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BJP ने लोकसभा चुनाव 2024 के लिए 72 नामों वाली दूसरी लिस्ट जारी की: गडकरी, अनुराग ठाकुर, तेजस्वी सूर्या, खट्टर सहित कई नाम; 10 महिला उम्मीदवार

भाजपा ने बुधवार (13 मार्च 2024) को लोकसभा चुनाव 2024 के लिए 72 नामों वाले उम्मीदवारों की अपनी दूसरी लिस्ट जारी की। इस लिस्ट में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, अनुराग सिंह ठाकुर, मनोहर लाल खट्टर, पीयूष गोयल जैसे नाम शामिल हैं। इससे पहले भाजपा ने 2 मार्च को 195 प्रत्याशियों वाली पहली सूची जारी की थी। इस तरह भाजपा ने 267 उम्मीदवारों की घोषणा कर दी।

भाजपा ने अपनी दूसरी सूची में दिल्ली की 2, हरियाणा की 6, उत्तराखंड 2, हिमाचल प्रदेश की 2, मध्य प्रदेश की 5, गुजरात की 7, कर्नाटक की 20, महाराष्ट्र की 20, तेलंगाना की 6, त्रिपुरा की 1 और दादर एवं नगर हवेली की 1 सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा की है। भाजपा ने पहली सूची में 16 राज्यों और 2 केंद्रशासित प्रदेशों के लिए उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की थी।

दूसरी सूची में दिए गए नामों के अनुसार, नितिन गडकरी नागपुर से, अनुराग सिंह ठाकुर हमीरपुर से, पीयूष गोयल मुंबई नॉर्थ से और मनोहर लाल खट्टर करनाल से चुनाव लड़ेंगे। इसके अलावा, मैसूर से राजघराने के यदुवीर कृष्णदत्त चामराज वाडियार, बेंगलुरु साउथ से तेजस्वी सूर्या, बीड से पंकजा मुंडे को मैदान में उतारा गया है।

वहीं, उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को हरिद्वार से और भाजपा मीडिया सेल के प्रमुख अनिल बलूनी को गढ़वाल से मैदान में उतारा गया है। वहीं, दिल्ली के कुल सात सीटों में से पूर्व दिल्ली से हर्ष मल्होत्रा और उत्तर पश्चिमी दिल्ली से अनुसूचित जाति के योगेश चंदोलिया को मैदान में उतारा गया है। पाँच सीटों की पहले घोषणा हो चुकी है।

भाजपा की दूसरी लिस्ट में 10 महिलाओं को उम्मीदवार बनाया गया है। वहीं, अनुसूचित जाति के 5 और अनुसूचित जनजाति के सात उम्मीदवारों को जगह दी गई है। भाजपा की पहली सूची में 28 महिला उम्मीदवार थीं। इसके अलावा, उस सूची के एक चौथाई यानी 47 उम्मीदवारों की उम्र 50 साल से कम है। बीजेपी की सूची में एससी वर्ग के 27 उम्मीदवार हैं और एसटी वर्ग के 18 लोग शामिल थे।

बीजेपी की लिस्ट में राज्यवार देखें तो उत्तर प्रदेश से 51 उम्मीदवारों के नाम की घोषणा की गई थी। पश्चिम बंगाल से 20 उम्मीदवारों के नाम घोषित किए गए थे। इसके बाद मध्य प्रदेश से 24, गुजरात से 15, राजस्थान से 15, केरल से 12, असम के 14 में से 11, झारखंड से 11, छत्तीसगढ़ से 11, तेलंगाना से 9, दिल्ली से 5, जम्मू-कश्मीर से 2, उत्तराखंड से 3, अरुणाचल प्रदेश से 2, गोवा, त्रिपुरा, अंडमान निकोबार और दमन-दीव से एक-एक उम्मीदवार के नाम की घोषणा की गई थी।

बड़े प्रत्याशियों की बात करें वाराणसी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लखनऊ से राजनाथ सिंह, गुजरात के गाँधीनगर से अमित शाह, मध्य प्रदेश की विदिशा सीट से पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, दिल्ली की नॉर्थ-ईस्ट सीट से मनोज तिवारी, गोरखपुर से रवि किशन, आजमगढ़ से निरहुआ, उन्नाव से साक्षी महाराज के नाम की घोषणा की गई थी। दिल्ली की पाँच सीटों में से चार पर नई दिल्ली से बांसुरी स्वराज, पश्चिमी दिल्ली से कमलजीत सहरावत, दक्षिणी दिल्ली से रामवीर सिंह बिधूड़ी और चांदनी चौक से प्रवीण खंडेलवाल को उतारा गया है।

मस्जिद में अरबी पढ़ने जाता था मासूम, कमरे में ले जा कर किया था कुकर्म: राजस्थान में मौलवी नसीम को उम्रकैद की सज़ा, जज ने कविता पढ़ कर प्रकट किए भाव

