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What’s Wrong With India: भारतीयों ने हाइजैक किया भारत विरोधी प्रोपेगंडा, खोल दी नफरती ट्रेंड की पोल, दूसरे देशों की सच्चाई भी दिखाई

भारतीयों ने इन्टरनेट पर चलाए जाने वाले भारत विरोधी कैम्पेन की हवा निकाल दी। साथ में ही उन्होंने पश्चिमी देशों की वह सच्चाई सामने ला दी, जो पश्चिमी देश, मीडिया और औपनिवेशिक मानसिकता वाले नागरिक छुपाना चाहते हैं। इन्टरनेट पर आम नागरिकों की इस फ़ौज को भारत सरकार का आधिकारिक समर्थन भी मिला। यह पूरी कहानी What;s Wrong With India नाम के एक ट्विटर ट्रेंड से

भारत सरकार के एक एक्स (पहले ट्विटर) हैंडल ने भी इस अभियान हिस्सा लिया। भारत सरकार के @MyGovIndia ने भी इसी श्रंखला में भारत की उपलब्धियों को दिखाते हुए एक ट्वीट किया। इसमें भारत के घोर गरीबी के उन्मूलन में सफलता, चन्द्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाले पहले देश बनने, IMF द्वारा आर्थिक स्थिति को लेकर प्रशंसा पाने और डिजिटल इन्फ्रा में पाई गई उपलब्धियों का जिक्र था। इस ट्वीट को ‘व्हाट्स रॉंग विद इंडिया’ (What’s Wrong with India) का नाम दिया गया था।

लेकिन असल जानने वाली बात है कि आखिर सरकार का एक ट्विट्टर हैंडल बिलकुल विपरीत लाइन लिख कर भारत की उपलब्धियों को दर्शा रहा था। इसके पीछे क्या कारण है और इस कैप्शन (व्हाट्स रॉंग विद इंडिया) की कहानी क्या है?

विदेशी सोशल मीडिया अकाउंट चला रहे थे (What’s Wrong with India) का एजेंडा

दरअसल, भारत सरकार के इस हैंडल का यह ट्वीट एक ट्रेंड हाइजैक का हिस्सा था। गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से विदेशी सोशल मीडिया अकाउंट्स भारत की नकारात्मक छवि पेश कर रहे थे। यह प्रमुखता से ट्विटर पर हो रहा था। यह अकाउंट भारतीयों के गाड़ी चलाने के तरीके, खान पान की आदतें, खुले में पेशाब, ड्रग की समस्या और धोखाधड़ी जैसे चीजों की फोटो वीडियो के जरिए भारत को निशाना बना रहे थे। यह बीते कुछ समय से विशेष रूप बढ़ गया था। इसमें हालिया 10 दिन में तो बाढ़ सी गई थी।

What's Wrong With India ट्रेंड
What’s Wrong With India ट्रेंड

हालाँकि अभी ये तो नहीं पता कि ‘What’s Wrong with India’ वाला ट्रेड किसने चालू किया? कई सोशल मीडिया यूजर्स के अनुसार, यह सबसे पहले तब सामने आया जब विश्व भर से कई भारत विरोधी अकाउंट्स ने भारत में स्ट्रीट फूड को निशाना बनाया। उन्होंने इसे गंदा बताया। बात यहीं नहीं रुकी, यही अकाउंट्स धीरे-धीरे भारत में महिलाओं की सुरक्षा, अपराध और भ्रष्टाचार जैसे अन्य मुद्दों को लेकर भी भारत निशाना बनाने लगे। इस पूरे अभियान में यह व्हाट्स रॉंग विद इंडिया वाली लाइन सबसे बड़ा हथियार बनी।

भारतीयों ने हाइजैक कर लिया प्रोपेगंडा

जब भारत के खिलाफ यह अभियान चला तो भारतीय सोशल मीडिया यूजर्स ने भी अपना दम दिखाया। उन्होंने भी अन्य देशों की कमियों को उजागर करना चालू किया। हालाँकि, भारतीय यूजर्स ने इसमें भी वही कैप्शन (What’s Wrong With India) उपयोग की जो कि विदेशी अकाउंट उपयोग में ला रहे थे। दरअसल, इसके पीछे का कारण यह था कि एलन मस्क के मालिकाना हक़ वाला ट्विटर इस कैप्शन वाली इन पोस्ट को बढ़ावा दे रहा था और ज्यादा जनता तक पहुँचा रहा था।

आसान भाषा में समझे तो ट्विटर भारत विरोधी प्रोपेगंडा को हवा दे रहा था। जबकि भारतीय अगर अन्य देशों के विषय में कमी निकालते तो वह ज्यादा लोगों तक नहीं पहुँचती। ऐसे में भारतीय यूजर्स ने इस भारत विरोधी अभियान को अपने हक़ में लाने के लिए हाईजैक कर लिया। भारतीय यूजर्स ने ट्विटर की तकनीक उसके खिलाफ ही अपनाई और भारत विरोधी प्रोपेगंडा को ध्वस्त कर दिया। इसी अभियान को भारत सरकार का भी साथ मिल गया।

दूसरे देशों की कमियाँ भी सामने रख दी

जहाँ दूसरे देशों के यूजर्स भारत का अपमान कर रहे थे, वहीं भारतीय यूजर्स ने इन देशों की कमियों को भी सामने रखा। भारतीयों ने दूसरे देशों में मेट्रो में होने वाली अश्लीलता, ड्रग्स की बढ़ती समस्या, सड़कों पर बिखरे कूड़े और ऐसे ही तमाम उदाहरण ट्विटर पर सामने रखे। एक वीडियो में एक व्यक्ति मेट्रो के अंदर पेशाब करते दिखता है। इन सब पोस्ट में What’s Wrong with India का उपयोग किया गया।

