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नाबालिग मुस्लिम लड़के ने मार-मार के बुजुर्ग की तोड़ी हड्डी, प्रशासन ने उसके अब्बू के अवैध निर्माण पर चलाया बुलडोजर

गुजरात के कच्छ के भचाऊ में कुछ दिन पहले एक मुस्लिम लड़के ने खेत में बकरी चराने के विवाद पर दो बुजुर्ग किसानों को बुरी तरह पीटा था। मामले में केस दर्ज हुआ था, पर नाबालिग कुछ ही समय बाद जमानत लेकर छूट गया।

इस बीच उसके अब्बा द्वारा सरकारी जमीन पर किए गए अवैध अतिक्रमण की शिकायत पुलिस को मिली। जाँच होने पर कब्जे की बात सच निकली। प्रशासन एक्टिव हुआ। उन्होंने हाजी अमाद को नोटिस भेजा, उससे जगह खाली करने को कहा और जैसे ही जगह खाली हुई प्रशासन के अधिकारियों ने वहाँ पहुँच उस पर बुलडोजर चलवा दिया।

जानकारी के मुताबिक, बुजुर्गों को पीटे जाने की घटना का पता चलने पर बाद हिंदू संगठनों ने खूब विरोध किया था। आरोपित के खिलाफ कार्रवाई की माँग भी हुई थी। इसी बीच किसी ने शिकायत दी थी कि आरोपित के अब्बा हाजी अमाद ट्रेया के खिलाफ कई आरोप (हत्या, उत्पीड़न, हत्या की धमकी और हथियार संबंधी अपराध) भी दर्ज हैं। इसके अलावा यह भी पता चला था कि इन लोगों ने शिकारपुर गाँव में सरकारी जमीन पर कब्जा किया हुआ है।

इन्हीं शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए भचाऊ तालुका प्रशासन ने सरकारी भूमि पर से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की। टीडीओ ने मामले की जाँच की और जगह खाली करने को कहा। नोटिस आने के बाद आरोपित ने भी जगह खाली कर दी। अंतत: शुक्रवार (मार्च 1, 2024) को प्रशासनिक तंत्र के आला अधिकारी, पुलिस अधिकारी सब वहाँ पहुँचे और अतिक्रमण को हटाया गया।

बुजुर्गों पर नाबालिग ने क्यों किया था हमला?

15 फरवरी, 2024 को भचाऊ के शिकारपुर गाँव के रहने वाले 55 वर्षीय भवनभाई पटेल खेत में काम कर रहे थे, तभी नाबालिग लड़का उनके पास आया और डंडे से जान से मारने की धमकी देते हुए कहा, “जब हम बकरियाँ चराते हैं तो तुम क्यों चरा रहे हो बकरियाँ?”

हमले में बुजुर्ग व्यक्ति के हाथ और पैर गंभीर रूप से घायल हो गए और उसे लहूलुहान अवस्था में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल में पता चला था कि उसके दोनों हाथ और एक पैर की हड्डी टूट गई है।

उसी दिन, नाबालिग ने शिकारपुर के पास नारानसारी गाँव में भी एक 65 वर्षीय व्यक्ति पर भी हमला किया था। आरोपित बकरियों को चराने के लिए उसके खेत में घुस गया था, इसलिए जब किसान ने फसल खराब होने के डर से मना किया तो वह भड़क गया गया और उसके सिर पर वार करने की कोशिश की, लेकिन किसान ने अपनी बांहें आगे करके बचाव किया जिसकी वजह से उनके हाथ में चोट लग गई। फिर उसके खिलाफ एक और अपराध दर्ज किया गया। इसके बाद उसपर कार्रवाई हुई लेकिन जमानत मिलने के बाद वो छूट गया और उसके अब्बू द्वारा सरकारी जमीन पर करवाए गए अवैध निर्माण पर बुलडोजर चला।

 

रामेश्ववर कैफे ब्लास्ट 2022 के मेंगलुरु धमाके की तरह: ISIS-लश्कर लिंक में तब पकड़ाए थे आतंकी, अभी 4 को हिरासत में लेकर पूछताछ

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के व्हाइटफील्ड इलाके में स्थित रामेश्वरम कैफे के बम धमाके के तार साल 2022 के मेंगलुरु धमाके से जुड़े दिख रहे हैं। दोनों ही धमाकों में एक ही तरह के विस्फोटकों का इस्तेमाल किया गया है। दोनों धमाकों का पैटर्न भी एक ही है और दोनों ही धमाकों में बम स्थानीय तौर पर बनाए गए थे। बेंगलुरु पुलिस ने बताया है कि रामेश्वरम कैफे में हुआ धमाका आईईडी ब्लास्ट था, जिसमें 10 लोग घायल हो गए। इस धमाके के सिलसिले में 4 लोगों को हिरासत में ले लिया गया है और पूछताछ चल रही है।

कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने बताया है कि रामेश्वरम कैफे में हुआ विस्फोट साल 2022 में मेंगलुरु में हुए धमाकों के समान ही है। रामेश्वरम कैफे में ब्लास्ट के पीछे एक व्यक्ति की पहचान की जा रही है, जो कैफे में नाश्ते के लिए आया था, लेकिन बैग रखकर फरार हो गया था। उसी बैग में आईईडी था और उसमें थोड़ी ही देर में धमाका हो गया।

कर्नाटक के पुलिस अधिकारियों के हवाले से डीके शिवकुमार ने कहा कि रामेश्वरम कैफे ब्लास्ट में इस्तेमाल की गई सामग्री मेंगलुरु विस्फोट में इस्तेमाल की गई सामग्री से काफी मिलती-जुलती है। डीके शिवकुमार ने कहा, “टाइमर और अन्य चीजों जैसी सामग्रियों के माध्यम से एक लिंक है। मेंगलुरु और शिवमोग्गा की पुलिस यहाँ जाँच कर रही है। ये आईईडी स्थानीय तौर पर तैयार की गई थी।

