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मौसी की बेटी से कराची में निकाह किया, फिर ISI के लिए करने लगा जासूसी: 2 पासपोर्ट रखने वाले फैसल रहमान को 10 साल की सजा

कानपुर की एक अदालत ने शनिवार (2 फरवरी 2024) को पाकिस्तान के एक जासूस को 10 साल कैद की सजा सुनाई है। सजा पाए अपराधी का नाम फैसल रहमान उर्फ़ गुड्डू है। उस पर अदालत ने 50 हजार रुपए का जुर्माना भी ठोका है। आज से लगभग 13 साल पहले उसे उत्तर प्रदेश ATS ने सैनिक ठिकानों की रेकी करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। फैसल की बीवी पाकिस्तान के सरकारी स्कूल में नौकरी करती है। वहीं पर उसे पाकिस्तानी एजेंट ने अपने साथ मिलाया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, फैसल रहमान का केस कानपुर जिला अदालत के सत्र न्यायाधीश-8 राम अवतार प्रसाद की अदालत में सुना गया। फिलहाल वह जमानत पर चल रहा था। 13 साल तक चले इस मुकदमे में आखिरकार गुड्डू उर्फ़ फैसल रहमान को दोषी पाया गया। उसे 10 साल सश्रम कारावास और 50 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई। सजा सुनाए जाने के बाद पुलिस ने फैसल रहमान को कस्टडी में लेकर जेल भेज दिया।

कानपुर के ADGC अरविन्द डिमरी ने फैसल रहमान को बेहद शातिर अपराधी बताया। ADGC ने बताया कि फैसल को किसी वकील पर विश्वास नहीं था। उसने अपने मुकदमे की पैरवी खुद ही की थी। इस बावत उसने कोर्ट से बाकायदा धारा 32 के तहत अनुमति भी ली थी। माना जा रहा है कि जल्द ही फैसल रहमान अपनी सजा को हाईकोर्ट में चुनौती दे सकता है।

फैसल रहमान मूलतः झारखंड के राँची का निवासी है। उसका घर जगन्नाथ थाना क्षेत्र के फिरदौस नगर में है। साल 2002-03 में फैसल पाकिस्तान के कराची में रहने वाली अपनी मौसी जाकिया मुमताज के घर गया था। यहाँ उसे अपनी मौसी की बेटी साइमा से मोहब्बत हो गई। साइमा पाकिस्तान के सरकारी स्कूल गवर्नमेंट इस्लामिया में पढ़ाती थी। थोड़ी ही दिनों के बाद फैसल ने उससे निकाह कर लिया।

इसी पाकिस्तान यात्रा के दौरान उसकी मुलाकत ISI एजेंट से हुई थी। वह भारत लौटकर आने के बाद पाकिस्तान के लिए जासूसी करने लगा। उसने देश के विभिन्न हिस्सों में मौजूद सैनिक ठिकानों की रेकी करनी शुरू कर दी। वह प्रयागराज, राँची, झाँसी और बबीना गया। वहाँ मौजूद सैनिक ठिकानों की जानकारी जुटाई। उसने RTI डालकर भी सरकार से सेना संबंधी कई सवाल किए थे।

इन सवालों में कौन-सी बटालियन कहाँ तैनात है जैसे सवाल शामिल थे। हालाँकि इन हरकतों के चलते फैसल ATS के रडार पर आ चुका था। कई जगह घूमने के बाद आखिरकार फैसला साल 2011 में कानपुर पहुँचा। वह कानपुर सैनिक ठिकाने की जासूसी करने के लिए वहाँ गया था। वहाँ पहले से ही तैयार ATS ने 19 सितंबर 2011 को फैसल को कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन से दबोच लिया।

तलाशी के दौरान उसकी जेब से पाकिस्तानी सिम, हाथ से बना हुआ कानपुर सैनिक छावनी का नक्शा, दो अलग-अलग पासपोर्ट, कई टिकट और वोटर कार्ड आदि बरामद हुए थे। जब ATS ने उसका ईमेल चेक किया तो सेना से जुड़ी कई सूचनाएँ पाकिस्तान भेजे जाने की पुष्टि हुई। फैसल के पासपोर्ट अलग-अलग समय में पटना और राँची से बने मिले। वह पाकिस्तान के अलावा रूस की यात्रा कर चुका था।

फैसला रहमान पर धारा 22 (1), 120 बी और 115 IPC के अलावा शासकीय गोपनीयता अधिनियम 1973 की धारा 3/4/9 के तहत कानपुर के रेल बाजार थानाक्षेत्र में FIR दर्ज हुई थी। ATS की पूछताछ में फैसल ने पाकिस्तान के लिए जासूसी करने की बात कबूल की थी। उसे 2011 में जेल भेज दिया गया था, लेकिन बाद में जमानत हो गई थी। अब फैसल रहमान उर्फ़ गुड्डू को सजा सुनाई गई है।

Jharkhand court sentences Faisal Rehman to 10 years in jail for spying for Pakistan

हैदराबाद में असदुद्दीन ओवैसी के खिलाफ BJP ने डॉक्टर माधवी लता को उतारा: जानिए कौन हैं ये महिला, जिनकी खूब हो रही है चर्चा

लोकसभा चुनाव 2024 के लिए भारतीय जनता पार्टी ने अपनी पहली लिस्ट शनिवार (2 फरवरी 2024) को जारी कर दी। भाजपा ने हैदराबाद में AIMIM सुप्रीमो एवं सांसद असदुद्दीन ओवैसी के खिलाफ डॉक्टर माधवी लता को प्रत्याशी बनाया है। माधवी राजनीति विज्ञान में परास्नातक हैं। वो हैदराबाद में एक नामी अस्पताल की चेयरपर्सन हैं। माधवी को प्रत्याशी घोषित करते ही सोशल मीडिया में उनके समर्थन में मुहिम छेड़ दी गई है।

बच्चों को दिया श्रीमद्भगवत गीता का ज्ञान

माधवी 3 बच्चों की माँ हैं। उनकी बड़ी बेटी लोपामुद्रा 19 वर्ष की हैं, जो IIT मद्रास से बीटेक कर रही हैं। दूसरे नंबर पर 16 साल का बेटा रामकृष्ण परमहंस है। वह भी IIT मद्रास से बीटेक प्रथम वर्ष का छात्र है। माधवी की सबसे छोटी बेटी मोदिनी है, जो फिलहाल कक्षा 11 में पढ़ती है। मोदिनी भी अपने भाई और बहन की तरह IIT करना चाहती हैं। माधवी ने अपने बच्चों को बचपन में खुद ही पढ़ाया है। वे बच्चों को अंग्रेजी, गणित, विज्ञान, समाजशास्त्र आदि विषयों के साथ-साथ उन्हें श्रीमद्भगवत गीता और महाभारत का भी ज्ञान दिया है।

