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रमजान के पहले दिन हलीम Free…. ऑफर देख होटल के बाहर जुटे सैकड़ों रोजाधारी: हैदराबाद पुलिस ने लाठी-डंडों से मारकर भगाया, केस दर्ज

रमजान का महीना शुरू होते ही पहले दिन हैदराबाद में एक होटल/रेस्टोरेंट के बाहर सैंकड़ों की भीड़ हलीम खाने पहुँची। बताया जा रहा है कि होटल/रेस्टोरेंट ने रमजान पर अपने यहाँ फ्री हलीम का ऑफर रखा था। इसके बाद क्या…? उनके होटल/रेस्टोरेंट के बाहर इतनी भीड़ जुटी कि उसे काबू करना मुश्किल हो गया। हालात ऐसे हो गए कि पुलिस को वहाँ आकर लाठी चार्ज करना पड़ा, तब जाकर स्थिति नियंत्रण में आई।

मामला मालकपेट शहर के एक नए होटल/रेस्टोरेंट ‘Aazebo’ का है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जहाँ होटल/रेस्टोरेंट के बाहर मार्केट वाली जगह पर इतनी भीड़ जुटी कि आसपास बड़ा ट्रैफिक जाम लग गया। लोग हलीम को माँगने के लिए लड़ाई लड़ने लगे। एक दूसरे से धक्का-मुक्की शुरू हो गई। बिगड़ते हालातों को देखते हुए पुलिस ने आकर स्थिति को संभाला तो लेकिन ये बेहद मुश्किल काम था। होटल/रेस्टोरेंट के बाहर फ्री हलीम के इंतजार में खड़ा कोई व्यक्ति वहाँ से हटने को तैयार नहीं था। ऐसे में पुलिस को लाठी चार्ज का भी सहारा लेना पड़ा।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में मालकपेट इंस्पेक्टर यू श्रीनिवास ने ट्रैफिक की आवाजाही बाधित करने के लिए होटल के खिलाफ केस को दर्ज कर लिया है। उन्होंने बताया कि होटल/रेस्टोरेंट मैनेजमेंट ने पहले से कोई जानकारी नहीं दी थी कि होटल/रेस्टोरेंट ऐसा कोई ऑफर दे रहा है या उन्होंने इस संबंध में पहले कोई परमिशन भी नहीं ली थी। पुलिस इंस्पेक्टर ने कहा कि इस तरह डिस्टरबेंस बढ़ाने के लिए और यातायात बाधित करने के लिए मामला दर्ज हो गया है।

जिस आरिफ थानवी की बहन को पुलिस ने किया था सम्मानित, वही CAA के खिलाफ उड़ा रहा था अफवाह, ‘मर्दाना ताकत’ वाला क्लिनिक चलाता था झोलाछाप डॉक्टर

भारत सरकार ने सोमवार (11 मार्च, 2024) को नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। पूरे देश की पुलिस को इस मौके पर हाई अलर्ट पर रखा गया है। पुलिस ने जमीन से ले कर सोशल मीडिया पर कड़ी नजर रखी है। लोगों से लगातार भ्रामक खबरें न तो उड़ाने और न ही उस पर विश्वास करने की अपील की जा रही है। इस अपील को दरनिकार कर के उत्तर प्रदेश के मुज़फ्फरनगर जिले का आरिफ थानवी लगातार CAA के खिलाफ अफवाह उड़ा रहा था। सोमवार (12 मार्च, 2024) को पुलिस ने आरिफ को गिरफ्तार कर लिया है।

यह मामला मुज़फ्फरनगर जिले के थानाक्षेत्र कोतवाली नगर का है। पुलिस ने मंगलवार को बताया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और व्हाट्सएप पर एक ग्रुप थानवी टाइम्स चल रहा था। इस ग्रुप को आरिफ थानवी संचालित करता है। इस ग्रुप में लगातार CAA को ले कर भ्रामक खबरें शेयर की जा रहीं थीं। पुलिस ने आरिफ की इस करतूत को सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाली हरकत करार दिया है। कोतवाली नगर में आरिफ के खिलाफ FIR दर्ज कर के मंगलवार को उसे गिरफ्तार कर लिया गया है।

पुलिस प्रेसनोट

नसीम का बेटा आरिफ थानवी मूल रूप से मुज़फ्फरनगर के खालापार इलाके का निवासी है। यह वही क्षेत्र है जहाँ CAA विरोधी हिंसक प्रदर्शन हुए थे जिसमें पुलिस अधीक्षक नगर तक को जान से मारने की नीयत से गोली मारी गई थी। हालाँकि इस हमले में SP सिटी बाल-बाल बच गए थे। दबिश के दौरान पुलिस को आरिफ अपने घर पर ही मिल गया। उसका ओप्पो कम्पनी का वह मोबाइल फोन भी ज़ब्त कर लिया गया है जिस से वो भ्रामक खबरें शेयर कर रहा था। इस गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने एक बार फिर से लोगों को अफवाह न तो उड़ाने और न ही उस पर विश्वास करने की अपील की है।

