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रामलीला मैदान में 10000 किसानों का जमावड़ा: MSP और ₹600 की दिहाड़ी की माँग, ट्रैक्टर-हथियार न लाने की शर्त पर मिली थी अनुमति

दिल्ली के रामलीला मैदान में एक बार फिर से किसानों का जमावड़ा हुआ है। ‘किसान मजदूर महापंचायत’ में 10,000 से भी अधिक किसान पहुँचे। इनमें सिख किसानों का बोलबाला रहा और महिलाएँ भी शामिल हैं। ‘मोदी सरकार मुर्दाबाद’ के नारे लगाए गए। बहादुरगढ़ के रास्ते टिकरी बॉर्डर होते हुए हुए ये किसान दिल्ली पहुँचे और गुरुवार (13 मार्च, 2024) को ये विरोध प्रदर्शन किया। टिकरी बॉर्डर पर दिल्ली या हरियाणा की पुलिस ने इन्हें नहीं रोका। हालाँकि, आंदोलन की सूचना को लेकर जवान अलर्ट पर थे।

इनमें अधिकतर किसान BKU (उग्राहा) संगठन के थे। न सिर्फ 250 से अधिक वाहनों, बल्कि ट्रेन और बसों के माध्यम से भी कई किसान दिल्ली पहुँचे। टिकरी बॉर्डर पर इसे देखते हुए अर्धसैनिक बलों के जवानों को भी तैनात किया गया था, लेकिन किसानों के साथ कोई रोकटोक नहीं की गई। आंदोलन में न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी, बिजली बिल संशोधन की वापसी, लेबर कोड रद्द किए जाने, किसानों पर लगे मुकदमे खारिज करवाने, मनरेगा के काम 200 दिन मिलने और 600 रुपए प्रतिदिन दिहाड़ी किए जाने की माँग की गई।

‘पगड़ी संभाल जट्टा संघर्ष समिति’ के कई सदस्य तो एक सप्ताह पहले से ही दिल्ली पहुँचे हुए थे। अग्रोहा से निकलने के बाद लांधड़ी टोल प्लाजा पर उन्हें रोक लिया गया था, लेकिन उनमें से कई दिल्ली पहुँचने में कामयाब रहे। जहाँ रोका गया, वहाँ भी किसानों ने मोर्चा जमा दिया था। बताया जा रहा है कि इस आंदोलन में 400 संगठन शामिल हैं। ये महापंचायत 1 दिन की ही है। पुलिस और MCD ने उन्हें इस शर्त पर अनुमति दी कि वो ट्रैक्टर लेकर नहीं आएँगे और उनके पास कोई हथियार भी नहीं होगा।

‘संयुक्त किसान मोर्चा’ के बैनर तले आगे की आंदोलन की रूपरेखा भी तय की जा रही है। पंजाब में शंभू बॉर्डर पर भी आंदोलन अब तक जारी है। SKM का कहना है कि उस आंदोलन में उसके किसान शामिल नहीं हैं। पिछले किसान आंदोलन में दर्ज केस वापस लिए जाने और किसानों की मौत का दावा करते हुए उनके परिजनों को मुआवजा दिए जाने की माँग भी की जा रही है। भूमि अधिग्रहण कानून के कुछ हिस्से को भी किसान विरोधी बता कर उसे बदलने की माँग की जा रही है।

CAA पर बुरे फँसे अरविंद केजरीवाल: अमित शाह ने ‘रोहिंग्या’ पर चुप्पी को लेकर रगड़ा, हिंदू शरणार्थियों ने दिल्ली CM का घर घेरा

नागरिकता संशोधन कानून के लागू होने के बाद जिस तरह विपक्षी नेता मोदी सरकार को घेर रहे हैं उसे देखते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने अपने हालिया इंटरव्यू में सबको करारा जवाब दिया है। इसी लिस्ट में चूँकि आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल भी थे इसलिए उनको भी अमित शाह ने खरी-खरी सुनाई और कहा कि भ्रष्टाचार की पोल खुलने से केजरीवाल जो हैं वो आपा खो बैठे हैं।

दरअसल, देश में सीएए लागू होने पर अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि अगर सीएए लागू होगा तो देश में अंधाधुंध लोग आएँगे, जैसा कि स्वतंत्रता के बाद हुआ था। इससे कानून व्यवस्था बिगड़ेगी और चोरियाँ, डकैतियाँ और बलात्कार आदि होंगे।