What’s Wrong With India ट्रेंड के साथ की गई एक पोस्ट

दूसरे भारतीय यूजर ने मेट्रो के अंदर नहाते एक व्यक्ति की वीडियो डाल दी।

एक अन्य ने सड़कों पर पड़ा कूड़ा और सड़क किनारे टेंट में रहते लोग दिखाए।

एक अन्य वीडियो में नशेडी देखे जा सकते हैं।

इसके बाद तो पश्चिमी देशों का सच दिखाने वाले मीम्स, सोशल मीडिया पोस्ट और वीडियो की भरमार हो गई। इन सबमें भारत जा एंगल जोड़ा गया। भारतीय यूजर्स ने स्पष्ट किया कि मात्र भारत ही नहीं बल्कि विकसित देशों में भी वही समस्याएँ हैं। इस ट्रेंड में सरकारी पोर्टल ने भी हिस्सा लेकर और भी मजेदार बना दिया।

रोजे में पखाने के बाद कैसे धोएँ, कैसे न धोएँ… पिछवाड़े से पानी पेट में चले जाने से टूट जाएगा रोजा? अलग-अलग मौलाना के वीडियो हो रहे वायरल, सब दे रहे ज्ञान

रमजान का महीना शुरू होते ही सोशल मीडिया पर इस्लाम संबंधी कई सवालों के जवाब में मुफ्ती/ मौलाना की वीडियो आना शुरू हो गई है। इसी क्रम में वो वीडियो भी वायरल हो रही है जिसमें एक मुफ्ती को पखाने के बाद गुदाद्वार साफ करने का तरीका बताते देखा जा सकता है जिससे कि पानी पेट तक न जाए।

सोशल मीडिया पर लोग इस वीडियो को ये कहकर शेयर कर रहे हैं कि मुफ्ती खुद इस संबंध में ज्ञान दे रहे हैं कि कैसे गुदाद्वार साफ किया जाए, लेकिन हकीकत यह है कि मुफ्ती बदर अपनी वीडियो में किसी और मौलाना द्वारा फैलाई कई भ्रांति पर सफाई दे रहे हैं। असल में तो वो समझा रहे हैं कि पखाने का रास्ता बहुत सख्त होता है वहाँ से कैसे भी पानी घुसकर पेट तक नहीं जा सकता।

वायरल होती वीडियो में मुफ्ती मामुर बदर कासमी की वीडियो को क्रॉप करके शेयर किया जा रहा है। क्रॉप वीडियो में ऐसा लग रहा है कि वो खुद कहते हैं कि इस्तिन्जा करते समय साँस रोक लें। इसके बाद वो हाथ हिला कर (पिछवाड़ा धोने की प्रक्रिया) बता रहे हैं कि पानी का इस्तेमाल करें। साँस रोकने को लेकर मुफ्ती तर्क देते हैं कि इससे पखाने का सुराख (गुदाद्वार) खुलेगा नहीं, टाइट रहेगा। इस कारण से इस्तिन्जा के वक्त पानी गुदाद्वार से होते हुए पेट के अंदर नहीं जाएगा।

रोजे के टूटने की बात कहते हुए मुफ्ती बताते हैं कि कोई चीज अगर मुँह के रास्ते से या पखाने के रास्ते से पेट में चली जाए तो उस कारण से रोजा का टूटना माना जाएगा। अपनी बात में वजन लाने के लिए इस्लामी मजहबी किताबों के कुछ उदाहरण भी देते हैं मुफ्ती।

बता दें कि ये वीडियो 7 मई 2020 को रमजान के समय मुफ्ती मामुर बदर कासमी के ऑफिशियल अकॉउंट से अपलोड की गई थी। ये वीडियो 7 मिनट 18 सेकेंड की है। इसमें मुफ्ती बदल असल में ‘रोजे में पखाने के बाद पिछवाड़ा कैसे धोएँ’ को लेकर चल रही भ्रांतियों पर बात रखी थी।

उन्होंने अपने यूजर को वीडियो में बताया था कि जैसा कि वीडियो वायरल हो रही है कि इस्तिन्जा के समय पानी पेट में जा सकता है। तो ये बात बिलकुल असंभव है। हाँ, एक संभावना यह बताई कि जिस इंसान के पखाने का रास्ता (गुदाद्वार) बहुत ढीला हो, उसके पेट में इस्तिन्जा करते समय पानी जा सकता है।

पिछले साल भी उनकी यह वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल होना शुरू हुई थी। उस समय उन्होंने शॉर्ट वीडियो बनाते हुए सफाई दी थी। उन्होंने कहा था कि ये दावा उनका नहीं है बल्कि एक बरेलवी मौलाना का है जो बता रहे थे कि रोजे में किस तरह से इस्तिन्जा करना चाहिए।

उनके अनुसार बरेलवी मौलाना ने वो भ्रांतियाँ फैलाई थीं जिसकी बात करते वो वीडियो में दिखे। ऊपर दी गई वीडियो उसी बरेलवी मौलाना की है जो यह बताता दिख रहा है कि रोजे में गुदाद्वार को चिपका कर इस्तिन्जा करना चाहिए।

हैदराबाद मुक्ति दिवस: जब इस्लामी सेना के आतंक से 1.5 करोड़ हिन्दू हड्डी और राख होने से बचाए गए, अमित शाह ने 17 सितम्बर कर दिया फिक्स