NCC कैडेट और भरतनाट्यम नृत्यांगना

माधवी लता के पति का नाम विश्वनाथ है। वो एमिरेट्स विरिंची नाम की कम्पनी के संस्थापक हैं। माधवी तेलंगाना टुडे को बताती हैं कि उन्होंने कई अनाथालयों को दान दिए हैं। माधवी लता प्रोफेशनल भरतनाट्यम नृत्यांगना हैं। वो अब तक 100 से ज्यादा स्टेज प्रस्तुति दे चुकी हैं। माधवी अपने छात्रा जीवन में NCC कैडेट भी रह चुकी हैं।

डॉक्टर माधवी लता को तेलंगाना में हिंदुत्व का मुखर चेहरा माना जाता है। कोटी महिला कॉलेज से राजनीति शास्त्र में MA करने के बाद वह मूलतः शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे सामाजिक कार्यों में काफी सक्रिय रही हैं। इन कार्यों को वो ट्रस्ट और संस्थाओं के माध्यम से करती हैं। हैदराबाद से भाजपा की पहली महिला प्रत्याशी माधवी के हिन्दू धर्म को लेकर दिए जाने वाले भाषण अक्सर वायरल होते हैं।

हैदराबाद में मंदिरों पर कब्ज़ा

प्रत्याशी के तौर पर अपना नाम सामने आने के बाद माधवी ने ANI से बात की। तब उन्होंने बताया कि वो पिछले 8 वर्षों से लगातार हैदराबाद के उस संसदीय क्षेत्र में जा रही हैं, जहाँ से वो खुद प्रत्याशी घोषित हुई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उस क्षेत्र में विकास पूरी तरह से ठप्प हो गया है और लोग पढ़ाई, सफाई और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। माधवी ने आगे कहा कि जहाँ मदरसों में बच्चों को खाना नहीं मिल रहा है, वहीं हिंदुओं के कई मंदिरों को कब्ज़ा कर लिया गया है।

उस संसदीय क्षेत्र के हिन्दू समाज को आए दिन परेशानी का सामना करने वाली आबादी बताते हुए माधवी ने आरोप लगाया कि मुस्लिम बच्चों को भी बाल मजदूरी करवाई जा रही है। माधवी ने आगे बताया कि ओवैसी जैसे लोगों का वोट सिर्फ हिन्दू और मुस्लिमों की लड़ाई करवाने से आता है। पुराने हैदराबाद को गरीबी और बेबसी का शिकार बताते हुए भाजपा प्रत्याशी ने इसे बहुत आगे ले जाने की जरूरत पर जोर दिया।

1984 से काबिज़ है ओवैसी परिवार

भारतीय जनता पार्टी ने जिस हैदराबाद सीट पर माधवी लता को उतारा है, वहाँ साल 1984 से ओवैसी परिवार का दबदबा है। ओवैसी के अब्बा सुल्तान सलाउद्दीन यहाँ से 1984 में पहली बार सांसद बने थे। साल 2004 तक सुल्तान सलाउद्दीन यहाँ से जीतते आए, जिसके बाद से अब इस सीट पर असदुद्दीन ओवैसी की जीत हो रही है।

हिंदुओं से नफरत, 2047 तक भारत को इस्लामी मुल्क बनाने का मकसद: NIA ने 2 लाख के ईनामी PFI आतंकी अब्दुल सलीम को दबोचा

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने प्रतिबंधित इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के एक आतंकी अब्दुल सलीम को पकड़ा है। सलीम के खिलाफ निज़ामाबाद पीएफआई मामले में आरोप पत्र दाखिल किया था। हालाँकि, वह फरार हो गया था। उस पर NIA ने 2 लाख रुपए का नकद इनाम भी रखा था।

NIA के प्रवक्ता ने बताया, “उत्तरी तेलंगाना पीएफआई का राज्य सचिव अब्दुल सलीम 15वाँ आरोपित है, जिसे मूल रूप से जुलाई 2022 में निज़ामाबाद पुलिस द्वारा दर्ज किए गए मामले में गिरफ्तार किया गया है। बाद में इस मामले को राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) को सौंप दिया गया था।”

एनआईए अधिकारी ने कहा कि सलीम पीएफआई के साजिशकर्ताओं के समूह का एक प्रमुख सदस्य था और यह मामला सामने आने के बाद से वह फरार था। उन्होंने बताया कि आरोपित को खुफिया जानकारी के आधार पर चलाए गए अभियान के बाद आंध्र प्रदेश के कडप्पा जिले के मायदुकुर से पकड़ा गया है।

एनआईए की जाँच से पता चला है कि अब्दुल सलीम पीएफआई में मुस्लिम युवाओं को कट्टरपंथ की राह पर धकेल रहा था। वह उन्हें कट्टरपंथ बनाने के लिए भर्ती करने में शामिल था। वह उन्हें संगठन के नापाक भारत विरोधी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए हथियार प्रशिक्षण के लिए आतंकवादी प्रशिक्षण शिविरों में भी भेजता था।

एनआईए ने दिसंबर 2022 में अब्दुल सलीम सहित 11 आरोपितों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था। उसके बाद पिछले साल मार्च में पाँच और दिसंबर में एक के खिलाफ पूरक आरोप पत्र दायर किया था। एनआईए अधिकारी ने कहा कि पीएफआई और उसके आतंकियों की साजिश का एक अभिन्न हिस्सा साल 2047 तक भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाना था।

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने 16 मार्च 2023 को प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया है। यह आरोप पत्र निजामाबाद मामले में PFI के 5 आरोपितों- शेख रहीम उर्फ अब्दुल रहीम, शेख वाहिद अली उर्फ अब्दुल वहीद अली, जफरुल्ला खान पठान, शेख रियाज अहमद और अब्दुल वारिस के खिलाफ चार्जशीट दाखिल किया था।

इससे पहले 30 दिसंबर 2022 को एनआईए ने 11 आरोपितों के खिलाफ पहला आरोप पत्र दाखिल किया था। NIA ने यह मामला अगस्त 2022 में तेलंगाना पुलिस से अपने हाथ में लिया था। तेलंगाना पुलिस ने इस मामले में 4 जुलाई 2022 को मामला दर्ज किया था।

