Home Blog Page 1148

लोकसभा चुनाव 2024: BSP छोड़ BJP में शामिल हुए रितेश पांडेय, पीएम मोदी संग लंच में हुए थे शामिल, राम मंदिर आंदोलन से जुड़ा था परिवार

लोकसभा चुनाव 2024 से पहले बहुजन समाज पार्टी को बड़ा झटका लगा है। साल 2020 में लोकसभा में पार्टी के नेता रहे और अंबेडकर नगर लोकसभा सीट से सांसद रितेश पाण्डेय ने बीएसपी से इस्तीफा दे दिया है। इसके साथ ही उन्होंने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है। रितेश पाण्डेय सांसद से पहले विधायक भी रहे थे। उसके पिता भी सांसद रहे हैं, तो चाचा पवन पाण्डेय को मजबूत ब्राह्मण नेताओं में शुमार किया जाता है। वो राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे हैं और बाबरी ढहाने के मामले में उन पर अलग से एफआईआर भी दर्ज की गई थी। खास बात ये है कि उनके चाचा पवन पाण्डेय, पिता राकेश पाण्डेय और खुद रितेश पाण्डेय अब अलग-अलग पार्टियों में पहुँच चुके हैं।

बीजेपी से जुड़ने के बाद रितेश पाण्डेय ने कहा, “मैं देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को देखते हुए विकसित भारत की कल्पना में अपना सहयोग देने के लिए इस बड़े मिशन के लिए बीजेपी के साथ जुड़ कर काम करने के लिए आगे आया हूँ। मेरे क्षेत्र में ही हम देखते हैं कि पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस वे, 2-2 औद्योगिक कॉरिडोर और 40 हजार से ज्यादा आवास की उपलब्ध कराना दिखाता है कि ये हमारे क्षेत्र को विकसित भारत की ओर बढ़ाने के लिए हो रहा है।”

उन्होंने कहा, “मैं बीएसपी में 15 साल से था। मैं मायावती जी की कार्यप्रणाली पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता। मैंने अपने इस्तीफे में विस्तार से इसकी वजहें बताई हैं। पिछले पाँच साल में मेरे लोकसभा क्षेत्र में जो काम हुए हैं, जो बदलाव हुए हैं। उसके लिए मैंने बीजेपी का साथ चुना है।”

पीएम मोदी के साथ लंच कर चुके हैं रितेश पाण्डेय

पीएम मोदी ने 9 फरवरी 2024 को रितेश पाण्डेय समेत 8 अलग-अलग पार्टियों के सांसदों के साथ संसद में लंच किया था। रितेश पाण्डेय ने एक्स पर इसके बारे में लिखा भी था और पीएम मोदी की जमकर तारीफ भी की थी। उन्होंने एक्स पर लिखा था, “आज लंच के लिए प्रधानमंत्री के जरिए आमंत्रित किया जाना और यह सीखना वास्तव में एक सम्मान की बात थी कि उन्होंने 2001 के भुज भूकंप से हासिल एक्सपीरियंस का इस्तेमाल कोविड-19 महामारी से निपटने के लिए किस तरह से किया। बहुत ही ज्यादा ज्ञानवर्धक चर्चा हुई। हमारे साथ बैठने के लिए आपका धन्यवाद!” इसके बाद से ही उनके बीजेपी में जाने की चर्चाएं शुरू हो गई थी।

बीएसपी से दिया इस्तीफा, मायावती को लिखा पत्र

इससे पहले, उन्होंने बीएसपी की मुखिया मायावती को पत्र लिखकर पार्टी के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने आरोप लगाया है कि लंबे समय से न तो उन्हें पार्टी की बैठकों में बुलाया जा रहा था और न ही उनसे किसी तरह का संवाद किया जा रहा था। इतना ही नहीं, पार्टी के पदाधिकारियों से मिलने के अनगिनत प्रयासों में भी उन्हें कामयाबी नहीं मिल रही थी। पत्र में पांडेय ने लिखा कि ऐसा लगता है कि पार्टी को मेरी सेवाओं की कोई जरूरत नहीं है। ऐसे में इस्तीफा देने के अलावा मेरे पास कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने मार्गदर्शन और राजनीति में मौके देने के लिए मायावती को आभार भी व्यक्त किया। वैसे, अंबेडनगर लोकसभा सीट से खुद मायावती सांसद रही हैं, ऐसे में उसी सीट से सांसद का पार्टी छोड़ना उनके लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है।

बता दें कि रितेश पाण्डेय का पूरा परिवार ही राजनीति में है। पिता राकेश पाण्डेय भी सांसद रह चुके हैं। उन्होंने 2022 में समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया था। चाचा पवन पाण्डेय शिवसेना से लेकर सपा, बसपा, बीजेपी सभी में रह चुके हैं। वहीं, रितेश पाण्डेय शुरू से बीएसपी से ही जुड़े रहे थे। साल 2012 के विधानसभा चुनाव में वो पहली बार मैदान में उतरे थे, लेकिन उन्हें हार झेलनी पड़ी थी। इसके बाद साल 2017 के विधानसभा चुनाव में पहली बार विधायक बने थे, और साल 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने अंबेडकर से बीजेपी के मुकुट बिहारी को हराया था। उन्हें बीएसपी ने 2020 में सदन में पार्टी का नेता बनाया था। हालाँकि उसके बाद से ही वो पार्टी में उपेक्षित चल रहे थे।

जिस मौलाना ने राष्ट्रीय ध्वज को बताया ‘शैतानी झंडा’ उसे फ्रांस ने देश से निकाला, गृह मंत्री ने कहा- किसी को नहीं छोड़ेंगे

