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‘इंशाल्लाह, तुझे बम से उड़ाएँगे’: मथुरा के श्रीकृष्णजन्मभूमि के वादी को वॉट्सएप कॉल पर मिली धमकी, कहा- केस वापस लो नहीं तो ईदगाह ढाँचे में दफना देंगे

श्री कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद के वादी आशुतोष पांडेय को बम से उड़ाने की धमकी मिली है। धमकी भरा फोन पाकिस्तान नंबर से आया था। पांडेय ने आरोप लगाया है कि उन्हें धमकी देने वाले ने कहा कि अगर उन्होंने मुकदमा वापस नहीं लिया तो उन्हें बम से उड़ा दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि धमकी देने वाले ने हिंदुस्तान के खिलाफ नारे भी लगाए। पांडेय ने इस मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज कराई है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तानी शख्स ने शुक्रवार (23 फरवरी 2024) की शाम करीब साढ़े 7 बजे हिंदू पक्षकार आशुतोष पांडेय के मोबाइल पर व्हाट्सऐप्प कॉलिंग कर केस वापस लेने की धमकी दी है। धमकी देने वाले ने वॉट्सऐप पर किए कॉल पर कहा, “मुकदमा वापस ले लो, वर्ना बम से उड़ा देंगे। तुम्हारी सारी फेसबुक, ट्विटर आईडी हैक कर लेंगे। अगर केस वापस नहीं लिया, तो तेरा घंटा बजा दूँगा। इंशाल्लाह, तुझे बम से उड़ाएँगे। तू जो ईदगाह-ईदगाह करता फिर रहा है, उसी ईदगाह के अंदर तेरी अस्थियों को दफनाएँगे।”

श्रीमद् महेश्वरी धाम सिद्धपीठ माता शाकुंभरी पीठाधीश्वर वृंदावन मथुरा के भृगुवंशी आशुतोष पांडेय श्रीकृष्ण जन्मभूमि के वादी और पक्षकार हैं। वह श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट मथुरा के अध्यक्ष भी हैं। शुक्रवार को वह हाईकोर्ट में जन्मभूमि मामले की सुनवाई के बाद श्रीकृष्ण सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनीष डावर व करन शर्मा के साथ कार से मथुरा जा रहे थे।

धमकी भरी कॉल आने के बाद मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद के पक्षकार आशुतोष पांडेय ने फतेहपुर जिले के कोतवाली पुलिस को तहरीर दी है। अपनी शिकायत में उन्होंने कहा है कि फतेहपुर की सीमा पर उनके वाट्सअप पर एक कॉल आई जिसमें मुकदमा की पैरवी ना करने और मुकदमा वापस लेने की धमकी दी गई है। कॉलर ने खुद को पाकिस्तान के एक आतंकवादी संगठन का सदस्य बताते हुए हिंदुस्तान विरोधी नारेबाजी भी की।

एसएसआई संतोष कुमार ने बताया तहरीर की जाँच की जा रही है। मोबाइल नंबर की सर्विलांस के जरिए जांच के बाद स्पष्ट होगा कि नंबर कहाँ का है। पीड़ित ने बताया है कि उन्हें करीब 22 दिन पहले भी इसी तरह से जान से मारने की धमकी दी गई थी। फतेहपुर के एएसपी विजय शंकर मिश्र ने मीडिया से इस बारे में बात की। उन्होंने बताया कि वॉट्सऐप नंबर की सर्विलांस सेल से जाँच कराई जा रही है।इस संबंध में थाना कोतवाली नगर में अभियोग पंजीकृत कर लिया गया है।

भारत और हिंदुओं के खिलाफ दुष्प्रचार कर रहा कट्टरपंथी पिनाकी भट्टाचार्य, धर्मांतरण के बाद परिवार ने भगाया तो फ्रांस में जा बसा: बांग्लादेशी लेखक ने खोली पोल

बांग्लादेशी लेखक और ब्लिट्ज पत्रिका के संपादक सलाह उद्दीन शोएब चौधरी ने फ्रांस में रहने वाले ‘नियो-मुस्लिम’ यूट्यूबर पिनाकी भट्टाचार्य के खिलाफ आवाज उठाई है। चौधरी ने भट्टाचार्य के खिलाफ कार्रवाई करने का आग्रह किया है। उन्होंने शनिवार (24 फरवरी 2024) को एक्स (औपचारिक रूप से ट्विटर) पर बांग्लादेशी डॉक्टर पिनाकी भट्टाचार्य द्वारा फैलाए जा रहे भयानक रूप से हिंदू विरोधी और भारत विरोधी प्रोपेगेंडा की पोल खोली। पिनाकी भट्टाचार्य लोकप्रिय यूट्यूबर है, जो फ्रांस में रहकर राजनीतिक शरण माँग रहा है।

पिनाकी भट्टाचार्य के बारे में सलाहुद्दीन शोएब चौधरी ने लंबा पोस्ट लिखा है और उसके अतीत के बारे में भी बताया है। उन्होंने एक्स पर लिखा, “पिनाकी भट्टाचार्य को उनके माता-पिता ने तब्लीगी जमात के प्रभाव में हिंदू धर्म छोड़ने और इस्लाम अपनाने के कारण कुछ साल पहले ही अपने परिवार से बाहर निकाल दिया था। उनके पिता श्यामल भट्टाचार्य, एक स्कूल शिक्षक, लेखक और नाटक अभिनेता थे और अपने बेटे के धर्म परिवर्तन से बेहद नाराज हो गए और बाद में नाराज पिता ने उसे बहिस्कृत कर बेदखल कर दिया और पिनाकी के साथ सारे संबंध तोड़ लिए।”

उन्होंने आगे लिखा, “पिनाकी का जन्म बांग्लादेश के बोगुरा जिले में हुआ था और उन्होंने 1992 में राजशाही मेडिकल कॉलेज से पढ़ाई की। इस मेडिकल कॉलेज को जमात-ए-इस्लामी गतिविधियों के केंद्र के रूप में जाना जाता है। पिनाकी की पत्नी जो खुद एक डॉक्टर हैं, ने पिनाकी के आईएसआई कनेक्शन और इस्लामवादियों, जिहादियों और आतंकवादियों के साथ मजबूत संबंधों के बारे में जाना, और उससे सारे संबंध तोड़ दिए।”

शोएब चौधरी ने बताया है कि पिनाकी हिंदू से मुस्लिम बनने के बाद कहीं ज्यादा कट्टर हो चुका है। हालाँकि उसका धर्म से कोई लेना देना नहीं है, क्योंकि वो अपनी दवा फैक्ट्री में दवाइयों की आड़ में ड्रग्स बनाता था, जिसमें खतरनाक दवा मेथामफेटामाइन और कैफीन मिला होता था। वो बांग्लादेश में अंडरवर्ल्ड अपराध रैकेटों के माध्यम से इन खतरनाक चीजों को बेचता था। इसकी वजह से उस पर कानूनी एजेंसियों ने दबाव बनाया, तो वो बांग्लादेश से भागकर फ्रांस पहुँचा और वहाँ राजनीतिक शरण की माँग की। उसने बांग्लादेश की सत्ताधारी पार्टी पर राजनीतिक उत्पीड़न का आरोप लगाया।

उन्होंने आगे बताया है कि पिनाकी आईएसआई की मदद से अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से भारत, हिंदू धर्म और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बीजेपी और आरएसएस के खिलाफ जहर उगलता है। वो यूएस, इजरायल, ब्रिटेन, ईयू समेत धर्मनिरपेक्ष देशों के खिलाफ भी प्रोपेगेंडा फैलाता है। वो जम्मू-कश्मीर समेत भारत में आतंक फैला रहे पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद को भी समर्थन देता है। यही नहीं, उसने 22 फरवरी को, 2024 को फेसबुक पोस्ट डालकर बांग्लादेशी निर्देशकों और अभिनेताओं से कहा कि वे पश्चिम बंगाल स्थित ओटीटी प्लेटफॉर्म होइचोई या किसी अन्य भारतीय प्लेटफॉर्म पर काम न करें। उन्होंने बांग्लादेशी अभिनेता मोशर्रफ करीम से होइचोई के लिए अपनी आगामी फिल्म ‘हब्बा’ का प्रचार नहीं करने की अपील की। इस पोस्ट में वो बांग्लादेशी डायरेक्टरों और अभिनेताओं को धमकी देता है।

