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अब इधर-ऊधर नहीं होऊँगा: औरंगाबाद में मंच से नीतीश कुमार ने पीएम मोदी से किया वादा, कहा- हम मिलकर बिहार का विकास करेंगे

झारखंड और बंगाल के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार (2 मार्च 2024) को बिहार के औरंगाबाद पहुँचे। वहाँं उन्होंने कई परियोजनाओं की घोषणा की। इस दौरान बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पीएम मोदी की आगवानी की और मंच से कहा कि अब वे NDA गठबंधन को छोड़कर कहीं नहीं जाएँगे। इस दौरान पीएम मोदी भी ठहाके लगाकर हँसते हुए नजर आए।

औरंगाबाद में पीएम की उपस्थिति में जनसभा को संबोधित करते हुए नीतीश कुमार ने कहा, “आज मैं अभिनंदन करता हूँ कि आप फिर पधारे हैं यहाँ। आज हमलोगों के लिए बड़ी खुशी की बात है। आप पहले आए थे, लेकिन इधर हम गायब हो गए थे। अब हम फिर आपके साथ हैं। अब आपको आश्वस्त करते हैं कि हम इधर-उधर होने वाले नहीं हैं। हम रहेंगे आप ही के साथ।”

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा, “अब जरा तेजी से यहाँ वाला काम हो जाए। हम लोग तो 2005 से एक साथ ही हैं। हम लोग मिलकर लगातार कितना काम किए हैं। हम लोग आपस में मिलजुल कर सारा काम किए हैं। हम चाहते हैं कि सबकी आर्थिक स्थित बेहतर हो जाए। मुझे पूरा भरोसा है कि प्रधानमंत्री जी बिहार आते रहेंगे।”

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि इस बार के चुनाव में उन्हें पूरा भरोसा है कि पीएम मोदी 400 सीट जीतेंगे। अन्य विपक्षी पार्टियों पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा, “बाकी लोग जो इधर-उधर कर रहा है, उनका कुछ नहीं होने वाला है।” पीएम की ओर देखते हुए कहा नीतीश कुमार ने कहा, “बिहार में जो भी विकास होता रहेगा, उसका क्रेडिट हम आपको देते रहेंगे।”

इस दौरान नीतीश कुमार भी मंच से हँसते हुए नजर आए। इसके अलावा मंच पर बैठे अन्य लोगों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी ठहाके लगाते रहे। दूसरी तरफ सभा में मौजूद सभी लोग जोर-जोर से मोदी के नारे भी लगाने लगे। इसके बाद नीतीश कुमार ने कहा, “हमें एक साथ जुट कर काम करना है और एक दूसरे से विवाद नहीं करना है।”

इस दौरान दोनों नेताओं के बीच एक गजब की कमेस्ट्री दिखी। पीएम मोदी जैसे ही मंच पर पहुँचे तो एक बड़ा-सा माला लेकर बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा, सम्राट चौधरी और गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय लेकर आए और पीएम मोदी को पहनाने लगे। उस दौरान पीएम मोदी ने सीएम नीतीश का हाथ पकड़ा और उन्हें माला के अंदर खींच लिया। पीएम ने जब ऐसा किया तो नीतीश कुमार मुस्कुरा रहे थे।

बता दें कि 10 मई 2009 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले लुधियाना में NDA की रैली थी। इस रैली में लालकृष्ण आडवाणी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने की योजना थी। इसलिए NDA शासित राज्यों के सभी मुख्यमंत्रियों को बुलाया गया था। इस वजह से बतौर गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी वहाँ पहुँचे थे।

उस दौरान नीतीश कुमार ने मंच पर जैसे ही कदम रखा तो दूसरी तरफ से नरेंद्र मोदी आए और नीतीश कुमार का हाथ पकड़ कर ऊपर उठा दिया था। अखबारों में जब यह फोटो छपी तो नीतीश कुमार नाराज हो गए। इतना ही नहीं, लुधियाना से पटना लौटने के बाद नीतीश कुमार ने कहा था कि मोदी ने उनकी इच्छा के खिलाफ उनका हाथ उठाया था। बाद में दोनों अलग अलग हो गए थे।

साल 2009 में लुधियाना की रैली में गुजरात के तत्कालीन सीएम मोदी और बिहार के नीतीश कुमार (साभार: नवभारत टाइम्स)

बिहार में NDA की सरकार बनने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह पहला बिहार दौरा है। इस दौरा में उन्होंने बिहार को 34,000 करोड़ रुपए की परियोजनाओं की सौगात दी। इन में 21,400 करोड़ रुपए औरंगाबाद के लिए और 13,400 करोड़ रुपए बेगूसराय में विकास के लिए होगा। इसके अलावा पीएम मोदी कई परियोजनाओं का शिलान्यास किया।

बिहार के जंगलराज को याद करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “एक वो दौर था, जब बिहार के लोग अपने ही घरों से निकलने में डरते थे। एक ये दौर है, जब बिहार में पर्यटन की संभावनाएँ विकसित हो रही हैं। बिहार को वंदेभारत और अमृत भारत जैसी आधुनिक ट्रेनें मिलीं। अमृत स्टेशनों का विकास किया जा रहा है।”

इस पीएम मोदी ने विपक्ष पर जमकर हमला बोला और कहा बिहार में एनडीए की शक्ति बढ़ने के बाद परिवाद की राजनीति हाशिये पर जाने लगी है। परिवारवादी राजनीति की एक और विडंबना है कि माँ-बाप से विरासत में पार्टी और कुर्सी तो मिल जाती है, लेकिन माँ-बाप की सरकारों के काम-काज का एक बार भी जिक्र करने की हिम्मत नहीं होती है। यह है परिवादी पार्टी की हालत है।

