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Video: आम आदमी पार्टी के पार्षद को महिलाओं ने चप्पलों से पीटा, थाने में घुसकर बचाई जान, पिटाई की वजह कर देगी हैरान

मध्य प्रदेश के श्योपुर में आम आदमी पार्टी के एक पार्षद को महिलाओं के समूह ने जमकर पीटा है। महिलाओं ने पार्षद पर आरोप लगाए कि वो भ्रष्टाचारी है और पीएम आवास के लिए मिलने वाले सरकारी पैसों में से 20 हजार रुपए की रिश्वत माँग रहा था। महिलाओं ने पार्षद को नगर पालिका कार्यालय के नीचे ही घेर लिया। महिलाओं ने बीच-बाजार में पार्षद की ऐसी पिटाई कि उसे अपनी जान बचाने के लिए थाने में भागना पड़ा। इसके बाद पुलिस ने महिलाओं के खिलाफ केस दर्ज किया है।

आज तक की रिपोर्ट के मुताबिक, ये मामला वार्ड नंबर 14 के पार्षद जुगल मेहरा से जुड़ा है। वो आम आदमी पार्टी की तरफ से चुनाव जीतकर पार्षद बने हैं। लेकिन महिलाओं का आरोप है कि जुगल मेहरा पीएम आवास योजना के तहत मिलने वाले पैसों में से 20 हजार की रिश्वत माँगता है। जिसमें 10 हजार रुपए पहले और 10 हजार रुपए काम होने के बाद।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटनाक्रम के मुताबिक शनिवार शाम को नगर पालिका में विकसित भारत संकल्प यात्रा का कार्यक्रम रखा गया था। इस कार्यक्रम में वार्ड 14 के पार्षद जुगल मेहरा भी पहुँचे थे, जिनपर महिलाओं ने पीएम आवास की किस्त दिलाने के एवज में रिश्वत माँगने का आरोप लगाया। और फिर उनकी पिटाई शुरू कर दी। सरे राह महिलाओं ने पार्षद के कुर्ते का काॅलर पकडकर खींच लिया और पहले चप्पलों से, फिर थप्पड़ जड़ कर पिटाई कर दी। इस दौरान वहाँ मौजूद लोगों ने बीच बचाव भी किया लेकिन महिलाओं से घिरे पार्षद ने कोतवाली थाने में भागकर अपनी जान छुड़ाई।

एक्स यूजर राकेश कुमार पटेल ने इस घटना का वीडियो शेयर किया है। उन्होंने लिखा, “श्योपुर नगरपालिका में AAP(आम आदमी पार्टी) के पार्षद की महिलाओं ने चप्पल से पिटाई कर दी। महिलाओं ने पार्षद पर पीएम आवास योजना की किश्त बैंक खाते में डलवाने के बदले रिश्वत माँगने का आरोप लगाया है।”

पार्षद की पिटाई की खबर मिलने के बाद नगर पालिका अध्यक्ष के पति सुजीत गर्ग और दूसरे पार्षद एवं पार्षद प्रतिनिधि भी कोतवाली पहुँच गए। एसडीओपी राजीव कुमार गुप्ता का कहना है कि मामले की जाँच शुरू कर दी गई है।

पति ने समझा उपन्यास लेकिन पत्नी पढ़ रही थी बाइबिल… हनुमान चालीसा के कारण छोड़ा घर: बच्चों को ईसाई बनाने का डर, पुलिस से पति की गुहार

राजस्थान के उदयपुर से ईसाई में धर्मान्तरण का एक मामला सामने आया है। यहाँ एक पति ने अपनी बीवी के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में पति ने कहा है कि उसकी पत्नी ईसाई बन गई है और आशंका है कि अब नाबालिग बेटे की भी जल्द ही धर्म परिवर्तन कराएगी। महिला शुक्रवार (23 फरवरी 2024) से अपने 12 वर्षीय बेटे को लेकर घर से गायब है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला उदयपुर के घंटाघर थाना क्षेत्र घंटाघर का है। यहाँ छबिला भेरू रोड पर ज्वैलरी का काम करने वाले प्रकाश सोनी अपने परिवार के साथ रहते हैं। परिवार में उनकी पत्नी के अलावा 12 साल का एक बेटा और 14 साल की एक बेटी है। पुलिस को दी गई शिकायत में उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी रेखा कुछ समय से चर्च जा रही है और बाइबिल सहित ईसाई मजहब की पुस्तकें पढ़ रही है।

