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वापस नहीं होगा CAA, मुख्यमंत्री नहीं कर सकते इनकार: ममता-स्टालिन जैसों को अमित शाह की दो टूक, ‘तुष्टिकरण’ की राजनीति पर विपक्ष को घेरा

पूरे देश में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर अधिसूचना जारी करने के बाद केंद्रीय गृहमंत्री ने समाचार एजेंसी पत्रकार स्मिता प्रकाश को इंटरव्यू दिया। इस इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि किसी भी कीमत पर CAA सरकार वापस नहीं लेगी। ये बिलकुल देश का, देश की संप्रभुता का मामला है।

दरअसल, स्मिता प्रकाश के शो में अमित शाह से सवाल किया गया था कि क्या जिस तरह से कृषि कानून वापस लिए गए उसी प्रकार अगर लोग विरोध करें, अंतरराष्ट्रीय प्रेस पर बात उठे, तो क्या संभावना है कि ये कानून भी वापस लिया जाए?

इस पर अमित शाह ने कहा कि ऐसा बिलकुल नहीं होने वाला है। उन्होंने कहा- “CAA का कानून कभी वापस नहीं लिया जाएगा। भारत की नागरिकता सुनिश्चित करना ये भारत का विषय है, भारत की संप्रभुता का विषय है इसके साथ हम कोई कॉम्प्रॉमाइज नहीं कर सकते।”

अमित शाह ने कानून लागू करने के समय को लेकर कहा कि आज विपक्षी पार्टियाँ जिसमें ओवैसी, राहुल गाँधी, अरविंद केजरीवाल सब शामिल होकर झूठ की राजनीति कर रहे हैं। वह बोले कि ये कानून कब लागू हुआ इसका सवाल ही नहीं है। भाजपा ने 2019 के अपने मेनिफेस्टो में कहा था कि वो पड़ोसी देश के शर्णार्थियों को नागरिकता देंगे। 2019 में इसे संसद से पारित किया गया फिर ये कोरोना के कारण लेट हुआ। अब विपक्ष चूँकि तुष्टिकरण की राजनीति करना चाहता है इसलिए ऐसा कर रहा है।

उन्होंने विपक्ष के उन नेताओं (सीएम ममता बनर्जी, सीएम स्टालिन, सीएम पिनराई विजयन) को सुनाते हुए कहा कि इस कानून को लागू करने से कोई राज्य (या उसके मुख्यमंत्री) नहीं मना कर सकते। कानून बनाने का काम संसद का है। ये केंद्र का विषय है। राज्य का इसे बनाने में या लागू करने में… कोई रोल नहीं होता।

अमित शाह ने कहा, “पिछले 4 साल में 41 बार कह चुका था कि चुनाव से पहले सीएए पूरे देश में लागू होगा… विपक्ष के पास कोई और काम नहीं है। उनका इतिहास ये है कि वो जो बोलते हैं वो करते नहीं है। मोदी जी की हिस्ट्री है कि जो पीएम मोदी ने कहा वो पत्थर की लकीर है। मोदी की हर गारंटी पूरी हो रही है… विपक्ष ने तो यहाँ तक कहा था कि एयरस्ट्राइक, सर्जिकल स्ट्राइक में हमारा कोई राजनीतिक फायदा है। तो क्या हमें आतंक के खिलाफ कदम नहीं उठाने चाहिए। इन्होंने कहा कि आर्टिकल 370 खत्म करने से फायदा मिलेगा। हम तो 1950 से कह रहे थे कि हम इसे हटाएँगे।”

उन्होंने समझाया कि इस कानून से अल्पसंख्यकों को डरने की जरूरत नहीं है क्योंकि सीएए में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि किसी की नागरिकता को वो छीने। इसमें सिर्फ हिंदुओं, बौद्धों, जैनों, सिखों और ईसाइयों और पारसियों को नागरिकता देने की बात है। 1947 में कॉन्ग्रेस नेताओं ने कहा था कि विभाजन के समय जिन लोगों को जाना पड़ा वो कभी भी भारत आ सकते हैं लेकिन उन्होंने अपना वादा नहीं निभाया। विभाजन के वक्त 23 फीसद हिंदू और सिख वहाँ थे। अब सिर्फ 3.7 फीसद है। बांग्लादेश में हिंदुओं की संख्या 22% थी अब सिर्फ 10% रह गई है।

गृहमंत्री ने विपक्षी नेताओं के आपा खोने पर बात की, बंगाल में सरकार बनाने पर बात की। साथ ही ये भी समझाया कि सीएए और एनआरसी का एक दूसरे से लेना देना नहीं है सिर्फ दुष्प्रचार के कारण इसे एक साथ देखा जा रहा है। उन्होंने विपक्षी नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि शर्णार्थियों और घुसपैठियों में फर्क होता है ये विपक्षी नेताओं को समझना होगा। उन्होंने सीएए को संवैधानिक रूप से वैध कानून बताया।

