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ED के अधिकारियों पर करवाया हमला, अब गिरफ्त से बचने को जोड़ रहा हाथ-पैर: शेख शाहजहाँ की जमानत याचिका खारिज

पश्चिम बंगाल के संदेशखाली में महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न और जमीन कब्जाने के मामले में गिरफ्तार TMC से निलंबित नेता शाहजहाँ शेख की जमानत याचिका कलकत्ता हाई कोर्ट ने ठुकरा दी है। उसने यह जमानत राशन घोटाले के मामले में माँगी थी, जिसे कोर्ट ने देने से इंकार कर दिया।

पश्चिम बंगाल के करोड़ों के सार्वजनिक राशन घोटाला मामले में शेख शाहजहाँ ने गिरफ्तारी से बचने के लिए यह जमानत याचिका कलकत्ता हाई कोर्ट के सामने लगाई थी। इस मामले की जाँच ED कर रही है। ED उसे इस मामले में पूछताछ के लिए गिरफ्तार कर सकती है।

शाहजहाँ के वकील ने इस मामले में दावा किया कि ED द्वारा शाहजहाँ पर लगाए गए आरोप स्पष्ट नहीं है। उसने यह भी दावा किया कि शाहजहाँ के घर पर छापे के बाद भी ED पर्याप्त सबूत नहीं पेश कर सकी है। शाहजहाँ ने कोर्ट से दावा किया कि उसके खिलाफ कोई स्पष्ट सबूत नहीं है, इसलिए उसे इस मामले में गिरफ्तार ना किया जाए।

गौरलतब है कि इसी राशन घोटाला मामले में जब जनवरी, 2024 में ED की टीम शेख शाहजहाँ के घर संदेशखाली पहुँची थी, तब उन पर हमला हो गया था। शाहजहाँ ने ही यह हमला करवाया था। ED की टीम राशन घोटाला मामले में उससे पूछताछ करना चाहती थी।

इस हमले में ED के कुछ अधिकारी घायल हुए थे। कई को चोट आई थी और उनकी गाड़ियाँ भी तोड़ दी गईं थी। इसके बाद शेख शाहजहाँ यहाँ से भाग गया था। हालाँकि, जब एक माह बाद उसके कर्मों की कलाई क्झुली तो सामने आया कि उसकी कहानी और भी खतरनाक है।

उसके खिलाफ फरवरी में सन्देशखाली की महिलाओं ने आरोप लगाया था कि वह उनका यौन शोषण करता है। उस पर कई किसानों की जमीन कब्जे की शिकायतें भी दर्ज की गई हैं। उसे हाल ही में बंगाल पुलिस ने पकड़ कर CBI को सौंपा था। शेख लम्बे से समय ED के राडार पर है।

ED से ही शाहजहाँ बचना चाह रहा है। इसीलिए उसने कलकत्ता हाई कोर्ट से जमानत माँगी थी। उसकी याचिका को रद्द कर दिया गया। ED की तरफ से पेश हुए अफसर ने कहा कि शाहजहाँ जाँच में बिलकुल भी सहयोग नहीं कर रहा और साथ ही उसने ED पर हमला भी करवाया है।

इसी के साथ ही शाहजहाँ के बांग्लादेश में छात्र नेता होने का दावा किया गया है। पद्म श्री पुरष्कार से सम्मानित प्रोफ़ेसर नारायण चक्रबर्ती ने कहा है कि शेख शाहजहाँ का स्कूल प्रमाण पत्र बांग्लादेश का है। वह बांग्लादेश में बांग्लादेश नेशनल पार्टी का छात्र नेता था। यह पार्टी वहाँ कट्टर इस्लाम समर्थक मानी जाती है। नारायण चक्रबर्ती ने कहा है कि शेख शाहजहाँ बांग्लादेश से भारत में कैसे घुसा, इसकी जाँच करने की आवश्यकता है।

क्या CAA कानून लागू करने से इनकार कर सकती हैं राज्य सरकारें, जानिए क्या कहता है संविधान: ममता बनर्जी और विजयन के बयान के बाद उठ रहे हैं सवाल

केंद्र की मोदी सरकार ने सोमवार (11 मार्च 2024) को नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) को लागू कर द‍िया। इसके बाद पश्‍च‍िम बंगाल की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी और केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने इसे अपने-अपने राज्यों में लागू करने से इनकार कर दिया है। अब ऐसे में सवाल उठता है कि क्या कोई राज्य इस कानून को लागू करने से इनकार कर सकता है।

दरअसल, ममता बनर्जी ने मंगलवार (12 मार्च 2024) को कहा कि वह CAA बंगाल में लागू नहीं होने देंगी और ना ही बंगाल को डिटेंशन सेंटर बनने देंगी। उन्होंने कहा, “मैं सीएए लागू नहीं करने दूँगी। मैं लोगों के बुनियादी अधिकार छीनने नहीं दूँगी। इसके लिए मुझे अपनी जान भी कुर्बान करनी पड़ी तो मैं करूँगी।” ममता ने इस कानून को देश को बाँटने वाला बताया है।

ममता बनर्जी ने कहा, “आवेदन करते ही ऐसे लोग घुसपैठिये बन जाएँगे। यह अधिकार छीनने का खेल है। अगर आप आवेदन करते हैं तो इसकी कोई गारंटी नहीं है कि आपको नागरिकता मिलेगी या नहीं। आप अपनी संपत्ति खो देंगे। आप सरकारी योजनाओं से वंचित रहेंगे। आवेदन करने पर सारे नागरिक अधिकार छीन लिए जाएँगे। इस लिए आवेदन करने से पहले हजार बार सोचें। यह एनआरसी से जुड़ा है।”

अवैध घुसपैठियों का बचाव करते हुए ममता बनर्जी ने आगे कहा, “यह कहते हुए कि यह अधिनियम लोगों को परेशान करने के लिए बनाया गया है। संयुक्त राष्ट्र ने स्पष्ट रूप से कहा है कि शरणार्थियों को विस्थापित नहीं किया जाना चाहिए और किसी देश से बाहर नहीं निकाला जाना चाहिए। यह बुनियादी मानवता है। क्या हमने कभी देखा है कि धर्म के आधार पर नागरिकता दी जा रही है?”