फ्रांस के तिरंगे झंडे को शैतानी बताने वाले इमाम को देश से निकाल दिया गया। इस इमाम ने एक ऑनलाइन वीडियो में झंडे को शैतानी बताया था, इमाम को पहले फ्रांस की सुरक्षा एजेंसियों ने गिरफ्तार किया, फिर उसे देश से निकाल बाहर फेंका। यह पूरी कार्रवाई 12 घंटे के भीतर हो गई।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अफ्रीकी देश ट्यूनीशिया से 38 साल पहले फ्रांस आए महजूब महजूबी ने हाल ही में एक ऑनलाइन वीडियो में फ्रांस के नीले, लाल और सफ़ेद रंग की पट्टियों वाले तिरंगे झंडे को शैतानी (Satanic) बताया था। उसने कहा यह झंडा शैतानी है और इसमें अल्लाह से जुड़ा कोई महत्व नहीं है।

कुछ समय बाद इमाम की यह वीडियो वायरल ही गई और इमाम पर कार्रवाई की माँग होने लगी। इसके बाद इमाम को गिरफ्तार कर लिया गया और उसे वापस ट्यूनीशिया भेजे जाने की कार्रवाई फ्रांस सरकार ने अगले 12 घंटों में ही पूरी करके उसे देश निकाला दे दिया।

महजूबी फ्रांस के एक छोटे शहर में एक मस्जिद का इमाम था। हालाँकि, इमाम ने झंडे को शैतानी बताने को लेकर माफ़ी भी मांगी। उसने कहा कि उसकी जुबान फिसल गई थी जिसके कारण उसने ऐसा कहा। इस विषय में फ्रेंच मीडिया ने उसे देश निकाला दिए जाने सम्बंधित आदेश की कॉपी भी प्रकाशित की।

इसमें बताया गया कि इमाम महजूबी मात्र फ्रांस के झंडे के खिलाफ ही नहीं बल्कि यहूदियों के खिलाफ भी जहर उगलता था। बताया गया कि वह महिला विरोधी बातें करता था और जिहादी मानसिकता को बढ़ावा देता था। उसका दृष्टिकोण फ्रांस के मूल्यों से मेल नहीं खा रहा था।

इमाम के निकाले जाने को लेकर कहा, “कट्टरपंथी इमाम महजूब महजूबी को देश की सीमाओं से 12 घंटे के भीतर बाहर कर दिया गया है। यह दिखाता है कि नए इमिग्रेशन कानून के बिना यह संभव नहीं होता, यह फ्रांस को मजबूत करता है। हम किसी को ऐसे ही नहीं छोड़ देंगे।”

फ्रांस के सरकारी मीडिया फ्रांस24 ने बताया कि मौलाना ने इस निर्णय के खिलाफ अपील करने को कहा है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि उसके फ्रांस में पाँच बच्चे 1980 से लेकर अब तक हो चुके हैं। उसके बच्चों के पास फ्रांस की नागरिकता है, उसे फ्रांस में रहने की अनुमति दी गई थी लेकिन अब यह हटा ली गई है। इमाम वापस ट्यूनीशिया पहुँच गया है।

नाबालिग हिन्दू बच्ची को मारा, चटवाया अपना थूक, मोहम्मद मुश्ताक गिरफ्तार: सरपंच के साथ गाँव की महिलाओं ने देखा ‘तमाशा’, नहीं किया विरोध

बिहार के पूर्णिया में एक नाबालिग हिन्दू लड़की को थूक चटवाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि बच्ची की खम्बे में बाँध कर पिटाई भी की गई है। इस मामले में मोहम्मद मुश्ताक को आरोपित बनाया गया है। शिकायत में बताया गया है कि मुश्ताक ने बच्ची पर बेर चुराने का आरोप लगा कर उसे बाँस से फट्टे से दौड़ा-दौड़ा कर पीटा। शिकायत लेकर जाने पर मुश्ताक के परिजनों द्वारा घटना पर पर्दा डालने का प्रयास किया गया। पुलिस ने FIR दर्ज कर के बुधवार (21 फरवरी 2024) को आरोपित को गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया है। घटना सोमवार (19 फरवरी 2024) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना बायसी थानाक्षेत्र की है। पीड़िता बच्ची के परिजनों ने यहाँ शिकायत दर्ज करवाई है। बच्ची ने बताया कि 19 फरवरी को वह लगभग 15 अन्य छात्र-छात्राओं के साथ स्कूल जा रही थी। तभी रास्ते में एक बेर का पेड़ था, जिसमें कोई और लड़का बेर तोड़ रहा था। जब पीड़िता स्कूल में घुसने ही वाली थी, तभी वहाँ गेट के पास मोहम्मद मुश्ताक पहुँच गया। मुश्ताक ने बच्ची की पिटाई की और बैगन के खेत में ले जाकर कई लोगों के आगे उससे थूक चटवाया। पीड़िता ने कहा कि वो मुश्ताक का पैर पकड़ कर गिड़गिड़ा रही थी और खुद को छोड़ने की गुहार लगाती रही लेकिन उसे कोई फर्क नहीं पड़ा।

पीड़िता के साथ मौजूद एक अन्य छात्रा ने भी मुश्ताक की करतूत बताई है। छात्रा ने बताया कि पिटाई से पहले मुश्ताक ने बाँस लेकर बच्चों को काफी दूर तक दौड़ाया। बच्चे ज्यादा दूर तक भाग नहीं पाए तो मुश्ताक ने उन्हें पैरों से भी मारा।

पीड़िता के भाई ने दावा किया कि उनकी बहन को जब थूक चटवाया जा रहा था, तब गाँव का सरपंच भी मौके पर मौजूद था। कई महिलाएँ भी वहाँ मौजूद बताई जा रही हैं। इनमें से किसी ने भी मुश्ताक की इस हरकत पर कोई विरोध नहीं किया। उन्होंने यह भी दावा किया कि जब वो सब मुश्ताक की शिकायत लेकर उसके घर गए, तब वहाँ बच्चियों को ही झूठा बताया जाने लगा।