इस बीच, बेंगलुरु के सेंक्ट्रल क्राइम ब्रांच ने 4 लोगों को हिरासत में लिया है और पूछताछ कर रही है। इन लोगों को धारवाड़, हुब्बली और बेंगलुरु से पकड़ा गया है। हालाँकि अभी तक आधिकारिक रूप से इन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया है। बेंगलुरु शहर के कमिश्नर बी दयानंद ने बताया कि रामेश्वरम कैफे ब्लास्ट में आईईडी का इस्तेमाल किया गया था, जिसमें 10 लोग घायल हो गए। इस धमाके की जाँच के लिए कई टीमों का गठन किया गया है। उन्होंने बताया कि सभी घायलों की हालत स्थिर है। फिलहाल कोई गिरफ्तारी नहीं की गई है।

बल्ब फिलामेंट डेटोनेटर मंगलुरु विस्फोट से जुड़े तार

बता दें कि नवंबर 2022 में ऑटो में मोहम्मद शारिक के बैग में रखा आईईडी बम फट गया था। इस घटना में मोहम्मद शारिक 40% जल गया और बाद में उसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। बाद में पता चला कि मोहम्मद शारिक पहले से ही एक वांछित अपराधी था और इससे पहले पुलिस ने उसके दो साथियों को सितंबर 2022 में शिवमोग्गा से गिरफ्तार किया था। रामेश्वरम कैफे और मंगलुरु दोनों विस्फोटों में आरोपितों ने डेटोनेटर के रूप में बल्ब फिलामेंट का इस्तेमाल किया गया। यही नहीं, दोनों धमाकों में डिजिटल टाइमर और बैटरियों का भी समान रूप से इस्तेमाल किया गया।

बस से आया था धमाका करने वाला, रवा-इडली खाकर चलता बन

डीके शिवकुमार ने कहा कि 28-30 साल का दिखने वाला आरोपित बस में सवार होकर रामेश्वरम कैफे पहुँचा। उसने रवा-इडली का ऑर्डर दिया, लेकिन थोड़ा सा ही खाकर निकल गया। वो अपना बैग सजावटी पेड़ के पास छोड़ गया। अब इस मामले में भारत की नोडल आतंकवाद विरोधी एजेंसी राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) भी जाँच शुरू कर चुकी है।

जालंधर में कश्मीरी और पंजाबी छात्रों के बीच पत्थरबाजी, लात-घूँसे: लड़की से छेड़खानी, पगड़ी गिराने का आरोप… मस्जिद घेर कर बैठे लोग, नहीं पढ़ने दी नमाज

पंजाब के जालंधर में एक इंस्टिट्यूट में पढ़ने वाले कश्मीरी और पंजाबी छात्रों के बीच गुरुवार (29 फरवरी 2024) को भिड़ंत हो गई। इस झगड़े में दोनों तरफ से जमकर लात-घूँसे चले। एक पक्ष के अनुसार विवाद की वजह कश्मीर की एक छात्रा से छेड़खानी होना बताया जा रहा है। इसके उलट सिख छात्रों ने कश्मीरियों पर बेवजह मारपीट के बाद अपनी पगड़ी तक उतारने का आरोप लगाया है। हालात को काबू में करने के लिए पुलिस बुलानी पड़ी।

इस मामले में अब तक 14 छात्रों को निलंबित किया जा चुका है। इंस्टिट्यूट प्रशासन घटना की जाँच करा रहा है। विवाद से नाराज एक पक्ष के समर्थकों ने पास की एक मस्जिद में मुस्लिमों को नमाज़ भी नहीं अदा करने दी।

घटना जालंधर के सदर थानाक्षेत्र की है। यहाँ के शाहपुर इलाके में सीटी इंस्टीट्यूट का परिसर है। जम्मू कश्मीर स्टूडेंट एसोशिएशन ने आरोप लगाया है कि विपक्षी छात्रों का गुट एक कश्मीरी छात्रा से अभद्रता कर रहा था। इस अभद्रता की शिकायत इंस्टिट्यूट प्रशासन से की गई लेकिन उसे अनदेखा कर दिया गया। यह विवाद थोड़े समय बाद भड़क गया और मारपीट शुरू हो गई। आरोप है कि इस दौरान कश्मीरी छात्रों को पीटा गया। जम्मू एंड कश्मीर स्टूडेंट एसोशिएशन ने पुलिस से इस मामले में हस्तक्षेप और कश्मीरी छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की गुजारिश की है।

फिलहाल अभी तक दोनों तरफ से FIR दर्ज नहीं हुई है। इंस्टिट्यूट प्रशासन की आंतरिक कमिटी इस मामले की जाँच में जुटी है। मारपीट का एक वीडियो भी जम्मू कश्मीर स्टूडेंट एसोशिएशन ने अपने X हैंडल पर शेयर किया है। आरोप है कि दोनों तरफ से एक-दूसरे पर पत्थरबाजी की गई और कुर्सियाँ फेंकी गईं। इस वीडियो के माध्यम से चिन्हित किए गए 14 छात्रों को फिलहाल सस्पेंड कर दिया गया है।

घटनास्थल पर लगे CCTV फुटेज आदि के माध्यम से विवाद के असल कारणों की पड़ताल की जा रही है।

पुलिस ने भी इस मामले में दोनों पक्षों की काउंसलिंग करने और इंस्टिट्यूट प्रशासन द्वारा कार्रवाई किए जाने की बात कही है।

जम्मू एंड कश्मीर स्टूडेंट असोशिएशन के दावों के उलट पंजाबी छात्रों ने कश्मीरी छात्रों पर बेवजह खुद पर हमला किए जाने का आरोप लगाया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पंजाबी छात्रों का कहना है कि मारपीट के दौरान उनकी पगड़ियाँ तक उतारी गईं।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार पंजाबी छात्रों के साथ हुई मारपीट का असर इंस्टिट्यूट के आसपास मौजूद गाँवों तक पहुँच गया। घटना के एक दिन बाद शुक्रवार को इंस्टिट्यूट के पास फतेहपुर खेड़ा गाँव में बनी मस्जिद के आगे 50 लोग लाठियाँ लेकर बैठ गए थे। इसी मस्जिद में CT इंस्टिट्यूट के छात्र नमाज़ पढ़ने जाया करते थे। हालात तनावपूर्ण होने की वजह से वो शुक्रवार की नमाज़ नहीं पढ़ पाए।

