Home Blog Page 1071

ED के सामने फिर पेश नहीं हुई महुआ मोइत्रा, कहा- कृष्णा नगर के चुनाव में व्यस्त हूँ: पैसे लेकर लोकसभा में सवाल पूछने के मामले की जाँच कर रही है एजेंसी

तृणमूल कॉन्ग्रेस की नेता महुआ मोइत्रा प्रवर्तन निदेशालय (ED) के समन पर आज पूछताछ के लिए नहीं पहुँची। उन्होंने चुनाव की व्यस्तता का हवाला देते हुए एजेंसी के सामने पेश होने से इनकार कर दिया। ED महुआ मोइत्रा के ‘कैश फॉर क्वेरी’ मामले में विदेश में हुए लेनदेन की जाँच कर रही है।

ED ने महुआ मोइत्रा को बुधवार (27 मार्च, 2024) को पूछताछ करने के लिए समन भेजा था। उनसे दिल्ली आकर पूछताछ में शामिल होने और साथ ही विदेशी लेनदेन से जुड़े कुछ दस्तावेज उपब्ध करवाने को कहा गया था। हालाँकि, महुआ ने इस पूछताछ में शामिल होने से मना कर दिया।

महुआ ने कहा कि वर्तमान में वह बंगाल में अपनी सीट कृष्णानगर पर चुनाव प्रचार में व्यस्त हैं, इसीलिए वह पूछताछ के लिए दिल्ली नहीं जा सकेंगी। ED इससे पहले भी महुआ को फरवरी और मार्च में दो बार पूछताछ के लिए बुला चुकी है। वह तब भी ED के सामने पेश नहीं हुई थीं।

ED ने 23 मार्च, 2024 को महुआ के ठिकानों पर छापेमारी भी की थी। पश्चिम बंगाल में एजेंसी ने कोलकाता और कृष्णानगर स्थित उनके कार्यालय और घर पर छापेमारी की थी। ED महुआ के खिलाफ एक विदेशी खाते से जुड़े लेनदेन को लेकर जाँच कर रही है। ED इस सम्बन्ध में FEMA के तहत किए गए लेनदेन और खर्चे की जानकारी लेना चाहती है।

गौरतलब है कि महुआ मोइत्रा पर दुबई में रहने वाले कारोबारी दर्शन हीरानंदानी से पैसे और महँगे गिफ्ट लेकर कारोबारी गौतम अडानी के विरुद्ध लोकसभा में प्रश्न पूछने का आरोप 15 अक्टूबर को भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा स्पीकर को एक पत्र लिख कर लगाया था।

यह आरोप महुआ मोइत्रा के पूर्व पार्टनर और सुप्रीम कोर्ट में वकील जय अनंत देहाद्राई के हवाले से लगाए गए थे। बाद में दर्शन हीरानंदानी ने स्वयं यह स्वीकार किया था कि उन्होंने महुआ को महँगे तोहफे और पैसे दिए हैं। महुआ पर यह भी आरोप लगाया गया था कि उन्होंने अपने संसद पोर्टल की लॉगइन आईडी और पासवर्ड दर्शन हीरानंदानी को दिए।

इस बात को महुआ ने खुद भी स्वीकारा था। इस मामले की जाँच के लिए इसे लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने संसद की आचार समिति के पास भेज दिया था। आचार समिति ने दोनों पक्षों को सुन कर अपनी रिपोर्ट संसद को 8 दिसम्बर, 2023 को दी थी।

इस रिपोर्ट में महुआ पर लगे आरोपों को सही पाया गया था। महुआ के इस कदाचार के चलते समिति ने उन्हें लोकसभा की सदस्यता से बर्खास्त करने की सिफारिश की थी। इसके पश्चात 8 दिसम्बर, 2023 को ही इस रिपोर्ट के आधार पर महुआ की संसद सदस्यता रद्द कर दी गई थी। महुआ मोइत्रा के खिलाफ लोकपाल के आदेश के बाद सीबीआई भी जाँच कर रही है।

गिरफ्तारी के बाद भी CM बने हुए हैं केजरीवाल, दिल्ली हाई कोर्ट का दखल देने से इनकार: कहा – कानूनी प्रावधान दिखाओ, ये कार्यपालिका का मामला

दिल्ली उच्च न्यायालय ने गुरुवार (28 मार्च, 2024) को शराब घोटाले में फँसे मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को मुख्यमंत्री पद से हटाए जाने की माँग वाली याचिका खारिज कर दी। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस मनमोहन और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की पीठ ने ने कहा कि याचिकाकर्ता कानून में किसी ऐसे प्रावधान का जिक्र करने में असफल रहे, जो ये कहता हो कि किसी मौजूदा मुख्यमंत्री को गिरफ़्तारी के बाद पद पर रहने से वंचित करता हो।

जजों ने कहा, “हमें दिखाइए, कहाँ इस प्रतिबंध का जिक्र है। आप जो माँग कर रहे हैं, उसके समर्थन में कोई कानूनी प्रावधान दिखाइए।” हाईकोर्ट ने आगे कहा कि इस मामले में न्यायपालिका के हस्तक्षेप की कोई आवश्यकता नहीं है, कार्यपालिका इसे देख रही है। हाईकोर्ट ने कहा कि अगर संवैधानिक उल्लंघन का कोई मामला है तो राष्ट्रपति या उप-राज्यपाल (LG) पर पर कदम उठाएँगे, LG मामले को देख भी रहे हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि मामला राष्ट्रपति तक जाएगा, न्यायिक हस्तक्षेप की ज़रूरत नहीं है।