पीएम मोदी ने कहा, “मैंने तो सुना है कि इनकी पार्टी (RJD) के बड़े-बड़े नेता भी इस बार बिहार में लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं। सब भाग रहे हैं। वे राज्यसभा की सीटें खोज रहे हैं। जनता साथ देने को तैयार नहीं है। यह है आपके साथ और आपके विश्वास की ताकत। मोदी इसी विश्वास के लिए बिहार की जनता को धन्यवाद करने आया है।” 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “बिहार का विकास- ये मोदी की गारंटी है। बिहार में शांति और कानून व्यवस्था का राज- ये मोदी की गारंटी है। बिहार में बहन-बेटियों को अधिकार- ये मोदी की गारंटी है। तीसरे टर्म में हमारी सरकार इन्हीं गारंटियों को पूरा करने और विकसित बिहार बनाने के लिए काम करेगी।”

‘गजवा-ए-हिंद (भारत पर इस्लामी कब्जा)’ वाला फतवा सही, कानूनी कार्रवाई हुई तो कोर्ट जाएगा दारुल उलूम देवबंद: भारत में ऑफिस, भारत पर ही आक्रमण?

सहारनपुर के देवबंद स्थित दारुल उलूम ने ‘गजवा-ए-हिंद’ को सही ठहराने वाले फतवे को लेकर बड़ा फैसला लिया है। दारुल उलूम ने कहा है कि ये फतवा सही है और अगर इसके खिलाफ कोई कार्रवाई की जाएगी, तो हम कोर्ट में जाएँगे। सहारनपुर में दारुल उलूम की सबसे बड़ी कमेटी मजलिस-ए-शूरा की बैठक हुई, जिसमें शूरा के सदस्यों ने गजवा-ए-हिंद पर दिए फतवे को सही ठहराया है। शूरा ने कहा है कि दारुल उलूम की वेबसाइट नहीं बंद की जाएगी। पहले की तरह की फतवे ऑलनाइन माध्यम से भी जारी किए जाते रहेंगे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दारुल उलूम देवबंद की वेबसाइट पर ‘गजवा ए हिंद’ को सही बताया गया है। इस पर राष्ट्रीय बाल अधिकारि संरक्षण आयोग ने कड़ाई बरतते हुए डीएम को कार्रवाई के निर्देश दिए थे, साथ ही एफआईआर दर्ज करने के लिए भी कहा था। अब कई मुद्दों को लेकर दारुल उलूम के गेस्ट हाउस में बैठक हुई, जिसमें फतवे पर टिके रहने का फैसला लिया गया। दारुल उलूम के मोहतमिम मुफ्ती अबुल कासिम नौमानी ने कहा है कि गजवा-ए-हिंद पर दिए फतवे के मामले में भविष्य में कोई भी कार्रवाई हुई तो उसका कानूनी रूप से जवाब दिया जाएगा।

एनसीपीसीआर ने जारी किया था नोटिस

गजवा ए हिंद पर दिए गए फतवे के खिलाफ अब राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने स्वत: संज्ञान लेते हुए सहारनपुर पुलिस के अधिकारियों को कार्रवाई के लिए नोटिस जारी किया था। एनसीपीसीआर ने नोटिस में कहा कि ये मदरसा भारत के बच्चों को देशविरोधी तालीम दे रहा है। इससे इस्लामी कट्टरपंथ को बढ़ावा मिलेगा। बच्चों में देश के प्रति नफरत पैदा होगी। आयोग ने कहा कि बच्चों को अनावश्यक रूप से परेशान करना या शारीरिक कष्ट देना तो किशोर न्याय अधिनियम की धारा 75 का उल्लंघन है।

दरअसल, दारुल उलूम की साइट (darulifta-deoband.com) पर सवाल किया गया था कि क्या हदीस में भारत पर आक्रमण का जिक्र है जो उपमहाद्वीप में होगा? और जो भी इस जंग में शहीद होगा, वो महान शहीद कहलाएगा। और जो गाजी होगा वो जन्नती होगा। इसी सवाल के जवाब में दारुल उलूम की ओर से फतवा जारी किया गया। फतवे में ‘सुन्न अल नसा (Sunan-al-Nasa) ‘ नाम की किताब का जिक्र करते हुए कहा गया है कि इस किताब में गजवा-ए-हिंद को लेकर पूरा का पूरा चैप्टर है। इसमें हजरत अबू हुरैरा की हदीस का जिक्र करते हुए कहा गया है- “अल्लाह के संदेशवाहक ने भारत पर हमले का वादा किया था। उन्होंने कहा था कि अगर मैं जिंदा रहा तो इसके लिए मैं अपनी खुद की और अपनी संपत्ति की कुर्बानी दे दूँगा। मैं सबसे महान शहीद बनूँगा।”

फतवा 9 साल पुराना, डीएम को भेजा जवाब

इस मामले में अब दारुल उलूम ने साफ कर दिया है कि वो फतवे को नहीं हटाएँगे और न ही वेबसाइट को बंद करेंगे। इस मामले में दारुल उलूम ने सहारनपुर के डीएम को भी अपना जवाब भेजा है। दारुल उलूम ने कहा है कि ये फतवा नौ साल पुराना है। ये फतवा साल 2015 में दिया गया था। मजलिस-ए-शूरा के सदस्यों ने डीएम को भेजे गए जवाब पर सहमति जताई है।

इस मामले में सहारनपुर के डीएम डॉ. दिनेश चंद्र ने बताया कि फतवा प्रकरण में जिला प्रशासन ने अपनी प्राथमिक जाँच रिपोर्ट राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग को भेज दी है। आयोग के निर्देशों के मुताबिक आगे की कार्रवाई की जाएगी।

‘अगर ब्रिटेन में हिंसा की तो VISA कैंसिल कर देंगे’: PM ऋषि सुनक की कट्टरपंथ पर दो टूक, बोले- इनका मकसद हमें खत्म करना