केंद्र सरकार ने निर्णय लिया है कि वह हर वर्ष 17 सितम्बर को ‘हैदराबाद मुक्ति दिवस’ मनाएगी। इसके लिए केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी की है। सरकार का कहना है कि यह माँग लम्बे समय से की जा रही थी, जिसे अब पूरा किया जा रहा है।

गृह मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया, “15 अगस्त, 1947 को भारत की स्वतंत्रता होने के बाद भी हैदराबाद को 13 महीने तक मुक्ति नहीं मिली और यह निजाम के शासन के अधीन था। यह क्षेत्र 17 सितंबर, 1948 को ‘ऑपरेशन पोलो’ नामक पुलिसिया कार्रवाई के बाद निजाम के शासन से मुक्त हो गया।”

गृह मंत्रालय ने कहा कि हैदराबाद की निजामशाही में आने वाले क्षेत्रों के लोगों को माँग रही है कि इस दिन को हैदराबाद मुक्ति दिवस के रूप में हर वर्ष मनाया जाए। इस माँग को मानते हुए सरकार ने 17 सितम्बर को ‘हैदराबाद मुक्ति दिवस’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। गृह मंत्रालय ने कहा कि इससे युवाओं के मन में देशभक्ति की लौ जलाई जा सकेगी और साथ ही इस क्षेत्र को स्वतंत्र करवाने के लिए प्राण देने वालों का भी समान होगा।

कल (12 मार्च, 2024) को केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तेलंगाना के सिकन्द्राबाद में आयोजित एक रैली में लोगों से पूछा था कि क्या हमें 17 सितम्बर को हैदराबाद मुक्ति दिवस मनाना चाहिए। इस पर जनता ने उनका समर्थन किया था। कल ही यह बात सरकार ने मान भी ली।

गौरतलब है कि देश के आजाद होने के बाद हैदराबाद के निजाम ने भारत में विलय होने से इंकार कर दिया था। हैदराबाद का निजाम पाकिस्तान में विलय होने की धमकी भारत के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल को दे रहा था। इसके बाद ‘ऑपरेशन पोलो’ के जरिए हैदराबाद को मुक्त करवाया गया था।

निजाम ने भारत में विलय को लेकर नेहरु सरकार को काफी छकाया था। निज़ाम ने घोषणा की थी कि आज़ादी के बाद वह ब्रिटिश कॉमनवैल्थ का सदस्य बन कर एक अलग राज्य की सम्प्रभुता को क़ायम रखना चाहता है। उसके सिपाहसालार कासिम रजवी, जो कि इत्तिहाद ए मुस्लिमीन का अध्यक्ष (यह अब AIMIM के नाम से जानी जाती है।) था। उसने धमकी दी थी कि अगर भारत सरकार हैदराबाद में दखल देती है तो उसे 1.5 करोड़ हिन्दुओं की हड्डियाँ और राख मिलेगी।

इस पर सरदार पटेल ने कहा था कि अगर ऐसी बात है तो यह निज़ाम और उसके पूरे खानदान की जड़ों को नष्ट कर देगा। सरदार ने कहा कि हैदराबाद का विलय उसी प्रकार से होगा, जिस तरह से अन्य राज्यों का हुआ है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों के ख़ून-पसीने से बने भारत को एक धब्बे की वजह से बर्बाद नहीं होने दिया जाएगा।

निजाम की सेना ने भारत के सैन्य दखल देने से पहले हिन्दुओं पर काफी अत्याचार किया था, महिलाओं के साथ बलात्कार किए गए थे। ब्राम्हणों को मारा गया था। इन सब अत्याचारों को जनता के सामने लाने के लिए एक फिल्म बनाई जा रही है। इसका नाम ही ‘रजाकार‘ रखा गया गया है।

रमजान के पहले दिन हलीम Free…. ऑफर देख होटल के बाहर जुटे सैकड़ों रोजाधारी: हैदराबाद पुलिस ने लाठी-डंडों से मारकर भगाया, केस दर्ज

रमजान का महीना शुरू होते ही पहले दिन हैदराबाद में एक होटल/रेस्टोरेंट के बाहर सैंकड़ों की भीड़ हलीम खाने पहुँची। बताया जा रहा है कि होटल/रेस्टोरेंट ने रमजान पर अपने यहाँ फ्री हलीम का ऑफर रखा था। इसके बाद क्या…? उनके होटल/रेस्टोरेंट के बाहर इतनी भीड़ जुटी कि उसे काबू करना मुश्किल हो गया। हालात ऐसे हो गए कि पुलिस को वहाँ आकर लाठी चार्ज करना पड़ा, तब जाकर स्थिति नियंत्रण में आई।

मामला मालकपेट शहर के एक नए होटल/रेस्टोरेंट ‘Aazebo’ का है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जहाँ होटल/रेस्टोरेंट के बाहर मार्केट वाली जगह पर इतनी भीड़ जुटी कि आसपास बड़ा ट्रैफिक जाम लग गया। लोग हलीम को माँगने के लिए लड़ाई लड़ने लगे। एक दूसरे से धक्का-मुक्की शुरू हो गई। बिगड़ते हालातों को देखते हुए पुलिस ने आकर स्थिति को संभाला तो लेकिन ये बेहद मुश्किल काम था। होटल/रेस्टोरेंट के बाहर फ्री हलीम के इंतजार में खड़ा कोई व्यक्ति वहाँ से हटने को तैयार नहीं था। ऐसे में पुलिस को लाठी चार्ज का भी सहारा लेना पड़ा।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में मालकपेट इंस्पेक्टर यू श्रीनिवास ने ट्रैफिक की आवाजाही बाधित करने के लिए होटल के खिलाफ केस को दर्ज कर लिया है। उन्होंने बताया कि होटल/रेस्टोरेंट मैनेजमेंट ने पहले से कोई जानकारी नहीं दी थी कि होटल/रेस्टोरेंट ऐसा कोई ऑफर दे रहा है या उन्होंने इस संबंध में पहले कोई परमिशन भी नहीं ली थी। पुलिस इंस्पेक्टर ने कहा कि इस तरह डिस्टरबेंस बढ़ाने के लिए और यातायात बाधित करने के लिए मामला दर्ज हो गया है।