वहीं, केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने भी कहा कि वे पहले ही दोहरा चुके हैं कि मुस्लिमों को दोयम दर्जे का नागरिक समझने वाले CAA कानून को केरल में किसी भी कीमत पर लागू नहीं होने देंगे। इस सांप्रदायिक कानून बताते हुए विजयन ने कहा कि इसके विरोध में पूरा केरल खड़ा नजर आएगा।

नागरिकता संशोधन अधिनियम दिसंबर 2019 में संसद के दोनों सदनों से पास हुआ था। इसके बाद देश भर में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए थे। इस कानून में पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के अल्पसंख्यक- हिंदू, सिख, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के प्रताड़ित लोगों को भारत की नागरिकता देने का प्रावधान है। इसके लिए शर्त है कि ये लोग 31 दिसंबर 2014 तक भारत आ गए हों।

लोकसभा चुनाव 2024 को देखते हुए ममता बनर्जी बंगाल में और पिनराई विजयन केरल में इसे किसी कीमत पर लागू नहीं होने की बात भले करते हों, लेकिन यह संभव नहीं है। संविधान के अनुसार, भारतीय राज्य CAA को लागू करने से इनकार नहीं कर सकते। क्योंकि, नागरिकता का मामला राज्य का नहीं, बल्कि केंद्र का मसला है और इस कानून को संसद ने पारित किया है।

सुप्रीम कोर्ट की वकील रीना एन सिंह का कहना है कि नागरिकता कानून संघ सूची के तहत आता है, ना कि राज्य सूची के अधीन। संविधान के अनुच्छेद 246 में संघ और राज्य के बीच शक्तियों का साफ तौर पर बँटवारा किया गया है। उनका कहना है कि भारतीय राज्यों को इसे लागू करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है। वही राज्य इसे लागू नहीं कर सकेंगे, जिन्हें इस कानून में अपवाद रखा गया है।

रीना सिंह कहती हैं, “अगर बंगाल और केरल की सरकार CAA लागू करने से इनकार करती हैं तो यह पूर्णत: असंवैधानिक होगा, क्योंकि सविंधान के अनुच्छेद 256 के अंतर्गत कोई भी राज्य संसद द्वारा पारित कानून को लागू करने से इनकार नहीं कर सकता।” उनका कहना है कि अगर किसी राज्य सरकार को लगता है कि आम लोगों के हित में नहीं है तो वह इसके खिलाफ कोर्ट जा सकती है।

रीना सिंह ममता बनर्जी और पिनराई विजयन द्वारा CAA को अपने-अपने राज्यों में लागू नहीं करने की बात को राजनीति से प्रेरित मानती हैं। उनका कहना है कि बंगाल तथा केरल की सरकारों के ऐसे बयान निरर्थक हैं। ऐसे बयान स्पष्ट करते हैं कि ये राज्य वोट बैंक की राजनीति के कारण इस तरह के बयान दे रहे हैं। इसकी कोई कानूनी अहमियत नहीं है।

बता दें कि CAA को संविधान की 7वीं अनुसूची के तहत लागू किया गया है। इन अनुसूची में रक्षा, विदेश, रेलवे, नागरिकता सहित ऐसे 97 विषय आते हैं। इन विषयों पर नियम-कानून बनाने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है। हालाँकि, केंद्र इसके लिए राज्य सरकारों से परामर्श ले सकता है, लेकिन उनकी बात मानने के लिए बाध्य नहीं है।

गौरतलब है कि CAA लागू करने के विरोध में कई संगठनों ने कोर्ट में याचिका डाल रखी हैं। CAA के खिलाफ ऐसी कुल 220 याचिकाएँ लंबित हैं। जिन लोगों एवं संगठनों ने CAA के खिलाफ याचिका दायर की हैं, उनमें केरल की मुस्लिम लीग, टीएमसी की महुआ मोइत्रा, कॉन्ग्रेस नेता जयराम रमेश एवं देबब्रत सैकिया, AIMIM सुप्रीमो असदुद्दीन ओवैसी, एनजीओ रिहाई मंच आदि शामिल हैं। CAA को चुनौती देने वाली केरल सरकार की भी एक याचिका लंबित है।

‘अगले आदेश तक रोको कार्रवाई’: पाकिस्तानी हिन्दुओं की झुग्गियाँ गिराने चले DDA के बुलडोजर पर हाईकोर्ट ने लगाया ब्रेक, लक्जरी दुकानों को नोटिस तक नहीं