पीड़िता के परिजनों ने पुलिस से आरोपित मुश्ताक पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। पूर्णिया पुलिस ने इस मामले में FIR संख्या 33/2024 के तहत मोहम्मद मुश्ताक को नामजद किया है। उस पर IPC की धारा 323, 341, 354 और 509 के तहत कार्रवाई की गई है। मुश्ताक को गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया गया है। पूर्णिया पुलिस के मुताबिक आरोपित ने बच्ची को खम्बे में बाँध कर भी पीटा था।

बंगाल में TMC-कॉन्ग्रेस गठबंधन के खिलाफ अधीर रंजन चौधरी, वाम दलों के साथ बातचीत का ऐलान, मुश्किल में INDI गठबंधन

INDI गठबंधन की राह पश्चिम बंगाल में दिन-प्रतिदिन मुश्किल होती जा रही है। यहाँ विपक्षी पार्टियों के बीच समझौता नहीं हो पा रहा। जहाँ कॉन्ग्रेस का केन्द्रीय नेतृत्व चाहता है कि वह सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के साथ चुनाव लड़े, वहीं राज्य नेतृत्व वाम दलों के साथ गठबंधन करने के लिए जोर लगा रहा है।

वाम दलों के साथ गठबंधन के लिए जोर लगाने में सबसे आगे बंगाल कॉन्ग्रेस के मुखिया और कॉन्ग्रेस के लोकसभा में नेता अधीर रंजन चौधरी हैं। वह चाहते है कि राज्य में TMC के बजाय वाम दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ा जाए। उधर TMC ने एकला चलो नीति से हटने से इंकार कर दिया है।

गौरतलब है कि हाल ही में कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने इस बात के संकेत दिए थे कि बंगाल में TMC से सीट समझौते को लेकर उनकी पार्टी की बातचीत अभी भी जारी है। हालाँकि, उनके इस दावे को बंगाल कॉन्ग्रेस के मुखिया अधीर रंजन चौधरी ने नकार दिया।

अधीर रंजन चौधरी ने जयराम के दावे पर कहा, “मुझे नहीं मालूम जयराम रमेश ने क्या कहा है, लेकिन मैं बंगाल में कॉन्ग्रेस का अध्यक्ष हूँ और मुझे ऐसी किसी बातचीत की जानकारी नहीं है। मुझे नहीं मालूम कि मेरी अनुपस्थिति में कुछ हुआ हो और दूसरी बात TMC ने पहले ही बंगाल में सभी 42 सीटों पर अकेले लड़ने का ऐलान किया है।”

इसके बाद अधीर रंजन चौधरी ने बंगाल में कॉन्ग्रेस के वाम दलों के साथ गठबंधन को लेकर बातचीत की जानकारी दी। उन्होंने कहा, “मैंने CPM के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम से इस विषय बातचीत चालू कर चुका हूँ और कॉन्ग्रेस वाम दलों के साथ मिलकर बंगाल में चुनाव लड़ना चाहती है।”

उन्होंने इस दौरान बंगाल की मुख्यमंत्री और TMC की सुप्रीमो ममता बनर्जी पर INDI गठबंधन को लेकर यू टर्न लेने का आरोप लगाया। दूसरी तरफ जयराम रमेश के गठबंधन और सीट समझौते के दावे को TMC ने भी नकार दिया। उसने कहा कि बंगाल में सभी 42 सीटों पर चुनाव लड़ने को लेकर उसका स्टैंड एकदम साफ़ है।

गौरतलब है कि TMC सुप्रीमो ममता बनर्जी ने पिछले महीने बंगाल में अकेले ही चुनाव लड़ने का ऐलान किया था। दरअसल, अधीर रंजन चौधरी के TMC के साथ गठबंधन ना करने की वकालत के कई कारण है। वह लगातार बंगाल में बिगड़ती कानून व्यवस्था पर बोलते आए हैं और CM ममता बनर्जी को निशाने पर लेते रहे हैं।

वह बंगाल में राष्ट्रपति शासन की माँग भी कर चुके हैं। उनके और TMC के नेताओं के बीच बयानबाजी लगातार जारी रहती है। इसके अलावा, यदि बंगाल में TMC के साथ कॉन्ग्रेस का गठबंधन हो गया तो अधीर को अपनी बहरामपुर लोकसभा उसके खाते में जाती दिख रही है।

वहीं दूसरी तरफ अपने अवसान की ओर जा रहे वाम दलों के साथ गठबंधन की वकालत करने से उनके सभी हित सध जाएँगे। बंगाल में वाम दल और कॉन्ग्रेस इससे पहले भी 2021 विधानसभा चुनावों में गठबंधन में लड़ चुके हैं। उधर TMC का रुख स्पष्ट है कि वह कॉन्ग्रेस+वाम दल वाले मोर्चे के साथ नहीं जाएगी। ऐसे में बंगाल में INDI गठबंधन खंड खंड होता दिख रहा है।

यूपी पुलिस कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले में नीरज यादव गिरफ्तार: CM योगी ने किया था कड़ी कार्रवाई का वादा, 1 दिन में ही एक्शन शुरू

उत्तर प्रदेश में पुलिस भर्ती परीक्षा के रद्द होने के 24 घंटों के भीतर ही एसटीएफ ने पहली गिरफ्तारी कर ली है। एसटीएफ ने पेपर लीक कांड से जुड़े नीरज यादव को गिरफ्तार किया है। एसटीएफ की गिरफ्त में आया नीरज यादव बलिया जिले का रहने वाला है। उसी ने वॉट्सऐप पर पेपर को शेयर किया था। अब एसटीएफ इस खेल के दूसरे खिलाड़ियों को पकड़ रही है।