जिस आरिफ थानवी की बहन को पुलिस ने किया था सम्मानित, वही CAA के खिलाफ उड़ा रहा था अफवाह, ‘मर्दाना ताकत’ वाला क्लिनिक चलाता था झोलाछाप डॉक्टर

भारत सरकार ने सोमवार (11 मार्च, 2024) को नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। पूरे देश की पुलिस को इस मौके पर हाई अलर्ट पर रखा गया है। पुलिस ने जमीन से ले कर सोशल मीडिया पर कड़ी नजर रखी है। लोगों से लगातार भ्रामक खबरें न तो उड़ाने और न ही उस पर विश्वास करने की अपील की जा रही है। इस अपील को दरनिकार कर के उत्तर प्रदेश के मुज़फ्फरनगर जिले का आरिफ थानवी लगातार CAA के खिलाफ अफवाह उड़ा रहा था। सोमवार (12 मार्च, 2024) को पुलिस ने आरिफ को गिरफ्तार कर लिया है।

यह मामला मुज़फ्फरनगर जिले के थानाक्षेत्र कोतवाली नगर का है। पुलिस ने मंगलवार को बताया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और व्हाट्सएप पर एक ग्रुप थानवी टाइम्स चल रहा था। इस ग्रुप को आरिफ थानवी संचालित करता है। इस ग्रुप में लगातार CAA को ले कर भ्रामक खबरें शेयर की जा रहीं थीं। पुलिस ने आरिफ की इस करतूत को सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाली हरकत करार दिया है। कोतवाली नगर में आरिफ के खिलाफ FIR दर्ज कर के मंगलवार को उसे गिरफ्तार कर लिया गया है।

पुलिस प्रेसनोट

नसीम का बेटा आरिफ थानवी मूल रूप से मुज़फ्फरनगर के खालापार इलाके का निवासी है। यह वही क्षेत्र है जहाँ CAA विरोधी हिंसक प्रदर्शन हुए थे जिसमें पुलिस अधीक्षक नगर तक को जान से मारने की नीयत से गोली मारी गई थी। हालाँकि इस हमले में SP सिटी बाल-बाल बच गए थे। दबिश के दौरान पुलिस को आरिफ अपने घर पर ही मिल गया। उसका ओप्पो कम्पनी का वह मोबाइल फोन भी ज़ब्त कर लिया गया है जिस से वो भ्रामक खबरें शेयर कर रहा था। इस गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने एक बार फिर से लोगों को अफवाह न तो उड़ाने और न ही उस पर विश्वास करने की अपील की है।

झोलाझाप डॉक्टर, बहन को पुलिस ने दिया था सम्मान

ऑपइंडिया ने मुज़फ्फरनगर के पत्रकार समर ठाकुर से बात की। समर ठाकुर ने बताया कि आरिफ थानवी एक झोलाछाप डॉक्टर है जो हकीमी आदि की क्लिनिक चलाता है। वह मर्दाना ताकत और गुप्त रोगों आदि के इलाज का भी दावा करता है। कभी कभार उसकी कथित क्लिनिक पर भीड़ भी दिखाई पड़ती है।

साल 2018 के अगस्त माह में मुज़फ्फरनगर के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक की मौजूदगी में आरिफ की बहन सना को पुलिस ने सम्मानित भी किया था। तब उन्हें रक्षाबंधन के मौके पर 1 दिन का प्रतीकात्मक तौर पर जिले के थाना नई मंडी प्रभार भी दिया गया था। इस दौरान सना थानवी को बकायदा पुलिस अधिकारी की कैप भी पहनाई गई थी।

नाबालिग हिन्दू सहेली को ले गई साथ, 2 दिनों बाद मिली रहीसुद्दीन के पास: गाजियाबाद में ‘द केरल स्टोरी’ जैसी घटना, मुस्लिम पड़ोसन की दीदी-मामी सबके शामिल होने की आशंका

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में ‘द केरल स्टोरी’ जैसा मामला सामने आया है। यहाँ एक मुस्लिम महिला पर नाबालिग हिन्दू लड़की को बहला-फुसला कर अपने साथ ले जाने का आरोप लगा है। 2 दिनों के बाद वही लड़की एक मुस्लिम युवक के साथ मिली। पुलिस ने केस दर्ज कर के आरोपित महिला सहित एक मुस्लिम युवक को हिरासत में ले लिया है। मामले की जाँच की जा रही है। घटना बुधवार (6 मार्च 2024) की है।

यह मामला गाजियाबाद के थाना क्षेत्र साहिबाबाद का है। यहाँ की रहने वाली एक हिन्दू महिला ने शनिवार (9 मार्च, 2024) को पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में महिला ने बताया है कि 6 मार्च को उनकी 15 वर्षीया बेटी को एक मुस्लिम लड़की अपने साथ बहला-फुसला कर ले गई थी। अरोपिता पीड़िता की पड़ोसन बताई जा रही है। जब पीड़िता की माँ ने अपनी बेटी की खोजबीन शुरू की तो वह 2 दिनों के बाद 8 मार्च को रहीसुद्दीन नाम के एक व्यक्ति के घर मिली। रहीसुद्दीन का घर साहिबाबाद थाना क्षेत्र के ही मुस्तफा मस्जिद के पास बताया गया है।