दिल्ली हाईकोर्ट से पाकिस्तान के शरणार्थी हिन्दुओं को बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने दिल्ली विकास प्राधिकरण को आदेश दिया है कि वो मजनू का टीला पर रह रहे पाकिस्तानी शरणार्थियों के शिविर पर कोई दंडात्मक अथवा ध्वस्तीकरण की कार्रवाई न करें। DDA ने नोटिस भेज कर इस शिविर पर 6 मार्च को बुलडोजर चलाने की सूचना दी थी। फिलहाल इस मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च 2024 को तय की गई है। हाईकोर्ट के इस निर्णय पर शरणार्थियों ने ख़ुशी जताई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह सुनवाई जस्टिस जस्टिस मिनी पुष्करणा की बेंच में हुई। कोर्ट में पाकिस्तानी शरणार्थियों का पक्ष एडवोकेट रवि रंजन सिंह ने रखा। उन्होंने अदालत से माँग की है कि जब तक इन शरणार्थियों को रहने के लिए कोई वैकल्पिक जगह नहीं दे दी जाती तब तब उनको हटाना न्यायोचित नहीं होगा। वहीं अदालत में DDA की तरफ से पेश हुए वकील ने कार्रवाई के पीछे NGT (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) के आदेश को वजह बताया। दोनों पक्षों की दलीलें सुन कर अदालत ने फैसला शरणार्थियों के पक्ष में सुनाया।

अदालत ने अपने फैसले में साल 2013 में भारत के तत्कालीन एडिशनल सॉलिसिटर जनरल द्वारा दिए गए बयान का हवाला दिया। 29 मई 2013 को डब्ल्यू.पी. (सी) नंबर 3712/2013 के तहत जारी इस आदेश में कहा गया था कि पाकिस्तान से आए हिन्दुओं को हर प्रकार का सहयोग किया जाएगा। शरणार्थियों को अंतरिम राहत देते हुए हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई तक DDA को किसी भी प्रकार के ध्वस्तीकरण आदि न करने के आदेश दिए। सुनवाई के लिए अगली तारीख इसी महीने 19 मार्च को तय हुई है।

बताते चलें कि 8 मार्च को ऑपइंडिया ने अपनी ग्राउंड रिपोर्ट में बताया था कि कैसे यमुना क्षेत्र पर अतिक्रमण के नाम पर सिर्फ एकतरफा पाकिस्तानी शरणार्थियों को ही नोटिस थमाई गई थी। तब शरणार्थियों ने हमें DDA की वो नोटिस दिखाई थी जो उनके घरों पर चिपका दी गई थी। इस नोटिस में 8 तारीख तक उनकी बस्ती को ध्वस्त करने की बात कही गई थी। हालाँकि, बगल में गुरूद्वारे के रिवर व्यू चबूतरा और पूरा यमुना नदी के क्षेत्र में बने तिब्बती मार्किट में DDA द्वारा कोई नोटिस गई थी या नहीं इसकी जानकारी अभी तक सार्वजनिक नहीं हो पाई है।

CPM समर्थक वकील अब बनेंगे हाई कोर्ट के जज, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने की सिफारिश, कहा – ‘व्यक्ति की राजनीतिक पृष्ठभूमि उसे जज बनने से नहीं रोक सकती’

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने केरल उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में मनोज पुलम्बी माधवन की नियुक्ति का रास्ता साफ कर दिया है। माधवन का झुकाव वामपंथ की ओर रहा है। इसको देखते हुए उनकी नियुक्ति पर केंद्र सरकार के न्याय विभाग ने चिंता जताई थी। इसके बाद भी उनकी हो रही है।

CJI की अध्यक्षता वाली कॉलेजियम में डीवाई चंद्रचूड़ के अलावा न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति बीआर गवई भी शामिल थे। मनोज पुलम्बी माधवन की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट की कॉलेजियम ने कहा, “सिर्फ यह तथ्य कि उम्मीदवार की राजनीतिक पृष्ठभूमि रही है, सभी मामलों में पर्याप्त कारण नहीं हो सकता है।”

न्याय विभाग ने माधवन की नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए कहा था कि वे पहले सीपीआई (एम) पार्टी के समर्थक थे। इसके अतिरिक्त उन्होंने सरकारी वकील के रूप में कार्य किया है और उन्हें केरल की वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) सरकार ने नियुक्त किया था। यह जानकारी उनकी संभावित नियुक्ति के लिए मूल्यांकन प्रक्रिया के हिस्से के रूप में सामने लाई गई थी।

कॉलेजियम ने इन चिंताओं को ‘बेहद अस्पष्ट’ और अयोग्यता के लिए ‘अपर्याप्त’ बताते हुए खारिज कर दिया। कॉलेजियम ने कहा कि किसी उम्मीदवार की राजनीतिक पृष्ठभूमि न्यायिक पद के लिए उसकी पात्रता को स्वाभाविक रूप से कमजोर नहीं करती है। कॉलेजियम के अनुसार, सरकार के इस दावे में विस्तृत साक्ष्य का अभाव है और उनकी उम्मीदवारी को अस्वीकार करने का कोई वैध आधार नहीं है।

मद्रास उच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति विक्टोरिया गौरी के मामले को मिसाल के रूप में पेश करते हुए कॉलेजियम ने कहा, “उदाहरण के लिए, हाल के दिनों में एक वकील को उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया है। हालाँकि, वह पदोन्नति से पहले एक राजनीतिक दल की पदाधिकारी थीं।” बता दें कि न्यायमूर्ति गौरी को जज नियुक्त किया गया था।