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने हाल में ब्रिटेन में लोकतंत्र को बचाने के लिए कट्टरपंथ के खिलाफ आवाज बुलंद की। उन्होंने कहा कि आज कट्टरपंथी ताकतें देश को तोड़ने और बहु-धार्मिक पहचान को कमजोर करने में जुटी हुई है। देश को इनसे लड़ने की जरूरत है

उन्होंने अपनी बात रोडशेल उपचुनाव के नतीजे आने के बाद 10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर भाषण देने के वक्त कही। उन्होंने साफ तौर पर चेतावनी देते हुए कहा कि अगर किसी इस्लामी कट्टरपंथी या धुर दक्षिणपंथी ने ब्रिटेन में नफरत फैलाने का प्रयास किया तो वो उसका वीजा कैंसिल करने से पहले हिचकेंगे नहीं।

उन्होंने हमास-इजरायल के बीच चल रहे युद्ध की वजह से जो देश में प्रदर्शन हो रहे हैं उसपर बात की। उन्होंने कहा, “हमारी सड़कों पर विरोध प्रदर्शन के रूप में जो शुरू हुआ, वह डराने-धमकाने, धमकियों और हिंसा के नियोजित कृत्यों में बदल गया है। यहूदी बच्चे स्कूल की वर्दी पहनने से डरते हैं कि कहीं इससे उनकी पहचान उजागर न हो जाए। मुस्लिम महिलाओं को आतंकी संगठन के करनी के ताने सुनने पड़ते हैं जबकि उनका हमले से कोई लेना-देना नहीं है। ये हमारे लोकतंत्र पर खतरा है।”

उन्होंने कहा, “इस्लामी कट्टरपंथ और धुर दक्षिणपंथ लोग जहर फैलाने का काम कर रहे हैं। इनका मकसद एक इंसान के तौर पर हमारे आत्मविश्वास और भविष्य को खत्म कर देना है। ये चाहते हैं कि हम लोग एक दूसरे पर शक करें। खुद पर शक करें। हमारी उपलब्धियों पर शक करें।”

उन्होंने डर जताया कि वो लोग जो ब्रिटेन में दुनिया का सबसे सफल बहु-जातीय, बहु-आस्था वाले लोकतंत्र के निर्माण का प्रयास कर रहे हैं, उसे कट्टरपंथी ताकतें कमजोर करने का प्रयास कर रही हैं। उन्होंने कहा, “कुछ ऐसी ताकतें हैं जो हमें तोड़ने की कोशिश कर रही हैं… लेकिन अब वक्त आ गया है कि हम सब इन बाँटने वाली ताकतों के साथ खड़े हों और इस जहर को मात दें।”

पीएम सुनक ने अपनी स्पीच में कहा कि जो लोग वीजा पर हैं अगर वो ब्रिटेन में नफरत फैलाने का प्रयास करते हैं तो उनका वीजा रद्द किया जाएगा। उन्होंने अपील की कि ब्रिटेन में होने वाले शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर कट्टरपंथियों द्वारा न कब्जा किया जाए।

उन्होंने कहा, “जो आप्रवासी यहाँ आए हैं उन्होंने संपूर्ण रूप से अपना योगदान दिया है। उन्होंने हमारे देश की कहानी में एक नया अध्याय लिखने में मदद की है। उन्होंने ऐसा अपनी पहचान छोड़े बिना किया है।” वह आगे बोले, “मुझे ब्रिटेन पर बहुत गर्व है। मैं यहाँ का पहला अश्वेत प्रधानमंत्री हूँ… जो सबको साथ लेकर चलने वाली सरकार का नेतृत्व कर रहा है। इससे पता चलता है कि आपकी सफलता इससे तय नहीं होगी कि आपकी जाति, आपका रंग , आपका धर्म क्या है? या आप कहाँ पर पैदा हुए हैं।”

केरल के जिस यूनिवर्सिटी में छात्र सिद्धार्थ ने किया सुसाइड, उसके VC को राज्यपाल ने हटाया: 19 छात्र भी अब किसी संस्थान में नहीं पढ़ पाएँगे

केरल के वायनाड में कुछ दिन पहले वेटनरी कॉलेज के 20 वर्षीय छात्र जे एस सिद्धार्थ ने आत्महत्या कर ली थी। इस मामले में वामपंथी छात्र नेताओं पर मृतक को नग्न घुमाने, मारने-पीटने, बेइज्जत करने और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप लगे। यूनिवर्सिटी ने 19 छात्रों को निलंबित कर दिया है। वहीं, प्रदेश के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने इसके वाइस चांसलर को भी निलंबित कर दिया।

राज्यपाल मोहम्मद आरिफ खान ने शनिवार (2 मार्च 2024) को केरल पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (KVASU) के कुलपति डॉक्टर एमआर ससींद्रनाथ को निलंबित कर दिया। इसके साथ ही राज्यपाल खान ने घटना की न्यायिक जाँच के भी आदेश दिए हैं। न्यायिक जाँच के संबंध में केरल उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार से संपर्क किया जाएगा।

स्नातक द्वितीय वर्ष के छात्र जे एस सिद्धार्थ को इसलिए प्रताड़ित किया गया था, क्योंकि उसने वेलेंटाइन डे (14 फरवरी 2024) को कॉलेज में सीनियर छात्राओं के साथ डांस किया था। इस मामले में गिरफ्तार किए गए 11 लोगों में स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) के चार नेता शामिल हैं। वहीं, कुल 19 छात्रों को भारत के किसी भी संस्थान में पढ़ाई से रोक दिया गया है।

राजभवन से जारी निलंबन आदेश में कहा गया है कि जिन घटनाक्रमों की परिणति सिद्धार्थ की मृत्यु के रूप में हुई, उनसे संकेत मिलता है कि विश्वविद्यालय के मामलों में वीसी द्वारा ‘वांछित ईमानदारी, गंभीरता और तत्परता’ के साथ भाग नहीं लिया जा रहा है। यह विश्वविद्यालय के अधिनियमों/क़ानूनों और अन्य प्रासंगिक नियम में अनिवार्य है।