नाबालिग पीड़िता की माँ ने पुलिस से दोनों आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है। पुलिस ने मुस्लिम लड़की और रहीसुद्दीन के खिलाफ FIR दर्ज कर के उन्हें हिरासत में ले लिया। दोनों पर IPC की धारा 363 के तहत कार्रवाई की गई है। पीड़िता को मेडिकल परीक्षण के लिए भेजा गया है। हिन्दू संगठनों की मानें तो अभी मेडिकल रिपोर्ट और पीड़िता के बयानों के आधार पर अभी इस केस में कुछ अन्य आरोपितों के नाम प्रकाश में आने और FIR में धाराएँ बढ़ने की आशंका है।

ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। गाजियाबाद जिले के हिन्दू संगठनों ने इस घटना के आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। उन्होंने इसे ‘द केरल स्टोरी’ जैसी ही साजिश करार देते हुए उच्चस्तरीय जाँच की माँग भी की है।

बाँध दिए गए थे पीड़िता के हाथ और पैर

ऑपइंडिया ने इस मामले में पीड़िता की माँ से बात की। लड़की की माँ ने हमें पूरी जानकारी के लिए स्थानीय विश्व हिन्दू परिषद के धर्मपरावर्तन जिलाध्यक्ष सुशील सक्सेना से बात करने के लिए कहा। विहिप पदाधिकारी सुनील सक्सेना और विश्व हिन्दू परिषद मातृशक्ति जिलाध्यक्ष ममता मित्तल ने ऑपइंडिया से बात करते हुए कहा कि वो पीड़िता के परिजनों के लगातार सम्पर्क में हैं। इन दोनों ने दावा किया कि पीड़िता को अपने साथ ले जाने वाली लड़की उसकी सहेली थी थी जो संभवतः अभी नाबालिग है।

सुशील और ममता ने दावा किया कि पीड़िता को उसकी सहेली पहले अपनी मामी के घर ले गई थी। यहाँ एक दिन रुकने के बाद लड़की को रहीसुद्दीन की बहन के घर ले जाया गया। यहाँ पर रहीसुद्दीन भी मौजूद था जिसकी उम्र लगभग 25 वर्ष बताई जा रही है। सुशील सक्सेना के मुताबिक यहाँ पीड़िता को कोई नशीली चीज खिला दी गई थी जिस से वो बेसुध हो गई थी। आशंका जताई जा रही है कि इस बेहोशी की हालत में पीड़िता से दुष्कर्म हुआ है। हालाँकि दुष्कर्म की पुष्टि उन्होंने मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद ही हो पाना संभव बताया।

सुशील और ममता ने हमसे बातचीत के दौरान आगे बताया कि नाबालिग हिन्दू लड़की के साथ हुए इस गुनाह में रहीसुद्दीन की मामी और बहन भी शामिल हैं। इस दौरान उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि साजिशन कई आतंकियों की तरह रहीसुद्दीन को भी मानसिक रोगी साबित करने के लिए उसके परिजन तैयारी में जुट गए हैं। हालाँकि उन्होंने यह भी कहा कि आरोपितों को सजा मिलने तक पीड़िता के परिजनों को पूरी सुरक्षा और कानूनी मदद की जाएगी।

JNU (जहाँगीर नेशनल यूनिवर्सिटी): कैसे एक विश्वविद्यालय बन गया देश तोड़ने वालों का अड्डा, फिल्म का पोस्टर आते ही वामपंथी करने लगे रुदन

बात ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ की हो या ‘आजादी गैंग’ की या फिर दिल्ली में हिंदू विरोधी दंगों की… इनकी जड़ों में एक ही नाम मिला, -JNU (जेएनयू) का। इस यूनिवर्सिटी को लेकर अक्सर विवाद होता रहता है। कई गंभीर आरोप यहाँ से जुड़े छात्रों पर भी लगते हैं। ऐसे में जेएनयू नाम से एक फिल्म आ रही है, जिसका पूरा नाम जेएनयू: जहाँगीर नेशनल यूनिवर्सिटी रखा गया है। इस फिल्म का फर्स्ट लुक पोस्टर भी जारी हो गया है, जो भगवा रंग में है। खास बात ये है कि जेएनयू की पहचान जिन गलत चीजों के लिए बनती जा रही थी, उन्हीं मुद्दों को इस फिल्म में दिखाया जाने वाला है, जिसमें बॉलीवुड के मंझे कलाकार नजर आएँगे। ये फिल्म 5 अप्रैल को सिनेमाघरों में दस्तक देगी।

जेएनयू फिल्म के पोस्टर में भगवा रंग में भारत का नक्शा दिखाया गया है, जो एक मुट्ठी में जकड़ा हुआ है। उसी नक्शे पर फिल्म की टैगलाइन – क्या एक एजुकेशनल यूनिवर्सिटी देश को तोड़ सकती है? (Can One Educational University Break The Nation?) भी लिखा हुआ है। इसके नीचे कई हाथ नारेबाजी की मुद्रा में उठे हुए हैं। इस फिल्म में पीयूष मिश्रा, रश्मि देसाई, उर्वशी रौतेला जैसे नामी चेहरे दिखेंगे, तो भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार रवि किशन भी इस फिल्म में नजर आएँगे। इस फिल्म का लेखक और डायरेक्शन विनय शर्मा कर रहे हैं।