दिल्ली के ही रहने वाले सुरजीत सिंह यादव ने ये PIL दायर की थी। वो किसान एवं सामाजिक कार्यकर्ता हैं। उन्होंने माँग उठाई थी कि वित्तीय गड़बड़ी में शामिल मुख्यमंत्री को पद पर रहने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने आशंका जताई थी कि इससे कानूनी कार्यवाही में बाधा आएगी, साथ ही राज्य की संवैधानिक व्यवस्था भी चरमरा जाएगी। उन्होंने कहा था कि अरविंद केजरीवाल कस्टडी में हैं और इस दौरान वो मुख्यमंत्री वाली अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन नहीं कर सकते।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि गिरफ्तार होने और ED की रिमांड में होने के बावजूद अरविंद केजरीवाल के CM बने रहने के रास्ते में कोई कानूनी बाध्यता नहीं है। जजों ने कहा कि हमें राजनीति में नहीं पड़ना चाहिए, राजनीतिक दल इसमें जाएँगे, वो लोग जनता में जाएँगे, ये हमारे लिए नहीं है। अरविंद केजरीवाल 21 मार्च को ही ED द्वारा गिरफ्तार किए जा चुके हैं। उन्हें 1 सप्ताह की रिमांड पर भेजा गया था, अब राउज एवेन्यू कोर्ट में उन्हें पेश किया जा रहा है।

‘सादिक़ खान, तुमने लंदन को जो बना कर रख दिया है उस पर तुम्हें गर्व होगा?’: चलती ट्रेन में चाकूबाजी का वीडियो देख मेयर पर भड़के केविन पीटरसन

UK (इनाइटेड किंगडम) की राजधानी लंदन में 15 लाख के करीब मुस्लिम रहते हैं, जिनकी बदौलत लेबर पार्टी के सादिक़ खान 2016 और 2021 में जीत कर मेयर बने। हालाँकि, उनके कार्यकाल में लंदन में मुस्लिम भीड़ का उत्पात भी देखने को मिला। बात-बार पर विरोध प्रदर्शन हुए। लंदन की सड़कों पर मुस्लिम भीड़ निकली। अब लंदन में ट्रेन में हिंसा हुई है, जिसके कारण पूर्व क्रिकेटर केविन पीटरसन ने सादिक़ खान को आड़े हाथों लिया था। हिंसा का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

दक्षिण-पूर्वी लंदन में एक चलती हुई ट्रेन में एक व्यक्ति पर लंबे चाकू से हमला कर दिया गया, जिसके बाद वो अस्पताल में जीवन और मौत के बीच जूझ रहा है। ट्रेन के कैरिज डोर के नज़दीक ये हमला हुआ। ये ट्रेन शॉर्टलैंड्स से बेकहम तक जा रही थी, लंदन विक्टोरिया की तरफ। इस मामले में अब तक कोई गिरफ़्तारी नहीं हो पाई है। शॉर्टलैंड्स स्टेशन पर ही 2 लोगों को लड़ते हुए ट्रेन में घुसते देखा गया। वहीं CCTV वीडियो में काले रंग की हुडी वाले जैकेट पहले वक शख्स को चाकूबाजी करते और चिल्लाते हुए देखा जा सकता है।

उसने काले रंग का पजामा पहन रखा है और मास्क भी लगा रखा है। वहाँ स्थित एक स्कूल को बच्चों को छुट्टी के बावजूद स्कूल में रखना पड़ा, ताकि सुरक्षित व्यवस्था होने के बाद उन्हें घर भेजा जा सके। पीड़ित ट्रॉमा सेंटर में भर्ती है। घटना के कुछ देर बाद रेल लाइनों को सामान्य रूप में फिर से खोला गया और आवागमन चालू हुआ। जासूसों को जाँच के लिए लगाया गया है। घटना बुधवार (27 मार्च, 2024) को शाम 4 बजे की है। ब्रिटिश ट्रांसपोर्ट पुलिस (BTP) छानबीन में लगी हुई है।

इंग्लैंड की क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान केविन पीटरसन ने इस घटना पर आक्रोश जताते हुए लिखा, “ये लंदन में क्या बकवास हो रहा है? ये कभी सबसे अद्भुत शहर हुआ करता था। अब ये एक जगह के नाम पर कलंक रह गया है। हम किसी भी कीमत की घड़ी नहीं पहन सकते। आप हाथ में फोन लेकर नहीं टहल सकते। महिलाओं से उनके बैग और गहने छीन लिए जाते हैं। कारों की तोड़फोड़ की जाती है। वीडियो में चाकूबाजी होती हुई दिख रही है। सादिक़ खान, आपने जो बनाया है उस पर आपको गर्व होना चाहिए?”

‘न्यायपालिका पर दबाव बना रहा एक खास गुट, सोशल मीडिया पर करता है बदनाम’: हरीश साल्वे समेत सुप्रीम कोर्ट के 600+ वकीलों की CJI को चिट्ठी

देशभर के 600 से ज्यादा वकीलों ने मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ को पत्र लिखकर चिंता जाहिर की है। वकीलों का कहना है कि न्यायपालिका पर उठते सवाल और अखंडता को कमजोर करने के प्रयासों को देखते हुए वो चिंतित हैं। पत्र लिखने वाले वकीलों में हरीश साल्वे, मनन कुमार मिश्रा, आदिश अग्रवाल, चेतन मित्तल, पिंकी आनंद, हितेश जैन, उज्ज्वला पवार, उदय होला और स्वरुपमा चतुर्वेदी जैसे बड़े नाम शामिल हैं।

देश के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ को लिखे पत्र में वकीलों ने आरोप लगाते हुए लिखा है, “देश का एक ख़ास वर्ग है जो अदालत पर दबाव डालना चाहता है और इसकी स्वायत्तता कम करने की कोशिश में है। खासतौर पर राजनीतिक लोगों से जुड़े मामले और भ्रष्टाचार से संबंधित केस में। वो अदालत पर लोगों का भरोसा कम करना चाहते हैं।” पत्र में अपील की गई है कि अभी कोर्ट के साथ खड़े होने की जरूरत है ताकि सुनिश्चित हो कि ये लंकतंत्र का मजबूत स्तंभ बना रहे।

वकीलों का कहना है कि इस खास ग्रुप कई तरीकों से न्यायपालिका के कामकाज को प्रभावित करने की कोशिश करता है, जिनमें न्यायपालिका के तथाकथित सुनहरे युग के बारे में गलत नैरेटिव पेश करने से लेकर अदालतों की मौजूदा कार्यवाहियों पर सवाल उठाना और अदालतों में जनता के विश्वास को कम करना शामिल हैं।