यूपी एसटीएफ ने ऐसे लोगों की लिस्ट बनाई है, जो पेपर लीक कांड से जुड़े हो सकते हैं। इसमें पश्चिमी यूपी के मोनू मालिक और कपिल जैसे बदमाशों की तलाश भी की जा रही है, इन्हें पश्चिमी यूपी और उत्तराखंड में पेपर लीक करने वाले गैंग का सरगना कहा जाता है। ये सबकुछ सीएम योगी आदित्यनाथ के उस आदेश के बाद हो रहा है, जिसमें उन्होंने कड़ी कार्रवाई के लिए कहा था। बता दें कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को छोड़ा नहीं जाएगा, उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नीरज यादव के पास से मूल परीक्षा के प्रश्न भी मिले हैं, जो उसे मथुरा से भेजे गए थे। यहाँ किसी उपाध्याय नाम के व्यक्ति का नाम सामने आ रहा है। हालाँकि वो अभी फरार बताया जा रहा है। यूपी एसटीएफ के सूत्रों की मानें, तो एसटीएफ ने ऐसे लोगों की लिस्ट तैयार की है, जो पेपर लीक कांड से जुड़े हो सकते हैं। इस मामले में एसटीएफ अभ्यर्थियों की ओर से मिले उन इनपुट्स पर भी ध्यान दे रही है, जो उन्होंने ई-मेल के माध्यम से उपलब्ध कराए हैं।

सीएम योगी ने किया था कड़ी कार्रवाई का वादा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने परीक्षा को रद्द करने का ऐलान करते हुए कहा था कि “उत्तर प्रदेश आरक्षी नागरिक पुलिस के पदों पर चयन के लिए आयोजित परीक्षा-2023 को निरस्त करने तथा आगामी 06 माह के भीतर ही पुन: परीक्षा कराने के आदेश दिए हैं। परीक्षाओं की शुचिता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। युवाओं की मेहनत के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी दशा में बख्शे नहीं जाएंगे। ऐसे अराजक तत्वों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई होनी तय है।”

बता दें कि यूपी पुलिस कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा 17 और 18 फरवरी को आयोजित की गई थी। 60,244 पदों के लिए आयोजित की गई इस भर्ती परीक्षा में करीब 50 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था, जबकि 48 लाख अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी थी। इस परीक्षा के बाद से ही शिकायतें आ रही थी कि इसके पेपर लीक हो गए थे और इस परीक्षा को रद्द करने की माँग को लेकर अभ्यर्थी प्रदर्शन भी कर रहे थे। हालाँकि अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ कर दिया है कि 17-18 फरवरी को हुई परीक्षा को पूरी तरह से रद्द कर दिया गया है, और अगले 6 माह के अंदर ही ये प्रक्रिया फिर से पूरी कर ली जाएगी।

‘भागते भूत की लंगोट भली’: कॉन्ग्रेस और राहुल गाँधी को उनके सहयोगियों ने ही दिखाई औकात, खुद की चाल में फँस गए ‘प्रिंस’

लोकसभा चुनाव 2024 सिर पर है और राजनीतिक दल अपने-अपने उम्मीदवारों को चयन में गुणा-भाग लगा रहे हैं। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली NDA से मुकाबला करने के लिए जोर-शोर से खड़ा किया गया कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाला INDI गठबंधन पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है। इस गठबंधन के नाम पर अब सिर्फ समाजवादी (सपा), राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और आम आदमी पार्टी (AAP) बचे हैं, जो अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग परिस्थितियों के तहत कॉन्ग्रेस के साथ गठबंधन किया है। बाकी के सहयोगी पहले ही कॉन्ग्रेस से किनारा कर चुके हैं।

समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी के साथ भी कॉन्ग्रेस का गठबंधन तभी मूर्त रूप ले पाया, जब उसे लग गया कि जितनी सीटों को वह उम्मीद कर रही है, उतनी लेने में वह कामयाब नहीं हो पाएगी। ऐसे में ‘भागते भूत की लंगोट भली’ वाली कहावत को चरितार्थ करते हुए सहयोगी दल ने जितने सीटें दीं, उसी पर आखिरकार उसे सहमत होना पड़ा।

समाजवादी पार्टी और कॉन्ग्रेस ने 20 फरवरी 2024 को घोषणा को सीट बँटवारे की घोषणा की। इस घोषणा के तहत उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी ने कुल 80 सीटों में 17 सीटें कॉन्ग्रेस को दी है, जबकि बाकी के 63 सीटों पर वह अपने छोटे सहयोगियों के साथ लड़ेगी। वहीं, कॉन्ग्रेस ने मध्य प्रदेश में समाजवादी पार्टी को लोकसभा की एक सीट दी है।

समाजवादी पार्टी और कॉन्ग्रेस के बीच गठबंधन के बाद जो 17 सीटें कॉन्ग्रेस को दी गई हैं, उनमें रायबरेली, अमेठी, कानपुर नगर, फतेहपुर सीकरी, बाँसगाँव, सहारनपुर, प्रयागराज, महाराजगंज, वाराणसी, अमरोहा, झाँसी, बुलंद शहर, गाजियाबाद, मथुरा, सीतापुर, बाराबंकी और देवरिया लोकसभा सीटें हैं। इनमें से वाराणसी सीट पर समाजवादी पार्टी ने पहले ही अपने उम्मीदवार की घोषणा कर दी थी, अब उन्हें शायद मैदान से हटना पड़े।

वहीं, कॉन्ग्रेस और आम आदमी पार्टी ने दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, चंडीगढ़ और गोवा में सीटों का बँटवारा किया है। इसके तहत दिल्ली की 7 लोकसभा सीटों में से 3 पर कॉन्ग्रेस पार्टी चुनाव लड़ेगी, जबकि 4 सीटों पर आम आदमी पार्टी चुनाव लड़ेगी। दिल्ली में आप को नई दिल्ली, पश्चिमी दिल्ली, दक्षिणी दिल्ली और पूर्वी दिल्ली की सीट दी गई है। वहीं, कॉन्ग्रेस चाँदनी चौक, उत्तर-पूर्वी दिल्ली और उत्तर पश्चिमी दिल्ली सीट पर चुनाव लड़ेगी।