अब इधर-ऊधर नहीं होऊँगा: औरंगाबाद में मंच से नीतीश कुमार ने पीएम मोदी से किया वादा, कहा- हम मिलकर बिहार का विकास करेंगे

झारखंड और बंगाल के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार (2 मार्च 2024) को बिहार के औरंगाबाद पहुँचे। वहाँं उन्होंने कई परियोजनाओं की घोषणा की। इस दौरान बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पीएम मोदी की आगवानी की और मंच से कहा कि अब वे NDA गठबंधन को छोड़कर कहीं नहीं जाएँगे। इस दौरान पीएम मोदी भी ठहाके लगाकर हँसते हुए नजर आए।

औरंगाबाद में पीएम की उपस्थिति में जनसभा को संबोधित करते हुए नीतीश कुमार ने कहा, “आज मैं अभिनंदन करता हूँ कि आप फिर पधारे हैं यहाँ। आज हमलोगों के लिए बड़ी खुशी की बात है। आप पहले आए थे, लेकिन इधर हम गायब हो गए थे। अब हम फिर आपके साथ हैं। अब आपको आश्वस्त करते हैं कि हम इधर-उधर होने वाले नहीं हैं। हम रहेंगे आप ही के साथ।”

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा, “अब जरा तेजी से यहाँ वाला काम हो जाए। हम लोग तो 2005 से एक साथ ही हैं। हम लोग मिलकर लगातार कितना काम किए हैं। हम लोग आपस में मिलजुल कर सारा काम किए हैं। हम चाहते हैं कि सबकी आर्थिक स्थित बेहतर हो जाए। मुझे पूरा भरोसा है कि प्रधानमंत्री जी बिहार आते रहेंगे।”

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि इस बार के चुनाव में उन्हें पूरा भरोसा है कि पीएम मोदी 400 सीट जीतेंगे। अन्य विपक्षी पार्टियों पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा, “बाकी लोग जो इधर-उधर कर रहा है, उनका कुछ नहीं होने वाला है।” पीएम की ओर देखते हुए कहा नीतीश कुमार ने कहा, “बिहार में जो भी विकास होता रहेगा, उसका क्रेडिट हम आपको देते रहेंगे।”

इस दौरान नीतीश कुमार भी मंच से हँसते हुए नजर आए। इसके अलावा मंच पर बैठे अन्य लोगों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी ठहाके लगाते रहे। दूसरी तरफ सभा में मौजूद सभी लोग जोर-जोर से मोदी के नारे भी लगाने लगे। इसके बाद नीतीश कुमार ने कहा, “हमें एक साथ जुट कर काम करना है और एक दूसरे से विवाद नहीं करना है।”

इस दौरान दोनों नेताओं के बीच एक गजब की कमेस्ट्री दिखी। पीएम मोदी जैसे ही मंच पर पहुँचे तो एक बड़ा-सा माला लेकर बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा, सम्राट चौधरी और गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय लेकर आए और पीएम मोदी को पहनाने लगे। उस दौरान पीएम मोदी ने सीएम नीतीश का हाथ पकड़ा और उन्हें माला के अंदर खींच लिया। पीएम ने जब ऐसा किया तो नीतीश कुमार मुस्कुरा रहे थे।

बता दें कि 10 मई 2009 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले लुधियाना में NDA की रैली थी। इस रैली में लालकृष्ण आडवाणी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने की योजना थी। इसलिए NDA शासित राज्यों के सभी मुख्यमंत्रियों को बुलाया गया था। इस वजह से बतौर गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी वहाँ पहुँचे थे।

उस दौरान नीतीश कुमार ने मंच पर जैसे ही कदम रखा तो दूसरी तरफ से नरेंद्र मोदी आए और नीतीश कुमार का हाथ पकड़ कर ऊपर उठा दिया था। अखबारों में जब यह फोटो छपी तो नीतीश कुमार नाराज हो गए। इतना ही नहीं, लुधियाना से पटना लौटने के बाद नीतीश कुमार ने कहा था कि मोदी ने उनकी इच्छा के खिलाफ उनका हाथ उठाया था। बाद में दोनों अलग अलग हो गए थे।

साल 2009 में लुधियाना की रैली में गुजरात के तत्कालीन सीएम मोदी और बिहार के नीतीश कुमार (साभार: नवभारत टाइम्स)

बिहार में NDA की सरकार बनने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह पहला बिहार दौरा है। इस दौरा में उन्होंने बिहार को 34,000 करोड़ रुपए की परियोजनाओं की सौगात दी। इन में 21,400 करोड़ रुपए औरंगाबाद के लिए और 13,400 करोड़ रुपए बेगूसराय में विकास के लिए होगा। इसके अलावा पीएम मोदी कई परियोजनाओं का शिलान्यास किया।

बिहार के जंगलराज को याद करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “एक वो दौर था, जब बिहार के लोग अपने ही घरों से निकलने में डरते थे। एक ये दौर है, जब बिहार में पर्यटन की संभावनाएँ विकसित हो रही हैं। बिहार को वंदेभारत और अमृत भारत जैसी आधुनिक ट्रेनें मिलीं। अमृत स्टेशनों का विकास किया जा रहा है।”

