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जब रील बनाने में बिजी थीं TMC की MP नुसरत जहाँ, तब संदेशखाली में गोद में बच्ची लेकर शेख शाहजहाँ ऐंड गैंग से लड़ रहीं थीं रेखा पात्रा: देखिए Video

उत्तर 24 परगना जिले की बशीरहाट लोकसभा सीट। साल 2009 से टीएमसी के गढ़ रहे इस लोकसभा सीट के अंदर ही आता है संदेशखाली का वो इलाका, जो पिछले कुछ समय से टीएमसी नेता और ममता बनर्जी के करीबी शेख शाहजहाँ की कारस्तानियों की वजह से चर्चा में है। जमीनों पर अवैध कब्जे, महिलाओं के शोषण समेत तमाम घृणित अपराधों के लिए शेख शाहजहाँ और ममता बनर्जी पर उंगलियाँ उठ रही हैं। इस लोकसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी ने रेखा पात्रा को अपना उम्मीदवार बनाया है। रेखा पात्रा शेख शाहजहाँ और उसके गुर्गों द्वारा बरती गई अमानवीयता के खिलाफ प्रतिरोध का चेहरा बनकर उभरी हैं। शेख शाहजहाँ के खिलाफ प्रदर्शन के लिए बीजेपी की महिला नेताओं के जत्थों को पश्चिम बंगाल पुलिस ने संदेशखाली पहुँचने से जब रोक लिया, जब अपनी नन्हीं सी बच्ची को गेद में उठाए रेखा पात्रा ने विरोध प्रदर्शनों की कमान संभाली।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब पश्चिम बंगाल पहुँचे, तो उन्होंने संदेशखाली की पीड़ित महिलाओं से मुलाकात की थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने वाली पीड़ित महिलाओं में रेखा पात्रा भी थी। अब भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें अपना उम्मीदवार बनाया है। रेखा पात्रा उन पीड़ित महिलाओं में से हैं, जो टीएमसी और शेख शाहजहाँ के खिलाफ प्रतिरोध की मजबूत आवाज साबित हो रही हैं। अगर वो बशीरहाट लोकसभा सीट से चुनाव जीत जाती हैं, तो शेख शाहजहाँ के अपराधों को संसद के माध्यम से देश की सबसे बड़ी पंचायत में सामने रखेंगी। ये ममता बनर्जी के खिलाफ पश्चिम बंगाल ही नहीं, बल्कि पूरे देश में जनमत बनाने और अपराधों के खिलाफ मजलूमों के खड़े होने का बड़ा उदाहरण बन सकता है। रेखा पात्रा का लोकसभा चुनाव जीतना पश्चिम बंगाल से ममता बनर्जी की विदाई का कारण बन सकता है।

बीजेपी प्रवक्ता अमित मालवीय ने एक्स पर लिखा, “बीजेपी की बशीरहाट उम्मीदवार रेखा पात्रा अपने बच्चे को गोद में लेकर संदेशखाली आंदोलन में प्रदर्शन करती हुई। वह धैर्य और दृढ़ संकल्प का चेहरा हैं। वोट के लिए हिंदू महिलाओं को भेड़ियों के सामने फेंकने की ममता बनर्जी की घिनौनी राजनीति के खिलाफ वो मैदान में डटी हैं।”

वामपंथियों के लिए जैसे सिंगूर बना विदाई की वजह, क्या संदेशखाली मिटाएगा टीएमसी का वजूद?

पश्चिम बंगाल को वामपंथी राजनीतिक का अभेद्य किला माना जाता था। पूरे देश में वामपंथी पार्टियों को लग रहे झटकों के बावजूद ये पार्टियाँ पश्चिम बंगाल को बेस बनाकर बाकी जगहों पर भी राजनीति चलाती रहती थी। इसका असर पश्चिम बंगाल से सटे त्रिपुरा, ओडिशा, झारखंड, बिहार तक होता था। लेकिन नंदीग्राम से शुरू हुए नक्सलवाड़ी केंद्रित हिंसा और फिर वामपंथ के चंगुल में फंसे पश्चिम बंगाल के किले को सिंगूर में ममता बनर्जी ने जिस तरीके से ध्वस्त किया, कुछ उसी रास्ते पर बढ़ता दिख रहा है संदेशखाली। संदेशखाली में हुई ज्यादतियों की वजह से ममता बनर्जी बैकफुट पर हैं। यहाँ की सांसद नुसरत जहाँ ने चुनाव लड़ने से मना कर दिया। नुसरत ने संदेशखाली के पूरे विवाद पर चुप्पी साधे रखी। वो रील बनाने में व्यस्त रहीं। मीडिया ने सवाल पूछा, तो उन्होंने धारा 174 का बहाना बनाकर पलड़ा झाड़ लिया। इसके बाद जब उन्होंने देखा कि अब संदेशखाली में टीएमसी के खिलाफ माहौल खराब हो चुका है, तो उन्होंने लोकसभा चुनाव न लड़ने का फैसला किया।

नुसरत जहाँ का चुनाव लड़ने से इनकार करना ममता बनर्जी के लिए बड़ा झटका था। भले ही उन्होंने टीएमसी की लीडरशिप और स्थानीय काडर पर अपना समर्थन न देने का आरोप लगाया हो, लेकिन सच ये है कि संदेशखाली से जो संदेश पूरे देश में गया, उससे नुसरत को अपने भविष्य का अंदाजा हो चला था। इसीलिए उन्होंने छीछालेदर न कराते हुए अपनी राह अलग कर ली। इसके बाद ममता बनर्जी की टीएमसी ने हाजी नुरुल इस्लाम को अपना उम्मीदवार बनाया है। नुरुल इस्लाम पर भी हिंदू विरोधी हिंसा के आरोप हैं। वो साल 2009 में टीएमसी के टिकट पर पहली बार इस लोकसभा सीट से सांसद भी बना था। टीएमसी का स्थानीय कद्दावर नेता होने की वजह से ममता बनर्जी ने उसे उम्मीदवार बनाया है, लेकिन कहा जाता है कि शेख शाहजहाँ को आगे बढ़ाने में नुरुल इस्लाम का भी हाथ रहा।

बीजेपी की महिला शक्ति उखाड़ फेंकेगी टीएमसी को?