साथ ही कहा कि विपक्ष को केवल तुष्टिकरण की राजनीति करनी है इसलिए वो ये सब कर रहे हैं। रही बात मुस्लिमों की तो इस पर भी अमित शाह ने समझाया कि पड़ोसी मुल्क से आए मुस्लिम भी नागरिकता के लिए अप्लाई कर सकते हैं। कानून में उनका जिक्र इसलिए नहीं है क्योंकि ये प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को शरण देने का मसला है और मुस्लिमों के नाम पर पहले से पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान जैसे देश बने हैं।

ED ने की संदेशखाली में छापेमारी, शाहजहाँ शेख की कब्जाई जमीनों को लेकर कार्रवाई: अभी CBI की गिरफ्त में है TMC का पूर्व नेता

केन्द्रीय एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पूर्व TMC नेता शेख शाहजहाँ के संदेशखाली और धामखाली स्थित ठिकानों पर छापेमारी की है। यह छापेमारी आज (14 मार्च, 2024) की सुबह से चालू है। ED की टीम यहाँ केन्द्रीय सुरक्षा बलों के साथ पहुँची है।

जानकारी के अनुसार, ED ने शाहजहाँ शेख के 4 ठिकानों पर छापेमारी है, इसमें एक ईंट भट्ठा भी शामिल है। ED की टीम इस बार पूरे दल बल के साथ पहुँची है। उसके साथ बड़ी संख्या में CRPF के जवान हैं, इनमें महिला जवान भी शामिल हैं। उसके सभी ठिकानों की तलाशी ली जा रही है। उसके घर-दफ्तर और उससे जुड़े अन्य ठिकानों में तलाशी चल रही है।

शाहजहाँ शेख के ठिकानों पर ED की यह छापेमारी उसके खिलाफ दर्ज किए गए जमीन कब्जे के मामले में की जा रही है। गौरतलब है कि शाहजहाँ के खिलाफ संदेशखाली की महिलाओं ने यौन उत्पीडन और जमीन कब्जाने के आरोप लगाए हैं। शाहजहाँ पर आरोप है कि उसने आम लोगों की जमीन कब्जा करके मछली का काम किया और लोगों की जमीनें भी तबाह कर दी।

उसने जिन लोगों की जमीन हथियाई उन्हें कोई पैसा नहीं मिला। कुछ लोगों की जमीन को लीज पर लिया गया लेकिन उन्हें कोई भुगतान नहीं हुआ। इसके अलावा लोगों को मजदूरी भी नहीं दी गई। जिन लोगों ने जमीनों पर कब्जे के विरुद्ध आवाज उठाई, उन्हें मारा पीटा गया और धमकियाँ दी गईं। पुलिस और प्रशासन भी इस मामले में चुप बैठा रहा।

गौरतलब है कि ED की टीम पर शाहजहाँ शेख हमला भी करवा चुका है। सबसे पहले जनवरी, 2024 में उसके घर पर ED छापा मारने गई थी तब उसने यहाँ स्थानीय लोगों को भड़का कर और अपने गुंडों के जरिए ED टीम पर हमला करवा दिया था। इस हमले में अधिकारियों को चोटें आई थीं और साथ ही उनकी गाड़ियाँ क्षतिग्रस्त कर दी गईं थी।

शेख शाहजहाँ के खिलाफ यौन शोषण, जमीन कब्जाने और पीड़ित करने के आरोप सामने आने के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया था। उसकी गिरफ्तारी बंगाल पुलिस ने की थी लेकिन फिर उसे कोर्ट के आदेश से सीबीआई को सौंप दिया गया था। वह वर्तमान में सीबीआई की ही गिरफ्त में है।

उसको राशन घोटाला मामले में ED भी गिरफ्तार कर सकती है। इस गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने कलकता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हालाँकि, उसे यहाँ से कोई राहत नहीं मिली थी। वह राशन घोटाले में भी आरोपित है, उसका काला चिटठा इसी घोटाले में माध्यम से सामने आया था।

रमजान में बाजार में खा रहे थे खाना, पुलिस ने रोजा नहीं रखने पर 11 को किया गिरफ्तार: गैर मुस्लिमों से कहा- खाना बनाते दिखे तो मिलेगी सजा

नाइजीरिया में रमजान के महीने में रोजा न रखने वालों को पुलिस गिरफ्तार कर रही है। मामला वहाँ के उत्तरी कानो का है। वहाँ 11 मुस्लिमों को रमजान में रोजा रखने के समय पर मार्केट में खाना खाता देखे जाने पर यह कार्रवाई हुई।

जानकारी के मुताबिक कानो एक मुस्लिम बहुसंख्यक आबादी वाला राज्य है जहाँ इस्लामी कानून शरिया के हिसाब के चीजें संचालित होती हैं। यहाँ की पुलिस को हिस्बाह के नाम से जाना जाता है।