राजस्थान के कोटा में अदालत ने मस्जिद में नाबालिग बच्चे से कुकर्म के मामले में एक मौलवी को उम्रकैद की सजा दी है। 23 वर्षीय मौलवी का नाम नसीम खान है जो मूलतः हरियाणा के पलवल का निवासी है। अदालत ने नसीम पर 21 हजार रुपए का जुर्माना भी ठोंका है। सजा के बाद जज ने पीड़ित बच्चे के लिए एक कविता भी पढ़ी। इस सजा का एलान बुधवार (13 मार्च, 2024) को हुआ है।

दैनिक भास्कर के मुताबिक यह मामला 22 अक्टूबर 2023 का है। यहाँ कक्षा 5 में पढ़ने वाले 10 साल के मासूम बच्चे के चाचा ने तब थाना बूढ़ादीत पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत में उन्होंने बताया था कि पीड़ित 3 बजे दीनी तालीम लेने और अरबी पढ़ने मस्जिद में गया था। इस मस्जिद में हरियाणा के पलवल निवासी नसीम खान मौलवी के तौर पर काम करता था। मौलवी बच्चे को अकेला पा कर एकांत वाले कमरे में ले गया। यहाँ उसने बच्चे के साथ कुकर्म किया। जब बच्चा रोने लगा तो नसीम ने कहीं बताने पर जान से मार डालने की धमकी दे कर उसे चुप करवाया।

हालाँकि, बच्चे ने घर आ कर पूरी बात बता दी थी। पुलिस ने तब आरोपित मौलवी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट और IPC की धारा 377 व 506 आदि के तहत कार्रवाई की थी। आरोपित मौलवी को गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया गया था। कोर्ट में इस मामले की सुनवाई लगभग 5 महीने तक चली। सरकारी वकील ललित कुमार शर्मा ने मीडिया से बताया कि पुलिस ने महज 14 दिनों के अंदर जाँच पूरी कर के कोर्ट में चालान पेश कर दिया था। 24 दस्तावेजों वाले इस चालान में 11 गवाहों के बयान भी दर्ज थे।

बचाव पक्ष के वकील ने अपने मुअक्किल को बेगुनाह बताया। हालाँकि अभियोजन पक्ष द्वारा पेश सबूतों को अदालत ने पुख्ता माना। अभियोजन पक्ष ने नसीम को फाँसी देने की माँग रखी थी। कोटा जिले के पॉस्को कोर्ट नंबर 3 में न्यायाधीश दीपक दुबे ने अंत में आरोपित मौलवी को अंतिम साँस तक जेल में रहने और 21 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। सजा पाने के बाद जेल जाते हुए मौलवी नसीम अपने मुँह को छिपाता रहा।

वहीं सजा देने के बाद न्यायाधीश ने इबादतगाह में घिनौना कृत्य करने वाले मौलवी और पीड़ित बच्चे पर आधारित एक कविता भी टिप्पणी के तौर पर कही। अपनी कविता में न्यायाधीश दीपक दुबे ने कहा, “मेरे नन्हे-मुन्ने मासूम फरिश्ते। तुम निर्दोष व निष्पाप हो। तुम्हारी मुस्कान ही सारा जहान है। तुम्हारी सूरत में अल्लाह का नूर बसता है। तुम मन-मस्तिष्क से कटु स्मृतियों को मिटा दो। तुम्हारा गुनहगार हमने आजीवन सलाखों के पीछे भेज दिया है। अब तुम हँस-खेल कर इस जीवन को यापन करो। तुम्हारी आँखों के आँसू बहता हुआ घर नहीं आएगा”।

‘कहाँ है सबूत’: जिस 5-Eyes का सदस्य है कनाडा, उसमें शामिल देशों ने ही ट्रुडो पर जताया संदेह, भारत पर लगा रहा था निज्जर की हत्या का आरोप

न्यूजीलैंड के उप प्रधानमंत्री विंस्टन पीटर्स ने खालिस्तान अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को लेकर कनाडा के दावे पर संदेह जताया है। इस तरह कनाडा को अपने साथियों से ही झटका मिला है। दरअसल, कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने निज्जर की हत्या में भारत का हाथ होने की बात कही थी। हालाँकि, भारत ने इससे इनकार किया था। इसको लेकर दोनों देशों के संबंधों में खटास आ गई थी।

बता दें कि न्यूज़ीलैंड फ़ाइव-आइज़ ख़ुफ़िया गठबंधन के सदस्यों में से एक है। इस गठबंधन में अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। विंस्टन पीटर्स के इस बयान से समझा जाता है कि कनाडा ने खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर हत्याकांड से जुड़ी खुफिया जानकारी गठबंधन के अपने सहयोगियों के साथ साझा की है।

विंस्टन पीटर्स इस समय भारत की आधिकारिक यात्रा पर हैं। इस दौरान इंडियन एक्सप्रेस ने उनसे बातचीत की। पीटर्स से पूछा गया कि क्या न्यूजीलैंड ने भारत को अपनी स्थिति से अवगत कराया है। इस पर उन्होंने कहा कि वह इस मामले को हैंडल करने वालों में शामिल नहीं थे, क्योंकि इसे पिछली सरकार मुख्य रूप से मैनेज कर रही थी।