ममता बनर्जी खुद को नारी शक्ति का प्रतीक बताती हैं, लेकिन दुर्गापूजा के समय वही तमाम अड़चनें भी डालती हैं। मुस्लिमों के तुष्टिकरण को लेकर उनके कदम हमेशा राष्ट्रीय राजनीति में संदिग्ध नजरों से देखे जाते हैं। उस पर भी वो बांग्लादेशी घुसपैठियों को लेकर नरम रवैया अपनाती हैं। उन्होंने ऐलान कर दिया है कि वो पश्चिम बंगाल में एनआरसी-सीएए लागू नहीं होने देंगी। यही नहीं, उन्होंने जिन कथित बाहरी लोगों के आधार कार्ड डिएक्टीवेट किए गए हैं, उन्हें नया आधार और पश्चिम बंगाल सरकार की तरफ से पहचान पत्र देने की भी घोषणा की है, लेकिन क्या शेख शाहजहाँ की अगुवाई में टीएमसी ने संदेशखाली में जो कुछ किया है, उससे वो पार पा सकेंगी?

बीजेपी का रेखा पात्रा को टिकट देना न सिर्फ ममता बनर्जी के लिए सीधी चुनौती है, बल्कि हिंदुओं पर पश्चिम बंगाल में हो रहे अत्याचारों के खिलाफ भी बीजेपी की लड़ाई का एक प्रतीक है। बशीरहाट लोकसभा सीट बांग्लादेश की सीमा से लगी है। यहाँ करीब आधे मतदाता मुस्लिम हैं। लेकिन बीजेपी को उम्मीद है कि शेख शाहजहाँ के अत्याचारों से पीड़ित महिला शक्ति एकजुट होगी और रेखा पात्रा न सिर्फ रेखा पात्रा बल्कि पूरे राज्य में ममता बनर्जी के खिलाफ वोट से चोट करेगी।

रेखा पात्रा ने संदेशखाली में जिस दृढ़ता के साथ शेख शाहजहाँ और उसके गुर्गों के खिलाफ सड़कों पर उतरी, उसे पूरी दुनिया ने देखा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रेखा पात्रा को शक्ति स्वरूपा बताया है। उन्हें बीजेपी की तरफ से बशीरहाट लोकसभा सीट पर उम्मीदवार बनाए जाने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनसे फिर से बातचीत की और उनका हौसला बढ़ाया। आगे पीएम मोदी ने रेखा पात्रा से कहा, “संदेशखाली में आपने इतनी बड़ी लड़ाई लड़ी है। आप एक प्रकार से शक्ति स्वरूपा हैं। आपने इतने ताकतवर लोगों को जेल भेज दिया। आपको अंदाजा है कि आपने कितने बड़े साहस का काम किया है?”

इस पर रेखा ने कहा कि उन्हें संदेशखाली की महिलाओं का साथ था इसलिए वो ये सब कर पाईं। उन्होंने पीएम को पिता-भाई के रूप में बताया और उम्मीद की कि टीएमसी के खिलाफ लड़ाई में पीएम उनका साथ देंगे। इस पर पीएम ने उनकी हिम्मत बढ़ाई और कहा कि ये लड़ाई बंगाल के सम्मान की है। उन्होंने रेखा पात्रा को आश्वासन दिया कि वो हर तरह से साथ रहेंगे। व्यक्तिगत रूप से भी उनकी चिंता करेंगे। उन्होंने रेखा पात्रा का उत्साह देखते हुए कहा, “बंगाल शक्ति पूजा, दुर्गा पूजा की भूमि है। आप उसी शक्ति का पर्याय हैं। आपका काम बहुत बड़ा है। संदेशखाली की महिलाओं की आवाज को दुनिया के सामने उठाना वो कोई सामान्य बात नहीं है। आपका उत्साह देखकर लग रहा है कि इस बार बंगाल में नारी शक्ति हमें जरूर आशीर्वाद देगी।”

बिना मतदान के ही खुल गया BJP का खाता, 5 लोगों ने निर्विरोध जीता चुनाव: उम्मीदवार तक नहीं दे पाई कॉन्ग्रेस, विजेताओं में CM पेमा खांडू भी

अरुणाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव का मतदान होने से पहले ही भाजपा के पाँच प्रत्याशी विजयी हो गए हैं। इनके विरुद्ध कॉन्ग्रेस समेत किसी राजनीतिक दल ने प्रत्याशी ही नहीं उतारे। निर्विरोध विजयी होने वालो में अरुणाचल प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री पेमा खांडू भी शामिल हैं।

अरुणाचल प्रदेश में लोकसभा चुनावों के साथ ही विधानसभा के भी चुनाव भी प्रस्तावित हैं। इनके लिए मतदान 19 अप्रैल, 2024 को होने वाला है। इन विधानसभा चुनावों के लिए बुधवार (27 मार्च, 2024) तक नामांकन भरे जाने थे। हालाँकि, शाम तक अरुणाचल की पाँच सीटों पर मात्र एक ही नामांकन प्राप्त हुआ जो कि भाजपा के उम्मीदवारों का था।

ऐसे में नामांकन ना प्राप्त होने की दशा में यह उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो रहे हैं। राज्य के मुख्यमंत्री पेमा खांडू के विरुद्ध भी कोई नामांकन नहीं हुआ। वह अरुणाचल के तवांग जिले की मुक्तो सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। वह इस सीट से चौथी बार निर्वाचित हो रहे हैं। इनमें से तीन बार वह निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं।

