लारखा का भी शुरुआत से ही हिन्दू धर्म की तरफ झुकाव था। घर वापसी कार्यक्रम सम्पन्न करवाने वाले योगेश अग्रवाल ने इस मौके पर मीडिया से बात की। उन्होंने बताया कि भारत के हर मुस्लिम और ईसाई के पूर्वज कहीं न कहीं हिन्दू ही थे। धर्मसेना ने आह्वान किया कि वो हर ईसाई और मुस्लिम की घर वापसी का स्वागत करेंगे।

ज्ञानवापी के लिए पैसे देता था मुख्तार अंसारी! रिपोर्ट में दावा -माफिया की मौत के बाद मुकदमों पर पड़ेगा असर, महंगे वकीलों की फीस कैसे दी जाएगी?

ज्ञानवापी से जुड़े मामलों की सुनवाई एक ही दिन में जिला कोर्ट से लेकर हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक में होती रहती थी। अब लगता है, वो रुक जाएगी। भास्कर ने अपनी रिपोर्ट में बीजेपी नेता के हवाले से दावा किया है कि मुख्तार अंसारी ज्ञानवापी को चंदे देता था और उन पैसों से मुकदमे बाजी की जाती थी। बीजेपी नेता ने कहा कि साल 2012 से मुख्तार अंसारी की ओर से पैसे दिए जाते हैं। उनका दावा है कि अब ज्ञानवापी के मुकदमे को लड़ने पर फर्क पड़ सकता है, क्योंकि फंड की कमी आ सकती है।

इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि साल 2022 में भी ज्ञानवापी पक्ष के लिए हो रहे फंडिंग की जाँच का मुद्दा उठा था, लेकिन बाद में ये माँग ढीली पड़ गई। माफिया विरोधी मंच के अध्यक्ष और बीजेपी नेता सुधीर सिंह का दावा है कि साल 2012 में पहली बार मुख्तार अंसारी ने ज्ञानवापी के लिए 10 लाख रुपए दिए थे। मुख्तार अंसारी अपने इलाजे के लिए बीएचयू पहुँचे थे। यहाँ उनकी मुलाकात मुफ्ती अब्दुल बातिन से हुई थी। मुफ्ती की तरफ से ही ज्ञानवापी के जर्जर होने की दुहाई दी गई, जिसके बाद मुख्तार ने अपने पीए को बुलाकर 10 लाख रुपए मंगवाए और उन्हें दे दिए। सुधीर सिंह का दावा है कि ये लेनदेन उनकी मौजूदगी में हुई थी, क्योंकि वो भी उस समय समाजवादी पार्टी के नेता थे।

सुधीर सिंह ने कहा, “मुख्तार अंसारी ने आगे भी पैसे देने का वादा किया। वो सेशन कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक केस लड़ने के लिए पैसे भिजवाता था।” हालाँकि अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने इस दावे को खारिज किया है। ज्वॉइंट सेक्रेटरी एसएम यासीन ने कहा कि मुख्तार से कभी पैसे नहीं लिए गए। मुख्तार ने खुद से चंदा दिया हो, ऐसा कोई वाकया उन्हें याद नहीं। वहीं, मुफ्ती अब्दुल बातिन नोमानी ने भी वही बाते दोहराई और कहा कि जो व्यक्ति साल 2005 से जेल में बंद हो, वो हमारी मदद क्या करेगा?

अपने दावे के बारे में बात करते हुए सुधीर सिंह ने बताया, “साल 2012 में मुख्तार अंसारी को यूरिक एसिड की समस्या थी, जिसके इलाज के लिए वो बीएचयू आए थे। वहीं मुफ्ती नोमानी से उनकी मुलाकात हुई। इस मुलाकात के दौरान मुफ्ती नोमानी ने कहा कि ज्ञानवापी की हालत जर्जर होती जा रही है, वो कभी भी गिर सकती है। मरम्मत के लिए रकम की जरूरत है। इस पर मुख्तार ने अपने पीए को कहकर 10 लाख रुपए गाड़ी से मँगवाए और उन्हें दे दिया। इसके बाद मुफ्ती ने रकम को नाकाफी बताया, तो मुख्तार ने और भी मदद करने की बात कही, साथ ही कहा कि हर माह उन्हें रकम पहुँचती रहेगी।”