झोलाझाप डॉक्टर, बहन को पुलिस ने दिया था सम्मान

ऑपइंडिया ने मुज़फ्फरनगर के पत्रकार समर ठाकुर से बात की। समर ठाकुर ने बताया कि आरिफ थानवी एक झोलाछाप डॉक्टर है जो हकीमी आदि की क्लिनिक चलाता है। वह मर्दाना ताकत और गुप्त रोगों आदि के इलाज का भी दावा करता है। कभी कभार उसकी कथित क्लिनिक पर भीड़ भी दिखाई पड़ती है।

साल 2018 के अगस्त माह में मुज़फ्फरनगर के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक की मौजूदगी में आरिफ की बहन सना को पुलिस ने सम्मानित भी किया था। तब उन्हें रक्षाबंधन के मौके पर 1 दिन का प्रतीकात्मक तौर पर जिले के थाना नई मंडी प्रभार भी दिया गया था। इस दौरान सना थानवी को बकायदा पुलिस अधिकारी की कैप भी पहनाई गई थी।

नाबालिग हिन्दू सहेली को ले गई साथ, 2 दिनों बाद मिली रहीसुद्दीन के पास: गाजियाबाद में ‘द केरल स्टोरी’ जैसी घटना, मुस्लिम पड़ोसन की दीदी-मामी सबके शामिल होने की आशंका

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में ‘द केरल स्टोरी’ जैसा मामला सामने आया है। यहाँ एक मुस्लिम महिला पर नाबालिग हिन्दू लड़की को बहला-फुसला कर अपने साथ ले जाने का आरोप लगा है। 2 दिनों के बाद वही लड़की एक मुस्लिम युवक के साथ मिली। पुलिस ने केस दर्ज कर के आरोपित महिला सहित एक मुस्लिम युवक को हिरासत में ले लिया है। मामले की जाँच की जा रही है। घटना बुधवार (6 मार्च 2024) की है।

यह मामला गाजियाबाद के थाना क्षेत्र साहिबाबाद का है। यहाँ की रहने वाली एक हिन्दू महिला ने शनिवार (9 मार्च, 2024) को पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में महिला ने बताया है कि 6 मार्च को उनकी 15 वर्षीया बेटी को एक मुस्लिम लड़की अपने साथ बहला-फुसला कर ले गई थी। अरोपिता पीड़िता की पड़ोसन बताई जा रही है। जब पीड़िता की माँ ने अपनी बेटी की खोजबीन शुरू की तो वह 2 दिनों के बाद 8 मार्च को रहीसुद्दीन नाम के एक व्यक्ति के घर मिली। रहीसुद्दीन का घर साहिबाबाद थाना क्षेत्र के ही मुस्तफा मस्जिद के पास बताया गया है।

नाबालिग पीड़िता की माँ ने पुलिस से दोनों आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है। पुलिस ने मुस्लिम लड़की और रहीसुद्दीन के खिलाफ FIR दर्ज कर के उन्हें हिरासत में ले लिया। दोनों पर IPC की धारा 363 के तहत कार्रवाई की गई है। पीड़िता को मेडिकल परीक्षण के लिए भेजा गया है। हिन्दू संगठनों की मानें तो अभी मेडिकल रिपोर्ट और पीड़िता के बयानों के आधार पर अभी इस केस में कुछ अन्य आरोपितों के नाम प्रकाश में आने और FIR में धाराएँ बढ़ने की आशंका है।

ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। गाजियाबाद जिले के हिन्दू संगठनों ने इस घटना के आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। उन्होंने इसे ‘द केरल स्टोरी’ जैसी ही साजिश करार देते हुए उच्चस्तरीय जाँच की माँग भी की है।

बाँध दिए गए थे पीड़िता के हाथ और पैर

ऑपइंडिया ने इस मामले में पीड़िता की माँ से बात की। लड़की की माँ ने हमें पूरी जानकारी के लिए स्थानीय विश्व हिन्दू परिषद के धर्मपरावर्तन जिलाध्यक्ष सुशील सक्सेना से बात करने के लिए कहा। विहिप पदाधिकारी सुनील सक्सेना और विश्व हिन्दू परिषद मातृशक्ति जिलाध्यक्ष ममता मित्तल ने ऑपइंडिया से बात करते हुए कहा कि वो पीड़िता के परिजनों के लगातार सम्पर्क में हैं। इन दोनों ने दावा किया कि पीड़िता को अपने साथ ले जाने वाली लड़की उसकी सहेली थी थी जो संभवतः अभी नाबालिग है।

सुशील और ममता ने दावा किया कि पीड़िता को उसकी सहेली पहले अपनी मामी के घर ले गई थी। यहाँ एक दिन रुकने के बाद लड़की को रहीसुद्दीन की बहन के घर ले जाया गया। यहाँ पर रहीसुद्दीन भी मौजूद था जिसकी उम्र लगभग 25 वर्ष बताई जा रही है। सुशील सक्सेना के मुताबिक यहाँ पीड़िता को कोई नशीली चीज खिला दी गई थी जिस से वो बेसुध हो गई थी। आशंका जताई जा रही है कि इस बेहोशी की हालत में पीड़िता से दुष्कर्म हुआ है। हालाँकि दुष्कर्म की पुष्टि उन्होंने मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद ही हो पाना संभव बताया।