मुख्यमंत्री खांडू के अलावा ताली से जिक्के ताको, सागाली से रातू तेची, तलिहा से न्यातो डुकोम, और रोइंग विधानसभा सीट से से मुच्चू मीठी के विरोध में भी कोई प्रत्याशी नहीं खड़ा हुआ। ऐसे में मुख्यमंत्री खांडू के साथ ही यह भी निर्विरोध विधायक निर्वाचित होंगे। अभी चुनाव आयोग ने इस सम्बन्ध में औपचारिक घोषणा नहीं की है। गौरतलब है कि इसमें से न्यातो डुकम उस सीट से निर्विरोध जीते हैं जो राज्य के पूर्व कॉन्ग्रेसी मुख्यमंत्री नबाम तुकी की सीट रही है।

निर्विरोध निर्वाचित होने को लेकर पेमा खांडू ने कहा, “पांच विधानसभा क्षेत्रों में केवल एक नामांकन पत्र भरा गया है। हमें आशा है कि नाम वापसी के आखिरी दिन तक कुछ और सीटें इसमें जुड़ जाएँगी।” अरुणाचल में 30 मार्च, 2024 नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख है।

राज्य विधानसभा चुनावों के लिए भाजपा ने जहाँ सभी 60 प्रत्याशियों की घोषणा नामांकन से कुछ दिन पहले ही कर दी थी, वहीं कॉन्ग्रेस और NPP इस मामले में पिछड़ गईं। कॉन्ग्रेस ने राज्य में 60 विधानसभा सीटों में से मात्र 34 विधानसभा सीटों पर ही अपने प्रत्याशी घोषित किए। कॉन्ग्रेस ने अपने प्रत्याशियों की एक ही सूची जारी की और उसके बाद नामांकन की समय सीमा समाप्त हो गई।

इससे पहले 2019 के राज्य विधानसभा चुनाव में भाजपा ने प्रचंड बहुमत से जीत कर सरकार बनाई थी। तब राज्य की 60 सीटों में से भाजपा को 41 सीटें मिली थी। कॉन्ग्रेस ने इस चुनाव में भी मात्र 46 प्रत्याशी ही उतारे थे। कॉन्ग्रेस को यहाँ मात्र 4 सीटों पर विजय मिली थी। जदयू के भी राज्य में 15 में से 7 उम्मीदवार जीते थे जिन्होंने बाद में भाजपा का दामन थाम लिया था।

राज्य की अन्य पार्टी NPP ने विधानसभा चुनाव लड़ने और लोकसभा में भाजपा के उम्मीदवारों का समर्थन करने का निर्णय लिया है। मेघालय की सत्ता में काबिज NPP ने राज्य में 29 उम्मीदवार उतारे हैं। राज्य में दो लोकसभा की भी सीट हैं। इन दोनों सीटों पर भाजपा ने अपने प्रत्याशी रिपीट किए हैं। अरुणाचल प्रदेश पूर्वी से तापिर गाओ जबकि पश्चिमी सीट से केन्द्रीय मंत्री करें रिजीजू को फिर से उतारा गया है।

कॉन्ग्रेस ने भी इन दोनों सीट से अपने लोकसभा उमीदवार घोषित किए हैं। अरुणाचल प्रदेश पश्चिमी से पूर्व मुख्यमंत्री नबाम तुकी जबकि पूर्वी सीट से बोसिराम सीरम को उतारा गया है। राज्य इस बार भी भाजपा की सरकार बनने के कयास लग रहे हैं।

यूपी से जुड़े बेंगलुरु के रामेश्वर धमाके के तार! बरेली से मौलाना को NIA ने दबोचा, करीब 9 घंटे तक चली पूछताछ: विदेश जाने की कर रहा था तैयारी

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के मशहूर रामेश्वरम कैफे में ब्लास्ट हुआ था। 1 मार्च को राजाजीनगर स्थित इस कैफे में ब्लास्ट के मामले में कई लोग गिरफ्तार हो चुके हैं, मुख्य संदिग्ध को भी पकड़ा जा चुका है। लेकिन इस धमाके के तार अब उत्तर प्रदेश से जुड़ते दिख रहे हैं, क्योंकि धमाके के तुरंत बाद एक धार्मिक केंद्र से जुड़ा मौलाना बेंगलुरु से बरेली चला आया था, वो अब विदेश जाने की तैयारी कर रहा था। इस पूरे मामले पर नजर रख रही एनआईए ने मौलाना को पकड़ लिया।

ये मामला बरेली के भोजीपुरा थाना इलाके में स्थित धौराटांडा की मस्जिद से जुड़ा है, जहाँ से एनआईए ने एक मौलाना को पूछताछ के लिए पकड़ा। करीब 9 घंटों तक एनआईए ने पूछताछ की है। बताया जा रहा है कि मौलाना विदेश जाने की तैयारी कर रहा था और वो बेंगलुरु धमाके के तुरंत बाद ही बरेली चला आया था। इस सब तारों को जोड़ते हुए एनआईए की लखनऊ यूनिट लगातार बरेली पर नजर रखे हुए थी और पिछले तीन दिनों से ट्रैक करते हुए मौलाना के घर भी पहुँच गई।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बरेली में बुधवार (27 मार्च 2024) की सुबह ही एनआईए की टीम स्थानीय पुलिस और नायब तहसीलदार को लेकर मौलाना के घर पहुँच गई, लेकिन वो घर पर नहीं था। इसके बाद मौलाना के पिता को लेकर ये टीम एक मस्जिद पहुँची और वहाँ से मौलाना को हिरासत में ले लिया। बताया जा रहा है कि मौलाना की भूमिका संदिग्ध पाई गई है, जिसके बाद ये पूछताछ की गई।

हालाँकि अभी मौलाना को आधिकारिक तौर पर गिरफ्तार नहीं किया गया है, बल्कि 9 घंटे की पूछताछ के बाद घर जाने के लिए बोल दिया गया। साथ ही ये हिदायत भी दी गई है कि वो भागने की कोशिश न करे और जाँच में सहयोग करे। भोजीपुरा थाने के इंस्पेक्टर जगत सिंह ने इस पूरी कार्रवाई की पुष्टि की है।

