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हलाल के नाम पर ‘हराम’ की कमाई कर रहे थे मौलाना हबीब यूसुफ और मौलाना मुइदशीर, ताहिर और अनवर के साथ यूपी एसटीएफ ने किया गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश में हलाल सर्टिफिकेट वाला न कोई सामान बनाया जाएगा और न ही बेचा जाएगा, सिवाय बाहरी देशों में एक्सपोर्ट के लिए तैयार हो रहे माल के। खुद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसका ऐलान किया था। इसके बावजूद कुछ मौलाना एक गिरोह बनाकर उत्तर प्रदेश में हलाल सर्टिफिकेट देने के नाम पर ‘हराम’ की कमाई कर रहे थे। उनके पास न कोई लैब थी, न वो किसी सामान की टेस्टिंग करते थे, बस 10 हजार लिया और दे दिया सर्टिफिकेट। मुंबई में बैठकर पैसे बना रहे ऐसे ही मौलानाओं की चौकड़ी को यूपी एसटीएफ ने पहले तो पूछताछ के लिए बुलाया, और जब पूछताछ में उन्हें पूरी तरह से बेनकाब कर दिया, तो फिर उन्हें सलाखों के पीछे भेज दिया।

जानकारी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने सोमवार (12 फरवरी 2024) को हलाल काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मौलाना हबीब युसूफ पटेल, उपाध्यक्ष मौलाना मुईदशीर सपडीहा, जनरल सेक्रेटरी मुफ़्ती ताहिर जाकिर और कोषाध्यक्ष मोहम्मद अनवर खान को गिरफ्तार किया है। इन पर आरोप है कि वे कंपनियों से हलाल सर्टिफिकेट के नाम पर वसूली करते थे। एसटीएफ को सूचना मिली थी कि हलाल काउंसिल ऑफ इंडिया के कुछ सदस्य कंपनियों से हलाल सर्टिफिकेट के लिए मोटी रकम वसूल रहे हैं। एसटीएफ ने इस मामले की जाँच शुरू की और पाया कि आरोपित कंपनियों को धमकाते थे कि अगर वे पैसे नहीं देंगे तो उन्हें हलाल सर्टिफिकेट नहीं दिया जाएगा।

पुलिस उपाधीक्षक दीपक कुमार सिंह की अगुवाई में एसटीएफ की टीम ने चारों को गिरफ्तार किया। एसटीएफ को उनके पास से 4 आधार कार्ड, 4 पैन कार्ड, 3 मोबाइल फोन, 4 एटीएम कार्ड, 21 हजार 820 रुपये की नकदी, तीन ड्राइविंग लाइसेंस, एक आरसी और 2 वोटर कार्ड भी मिले हैं। जानकारी मिली है कि सिर्फ 10 हजार रुपए लेकर ये किसी भी चीज को ‘हराम’ से ‘हलाल’ बना देते थे। जबकि इन लोगों को ये सर्टिफिकेट जारी करने का अधिकार ही नहीं है। यूपी एसटीएफ इस बात की भी जाँच कर रही है कि इस ‘हराम’ की कमाई को किस ‘हलाल’ काम के लिए इस्तेमाल किया जाता था।

हलाल सर्टिफिकेट क्या है?

हलाल सर्टिफिकेट एक ऐसा प्रमाणपत्र है जो यह दर्शाता है कि कोई उत्पाद या सेवा इस्लामिक कानूनों के अनुसार तैयार किया गया है। यह प्रमाणपत्र मुस्लिम समुदाय के लोगों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे केवल हलाल उत्पादों का ही सेवन करते हैं। हलाल का मतलब है “जायज़” यानी इस्लाम में जिसकी अनुमति है। हराम का मतलब है जिसकी अनुमति नहीं है। इसलिए, यह सुनिश्चित करने के लिए कि प्रोडक्ट में इस तरह के किसी पदार्थ की मिलावट नहीं है जो हराम है और उसे बनाने की विधि भी जायज है, इस तरह के सर्टिफिकेट जारी किए जाते हैं। हालाँकि यूपी में ऐसा करना जुर्म है।

उत्तर प्रदेश में पिछले साल बैन किया गया था ये सर्टिफिकेट

बता दें कि पिछले साल योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश में हलाल सर्टिफिकेट वाले सामान बेचने पर जेल भेजने का फैसला किया था। दरअसल, उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से जारी आदेश में कहा है कि हलाल सर्टिफिकेट किसी उत्पाद की गुणवत्ता से संबंधित नहीं है। ऐसे निशान गुणवत्ता को लेकर भ्रम की स्थिति ही पैदा करते हैं। जिन उत्पादों पर इस तरह के प्रतिबंध लगाए गए हैं, उनका उल्लेख राज्य सरकार द्वारा जारी पत्र में साफ तौर पर किया गया है। इस पत्र में बताया गया है कि डेरी उत्पाद, चीनी, बेकरी उत्पाद, पिपरमिंट ऑयल, रेडी टू ईट सेवरीज व खाद्य तेल आदि के लेबल पर हलाल प्रमाणन का उल्लेख किया जा रहा है, जो कि गलत है। उत्तर प्रदेश सरकार का कहना है कि इन उत्पादों के लिए एफएसएसएआई (Food Safety and Standards Authority of India) प्रमाण पत्र ही काफी है।