इसी तरह गुजरात की 26 लोकसभा सीटों में से 24 पर कॉन्ग्रेस लड़ेगी और दो सीट पर आम आदमी पार्टी लड़ेगी। गुजरात में भरूच और भावनगर सीटें आम आदमी पार्टी को दी गई हैं। वहीं, हरियाणा में कॉन्ग्रेस पार्टी 10 में से 9 सीटों पर लड़ेगी, जबकि आम आदमी पार्टी एक सीट पर चुनाव लड़ेगी। हरियाणा की कुरुक्षेत्र लोकसभा सीट आम आदमी पार्टी को दी गई है। इसके अलावा चंडीगढ़ और गोवा में कॉन्ग्रेस अकेले चुनाव लड़ेगी। गोवा में जिस सीट से आम आदमी पार्टी ने उम्मीदवार की घोषणा की है, वो अपनी दावेदारी वापस ले लेगी। वहीं, पंजाब में दोनों ही पार्टियाँ अलग-अलग चुनाव लड़ेंगी।

अगर सीट बँटवारे के ऊपरी समीकरण को देखें तो यह INDI गठबंधन सिर्फ नाम का है। गोवा और पंजाब में कॉन्ग्रेस तथा आम आदमी पार्टी के बीच किसी तरह का गठबंधन नहीं हुआ। यानी समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी ने अपनी-अपनी शर्तों और जरूरत के हिसाब से कॉन्ग्रेस के साझेदारी की है। कॉन्ग्रेस के पास इसे मानने का कोई अन्य विकल्प भी नहीं था। अगर कॉन्ग्रेस इन पार्टियों के साथ गठबंधन नहीं करती तो उसे अकेले ही लोकसभा चुनाव में उतरना पड़ता और शायद यह भी संभव होता कि साल 2019 के लोकसभा चुनाव से भी ज्यादा उसे दुर्गति झेलनी पड़ती।

INDI गठबंधन को मूर्त रूप देने वाले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पहले ही गठबंधन छोड़कर NDA के साथ आ चुके हैं। रालोद और ममता बनर्जी की तृणमूल कॉन्ग्रेस जैसी पार्टियाँ पहले ही किनारा कर चुकी हैं। हालात ऐसे हो गए कि महाराष्ट्र में अशोक चव्हाण और राजस्थान के आदिवासी नेता महेंद्रजीत मालवीय जैसेे दिग्गज पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए। कमलनाथ जैसे दिग्गज की भाजपा में शामिल होने की अफवाहें उड़ने लगीं। हर तरह आफरा-तफरी का माहौल है।

अगर इस पूरी कहानी की पृष्ठभूमि में जाएँ तो साफ पता चलता है कि इस गठबंधन के नाकाम होने के पीछे भी कॉन्ग्रेस ही रही है। कॉन्ग्रेस अधिक से अधिक सीटों को हथियाने के चक्कर में सहयोगी दलों के साथ सीट बँटवारे को लगातार टालती रही। इससे गठबंधन में असंतोष की स्थिति पैदा हो गई। दरअसल, हिमाचल प्रदेश में भाजपा को हराकर सरकार बनाने के बाद कॉन्ग्रेस अति उत्साह में आ गई। उसे लगा कि राजस्थान, मध्य प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और छत्तीसगढ़ में अगर उसकी जीत होती है तो वह बेहतर तो सहयोगी दलों के साथ मोल-भाव के लिए बेहतर स्थिति में रहेगी।

हालाँकि, कर्नाटक और तेलंगाना में कॉन्ग्रेस को सफलता भी मिली और उसने भाजपा और BRS को हराकर सरकार बनाने में कामयाब रही। वहीं, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे अपने प्रमुख राज्यों को बचाने में नाकाम रही। इन राज्यों में हारने के बाद कॉन्ग्रेस अपनी शर्तों पर मोल-भाव करने की स्थिति में नहीं रह गई। इस बीच तृणमूल कॉन्ग्रेस ने बंगाल में अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया, जबकि पंजाब में आम आदमी की सरकार ने भी गठबंधन करने से मना कर दिया।

हालात ये हैं कि महाराष्ट्र में शरद पवार और उद्धव ठाकरे गठबंधन के लिए तैयार हैं, लेकिन उनके साथ सीट बँटवारे पर अभी भी सहमति नहीं बनी है। वहीं, झारखंड में झारखंड मुुक्ति मोर्चा और बिहार में आरजेडी के साथ भी अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। हालाँकि, इन राज्यों में अब कॉन्ग्रेस की तरफ से नहीं, इन क्षेत्रीय दलों द्वारा अपनी शर्तों पर सीट बँटवारे की नियम तय किए जा रहे हैं। ऐसे में कॉन्ग्रेस को सपा और आदमी पार्टी की तरह इसे स्वीकार करना ही पड़ेगा।

अब जबकि देश चुनाव के मुहाने पर खड़ा है, ऐसे में राहुल गाँधी न्याय यात्रा पर हैं। यह यात्रा अब तक असफल ही साबित हुई है। यह यात्रा जहाँ-जहाँ पहुँची वहाँ-वहाँ के कॉन्ग्रेस नेताओं ने या तो पार्टी छोड़ दी या फिर सहयोगी दलों ने उनसे किनार कर लिया। असम में कॉन्ग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने भाजपा सरकार को सदन में समर्थन देने का ऐलान कर दिया तो बंगाल में यात्रा पहुँचने के बाद ममता बनर्जी उनसे बिदक गईं। ममता ने आरोप लगाया कि राहुल गाँधी ने उन्हें बताया था कि यात्रा बंगाल में आ रही है और ना ही उन्हें इसमें शामिल होने के लिए बुलाया था।