पीटर्स ने कहा, “मैं यहाँ नहीं था। इसे पिछली सरकार ने हैंडल किया था। कभी-कभी जब आप फ़ाइव-आईज़ की जानकारी सुन रहे होते हैं तो आप इसे बस सुन रहे होते हैं और कुछ नहीं कह रहे होते हैं। आप इसका मूल्य या गुणवत्ता नहीं जानते, लेकिन आप इसे पाकर प्रसन्न हैं। आप इसकी अहमियत नहीं जानते, लेकिन बहुत-बहुत महत्वपूर्ण जानकारी जो मायने रखती है।”

उन्होंने कहा, “एक प्रशिक्षित वकील के रूप में मैं ठीक से देखता हूँ कि मामला कहाँ है? सबूत कहाँ है? अभी, जाँच के परिणाम कहाँ हैं? खैर, अभी कुछ नहीं है।” बता दें कि फाइव-आइज़ के किसी पार्टनर द्वारा खालिस्तानी आतंकी निज्जर की हत्या के मामले में कनाडा के दावों पर खुले तौर पर सवाल उठाने का पहला उदाहरण है।

दरअसल, निज्जर भारत द्वारा नामित एक आतंकी था। उसकी हत्या 18 जून 2023 की शाम को ब्रिटिश कोलंबिया के सरे शहर में स्थित एक गुरुद्वारे से बाहर गोली मारकर कर दी गई थी। उसकी मौत के बाद भारत और कनाडा के बीच राजनयिक विवाद पैदा हो गया था। यहाँ तक कि भारत ने कनाडा के कई राजनयिकों को दिल्ली से निकाल दिया था।

पिछले साल सितंबर में कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने निज्जर की हत्या में भारत की संलिप्तता का निराधार आरोप लगाया था। इसे भारत ने बेतुका और मनगढंत कहकर खारिज कर दिया था। भारत के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, कनाडा इस हत्या पर अपने दावे को साबित करने के लिए कोई सबूत पेश नहीं कर पाया है।

वहीं, लगभग 9 महीने से इस मामले की जाँच कर रही कनाडा की रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (आरसीएमपी) ने आतंकी निज्जर की हत्या के संबंध में अभी तक किसी संदिग्ध का नाम नहीं लिया है। पुलिस ने इस मामले में अभी तक किसी की गिरफ्तारी भी नहीं की है। इसको लेकर भर कनाडा सरकार के दावों पर सवाल खड़ा हो रहे हैं।

सुलेमान ने 8 साल की हिन्दू बच्ची को कमरे में बंद किया, चीख-पुकार के बाद परिजनों ने खुलवाया दरवाजा तो रोती हुई निकली बाहर: रेप की कोशिश के बाद गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में एक 8 साल की नाबालिग हिन्दू बच्ची से छेड़खानी का मामला सामने आया है। छेड़खानी का आरोप लगभग 20 वर्षीय सुलेमान पर लगा है। सुलेमान ने बच्ची को अपने कमरे में बंद कर लिया था। पीड़िता के परिजनों ने दरवाजा खुलवा कर उसे बचाया। घटना शनिवार (9 मार्च, 2024) की है। पुलिस में मामले में FIR दर्ज कर ली। सुलेमान को गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया गया है। पीड़िता के पिता ने ऑपइंडिया को बताया कि सुलेमान के घर वाले केस वापस लेने के लिए कह रहे हैं।

यह मामला गाजियाबाद जिले के थाना क्षेत्र कौशाम्बी का है। यहाँ 8 वर्षीया पीड़िता अपने छोटे भाई और माता-पिता के साथ रहती है। परिवार का गुजारा परचून की दुकान से होता है जिसे पीड़िता के पिता सँभालते हैं। पीड़िता की माँ ने रविवार (10 मार्च, 2024) को पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में बताया गया है कि उनके पड़ोस में सलमान (सुलेमान) नाम का युवक किराए पर रहता है। वही पिछले काफी समय से पीड़िता से छेड़खानी करता आ रहा था। सुलेमान की करतूत पीड़िता ने अपने परिजनों को भी बता रखी थी। हालाँकि पीड़िता के परिजनों को इस पर शुरुआत में यकीन नहीं हुआ था।

शिकायत में आगे बताया गया है कि शनिवार (9 मार्च) को शाम लगभग 5 बजे सुलेमान ने पीड़िता को अपने कमरे में बंद कर लिया। पीड़िता के 5 वर्षीय छोटे भाई ने घर आ कर इस हरकत की जानकारी अपनी माँ को दी। जब पीड़िता की माँ सुलेमान के कमरे पर पहुँची तो वहाँ दरवाजा बंद था। दरवाजा खुलवाने पर बच्ची रोते हुए बाहर निकली। पूछने पर बच्ची ने बताया कि सुलेमान ने उसके साथ गलत हरकत की है। आखिरकार पीड़िता के परिजनों ने पुलिस में शिकायत दी और सुलेमान पर कड़ी कार्रवाई की माँग की।

पुलिस ने पीड़िता की माँ की शिकायत पर सुलेमान के खिलाफ IPC की धारा 354 और पॉक्सो एक्ट की के सेक्शन 9m/10 के तहत FIR दर्ज कर ली। 11 मार्च (सोमवार) को गाजियाबाद पुलिस ने बताया कि आरोपित सुलेमान को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस के मुताबिक, मामला नाबालिग बच्ची और 2 अलग-अलग समुदायों से जुड़ा था जिसके चलते पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई की है। फिलहाल इस केस में आगे की जाँच व कानूनी कार्रवाई की जा रही है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