पति ने आरोप लगाया कि कुछ दिन पहले से उनकी पत्नी रेखा दोनों बच्चों को भी ईसाई पद्धति से रहने की शिक्षा देने लगी है। इस पर उन्होंने अपनी पत्नी को समझाने की कोशिश की, लेकिन उस पर कोई असर नहीं पड़ा। वो जब भी पत्नी को समझाने की कोशिश करते, दोनों के बीच झगड़ा हो जाता और मारपीट तक की नौबत आ थी। रेखा में पूजा-पाठ करने पर भी नाक-भौं सिकोड़ने लगी थी।

इतना ही नहीं, रेखा घर आने वाले रिश्तेदारों को भी ईसाई मत अपनाने के लिए कहने लगी थी। एक दिन मंगलवार को प्रकाश अपने घर में हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे थे। तभी रेखा घर छोड़ कर चली गईं थी। उसके बाद से वह अलग रह रही है। रेखा उनसे अलग रहते हुए करीब एक महीने हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि उनके साथ उनके बुजुर्ग माता-पिता और दो बच्चे रहते हैं।

शिकायत में प्रकाश ने आगे लिखा कि शुक्रवार (23 फरवरी 2024) को उनकी बेटी और बेटा एक साथ पढ़ने स्कूल गए थे। शाम को बेटी तो वापस लौट आई, लेकिन बेटा नहीं लौटा। जब उन्होंने पता किया तो बेटा अपनी माँ रेखा के पास मिला। प्रकाश का आरोप है कि उनकी पत्नी जल्द ही उनके बेटे का भी धर्मान्तरण करवा सकती है। फ़िलहाल रेखा उदयपुर में ही अपने चचेरे भाई के घर रहती है।

परिवाद के माध्यम से दी गई शिकायत में प्रकाश सोनी ने यह भी बताया है कि उन्होंने 20 फरवरी को ही स्थानीय पुलिस को अपनी पत्नी की हरकतों के बारे में लिखित तौर पर सूचित कर दिया था। हालाँकि, तब उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाई थी। उदयपुर के ACP ने परिवाद का संज्ञान लेकर अधीनस्थों को कार्रवाई का आदेश दिया है।

जाँच के दौरान पुलिस ने रेखा सोनी के बयान दर्ज किए हैं। रेखा ने अपने पति के आरोपों को सिरे से ख़ारिज कर दिया है। उन्होंने ईसाई में अपने धर्मान्तरण के दावों को भी बेबुनियाद बताया है। पुलिस ने प्रकाश सोनी और बच्चों के बयान भी दर्ज किए हैं। थाना प्रभारी भवानी सिंह के मुताबिक, मामले की गहनता से जाँच की जा रही है।

मुस्लिम शादी में हिन्दू कार्ड, वैदिक मंत्र और हिन्दू प्रतीक चिन्ह, जानें क्या है सच्चाई

सोशल मीडिया पर मुस्लिम शादी का एक कार्ड वायरल हो रहा है। इसमें दूल्हा-दूल्हन के नाम मुस्लिम जबकि कार्ड की शैली हिन्दू है। इसमें वैदिक मंत्र भी लिखे हुए हैं और हिन्दू प्रतीक चिन्ह बने हुए हैं। कार्ड में सभी रिश्तेदारों के नाम भी मुस्लिम हैं। इस कार्ड के विषय में अब पूरी जानकारी सामने आई है।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा शादी का यह कार्ड बहराइच के कैसरगंज के सफीपुर के रहने वाले समीर अहमद का है। समीर अहमद कैसरगंज के सफीपुर के रहने वाले हैं जबकि उनका विवाह जरवल रोड की रहने वाली सानिया खातून से होना है। यह शादी 29 फरवरी, 2024 को होनी है। इस कार्ड में इसे निकाह नहीं बल्कि परिणय बंधन बताया गया है।

हिन्दुतान लाइव की रिपोर्ट के अनुसार, उजहुल कमर ने अपने बेटे के निकाह के लिए दो कार्ड छपवाए हैं। इनमें से जो हिन्दू कार्ड वायरल हो रहा है, वह उजहुल ने अपने हिन्दू परिचितों को भेजने के लिए छपवाया है। उन्होंने हिन्दुस्तान से बात करते हुए बताया है कि यह कार्ड केवल उनके हिन्दू परिचितों और पड़ोसियों को बाँटा जाएगा।

उन्होंने अपने मुस्लिम रिश्तेदारों और पहचान वालों के लिए एक और कार्ड छपवाया है जो कि उर्दू में है। यह कार्ड हिन्दू नहीं पढ़ सकेंगे। हिन्दुओं को दिए गए निमंत्रण में प्रीतिभोज की तारीख 28 फरवरी, 2024 को रखा गया है। उजहुल ने बताया है कि हिन्दुओं के लिए प्रीतिभोज भी उन्होंने अलग रखा है।