चार्जशीट में कहा गया था कि ये अभियुक्त कुख्यात PFI के प्रशिक्षित कैडर शामिल हैं। ये प्रभावशाली मुस्लिम युवाओं को भड़काने और कट्टरपंथी बनाने का काम करते थे। इसके बाद उन्हें पीएफआई में भर्ती कराते थे। इसके अलावा, भर्ती कराए गए लोगों को PFI के प्रशिक्षण शिविरों में हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी जाती थी। 

दरअसल, एनआईए ने कराटे प्रशिक्षण केंद्र के नाम पर संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) द्वारा ट्रेनिंग कैंप चलाए जाने के मामले में सितंबर 2022 में छापेमारी की थी। एनआईए ने आंध्र प्रदेश के कुरनूल, नेल्लोर, कडपा, गुंटूर और तेलंगाना के निजामाबाद में संदिग्धों के घर व बिजनेस परिसरों की तलाशी भी ली थी।

इससे पहले जुलाई 2022 में तेलंगाना (Telangana) की निजामाबाद पुलिस ने कराटे और मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग की आड़ में देश विरोधी गतिविधियों के आरोप में PFI के 3 सदस्यों को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तार आरोपितों के नाम शेख शहदुल्लाह, अब्दुल मोबीन और मोहम्मद इमरान हैं। इनमें एक आरोपित ने अब तक 200 मुस्लिमों को ट्रेनिंग देने की बात कबूली।

इन लोगों को देश के अलग-अलग हिस्सों में अस्थिरता फैलाने का टास्क मिला था। निजामाबाद पुलिस कमिश्नर द्वारा शेयर मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रेनिंग सेंटर में देश की धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ शिक्षा दी जा रही थी। यहाँ शरिया कानून लागू करने के लिए उकसाया जाता था। ट्रेनिंग के लिए गरीब और मध्यम वर्ग के युवाओं को भर्ती किया जा रहा था।

इन सभी का सरगना 52 साल का कादिर है। वह ट्रेनिंग में आने वाले युवाओं को यह कहकर भड़काता था कि हिन्दू तुम्हारे दुश्मन हैं। पुलिस का मानना है कि यहाँ तैयार किए जा रहे लोगों को हिन्दू समाज को निशाना बनाने के लिए उकसाया जा रहा था। गिरफ्तार आरोपित पहले बैन आतंकी संगठन सिमी के सदस्य थे। बाद में ये सभी PFI से जुड़ गए।

‘क्या डार्लिंग, चालान करने आई हो क्या?’: शराबी ने महिला पुलिस अधिकारी पर किया कमेंट, कोर्ट बोला- यह आपत्तिजनक और यौन रूप से प्रेरित टिप्पणी

कलकत्ता हाई कोर्ट ने शुक्रवार (1 मार्च 2024) को एक मामले की सुनवाई के दौरान माना कि किसी अज्ञात महिला को ‘डार्लिंग’ कहना आपत्तिजनक और यौन रूप से प्रेरित टिप्पणी है। ऐसा करने वाले को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354A(I) के तहत दंडित करने का प्रावधान है। पोर्ट ब्लेयर पीठ में एकल-न्यायाधीश न्यायमूर्ति जय सेनगुप्ता ने जनक राम (अपीलकर्ता/दोषी) की सजा को बरकरार रखा।

जनक राम ने नशे की हालत में पकड़े जाने के बाद एक महिला पुलिस अधिकारी (शिकायतकर्ता) से पूछा था, “क्या डार्लिंग, चालान करने आई हो क्या”? जज ने कहा, “सड़क पर किसी अज्ञात महिला को, चाहे वह पुलिस कॉन्स्टेबल हो या नहीं, एक आदमी द्वारा, चाहे वो शराब के नशे में हो या नहीं, ‘डार्लिंग’ शब्द से संबोधित करना स्पष्ट रूप से अपमानजनक है। इस्तेमाल किया गया शब्द मूल रूप से यौन टिप्पणी है।”

अदालत ने कहा कि आरोपित का दावा था कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि वह नशे में था। अदालत ने तर्क के जवाब में कहा, “अगर यह शांत अवस्था में किया गया होता तो अपराध की गंभीरता शायद और भी अधिक होती।” कोर्ट ने कहा, “हमारे समाज में प्रचलित मानक ऐसे नहीं हैं कि सड़क पर किसी पुरुष को एक अनजान महिला के संबंध में ऐसी अभिव्यक्ति का उपयोग करने की अनुमति दी जा सके।”

दरअसल, पीड़ित महिला पुलिस कॉन्स्टेबल और अन्य पुलिसकर्मियों की एक पुलिस टीम दुर्गा पूजा की पूर्व संध्या पर कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए लाल टिकरे की ओर जा रही थी। जब वे वेबी जंक्शन पहुँचे तो उन्हें सूचना मिली कि एक व्यक्ति वहाँ उपद्रव मचा रहा है। पुलिस दल वहाँ पहुँचा और बदमाश को पकड़कर थाने ले गया, जबकि पीड़िता सहित बाकी पुलिस दल जंक्शन पर ही रुक गया।

जिस जगह पर पुलिस दल खड़ा था, वहाँ अंधेरा था। इसलिए उन्होंने एक दुकान के सामने लगी स्ट्रीट लाइट के नीचे जाने का फैसला किया। जब वे स्ट्रीट लाइट के पास पहुँचे तो दुकान के सामने खड़े अपीलकर्ता जनक राम ने शिकायतकर्ता महिला अधिकारी से कामुक सवाल पूछा, “क्या डार्लिंग, चालान करने आई हो क्या?”