आयकर विभाग ने कॉन्ग्रेस को दिया फिर झटका, इस बार थमाया ₹1745 करोड़ का नोटिस: टैक्स की रकम का आँकड़ा ₹3000 करोड़ के पार

कॉन्ग्रेस पार्टी को इनकम टैक्स विभाग से नया नोटिस मिला है। इसमें आकलन वर्ष 2014-15 से 2016-17 तक के लिए 1,745 करोड़ रुपए के टैक्स की माँग की गई है। साल के हिसाब से बताएँ तो 2014-15 के लिए 663 करोड़ रुपए, 2015-16 के लिए करीब 664 करोड़ रुपए और 2016-17 के लिए करीब 417 करोड़ रुपए आयकर विभाग ने कॉन्ग्रेस पार्टी से माँगे हैं

इस नोटिस के बाद कहा जा रहा है कि आयकर विभाग द्वारा कॉन्ग्रेस से अब तक कुल 3,567 करोड़ रुपए के कर की माँग हो चुकी है। ये नोटिस अधिकारियों द्वारा राजनीतिक दलों को दी जाने वाली टैक्स छूट खत्म के बाद पार्टी को दिए गए हैं।

बता दें कि इससे पहले कॉन्ग्रेस ने बताया था कि उन्हें आयकर विभाग से नोटिस मिला था जिसमें करीब 1,823 करोड़ रुपए का भुगतान करने को कहा गया है। उन्होंने यह भी दावा किया था कि पिछले वर्ष से संबंधित टैक्स माँग के लिए पार्टी के खातों से पहले ही 135 करोड़ रुपए निकाल लिए गए हैं जिसके कारण उन्होंने अदालत का रुख किया है। अब इस मामले में 1 अप्रैल को इस मामले में सुनवाई होने की संभावना है।

कॉन्ग्रेस ने जानकारी साझा करते हुए आयकर विभाग के इन नोटिसों और रिकवरी की कार्रवाई पर आरोप लगाया था कि सरकार चुनाव से पहले उनके खाते सीज कर रही है। कॉन्ग्रेस का कहना था कि पार्टी के पास चुनाव लड़ने को भी फंड नहीं है, इसीलिए वह प्रचार आदि में भी पैसा नहीं खर्च पा रही। वहीं उनकी पार्टी के खाते से 135 करोड़ रुपए निकाल लिए गए हैं। हालाँकि, आयकर विभाग ने इन आरोपों पर कहा था कि वह मात्र अपनी रिकवरी कर रहे हैं और उसने कोई भी खाते फ्रीज नहीं किए हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस मामले पर कहा था कि कॉन्ग्रेस इसे चुनावी मुद्दा बना रही है।

लाठी उठा कर ताबड़तोड़ किया वार, ‘मुंबई इंडियंस’ के फैंस ने पीट-पीट कर मार डाला: रोहित शर्मा के आउट होने का जश्न मना रहा था CSK फैन

महाराष्ट्र के कोल्हापुर में क्रिकेट के विवाद में एक व्यक्ति की जान चली गई है। मृतक की पहचान 63 वर्षीय बंदोपंत बापसो टिबिले के रूप में हुई है। हत्या का आरोप 50 साल के महादेव झांझगे (50) और 35 वर्षीय सागर सदाशिव झांझगे पर लगा है। दोनों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। मृतक ‘चेन्नई सुपरकिंग्स’ का फैन था जबकि आरोपित ‘मुंबई इंडियंस’ के समर्थक थे। घटना बुधवार (27 मार्च, 2024) की है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना कोल्हापुर के हनमंतवाड़ी की है। 27 मार्च 2024 को हैदराबाद के राजीव गाँधी इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में ‘मुंबई इंडियंस’ और ‘सनराइजर्स हैदराबाद’ टीमों के बीच आईपीएल मैच खेला जा रहा था। बलवंत झांझगे और सागर झांझगे दोनों ही IPL (इंडियन प्रीमियर लीग) में ‘मुंबई इंडियंस’ को समर्थन दे रहे हैं। वहीं मृतक बंदोपंत टिबिले ‘चेन्नई सुपरकिंग्स’ के फैन हैं। बताया जा रहा है कि बुधवार को हुए इस मैच में हैदराबाद की टीम ने बड़ा स्कोर खड़ा किया था। इस स्कोर से दोनों आरोपित खुश नहीं थे।