इसके अलावा, कॉलेजियम ने यह भी तर्क दिया कि सरकारी वकील के रूप में मनोज पुलम्बी माधवन की पिछली भूमिका से उनकी नियुक्ति में बाधा नहीं आनी चाहिए। कॉलेजियम ने कहा कि उनकी पिछली भूमिका को एक मूल्यवान अनुभव के रूप में देखा जाना चाहिए, खासकर राज्य से जुड़े मामलों में।

कॉलेजियम ने कहा कि अनुसूचित जाति (एससी) के उम्मीदवार के रूप में कानूनी अभ्यास का माधवन का व्यापक अनुभव उनके पक्ष में जाता है। यह उन्हें उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त होने के योग्य बनाता है। कॉलेजियम ने यह भी कहा कि उच्च न्यायालय के कॉलेजियम द्वारा उनके प्रदर्शन को देखा गया था, जिन्होंने एक वकील के रूप में उनकी क्षमता और आचरण का निरीक्षण किया। इसलिए उनकी राय को उचित महत्व दिया जाना चाहिए।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने मंगलवार (12 मार्च 2024) को केरल उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों के रूप में नियुक्ति के लिए केंद्र को छह अधिवक्ताओं के नामों की सिफारिश की। इसके अलावा, न्यायिक अधिकारी मोहम्मद यूसुफ वानी को जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति की सिफारिश की।

केरल हाई कोर्ट में जिन छह अधिवक्ताओं को पदोन्नत करके जज बनाने की सिफारिश की गई है, उनमें अब्दुल हकीम मुल्लापल्ली अब्दुल अजीज, श्याम कुमार वडक्के मुदावक्कट, हरिशंकर विजयन मेनन, मनु श्रीधरन नायर, ईश्वरन सुब्रमणि और मनोज पुलम्बी माधवन शामिल हैं।

इसके साथ ही कॉलेजियम ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में पाँच अतिरिक्त न्यायाधीशों को स्थायी नियुक्ति की सिफारिश की है। ये नाम हैं- न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव, न्यायमूर्ति ओम प्रकाश शुक्ला, न्यायमूर्ति मोहम्मद अज़हर हुसैन इदरीसी, ज्योत्सना शर्मा और सुरेंद्र सिंह-प्रथम को स्थायी न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति दी जाएगी।

बॉम्बे उच्च न्यायालय के 11 अतिरिक्त न्यायाधीशों को उस उच्च न्यायालय के स्थायी न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किए जाने के सिफारिश हुई है। ये 11 जज हैं – जस्टिस उर्मिला सचिन जोशी-फाल्के, भरत पांडुरंग देशपांडे, किशोर चंद्रकांत संत, वाल्मिकी एस ए मेनेजेस, कमल रश्मि खाता, शर्मिला उत्तमराव देशमुख, अरुण रामनाथ पेडनेकर, संदीप विष्णुपंत मार्ने, गौरी विनोद गोडसे, राजेश शांताराम पाटिल और आरिफ सालेह डॉक्टर।

3 मदरसों के बाद अब 5 दरगाहों को कर दिया गया समतल: 24 घंटे के भीतर गुजरात सरकार का बुलडोजर एक्शन मोड में

गुजरात में अवैध अतिक्रमणों पर बुलडोजर कार्रवाई जारी है। इस क्रम में द्वारका, सोमनाथ के पास वाले अवैध कब्जे हटाए जाने के बाद जूनागढ़ के मजेवाड़ी द्वार के पास बनी दरगाह को हटा दिया गया है। इसके अलावा कच्छ में भी ब्लैक हिल्स से कब्जा खाली कराने के बाद बुलडोजर अबदासा की ओर मुड़ा और फिर अंजार में भी तीन अवैध दरगाहें जगह से हटाई गईं।

जानकारी के मुताबिक, मंगलवार (12 मार्च 2024) को कच्छ के अंजार में सरकारी जमीन पर बनी तीन दरगाहों को बुलडोजर से हटाया गया। प्रशासन ने कड़ी पुलिस व्यवस्था के बीच यह अभियान चलाया। इस दौरान हाजीपीर की दरगाह, नागेशापीर की दरगाह और वल्लीपीर की दरगाह पर कार्रवाई हुई।

इसके अलावा एक अन्य ढाँचे को भी ध्वस्त किया गया। देर रात हुई इस कार्रवाई में भारी पुलिस बल को इलाके में तैनात रखा गया। इसके अलावा सुरक्षा के लिहाज से फायर ब्रिगेड की टीम और एंबुलेंस की टीम भी बुलाई गई।

बता दें कि बुलडोजर की कार्रवाई से पहले प्रशासन द्वारा सभी अवैध निर्माणों को नोटिस जारी किया गया था। इसके बाद ही ये कार्रवाई हुई। इससे पहले गुजरात में लगातार सरकारी जमीनों को अवैध कब्जे से छुटाने का काम किया जा रहा है।

कुछ समय पहले ही मजेवाड़ी गेट के पास विवादित मजहबी स्थल को तोड़ दिया गया था। उसके पूर्व कच्छ के खावड़ा इलाके में तीन अवैध मदरसों को ध्वस्त किया गया था। शुक्रवार (9 मार्च 2024) को जामनगर में भी कुख्यात अपराधी रजाक साइचा और उसके भाई के 2 अवैध बंगलों पर भी बुलडोजर चलाया गया था। इसके अलावा 11 मार्च को कच्छ के अबदासा में दो अवैध दरगाहों पर बुलडोजर चलाया गया था।