ऑपइंडिया ने बच्ची के पिता से बात की। उन्होंने बताया कि वो पुलिस कार्रवाई से संतुष्ट हैं। पीड़िता के परिजनों ने हमें बताया कि सुलेमान के घर वाले उनसे केस वापस लेने के लिए बोल रहे थे, हालाँकि बच्ची के परिजनों ने उन्हें अपने बजाय कोर्ट में गुहार लगाने की सलाह दी है। हमें आगे बताया गया कि सुलेमान मूलतः उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले का है। वह आनंद विहार बस अड्डे और रेलवे स्टेशन के पास घड़ियाँ और मोबाइल एसेसरीज आदि बेचता है। बच्ची के घर वालों का यह भी दावा है कि सुलेमान अक्सर नशे में धुत रहता था।

‘फ्रांस अल्लाह का… अल्लाह के सामने समर्पण करो’: रमजान शुरू होते ही ईसाइयों के कब्रिस्तान, चर्च और युद्ध स्मारक पर पोत डाले इस्लामी नारे, लोगों में भारी गुस्सा

मुस्लिमों के रमजान का महीना शुरू होते ही फ्रांस के एक कब्रिस्तान में लगभग साठ कब्रों पर ‘अल्लाह के सामने समर्पण करें’, ‘फ्रांस पहले से ही अल्लाह का है’ और ‘गैर-मुस्लिमों को रमजान मुबारक’ आदि लिखे मिले हैं। यह कब्र ईसाइयों की बताई जा रही है। इस घटना के पास आसपास के लोगों में गुस्से की लहर दौड़ गई है।

दरअसल, 11 मार्च 2024 (सोमवार) की सुबह पेरीगॉर्ड वर्ट के दॉरदॉग्ने में क्लेरमोंट-डी’एक्सीड्यूइल कब्रिस्तान में 58 कब्रों पर इस तरह इस्लामी बातें लिखी मिलीं। माना जा रहा है कि इस घटना को रविवार (10 मार्च 2024) की रात को अंजाम दिया गया होगा। हालाँकि, इस पर घटना के अगले दिन मेयर क्लाउड एमरी का ध्यान गया।

जिन जगहों पर इस तरह कट्टरपंथी इस्लामी नारे लिखे गए हैं, उनमें कब्र, युद्ध स्मारक, चर्च का दरवाजा, सूली पर चढ़े ईसा मसीह की प्रतिमा वाली जगह और एक फव्वारा शामिल हैं। एक कब्र के किनारे बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा है, ‘फ्रांस पहले से ही अल्लाह का है’, जबकि दूसरे कब्र पर लिखा है, ‘गैर-मुसलमानों, रमज़ान मुबारक हो।’

इसके अलावा, कम-से-कम कब्रों पर ‘GWER’ लिखा मिला है। Gwer का अल्जीरियाई अरबी में अनुवाद ‘श्वेत व्यक्ति, पश्चिमी या गैर-मुस्लिम’ होता है। इतना ही नहीं, कब्रिस्तान से लगभग 300 मीटर की दूरी पर स्थित एक चर्च को निशाना बनाया गया और उसके लकड़ी के दरवाजे पर ‘रमजान मुबारक’ लिख दिया गया।

मेयर एमरी जब सोमवार की सुबह साढ़े आठ बजे कब्रिस्तान पहुँचे तो उन्होंने यह परेशान करने वाली घटना देखी। उन्होंने फ़्रांसइन्फो में भी कुछ ऐसा ही देखा। इसके बाद उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचित किया। मेयर ने कहा, “इस तरह के छोटे शहर में यह अजीब है। मैंने सोचा कि यह सिर्फ दूसरी जगहों पर होता है।” पेरिग्यूक्स के सरकारी अभियोजक ने इसकी की जाँच शुरू कर दी है।

पेरीगॉर्ड वर्ट के निवासी अपने प्रियजनों को कब्रिस्तान में दफनाते हैं और उनमें से कई लोग इस घटना से स्तब्ध हैं और इससे उन्हें जबरदस्त आघात लगा है। एक स्थानीय व्यक्ति ने कहा, “मैंने अभी-अभी ये टैग खोजे हैं और यह मेरी रीढ़ में सिहरन पैदा कर देता है। जब मैं इसे पढ़ता हूँ तो मुझे डर हो जाता है। यह शहर के लिए एक आघात है।”

एसओएस कैल्वायरेस एसोसिएशन के एलेक्जेंडर कैले ने कहा, “लोग अपने पूर्वजों, अपने बुजुर्गों की कब्रों को देखने आए थे, जो शाश्वत निद्रा में थे। इसे नुकसान पहुँचाया गया।” उन्होंने कहा, “जो महत्वपूर्ण है वह प्रतीक है। हम युद्ध स्मारक की बात कर रहे हैं। हम उन लोगों के बारे में कह रहे हैं, जिन्होंने फ्रांस को आज़ाद कराने की लड़ाई लड़ी। लोग वास्तव में क्रोधित हैं, स्तब्ध और कुछ तो सदमे में भी हैं।”