हालांकि, समाजवादी पार्टी से गठबंधन होने के बाद अखिलेश यादव में यूपी पहुँची राहुल गाँधी की यात्रा में शामिल होने के लिए अपनी सहमति दी है। अखिलेश आज रविवार को आगरा में इस यात्रा में शामिल होंगे। महत्वपूर्ण बात यह भी है कि अब राहुल गाँधी की यात्रा से दूर रहीं उनकी बहन एवं पार्टी की वरिष्ठ नेता प्रियंका गाँधी भी अपने भाई का साथ देने के लिए यात्रा में शामिल हो गई हैं। लेकिन इस यात्रा का अब कोई खास महत्व नहीं रह गया है, जब सारे सहयोगी अलग हो गए। संभावना है कि बिहार और झारखंड में भी कॉन्ग्रेस और राजद तथा झामुमो की शर्तों को स्वीकार करना होगा, तभी शायद वहाँ बात बन पाए।

10-10 रुपए के स्टैम्प से करोड़ों की जमीन पर कब्जा, फौजी कॉलोनी को बना दिया रहमतनगर: हल्द्वानी की ही तरह रामनगर में भी बदल गई डेमोग्राफी

उत्तराखंड में डेमोग्राफी बदलाव की तमाम साजिशों के बीच हल्द्वानी के बाद अब पर्यटन नगरी रामनगर में भी सरकारी जमीनों को कब्ज़ाने का मामला सामने आया है। खुद वन विभाग ने 1000 से अधिक ऐसे परिवारों की सूची बनाई है, जो उनकी जबीन कब्जाए बैठे हैं। इन सभी ने न सिर्फ तमाम कागजात बनवा डाले हैं बल्कि इलाके को इस्लामी नामों से बुलाने लगे हैं। कब्ज़े की शुरुआत पॉलीथिन और लड़की के अस्थाई घरों को बना कर हो रही है। हालाँकि मामला संज्ञान में आते ही प्रशासन ने सक्रियता दिखाई है और कुछ हिस्सों से अवैध अतिक्रमण हटवाने शुरू किए हैं।

10 रुपए का स्टैम्प, करोड़ों की जमीन कब्ज़ा

दैनिक जागरण ने अपनी एक रिपोर्ट में रामनगर के पूंछड़ी इलाके का जिक्र किया है। यहाँ बाहर से आकर बसे मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा वन विभाग की जमीनों पर कब्ज़े की शिकायतें मिली हैं। खुद वन विभाग ने लगभग 1002 ऐसे परिवारों को चिन्हित किया है, जिन्होंने उनकी जमीन पर कब्ज़ा जमा लिया है। इन परिवारों ने 10 रुपए के स्टैम्प पेपर पर करोड़ों की जमीनें हड़प ली हैं।

कब्जाई जमीनों पर उन्होंने बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाएँ भी हासिल कर ली हैं। राजस्व क्षेत्र में बनी फौजी कॉलोनी में अपनी बहुलता वाले हिस्से को रहमतनगर का नाम भी दे दिया गया है। दावा है कि 800 बीघा पक्की जमीन पर कब्ज़े के बाद अब अतिक्रमण उसके आसपास के इलाकों में भी शुरू हो चुका है।

लेकर आए थे बुग्गी (बैल/भैंसगाड़ी), अब चला रहे डम्पर

दावा किया गया है रामनगर में इस क्षेत्र की जमीन पर कब्ज़े की शुरुआत साल 2004-05 में हुई थी। तब उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद और रामपुर आदि जिलों से आए ज्यादातर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने यहाँ जमीनें कब्जाईं। बाद में इसे 10-10 रुपए के स्टैम्प पेपर पर एक-दूसरे को बेचते चले गए।

यहाँ लकड़ियों और तिरपाल के मकानों की कतार देखी जा सकती है। कब्ज़े की चपेट में नई बस्ती नाम का एक इलाका भी है। शुरुआत में यहाँ मुस्लिम समुदाय के एकाध परिवार बुग्गी लेकर कामकाज के नाम पर आए थे, जिनकी आज ट्रकें और डम्पर चल रहे हैं।

अब रामनगर के पूंछड़ी इलाके में डेमोग्राफी इतना बदल चुकी है कि वहाँ ग्राम प्रधान मुस्लिम महिला ही है। अवैध कब्ज़ों को छुड़वाने के लिए वन विभाग हाईकोर्ट तक गया। कोर्ट के निर्णय के बाद साल 2017 में 36 अवैध पक्के निर्माणों को ध्वस्त भी किया गया था लेकिन थोड़े समय बाद हालात पहले से भी बदतर बन गए।

हालात यह है कि अतिक्रमण की चपेट में आए इस इलाके में कुल मतदाताओं की तादाद 3500 के पार हो चुकी है। पूंछड़ी के पूर्व ग्राम प्रधान ने भी दैनिक जागरण से बातचीत के दौरान 2005 के बाद हुए डेमोग्राफी बदलाव का खुद को साक्षी बताया।

उठी कार्रवाई की माँग तो सक्रिय हुआ प्रशासन

रामनगर में लगातार होते जा रहे इस कब्ज़े के खिलाफ भाजपा विधायक दीवान सिंह बिष्ट ने आवाज बुलंद की है। उन्होंने दैनिक जागरण से बात करते हुए कब्ज़े के लिए वन विभाग को भी दोषी बताया है।

दीवान सिंह ने बाहर से आकर अवैध तौर पर बसे लोगों की सख्ती से जाँच करवाए जाने की माँग उठाई है। फौजी कॉलोनी के एक हिस्से को रहमतनगर नाम दिए जाने पर भी उन्होंने हैरानी जताते हुए इस पर संज्ञान लेकर कार्रवाई का भरोसा दिया है।

बेट द्वारका के द्वारकाधीश मंदिर जाना हुआ आसान: PM मोदी ने भारत के सबसे लंबे केबल ब्रिज ‘सुदर्शन पुल’ का किया उद्धाटन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने शनिवार (24 फरवरी 2024) से अपने गृह राज्य गुजरात के दौरे पर हैं। वे रविवार (25 फरवरी 2024) की सुबह बेट द्वारका मंदिर पहुँचे और भगवान द्वारकाधीश का दर्शन-पूजन किया। मंदिर से लौटकर पीएम मोदी ने केबल आधारित भारत के सबसे लंबे पुल ‘सुदर्शन सेतु’ का उद्घाटन किया। लगभग 980 करोड़ रुपए की लागत से 2.32 किलोमीटर लंबा बना यह केबल ब्रिज ओखा को बेट द्वारका द्वीप से जोड़ता है।