ये पुलिस हर साल रमजान के दौरान होटल, रेस्टोरेंट और मार्केट वाली जगहों पर तलाशी लेती है और जो कोई उन्हें रोजे की जगह ऐसे खाता-पीता मिलता है उन्हें गिरफ्तार कर लेती है।

12 मार्च 2024 को भी ऐसा ही हुआ। मार्केट प्लेस में जाँच करने निकली पुलिस को ऐसे 11 लोग मिले, जिसके बाद फौरन उन्होंने उनको गिरफ्तार कर लिया। बाद में इन लोगों को एक कसम दिलवाई गई कि वह दोबारा जानबूझकर अपना रोजा नहीं छोड़ेंगे। ये कसम दिलाकर उन्हें छोड़ दिया गया।

इन 11 लोगों में 1 मूँगफली बेचने वाली महिला भी शामिल थी। पुलिस की नजर जब उसपर पड़ी तब वो अपने ही सामान से निकालकर कुछ-कुछ खा रही थी। पुलिस ने उसे भी गिफ्तार करके रोजा न तोड़ने की कसम दिलाई।

बता दें कि कानो की इस्लामिक पुलिस हिस्बाह ने साफ कहा है कि उनके यहाँ पर रमजान के समय ऐसा तलाशी अभियान जारी रहेगा। केवल गैर मुस्लिमों को इसमें छूट दी जाएगी कि वो रोजे के समय में खा पी सकते हैं। उन्हें सजा तब मिलेगी जब पता चलेगा कि वो रोजाधारी मुसलमानों के रोजे के समय कुछ पका कर बेच रहे हैं जिससे मुसलमानों को लालच आए।

मालूम हो कि इस बार रमजाम 11 मार्च से 9 अप्रैल के बीच में हैं। इस दौरान नाइजीरिया की इस्लामिक पुलिस हर सार्वजनिक स्थानों पर सक्रिय होकर रोजा न रखने वालों को पकड़ने के लिए घूम रही है। जानकारी के मुताबिक रमजान के महीने में मुस्लिमों के लिए रोजे के वक्त, खाना-पीना, सेक्स करना, धूम्रपान करना सब वर्जित होता है।

‘मैं मंत्री नहीं होता तो उसको (PM मोदी) टुकड़ों में फाड़ देता’: तमिलनाडु के मंत्री ने भरी सभा में प्रधानमंत्री को दी धमकी, Video वायरल

तमिलनाडु की DMK सरकार में मंत्री टी एम अनबरसन का एक वीडियो वायरल हो रहा है जहाँ वह पीएम मोदी को धमकाने वाला एक विवादित बयान दे रहे हैं। यह बयान एक भरी सभा में मंच दिया गया। DMK के मंत्री ने पीएम मोदी के टुकड़े करने की धमकी दी है।

वायरल हो रहे वीडियो में टीएम अनबरसन कहते हुए दिखते हैं, “मैंने अभी शांति रखी हुई है और मृदु बात कर रहा हूँ क्योंकि मैं एक मंत्री हूँ। मैं मंत्री ना होता तो उसको टुकड़ों में फाड़ देता।” इस बयान के दौरान और भी लोग बैठे हुए हैं और ताली बजाते हैं।

टीएम अनबरसन तमिलनाडु की एमके स्टालिन की अगुवाई वाली DMK-कॉन्ग्रेस गठबंधन सरकार में ग्रामीण उद्योग, कुटीर उद्योग, लघु उद्योग और झुग्गी उन्मूलन बोर्ड के मंत्री हैं। अनबरसन का बयान पिछले सप्ताह का बताया जा रहा है। इससे एक सप्ताह पहले ही तिरूप्पुर में पीएम मोदी ने रोडशो किया था।

अनबरसन ने इसी बयान में कहा, “हमारे कई प्रधानमंत्री हुए, कोई ऐसे नहीं बोलता था। मोदी हमें मिटाने की बात करता है, लेकिन मैं एक बात याद दिला दूँ कि DMK कोई सामान्य संगठन नहीं है। यह कई बलिदानों और बहुत खून बहने के बाद बना है।”

इसके बाद उसने कहा, “जिन लोगों ने DMK को खत्म करने की बात की, उनका ही विनाश हो गया। यह संगठन बना रहेगा, ये बात दिमाग में रखना। मैंने उससे (पीएम मोदी) अलग तरीके से निपटता। अभी मैं चुप हूँ और मृदु तरीके से बोल रहा हूँ क्योंकि मैं एक मंत्री हूँ। अगर मैं मंत्री ना होता, तो उसके साथ दूसरा ही तरीका अपनाता।”