पासपोर्ट जब्त, विदेश जाने पर रोक

बताया जा रहा है कि एनआईए की टीम पिछले तीन दिनों से क्षेत्र में डेरा डाले हुए थी। मौलाना के बारे में पहले पूरी तहकीकात की गई। मौलाना के घर में ही होने की पुष्टि के बाद टीम ने छापेमारी की। टीम ने मौलाना का मोबाइल फोन और जरूरी दस्तावेज कब्जे में लिए है। मोबाइल फोन की कॉल डिटेल्स खंगालने की बात कही जा रही है। सूत्रों की मानें तो पासपोर्ट जब्त कर मौलाना के विदेश जाने पर भी पाबंदी लगाई गई है। वहीं, एनआईए ने बेंगलुरु में भी दो लोगों को हिरासत में लिया है।

बीमार नहीं बल्कि फिट है डॉन, मुख़्तार अंसारी की मेडिकल रिपोर्ट नॉर्मल: 14 घंटे टेस्टिंग के बाद अस्पताल से फिर भेजा गया जेल, ज़ाकिर अली त्यागी उड़ा रहा था जहर वाली अफवाह

माफिया मुख़्तार अंसारी की सेहत को ले कर उठ रही तमाम अटकलों और अफवाहों पर उस समय विराम लग लगा जब वह मेडिकल जाँच में पूरी तरह से फिट निकला। जेल प्रशासन की तरफ से मुख़्तार अंसारी का ब्लड, CBC, LFT, सुगर और इलेक्ट्रोलाइट आदि की जाँच करवाई गई थी। बुधवार (27 मार्च, 2024) को इन सभी जाँचों की रिपोर्ट नॉर्मल आईं हैं। 3 डॉक्टरों की टीम ने मुख़्तार अंसारी का इलाज किया था।

आज तक के मुताबिक, मंगलवार (26 मार्च, 2024) को तबियत खराब होने की शिकायत पर मुख़्तार अंसारी को बाँदा जेल से अस्पताल में शिफ्ट किया गया था। मुख़्तार अंसारी का इलाज बाँदा जिले के ही रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज में करवाया गया था। मुख़्तार ने अपने स्टूल सिस्टम में समस्या बताई थी। इस दौरान 3 डॉक्टरों ने मुख़्तार अंसारी के खून के सैम्पल लिए। इसमें सोडियम, पोटैशियम और कैल्शियम आदि की जाँच हुई। माफिया मुख़्तार के पेट का 2 बार एक्सरे करवाया गया।

अस्पताल में मुख़्तार लगभग 14 घंटे रहा। उसके स्वास्थ्य पर डॉक्टरों ने कड़ी निगरानी रखी। कुछ ही घंटों में मुख़्तार अंसारी की तमाम जाँच रिपोर्ट्स भी सामने आ गईं। ये तमाम रिपोर्ट्स नॉर्मल थीं। मुख़्तार अंसारी को जरूरी दवाएँ और इंजेक्शन दिए गए। रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉक्टर सुनील कौशल ने आज तक से बातचीत में मुख़्तार की रिपोर्ट नॉर्मल आने की पुष्टि की है। मंगलवार को ही शाम लगभग 6 बजे मुख़्तार अंसारी को कड़ी सुरक्षा के साथ मेडिकल कॉलेज से बाँदा जेल भेज दिया गया। फिलहाल मुख़्तार अंसारी की सेहत पर जेल डॉक्टरों की भी नजर है।

अफवाहों उड़ाने वालों में ज़किर अली त्यागी भी

बताते चलें कि इस से पहले मुख़्तार अंसारी के बेटे उमर अंसारी ने स्थानीय प्रशासन पर अपने अब्बा को स्लो पॉइजन दिए जाने का आरोप लगाया था। इसकी शिकायत अदालत तक में की गई थी। वहीं अफ़ज़ाल ने यहाँ तक कह दिया था कि जेल प्रशसन की मिलीभगत से उनके भाई मुख्तार की हत्या के 7 प्रयास किए जा चुके हैं लेकिन खुदा ने उसे बचा लिया। इन लोगों के बयानों के बाद अफवाहों का बाजार गर्म हो गया था। मुख़्तार के समर्थन में खुद को पत्रकार बताने वाले ज़ाकिर अली त्यागी जैसे लोग भी कूद पड़े थे।

इन सभी ने जीवन में कई बार अमानवीय अपराध करने वाले इस सजायाफ्ता माफिया के लिए मानवीयता आदि की दुहाई दी। ज़ाकिर अली जैसे लोगों की बातों में आ कर कुछ समर्थकों ने तो मुख़्तार की लम्बी उम्र की दुआएँ भी माँगनी शुरू कर दी थीं। फिलहाल माफिया की तमाम मेडिकल रिपोर्ट नॉर्मल आने के बाद अफवाहों के बाजर पर विराम लग गया है।

केरल के सीएम पी विजयन की बेटी वीणा के खिलाफ ED ने केस किया दर्ज, PMLA यानी मनी लॉन्ड्रिंग का मामला: बिना काम किए ही मिल रहे थे पैसे

केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की बेटी वीणा विजयन मुश्किल में फंस सकती हैं। वीणा विजयन और उनकी आईटी कंपनी के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत मामला दर्ज किया है। ईडी से जुड़े सूत्रों ने बताया कि यह मामला एक खनिज कंपनी द्वारा विजयन की फर्म को कथित अवैध भुगतान से जुड़ा है, जिसमें बिना काम किए ही पैसों का भुगतान किया गया। ईडी ने एक शिकायत के आधार पर ये मामला दर्ज किया है। ये मामला पहले भी सुर्खियों में रहा है। इस मुद्दे को लेकर बीजेपी लगातार पी विजयन और वीणा विजयन पर सवाल खड़े करती रही है।

क्या है पूरा मामला, क्यों मुश्किल में वीणा?

