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PM मोदी ने समुद्र में जाकर देखी असली द्वारका, भगवान कृष्ण ने बसाया, सिन्धु घाटी सभ्यता से भी पुरानी है यह नगरी, जानें इसका इतिहास

विश्व के सबसे पुरातन धर्म सनातन में चार धाम और सात नगरों को सबसे पवित्र माना गया है। यह चार धाम बद्रीनाथ, द्वारका, जगन्नाथपुरी और रामेश्वरम हैं। वहीं सात नगरों की बात की जाए तो यह हैं- अयोध्या, मथुरा, माया (हरिद्वार), काशी, कांची, अवंति (उज्जैन की तत्कालीन मालवनी राजधानी) और द्वारावती (द्वारका नगरी)। इन धामों और नगरों का उल्लेख गरुड़पुराण के प्रेतखण्ड के 34वें और 56वें ​​श्लोक में मिलता है। 

स्कंदपुराण के काशीखंड में भी इन सभी सात नगरों का उल्लेख है। ये सात नगर और चारों धाम मोक्ष देने वाले कहे गए हैं। इन सब नगरों में सबसे पवित्र द्वारका धाम है। द्वारका का जिक्र सातों नगरों और चारों धाम, दोनों में है। द्वारका नगरी का अपना काफी गौरवशाली और रोचक इतिहास है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार (25 फरवरी,2024) को धर्मनगरी द्वारका का दौरा किया । यहाँ पीएम मोदी ने भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना की और बेट द्वारका नगरी को मुख्य भूमि से जोड़ने वाले नवनिर्मित ‘सुदर्शन सेतु’ का लोकार्पण भी किया। इसके बाद पीएम मोदी ने समुद्र में डूबे प्राचीन द्वारका शहर के अवशेषों को देखा, इसके लिए पीएम मोदी समुद्र के अंदर गए।

इस अनुभव के बारे में बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “जल के भीतर द्वारका शहर में प्रार्थना करना एक दिव्य अनुभव था। मुझे यहाँ भक्ति और आध्यात्मिक वैभव के प्राचीन युग से जुड़ाव का अनुभव हुआ। भगवान श्रीकृष्ण सभी को आशीर्वाद दें।”

भगवान कृष्ण ने बसाई भारत की सबसे आधुनिक नगरी द्वारका

द्वारका एक प्राचीन और पवित्र शहर के रूप में जाना जाता है। द्वारका का इतिहास गौरवशाली और रोचक है। ऐतिहासिक दृष्टि से देखा जाए तो द्वारका प्राचीन भारत का सबसे उन्नत एवं आधुनिक नगर था। सबसे बड़ा आश्चर्य ये है उस समय समुद्र के बीचों बीच द्वारका कैसे बसाई गई होगी। हाल ही में समुद्र में भेजे गए अभियानों में समुद्र में डूबी स्वर्ण नगरी द्वारका के अवशेष मिले हैं।

द्वारका नगरी का उल्लेख महाभारत के आसपास लिखे गए ग्रंथों में मिलता है। बताया जाता है कि जब भगवान श्रीकृष्ण ने अपने मामा और मथुरा के अत्याचारी राजा कंस का वध किया, तब कंस के ससुर और तत्कालीन मगध नरेश जरासंध ने श्रीकृष्ण से बदला लेने के लिए यादवों पर लगातार हमले चालू कर दिए।

ब्रजभूमि को लगातार होने वाले आक्रमणों से बचाने के लिए, भगवान श्रीकृष्ण ने एक नए स्थान पर बसने का निर्णय किया। इसके लिए उन्होंने सुराष्ट्र (आधुनिक सौराष्ट्र) में कुशस्थली इलाके को चुना। कुशस्थली आने से पहले भगवान श्रीकृष्ण ने कुशादित्य, कर्णादित्य, सर्वादित्य और गृहादित्य नामक कई राक्षसों से युद्ध करके उनका विनाश कर दिया था और समुद्र तट पर द्वारका का निर्माण किया था।

श्रीमद्भागवत के अनुसार, द्वारका का निर्माण करने से पहले, भगवान श्रीकृष्ण ने समुद्र से भूमि देने और पानी को दूसरी जगह स्थानांतरित करने की विनती की। वरुण देव ने भगवान श्रीकृष्ण की कोमलता को पहचाना और समुद्र के ठीक बीच में एक बड़ा क्षेत्र दिया। इसके बाद विश्वकर्माजी ने द्वारका नगरी का निर्माण किया। 

भगवान कृष्ण ने द्वारका नगरी की स्थापना की और इसे समृद्धि का मुख्य केंद्र बनाया। भगवान श्रीकृष्ण के जीवन की कई महत्वपूर्ण घटनाएँ द्वारका नगरी में ही घटित हुईं, जैसे रुक्मणिहरण और विवाह, जाम्बवती, रोहिणी, सत्यभामा, कालिंदी, मिगविंदा, सत्या, नग्नजीति, सुशीलमाद्रि, लक्ष्मण, दत्त सुशल्या आदि। इसके अलावा अनिरुद्ध का विवाह, महाभारत युद्ध प्रबंधन भी यहीं से सम्बंधित है। इसके अलावा चीरहरण से द्रौपदी की रक्षा और शिशुपाल वध की गवाह द्वारका है।

प्राचीन भारत की समृद्ध नगरी थी द्वारका

भगवान श्रीकृष्ण के समय में द्वारका की भौतिक समृद्धि सफलता के उच्चतम स्तर तक पहुँच चुकी थी। द्वारका प्राचीन भारत का सबसे उन्नत शहर बन गया था। विदेशी व्यापार से लेकर विज्ञान तक क्षेत्रों में प्राचीन द्वारका सबसे अग्रणी थी। भगवान कृष्ण के नेतृत्व में यदुवंश भी समृद्ध हो रहा था।

प्राचीन भारत उस समय की बाक़ी दुनिया से कहीं आगे था और उसमें भी द्वारका शहरी उन्नति के सभी शिखरों को छू रही थी। इसका उदाहरण समुद्र के बीचोंबीच एक पूरा साम्राज्य खड़ा करना है और वो भी बिना आधुनिक मशीनरी के। यहाँ विशाल महल और मकान थे। उत्कृष्ट सड़क व्यवस्था थी और प्रकाश की भी व्यवस्था थी। तब भगवान श्रीकृष्ण के पास प्राचीन विश्व की सबसे शक्तिशाली सेना थी। इसे नारायणी सेना के नाम से जाना जाता था। इस सेना के समक्ष बड़ी बड़ी सेनाएँ बिना लड़ें ही हार मान लेती थीं।