सीजेआई को लिखे पत्र में कहा गया है कि ये ग्रुप अपने पॉलिटिकल एजेंडे के आधार पर अदालती फैसलों की सराहना या फिर आलोचना करता है। असल में ये ग्रुप ‘माई वे या हाईवे’ वाली थ्योरी में विश्वास करता है। साथ ही बेंच फिक्सिंग की थ्योरी भी इन्हीं की गढ़ी हुई है। वकीलों ने आरोप लगाया है कि “ये अजीब है कि नेता किसी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हैं और फिर अदालत में उनका बचाव करते हैं। ऐसे में अगर अदालत का फैसला उनके मनमाफिक नहीं आता तो वे कोर्ट के भीतर ही या फिर मीडिया के जरिए अदालत की आलोचना करना शुरू कर देते हैं।”

इस पत्र में कहा गया है कि कुछ तत्व जजों को प्रभावित करने या फिर कुछ चुनिंदा मामलों में अपने पक्ष में फैसला देने के लिए जजों पर दबाव डालने की कोशिश कर रहे हैं और ऐसा सोशल मीडिया पर झूठ फैलाकर किया जा रहा है। इनके ये प्रयास निजी या राजनीतिक कारणों से अदालतों को प्रभावित करने का प्रयास है, जिन्हें किसी भी परिस्थिति में सहन नहीं किया जा सकता।

इन वकीलों का आरोप है कि ये खास ग्रुप की गतिविधियाँ चुनावी सीजन के दौरान अधिक सक्रिय हो जाती है। साल 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान भी ऐसा ही देखने को मिला था। हम सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध करते हैं कि वे इस तरह के हमलों से हमारी अदालतों को बचाने के लिए सख्त और ठोस कदम उठाएँ। पत्र में वकीलों ने न्यायपालिका के समर्थन में एकजुट रुख अपनाने का आह्वान किया है ताकि ये सुनिश्चित किया जा सके कि न्यायपालिका लोकतंत्र का एक मजबूत स्तंभ बना रहे।

इस मुद्दे पर एएनआई से बातचीत में बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन, सीनियर एडवोकेट मनन कुमार मिश्रा ने कहा, “हम लोगों ने माननीय मुख्य न्यायाधीश महोदय को बताया है कि जिस ढंग से खासतौर पर चुनाव का समय चुना गया है, चंद लोगों द्वारा, चंद वकीलों द्वारा। और हमारे न्यायपालिका पर, जोकि हमारे संविधान की गार्जियन मानी जाती है, इसका एकमात्र मकसद है हमारे जजों पर प्रेशर डालना। अपने मन मुताबिक आदेश चाहते हैं लोग। जब करप्शन में शामिल किसी अभियुक्त को अदालत से राहत नहीं मिलती है, तो सोशल मीडिया का उपयोग करके ये लोग कोशिश करते हैं कि अपने मन मुताबिक आदेश ले लें। लेकिन देश की जनता और जो जागरुक लोग हैं, वो इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। इसी को लेकर हमनें माननीय मुख्य न्यायाधीश जी को चिट्ठी लिखी है और सोशल मीडिया पर चल रहे ऐसे अभियानों पर ध्यान न देने की अपील की है। ऐसे प्रयास सिर्फ करप्ट लोगों को बचाने के लिए है, जो सफल नहीं होगा। हमारी न्यायपालिका बहुत मजबूत है।”

बता दें कि कुछ दिन पहले कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में एक सुनवाई के दौरान कहा था कि ये न्यायपालिका के लिए अच्छा दिन नहीं है। बीआरएस नेता के कविता के लिए जिरह के दौरान कपिल सिब्बल ने ये बाते कही थी। उन्होंने कहा था कि इस कोर्ट का इतिहास स्वर्णिम काल में नहीं लिखा जाएगा। हालाँकि सुप्रीम कोर्ट ने उनकी आपत्तियों को खारिज कर दिया था। देश के 600 से ज्यादा वकीलों की चिट्ठी इस दिशा की तरफ भी इशारा करती दिखती है।

‘3 साल का था जब माँ की उँगली पकड़ पीलीभीत आया था’: बदला 35 सालों का इतिहास तो क्षेत्र की जनता को वरुण गाँधी ने लिखा पत्र, कहा – बेटे के रूप में सेवा करता रहूँगा

लोकसभा चुनाव 2024 के लिए भाजपा ने अब तक 7 सूची जारी कर दी है। इन सीटों में एक पीलीभीत भी है, जहाँ से पार्टी के वरुण गाँधी सांसद हैं। हालाँकि, इस बार उनका टिकट काट कर जितिन प्रसाद को चुनाव लड़ने के लिए कहा गया है। वरुण गाँधी पिछले कुछ वर्षों से कई मुद्दों पर पार्टी से अलग रुख अपनाए हुए थे। हालाँकि, उनकी माँ मेनका गाँधी को सुल्तानपुर में बरकरार रखा गया है। अटकलें थीं कि सपा और कॉन्ग्रेस ने वरुण गाँधी को चुनाव लड़ने का ऑफर दिया है, लेकिन अब खुद सांसद ने अपने क्षेत्र की जनता के नाम एक पत्र लिख कर सब कुछ साफ़ कर दिया है।

वरुण गाँधी ने पीलीभीत के नागरिकों को प्रणाम करते हुए इस पत्र में लिखा है कि अनगिनत यादों के कारण आज वो भावुक हैं, उन्हें वो 3 साल का बच्चा याद आ रहा है जो माँ की उँगली पकड़ कर 1983 में पहली बार पीलीभीत आया था। बकौल वरुण गाँधी, तब उस बच्चे को कहाँ पता था कि एक दिन ये धरती उसकी कर्मभूमि होगी और यहाँ के लोग उसका परिवार। उन्होंने वर्षों तक पीलीभीत की जनता की सेवा के अवसर के लिए खुद को सौभाग्यशाली बताते हुए कहा कि एक सांसद ही नहीं बल्कि एक व्यक्ति के रूप में भी उनके परवरिश व विकास में पीलीभीत से मिले आदर्श, सरलता व सहृदयता का बहुत योगदान है।