‘जेएनयू: जहाँगीर नेशनल यूनिवर्सिटी’ का पहला पोस्टर सामने आते ही हंगामा मच गया है। जेएनयू जिस वामपंथी चरित्र की वजह से बदनाम हो चुका है, उसी वामपंथी गैंग के लोग सोशल मीडिया पर हंगामा मचाते नजर आ रहे हैं। जाने-माने वामपंथी लेखक और हिंदू विरोधी लेखन के लिए कुख्यात इरफान हबीब ने तो पोस्टर के जारी होते ही रोना शुरू कर दिया है। उन्होंने अपने एक्स हैंडल पर लिखा, “जेएनयू को लेकर एक सनक रहा है। ये सिर्फ इसलिए, क्योंकि ये सोचने की आजादी देता है। जेएनयू ने पूरे भारत के वंचितों को जगह दी है। विचारों और संस्कृतियों का एक सच्चा मेल यहाँ होता था। यही एकमात्र वजह है कि इस प्रमुख संस्थान को हर दिन निशाना बनाया जा रहा है और उसे कमजोर किया जा रहा है।”

अक्सर आईडिया ऑफ इंडिया की जगह आईडिया ऑफ ब्रेकिंग इंडिया पर ट्वीट करने वाली कथित पूर्व पत्रकार रिया (असली नाम Andrea D Souza) ने लिखा, “जेएनयू के छात्र क्यों नहीं कदम (विरोध) उठाते? जवाहर लाल नेहरू वो नहीं है, जो फेक प्रोपेगेंडा फिल्में दावा कर रही हैं। जेएनयू को खुद ऐसे प्रोड्यूसर्स के खिलाफ कड़े से कड़े कदम उठाने चाहिए।”

कुछ लोगों ने वामपंथियों की छटपटाहट को पकड़ लिया और अपनी प्रतिक्रिया दी। सोशल स्क्रिप्ट नाम के एक्स हैंडल ने लिखा, “कश्मीर फाइल्स, द केरला स्टोरी, आर्टिकल 370, स्वातंत्र्य वीर सावरकर के बाद अब आ रही है जेएनयू। पाँच अप्रैल को तैयार रहें लेफ्टिस्ट एजेंडा को समझने के लिए, उन्होंने भारत देश के टुकड़े करने के लिए किस तरह की तरकीबें अपनाई।

शरत(थ) नाम के यूजर ने लिखा, “हर रोज एक नया जख्म।”

बता दें कि 5 अप्रैल को रिलीज होने जा रही फिल्म जेएनयू-जहाँगीर नेशनल यूनिवर्सिटी को लेकर सोशल मीडिया पर काफी पहले से चर्चा हो रही है। इस फिल्म को महाकाल मूवीज के बैनर तले बनाया जा रहा है।

‘CAA के लिए आवेदन करने वालों को नहीं मिलेगा सरकारी योजनाओं का लाभ’: CM ममता बनर्जी बोलीं – बंगाल में नहीं होने दूँगी लागू, केरल सरकार ने मिलाया सुर

केंद्र की मोदी सरकार ने सोमवार (11 मार्च 2024) को नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) को लागू कर द‍िया। इसके बाद पश्‍च‍िम बंगाल की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी और केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने इसे अपने-अपने राज्यों में लागू करने से इनकार कर दिया है। ममता बनर्जी ने मंगलवार (12 मार्च 2024) को कहा कि बंगाल को किसी भी सूरत में डिटेंशन सेंटर नहीं बनने दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य के लोगों से नागरिकता के लिए आवेदन नहीं करने को कहा। उन्होंने कहा कि यदि लोगों ने ऐसा किया तो उन्हें शरणार्थी और घुसपैठिए के रूप में चिह्नित किया जाएगा और सरकारी योजनाओं से वंचित कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा, “मुझे संदेह है कि इनकी ओर से लाया कानून वैध भी या नहीं। इसे लेकर केंद्र सरकार की स्पष्टता नहीं है।”

ममता बनर्जी ने भाजपा को बेकार पार्टी और मह‍िलाओं के ख‍ि‍लाफ बताते हुए कहा कि असली हिंदू का मतलब यह नहीं होता क‍ि बाहरी लोगों को हिंदू बनाया जाए। उन्होंने कहा कि CAA राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) से जुड़ा हुआ है। ममता ने कहा, “मैं लोगों से आग्रह करती हूँ कि लोकसभा चुनावों से पहले वे भाजपा की योजना के झाँसे में न आएँ।”

ममता बनर्जी ने कहा, “आवेदन करते ही ऐसे लोग घुसपैठिये बन जाएँगे। यह अधिकार छीनने का खेल है। अगर आप आवेदन करते हैं तो इसकी कोई गारंटी नहीं है कि आपको नागरिकता मिलेगी या नहीं। आप अपनी संपत्ति खो देंगे। आप सरकारी योजनाओं से वंचित रहेंगे। आवेदन करने पर सारे नागरिक अधिकार छीन लिए जाएँगे। इस लिए आवेदन करने से पहले हजार बार सोचें। यह एनआरसी से जुड़ा है।”