उन्होंने अपने पोस्ट में पिनाकी के अन्य कारनामों के बारे में भी विस्तार से लिखा है। कुछ चीजों को हम यहाँ सबूत के साथ रख रहे हैं। खासकर उसके भारत विरोधी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ चलाए जा रहे प्रचार अभियान से जुड़ी बातों को।

ऐसा ही एक वीडियो उसने 23 जनवरी 2024 को पोस्ट किया था। जिसमें उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ जहर उगला था। इस वीडियो को करीब 8 लाख बार देखा जा चुका है, जिसमें वो बांग्लादेश के हिंदू समुदाय के खिलाफ भी जहर उगल रहा है। इस वीडियो में वो भारतीय कंपनियों मैरिको, इमामी, डाबर, एशियन पेंट्स, गोदरेज जैसी भारतीय कंपनियों के उत्पादों के बहिस्कार की बात कर रहा है।

पिनाकी लगातार भारत विरोधी प्रोपेगेंडा फैलाता रहा है। यहाँ तक कि राम मंदिर की डिजाइन और निर्माण से जुड़ी कंपनी एलएंडटी को भी उसने निशाने पर लिया।

अगर कोई पिनाकी भट्टाचार्य के यूट्यूब पेज को देखेगा,तो उसे अनगिनत भारत विरोधी वीडियो दिखाई देंगे, जिसमें वो अपने फॉलोवर्स को भारत के खिलाफ भड़का रहा है और भारतीय सामानों के बहिस्कार के लिए उकसा रहा है।

पिनाकी के यूट्यूब चैनल का स्क्रीनशॉट

शोएब चौधरी ने बताया है कि अपने वीडियो और पोस्ट में पिनाकी बांग्लादेशी मुसलमानों को हिंदुओं के खिलाफ जिहाद छेड़ने के लिए उकसाता है। उसके भारत विरोधी पोस्ट बांग्लादेश में बेहद लोकप्रिय हैं। वो बार-बार बांग्लादेशी हिंदुओं पर मुस्लिम चरमपंथियों द्वारा किए गए सभी हमलों के लिए मोदी को जिम्मेदार ठहराता है।

पिनाकी के खिलाफ फ्रांस में शिकायत

गौरतलब है कि 2021 में फ्रांस पुलिस को पिनाकी भट्टाचार्य के खिलाफ बांग्लादेश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने की शिकायत दर्ज कराई गई थी। ये शिकायत ऑल यूरोपियन अवामी लीग के अध्यक्ष एम नजरूल इस्लाम ने दर्ज कराी थी। उन्होंने अपनी शिकायत में कहा, ”पिनाकी भट्टाचार्य बांग्लादेश विरोधी गतिविधियों में शामिल हैं। यह तथाकथित लेखक फ्रांस में बैठकर बांग्लादेश, बांग्लादेश सरकार, राष्ट्रपिता बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान, प्रधान मंत्री शेख हसीना और बंगबंधु परिवार के बारे में भ्रामक और गलत जानकारी से लोगों को भ्रमित करने की कोशिश कर रहा है।”

इसी तरह, नवंबर 2022 में, ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस की काउंटर टेररिज्म एंड ट्रांसनेशनल क्राइम (CTTC) यूनिट ने पिनाकी भट्टाचार्य और दो अन्य पर देश की छवि खराब करने का आरोप लगाते हुए डिजिटल सुरक्षा अधिनियम के तहत मुकदमा दायर किया था।

ये खबर मूल रूप से अंग्रेजी भाषा में लिखी गई है, इस मूल समाचार को पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

‘मुस्लिम कुरान और शरिया ही मानेंगे’: असम में विवाह-तलाक कानून रद्द करने पर बोले सपा सांसद हसन, कॉन्ग्रेस नेता बोले- यह मुस्लिमों का निजी कानून

असम ने वर्ष 1935 में बनाए गए मुस्लिम विवाह और तलाक रजिस्ट्रेशन अधिनियम (Muslim Marriages and Divorces Registration Act 1935) को रद्द कर दिया है। इसके साथ ही राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में असम की हिमंता बिस्वा सरमा की सरकार ने एक कदम आगे बढ़ा दिया है। वहीं, मुस्लिम नेता इसके विरोध में उतर आए हैं और कहा कि मुस्लिमों के कुरान सबसे पहले है।

सीएम सरमा ने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “23 फरवरी, 2024 को असम कैबिनेट ने दशकों पुराने असम मुस्लिम विवाह और तलाक पंजीकरण अधिनियम को निरस्त करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। भले ही दूल्हा और दुल्हन की उम्र 18 और 21 ना हुई हो, जैसा कि कानूनन होना चाहिए, के विवाह का पंजीकरण भी इसके अंतर्गत हो रहा था। यह निर्णय असम में बाल विवाह पर रोक लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।”

इस कानून के रद्द करने के बाद अब असम में इस अधिनियम के जरिए मुस्लिम विवाह या तलाक का पंजीकरण नहीं हो सकेगा। असम सरकार में मंत्री जयंत मल्ला बरुआ ने कहा कि राज्य में एक विशेष विवाह अधिनियम है। इसलिए सरकार चाहती है कि सभी विवाह, विशेष विवाह अधिनियम के तहत हों।

राज्य सरकार के इस फैसले का कुछ मुस्लिम नेताओं ने विरोध किया है। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के नेता और पेशे से सर्जन एसटी हसन ने कहा कि मुस्लिम सिर्फ शरीयत और कुरान को ही मानेंगे। उन्होंने कहा कि इस कानून को निरस्त करने के साथ ‘हिंदू मतदाताओं के ध्रुवीकरण की कोशिश’ की जा रही है।

कानून को नजरअंदाज करते हुए उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद से समाजवादी पार्टी के सांसद एसटी हसन ने कहा, “सरकार चाहे जितना कानून बनाना चाहे, बना सकती है… मुस्लिम सिर्फ शरीयत और कुरान को ही फॉलो करेंगे। तमाम धर्मों की अपनी-अपनी मान्यताएँ हैं। लोग उन्हें हजारों सालों से फॉलो करते आ रहे हैं और आगे भी फॉलो किया जाता रहेगा।” 

वहीं, असम के ऑल इंडिया यूनाइटडेट डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) के प्रमुख बदरुद्दीन अजमल ने कहा कि एक्ट को निरस्त करके मुस्लिमों को भड़काना चाहती है। मुस्लिम भड़केगा नहीं। इसके जरिए सरकार राज्य में यूनिफॉर्म सिविल कोड लाना चाहती है। अजमल ने कहा कि काजी लोग भिखारी नहीं हैं। वे सरकार से एक रुपया नहीं ले रहे हैं। उन्होंने चुनाव बाद विरोध करने की बात कही है।

कॉन्ग्रेस नेता अब्दुर राशिद मंडल ने सरकार के इस कदम को भेदभाव वाला बताया। उन्होंने कहा कि असम सरकार यूनिफॉर्म सिविल कोड लाने और बहु-विवाह को रोक पाने में विफल रही है। राशिद ने कहा कि सरकार कह रही है कि ये ब्रिटिश राज का कानून है और चाइल्ड मैरिज की बात कर रही है। ये सच नहीं है। उन्होंने कहा, “ये मुस्लिमों का निजी कानून है, इसे रद्द नहीं किया जा सकता।”

बता दें कि यह अधिनियम वर्ष 1935 में अंग्रेजों द्वारा लाया गया था। यह असम के मुस्लिमों के लिए विवाह पंजीकरण और तलाक के नियम बनाता था। इसके अंतर्गत कोई भी मुस्लिम व्यक्ति, जिसे सरकार अधिकृत कर दे, मुस्लिम निकाह को पंजीकृत कर सकता था। इसी के साथ वह तलाक का पंजीकरण भी कर सकता था। इसके लिए वह एक शुल्क भी ले सकता था।