कुछ देर मुंबई इंडियंस ने रनों का पीछा करना शुरू किया। इसी दौरान मुंबई इंडियंस के बल्लेबाज रोहित शर्मा आउट हो गए। इस विकेट के गिरने का टिबिले जश्न मनाना शुरू कर दिए। यह बात उसी टीवी पर मैच देख रहे बलवंत झांझगे और सागर झांझगे को नागवार गुजरी। दोनों ने गुस्से ने लाठी उठा ली और बंदोपंत टिबिले को पीटना शुरू कर दिया। लाठियों के वार टिबिले के सिर पर भी किए गए। इस हमले से पीड़ित मौके पर ही बेहोश हो गया जिसे अस्पताल में भर्ती करवाया गया।

लगभग 4 दिनों तक बंदोपन्त का अस्पताल में इलाज चला। आखिरकार रविवार (31 मार्च, 2024) को बंदोपन्त का निधन हो गया। पीड़ित परिवार की तहरीर पर पुलिस ने बलवंत और सागर के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। दोनों को गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया गया है। मामले की जाँच की जा रही है। जिस मैच के विवाद में बंदोपन्त की हत्या हुई थी बाद में मुंबई इंडियन उसे 31 रनों से हार गई थी।

कुर्सी बदल कर सीताराम येचुरी से अलग बैठ गए डेरेक ओब्रायन, रैली में दिखी I.N.D.I. गठबंधन की एकता में खटास: राजदीप सरदेसाई की पत्नी बोलीं – देश में तानाशाही

राजधानी नई दिल्ली में हुई I.N.D.I. गठबंधन की रैली यूँ तो मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गिरफ़्तारी का विरोध करने के लिए बुलाई गई थी, लेकिन इसमें विपक्षी दलों की एकता में खटास भी दिख गई। हुआ यूँ कि पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी TMC (तृणमूल कॉन्ग्रेस) के नेता डेरेक ओब्रायन और राज्य में विपक्षी दलों में शामिल CPI(M) के सीताराम येचुरी को रैली में मंच पर साथ-साथ बिठाया गया था। हालाँकि, डेरेक ओब्रायन ने अपनी कुर्सी बदल ली और अलग बैठ गए।

बता दें कि पश्चिम बंगाल में TMC और वामदल लंबे समय से एक-दूसरे के दुश्मन हैं और लोकसभा चुनाव 2024 में भी दोनों दल एक-दूसरे के खिलाफ लड़ रहे हैं। 2012 से पहले 33 वर्षों तक वहाँ लेफ्ट का शासन था, वहीं पिछले 12 वर्षों से ममता बनर्जी सत्ता में हैं। ममता बनर्जी ने कॉन्ग्रेस पार्टी को भी इन चुनावों में भाव नहीं दिया और सभी सीटों पर अपने प्रत्याशी उतार दिए। कॉन्ग्रेस से सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी, प्रियंका गाँधी और अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे इस रैली का हिस्सा बने।

वहीं बात-बात पर भाजपा को कोसने वाले पत्रकार राजदीप सरदेसाई की पत्नी सागरिका घोष ने भी इस रैली में बड़ी-बड़ी बातें की। उन्होंने कहा कि उनकी नेता ममता बनर्जी का पूरा समर्थन अरविंद केजरीवाल के साथ है, चुनाव प्रचार शुरू करने में व्यस्त होने के कारण वो नहीं आ सकीं। सागरिका घोष ने कहा कि AAP के सामने चुनाव के समय एक बहुत बड़ी चुनौती है, उनके लोकप्रिय नेता को जेल भेजा गया है। उन्होंने कहा कि ये जनतंत्र नहीं बल्कि तानाशाही है।