भाजपा ने DMK पर किया हमला

अनबरसन के बयान के बाद भाजपा ने DMK की कड़ी आलोचना की। भाजपा ने INDI गठबंधन को निशाना बनाया है। DMK, INDI गठबंधन का हिस्सा है। अनबरसन के बयान को भाजपा नेताओं ने ट्विटर पर इस वीडियो को प्रसारित करते हुए खूब हमले किए हैं।

भाजपा के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने एक्स पर लिखा कि INDI गठबंधन का एजेंडा इससे ज्यादा स्पष्ट नहीं हो सकता। उनका लक्ष्य सनातन धर्म और इसको मानने वालों का विनाश करना है। भाजपा के राष्ट्रीय सचिव सत्य कुमार यादव ने कहा, “INDI गठबंधन का एक बार और छिछला स्तर। INDI गठबंधन लोकसभा परिणाम जानता है इसीलिए पीएम मोदी को गालियाँ दे रहे हैं।”

तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष के अन्नामलाई ने ट्विटर पर लिखा, “तमिलनाडु में सत्ता विरोधी लहर बढ़ने से आई हताशा के कारण DMK के मंत्री हमारे माननीय प्रधानमंत्री मोदी को धमकियाँ तक दे रहे हैं। अपनी विभाजन वाली राजनीति, भ्रष्ट आचरण, अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करों के साथ कनेक्शन, गुंडागर्दी और कुशासन जैसे कारणों से राजनीतिक क्षेत्र से समाप्त हो जाएगी।”

टीएम अनबरसन का यह बयान अब सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है और लोग DMK के रवैये की आलोचना कर रहे हैं। गौरतलब है कि इससे पहले DMK मंत्री और CM स्टालिन के बेटे उदयानिधि सनातन को मिटाने की बात कर चुके हैं।

गेट फाँद कर घुसा हमलावर, तोड़ डाली बजरंग बली की मूर्ति: बरेली के हिन्दू मंदिर में तोड़फोड़ के बाद हिन्दू संगठनों में आक्रोश

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में एक हिन्दू मंदिर के अंदर तोड़फोड़ की खबरें हैं। उपद्रवी ने घुस कर मंदिर में स्थापित बजरंग बली का हाथ तोड़ दिया है। हिन्दू संगठनों ने इस घटना पर कड़ा विरोध जताया है और आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की माँग उठाई है। पुलिस ने मामले का संज्ञान ले कर जाँच शुरू कर दी। घटना 12-13 मार्च 2024 रात की है। मंदिर में तोड़फोड़ का वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

यह घटना बरेली के थानाक्षेत्र सुभाषनगर की है जो कि शहरी इलाके में आता है। यहाँ के मोहल्ला सिठौरा में भैरवनाथ मंदिर है जो पुराने समय से स्थानीय लोगों की आस्था का केंद्र है। यहाँ बजरंग बली, महादेव शिव सहित कई अन्य देवी देवताओं की मूर्तियाँ हैं। ऑपइंडिया ने बरेली के विश्व हिन्दू परिषद पदाधिकारी हिमांशु पटेल से इस घटना के बारे में बात की। हिमांशु ने हमें बताया कि 13 मार्च (बुधवार) की सुबह स्थानीय लोग यहाँ पूजा करने गए तो उन्होंने मंदिर को अस्त-व्यस्त हालत में पाया।

बजरंग बली की मूर्ति को खासतौर पर निशाना बनाया गया था। आशंका जताई जा रही है कि अज्ञात उपद्रवी गेट को फाँद कर अंदर घुसा था। इसके बाद बजरंग बली के उस हाथ को तोडा गया था जिस से उन्होंने प्रतीकत्मक पर्वत उठा रखा था। हाथ टूट कर जमीन पर गिरा पड़ा था। इस घटना की जानकारी कुछ ही देर में आसपास के निवासियों के बीच फ़ैल गई। लोग मौके पर जमा होना शुरू हो गए। कुछ ही देर बाद मंदिर में हिन्दू संगठन के पदाधिकारी भी पहुँच गए। उन्होंने इस घटना पर नाराजगी जताते हुए तोड़फोड़ करने वाले की पहचान कर के कड़ी कार्रवाई की माँग उठानी शुरू कर दी।

कुछ ही देर में मंदिर की टूटी मूर्ति की तस्वीर भी सोशल पर वायरल होने लगी। मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची। बरेली पुलिस ने नाराज लोगों को समझाया और संदिग्ध की पहचान कर के जल्द से जल्द गिरफ्तारी का भरोसा दिया। कुछ ही देर में क्षतिग्रस्त मूर्ति को हटा कर नई प्रतिमा मँगवाई गई जिसकी विधि-विधान से प्राण प्रतिष्ठा करवाई गई। फ़िलहाल अभी तक इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

‘माफ कर दीजिए, मेरी बेटी ने आसाराम पर झूठे आरोप लगाए’: रेप पीड़िता के पिता के नाम से वीडियो वायरल, शिकायत के बाद यूपी पुलिस ने जाँच शुरू की