हालाँकि, समय के साथ परिस्थितियाँ बदलने लगीं और भौतिक सुविधाओं में सुधार के कारण यदु वंश भोग-विलास में लिप्त होने लगा। द्वारका में एक साथ अनेक त्रासदियाँ घटित होने लगीं।इसी दौरान, यादवों ने पिंडतारण क्षेत्र में रहने वाले ऋषियों के लिए बाधाएँ खड़ी की। हालाँकि, ऋषियों ने यादवों को माफ कर दिया। यादवों ने उन ऋषियों की धार्मिक कार्यकलापों में बाधा डालना शुरू कर दिया। अंततः ऋषियों ने यादवों को श्राप दे दिया। यह यदुवंश को मिला पहला श्राप था।

गांधारी का श्राप और द्वारका डूब गयी

ऋषियों द्वारा दिए गए श्राप का प्रभाव दिन प्रतिदिन प्रबल होता जा रहा था। इस बीच भगवान श्रीकृष्ण ने महाभारत के महान युद्ध में भाग लिया। वह पांडव योद्धा अर्जुन के सारथी बनकर कुरूक्षेत्र में उतरे। जबकि उनकी नारायणी सेना कौरवों की तरफ से लड़ रही थी। 18 दिनों तक चले इस महान युद्ध के दौरान भगवान श्रीकृष्ण ने कई अनुष्ठान किये। इस दौरान अर्जुन को श्रीमद्भगवद्गीता का दिव्य ज्ञान मिला। दूसरी तरफ ऋषियों के श्राप के प्रकोप से पांडवों के हाथों नारायणी सेना नष्ट होने लगी। इस भीषण युद्ध में अंततः कौरवों की हार हुई।

इस युद्ध में राजा धृतराष्ट्र के सभी 100 पुत्रों के मारे जाने का समाचार सुनकर पत्नी गांधारी अत्यंत दुखी हुईं और रोने लगी। उस समय पांडवों का हस्तिनापुर में राज्याभिषेक हो रहा था। सबसे बड़े पांडव भाई युधिष्ठिर पवित्र सेंगोल धारण कर राजगद्दी पर बैठने जा रहे थे। 

इसी समय राजसभा में कौरवों की माता गांधारी आईं और उन्होंने युद्ध और अपने पुत्रों की मृत्यु के लिए भगवान कृष्ण को दोषी ठहराया और श्राप दिया, “जिस प्रकार पूरे कौरव वंश का नाश हो गया, उसी प्रकार यदु वंश का भी नाश होगा। यहाँ तक ​​कि दुनिया की सबसे सुंदर नगरी द्वारका भी जल में डूब जाएगी”

भगवान श्रीकृष्ण ने उनके श्राप को सहर्ष स्वीकार किया। हालाँकि, इसके बाद गांधारी को अपनी गलती का पता चला तो उन्होंने भगवान से क्षमा माँगी। उस समय भगवान श्री कृष्ण ने कहा, “तुम तो केवल निमित्त मात्र बनी हो। यदुवंश का विनाश निश्चित था। जो सभ्यता भोग-विलास में सोती है, वह निश्चित ही नष्ट हो जाएगी।”

आखिर में ऐसा भी एक समय आया जब यदुवंशी आपस में ही लड़ने लगे और विद्रोह कर दिया। इसी बीच एक दिन भगवान श्रीकृष्ण प्रभास क्षेत्र के वन में विश्राम कर रहे थे। इसी दौरान एक शिकारी ने अचानक ने उन पर जानवर समझकर तीर चला दिया, जो भगवान के पैर के तलवे में लगा। जैसे-जैसे शिकारी करीब आया, उसे अपनी गलती का एहसास हुआ और वह भगवान से क्षमा माँगने लगा। 

इस पर भगवान श्रीकृष्ण ने कहा, “जो कुछ होता है वह मेरी इच्छा से ही होता है।” इस प्रकार उन्होंने मानव शरीर को त्याग दिया। भगवान की लीला के समाप्त होते ही होते ही द्वारिका में भीषण सुनामी आई और वह बह गयी और यदुवंश का भी पतन हो गया। उस समय की भव्य एवं दिव्य स्वारका जलमग्न हो गयी। इस प्रकार भगवान श्री कृष्ण के महान साम्राज्य खत्म हुआ।बताया जाता है कि जब श्रीकृष्ण ने अपने शरीर का त्याग किया, तभी से कलयुग चालू हुआ।

सिंधु घाटी सभ्यता से भी पुरानी द्वारका

द्वारका के गौरवशाली इतिहास को जानने के लिए कई इतिहासकारों ने काफी प्रयास किया है। इसमें जादुनाथ सरकार के साथ ही कई विदेशी इतिहासकार भी शामिल हैं। लेकिन अभी तक कोई भी इतिहासकार इसकी जड़ों तक नहीं पहुँच पाया है। समुद्र में कई अभियानों में प्राचीन द्वारका के खंडहरों के बारे में पता चला है। प्राचीन द्वारका के खंडहरों में खम्भे, पत्थर, बर्तन और भगवान श्रीकृष्ण के महल वाली पूरी दिव्य नगरी भी मिली है। इन सभी साक्ष्यों का परीक्षण किया गया है और पाया गया है कि ये आज से 5000 वर्ष से भी अधिक पुराने हैं।

कई हिंदू धर्मग्रंथों में भी द्वारका के बारे में जानकारी दी गई है। इनमें द्वारका शब्द का अर्थ ‘स्वर्ग का द्वार’ बताया गया है। प्रसिद्ध इतिहासकार ए जे चावड़ा के अनुसार, भगवान कृष्ण का साम्राज्य सिंधु घाटी सभ्यता से भी पुराना है। सिंधु घाटी की आर्यन सभ्यता को विश्व के इतिहास में सबसे पुरानी सभ्यता के रूप में मान्यता प्राप्त है। लेकिन द्वारका नगरी के अवशेष भी 5 हजार वर्ष से भी अधिक प्राचीन हैं। सिंधु घाटी सभ्यता लगभग 4,000 साल पहले सिंध क्षेत्र से भारत के विभिन्न राज्यों में फैल गई थी।