नाबालिग को ब्लैकमेल करके अरबाज और सोहेल ने साथियों सहित मिलकर किया रेप, बेल्ट से पीटा: पुलिस ने 3 आरोपितों के 4 घरों पर चलाया बुलडोजर

मध्य प्रदेश के मंदसौर में नाबालिग से दुष्कर्म करने के पाँच आरोपितों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया हैं। इनमें से दो नाबालिग हैं। वहीं, प्रशासन ने सोमवार (12 फरवरी 2024) को अरबाज, सोहेल और एनोस उर्फ यस के चार मकानों पर बुलडोजर चला दिया। इस दौरान तीन थानों की पुलिस तैनात रही। हिंदू संगठनों ने आरोपियों के दूसरे अवैध ठिकानों को भी गिराने की माँग की।

पुलिस के मुताबिक, मंदसौर जिले के दलोदा में रविवार (11 फरवरी 2024) को आरोपितों ने किशोरी को ब्लैकमेल करके एकांत में मिलने बुलाया था। जब किशोरी वहाँ पहुँची तो आरोपितों ने पहले थप्पड़ मारे, फिर बेल्ट से पिटाई कर दी। लड़की को पिटते देखकर कुछ हिंदू संगठन के कार्यकर्ता मौके पर पहुँच गए। उन्होंने तीन आरोपितों को पकड़ लिया उसे थाने लाए। वहीं, दो आरोपित भागने में कामयाब रहे थे।

पुलिस ने देर रात मुख्य आरोपी समेत पाँचों आरोपितों के खिलाफ मामला दर्ज करके उन्हें हिरासत में ले लिया। इन आरोपितों में सोहेल की उम्र 20 साल, आरबाज की उम्र 19 साल और एनोस उर्फ यस की उम्र 19 साल है। वहीं, दो आरोपित 18 साल से कम उम्र के हैं। पुलिस ने बताया कि इनमें मुख्य नाबालिग अभियुक्त ने किशोरी के साथ साल 2022 में भी जबरदस्ती की थी।

पीड़िता का कहना है कि 11 फरवरी 2024 की शाम करीब 5 बजे वह स्टेशन रोड पर स्थित कोचिंग जा रही थी। उसी दौरान यस ने अपने दोस्त (नाबालिग) के साथ उसका रास्ता रोक लिया। उसने पीड़िता के पुराने फोटो दिखाए, जिसमें वह नाबालिग के साथ थी। दोनों ने पुराने फोटो दिखाकर उसे ब्लैकमेल किया और कहा कि यदि वह द्वारिका विहार काॅलोनी नहीं आई तो वे फोटो को वायरल कर देंगे।

पीड़िता ने आगे बताया कि वह घर भागने लगी तो यस और उसके साथी ने पकड़कर मुँह दबा दिया। उसके बाद उसे काले रंग की कार में बैठाया और द्वारिका विहार काॅलोनी लेकर गए। यहाँ कार से बाहर खींचा और अरबाज अपने नाबालिग लड़के से साथ उसे पीटना शुरू कर दिया। नाबालिग ने उसे 15 से 20 चाँटे मारे और गर्दन दबाई। उसने मारने के लिए बेल्ट भी निकाली। इसी दौरान सोहेल भी आ गया।

लड़की ने बताया कि इस दौरान द्वारिका विहार काॅलोनी में बनी एक झोपड़ी में ले जाकर उसके साथ जबरन संबंध बनाए। यहाँ पर तीन और लोग आ गए, जिन्हें वह पहले से नहीं जानती थी। वे लोग उन्हें पकड़ कर थाने ले गए। इसके बाद लड़की के माँ-पिता को थाने बुलाया गया। मीडिया संस्थान हिंदुस्तान के अनुसार, इस मामले में सभी आरोपित एक समुदाय विशेष के बताए जा रहे हैं।

इसके बाद हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं ने थाने का घेराव करके आरोपितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की। हिंदू कार्यकर्ताओं का कहना है कि रविवार (11 फरवरी 2024) की शाम करीब 5 बजे नाबालिग लड़की से आरोपित मारपीट कर रहे थे। वर्ग विशेष ‎के युवक उसे बाइक से सुनसान जगह ले गए थे और वहाँ किशोरी के साथ ऐसी हरकत कर रहे थे।

इस मामले में पूर्व‎ विधायक यशपाल सिंह सिसोदिया ने‎ बताया कि आरोपितों के खिलाफ‎ सख्त कार्रवाई को लेकर कलेक्टर और एसपी से चर्चा की है। पुराने ‎आपराधिक मामले जो दबे हुए ‎होंगे, उन पर भी जाँच की माँग की ‎है।‎ वहीं, तहसीलदार नीतेश पटेल ने कहा कि घटना के बाद ग्राम पंचायत से जानकारी निकाली गई थी और तीन आरोपितों के चार अवैध निर्माण को तोड़ा गया है। 

‘₹5 करोड़ अभी, ₹5 करोड़ नीतीश सरकार गिरने के बाद’: विश्वासमत के बाद तेजस्वी यादव के करीबी पर अपहरण का केस दर्ज, अखिलेश ने इंटरनेट से किया कॉल