दुष्कर्म के आरोप में जेल में बंद आसाराम पर आरोप लगाने वाली पीड़िता के पिता का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें रेप का आरोप लगाने वाली लड़की का पिता कहता नजर आ रहा है कि उसने आसाराम पर झूठा केस दायर किया था। इसके लिए उसे बेहद अफसोस है। वीडियो में वह माफी माँगता भी नजर आ रहा है। यूपी पुलिस इस वीडियो की जाँच कर रही है।

यह वीडियो सामने आने के बाद रेप पीड़िता का पिता और उसका परिवार सतर्क हो गया। उसने इसे झूठा बताते हुए शाहजहाँपुर पुलिस में शिकायत की है। अब शिकायत के आधार पर पुलिस इस वीडियो की सत्यता की जाँच शुरू कर दी है। इसके साथ ही इसे बनाने वालों की भी पहचान कर रही है।

बता दें कि आसाराम बापू पिछले 11 सालों से जेल में बंद है। वह खुद को निर्दोष बताता है। वहीं, उसके गुर्गे भी समय समय पर अफवाह फैलाने की कोशिश करते रहते हैं। पिछले वर्ष शाहजहाँपुर में शरबत वितरण के साथ आसाराम को निर्दोष बताने वाली किताबें बाँटा गया था। इसका भी वीडियो वायरल हुआ था।

वायरल वीडियो में एक व्यक्ति मीडिया के सवालों का जवाब दे रहा है, जो पीड़िता का पिता होने का दावा कर रहा है। 2:20 मिनट के इस वीडियो में व्यक्ति कहता है, “कृपया हमें माफ कर दीजिए। हमारी बेटी ने झूठे आरोप लगाए थे।” सोशल साइट एक्स पर वायरल किया गया है। पीड़िता के पिता ने इसे साजिश करार दिया है।

पीड़िता के पिता का कहना है कि आसाराम जेल में बैठकर परिवार को बदनाम कर रहा है। पिता का दावा है कि वीडियो में ना वह है और ना ही उसकी आवाज है। उसका कहना है कि आसाराम के गुर्गे पहले भी डराने-धमकाने और बदनाम करने की कोशिश कर चुके हैं। वह इससे डरने वाला नहीं है।

दरअसल, शाहजहाँपुर की एक लड़की ने आसाराम के खिलाफ साल 2013 में रेप का केस दर्ज कराया था। पीड़िता ने आरोप लगाया था कि साल 2013 में आसाराम बापू ने जोधपुर स्थित अपने आश्रम में उसका रेप किया था। उस वक्त वह नाबालिग थी और उसकी उम्र 16 साल थी। इस समय आसाराम की उम्र 83 साल है।

इस मामले में आसाराम के खिलाफ गवाही देने वाले एक गवाह की हत्या भी कर दी गई थी। साल 2018 में न्यायालय ने आसाराम को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके बाद से वह जोधपुर सेट्रल जेल में है। उसने बेल के लिए 15 से अधिक बार याचिका दायर की, लेकिन जमानत नहीं मिली।

‘हमेशा मदद करते हैं PM मोदी’: CAA लागू होने के बाद अफगानिस्तान के सिख शरणार्थी ने किया धन्यवाद, कहा – पहले वीजा के लिए दौड़ाया जाता था

भारत सरकार ने सोमवार (11 मार्च, 2024) को ‘नागरिकता संशोधन कानून’ (CAA) का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इस कानून के लागू होने के बाद अब अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश में किसी भी कारण से सताये जाने वाले अल्पसंख्यकों को भारत में नागरिकता मिलना आसान हो जाएगा। यह कानून लागू होने के बाद उन तमाम लोगों की प्रतिक्रियाएँ सामने आ रहीं हैं जो कहीं न कहीं मज़हबी हिंसा के शिकार रहे हैं। पाकिस्तान के शरणार्थी हिंदुओं ने अपने कैम्पों में दीवाली मनाई। अब अफगानिस्तान के शरणार्थी सिख भी सामने आए हैं। उन्होंने यह कानून लागू करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद किया है।

अफगानिस्तान के एक गुरुद्वारे में ग्रंथी रहे शरणार्थी गुरमान साहेब सिंह ने ANI से बात करते हुए CAA लागू होने पर ख़ुशी जाहिर की है। गुरमान सिंह ने बताया कि साल 2018 में भारत आने से पहले वो जलालाबाद में रहते थे। CAA बिल लागू होने पहले उन्होंने अफगानिस्तान से वीजा आदि न मिलने जैसी तमाम समस्याओं का जिक्र किया। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तहेदिल से शुक्रिया भी अदा किया है। गुरमान सिंह ने खुल कर बताया कि उन्होंने अफगानिस्तान में क्या मुसीबतें झेलीं हैं।

