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बचपन में पिता का साया उठा, माँ ने किया लालन-पालन: जानिए कौन हैं शीना रानी, जिनके नेतृत्व में अग्नि-5 का हुआ सफल परीक्षण

भारत ने ‘मिशन दिव्यास्त्र’ के तहत अग्नि-5 मिसाइल का सोमवार (11 मार्च 2024) को सफल परीक्षण किया। लगभग 5,000 किलोमीटर की रेंज वाली यह अंतर-महाद्वीपीय मिसाइल ‘मल्टीपल इंडिपेंडेंट टारगेटेबल री-एंट्री व्हीकल’ (MIRV) टेक्नोलॉजी के साथ देश में विकसित की गई। इसमें रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की वैज्ञानिक शीना रानी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

इस पूरे प्रोजेक्ट को DRDO की महिला वैज्ञानिक शीना रानी ने लीड किया है। वरिष्ठ वैज्ञानिक शीना रानी की सफलता को देखते हुए को लोगों ने उन्हें ‘दिव्य पुत्री’ नाम दिया है। हैदराबाद के DRDO की हाईटेक लैब में कार्यरत 57 वर्षीय शीना रानी के काम के प्रति लगन और उत्साह के कारण उनके सहकर्मी उन्हें ‘पावरहाउस ऑफ एनर्जी’ के नाम से भी बुलाते हैं।

केरल के तिरुवनंतपुरम की रहने वाली शीना रानी ‘अग्नि पुत्री’ के नाम से प्रसिद्ध मशहूर मिसाइल वुमेन टेसी थॉमस के नक्श-ए-कदम पर चलती हैं। टेसी थॉमस ने अग्नि सीरीज की मिसाइलों के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। अब शीना रानी उसी विरासत को आगे बढ़ा रही हैं। शीना भारत के ‘मिसाइल मैन’ कहे जाने वाले पूर्व राष्ट्रपति एवं वैज्ञानिक डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम को आदर्श मानती हैं।  

शीना रानी का जन्म केरल के तिरुवनंतपुरम में हुआ है। जब वह 10वीं कक्षा में थीं तब उनके पिता का निधन हो गया। इसके बाद उनकी माँ ने उनका पालन-पोषण किया। शीना रानी का कहना है कि माँ ही उनकी और उनकी बहन के जीवन की स्तंभ हैं। उन्होंने तिरुवनंतपुरम के कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन में इंजीनियरिंग की है। उन्हें कंप्यूटर विज्ञान में भी विशेषज्ञता हासिल है।

शीना रानी ने भारत की अग्रणी नागरिक रॉकेटरी प्रयोगशाला, विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (VSSC) में आठ वर्षों तक काम किया। साल 1998 में राजस्थान के पोखरण में परमाणु परीक्षण के बाद वह DRDO से जुड़ी थीं। साल 1999 से वह अग्नि मिसाइल कार्यक्रम से जुड़ी हुई हैं। MIRV तकनीक वाली अग्नि-5 मिसाइल के विकास में शीना रानी की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है।

शीना रानी का कहना है, “मैं DRDO की एक प्राउड मेंबर हूँ, जो भारत की रक्षा में मदद करती है।” उनके पति पी.एस.आर.एस. शास्त्री ने भी मिसाइलों पर DRDO में उनके साथ काम किया है। साल 2019 में इसरो द्वारा लॉन्च किए गए कौटिल्य उपग्रह के प्रभारी भी थे। उन्हें भारत के मिसाइल मैन, पूर्व डीआरडीओ प्रमुख और भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम से प्रेरणा मिली थी।

दरअसल, डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम ने भी अपना करियर विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र से ही शुरू किया था। इसके बाद वह इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम का नेतृत्व करने के लिए DRDO में शामिल हुए थे। इस दौरान शीना रानी और उनके पति को डॉक्टर कलाम के साथ काम करने का मौका मिला था।

बताते चलें कि MIRV तकनीक सिर्फ अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन के पास ही है। इस मिसाइल को जमीन से या समुद्र से या फिर पनडुब्बी से भी लॉन्च किया जा सकता है। MIRV तकनीक की खास बात ये है कि इसकी मदद से कई हथियार ले जाए जा सकते हैं और अलग-अलग स्पीड और अलग-अलग दिशाओं में इन हथियारों से टारगेट को निशाना बनाया जा सकता है। 


जय माता दी! वादा पूरा करने के लिए जरूर लड़ूँगा चुनाव: भोजपुरी अभिनेता पवन सिंह का ऐलान, BJP ने आसनसोल की दी थी कमान