सुदर्शन सेतु द्वारकाधीश मंदिर में आने वालों के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित होगा। इसके साथ ही ओखा मेनलैंड को बेट द्वारका द्वीप से जोड़ने से इस क्षेत्र में कनेक्टिविटी को बढ़ावा मिलेगी। सुदर्शन सेतु के निर्माण से पहले तीर्थयात्रियों को बेयत, द्वारकाधीश मंदिर तक पहुँचने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ता था। बेट द्वारका ओख बंदरगाह के पास एक द्वीप है, जो द्वारका से 30 किलोमीटर दूर है।

सुदर्शन सेतु को भगवद्गीता के श्लोकों और दोनों तरफ भगवान कृष्ण की छवियों से सजाया गया है। चार लेन वाले इस सिग्नेचर ब्रिज पर दोनों तरफ 50 मीटर चौड़े फुटपाथ हैं। फुटपाथ के ऊपरी हिस्सों पर सौर पैनल लगाए गए हैं, जो 1 मेगावाट बिजली भी पैदा करते हैं। बता दें कि पीएम मोदी ने अक्टूबर 2017 में इस पुल की नींव रखी थी। इस पुल से लक्षद्वीप के लोगों को भी लाभ मिलेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज गुजरात में अलग-अलग जगहों पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में शामिल होंगे। इस दौरान वे 52,250 करोड़ रुपए से अधिक की विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे। जिन परियोजनाओं की वे आधारशिला रखेंगे उनमें स्वास्थ्य, सड़क, रेल, ऊर्जा, पर्यटन, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज राजकोट, बठिंडा, रायबरेली, कल्याणी और मंगलागिरी में नवनिर्मित एम्स भी राष्ट्र को समर्पित करेंगे। इसके अलावा वे नई मुंद्रा-पानीपत पाइपलाइन परियोजना की आधारशिला भी रखेंगे। वह राजकोट-ओखा, राजकोट-जेतलसर-सोमनाथ और जेतलसर-वांसजालिया रेल विद्युतीकरण परियोजनाओं को राष्ट्र को समर्पित करेंगे।

इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 11,500 करोड़ रुपए से अधिक की 200 से अधिक स्वास्थ्य देखभाल परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे और राष्ट्र को समर्पित करेंगे। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल शाम (24 फरवरी 2024) को गुजरात पहुँचे थे। उन्होंने देर रात जामनगर में रोड शो भी किया था।

गणतंत्र दिवस पर किया था माँ सरस्वती का अपमान… राजस्थान की सरकारी महिला टीचर को कर दिया गया सस्पेंड

राजस्थान के बारां जिले में 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) के दिन एक महिला टीचर ने स्कूल परिसर में माँ सरस्वती का अपमान किया था। तब शिक्षिका हेमलता बैरवा ने माता सरस्वती को शिक्षा की देवी मानने से इनकार करते हुए उनकी तस्वीर को मंच पर लगाने से रोक दिया था। इस हरकत का ग्रामीणों ने विरोध किया था, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल भी हुआ था। अब राजस्थान सरकार ने शुक्रवार (23 फरवरी 2024) को अरोपिता टीचर को सस्पेंड कर दिया है। शिक्षा विभाग हेमलता बैरवा पर हिन्दू भावनाओं के अपमान के आरोप में अनुशासनात्मक कार्रवाई करने पर भी विचार कर रहा है।

बारां के जिला शिक्षा अधिकारी पियूष कुमार शर्मा ने शुक्रवार को एक आधिकारिक पत्र जारी किया है। इस पत्र में शिक्षिका हेमलता बैरवा पर कार्रवाई की संस्तुति की गई है। पत्र में बताया गया है कि राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय लकडाई (बांदीपुरा) किशनगंज में कार्यरत लेवल 1 शिक्षिका हेमलता बैरवा के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई पर विचार चल रहा है। उन्हें राजस्थान सिविल सेवा नियम 1958 के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। हेमलता बैरवा को ट्रांसफर करके बीकानेर मुख्यालय से अटैच कर दिया गया है।

बारां के जिला शिक्षा अधिकारी के इस पत्र में स्कूल के प्रिंसिपल को भी आदेश मिला है कि वो तत्काल प्रभाव से हेमलता बैरवा को वहाँ से कार्यमुक्त करें। इस आदेश की प्रति शासन से लेकर सभी प्रशासनिक आधिकारियों को भी प्रेषित की गई है। बारां जिले के शिक्षा अधिकारी का यह भी कहना है कि हेमलता बैरवा के खिलाफ धार्मिक भावनाओं को भड़काने और ठेस पहुँचाने की शिकायत मिली थी। इसकी प्रारम्भिक जाँच में उन्हें दोषी पाया गया, जिसकी वजह से हेमलता को निलंबित किया जा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने खुद इस घटना का संज्ञान लिया था। 22 फरवरी (गुरुवार) को उन्होंने बारां जिले में एक जनसभा को सम्बोधित करते हुए इस घटना का जिक्र किया था। तब मंत्री ने कहा, “कुछ लोग खुद को इतना महत्व देते हैं, उनकी चाल अभी खत्म नहीं हुई। वो पूछते हैं कि स्कूल में देवी सरस्वती का क्या योगदान है। जिसने भी इस क्षेत्र में ऐसा कहा है, मैं उसे निलंबित कर देता हूँ।”

शिक्षा मंत्री के इसी बयान के एक दिन बाद बारां के जिला शिक्षा अधिकारी ने हेमलता बैरवा पर कार्रवाई का आदेश जारी कर दिया। तब शिक्षिका हेमलता बैरवा का वीडियो भी सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था।