इस पीएम मोदी ने विपक्ष पर जमकर हमला बोला और कहा बिहार में एनडीए की शक्ति बढ़ने के बाद परिवाद की राजनीति हाशिये पर जाने लगी है। परिवारवादी राजनीति की एक और विडंबना है कि माँ-बाप से विरासत में पार्टी और कुर्सी तो मिल जाती है, लेकिन माँ-बाप की सरकारों के काम-काज का एक बार भी जिक्र करने की हिम्मत नहीं होती है। यह है परिवादी पार्टी की हालत है।

पीएम मोदी ने कहा, “मैंने तो सुना है कि इनकी पार्टी (RJD) के बड़े-बड़े नेता भी इस बार बिहार में लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं। सब भाग रहे हैं। वे राज्यसभा की सीटें खोज रहे हैं। जनता साथ देने को तैयार नहीं है। यह है आपके साथ और आपके विश्वास की ताकत। मोदी इसी विश्वास के लिए बिहार की जनता को धन्यवाद करने आया है।” 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “बिहार का विकास- ये मोदी की गारंटी है। बिहार में शांति और कानून व्यवस्था का राज- ये मोदी की गारंटी है। बिहार में बहन-बेटियों को अधिकार- ये मोदी की गारंटी है। तीसरे टर्म में हमारी सरकार इन्हीं गारंटियों को पूरा करने और विकसित बिहार बनाने के लिए काम करेगी।”

‘गजवा-ए-हिंद (भारत पर इस्लामी कब्जा)’ वाला फतवा सही, कानूनी कार्रवाई हुई तो कोर्ट जाएगा दारुल उलूम देवबंद: भारत में ऑफिस, भारत पर ही आक्रमण?

सहारनपुर के देवबंद स्थित दारुल उलूम ने ‘गजवा-ए-हिंद’ को सही ठहराने वाले फतवे को लेकर बड़ा फैसला लिया है। दारुल उलूम ने कहा है कि ये फतवा सही है और अगर इसके खिलाफ कोई कार्रवाई की जाएगी, तो हम कोर्ट में जाएँगे। सहारनपुर में दारुल उलूम की सबसे बड़ी कमेटी मजलिस-ए-शूरा की बैठक हुई, जिसमें शूरा के सदस्यों ने गजवा-ए-हिंद पर दिए फतवे को सही ठहराया है। शूरा ने कहा है कि दारुल उलूम की वेबसाइट नहीं बंद की जाएगी। पहले की तरह की फतवे ऑलनाइन माध्यम से भी जारी किए जाते रहेंगे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दारुल उलूम देवबंद की वेबसाइट पर ‘गजवा ए हिंद’ को सही बताया गया है। इस पर राष्ट्रीय बाल अधिकारि संरक्षण आयोग ने कड़ाई बरतते हुए डीएम को कार्रवाई के निर्देश दिए थे, साथ ही एफआईआर दर्ज करने के लिए भी कहा था। अब कई मुद्दों को लेकर दारुल उलूम के गेस्ट हाउस में बैठक हुई, जिसमें फतवे पर टिके रहने का फैसला लिया गया। दारुल उलूम के मोहतमिम मुफ्ती अबुल कासिम नौमानी ने कहा है कि गजवा-ए-हिंद पर दिए फतवे के मामले में भविष्य में कोई भी कार्रवाई हुई तो उसका कानूनी रूप से जवाब दिया जाएगा।

एनसीपीसीआर ने जारी किया था नोटिस

गजवा ए हिंद पर दिए गए फतवे के खिलाफ अब राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने स्वत: संज्ञान लेते हुए सहारनपुर पुलिस के अधिकारियों को कार्रवाई के लिए नोटिस जारी किया था। एनसीपीसीआर ने नोटिस में कहा कि ये मदरसा भारत के बच्चों को देशविरोधी तालीम दे रहा है। इससे इस्लामी कट्टरपंथ को बढ़ावा मिलेगा। बच्चों में देश के प्रति नफरत पैदा होगी। आयोग ने कहा कि बच्चों को अनावश्यक रूप से परेशान करना या शारीरिक कष्ट देना तो किशोर न्याय अधिनियम की धारा 75 का उल्लंघन है।

दरअसल, दारुल उलूम की साइट (darulifta-deoband.com) पर सवाल किया गया था कि क्या हदीस में भारत पर आक्रमण का जिक्र है जो उपमहाद्वीप में होगा? और जो भी इस जंग में शहीद होगा, वो महान शहीद कहलाएगा। और जो गाजी होगा वो जन्नती होगा। इसी सवाल के जवाब में दारुल उलूम की ओर से फतवा जारी किया गया। फतवे में ‘सुन्न अल नसा (Sunan-al-Nasa) ‘ नाम की किताब का जिक्र करते हुए कहा गया है कि इस किताब में गजवा-ए-हिंद को लेकर पूरा का पूरा चैप्टर है। इसमें हजरत अबू हुरैरा की हदीस का जिक्र करते हुए कहा गया है- “अल्लाह के संदेशवाहक ने भारत पर हमले का वादा किया था। उन्होंने कहा था कि अगर मैं जिंदा रहा तो इसके लिए मैं अपनी खुद की और अपनी संपत्ति की कुर्बानी दे दूँगा। मैं सबसे महान शहीद बनूँगा।”

फतवा 9 साल पुराना, डीएम को भेजा जवाब

इस मामले में अब दारुल उलूम ने साफ कर दिया है कि वो फतवे को नहीं हटाएँगे और न ही वेबसाइट को बंद करेंगे। इस मामले में दारुल उलूम ने सहारनपुर के डीएम को भी अपना जवाब भेजा है। दारुल उलूम ने कहा है कि ये फतवा नौ साल पुराना है। ये फतवा साल 2015 में दिया गया था। मजलिस-ए-शूरा के सदस्यों ने डीएम को भेजे गए जवाब पर सहमति जताई है।

इस मामले में सहारनपुर के डीएम डॉ. दिनेश चंद्र ने बताया कि फतवा प्रकरण में जिला प्रशासन ने अपनी प्राथमिक जाँच रिपोर्ट राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग को भेज दी है। आयोग के निर्देशों के मुताबिक आगे की कार्रवाई की जाएगी।