भोजपुरी अभिनेता और भारतीय जनता पार्टी के नेता पवन सिंह लोकसभा चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने ये ऐलान अपने सोशल मीडिया अकॉउंट एक्स के जरिए किया है। अपने अकॉउंट से उन्होंने कहा कि जनता जनार्दन से वादा पूरा करने के लिए वो चुनाव लड़ेंगे।

13 मार्च 2024 को करीबन 1:30 बजे पवन सिंह ने अपने एक्स अकॉउंट पर लिखा- “मैं अपने समाज जनता जनार्दन और माँ से किया हुआ वादा पूरा करने के लिए चुनाव लड़ूँगा। आप सभी का आशीर्वाद एव सहयोग अपेक्षित है। जय माता दी।”

बता दें कि इससे पहले 2 मार्च को भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल के आसनसोल से अपना प्रत्याशी घोषित किया था। इसके बाद उन्होंने पोस्टर शेयर करके पार्टी का धन्यवाद दिया था। पोस्ट में वह हाथ जोड़े दिख रहे थे। साथ ही इसमें लिखा था- “मुझे लोकसभा क्षेत्र आसनसोल से उम्मीदवार बनाए जाने के लिए भारतीय जनता पार्टी के सभी महानुभावों का वंदन चंदन और अभिनंदन करता हूँ।”

इस ट्वीट पर जब हर कोई उन्हें बधाई देने लगा तो उसके अगले ही दिन उन्होंने चुनाव न लड़ने की बात कही। पवन सिंह ने कहा- “भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का दिल से आभार व्यक्त करता हूँ। पार्टी ने मुझेपर विश्वास करके आसनसोल का उम्मीदवार घोषित किया लेकिन किसी कारण वश मैं आसनसोल से नहीं लड़ पाऊँगा। इस ट्वीट के साथ उन्होंने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को भी अपने ट्वीट में टैग किया था।”

पवन सिंह की इस प्रतिक्रिया के बाद अलग अलग बातें होना शुरू हो गई थी। लेकिन अब जब उन्होंने दोबारा से चुनाव लड़ने का ऐलान किया है तो उनके फैंस खुश हैं और बढ़-चढ़कर उन्हें बधाइयाँ दे रहे हैं।

कॉन्ग्रेस ने जिस नेता को बनाया था बिहार सह-प्रभारी, उन्होंने थामा कमल का फूल: BJP में शामिल हुए कानपुर के पूर्व विधायक अजय कपूर

लोकसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में कॉन्ग्रेस को झटका लगा है। वहाँ पार्टी के बड़े नेता अजय कपूर ने कॉन्ग्रेस का हाथ छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का हाथ थाम लिया है। वह कॉन्ग्रेस में राष्ट्रीय सचिव के पद पर थे और बिहार के सह प्रभारी और पूर्व विधायक भी थे।

मौजूदा जानकारी के अनुसार, अजय कपूर किदवई नगर व उससे पूर्व गोविंद नगर विधानसभा क्षेत्र से तीन बार विधायक बने थे। 12 मार्च को उन्होंने अपने एक्स अकॉउंट से कॉन्ग्रेस नेता होने की जानकारी को हटा दिया था। वहीं आज भाजपा से जुड़ने के बाद उन्होंने इसे जीवन की नई शुरुआत बताया।

उन्होंने कहा, “देश के नेता और दुनिया के युग पुरुष मोदी जी के परिवार में शामिल होकर अभिभूत हूँ। सैंतीस साल तक कॉन्ग्रेस में मैंने अलग-अलग पद पर काम किया। लेकिन आज दुनिया के हर नागरिक को मोदी जी के परिवार में शामिल होकर देश के विकास में सहयोग करना होगा।”

गौरतलब है कि यूपी में अजय कपूर को कॉन्ग्रेस का कद्दावर नेता माना जाता था जो कि राहुल गाँधी, प्रियंका गाँधी के करीबी नेताओं में से एक थे। मगर अब वो बीजेपी से जुड़ गए हैं। वह यूपी विधानसभा के अध्यक्ष सतीश महाना के रिश्तेदार भी हैं। उनके बीजेपी में आने से पहले उनके दो भाई बीजेपी से जुड़े थे। इनमें से एक भाई विजय उद्यमी है। वहीं दूसरा भारतीय चेस फेडरेशन के अध्यक्ष संजय कपूर हैं।

ED के अधिकारियों पर करवाया हमला, अब गिरफ्त से बचने को जोड़ रहा हाथ-पैर: शेख शाहजहाँ की जमानत याचिका खारिज

पश्चिम बंगाल के संदेशखाली में महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न और जमीन कब्जाने के मामले में गिरफ्तार TMC से निलंबित नेता शाहजहाँ शेख की जमानत याचिका कलकत्ता हाई कोर्ट ने ठुकरा दी है। उसने यह जमानत राशन घोटाले के मामले में माँगी थी, जिसे कोर्ट ने देने से इंकार कर दिया।