सुशील और ममता ने हमसे बातचीत के दौरान आगे बताया कि नाबालिग हिन्दू लड़की के साथ हुए इस गुनाह में रहीसुद्दीन की मामी और बहन भी शामिल हैं। इस दौरान उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि साजिशन कई आतंकियों की तरह रहीसुद्दीन को भी मानसिक रोगी साबित करने के लिए उसके परिजन तैयारी में जुट गए हैं। हालाँकि उन्होंने यह भी कहा कि आरोपितों को सजा मिलने तक पीड़िता के परिजनों को पूरी सुरक्षा और कानूनी मदद की जाएगी।

JNU (जहाँगीर नेशनल यूनिवर्सिटी): कैसे एक विश्वविद्यालय बन गया देश तोड़ने वालों का अड्डा, फिल्म का पोस्टर आते ही वामपंथी करने लगे रुदन

बात ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ की हो या ‘आजादी गैंग’ की या फिर दिल्ली में हिंदू विरोधी दंगों की… इनकी जड़ों में एक ही नाम मिला, -JNU (जेएनयू) का। इस यूनिवर्सिटी को लेकर अक्सर विवाद होता रहता है। कई गंभीर आरोप यहाँ से जुड़े छात्रों पर भी लगते हैं। ऐसे में जेएनयू नाम से एक फिल्म आ रही है, जिसका पूरा नाम जेएनयू: जहाँगीर नेशनल यूनिवर्सिटी रखा गया है। इस फिल्म का फर्स्ट लुक पोस्टर भी जारी हो गया है, जो भगवा रंग में है। खास बात ये है कि जेएनयू की पहचान जिन गलत चीजों के लिए बनती जा रही थी, उन्हीं मुद्दों को इस फिल्म में दिखाया जाने वाला है, जिसमें बॉलीवुड के मंझे कलाकार नजर आएँगे। ये फिल्म 5 अप्रैल को सिनेमाघरों में दस्तक देगी।

जेएनयू फिल्म के पोस्टर में भगवा रंग में भारत का नक्शा दिखाया गया है, जो एक मुट्ठी में जकड़ा हुआ है। उसी नक्शे पर फिल्म की टैगलाइन – क्या एक एजुकेशनल यूनिवर्सिटी देश को तोड़ सकती है? (Can One Educational University Break The Nation?) भी लिखा हुआ है। इसके नीचे कई हाथ नारेबाजी की मुद्रा में उठे हुए हैं। इस फिल्म में पीयूष मिश्रा, रश्मि देसाई, उर्वशी रौतेला जैसे नामी चेहरे दिखेंगे, तो भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार रवि किशन भी इस फिल्म में नजर आएँगे। इस फिल्म का लेखक और डायरेक्शन विनय शर्मा कर रहे हैं।

‘जेएनयू: जहाँगीर नेशनल यूनिवर्सिटी’ का पहला पोस्टर सामने आते ही हंगामा मच गया है। जेएनयू जिस वामपंथी चरित्र की वजह से बदनाम हो चुका है, उसी वामपंथी गैंग के लोग सोशल मीडिया पर हंगामा मचाते नजर आ रहे हैं। जाने-माने वामपंथी लेखक और हिंदू विरोधी लेखन के लिए कुख्यात इरफान हबीब ने तो पोस्टर के जारी होते ही रोना शुरू कर दिया है। उन्होंने अपने एक्स हैंडल पर लिखा, “जेएनयू को लेकर एक सनक रहा है। ये सिर्फ इसलिए, क्योंकि ये सोचने की आजादी देता है। जेएनयू ने पूरे भारत के वंचितों को जगह दी है। विचारों और संस्कृतियों का एक सच्चा मेल यहाँ होता था। यही एकमात्र वजह है कि इस प्रमुख संस्थान को हर दिन निशाना बनाया जा रहा है और उसे कमजोर किया जा रहा है।”

अक्सर आईडिया ऑफ इंडिया की जगह आईडिया ऑफ ब्रेकिंग इंडिया पर ट्वीट करने वाली कथित पूर्व पत्रकार रिया (असली नाम Andrea D Souza) ने लिखा, “जेएनयू के छात्र क्यों नहीं कदम (विरोध) उठाते? जवाहर लाल नेहरू वो नहीं है, जो फेक प्रोपेगेंडा फिल्में दावा कर रही हैं। जेएनयू को खुद ऐसे प्रोड्यूसर्स के खिलाफ कड़े से कड़े कदम उठाने चाहिए।”

कुछ लोगों ने वामपंथियों की छटपटाहट को पकड़ लिया और अपनी प्रतिक्रिया दी। सोशल स्क्रिप्ट नाम के एक्स हैंडल ने लिखा, “कश्मीर फाइल्स, द केरला स्टोरी, आर्टिकल 370, स्वातंत्र्य वीर सावरकर के बाद अब आ रही है जेएनयू। पाँच अप्रैल को तैयार रहें लेफ्टिस्ट एजेंडा को समझने के लिए, उन्होंने भारत देश के टुकड़े करने के लिए किस तरह की तरकीबें अपनाई।