वीणा विजयन और उनकी कंपनी पर आरोप है कि कोच्चि स्थित कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (सीएमआरएल) एक निजी कंपनी ने 2017 और 2018 के बीच एक्सलॉजिक सॉल्यूशंस – जिसका स्वामित्व वीणा विजयन के पास है – को 1.72 करोड़ रुपये का भुगतान किया था, जबकि उस समय ये आईटी कंपनी कोई सर्विस नहीं मुहैया करवा रही थी। आरोप हैं कि ये भुगतान वीणा को इसलिए किए गए, ताकि उस कंपनी को किसी भी कार्रवाई से बचाया जा सके। इसे उगाही का भी मामला बताया जा रहा है।

कर्नाटक हाई कोर्ट से लगा था झटका

इस मामले में कर्नाटक हाई कोर्ट में केस भी चल रहा था, जिसमें एक्सलॉजिक को भुगतान सिर्फ इसलिए करना बताया गया, क्योंकि उसकी मालिक वीणा विजयन के पिता केरल के मुख्यमंत्री हैं। एक्सलॉजिक ने इस जाँच से बचने के लिए कर्नाटक हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी, लेकिन अदालत ने इस याचिका को खारिज कर दिया था। अदालत ने कहा था कि गलत कामों की जाँच के लिए वो सरकार के हाथ नहीं बाँध सकती। इस याचिका के खारिज होने के बाद से ही माना जा रहा था कि ये केस कभी भी दर्ज किया जा सकता है और ईडी इस केस में अब वीणा से कभी भी पूछताछ कर सकती है।

विजयन ने आरोपों को नकारा, कही ये बात

जनवरी में केरल विधानसभा में बोलते हुए मुख्यमंत्री विजयन ने कहा था कि उनकी बेटी ने उनकी पत्नी की सेवानिवृत्ति निधि का उपयोग करके कंपनी शुरू की थी और उनके और उनके परिवार के खिलाफ लगाए जा रहे आरोप झूठे हैं। उनकी पार्टी सीपीआई (एम) ने भी इन आरोपों का बचाव किया था और कहा था कि वीणा की कंपनी के खिलाफ लोकसभा चुनाव से पहले ईडी का ये कदम राजनीति से प्रेरित है।

मस्जिद के आगे हमला, नमाज के समय DJ बजा रहे दलित परिवार की पिटाई, कश्यप परिवार पर चलाई लाठियाँ, रमाकांत यादव को घोंपा चाकू: होली पर कई राज्यों में हिंसा

सोमवार (25 मार्च, 2024) को देश में धूमधाम से होली का त्योहार मनाया गया। इस अवसर पर देश के कई हिस्सों में अराजक तत्वों द्वारा हिंसक गतिविधियों को भी अंजाम दिया गया। उत्तराखंड, पंजाब और उत्तर प्रदेश से भी इसी प्रकार की हरकतें की गईं हैं। पंजाब के लुधियाना में मस्जिद के आगे एक युवक की पिटाई का आरोप लगा है जबकि उत्तराखंड के रुड़की में रंग पड़ जाने पर लाठी-डंडों से हमले जैसी घटना सामने आई है।

वहीं उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी में फाग के बज रहे DJ के दौरान नमाज़ का वक्त बता कर विवाद किया गया। पुलिस इन तीनों मामलों की जाँच कर रही है। यूपी के ही कुशीनगर में हिन्दू यादव समाज के एक व्यक्ति पर मुस्लिम युवक ने हमला कर दिया।

मस्जिद के आगे युवक पर हमला

पहला मामला पंजाब के लुधियाना का है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यहाँ के टिब्बा थाना क्षेत्र में रहने वाले अश्वनी मिश्रा ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में उन्होंने बताया है कि उनका बेटा करन होली खेल कर घर आ रहा था। तभी संधू नगर इलाके में पड़ने वाली नूरानी मस्जिद के आगे लगभग 150 की तादाद में जमा हमलावरों ने उस पर हमला कर दिया। आरोप है कि हमले में करन और उसका साथी हनी सिर में चोट लगने की वजह से घायल हो गए हैं।

घटना 25 फरवरी 2024 की बताई जा रही है। हालाँकि इस मामले में दूसरे पक्ष की तरफ से मोहम्मद सुल्तान ने शिकायत दर्ज करवाई है उन्होंने आरोप लगाया है कि उन पर तेज धार वाले हथियारों से दूसरे पक्ष ने हमला किया है। इस दौरान वाहनों को भी नुकसान पहुँचा है। पुलिस दोनों पक्षों द्वारा मिली शिकायतों पर जाँच कर रही है।

रंग गिरते ही भड़क उठा मुस्लिम युवक

दूसरा मामला उत्तराखंड के हरिद्वार जिले का है। यहाँ के कोतवाली मंगलौर के रहने वाले अजय कश्यप ने पुलिस में तहरीर दी है। तहरीर में उन्होंने बताया कि सोमवार को वो होली खेल रहे थे। वहीं पर DJ भी बज रहा था जिस पर कुछ लोग नाच रहे थे। इसी नाच को देखने के लिए कुछ मुस्लिम युवक वहाँ रुक गए। तभी थोड़ा सा रंग वहाँ खड़े एक मुस्लिम युवक पर गिर पड़ा। मुस्लिम युवक ने इस बार पर गुस्सा हो कर विवाद शुरू कर दिया। आरोप है कि जिस युवक पर रंग गिरा था वो वहाँ से जा कर अपने कई साथियों सहित वापस लौटा।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन सभी के पास लाठी-डंडे भी बताए जा रहे हैं। इन सभी ने होली खेल रहे लोगों पर हमला कर दिया। अचानक हुए इस हमले में सनी और सचिन नाम के 2 लोग घायल हो गए। हमलावर जान से मारने की धमकी दे कर फरार हो गए। पुलिस ने कुल 6 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। इसमें असलम, सोनू और आफ़ताब को नामजद किया गया है। मामले में कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

नमाज के टाइम फाग के DJ पर विवाद

तीसरा मामला उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी जिले का है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यहाँ के थानाक्षेत्र करारी के गाँव छिमिरछा में DJ बजने को ले कर 2 पक्षों में विवाद हो गया। बताते हैं कि यहाँ दलित समुदाय के मुकेश सरोज होली के दिन DJ पर अपने साथियों सहित नाच-गा रहे थे। तभी गाँव के ही मुस्लिम वर्ग के कुछ लोग वहाँ पहुँचे। उन्होंने नमाज़ का वक्त बता कर DJ बंद करने को कहा। मुकेश सरोज ने ऐसा करने से मना किया तो दोनों पक्षों में विवाद शुरू हो गया।