पश्चिम बंगाल के करोड़ों के सार्वजनिक राशन घोटाला मामले में शेख शाहजहाँ ने गिरफ्तारी से बचने के लिए यह जमानत याचिका कलकत्ता हाई कोर्ट के सामने लगाई थी। इस मामले की जाँच ED कर रही है। ED उसे इस मामले में पूछताछ के लिए गिरफ्तार कर सकती है।

शाहजहाँ के वकील ने इस मामले में दावा किया कि ED द्वारा शाहजहाँ पर लगाए गए आरोप स्पष्ट नहीं है। उसने यह भी दावा किया कि शाहजहाँ के घर पर छापे के बाद भी ED पर्याप्त सबूत नहीं पेश कर सकी है। शाहजहाँ ने कोर्ट से दावा किया कि उसके खिलाफ कोई स्पष्ट सबूत नहीं है, इसलिए उसे इस मामले में गिरफ्तार ना किया जाए।

गौरलतब है कि इसी राशन घोटाला मामले में जब जनवरी, 2024 में ED की टीम शेख शाहजहाँ के घर संदेशखाली पहुँची थी, तब उन पर हमला हो गया था। शाहजहाँ ने ही यह हमला करवाया था। ED की टीम राशन घोटाला मामले में उससे पूछताछ करना चाहती थी।

इस हमले में ED के कुछ अधिकारी घायल हुए थे। कई को चोट आई थी और उनकी गाड़ियाँ भी तोड़ दी गईं थी। इसके बाद शेख शाहजहाँ यहाँ से भाग गया था। हालाँकि, जब एक माह बाद उसके कर्मों की कलाई क्झुली तो सामने आया कि उसकी कहानी और भी खतरनाक है।

उसके खिलाफ फरवरी में सन्देशखाली की महिलाओं ने आरोप लगाया था कि वह उनका यौन शोषण करता है। उस पर कई किसानों की जमीन कब्जे की शिकायतें भी दर्ज की गई हैं। उसे हाल ही में बंगाल पुलिस ने पकड़ कर CBI को सौंपा था। शेख लम्बे से समय ED के राडार पर है।

ED से ही शाहजहाँ बचना चाह रहा है। इसीलिए उसने कलकत्ता हाई कोर्ट से जमानत माँगी थी। उसकी याचिका को रद्द कर दिया गया। ED की तरफ से पेश हुए अफसर ने कहा कि शाहजहाँ जाँच में बिलकुल भी सहयोग नहीं कर रहा और साथ ही उसने ED पर हमला भी करवाया है।

इसी के साथ ही शाहजहाँ के बांग्लादेश में छात्र नेता होने का दावा किया गया है। पद्म श्री पुरष्कार से सम्मानित प्रोफ़ेसर नारायण चक्रबर्ती ने कहा है कि शेख शाहजहाँ का स्कूल प्रमाण पत्र बांग्लादेश का है। वह बांग्लादेश में बांग्लादेश नेशनल पार्टी का छात्र नेता था। यह पार्टी वहाँ कट्टर इस्लाम समर्थक मानी जाती है। नारायण चक्रबर्ती ने कहा है कि शेख शाहजहाँ बांग्लादेश से भारत में कैसे घुसा, इसकी जाँच करने की आवश्यकता है।

क्या CAA कानून लागू करने से इनकार कर सकती हैं राज्य सरकारें, जानिए क्या कहता है संविधान: ममता बनर्जी और विजयन के बयान के बाद उठ रहे हैं सवाल

केंद्र की मोदी सरकार ने सोमवार (11 मार्च 2024) को नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) को लागू कर द‍िया। इसके बाद पश्‍च‍िम बंगाल की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी और केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने इसे अपने-अपने राज्यों में लागू करने से इनकार कर दिया है। अब ऐसे में सवाल उठता है कि क्या कोई राज्य इस कानून को लागू करने से इनकार कर सकता है।

दरअसल, ममता बनर्जी ने मंगलवार (12 मार्च 2024) को कहा कि वह CAA बंगाल में लागू नहीं होने देंगी और ना ही बंगाल को डिटेंशन सेंटर बनने देंगी। उन्होंने कहा, “मैं सीएए लागू नहीं करने दूँगी। मैं लोगों के बुनियादी अधिकार छीनने नहीं दूँगी। इसके लिए मुझे अपनी जान भी कुर्बान करनी पड़ी तो मैं करूँगी।” ममता ने इस कानून को देश को बाँटने वाला बताया है।