CHC के लिए 4500 पदों पर वैकेंसी लेकिन सामान्य वर्ग के लिए 0 सीट: विरोध के बाद बिहार के स्वास्थ्य विभाग ने रद्द की भर्तियाँ, ₹40000 वेतन वाले पद के लिए फिर आएगी अधिसूचना

बिहार में स्वास्थ्य विभाग ने CHC (सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों) को लेकर आई बहाली को रद्द करने का फैसला लिया है। भर्तियाँ आने के बाद से ही लगातार इसका विरोध हो रहा था। बता दें कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार में सम्राट चौधरी के पास स्वास्थ्य विभाग है जो राज्य के डिप्टी CM भी हैं। बिहार में 4500 पदों के लिए कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर पद के लिए वैकेंसी निकाली गई थी। राज्य स्वास्थ्य समिति ने भर्तियों को लेकर विज्ञापन जारी किया था।

अब समिति ने एक नया नोटिफिकेशन जारी किया गया है, जिसमें सूचना दी गई है कि अपरिहार्य कारणों से इस वैकेंसी को रद्द किया जाता है। असल में विरोध का कारण ये था कि इन भर्तियों में सामान्य वर्ग के लिए एक भी पद नहीं रखा गया था। इसे लेकर सोशल मीडिया पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए विरोध हो रहा था। सामान्य वर्ग के लिए इसमें शून्य सीटें थीं, जबकि EBC (अत्यंत पिछड़ा वर्ग) के लिए सबसे अधिक 1345 सीटों का प्रावधान किया गया था।

इसके बाद SC (अनुसूचित जाति) का स्थान आता है, जिसके लिए 1279 पद रखे गए थे। आवेदन की अंतिम तिथि 30 अप्रैल, 2024 रखी गई थी। नियुक्त होने वाले कर्मियों को 32,000 रुपए का वेतन, 8000 रुपए का इंसेंटिव प्रति महीने मिलता। विरोध होने के बाद सत्ताधारी जदयू द्वारा कहा गया था कि जिस स्तर पर सुधार की ज़रूरत होगी उसे लागू किया जाएगा। वहीं सत्ताधारी गठबंधन में शामिल भाजपा नेताओं को भी लोग अपनी समस्या से आगाह करा रहे थे, क्योंकि स्वास्थ्य विभाग भाजपा नेता के पास है।

अब कुछ दिनों बाद एक अन्य अधिसूचना जारी कर के बताया जाएगा कि इन पदों पर फिर से भर्तियाँ शुरू होंगी या नहीं। इच्छुक उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वो समय-समय पर ‘shs.bihar.gov.in’ वेबसाइट को चेक करते रहें। सोशल मीडिया पर लोगों ने ट्रेंड चला कर बिहार के सामान्य वर्ग के विधायकों से पूछा था कि आखिर वो इस पर कब बोलेंगे? वहीं आरक्षण विरोधियों ने भी जम कर आवाज़ उठाई थी। अब उनकी माँगों को देखते हुए भर्तियाँ रद्द कर दी गई हैं।

बेंगलुरु के रामेश्वरम कैफे धमाका मामले में शब्बीर बेल्लारी से धराया, दूसरा हैदराबाद में छुपा हुआ: NIA कर रही पूछताछ

बेंगलुरु के रामेश्वरम कैफे में हुए धमाके के मामले में सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी कामयाबी मिली है। सुरक्षा एजेंसी NIA ने इस मामले में धमाका करने वाले आतंकी के एक मददगार को पकड़ा है। उसे कर्नाटक से ही गिरफ्तार किया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बेंगलुरु के रामेश्वरम कैफे में 1 मार्च को हुए धमाके की जाँच कर रही NIA ने एक संदिग्ध शब्बीर को हिरासत में लिया है। बताया जा रहा है कि वह कर्नाटक के बेल्लारी में किसी जगह से गिरफ्तार हुआ है। अभी एजेंसी उससे इस मामले में गहन पूछताछ कर रही है।

कर्नाटक के एक स्थानीय समाचार चैनल ने बताया है कि शब्बीर को सुबह 4 बजे गिरफ्तार किया गया था। अभी शब्बीर को बेंगलुरु पूछताछ के लिए ले जाया गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि जिस आतंकी ने बेंगलुरु के रामेश्वरम कैफे में धमाका किया, वह शब्बीर से मिलने आया था।

शब्बीर बेल्लारी के कौल बाजार इलाके का निवासी बताया जा रहा है। आरोप है कि शब्बीर ने बेंगलुरु में धमाका करने वाले आतंकी को भागने में मदद की। यह आतंकी भाग कर तेलंगाना के हैदराबाद गया है। मुख्य आतंकी के हैदराबाद में छुपने की सूचना है।

गौरतलब है कि पिछले शुक्रवार (1 मार्च, 2024) को बेंगलुरु के वाइटफील्ड इलाके में स्थित रामेश्वरम कैफे में दोपहर में एक धमाका हुआ था। इस धमाके में 9 लोग घायल हुए थे। धमाके के पीछे की जानकारी बाद में निकल कर सामने आई थी। इसके बाद इस मामले की जाँच NIA ने चालू कर दी थी। तब से ही इस संदिग्ध की पहचान स्थापित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