‘अगर ब्रिटेन में हिंसा की तो VISA कैंसिल कर देंगे’: PM ऋषि सुनक की कट्टरपंथ पर दो टूक, बोले- इनका मकसद हमें खत्म करना

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने हाल में ब्रिटेन में लोकतंत्र को बचाने के लिए कट्टरपंथ के खिलाफ आवाज बुलंद की। उन्होंने कहा कि आज कट्टरपंथी ताकतें देश को तोड़ने और बहु-धार्मिक पहचान को कमजोर करने में जुटी हुई है। देश को इनसे लड़ने की जरूरत है

उन्होंने अपनी बात रोडशेल उपचुनाव के नतीजे आने के बाद 10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर भाषण देने के वक्त कही। उन्होंने साफ तौर पर चेतावनी देते हुए कहा कि अगर किसी इस्लामी कट्टरपंथी या धुर दक्षिणपंथी ने ब्रिटेन में नफरत फैलाने का प्रयास किया तो वो उसका वीजा कैंसिल करने से पहले हिचकेंगे नहीं।

उन्होंने हमास-इजरायल के बीच चल रहे युद्ध की वजह से जो देश में प्रदर्शन हो रहे हैं उसपर बात की। उन्होंने कहा, “हमारी सड़कों पर विरोध प्रदर्शन के रूप में जो शुरू हुआ, वह डराने-धमकाने, धमकियों और हिंसा के नियोजित कृत्यों में बदल गया है। यहूदी बच्चे स्कूल की वर्दी पहनने से डरते हैं कि कहीं इससे उनकी पहचान उजागर न हो जाए। मुस्लिम महिलाओं को आतंकी संगठन के करनी के ताने सुनने पड़ते हैं जबकि उनका हमले से कोई लेना-देना नहीं है। ये हमारे लोकतंत्र पर खतरा है।”

उन्होंने कहा, “इस्लामी कट्टरपंथ और धुर दक्षिणपंथ लोग जहर फैलाने का काम कर रहे हैं। इनका मकसद एक इंसान के तौर पर हमारे आत्मविश्वास और भविष्य को खत्म कर देना है। ये चाहते हैं कि हम लोग एक दूसरे पर शक करें। खुद पर शक करें। हमारी उपलब्धियों पर शक करें।”

उन्होंने डर जताया कि वो लोग जो ब्रिटेन में दुनिया का सबसे सफल बहु-जातीय, बहु-आस्था वाले लोकतंत्र के निर्माण का प्रयास कर रहे हैं, उसे कट्टरपंथी ताकतें कमजोर करने का प्रयास कर रही हैं। उन्होंने कहा, “कुछ ऐसी ताकतें हैं जो हमें तोड़ने की कोशिश कर रही हैं… लेकिन अब वक्त आ गया है कि हम सब इन बाँटने वाली ताकतों के साथ खड़े हों और इस जहर को मात दें।”

पीएम सुनक ने अपनी स्पीच में कहा कि जो लोग वीजा पर हैं अगर वो ब्रिटेन में नफरत फैलाने का प्रयास करते हैं तो उनका वीजा रद्द किया जाएगा। उन्होंने अपील की कि ब्रिटेन में होने वाले शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर कट्टरपंथियों द्वारा न कब्जा किया जाए।

उन्होंने कहा, “जो आप्रवासी यहाँ आए हैं उन्होंने संपूर्ण रूप से अपना योगदान दिया है। उन्होंने हमारे देश की कहानी में एक नया अध्याय लिखने में मदद की है। उन्होंने ऐसा अपनी पहचान छोड़े बिना किया है।” वह आगे बोले, “मुझे ब्रिटेन पर बहुत गर्व है। मैं यहाँ का पहला अश्वेत प्रधानमंत्री हूँ… जो सबको साथ लेकर चलने वाली सरकार का नेतृत्व कर रहा है। इससे पता चलता है कि आपकी सफलता इससे तय नहीं होगी कि आपकी जाति, आपका रंग , आपका धर्म क्या है? या आप कहाँ पर पैदा हुए हैं।”

केरल के जिस यूनिवर्सिटी में छात्र सिद्धार्थ ने किया सुसाइड, उसके VC को राज्यपाल ने हटाया: 19 छात्र भी अब किसी संस्थान में नहीं पढ़ पाएँगे

केरल के वायनाड में कुछ दिन पहले वेटनरी कॉलेज के 20 वर्षीय छात्र जे एस सिद्धार्थ ने आत्महत्या कर ली थी। इस मामले में वामपंथी छात्र नेताओं पर मृतक को नग्न घुमाने, मारने-पीटने, बेइज्जत करने और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप लगे। यूनिवर्सिटी ने 19 छात्रों को निलंबित कर दिया है। वहीं, प्रदेश के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने इसके वाइस चांसलर को भी निलंबित कर दिया।

राज्यपाल मोहम्मद आरिफ खान ने शनिवार (2 मार्च 2024) को केरल पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (KVASU) के कुलपति डॉक्टर एमआर ससींद्रनाथ को निलंबित कर दिया। इसके साथ ही राज्यपाल खान ने घटना की न्यायिक जाँच के भी आदेश दिए हैं। न्यायिक जाँच के संबंध में केरल उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार से संपर्क किया जाएगा।

स्नातक द्वितीय वर्ष के छात्र जे एस सिद्धार्थ को इसलिए प्रताड़ित किया गया था, क्योंकि उसने वेलेंटाइन डे (14 फरवरी 2024) को कॉलेज में सीनियर छात्राओं के साथ डांस किया था। इस मामले में गिरफ्तार किए गए 11 लोगों में स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) के चार नेता शामिल हैं। वहीं, कुल 19 छात्रों को भारत के किसी भी संस्थान में पढ़ाई से रोक दिया गया है।