शरत(थ) नाम के यूजर ने लिखा, “हर रोज एक नया जख्म।”

बता दें कि 5 अप्रैल को रिलीज होने जा रही फिल्म जेएनयू-जहाँगीर नेशनल यूनिवर्सिटी को लेकर सोशल मीडिया पर काफी पहले से चर्चा हो रही है। इस फिल्म को महाकाल मूवीज के बैनर तले बनाया जा रहा है।

‘CAA के लिए आवेदन करने वालों को नहीं मिलेगा सरकारी योजनाओं का लाभ’: CM ममता बनर्जी बोलीं – बंगाल में नहीं होने दूँगी लागू, केरल सरकार ने मिलाया सुर

केंद्र की मोदी सरकार ने सोमवार (11 मार्च 2024) को नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) को लागू कर द‍िया। इसके बाद पश्‍च‍िम बंगाल की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी और केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने इसे अपने-अपने राज्यों में लागू करने से इनकार कर दिया है। ममता बनर्जी ने मंगलवार (12 मार्च 2024) को कहा कि बंगाल को किसी भी सूरत में डिटेंशन सेंटर नहीं बनने दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य के लोगों से नागरिकता के लिए आवेदन नहीं करने को कहा। उन्होंने कहा कि यदि लोगों ने ऐसा किया तो उन्हें शरणार्थी और घुसपैठिए के रूप में चिह्नित किया जाएगा और सरकारी योजनाओं से वंचित कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा, “मुझे संदेह है कि इनकी ओर से लाया कानून वैध भी या नहीं। इसे लेकर केंद्र सरकार की स्पष्टता नहीं है।”

ममता बनर्जी ने भाजपा को बेकार पार्टी और मह‍िलाओं के ख‍ि‍लाफ बताते हुए कहा कि असली हिंदू का मतलब यह नहीं होता क‍ि बाहरी लोगों को हिंदू बनाया जाए। उन्होंने कहा कि CAA राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) से जुड़ा हुआ है। ममता ने कहा, “मैं लोगों से आग्रह करती हूँ कि लोकसभा चुनावों से पहले वे भाजपा की योजना के झाँसे में न आएँ।”

ममता बनर्जी ने कहा, “आवेदन करते ही ऐसे लोग घुसपैठिये बन जाएँगे। यह अधिकार छीनने का खेल है। अगर आप आवेदन करते हैं तो इसकी कोई गारंटी नहीं है कि आपको नागरिकता मिलेगी या नहीं। आप अपनी संपत्ति खो देंगे। आप सरकारी योजनाओं से वंचित रहेंगे। आवेदन करने पर सारे नागरिक अधिकार छीन लिए जाएँगे। इस लिए आवेदन करने से पहले हजार बार सोचें। यह एनआरसी से जुड़ा है।”

ममता बनर्जी ने साफ कहा कि वह CAA बंगाल में लागू नहीं होने देंगी। ममता बनर्जी ने कहा, “मैं सीएए लागू नहीं करने दूँगी। मैं लोगों के बुनियादी अधिकार छीनने नहीं दूँगी। इसके लिए मुझे अपनी जान भी कुर्बान करनी पड़ी तो मैं करूँगी।” उन्‍होंने कहा कि 2019 में असम में NRC के नाम पर 19 लाख में से 13 लाख बंगाली हिंदू के नाम हटा दिए गए थे। इसके कारण कई लोगों ने आत्महत्या कर ली थी।

अवैध घुसपैठियों का बचाव करते हुए ममता बनर्जी ने आगे कहा, “यह कहते हुए कि यह अधिनियम लोगों को परेशान करने के लिए बनाया गया है। संयुक्त राष्ट्र ने स्पष्ट रूप से कहा है कि शरणार्थियों को विस्थापित नहीं किया जाना चाहिए और किसी देश से बाहर नहीं निकाला जाना चाहिए। यह बुनियादी मानवता है। क्या हमने कभी देखा है कि धर्म के आधार पर नागरिकता दी जा रही है?”

CAA को खतरनाक बताते हुए ममता बनर्जी ने आगे कहा, “वे पिता का जन्म प्रमाण पत्र माँग रहे हैं… क्या आपके पास आपके पिता का जन्म प्रमाण पत्र है? मेरे पास नहीं है। मैं अपने माता-पिता की जन्मतिथि भी नहीं जानती। इससे कुछ लोगों को नागरिकता मिल सकती है, लेकिन जिन्हें नहीं मिलेगी उन्हें हिरासत शिविर में भेज दिया जाएगा।”

सीएए को नागरिकता अधिकार छीनने के लिए रची गई साजिश बताते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि यह बंगाल को फिर से विभाजित करने और बंगालियों को देश से बाहर निकालने का खेल है। उन्होंने कहा, “उन्होंने जानबूझकर कल इसकी घोषणा करने का फैसला किया, क्योंकि आज से यह रोज़ा है। हम उन्हें यहाँ एनआरसी लागू नहीं करने देंगे।”