उनकी इसी चिंता का जवाब देते हुए अमित शाह ने कहा, “दिल्ली मुख्यमंत्री अपने भ्रष्टाचार के उजागर होने से अपना आपा खो चुके हैं। उनको मालूम नहीं है सारे लोग आ चुके हैं और भारत में ही रह रहे हैं। सिर्फ उनको अधिकार नहीं मिला है। ये उनको अधिकार देने की बात है। 2014 तक जो आ गए उनको नागरिकता देने की बात हो रही है। इतनी ही चिंता है तो क्यों बांग्लादेश घुसपैठियों की बात क्यों नहीं करते, रोहिंग्याओं की बात क्यों नहीं करते… क्योंकि वो वोटबैंक की पॉलिटिक्स कर रहे हैं। दिल्ली के चुनाव उनके लिए लोहे के चने चबाने जैसे हैं इसलिए वो वोटबैंक की राजनीति कर रहे हैं।

अमित शाह से जब पूछा गया कि अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि सरकार अपने लोगों को नौकरी नहीं दे पा रही, फिर इन्हें कैसे देगी। इस पर अमित शाह ने कहा कि केजरीवाल ने कभी भी रोहिंग्याओं के लिए तो कुछ नहीं कहा। सिर्फ जो बौद्ध, हिंदू, पारसी, ईसाई, सिख शरणार्थी आए हैं, वो उन्हीं का विरोध कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, “ये लोग विभाजन का समय भूल गए हैं। ये शरणार्थी अपनी करोड़ों की संपत्ति छोड़कर यहाँ आए थे। हम उनकी समस्याएँ क्यों नहीं सुनेंगे? उन्हें यहाँ नौकरी और शिक्षा नहीं मिलती। हम उनके प्रति सहानुभूति क्यों नहीं व्यक्त करेंगे? देश का बँटवारा करना उनका फैसला नहीं था। यह कॉन्ग्रेस थी जिसने यह निर्णय लिया और उन्होंने उन्हें नागरिकता देने का वादा किया। अब वे अपने वादे से मुकर रहे हैं।”

बता दें कि एक तरफ अमित शाह ने अरविंद केजरीवाल को उनके बयान पर उन्हें ये सब कहा। वहीं दूसरी ओर हिंदू शरणार्थी भी सड़कों पर दिल्ली सीएम के विरोध में उतर आए। इन लोगों ने अरविंद केजरीवाल के आवास के बाहर हाथ में झंडे लेकर प्रदर्शन किया। इस दौरान मोदी-मोदी के नारे लगे। साथ ही केजरीवाल माफी माँगो का नारा लगाती भी महिलाएँ दिखीं। महिलाओं के हाथ में लगे पोस्टरों में लिखा दिखा- “झूठे केजरीवाल CAA कानून पर भ्रम मत फैलाओ जनता को सच बताओ।”

नदीम ने घर में घुस अफजाल की बेटी को छेड़ा, लोगों ने पकड़कर पीटा: 10 दिन बाद ‘मॉब लिंचिंग’ बता पेश कर रहे इस्लामी नाम वाले हैंडल

सोशल मीडिया प्लेटफार्म ट्विटर पर उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर का एक वीडियो वायरल किया जा रहा है। इस वीडियो में एक युवक के हाथ पैर रस्सियों से बंधे दिख रहे हैं। उसके आसपास कई लोग हैं। एक महिला बचाओ-बचाओ चिल्ला रही है। इस वीडियो को ट्विटर पर भीड़ द्वारा मुस्लिम की पिटाई के मामले के रूप में प्रचारित किया जा रहा है।

इस्लामी नाम वाले ट्विटर अकाउंट इस वीडियो को शेयर करते हुए लिख रहे हैं, “यूपी के मुजफ्फरनगर में 4 मार्च को ‘भीड़’ ने नदीम नामक मुस्लिम युवक की बेरहमी से पिटाई की, उसके हाथ-पैर रस्सी से बाँध दिए। पीड़ित परिवार का आरोप है कि ‘आरोपियों’ के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय, पुलिस ने पीड़ित नदीम को ही घंटों थाने में बैठाए रखा।”

कुल मिलाकर इस वीडियो के साथ दावा यह हो रहा है कि नदीम नाम के एक मुस्लिम युवक को भीड़ ने घेरा और उसे रस्सियों से बाँध कर पीटा। इस मामले में को भीड़ की पिटाई और वामपंथी-लिबरल गैंग के ‘मॉब लिंचिंग’ के एजेंडे के साथ जोड़ा जा रहा है। इसमें यह इशारा करने की कोशिश करने की जा रही है जैसे हिन्दुओं ने इस मुस्लिम युवक को पीटा हो। साथ ही पुलिस पर भी कार्रवाई ना करने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं।

ऑपइंडिया ने इस मामले का फैक्ट चेक किया है। हमारे फैक्ट चेक में इसकी सच्चाई कुछ और निकली है। ऑपइंडिया ने इस मामले में दर्ज की गई एक FIR की कॉपी भी प्राप्त की है। असल में यह मामला मुस्लिमों के बीच मारपीट का है।