इस अधिनियम के तहत एक इलाके में दो मुस्लिम रजिस्ट्रार नियुक्त किए जाने थे, जिनमें से एक सुन्नी और एक शिया होता। वहीं, असम सरकार का मानना है कि इस नियम का लाभ उठा कर ऐसे निकाह भी पंजीकृत हो रहे थे, जो कि कानूनी मान्यता पूरी नहीं करते। चूंकि इस अधिनियम में निकाह की न्यूनतम आयु का जिक्र नहीं था, ऐसे में 18 वर्ष से कम की बच्चियों का निकाह भी हो रहा था।

आतंकी निज्जर के दोस्त के घर गोलीबारी: खालिस्तान समर्थक की पहली बीवी का किशोर बेटा था हमले में शामिल, माँ के साथ दुर्व्यवहार से था नाराज, जाँच में खुलासा

कनाडा पुलिस ने खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर के साथी सिमरनजीत सिंह के घर पर चलीं गोलियों के मामले में 2 लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार हुए दोनों आरोपित नाबालिग बताए जा रहे हैं। यह गिरफ्तारी घटना के 3 हफ्ते बाद हुई है। अभी तक पुलिस की जाँच में इस पूरी घटना में किसी भी प्रकार के विदेशी हाथ होने के सबूत नहीं मिले हैं। पकड़े गए नाबालिगों में एक सिमरनजीत सिंह का बेटा ही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना 1 फरवरी 2024 की है। तब सिमरनजीत सिंह के साउथ सरे के आवास पर रात के लगभग 1.20 बजे गोलियाँ चली थीं। घर पर हुई इस गोलीबारी में कोई घायल नहीं हुआ था। इन गोलियों से मौके पर खड़ी एक कार और घर को नुकसान पहुँचा था। इसी मामले में जाँच करते हुए कनाडा पुलिस ने 12 फरवरी को ही 2 किशोरों को गिरफ्तार किया था। दोनों की उम्र लगभग 16 साल बताई जा रही है। दोनों आरोपित फ़िलहाल पुलिस हिरासत में हैं, जिन्हें जल्द ही कोर्ट में पेश किया जाना है।

इन दोनों नाबालिगों के खिलाफ ब्रिटिश कोलंबिया अभियोजन सेवा ने गोलियाँ चलाने और प्रतिबंधित बंदूक रखने के आरोप में केस चलाने की मंजूरी दे दी है। पुलिस ने दोनों के पास से 3 हथियार और कई अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए हैं। बताते चलें कि कनाडा के वैंकूवर में भारतीय वाणिज्य दूतावास पर हुए खालिस्तान समर्थकों के विरोध प्रदर्शन के कुछ दिन दिनों बाद सिमरनजीत सिंह के घर पर गोलीबारी हुई थी।

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि दोनों नाबालिगों में से एक सिमरनजीत सिंह का बेटा ही है। हालाँकि, नाबालिग होने की वजह से आरोपितों की पहचान उजागर नहीं की गई है। बताया जा रहा है कि यह झगड़ा पारिवारिक विवाद की वजह से हुआ था। अपुष्ट खबरों के मुताबिक, पकड़ा गया एक आरोपित सिमरनजीत सिंह की पहली बीवी का बेटा है। वह अपनी माँ के साथ हुए दुर्व्यवहार का बदला लेना चाहता था। माना जा रहा है कि सिमरनजीत सिंह के आवास पर गोलियाँ उसने इसी मकसद से चलाईं थीं।

यहाँ गौरतलब है कि सिमरनजीत सिंह के घर पर चली गोलियों को खालिस्तानी गैंग ने भारत सरकार द्वारा करवाया गया हमला बताने की साजिश रची थी। ब्रिटिश कोलंबिया गुरुद्वारा काउंसिल के प्रवक्ता मोनिंदर सिंह ने तब इसे निजी मामला न मानते हुए सीधे-सीधे भारत सरकार की कार्रवाई करार दिया था। तब उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए दिल्ली से कनाडा पर कराया गया हमला कहा था। मोनिंदर सिंह ने तो इस गोलीबारी को साल 2023 में मारे गए खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की कड़ी में हुआ अगला हमला कह डाला था।

आए दिन भारत विरोधी बयानबाजी के लिए कुख्यात सिख फॉर जस्टिस (SFJ) के मुखिया गुरपतवंत सिंह (पन्नू) ने भी इस हमले का आरोप भारत पर लगाने का प्रयास किया था। तब उन्होंने सिमरनजीत सिंह को खालिस्तान आंदोलन का मेंबर और मारे गए आतंकी हरदीप सिंह निज्जर का सहयोगी बताया गया। ये तमाम आरोप कनाडाई सरकार के उस बयान के साथ जोड़ कर लगाए जा रहे थे जिसमें हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के पीछे भारत का हाथ होने के आरोप लगाए गए थे।

फिलहाल कनाडा पुलिस के खुलासे के बाद मोनिंदर सिंह और पन्नू जैसे तमाम खालिस्तान समर्थकों की बोलती बंद हो गई है। कनाडा पुलिस के अधिकारियों ने साफ कहा कि हमलावरों को विदेश से कोई भी निर्देश मिलने के सबूत नहीं मिले हैं। कनाडा पुलिस की जाँच रिपोर्ट आने के बाद सिख समुदाय ने ब्रिटिश कोलंबिया गुरुद्वारा काउंसिल से माफी की माँग उठाई है। उन्होंने कहा है कि परिषद के प्रवक्ता मोनिंदर ने न सिर्फ झूठ बोला, बल्कि गोलीबारी की जाँच को भी गुमराह करने की कोशिश की।

गुजरात में कॉन्ग्रेस के साथ AAP का गठबंधन: आम आदमी पार्टी को भरूच और भावनगर की सीटें देने के पीछे क्या है वोटों का गणित?

लगभग एक सप्ताह चली रस्साकशी के बाद गुजरात में आम आदमी पार्टी (AAP) और कॉन्ग्रेस ने गठबंधन का ऐलान कर दिया है। कॉन्ग्रेस राज्य में 24 और AAP दो सीटों पर चुनाव लड़ेगी। इन दो सीटों पर AAP ने पहले ही अपने उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है। भावनगर लोकसभा सीट से उसके विधायक उमेश मकवाना, जबकि भरूच सीट से विधायक चैतर वैसावा चुनाव लड़ेंगे।

दोनों पार्टियों के बीच गठबंधन में सबसे ज्यादा समस्या भरूच सीट को लेकर थी। यह सीट कॉन्ग्रेस के पूर्व सांसद स्वर्गीय अहमद पटेल की परंपरागत सीट मानी जाती थी। उन्होंने यहाँ से 1977 और 1984 में चुनाव जीता था। हालाँकि, 1989 के बाद से यहाँ भाजपा का परचम बुलंद है। इसके बाद से भाजपा यहाँ कभी नहीं हारी है।

कॉन्ग्रेस नेता एवं पूर्व मंत्री अहमद पटेल की मृत्यु के बाद उनके बेटे फैसल पटेल और बेटी मुमताज पटेल सक्रिय राजनीति में आ गए हैं। ऐसे में इस बात को लेकर चर्चा थी कि इस सीट से कॉन्ग्रेस इन दोनों में से किसी एक को लोकसभा का चुनाव लड़वा सकती है। हालाँकि, अब इन सभी कयासों पर विराम लग गया है और यह सीट AAP के खाते में आई है।

कॉन्ग्रेस ने क्यों छोड़ दी भरूच सीट?