इस बारे में एजे चावड़ा ने कहा कि जिसे हम सिंधु घाटी सभ्यता कहते हैं वह असल में द्वारका सभ्यता थी। इतिहासकारों को सिंधु घाटी सभ्यता की प्राचीन मूर्तियाँ मिलीं है। जो अनुमानतः 4000-4500 वर्ष पुरानी है। उन मूर्तियों में शिव-पार्वती की मूर्तियां और विभिन्न देवी-देवताओं की मूर्तियां शामिल हैं। ऐसे में यह स्पष्ट है कि सिंध में बसने वाली यह सभ्यता आर्य सभ्यता थी।

वहीं एजे चावड़ा ने यह भी दावा किया है कि द्वारका आर्य सभ्यता का ही एक महत्वपूर्ण हिस्सा था। उन्होंने कहा कि लगभग 5500-6000 वर्ष पूर्व भगवान श्रीकृष्ण ने द्वारिका बसाई थी। उस समय उन्होंने आर्य सभ्यता की नींव रखी थी। वह द्वारका सभ्यता सौराष्ट्र, कच्छ, सिंध, गुजरात के कई क्षेत्रों, उत्तर भारत के क्षेत्रों और दक्षिण भारत के कई क्षेत्रों तक फैली हुई थी।

द्वारका थी भारत की सुनियोजित नगरी

कई इतिहासकारों के अनुसार वाराणसी भी द्वारका सभ्यता का हिस्सा था। वाराणसी को विश्व के सबसे प्राचीन शहर के रूप में जाना जाता है। विशेष बात यह है कि सिंधु घाटी सभ्यता के शहर जैसे कि मोहन-जो-दाड़ो, लोथल, हड़प्पा, धोलावीरा आदि विकसित और सुनियोजित शहर माने जाते थे। जिसमें मोहनजो-दाडो को सबसे अधिक विकसित शहर माना जाता था। उनकी नगर रचना बहुत अच्छी थी। 

लेकिन द्वारका की नगर संरचना और मोहनजो-दाड़ो की नगर रचना एकसमान थी। कई मायनों में द्वारका नगरी मोहनजो-दाड़ो से भी अच्छी थी। फिर भी प्राचीन इतिहास में द्वारका को स्थान नहीं दिया गया है। विश्व की सबसे विकसित और सुनियोजित नगरी द्वारका को इतिहास में जगह न मिलने के पीछे कई कारण हो हैं। मुख्य कारणों में से एक यह है कि द्वारका का निर्माण हिंदू धर्म के भगवान श्रीकृष्ण ने किया था। जबकि मोहनजो-दाड़ो को किसने बसाया इसके बारे में कोई भी स्पष्ट ऐतिहासिक जानकारी नहीं है।

ब्रिटिश काल से लेकर भारत के स्वतंत्र होने के बाद तक इतिहास के क्षेत्र में वामपंथी इतिहासकारों का वर्चस्व रहा है। ऐसे में कई धार्मिक मंदिरों और कस्बों के बारे में देश के करोड़ों लोगों को जानकारी नहीं दी गई है। भारत के इतिहास में द्वारका का नाम न आने के पीछे एक कारण वामपंथी इतिहासकारों के प्रति हिंदू घृणा भी है। 

एक धार्मिक स्थल के रूप में विख्यात द्वारका का इतिहास संभवतः 6000 वर्ष पुराना है। हाल ही में, भारत सरकार कई मिशनों और अभियानों के माध्यम से जलमग्न द्वारका को दुनिया के सामने पेश करने के लिए प्रयास कर रही है। इन प्रयासों से प्राचीन भारत की आधुनिक नगरी द्वारका का गौरवशाली एवं दिव्य इतिहास धीरे-धीरे सामने आ रहा है।

सिनेमा बनाने वाला जाफ़र सादिक, असली काम ₹2000 करोड़ का ड्रग रैकेट… CM स्टालिन और DMK से कनेक्शन, ऑस्ट्रेलिया-न्यूजीलैंड तक डायरेक्ट सप्लाई

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की एक कार्रवाई में दिल्ली में बड़े ड्रग रैकेट का खुलासा हुआ है। इसका सरगना एक तमिल फिल्म निर्माता जाफ़र सादिक बताया जा रहा है। उसकी तलाश जारी है। इस तमिल फिल्म निर्माता की तस्वीरें तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन के साथ भी सामने आई थीं। उसकी प्रशंसा में स्टालिन के बेटे उदयानिधि ने पोस्ट लिखा था।

जानकारी के अनुसार, दिल्ली में पड़े इस छापे से कई बड़े खुलासे हुए हैं। दिल्ली के एक गोदाम में मारे गए इस छापे में 50 किलो ड्रग बरामद हुई है। इसके साथ ही तीन लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है। इस गैंग के तार तमिलनाडु के एक फिल्म जाफ़र सादिक निर्माता से जुड़े हैं, जो इस पूरे खेल का सरगना माना जा रहा है।

इस छापे में स्यूडोफेड्राइन नाम की एक ड्रग बरामद हुई है। सामने आया है कि यह रैकेट इस ड्रग को अलग अलग खाने के सामान में छुपा कर ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड भेज रहा था, जहाँ इसकी कीमत करोड़ों में है। यह सामने आया है कि बीते तीन वर्षों में 3500 किलो से अधिक ड्रग इन देशों को भेजी जा चुकी है। अब तक 45 बार यहाँ ड्रग भेजी गई है। इसकी अंतरराष्ट्रीय बाजर में कीमत कम से कम ₹2000 करोड़ बताई जा रही।

CM स्टालिन के साथ जाफ़र सादिक

जाफ़र सादिक इस पूरे ड्रग नेटवर्क का सरगना माना जा रहा है। वह एक तमिल फिल्म निर्माता है। उसने एक फिल्म ‘मंगाई’ बनाई थी। इसका एक गाना उदयानिधि की पत्नी के हाथों लॉन्च किया गया था। इससे पहले वह तमिलनाडु के मुख्यमंत्री स्टालिन ने भी मिला था। वह सीएम स्टालिन से 17 दिसम्बर 2023 को मिला था। सादिक ने इस दौरान उन्हें ₹10 लाख चेक सौंपा था। यह चेक मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए था। यह दान उसने तूफ़ान मिचौन्ग के बाद दिया था।

वह सिर्फ सीएम स्टालिन से ही नहीं बल्कि उनके बेटे और तमिलनाडु सरकार में मंत्री उदयानिधि स्टालिन से भी मिला था। उन्हें इसने ₹2 लाख का चेक सौंपा था, जो मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए था। इस दान को लेकर उदयानिधि ने सादिक की प्रशंसा में एक पोस्ट भी लिखा था, वह अब डिलीट कर दिया गया है।