उजहुल कमर ने बताया है कि उनके यह अलग कार्ड छपवाने के कारण अब तक उन्हें कई फ़ोन आ चुके हैं। सभी उनसे इस विषय में पूछ रहे हैं। गौरतलब है कि हिन्दुओं के विवाह निमंत्रणों में वैदिक मंत्र, गणेश भगवान तथा हिन्दू प्रतीक चिन्ह शामिल होते हैं। मुस्लिमों के निकाह में कार्ड अधिकतर उर्दू में छापे जाते हैं। इनमें ऐसे कोई प्रतीक या छवियाँ नहीं होती।

भिंड के RSS ऑफिस में पिन लगा हैंड ग्रेनेड मिलने से हड़कंप, बॉल समझकर परिसर में खेल रहे थे बच्चे: बम निरोधक दस्ता ले गई अपने साथ

मध्य प्रदेश के भिंड में स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के ऑफिस कंपाउंड में हैंड ग्रेनेड मिला है। इस हैंड ग्रेनेड से बच्चे खेल रहे थे। इस हैंड ग्रेनेड के मिलने से सनसनी फैल गई। भिंड पुलिस ने मुरैना से बम डिस्पोजल स्क्वॉयड को बुलाया, जिसमें पता चला है कि ये हैंड ग्रेनेड तीन दशक से भी ज्यादा पुराना है और ‘डेड’ हो चुका है। ऐसे में इससे डरने वाली कोई बात नहीं।

जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार (24 फरवरी 2024) को बजरिया इलाके में स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के ऑफिस कंपाउंड में कुछ बच्चे खेल रहे थे। कार्यालय के पदाधिकारी बाहर गए हुए थे, ऐसे में कार्यालय खाली पड़ा था। इसी दैरान बच्चों को गेंद के आकार की वस्तु मिली, जो हैंड ग्रेनेड निकली। इसके बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। इस हैंड ग्रेनेड में पिन लगा हुआ था। हालाँकि ये हैंड ग्रेनेड काफी पुराना था। इस बीच मौके पर पहुँची ने जाँच की, तो ये गैंड ग्रेनेड ‘डेड’ मिला, यानि ये फट नहीं सकता था। मुरैना पुलिस के बम डिस्पोजल दस्ते ने भी मौके पर जाँच की।

भिंड पुलिस ने बताया कि रात करीब 10 बजे हैंड ग्रेनेड की सूचना मिली थी। वहाँ 12 बजे रात में ही एसपी डॉ असित यादव भी मौके पर पहुँच गए। इसके बाद स्निफर डॉग भी मौके पर पहुँचा। वहीं, मुरैना से बम डिस्पोजल स्क्वॉयड की टीम रात 2 बजे मौके पर पहुँची और हैंड ग्रेनेड को कब्जे में ले लिया है। इस बीच मौके पर स्थानीय विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाहा भी पहुँचे थे।

एसपी असित यादव ने बताया कि ये हैंड ग्रेनेड संभवत; उस जगह से यहाँ पहुँची है, जहाँ से कार्यालय में मिट्टी डलवाई गई थी। वो जगह संभवत: पहले पुलिस का ट्रेनिंग सेंटर था। उस इलाके को चांदमारी भी कहते हैं। वहां से मिट्टी भरने के समय ही ये हैंड ग्नेनेड भी मिट्टी के साथ ही आ गया होगा। हालाँकि ये निष्क्रिय है और किसी तरह का नुकसान नहीं पहुँचा सकता।

दिल्ली पुलिस के हत्थे चढ़ा प्रतिबंधित इस्लामी संगठन SIMI का आतंकी हनीफ शेख, 22 साल से था फरार, भुसावल में पढ़ाता था उर्दू

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ़ इंडिया (SIMI) के एक आतंकी को गिरफ्तार किया है। यह आतंकी 22 वर्षों से फरार था। उसके खिलाफ राजद्रोह और UAPA के तहत मामला चल रहा था। वह वर्तमान में महाराष्ट्र के भुसावल में एक स्कूल में उर्दू पढ़ा रहा था। कोर्ट ने उसे भगौड़ा घोषित किया हुआ था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने जिस आतंकी को गिरफ्तार किया है, उसका नाम हनीफ शेख है। वह SIMI की इस्लामिक मूवमेंट नाम की पत्रिका का उर्दू सम्पादक था और अपने कट्टर विचारों से बीते ढाई दशकों में बड़ी संख्या में मुस्लिम युवकों को जिहादी बना रहा था। उसकी तलाश पिछले 4 साल से लगातार जारी थी।