उन्होंने ED को मोदी सरकार का यंत्र बताते हुए कहा कि भाजपा के भीतर जो चला जाता है उस पर दूध सी सफेदी छा जाती है। उन्होंने कहा कि एक नेता, एक दल वाली नीति लोकतंत्र को खत्म कर रही है। उन्होंने कहा कि पैसा सरकार गिराने के लिए लगाया जा रहा है, गरीब कल्याण के लिए नहीं। उन्होंने कहा कि इस राजनीति से हमारे देश का विनाश हो रहा है। उन्होंने देश की 70% आमदनी 10% लोगों के पास होने की बात करते हुए कहा कि दूध-टमाटर-दाल का दाम बढ़ गया है और मोदी की गारंटी जीरो वॉरंटी है।

मथुरा में पुलिस और गौरक्षकों ने तस्करों से बचाए 24 गोवंश, एक दिन पहले ही मुठभेड़ में पुलिस ने हनीफ-इरशाद और जाहिद को पकड़ा था

हिंदुओं का प्रसिद्ध धार्मिक केंद्र मथुरा में भी गौ तस्कर अपनी करतूतों से बाज नहीं आ रहे हैं। वे लगातार पुलिस को चुनौती दे रहे हैं। शुक्रवार (29 मार्च 2024) की देर रात करीब गौ रक्षकों ने पुलिस के सहयोग से 24 गोवंशों को बचाया है। इसके ठीक एक दिन पहले मथुरा पुलिस ने एनकाउंटर करके तीन गो तस्करों को गिरफ्तार किया था। उनके पैरों में गोली लगी थी।

दरअसल, शुक्रवार की रात कुछ गौ रक्षकों को सूचना मिली की एक बंद बॉडी कैंटर में गौ वंश को भरकर तस्कर आगरा से मेवात की तरफ ले जा रहे हैं। यह भी कहा गया था कि इस छोटे से कैंटर में 24 गौ वंशों को रखा गया है। इसके बाद गौ रक्षकों की टीम ने पुलिस को सूचित किया और एक गाँव के समीप नाका लगाया। इस दौरान आ रहे कैंटर को रोकने का प्रयास किया, लेकिन तस्कर कैंटर लेकर भागने लगे।

तस्करों द्वारा कैंटर लेकर भागने पर गौ रक्षकों ने अपनी गाड़ियों से उसका पीछा किया और उसे रोकने की कोशिश की। लगभग 10 किलोमीटर तक पीछा करने के बाद गौ तस्कर खुद घिरता देखकर हड़बड़ा गए और अंधेरे में सड़क किनारे कैंटर छोड़कर भाग गए। इस दौरान पीछा कर रही गौरक्षकों की टीम वहाँ पहुँची और कैंटर में भरे 24 गौ वंश को बरामद कर लिया।

पुलिस ने गौ तस्करों की तलाश की, लेकिन अंधेरे का फायदा उठाकर वे भागने में सफल रहे। आखिरकार गौ वंशों को श्रीपाद बाबा की गौशाला लाया गया। वहीं कैंटर को पुलिस ने जब्त कर लिया। गौ तस्करी के इस मामले में धनगर थाना में अज्ञात गौ तस्करों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई कराई है।

बता दें कि गुरुवार (28 मार्च 2024) की रात को गश्ती के दौरान बरसाना पुलिस की चरण पहाड़ी के पास गौ तस्करों से मुठभेड़ हो गई थी। जब पुलिस ने तस्करों को रोकने की कोशिश की तो वे पुलिस पर फायरिंग करने लगे। इसके बाद पुलिस ने जवाबी फायरिंग की, जिसमें तीन तस्करों के पैरों में गोली लगी।