ममता बनर्जी ने साफ कहा कि वह CAA बंगाल में लागू नहीं होने देंगी। ममता बनर्जी ने कहा, “मैं सीएए लागू नहीं करने दूँगी। मैं लोगों के बुनियादी अधिकार छीनने नहीं दूँगी। इसके लिए मुझे अपनी जान भी कुर्बान करनी पड़ी तो मैं करूँगी।” उन्‍होंने कहा कि 2019 में असम में NRC के नाम पर 19 लाख में से 13 लाख बंगाली हिंदू के नाम हटा दिए गए थे। इसके कारण कई लोगों ने आत्महत्या कर ली थी।

अवैध घुसपैठियों का बचाव करते हुए ममता बनर्जी ने आगे कहा, “यह कहते हुए कि यह अधिनियम लोगों को परेशान करने के लिए बनाया गया है। संयुक्त राष्ट्र ने स्पष्ट रूप से कहा है कि शरणार्थियों को विस्थापित नहीं किया जाना चाहिए और किसी देश से बाहर नहीं निकाला जाना चाहिए। यह बुनियादी मानवता है। क्या हमने कभी देखा है कि धर्म के आधार पर नागरिकता दी जा रही है?”

CAA को खतरनाक बताते हुए ममता बनर्जी ने आगे कहा, “वे पिता का जन्म प्रमाण पत्र माँग रहे हैं… क्या आपके पास आपके पिता का जन्म प्रमाण पत्र है? मेरे पास नहीं है। मैं अपने माता-पिता की जन्मतिथि भी नहीं जानती। इससे कुछ लोगों को नागरिकता मिल सकती है, लेकिन जिन्हें नहीं मिलेगी उन्हें हिरासत शिविर में भेज दिया जाएगा।”

सीएए को नागरिकता अधिकार छीनने के लिए रची गई साजिश बताते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि यह बंगाल को फिर से विभाजित करने और बंगालियों को देश से बाहर निकालने का खेल है। उन्होंने कहा, “उन्होंने जानबूझकर कल इसकी घोषणा करने का फैसला किया, क्योंकि आज से यह रोज़ा है। हम उन्हें यहाँ एनआरसी लागू नहीं करने देंगे।”

वहीं, केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने भी कहा कि वे पहले ही दोहरा चुके हैं कि मुस्लिमों को दोयम दर्जे का नागरिक समझने वाले CAA कानून को केरल में किसी भी कीमत पर लागू नहीं होने देंगे। इस सांप्रदायिक कानून बताते हुए विजयन ने कहा कि इसके विरोध में पूरा केरल खड़ा नजर आएगा।

‘जीवनसाथी को तलाक दिए बिना दूसरे के साथ लिव इन में रहना गैर-कानूनी’: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने विवाहिता द्वारा दायर सुरक्षा की याचिका खारिज की, लगाया ₹2000 का जुर्माना

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मंगलवार (12 मार्च 2024) को पति को तलाक दिए बिना लिव इन रिलेशनशिप में रहने वाली एक विवाहित महिला की याचिका खारिज कर दिया। हाई कोर्ट ने कहा कि विवाहित महिला पति से तलाक लिए बिना किसी और के साथ लिव इन में नहीं रह सकती। इसके साथ ही कोर्ट ने उसकी सुरक्षा की माँग को खारिज कर दिया और दो हजार रुपए का जुर्माना लगा दिया।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, एक महिला ने सुरक्षा की माँग को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इस मामले पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट की जस्टिस रेनू अग्रवाल की सिंगल बेंच ने कहा कि पति से बिना तलाक लिए एक विवाहित महिला लिव इन में नहीं रह सकती है। अगर ऐसे रिश्तों को मान्यता दी जाती है तो इससे अराजकता बढ़ेगी और समाज का ताना-बाना नष्ट हो जाएगा।

न्यायमूर्ति रेनू अग्रवाल ने कहा, “न्यायालय इस प्रकार के रिश्ते का समर्थन नहीं कर सकता, जो कि कानून का उल्लंघन है। हिंदू विवाह अधिनियम के अनुसार यदि किसी व्यक्ति का जीवनसाथी जीवित है या तलाक की डिक्री प्राप्त करने से पहले वह किसी अन्य व्यक्ति से शादी नहीं कर सकता है।”

बता दें कि उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले की रहने वाली याची ममता (बदला हुआ नाम) ने यह याचिका दाखिल की थी। याचिका में बताया गया कि वह और उसका लिव इन पार्टनर पहले से ही शादीशुदा हैं। ऐसे में उसे सुरक्षा दी जाए। इन तथ्यों पर गौर करने के बाद हाई कोर्ट का सुरक्षा देने से इनकार कर दिया है। इसके साथ ही याचिकाकर्ता पर 2,000 रुपए का जुर्माना भी लगाया है।

बता दें कि पिछले महीने इसी तरह के एक मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक विवाहित महिला और उसके लिव इन पार्टनर द्वारा दायर सुरक्षा याचिका को खारिज कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि इस प्रकार के ‘अवैध संबंध’ को अदालत द्वारा संरक्षित करने की आवश्यकता नहीं है।

दरअसल, जस्टिस रेनू अग्रवाल की पीठ के समक्ष ही 26 साल की मुस्लिम महिला की याचिका गई थी, जो अपने हिंदू प्रेमी के साथ रहना चाहती थी। महिला ने हाई कोर्ट में याचिका देकर कहा था कि उसे अपने रिश्तेदारों से जान का खतरा है। उसने अपनी और अपने प्रेमी की सुरक्षा की गुहार लगाई थी।