बिहार में नीतीश कुमार की सरकार ने 129 विधायकों के समर्थन के साथ बहुमत साबित कर दिया, जबकि राजद ने 2 दिनों से अपने विधायकों को पूर्व डिप्टी CM तेजस्वी यादव के आवास में रखा हुआ था। इसके बावजूद चेतन आनंद, नीलम देवी और प्रह्लाद यादव ने पाला बदल कर सत्ताधारी गठबंधन का साथ दिया। अब जदयू विधायक सुधांशु शेखर ने एक केस दर्ज कराया है, जिसके बाद नया विवाद पैदा हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि जदयू विधायकों को तोड़ने के लिए 10-10 करोड़ रुपए के ऑफर दिए गए थे।

उनके द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत में कहा गया है कि जदयू विधायकों को ऑफर दिया गया था कि उन्हें 5 करोड़ पहले और बाकी के 5 करोड़ काम हो जाने के बाद दिए जाएँगे। बताया गया है कि तेजस्वी यादव के करीबी इंजीनियर सुनील की तरफ से ये ऑफर दिए गए थे। पूर्व मंत्री नागमणि का नाम भी इसमें सामने आया है, जिनके द्वारा कहा गया था कि अखिलेश नाम का एक शख्स आपसे बात करेगा। फिर खुद को राहुल गाँधी का करीबी बताते हुए अखिलेश ने इंटरनेट से कॉल किया।

शिकायत में कहा गया है कि कई विधायकों को इस तरह के ऑफर दिए गए थे। जदयू विधायकों से संपर्क करने वालों में शक्ति सिंह यादव का नाम भी सामने आया है। उधर जदयू अपने उन विधायकों पर सख्त कार्रवाई करने जा रही है, जिन्होंने विश्वासमत में धोखा किया। सुधांशु शेखर ने राजधानी पटना के कोतवाली थाने में मामला दर्ज कराया था। जिस सुनील पर अपहरण का आरोप लगाया गया है, वो ठेकेदार है और तेजस्वी यादव का करीबी माना जाता है।

जदयू विधायक बीमा भारती और दिलीप राय के अपहरण का मामला दर्ज कराया गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी भी कह चुके हैं कि खेला करने वाले विधायकों पर कार्रवाई की जाएगी। पूर्व उप-मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने भी कहा है कि विधायकों की खरीद-फरोख्त से खेला करने की सारी जोड़-तोड़ को विफल कर दिया गया है। नीतीश कुमार भी कह चुके हैं कि वो इसकी जाँच कराएँगे कि राजद विधायकों को एक साथ रखा गया था उसका पैसा कहाँ से आया।

बॉलीवुड अभिनेत्री जैकलीन फर्नाडिंस ने महाठग सुकेश के खिलाफ दिल्ली पुलिस कमिश्नर को दी शिकायत, कहा- जेल में बैठकर मुझे धमकी दे रहा और प्रताड़ित कर रहा है

बॉलीवुड ऐक्ट्रेस जैकलीन फर्नांडिस ने जेल में बंद महाठग सुकेश चंद्रशेखर के खिलाफ दिल्ली के पुलिस कमिश्नर संजय अरोड़ा से शिकायत की है। अपनी शिकायत में जैकलीन ने कहा है कि सुकेश जेल से ही उन्हें धमकी दे रहा है और प्रताड़ित कर रहा है। उन्होंने खुद को एक जिम्मेदार नागरिक बताया है, जो अनजाने में एक केस में फँस गई है।

कुछ दिन पहले पुलिस प्रमुख को भेजे गए पत्र में जैकलीन ने कहा, “मैं एक जिम्मेदार नागरिक हूँ, जिसने खुद को अनजाने में एक ऐसे मामले में उलझा हुआ पाया है जिसका कानून के शासन और हमारी न्यायिक प्रणाली की पवित्रता पर दूरगामी प्रभाव है। स्पेशल सेल द्वारा दर्ज एक मामले में अभियोजन पक्ष के गवाह के रूप में मैं आपको मनोवैज्ञानिक दबाव और लक्षित धमकी अभियानों की भीषण अग्निपरीक्षा के बीच लिख रही हूँ।”

पुलिस प्रमुख और क्राइम ब्रांच के स्पेशल कमिश्नर को भेजे गए ईमेल में जैकलीन ने मामले को तुरंत संज्ञान में लेने का आग्रह किया। उनका कहना है कि इससे न केवल उनकी सुरक्षा को खतरा है, बल्कि कानूनी प्रक्रियाओं की अखंडता भी खतरे में है। पत्र में कहा गया है, “खुद को सुकेश बताने वाला एक आरोपित मंडोली जेल में सलाखों के पीछे बैठा है और सार्वजनिक रूप से मुझे डराने-धमकाने की रणनीति के साथ धमकी दे रहा है।”

जैकलीन ने इसमें कहा है कि महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के तहत एक मामले में ‘अभियोजन गवाह’ उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सुकेश चंद्रशेखर के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए। अभिनेत्री ने कहा कि अदालत में सच्चाई बताने से रोकने के लिए वह उन्हें धमकाना चाहता है।

जैकलीन ने कहा, “ये कार्य केवल मेरे व्यक्तिगत अधिकारों पर आघात नहीं करते हैं, वे हमारी न्याय प्रणाली के हृदय पर प्रहार करते हैं। गवाह सुरक्षा के सिद्धांत, जो न्याय प्रशासन के लिए मौलिक है, से समझौता किया गया है, जिससे हमारे कानूनी संस्थानों की विश्वसनीयता और प्रभावकारिता कम हो गई है।”