मुठभेड़ में घायल हुए तस्करों की पहचान हरियाणा के नूहँ निवासी हनीफ, इरशाद और जाहिद के रूप में हुई। इन तीनों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। घायल तस्करों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया था। इनके पास से दो तमंचा, एक सैंट्रो कार और दो गौवंश बरामद किए गए थे।

अब्दुल को ईसाई बनने पर UK में मिली थी शरण, महिला और बच्चे पर केमिकल अटैक करने वाले का ‘सच’: ‘मुस्लिम भाइयों’ ने उसके लिए ‘फर्जीवाड़ा’ कर जमा किया चंदा

यूनाइटेड किंगडम (यूके) जो दशकों से मुस्लिमों को शरण देता रहा। वहाँ ऐसा आपराधिक कुकृत्व सामने आया है, जिसने पूरे यूके की आँखें खोल दी हैं। यहाँ अफगानिस्तान से भागे जिहादी अब्दुल इजेदी ने 31 मार्च को एक महिला और उसके 1 साल के बच्चे पर केमिकल अटैक किया। इस हमले में कई लोग महिला और बच्चे को बचाने के चक्कर में झुलस गए, जिसमें 5 पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। अब पता चला है कि जिहादी अब्दुल इजेदी की पूरी जिंदगी ही झूठ पर आधारित थी और उसकी पूरी कौम का भी यही हाल दिखता है।

दरअसल, अब्दुल इजेदी का शव टेम्स नदी से बरामद हुआ, तब तक वो क्रिश्चियन था, क्योंकि उसने नागरिकता पाने के लिए क्रिश्चियानिटी का सहारा लिया था। लेकिन डेलीमेल ने खुलासा किया है कि अब्दुल इजेदी के ‘करीबियों’ ने उसे क्रिश्चियन कब्रिस्तान नहीं, बल्कि मुस्लिम कब्रिस्तान में दफनाया। यही नहीं, उसे दफनाने के लिए तथाकथित मुस्लिम धर्म के लोगों ने ऑनलाइंन फंडिंग अभियान भी चलाया। लेकिन यहाँ भी जिहादियों ने धोखाधड़ी करते हुए किसी अन्य नाम और पहचान के साथ न सिर्फ चंदा इकट्ठा किया, बल्कि उसे इस्लामिक रीति-रिवाजों के साथ दफनाया भी।

इस पूरे मामले में खुलासा हुआ है कि अब्दुल इजेदी साल 2016 में लॉरी में सवार होकर ब्रिटेन पहुँचा था। वो अफगानिस्तान से किसी तरह ब्रिटेन पहुँचने में सफल रहा। यहाँ उसने दो बार शरणार्थी के तौर पर देश में रहने देने की अनुमति माँगी, लेकिन उसकी अपील खारिज कर दी गई। लेकिन कुछ समय गायब रहने के बाद उसने दावा किया कि वो अब क्रिश्चियन हो गया है और अब अगर वो अफगानिस्तान जाएगा, तो उसको मार दिया जाएगा।

अब्दुल इजेदी की इस दलील और बापतिस्ट चर्च से मिले धर्मांतरण के बाद उसे इंग्लैंड में रहने की छूट दे गई। वैसे, वो साल 2018 में भी एक महिला के साथ उसने यौन हमले में दोषी ठहराया जा चुका था। अब अब 31 मार्च को उसने अपनी पूर्व परिचित महिला और उसके 1 साल के बच्चे के ऊपर केमिकल फेंका। उसकी तलाश की जा रही थी कि उसका शव टेम्स नदी में मिला। लेकिन जब दफनाने की बारी आई, तो उसके मुस्लिम ‘जिहादी भाईयों’ ने अलग रास्ता खोज निकाला।