दिल्ली पुलिस हनीफ शेख को पकड़ने के लिए देश के कई हिस्सों में जा चुकी थी और उसके विषय में जानकारी जुटा रही थी। उसको पकड़ने के लिए प्रयास करने पर दिल्ली पुलिस को पता चला था कि वह वर्तमान में महाराष्ट्र के भुसावल में है। हनीफ यहाँ एक उर्दू स्कूल में पढ़ा रहा था और साथ ही उसने अपना नाम हनीफ हुडई से बदल कर मोहम्मद हनीफ कर लिया था।

दिल्ली पुलिस ने उसे दबोचने के लिए भुसावल में अपनी एक टीम भेजी थी। यह टीम लगातार यहाँ जानकारी इकट्ठा कर रही थी। इसने एक दिन जाल बिछा कर हनीफ को पकड़ लिया। हनीफ ने पुलिस के चंगुल के भागने की कोशिश भी कि लेकिन वह कामयाब नहीं हो पाया।

हनीफ के खिलाफ वर्ष 2001 में UAPA और अन्य धाराओं में मामला दर्ज हुआ था। सितम्बर, 2001 में दिल्ली के जामिया नगर में SIMI आतंकी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे। दिल्ली पुलिस ने यहाँ जब छापा मारा तो अधिकांश लोग भाग गए थे। प्रेस कॉन्फ्रेंस से बड़ी मात्रा में मुस्लिमों के आतंक के रास्ते पर ले जाने वाला साहित्य बरामद हुआ था। यहाँ से भागने वालों में हनीफ शेख भी शामिल था। इसकी तब से ही तलाश चल रही थी।

दिल्ली पुलिस के हत्थे चढ़ा हनीफ शेख SIMI के थिंक टैंक का हिस्सा था। वह वह वर्तमान में वहादत ए इस्लाम नाम के इस्लामिक संगठन को बढ़ा रहा था। वह चन्दा माँग कर आतंकी गतिविधियों की फंडिंग करवाने में भी संलिप्त था। अब पुलिस उससे पूछताछ कर रही है और उसके लिंक निकालने की कोशिश कर रही है। पुलिस का कहना है कि उसे अब अलग-अलग प्रदेशों में भी पूछताछ के लिए ले जाया जाएगा।

हिंदू बन संत रविदास की शोभा यात्रा में घुसा आज़म खान, भगवान राम का फाड़ा बैनर: रोकने वालों को दी जान से मार डालने की धमकी, देहरादून में गिरफ्तार

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में शुक्रवार (23 फरवरी 2024) को संत रविदास की शोभा यात्रा के दौरान विवाद खड़ा हो गया। यह विवाद आज़म खान नाम के युवक द्वारा भगवान राम का बैनर फाड़ने के चलते हुआ। बताया जा रहा है कि आज़म खान हिन्दू बनकर शोभा यात्रा में शामिल हुआ था। हिन्दू संगठनों के दबाव के बाद पुलिस ने आजम के खिलाफ मुकदमा दर्ज करके उसे गिरफ्तार कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शुक्रवार को देहरादून में संत रविदास की शोभायात्रा निकाली गई थी। इसमें हिन्दू समाज के तमाम श्रद्धालु मौजूद थे। यात्रा में भगवान राम सहित कई अन्य देवी-देवताओं के बैनर लगे हुए थे। आरोप है कि इसी यात्रा में आज़म खान हिन्दू बनकर शामिल हुआ था। जब शोभा यात्रा घंटाघर के पास पहुँची तब आजम खान ने साम्प्रदायिक माहौल खराब करने की कोशिश की।

आरोप है कि उसने भगवान राम के बैनर फाड़ डाले। भगवान राम का यह पोस्टर अयोध्या में बने रामलला के मंदिर से जुड़ा हुआ था। आज़म खान ने पोस्टर को न सिर्फ फाड़ डाला था, बल्कि उसे नीचे जमीन पर भी गिरा दिया। आज़म की इस हरकत को कुछ लोगों ने देखा तो उसे रोकने की कोशिश की। इस दौरान उसे रोकने वालों को न सिर्फ गंदी-गंदी गालियाँ दीं, बल्कि जान से मारने की भी धमकी भी दी।

इसके बाद आज़म खान वहाँ से भाग निकला। जब यात्रा में शामिल बाकी श्रद्धालुओं को इस हरकत की जानकारी मिली तो वो भड़क गए। नाराज लोगों ने सड़क पर जाम लगा दिया। वो आज़म की तत्काल गिरफ्तारी के साथ उस पर कठोरतम कार्रवाई की माँग करने लगे। घंटाघर पर होने वाली इस प्रदर्शन की वजह से लम्बा ट्रैफिक जाम लग गया। मामले की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची।

पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की, लेकिन वो अपनी माँगों पर अड़े रहे। आखिरकार पुलिस ने आज़म खान पर धार्मिक भावनाएँ भड़काने का मुकदमा दर्ज कर लिया। फरार आज़म को खोजने के लिए टीमों का गठन किया गया। आखिरकार देहरादून पुलिस ने आजम खान को देर रात शहर से गिरफ्तार कर लिया। आज़म देहरादून के माज़रा प्रधान वाली गली का रहने वाला है।

सामने आए वीडियो में पुजारी की वेश-भूषा में दिखने वाले एक व्यक्ति ने कहा कि आजम खान ने हिंदुओं को आपस में लड़ाने की कोशिश की थी। उस व्यक्ति ने कहा, “यह गाँधी पार्क ठेली लगाता है। पूर्व में यह पायरेटेड सीडी बेचने का काम करता था। इसका एक मुजफ्फरनगरवासी एक भाई वहाँ से लोगों को लाकर यहाँ पर अवैध रूप से बसाता है और छोटी-छोटी ठेलियाँ लगवाता है।”

उस व्यक्ति ने आगे कहा, “इसका एक भाई नाबालिग लड़की के ऊपर तेजाब फेंकने के मामले में जेल गया। बाबा साहेब आंबेडकर पार्क में हमारी हनुमान चालीसा चलती है। उस हनुमान चालीसा को लेकर आजम ने अपने फेसबुक पोस्ट में आपत्तिजनक शब्द लिखे थे। इसने हनुमान चालीसा को अराजकता और घिनौना बताया था। वह हमेशा ऐसा करता है, लेकिन पुलिस से बच जाता है।”

संदेशखाली के ‘शैतान’ को ED ने फिर भेजा नोटिस, 29 फरवरी को पूछताछ के लिए बुलाया: पीड़ितों की माँग- पकड़कर फाँसी पर लटकाओ, वर्ना जीने नहीं देगा

पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के संदेशखाली में जैसा हुआ, वैसा कोई दूसरा उदाहरण नहीं मिलता। जमीनों पर जबरन कब्जा, महिलाओं का यौन उत्पीड़न, बेगारी, मनरेगा मजदूरी तक छीन लेना और भी बहुत कुछ। लेकिन अब लोगों के सहने की शक्ति खत्म हो गई है, तो खुलकर लोग उस शैतान के खिलाफ अपनी आवाज उठा रहे हैं। संदेशखाली के उस शैतान शेख शाहजहाँ की तलाश राज्य पुलिस भी करने लगी है, केंद्रीय की एजेंसियाँ तो कर ही रही हैं, लुकआउट नोटिस भी जारी हो चुका है, इसके बावजूद वो छिपकर बैठा है और किसी के हाथ नहीं आ रहा है।

ईडी का नोटिस, लुकआउट सर्कुलर जारी

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, संदेशखाली के लिए अभिशाप बन चुके मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी टीएमसी नेता शेख शाहजहाँ के खिलाफ ईडी ने फिर से नोटिस जारी किया है। ईडी ने उसे 29 फरवरी को पूछताछ के लिए बुलाया है। ये अलग बात है कि वो ईडी की टीम पर हमले के बाद से ही फरार चल रहा है। उसके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर भी जारी किया जा चुका है, तो केंद्रीय एजेंसियाँ उसकी खोज कर रही हैं। फिर भी वो किसी के हाथ नहीं आ रहा है।

संदेशखाली में शेख शाहजहाँ और उसका पूरा गैंग जबरन जमीनों पर कब्जा करता था। महिलाओं की इज्जत लूटता था। पुरुषों को टॉर्चर किया जाता था और उन्हें जान से मारने की धमकी दी जाती थी, ताकि महिलाएँ अपना मुँह न खोलें और चुपचाप उसके गुर्गे उनका यौन उत्पीड़न करते रहे। उसके वारदातों की लिस्ट बहुत लंबी है, लेकिन वो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का करीबी होने के नाते किसी भी कानूनी पचड़े से बचा रहा और एकछत्र राज चलाए जा रहा था।

ममता सरकार के दो मंत्रियों ने किया दौरा

उसके अत्याचारों से परेशान जनता ने 8 फरवरी 2024 से उसके खिलाफ जो मोर्चा खोला है, तो अब राज्य सरकार को भी बैकफुट पर आना पड़ रहा है। एक तरफ तो मानवाधिकार संगठन, अनुसूचित जाति आयोग से लेकर विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी मौके पर पहुँच चुके हैं, तो बीजेपी की महिला टीम को रास्ते में ही रोक लिया गया। यहीं नहीं, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की टीम को पश्चिम बंगाल पुलिस हिरासत में भी ले चुकी है। तो दूसरी तरफ राज्य सरकार इस मामले को दबाने में लगी हुई है। अब ममता सरकार के दो मंत्रियों ने संदेशखाली का दौरा किया है। तो पश्चिम बंगाल की पुलिस भी संदेशखाली की महिलाओं की शिकायतों को दर्ज करने लगी है।