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, इस पर मायाबंदर पुलिस स्टेशन ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 354 ए (1) (iv) और 509 (शब्द, इशारा या किसी महिला की विनम्रता का अपमान करने का इरादा) के तहत पहली सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज की।

24 अप्रैल 2023 के एक फैसले में न्यायिक मजिस्ट्रेट, प्रथम श्रेणी, उत्तरी और मध्य अंडमान, मायाबंदर ने अपीलकर्ता को आईपीसी की धारा 354A(1)(iv) और 509 के तहत अपराध के लिए दोषी ठहराया और उसे तीन महीने के साधारण कारावास की सजा सुनाई। साथ ही उसे दोनों अपराधों में से प्रत्येक के लिए ₹500 का जुर्माना भरने का भी निर्देश दिया।

इसके खिलाफ अपीलकर्ता ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, उत्तरी और मध्य अंडमान के समक्ष अपील की, लेकिन 21 नवंबर 2023 को इसे खारिज कर दिया गया। इसके बाद जनक राम ने उच्च न्यायालय के समक्ष याचिका दायर की। न्यायालय ने पहले धारा 354ए और 509 की जाँच की और माना कि किसी अनजान महिला को ‘डार्लिंग’ जैसे शब्दों से संबोधित करना दोनों प्रावधानों के तहत अपराध होगा।

रोशन राय के नाम से फेसबुक पर नाबालिग हिंदू लड़की से दोस्ती… घर में सेक्स के बाद मजार में निकाह: UP पुलिस ने शाहवेज को दबोचा

उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले से लव जिहाद का मामला सामने आया है। यहाँ एक हिन्दू लड़की ने शाहवेज पर खुद को रोशन राय नाम से प्यार के जाल में फँसाने और बाद में निकाह कर के आए दिन पिटाई कर के पैसे उगाही करने का आरोप लगाया है। इस दौरान पीड़िता को जान से मार डालने की भी धमकी दी गई और धर्मान्तरण कराने का भी दबाव डाला गया। शुक्रवार (1 मार्च 2024) को पुलिस ने शाहवेज को गिरफ्तार कर लिया है। पीड़िता की शिकायत में शाहवेज के अन्य परिजन भी नामजद हैं, जिनकी भूमिका की जाँच करवाई जा रही है।

घटना सोनभद्र जिले के थानाक्षेत्र रॉबर्ट्सगंज की है। यहाँ पीड़िता ने बुधवार (28 फरवरी 2024) को पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। पीड़िता के पिता की मृत्यु काफी पहले बीमारी से हो गई थी। वो घर पर अपनी माँ के साथ अकेली हैं। पीड़िता का एक भाई भी है, लेकिन वो बाहर दूर किसी शहर में कमाता है। शिकायत में बताया गया है कि साल 2018 जब वो महज 15 साल की नाबालिग थी, तब उसे रोहन राय नाम से फेसबुक पर फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी गई थी। यह ID शाहवेज चला रहा था। इस रिक्वेस्ट को पीड़िता ने एक्स्पेट कर लिया और दोनों में बातचीत होने लगी।

कुछ माह में ही बातचीत के बाद दोनों की मुलाकात हुई। शाहवेज ने तब भी खुद को हिन्दू बताते हुए पीड़िता को डाला क्षेत्र के एक मंदिर ले गया। मूलतः चुर्क वार्ड नंबर 4 सोनभद्र में रहने वाले रोशन बने शाहवेज ने पीड़िता से अपना घर गाजियाबाद और जॉब नोएडा में बताया। प्यार करने का नाटक करते हुए उसने पहले पीड़िता को पहले विश्वास में लिया और नाबालिग होने के बावजूद उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। जब लड़की की माँ नहीं होती थी, तब वह शारीरिक संबंध बनाने घर पर भी आता था।

शाहवेज बार-बार गाजियाबाद से आने का झूठ बोला करता था। थोड़े समय बाद शाहवेज ने सोनभद्र के ही एक मंदिर में अपने 4-5 दोस्तों की मौजूदगी में पीड़िता से शादी भी कर ली। मंदिर में शादी के बाद पीड़िता अपनी माँ के पास लौट आई। कुछ समय बाद लड़की ने अपनी माँ को सारी बात बताई। पहले तो माँ ने विरोध किया, लेकिन अपनी बेटी की ख़ुशी देखकर वो चुप रही। इस बीच रोशन राय बने शाहवेज ने पीड़िता की माँ को भी झाँसे में ले लिया। उसने हमेशा माँ-बेटी का ध्यान रखने का वादा किया।

25 अगस्त 2019 को शाहवेज पीड़िता को लेकर मिर्जापुर में एक मजार पर गया। इस दौरान शाहवेज के साथ उसके परिवार वाले और कुछ रिश्तेदार भी मौजूद थे। ऑपइंडिया से बातचीत के दौरान पीड़िता ने बताया कि शाहवेज के इन रिश्तेदारों में वाराणसी में रहने वाला एक मौलाना भी था। यहाँ पर आरोपितों द्वारा पीड़िता का बिना मर्जी के निकाह करवाया गया और उसे इस्लाम कबूलने का दबाव भी दिया गया। शाहवेज इसी के बाद से पीड़िता को शाहीन कहने लगा था। इसी दिन पीड़िता को पहली बार शाहवेज के मुस्लिम होने की जानकारी हुई थी।

पीड़िता ने इस्लाम कबूलने से इनकार कर दिया था। वह हिन्दू रीति रिवाज़ का पालन करने लगी। इसी बात पर उससे लगातार मारपीट होती थी और जान से मारने की धमकियाँ भी दी जाती थीं। तब तक पीड़िता गर्भवती हो चुकी थी और मजबूरी में शाहवेज के साथ रह रही थी। थोड़े समय बाद पीड़िता ने एक बेटे को जन्म दिया, जिसका नाम आयुष है। पीड़िता ने आरोप लगाया है कि शाहवेज इस बच्चे का नाम मोहम्मद अली रखना चाहता था। वह बच्चे का खतना भी करवाना चाहता था। पीड़िता ने इसके लिए मना कर दिया, जिसके बाद दोनों के बीच झगड़ा हुआ। इस झगड़े में पीड़िता की पिटाई भी हुई।

बकौल पीड़िता, सब कुछ जैसे-तैसे चल रहा था। थोड़े समय बाद शाहवेज ने लालच दिखाते हुए चुर्क इलाके में पीड़िता से 60 हजार रुपए में एक जमीन खरीदवाई और फिर डेढ़ लाख रुपए में वहीं जूते की दुकान बनवाई। सब कुछ बन जाने के बाद वह खुद दुकान चलाने लगा और उसका पैसा अपनी जेब में रखने लगा। इस दुकान को बनवाने के लिए पीड़िता ने डेढ़ लाख रुपए का लोन भी लिया था। आरोप है कि अपने अब्बा की खाली जमीन पर दुकान बनवाने के लिए ही शाहवेज ने यह पूरा षड्यंत्र रचा था। पीड़िता ने शाहवेज से उसके झूठ की शिकायत करनी चाही तो उसे मुँह बंद रखने की भी धमकी दी गई।