जाफ़र सादिक तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी DMK से जुड़ा हुआ है और इसकी NRI विंग का मैनेजर है। उसकी कई DMK सांसदों और विधायकों के साथ फोटो हैं।

अन्नामलाई ने उठाए सवाल

सादिक पर हुए इस खुलासे के बाद अब तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष के अन्नामलाई ने प्रश्न उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सादिक के फोटो मुख्यमंत्री समेत तमाम बड़ी हस्तियों के साथ आए हैं। उन्होंने कहा कि जबसे राज्य में डीएमके की सरकार आई है, ड्रग्स का असर बढ़ गया है। स्कूलों में भी ड्रग उपलब्ध हैं। उन्होंने तमिलनाडु सरकार से मामले में कार्रवाई की माँग की है।

बताया गया है कि इस मामले के खुलने के बाद सादिक के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। वहीं पुलिस सलीम और मोईद नाम के अन्य दो व्यक्तियों को इस मामले में ढूँढ रही है। बताया जा रहा है दिल्ली में छापे के दौरान पकड़े गए तीनों व्यक्ति भी तमिलनाडु के हैं।

जहाँ से राहुल गाँधी ने शुरू की यात्रा, वहीं से कॉन्ग्रेस के आधे विधायक BJP में शामिल: जुड़ने के बजाय कट रही इंडी गठबंधन

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी अपनी पार्टी को मजबूती देने के लिए भारत जोड़ो यात्रा के बाद अब भारत जोड़ो न्याय यात्रा निकाल रहे हैं। ये अलग बात है कि उनकी ‘न्याय’ यात्रा जिस राज्य में पहुँचती है, या जिस राज्य से गुजरती है, वहाँ पर न सिर्फ कॉन्ग्रेस बल्कि पूरे इंडी गठबंधन के लिए दिक्कतें शुरू हो जाती हैं। राहुल की यात्रा पूर्वोत्तर में जिस अरुणाचल प्रदेश से होकर गुजरी थी, महज एक दिन की यात्रा का असर ऐसा हुआ कि कॉन्ग्रेस पार्टी के आधे विधायक ही टूटकर पार्टी से अलग हो गए और बीजेपी में शामिल हो गए।

खास बात ये है कि अरुणाचल प्रदेश की विधानसभा में 60 सीटें हैं। इनमें से अब कॉन्ग्रेस के पास सिर्फ 2 विधायक ही बचे हैं और विपक्ष में कुल मिलाकर सिर्फ तीन विधायक। बाकी सभी विधायक सत्ता पक्ष में हैं, जिसमें से दो निर्दलीय विधायक भी हैं। नहीं समझे न? दरअसल, अरुणाचल प्रदेश में जब साल 2019 में विधानसभा चुनाव हुए थे, तो बीजेपी ने 41 सीटें जीती थी और दो तिहाई बहुमत से सरकार बनाई थी। इसके साथ ही जेडीयू ने 7 सीटें जीती थी। नेशनल पीपल्स पार्टी ने 5 विधानसभा सीटें जीती, तो कॉन्ग्रेस ने चार सीटें। वहीं, पीपल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल ने भी एक सीट जीती थी। इसके अलावा 2 निर्दलीय विधायक थे।

इसके बाद अरुणाचल में जेडीयू के सभी विधायक बीजेपी में शामिल हो गए थे। पीपल्स पार्टी का विधायक भी बीजेपी में शामिल हो गया था। एनपीपी वैसे भी एनडीए का हिस्सा है। ऐसे में कॉन्ग्रेस के चार विधायक ही विपक्ष में बैठे थे। एक निर्दलीय विधायक बाद में टीएमसी में शामिल हो गए थे। कुल 5 विपक्षी विधायकों वाली अरुणाचल प्रदेश में अब कॉग्रेस के दो ही विधायक बचे हैं, तो टीएमसी का एक। बाकी के दो निर्दलीय विधायक सरकार को समर्थन दे रहे हैं। इस तरह से राहुल गाँधी ने जिस अरुणाचल प्रदेश में अपनी न्याय यात्रा एक दिन निकाली, उस अरुणाचल प्रदेश में पार्टी के आधे विधायक ही बागी हो गए और वो बीजेपी में शामिल हो गए।

अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री प्रेमा खांडू ने खुद एक्स पर इस बात की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री निनॉन्ग एरिंग, जो पासीघाट पश्चिम सीट से कॉन्ग्रेस के विधायक हैं, वो अब बीजेपी में आ चुके हैं। उनके साथ ही बोरदुनिया-बोगापानी के कॉन्ग्रेस विधायक वांगलिन लोवांगडोंग ने भी बीजेपी की सदस्यता ले ली। इस दौरान एनपीपी के विधायक मुच्चू मीठी जो रोइंग सीट से विधायक हैं, और उनके साथी बसर सीट से विधायक गोकर बसर भी बीजेपी में शामिल हो गए। इस दौरान असम के मंत्री और अरुणाचल में बीजेपी के चुनाव प्रभारी अशोक सिंघल भी मौजूद रहे।

खैर, ये मामला सिर्फ अरुणाचल का ही नहीं है, बल्कि राहुल गाँधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा जिन राज्यों से गुजरी, या जिन राज्यों में पहुँची या पहुँचने वाली थी। यानी किसी भी तरह का जुड़ाव न्याय यात्रा से अगर था, तो वहाँ पार्टी ही नहीं, बल्कि इंडी गठबंधन को नुकसान ही हुआ है। अरुणाचल से लेकर असम तक विद्रोह हुआ, तो पश्चिम बंगाल में दीदी ममता ने आँखें दिखा दी। बिहार में इंडी गठबंधन के सूत्रधार ने ही इंडी गठबंधन को छोड़ दिया, तो उत्तर प्रदेश में जयंत चौधरी जैसे नेताओं ने भी राहुल गाँधी का हाथ झटक दिया। महाराष्ट्र में अशोक चौहान से लेकर बाबा सिद्दीकी तक ने झटका दिया, तो कॉन्ग्रेस को सहयोगी दलों के सामने भी घुटने टेकने पर मजबूर होना पड़ा है।

उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में उसे सपा की शर्तों पर लोकसभा चुनाव सिर्फ 17 सीटों पर लड़ना पड़ रहा है, तो पंजाब में इंडी गठबंधन में होने के बावजूद उसे आम आदमी पार्टी के खिलाफ अलग ही लड़ाई लड़नी पड़ रही है। वहीं, दिल्ली की सात में से 4 लोकसभा सीटें भी आप के लिए छोड़नी पड़ गई। ऐसे में समझ सकते हैं कि इंडी गठबंधन में कॉन्ग्रेस पार्टी को लगातार नुकसान पर नुकसान ही झेलना पड़ रहा है।

Video: आम आदमी पार्टी के पार्षद को महिलाओं ने चप्पलों से पीटा, थाने में घुसकर बचाई जान, पिटाई की वजह कर देगी हैरान

मध्य प्रदेश के श्योपुर में आम आदमी पार्टी के एक पार्षद को महिलाओं के समूह ने जमकर पीटा है। महिलाओं ने पार्षद पर आरोप लगाए कि वो भ्रष्टाचारी है और पीएम आवास के लिए मिलने वाले सरकारी पैसों में से 20 हजार रुपए की रिश्वत माँग रहा था। महिलाओं ने पार्षद को नगर पालिका कार्यालय के नीचे ही घेर लिया। महिलाओं ने बीच-बाजार में पार्षद की ऐसी पिटाई कि उसे अपनी जान बचाने के लिए थाने में भागना पड़ा। इसके बाद पुलिस ने महिलाओं के खिलाफ केस दर्ज किया है।

आज तक की रिपोर्ट के मुताबिक, ये मामला वार्ड नंबर 14 के पार्षद जुगल मेहरा से जुड़ा है। वो आम आदमी पार्टी की तरफ से चुनाव जीतकर पार्षद बने हैं। लेकिन महिलाओं का आरोप है कि जुगल मेहरा पीएम आवास योजना के तहत मिलने वाले पैसों में से 20 हजार की रिश्वत माँगता है। जिसमें 10 हजार रुपए पहले और 10 हजार रुपए काम होने के बाद।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटनाक्रम के मुताबिक शनिवार शाम को नगर पालिका में विकसित भारत संकल्प यात्रा का कार्यक्रम रखा गया था। इस कार्यक्रम में वार्ड 14 के पार्षद जुगल मेहरा भी पहुँचे थे, जिनपर महिलाओं ने पीएम आवास की किस्त दिलाने के एवज में रिश्वत माँगने का आरोप लगाया। और फिर उनकी पिटाई शुरू कर दी। सरे राह महिलाओं ने पार्षद के कुर्ते का काॅलर पकडकर खींच लिया और पहले चप्पलों से, फिर थप्पड़ जड़ कर पिटाई कर दी। इस दौरान वहाँ मौजूद लोगों ने बीच बचाव भी किया लेकिन महिलाओं से घिरे पार्षद ने कोतवाली थाने में भागकर अपनी जान छुड़ाई।

एक्स यूजर राकेश कुमार पटेल ने इस घटना का वीडियो शेयर किया है। उन्होंने लिखा, “श्योपुर नगरपालिका में AAP(आम आदमी पार्टी) के पार्षद की महिलाओं ने चप्पल से पिटाई कर दी। महिलाओं ने पार्षद पर पीएम आवास योजना की किश्त बैंक खाते में डलवाने के बदले रिश्वत माँगने का आरोप लगाया है।”

पार्षद की पिटाई की खबर मिलने के बाद नगर पालिका अध्यक्ष के पति सुजीत गर्ग और दूसरे पार्षद एवं पार्षद प्रतिनिधि भी कोतवाली पहुँच गए। एसडीओपी राजीव कुमार गुप्ता का कहना है कि मामले की जाँच शुरू कर दी गई है।

पति ने समझा उपन्यास लेकिन पत्नी पढ़ रही थी बाइबिल… हनुमान चालीसा के कारण छोड़ा घर: बच्चों को ईसाई बनाने का डर, पुलिस से पति की गुहार

राजस्थान के उदयपुर से ईसाई में धर्मान्तरण का एक मामला सामने आया है। यहाँ एक पति ने अपनी बीवी के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में पति ने कहा है कि उसकी पत्नी ईसाई बन गई है और आशंका है कि अब नाबालिग बेटे की भी जल्द ही धर्म परिवर्तन कराएगी। महिला शुक्रवार (23 फरवरी 2024) से अपने 12 वर्षीय बेटे को लेकर घर से गायब है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला उदयपुर के घंटाघर थाना क्षेत्र घंटाघर का है। यहाँ छबिला भेरू रोड पर ज्वैलरी का काम करने वाले प्रकाश सोनी अपने परिवार के साथ रहते हैं। परिवार में उनकी पत्नी के अलावा 12 साल का एक बेटा और 14 साल की एक बेटी है। पुलिस को दी गई शिकायत में उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी रेखा कुछ समय से चर्च जा रही है और बाइबिल सहित ईसाई मजहब की पुस्तकें पढ़ रही है।

पति ने आरोप लगाया कि कुछ दिन पहले से उनकी पत्नी रेखा दोनों बच्चों को भी ईसाई पद्धति से रहने की शिक्षा देने लगी है। इस पर उन्होंने अपनी पत्नी को समझाने की कोशिश की, लेकिन उस पर कोई असर नहीं पड़ा। वो जब भी पत्नी को समझाने की कोशिश करते, दोनों के बीच झगड़ा हो जाता और मारपीट तक की नौबत आ थी। रेखा में पूजा-पाठ करने पर भी नाक-भौं सिकोड़ने लगी थी।

इतना ही नहीं, रेखा घर आने वाले रिश्तेदारों को भी ईसाई मत अपनाने के लिए कहने लगी थी। एक दिन मंगलवार को प्रकाश अपने घर में हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे थे। तभी रेखा घर छोड़ कर चली गईं थी। उसके बाद से वह अलग रह रही है। रेखा उनसे अलग रहते हुए करीब एक महीने हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि उनके साथ उनके बुजुर्ग माता-पिता और दो बच्चे रहते हैं।

शिकायत में प्रकाश ने आगे लिखा कि शुक्रवार (23 फरवरी 2024) को उनकी बेटी और बेटा एक साथ पढ़ने स्कूल गए थे। शाम को बेटी तो वापस लौट आई, लेकिन बेटा नहीं लौटा। जब उन्होंने पता किया तो बेटा अपनी माँ रेखा के पास मिला। प्रकाश का आरोप है कि उनकी पत्नी जल्द ही उनके बेटे का भी धर्मान्तरण करवा सकती है। फ़िलहाल रेखा उदयपुर में ही अपने चचेरे भाई के घर रहती है।