ममता बनर्जी ने कहा, “आवेदन करते ही ऐसे लोग घुसपैठिये बन जाएँगे। यह अधिकार छीनने का खेल है। अगर आप आवेदन करते हैं तो इसकी कोई गारंटी नहीं है कि आपको नागरिकता मिलेगी या नहीं। आप अपनी संपत्ति खो देंगे। आप सरकारी योजनाओं से वंचित रहेंगे। आवेदन करने पर सारे नागरिक अधिकार छीन लिए जाएँगे। इस लिए आवेदन करने से पहले हजार बार सोचें। यह एनआरसी से जुड़ा है।”

अवैध घुसपैठियों का बचाव करते हुए ममता बनर्जी ने आगे कहा, “यह कहते हुए कि यह अधिनियम लोगों को परेशान करने के लिए बनाया गया है। संयुक्त राष्ट्र ने स्पष्ट रूप से कहा है कि शरणार्थियों को विस्थापित नहीं किया जाना चाहिए और किसी देश से बाहर नहीं निकाला जाना चाहिए। यह बुनियादी मानवता है। क्या हमने कभी देखा है कि धर्म के आधार पर नागरिकता दी जा रही है?”

वहीं, केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने भी कहा कि वे पहले ही दोहरा चुके हैं कि मुस्लिमों को दोयम दर्जे का नागरिक समझने वाले CAA कानून को केरल में किसी भी कीमत पर लागू नहीं होने देंगे। इस सांप्रदायिक कानून बताते हुए विजयन ने कहा कि इसके विरोध में पूरा केरल खड़ा नजर आएगा।

नागरिकता संशोधन अधिनियम दिसंबर 2019 में संसद के दोनों सदनों से पास हुआ था। इसके बाद देश भर में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए थे। इस कानून में पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के अल्पसंख्यक- हिंदू, सिख, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के प्रताड़ित लोगों को भारत की नागरिकता देने का प्रावधान है। इसके लिए शर्त है कि ये लोग 31 दिसंबर 2014 तक भारत आ गए हों।

लोकसभा चुनाव 2024 को देखते हुए ममता बनर्जी बंगाल में और पिनराई विजयन केरल में इसे किसी कीमत पर लागू नहीं होने की बात भले करते हों, लेकिन यह संभव नहीं है। संविधान के अनुसार, भारतीय राज्य CAA को लागू करने से इनकार नहीं कर सकते। क्योंकि, नागरिकता का मामला राज्य का नहीं, बल्कि केंद्र का मसला है और इस कानून को संसद ने पारित किया है।

सुप्रीम कोर्ट की वकील रीना एन सिंह का कहना है कि नागरिकता कानून संघ सूची के तहत आता है, ना कि राज्य सूची के अधीन। संविधान के अनुच्छेद 246 में संघ और राज्य के बीच शक्तियों का साफ तौर पर बँटवारा किया गया है। उनका कहना है कि भारतीय राज्यों को इसे लागू करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है। वही राज्य इसे लागू नहीं कर सकेंगे, जिन्हें इस कानून में अपवाद रखा गया है।

रीना सिंह कहती हैं, “अगर बंगाल और केरल की सरकार CAA लागू करने से इनकार करती हैं तो यह पूर्णत: असंवैधानिक होगा, क्योंकि सविंधान के अनुच्छेद 256 के अंतर्गत कोई भी राज्य संसद द्वारा पारित कानून को लागू करने से इनकार नहीं कर सकता।” उनका कहना है कि अगर किसी राज्य सरकार को लगता है कि आम लोगों के हित में नहीं है तो वह इसके खिलाफ कोर्ट जा सकती है।

रीना सिंह ममता बनर्जी और पिनराई विजयन द्वारा CAA को अपने-अपने राज्यों में लागू नहीं करने की बात को राजनीति से प्रेरित मानती हैं। उनका कहना है कि बंगाल तथा केरल की सरकारों के ऐसे बयान निरर्थक हैं। ऐसे बयान स्पष्ट करते हैं कि ये राज्य वोट बैंक की राजनीति के कारण इस तरह के बयान दे रहे हैं। इसकी कोई कानूनी अहमियत नहीं है।

बता दें कि CAA को संविधान की 7वीं अनुसूची के तहत लागू किया गया है। इन अनुसूची में रक्षा, विदेश, रेलवे, नागरिकता सहित ऐसे 97 विषय आते हैं। इन विषयों पर नियम-कानून बनाने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है। हालाँकि, केंद्र इसके लिए राज्य सरकारों से परामर्श ले सकता है, लेकिन उनकी बात मानने के लिए बाध्य नहीं है।