अब्दुल इजेदी की जगह अब्दुल वाहेद के नाम से चंदा इकट्ठा

मुस्लिम बुरिअल फंड (MBF) ने इसाई बन चुके अब्दुल इजेदी को अब्दुल वाहेद के नाम से दफनाया। उन्होंने इसके लिए 3800 पाउंड का लक्ष्य रखा था, जिसे चंदे के जरिए पूरा करना था। उसमें पूरे यूके के मुस्लिमों की ओर से 6596 पाउंड दान की रकम मिली। मुस्लिम बुरिअल फंड से जब पूछा गया कि अब्दुल इजेदी को इस्लामी रीति से क्यों दफनाया गया, तो संस्था ने जवाब दिया कि ये मरने वाले के परिजनों की इच्छा के मुताबिक किया गया। हालाँकि सवाल उठ रहे हैं कि उसके किस परिजन की मर्जी से ऐसा हुआ? वो परिजन कहाँ से आए? क्योंकि उन्हें छोड़कर अब्दुल 2016 में भी यूके आ गया था और क्रिश्चियन बन गया था? या उसकी ‘पुरानी कौम’ के लोग?

समस्या दान के पैसों की नहीं है, अब सवाल उठ रहे हैं कि किसी गलत नाम से चंदा क्यों इकट्ठा किया गया और सबसे बड़ा सवाल तो ये उठ रहा है, कि क्या कोई भी व्यक्ति नागरिकता या शरण पाने के लिए क्रिश्चियन बन जाता है, तो उसे ब्रिटेन में रहने की अनुमति मिल जाती है? क्योंकि अब्दुल इजेदी के मामले में ऐसा ही हुआ। ऐसे में बापटिस्ट चर्च को भी लोग चेतावनी दे रहे हैं कि वो ऐसे किसी ‘खेल’ के चक्कर में न पड़े।

लालकृष्ण आडवाणी के घर पर चल कर आया ‘भारत रत्न’, PM मोदी की मौजूदगी में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया सम्मानित: देखें वीडियो

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रविवार (31 मार्च 2024) को भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के आवास पर जाकर उन्हें देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ दिया। इस दौरान राष्ट्रपति के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृहमंत्री अमित शाह भी मौजूद थे। दरअसल, आडवाणी के खराब स्वास्थ्य के कारण उनके घर जाकर यह सम्मान सौंपा गया।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 3 फरवरी 2024 को उन्हें भारत रत्न देने की घोषणा की थी। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और भाजपा के संस्थापक सदस्य नानाजी देशमुख के बाद लालकृष्ण आडवाणी भारत रत्न सम्मान पाने वाले भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े तीसरे नेता हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 3 फरवरी 2024 को भारत रत्न देने की घोषणा करते हुए कहा था कि उन्हें ये बताते हुए ख़ुशी हो रही है कि पूर्व उप-प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी को ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने आडवाणी से बात करके उन्हें बधाई भी दी थी। पीएम ने आडवाणी को अपने समय के सबसे सम्मानित नेताओं में से एक बताते हुए कहा था कि भारत के विकास में उनका योगदान चिरस्मरणीय है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लालकृष्ण आडवाणी के साथ अपनी 2 तस्वीरें पोस्ट की थी और लिखा था, “लालकृष्ण आडवाणी का जीवन जमीनी स्तर पर काम करने से शुरू हुआ और उप-प्रधानमंत्री के रूप में देश की सेवा करने तक पहुँचा। हमारे गृह एवं सूचना-प्रसारण मंत्री के रूप में भी उन्होंने छाप छोड़ी। संसद में उनके संबोधन हमेशा अनुकरणीय और समृद्ध अंतःदृष्टि से परिपूर्ण रहे।”

लालकृष्ण आडवाणी का जन्म 8 नवंबर 1927 को वर्तमान पाकिस्तान के कराची शहर में हुआ था। उन्होंने कराची के सेंट पैट्रिक और सिंध स्थित हैदराबाद के डीजी नेशनल कॉलेज से पढ़ाई की है। लालकृष्ण आडवाणी मात्र 14 वर्षों की उम्र में 1941 में RSS (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) में शामिल हो गए थे। सन 1947 वे RSS के कराची ईकाई के सचिव बने।