जैकलिन ने कमिश्नर अरोड़ा से इस बात की भी व्यापक एवं पारदर्शी जाँच करने को कहा कि कैसे जेल में बंद एक आरोपित बाहर के लोगों से संचार बनाए रखने में कामयाब रहा। उन्होंने कहा, “यह जरूरी है कि आरोपियों के लिए उपलब्ध सभी संचार माध्यमों की जाँच की जाए और आगे के दुरुपयोग को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जाएँ।”

बता दें कि जैकलीन ने पिछले साल दिसंबर में दिल्ली की एक अदालत में याचिका दायर किया था। इस याचिका में जैकलीन ने कोर्ट से आग्रह किया था कि सुकेश द्वारा उन्हें संबोधित करते हुए पत्र लिखने या बयान जारी करने पर रोक लगाने के निर्देश दिए जाएँ। दरअसल, जैकलीन सुकेश से जुड़े 200 करोड़ रुपए के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दिल्ली पुलिस द्वारा की जा रही जाँच में गवाह हैं।

दरअसल, सुकेश अभिनेत्री जैकलीन को संबोधित करते हुए पत्र और बयान जारी करते रहता है। इन पत्र और बयानों में वह जैकलीन को ‘बेबी’ और ‘बोम्मा’ जैसे नामों से बुलाता रहा है। इस महाठग ने हाल ही में क्रिसमस और थैंक्सगिविंग के मौके पर एक पत्र जारी किया था। सुकेश ने इस पत्र में जैकलीन को हाल ही में एक पुरस्कार हासिल करने पर बधाई दी थी और उन्हें ‘माई लव’ और ‘बेबी’ कहकर संबोधित किया था।

सुकेश ने अपने पत्र में लिखा था, “बेबी, सबसे पहले आपके लिए मैं बहुत खुश हूँ। मनोरंजन उद्योग में आपके उत्कृष्ट योगदान के लिए 7वाँ DIAFA पुरस्कार प्राप्त करने पर बधाई। आपको अंदाजा नहीं है कि मैं आपके लिए कितना खुश हूँ माई लव। तुम सच में भारतीय फिल्म उद्योग की सबसे महान कलाकार हो। आप पुरस्कारों में ‘व्हाइट गाउन’ में सुपर सुपर स्टनिंग लग रही थीं। बेबी, मैं एक बार फिर आश्चर्यचकित हूँ।”

उसने आगे लिखा, “बेबी, आपकी दो अन्य लेटेस्ट तस्वीरें बहुत खूबसूरत थीं। एक आपकी ‘लाल अरबी पोशाक’ में रेगिस्तान में ली गई तस्वीर और बो पिंक साड़ी में आप बहुत खूबसूरत थीं। लेकिन जिसने मेरा दिल चुरा लिया, वह चमकदार लहंगे में तुम्हारा फोटोशूट है। बेबी तुम लहंगा में धरती की एकमात्र परी लग रही हो।”

गैंगस्टर बेटे को देने के लिए जेल में चरस लेकर पहुँची अमीर फातिमा, तलाशी के दौरान जूते से निकला ड्रग्स: FIR के बाद चालान, कोर्ट ने दी जमानत

उत्तर प्रदेश के बिजनौर जेल में बंद अपने गैंगस्टर बेटे से मिलने पहुँची उसकी अम्मी को लेकर हैरान करने वाला मामला सामने आया है। महिला शनिवार (10 फरवरी 2024) की दोपहर जिला जेल में अपने गैंगस्टर बेटे से मिलने पहुँची थी। कैदियों से मिलने आने वाली महिलाओं की महिला पुलिस तलाशी ले रही थी। तलाशी के दौरान जब महिला पुलिसकर्मियों ने उसके जूते उतरवाए तो उसमें से चरस का पैकेट मिला।

इसके बाद महिला पुलिसकर्मियों ने इसकी जानकारी अपने उच्चाधिकारियों को दी। उच्च अधिकारियों ने जूते से मिले चीज को देखा तो पाया कि पैकेट में करीब 10 ग्राम चरस है। चरस प्रतिबंधित मादक पदार्थ है। इसकी खरीद-बिक्री पर प्रतिबंध है। इसके बावजूद, यह महिला इसे लेकर अपने बेटे को देने के लिए जेल पहुँची थी।

इस महिला का नाम अमीर फातिमा है। यह तारिकमपुर निवासी जाहिद हुसैनी की बीवी है। पूछताछ में फातिमा ने बताया कि उसका बेटा सावेज पिछले एक साल से जेल में है और वह नशे का आदी है। इसीलिए उसके लिए वह चरस लेकर आई थी। हालाँकि, जेल के मुख्य गेट पर तलाशी के दौरान वह पकड़ी गई। जेलर रवींद्र नाथ ने फातिमा के खिलाफ संबंधित धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई है।

जेलर रवींद्र नाथ ने बताया कि अमीर फातिमा का बेटा सावेज एक गैंगस्टर है। उस पर हत्या, लूट, जानलेवा हमला, चोरी समेत सात मुकदमे दर्ज हैं। अब उसकी अम्मी पर भी ड्रग्स आदि से संबंधित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज करके उसका चालान कर दिया गया है। हालाँकि, बाद में उसे कोर्ट से जमानत मिल गई है।