मुमताज पटेल और फैसल पटेल के खुले विरोध के बाद भी भरूच सीटर पर कॉन्ग्रेस ने AAP के सामने अपने हथियार डाल दिए हैं। भरूच एक मुस्लिम बहुल सीट है। इसके अलावा, यहाँ जनजातीय समुदाय के लोगों की भी संख्या अच्छी है। फिर भी इसे कॉन्ग्रेस ने AAP को सरेंडर क्यों कर दिया, इसके पीछे एक से अधिक कारण हो सकते हैं।

दरअसल, जबसे भरूच के अंतर्गत आने वाले एक विधानसभा सीट डेडियापाड़ा से AAP के चैतर वैसावा चुनाव जीतकर विधायक बने हैं, तब से पार्टी लगातार भरूच लोकसभा से चुनाव लड़ने के मूड में दिख रही है और यहाँ से डेडियापाड़ा के वर्तमान विधायक को लड़ाना चाह रही है। AAP का आईटी सेल लगातार वैसावा का प्रचार प्रसार कर रही है।

कुछ यूट्यूब चैनल भी इस प्रोपगैंडा में शामिल हैं। इनमें से कुछ निष्पक्षता का दावा कर रहे हैं, जबकि कुछ खुले तौर पर ‘लोकसभा के लिए चैतर वैसावा’ का अभियान चलाए हुए हैं। हाल ही में वह वनकर्मियों को पीटने के जुर्म में भी पकड़े गए थे। इसको लेकर बवाल भी हुआ था और पार्टी ने इसी का फायदा उठाकर उनके नाम की घोषणा कर दी।

भरूच लोकसभा सीट का मुस्लिम वोट बैंक अब तक कॉन्ग्रेस के पास रहा है। हालाँकि, यह बात अलग है कि यह सीट आखिरी बार कॉन्ग्रेस ने 1984 में जीती थी, लेकिन यहाँ अल्पसंख्यक वोटों का खूब ध्रुवीकरण होता है। ऐसे में AAP ने चैतर को एक जनजातीय चेहरा बनाकर पेश करने और लोकसभा जीतने की जुगत भिड़ाई है। हालाँकि यह इतना आसान नहीं है, जितना दिखता है।

यहाँ के स्थानीय कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता अहमद पटेल के बेटे-बेटी के साथ हैं। दोनों ने ऐलान भी किया है कि यदि यह सीट AAP के पास जाती है तो वह निर्णय स्वीकार कर लेंगे, लेकिन AAP उम्मीदवार के लिए चुनाव प्रचार में हिस्सा नहीं लेंगे। अगर वे अपने निर्णय पर अटल रहे तो यह गठबंधन कुछ हासिल नहीं कर पाएगा। ऐसी परिस्थिति में वोट बिखर जाएँगे।

कॉन्ग्रेस अब यहाँ अपना उम्मीदवार नहीं उतरेगी, इसके बावजूद अपने वोट को AAP के पक्ष में हस्तांतरित कराने में नाकाम रहती है तो परिस्थितियाँ पहले जैसी ही रहेंगी और भाजपा इसका फायदा उठा सकती है। दूसरी बात ये भी है कि कोई भी चुनाव केवल एक ही मुद्दे पर नहीं लड़े जाते। ऐसे में यह सोचना मूर्खता होगी कि कोई जाति का फॉर्मूला लगाकर यहाँ जीत हासिल कर सकता है।

दूसरी तरफ भाजपा के पास पीएम मोदी का चेहरा है। भाजपा ने यहाँ पिछले कुछ दशक में अपना एक बड़ा वोट बैंक तैयार किया है। यह वोट बैंक इसलिए विशेष है, क्योंकि यह जाति जैसे मुद्दों को देखकर वोट नहीं देने वाली। उनका वोट पीएम मोदी को होता है। इस स्थिति में चैतर वैसावा के जीतने की उम्मीदें नगण्य ही मानी जा रही है।

कॉन्ग्रेस ने भावनगर सीट AAP को क्यों दी?

अगर भावनगर सीट की बात की जाए तो यहाँ विधानसभा चुनाव में AAP का प्रदर्शन बाकी सीटों से अच्छा था। पार्टी ने भावनगर लोकसभा के अंतर्गत आने वाली दो विधानसभा सीटों- बोटाद और गरियाधर जीती थीं। दूसरी तरफ भावनगर, सुरेंद्रनगर और अमरेली इलाके में कॉन्ग्रेस के पास एक भी सीट नहीं है। ऐसे में कॉन्ग्रेस ने इस सीट पर से दावा छोड़ दिया, क्योंकि कॉन्ग्रेस के पास यहाँ खोने के लिए कुछ नहीं है।

हालाँकि, यहाँ भी AAP की राह आसान नहीं होने वाली है। इस सीट पर भाजपा इन दोनों पार्टियों से कहीं अधिक मजबूत है। 1991 के बाद यहाँ से पार्टी का उम्मीदवार जीतता आया है। भारतीबेन शियाल इस सीट से पिछले 2 बार से जीत रही हैं। उनको 2014 में 59% वोट मिले थे, जो 2019 में बढ़कर 63% हो गए। 2019 में कॉन्ग्रेस उम्मीदवार को सिर्फ 31.86% वोट मिले थे।

चित्र साभार: Times Of India

इन सब परिस्थितयों को देखते हुए यदि AAP भावनगर सीट पर लड़ती है तो वहाँ उसके पास ना ही कोई मजबूत चेहरा है और ना ही पार्टी यहाँ कोई साख है। भले ही विधानसभा चुनाव में 2 सीटें जीतकर कॉन्ग्रेस के सामने AAP ने अपना लोकसभा चुनाव का दावा मजबूत कर दिया हो, लेकिन इसी आधार पर जीत हासिल करना मुश्किल होगा।

दरअसल, विधानसभा चुनाव स्थानीय मुद्दों पर लड़े जाते हैं, जबकि लोकसभा राष्ट्रीय मुद्दों पर। लोकसभा सीट का क्षेत्रफल भी बड़ा होता है। ऐसे में वोट बँट जाते हैं। इसके अलावा, बोटाद से मौजूदा आप विधायक उमेश मकवाना, जिन्हें AAP ने अपना उम्मेदवार बनाया है, अपने क्षेत्र में कोई ख़ास प्रभाव नहीं बना सके हैं। उन्हें विधानसभा में वोट देने वाले भी यह सोचते हैं।

इन सब परिस्थियों को देखते हुए यह तय है कि इस बार लोकसभा चुनाव का पैटर्न भी विधानसभा चुनाव जैसा ही रहने वाला है। बता दें कि AAP इसे पहले विधानसभा चुनाव में गुजरात में सरकार बनाने का दावा ठोक रही थी, जबकि नतीजों में उसे मात्र 5 सीट मिली थीं। जीतने वाले सभी उम्मीदवार कुछ हद तक अपने प्रयासों से, कुछ जातिवाद के कारण और अन्य पार्टियों में आंतरिक फूट के कारण जीते।

लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 370 से अधिक सीट जीतने का लक्ष्य रखा है। स्वाभाविक है कि उसका लक्ष्य गुजरात की 26 की 26 सीटें हैं। यूँ तो लोकसभा चुनाव के लिए अभी 2 महीने का समय है, लेकिन सभी समीकरण यही दिखा रहे हैं कि इस बार भी भाजपा गुजरात में क्लीन स्वीप करते हुए 26 सीट अपने नाम करेगी।

(इस खबर को मूल रूप से गुजराती में लिखा गया है। आप इसे इस लिंक पर पढ़ सकते हैं।)

दंड संहिता नहीं, अब न्याय संहिता कहिए: 1 जुलाई से IPC, CrPC और साक्ष्य कानून की जगह BNS, BNSS और BSA लागू

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023, भारतीय न्‍याय संहिता 2023 और भारतीय साक्ष्‍य अधिनियम 2023 पहली जुलाई से लागू हो जाएँगे। गृह मंत्रालय ने आज (24 फरवरी 2024) इस बारे में एक राजपत्र अधिसूचना (नोटिफिकेशन) जारी कर दिया है। ये तीनों विधेयक पिछले वर्ष दिसंबर में संसद में पारित किए गए थे। ये कानून भारतीय दंड संहिता 1860, दंड प्रक्रिया संहिता 1898 और भारतीय साक्ष्‍य अधिनियम 1872 का स्‍थान लेंगे।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने शनिवार को जारी नोटिफिकेशन में कहा है कि 1 जुलाई से देश में तीन नए आपराधिक कानून – भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Bharatiya Sakshya Adhiniyam) लागू होंगे। इसके लिए गृह मंत्रालय ने तीन अलग-अलग नोटिफिकेशन जारी किए हैं। ये नए कानून दशकों पुराने भारतीय दंड संहिता (IPC), आपराधिक प्रक्रिया संहिता और 1872 के भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जगह लेंगे।

इन तीनों कानूनों को 21 दिसंबर 2024 को संसद की मंजूरी मिली थी। इसके बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 25 दिसंबर 2024 को तीनों कानूनों को अपनी मंजूरी दे दी थी। संसद में तीनों विधेयकों पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि इनमें सजा देने के बजाय न्याय देने पर फोकस किया गया है। पिछले माह ही प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने निर्देश दिए थे कि नए आपराधिक कानूनों को सभी केंद्र शासित प्रदेशों (यूटी) में लक्षित तरीके से लागू किया जाना चाहिए।

क्या क्या बदलाव आएँगे?