निलंबन आदेश में आगे कहा गया है, “इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना की पृष्ठभूमि में वीसी का अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों के प्रति उदासीन, लापरवाह और संवेदनहीन रवैया उनकी रिपोर्ट से पता चलता है। इस अवधि के दौरान वीसी की ओर से कर्तव्य में घोर लापरवाही की गई, जिसके कारण यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई।”

राज्यपाल खान ने कहा, “केरल पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय अधिनियम, 2010 की धारा 9 (9) को लागू करने के लिए एक उपयुक्त मामला होने के नाते, एक ऐसे व्यक्ति द्वारा जाँच का आदेश दिया जाता है, जो उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश है या रह चुका है। इस संबंध में उचित समय पर उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार से अनुरोध किया जाएगा।”

वीसी को निलंबित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि मौजूदा वीसी के नेतृत्व में परिसर में सौहार्द्रपूर्ण माहौल के प्रति सम्मान की कमी है और विश्वविद्यालय के मामलों के प्रति उदासीनता ‘कानून के शासन के संदर्भ में समझ से परे’ हो गई है। यह एक अशुभ संकेत है। यह राज्य में विश्वविद्यालय और उच्च शिक्षा क्षेत्र के मामलों के लिए अच्छा संकेत नहीं है।

सिद्धार्थ के आत्महत्या के मामले में शुक्रवार (1 मार्च 2024) को पुलिस ने चार लोगों को पकड़ा है। इन चारों में से मलप्पुरम का रहने वाला अमीन अली अकबर, SFI का कॉलेज यूनियन प्रेसीडेंट के अरुण और यूनिट सेक्रेटरी अमल अहसान ने पुलिस के सामने खुद आत्मसमर्पण कर दिया था। वहीं, पुलिस टीम ने यूनियन के सदस्य आसिफ खान को उसके घर से दबोचा था।

दरअसल, 18 जनवरी 2024 को वायनाड के एक कॉलेज में पशु विज्ञान की पढ़ाई करने वाले छात्र जे एस सिद्धार्थ ने आत्महत्या कर ली थी। सिद्धार्थ को कॉलेज हॉस्टल के एक टॉयलेट में लटकता पाया गया था। इसके बाद सिद्धार्थ की पोस्टमॉर्टेम रिपोर्ट में कई खुलासे हुए। रिपोर्ट में बताया गया कि मौत से पहले सिद्धार्थ को बुरी तरीके से मारा पीटा गया था। उसका पेट खाली था और शरीर पर घाव थे।

इसके बाद पुलिस ने इस मामले में अप्राकृतिक मौत का मामला दर्ज किया। इस मामले में 12 छात्रों को कॉलेज से निलंबित भी कर दिया गया। ये सभी अब भारत के किसी भी शिक्षण संस्थान में नहीं पढ़ पाएँगे। निलंबित किए जाने वालों में SFI के वामपंथी छात्र नेता भी हैं। सिद्धार्थ के पिता जयप्रकाश ने बताया है कि उनके बेटे को वामपंथी छात्रों ने काफी प्रताड़ित किया।

इस बीच मृतक छात्र सिद्धार्थ के पिता जयप्रकाश ने कहा था कि कैंपस के डीन डॉ नारायणन ने इस मामले में लीपापोती की है और उन्हें पूरे मामले की जानकारी थी। ऐसे में उन्हें भी आरोपित बनाया जाए। सिद्धार्थ के पिता ने कहा था, “मुझे यही लग रहा था कि सिद्धार्थ की मौत आत्महत्या का मामला है और मैं इसके पीछे के कारण के बारे में सोच रहा था।”

उन्होंने आगे कहा था, “एक छात्र ने मुझे बताया कि एसएफआई नेता ने उन्हें सिद्धार्थ की मौत की असलियत बताने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी है। यहाँ तक कि परिसर में शिक्षक और प्रशासनिक प्रमुख भी इन एसएफआई गुंडों की धुन पर नाचने वाली कठपुतली मात्र हैं। ऐसे कई अन्य छात्र हैं जिन्हें इसी तरह से प्रताड़ित किया गया।”

केरल यूनिवर्सिटी के यूथ फेस्टिवल का नाम इंतिफादा (खूनी विद्रोह): लोग पूछ रहे – पैसे भारत सरकार से… सपने हमास के इस्लामी आतंकियों वाले

केरल की सबसे बड़ी यूनिवर्सिटी में यूथ फेस्टिवल का आयोजन किया जा रहा है। इसका नाम रखा गया है ‘इंतिफादा’। केरल यूनिवर्सिटी में 7 से 11 मार्च तक होने वाले यूथ फेस्टिवल को ‘आक्रमण के खिलाफ कला का विरोध’ टैगलाइन के साथ आयोजित किया जा रहा है, जिसका सीधा मतलब इजरायल-हमास युद्ध में हमास के समर्थन से है। अब इस ‘इंतिफादा’ के खिलाफ एक स्टूडेंट ने केरल एवं लक्षद्वीप हाई कोर्ट में याचिका लगाई है और इसका नाम बदलने की माँग की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, केरल यूनिवर्सिटी के पहले साल के छात्र ने हाई कोर्ट में जो याचिका दाखिल की है, उसमें कोर्ट से अपील की है कि इस नाम को बदलने का आदेश जारी किया जाए, क्योंकि ‘इंतिफादा’ न सिर्फ भ्रमित करने वाला शब्द है, बल्कि ये मौजूदा इजरायल-हमास युद्ध को ध्यान में रखते हुए बाँटने वाला शब्द भी है।