गुरमान सिंह ने कहा, “हम इसी कोशिश में हैं कि हमारा हक हमको मिल जाए। हमको नागरिकता मिल जाए। 30-35 सालों से हमारी यही जद्दोजहद थी। मोदी जी ने CAA का एनाउंसमेंट 2-3 साल पहले भी किया था। वो तब लागू नहीं हुआ लेकिन अभी ये लागू हुआ है। हम बहुत खुश हैं। हम मोदी जी को बहुत ज्यादा धन्यवाद करते हैं। हमारी प्रॉब्लम थी वीजा लेने की।” इसके बाद गुरमान सिंह ने बताया कि उन्हें वीजा लेते हुए क्या दिक्क्तें झेलनी पड़ती थीं।

गुरनाम सिंह ने आगे कहा, “हम वीजा लेने जाते थे FRO में हमसे कहा कहा जाता था कि मकान मालिक की ID ले कर आओ। पड़ोसी का साइन ले कर आओ। ऐसे बंदे का पासपोर्ट ले कर आओ जो इंडियन हो। आज कल तो भाई अपने भाई की गारंटी नहीं करता तो हमारे पड़ोसी हमारी गारंटी क्या लेते। हमारी ऐसी बहुत सी मुश्किलें थीं। बच्चों की पढ़ाई, घर के किराए आदि की क्योंकि हम जगह ले नहीं सकते थे। जब से हमें पता चला है कि ये (CAA) कानून लागू हुआ है तब से हम बहुत खुश हैं। हम मोदी जी और भारत सरकार का धन्यवाद करते हैं। अफगानियों के साथ हमेशा उन्होंने अच्छा ही किया है। उन्होंने हमारी बहुत मदद की है।”

बताते चलें कि भले ही CAA लागू होने पर पाकिस्तानी, बांग्लादेशी और अफगानी शरणार्थी ख़ुशी मना रहे हैं लेकिन विपक्षी INDI गठबंधन इसका लगातार विरोध कर रहे है। अरविन्द केजरीवाल और अखिलेश यादव ने खुल कर इसे मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास करार दिया है।

BJP ने लोकसभा चुनाव 2024 के लिए 72 नामों वाली दूसरी लिस्ट जारी की: गडकरी, अनुराग ठाकुर, तेजस्वी सूर्या, खट्टर सहित कई नाम; 10 महिला उम्मीदवार

भाजपा ने बुधवार (13 मार्च 2024) को लोकसभा चुनाव 2024 के लिए 72 नामों वाले उम्मीदवारों की अपनी दूसरी लिस्ट जारी की। इस लिस्ट में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, अनुराग सिंह ठाकुर, मनोहर लाल खट्टर, पीयूष गोयल जैसे नाम शामिल हैं। इससे पहले भाजपा ने 2 मार्च को 195 प्रत्याशियों वाली पहली सूची जारी की थी। इस तरह भाजपा ने 267 उम्मीदवारों की घोषणा कर दी।

भाजपा ने अपनी दूसरी सूची में दिल्ली की 2, हरियाणा की 6, उत्तराखंड 2, हिमाचल प्रदेश की 2, मध्य प्रदेश की 5, गुजरात की 7, कर्नाटक की 20, महाराष्ट्र की 20, तेलंगाना की 6, त्रिपुरा की 1 और दादर एवं नगर हवेली की 1 सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा की है। भाजपा ने पहली सूची में 16 राज्यों और 2 केंद्रशासित प्रदेशों के लिए उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की थी।

दूसरी सूची में दिए गए नामों के अनुसार, नितिन गडकरी नागपुर से, अनुराग सिंह ठाकुर हमीरपुर से, पीयूष गोयल मुंबई नॉर्थ से और मनोहर लाल खट्टर करनाल से चुनाव लड़ेंगे। इसके अलावा, मैसूर से राजघराने के यदुवीर कृष्णदत्त चामराज वाडियार, बेंगलुरु साउथ से तेजस्वी सूर्या, बीड से पंकजा मुंडे को मैदान में उतारा गया है।

वहीं, उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को हरिद्वार से और भाजपा मीडिया सेल के प्रमुख अनिल बलूनी को गढ़वाल से मैदान में उतारा गया है। वहीं, दिल्ली के कुल सात सीटों में से पूर्व दिल्ली से हर्ष मल्होत्रा और उत्तर पश्चिमी दिल्ली से अनुसूचित जाति के योगेश चंदोलिया को मैदान में उतारा गया है। पाँच सीटों की पहले घोषणा हो चुकी है।

भाजपा की दूसरी लिस्ट में 10 महिलाओं को उम्मीदवार बनाया गया है। वहीं, अनुसूचित जाति के 5 और अनुसूचित जनजाति के सात उम्मीदवारों को जगह दी गई है। भाजपा की पहली सूची में 28 महिला उम्मीदवार थीं। इसके अलावा, उस सूची के एक चौथाई यानी 47 उम्मीदवारों की उम्र 50 साल से कम है। बीजेपी की सूची में एससी वर्ग के 27 उम्मीदवार हैं और एसटी वर्ग के 18 लोग शामिल थे।