गौरतलब है कि CAA लागू करने के विरोध में कई संगठनों ने कोर्ट में याचिका डाल रखी हैं। CAA के खिलाफ ऐसी कुल 220 याचिकाएँ लंबित हैं। जिन लोगों एवं संगठनों ने CAA के खिलाफ याचिका दायर की हैं, उनमें केरल की मुस्लिम लीग, टीएमसी की महुआ मोइत्रा, कॉन्ग्रेस नेता जयराम रमेश एवं देबब्रत सैकिया, AIMIM सुप्रीमो असदुद्दीन ओवैसी, एनजीओ रिहाई मंच आदि शामिल हैं। CAA को चुनौती देने वाली केरल सरकार की भी एक याचिका लंबित है।

‘अगले आदेश तक रोको कार्रवाई’: पाकिस्तानी हिन्दुओं की झुग्गियाँ गिराने चले DDA के बुलडोजर पर हाईकोर्ट ने लगाया ब्रेक, लक्जरी दुकानों को नोटिस तक नहीं

दिल्ली हाईकोर्ट से पाकिस्तान के शरणार्थी हिन्दुओं को बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने दिल्ली विकास प्राधिकरण को आदेश दिया है कि वो मजनू का टीला पर रह रहे पाकिस्तानी शरणार्थियों के शिविर पर कोई दंडात्मक अथवा ध्वस्तीकरण की कार्रवाई न करें। DDA ने नोटिस भेज कर इस शिविर पर 6 मार्च को बुलडोजर चलाने की सूचना दी थी। फिलहाल इस मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च 2024 को तय की गई है। हाईकोर्ट के इस निर्णय पर शरणार्थियों ने ख़ुशी जताई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह सुनवाई जस्टिस जस्टिस मिनी पुष्करणा की बेंच में हुई। कोर्ट में पाकिस्तानी शरणार्थियों का पक्ष एडवोकेट रवि रंजन सिंह ने रखा। उन्होंने अदालत से माँग की है कि जब तक इन शरणार्थियों को रहने के लिए कोई वैकल्पिक जगह नहीं दे दी जाती तब तब उनको हटाना न्यायोचित नहीं होगा। वहीं अदालत में DDA की तरफ से पेश हुए वकील ने कार्रवाई के पीछे NGT (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) के आदेश को वजह बताया। दोनों पक्षों की दलीलें सुन कर अदालत ने फैसला शरणार्थियों के पक्ष में सुनाया।

अदालत ने अपने फैसले में साल 2013 में भारत के तत्कालीन एडिशनल सॉलिसिटर जनरल द्वारा दिए गए बयान का हवाला दिया। 29 मई 2013 को डब्ल्यू.पी. (सी) नंबर 3712/2013 के तहत जारी इस आदेश में कहा गया था कि पाकिस्तान से आए हिन्दुओं को हर प्रकार का सहयोग किया जाएगा। शरणार्थियों को अंतरिम राहत देते हुए हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई तक DDA को किसी भी प्रकार के ध्वस्तीकरण आदि न करने के आदेश दिए। सुनवाई के लिए अगली तारीख इसी महीने 19 मार्च को तय हुई है।

बताते चलें कि 8 मार्च को ऑपइंडिया ने अपनी ग्राउंड रिपोर्ट में बताया था कि कैसे यमुना क्षेत्र पर अतिक्रमण के नाम पर सिर्फ एकतरफा पाकिस्तानी शरणार्थियों को ही नोटिस थमाई गई थी। तब शरणार्थियों ने हमें DDA की वो नोटिस दिखाई थी जो उनके घरों पर चिपका दी गई थी। इस नोटिस में 8 तारीख तक उनकी बस्ती को ध्वस्त करने की बात कही गई थी। हालाँकि, बगल में गुरूद्वारे के रिवर व्यू चबूतरा और पूरा यमुना नदी के क्षेत्र में बने तिब्बती मार्किट में DDA द्वारा कोई नोटिस गई थी या नहीं इसकी जानकारी अभी तक सार्वजनिक नहीं हो पाई है।

CPM समर्थक वकील अब बनेंगे हाई कोर्ट के जज, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने की सिफारिश, कहा – ‘व्यक्ति की राजनीतिक पृष्ठभूमि उसे जज बनने से नहीं रोक सकती’

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने केरल उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में मनोज पुलम्बी माधवन की नियुक्ति का रास्ता साफ कर दिया है। माधवन का झुकाव वामपंथ की ओर रहा है। इसको देखते हुए उनकी नियुक्ति पर केंद्र सरकार के न्याय विभाग ने चिंता जताई थी। इसके बाद भी उनकी हो रही है।

CJI की अध्यक्षता वाली कॉलेजियम में डीवाई चंद्रचूड़ के अलावा न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति बीआर गवई भी शामिल थे। मनोज पुलम्बी माधवन की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट की कॉलेजियम ने कहा, “सिर्फ यह तथ्य कि उम्मीदवार की राजनीतिक पृष्ठभूमि रही है, सभी मामलों में पर्याप्त कारण नहीं हो सकता है।”