साल 2023 में पीड़िता ने एक बेटी को जन्म दिया। इसके बाद से पीड़िता की मुसीबतें और बढ़ गईं। प्रताड़ित करते हुए शाहवेज ने पीड़िता के सारे जेवरात हड़प लिए और 2 लाख रुपए दहेज़ लाने का भी दबाव देने लगा। पीड़िता ने अपनी बेटी का नाम सान्या रखा, जबकि शाहवेज सानिया रखने पर आमादा था। इस बात पर न सिर्फ शाहवेज बल्कि उसके अब्बा रिज़वान और भाई तफ़सीर हुसैन भी नाराज हो उठे। आरोप है कि ये दोनों भी अन्य परिजनों के साथ पीड़िता पर इस्लाम कबूलने का दबाव बनाने में शामिल थे। पीड़िता को मिल रही धमकियों में उसके दोनों बच्चों की हत्या करना भी शामिल है।

आखिरकार मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई गई। सोनभद्र सिटी के डिप्टी एसपी राहुल ने बताया कि मुख्य आरोपित शाहवेज को गिरफ्तार कर लिया गया है। उसके परिजनों पर लगाए गए आरोपों की जाँच करवाई जा रही है। सभी आरोपितों पर IPC की धारा 416, 376, 506 और 498-A के अलावा दहेज़ अधिनियम व धर्मान्तरण निरोधक कानून के तहत कार्रवाई की गई है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

आरोपित तफ़्सीर हुसैन (शाहवेज का भाई)

सभी शादीशुदा भाइयों की हैं हिन्दू गर्लफ्रेंड

ऑपइंडिया से बात करते हुए पीड़िता ने शाहवेज और उसके परिवार पर हिन्दू लड़कियों को जानबूझ कर टारगेट करने का आरोप लगाया है। पीड़िता ने बताया कि न सिर्फ शाहवेज, बल्कि उसके भाई तफ़सीर के चंगुल में भी कई हिन्दू लड़कियाँ आज भी फँसी हैं।

पीड़िता ने यह भी कहा कि जिस दुकान को कर्ज लेकर उसने खरीदा है, उसके एक हिस्से पर आज भी शाहवेज का अब्बा रिज़वान काबिज़ है। रिज़वान पर उन्होंने कई अन्य लोगों की भी जमीनों को कब्ज़ा करने का आरोप लगाया। नाबालिग होने के बावजूद निकाह करवाने से लेकर अपने साथ उसी समय हुए दुष्कर्म में पीड़िता ने शाहवेज के अब्बू और भाई की भी साजिश बताया है।

चीन से पाकिस्तान जा रहे एक संदिग्ध जहाज को भारतीय एजेंसियों ने मुंबई में पकड़ा, परमाणु कार्गो के संदेह में माल किया गया जब्त

मुंबई के न्हावा शेवा बंदरगाह पर सुरक्षा एजेंसियों ने पाकिस्तान के कराची जा रही एक जहाज को परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों के लिए दोहरे उपयोग का हवाला देते हुए रोक लिया। यह खेप चीन से पाकिस्तान के लिए भेजी गई थी। भारतीय एजेंसियों ने इसे जब्त कर लिया है। अधिकारियों ने शनिवार (2 मार्च 2024) को इसकी जानकारी दी।

अधिकारियों ने बताया कि माल्टा के झंडे वाला व्यापारी जहाज सीएमए सीजीएम अत्तिला को सीमा शुल्क अधिकारियों द्वारा प्राप्त खुफिया जानकारी के आधार पर 23 जनवरी को रोक दिया गया था। निरीक्षण करने पर उन्हें एक इतालवी कंपनी द्वारा निर्मित कंप्यूटर न्यूमेरिकल कंट्रोल (सीएनसी) मशीन मिली, जो कंप्यूटर सिस्टम द्वारा नियंत्रित होने पर अपनी सटीकता और दक्षता के लिए जानी जाती है।

रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) की टीम ने इस खेप की जाँच की और पाकिस्तान की परमाणु मिसाइल के निर्माण में इसके संभावित उपयोग की पुष्टि की। सीएनसी मशीनों को वासेनार व्यवस्था के तहत वर्गीकृत किया गया है, जो एक अंतरराष्ट्रीय हथियार नियंत्रण व्यवस्था है। इसका उद्देश्य नागरिक और सैन्य प्रयोगों वाली वस्तुओं के प्रसार को रोकना है। भारत इसका सक्रिय भागीदार है।

जाँच में वास्तविक प्राप्तकर्ताओं को छुपाने कोशिश का पता चला। यह घटना चीन से पाकिस्तान ले जाने वाली दोहरे उपयोग वाली सैन्य-ग्रेड वस्तुओं की पिछली जब्ती के बाद हुई है। जाँच की जा रही है कि क्या इन वस्तुओं को प्राप्त करने वाली पाकिस्तानी संस्थाओं का रक्षा विज्ञान और प्रौद्योगिकी संगठन (DESTO) से कोई संबंध है। DETSO पाकिस्तान के रक्षा अनुसंधान और विकास के लिए जिम्मेदार है।

बंदरगाह के अधिकारियों ने विशिष्ट खुफिया जानकारी पर कार्रवाई करते हुए भारी माल का निरीक्षण किया और संदेह की सूचना भारतीय रक्षा अधिकारियों को देकर सतर्क कर दिया। इसके बाद इस खेप को जब्त कर लिया गया। अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि यह जब्ती पाकिस्तान और चीन द्वारा संभावित प्रसार को रोकने के प्रयासों के तहत आती है।

लदाई के बिल जैसे दस्तावेज़ के अनुसार, कंसाइनर को ‘शंघाई जेएक्सई ग्लोबल लॉजिस्टिक्स कंपनी लिमिटेड’ के रूप में सूचीबद्ध किया गया था और कंसाइनर सियालकोट की ‘पाकिस्तान विंग्स प्राइवेट लिमिटेड’ था। सुरक्षा एजेंसियों द्वारा जाँच से संकेत मिला कि 22,180 किलोग्राम की खेप वास्तव में ताइयुआन माइनिंग इम्पोर्ट एंड एक्सपोर्ट कंपनी लिमिटेड द्वारा भेजी गई थी और इसका उद्देश्य पाकिस्तान में कॉसमॉस इंजीनियरिंग के लिए था।