परिवाद के माध्यम से दी गई शिकायत में प्रकाश सोनी ने यह भी बताया है कि उन्होंने 20 फरवरी को ही स्थानीय पुलिस को अपनी पत्नी की हरकतों के बारे में लिखित तौर पर सूचित कर दिया था। हालाँकि, तब उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाई थी। उदयपुर के ACP ने परिवाद का संज्ञान लेकर अधीनस्थों को कार्रवाई का आदेश दिया है।

जाँच के दौरान पुलिस ने रेखा सोनी के बयान दर्ज किए हैं। रेखा ने अपने पति के आरोपों को सिरे से ख़ारिज कर दिया है। उन्होंने ईसाई में अपने धर्मान्तरण के दावों को भी बेबुनियाद बताया है। पुलिस ने प्रकाश सोनी और बच्चों के बयान भी दर्ज किए हैं। थाना प्रभारी भवानी सिंह के मुताबिक, मामले की गहनता से जाँच की जा रही है।

मुस्लिम शादी में हिन्दू कार्ड, वैदिक मंत्र और हिन्दू प्रतीक चिन्ह, जानें क्या है सच्चाई

सोशल मीडिया पर मुस्लिम शादी का एक कार्ड वायरल हो रहा है। इसमें दूल्हा-दूल्हन के नाम मुस्लिम जबकि कार्ड की शैली हिन्दू है। इसमें वैदिक मंत्र भी लिखे हुए हैं और हिन्दू प्रतीक चिन्ह बने हुए हैं। कार्ड में सभी रिश्तेदारों के नाम भी मुस्लिम हैं। इस कार्ड के विषय में अब पूरी जानकारी सामने आई है।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा शादी का यह कार्ड बहराइच के कैसरगंज के सफीपुर के रहने वाले समीर अहमद का है। समीर अहमद कैसरगंज के सफीपुर के रहने वाले हैं जबकि उनका विवाह जरवल रोड की रहने वाली सानिया खातून से होना है। यह शादी 29 फरवरी, 2024 को होनी है। इस कार्ड में इसे निकाह नहीं बल्कि परिणय बंधन बताया गया है।

हिन्दुतान लाइव की रिपोर्ट के अनुसार, उजहुल कमर ने अपने बेटे के निकाह के लिए दो कार्ड छपवाए हैं। इनमें से जो हिन्दू कार्ड वायरल हो रहा है, वह उजहुल ने अपने हिन्दू परिचितों को भेजने के लिए छपवाया है। उन्होंने हिन्दुस्तान से बात करते हुए बताया है कि यह कार्ड केवल उनके हिन्दू परिचितों और पड़ोसियों को बाँटा जाएगा।

उन्होंने अपने मुस्लिम रिश्तेदारों और पहचान वालों के लिए एक और कार्ड छपवाया है जो कि उर्दू में है। यह कार्ड हिन्दू नहीं पढ़ सकेंगे। हिन्दुओं को दिए गए निमंत्रण में प्रीतिभोज की तारीख 28 फरवरी, 2024 को रखा गया है। उजहुल ने बताया है कि हिन्दुओं के लिए प्रीतिभोज भी उन्होंने अलग रखा है।

उजहुल कमर ने बताया है कि उनके यह अलग कार्ड छपवाने के कारण अब तक उन्हें कई फ़ोन आ चुके हैं। सभी उनसे इस विषय में पूछ रहे हैं। गौरतलब है कि हिन्दुओं के विवाह निमंत्रणों में वैदिक मंत्र, गणेश भगवान तथा हिन्दू प्रतीक चिन्ह शामिल होते हैं। मुस्लिमों के निकाह में कार्ड अधिकतर उर्दू में छापे जाते हैं। इनमें ऐसे कोई प्रतीक या छवियाँ नहीं होती।

भिंड के RSS ऑफिस में पिन लगा हैंड ग्रेनेड मिलने से हड़कंप, बॉल समझकर परिसर में खेल रहे थे बच्चे: बम निरोधक दस्ता ले गई अपने साथ

मध्य प्रदेश के भिंड में स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के ऑफिस कंपाउंड में हैंड ग्रेनेड मिला है। इस हैंड ग्रेनेड से बच्चे खेल रहे थे। इस हैंड ग्रेनेड के मिलने से सनसनी फैल गई। भिंड पुलिस ने मुरैना से बम डिस्पोजल स्क्वॉयड को बुलाया, जिसमें पता चला है कि ये हैंड ग्रेनेड तीन दशक से भी ज्यादा पुराना है और ‘डेड’ हो चुका है। ऐसे में इससे डरने वाली कोई बात नहीं।

जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार (24 फरवरी 2024) को बजरिया इलाके में स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के ऑफिस कंपाउंड में कुछ बच्चे खेल रहे थे। कार्यालय के पदाधिकारी बाहर गए हुए थे, ऐसे में कार्यालय खाली पड़ा था। इसी दैरान बच्चों को गेंद के आकार की वस्तु मिली, जो हैंड ग्रेनेड निकली। इसके बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। इस हैंड ग्रेनेड में पिन लगा हुआ था। हालाँकि ये हैंड ग्रेनेड काफी पुराना था। इस बीच मौके पर पहुँची ने जाँच की, तो ये गैंड ग्रेनेड ‘डेड’ मिला, यानि ये फट नहीं सकता था। मुरैना पुलिस के बम डिस्पोजल दस्ते ने भी मौके पर जाँच की।

भिंड पुलिस ने बताया कि रात करीब 10 बजे हैंड ग्रेनेड की सूचना मिली थी। वहाँ 12 बजे रात में ही एसपी डॉ असित यादव भी मौके पर पहुँच गए। इसके बाद स्निफर डॉग भी मौके पर पहुँचा। वहीं, मुरैना से बम डिस्पोजल स्क्वॉयड की टीम रात 2 बजे मौके पर पहुँची और हैंड ग्रेनेड को कब्जे में ले लिया है। इस बीच मौके पर स्थानीय विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाहा भी पहुँचे थे।