कुछ ही देर में यह विवाद गाली-गलौज और मारपीट में तब्दील हो गया। मामले की जानकारी बजरंग दल के सदस्यों को हुई तो वो पहुँच कर नारेबाजी करने लगे। आनन-फानन में पुलिस बल घटनास्थल पर पहुँचा। दोनों पक्षों को समझा बुझा कर शांत करवाया गया। गाँव में तनाव को देखते हुए पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। मुकेश सरोज की तहरीर पर मुस्लिम पक्ष के 13 नामजद और 27 अज्ञात के खिलाफ FIR दर्ज किया गया है। पुलिस मामले की जाँच में जुटी हुई है।

कुशीनगर: होली पर मुस्लिम युवक ने किया जानलेवा हमला

हाटा तहसील के अहरौली थाना के तहत आने वाले भटगाँवा में एक हिन्दू व्यक्ति को एक मुस्लिम युवक ने चाकू मार दिया। पीड़ित की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे गोरखपुर के अस्पताल में रेफर कर दिया गया है। पीड़ित रमाकांत यादव होलिका जलाने के लिए घर से बाहर निकले थे। एक दुकान पर रास्ते में नबी हसन का बेटा फिरोज मिल गया और बात करते-करते ही उसने अचानक से चाकू से ताबड़तोड़ वार किए। सिर पर हमले किए जाने के बाद रमाकांत यादव वहाँ से भागे।

जिस बंधू राय ने बिहार से बुला कर किया नौकरी और छत का इंतजाम, उन्हीं का गला घोंट कर मार डाला: 8 साल बाद धराए शकील और बबलू (मामन का बेटा), असलम फरार

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने शुक्रवार (22 मार्च, 2024) को 8 साल पुराने एक हत्याकांड के 2 फरार आरोपितों को गिरफ्तार किया है। इन आरोपितों के नाम शकील खलीफा उर्फ़ कबीर नट और बबलू नट हैं। इन दोनों ने 3 मार्च, 2016 को बंधु राय नाम के एक व्यक्ति को बेरहमी से मार डाला था। कभी बंधू राय ने शकील और बबलू को गाँव से बुला कर न सिर्फ उनकी नौकरी लगवाई थी बल्कि उनके रहने आदि का भी इंतजाम किया था। इस हत्याकांड में शामिल तीसरा आरोपित मोहम्मद असलम फ़िलहाल फरार है जिसकी तलाश की जा रही है।

यह मामला दिल्ली के थानाक्षेत्र रनहोला का है। यहाँ 3 जुलाई, 2016 को पुलिस को सोम बाजार के पास गोमती गार्ड़न में एक शव की सूचना मिली। पुलिस मौके पर पहुँच कर जाँच की तो शव बंधू राय का निकला। मृतक मूलतः बिहार के समस्तीपुर जिले का निवासी था जो अस्थाई तौर पर दिल्ली के विकास नगर इलाके में रहता था। वह छोटी-मोटी ठेकेदारी कर के अपने परिवार का गुजर-बसर करता था। मृतक के परिजनों की शिकायत पर दिल्ली के रनहोला थाने में हत्या की धारा 302 के साथ 174-A व 34 IPC के तहत FIR दर्ज हुई।

9 जुलाई, 2016 को दर्ज इस FIR में मृतक के परिजनों ने कबीर नट उर्फ़ शकील खलीफा, बबलू नट और मोहम्मद असलम को नामजद किया। ये तीनों बिहार के समस्तीपुर के ही निवासी हैं और मृतक बंधू राय के पूर्व परिचित हैं। शिकायत में बताया गया कि बंधू राय ने तीनों आरोपितों के लिए दिल्ली में काम की तलाश की। इसी के साथ उन्होंने तीनों के लिए दिल्ली में रहने की जगह खोजी। इसके अलावा बंधू राय ने इन शकील, बबलू और असलम की शुरुआत में आर्थिक सहायता सहित अन्य तमाम प्रकार की मदद की।

पुलिस के मुताबिक 2-3 जुलाई 2016 की रात असलम, बबलू, शकील और बंधू राय ने मिल कर एक साथ शराब पी। इस दौरान किसी बात पर तीनों का बंधू राय से विवाद हो गया। तीनों ने वहीं पर बंधू को लूटने और फिर उनकी हत्या की साजिश रच डाली। इस साजिश को अंजाम देने के लिए शकील और बबलू ने बंधू राय के हाथों और पैरों को जकड़ लिया। तीसरे आरोपित मोहम्मद असलम ने बंधू का गला दबा दिया। दम घुटने से बंधू राय की मौत हो गई। मौत के बाद तीनों आरोपित घटनास्थल से फरार हो गए।

बताया जा रहा है कि फरार होने के दौरान शकील, बबलू और असलम ने बंधू की जेब में रखे रुपए भी लूट लिए थे। स्थानीय थाना पुलिस ने तीनों आरोपितों को खोजने की काफी कोशिश की लेकिन वो हाथ नहीं आए। लगातार फरार रहने की वजह से दिल्ली की एक अदालत ने 31 अगस्त 2018 को इन तीनों को घोषित अपराधी करार दिया। तब से पुलिस इन आरोपितों को पकड़ने के लिए कई स्थानों पर दबिश दे चुकी थी।

22 मार्च 2024 को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के इंस्पेक्टर संदीप डबास को सूचना मिली कि साल 2016 से एक हत्या के मामले में फरार चल रहे 2 आरोपित नजफगढ़ की अनाज मंडी आने वाले हैं। इस सूचना पर पुलिस ने अपना जाल बिछाया। सूचना सही पाई गई और शकील व बबलू को गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में इन्होने बताया कि पुलिस से बचने के लिए ये लगातार अपनी लोकेशन बदल रहे थे। कानूनी औपचारिकताओं का पालन करते हुए इन्हें अदालत में पेश कर के जेल भेज दिया गया है। अब पुलिस को फरार चल रहे तीसरे आरोपित असलम की तलाश है।