न्याय विभाग ने माधवन की नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए कहा था कि वे पहले सीपीआई (एम) पार्टी के समर्थक थे। इसके अतिरिक्त उन्होंने सरकारी वकील के रूप में कार्य किया है और उन्हें केरल की वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) सरकार ने नियुक्त किया था। यह जानकारी उनकी संभावित नियुक्ति के लिए मूल्यांकन प्रक्रिया के हिस्से के रूप में सामने लाई गई थी।

कॉलेजियम ने इन चिंताओं को ‘बेहद अस्पष्ट’ और अयोग्यता के लिए ‘अपर्याप्त’ बताते हुए खारिज कर दिया। कॉलेजियम ने कहा कि किसी उम्मीदवार की राजनीतिक पृष्ठभूमि न्यायिक पद के लिए उसकी पात्रता को स्वाभाविक रूप से कमजोर नहीं करती है। कॉलेजियम के अनुसार, सरकार के इस दावे में विस्तृत साक्ष्य का अभाव है और उनकी उम्मीदवारी को अस्वीकार करने का कोई वैध आधार नहीं है।

मद्रास उच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति विक्टोरिया गौरी के मामले को मिसाल के रूप में पेश करते हुए कॉलेजियम ने कहा, “उदाहरण के लिए, हाल के दिनों में एक वकील को उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया है। हालाँकि, वह पदोन्नति से पहले एक राजनीतिक दल की पदाधिकारी थीं।” बता दें कि न्यायमूर्ति गौरी को जज नियुक्त किया गया था।

इसके अलावा, कॉलेजियम ने यह भी तर्क दिया कि सरकारी वकील के रूप में मनोज पुलम्बी माधवन की पिछली भूमिका से उनकी नियुक्ति में बाधा नहीं आनी चाहिए। कॉलेजियम ने कहा कि उनकी पिछली भूमिका को एक मूल्यवान अनुभव के रूप में देखा जाना चाहिए, खासकर राज्य से जुड़े मामलों में।

कॉलेजियम ने कहा कि अनुसूचित जाति (एससी) के उम्मीदवार के रूप में कानूनी अभ्यास का माधवन का व्यापक अनुभव उनके पक्ष में जाता है। यह उन्हें उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त होने के योग्य बनाता है। कॉलेजियम ने यह भी कहा कि उच्च न्यायालय के कॉलेजियम द्वारा उनके प्रदर्शन को देखा गया था, जिन्होंने एक वकील के रूप में उनकी क्षमता और आचरण का निरीक्षण किया। इसलिए उनकी राय को उचित महत्व दिया जाना चाहिए।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने मंगलवार (12 मार्च 2024) को केरल उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों के रूप में नियुक्ति के लिए केंद्र को छह अधिवक्ताओं के नामों की सिफारिश की। इसके अलावा, न्यायिक अधिकारी मोहम्मद यूसुफ वानी को जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति की सिफारिश की।

केरल हाई कोर्ट में जिन छह अधिवक्ताओं को पदोन्नत करके जज बनाने की सिफारिश की गई है, उनमें अब्दुल हकीम मुल्लापल्ली अब्दुल अजीज, श्याम कुमार वडक्के मुदावक्कट, हरिशंकर विजयन मेनन, मनु श्रीधरन नायर, ईश्वरन सुब्रमणि और मनोज पुलम्बी माधवन शामिल हैं।

इसके साथ ही कॉलेजियम ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में पाँच अतिरिक्त न्यायाधीशों को स्थायी नियुक्ति की सिफारिश की है। ये नाम हैं- न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव, न्यायमूर्ति ओम प्रकाश शुक्ला, न्यायमूर्ति मोहम्मद अज़हर हुसैन इदरीसी, ज्योत्सना शर्मा और सुरेंद्र सिंह-प्रथम को स्थायी न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति दी जाएगी।

बॉम्बे उच्च न्यायालय के 11 अतिरिक्त न्यायाधीशों को उस उच्च न्यायालय के स्थायी न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किए जाने के सिफारिश हुई है। ये 11 जज हैं – जस्टिस उर्मिला सचिन जोशी-फाल्के, भरत पांडुरंग देशपांडे, किशोर चंद्रकांत संत, वाल्मिकी एस ए मेनेजेस, कमल रश्मि खाता, शर्मिला उत्तमराव देशमुख, अरुण रामनाथ पेडनेकर, संदीप विष्णुपंत मार्ने, गौरी विनोद गोडसे, राजेश शांताराम पाटिल और आरिफ सालेह डॉक्टर।