1980 में मात्र 34 वर्ष की आयु में प्लेन क्रैश में चल बसे अमेठी के तत्कालीन सांसद संजय दिवंगत संजय गाँधी के बेटे वरुण गाँधी ने पत्र में लिखा, “पीलीभीत की जनता का प्रतिनिधि होना मेरे जीवन का सबसे बड़ा सम्मान रहा है और मैंने हमेशा अपनी पूरी क्षमता से आवाज़ उठाई है। एक सांसद के तौर पर मेरा कार्यकाल भले समाप्त हो रहा हो, पीलीभीत से मेरा रिश्ता अंतिम साँस तक खत्म नहीं हो सकता। सांसद के तौर पर नहीं तो आपके बेटे के तौर पर ही सही, मैं हमेशा आपकी सेवा के लिए प्रतिबद्ध रहूँगा और मेरे दरवाजे हमेशा के लिए आपके लिए खुले रहेंगे।”

वरुण गाँधी ने कहा कि वो राजनीति में आम आदमी की तरफ आवाज़ उठाने आए थे और आज वो जनता से यही आशीर्वाद माँगते हैं कि वो सदैव यही कार्य करते रहें, भले ही इसके लिए कोई भी कीमत चुकानी पड़े। वरुण गाँधी ने कहा कि उनका और पीलीभीत की जनता का रिश्ता विश्वास का है और ये किसी भी राजनीतिक गुना-भाग से ऊपर है। वरुण गाँधी ने पीलीभीत के लोगों को आश्वस्त किया कि वो उनके थे और उनके ही रहेंगे। बता दें कि वरुण गाँधी भारत की दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के पोते हैं।

जहाँ तक पीलीभीत लोकसभा का सवाल है, वरुण गाँधी यहाँ से 2009 और 2019 में सांसद चुने जा चुके हैं। वहीं 2014 में वो सुल्तानपुर से सांसद चुने गए थे। पीलीभीत से उनकी माँ मेनका गाँधी 1989, 1996, 98, 99, 2004 और 2014 में सांसद रही हैं। वहीं मेनका गाँधी उत्तर प्रदेश के आँवला से भी 2009 में सांसद रही हैं। पीलीभीत में पिछले 35 वर्षों में दूसरा और 28 वर्षों बाद पहला मौका है जब मेनका-वरुण यहाँ से सांसद नहीं हैं। मेनका गाँधी यहाँ से 1991 में चुनाव हार गई थीं।

महुआ कांड में आया नाम, मोइत्रा के लिए गए कोर्ट… अब पुरी से पिनाकी मिश्रा को BJD ने किया बेटिकट: 4 बार के थे सांसद, संबित पात्रा के सामने अरूप पटनायक

ओडिशा के सत्ताधारी बीजू जनता दल (BJD) ने पुरी लोकसभा सीट से चार बार के सांसद पिनाकी मिश्रा का टिकट काट दिया है। नई लिस्ट में उनकी जगह पर अरूप पटनायक को टिकट दिया गया है। बताया जा रहा है कि उनके टिकट के पीछे संसद से निष्कासित पूर्व TMC सांसद महुआ मोइत्रा से उनकी नजदीकी हो सकती है। मिश्रा का नाम बुधवार (27 मार्च, 2024) को जारी गई पार्टी की लोकसभा सूची से गायब था। पुरी के नए प्रत्याशी पटनायक का मुकाबला भाजपा के प्रवक्ता संबित पात्रा से होगा।

BJD ने बुधवार को ही पहली सूची भी जारी की थी। इसमें कालाहांडी से लंबोदर नियाल, संबलपुर से प्रणब प्रकाश दास, सुंदरगढ़ से लिए दिलीप तिर्की, मयूरभंज से लिए सुदाम मरांडी, केंद्रपाड़ा से अंसुमान मोहंती, नबरंगपुर से प्रदीप कुमार माझी, भुवनेश्वर से मनमथ राउतराय, कोरापुट से कौशल्या हिकाका और अक्सा असका से रंजीता को टिकट दिया गया। दूसरी सूची में, पुरी से अरूप पटनायक, जाजपुर से शर्मिष्ठा सेठी, जगतसिंहपुर से राजश्री मल्लिक, धेकनाल से अविनाश समल, कंधमाल से अच्युतानंद सामंत और कटक से संतरूप मिश्रा को उतारा गया।

‘महुआगेट’ में था पिनाकी मिश्रा का नाम

गौरतलब है कि पिनाकी मिश्रा का नाम महुआ से सम्बन्धित कदाचार के मामले में सामने आया था। दुबई में रहने वाले भारतीय कारोबारी ने एक पत्र लिख कर महुआ को गिफ्ट और पैसे देने की बात स्वीकारी थी। उन्होंने इसी पत्र में बताया था कि महुआ के विपक्षी नेताओं जैसे कि शशि थरूर, पिनाकी मिश्रा और राहुल गाँधी से बहुत अच्छे संबंध थे।

हीरानंदानी ने कहा था उनकी सोच थी कि वह विपक्षी नेताओं का समर्थन पाने के लिए महुआ के रसूख का इस्तेमाल कर सकते हैं। उन्होंने कहा था कि इसी कारण से उन्होंने महुआ को महंगे गिफ्ट दिए और उनकी बाकी माँगे भी पूरी करते रहे। उन्होंने लिखा था कि महुआ को उन्होंने लक्ज़री गिफ्ट दी और उनके आवास के नवीकरण में मदद की। हीरानंदानी ने कहा था कि उन्होंने महुआ के लिए भारत के भीतर और दुनिया के भीतर यात्रा के लिए इंतजाम भी किए।

पिनाकी मिश्रा पुरी से चार बार के सांसद हैं। इस मामले में उनका नाम आने पर भाजपा ने मुख्यमंत्री और BJD अध्यक्ष नवीन पटनायक सफाई देने को कहा था। हालाँकि, पिनाकी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए भाजपा ओडिशा को कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी भी थी। उन्होंने इस मामले पर कहा था, “यह बड़ी दुर्भाग्यशाली है कि जनता के बीच चल रहे एक बिना सिद्ध हुए मामले को लेकर ओडिशा भाजपा ने मुझ पर इतने गंभीर आरोप लगाए हैं।”

हालाँकि, ध्यान देने वाली यह है कि सुप्रीम कोर्ट के वकील मिश्रा ने इस मामले में महुआ मोइत्रा की तरफ से केस लड़ा था। पिनाकी ने इस मामले में कोर्ट से कहा था कि संसद से निकाले जाने के बाद महुआ को दिल्ली स्थित सरकारी बंगले में उन्हें रहने दिया जाए।