पुलिस से दर्ज करवाई गई FIR के मुताबिक़, वीडियो में दिख रहा युवक नदीम थाना रतनपुरी के फुलत गाँव का रहने वाला है। वह 3 मार्च की रात को 9:30 मिनट पर को गाँव के ही अफजाल के घर में घुसा। नदीम, अफजाल के घर में उनकी बेटी शिबा से छेड़खानी करने पहुँचा था। इस बात की भनक लगते ही अफजाल ने अपने परिवार के साथ नदीम को पकड़ लिया।

नदीम के खिलाफ दर्ज FIR

इसके बाद नदीम की पिटाई हो गई। हालाँकि, नदीम इस पिटाई से भी नहीं माना और अपने भाइयों को साथ लेकर वापस अफजाल को मारने आया। उसने अफजाल के घर में घुस कर अपने भाइयों नौशाद, दिलशाद, मुदस्सिर और सोनू के साथ अफजाल के परिवार पर लाठी डंडे और लोहे की रॉड से हमला कर दिया।

नदीम अफजाल के परिवार को जान से मारने की कोशिश भी की। इसके बाद जब मुहल्ले के और लोग नदीम और उसके साथ के गुंडों को रोकने आए तो वह भाग गए। अफजाल ने कहा है कि इस हमले में उनके घर के लोग घायल हो गए।

मुजफ्फरनगर पुलिस ने इस मामले में बताया है, “प्रकरण एक ही समुदाय से सम्बन्धित है जिसमें थाना रतनपुरी पुलिस द्वारा दिनांक 04.03.2024 को सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत कर 03 अभियुक्तगण को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। थाना रतनपुरी पुलिस द्वारा अग्रिम विधिक कार्यवाही प्रचलित है।”

ऑपइंडिया ने इस मामले के फैक्ट चेक में पाया कि इस मामले में भीड़ द्वारा पिटाई का जो नैरेटिव चलाया जा रहा है, वह झूठा है। असल में यह मामला मुस्लिमों के आपसी विवाद का है, जिसमें नदीम ने एक लड़की से छेड़छाड़ करने की कोशिश की। इसके बाद उसने लड़की के परिवार पर हमला किया। ऐसे में ऑपइंडिया के फैक्ट चेक में भीड़ द्वारा पिटाई का नैरेटिव गलत साबित हुआ है।

वापस नहीं होगा CAA, मुख्यमंत्री नहीं कर सकते इनकार: ममता-स्टालिन जैसों को अमित शाह की दो टूक, ‘तुष्टिकरण’ की राजनीति पर विपक्ष को घेरा

पूरे देश में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर अधिसूचना जारी करने के बाद केंद्रीय गृहमंत्री ने समाचार एजेंसी पत्रकार स्मिता प्रकाश को इंटरव्यू दिया। इस इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि किसी भी कीमत पर CAA सरकार वापस नहीं लेगी। ये बिलकुल देश का, देश की संप्रभुता का मामला है।

दरअसल, स्मिता प्रकाश के शो में अमित शाह से सवाल किया गया था कि क्या जिस तरह से कृषि कानून वापस लिए गए उसी प्रकार अगर लोग विरोध करें, अंतरराष्ट्रीय प्रेस पर बात उठे, तो क्या संभावना है कि ये कानून भी वापस लिया जाए?

इस पर अमित शाह ने कहा कि ऐसा बिलकुल नहीं होने वाला है। उन्होंने कहा- “CAA का कानून कभी वापस नहीं लिया जाएगा। भारत की नागरिकता सुनिश्चित करना ये भारत का विषय है, भारत की संप्रभुता का विषय है इसके साथ हम कोई कॉम्प्रॉमाइज नहीं कर सकते।”

अमित शाह ने कानून लागू करने के समय को लेकर कहा कि आज विपक्षी पार्टियाँ जिसमें ओवैसी, राहुल गाँधी, अरविंद केजरीवाल सब शामिल होकर झूठ की राजनीति कर रहे हैं। वह बोले कि ये कानून कब लागू हुआ इसका सवाल ही नहीं है। भाजपा ने 2019 के अपने मेनिफेस्टो में कहा था कि वो पड़ोसी देश के शर्णार्थियों को नागरिकता देंगे। 2019 में इसे संसद से पारित किया गया फिर ये कोरोना के कारण लेट हुआ। अब विपक्ष चूँकि तुष्टिकरण की राजनीति करना चाहता है इसलिए ऐसा कर रहा है।

उन्होंने विपक्ष के उन नेताओं (सीएम ममता बनर्जी, सीएम स्टालिन, सीएम पिनराई विजयन) को सुनाते हुए कहा कि इस कानून को लागू करने से कोई राज्य (या उसके मुख्यमंत्री) नहीं मना कर सकते। कानून बनाने का काम संसद का है। ये केंद्र का विषय है। राज्य का इसे बनाने में या लागू करने में… कोई रोल नहीं होता।