बीजेपी की लिस्ट में राज्यवार देखें तो उत्तर प्रदेश से 51 उम्मीदवारों के नाम की घोषणा की गई थी। पश्चिम बंगाल से 20 उम्मीदवारों के नाम घोषित किए गए थे। इसके बाद मध्य प्रदेश से 24, गुजरात से 15, राजस्थान से 15, केरल से 12, असम के 14 में से 11, झारखंड से 11, छत्तीसगढ़ से 11, तेलंगाना से 9, दिल्ली से 5, जम्मू-कश्मीर से 2, उत्तराखंड से 3, अरुणाचल प्रदेश से 2, गोवा, त्रिपुरा, अंडमान निकोबार और दमन-दीव से एक-एक उम्मीदवार के नाम की घोषणा की गई थी।

बड़े प्रत्याशियों की बात करें वाराणसी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लखनऊ से राजनाथ सिंह, गुजरात के गाँधीनगर से अमित शाह, मध्य प्रदेश की विदिशा सीट से पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, दिल्ली की नॉर्थ-ईस्ट सीट से मनोज तिवारी, गोरखपुर से रवि किशन, आजमगढ़ से निरहुआ, उन्नाव से साक्षी महाराज के नाम की घोषणा की गई थी। दिल्ली की पाँच सीटों में से चार पर नई दिल्ली से बांसुरी स्वराज, पश्चिमी दिल्ली से कमलजीत सहरावत, दक्षिणी दिल्ली से रामवीर सिंह बिधूड़ी और चांदनी चौक से प्रवीण खंडेलवाल को उतारा गया है।

मस्जिद में अरबी पढ़ने जाता था मासूम, कमरे में ले जा कर किया था कुकर्म: राजस्थान में मौलवी नसीम को उम्रकैद की सज़ा, जज ने कविता पढ़ कर प्रकट किए भाव

राजस्थान के कोटा में अदालत ने मस्जिद में नाबालिग बच्चे से कुकर्म के मामले में एक मौलवी को उम्रकैद की सजा दी है। 23 वर्षीय मौलवी का नाम नसीम खान है जो मूलतः हरियाणा के पलवल का निवासी है। अदालत ने नसीम पर 21 हजार रुपए का जुर्माना भी ठोंका है। सजा के बाद जज ने पीड़ित बच्चे के लिए एक कविता भी पढ़ी। इस सजा का एलान बुधवार (13 मार्च, 2024) को हुआ है।

दैनिक भास्कर के मुताबिक यह मामला 22 अक्टूबर 2023 का है। यहाँ कक्षा 5 में पढ़ने वाले 10 साल के मासूम बच्चे के चाचा ने तब थाना बूढ़ादीत पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत में उन्होंने बताया था कि पीड़ित 3 बजे दीनी तालीम लेने और अरबी पढ़ने मस्जिद में गया था। इस मस्जिद में हरियाणा के पलवल निवासी नसीम खान मौलवी के तौर पर काम करता था। मौलवी बच्चे को अकेला पा कर एकांत वाले कमरे में ले गया। यहाँ उसने बच्चे के साथ कुकर्म किया। जब बच्चा रोने लगा तो नसीम ने कहीं बताने पर जान से मार डालने की धमकी दे कर उसे चुप करवाया।

हालाँकि, बच्चे ने घर आ कर पूरी बात बता दी थी। पुलिस ने तब आरोपित मौलवी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट और IPC की धारा 377 व 506 आदि के तहत कार्रवाई की थी। आरोपित मौलवी को गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया गया था। कोर्ट में इस मामले की सुनवाई लगभग 5 महीने तक चली। सरकारी वकील ललित कुमार शर्मा ने मीडिया से बताया कि पुलिस ने महज 14 दिनों के अंदर जाँच पूरी कर के कोर्ट में चालान पेश कर दिया था। 24 दस्तावेजों वाले इस चालान में 11 गवाहों के बयान भी दर्ज थे।

बचाव पक्ष के वकील ने अपने मुअक्किल को बेगुनाह बताया। हालाँकि अभियोजन पक्ष द्वारा पेश सबूतों को अदालत ने पुख्ता माना। अभियोजन पक्ष ने नसीम को फाँसी देने की माँग रखी थी। कोटा जिले के पॉस्को कोर्ट नंबर 3 में न्यायाधीश दीपक दुबे ने अंत में आरोपित मौलवी को अंतिम साँस तक जेल में रहने और 21 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। सजा पाने के बाद जेल जाते हुए मौलवी नसीम अपने मुँह को छिपाता रहा।