वहीं, केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने भी कहा कि वे पहले ही दोहरा चुके हैं कि मुस्लिमों को दोयम दर्जे का नागरिक समझने वाले CAA कानून को केरल में किसी भी कीमत पर लागू नहीं होने देंगे। इस सांप्रदायिक कानून बताते हुए विजयन ने कहा कि इसके विरोध में पूरा केरल खड़ा नजर आएगा।

‘जीवनसाथी को तलाक दिए बिना दूसरे के साथ लिव इन में रहना गैर-कानूनी’: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने विवाहिता द्वारा दायर सुरक्षा की याचिका खारिज की, लगाया ₹2000 का जुर्माना

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मंगलवार (12 मार्च 2024) को पति को तलाक दिए बिना लिव इन रिलेशनशिप में रहने वाली एक विवाहित महिला की याचिका खारिज कर दिया। हाई कोर्ट ने कहा कि विवाहित महिला पति से तलाक लिए बिना किसी और के साथ लिव इन में नहीं रह सकती। इसके साथ ही कोर्ट ने उसकी सुरक्षा की माँग को खारिज कर दिया और दो हजार रुपए का जुर्माना लगा दिया।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, एक महिला ने सुरक्षा की माँग को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इस मामले पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट की जस्टिस रेनू अग्रवाल की सिंगल बेंच ने कहा कि पति से बिना तलाक लिए एक विवाहित महिला लिव इन में नहीं रह सकती है। अगर ऐसे रिश्तों को मान्यता दी जाती है तो इससे अराजकता बढ़ेगी और समाज का ताना-बाना नष्ट हो जाएगा।

न्यायमूर्ति रेनू अग्रवाल ने कहा, “न्यायालय इस प्रकार के रिश्ते का समर्थन नहीं कर सकता, जो कि कानून का उल्लंघन है। हिंदू विवाह अधिनियम के अनुसार यदि किसी व्यक्ति का जीवनसाथी जीवित है या तलाक की डिक्री प्राप्त करने से पहले वह किसी अन्य व्यक्ति से शादी नहीं कर सकता है।”

बता दें कि उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले की रहने वाली याची ममता (बदला हुआ नाम) ने यह याचिका दाखिल की थी। याचिका में बताया गया कि वह और उसका लिव इन पार्टनर पहले से ही शादीशुदा हैं। ऐसे में उसे सुरक्षा दी जाए। इन तथ्यों पर गौर करने के बाद हाई कोर्ट का सुरक्षा देने से इनकार कर दिया है। इसके साथ ही याचिकाकर्ता पर 2,000 रुपए का जुर्माना भी लगाया है।

बता दें कि पिछले महीने इसी तरह के एक मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक विवाहित महिला और उसके लिव इन पार्टनर द्वारा दायर सुरक्षा याचिका को खारिज कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि इस प्रकार के ‘अवैध संबंध’ को अदालत द्वारा संरक्षित करने की आवश्यकता नहीं है।

दरअसल, जस्टिस रेनू अग्रवाल की पीठ के समक्ष ही 26 साल की मुस्लिम महिला की याचिका गई थी, जो अपने हिंदू प्रेमी के साथ रहना चाहती थी। महिला ने हाई कोर्ट में याचिका देकर कहा था कि उसे अपने रिश्तेदारों से जान का खतरा है। उसने अपनी और अपने प्रेमी की सुरक्षा की गुहार लगाई थी।

कोर्ट ने कहा था, “प्रथम याचिकाकर्ता (मुस्लिम महिला) मुस्लिम कानून (शरियत) के प्रावधानों के विपरीत दूसरे याचिकाकर्ता के साथ रह रही है। मुस्लिम कानून में विवाहित महिला शादीशुदा जिंदगी से बाहर नहीं जा सकती, इसलिए मुस्लिम महिला के इस कृत्य को ‘जिना’ और ‘हराम’ के तौर पर परिभाषित किया जाता है।” बता दें कि इस मुस्लिम महिला का शौहर खुद दूसरी बीवी के साथ रह रहा है।

‘तुझ जैसी च**ट्टी से हम मुस्लिम सिर्फ मजे लेते हैं’: दलित महिला से रेप, अबॉर्शन, ब्लैकमेलिंग, तालिब के घर वाले बोले – हिन्दू लड़कियों से अय्याशी हमारा फैशन

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले से ‘लव जिहाद’ का मामला सामने आया है। यहाँ तालिब हसन नाम के व्यक्ति पर हिन्दू नाम से एक तलाकशुदा दलित युवती से रेप का आरोप लगा है। सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करने वाली पीड़िता ने तालिब पर अश्लील वीडियो बना कर खुद को ब्लैकमेल करने का भी आरोप लगाया है। कई बार रेप से गर्भवती होने के बाद आरोपित ने पीड़िता का एबॉर्शन भी करवा दिया। तालिब एक मेडिकल कम्पनी में सेल्समैन का काम करता है जिसने लड़की से 2 लाख रुपए भी ऐंठ लिए।। पीड़िता ने इस साजिश में तालिब की बहन, बहनोई, भाई और माँ को भी नामजद किया है। शनिवार (9 मार्च) को पुलिस ने FIR दर्ज कर के आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।