महुआ मोइत्रा के खिलाफ कैश-फॉर-क्वेरी घोटाले का आरोप लगाने वाले सुप्रीम कोर्ट के वकील जय अनंत देहाद्राई ने एक पोस्ट में यहाँ तक ​​कहा था कि महुआ मोइत्रा को जब सरकारी बंगला खाली करने को कहा गया तब वह मिश्रा के साथ ‘रहने’ लगी।

महुआ पिनाकी मिश्रा

गौरतलब है कि दर्शन हीरानंदानी से पैसे और गिफ्ट लेकर प्रश्न पूछने के मामले में महुआ मोइत्रा को संसद की आचार समिति ने दोषी पाया था। इस मामले में उन पर यह भी आरोप था कि उन्होंने अपना संसद पोर्टल का आईडी पासवर्ड हीरानंदानी को दिया। इसके बाद उन्हें दिसम्बर 2023 में उन्हें संसद से निकाल दिया गया था।

अयोध्या में रामलला ने 500 साल बाद खेली होली, मथुरा-वृंदावन की गलियाँ कर रहीं इंतजार: CM योगी आदित्यनाथ, कहा- PM मोदी के साथ जनमत

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मेरठ में प्रबुद्ध सम्मेलन में कहा कि अयोध्या में रामलला विराजमान ने अपने भव्य धाम में होली का उत्सव मनाया है। मथुरा और वृंदावन की गलियाँ भी इंतजार कर रही हैं। उनका इशारा साफ तौर पर अयोध्या के बाद मथुरा की तरफ बीजेपी के ध्यान पर था। योगी आदित्यनाथ ने इस बात को विधानसभा में भी कहा था कि वो मथुरा-वृंदावन धाम का उसी तरह से विकास करना चाहते हैं, जैसे अयोध्या धाम का विकास हो रहा है।

मेरठ में बोलते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “‘होली खेले रघुवीरा अवध में’ भजन हमने खूब सुना है, लेकिन पहली बार पाँच सौ बरसों में अयोध्या धाम में मर्यादा पुरुषोत्तम राम ने अपने धाम अयोध्या में विराजमान होकर के होली का उत्सव करवाया। और मथुरा वृंदावन की पूज्य गलियाँ भी इंतजार तो कर ही रही होंगी।”

मतदाताओं के मन में कोई शंका नहीं

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ने कहा कि मतदाताओं के मन में कोई शंका नहीं है कि लोकसभा चुनाव में किस पार्टी को वोट देना है। उन्होंने कहा कि देश की जनता अपना मन बना चुकी है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीसरी बार पूर्ण बहुमत के साथ देश का प्रधानमंत्री बनाना है।

मुख्यमंत्री योगी ने कहा, “ये पहली बार है कि जनता ने अपना मन बना लिया है कि उसे किस पार्टी को वोट देना है। पीएम मोदी के तीसरे कार्यकाल में भारत देश दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश होगा।” सीएम योगी ने कहा, आर्टिकल 370 हटाने का दम सिर्फ पीएम नरेंद्र मोदी के पास ही था। आर्टिकल 370 हटने की पत्थरबाजी की घटनाएँ पूरी तरह से बंद हो चुकी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में अयोध्या का जिस तीव्र गति से विकास हुआ, वैसा पाँच शताब्दियों में कभी नहीं हुआ।

मेरठ से बीजेपी कैंडिडेट अरुण गोविल के बारे में बोलते हुए सीएम योगी ने कहा, ‘अरुण गोविल जी ने भगवान राम का किरदार सिर्फ टीवी पर ही नहीं निभाया, बल्कि पूरा जीवन उन्होंने शुचिता के साथ जिया है।’ योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ये लोकसभा चुनाव ‘फैमिली फर्स्ट’ और ‘नेशन फर्स्ट’ के बीच का है।

सीएम योगी ने गाजियाबाद में भी यही बातें दोहराई।

मेरठ के अलावा गाजियाबाद में भी सीएम योगी आदित्यनाथ ने जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि आपके वोट ने तय किया कि रामलला अवध में होली खेल सकें। उन्होंने कहा, ‘इस होली में ‘जो राम को लाए हैं, हम उनको लाएँगे’ गाना हर तरफ बजा। यही आम लोगों के मन में है।’ पहले फूहड़ गाने होली पर बजते थे, लेकिन इस बार एक ही गाना हर तरफ बज रहा था, ‘जो राम को लाए हैं’। उन्होंने कहा कि आप अनुमान लगाइए कि होली के समय ‘राम को लाए हैं’ गाना बज रहा है, तो कितना परिवर्तन हुआ है।

ऋषि मांडव की भूमि को ऐसे बताया जैसे वहाँ ‘देह का धंधा’ होता हो: कंगना रनौत ने बताया हिमाचल के लोगों का दुख, कॉन्ग्रेसियों ने ‘मंडी में रं$-भाव क्या है’ जैसे किए थे पोस्ट्स

अभिनेत्री और हिमाचल प्रदेश की मंडी सीट से भाजपा उम्मीदवार कंगना रनौत ने उन पर किए गए अभद्र टिप्पणियों का करारा जवाब दिया है। मंडी शब्द को लेकर उनके खिलाफ की गई बेहूदी टिप्पणियों पर उन्होंने कहा है कि कॉन्ग्रेस के लोगों के दिमाग में एक ही मंडी चलती रही है। कंगना रनौत ने मंडी नाम के पीछे कारण भी बताया है।

समाचार चैनल टाइम्स नाउ द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में कंगना ने यह बातें कही। कंगना ने हाल ही में उनके ऊपर मंडी शब्द को लेकर की गई टिप्पणियों पर कहा, “मंडी का नाम यहाँ रहने वाले ऋषि मांडव के नाम पर पड़ा है। मनाली का नाम मनुस्मृति लिखने मनु के नाम पर है, व्यास नदी ऋषि वेदव्यास के नाम पर है। यह वो मंडी नहीं है जो कॉन्ग्रेस के लोगों के दिमाग में चलती रहती है। यह मांडव ऋषि वाली मंडी है।” उनकी यह बातचीत आप नीचे लगे वीडियो में 3 मिनट के बाद सुन सकते हैं।

उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस के लोगों के बयानों से हिमाचल वासी काफी दुखी हुए हैं, वह सीधे-साधे लोग हैं। उन्होंने कहा कि उनके विषय में हमेशा से अभद्र बातें होती आई हैं लेकिन मंडी के विषय में ऐसी बात की गई जैसे वहाँ जिस्म का धंधा होता हो। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस पार्टी बिकनी पहनने वाली महिलाओं का अपमान और बुरका को प्रमोट करती है।

गौरलतब है कि रविवार (24 मार्च, 2024) को भाजपा द्वारा जारी की गई सूची में अभिनेत्री कंगना रनौत का नाम हिमाचल प्रदेश की मंडी लोकसभा से घोषित किया गया था। कंगना मंडी की ही निवासी हैं। हालाँकि, उनको टिकट मिलने के कुछ घंटों के बाद ही उनको गालियाँ देने और ट्रोल करने का अभियान चालू हो गया।

कॉन्ग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने इन्स्टाग्राम अकाउंट पर कंगना की एक फोटो डालते हुए लिखा, “क्या भाव चल रहा है मंडी में कोई बताएगा?”

सुप्रिया कंगना मंडी

सुप्रिया की इस टिप्पणी पर कंगना रनौत ने कहा था कि हमें महिलाओं का सम्मान करना चाहिए, भले ही वह किसी भी क्षेत्र से जुड़ी हुई। कंगना के समर्थन में भी बड़ा अभियान चला था और सुप्रिया श्रीनेत की इस मामले में राष्ट्रीय स्तर पर आलोचना हुई थी। विरोध के बाद यह पोस्ट हटा दिया गया था और सुप्रिया श्रीनेत ने इस मामले में सफाई पेश की थी। उन्होंने ट्विटर पर एक ट्वीट लिख कर अकाउंट का एक्सेस किसी और के हाथ में होने और साथ ही एक पैरोडी अकाउंट पर दोष मढ़ने का प्रयास किया था।

उन्होंने लिखा था, “मेरे मेटा अकाउंट (फेसबुक और इंस्टा) का एक्सेस रखने वाले किसी व्यक्ति ने एक काफी घृणित और आपत्तिजनक पोस्ट की, जिसे हटा दिया गया है। जो भी मुझे जानता है उसे पता होगा कि मैं किसी महिला के लिए ऐसा कभी नहीं कहूँगी। हालाँकि, मुझे अभी पता चला है कि मेरे नाम से एक पैरोडी अकाउंट ट्विटर पर चलाया जा रहा है, इससे ही पूरी शरारत शुरू हुई और इसकी रिपोर्ट की जा रही है।”

कॉन्ग्रेस के एक नेता HS अहीर ने भी कंगना को लेकर काफी अभद्र टिप्पणी की थी। उन्होंने कंगना को लेकर महिलाओं को वेश्या बताने वाली गाली का उपयोग किया था। अहीर ने भी लानत मलानत के बाद यही सफाई दी थी कि उनके अकाउंट से किसी और ने यह ट्वीट किया।

गौरतलब है कि जहाँ कंगना रनौत को भाजपा ने मंडी जैसी हाई प्रोफाइल सीट से टिकट दिया है, वहीं सुप्रिया श्रीनेत का टिकट कट गया है। सुप्रिया श्रीनेत को कॉन्ग्रेस ने 2019 चुनावों में उत्तर प्रदेश की महाराजगंज सीट से उम्मीदवार बनाया था। हालाँकि, इस बार कॉन्ग्रेस ने यहाँ से वीरेन्द्र चौधरी को उतारा है।

पैसा, पावर, फैक्टर… निर्मला सीतारमण को BJP ने दिया था लोकसभा चुनाव लड़ने का ऑफर, जानिए क्यों कर दिया इनकार

देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि उनके पास लोकसभा चुनाव लड़ने लायक पैसा नहीं है। उन्होंने कहा है कि उनको पार्टी ने तमिलनाडु या आन्ध्र प्रदेश से लड़ने का मौक़ा दिया था लेकिन उन्होंने मना कर दिया। वित्त मंत्री सीतारमण ने यह बातें एक इंटरव्यू में कहीं।

टाइम्स नाउ द्वारा आयोजित एक समिट में निर्मला सीतारमण ने कई महत्वपूर्ण बातें कहीं। लोकसभा चुनाव 2024 लड़ने को लेकर जब उनसे प्रश्न पूछा गया तो उन्होंने कहा, “पार्टी ने मुझसे लोकसभा चुनाव लड़ने को पूछा था लेकिन एक सप्ताह तक सोचने के बाद मैंने मना कर दिया। मेरे पास उस प्रकार का पैसा और शक्ति नहीं है। पार्टी ने मुझसे कहा था कि आप अपनी इच्छा से तमिलनाडु या आंध्र प्रदेश से चुनाव लड़ सकती हैं। इसके अलावा जीतने के लिए लगाए जाने वाले फैक्टर भी महत्वपूर्ण हैं कि आप किस समाज, किस जाति से हैं।”

उन्होंने कहा कि पार्टी ने उनकी बात मानते हुए उन्हें चुनाव ना लड़वाने का निर्णय लिया। जब उनसे पूछा गया कि आखिर वित्त मंत्री होकर उनके पास पैसा क्यों नहीं है तो उन्होंने कहा, “मेरा पैसा, मेरी बचत, मेरी कमाई केवल मेरी है, यह भारत की संचित निधि थोड़े ना है।” आप उनकी यह बातचीत नीचे लगे वीडियो में 43 मिनट के बाद सुन सकते हैं।

वित्त मंत्री सीतारमण ने इस दौरान कॉन्ग्रेस पार्टी के टैक्स ना चुकाने और बाद में इस बात को मुद्दा बनाने को लेकर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि 2021 से लगातार तीन-चार स्तर पर कोर्ट में उनसे कहा जा चुका है कॉन्ग्रेस टैक्स चुकाए।