एसपी असित यादव ने बताया कि ये हैंड ग्रेनेड संभवत; उस जगह से यहाँ पहुँची है, जहाँ से कार्यालय में मिट्टी डलवाई गई थी। वो जगह संभवत: पहले पुलिस का ट्रेनिंग सेंटर था। उस इलाके को चांदमारी भी कहते हैं। वहां से मिट्टी भरने के समय ही ये हैंड ग्नेनेड भी मिट्टी के साथ ही आ गया होगा। हालाँकि ये निष्क्रिय है और किसी तरह का नुकसान नहीं पहुँचा सकता।

दिल्ली पुलिस के हत्थे चढ़ा प्रतिबंधित इस्लामी संगठन SIMI का आतंकी हनीफ शेख, 22 साल से था फरार, भुसावल में पढ़ाता था उर्दू

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ़ इंडिया (SIMI) के एक आतंकी को गिरफ्तार किया है। यह आतंकी 22 वर्षों से फरार था। उसके खिलाफ राजद्रोह और UAPA के तहत मामला चल रहा था। वह वर्तमान में महाराष्ट्र के भुसावल में एक स्कूल में उर्दू पढ़ा रहा था। कोर्ट ने उसे भगौड़ा घोषित किया हुआ था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने जिस आतंकी को गिरफ्तार किया है, उसका नाम हनीफ शेख है। वह SIMI की इस्लामिक मूवमेंट नाम की पत्रिका का उर्दू सम्पादक था और अपने कट्टर विचारों से बीते ढाई दशकों में बड़ी संख्या में मुस्लिम युवकों को जिहादी बना रहा था। उसकी तलाश पिछले 4 साल से लगातार जारी थी।

दिल्ली पुलिस हनीफ शेख को पकड़ने के लिए देश के कई हिस्सों में जा चुकी थी और उसके विषय में जानकारी जुटा रही थी। उसको पकड़ने के लिए प्रयास करने पर दिल्ली पुलिस को पता चला था कि वह वर्तमान में महाराष्ट्र के भुसावल में है। हनीफ यहाँ एक उर्दू स्कूल में पढ़ा रहा था और साथ ही उसने अपना नाम हनीफ हुडई से बदल कर मोहम्मद हनीफ कर लिया था।

दिल्ली पुलिस ने उसे दबोचने के लिए भुसावल में अपनी एक टीम भेजी थी। यह टीम लगातार यहाँ जानकारी इकट्ठा कर रही थी। इसने एक दिन जाल बिछा कर हनीफ को पकड़ लिया। हनीफ ने पुलिस के चंगुल के भागने की कोशिश भी कि लेकिन वह कामयाब नहीं हो पाया।

हनीफ के खिलाफ वर्ष 2001 में UAPA और अन्य धाराओं में मामला दर्ज हुआ था। सितम्बर, 2001 में दिल्ली के जामिया नगर में SIMI आतंकी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे। दिल्ली पुलिस ने यहाँ जब छापा मारा तो अधिकांश लोग भाग गए थे। प्रेस कॉन्फ्रेंस से बड़ी मात्रा में मुस्लिमों के आतंक के रास्ते पर ले जाने वाला साहित्य बरामद हुआ था। यहाँ से भागने वालों में हनीफ शेख भी शामिल था। इसकी तब से ही तलाश चल रही थी।

दिल्ली पुलिस के हत्थे चढ़ा हनीफ शेख SIMI के थिंक टैंक का हिस्सा था। वह वह वर्तमान में वहादत ए इस्लाम नाम के इस्लामिक संगठन को बढ़ा रहा था। वह चन्दा माँग कर आतंकी गतिविधियों की फंडिंग करवाने में भी संलिप्त था। अब पुलिस उससे पूछताछ कर रही है और उसके लिंक निकालने की कोशिश कर रही है। पुलिस का कहना है कि उसे अब अलग-अलग प्रदेशों में भी पूछताछ के लिए ले जाया जाएगा।

हिंदू बन संत रविदास की शोभा यात्रा में घुसा आज़म खान, भगवान राम का फाड़ा बैनर: रोकने वालों को दी जान से मार डालने की धमकी, देहरादून में गिरफ्तार

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में शुक्रवार (23 फरवरी 2024) को संत रविदास की शोभा यात्रा के दौरान विवाद खड़ा हो गया। यह विवाद आज़म खान नाम के युवक द्वारा भगवान राम का बैनर फाड़ने के चलते हुआ। बताया जा रहा है कि आज़म खान हिन्दू बनकर शोभा यात्रा में शामिल हुआ था। हिन्दू संगठनों के दबाव के बाद पुलिस ने आजम के खिलाफ मुकदमा दर्ज करके उसे गिरफ्तार कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शुक्रवार को देहरादून में संत रविदास की शोभायात्रा निकाली गई थी। इसमें हिन्दू समाज के तमाम श्रद्धालु मौजूद थे। यात्रा में भगवान राम सहित कई अन्य देवी-देवताओं के बैनर लगे हुए थे। आरोप है कि इसी यात्रा में आज़म खान हिन्दू बनकर शामिल हुआ था। जब शोभा यात्रा घंटाघर के पास पहुँची तब आजम खान ने साम्प्रदायिक माहौल खराब करने की कोशिश की।

आरोप है कि उसने भगवान राम के बैनर फाड़ डाले। भगवान राम का यह पोस्टर अयोध्या में बने रामलला के मंदिर से जुड़ा हुआ था। आज़म खान ने पोस्टर को न सिर्फ फाड़ डाला था, बल्कि उसे नीचे जमीन पर भी गिरा दिया। आज़म की इस हरकत को कुछ लोगों ने देखा तो उसे रोकने की कोशिश की। इस दौरान उसे रोकने वालों को न सिर्फ गंदी-गंदी गालियाँ दीं, बल्कि जान से मारने की भी धमकी भी दी।

इसके बाद आज़म खान वहाँ से भाग निकला। जब यात्रा में शामिल बाकी श्रद्धालुओं को इस हरकत की जानकारी मिली तो वो भड़क गए। नाराज लोगों ने सड़क पर जाम लगा दिया। वो आज़म की तत्काल गिरफ्तारी के साथ उस पर कठोरतम कार्रवाई की माँग करने लगे। घंटाघर पर होने वाली इस प्रदर्शन की वजह से लम्बा ट्रैफिक जाम लग गया। मामले की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची।

पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की, लेकिन वो अपनी माँगों पर अड़े रहे। आखिरकार पुलिस ने आज़म खान पर धार्मिक भावनाएँ भड़काने का मुकदमा दर्ज कर लिया। फरार आज़म को खोजने के लिए टीमों का गठन किया गया। आखिरकार देहरादून पुलिस ने आजम खान को देर रात शहर से गिरफ्तार कर लिया। आज़म देहरादून के माज़रा प्रधान वाली गली का रहने वाला है।