एक अन्य व्यक्ति ने बताया, “मुझे इस पर विश्वास नहीं हुआ। एकदम नहीं। ईमानदारी से कहूँ तो मैंने इसे एक अफवाह माना। मुझे आशा है कि हम लिखने वाले को ढूंढ लेंगे, जिसने यह सब किया है। मैं एक अनाथ बच्चे को पालने वाले परिवार में बड़ा हुआ हूँ, जहाँ उन्होंने सम्मान सिखाया। भले ही आप आस्तिक या किसी अन्य धर्म के हों, आपको सम्मान करना चाहिए।”

शूटिंग के लिए नहीं मिलते पुराने स्टेशन, सब फैंसी हो गए: किरण राव की शिकायत, नेटिजन्स बोले- विकास देख रहे हो

लापता लेडीज की डायरेक्टर किरण राव ने हाल में द लल्लनटॉप को दिए इंटरव्यू में आजकल के रेलवे स्टेशनों को लेकर एक शिकायत की। किरण राव ने कहा कि आजकल बहुत ही ज्यादा फैंसी रेलवे स्टेशन बन गए हैं पुराने समय वाला स्टेशन खोजने में बड़ी समस्या होती है। इस वीडियो को अब सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है और दिखाया जा रहा है कि नरेंद्र मोदी सरकार में स्टेशनों की तस्वीर कैसे बदल रही है।

तो, लल्लनटॉप पर मौजूद किरण राव के 53 मिनट 12 सेकेंड के वीडियो में किरण राव 23 मिनट 20 सेकेंड के बाद बताती हैं कि उन्होंने फिल्म के सीन कहाँ-कहाँ रिकॉर्ड किए। इसी दौरान उन्होंने बताया कि उन्होंने फिल्म के सीन नासिक में शूट किए थे- योला और कानेगाँव में।

उन्होंने बताया कि उन्हें 2001 के अनुसार रेलवे स्टेशन चाहिए था। लेकिन आजकल सारे स्टेशन फैंसी बनाने की कोशिश हो रही है। सब कुछ बदल रहा है जिसमें नई टाइलिंग वगैरह सब है और उनको फिल्म के लिए पुराने स्टेशन चाहिए थे। इसके बाद सौरभ द्विवेदी उन्हें टोंकते नजर आते हैं- “लोग आपकी यही क्लिप निकालेंगे कि देखों यहाँ स्टेशन बन रहे हैं इन्हें इससे भी दिक्कत है।” इसमें किरण राव कहती हैं कि अच्छा है कि इसे हटा ही देना।

अब इस वीडियो को शेयर करके नरेंद्र मोदी के काल में हुआ भारत का विकास बताया जा रहा है। यूजर्स कह रहे हैं कि एक बार विकास की स्पीड देखो। भारत की बड़ी डायरेक्टर को शूटिंग के लिए अब पुराने, गंदे रेलवे स्टेशन नहीं मिल पा रहे हैं। हर स्टेशन को रीडेवलप किया जा चुका है।

एक अन्य यूजर इस बात पर गौर करवा रही हैं कि एक समय में आमिर खान की पत्नी किरण राव भारत में रहने से डरती थीं। अब वहीं किरण राव हैं जो कहती हैं कि लापता ले़डीज के लिए उन्हें पुराने रेलवे स्टेशन खोजने में दिक्कत हुई क्योंकि सब फैंसी हो गए हैं और फिल्म 90 के दौर की है। ये बदलाव है जो मोदी ने किया है।

बता दें कि किरण राव की फिल्म लापता लेडीज को रिलीज हुए 12 दिन हो गए हैं। 12वें दिन फिलम ने 33 लाख रुपए कारोबार किया जिसके बाद इसका कुल बॉक्स ऑफिस कलेक्शन 9.38 करोड़ रुपए हो गया है। इस फिल्म को 5 करोड़ रुपए की लागत में बनाया गया है। फिल्म की कहानी 2 नई नवेली दुल्हनों की अदला-बदली पर बनी है जो कि स्टेशन पर हो जाती है। फिल्म में स्पर्श श्रीवास्तव, नितांशी गोयल और प्रतिभा जैसे सितारे हैं। रवि किशन भी फिल्म में मुख्य भूमिका में हैं।

नहीं हो रही मोदी सरकार से कोई दिक्कत, कॉन्ग्रेसी CM रेवंत रेड्डी ने ध्वस्त किया आरफा का एजेंडा: प्रोपेगेंडा पत्रकार करती रही कोशिश

प्रोपेगेंडा पोर्टल द वायर की युट्यूबर आरफा खानम शेरवानी तेलंगाना के कॉन्ग्रेसी सीएम रेवंत रेड्डी से मात खा गईं। एक इंटरव्यू में आरफा ने काफी कोशिश की कि वह CM रेड्डी से भाजपा की केंद्र सरकार की आलोचना करवाएँ, लेकिन असफल रहीं। उन्होंने कई बार यह प्रयास किया लेकिन पीएम मोदी को बड़े भाई बताने वाले रेवंत ने उनकी चालों को फेल कर दिया।