बता दें कि दिसंबर 2023 में भी उत्तर प्रदेश के बिजनौर से ही एक ऐसा ही मामला सामने आया था। दरअसल, सर्वेश नाम की एक महिला का बेटा संजू सैनी हीमपुरदीप थाने का हिस्ट्रीशीटर है और पिछले एक साल से जेल में बंद है। उसे भी नशे की लत है। उसकी माँ एक अन्य महिला को अपने साथ लेकर जेल में उससे मिलने गई थी। तलाशी के दौरान उसके पर्स से भाँग की करीब 6 गोलियाँ बरामद हुई थीं।

इन दोनों महिलाओं के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई के लिए पत्र भेज दिया था। कहा जाता है कि वह पहले भी कई बार अपने बेटे को भाँग लाकर दे चुकी थी। संजू सैनी हिस्ट्रीशीटर बदमाश है। उस पर बिजनौर, अमरोहा और उत्तराखंड के हरिद्वार में भी कई मुकदमे दर्ज हैं। वह गिरोहबंदी अपराध करता है।

इसी तरह, कुछ दिन पहले इसी तरह की एक घटना सामने आई थी। राजस्थान के झालावाड़ जिले में गांजा की खेती का मामला सामने आया था। यहाँ मेहंदी के एक खेत में अवैध रूप से गांजा की खेती की जा रही थी। पुलिस ने मेहंदी के खेत में लगे 15 पौधों से 11 किलोग्राम से अधिक मादक पदार्थ बरामद किया था। इसके साथ ही इस धंधे में शामिल एक शख्स को भी गिरफ्तार किया था।

‘जिंदा आग में झोंक दिया, हिन्दुओं की पहचान कर-कर के हत्या की कोशिश’: जिन पत्रकारों ने कभी चलाई इनके दुख-दर्द की खबरें, हल्द्वानी में उन्हीं पर हमला

उत्तराखंड के नैनीताल के हल्द्वानी स्थित बनभूलपुरा में एक अवैध मस्जिद और मदरसे को ध्वस्त करने पहुँची प्रशासन की टीम पर हमला कर दिया गया। न सिर्फ थाना और पेट्रोल पंप फूँक दिया गया, बल्कि पुलिसकर्मियों को ज़िंदा जलाने की भी कोशिश की गई। महिला पुलिसकर्मियों को बदहवास अवस्था में भागते हुए देखा गया, उनके कपड़े तक फाड़ डाले गए। पत्थरबाजी हुई, गोलीबारी हुई। आम लोगों या पुलिस तो छोड़ दीजिए, पत्रकारों तक पर जानलेवा हमले किए गए।

इन्हीं पीड़ित पत्रकारों में से एक हैं राष्ट्रीय मीडिया संस्थान के लिए काम करने वाले राज सिंह (बदला हुआ नाम, स्थानीय स्तर पर कट्टर इस्लामी लोगों से खौफ के कारण)। ऑपइंडिया ने घायल पत्रकार से मिल कर जाना कि गुरुवार (8 फरवरी, 2024) को क्या हुआ था। राज सिंह को आग में ज़िंदा झोंकने की कोशिश की गई। उन्होंने बताया कि उस दिन उनका ऑफ था, लेकिन साढ़े 3 बजे के करीब दफ्तर से कॉल आया कि वो जल्द मलिक के बगीचे में पहुँच जाएँ। वहाँ उन्होंने देखा कि अवैध मदरसा और मस्जिद को पुलिस ने सील कर रखा था और प्रशासन उसे तोड़ने वाला था।

उन्होंने बताया कि वहाँ नगर निगम की टीम पहुँची और विरोध शुरू हो गया, जिसे मीडिया वाले कवर कर रहे थे। राज सिंह ने बताया कि उसी समय चारों तरफ से आगजनी शुरू हो गई, पत्रकार लोग भीतर घिरे हुए थे। तभी पत्थरबाजी शुरू हो गए, आँसू गैस के गोले भी चले। उन्होंने बताया कि वापसी के समय उन्हें और उनके साथियों को लौटते समय घेर लिया गया। पत्थर से हमला किया गया और लाठी-डंडों से पीटा जाने लगा। राज सिंह ने बताया कि उन्हें नाली में फेंक दिया गया।

उन्होंने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा कि उसके बाद जलती हुई आग में उन्हें झोंक दिया गया। बकौल राज सिंह, उनके सिर से काफी खून बह रहा था और वो होश में नहीं थे, ऐसे में वो हमलावरों को पहचान नहीं पाए। वो उनका कैमरा भी छीन कर ले गए। उन्होंने बताया कि भयंकर धुआँधार गोलियों की आवाज़ें आ रही थीं। उन्होंने संपादक को फोन कर के इसकी सूचना दी, फिर उनके परिचितों के फोन आने लगे। एक भाजपा नेता की मदद से वो गलियों से किसी तरह बाहर निकले।

राज सिंह की एक उँगली फ्रैक्चर हो गई है। उन्होंने बताया कि ईंट-पत्थर फेंके जा रहे थे। उनके अनुसार सिर पर नजदीक से ईंट-पत्थर चलाए जा रहे थे, कई छोटे-छोटे बच्चे भी हमलावरों में शामिल थे। राज सिंह के परिवार में उनकी पत्नी और 2 बेटे हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने उम्मीद छोड़ दी थी कि वो इस स्थिति से बाहर निकल पाएँगे, वो भगवान का नाम लेने लगे थे। उन्होंने कहा कि पहले यहाँ ऐसा नहीं हुआ था, अब पत्रकारों को भी पीटा जा रहा है।