बता दें कि शेख शाहजहाँ के अत्याचारों से पीड़ित आम लोग अब खुलेआम सड़कों पर आ चुके हैं। उसके सहयोगियों द्वारा जमा की गई अवैध संपत्तियों को आग के हवाले कर रहे हैं। पीड़ितों ने शेख शाहजहाँ को फाँसी पर लटकाने की माँग की है। महिलाओं और प्रदर्शनकारियों का कहना है कि शेख शाहजहाँ अगर पकड़ा जाता है, तो भी वो अपनी पहुँच के दम पर बाहर आ जाएगा और वो फिर उन्हें जीने नहीं देगा। लोग माँग कर रहे हैं कि शेख शाहजहाँ को फाँसी पर लटका दिया जाए, क्योंकि वो जिएगा, तो बाकियों को जीने नहीं देगा।

दो दिन पहले नया मामला दर्ज

गौरतलब है कि ईडी ने शेख शाहजहाँ के खिलाफ दो दिन पहले ही नया मामला भी दर्ज किया है। उसके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के मामले के साथ ही राशन घोटाले में भी एफआईआर दर्ज की गई है। ईडी ने इसी केस में उसके घर पर नोटिस चस्पा किया है। जिसमें उसे 29 फरवरी को पूछताछ के लिए हाजिर होने को कहा गया है। वहीं, संदेशखाली में हालात की गंभीरता को देखते हुए लंबे समय से धारा-144 लगा दी गई है, तो बंगाल पुलिस ने भी संदेशखाली में कैंप लगाया है। इसके साथ ही पूरे इलाके में सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं, तो पीड़ियों को इस बात का भरोसा दिलाया जा रहा है कि उनके साथ न्याय होगा।

सोनम सिद्दीकी बनीं लक्ष्मी, बरेली में विष्णु मौर्य संग लिए लिए सात फेरे: अब अयोध्या जाएँगी, बोली- भगवान राम में शुरू से आस्था

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में एक मुस्लिम महिला ने घर वापसी की है। 26 वर्षीया महिला का नाम सोनम सिद्दीकी है, जो अब लक्ष्मी के नाम से जानी जाएगी। सोनम ने रविवार (25 फरवरी 2024) को एक हिन्दू मंदिर में विधि-विधान से अपने ही गाँव के विष्णु मौर्य को अपना जीवनसाथी चुना है। इस दौरान वेद मंत्रों के बीच जय श्रीराम के नारे लगे। हिन्दू संगठनों ने इस विवाह में सहयोग किया और वर-वधू दोनों को आशीर्वाद दिया। सोनम ने पुलिस से अपनी और अपने पति की सुरक्षा की गुहार लगाई है और परिजनों से खतरा बताया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला बरेली के देवरनिया थाना क्षेत्र का है। यहाँ के गिरधरपुर गाँव में रहने वाले विष्णु मौर्य और सोनम सिद्दीकी लगभग 12 साल से एक-दूसरे से परिचित हैं। दोनों में थोड़े समय बाद प्यार हो गया था। इन दोनों के रिश्तों की भनक दोनों परिवारों को लग चुकी थी। सोनम के घर वालों ने उन पर तमाम पाबंदियाँ लगा दीं। प्रतिबंधों के बावजूद सोनम जैसे-तैसे सोशल मीडिया के माध्यम से विष्णु मौर्य से जुडी रही। दोनों फोन से बात भी करते रहे।

सोनम और विष्णु बालिग होने का इंतजार करते रहे। हालाँकि, इस बीच सोनम सिद्दीकी ने अपने परिवार वालों को विष्णु से रिश्ते के लिए मनाने की बहुत कोशिश की, लेकिन उन पर कोई फर्क नहीं पड़ा। विष्णु ने गाँव के पास ही कीटनाशक दवाओं की दुकान खोल ली। बीच में समय निकाल कर सोनम विष्णु से मिलती भी रही। इस बीच सोनम को लगने लगा कि उसके परिजन विष्णु से रिश्ते के लिए कभी तैयार नहीं होंगे। सोनम का निकाह भी किसी रिश्तेदार से तय कर दिया गया था।