NIA ने इस मामले में एक संदिग्ध की फोटो जारी करके लोगों से पहचान करने को कहा था। संदिग्ध की बस और कैफे के भीतर की CCTV वीडियो सामने आई थी। पता चला था कि वह धमाके वाली जगह पर सार्वजनिक बस में आया था।

रामेश्वरम कैफे में धमाका करने वाला संदिग्ध सुबह 10:45 मिनट पर एक सार्वजनिक बस से उतरा था। यह बस स्टॉप कैफे से मात्र 100 मीटर ही दूर है। इसके बाद वह घूमता हुआ 11:34 पर कैफे में घुसा और 8 मिनट बाद ही बाहर निकल गया। इस बीच ही उसने यहाँ बम रखा था।

वह यहाँ से निकलने के बाद एक किलोमीटर दूर स्थित एक बस स्टॉप पर गया और वहाँ से बस पकड़ ली। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि यह संदिग्ध अपने इस रास्ते में एक मुस्लिम मजहबी केंद्र पर भी रुका था। यहाँ उसने अपना भेष बदला था और टोपी भी छोड़ दी थी।

NIA ने यह टोपी बरामद कर ली थी। संदिग्ध की पहचान के लिए NIA ने उसकी फोटो वाला एक पोस्टर जारी किया था। NIA ने इसके विषय में जानकारी देने पर ₹10 लाख ईनाम घोषित किया था। अब इस मामले में इस संदिग्ध के हिरासत में लिए जाने के बाद इस मामले का खुलासा होने की उम्मीद बढ़ी है।

What’s Wrong With India: भारतीयों ने हाइजैक किया भारत विरोधी प्रोपेगंडा, खोल दी नफरती ट्रेंड की पोल, दूसरे देशों की सच्चाई भी दिखाई

भारतीयों ने इन्टरनेट पर चलाए जाने वाले भारत विरोधी कैम्पेन की हवा निकाल दी। साथ में ही उन्होंने पश्चिमी देशों की वह सच्चाई सामने ला दी, जो पश्चिमी देश, मीडिया और औपनिवेशिक मानसिकता वाले नागरिक छुपाना चाहते हैं। इन्टरनेट पर आम नागरिकों की इस फ़ौज को भारत सरकार का आधिकारिक समर्थन भी मिला। यह पूरी कहानी What;s Wrong With India नाम के एक ट्विटर ट्रेंड से

भारत सरकार के एक एक्स (पहले ट्विटर) हैंडल ने भी इस अभियान हिस्सा लिया। भारत सरकार के @MyGovIndia ने भी इसी श्रंखला में भारत की उपलब्धियों को दिखाते हुए एक ट्वीट किया। इसमें भारत के घोर गरीबी के उन्मूलन में सफलता, चन्द्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाले पहले देश बनने, IMF द्वारा आर्थिक स्थिति को लेकर प्रशंसा पाने और डिजिटल इन्फ्रा में पाई गई उपलब्धियों का जिक्र था। इस ट्वीट को ‘व्हाट्स रॉंग विद इंडिया’ (What’s Wrong with India) का नाम दिया गया था।

लेकिन असल जानने वाली बात है कि आखिर सरकार का एक ट्विट्टर हैंडल बिलकुल विपरीत लाइन लिख कर भारत की उपलब्धियों को दर्शा रहा था। इसके पीछे क्या कारण है और इस कैप्शन (व्हाट्स रॉंग विद इंडिया) की कहानी क्या है?

विदेशी सोशल मीडिया अकाउंट चला रहे थे (What’s Wrong with India) का एजेंडा

दरअसल, भारत सरकार के इस हैंडल का यह ट्वीट एक ट्रेंड हाइजैक का हिस्सा था। गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से विदेशी सोशल मीडिया अकाउंट्स भारत की नकारात्मक छवि पेश कर रहे थे। यह प्रमुखता से ट्विटर पर हो रहा था। यह अकाउंट भारतीयों के गाड़ी चलाने के तरीके, खान पान की आदतें, खुले में पेशाब, ड्रग की समस्या और धोखाधड़ी जैसे चीजों की फोटो वीडियो के जरिए भारत को निशाना बना रहे थे। यह बीते कुछ समय से विशेष रूप बढ़ गया था। इसमें हालिया 10 दिन में तो बाढ़ सी गई थी।

What's Wrong With India ट्रेंड
What’s Wrong With India ट्रेंड

हालाँकि अभी ये तो नहीं पता कि ‘What’s Wrong with India’ वाला ट्रेड किसने चालू किया? कई सोशल मीडिया यूजर्स के अनुसार, यह सबसे पहले तब सामने आया जब विश्व भर से कई भारत विरोधी अकाउंट्स ने भारत में स्ट्रीट फूड को निशाना बनाया। उन्होंने इसे गंदा बताया। बात यहीं नहीं रुकी, यही अकाउंट्स धीरे-धीरे भारत में महिलाओं की सुरक्षा, अपराध और भ्रष्टाचार जैसे अन्य मुद्दों को लेकर भी भारत निशाना बनाने लगे। इस पूरे अभियान में यह व्हाट्स रॉंग विद इंडिया वाली लाइन सबसे बड़ा हथियार बनी।