यह पहली बार नहीं है जब भारतीय बंदरगाह अधिकारियों ने चीन से पाकिस्तान जा रहे दोहरे उपयोग वाली सैन्य-ग्रेड वस्तुओं को इस तरह रोका है। पाकिस्तानी रक्षा आपूर्तिकर्ता कॉसमॉस इंजीनियरिंग 12 मार्च 2022 से जाँच के दायरे में है। उस दौरान भारतीय अधिकारियों ने न्हावा शेवा बंदरगाह पर इतालवी निर्मित थर्मोइलेक्ट्रिक उपकरणों की एक खेप को रोक दिया था।

अंतर्राष्ट्रीय समझौतों की अवहेलना करने वाली इस तरह की गतिविधियों से पाकिस्तान और चीन के बीच चल रहे सहयोग का पता चलता है। इसके कारण इन के संभावित प्रसार गतिविधियों के बारे में चिंताएँ बढ़ जाती हैं। फरवरी 2020 में एक अलग घटना में चीन को “औद्योगिक ड्रायर” की आड़ में पाकिस्तान को आटोक्लेव की आपूर्ति करते पाया गया था।

आटोक्लेव को एक चीनी जहाज दाई कुई युन से जब्त किया गया था, जिस पर हांगकांग का झंडा लहरा रहा था। यह जहाज चीन के जियांगसू प्रांत में जियानगिन बंदरगाह से पाकिस्तान के पोर्ट कासिम के लिए रवाना हुआ था। यह खेप पाकिस्तान के मिसाइल कार्यक्रम के लिए थी। इससे यह संदेह और मजबूत होता है कि पाकिस्तान अवैध मिसाइल व्यापार में संलग्न है और मिसाइल प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्यवस्था (एमटीसीआर) का उल्लंघन कर रहा है।

‘काले जादू से बनाऊँगा अमीर’: वजीर शेख बनाता था महिलाओं को शिकार, वीडियो बनाकर करवाता था ‘धंधा’, असलम-सलीम समेत 7 गिरफ्तार

महाराष्ट्र के ठाणे में साहेब लाल वजीर शेख उर्फ यूसुफ बाबा नाम का व्यक्ति गरीब महिलाओं-लड़कियों को जल्दी अमीर बनाने का सपना दिखाता था। उसे वो अपनी जाल में फंसाकर काले जादू के बहाने कपड़े उतरवाता था, फिर शैतान को खुशामद करने के नाम पर उनके साथ संबंध बनाता था और इन सबका वीडियो बनाकर वो पीड़ित महिलाओं-लड़कियों से ‘धंधा’ करवाता था। अब पुलिस ने वजीर शेख उर्फ यूसुफ बाबा के साथ ही उसके दो चेलों असलम खान और सलीम शेख को भी गिरफ्तार किया है। पहले चेले ही पकड़े गए थे, फिर पुख्ता सबूतों को जुटाने के बाद पुलिस ने मुख्य आरोपित को गिरफ्तार किया है।

ये मामला महाराष्ट्र के ठाणे का है, जहाँ के राबोडी से 15 साल की लड़की के लापता होने के बाद पुलिस ने जाँच शुरू की, तो काले जादू की आड़ में सेक्स रैकेट चलाए जाने के मामले का भंडाफोड़ हुआ। एक जाँच अधिकारी ने बताा कि यूसुफ बाबा और उसके सहयोगियों ने काले जादू के माध्यम से अमीर बनाने का सपना दिखाकर गरीब महिलाओं और लड़कियों को अपने पास बुलाया। उन्होंने शैतान को खुश करने का झाँसा देकर उनके साथ संबंध बनाए और इसका वीडियो बना लिया। फिर उन्होंने ब्लैकमेलिंग कर उन महिलाओं को सेक्स रैकेट में ढकेल दिया। पुलिस को आरोपितों के मोबाइल फोन से बहुत सारे सबूत मिले हैं।

इस मामले में पहले असलम खान और सलीम शेख को 25 फरवरी को ही गिरफ्तार कर लिया गया था। इसके साथ ही गिरोह में शामिल 2 महिलाओं समेत 4 अन्य लोगों को भी पकड़ा गया था, जिसमें कुछ दलाल भी हैं। आखिर में पुलिस ने साहेब लाल वजीर शेख उर्फ यूसुफ बाबा को पकड़ा, जो इनका सरगना है।

ठाणे क्राइम ब्रांच-1 के इंस्पेक्टर कृष्णा कोकनी ने कहा, “हमारा मानना है कि इस गिरोह ने, जिसमें दो महिलाएँ भी शामिल हैं, कम से कम 17 लोगों को जाल में फंसाया। सात गिरफ्तारियाँ ठाणे, पालघर के वसई और मुंबई से की गईं।” उन्होंने कहा कि भारतीय दंड संहिता के तहत अपहरण, बलात्कार, धोखाधड़ी और अन्य अपराधों में राबोडी थाने में मामला दर्ज किया गया है और इस रैकेट की जांच जारी है। अधिकारी ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम और महाराष्ट्र मानव बलि एवं अन्य अमानवीय व अघोरी प्रथाओं और काला जादू रोकथाम एवं उन्मूलन अधिनियम 2013 के तहत भी आरोप लगाए गए हैं।

आरोपित मुस्लिम, लेकिन तांत्रिक बताकर सनातन को बदनाम कर रहे न्यूज चैनल?

इस पूरे गिरोह का मुखिया वजीर शेख उर्फ यूसुफ बाबा है, तो उसके चेलों के नाम असलम खान और सलीम शेख हैं। ये लोग काले जादू के नाम पर महिलाओं को अपनी जाल में फंसाते थे। हालाँकि पूरा का पूरा मीडिया इन्हें तांत्रिक बताने में अपनी पूरी ताकत खर्च कर रहा है, जबकि बयान में साफ दर्ज है कि ये लोग शैतान और काले जादू के नाम पर महिलाओं को फाँसते थे और फिर उनसे धंधा कराते थे।

ऐसे लोगों की रिपोर्ट करते समय मीडिया को अपनी शब्दावली पर भी ध्यान देना चाहिए, क्योंकि ये लोग ‘मुस्लिम पीर’, ‘मुस्लिम फकीर’, ‘सूफी पीर’, ‘सूफी फकीर’ तो हो सकते हैं, तांत्रिक कतई नहीं। इसके बावजूद यूसुफ बाबा जैसे अपराधारियों को तांत्रिक लिखने से गलत संदेश फैलाया जा रहा है। ये जान-बूझकर किया जा रहा है या अनजाने में, इस पर विचार स्वयं समाचार लिखने वालों को ही करना चाहिए।