अमित शाह ने कहा, “पिछले 4 साल में 41 बार कह चुका था कि चुनाव से पहले सीएए पूरे देश में लागू होगा… विपक्ष के पास कोई और काम नहीं है। उनका इतिहास ये है कि वो जो बोलते हैं वो करते नहीं है। मोदी जी की हिस्ट्री है कि जो पीएम मोदी ने कहा वो पत्थर की लकीर है। मोदी की हर गारंटी पूरी हो रही है… विपक्ष ने तो यहाँ तक कहा था कि एयरस्ट्राइक, सर्जिकल स्ट्राइक में हमारा कोई राजनीतिक फायदा है। तो क्या हमें आतंक के खिलाफ कदम नहीं उठाने चाहिए। इन्होंने कहा कि आर्टिकल 370 खत्म करने से फायदा मिलेगा। हम तो 1950 से कह रहे थे कि हम इसे हटाएँगे।”

उन्होंने समझाया कि इस कानून से अल्पसंख्यकों को डरने की जरूरत नहीं है क्योंकि सीएए में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि किसी की नागरिकता को वो छीने। इसमें सिर्फ हिंदुओं, बौद्धों, जैनों, सिखों और ईसाइयों और पारसियों को नागरिकता देने की बात है। 1947 में कॉन्ग्रेस नेताओं ने कहा था कि विभाजन के समय जिन लोगों को जाना पड़ा वो कभी भी भारत आ सकते हैं लेकिन उन्होंने अपना वादा नहीं निभाया। विभाजन के वक्त 23 फीसद हिंदू और सिख वहाँ थे। अब सिर्फ 3.7 फीसद है। बांग्लादेश में हिंदुओं की संख्या 22% थी अब सिर्फ 10% रह गई है।

गृहमंत्री ने विपक्षी नेताओं के आपा खोने पर बात की, बंगाल में सरकार बनाने पर बात की। साथ ही ये भी समझाया कि सीएए और एनआरसी का एक दूसरे से लेना देना नहीं है सिर्फ दुष्प्रचार के कारण इसे एक साथ देखा जा रहा है। उन्होंने विपक्षी नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि शर्णार्थियों और घुसपैठियों में फर्क होता है ये विपक्षी नेताओं को समझना होगा। उन्होंने सीएए को संवैधानिक रूप से वैध कानून बताया।

साथ ही कहा कि विपक्ष को केवल तुष्टिकरण की राजनीति करनी है इसलिए वो ये सब कर रहे हैं। रही बात मुस्लिमों की तो इस पर भी अमित शाह ने समझाया कि पड़ोसी मुल्क से आए मुस्लिम भी नागरिकता के लिए अप्लाई कर सकते हैं। कानून में उनका जिक्र इसलिए नहीं है क्योंकि ये प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को शरण देने का मसला है और मुस्लिमों के नाम पर पहले से पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान जैसे देश बने हैं।

ED ने की संदेशखाली में छापेमारी, शाहजहाँ शेख की कब्जाई जमीनों को लेकर कार्रवाई: अभी CBI की गिरफ्त में है TMC का पूर्व नेता

केन्द्रीय एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पूर्व TMC नेता शेख शाहजहाँ के संदेशखाली और धामखाली स्थित ठिकानों पर छापेमारी की है। यह छापेमारी आज (14 मार्च, 2024) की सुबह से चालू है। ED की टीम यहाँ केन्द्रीय सुरक्षा बलों के साथ पहुँची है।

जानकारी के अनुसार, ED ने शाहजहाँ शेख के 4 ठिकानों पर छापेमारी है, इसमें एक ईंट भट्ठा भी शामिल है। ED की टीम इस बार पूरे दल बल के साथ पहुँची है। उसके साथ बड़ी संख्या में CRPF के जवान हैं, इनमें महिला जवान भी शामिल हैं। उसके सभी ठिकानों की तलाशी ली जा रही है। उसके घर-दफ्तर और उससे जुड़े अन्य ठिकानों में तलाशी चल रही है।

शाहजहाँ शेख के ठिकानों पर ED की यह छापेमारी उसके खिलाफ दर्ज किए गए जमीन कब्जे के मामले में की जा रही है। गौरतलब है कि शाहजहाँ के खिलाफ संदेशखाली की महिलाओं ने यौन उत्पीडन और जमीन कब्जाने के आरोप लगाए हैं। शाहजहाँ पर आरोप है कि उसने आम लोगों की जमीन कब्जा करके मछली का काम किया और लोगों की जमीनें भी तबाह कर दी।