सन 15 अगस्त 1947 में भारत के विभाजन के बाद उनका परिवार मुंबई में आ गया। 1951 में उन्हें जनसंघ ने राजस्थान में संगठन की जिम्मेदारी सौंपी और 6 वर्षों तक घूम-घूम कर उन्होंने जनता से संवाद किया था और संपर्क बनाया था। 1967 में दिल्ली महानगरपालिका परिषद का अध्यक्ष चुने जाने के साथ उन्होंने चुनावी राजनीति में कदम रखा था।

लालकृष्ण आडवाणी का सार्वजनिक जीवन 7 दशकों से भी अधिक का रहा है। 96 वर्ष की उम्र में भी वो लिखने-पढ़ने में रुचि रखते हैं। लालकृष्ण आडवाणी लोकसभा में गाँधीनगर और नई दिल्ली का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। वहीं उन्हें दिल्ली, गुजरात और मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद भी चुना गया था। 3 बार उन्होंने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष की कमान सँभाली।

‘भारत माँ कराह रही है’: सुनीता केजरीवाल ने स्वतंत्रता संग्राम के बलिदानियों से की अपने CM पति की तुलना, दिल्ली में I.N.D.I. गठबंधन के मंच से मनुस्मृति के खिलाफ लड़ाई का ऐलान

राजधानी नई दिल्ली में रविवार (31 मार्च, 2024) को विपक्षी नेताओं का जमघट लगा और I.N.D.I. गठबंधन के बैनर तले रैली हुई हुई। रैली में कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी, महासचिव प्रियंका गाँधी, पंजाब के CM भगवंत मान, जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फ़ारूक़ अब्दुल्लाह व महबूबा मुफ़्ती, हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना, राजद से तेजस्वी यादव और सपा से अखिलेश यादव के अलावा महाराष्ट्र में NCP के शरद पवार और शिवसेना (UBT) के उद्धव ठाकरे शामिल हुए। वामपंथी नेता दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि ये संविधान की जगह मनुस्मृति थोपने के खिलाफ लड़ाई है।

इस दौरान सुनीता केजरीवाल ने कहा कि जेल से अरविंद केजरीवाल ने जनता के नाम संदेश जेल भेजा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके पति को जेल में डाल दिया। उन्होंने रैली में उपस्थित लोगों से पूछा कि क्या आप मानते हैं कि अरविंद केजरीवाल सच्चे और देशभक्त इंसान हैं? उन्होंने पूछा कि क्या उन्हें इस्तीफा देना चाहिए? उन्होंने दावा किया कि अरविंद केजरीवाल करोड़ों लोगों के दिल में बसते हैं, जिस बहादुरी और साहस से वो लड़ रहे हैं ऐसा लगता है वो स्वतंत्रता सेनानी की तरह हैं जो शहीद हो गए।

उन्होंने दावा किया कि ये लोग अरविंद केजरीवाल को ज़्यादा दिन जेल में नहीं रख पाएँगे। उन्होंने केजरीवाल का संदेश पढ़ते हुए कहा कि आज वो वोट नहीं माँग रहे, 140 करोड़ देशवासियों से एक बड़ा भारत बनाने के लिए आमंत्रित करते हैं। उन्होंने कहा कि भारत एक महान देश है जिसकी संस्कृति हजारों वर्ष पुरानी है, भगवान का दिया सब कुछ है फिर भी हमारे लोग अनपढ़ और पिछड़े। बकौल सुनीता, जेल में उनके पति काफी सोचते हैं, उन्हें पता चला है कि भारत माँ दुःखी हैं, दर्द में हैं, कराह रही है।

उन्होंने संदेश पढ़ते हुए कहा, “जब महँगाई की वजह से लोगों को रोटी नहीं मिलती तो भारत माता को दुःख होता है। आज़ादी के 75 वर्ष बाद भी लोगों को इलाज नहीं मिलता। बिजली जाती है, सड़कें खराब हैं। भारत माँ को बहुत पीड़ा होती है। इस पर कुछ नेता लच्छेदार भाषण देते हैं, शौनो-शौकत की ज़िंदगी जीते हैं। भारत माता को ऐसे लोगों से नफरत है। एक ऐसा भारत जहाँ सबको खाना मिले, हर बच्चे को अच्छी शिक्षा मिले, सबको अच्छा इलाज मिले चाहे वो अमीर हो या गरीब।”