3 मदरसों के बाद अब 5 दरगाहों को कर दिया गया समतल: 24 घंटे के भीतर गुजरात सरकार का बुलडोजर एक्शन मोड में

गुजरात में अवैध अतिक्रमणों पर बुलडोजर कार्रवाई जारी है। इस क्रम में द्वारका, सोमनाथ के पास वाले अवैध कब्जे हटाए जाने के बाद जूनागढ़ के मजेवाड़ी द्वार के पास बनी दरगाह को हटा दिया गया है। इसके अलावा कच्छ में भी ब्लैक हिल्स से कब्जा खाली कराने के बाद बुलडोजर अबदासा की ओर मुड़ा और फिर अंजार में भी तीन अवैध दरगाहें जगह से हटाई गईं।

जानकारी के मुताबिक, मंगलवार (12 मार्च 2024) को कच्छ के अंजार में सरकारी जमीन पर बनी तीन दरगाहों को बुलडोजर से हटाया गया। प्रशासन ने कड़ी पुलिस व्यवस्था के बीच यह अभियान चलाया। इस दौरान हाजीपीर की दरगाह, नागेशापीर की दरगाह और वल्लीपीर की दरगाह पर कार्रवाई हुई।

इसके अलावा एक अन्य ढाँचे को भी ध्वस्त किया गया। देर रात हुई इस कार्रवाई में भारी पुलिस बल को इलाके में तैनात रखा गया। इसके अलावा सुरक्षा के लिहाज से फायर ब्रिगेड की टीम और एंबुलेंस की टीम भी बुलाई गई।

बता दें कि बुलडोजर की कार्रवाई से पहले प्रशासन द्वारा सभी अवैध निर्माणों को नोटिस जारी किया गया था। इसके बाद ही ये कार्रवाई हुई। इससे पहले गुजरात में लगातार सरकारी जमीनों को अवैध कब्जे से छुटाने का काम किया जा रहा है।

कुछ समय पहले ही मजेवाड़ी गेट के पास विवादित मजहबी स्थल को तोड़ दिया गया था। उसके पूर्व कच्छ के खावड़ा इलाके में तीन अवैध मदरसों को ध्वस्त किया गया था। शुक्रवार (9 मार्च 2024) को जामनगर में भी कुख्यात अपराधी रजाक साइचा और उसके भाई के 2 अवैध बंगलों पर भी बुलडोजर चलाया गया था। इसके अलावा 11 मार्च को कच्छ के अबदासा में दो अवैध दरगाहों पर बुलडोजर चलाया गया था।

CHC के लिए 4500 पदों पर वैकेंसी लेकिन सामान्य वर्ग के लिए 0 सीट: विरोध के बाद बिहार के स्वास्थ्य विभाग ने रद्द की भर्तियाँ, ₹40000 वेतन वाले पद के लिए फिर आएगी अधिसूचना

बिहार में स्वास्थ्य विभाग ने CHC (सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों) को लेकर आई बहाली को रद्द करने का फैसला लिया है। भर्तियाँ आने के बाद से ही लगातार इसका विरोध हो रहा था। बता दें कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार में सम्राट चौधरी के पास स्वास्थ्य विभाग है जो राज्य के डिप्टी CM भी हैं। बिहार में 4500 पदों के लिए कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर पद के लिए वैकेंसी निकाली गई थी। राज्य स्वास्थ्य समिति ने भर्तियों को लेकर विज्ञापन जारी किया था।

अब समिति ने एक नया नोटिफिकेशन जारी किया गया है, जिसमें सूचना दी गई है कि अपरिहार्य कारणों से इस वैकेंसी को रद्द किया जाता है। असल में विरोध का कारण ये था कि इन भर्तियों में सामान्य वर्ग के लिए एक भी पद नहीं रखा गया था। इसे लेकर सोशल मीडिया पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए विरोध हो रहा था। सामान्य वर्ग के लिए इसमें शून्य सीटें थीं, जबकि EBC (अत्यंत पिछड़ा वर्ग) के लिए सबसे अधिक 1345 सीटों का प्रावधान किया गया था।

इसके बाद SC (अनुसूचित जाति) का स्थान आता है, जिसके लिए 1279 पद रखे गए थे। आवेदन की अंतिम तिथि 30 अप्रैल, 2024 रखी गई थी। नियुक्त होने वाले कर्मियों को 32,000 रुपए का वेतन, 8000 रुपए का इंसेंटिव प्रति महीने मिलता। विरोध होने के बाद सत्ताधारी जदयू द्वारा कहा गया था कि जिस स्तर पर सुधार की ज़रूरत होगी उसे लागू किया जाएगा। वहीं सत्ताधारी गठबंधन में शामिल भाजपा नेताओं को भी लोग अपनी समस्या से आगाह करा रहे थे, क्योंकि स्वास्थ्य विभाग भाजपा नेता के पास है।