आरफा ने CM रेवंत रेड्डी के साथ एक 40 मिनट लंबा इंटरव्यू किया है। CM रेड्डी ने इस दौरान उनसे कई मुद्दों पर बात की। उन्होंने इस इंटरव्यू के दौरान पीएम मोदी की आलोचना नहीं की और स्पष्ट किया कि उन्होंने हाल ही में पीएम मोदी को बड़े भाई का दर्जा क्यों कहा था।

केंद्र सरकार से तेलंगाना को मिलने वाले फंड को लेकर आरफा ने CM रेड्डी से एक प्रश्न पूछा। आरफा ने पूछा कि क्या आपको केंद्र से फंड लेने के लिए मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है? इस पर सीएम रेडी ने उनकी बात नकार दी।

सीएम रेड्डी ने कहा, “नहीं अभी तो शुरुआत है, इतना जल्दी मैं सीधा-सीधा मैं टिप्पणी नहीं करूँगा। हमें आज तक तो कोई दिक्कत नहीं आई है, जो हमने केंद्र से माँगा है, मिला है। मुझे उनसे कोई शिकायत नहीं है। बाद में क्या होगा, उसका तब देखेंगे।” आप यह बातचीत इस वीडियो में 29:55 सेकंड से सुन सकते हैं।

इसके बाद आरफा ने फिर कोशिश की। आरफा ने दूसरे प्रदेशों (केरल, बंगाल और कर्नाटक) का उदाहरण देकर सीएम रेड्डी से केंद्र को लेकर टिप्पणी चाही। इसमें भी आरफा फेल हो गईं। सीएम रेड्डी ने फिर स्पष्ट किया, “अभी तक तो केंद्र सरकार से हमें कोई दिक्कत नहीं आई है, अगर केंद्र सरकार से कोई दिक्कत आएगी तो हम बता देंगे कि यहाँ-यहाँ समस्या हो रही है।”

आरफा ने सीएम रेड्डी से कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी की मीडिया को लेकर कही गई बात का जिक्र भी किया। गौरतलब है कि राहुल गाँधी लगातार मीडिया पर कवरेज में पक्षपात का आरोप लगाते रहे हैं। इस पर भी आरफा की दाल नहीं गली। सीएम रेड्डी ने स्पष्ट रूप से कहा कि चुनाव कभी भी मीडिया के सहारे नहीं जीते जाते।

इसके अलावा सीएम रेड्डी ने पूरे इंटरव्यू के दौरान कहीं पर भी पीएम मोदी या अन्य किसी भाजपा नेता की निजी रूप से आलोचना नहीं की। हालाँकि, आरफा ने इसकी खूब कोशिश की लेकिन विफल रहीं।

गुलाम-चुहिया की मदद से हिन्दू लड़की को ले भागा आसिब; साजिश में इजहार भी शामिल… घर से गहने और कैश भी गायब, बांदा पुलिस कर रही तलाश

उत्तर प्रदेश के बांदा जिले से ‘लव जिहाद’ का एक मामला सामने आया है। यहाँ एक 22 वर्षीया हिन्दू लड़की को अचानक घर से लापता हो गई। लड़की के परिजनों ने आसिब नाम के युवक पर पीड़िता के अपहरण का आरोप लगाया है। आसिब के साथ उसकी अम्मी और भाइयों को भी इस साजिश में शामिल बताया गया है। घटना शनिवार (9 मार्च, 2024) की है। पुलिस ने आसिब सहित कुल 5 लोगों पर FIR दर्ज कर ली है। आरिब की गिरफ्तारी के साथ पीड़िता को सही-सलामत बरामद करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

यह घटना बांदा जिले के थाना क्षेत्र नरैनी की है। रविवार (10 मार्च, 2024) को पीड़िता के भाई ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में बताया गया है कि 9 मार्च की रात लगभग 11:30 पर घर के सभी लोग सो गए थे। तभी शिकायतकर्ता की 22 वर्षीया बहन घर से कहीं चली गई। जाते हुए लड़की 1 लाख रुपए कैश और 2 लाख रुपए मूल्य के जेवर ले कर गई है। घर के लोगों ने पीड़िता की काफी खोजबीन की लेकिन उसका कुछ पता नहीं चला।

शिकायत में बताया गया है कि अगले दिन पीड़िता की बड़ी बहन ने उसे फोन किया। पीड़िता ने फोन उठाया और रोते हुए आसिब पर खुद को बरगला और साजिश रच कर खुद को भगा लाने का आरोप लगाया। शिकायतकर्ता ने आसिब की अम्मी चुहिया और उसके भाइयों इजहार, गुलाम, मुन्ना पर भी इस साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया है। पीड़िता और आरोपित एक ही गाँव के निवासी है। पुलिस ने इस मामले में नामजद किए गए सभी 5 आरोपितों पर FIR दर्ज कर ली है। इन सभी पर IPC की धारा 366 और 120-बी के तहत कार्रवाई की गई है।