राजभवन से जारी निलंबन आदेश में कहा गया है कि जिन घटनाक्रमों की परिणति सिद्धार्थ की मृत्यु के रूप में हुई, उनसे संकेत मिलता है कि विश्वविद्यालय के मामलों में वीसी द्वारा ‘वांछित ईमानदारी, गंभीरता और तत्परता’ के साथ भाग नहीं लिया जा रहा है। यह विश्वविद्यालय के अधिनियमों/क़ानूनों और अन्य प्रासंगिक नियम में अनिवार्य है।

निलंबन आदेश में आगे कहा गया है, “इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना की पृष्ठभूमि में वीसी का अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों के प्रति उदासीन, लापरवाह और संवेदनहीन रवैया उनकी रिपोर्ट से पता चलता है। इस अवधि के दौरान वीसी की ओर से कर्तव्य में घोर लापरवाही की गई, जिसके कारण यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई।”

राज्यपाल खान ने कहा, “केरल पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय अधिनियम, 2010 की धारा 9 (9) को लागू करने के लिए एक उपयुक्त मामला होने के नाते, एक ऐसे व्यक्ति द्वारा जाँच का आदेश दिया जाता है, जो उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश है या रह चुका है। इस संबंध में उचित समय पर उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार से अनुरोध किया जाएगा।”

वीसी को निलंबित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि मौजूदा वीसी के नेतृत्व में परिसर में सौहार्द्रपूर्ण माहौल के प्रति सम्मान की कमी है और विश्वविद्यालय के मामलों के प्रति उदासीनता ‘कानून के शासन के संदर्भ में समझ से परे’ हो गई है। यह एक अशुभ संकेत है। यह राज्य में विश्वविद्यालय और उच्च शिक्षा क्षेत्र के मामलों के लिए अच्छा संकेत नहीं है।

सिद्धार्थ के आत्महत्या के मामले में शुक्रवार (1 मार्च 2024) को पुलिस ने चार लोगों को पकड़ा है। इन चारों में से मलप्पुरम का रहने वाला अमीन अली अकबर, SFI का कॉलेज यूनियन प्रेसीडेंट के अरुण और यूनिट सेक्रेटरी अमल अहसान ने पुलिस के सामने खुद आत्मसमर्पण कर दिया था। वहीं, पुलिस टीम ने यूनियन के सदस्य आसिफ खान को उसके घर से दबोचा था।

दरअसल, 18 जनवरी 2024 को वायनाड के एक कॉलेज में पशु विज्ञान की पढ़ाई करने वाले छात्र जे एस सिद्धार्थ ने आत्महत्या कर ली थी। सिद्धार्थ को कॉलेज हॉस्टल के एक टॉयलेट में लटकता पाया गया था। इसके बाद सिद्धार्थ की पोस्टमॉर्टेम रिपोर्ट में कई खुलासे हुए। रिपोर्ट में बताया गया कि मौत से पहले सिद्धार्थ को बुरी तरीके से मारा पीटा गया था। उसका पेट खाली था और शरीर पर घाव थे।

इसके बाद पुलिस ने इस मामले में अप्राकृतिक मौत का मामला दर्ज किया। इस मामले में 12 छात्रों को कॉलेज से निलंबित भी कर दिया गया। ये सभी अब भारत के किसी भी शिक्षण संस्थान में नहीं पढ़ पाएँगे। निलंबित किए जाने वालों में SFI के वामपंथी छात्र नेता भी हैं। सिद्धार्थ के पिता जयप्रकाश ने बताया है कि उनके बेटे को वामपंथी छात्रों ने काफी प्रताड़ित किया।

इस बीच मृतक छात्र सिद्धार्थ के पिता जयप्रकाश ने कहा था कि कैंपस के डीन डॉ नारायणन ने इस मामले में लीपापोती की है और उन्हें पूरे मामले की जानकारी थी। ऐसे में उन्हें भी आरोपित बनाया जाए। सिद्धार्थ के पिता ने कहा था, “मुझे यही लग रहा था कि सिद्धार्थ की मौत आत्महत्या का मामला है और मैं इसके पीछे के कारण के बारे में सोच रहा था।”

उन्होंने आगे कहा था, “एक छात्र ने मुझे बताया कि एसएफआई नेता ने उन्हें सिद्धार्थ की मौत की असलियत बताने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी है। यहाँ तक कि परिसर में शिक्षक और प्रशासनिक प्रमुख भी इन एसएफआई गुंडों की धुन पर नाचने वाली कठपुतली मात्र हैं। ऐसे कई अन्य छात्र हैं जिन्हें इसी तरह से प्रताड़ित किया गया।”

केरल यूनिवर्सिटी के यूथ फेस्टिवल का नाम इंतिफादा (खूनी विद्रोह): लोग पूछ रहे – पैसे भारत सरकार से… सपने हमास के इस्लामी आतंकियों वाले

केरल की सबसे बड़ी यूनिवर्सिटी में यूथ फेस्टिवल का आयोजन किया जा रहा है। इसका नाम रखा गया है ‘इंतिफादा’। केरल यूनिवर्सिटी में 7 से 11 मार्च तक होने वाले यूथ फेस्टिवल को ‘आक्रमण के खिलाफ कला का विरोध’ टैगलाइन के साथ आयोजित किया जा रहा है, जिसका सीधा मतलब इजरायल-हमास युद्ध में हमास के समर्थन से है। अब इस ‘इंतिफादा’ के खिलाफ एक स्टूडेंट ने केरल एवं लक्षद्वीप हाई कोर्ट में याचिका लगाई है और इसका नाम बदलने की माँग की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, केरल यूनिवर्सिटी के पहले साल के छात्र ने हाई कोर्ट में जो याचिका दाखिल की है, उसमें कोर्ट से अपील की है कि इस नाम को बदलने का आदेश जारी किया जाए, क्योंकि ‘इंतिफादा’ न सिर्फ भ्रमित करने वाला शब्द है, बल्कि ये मौजूदा इजरायल-हमास युद्ध को ध्यान में रखते हुए बाँटने वाला शब्द भी है।