उसने जिन लोगों की जमीन हथियाई उन्हें कोई पैसा नहीं मिला। कुछ लोगों की जमीन को लीज पर लिया गया लेकिन उन्हें कोई भुगतान नहीं हुआ। इसके अलावा लोगों को मजदूरी भी नहीं दी गई। जिन लोगों ने जमीनों पर कब्जे के विरुद्ध आवाज उठाई, उन्हें मारा पीटा गया और धमकियाँ दी गईं। पुलिस और प्रशासन भी इस मामले में चुप बैठा रहा।

गौरतलब है कि ED की टीम पर शाहजहाँ शेख हमला भी करवा चुका है। सबसे पहले जनवरी, 2024 में उसके घर पर ED छापा मारने गई थी तब उसने यहाँ स्थानीय लोगों को भड़का कर और अपने गुंडों के जरिए ED टीम पर हमला करवा दिया था। इस हमले में अधिकारियों को चोटें आई थीं और साथ ही उनकी गाड़ियाँ क्षतिग्रस्त कर दी गईं थी।

शेख शाहजहाँ के खिलाफ यौन शोषण, जमीन कब्जाने और पीड़ित करने के आरोप सामने आने के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया था। उसकी गिरफ्तारी बंगाल पुलिस ने की थी लेकिन फिर उसे कोर्ट के आदेश से सीबीआई को सौंप दिया गया था। वह वर्तमान में सीबीआई की ही गिरफ्त में है।

उसको राशन घोटाला मामले में ED भी गिरफ्तार कर सकती है। इस गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने कलकता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हालाँकि, उसे यहाँ से कोई राहत नहीं मिली थी। वह राशन घोटाले में भी आरोपित है, उसका काला चिटठा इसी घोटाले में माध्यम से सामने आया था।

रमजान में बाजार में खा रहे थे खाना, पुलिस ने रोजा नहीं रखने पर 11 को किया गिरफ्तार: गैर मुस्लिमों से कहा- खाना बनाते दिखे तो मिलेगी सजा

नाइजीरिया में रमजान के महीने में रोजा न रखने वालों को पुलिस गिरफ्तार कर रही है। मामला वहाँ के उत्तरी कानो का है। वहाँ 11 मुस्लिमों को रमजान में रोजा रखने के समय पर मार्केट में खाना खाता देखे जाने पर यह कार्रवाई हुई।

जानकारी के मुताबिक कानो एक मुस्लिम बहुसंख्यक आबादी वाला राज्य है जहाँ इस्लामी कानून शरिया के हिसाब के चीजें संचालित होती हैं। यहाँ की पुलिस को हिस्बाह के नाम से जाना जाता है।

ये पुलिस हर साल रमजान के दौरान होटल, रेस्टोरेंट और मार्केट वाली जगहों पर तलाशी लेती है और जो कोई उन्हें रोजे की जगह ऐसे खाता-पीता मिलता है उन्हें गिरफ्तार कर लेती है।

12 मार्च 2024 को भी ऐसा ही हुआ। मार्केट प्लेस में जाँच करने निकली पुलिस को ऐसे 11 लोग मिले, जिसके बाद फौरन उन्होंने उनको गिरफ्तार कर लिया। बाद में इन लोगों को एक कसम दिलवाई गई कि वह दोबारा जानबूझकर अपना रोजा नहीं छोड़ेंगे। ये कसम दिलाकर उन्हें छोड़ दिया गया।

इन 11 लोगों में 1 मूँगफली बेचने वाली महिला भी शामिल थी। पुलिस की नजर जब उसपर पड़ी तब वो अपने ही सामान से निकालकर कुछ-कुछ खा रही थी। पुलिस ने उसे भी गिफ्तार करके रोजा न तोड़ने की कसम दिलाई।

बता दें कि कानो की इस्लामिक पुलिस हिस्बाह ने साफ कहा है कि उनके यहाँ पर रमजान के समय ऐसा तलाशी अभियान जारी रहेगा। केवल गैर मुस्लिमों को इसमें छूट दी जाएगी कि वो रोजे के समय में खा पी सकते हैं। उन्हें सजा तब मिलेगी जब पता चलेगा कि वो रोजाधारी मुसलमानों के रोजे के समय कुछ पका कर बेच रहे हैं जिससे मुसलमानों को लालच आए।

मालूम हो कि इस बार रमजाम 11 मार्च से 9 अप्रैल के बीच में हैं। इस दौरान नाइजीरिया की इस्लामिक पुलिस हर सार्वजनिक स्थानों पर सक्रिय होकर रोजा न रखने वालों को पकड़ने के लिए घूम रही है। जानकारी के मुताबिक रमजान के महीने में मुस्लिमों के लिए रोजे के वक्त, खाना-पीना, सेक्स करना, धूम्रपान करना सब वर्जित होता है।