यह घटना गाजियाबाद के थानाक्षेत्र क्रॉसिंग रिपब्लिक की है। यहाँ एक सोसाइटी में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करने वाली एक लड़की ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में पीड़िता ने बताया है कि फरवरी 2020 में वह तालिब से मिली थी जिसने अपना नाम अंकित बताया था। मूल रूप से मुरादाबाद का रहने वाला तालिब नोएडा में दवाओं के सेल्समैन के तौर पर काम करता था। यह दोस्ती 4-5 महीने चली। इस दौरान अंकित बने तालिब ने पीड़िता को प्रपोज भी किया। हालाँकि लड़की ने इसे ठुकरा दिया।

थोड़े समय बाद तालिब ने पीड़िता से शादी का वादा किया। पीड़िता तालिब के झाँसे में आ गई। एक दिन पीड़िता को OYO से बुक किए हुए एक होटल में बुलवाया। यहाँ उसने लड़की को नशीला पदार्थ दे करदुष्कर्म किया। इसी दौरान उसने चुपके से लड़की की अश्लील फोटो और वीडियो बना लीं। इसके बाद तालिब ने यही फोटो और वीडियो दिखा कर पीड़िता से कई बार रेप किया। फरवरी 2021 में पीड़िता प्रेग्नेंट हो गई। शादी में मजबूरी की वजह से देरी की बात कह कर उसने 14 मार्च, 2021 को पीड़िता का एबॉर्शन भी करवा दिया।

इसके बाद पीड़िता आरोपित पर शादी का दबाव बनाने लगी। आरोप है कि एक दिन पीड़िता ऑटो से कहीं जा रही थी। इस दौरान तालिब ने ऑटो से खींच कर उसे मारा। इसी के साथ उसने कहा, “मुझे तो तेरे साथ मजे लेने थे जो मैंने ले लिए। मुझे तुझसे कोई शादी-वादी नहीं करनी है। मैं मुसलमान हूँ और तू हिन्दू है। वैसे भी तू च*री नीच जात की है। तुझ जैसे च*टी से शादी कौन करेगा। कम से कम मैं तो नहीं करूँगा। अब तुझ में मेरा कोई इंट्रेस्ट नहीं बचा। जा के कहीं मर जा। मैं तो अपनी पसंद की मुस्लिम लड़की से शादी करूँगा। तुझ जैसी लड़कियों से हम जैसे मुसलमान सिर्फ मौज मस्ती करते हैं, शादी नहीं।”

इसके बाद आरोपित ने पीड़िता को बेरहमी से मारा-पीटा। जब तालिब की शिकायत लड़की ने उसके घर वालों से की तो वहाँ भी पीड़िता को जातिसूचक शब्द बोले गए। पीड़िता को गालियाँ देते हुए तालिब के परिजनों ने कहा, “च$*री तेरा ये ख्वाब कभी पूरा नहीं होगा। एक गैर-मजहब की लड़की हमारे घर में नहीं आ सकती। तालिब ने तेरे साथ जो भी किया वो हमारे मजहब में बुरा नहीं माना जाता। हिन्दू लड़कियों से अय्याशी करना हमारा फैशन माना जाता है।” इन तमाम घटनाओं के पहले तालिब पीड़िता का 3-4 बार एबॉर्शन करवा चुका था। साथ ही उसने लगभग 2 लाख रुपए भी ब्लैकमेल कर के ऐंठ लिए थे।

पीड़िता ने अपनी शिकायत में तालिब हसन के साथ उसकी माँ नूरजहाँ, उसकी बहनें गुलफ्शा, मुमताज और गुलशन, तालिब के बहनोई दिलशाद और राशिद, भाई अनीश और भाभी सबीना को भी नामजद किया है। इन सभी पर पीड़ता को जातिसूचक गालियाँ देने और प्रताड़ित करने का आरोप है। पुलिस ने सभी आरोपितों पर IPC की धारा 328, 376, 313, 406, 423, 323, 504 और 506 के साथ SC/ST एक्ट में FIR दर्ज कर ली है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। तालिब हसन को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

नायब सिंह सैनी बने हरियाणा के नए CM, खट्टर का पैर छूकर लिया आशीर्वाद: बनवारी लाल, रणजीत चौटाला सहित 4 विधायकों ने ली मंत्री पद की शपथ

हरियाणा में मनोहर लाल खट्टर के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे के बाद भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं कुरुक्षेत्र से सांसद नायब सिंह सैनी ने मंगलवार (12 मार्च 2024) को सीएम पद की शपथ ली। उन्होंने चंडीगढ़ में स्थित राजभवन में अपने कैबिनेट के साथ शपथ ली। इस शपथ ग्रहण समारोह में खट्टर सरकार में उपमुख्यमंत्री रहे दुष्यंत चौटाला की पार्टी जननायक जनता पार्टी (JJP) के भी चार विधायक मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद नायब सैनी ने पूर्व मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर के पैर छुए और उनका आशीर्वाद लिया। सीएम सैनी के साथ जिन विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली, उनमें डॉक्टर बनवारी लाल भी शामिल हैं। हरियाणा के बावल से विधायक बनवारी लाल खट्टर सरकार में सहकारिता एवं जनस्वास्थ्य मंत्री रह चुके हैं और हरियाणा सरकार में अनुसूचित वर्ग के मुख्य चेहरा थे।