निर्दलीय सांसद नवनीत राणा को BJP ने अमरावती से बनाया प्रत्याशी, जारी हुई पार्टी की 7वीं लिस्ट: हनुमान चालीसा का पाठ करने और उद्धव सरकार ने किया था गिरफ्तार

लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर बीजेपी ने अपने उम्मीदवारों की सातवीं लिस्ट जारी कर दी है। इस लिस्ट में महाराष्ट्र की अमरावती लोकसभा सीट से मौजूदा निर्दलीय सांसद नवनीत राणा को प्रत्याशी बनाया गया है। निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नवनीत कौर राणा ने साल 2019 में शिवसेना के आनंदराव असडुल को हराया था। अमरावती को एनसीपी का गढ़ माना जाता है, लेकिन बीजेपी ने इस बार सिटिंग सांसद को अपने सिंबल पर मैदान में उतार दिया है। बीजेपी की सातवीं लिस्ट में सिर्फ दो नाम हैं। दूसरा नाम कर्नाटक के चित्रदुर्ग से गोविंद करजोल का है।

उम्मीदवार बनाये जाने के के बाद अमरावती से लोकसभा सांसद नवनीत राणा ने कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा को धन्यवाद देती हैं। पार्टी ने उन पर विश्वास जताया है, उसके लिए वो अभारी हैं।

बीजेपी की सातवीं लिस्ट

बता दें कि अप्रैल 2022 में मुंबई पुलिस ने नवनीत राणा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। उन्हें और उनके पति को तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के निजी आवास के बाहर हनुमान चालीसा का पाठ करने की चेतावनी के बाद गिरफ्तार किया गया था। उन पर “विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी पैदा करने” के आरोप लगे थे। उनके पति रवि राणा भी निर्दलीय विधायक हैं। उन्होंने इसके बाद एमवीए के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। वैसे, नवनीत राणा साल 2014 में एनसीपी के टिकट पर चुनाव लड़ चुकी थी, लेकिन तब उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।

अब तक 407 उम्मीदवारों का ऐलान कर चुकी है बीजेपी

बता दें कि भारतीय जनता पार्टी अब तक 407 उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर चुकी है। बीजेपी ने छठीं लिस्ट में तीन उम्मीदवारों का नाम दिया था। इसमें राजस्थान की करौली-धौलपुर सीट से और कन्हैया लाल मीणा को राजस्थान के दौसा लोकसभा से कांग्रेस के मुरारी लाल मीणा के खिलाफ मैदान में उतारा है। तो थौनाओजम बसंत कुमार सिंह को मणिपुर के इनर सीट से उम्मीदवार बनाया गया है। भारतीय जनता पार्टी ने 101 सांसदों का टिकट काटा है। माना जा रहा है कि महाराष्ट्र में बीजेपी एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिव सेना के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी।

‘ब्राह्मण-बनियावाद मुर्दाबाद’: अशोक विश्वविद्यालय में हिंदू विरोधी नारेबाजी से फैला गुस्सा, लोगों ने की कार्रवाई की माँग

हरियाणा के सोनीपत में स्थित अशोक यूनिवर्सिटी में 26 मार्च 2024 को छात्र-छात्राओं ने प्रदर्शन के दौरान हिंदू विरोधी नारेबाजी की। इस दौरान छात्रों द्वारा “ब्राह्मण-बनियावाद मुर्दाबाद” जैसे नारे लगाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। ब्राह्मण और बनिया समुदाय को गाली देने के अलावा, उन्होंने “जय भीम-जय मीम” और “जय सावित्री-जय फातिमा” जैसे नारे लगाए। उन्होंने जाति जनगणना और आरक्षण की भी माँग की।

हिंदूफोबिक नारों को लेकर सोशल मीडिया यूजर्स में गुस्सा

अशोक यूनिवर्सिटी में इस तरह की नारेबाजी को लेकर सोशल मीडिया में गुस्सा फैल गया। कई लोगों ने यूनिवर्सिटी में इस तरह की नारेबाजी की अनुमति देने के लिए यूनिवर्सिटी प्रशासन की आलोचना की। डीडी न्यूज से जुड़े पत्रकार प्रखर श्रीवास्तव ने सवाल किया कि इन छात्रों में आखिर नफरत भर कौन रहा है?

सोशल मीडिया यूजर अंशुल सक्सेना ने लिखा, “यह अशोक यूनिवर्सिटी से है। नारा है ब्राह्मण-बनियावाद मुर्दाबाद। पहले उन्होंने ब्राह्मणों को निशाना बनाया और अब बनियों को। जो कोई भी यह मानता है कि यह विशिष्ट जातियों तक ही सीमित है, वह गलत है, क्योंकि वो एक से होते हुए दूसरे और फिर आपको भी निशाना बनाएँगे। उनका लक्ष्य हिंदुओं को विभाजित करना और उन पर हमला करना है।”

एक्स यूजर मिस्टर सिन्हा ने सवाल दागा, “ब्राह्मण-बनियावाद मुर्दाबाद” ऐसे नारे अशोक यूनिवर्सिटी में लग रहे हैं। वे ब्राह्मणों पर अतीत में अत्याचार करने का आरोप लगाते हैं लेकिन बनिया समाज के बारे में क्या? सच तो यह है कि वे ब्राह्मण, बनिया या किसी अन्य जाति से नफरत नहीं करते, वे हिंदू धर्म से नफरत करते हैं। ऐसे जागरुक जोकरों के साथ अच्छा व्यवहार करने की जरूरत है।”

बताया जा रहा है कि ऐसा ही प्रदर्शन 22 मार्च 2024 को भी हुआ था। इस प्रदर्शन को आयोजित करने के पीछे ‘सामाजिक न्याय मंच’ नाम का ग्रुप था। एक सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से दावा किया गया कि उन्होंने 22 मार्च 2024 को संजीव बिखचंदानी की क्लास को डिस्टर्ब भी किया।