‘मैं मंत्री नहीं होता तो उसको (PM मोदी) टुकड़ों में फाड़ देता’: तमिलनाडु के मंत्री ने भरी सभा में प्रधानमंत्री को दी धमकी, Video वायरल

तमिलनाडु की DMK सरकार में मंत्री टी एम अनबरसन का एक वीडियो वायरल हो रहा है जहाँ वह पीएम मोदी को धमकाने वाला एक विवादित बयान दे रहे हैं। यह बयान एक भरी सभा में मंच दिया गया। DMK के मंत्री ने पीएम मोदी के टुकड़े करने की धमकी दी है।

वायरल हो रहे वीडियो में टीएम अनबरसन कहते हुए दिखते हैं, “मैंने अभी शांति रखी हुई है और मृदु बात कर रहा हूँ क्योंकि मैं एक मंत्री हूँ। मैं मंत्री ना होता तो उसको टुकड़ों में फाड़ देता।” इस बयान के दौरान और भी लोग बैठे हुए हैं और ताली बजाते हैं।

टीएम अनबरसन तमिलनाडु की एमके स्टालिन की अगुवाई वाली DMK-कॉन्ग्रेस गठबंधन सरकार में ग्रामीण उद्योग, कुटीर उद्योग, लघु उद्योग और झुग्गी उन्मूलन बोर्ड के मंत्री हैं। अनबरसन का बयान पिछले सप्ताह का बताया जा रहा है। इससे एक सप्ताह पहले ही तिरूप्पुर में पीएम मोदी ने रोडशो किया था।

अनबरसन ने इसी बयान में कहा, “हमारे कई प्रधानमंत्री हुए, कोई ऐसे नहीं बोलता था। मोदी हमें मिटाने की बात करता है, लेकिन मैं एक बात याद दिला दूँ कि DMK कोई सामान्य संगठन नहीं है। यह कई बलिदानों और बहुत खून बहने के बाद बना है।”

इसके बाद उसने कहा, “जिन लोगों ने DMK को खत्म करने की बात की, उनका ही विनाश हो गया। यह संगठन बना रहेगा, ये बात दिमाग में रखना। मैंने उससे (पीएम मोदी) अलग तरीके से निपटता। अभी मैं चुप हूँ और मृदु तरीके से बोल रहा हूँ क्योंकि मैं एक मंत्री हूँ। अगर मैं मंत्री ना होता, तो उसके साथ दूसरा ही तरीका अपनाता।”

भाजपा ने DMK पर किया हमला

अनबरसन के बयान के बाद भाजपा ने DMK की कड़ी आलोचना की। भाजपा ने INDI गठबंधन को निशाना बनाया है। DMK, INDI गठबंधन का हिस्सा है। अनबरसन के बयान को भाजपा नेताओं ने ट्विटर पर इस वीडियो को प्रसारित करते हुए खूब हमले किए हैं।

भाजपा के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने एक्स पर लिखा कि INDI गठबंधन का एजेंडा इससे ज्यादा स्पष्ट नहीं हो सकता। उनका लक्ष्य सनातन धर्म और इसको मानने वालों का विनाश करना है। भाजपा के राष्ट्रीय सचिव सत्य कुमार यादव ने कहा, “INDI गठबंधन का एक बार और छिछला स्तर। INDI गठबंधन लोकसभा परिणाम जानता है इसीलिए पीएम मोदी को गालियाँ दे रहे हैं।”

तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष के अन्नामलाई ने ट्विटर पर लिखा, “तमिलनाडु में सत्ता विरोधी लहर बढ़ने से आई हताशा के कारण DMK के मंत्री हमारे माननीय प्रधानमंत्री मोदी को धमकियाँ तक दे रहे हैं। अपनी विभाजन वाली राजनीति, भ्रष्ट आचरण, अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करों के साथ कनेक्शन, गुंडागर्दी और कुशासन जैसे कारणों से राजनीतिक क्षेत्र से समाप्त हो जाएगी।”

टीएम अनबरसन का यह बयान अब सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है और लोग DMK के रवैये की आलोचना कर रहे हैं। गौरतलब है कि इससे पहले DMK मंत्री और CM स्टालिन के बेटे उदयानिधि सनातन को मिटाने की बात कर चुके हैं।

गेट फाँद कर घुसा हमलावर, तोड़ डाली बजरंग बली की मूर्ति: बरेली के हिन्दू मंदिर में तोड़फोड़ के बाद हिन्दू संगठनों में आक्रोश

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में एक हिन्दू मंदिर के अंदर तोड़फोड़ की खबरें हैं। उपद्रवी ने घुस कर मंदिर में स्थापित बजरंग बली का हाथ तोड़ दिया है। हिन्दू संगठनों ने इस घटना पर कड़ा विरोध जताया है और आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की माँग उठाई है। पुलिस ने मामले का संज्ञान ले कर जाँच शुरू कर दी। घटना 12-13 मार्च 2024 रात की है। मंदिर में तोड़फोड़ का वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