छात्र का दावा है कि ‘इंतिफादा’ शब्द न सिर्फ हमास जैसे आतंकी संगठन से जुड़ा है, बल्कि केरल यूनिवर्सिटी के यूथ फेस्टिवल के लोगो पर इजरायत के नक्शे पर फिलिस्तीन को भी दिखाता है। छात्र ने कहा है कि यूथ फेस्टिवल का लोगो कला और सांस्कृतिक कार्यक्रम के हिसाब से सही नहीं है। इसकी वजह से छात्रों में भी अलगाव पैदा हो सकता है। छात्र ने कहा है कि उसने राज्यपाल और यूनिवर्सिटी के वीसी को भी पत्र लिखा है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। इस मामले में अब हाई कोर्ट ने केरल यूनिवर्सिटी को नोटिस जारी कर जवाब माँगा है।

वरिष्ठ पत्रकार राजीव सचान ने इसे बदमाशी और बेशर्मी की हद पार करने वाला बताया है। उन्होंने अपने एक्स हैंडल पर लिखा, “बदमाशी और बेशर्मी की हद! भारत सरकार से अनुदान पाने वाली केरल युनिवर्सिटी ने अपने यूथ फेस्टिवल का नाम इंतिफादा यानी हिंसक प्रतिरोध रखा है, जो हमास का आतंक फैलाने का तरीका ही है l गनीमत है कि यूथ फेस्टिवल का नाम जिहाद या गजवा हिंद नहीं रखा!”

क्या है इंतिफादा?

इंतिफादा एक अरबी शब्द है, जिसका मतलब होता है बगावत या विद्रोह। खास बात ये है कि इंतिफादा शब्द का सबसे ज्यादा इस्तेमाल ‘तख्तापलट’ जैसे कामों में मिडिल-ईस्ट से लेकर उत्तरी-पश्चिमी अफ्रीकन देशों में हुआ है और पिछले कुछ दशकों से इजरायल-फिलिस्तीन युद्ध में इसे ‘इजरायल’ के खिलाफ इस्तेमाल किया जाता है। हर बार इजरायल के खिलाफ वेस्ट बैंक या फिर गाजा पट्टी में कुछ होता है, तो उसे ‘इंतिफादा’ करके प्रचारित किया जाता है। एक तरफ इसे प्रतिरोध बताया जाता है, तो दूसरी तरफ कायराना हमले भी इजरायल पर किए जाते हैं। इस समय हमास-इजरायल के बीच चल रहे युद्ध को पाँचवाँ इंतिफादा भी कहा जा रहा है।

इजरायल-फिलिस्तीन के संदर्भ में इंतिफादा

इजरायल-फिलिस्तीन संकट के संदर्भ में इसे धर्मयुद्ध से भी जोड़ सकते हैं। एक तरफ यहूदी इजरायल का विरोध कर रहे मुस्लिम फिलिस्तीनी और अरबी हैं, तो दूसरी तरफ उन्हें समर्थन दे रहे मुस्लिम देश। इतजराय-फिलिस्तीन के बीच तमाम लड़ाई लड़कर हारने के बाद फिलिस्तीनियों द्वारा दिसंबर 1987 में पहला इंतिफादा शुरू किया गया, जो साल 1993 तक चला। दूसरा इंतिफादा सितंबर 2000 से साल 2005 तक चला। इसे अल-अक्सा इंतिफादा भी कहा जाता है। तीसरी बार साल 2014 में जेरूशलम में बड़ी संख्या में विरोध प्रदर्शनों और हिंसा को भी इंतिफादा कहा गया गया।

वहीं, साल 2015-2016 को चौथा इंतिफादा, जेरुशलम इंतिफादा, अल कुद्स इंतिफादा या चाकू इंतिफादा भी कहा जाता है। और पिछले साल अक्टूबर में अल-अक्सा फ्लड नाम से हमास ने इजरायल के अंदर जो हमला बोला, उसे कई ‘मुस्लिम’ विद्वान पाँचवाँ इंतिफादा भी कह रहे हैं। वैसे, तो इसे आम तौर पर अहिंसक विरोध प्रदर्शन से जोड़ा जाता है, लेकिन इजरायल-फिलिस्तीन के संदर्भ में ये हमेशा हिंसक ही रहा है।

‘SC-ST एक्ट में कितने फर्जी मामले दर्ज… जाँच हो’ : हिरोइन के भाषण पर FIR, कहा था- झूठे केस करना धंधा बन गया

मराठी अभिनेत्री केतकी चितले के खिलाफ एफआईआर हुई है। उनपर आरोप है कि उन्होंने अपने भाषण से एक जाति वर्ग के लोगों की भावनाओं को ठेस पहुँचाया। इस भाषण में उन्होंने एससी/एसटी एक्ट में दर्ज झूठे मामलों की जाँच की माँग की थी। उनके खिलाफ महाराष्ट्र के बीड जिले के परली शहर में प्रेमनाथ जगतकर नाम के शख्स की शिकायत पर पुलिस ने उनके खिलाफ एफआईआर की।

जानकारी के अनुसार, अभिनेत्री केतकी चितले ने इसी साल 25 फरवरी को परली में आयोजित ‘ब्राह्मण एक्य परिषद’ सम्मेलन में हिस्सा लिया था। इस दौरान उन्होंने ये कह दिया कि एससी/एसटी अधिनियम के तहत झूठे मामले दर्ज करना एक रैकेट बन गया है। सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी प्राप्त की जानी चाहिए कि अत्याचार अधिनियम के तहत कितने मामले दर्ज किए गए हैं और उनमे से कितने झूठे हैं।

उनका यह भाषण बाद में ऑनलाइन एक स्थानीय निवासी प्रेमनाथ जगतकर ने सुना और परली शहर पुलिस थाने में जाकर शिकायत दर्ज करवाई। इसके बाद इस मामले में एफआईआर दर्ज हुई।

कार्यक्रम के दौरान, उन्होंने दावा किया कि एससी/एसटी अधिनियम के तहत झूठे मामले दर्ज करना एक रैकेट बन गया है और पिछले 5 वर्षों में दायर ऐसे सभी मामलों की जाँच की माँग की।