जगाधरी से विधायक कंवरपाल गुज्जर भी मंत्री बनाए गए हैं। हरियाणा के यमुनानगर जिले के रहने वाले कंवरपाल शिक्षा मंत्री और वन मंत्री रह चुके हैं। इसके अलावा, वह हरियाणा विधानसभा के स्पीकर भी रह चुके हैं। लोहारू सीट से भाजपा विधायक जयप्रकाश दलाल भी मंत्री बने हैं। वे साल 2014 में भाजपा में शामिल हुए थे और पूर्व में मंत्री रह चुके हैं।

खट्टर सरकार में परिवहन एवं खनन मंत्री रहे बल्लभगढ़ से भाजपा विधायक मूलचंद शर्मा ने भी मंत्री पद की शपथ ली है। वे दूसरी बार विधायक बने थे। इसके अलावा, खट्टर सरकार में ऊर्जा और बिजली मंत्री रहे रणजीत सिंह चौटाला ने भी मंत्री पद की शपथ ली है। वह रनिया सीट से निर्दलीय विधायक हैं। रणजीत पूर्व उप प्रधानमंत्री देवीलाल के पुत्र और इनेलो सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला के भाई हैं।

नायब सिंह सैनी का जन्म अम्बाला के छोटे से गाँव मिर्ज़ापुर में 25 जनवरी 1970 को हुआ। सैनी उनकी माँ पंजाबी और पिता हरियाणवी हैं। उनकी माँ का नाम कुलवंत कौर हैं और उनके पिता का नाम तेलु राम सैनी है। स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद नायब सिंह ने बिहार के बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है।

ग्रेजुएशन के बाद नायब सिंह सैनी उत्तर प्रदेश आ गए। उन्होंने उत्तर प्रदेश के मेरठ में स्थित चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से एलएलबी की डिग्री हासिल की। पढ़ाई पूरी करने के बाद वे राजनीतिक की ओर बढ़े और RSS जुड़े। कुछ साल बाद वे भाजपा में शामिल हो गए। साल 2014 में नायब सिंह सैनी ने अंबाला जिले की नारायणगढ़ सीट से पहली बार विधायक चुने गए।

उन्होंने लगभग 24 हजार वोटों से चुनाव जीता। इसके बाद साल 2019 में वे कुरुक्षेत्र सीट से लोकसभा सांसद के तौर पर संसद पहुँचे। इस चुनाव में उन्हें 6 लाख 88 हजार 629 वोट मिले थे। इसी दौरान अक्टूबर 2023 में उन्हें हरियाणा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। अब वे सीएम बन गए हैं।

अबसे कुछ देर पहले ही नायब सिंह सैनी और उनके मंत्रीमंडल के सदस्यों ने राजभवन में शपथ ली। कुल 90 सीटों वाले हरियाणा में भाजपा के 41 विधायक हैं और 6 निर्दलीय विधायकों का समर्थन मिला है। इस तरह 10 विधायकों वाले जेजेपी से अलग होने के बाद भाजपा ने 47 विधायकों के साथ एक बार फिर से सरकार बनाई है। 

सनातन को करना होगा साफ… तमिलनाडु CM के मंत्री बेटे की टिप्पणी पर बिहार कोर्ट ने लिया संज्ञान, 1 अप्रैल को पेश होने को कहा

तमिलनाडु में मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे व द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के मंत्री उदयनिधि स्टालिन को सनातन पर की गई टिप्पणी के लिए बिहार के आरा जिले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) अदालत ने तलब किया है। आरा कोर्ट ने कहा है कि उदयनिधि स्टालिन की टिप्पणियों से धार्मिक भावनाएँ आहत हुई हैं। उन्हें 1 अप्रैल को अदालत में पेश होना होगा। कोर्ट ने इस मामले में आईपीसी की धारा 298 के तहत संज्ञान लेकर कार्यवाही शुरू की है।

बता दें कि पिछले साल सितंबर में ‘सनातन उन्मूलन सम्मेलन’ में बोलते हुए डीएमके मंत्री उदयनिधि स्टालिन ने कहा था, “कुछ चीजें हैं जिन्हें हमें खत्म करना होगा और हम केवल विरोध नहीं कर सकते। मच्छर, डेंगू बुखार, मलेरिया, कोरोना, ये सब ऐसी चीजें हैं जिनका हम विरोध नहीं कर सकते, हमें इन्हें खत्म करना है। सनातनम् भी ऐसा ही है। इसका विरोध करने की बजाय इसे खत्म करना होगा क्योंकि यह लोगों को जातियों में बाँटता है।”