यह घटना बरेली के थानाक्षेत्र सुभाषनगर की है जो कि शहरी इलाके में आता है। यहाँ के मोहल्ला सिठौरा में भैरवनाथ मंदिर है जो पुराने समय से स्थानीय लोगों की आस्था का केंद्र है। यहाँ बजरंग बली, महादेव शिव सहित कई अन्य देवी देवताओं की मूर्तियाँ हैं। ऑपइंडिया ने बरेली के विश्व हिन्दू परिषद पदाधिकारी हिमांशु पटेल से इस घटना के बारे में बात की। हिमांशु ने हमें बताया कि 13 मार्च (बुधवार) की सुबह स्थानीय लोग यहाँ पूजा करने गए तो उन्होंने मंदिर को अस्त-व्यस्त हालत में पाया।

बजरंग बली की मूर्ति को खासतौर पर निशाना बनाया गया था। आशंका जताई जा रही है कि अज्ञात उपद्रवी गेट को फाँद कर अंदर घुसा था। इसके बाद बजरंग बली के उस हाथ को तोडा गया था जिस से उन्होंने प्रतीकत्मक पर्वत उठा रखा था। हाथ टूट कर जमीन पर गिरा पड़ा था। इस घटना की जानकारी कुछ ही देर में आसपास के निवासियों के बीच फ़ैल गई। लोग मौके पर जमा होना शुरू हो गए। कुछ ही देर बाद मंदिर में हिन्दू संगठन के पदाधिकारी भी पहुँच गए। उन्होंने इस घटना पर नाराजगी जताते हुए तोड़फोड़ करने वाले की पहचान कर के कड़ी कार्रवाई की माँग उठानी शुरू कर दी।

कुछ ही देर में मंदिर की टूटी मूर्ति की तस्वीर भी सोशल पर वायरल होने लगी। मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची। बरेली पुलिस ने नाराज लोगों को समझाया और संदिग्ध की पहचान कर के जल्द से जल्द गिरफ्तारी का भरोसा दिया। कुछ ही देर में क्षतिग्रस्त मूर्ति को हटा कर नई प्रतिमा मँगवाई गई जिसकी विधि-विधान से प्राण प्रतिष्ठा करवाई गई। फ़िलहाल अभी तक इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

‘माफ कर दीजिए, मेरी बेटी ने आसाराम पर झूठे आरोप लगाए’: रेप पीड़िता के पिता के नाम से वीडियो वायरल, शिकायत के बाद यूपी पुलिस ने जाँच शुरू की

दुष्कर्म के आरोप में जेल में बंद आसाराम पर आरोप लगाने वाली पीड़िता के पिता का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें रेप का आरोप लगाने वाली लड़की का पिता कहता नजर आ रहा है कि उसने आसाराम पर झूठा केस दायर किया था। इसके लिए उसे बेहद अफसोस है। वीडियो में वह माफी माँगता भी नजर आ रहा है। यूपी पुलिस इस वीडियो की जाँच कर रही है।

यह वीडियो सामने आने के बाद रेप पीड़िता का पिता और उसका परिवार सतर्क हो गया। उसने इसे झूठा बताते हुए शाहजहाँपुर पुलिस में शिकायत की है। अब शिकायत के आधार पर पुलिस इस वीडियो की सत्यता की जाँच शुरू कर दी है। इसके साथ ही इसे बनाने वालों की भी पहचान कर रही है।

बता दें कि आसाराम बापू पिछले 11 सालों से जेल में बंद है। वह खुद को निर्दोष बताता है। वहीं, उसके गुर्गे भी समय समय पर अफवाह फैलाने की कोशिश करते रहते हैं। पिछले वर्ष शाहजहाँपुर में शरबत वितरण के साथ आसाराम को निर्दोष बताने वाली किताबें बाँटा गया था। इसका भी वीडियो वायरल हुआ था।

वायरल वीडियो में एक व्यक्ति मीडिया के सवालों का जवाब दे रहा है, जो पीड़िता का पिता होने का दावा कर रहा है। 2:20 मिनट के इस वीडियो में व्यक्ति कहता है, “कृपया हमें माफ कर दीजिए। हमारी बेटी ने झूठे आरोप लगाए थे।” सोशल साइट एक्स पर वायरल किया गया है। पीड़िता के पिता ने इसे साजिश करार दिया है।

पीड़िता के पिता का कहना है कि आसाराम जेल में बैठकर परिवार को बदनाम कर रहा है। पिता का दावा है कि वीडियो में ना वह है और ना ही उसकी आवाज है। उसका कहना है कि आसाराम के गुर्गे पहले भी डराने-धमकाने और बदनाम करने की कोशिश कर चुके हैं। वह इससे डरने वाला नहीं है।