मराठी अभिनेत्री ने टिप्पणी की, “अत्याचार करके पैसा कमाने एक धंधा बन गया है। इसका पूरा रैकेट है। कई झूठे केस दायर होते हैं।” उन्होंने इस दौरान मनोज जरांगे पाटिल के नेतृत्व वाले मराठा आरक्षण आंदोलन की भी आलोचना की और कथित तौर पर इसे ‘मूर्खों का मेला’ करार दिया।

अब खबर है कि शुक्रवार (1 मार्च 2024) को केतकी चितले के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 295ए (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना) और 502(2) (वर्गों के बीच दुश्मनी) के तहत प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज की गई।

बता दें कि इससे पहले केतकी पर आरोप लगा था कि उन्होंने एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इसके बाद 2022 में उन्हें एक महीने से अधिक समय सलाखों के पीछे रहना पड़ा था। तब, उन्हें उस साल 15 मई को एक फेसबुक पोस्ट के लिए गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने कथित तौर पर पवार पर लिखी एक कविता साझा की थी, जिसमें उन्हें ब्राह्मणों से नफरत करने वाला व्यक्ति बताया गया था। उस समय, उनके खिलाफ मुंबई और उसके उपनगरों के कई पुलिस स्टेशनों में मामले दर्ज किए गए थे।

PFI के आतंकी मोहम्मद गौस नियाजी को NIA ने दक्षिण अफ्रीका से दबोचा, RSS नेता रूद्रेश की हत्या का है आरोपित: 5 लाख रुपए का ईनाम था घोषित

प्रतिबंधित इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के आतंकी मोहम्मद गौस नियाजी को दक्षिण अफ्रीका में पकड़ा गया है। अब राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) उसे प्रत्यर्पित करके भारत लाया है। नियाजी पर कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के एक नेता की हत्या करने का आरोप है। उस पर NIA ने पाँच लाख रुपए का ईनाम भी घोषित कर रखा है।

मोहम्मद गौस नियाज़ी PFI का बड़ा चेहरा था। वह साल 2016 में बेंगलुरु में हुई RSS के 35 वर्षीय नेता रुद्रेश की हत्या में शामिल था। इस मामले में जाँच एजेंसियों ने उसे आरोपित बनाया है। हत्या करने के बाद वह फरार हो गया था और भारत से निकलकर अलग-अलग देशों में अपना ठिकाना बनाया हुआ था। इस मामले की जाँच NIA कर रही है।

गुजरात पुलिस की एंटी टेररिस्ट स्क्वॉयड (ATS) ने सबसे पहले मोहम्मद गौस को साउथ अफ्रीका में ट्रैक किया। इसके बाद उसने इसकी जानकारी सेंट्रल ऐजेंसी NIA को दी। इसके बाद NIA ने दक्षिण अफ्रीका में संपर्क किया, जिसके बाद वहाँ की एजेंसी ने उसे पकड़ लिया। अब उसे प्रत्यर्पण करके भारत लाया गया है और फिलहाल उसे मुंबई ले जाया गया है। 

बता दें कि साल 2016 में बेंगलुरु के शिवाजी नगर क्षेत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेता रूद्रेश की हत्या कर दी गई थी। जिस समय रूद्रेश की हत्या की गई, उस समय वे बेंगलुरु में संघ के एक कार्यक्रम में हिस्सा लेकर लौट रहे थे। उस दौरान पहले से ही घात लगाकर बैठे आतंकियों ने उन पर हमला कर दिया था। इस हमले में उनकी मौत हो गई थी।

संघ नेता की धारदार हथियार से काटकर हत्या के बाद स्वयंसेवक सड़कों पर उतर गए थे। घटना के बाद कर्नाटक भाजपा के तत्कालीन अध्यक्ष बीएस येदियुरप्पा ने रूद्रेश के परिजनों से मुलाकात की थी। उन्होंने इस मामले की जाँच आखिर तक कराने का आश्वासन दिया था। इस हत्याकांड के 6 साल बाद NIA ने आतंकी गौस नियाजी को भारत लाने में कामयाबी हासिल की है।

इस हत्या कांड को लेकर साल 2019 में NIA ने कहा था कि रूद्रेश की हत्या का एक अन्य आरोपित असीम शरीफ ने लोगों को हिंदू संगठन में शामिल होने से रोकने के लिए हत्या की साजिश रची थी। उसने आरएसएस के दो और कार्यकर्ताओं को मारने योजना बनाई थी। इस हत्या में असीम शरीफ के अलावा मोहम्मद गौस नियाजी सहित पीएफआई के चार अन्य नेता भी शामिल थे।

असीम शरीफ पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया का बंगलुरु अध्यक्ष था। इस मामले में असीम शरीप पर पहले ही हत्या में संलिप्तता को लेकर आरोप तय हो चुके हैं। शरीफ ने NIA की कार्रवाई को 2 जनवरी 2018 को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। हालाँकि, कोर्ट ने उसकी याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद उस पर अभियोजन का रास्ता साफ हो गया।

इतना ही नहीं, साल 2020 में बेंगलुरु के एक हिस्से में विवादास्पद फेसबुक पोस्ट पर की गई कथित टिप्पणी को लेकर हुई हिंसा के सिलसिले में बेंगलुरु पुलिस ने समीउद्दीन को हिरासत में लिया था। तब पुलिस अधिकारी ने कहा था कि जाँच के दौरान समीउद्दीन आरएसएस कार्यकर्ता रूद्रेश हत्या के मामले के एक आरोपित के संपर्क में पाया गया था। समीउद्दीन पिछले कुछ वर्षों से अल-हिंद आतंकवादी समूह के सदस्यों के साथ भी संपर्क बनाए हुए था।

JNU PhD धारी कन्हैया कुमार के लिए वीजा मतलब वायरस, छात्रों की बात करते हुए ‘पिघल’ कर ‘बिहार में हनीमून’ तक पहुँच गए