भारतीयों ने हाइजैक कर लिया प्रोपेगंडा

जब भारत के खिलाफ यह अभियान चला तो भारतीय सोशल मीडिया यूजर्स ने भी अपना दम दिखाया। उन्होंने भी अन्य देशों की कमियों को उजागर करना चालू किया। हालाँकि, भारतीय यूजर्स ने इसमें भी वही कैप्शन (What’s Wrong With India) उपयोग की जो कि विदेशी अकाउंट उपयोग में ला रहे थे। दरअसल, इसके पीछे का कारण यह था कि एलन मस्क के मालिकाना हक़ वाला ट्विटर इस कैप्शन वाली इन पोस्ट को बढ़ावा दे रहा था और ज्यादा जनता तक पहुँचा रहा था।

आसान भाषा में समझे तो ट्विटर भारत विरोधी प्रोपेगंडा को हवा दे रहा था। जबकि भारतीय अगर अन्य देशों के विषय में कमी निकालते तो वह ज्यादा लोगों तक नहीं पहुँचती। ऐसे में भारतीय यूजर्स ने इस भारत विरोधी अभियान को अपने हक़ में लाने के लिए हाईजैक कर लिया। भारतीय यूजर्स ने ट्विटर की तकनीक उसके खिलाफ ही अपनाई और भारत विरोधी प्रोपेगंडा को ध्वस्त कर दिया। इसी अभियान को भारत सरकार का भी साथ मिल गया।

दूसरे देशों की कमियाँ भी सामने रख दी

जहाँ दूसरे देशों के यूजर्स भारत का अपमान कर रहे थे, वहीं भारतीय यूजर्स ने इन देशों की कमियों को भी सामने रखा। भारतीयों ने दूसरे देशों में मेट्रो में होने वाली अश्लीलता, ड्रग्स की बढ़ती समस्या, सड़कों पर बिखरे कूड़े और ऐसे ही तमाम उदाहरण ट्विटर पर सामने रखे। एक वीडियो में एक व्यक्ति मेट्रो के अंदर पेशाब करते दिखता है। इन सब पोस्ट में What’s Wrong with India का उपयोग किया गया।

What’s Wrong With India ट्रेंड के साथ की गई एक पोस्ट

दूसरे भारतीय यूजर ने मेट्रो के अंदर नहाते एक व्यक्ति की वीडियो डाल दी।

एक अन्य ने सड़कों पर पड़ा कूड़ा और सड़क किनारे टेंट में रहते लोग दिखाए।

एक अन्य वीडियो में नशेडी देखे जा सकते हैं।

इसके बाद तो पश्चिमी देशों का सच दिखाने वाले मीम्स, सोशल मीडिया पोस्ट और वीडियो की भरमार हो गई। इन सबमें भारत जा एंगल जोड़ा गया। भारतीय यूजर्स ने स्पष्ट किया कि मात्र भारत ही नहीं बल्कि विकसित देशों में भी वही समस्याएँ हैं। इस ट्रेंड में सरकारी पोर्टल ने भी हिस्सा लेकर और भी मजेदार बना दिया।

रोजे में पखाने के बाद कैसे धोएँ, कैसे न धोएँ… पिछवाड़े से पानी पेट में चले जाने से टूट जाएगा रोजा? अलग-अलग मौलाना के वीडियो हो रहे वायरल, सब दे रहे ज्ञान

रमजान का महीना शुरू होते ही सोशल मीडिया पर इस्लाम संबंधी कई सवालों के जवाब में मुफ्ती/ मौलाना की वीडियो आना शुरू हो गई है। इसी क्रम में वो वीडियो भी वायरल हो रही है जिसमें एक मुफ्ती को पखाने के बाद गुदाद्वार साफ करने का तरीका बताते देखा जा सकता है जिससे कि पानी पेट तक न जाए।

सोशल मीडिया पर लोग इस वीडियो को ये कहकर शेयर कर रहे हैं कि मुफ्ती खुद इस संबंध में ज्ञान दे रहे हैं कि कैसे गुदाद्वार साफ किया जाए, लेकिन हकीकत यह है कि मुफ्ती बदर अपनी वीडियो में किसी और मौलाना द्वारा फैलाई कई भ्रांति पर सफाई दे रहे हैं। असल में तो वो समझा रहे हैं कि पखाने का रास्ता बहुत सख्त होता है वहाँ से कैसे भी पानी घुसकर पेट तक नहीं जा सकता।

वायरल होती वीडियो में मुफ्ती मामुर बदर कासमी की वीडियो को क्रॉप करके शेयर किया जा रहा है। क्रॉप वीडियो में ऐसा लग रहा है कि वो खुद कहते हैं कि इस्तिन्जा करते समय साँस रोक लें। इसके बाद वो हाथ हिला कर (पिछवाड़ा धोने की प्रक्रिया) बता रहे हैं कि पानी का इस्तेमाल करें। साँस रोकने को लेकर मुफ्ती तर्क देते हैं कि इससे पखाने का सुराख (गुदाद्वार) खुलेगा नहीं, टाइट रहेगा। इस कारण से इस्तिन्जा के वक्त पानी गुदाद्वार से होते हुए पेट के अंदर नहीं जाएगा।

रोजे के टूटने की बात कहते हुए मुफ्ती बताते हैं कि कोई चीज अगर मुँह के रास्ते से या पखाने के रास्ते से पेट में चली जाए तो उस कारण से रोजा का टूटना माना जाएगा। अपनी बात में वजन लाने के लिए इस्लामी मजहबी किताबों के कुछ उदाहरण भी देते हैं मुफ्ती।