राज सिंह ने बताया, “कोई भी कार्यक्रम होता था तो हम अच्छे से कवर करते थे। पहले हम रात-रात तक रुक कर कवर करते थे। सबकी पीड़ा दिखाते थे, अख़बारों की फाइलें देख लीजिए। जो भी हुआ वो उम्मीद से परे था, इसकी कल्पना हमने नहीं की थी। जितने भी पत्रकार थे, लगभग सभी को पीटा गया।”

एक अन्य पत्रकार ने बताया कि पिछले साल जब कोर्ट ने अतिक्रमण हटाने का फैसला दिया था तब वो लोग बनभूलपुरा के मुस्लिम समाज के साथ खड़े थे। इस पत्रकार ने बताया कि पत्रकार, नगर निगम और पुलिस में से खोज-खोज कर हिन्दू छाँटे गए, फिर उनकी हत्या की तैयारी बनी। उन्होंने कहा कि अगर गाँधीनगर के हिंदुओं ने हमें न बचाया होता तो कोई भी जिंदा न बचता। ये सब कहना है ‘DNN न्यूज़’ के पत्रकार पंकज अग्रवाल का।

उन्होंने बताया कि JCB पहुँचते ही पथराव चालू हो गया और पेट्रोल बम फेंक कर गाड़ियाँ जलाई गईं। उनके पाँव में चोटें आईं, उन्हें इलाज कराना पड़ा। उन्होंने बताया कि अगर हेलमेट न पहना होता तो और भी स्थिति ख़राब होती।

उन्होंने बताया कि ये वही लोग हैं जिनके समर्थन में अच्छी-अच्छी खबरें उन्होंने चलाई थीं, ताकि सरकार इनका कोई नुकसान न करे। पंकज अग्रवाल ने कहा कि केवल हिन्दुओं को निशाना बनाए जाने की साजिश थी। उन्होंने बताया कि हिन्दू पत्रकारों और सफाई कर्मचारियों की पहचान कर के उन्हें मारा गया। पंकज का कहना है कि पुलिस वालों और पत्रकारों को गिन-गिन कर मारा जा रहा था। दोनों पत्रकारों का कहना था कि जिनके लिए उन्होंने सकारात्मक खबरें पिछले साल चलाई थीं, उन्होंने ही उन्हें पीटा।

इससे पहले अस्पताल में इलाज कराने आए ‘HNN न्यूज़’ के घायल पत्रकार पंकज सक्सेना से ऑपइंडिया ने बातचीत की, जिन्होंने बताया था कि भीड़ नाम पूछ-पूछ कर मार रही थी, मुस्लिम होने पर छोड़ दिया जा रहा था। उनके हाथ और पाँव में फ्रैक्चर हुआ है। उनके पाँव में जहाँ प्लास्टर लगा है, वहीं हाथ में भी उन्होंने बैंडेज पहन रखा गया। उन्होंने बताया कि वहाँ पहले से साजिश रच कर 8-10 हजार लोग खड़े थे, जिन्होंने पत्थरबाजी शुरू कर दी और पेट्रोल बम फेंकने लगे।

अपडेट: पहले प्रकाशित खबर में एक राष्ट्रीय मीडिया संस्थान से जुड़े पत्रकार का नाम और उनकी फोटो लगी थी। सुरक्षा कारणों से उनके संस्थान का नाम, पत्रकार का नाम और फोटो आदि छिपा कर खबर को अपडेट किया गया है।

इंडी गठबंधन छोड़ NDA में शामिल हुई जयंत चौधरी की RLD, बदल गई पश्चिमी यूपी की राजनीति: बोले – सबसे बात कर के लिया फैसला

राष्ट्रीय लोक दल ने आधिकारिक तौर पर समाजवादी पार्टी और इंडी गठबंधन को छोड़ने का ऐलान कर दिया है, साथ ही तुरंत प्रभाव से आरएलडी ने एनडीए का हिस्सा बनना भी स्वीकार कर लिया है। इस बात की घोषणा आरएलडी प्रमुख जयंत चौधरी ने की। इस बीच, मीडिया ने जब सवाल पूछा कि आरएलडी विधायकों की नाराजगी की खबरें भी सामने आ रही हैं। इस बात के जवाब में उन्होंने कहा कि आरएलडी ने ये फैसला सभी से बातचीत के बाद लिया है।

राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) के अध्यक्ष जयंत चौधरी ने सोमवार (12 फरवरी 2024) को ऐलान किया कि आरएलडी ने एनडीए के साथ जाने का फैसला लिया है। चौधरी ने कहा कि पार्टी के सभी विधायकों से चर्चा के बाद ये फैसला लिया गया है। हमारे सभी विधायक और कार्यकर्ता हमारे साथ हैं। जयंत चौधरी ने कहा कि चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न देकर मोदी सरकार ने देश के सभी नागरिकों का, किसानों का सम्मान किया है।

जयंत चौधरी ने कहा कि हम देश के लिए, अपने लोगों के लिए कुछ अच्छा करना चाहते हैं। ऐसे में हमने एनडीए के साथ जाने का फैसला लिया। आरएलडी के मुखिया ने कहा कि इस फैसले को बहुत कम समय में लिया गया है। किसी तरह की पहले से कोई प्लानिंग नहीं थी।