कॉन्ग्रेस नेता कन्हैया कुमार जेएनयू से पीएचडी डिग्री धारी हैं। राहुल गाँधी के करीबी माने जाते हैं। बड़े-बड़े मुद्दों पर कॉन्ग्रेस की ओर से छोटी-छोटी प्रेस कॉन्फ्रेंस करते रहते हैं। इसी बीच, शुक्रवार (1 मार्च 2024) को उन्होंने रूस में रह रहे उन 20 भारतीयों को लेकर प्रेस से बातचीत की, जो वहाँ फंसे हुए हैं। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनका सामान्य ज्ञान भी सामने आ गया, जब उन्होंने खतरनाक H1N1 वायरस को वीजा कैटेगिरी बता डाला।

कन्हैया कुमार ने दावा किया, ”सरकार को उन युवाओं के साथ होने वाली किसी भी दुर्घटना की जिम्मेदारी लेनी चाहिए, जो यहाँ की परिस्थितियों के कारण भारत छोड़ने को मजबूर हैं।” कन्हैया ने कहा, “ये तो सरकार बताए कि ये लोग विदेश कैसे पहुँचे कि वो लोग स्टूडेंट वीजा पर गए हैं, वर्क वीजा पर गए गए हैं, टूरिस्ट वीजा पर गए हैं। वीजा की कैटेगिरी क्या है? एच1एन1 कौन सा वीजा लेकर गए हैं? ये सरकार बताएगी। हम कैसे बता सकते हैं, हम तो विदेश मंत्री हैं नहीं।”

जेएनयू से अफ्रीकन अध्ययन में पीएचडी करने वाले कन्हैया कुमार को शायद ये बात पता भी नहीं कि H1N1 को वीजा की कैटेगिरी नहीं है, बल्कि ये स्वाइन फ्लू का वायरस है। एच1एन1 वायरस साल 2009-2010 के दौरान तेजी से फैला था, जो मूलत: इन्फ्लूएंजा वायरस है। ये इंसानों में पक्षियों और सुवरों के माध्यम से फैलता है। इसे विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने साल 2009 में महामारी घोषित की थी, क्योंकि इससे 2.84 लाख लोगों की मौत हो गई थी।

स्वाइन फ्लू अब भी फैलता है और जब इसके फैलने की खबर आती है तो हजारों-लाखों जानवरों को मारना पड़ता है। लेकिन साल 2011 में जेएनयू के सेंटर फॉर अफ्रीकन स्टडीज में पीएचडी के लिए दाखिला लेने वाले कन्हैया कुमार को ये नहीं पता है कि एच1एन1 कोई वीजा कैटेगिरी नहीं, बल्कि वायरस है।

वैसे, अगर हम कन्हैया कुमार के बारे में ये मान लें कि एच1एन1 कोई वीजा कैटेगिरी है भी, तो भी उसका रूस से कोई लेना देना नहीं। पहली बात तो ये ही एच1एन1 कोई वीजा कैटेगिरी नहीं, बल्कि एच1बी वीजा कैटेगिरी होती है। जो सिर्फ अमेरिका के संदर्भ में लागू होती है। लेकिन इस प्रेस कॉन्फ्रेंस का अमेरिका से कोई लेना देना नहीं था, बल्कि इसका आयोजन रूस के मुद्दे पर सरकार को घेरने के लिए किया गया था।

बिहार में हनीमून डेस्टिनेशन की कमी

कन्हैया कुमार अपनी प्रेस कॉफ्रेंस में बिहार की बदहाली पर भी बात करते नजर आए। उन्होंने तमाम बातों के बीच बिहार में हनीमून के लिए बाहर जाने की मजबूरी भी गिनाई। कन्हैया कुमार ने कहा कि बिहार के लोग रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों में जाते हैं। यहाँ तक कि हनीमून मनाने भी बाहर जाने के लिए लोग मजबूर हैं। खैर, कन्हैया कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इतना महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया, उसके लिए बिहार के नौजवान जरूर उनके ऋणी रहेंगे।

विश्वासघात का दूसरा नाम TMC सरकार: पीएम मोदी ने कहा- ममता सरकार संदेशखाली के गुनाहगार को बचाना चाहती थी

लोकसभा चुनावों की घोषणा से पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई राज्यों के दौरे पर हैं। आज शनिवार (2 मार्च 2024) को उन्होंने बंगाल के कृष्णानगर में जनसभा को संबोधित किया। यहाँ उन्होंने केंद्रीय सरकार की योजनाओं के बारे में लोगों को बताया और ‘अबकी बार 400 के पार’ का नारा दिया। इसके साथ ही उन्होंने राज्य की सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधा।

उन्होंने कहा, “बंगाल के लोगों ने बार-बार यहाँ टीएमसी को भारी बहुमत दिया, लेकिन यहाँ टीएमसी अविश्वास और अत्याचार का दूसरा नाम बन गई है। टीएमसी के लिए विकास नहीं, भ्रष्टाचार और परिवारवाद ही प्राथमिकता है। टीएमसी का मतलब भ्रष्टाचार, विश्वासघात, परिवारवाद। टीएमसी बंगाल के लोगों को गरीब बनाए रखना चाहती है, ताकी उसकी राजनीति चलती रहे, उसका खेल चलता रहे।”

उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने बंगाल को पहला एम्स देने की घोषणा की थी। उसका लोकार्पण किया जा चुका है। लगभग 1000 बेड का यह अस्पताल कई सुविधाएँ लेकर आया है। युवाओं के लिए रोजगार के अवसर लेकर आया है। उन्होंने कहा कि मोदी की गारंटी का मतलब है गारंटी पूरी होने की गारंटी। पीएम ने कहा कि आज सभी टीएमसी के कुशासन में रो रहे हैं।