बताते चलें कि 26 जनवरी 2024 को गणतंत्र दिवस के मौके पर बारां के सरकारी स्कूल में कार्यरत शिक्षिका हेमलता बैरवा ने मंच पर माँ सरस्वती की प्रतिमा लगाए जाने का विरोध किया था। तमाम ग्रामीणों की गुजारिश और विरोध को दरकिनार करते हुए उन्होंने माँ सरस्वती को शिक्षा की देवी मानने से इनकार कर दिया था।

महिलाओं से रेप और जमीनों पर सिर्फ कब्जा ही नहीं करता था शाहजहाँ शेख, मनरेगा मजदूरों की छिन लेता था मजदूरी: बंगाल के संदेशखाली से लेकर मालदा तक रेप और हत्या

पश्चिम बंगाल के संदेशखाली में महिलाओं के साथ शोषण की एक से बढ़कर एक घटनाओं का खुलासा हो रहा है। इन सबमें सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) का नेता शाहजहाँ शेख शामिल है। शाहजहाँ शेख मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का भी करीबी बताया जाता है। अब पता चला है कि वह इलाके में मनरेगा मजदूरों के पैसे भी छिन लिया करता था। इतना ही नहीं, पार्टी के खिलाफ वोट करने पर उन्हें प्रताड़ित भी करता था।

शाहजहाँ शेख पर संदेशखाली की महिलाओं ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। महिलाओं का कहना है कि पार्टी बैठक के नाम पर शाहजहाँ शेख और उसके गुर्गे सभी लोगों को बुलाते थे और बाद में मर्दों को घर भेज दिया जाता था, महिलाओं को रख लिया जाता था और उनके साथ गलत हरकतें की जाती थीं। 18-40 साल तक की उम्र की महिलाओं को शिकार बनाया जाता था।

वहीं, शाहजहाँ शेख और उसके गुर्गों पर लोगों की जमीन पर अवैध कब्जा करने का भी आरोप है। शाहजहाँ शेख पश्चिम बंगाल के राशन घोटाले का भी आरोपित है। इसी सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उसके घर पर छापेमारी की थी। हालाँकि, इस दौरान अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों पर हमला कर दिया गया था।

संदेखाली में शाहजहाँ के जुल्मों की शिकार अधिकांश महिलाएँ अनुसूचित जनजाति समुदाय की हैं। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) भी घटनास्थल पर गया है। वहाँ आयोग को पता चला कि शाहजहाँ और उसके गुर्गे गरीब जनजातीय परिवारों से उनकी मनरेगा मजदूरी जबरन छीन लेते थे। अगर किसी के पास पैसे नहीं बचे होते तो उन्हें उधार लेकर देने के लिए धमकाया जाता था।

शिकायतकर्ताओं ने राष्ट्रीय जनजाति आयोग के उपाध्यक्ष अनंत नायक के नेतृत्व में गई तीन सदस्यीय टीम को बताया कि शाहजहाँ शेख और उसके गुर्गों पर पश्चिम बंगाल पुलिस का हाथ है। वहीं, नायक ने कहा कि पैनल को शाहजहाँ और उसके सहयोगियों द्वारा आदिवासी महिलाओं के यौन उत्पीड़न और जमीन हड़पने की 50 से अधिक शिकायतें मिलीं।

नायक ने कहा कि शिकायतकर्ताओं ने जाँच टीम को बताया कि आरोपित और उसके सहयोगियों ने चुनाव में दूसरी पार्टियों को वोट देने वाले लोगों को प्रताड़ित किया था। इसके अलावा, शाहजहाँ और उसके सहयोगी स्थानीय महिलाओं को देर रात बैठकों के लिए आने के लिए कहते थे और जो लोग उनकी माँगें नहीं मानते थे, उनके परिवार के सदस्यों को प्रताड़ित करते थे।

ये सिर्फ संदेशखाली का हाल नहीं है। यहाँ विधानसभा और लोकसभा चुनावों के बाद बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थी। इस हिंसा में बड़े पैमाने पर हिंदू समुदाय के लोगों को निशाना बनाया गया था। उन आरोप लगाया गया कि उन्होंने सत्ताधारी पार्टी को छोड़कर भाजपा को वोट दिया। इसलिए उनके घरों को जला दिया गया था। इसको लेकर राजनीतिक हिंसा भी फैली थी।

बात सिर्फ यहीं तक नहीं है। बंगाल में लड़कियों का अपहरण और रेप एवं हत्या की घटनाएँ जैसे आम सी हो गई हैं। आए दिन कहीं ना कहीं से नाबालिग लड़कियों तक की रेप के बाद हत्या की घटनाएँ सामने आती रहती हैं। अब मालदा जिले में नौवीं कक्षा की एक लड़की की अधनंगी लाश मिली है। पहचान मिटाने के लिए उसके सिर को कुचल दिया गया है। परिजनों का आरोप है कि रेप के बाद हत्या की गई है।

जनजातीय समुदाय से ताल्लुक रखने वाली यह लड़की गुरुवार (22 फरवरी 2024) से लापता थी। उसका शव शुक्रवार (23 फरवरी) को मालदा के एक ईंट भट्टे से बरामद किया गया। जानकारी के मुताबिक, मृतक के चेहरे को कुचल दिया गया था। पीड़ित परिवार का आरोप है कि नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार किया गया और फिर उसकी हत्या कर दी गई।

इससे पहले 15 फरवरी 2024 को मालदा के ही मोथाबारी इलाके में 25 साल की एक महिला का अर्धनग्न शव मक्के के एक खेत में मिला था। पीड़िता की पहचान कल्पना मंडल के रूप में हुई थी। वह सरस्वती पूजा (14 फरवरी) की शाम को लापता हो गई थी। परिजनों ने कहा था कि मृतक के साथ बलात्कार के बाद बेरहमी से उसकी हत्या कर दी गई। परिजनों का दावा है कि मृतक के शरीर पर हमले के निशान और चाकू के कई घाव थे।