बता दें कि संसद के बजट सत्र के आखिरी दिन चौधरी जयंत सिंह सत्तापक्ष की तरफ जाकर बैठे थे। उन्होंने कहा था कि मोदी सरकार चौधरी चरण सिंह जी की सरकार की तरह काम करती है। आरएलडी सांसद जयंत चौधरी ने कहा, “मैं 10 साल तक विपक्ष में रहा हूँ, कुछ समय के लिए इस सदन के इस तरफ बैठा हूँ, मौजूदा सरकार की कार्यशैली में भी चौधरी चरण सिंह के विचारों की झलक मिलती है। पीएम मोदी गाँव में शौचालयों के मुद्दों को संबोधित करते हैं, जब भारत सरकार महिला सशक्तिकरण को अपना मंच बनाती है और गाँवों में जागरूकता पैदा करती है, तो मुझे इसमें चौधरी चरण सिंह जी का उद्धरण याद आता है।”

आरएलडी सांसद जयंत चौधरी ने कहा, “मेरा मानना ​​है कि पीएम मोदी और भारत सरकार ने चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न दिया है, इससे दो बड़े काम हुए हैं, एक तो यह कि हम चौधरी चरण सिंह की विरासत को फिर से स्थापित कर रहे हैं…मेरा मानना ​​है कि यह सिर्फ एक पुरस्कार नहीं, सबसे बड़ा सम्मान है। एक जमीनी सरकार, जो जमीन की आवाज को समझती है और उसे ऊपर उठाना चाहती है, ऐसी सरकार ही धरती पुत्र चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न दे सकती है।”

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने जब पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के लिए भारत रत्न की घोषणा की थी, तब जयंत चौधरी ने मीडिया से कहा था कि वो अब किसी मुँह से बीजेपी के साथ जाने से मना करेंगे। इसके बाद से ये कयास लगने लगे थे कि वो अब एनडीए का हिस्सा बनने वाले हैं। वहीं, आजतक ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि जयंत चौधरी समाजवादी पार्टी की तरफ से सीट बँटवारे को लेकर खुश नहीं थे। सपा ने उनसे कहा था कि सीट भले ही उनके नाम की होगी, यानी चुनाव चिन्ह रालोद का होगा, लेकिन प्रत्याशी समाजवादी पार्टी के होंगे।

हिंदुओं को ‘कुत्ता’ कहने वाला मुफ्ती सलमान अजहरी फिर गिरफ्तार, 5 दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया

भड़काऊ भाषण देने के आरोप में गुजरात में कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे मुफ्ती सलमान अज़हरी को फिर से गिरफ्तार कर लिया गया है। कच्छ की भचाऊ कोर्ट से जमानत मिलने के 24 घंटे के अंदर मोडासा पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। अजहरी के खिलाफ मोडासा टाउन पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया था। अजहरी को कोर्ट 5 दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा है।

कच्छ में जमानत मिलते ही पुलिस ने अज़हरी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया और 10 दिन की रिमांड माँगी। हालाँकि, दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने 5 दिन की रिमांड दी। अज़हरी की रिमांड की माँग करते हुए पुलिस ने अदालत के सामने लगभग 10 अलग-अलग मुद्दे पेश किए। पुलिस ने कहा कि वह भड़काऊ भाषण के अलावा मुफ्ती के ट्रस्ट को फंडिंग जैसे मामलों की भी जाँच करेगी। अब 17 फरवरी को उसे कोर्ट में पेश किया जाएगा।

दरअसल, मुफ्ती सलमान अज़हरी ने 24 दिसंबर 2023 को मोडासा में भड़काऊ भाषण दिया था। इसको लेकर पुलिस ने मामला दर्ज किया था। अजहरी के खिलाफ अत्याचार की धारा भी जोड़ी गई है। इस मामले में पुलिस खुद अभियोजक है। आरोपितों में मुफ्ती सलमान अजहरी के अलावा सभा का आयोजक इशाक भी शामिल है। पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू की है।

इससे पहले सलमान अजहरी के खिलाफ जूनागढ़ और कच्छ में मामला दर्ज किया गया था। जूनागढ़ कोर्ट से जमानत मिलने के बाद कच्छ पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर भचाऊ कोर्ट में पेश किया। भचाऊ की अदालत ने रविवार (11 फरवरी) को अजहरी को सशर्त जमानत दी थी। इसके बाद अब अरावली पुलिस उसे मोडासा टाउन पुलिस स्टेशन ले गई। बाद में पुलिस ने उसे कोर्ट में पेश किया।

बता दें कि मुफ्ती सलमान अज़हरी ने 31 जनवरी 2024 को जूनागढ़ में भी एक भड़काऊ भाषण दिया था। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इसमें उसने कई आपत्तिजनक बातें कही थीं। उसने हिंदुओं की तुलना कुत्ते से की थी। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने मामले का संज्ञान लिया और जूनागढ़ बी डिवीजन पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया।

अपराध दर्ज होने के बाद गुजरात एटीएस सलमान अजहरी को गिरफ्तार करने मुंबई पहुँची थी। इस दौरान अजहरी के समर्थकों के सड़कें जाम करके बवाल कर दिया था। हालाँकि, बाद में घाटकोपर स्थित अजहरी के घर से उसे गिरफ्तार कर लिया गया था। गिरफ्तारी के बाद अजहरी को जूनागढ़ लाया गया था। उसके बाद कोर्ट में पेशी हुई थी। पेशी के दौरान कोर्ट ने अजहरी को 1 दिन की रिमांड भेजा था।