हाल की घटना का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा, “संदेशखाली की बहनें इंसाफ की गुहार लगाती रहीं, लेकिन टीएमसी सरकार ने उनकी एक नहीं सुनी। बंगाल में स्थिति ये है कि यहाँ पुलिस नहीं, अपराधी तय करते हैं कि उन्हें कब गिरफ्तार होना है। राज्य सरकार तो चाहती ही नहीं थी कि संदेशखाली का गुनाहगार कभी गिरफ्तार हो। ये तो बंगाल की नारीशक्ति दुर्गा बनकर खड़ी हो गई। तब राज्य सरकार को झुकना पड़ा।”

उन्होंने कहा, “महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण को लेकर केंद्र सरकार जो भी योजना यहाँ लाती है, उसे भी टीएमसी सरकार यहाँ ठीक से लागू नहीं होने देती। पूरे देश में बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान चला, लेकिन पश्चिम बंगाल सरकार ने यहाँ लागू नहीं होने दिया। महिलाओं की सुरक्षा के लिए पूरे देश में महिला हेल्पलाइन शुरू की गई है, लेकिन टीएमसी सरकार इसको भी लेकर गंभीर नहीं है।”

टीएमसी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा, “टीएमसी सरकार हर स्कीम को स्कैम में बदल देती है। स्कीम को स्कैम में बदलने में टीएमसी की मास्टरी है। भाजपा की केंद्र सरकार के 6 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन दे रही है। आने वाले 5 वर्ष तक ये योजना चलती रहेगी। ये मोदी की गारंटी है। इस योजना पर भी टीएमसी के लोग अपना स्टीकर लगाते हैं और गरीबों के राशन लूटने में भी पीछे नहीं रहते हैं।”

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “पश्चिम बंगाल देश के अन्य राज्यों के लिए पूर्वी द्वार का काम करता है। पूर्व में इस द्वार से प्रगति की अपार संभावनाओं का प्रवेश हो सकता है। इसलिए हमारी सरकार पश्चिम बंगाल में सड़क मार्ग, रेल मार्ग, वायु मार्ग और जल मार्ग की आधुनिक कनेक्टिविटी के लिए काम कर रही है।”

उन्होंने कहा, “इंफ्रास्ट्रक्चर के दृष्टिकोण से रेल पश्चिम बंगाल के गौरवशाली इतिहास का हिस्सा रहा है, लेकिन इतिहास की जो बढ़त बंगाल को हासिल थी, आजादी के बाद उसे सही ढंग से आगे नहीं बढ़ाया गया। यही कारण है कि तमाम संभावनाओं के बावजूद बंगाल पीछे छूटता गया। पिछले 10 वर्षों में हमने उस खाई को पाटने के लिए यहाँ के रेल इंफ्रास्ट्रक्चर पर बहुत जोर दिया है।”

स्पेन की महिला से झारखंड के दुमका में गैंगरेप, खेतों में पुलिस को मिले अंडरगारमेंट्स: गूगल ट्रांसलेटर की मदद से पुलिस ने लिखी शिकायत

झारखंड के दुमका में एक विदेशी महिला से गैंगरेप की खबर है। विरोध करने पर स्पैनिश दम्पति को पीटा भी गया। पीड़िता मूल रूप से स्पेन की रहने वाली है, जो अपने पति के साथ भारत में घूमने आई थी। आरोपितों की संख्या 7-8 के बीच बताई जा रही है। पुलिस ने FIR दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। 4 संदिग्ध हिरासत में बताए जा रहे हैं। घटना शुक्रवार (1 मार्च 2024) रात की है। भाजपा ने झारखंड सरकार में महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना दुमका के थानाक्षेत्र हँसडीह की है। यहाँ टूरिस्ट वीजा पर स्पेन से अपने पति के साथ आई 30 वर्षीया पीड़िता एक खेत में कैम्प डाल कर रुकी थी। यहाँ से इन दोनों को भागलपुर जाना था। आरोप है कि रात में करीब 7 से 8 की तादाद में कुछ लोग कैंप में घुसे। उन्होंने पीड़िता से रेप किया।

पीड़ित महिला के पति ने आरोपितों को रोकने का प्रयास किया तो उनकी भी पिटाई कर दी गई। रेप के बाद महिला अपने पति के साथ रात में ही कैम्प से निकल गई और रात लगभग 10:30 पर कुमारहाट चौक पर पुलिस की गश्ती टीम को देख कर अपने साथ हुई घटना को बताया।

बताया जा रहा है कि हिंदी न आने की वजह से महिला और उसके पति ने गूगल ट्रांसलेटर के माध्यम से अपनी शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने सर्च अभियान चला कर एक खेत से पीड़िता के अंडरगारमेंट्स तलाशे। रात में ही पीड़िता का मेडिकल परीक्षण करवाया गया, जिसमें उसके साथ समूहिक दुष्कर्म की पुष्टि हुई।

पुलिस ने अज्ञात आरोपितों के खिलाफ गैंगरेप सहित अन्य धाराओं में FIR दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। जाँच के लिए डॉग स्क्वायड सहित अन्य इलेक्ट्रानिक माध्यमों की मदद ली जा रही है। अब तक 4 संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।

भारतीय जनता पार्टी ने इस घटना के बाद झारखंड सरकार को आड़े हाथों लिया है। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने अपने संसदीय क्षेत्र में हुई इस घटना पर दुःख प्रकट किया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेतृत्व में चल रही वर्तमान सरकार ने बिना ट्रेनिंग दिए ही तमाम पुलिसकर्मियों को तैनात कर रखा है, जिसका नकारात्मक असर सीधे तौर पर लॉ एन्ड आर्डर की बदहाली के तौर पर देखा जा सकता है। भाजपा सांसद दुबे ने बलात्कार जैसी घटनाओं के पीछे प्रशासन को ही जिम्मेदार बता कर पुलिस वालों को ही जेल भेजने की माँग उठाई है।