दरअसल, शाहजहाँपुर की एक लड़की ने आसाराम के खिलाफ साल 2013 में रेप का केस दर्ज कराया था। पीड़िता ने आरोप लगाया था कि साल 2013 में आसाराम बापू ने जोधपुर स्थित अपने आश्रम में उसका रेप किया था। उस वक्त वह नाबालिग थी और उसकी उम्र 16 साल थी। इस समय आसाराम की उम्र 83 साल है।

इस मामले में आसाराम के खिलाफ गवाही देने वाले एक गवाह की हत्या भी कर दी गई थी। साल 2018 में न्यायालय ने आसाराम को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके बाद से वह जोधपुर सेट्रल जेल में है। उसने बेल के लिए 15 से अधिक बार याचिका दायर की, लेकिन जमानत नहीं मिली।

‘हमेशा मदद करते हैं PM मोदी’: CAA लागू होने के बाद अफगानिस्तान के सिख शरणार्थी ने किया धन्यवाद, कहा – पहले वीजा के लिए दौड़ाया जाता था

भारत सरकार ने सोमवार (11 मार्च, 2024) को ‘नागरिकता संशोधन कानून’ (CAA) का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इस कानून के लागू होने के बाद अब अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश में किसी भी कारण से सताये जाने वाले अल्पसंख्यकों को भारत में नागरिकता मिलना आसान हो जाएगा। यह कानून लागू होने के बाद उन तमाम लोगों की प्रतिक्रियाएँ सामने आ रहीं हैं जो कहीं न कहीं मज़हबी हिंसा के शिकार रहे हैं। पाकिस्तान के शरणार्थी हिंदुओं ने अपने कैम्पों में दीवाली मनाई। अब अफगानिस्तान के शरणार्थी सिख भी सामने आए हैं। उन्होंने यह कानून लागू करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद किया है।

अफगानिस्तान के एक गुरुद्वारे में ग्रंथी रहे शरणार्थी गुरमान साहेब सिंह ने ANI से बात करते हुए CAA लागू होने पर ख़ुशी जाहिर की है। गुरमान सिंह ने बताया कि साल 2018 में भारत आने से पहले वो जलालाबाद में रहते थे। CAA बिल लागू होने पहले उन्होंने अफगानिस्तान से वीजा आदि न मिलने जैसी तमाम समस्याओं का जिक्र किया। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तहेदिल से शुक्रिया भी अदा किया है। गुरमान सिंह ने खुल कर बताया कि उन्होंने अफगानिस्तान में क्या मुसीबतें झेलीं हैं।

गुरमान सिंह ने कहा, “हम इसी कोशिश में हैं कि हमारा हक हमको मिल जाए। हमको नागरिकता मिल जाए। 30-35 सालों से हमारी यही जद्दोजहद थी। मोदी जी ने CAA का एनाउंसमेंट 2-3 साल पहले भी किया था। वो तब लागू नहीं हुआ लेकिन अभी ये लागू हुआ है। हम बहुत खुश हैं। हम मोदी जी को बहुत ज्यादा धन्यवाद करते हैं। हमारी प्रॉब्लम थी वीजा लेने की।” इसके बाद गुरमान सिंह ने बताया कि उन्हें वीजा लेते हुए क्या दिक्क्तें झेलनी पड़ती थीं।

गुरनाम सिंह ने आगे कहा, “हम वीजा लेने जाते थे FRO में हमसे कहा कहा जाता था कि मकान मालिक की ID ले कर आओ। पड़ोसी का साइन ले कर आओ। ऐसे बंदे का पासपोर्ट ले कर आओ जो इंडियन हो। आज कल तो भाई अपने भाई की गारंटी नहीं करता तो हमारे पड़ोसी हमारी गारंटी क्या लेते। हमारी ऐसी बहुत सी मुश्किलें थीं। बच्चों की पढ़ाई, घर के किराए आदि की क्योंकि हम जगह ले नहीं सकते थे। जब से हमें पता चला है कि ये (CAA) कानून लागू हुआ है तब से हम बहुत खुश हैं। हम मोदी जी और भारत सरकार का धन्यवाद करते हैं। अफगानियों के साथ हमेशा उन्होंने अच्छा ही किया है। उन्होंने हमारी बहुत मदद की है।”

बताते चलें कि भले ही CAA लागू होने पर पाकिस्तानी, बांग्लादेशी और अफगानी शरणार्थी ख़ुशी मना रहे हैं लेकिन विपक्षी INDI गठबंधन इसका लगातार विरोध कर रहे है। अरविन्द केजरीवाल और अखिलेश यादव ने खुल कर इसे मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास करार दिया है।