स्टालिन के इस बयान से आहत अधिवक्ता धरनीधर पांडेय ने परिवाद दायर किया था। इस मामले में आईपीसी की धारा 120 (बी), 153 (ए), 153 (बी), 295 (ए) और 298 के तहत शिकायत दर्ज हुई थी। शिकायतकर्ता ने ही मामले की जानकारी देते हुए कहा- “मैं सनातन धर्म का अनुयायी हूँ और उदय निधि स्टालिन के द्वारा दिए गए घृणास्पद भाषण से मैं व्यथित हूँ। उदय निधि स्टालिन का भाषण समाज में धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाया है। उनका यह भाषण हिंदू धर्म के अनुयायियों का अपमान किया है।”

शिकायतकर्ता ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि उदयनिधि के भाषण ने न केवल हिंदू धर्म को मानने वालों का अपमान किया बल्कि धार्मिक समूहों के बीच भेदभाव को भी बढ़ावा दिया। उन्होंने भाषण में भड़काऊ भाषा का प्रयोग किया ताकि समुदायों में शत्रुता बढ़ाई जा सके और वर्गों के बीच कलपैदा हो सके, ताकि वह राष्ट्रीय एकता के लिए खतरा बने।

इसके बाद इस मामले में सिविल जज मनोरंजन झा की अध्यक्षता में सीजेएम अदालत ने मामले का संज्ञान लिया और कहा कि उदयनिधि को जमानत लेने के लिए व्यक्तिगत रूप से या अपने वकील के माध्यम से उसके समक्ष उपस्थित होना आवश्यक है। केस की अगली सुनवाई 1 अप्रैल को होगी।

‘केरल को एकमुश्त बेलआउट पैकेज दे केंद्र’: सुप्रीम कोर्ट का आदेश, राज्य सरकार के पास कर्मचारियों को देने के लिए पैसे नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (11 मार्च 2024) को सुझाव दिया कि केंद्र सरकार केरल को मौजूदा वित्तीय संकट से निकालने के लिए 31 मार्च तक उसे एकमुश्त पैकेज दे। कोर्ट ने यह भी माना कि वह वित्तीय मामलों का विशेषज्ञ नहीं है, लेकिन केंद्र सरकार और केरल सरकार बीच का रास्ता निकाल सकती हैं। इसको लेकर अब केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारियों की बैठक होने की संभावना है।

केरल सरकार द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम के जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि यह पैकेज कड़ी शर्तों के साथ दिया जा सकता है। पीठ ने कहा, “आप थोड़ा उदार हो सकते हैं और एक विशेष मामले के रूप में एकमुश्त पैकेज दे सकते हैं। अन्य राज्यों की तुलना में कठोर शर्तें के साथ 31 मार्च से पहले विशेष पैकेज दें।”

इस मामले में केरल सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल पेश हुए, जबकि केंद्र सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल (AG) आर वेंकटरमणि और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) एन वेंकटरमन पेश हुए। याचिका दाखिल करके केरल सरकार ने दावा किया गया था कि केंद्र सरकार राज्य की उधार लेने और उसके वित्त को विनियमित करने की शक्ति में अनुचित हस्तक्षेप कर रही है।

सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने केंद्र से केरल का बकाया 19,000 करोड़ रुपए तत्काल जारी करने की माँग की। तब एएसजी ने कहा, “जैसे ही बिजली मंत्रालय कहेगा कि उन्होंने अनुपालन कर लिया है, इसे स्थानांतरित कर दिया जाएगा। इस योजना के तहत बेलआउट पैकेज संभव नहीं है।” केंद्र ने कहा कि वह केरल के साथ विशेष व्यवहार नहीं कर सकता।

एएसजी ने जोर देकर कहा, “उनका मामला कोई विशेष नहीं है। हमने अन्य राज्यों को मना कर दिया है। वे व्यय का बजट भी नहीं रखते हैं। व्यय पैकेज की तुलना में 15 गुना अधिक बेलआउट मांँगा गया है।” केंद्र के हाथ बँधे होते हुए उन्होंने कहा, “उन्हें अदालत को बताना चाहिए कि वे भुगतान क्यों नहीं कर सकते। बाधाओं के बावजूद कोई रास्ता निकालने के लिए है।”

दरअसल, पिछले साल दिसंबर में दायर अपने मुकदमे में केरल सरकार ने आरोप लगाया था कि राज्य की उधारी पर केंद्र सरकार द्वारा कुछ सीमाएँ लगाने से अवैतनिक बकाया राशि जमा हो गई है। इसके परिणामस्वरूप गंभीर वित्तीय संकट हो सकता है। इसके बाद केरल की सरकार फरवरी महीने से अपने कई कर्मचारियों को वेतन देने में विफल रहा है।

पीठ ने 6 मार्च को कहा था कि राज्यों द्वारा राजकोषीय कुप्रबंधन एक ऐसा मुद्दा है जिसके बारे में केंद्र सरकार को चिंतित होना होगा, क्योंकि यह देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों सरकारों से बातचीत कर मुद्दों को हल करने का आग्रह किया था। इसके बाद दोनों सरकारें बातचीत करने पर सहमत हुई थीं। इसके बाद केंद्र और राज्य के अधिकारियों के बीच बैठक भी हुई।