बता दें कि ये वीडियो 7 मई 2020 को रमजान के समय मुफ्ती मामुर बदर कासमी के ऑफिशियल अकॉउंट से अपलोड की गई थी। ये वीडियो 7 मिनट 18 सेकेंड की है। इसमें मुफ्ती बदल असल में ‘रोजे में पखाने के बाद पिछवाड़ा कैसे धोएँ’ को लेकर चल रही भ्रांतियों पर बात रखी थी।

उन्होंने अपने यूजर को वीडियो में बताया था कि जैसा कि वीडियो वायरल हो रही है कि इस्तिन्जा के समय पानी पेट में जा सकता है। तो ये बात बिलकुल असंभव है। हाँ, एक संभावना यह बताई कि जिस इंसान के पखाने का रास्ता (गुदाद्वार) बहुत ढीला हो, उसके पेट में इस्तिन्जा करते समय पानी जा सकता है।

पिछले साल भी उनकी यह वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल होना शुरू हुई थी। उस समय उन्होंने शॉर्ट वीडियो बनाते हुए सफाई दी थी। उन्होंने कहा था कि ये दावा उनका नहीं है बल्कि एक बरेलवी मौलाना का है जो बता रहे थे कि रोजे में किस तरह से इस्तिन्जा करना चाहिए।

उनके अनुसार बरेलवी मौलाना ने वो भ्रांतियाँ फैलाई थीं जिसकी बात करते वो वीडियो में दिखे। ऊपर दी गई वीडियो उसी बरेलवी मौलाना की है जो यह बताता दिख रहा है कि रोजे में गुदाद्वार को चिपका कर इस्तिन्जा करना चाहिए।

हैदराबाद मुक्ति दिवस: जब इस्लामी सेना के आतंक से 1.5 करोड़ हिन्दू हड्डी और राख होने से बचाए गए, अमित शाह ने 17 सितम्बर कर दिया फिक्स

केंद्र सरकार ने निर्णय लिया है कि वह हर वर्ष 17 सितम्बर को ‘हैदराबाद मुक्ति दिवस’ मनाएगी। इसके लिए केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी की है। सरकार का कहना है कि यह माँग लम्बे समय से की जा रही थी, जिसे अब पूरा किया जा रहा है।

गृह मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया, “15 अगस्त, 1947 को भारत की स्वतंत्रता होने के बाद भी हैदराबाद को 13 महीने तक मुक्ति नहीं मिली और यह निजाम के शासन के अधीन था। यह क्षेत्र 17 सितंबर, 1948 को ‘ऑपरेशन पोलो’ नामक पुलिसिया कार्रवाई के बाद निजाम के शासन से मुक्त हो गया।”

गृह मंत्रालय ने कहा कि हैदराबाद की निजामशाही में आने वाले क्षेत्रों के लोगों को माँग रही है कि इस दिन को हैदराबाद मुक्ति दिवस के रूप में हर वर्ष मनाया जाए। इस माँग को मानते हुए सरकार ने 17 सितम्बर को ‘हैदराबाद मुक्ति दिवस’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। गृह मंत्रालय ने कहा कि इससे युवाओं के मन में देशभक्ति की लौ जलाई जा सकेगी और साथ ही इस क्षेत्र को स्वतंत्र करवाने के लिए प्राण देने वालों का भी समान होगा।

कल (12 मार्च, 2024) को केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तेलंगाना के सिकन्द्राबाद में आयोजित एक रैली में लोगों से पूछा था कि क्या हमें 17 सितम्बर को हैदराबाद मुक्ति दिवस मनाना चाहिए। इस पर जनता ने उनका समर्थन किया था। कल ही यह बात सरकार ने मान भी ली।

गौरतलब है कि देश के आजाद होने के बाद हैदराबाद के निजाम ने भारत में विलय होने से इंकार कर दिया था। हैदराबाद का निजाम पाकिस्तान में विलय होने की धमकी भारत के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल को दे रहा था। इसके बाद ‘ऑपरेशन पोलो’ के जरिए हैदराबाद को मुक्त करवाया गया था।

निजाम ने भारत में विलय को लेकर नेहरु सरकार को काफी छकाया था। निज़ाम ने घोषणा की थी कि आज़ादी के बाद वह ब्रिटिश कॉमनवैल्थ का सदस्य बन कर एक अलग राज्य की सम्प्रभुता को क़ायम रखना चाहता है। उसके सिपाहसालार कासिम रजवी, जो कि इत्तिहाद ए मुस्लिमीन का अध्यक्ष (यह अब AIMIM के नाम से जानी जाती है।) था। उसने धमकी दी थी कि अगर भारत सरकार हैदराबाद में दखल देती है तो उसे 1.5 करोड़ हिन्दुओं की हड्डियाँ और राख मिलेगी।

इस पर सरदार पटेल ने कहा था कि अगर ऐसी बात है तो यह निज़ाम और उसके पूरे खानदान की जड़ों को नष्ट कर देगा। सरदार ने कहा कि हैदराबाद का विलय उसी प्रकार से होगा, जिस तरह से अन्य राज्यों का हुआ है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों के ख़ून-पसीने से बने भारत को एक धब्बे की वजह से बर्बाद नहीं होने दिया जाएगा।

निजाम की सेना ने भारत के सैन्य दखल देने से पहले हिन्दुओं पर काफी अत्याचार किया था, महिलाओं के साथ बलात्कार किए गए थे। ब्राम्हणों को मारा गया था। इन सब अत्याचारों को जनता के सामने लाने के लिए एक फिल्म बनाई जा रही है। इसका नाम ही ‘रजाकार‘ रखा गया गया है।