नासिक-चंदवाड हाईवे के बीच बनी मज़ार पर चला प्रशासन का बुलडोजर; मालेगाँव से बुलवाया गया था मौलाना… भाजपा MLA ने दी थी महाआरती करने की चेतावनी

महाराष्ट्र के नासिक में एक मज़ार पर प्रशासन ने कार्रवाई की है। नासिक-चंदवाड हाईवे के बीच बनी इस मजार पर बुलडोजर चला दिया गया है। भारतीय जनता पार्टी के विधायक नितेश राणे ने इस मजार के खिलाफ 29 फरवरी 2024 को विधान भवन परिसर में आवाज बुलंद की थी। तब से इस पर कार्रवाई की सुगबुगाहट चल रही थी। ध्वस्तीकरण की यह कार्रवाई शनिवार (2 मार्च 2024) की भोर में की गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शनिवार की सुबह प्रशासनिक अधिकारी बुलडोजर लेकर मजार पर पहुँचे। इस अवसर पर भारी संख्या में पुलिस बल भी मौके पर मौजूद था। कुछ ही समय के अंदर मजार को तोड़ दिया गया। भाजपा विधायक नीतेश राणे ने इस जगह के पहले और बाद की तस्वीरें अपने X हैंडल पर शेयर की हैं।

अपने हैंडल पर तस्वीरों को शेयर करते हुए नीतेश राणे ने कैप्शन में मराठी भाषा में लिखा, “हे हिंदुत्वादी सरकार आहे। इथे उगाचे लाड चालत नाहीत। लक्षात ठेव्हा।” इसका हिंदी में अर्थ है कि ‘ये हिंदुत्ववादी सरकार है। यहाँ बेवजह किसी के नखरे नहीं पाले जाते हैं। याद रखना।’

पहले की तस्वीरों मे दिख रहा है कि हाइवे पर जहाँ U टर्न है, ठीक वहीं मुहाने पर मजार बनी है। यह वही जगह है, जहाँ ट्रैफिक पुलिस के जवान खड़े होते हैं और कई स्थानों पर वृक्षारोपण किया जाता है। इस मजार को पक्की कर दिया गया था और इसके ऊपर हरी चादर डाल दी गई थी। यह चादर अक्सर बदली भी जाती थी और मजार का रंग रोशन भी बराबर किया जाता था।

अब नई तस्वीरों में वह जगह पूरी तरह से सपाट दिख रही है। फिलहाल हाईवे पर ट्रैफिक सामान्य रूप से चल रहा है। मीडिया से 29 फरवरी 2024 को बात करते हुए नितेश राणे ने कहा था कि हिंदुस्तान से हिंदुओं को ही भगाने की साजिशें रची जा रही हैं। तब उन्होंने लैंड और लव जिहाद का जिक्र करते हुए उसके खिलाफ आवाज बुलंद करने का एलान किया था।

नासिक की अवैध मजार का जिक्र करते हुए नितेश राणे ने कहा था कि देश के हिन्दू टाइम बम पर बैठे हैं और अगर समय रहते उसे डिफ्यूज नहीं किया गया तो ये हिंदूराष्ट्र रहेगा ही नहीं, इस्लामिक राष्ट्र बन जाएगा। नितेश राणे का आरोप था कि मजार बनाने के बाद वहाँ पर मालेगाँव से मौलाना बुलवाया गया था। नेशनल हाइवे के आधिकारिक खाते में से उस मौलाना को 20 हजार रुपए ट्रांसफर भी किए गए थे।

नितेश राणे ने एलान किया था कि अगर मजार नहीं हटी तो उसी जगह पर बजरंग बली की भी मूर्ति स्थापित की जाएगी और महाआरती की जाएगी। तब नितेश राणे ने मौलाना के खाते में पैसे ट्रांसफर करने वाले NHAI के अधिकारी पर कार्रवाई के लिए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखकर कार्रवाई करने की माँग करने की बात कही थी।

BJP ने घोषित किए 195 उम्मीदवारों के नाम, वाराणसी से पीएम मोदी, गाँधी नगर से अमित शाह, दिल्ली में कटे 4 सांसदों के टिकट

भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा चुनाव 2024 के लिए उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। बीजेपी की पहली लिस्ट में 195 नाम हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी से चुनाव लड़ेंगे, तो गुजरात की गाँधी नगर लोकसभा सीट से गृहमंत्री अमित शाह मैदान में उतरे हैं। बीजेपी की पहली सूची में दिल्ली से 5 उम्मीदवारों के नाम की घोषणा की गई है, जिसमें मनोज तिवारी को छोड़कर बाकी के 4 सीटों पर उम्मीदवारों को बदल दिया गया है।

बीजेपी की पहली सूची में 34 केंद्रीय मंत्रियों/राज्यमंत्रियों को मैदान में उतारा गया है। कुल 195 उम्मीदवारों में 28 महिला उम्मीदवार हैं। बीजेपी ने इस बार युवाओं पर जोर दिया है, जिसमें लगभग एक चौथाई यानी 47 उम्मीदवारों की उम्र 50 साल से कम है। बीजेपी की सूची में एससी वर्ग के 27 उम्मीदवार हैं, तो 18 एसटी वर्ग के। बीजेपी ने 195 उम्मीदवारों के नाम घोषित किए हैं, जिसमें बहुत सारे सांसदों का टिकट काटा भी गया है।

यूपी से सबसे ज्यादा 51 उम्मीदवारों की घोषणा

बीजेपी की लिस्ट में राज्यवार देखें तो उत्तर प्रदेश से 51 उम्मीदवारों के नाम की घोषणा की गई है, तो पश्चिम बंगाल से 20 उम्मीदवारों के नाम घोषित किए गए हैं। इसके बाद मध्य प्रदेश से 24, गुजरात की 15 सीटों पर, राजस्थान की 15 सीटों, केरल की 12 सीटों पर, असम की 14 में से 11 सीटों पर, झारखंड से 11 उम्मीदवारों के नाम, छत्तीसगढ़ से 11 उम्मीदवारों के नाम, तेलंगाना से 9 उम्मीदवारों के नाम, दिल्ली से 5 उम्मीदवारों के नाम, जम्मू-कश्मीर से 2, उत्तराखंड से 3, अरुणाचल प्रदेश से 2, गोवा, त्रिपुरा, अंडमान निकोबार और दमन-दीव से एक-एक उम्मीदवार के नाम की घोषणा कर दी गई है।