वहीं सजा देने के बाद न्यायाधीश ने इबादतगाह में घिनौना कृत्य करने वाले मौलवी और पीड़ित बच्चे पर आधारित एक कविता भी टिप्पणी के तौर पर कही। अपनी कविता में न्यायाधीश दीपक दुबे ने कहा, “मेरे नन्हे-मुन्ने मासूम फरिश्ते। तुम निर्दोष व निष्पाप हो। तुम्हारी मुस्कान ही सारा जहान है। तुम्हारी सूरत में अल्लाह का नूर बसता है। तुम मन-मस्तिष्क से कटु स्मृतियों को मिटा दो। तुम्हारा गुनहगार हमने आजीवन सलाखों के पीछे भेज दिया है। अब तुम हँस-खेल कर इस जीवन को यापन करो। तुम्हारी आँखों के आँसू बहता हुआ घर नहीं आएगा”।

‘कहाँ है सबूत’: जिस 5-Eyes का सदस्य है कनाडा, उसमें शामिल देशों ने ही ट्रुडो पर जताया संदेह, भारत पर लगा रहा था निज्जर की हत्या का आरोप

न्यूजीलैंड के उप प्रधानमंत्री विंस्टन पीटर्स ने खालिस्तान अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को लेकर कनाडा के दावे पर संदेह जताया है। इस तरह कनाडा को अपने साथियों से ही झटका मिला है। दरअसल, कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने निज्जर की हत्या में भारत का हाथ होने की बात कही थी। हालाँकि, भारत ने इससे इनकार किया था। इसको लेकर दोनों देशों के संबंधों में खटास आ गई थी।

बता दें कि न्यूज़ीलैंड फ़ाइव-आइज़ ख़ुफ़िया गठबंधन के सदस्यों में से एक है। इस गठबंधन में अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। विंस्टन पीटर्स के इस बयान से समझा जाता है कि कनाडा ने खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर हत्याकांड से जुड़ी खुफिया जानकारी गठबंधन के अपने सहयोगियों के साथ साझा की है।

विंस्टन पीटर्स इस समय भारत की आधिकारिक यात्रा पर हैं। इस दौरान इंडियन एक्सप्रेस ने उनसे बातचीत की। पीटर्स से पूछा गया कि क्या न्यूजीलैंड ने भारत को अपनी स्थिति से अवगत कराया है। इस पर उन्होंने कहा कि वह इस मामले को हैंडल करने वालों में शामिल नहीं थे, क्योंकि इसे पिछली सरकार मुख्य रूप से मैनेज कर रही थी।

पीटर्स ने कहा, “मैं यहाँ नहीं था। इसे पिछली सरकार ने हैंडल किया था। कभी-कभी जब आप फ़ाइव-आईज़ की जानकारी सुन रहे होते हैं तो आप इसे बस सुन रहे होते हैं और कुछ नहीं कह रहे होते हैं। आप इसका मूल्य या गुणवत्ता नहीं जानते, लेकिन आप इसे पाकर प्रसन्न हैं। आप इसकी अहमियत नहीं जानते, लेकिन बहुत-बहुत महत्वपूर्ण जानकारी जो मायने रखती है।”

उन्होंने कहा, “एक प्रशिक्षित वकील के रूप में मैं ठीक से देखता हूँ कि मामला कहाँ है? सबूत कहाँ है? अभी, जाँच के परिणाम कहाँ हैं? खैर, अभी कुछ नहीं है।” बता दें कि फाइव-आइज़ के किसी पार्टनर द्वारा खालिस्तानी आतंकी निज्जर की हत्या के मामले में कनाडा के दावों पर खुले तौर पर सवाल उठाने का पहला उदाहरण है।

दरअसल, निज्जर भारत द्वारा नामित एक आतंकी था। उसकी हत्या 18 जून 2023 की शाम को ब्रिटिश कोलंबिया के सरे शहर में स्थित एक गुरुद्वारे से बाहर गोली मारकर कर दी गई थी। उसकी मौत के बाद भारत और कनाडा के बीच राजनयिक विवाद पैदा हो गया था। यहाँ तक कि भारत ने कनाडा के कई राजनयिकों को दिल्ली से निकाल दिया था।

पिछले साल सितंबर में कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने निज्जर की हत्या में भारत की संलिप्तता का निराधार आरोप लगाया था। इसे भारत ने बेतुका और मनगढंत कहकर खारिज कर दिया था। भारत के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, कनाडा इस हत्या पर अपने दावे को साबित करने के लिए कोई सबूत पेश नहीं कर पाया है।

वहीं, लगभग 9 महीने से इस मामले की जाँच कर रही कनाडा की रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (आरसीएमपी) ने आतंकी निज्जर की हत्या के संबंध में अभी तक किसी संदिग्ध का नाम नहीं लिया है। पुलिस ने इस मामले में अभी तक किसी की गिरफ्तारी भी नहीं की है। इसको लेकर भर कनाडा सरकार के दावों पर सवाल खड़ा हो रहे हैं।