मामले की जाँच नरैनी थाने के सब इंस्पेक्टर कमल सिंह को सौंपी गई है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। ऑपइंडिया से बात करते हुए पीड़िता के भाई ने बताया कि 3 दिन से अधिक समय बीत जाने पर भी लड़की का कहीं कोई अता-पता नहीं है। आरोपित आसिब 12वीं फेल होने के बाद पेंटिंग का काम करता है। जब पीड़िता अपनी बहन के साथ कहीं घूमने गई थी तब उसकी जान-पहचान आसिब से हुई थी। अपने गाँव को मुस्लिम बाहुल्य बताते हुए पीड़िता के भाई ने बताया कि उनकी मदद कोई नहीं कर रहा है उल्टे पीठ पीछे कई लोग मजे ले रहे हैं।

16 साल में 13 सरकारें, जगह-जगह उगीं दरगाहें, चीन का हस्तक्षेप… नेपाल में हिन्दू राष्ट्र के लिए तेज हुआ आंदोलन, लोग बोले – नेताओं ने किए झूठे वादे, हर तरफ भ्रष्टाचार

नए-नवेले वामपंथी बने नेपाल को एक बार फिर से हिन्दू राष्ट्र की माँग जोर पकड़ने लगी है। यहाँ की जनता पुराने राजतंत्र को याद कर रही है। प्रदर्शनकारियों के कई समूह एक बार फिर से पुराने समय को लाने का संकल्प ले रहे हैं। नेपाल की अधिकतर जनता भी इन प्रदर्शनकरियों के साथ खड़ी दिख रही है। लोगों का मानना है कि वर्तमान समय में भ्र्ष्टाचार और कुव्यवस्था का बोलबोला है जिसे फ़ौरन बदलने की जरूरत है। हिन्दूराष्ट्र बनाने के लिए साल 2023 से शुरू हुए और अब जोर पकड़ चुके इस आंदोलन में नेपाल का हर वर्ग भागीदारी कर रहा है जिसमें व्यापारी, छात्र, नेता और यहाँ तक कि सरकारी कर्मचारी भी शामिल हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बहुत ही कम समय में नेपाली जनता वहाँ की राजनैतिक पार्टियों और नेताओं से ऊब चुकी है। इन नेताओं ने देश की सत्ता तमाम झूठे वादे कर के हासिल की थी। इसमें शिक्षा, भ्र्ष्टाचार मुक्त शासन, बेरोजगारी, बेहतर स्वास्थ्य और सर्वांगीण विकास जैसे वादे शामिल थे। हालाँकि डेढ़ दशक से अधिक समय बीत जाने पर उनमें से किसी भी वादे पर लोगों ने अपने नेताओं को खरा उतरते नहीं देखा। उल्टे अब लोग इन नेताओं की खोखली बातों और भ्रष्टाचार आदि से तंग आ चुके हैं। अब एक बार फिर से हिन्दू राष्ट्र की माँग को ले कर वहाँ की जनता आंदोलित है।

16 साल पहले तक नेपाल में राजशाही रही थी। तब ज्ञानेंद्र सिंह देश की सर्वोच्च सत्ता हुआ करते थे। देश में मची उथल-पुथल के दौरान उन्होंने सरकार को भंग कर दिया था और कई राजनेताओं को पत्रकारों सहित जेल भेज दिया था। देश में मिलिट्री शासन भी लगा दिया गया था। इस दौरान बड़ी संख्या में खून-खराबा हुआ था। आखिरकार ज्ञानेंद्र सिंह ने कदम पीछे खींच लिए थे और यहीं से नेपाल में कथित लोकतंत्र की शुरुआत हुई थी। साल 2008 में हुए इस बदलाव के बाद से अब तक नेपाल में 13 सरकारें बन चुकी हैं।

हालाँकि, ये सरकारें जन-अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतरीं। उलटे अब लोगों को सत्ता की ताकत से तंग भी किया जा रहा है। राजधानी काठमांडू में हिन्दूराष्ट्र के समर्थन में एक बड़ा प्रदर्शन हु। तब हजारों लोगों के इस प्रदर्शन में शामिल रुद्रराज ने मीडिया से कहा था कि नेपाल में हुए बदलाव से लोग अपने पारम्परिक मूल्यों को खोते जा रहे हैं। इस प्रदर्शन में लोग हाथों में नेपाल का झंडा और राजा ज्ञानेंद्र की तस्वीरें ले कर चल रहे थे। हालाँकि नेपाल की सबसे बड़ी राजनैतिक पार्टी नेपाली कॉन्ग्रेस के नेता नारायण प्रकाश सऊद ने देश के फिर से हिन्दूराष्ट्र और राजतन्त्र जैसी संभावनाओं से इंकार किया है।