छात्र का दावा है कि ‘इंतिफादा’ शब्द न सिर्फ हमास जैसे आतंकी संगठन से जुड़ा है, बल्कि केरल यूनिवर्सिटी के यूथ फेस्टिवल के लोगो पर इजरायत के नक्शे पर फिलिस्तीन को भी दिखाता है। छात्र ने कहा है कि यूथ फेस्टिवल का लोगो कला और सांस्कृतिक कार्यक्रम के हिसाब से सही नहीं है। इसकी वजह से छात्रों में भी अलगाव पैदा हो सकता है। छात्र ने कहा है कि उसने राज्यपाल और यूनिवर्सिटी के वीसी को भी पत्र लिखा है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। इस मामले में अब हाई कोर्ट ने केरल यूनिवर्सिटी को नोटिस जारी कर जवाब माँगा है।

वरिष्ठ पत्रकार राजीव सचान ने इसे बदमाशी और बेशर्मी की हद पार करने वाला बताया है। उन्होंने अपने एक्स हैंडल पर लिखा, “बदमाशी और बेशर्मी की हद! भारत सरकार से अनुदान पाने वाली केरल युनिवर्सिटी ने अपने यूथ फेस्टिवल का नाम इंतिफादा यानी हिंसक प्रतिरोध रखा है, जो हमास का आतंक फैलाने का तरीका ही है l गनीमत है कि यूथ फेस्टिवल का नाम जिहाद या गजवा हिंद नहीं रखा!”

क्या है इंतिफादा?

इंतिफादा एक अरबी शब्द है, जिसका मतलब होता है बगावत या विद्रोह। खास बात ये है कि इंतिफादा शब्द का सबसे ज्यादा इस्तेमाल ‘तख्तापलट’ जैसे कामों में मिडिल-ईस्ट से लेकर उत्तरी-पश्चिमी अफ्रीकन देशों में हुआ है और पिछले कुछ दशकों से इजरायल-फिलिस्तीन युद्ध में इसे ‘इजरायल’ के खिलाफ इस्तेमाल किया जाता है। हर बार इजरायल के खिलाफ वेस्ट बैंक या फिर गाजा पट्टी में कुछ होता है, तो उसे ‘इंतिफादा’ करके प्रचारित किया जाता है। एक तरफ इसे प्रतिरोध बताया जाता है, तो दूसरी तरफ कायराना हमले भी इजरायल पर किए जाते हैं। इस समय हमास-इजरायल के बीच चल रहे युद्ध को पाँचवाँ इंतिफादा भी कहा जा रहा है।

इजरायल-फिलिस्तीन के संदर्भ में इंतिफादा

इजरायल-फिलिस्तीन संकट के संदर्भ में इसे धर्मयुद्ध से भी जोड़ सकते हैं। एक तरफ यहूदी इजरायल का विरोध कर रहे मुस्लिम फिलिस्तीनी और अरबी हैं, तो दूसरी तरफ उन्हें समर्थन दे रहे मुस्लिम देश। इतजराय-फिलिस्तीन के बीच तमाम लड़ाई लड़कर हारने के बाद फिलिस्तीनियों द्वारा दिसंबर 1987 में पहला इंतिफादा शुरू किया गया, जो साल 1993 तक चला। दूसरा इंतिफादा सितंबर 2000 से साल 2005 तक चला। इसे अल-अक्सा इंतिफादा भी कहा जाता है। तीसरी बार साल 2014 में जेरूशलम में बड़ी संख्या में विरोध प्रदर्शनों और हिंसा को भी इंतिफादा कहा गया गया।

वहीं, साल 2015-2016 को चौथा इंतिफादा, जेरुशलम इंतिफादा, अल कुद्स इंतिफादा या चाकू इंतिफादा भी कहा जाता है। और पिछले साल अक्टूबर में अल-अक्सा फ्लड नाम से हमास ने इजरायल के अंदर जो हमला बोला, उसे कई ‘मुस्लिम’ विद्वान पाँचवाँ इंतिफादा भी कह रहे हैं। वैसे, तो इसे आम तौर पर अहिंसक विरोध प्रदर्शन से जोड़ा जाता है, लेकिन इजरायल-फिलिस्तीन के संदर्भ में ये हमेशा हिंसक ही रहा है।

‘SC-ST एक्ट में कितने फर्जी मामले दर्ज… जाँच हो’ : हिरोइन के भाषण पर FIR, कहा था- झूठे केस करना धंधा बन गया

मराठी अभिनेत्री केतकी चितले के खिलाफ एफआईआर हुई है। उनपर आरोप है कि उन्होंने अपने भाषण से एक जाति वर्ग के लोगों की भावनाओं को ठेस पहुँचाया। इस भाषण में उन्होंने एससी/एसटी एक्ट में दर्ज झूठे मामलों की जाँच की माँग की थी। उनके खिलाफ महाराष्ट्र के बीड जिले के परली शहर में प्रेमनाथ जगतकर नाम के शख्स की शिकायत पर पुलिस ने उनके खिलाफ एफआईआर की।

जानकारी के अनुसार, अभिनेत्री केतकी चितले ने इसी साल 25 फरवरी को परली में आयोजित ‘ब्राह्मण एक्य परिषद’ सम्मेलन में हिस्सा लिया था। इस दौरान उन्होंने ये कह दिया कि एससी/एसटी अधिनियम के तहत झूठे मामले दर्ज करना एक रैकेट बन गया है। सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी प्राप्त की जानी चाहिए कि अत्याचार अधिनियम के तहत कितने मामले दर्ज किए गए हैं और उनमे से कितने झूठे हैं।

उनका यह भाषण बाद में ऑनलाइन एक स्थानीय निवासी प्रेमनाथ जगतकर ने सुना और परली शहर पुलिस थाने में जाकर शिकायत दर्ज करवाई। इसके बाद इस मामले में एफआईआर दर्ज हुई।