भारतीय दंड संहिता 1860 (IPC) के अधिकांश अपराधों को भारतीय न्याय संहिता (BNS) में अलग रखा गया है। इसमें ‘सामुदायिक सेवा’ को सजा के रूप में जोड़ा गया है। आत्महत्या जैसे अपराधों में व्यक्ति को सामाजिक सेवा की सजा दी जा सकती है। हालाँकि, इस दौरान उसे किसी तरह का मेहनताना नहीं दिया जाएगा।

राजद्रोह को अब अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया गया है। राजद्रोह के बजाय अब भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले कृत्यों के लिए एक नया अपराध के रूप में जोड़ा गया है।

BNS में आतंकवाद को एक अपराध माना गया है। इसे एक ऐसे कृत्य के रूप में परिभाषित किया गया है जिसका उद्देश्य देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा को खतरे में डालना, आम जनता को डराना या सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ना है। स्थानीय स्तर पर शांति भंग करना भी आतंकवाद की श्रेणी में शामिल है। फेक करेंसी की तस्करी आतंकवादी कृत्य होगा।

संगठित अपराध को अपराध के रूप में जोड़ा गया है। इसमें अपराध सिंडिकेट की ओर से किए गए अपहरण, जबरन वसूली और साइबर अपराध जैसे अपराध शामिल हैं। छोटे-मोटे संगठित अपराध भी अब अपराध हैं।

जाति-नस्ल, भाषा, समुदाय या व्यक्तिगत विश्वास जैसे कुछ पहचान चिह्नों के आधार पर पाँच या अधिक व्यक्तियों के समूह द्वारा की गई हत्या में सात साल से लेकर आजीवन कारावास या मौत तक की सजा का प्रावधान किया गया है।

नए कानून में सात वर्ष से अधिक और 12 साल से कम उम्र के किसी बच्चे के अपराध को अपराध नहीं माना जा सकता है, जिसकी समझ इतनी परिपक्व नहीं हुई कि उस अवसर पर वह अपने आचरण की प्रकृति और उसके परिणामों के बारे में निर्णय कर सके।

पहले किसी ऐसे व्यक्ति पर मुकदमा चलाने का कोई प्रावधान नहीं था, जो अपराध करने के उद्देश्य से किसी बच्चे को नियोजित या संलग्न करता था। नए कानून में इसके लिए एक खंड 95 जोड़ा गया है। इसमें यौन शोषण या पोर्नोग्राफी अपराध सहित अपराध करने के लिए किसी बच्चे को काम रखना या उसमें शामिल करना अपराध है। बच्चे द्वारा किए गए अपराध को उसे कराने वाले को भुगतना होगा।

भारतीय दंड संहिता विकृत दिमाग वाले व्यक्ति को अभियोजन (Prosecution) से सुरक्षा प्रदान करता है। BNS में इसे मानसिक बीमारी वाला व्यक्ति कहा गया है। मानसिक बीमारी की परिभाषा में मानसिक मंदता शामिल नहीं है और इसमें शराब एवं नशीली दवाओं के दुरुपयोग को शामिल किया गया है। अब मानसिक मंदता से पीड़ित व्यक्तियों पर मुकदमा चलाया जा सकता है।

इसमें हिट एंड रन मामले पर भी फोकस किया गया है। यदि किसी व्यक्ति सड़क पर एक्सिडेंट करता है और घायल व्यक्ति को छोड़कर भाग जाता है तो दस साल की सजा का प्रावधान किया है। वहीं, दुर्घटना के बाद वह घायल या घायलों को अस्पताल लेकर जाता है तो सजा कम हो सकती है।

पुलिस, FIR और हिरासत

पीड़ित व्यक्ति अब किसी भी थाने में जाकर जीरो एफआईआर दर्ज करा सकते हैं। इसके बाद शिकायत को 24 घंटे के बाद संबंधित थाने में स्थानांतरित किया जाएगा। वहीं, कोई भी महिला ई-एफआईआर दर्ज करा सकती और इस पर तुरंत संज्ञान लेने की व्यवस्था है। इसको लेकर दो दिनों के भीतर जवाब देने की व्यवस्था की गई है।

पुलिस किसी को गिरफ्तार करती है तो इसके बारे में उसके परिवार को सूचित करना जरूरी है। इसके बाद इस केस में क्या हुआ, इसके बारे में पुलिस को 90 दिनों में संबंधित परिवार को बताना होगा। पहले यह व्यवस्था नहीं थी।

किसी मामले में आरोपित अगर 90 दिनों में कोर्ट के समक्ष पेश नहीं होता है तो कोर्ट उसकी अनुपस्थिति में ट्रायल शुरू कर सकता है। इस कानून के बाद अब उन अपराधियों के खिलाफ भी ट्रायल शुरू हो जाएगा, जो विदेशों में छिपकर बैठे हैं।

नए कानून में दया याचिका को लेकर भी प्रावधान किया गया है। दया याचिका अब पीड़ित ही दायर कर सकता है। पहले एनजीओ एवं अन्य संस्थान भी ये काम कर लेते थे। इसमें यह भी प्रावधान किया गया है कि सुप्रीम कोर्ट से याचिका खारिज होने के 30 दिन के बाद ही याचिका दाखिल किया जा सकेगा।

रेप और हत्या के आरोपितों को पुलिस हथकड़ी लगा सकती है। यह हथकड़ी गिरफ्तारी के समय और कोर्ट ले जाने के दौरान लगा सकती है। हालांकि, आर्थिक अपराध करने वाले आरोपित इससे बचे रहेंगे।

भारतीय न्याय संहिता के अनुसार, पुलिस अपराधियों को अपनी हिरासत में 15 दिन से लेकर 60 दिन या फिर 90 दिन तक रख सकती है। पहले यह अवधि सिर्फ 15 दिन तक थी। हिरासत की अवधि अपराध की प्रवृति पर निर्भर करेगी।

पुलिस को मिली शिकायत के 3 दिनों में ही दर्ज करना और बिना देरी किए बलात्कार पीड़िता की मेडिकल जाँच कराना, रिपोर्ट को 7 दिनों के अंदर पुलिस थाने और न्यायालय में सीधे भेजना अनिवार्य होगा।

भारतीय न्याय संहिता (BNS) में किसी भी मामले में पुलिस को 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल करने की समय सीमा तय गई है। इसके साथ ही मजिस्ट्रेट को 14 दिनों में मामले का संज्ञान लेना होगा।

किन धाराओं में बदलाव

धारा 124: IPC की धारा 124 में राजद्रोह से जुड़े मामलों के सजा का प्रावधान था। नए कानून में ‘राजद्रोह’ को ‘देशद्रोह’ कर दिया गया है। भारतीय न्याय संहिता में अध्याय 7 में राज्य के विरुद्ध अपराधों की श्रेणी में ‘देशद्रोह’ को रखा गया है। वहीं, BNS में 124 में अब गलत तरीके से रोकने का प्रावधान किया गया है।

धारा 144: IPC की धारा 144 घातक हथियार से लैस होकर गैरकानूनी सभा में शामिल होने से संबंधित थी। इस धारा को भारतीय न्याय संहिता के अध्याय 11 में सार्वजनिक शांति के विरुद्ध अपराध की श्रेणी में रखा गया है। अब भारतीय न्याय संहिता की धारा 187 गैरकानूनी सभा के बारे में है। वहीं, BNS में धारा 144 में गैरकानूनी रूप से अनिवार्य श्रम को जोड़ा गया है।

धारा 302: IPC में हत्या करने वाले लोगों पर धारा 302 लगाया जाता था। अब ऐसे अपराधियों पर धारा 101 लगेगी। नए कानून के अनुसार, हत्या की धारा को अध्याय 6 में मानव शरीर को प्रभावित करने वाले अपराध कहा जाएगा। BNS में धारा 302 छिना-झपटी के लिए प्रयोग किया जाएगा।