बड़े प्रत्याशियों की बात करें वाराणसी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गुजरात के गाँधी नगर से अमित शाह, मध्य प्रदेश की विदिशा सीट से पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, दिल्ली की नॉर्थ-ईस्ट सीट से मनोज तिवारी, गोरखपुर से रवि किशन, आजमगढ़ से निरहुआ, उन्नाव से साक्षी महाराज, लखनऊ से राजनाथ सिंह के नाम की घोषणा की गई है। दिल्ली की पाँच सीटों में से चार पर नई दिल्ली से बांसुरी स्वराज, पश्चिमी दिल्ली से कमलजीत सहरावत, दक्षिणी दिल्ली से रामवीर सिंह बिधूड़ी और चांदनी चौक से प्रवीण खंडेलवाल को उतारा गया है।

यूपी से इन प्रत्याशियों के नाम

मुज्ज़फ़रनगर से संजीव बालियान, गौतम बुद्ध नगर से महेंद्र शर्मा, मथुरा से हेमा मालिनी, आगरा से एसपीएस बघेल, फ़तेहपुर सीकरी से राजकुमार चाहर, खीरी से अजय मिश्रा टेनी, सीतापुर से राजेश वर्मा, हरदोई से जयप्रकाश रावत, उन्नाव से साक्षी महाराज, लखनऊ से राजनाथ सिंह, अमेठी से स्मृति ईरानी, कन्नौज से सुब्रत पाठक, अकबरपुर से देवेंद्र भोले, झाँसी से अनुराग शर्मा, हमीरपुर से पुष्पेंद्र सिंह चंदेल, बाँदा से आरके पटेल, बाराबंकी से उपेन्द्र रावत और फैजाबाद से लल्लू सिंह को मैदान में उतारा गया है।

गुजरात से इन बड़े नामों को मिला टिकट

गांधीनगर से अमित शाह, राजकोट से पुरुषोत्तम रुपाला, पोरबंदर से मनसुख मंडाविया, पंचमहल से राजपाल सिंह महेंद्रसिंह यादव, दाहोद से जसवंत सिंह, भरुच से मनसुख भाई वसावा और नवसारी से सीआर पाटिल को मैदान में उतारा गया है।

मध्य प्रदेश ने इन्हें दिया गया टिकट

गुना से ज्योतिरादित्य सिंदिया, दामोह से राहुल लोधी, खजुराहो से वीडी शर्मा, रीवा से जनार्दन मिश्र, शहडोल से हिमाद्रि सिंह, जबलपुर से आशीष दुबे, होशंगाबाद से दर्शन चौधरी, विदिशा से शिवराज सिंह चौहान, भोपाल से अलोक शर्मा, राजगढ़ से रोडमल नागर और खंडवा से न्यानेश्वर पाटिल को टिकट दिया गया है।

इसी तरह से अंडमान से विष्णु, अरुणाचल पश्चिम से किरेन रिजिजू, अरुणाचल ईस्ट से तापिर गाव, सिलचर से परिमल शुक्ल, गुवाहाटी से बिजली कलिता और डिब्रूगढ़ से सर्बानंद सोनोवाल को टिकट दिया गया है।

गूगल के प्ले स्टोर पर सभी 10 भारतीय ऐप्स रिस्टोर, मोदी सरकार की ओर से मिली थी चेतावनी: सर्विस चार्ज नहीं देने का IT कंपनी ने लगाया था आरोप

गूगल ने अपने प्ले स्टोर से कई भारतीय ऐप को हटा दिया। कहा गया कि इन ऐप्स ने गूगल को सर्विस चार्ज नहीं दिया था। गूगल ने जिन भारतीय स्टार्टअप ऐप्स को हटाया वे 99 एकड़, ऑल्ट बालाजी, भारत मैट्रीमोनी, कुकू FM, नौकरी, क्वैक क्वैक, शादी.कॉम, स्टेज, ट्रूली मैडली, स्टेज OTT जैसे ऐप शामिल थे। हालाँकि, केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव के हस्तक्षेप के बाद गूगल ने इन ऐप्स को रिस्टोर कर दिया।

दरअसल, गूगल ने अपने प्ले स्टोर का इस्तेमाल करने की पॉलिसी में बदलाव किए थे। उसने सर्विस चार्जेस को 11 प्रतिशत से बढ़ाकर 26 प्रतिशत कर दिया था। गूगल की इस बिलिंग पॉलिसी के खिलाफ कई स्टार्टअप कंपनियों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। 9 फरवरी 2024 को सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच ने एप्स को प्ले स्टोर से हटाने से बचाने वाली याचिका पर अंतरिम आदेश देने से मना कर दिया था।

इसके बाद गूगल ने सर्विस चार्ज ना देने वाली कंपनियों पर एक्शन के तहत उन्हें प्ले स्टोर से हटाने का फैसला लिया था। इससे पहले देश की एंटीट्रस्ट अथॉरिटी ने पुराना सिस्टम खत्म करने का आदेश दिया था। गूगल ने कहा था कि कई जानी-मानी फर्म और कंपनियाँ उसके बिलिंग नियमों का उल्लंघन कर रही हैं। कुछ कंपनियाँ बिक्री पर लागू होने वाले सर्विस चार्ज भी नहीं दे रही हैं। इसलिए उन्हें ऐप स्टोर से हटाने का निर्णय लिया गया है।

गूगल के अनुसार, 10 भारतीय कंपनियाँ इन-ऐप भुगतान के लिए शुल्क दिए बिना प्लेटफ़ॉर्म का लाभ उठा रही हैं। उसका कहना है, “इन डेवलपर्स को तैयारी के लिए तीन साल से अधिक का समय देने के बाद, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद के तीन सप्ताह भी शामिल हैं, हम यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठा रहे हैं कि हमारी नीतियाँ पूरे पारिस्थितिकी तंत्र में लगातार लागू हों।”

मामला सामने आने के बाद केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने डेवलपर्स से बात की। उनका कहना है कि भारतीय स्टार्टअप्स को जरूरी सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि इसको लेकर उन्होंने पहले ही गूगल और ऐप डेवलपर्स (जिन ऐप को डीलिस्ट कर दिया गया है) को कॉल कर दिया है। उन्होंने बताया कि इस तरह से ऐप हटाने की परमिशन नहीं दी जा सकती है।

इस तरह केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव के हस्तक्षेप के बाद गूगल ने हटाए गए सभी भारतीय ऐप्स को प्ले स्टोर पर बल कर दिया है। इस मामले पर आगे की चर्चा के लिए वैष्णव सोमवार (4 मार्च 2024) को गूगल के साथ बैठक करेंगे।