कोर्ट ने कहा था, “प्रथम याचिकाकर्ता (मुस्लिम महिला) मुस्लिम कानून (शरियत) के प्रावधानों के विपरीत दूसरे याचिकाकर्ता के साथ रह रही है। मुस्लिम कानून में विवाहित महिला शादीशुदा जिंदगी से बाहर नहीं जा सकती, इसलिए मुस्लिम महिला के इस कृत्य को ‘जिना’ और ‘हराम’ के तौर पर परिभाषित किया जाता है।” बता दें कि इस मुस्लिम महिला का शौहर खुद दूसरी बीवी के साथ रह रहा है।

‘तुझ जैसी च**ट्टी से हम मुस्लिम सिर्फ मजे लेते हैं’: दलित महिला से रेप, अबॉर्शन, ब्लैकमेलिंग, तालिब के घर वाले बोले – हिन्दू लड़कियों से अय्याशी हमारा फैशन

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले से ‘लव जिहाद’ का मामला सामने आया है। यहाँ तालिब हसन नाम के व्यक्ति पर हिन्दू नाम से एक तलाकशुदा दलित युवती से रेप का आरोप लगा है। सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करने वाली पीड़िता ने तालिब पर अश्लील वीडियो बना कर खुद को ब्लैकमेल करने का भी आरोप लगाया है। कई बार रेप से गर्भवती होने के बाद आरोपित ने पीड़िता का एबॉर्शन भी करवा दिया। तालिब एक मेडिकल कम्पनी में सेल्समैन का काम करता है जिसने लड़की से 2 लाख रुपए भी ऐंठ लिए।। पीड़िता ने इस साजिश में तालिब की बहन, बहनोई, भाई और माँ को भी नामजद किया है। शनिवार (9 मार्च) को पुलिस ने FIR दर्ज कर के आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।

यह घटना गाजियाबाद के थानाक्षेत्र क्रॉसिंग रिपब्लिक की है। यहाँ एक सोसाइटी में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करने वाली एक लड़की ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में पीड़िता ने बताया है कि फरवरी 2020 में वह तालिब से मिली थी जिसने अपना नाम अंकित बताया था। मूल रूप से मुरादाबाद का रहने वाला तालिब नोएडा में दवाओं के सेल्समैन के तौर पर काम करता था। यह दोस्ती 4-5 महीने चली। इस दौरान अंकित बने तालिब ने पीड़िता को प्रपोज भी किया। हालाँकि लड़की ने इसे ठुकरा दिया।

थोड़े समय बाद तालिब ने पीड़िता से शादी का वादा किया। पीड़िता तालिब के झाँसे में आ गई। एक दिन पीड़िता को OYO से बुक किए हुए एक होटल में बुलवाया। यहाँ उसने लड़की को नशीला पदार्थ दे करदुष्कर्म किया। इसी दौरान उसने चुपके से लड़की की अश्लील फोटो और वीडियो बना लीं। इसके बाद तालिब ने यही फोटो और वीडियो दिखा कर पीड़िता से कई बार रेप किया। फरवरी 2021 में पीड़िता प्रेग्नेंट हो गई। शादी में मजबूरी की वजह से देरी की बात कह कर उसने 14 मार्च, 2021 को पीड़िता का एबॉर्शन भी करवा दिया।

इसके बाद पीड़िता आरोपित पर शादी का दबाव बनाने लगी। आरोप है कि एक दिन पीड़िता ऑटो से कहीं जा रही थी। इस दौरान तालिब ने ऑटो से खींच कर उसे मारा। इसी के साथ उसने कहा, “मुझे तो तेरे साथ मजे लेने थे जो मैंने ले लिए। मुझे तुझसे कोई शादी-वादी नहीं करनी है। मैं मुसलमान हूँ और तू हिन्दू है। वैसे भी तू च*री नीच जात की है। तुझ जैसे च*टी से शादी कौन करेगा। कम से कम मैं तो नहीं करूँगा। अब तुझ में मेरा कोई इंट्रेस्ट नहीं बचा। जा के कहीं मर जा। मैं तो अपनी पसंद की मुस्लिम लड़की से शादी करूँगा। तुझ जैसी लड़कियों से हम जैसे मुसलमान सिर्फ मौज मस्ती करते हैं, शादी नहीं।”

इसके बाद आरोपित ने पीड़िता को बेरहमी से मारा-पीटा। जब तालिब की शिकायत लड़की ने उसके घर वालों से की तो वहाँ भी पीड़िता को जातिसूचक शब्द बोले गए। पीड़िता को गालियाँ देते हुए तालिब के परिजनों ने कहा, “च$*री तेरा ये ख्वाब कभी पूरा नहीं होगा। एक गैर-मजहब की लड़की हमारे घर में नहीं आ सकती। तालिब ने तेरे साथ जो भी किया वो हमारे मजहब में बुरा नहीं माना जाता। हिन्दू लड़कियों से अय्याशी करना हमारा फैशन माना जाता है।” इन तमाम घटनाओं के पहले तालिब पीड़िता का 3-4 बार एबॉर्शन करवा चुका था। साथ ही उसने लगभग 2 लाख रुपए भी ब्लैकमेल कर के ऐंठ लिए थे।

पीड़िता ने अपनी शिकायत में तालिब हसन के साथ उसकी माँ नूरजहाँ, उसकी बहनें गुलफ्शा, मुमताज और गुलशन, तालिब के बहनोई दिलशाद और राशिद, भाई अनीश और भाभी सबीना को भी नामजद किया है। इन सभी पर पीड़ता को जातिसूचक गालियाँ देने और प्रताड़ित करने का आरोप है। पुलिस ने सभी आरोपितों पर IPC की धारा 328, 376, 313, 406, 423, 323, 504 और 506 के साथ SC/ST एक्ट में FIR दर्ज कर ली है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। तालिब हसन को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।