सोनम अपनी रिश्तेदारी में शादी होने से काफी नाराज थीं। उसने इसका विरोध किया। 24 फरवरी (शनिवार) को सोनम को उसके घर वालों ने विष्णु से रिश्ते के चलते बेरहमी से मारा-पीटा। जब यह बात विष्णु को पता चली तो वो परेशान हो उठे। अपनी जान का खतरा देखकर सोनम 24 फरवरी की रात को अपने घर से चुपके से भागने में कामयाब हो गई। वो सीधे विष्णु मौर्य के पास पहुँची। इस बीच विष्णु ने भी सोनम से शादी के लिए अपनी तरफ से कोशिशें शुरू कर दीं। उन्होंने शादी के लिए हिन्दू संगठनों से सम्पर्क साधा।

जैसे-तैसे 24 फरवरी की रात खुद को सुरक्षित करते हुए दोनों 25 फरवरी की सुबह एक साथ बरेली के इज्जतनगर इलाके में मौजूद भीटानाथ मंदिर पहुँचे। यहीं पर दोनों ने देवी-देवताओं के आगे एक-दूसरे को वरमाला डाली। पुजारी ने विधि-विधान से दोनों का विवाह करवाया। इस मौके पर हिन्दू संगठन के सदस्य मौजूद रहे। उन्होंने जय श्रीराम के नारे के साथ लक्ष्मी बनीं सोनम की घर वापसी का स्वागत किया और दोनों को हर सम्भव मदद का आश्वासन दिया। सोनम सिद्दीकी विष्णु मौर्य के साथ अपनी शादी से बेहद खुश नजर आईं।

शादी बाद सोनम ने बरेली पुलिस से सुरक्षा की गुहार लगाई है। अपने परिजनों से अपनी और अपने पति की जान को खतरा बताया है। उन्होंने कहा कि बचपन से ही उनकी आस्था भगवान राम में रही है। अब सोनम अपने पति विष्णु के साथ अयोध्या में राम मंदिर के दर्शन के लिए जाना चाहती हैं। साथ ही सोनम ने यह भी कहा कि पहले उनको तीन तलाक और हलाला से डर लगता था, लेकिन अब उनका डर दूर हो गया है।

‘समुद्र की गहराई में मुझे दिव्यता का अनुभव हुआ…’: पीएम मोदी ने जलमग्न द्वारका नगरी के किए दर्शन, द्वारकाधीश श्रीकृष्ण को नमन किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने गृह राज्य गुजरात में हैं। उन्होंने बेट द्वारका को जोड़ने वाली भारत की सबसे बड़ी केबल ब्रिज सुदर्शन पुल का भी उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने मंदिर जाकर भगवान द्वारकाधीश के दर्शन भी किए। इसके बाद पीएम मोदी ने समुद्र में डुबकी लगाई और जलमग्न हो चुके द्वारका का दर्शन कर वहाँ भगवान कृष्ण की प्रार्थना की।

बता दें कि यदुकुलवंशी भगवान श्रीकृष्ण द्वारका का राजा थे। कहा जाता है कि द्वापर में उनके परलोक गमन के बाद द्वारका नगरी समुद्र में विलीन हो गई थी। जिस स्थान पर द्वारका नगरी होने की बात कही जाती है, वहाँ पर समुद्र में एक शहर मिला है। इस शहर का जलमग्न खंडहर अभी भी देखने में बेहद भव्य दिखता है।

समुद्र के नीचे जाने के लिए प्रधानमंत्री ने आवश्यक उपकरणों का प्रयोग किया। इस दौरान उनकी ली गईं कुछ तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर आई हैं। इन तस्वीरों को अपने X हैंडल पर साझा करते हुए प्रधानमंत्री ने लिखा, “पानी में डूबी द्वारिका नगरी में प्रार्थना करना बहुत ही दिव्य अनुभव था। मुझे आध्यात्मिक वैभव और शाश्वत भक्ति के एक प्राचीन युग से जुड़ाव महसूस हुआ। भगवान श्री कृष्ण हम सभी को आशीर्वाद दें।”

वहाँ, द्वारका दर्शन रैली को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “आज मैंने उन क्षणों का अनुभव किया जो सदैव मेरे साथ रहेंगे… मैं समुद्र की गहराई में गया और प्राचीन द्वारका नगरी के ‘दर्शन’ किए। पानी के अंदर छिपी द्वारका नगरी के बारे में पुरातत्वविदों ने बहुत कुछ लिखा है। हमारे धर्मग्रंथों में भी द्वारका के बारे में कहा गया है कि यह सुंदर द्वारों और दुनिया की चोटी जितनी ऊँची इमारतों वाला शहर था। इस नगर का निर्माण स्वयं भगवान कृष्ण ने किया था।”

उन्होंने आगे कहा, “जब मैं समुद्र की गहराई में गया तो मुझे दिव्यता का अनुभव हुआ… मैंने द्वारकाधीश के सामने सिर झुकाया। मैं अपने साथ एक मोर पंख ले गया और उसे भगवान कृष्ण के चरणों में रख दिया। मैं हमेशा वहाँ जाने और प्राचीन द्वारका शहर के अवशेष को छूने के लिए उत्सुक था। मैं आज भावनाओं से भर गया हूँ… दशकों पुराना सपना आज पूरा हो गया।”