कार्यक्रम के दौरान, उन्होंने दावा किया कि एससी/एसटी अधिनियम के तहत झूठे मामले दर्ज करना एक रैकेट बन गया है और पिछले 5 वर्षों में दायर ऐसे सभी मामलों की जाँच की माँग की।

मराठी अभिनेत्री ने टिप्पणी की, “अत्याचार करके पैसा कमाने एक धंधा बन गया है। इसका पूरा रैकेट है। कई झूठे केस दायर होते हैं।” उन्होंने इस दौरान मनोज जरांगे पाटिल के नेतृत्व वाले मराठा आरक्षण आंदोलन की भी आलोचना की और कथित तौर पर इसे ‘मूर्खों का मेला’ करार दिया।

अब खबर है कि शुक्रवार (1 मार्च 2024) को केतकी चितले के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 295ए (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना) और 502(2) (वर्गों के बीच दुश्मनी) के तहत प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज की गई।

बता दें कि इससे पहले केतकी पर आरोप लगा था कि उन्होंने एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इसके बाद 2022 में उन्हें एक महीने से अधिक समय सलाखों के पीछे रहना पड़ा था। तब, उन्हें उस साल 15 मई को एक फेसबुक पोस्ट के लिए गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने कथित तौर पर पवार पर लिखी एक कविता साझा की थी, जिसमें उन्हें ब्राह्मणों से नफरत करने वाला व्यक्ति बताया गया था। उस समय, उनके खिलाफ मुंबई और उसके उपनगरों के कई पुलिस स्टेशनों में मामले दर्ज किए गए थे।

PFI के आतंकी मोहम्मद गौस नियाजी को NIA ने दक्षिण अफ्रीका से दबोचा, RSS नेता रूद्रेश की हत्या का है आरोपित: 5 लाख रुपए का ईनाम था घोषित

प्रतिबंधित इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के आतंकी मोहम्मद गौस नियाजी को दक्षिण अफ्रीका में पकड़ा गया है। अब राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) उसे प्रत्यर्पित करके भारत लाया है। नियाजी पर कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के एक नेता की हत्या करने का आरोप है। उस पर NIA ने पाँच लाख रुपए का ईनाम भी घोषित कर रखा है।

मोहम्मद गौस नियाज़ी PFI का बड़ा चेहरा था। वह साल 2016 में बेंगलुरु में हुई RSS के 35 वर्षीय नेता रुद्रेश की हत्या में शामिल था। इस मामले में जाँच एजेंसियों ने उसे आरोपित बनाया है। हत्या करने के बाद वह फरार हो गया था और भारत से निकलकर अलग-अलग देशों में अपना ठिकाना बनाया हुआ था। इस मामले की जाँच NIA कर रही है।

गुजरात पुलिस की एंटी टेररिस्ट स्क्वॉयड (ATS) ने सबसे पहले मोहम्मद गौस को साउथ अफ्रीका में ट्रैक किया। इसके बाद उसने इसकी जानकारी सेंट्रल ऐजेंसी NIA को दी। इसके बाद NIA ने दक्षिण अफ्रीका में संपर्क किया, जिसके बाद वहाँ की एजेंसी ने उसे पकड़ लिया। अब उसे प्रत्यर्पण करके भारत लाया गया है और फिलहाल उसे मुंबई ले जाया गया है। 

बता दें कि साल 2016 में बेंगलुरु के शिवाजी नगर क्षेत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेता रूद्रेश की हत्या कर दी गई थी। जिस समय रूद्रेश की हत्या की गई, उस समय वे बेंगलुरु में संघ के एक कार्यक्रम में हिस्सा लेकर लौट रहे थे। उस दौरान पहले से ही घात लगाकर बैठे आतंकियों ने उन पर हमला कर दिया था। इस हमले में उनकी मौत हो गई थी।

संघ नेता की धारदार हथियार से काटकर हत्या के बाद स्वयंसेवक सड़कों पर उतर गए थे। घटना के बाद कर्नाटक भाजपा के तत्कालीन अध्यक्ष बीएस येदियुरप्पा ने रूद्रेश के परिजनों से मुलाकात की थी। उन्होंने इस मामले की जाँच आखिर तक कराने का आश्वासन दिया था। इस हत्याकांड के 6 साल बाद NIA ने आतंकी गौस नियाजी को भारत लाने में कामयाबी हासिल की है।

इस हत्या कांड को लेकर साल 2019 में NIA ने कहा था कि रूद्रेश की हत्या का एक अन्य आरोपित असीम शरीफ ने लोगों को हिंदू संगठन में शामिल होने से रोकने के लिए हत्या की साजिश रची थी। उसने आरएसएस के दो और कार्यकर्ताओं को मारने योजना बनाई थी। इस हत्या में असीम शरीफ के अलावा मोहम्मद गौस नियाजी सहित पीएफआई के चार अन्य नेता भी शामिल थे।

असीम शरीफ पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया का बंगलुरु अध्यक्ष था। इस मामले में असीम शरीप पर पहले ही हत्या में संलिप्तता को लेकर आरोप तय हो चुके हैं। शरीफ ने NIA की कार्रवाई को 2 जनवरी 2018 को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। हालाँकि, कोर्ट ने उसकी याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद उस पर अभियोजन का रास्ता साफ हो गया।

इतना ही नहीं, साल 2020 में बेंगलुरु के एक हिस्से में विवादास्पद फेसबुक पोस्ट पर की गई कथित टिप्पणी को लेकर हुई हिंसा के सिलसिले में बेंगलुरु पुलिस ने समीउद्दीन को हिरासत में लिया था। तब पुलिस अधिकारी ने कहा था कि जाँच के दौरान समीउद्दीन आरएसएस कार्यकर्ता रूद्रेश हत्या के मामले के एक आरोपित के संपर्क में पाया गया था। समीउद्दीन पिछले कुछ वर्षों से अल-हिंद आतंकवादी समूह के सदस्यों के साथ भी संपर्क बनाए हुए था।