इस पोस्ट के दावे के जवाब में इंफो एज के संस्थापक संजीव बिखचंदानी ने भी जवाब दिया। उन्होंने कहा, “ये बात बढ़ा चढ़ा कर कही जा रही है। क्लास के पहले घंटे के बाद 10 मिनट के ब्रेक के दौरान प्रदर्शनकारी छात्र क्लास के दरवाजे के बाहर आकर खड़े हो गए। उन्होंने 2-3 मिनट नारेबाजी की और फिर चले गए। मैं क्लास के अंदर कुछ छात्रों से बातचीत कर रहा था। हमारी बातचीत पहले की तरह जारी रही। मुझे पहले से बताया गया था इस प्रोटेस्ट के बारे में। सभी लोगों को मेरी सलाह है कि अशोक यूनिवर्सिटी एक छोटी सी जगह है। उन्हें जनगणना करानी है, तो प्रशासन के भरोसे रहने की जगह इसे स्वयं करना चाहिए।”

पंजाब केसरी की रिपोर्ट के मुताबिक, ये आंदोलन 7 दिन पहले शरू हुआ था। ये सभी छात्र नेता कॉन्ग्रेस के नेता राहुल गाँधी द्वारा चुनाव प्रचार के दौरान उठाई गई जनगणना की माँग की तर्ज पर यूनिवर्सिटी में जाति आधारित जनगणना की माँग कर रहे थे। छात्रों की माँग है कि यूनिवर्सिटी में हर साल जातीत जनगणना कराई जानी चाहिए, ताकि पता चल सके कि यूनिवर्सिटी में सामान्य वर्ग के कितने छात्र हैं और कितने ओबीसी या एससी-एसटी कम्यूनिटी के।

जाति जनगणना के अलावा छात्रों की माँग है कि देर से आने पर लगने वाली फाइन को खत्म किया जाए और डॉ भीमराम आंबेडकर की याद में कार्यक्रम का आयोजन किया जाए। इस मामले में अशोक यूनिवर्सिटी की तरफ से एक प्रेसनोट जारी किया गया है, जिसमें छात्रों की माँगों पर विचार करने की बात कही गई है। हालाँकि हिंदू विरोधी नारेबाजी करने वाले छात्रों के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया गया।

पहले भी विवादों में रहा है अशोक यूनिवर्सिटी

अशोक यूनिवर्सिटी का विवादों से पुराना नाता रहा है। जनवरी 2021 में अशोक विश्वविद्यालय में नीलांजन सरकार नाम के प्रोफेसर ने बीजेपी की आलोचना के बहाने भगवान राम का मजाक उड़ाया था। एक्स पर उन्होंने पोस्ट करते हुए लिखा था, “पूरी तरह अद्भुत! यह नेताजी सुभाष चंद्र बोस नहीं हैं, यह प्रसिद्ध बंगाली अभिनेता प्रोसेनजीत चटर्जी की एक तस्वीर है जो एक फिल्म में नेताजी का किरदार निभा रहे हैं।” इसके अलावा भी ये यूनिवर्सिटी कई बार विवादों में रही है।

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इतने वार किए कि आँतें निकल आईं बाहर, बेसुध कर काट लिया गर्दन… मोहम्मद सैयद ने ‘पुराने दोस्त’ प्रणीत तेजा को धोखे से बुला कर मार डाला, 14 इंच फाल वाले चाकू से हत्या

हैदराबाद में एक 20 वर्षीय युवक प्रणीत तेजा की गला काट कर हत्या कर दी गई है। हत्या का आरोप उसके साथी मोहम्मद सैयद समीर पर लगा है। समीर को प्रणीत और अपनी बहन के बीच अवैध संबंधों का शक था। इस बात पर दोनों में झगड़ा भी हो चुका था। प्रणीत की हत्या समीर ने धोखा दे कर सॉरी कहने के बहाने बुला कर की है। पुलिस ने आरोपित सैयद समीर को गिरफ्तार कर लिया है। घटना रविवार (24 मार्च 2024) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना हैदराबाद के थाना क्षेत्र बालानगर की है। यहाँ के रहने वाले प्रणीत तेजा और मोहम्मद सैयद समीर अच्छे दोस्त माने जाते थे। बताया जा रहा है कि दोनों को नशे की लत थी। सैयद समीर को शक था कि उसकी बहन के तेजा के साथ अवैध संबंध हैं। इस बात को ले कर वो शनिवार (24 मार्च, 2024) को प्रणीत के घर गया था। यहाँ दोनों के बीच नोकझोंक हुई। इसी नोकझोंक में प्रणीत ने सैयद समीर को माँ की गाली दे दी थी। इसी के बाद सैयद ने प्रणीत को खत्म करने का प्लान बना डाला।

बताया जा रहा है कि अगले दिन रविवार को सैयद समीर फिर से प्रणीत तेजा से मिला। उसने प्रणीत से सॉरी कहा और घूमने-टहलने के बहाने अपने साथ ले गया। दोनों एक बस में गए जो सुनसान जगह पर पार्किंग में खड़ी थी। यहाँ दोनों ने गाँजा पिया। जब प्रणीत को नशा हो गया तब सैयद समीर ने अपने साथ लाया तेज धार वाला चाकू निकाल लिया। चाकू का फाल लगभग 14 इंच लम्बा बताया जा रहा है। उसने प्रणीत के पेट में कई वार किए। इन हमलों से नशे में बेसुध प्रणीत की आँतें भी निकल कर बाहर आ गईं।

बाद में सैयद समीर ने प्रणीत की गर्दन को काट डाला और लाश को वहीं छोड़ कर फरार हो गया। थोड़े समय बाद जब बस का ड्राइवर अंदर गया तो उसने खून-खराबा के साथ प्रणीत की लाश देखी। फ़ौरन ही पुलिस को बुलाया गया। पुलिस ने केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी। जाँच में मोहम्मद सैयद समीर का नाम आया। पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर के हत्या सहित अन्य धाराओं में जेल भेज दिया है। मामले की जाँच और आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।