धारा 307: भारतीय दंड संहिता में हत्या करने के प्रयास के लिए धारा 307 के तहत सजा मिलती थी। अब ऐसे दोषियों को भारतीय न्याय संहिता की धारा 109 के तहत सजा सुनाई जाएगी। इस धारा को भी अध्याय 6 में रखा गया है। वहीं, BNS में धारा 307 का प्रयोग लूटपाट से संबंधित होगा।

धारा 376: IPC में दुष्कर्म से संबंधित अपराध को धारा 376 में परिभाषित किया गया था। भारतीय न्याय संहिता में इसे अध्याय 5 में महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराध की श्रेणी में जगह दी गई है। नए कानून में दुष्कर्म से जुड़े अपराध में सजा को धारा 63 में परिभाषित किया गया है। वहीं, सामूहिक दुष्कर्म को आईपीसी की धारा 376D था, जो अब नए कानून में धारा 70 में शामिल किया गया है।

धारा 399: मानहानि के मामले में पहले IPC की धारा 399 का प्रयोग होता था। भारतीय न्याय संहिता में अध्याय 19 के तहत आपराधिक धमकी, अपमान, मानहानि आदि में इसे जगह दी गई है। मानहानि को भारतीय न्याय संहिता की धारा 356 में रखा गया है। वहीं, BNS में धारा 399 का प्रावधान नहीं है।

धारा 420: भारतीय दंड संहिता में धारा 420 में धोखाधड़ी या ठगी से संबंधित अपराध था। यह अपराध अब भारतीय न्याय संहिता की धारा 316 के तहत आएगा। इस धारा को भारतीय न्याय संहिता में अध्याय 17 में संपत्ति की चोरी के विरूद्ध अपराधों की श्रेणी में रखा गया है।

दंड प्रक्रिया संहिता और भारतीय साक्ष्य संहिता में बदलाव

दंड प्रक्रिया संहिता यानी CrPC की जगह अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) लागू हो गई है। सीआरपीसी में कुल 484 धाराओं का प्रावधान था। वहीं, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता में 531 धाराओं का प्रावधान है। नए कानून में 177 प्रावधानों को बदला गया है। इनमें 9 नई धाराएँ और 39 उपधाराएँ जोड़ी गई हैं। इसके अलावा, 35 धाराओं में समय सीमा तय की गई है। वहीं नए भारतीय साक्ष्य अधिनियम में 170 धाराओं का प्रावधान हैं। इससे पहले वाले साक्ष्य कानून में 167 धाराएँ थीं। नए कानून में 24 प्रावधान बदले हैं।

हल्द्वानी हिंसा का मुख्य गुनहगार अब्दुल मलिक दिल्ली से गिरफ्तार; ओवैसी के झूठ का नैनीताल पुलिस ने किया खंडन, कहा- महिलाओं का सम्मान सर्वोपरि

हल्द्वानी के बनभूलपुरा में 8 फरवरी 2024 को भड़की हिंसा का मुख्य आरोपित अब्दुल मलिक गिरफ्तार हो गया है। घटना के लगभग 16 दिनों के बाद उसे शनिवार (24 फरवरी 2024) को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया है। उसे अब हल्द्वानी लाया जा रहा है। उत्तराखंड पुलिस के IG नीलेश आनंद भरणे ने इस गिरफ्तारी की पुष्टि की है। बताया जा रहा इस गिरफ्तारी के बाद अब्दुल मलिक के वकील उसकी अग्रिम जमानत के लिए अदालत में सक्रिय हो गए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब्दुल मलिक के वकील अजय बहुगुणा ने भी अपने मुवक्किल की गिरफ्तारी की पुष्टि की है। उन्होंने साथी वकील शलभ पांडेय और देवेश पांडेय के साथ हल्द्वानी की जिला अदालत में अब्दुल मलिक की अग्रिम जमानत के लिए अर्जी भी दाखिल कर दी है।

अर्जी में वकीलों ने दावा किया है कि घटना के दिन अब्दुल बनभूलपुरा में नहीं था। इसी याचिका में अब्दुल के दिल्ली स्थित एक पते का जिक्र भी किया गया है। बताया जा रहा है कि इसी पते पर पहुँचकर उत्तराखंड पुलिस ने अब्दुल मलिक को गिरफ्तार किया। फिलहाल उसे आगे की कार्रवाई के लिए हल्द्वानी लाया जा रहा है।

महिलाओं पर अत्याचार के आरोपों का पुलिस द्वारा खंडन

इस बीच उत्तराखंड पुलिस ने उन तमाम आरोपों का खंडन किया है, जिसमें दबिश के नाम पर बनभूलपुरा की मुस्लिम पुरुषों और महिलाओं से अत्याचार के आरोप लगे थे। एक अज्ञात महिला के बयान को फ्रंटलाइन इंडिया की पत्रकार इश्मत आरा ने अपने X हैंडल पर शेयर किया है।

वीडियो में महिला ने कक्षा 10 में पढ़ने वाली एक नाबालिग लड़की के साथ पुलिस द्वारा दुर्व्यवहार किए जाने का आरोप लगाया था। इश्मत आरा के इस वीडियो को AIMIM पार्टी के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी ने भी शेयर किया है। ओवैसी ने राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग से मामले का संज्ञान लेने की अपील की है।

इस वीडियो का संज्ञान लेते हुए उत्तराखंड पुलिस ने खंडन जारी किया है। पुलिस मुख्यालय के प्रवक्ता IG नीलेश आनंद भरणे ने कहा, “बनभूलपुरा में पुलिस द्वारा महिलाओं के साथ अभद्रता किए जाने संबंधी सोशल मीडिया पर प्रसारित खबरों का हम पूर्णतः खण्डन करते हैं।”

आईजी नीलेश आनंद भरणे ने कहा कि पुलिस की कार्रवाई महिलाओं और बच्चों के साथ-साथ सभी के प्रति शिष्टाचार पूर्ण रही है और किसी भी प्रकार की कोई नियम विरुद्ध कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने उत्तराखंड पुलिस की छवि को ‘मित्र पुलिस’ बताया।

नीलेश भरणे ने यह भी कहा कि अगर किसी के भी पास महिलाओं या बच्चों के विरुद्ध किसी असंवैधानिक कार्रवाई के पुख्ता सबूत हों तो वो उन्हें वर्तमान में चल रही मजिस्ट्रेटियल जाँच हेतु भेज सकता है। सबूत पुख्ता होने पर दोषियों पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। हालाँकि, ओवैसी या फ्रंट इंडिया की पत्रकार का आरोप सिर्फ जुबानी हैं। वे कोई ठोस सबूत नहीं दे पाए हैं।

बताते चलें कि इससे पहले भी पूर्व IAS अधिकारी और कॉन्ग्रेस नेतृत्व के करीबी हर्ष मंदर के नेतृत्व में गई तथाकथित फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने पुलिस और प्रशासन के खिलाफ बिना ठोस सबूतों के माहौल बनाने का प्रयास किया था। बाद में उस कमेटी के आरोपों में सत्यता नहीं पाई गई थी।

अमेठी में लड़की के साथ रंगरेलियाँ मना रहा मौलाना गिरफ्तार, घर से मिली शक्तिवर्धक दवाएँ: छत्तीसगढ़ में जादू-टोना करने वाले मौलवी पर FIR

उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ के दो अलग-अलग मामलों में एक मौलवी और मौलाना पर पुलिस ने FIR दर्ज की है। अमेठी में एक मस्जिद के मौलाना को तेज आवाज में अश्लील गाने बजाकर एक लड़की के साथ रंगरेलियाँ मनाते पकड़ा गया है। वहीं, दूसरे मामले में छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में एक दरगाह के मौलवी पर झाड़-फूँक के नाम पर अन्धविश्वास फैलाने के आरोप में केस दर्ज हुआ है। यहाँ से लड़कियों के क्रॉस लगे चित्र भी बरामद किए गए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पहला मामला अमेठी के जायस थाना क्षेत्र का है। यहाँ मोजमगंज गाँव की मस्जिद में लगभग 7 साल से एक मौलाना रहता था। वो अक्सर नकाब में रहता था। उसकी गतिविधियों को देखकर गाँव के लोग उस पर नजर रख रहे थे। बुधवार (21 फरवरी 2024) की रात में एक महिला उसकी झोपड़ी में जाते हुए दिखी तो नजर गड़ाए ग्रामीणों ने उसका पीछा किया।