बता दें कि सुदर्शन सेतु द्वारकाधीश मंदिर में आने वालों के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा। इसके साथ ही ओखा मेनलैंड को बेट द्वारका द्वीप से जोड़ने से इस क्षेत्र में कनेक्टिविटी को बढ़ावा मिलेगी। सुदर्शन सेतु के निर्माण से पहले तीर्थयात्रियों को बेयत, द्वारकाधीश मंदिर तक पहुँचने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ता था। बेट द्वारका ओख बंदरगाह के पास एक द्वीप है, जो द्वारका से 30 किलोमीटर दूर है।

सुदर्शन सेतु को भगवद्गीता के श्लोकों और दोनों तरफ भगवान कृष्ण की छवियों से सजाया गया है। चार लेन वाले इस सिग्नेचर ब्रिज पर दोनों तरफ 50 मीटर चौड़े फुटपाथ हैं। फुटपाथ के ऊपरी हिस्सों पर सौर पैनल लगाए गए हैं, जो 1 मेगावाट बिजली भी पैदा करते हैं। बता दें कि पीएम मोदी ने अक्टूबर 2017 में इस पुल की नींव रखी थी। इस पुल से लक्षद्वीप के लोगों को भी लाभ मिलेगा।

संदेशखाली जा रही थी NHRC की टीम, बंगाल पुलिस ने रास्ते से ही हिरासत में लिया

पश्चिम बंगाल पुलिस ने संदेशखाली में बलात्कार और जमीन कब्जे के आरोपों पर तथ्य इकट्ठा करने पहुँची राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की 6 सदस्यों की टीम को हिरासत में ले लिया है। उन्हें कोलकाता के लाल बाजार पुलिस हेडक्वार्टर ले जाया जा रहा है।

इस 6 सदस्यीय टीम में पटना हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश एल नरसिम्हन रेड्डी, ओपी व्यास, चारू वाली खन्ना और भावना बजाज शामिल हैं। इनके साथ ही कई एक्टिविस्ट और वकीलों को भी बंगाल पुलिस ने हिरासत में लिया है। इन सभी को एक बस में भर कर ले जाया जा रहा है।

यह टीम संदेशखाली में TMC नेता शेख शाहजहाँ और उसके गुंडों के खिलाफ सामने आए बलात्कार और जमीन कब्जे जैसे आरोपों के विषय में तथ्य इकट्ठा करने गई थी। हिरासत में ली गई टीम ने बंगाल पुलिस पर कार्रवाई में देरी करने के लिए यह सब करने के आरोप लगाए हैं।

यह टीम लगातार पिछले दो दिनों से संदेशखाली की पीड़िताओं से बातचीत कर रही थी। यह फील्ड पर जाकर सारे तथ्य जुटा रही थी, इसके बाद यह अपनी रिपोर्ट तैयार करती जो कि उच्च संस्थाओं को सौंपी जाती। आज इस टीम को बंगाल पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। आज इस टीम को संदेशखाली थाना के मझेरपाड़ा, नातुनपाड़ा और नासकरपाड़ा जाना था।

बताया गया कि इस टीम को उस समय गिरफ्तार किया गया जब यह संदेशखाली जा रही थी। इन्हें दक्षिणी 24 परगना के भोजेरहाट से से हिरासत में लिया गया है। इसकी वीडियो भी सामने आई हैं। जहाँ इस टीम को हिरासत में लिया गया, वह जगह संदेशखाली से 52 किलोमीटर दूर है। पुलिस ने कहा है कि संदेशखाली में धारा 144 लागू है, इसलिए NHRC टीम यहाँ नहीं जा सकती। हिरासत में लिए गए सदस्यों ने इसे गैरकानूनी बताया है।

टीम की अगुवाई कर रहे जस्टिस रेड्डी ने कहा, “यह गिरफ्तारी पूरी तरह से अवैध है। हमने पुलिस कर्मियों से कहा है कि कानून मानने वाले नागरिक के रूप में हम नियम नहीं तोड़ेंगे। संदेशखाली में कोई कर्फ्यू नहीं लगाया गया है, ऐसे में हम दो समूहों में जा सकते हैं। कम से कम हमारी टीम की महिला सदस्यों को वहाँ जाने दिया जाना चाहिए ताकि वह संदेशखाली की उन महिलाओं से बात कर सकें जो कि राजनीतिक संरक्षण प्राप्त बाहुबली का दंश झेलने को मजबूर थीं।”