अब कुछ दिनों बाद एक अन्य अधिसूचना जारी कर के बताया जाएगा कि इन पदों पर फिर से भर्तियाँ शुरू होंगी या नहीं। इच्छुक उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वो समय-समय पर ‘shs.bihar.gov.in’ वेबसाइट को चेक करते रहें। सोशल मीडिया पर लोगों ने ट्रेंड चला कर बिहार के सामान्य वर्ग के विधायकों से पूछा था कि आखिर वो इस पर कब बोलेंगे? वहीं आरक्षण विरोधियों ने भी जम कर आवाज़ उठाई थी। अब उनकी माँगों को देखते हुए भर्तियाँ रद्द कर दी गई हैं।

बेंगलुरु के रामेश्वरम कैफे धमाका मामले में शब्बीर बेल्लारी से धराया, दूसरा हैदराबाद में छुपा हुआ: NIA कर रही पूछताछ

बेंगलुरु के रामेश्वरम कैफे में हुए धमाके के मामले में सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी कामयाबी मिली है। सुरक्षा एजेंसी NIA ने इस मामले में धमाका करने वाले आतंकी के एक मददगार को पकड़ा है। उसे कर्नाटक से ही गिरफ्तार किया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बेंगलुरु के रामेश्वरम कैफे में 1 मार्च को हुए धमाके की जाँच कर रही NIA ने एक संदिग्ध शब्बीर को हिरासत में लिया है। बताया जा रहा है कि वह कर्नाटक के बेल्लारी में किसी जगह से गिरफ्तार हुआ है। अभी एजेंसी उससे इस मामले में गहन पूछताछ कर रही है।

कर्नाटक के एक स्थानीय समाचार चैनल ने बताया है कि शब्बीर को सुबह 4 बजे गिरफ्तार किया गया था। अभी शब्बीर को बेंगलुरु पूछताछ के लिए ले जाया गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि जिस आतंकी ने बेंगलुरु के रामेश्वरम कैफे में धमाका किया, वह शब्बीर से मिलने आया था।

शब्बीर बेल्लारी के कौल बाजार इलाके का निवासी बताया जा रहा है। आरोप है कि शब्बीर ने बेंगलुरु में धमाका करने वाले आतंकी को भागने में मदद की। यह आतंकी भाग कर तेलंगाना के हैदराबाद गया है। मुख्य आतंकी के हैदराबाद में छुपने की सूचना है।

गौरतलब है कि पिछले शुक्रवार (1 मार्च, 2024) को बेंगलुरु के वाइटफील्ड इलाके में स्थित रामेश्वरम कैफे में दोपहर में एक धमाका हुआ था। इस धमाके में 9 लोग घायल हुए थे। धमाके के पीछे की जानकारी बाद में निकल कर सामने आई थी। इसके बाद इस मामले की जाँच NIA ने चालू कर दी थी। तब से ही इस संदिग्ध की पहचान स्थापित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

NIA ने इस मामले में एक संदिग्ध की फोटो जारी करके लोगों से पहचान करने को कहा था। संदिग्ध की बस और कैफे के भीतर की CCTV वीडियो सामने आई थी। पता चला था कि वह धमाके वाली जगह पर सार्वजनिक बस में आया था।

रामेश्वरम कैफे में धमाका करने वाला संदिग्ध सुबह 10:45 मिनट पर एक सार्वजनिक बस से उतरा था। यह बस स्टॉप कैफे से मात्र 100 मीटर ही दूर है। इसके बाद वह घूमता हुआ 11:34 पर कैफे में घुसा और 8 मिनट बाद ही बाहर निकल गया। इस बीच ही उसने यहाँ बम रखा था।

वह यहाँ से निकलने के बाद एक किलोमीटर दूर स्थित एक बस स्टॉप पर गया और वहाँ से बस पकड़ ली। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि यह संदिग्ध अपने इस रास्ते में एक मुस्लिम मजहबी केंद्र पर भी रुका था। यहाँ उसने अपना भेष बदला था और टोपी भी छोड़ दी थी।

NIA ने यह टोपी बरामद कर ली थी। संदिग्ध की पहचान के लिए NIA ने उसकी फोटो वाला एक पोस्टर जारी किया था। NIA ने इसके विषय में जानकारी देने पर ₹10 लाख ईनाम घोषित किया था। अब इस मामले में इस संदिग्ध के हिरासत में लिए जाने के बाद इस मामले का खुलासा होने की उम्मीद बढ़ी है।