सामने आए वीडियो में पुजारी की वेश-भूषा में दिखने वाले एक व्यक्ति ने कहा कि आजम खान ने हिंदुओं को आपस में लड़ाने की कोशिश की थी। उस व्यक्ति ने कहा, “यह गाँधी पार्क ठेली लगाता है। पूर्व में यह पायरेटेड सीडी बेचने का काम करता था। इसका एक मुजफ्फरनगरवासी एक भाई वहाँ से लोगों को लाकर यहाँ पर अवैध रूप से बसाता है और छोटी-छोटी ठेलियाँ लगवाता है।”

उस व्यक्ति ने आगे कहा, “इसका एक भाई नाबालिग लड़की के ऊपर तेजाब फेंकने के मामले में जेल गया। बाबा साहेब आंबेडकर पार्क में हमारी हनुमान चालीसा चलती है। उस हनुमान चालीसा को लेकर आजम ने अपने फेसबुक पोस्ट में आपत्तिजनक शब्द लिखे थे। इसने हनुमान चालीसा को अराजकता और घिनौना बताया था। वह हमेशा ऐसा करता है, लेकिन पुलिस से बच जाता है।”

संदेशखाली के ‘शैतान’ को ED ने फिर भेजा नोटिस, 29 फरवरी को पूछताछ के लिए बुलाया: पीड़ितों की माँग- पकड़कर फाँसी पर लटकाओ, वर्ना जीने नहीं देगा

पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के संदेशखाली में जैसा हुआ, वैसा कोई दूसरा उदाहरण नहीं मिलता। जमीनों पर जबरन कब्जा, महिलाओं का यौन उत्पीड़न, बेगारी, मनरेगा मजदूरी तक छीन लेना और भी बहुत कुछ। लेकिन अब लोगों के सहने की शक्ति खत्म हो गई है, तो खुलकर लोग उस शैतान के खिलाफ अपनी आवाज उठा रहे हैं। संदेशखाली के उस शैतान शेख शाहजहाँ की तलाश राज्य पुलिस भी करने लगी है, केंद्रीय की एजेंसियाँ तो कर ही रही हैं, लुकआउट नोटिस भी जारी हो चुका है, इसके बावजूद वो छिपकर बैठा है और किसी के हाथ नहीं आ रहा है।

ईडी का नोटिस, लुकआउट सर्कुलर जारी

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, संदेशखाली के लिए अभिशाप बन चुके मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी टीएमसी नेता शेख शाहजहाँ के खिलाफ ईडी ने फिर से नोटिस जारी किया है। ईडी ने उसे 29 फरवरी को पूछताछ के लिए बुलाया है। ये अलग बात है कि वो ईडी की टीम पर हमले के बाद से ही फरार चल रहा है। उसके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर भी जारी किया जा चुका है, तो केंद्रीय एजेंसियाँ उसकी खोज कर रही हैं। फिर भी वो किसी के हाथ नहीं आ रहा है।

संदेशखाली में शेख शाहजहाँ और उसका पूरा गैंग जबरन जमीनों पर कब्जा करता था। महिलाओं की इज्जत लूटता था। पुरुषों को टॉर्चर किया जाता था और उन्हें जान से मारने की धमकी दी जाती थी, ताकि महिलाएँ अपना मुँह न खोलें और चुपचाप उसके गुर्गे उनका यौन उत्पीड़न करते रहे। उसके वारदातों की लिस्ट बहुत लंबी है, लेकिन वो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का करीबी होने के नाते किसी भी कानूनी पचड़े से बचा रहा और एकछत्र राज चलाए जा रहा था।

ममता सरकार के दो मंत्रियों ने किया दौरा

उसके अत्याचारों से परेशान जनता ने 8 फरवरी 2024 से उसके खिलाफ जो मोर्चा खोला है, तो अब राज्य सरकार को भी बैकफुट पर आना पड़ रहा है। एक तरफ तो मानवाधिकार संगठन, अनुसूचित जाति आयोग से लेकर विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी मौके पर पहुँच चुके हैं, तो बीजेपी की महिला टीम को रास्ते में ही रोक लिया गया। यहीं नहीं, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की टीम को पश्चिम बंगाल पुलिस हिरासत में भी ले चुकी है। तो दूसरी तरफ राज्य सरकार इस मामले को दबाने में लगी हुई है। अब ममता सरकार के दो मंत्रियों ने संदेशखाली का दौरा किया है। तो पश्चिम बंगाल की पुलिस भी संदेशखाली की महिलाओं की शिकायतों को दर्ज करने लगी है।

बता दें कि शेख शाहजहाँ के अत्याचारों से पीड़ित आम लोग अब खुलेआम सड़कों पर आ चुके हैं। उसके सहयोगियों द्वारा जमा की गई अवैध संपत्तियों को आग के हवाले कर रहे हैं। पीड़ितों ने शेख शाहजहाँ को फाँसी पर लटकाने की माँग की है। महिलाओं और प्रदर्शनकारियों का कहना है कि शेख शाहजहाँ अगर पकड़ा जाता है, तो भी वो अपनी पहुँच के दम पर बाहर आ जाएगा और वो फिर उन्हें जीने नहीं देगा। लोग माँग कर रहे हैं कि शेख शाहजहाँ को फाँसी पर लटका दिया जाए, क्योंकि वो जिएगा, तो बाकियों को जीने नहीं देगा।

दो दिन पहले नया मामला दर्ज

गौरतलब है कि ईडी ने शेख शाहजहाँ के खिलाफ दो दिन पहले ही नया मामला भी दर्ज किया है। उसके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के मामले के साथ ही राशन घोटाले में भी एफआईआर दर्ज की गई है। ईडी ने इसी केस में उसके घर पर नोटिस चस्पा किया है। जिसमें उसे 29 फरवरी को पूछताछ के लिए हाजिर होने को कहा गया है। वहीं, संदेशखाली में हालात की गंभीरता को देखते हुए लंबे समय से धारा-144 लगा दी गई है, तो बंगाल पुलिस ने भी संदेशखाली में कैंप लगाया है। इसके साथ ही पूरे इलाके में सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं, तो पीड़ियों को इस बात का भरोसा दिलाया जा रहा है कि उनके साथ न्याय होगा।