सुनीता केजरीवाल ने देश के हर गाँव में शानदार सड़कें होने की बात करते हुए कहा कि एक ऐसा भारत बनेगा जो शिक्षा का केंद्र होगा, बहार से युवक पढ़ने आएँगे, ये विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का केंद्र होगा। उन्होंने कहा कि अगर आप सब I.N.D.I. गठबंधन को मौका देते हैं तो हम सब इसे एक महान राष्ट्र बनाएँगे। इस दौरान उन्होंने 6 गारंटी देने की बात की – पूरे देश में 24 घंटे बिजली, गरीबों को मुफ्त बिजली, हर गाँव-मोहल्ले में शानदार सरकारी स्कूल, हर गाँव-मोहल्ले में मोहल्ला क्लिनिक और हर जिले में मुफ्त इलाज के लिए मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल, किसानों को सभी फसलों पर MSP और दिल्ली को पूर्ण राज्य बनाएँगे।

‘रात साथ में गुजारो, पास कर दूँगा’: विश्व भारती का गेस्ट प्रोफेसर अब्दुल्ला छात्राओं को भेजता था गंदे मैसेज, FIR दर्ज

कोलकाता की विश्व भारती यूनिवर्सिटी की तीन छात्राओं ने एक गेस्ट प्रोफेसर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। छात्राओं ने आरोप लगाया है कि प्रोफेसर ने सेमेस्टर परीक्षा में पास करने के बदले में उनसे यौन संबंध बनाने को बोला।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रोफेसर का नाम अब्दुल्ला मोल्लाह है। मोल्लाह के खिलाफ दी गई शिकायत में तीन विभाग के छात्राओं ने आरोप लगाया है। ये छात्राएँ फारसी, उर्दू और इस्लामिक स्टडीज के डिपार्टमेंट की हैं। इनका कहना है कि गेस्ट टीचर ने इन्हें व्यक्तिगत रूप से अश्लील संदेश भेजे और कई बार उन्हें अनुचित तरीके से छुआ।

छात्राओं ने इस संबंध में 28 मार्च को शांतिनिकेतन पुलिस थाने में दी है। छात्राओं का कहना है कि उन्हें फेल होने का डर दिखाकर इस प्रकार से प्रताड़ित किया गया। प्रोफेसर की हरकत ज्यादा बढ़ने पर छात्राएँ उसके विरुद्ध सारे सबूत लेकर थाने पहुँचीं। उन्होंने प्रोफेसर के भेजे मैसेज दिखाए। इन संदेशों में उसने छात्राओं से अलग जगह मिलने और राज गुजारने जैसी बातें कही हुई हैं।

इस संबंध में पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वो मामले की जाँच कर रहे हैं। वहीं प्रोफेसर ने अपने ऊपर लगे सभी आरोप खारिज करते हुए कहा, “मैं इस वक्त बोलपुर में नहीं हूँ। बाहर हूँ। मैं इस बारे में कुछ नहीं जानता। मुझे फँसाया जा रहा है।”

आरोपित टीचर का कहना है, “वॉट्सएप पर अगर किसी छात्र को कोई मैसेज भेजा जाता है तो वह पढ़ाई को लेकर होता है। उनका किसी और से कोई रिश्ता नहीं है। मैं यहाँ इतने लंबे से पढ़ा रहा हूँ। पहले कभी मेरे खिलाफ इस तरह के आरोप नहीं लगे।”

वहीं विश्व भारती यूनिवर्सिटी फैकल्टी एसोसिएशन के प्रवक्ता सुदीप्त भट्टाचार्य ने कहा कि आरोपों की जल्द से जल्द उचित जाँच की जानी चाहिए।