जब लोग झोपड़ी में पहुँचे तो वहाँ मौलाना और महिला एक बिस्तर पर दोनों आपत्तिजनक हालात में मिले। मौलाना ने मामले को रफा-दफा करने की गुजारिश की, लेकिन ग्रामीण नहीं माने। ग्रामीणों का आरोप है कि मौलाना मस्जिद के बगल वाले छप्पर में गाँव की ही एक लड़की के साथ रंगरेलियाँ मनाता था।

इसके बाद ग्रामीणों को इसकी सूचना पुलिस को दी। सूचना मिलते ही गश्त करती पुलिस टीम मस्जिद के पास पहुँची और मौलाना को गिरफ्तार कर लिया। इस दौरान लगभग 18 वर्षीया लड़की के परिजनों को भी बुलाया गया और उन्हें उनकी बेटी सौंप दी गई। ग्रामीणों का आरोप है कि मौलाना अपनी शानो-शौकत पर लाखों रुपए खर्च करता था।

इतना ही नहीं, मौलाना शक्तिवर्धक दवाएँ खाता था और वह ब्रांडेड पानी मँगवा कर पीता था। वह बाहर से लड़कियाँ मँगवाता था और उनके संग रंगरेलियाँ मनाता था। वह साल में एक से अधिक बार जलसे आदि का आयोजन करता था, जिसमें लाखों रुपए लुटाए जाते थे। आरोपित मौलाना का नाम और सही पता गाँव वालों को भी नहीं पता है।

झाड़-फूँक के नाम पर अन्धविश्वास फैलाने वाले मौलवी पर FIR

एक अन्य मामले में छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में झाड़-फूँक के नाम पर समाज में अन्धविश्वास फैला रहे एक मौलवी पर पुलिस ने FIR दर्ज की है। आरोपित का नाम सादिक खान है। सादिक खान पर आरोप है कि उसने तोरवा थाना क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने एक घर को मज़हबी इबादतगाह के रूप में ढाल दिया था।

इसी जगह को वह चिल्ला मुबारकपुर दरगाह बताने लगा था। वह झाड़-फूँक के नाम पर लोगों की बड़ी-से-बड़ी बीमारियों को ठीक करने का दावा भी करता था। छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने गुरुवार (22 फरवरी 2024) को इस मामले में कड़ी कार्रवाई के आदेश दिए थे।

बिलासपुर पुलिस ने बताया कि आरोपित मौलवी सादिक खान के खिलाफ टोनही अधिनियम के तहत FIR दर्ज हुई है। वह लोगों पर भूत-प्रेत का साया बताकर उन्हें गुमराह करता था। सादिक खान के ठिकानों से कई लड़कयों की फोटो भी बरामद हुई है, जिस पर क्रॉस लगा हुआ है।

नगर निगम की नोटिस मिलने के बाद फिलहाल घर में बने गुंबद को हटा दिया गया है। इसी जगह पर लगभग 65 ऐसे परिवार चिह्नित हुए हैं, जो अवैध रूप से प्रधानमंत्री योजना आवास से बने मकानों में अवैध तौर पर रह रहे थे। स्थानीय प्रशासन जाँच करके इस मामले में कार्रवाई में जुटा हुआ है।

1947 में स्वतंत्र हुआ भारत, 47 साल में बना केवल एक AIIMS: पहले वाजपेयी फिर मोदी ने PMSSY से इलाज किया सुलभ, 10 साल में 15 को मंजूरी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कल (25 फरवरी, 2024) को गुजरात के राजकोट में देश के पाँच नए AIIMS का उद्घाटन करेंगे। यहाँ से पीएम राजकोट के अलावा मंगलागिरी, बठिंडा, रायबरेली और कल्याणी AIIMS का भी उद्घाटन करेंगे। इनमें से रायबरेली को छोड़ कर बाकी का ऐलान भी पीएम मोदी ने ही किया था और अब उद्घाटन भी वही कर रहे हैं। मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान पिछली सरकारों से दोगुनी सँख्या में AIIMS बनाए हैं।

मोदी सरकार मात्र AIIMS ही नहीं बल्कि अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं को दुरुस्त करने में भी काफी सफल रही है। बीते 10 वर्षों में देश मेडिकल कॉलेज की सँख्या जहाँ दोगुनी हो चुकी है, वहीं देश का स्वास्थ्य बजट भी इस दौरान लगभग तीन गुना हो चुका है। देश में MBBS सीट की सँख्या भी इस बीच दोगुनी हुई है। इसके अलावा प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र और आयुष्मान भारत जैसी योजनाएँ भी लाई गई हैं। इन सबसे देश के स्वास्थ्य क्षेत्र में बदलाव आए हैं।

पीएम मोदी ने दिए देश को 15 AIIMS

पीएम मोदी वर्ष 2014 में सत्ता में आए थे। तब देश में कुल 8 AIIMS थे। उनके कार्यकाल के लगभग 10 वर्ष बाद देश में कुल AIIMS की सँख्या 23 हो चुकी है। इनमें से अधिकांश चालू हो चुके हैं जबकि कुछ का निर्माण चल रहा है। पीएम मोदी के कार्यकाल में 2015 से ही युद्धस्तर पर AIIMS बनाने का काम चालू हो गया था।

प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (PMSSY) को दोबारा पीएम मोदी ने जीवित किया। उन्होंने अक्टूबर 2015 में एक साथ 3 AIIMS को मंजूरी दी। यह तीनों AIIMS मंगलागिरी (आंध्र प्रदेश), नागपुर और कल्याणी (पश्चिम बंगाल) में बनाए जाने थे। वर्तमान में मंगलागिरी में MBBS कक्षाएँ चल रही हैं। यह 2018 में ही चालू हो गईं थी। 25 फरवरी को प्रधानमंत्री इसमें और भी सुविधाओं के साथ इसका उद्घाटन करेंगे।

इसी तरह AIIMS नागपुर का निर्माण कार्य 2017 में चालू हुआ था। यहाँ भी वर्तमान में MBBS कक्षाएँ चल रही हैं और साथ OPD भी चालू है। पश्चिम बंगाल के कल्याणी में बनाए जाने वाले AIIMS ने भी 2019 में कक्षाएँ चालू कर दी थीं और साथ ही इसमें भी OPD एवं IPD सेवाएँ चालू हैं। राजकोट में जिन AIIMS का लोकार्पण होना है, उनमें यह कल्याणी भी शामिल है।

मोदी सरकार मात्र इतने पर ही नहीं रुकी। उसने जुलाई 2016 में AIIMS गोरखपुर और AIIMS बठिंडा को मंजूरी दी। वर्तमान में गोरखपुर और बठिंडा AIIMS कार्यरत हैं। यहाँ भी MBBS कक्षाएँ चल रही हैं और OPD सुविधाएँ मौजूद हैं। इसके बाद मई 2017 में AIIMS गुवाहाटी को मंजूरी दी गई। AIIMS गुवाहाटी उत्तरपूर्व के लोगों के लिए एक वरदान साबित हो रहा है। मणिपुर में भी एक AIIMS बनाए जाने का प्रस्ताव है।

दिसम्बर 2018 और जनवरी 2019 में मदुरई, बीबीनगर (तेलंगाना) और हिमाचल प्रदेश को AIIMS की मंजूरी सरकार ने दी। इनमें से बिलासपुर AIIMS का बीते वर्ष पीएम मोदी ने उद्घाटन किया था, AIIMS मदुरई में MBBS कक्षाएँ एक अस्थायी कैम्पस में चल रही हैं और मुख्य बिल्डिंग पर काम जारी है। बीबीनगर में MBBS और OPD सुविधाएँ मौजूद हैं।

इसके अलावा AIIMS देवघर में भी OPD, IPD और MBBS कक्षाएँ भी चालू हो चुकी हैं। चुनावी साल 2019 में 4 AIIMS (जम्मू, रेवाड़ी, अवन्तिपुराऔर राजकोट) का ऐलान किया गया। इनमें से हाल ही में पीएम मोदी ने जम्मू AIIMS का उद्घाटन किया।