ऑपइंडिया ने पूरे नेपाल में हिंदूवादी मूवमेंट चला रही हिन्दू सम्राट सेना के केंद्रीय अध्यक्ष राजेश कुमार यादव से बात की। उन्होंने हमें बताया कि हिन्दुओं को आपस में वामपंथी और दक्षिणपंथी के मुद्दों पर उलझा कर चीनियों और इस्लामी ताकतों ने अपना उल्लू सीधा किया है। राजेश ने हमें आगे बताया कि अब एक बार फिर से नेपाल को हिन्दूराष्ट्र बनाने की माँग शुरू हो चुकी है तो इसे अंजाम तक लाया जाएगा। वहीं नेपाल के ही कृष्ण कुमार ने ऑपइंडिया से बातचीत में बताया कि जब साल 2008 में नेपाल का नया संविधान बना था तब लोग जागरूक नहीं थे और भाईचारे के नशे में थे। कृष्ण कुमार का कहना है कि अब लोगों ने कथित भाईचारे का खुमार उतर चुका है क्योंकि वो आए दिन हमलों के शिकार हो रहे है।

साल 2022 में ऑपइंडिया ने भारत की सीमा से लगने वाले नेपाल के दाँग और कपिलवस्तु जिलों का दौरा किया था। इस दौरान पता इस बात का खुलासा हुआ था कि न सिर्फ भारत बल्कि नेपाल की तरफ के भी कई सीमावर्ती गाँव और शहर मुस्लिम बाहुल्य हो चुके हैं। हालात ऐसे मिले कि कुछ गाँवों में प्रधानी का चुनाव लड़ने के लिए हिन्दू प्रत्याशी ही नहीं खड़े हुए थे। इसके अलावा सीमा के दोनों तरफ सैकड़ों की तादाद में दरगाहें, मस्जिदें और अन्य इबादतगाहें बना ली गईं थीं। हालाँकि ऑपइंडिया की खबर का असर हुआ और जाँच के बाद भारत की सीमा पर बने तमाम अवैध मदरसों को बंद करने का आदेश दिया गया है। तब खुद नेपाल के तत्कालीन सांसद अभिषेक प्रताप शाह ने हालत को विस्फोटक जैसा बताते भारत और नेपाल दोनों को सीमावर्ती क्षेत्रों पर ध्यान देने की जरूरत बताई थी।

उत्तराखंड के UCC कानून को मिली राष्ट्रपति मुर्मू की मंजूरी, बन गया कानून, CM धामी ने कहा: गौरव का क्षण

उत्तराखंड के समान नागरिक संहिता (UCC) कानून को देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपनी मंजूरी दे दी है। यह मंजूरी 11 मार्च, 2024 को दी गई है। राष्ट्रपति मुर्मू द्वारा UCC कानून को मंजूरी देने की जानकारी उत्तराखंड के गजट के माध्यम से दी गई है। अब उत्तराखंड में UCC ने क़ानून का रूप ले लिया है।

उत्तराखंड सरकार द्वारा जारी किए गए गजट में बताया गया है, “भारत के संविधान के अनुच्छेद 201 के अधीन माननीय राष्ट्रपति ने उत्तराखण्ड विधान सभा द्वारा पारित ‘समान नागरिक संहिता, उत्तराखण्ड, 2024 विधेयक पर दिनाँक 11 मार्च, 2024 को स्वीकृति प्रदान की है।”

उत्तराखंड के UCC कानून को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने पर राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रसन्नता जताई है। उन्होंने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “हम सभी प्रदेशवासियों के लिए यह अत्यंत हर्ष और गौरव का क्षण है कि हमारी सरकार द्वारा उत्तराखण्ड विधानसभा में पारित समान नागरिक संहिता विधेयक को आदरणीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु जी ने अपनी मंजूरी प्रदान की है। निश्चित तौर पर प्रदेश में समान नागरिक संहिता कानून लागू होने से सभी नागरिकों को समान अधिकार मिलने के साथ ही महिलाओं पर हो रहे उत्पीड़न पर भी लगाम लगेगी।”

आगे उन्होंने आगे लिखा, “प्रदेश में सामाजिक समानता की सार्थकता को सिद्ध करते हुए समरसता को बढ़ावा देने में यूनिफार्म सिविल कोड अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विजन के अनुरूप हमारी सरकार नागरिकों के हितों के संरक्षण और उत्तराखण्ड के मूल स्वरुप को बनाए रखने के लिए संकल्पित है।”

गौरतलब है कि उत्तराखंड विधानसभा में समान नागरिक संहिता का विधेयक 7 फरवरी को एक विशेष सत्र में पास किया गया था। इसके बाद यह मंजूरी के लिए भेजा गया था। अब, जबकि इसे राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई है, यह राज्य में जल्द ही लागू हो जाएगा। उत्तराखंड UCC लागू करने वाला अब देश का पहला राज्य होगा।

इस UCC कानून को एक पाँच सदस्यीय पैनल ने तैयार किया है। इस पैनल की अध्यक्षता रिटायर्ड जस्टिस रंजना देसाई कर रही थी। उनके पैनल ने पिछले माह ही यह रिपोर्ट धामी कैबिनेट को सौंपी थी, इसके बाद कानून विधानसभा में लाकर पारित किया गया था।

गौरतलब है कि UCC कानून में विवाह, तलाक और लिव इन से सम्बंधित कई नियम बनाए गए हैं। उत्तराखंड में लिव इन में रहने वालों को भी इस कानून के लागू होने के बाद सरकार को सूचित करना होगा। इसके अलावा राज्य में बहुविवाह अदि पर भी रोक लग सकेगी।