वित्त मंत्री ने कहा कि टैक्स चुका कर कॉन्ग्रेस आगे काम कर सकती थी लेकिन उन्होंने चुनावी समय में इसे भुनाना ज्यादा जरूरी समझा। उन्होंने यह भी कहा कि उनके नेताओं के घर से नकदी बरामद हुई है, पार्टी उनके पास जा सकती है।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल की दिल्ली शराब मामला में गिरफ्तारी पर उन्होंने बात की। उन्होंने कहा कि जब केजरीवाल को एजेंसी समन भेजे तब वह पेश ना होने के बहाने देते रहे और तब नहीं कहा कि यह राजनीतिक प्रतिशोध के चलते हो रहा है। जब गिरफ्तारी हो गई तब उन्हें यह राजनीतिक प्रतिशोध नजर आ रहा है जबकि उनसे कोर्ट ने भी कह दिया है।

NDA के लोकसभा चुनाव 2024 में 400 सीटों के लक्ष्य रखने पर सीतारमण ने कहा कि यह पीएम मोदी द्वारा सेट किया गया है, हम इसको लेकर आशान्वित हैं। उन्होंने सरकार के काम गिनाए और कहा कि देश के लोगों का जीवन स्तर ऊपर उठाया है।

विपक्ष के नेताओं पर केन्द्रीय एजेंसियों की कार्रवाई को लेकर कहा कि एजेंसियाँ उसी के खिलाफ जाएँगी जिसने घोटाला किया है। उन्होंने कहा कि केजरीवाल के खिलाफ शराब घोटाला मामले को लेकर कॉन्ग्रेस ने कई पत्र लिखे और अब वह उनकी गिरफ्तारी का विरोध कर रहे हैं।

उन्होंने लोकसभा चुनाव को लेकर कॉन्ग्रेस पर हमला भी किया। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस को चुनाव में लड़ने के लिए प्रत्याशी नहीं मिल रहे हैं। सारे नेता कॉन्ग्रेस छोड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह कॉन्ग्रेस के कई नेताओं का सम्मान करती हैं लेकिन आज पार्टी की स्थिति खराब है।

निर्मला सीतारमण वर्तमान में कर्नाटक से राज्यसभा सांसद हैं। वह पूरे कार्यकाल तक वित्त मंत्री रहने वाली पहली महिला भी हैं। निर्मला सीतारमण तमिलनाडु से आती हैं। वह पहली बार 2014 में आंध्र प्रदेश से राज्य सभा सांसद बनी थीं। इसके बाद वह 2016 से वह कर्नाटक से सांसद हैं।

जब रील बनाने में बिजी थीं TMC की MP नुसरत जहाँ, तब संदेशखाली में गोद में बच्ची लेकर शेख शाहजहाँ ऐंड गैंग से लड़ रहीं थीं रेखा पात्रा: देखिए Video

उत्तर 24 परगना जिले की बशीरहाट लोकसभा सीट। साल 2009 से टीएमसी के गढ़ रहे इस लोकसभा सीट के अंदर ही आता है संदेशखाली का वो इलाका, जो पिछले कुछ समय से टीएमसी नेता और ममता बनर्जी के करीबी शेख शाहजहाँ की कारस्तानियों की वजह से चर्चा में है। जमीनों पर अवैध कब्जे, महिलाओं के शोषण समेत तमाम घृणित अपराधों के लिए शेख शाहजहाँ और ममता बनर्जी पर उंगलियाँ उठ रही हैं। इस लोकसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी ने रेखा पात्रा को अपना उम्मीदवार बनाया है। रेखा पात्रा शेख शाहजहाँ और उसके गुर्गों द्वारा बरती गई अमानवीयता के खिलाफ प्रतिरोध का चेहरा बनकर उभरी हैं। शेख शाहजहाँ के खिलाफ प्रदर्शन के लिए बीजेपी की महिला नेताओं के जत्थों को पश्चिम बंगाल पुलिस ने संदेशखाली पहुँचने से जब रोक लिया, जब अपनी नन्हीं सी बच्ची को गेद में उठाए रेखा पात्रा ने विरोध प्रदर्शनों की कमान संभाली।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब पश्चिम बंगाल पहुँचे, तो उन्होंने संदेशखाली की पीड़ित महिलाओं से मुलाकात की थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने वाली पीड़ित महिलाओं में रेखा पात्रा भी थी। अब भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें अपना उम्मीदवार बनाया है। रेखा पात्रा उन पीड़ित महिलाओं में से हैं, जो टीएमसी और शेख शाहजहाँ के खिलाफ प्रतिरोध की मजबूत आवाज साबित हो रही हैं। अगर वो बशीरहाट लोकसभा सीट से चुनाव जीत जाती हैं, तो शेख शाहजहाँ के अपराधों को संसद के माध्यम से देश की सबसे बड़ी पंचायत में सामने रखेंगी। ये ममता बनर्जी के खिलाफ पश्चिम बंगाल ही नहीं, बल्कि पूरे देश में जनमत बनाने और अपराधों के खिलाफ मजलूमों के खड़े होने का बड़ा उदाहरण बन सकता है। रेखा पात्रा का लोकसभा चुनाव जीतना पश्चिम बंगाल से ममता बनर्जी की विदाई का कारण बन सकता है।

बीजेपी प्रवक्ता अमित मालवीय ने एक्स पर लिखा, “बीजेपी की बशीरहाट उम्मीदवार रेखा पात्रा अपने बच्चे को गोद में लेकर संदेशखाली आंदोलन में प्रदर्शन करती हुई। वह धैर्य और दृढ़ संकल्प का चेहरा हैं। वोट के लिए हिंदू महिलाओं को भेड़ियों के सामने फेंकने की ममता बनर्जी की घिनौनी राजनीति के खिलाफ वो मैदान में डटी हैं।”

वामपंथियों के लिए जैसे सिंगूर बना विदाई की वजह, क्या संदेशखाली मिटाएगा टीएमसी का वजूद?