उन्होंने हालिया हरियाणा दौरे में रेवाड़ी AIIMS की आधारशिला रखी और थी और 25 फरवरी को वह राजकोट AIIMS का उद्घाटन करेंगे। अवन्तिपुरा (श्रीनगर) AIIMS का काम चल रहा है और इसका निर्माण 50% पूरा हो चुका है। सितम्बर 2020 में बिहार दरभंगा में AIIMS बनाए जाने के लिए भी कैबिनेट की मंजूरी मिल गई थी।

हालाँकि, राज्य सरकार और केंद्र सरकार के बीच इस सम्बन्ध में जमीन को लेकर सहमति नहीं बनी है। ऐसे में इसका काम अभी लटका हुआ है। हालिया राजनीतिक बदलावों से यह उम्मीद जगी है कि जल्द ही काम चालू होगा और यह धरातल पर उतरेगा। यहाँ की जनता भी इस बात को लेकर आशान्वित है।

नेहरु-इंदिरा-राजीव के दौर में एक AIIMS, वाजपेयी काल में 6

देश का पहला AIIMS दिल्ली में बनाया गया था। यह वर्ष 1956 में स्थापित हुआ था। इसकी स्थापना में बड़ा योगदान स्वास्थ्य मंत्री अमृत कौर का था, जिनकी इसमें निजी रूचि थी। इसके बाद देश के दूसरे हिस्सों में AIIMS या इनके जैसे ही बड़े अस्पताल बनाने के नाम पर कॉन्ग्रेस चुप बैठ गई। इस दौरान गाँधी-नेहरु परिवार से पीएम बनने वाले लोगों की सँख्या 3 हो गई लेकिन AIIMS की सँख्या 1 ही रही। हालाँकि, जब देश में सत्ता परिवर्तन हुआ और अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने इस पर ध्यान दिया।

2003 के 15 अगस्त को लाल किले से देश को संबोधित करते हुए वाजपेयी ने कहा था, “मैं जानता हूँ कि पिछड़े राज्यों के लोगों को अच्छे अस्पताल की कमी के कारण क्या नुकसान उठाना पड़ता है। इसलिए प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत अगले तीन वर्षों में पिछड़े राज्यों में दिल्ली के एम्स जैसी आधुनिक सुविधाओं से युक्त छह नए अस्पताल स्थापित किए जाएँगे।”

जैसा कि हम जानते हैं कि इसके बाद वाजपेयी सरकार करीब 9 महीने ही सत्ता में रही और 2004 में कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार आई। उस सरकार के दौरान उन छह एम्स का कार्य आगे बढ़ा जिनकी नींव वाजपेयी सरकार में डल गई थी। यह AIIMS जोधपुर, भोपाल, भुबनेश्वर, रायपुर, ऋषिकेश और पटना में बनाए गए।

इन पर काम कॉन्ग्रेस सरकार के दौरान चलता रहा। हालाँकि कॉन्ग्रेस सरकार ने 10 साल देश की सत्ता सँभालने के दौरान मात्र एक नया AIIMS की स्थापना करने का ऐलान किया, वह भी सोनिया गाँधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली में। इसका ऐलान भी फरवरी, 2024 में किया गया जब देश आम चुनावों की तरफ बढ़ रहा था।

AIIMS ही नहीं स्वास्थ्य के क्षेत्र में हुए और भी काम

ऐसा नहीं है कि मोदी सरकार का ध्यान मात्र AIIMS जैसे ही संस्थानों पर है। हाल ही में सरकार द्वारा जारी किया गया श्वेतपत्र बताता है कि आजादी के 67 सालों में जितने डॉक्टर तैयार करने की क्षमता देश बना पाया, उससे अधिक मोदी सरकार ने लगभग 10 वर्षों में ही बना दी। वर्ष 2014 में देश में MBBS सीटों की सँख्या 51,438 थी। वर्तमान में देश में 1.08 लाख मेडिकल सीट हैं। यानी यह बीते 10 वर्षों में दोगुनी हो गई हैं। इस दौरान देश में मेडिकल कॉलेज की सँख्या 387 से बढ़ कर 706 हो चुकी है।

बीते 10 वर्षों में देश का स्वास्थ्य बजट भी बढ़ चुका है। वर्ष 2013-14 में केंद्र सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए लगभग ₹37,000 करोड़ का आवंटन किया था। 2024-25 के अंतरिम बजट में इस क्षेत्र के लिए आवंटन बढ़ा कर लगभग ₹90,000 करोड़ हो चुका है। इसके अलावा आयुष्मान कार्ड और प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र जैसी योजनाएँ भी लाई गई हैं।

UP पुलिस की परीक्षा रद्द, 6 महीने में फिर से होगी बहाली: CM योगी ने कठोर कार्रवाई का किया वादा, आरओ-एआरओ पेपर लीक की भी होगी जाँच

उत्तर प्रदेश में पुलिस परीक्षा का पेपर लीक के दावों के बीच परिक्षार्थियों के लिए राहत की खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने छात्रों की शिकायत के बाद यूपी पुलिस भर्ती परीक्षा को रद्द करने का एलान किया है। छह महीने के अंदर एक बार फिर से ये परीक्षा आयोजित की जाएगी। इसके साथ ही योगी आदित्यनाथ ने आरओ-एआरओ परीक्षा की भी जाँच के आदेश दिए हैं। उस परीक्षा में भी धाँधली की शिकायतें आ रही हैं। मुख्यमंत्री योगी ने कहा है कि युवाओं की मेहनत और परीक्षा की शुचिता से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई होगी।

यूपी पुलिस की परीक्षा रद्द, 6 माह में फिर से होगी परीक्षा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने परीक्षा को रद्द करने का ऐलान करते हुए एक्स पर लिखा, “उत्तर प्रदेश आरक्षी नागरिक पुलिस के पदों पर चयन के लिए आयोजित परीक्षा-2023 को निरस्त करने तथा आगामी 06 माह के भीतर ही पुन: परीक्षा कराने के आदेश दिए हैं। परीक्षाओं की शुचिता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। युवाओं की मेहनत के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी दशा में बख्शे नहीं जाएंगे। ऐसे अराजक तत्वों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई होनी तय है।”

सीएम योगी ने एसटीएफ को परीक्षा लीक मामले की सख्ती से जाँच के निर्देश दिए हैं। गौरतलब है कि परीक्षा की गोपनीयता भंग करने वाले एसटीएफ की रडार पर हैं और अब तक एसटीएफ 300 से ज्यादा गिरफ्तारियाँ कर चुकी है।

आरओ-एआरओ परीक्षा की भी होगी जाँच

मुख्ममंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा 11 फरवरी 2024 को कराई गई समीक्षा अधिकारी/ सहायक समीक्षा अधिकारी (प्रारम्भिक) परीक्षा – 2023 से जुड़ी शिकायतों की भी जाँच कराने का निर्णय लिया है। जानकारी के मुताबिक, समीक्षा अधिकारी/ सहायक समीक्षा अधिकारी (प्रारम्भिक) परीक्षा – 2023 की शुचिता व पारदर्शिता के उद्देश्य में निर्णय लिया गया है कि परीक्षा के संबंध में प्राप्त शिकायतों का शासन स्तर पर परीक्षण किया जाए। इस मामले में अभ्यर्थियों से भी सहायता माँगी गई है। इसके लिए कार्मिक तथा नियुक्ति विभाग की ई-मेल आई.डी. – [email protected] पर 27 फरवरी 2024 तक मेल भेजने को कहा गया है।

बता दें कि यूपी पुलिस कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा 17 और 18 फरवरी को आयोजित की गई थी। 60,244 पदों के लिए आयोजित की गई इस भर्ती परीक्षा में करीब 50 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था, जबकि 48 लाख अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी थी। इस परीक्षा के बाद से ही शिकायतें आ रही थी कि इसके पेपर लीक हो गए थे और इस परीक्षा को रद्द करने की माँग को लेकर अभ्यर्थी प्रदर्शन भी कर रहे थे। हालाँकि अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ कर दिया है कि 17-18 फरवरी को हुई परीक्षा को पूरी तरह से रद्द कर दिया गया है, और अगले 6 माह के अंदर ही ये प्रक्रिया फिर से पूरी कर ली जाएगी।