पश्चिम बंगाल को वामपंथी राजनीतिक का अभेद्य किला माना जाता था। पूरे देश में वामपंथी पार्टियों को लग रहे झटकों के बावजूद ये पार्टियाँ पश्चिम बंगाल को बेस बनाकर बाकी जगहों पर भी राजनीति चलाती रहती थी। इसका असर पश्चिम बंगाल से सटे त्रिपुरा, ओडिशा, झारखंड, बिहार तक होता था। लेकिन नंदीग्राम से शुरू हुए नक्सलवाड़ी केंद्रित हिंसा और फिर वामपंथ के चंगुल में फंसे पश्चिम बंगाल के किले को सिंगूर में ममता बनर्जी ने जिस तरीके से ध्वस्त किया, कुछ उसी रास्ते पर बढ़ता दिख रहा है संदेशखाली। संदेशखाली में हुई ज्यादतियों की वजह से ममता बनर्जी बैकफुट पर हैं। यहाँ की सांसद नुसरत जहाँ ने चुनाव लड़ने से मना कर दिया। नुसरत ने संदेशखाली के पूरे विवाद पर चुप्पी साधे रखी। वो रील बनाने में व्यस्त रहीं। मीडिया ने सवाल पूछा, तो उन्होंने धारा 174 का बहाना बनाकर पलड़ा झाड़ लिया। इसके बाद जब उन्होंने देखा कि अब संदेशखाली में टीएमसी के खिलाफ माहौल खराब हो चुका है, तो उन्होंने लोकसभा चुनाव न लड़ने का फैसला किया।

नुसरत जहाँ का चुनाव लड़ने से इनकार करना ममता बनर्जी के लिए बड़ा झटका था। भले ही उन्होंने टीएमसी की लीडरशिप और स्थानीय काडर पर अपना समर्थन न देने का आरोप लगाया हो, लेकिन सच ये है कि संदेशखाली से जो संदेश पूरे देश में गया, उससे नुसरत को अपने भविष्य का अंदाजा हो चला था। इसीलिए उन्होंने छीछालेदर न कराते हुए अपनी राह अलग कर ली। इसके बाद ममता बनर्जी की टीएमसी ने हाजी नुरुल इस्लाम को अपना उम्मीदवार बनाया है। नुरुल इस्लाम पर भी हिंदू विरोधी हिंसा के आरोप हैं। वो साल 2009 में टीएमसी के टिकट पर पहली बार इस लोकसभा सीट से सांसद भी बना था। टीएमसी का स्थानीय कद्दावर नेता होने की वजह से ममता बनर्जी ने उसे उम्मीदवार बनाया है, लेकिन कहा जाता है कि शेख शाहजहाँ को आगे बढ़ाने में नुरुल इस्लाम का भी हाथ रहा।

बीजेपी की महिला शक्ति उखाड़ फेंकेगी टीएमसी को?

ममता बनर्जी खुद को नारी शक्ति का प्रतीक बताती हैं, लेकिन दुर्गापूजा के समय वही तमाम अड़चनें भी डालती हैं। मुस्लिमों के तुष्टिकरण को लेकर उनके कदम हमेशा राष्ट्रीय राजनीति में संदिग्ध नजरों से देखे जाते हैं। उस पर भी वो बांग्लादेशी घुसपैठियों को लेकर नरम रवैया अपनाती हैं। उन्होंने ऐलान कर दिया है कि वो पश्चिम बंगाल में एनआरसी-सीएए लागू नहीं होने देंगी। यही नहीं, उन्होंने जिन कथित बाहरी लोगों के आधार कार्ड डिएक्टीवेट किए गए हैं, उन्हें नया आधार और पश्चिम बंगाल सरकार की तरफ से पहचान पत्र देने की भी घोषणा की है, लेकिन क्या शेख शाहजहाँ की अगुवाई में टीएमसी ने संदेशखाली में जो कुछ किया है, उससे वो पार पा सकेंगी?

बीजेपी का रेखा पात्रा को टिकट देना न सिर्फ ममता बनर्जी के लिए सीधी चुनौती है, बल्कि हिंदुओं पर पश्चिम बंगाल में हो रहे अत्याचारों के खिलाफ भी बीजेपी की लड़ाई का एक प्रतीक है। बशीरहाट लोकसभा सीट बांग्लादेश की सीमा से लगी है। यहाँ करीब आधे मतदाता मुस्लिम हैं। लेकिन बीजेपी को उम्मीद है कि शेख शाहजहाँ के अत्याचारों से पीड़ित महिला शक्ति एकजुट होगी और रेखा पात्रा न सिर्फ रेखा पात्रा बल्कि पूरे राज्य में ममता बनर्जी के खिलाफ वोट से चोट करेगी।

रेखा पात्रा ने संदेशखाली में जिस दृढ़ता के साथ शेख शाहजहाँ और उसके गुर्गों के खिलाफ सड़कों पर उतरी, उसे पूरी दुनिया ने देखा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रेखा पात्रा को शक्ति स्वरूपा बताया है। उन्हें बीजेपी की तरफ से बशीरहाट लोकसभा सीट पर उम्मीदवार बनाए जाने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनसे फिर से बातचीत की और उनका हौसला बढ़ाया। आगे पीएम मोदी ने रेखा पात्रा से कहा, “संदेशखाली में आपने इतनी बड़ी लड़ाई लड़ी है। आप एक प्रकार से शक्ति स्वरूपा हैं। आपने इतने ताकतवर लोगों को जेल भेज दिया। आपको अंदाजा है कि आपने कितने बड़े साहस का काम किया है?”

इस पर रेखा ने कहा कि उन्हें संदेशखाली की महिलाओं का साथ था इसलिए वो ये सब कर पाईं। उन्होंने पीएम को पिता-भाई के रूप में बताया और उम्मीद की कि टीएमसी के खिलाफ लड़ाई में पीएम उनका साथ देंगे। इस पर पीएम ने उनकी हिम्मत बढ़ाई और कहा कि ये लड़ाई बंगाल के सम्मान की है। उन्होंने रेखा पात्रा को आश्वासन दिया कि वो हर तरह से साथ रहेंगे। व्यक्तिगत रूप से भी उनकी चिंता करेंगे। उन्होंने रेखा पात्रा का उत्साह देखते हुए कहा, “बंगाल शक्ति पूजा, दुर्गा पूजा की भूमि है। आप उसी शक्ति का पर्याय हैं। आपका काम बहुत बड़ा है। संदेशखाली की महिलाओं की आवाज को दुनिया के सामने उठाना वो कोई सामान्य बात नहीं है। आपका उत्साह देखकर लग रहा है कि इस बार बंगाल में नारी शक्ति हमें जरूर आशीर्वाद देगी।”