इस मामले में दोबारा पेशी पर कोर्ट ने उसे जमानत दे दी थी। चूँकि अजहरी के खिलाफ कच्छ में भी मामला दर्ज किया गया था, इसलिए बाद में कच्छ पुलिस उसे गिरफ्तार कर ले गई। भचाऊ कोर्ट ने अजहरी की तीन दिन की रिमांड भी मंजूर कर ली। बाद में इसमें भी जमानत दे दी गई। अब मोडासा मामले में मोडासा पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया है। उधर, गुजरात एटीएस इस बात की जाँच कर रही है कि उसके द्वारा संचालित ट्रस्ट को फंड कहाँ से मिलता है और इसका कोई आतंकी कनेक्शन तो नहीं है।

‘पिता ही नहीं बन सकता, प्रेगनेंट कैसे करूँगा’: महिला पत्रकार ने लगाया रेप का आरोप तो कोर्ट में बोले अभिनेता दर्शन जरीवाला

बॉलीवुड अभिनेता दर्शन जरीवाला पर एक महिला पत्रकार ने कुछ माह पहले का आरोप लगाते हुए था कि उन्होंने उसको प्रेगनेंट करके छोड़ दिया। ये आरोप महिला ने दिसंबर 2023 में लगाया था जिसके बाद अभिनेता का काफी विरोध हुआ और अब खबर है कि उन्होंने सिने एंड टीवी आर्टिस्ट एसोसिएशन की कार्यकारी समिति के सदस्य पद से अपना इस्तीफा दे दिया है। साथ ही उस महिला के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करवाया है।

इस बीच उनकी वकील सवीना बेदी ने दावा किया कि महिला का बच्चा दर्शन जरीवाला का हो ही नहीं सकता क्योंकि उन्हें तो मेडिकल समस्या है जिसके कारण वह पिता नहीं बन सकते। वहीं दर्शन जरीवाला ने भी इस मामले में किसी भी तरह की संलिप्ता से इनकार किया है। उन्होंने कहा है कि वो इस केस में अपने आप को निर्दोष साबित करने के लिए कोर्ट तक जाएँगे। उनकी वकील ने इस मामले में पत्रकार पर झूठा इल्जाम लगाने और मानहानि करने के आरोप में केस दर्ज करवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

वकील ने जानकारी दी कि वो पत्रकार जब भी अपने पोस्ट डालती है तो बहुत ही अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करती है। इसके अलावा वो व्हॉट्सएप मैसेज को फेसबुक पर और अपने दोस्तों के साथ-साथ CINTAA सदस्यों को फैला रही है जो कि गलत है। इन मैसेजों में अभिनेता को CINTAA के सहयोगियों के साथ कुछ अभिनेताओं पर भी टिप्पणी करते दिखाया गया है।

हालाँकि जरीवाला का कहना है कि जो मैसेज महिला पत्रकार फैला रही है वो ओरिजनल मैसेज नहीं हैं। उनके अनुसार, उन्होंने कभी ऐसी बात ही नहीं, वो मैसेज नकली हैं। फिर भी वो उन्हें पोस्ट कर रही है। जरीवाला ने कहा कि यही सारी बातें पत्रकार के खिलाफ मानहानि का केस करने का मूल आधार है। केस दायर हो चुका है।

दर्शन की वकील सवीना ने यह भी बताया कि पत्रकार अपने गर्भवती होने का जो दावा कर रही है, उससे दर्शन का कनेक्शन नहीं है। उन्होंने बताया,

“दर्शन का कहना है कि उन्हें स्वास्थ्य समस्या है, इसलिए वह पिता नहीं बन सकते। उनके अपने पार्टनर को भी यह बात माननी मुश्किल हो रही है। उनकी पार्टनर गर्भधारण करना चाहती हैं लेकिन दर्शन की मेडिकल प्रॉब्लम के कारण ऐसा नहीं हो पा रहा। ये महिला कहती है कि वो अचानक प्रेगनेंट हो गई। आज तक मैंने इसकी कोई रिपोर्ट नहीं देखी सिर्फ कुछ सोनोग्राफी के अलावा। ये मानहानि का मामला निकलकर आएगा। गर्भधारण के हफ्ते और स्कैन तस्वीरें भी मैच नहीं होतीं। मेडिकल रूप में देखें तो सोनोग्राफी फेक है। ये वैसी नहीं है जैसी आनी चाहिए। रिपोर्ट डबल स्क्रीन पर होनी चाहिए, लेकिन उसने इसे सिंगल पर रखा। खैर यही कहना है कि मेडिकल कारणों से वो पिता नहीं बन सकते और बच्चा उनका भी नहीं है।”

टाइम्स नाऊ की रिपोर्ट के अनुसार इस मामले में विवाद बढ़ने के बाद जब CINTAA के महासचिव अमित बहल से बात की गई तो उन्होंने बताया कि वो महिला लगातार कुछ न कुछ दिखाकर CINTAA की छवि खराब कर रही थी। उन्होंने कहा, “हमें हमारी महिला सदस्यों के जरिए कॉल आ रहा था। दर्शन को हटाने की बातें हो रही थीं। लेकिन दर्शन का कहना था कि वो एक बार निर्दोष साबित हो गए तो खुद पद छोड़ देंगे… वो अब भी ट्रस्टी हैं। अगर महिला अब भी CINTAA का नाम उछालती रही तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।”

बता दें कि दो माह पूर्व एक महिला पत्रकार ने दावा किया था कि उसने दर्शन जरीवाला के साथ ‘गंधर्व विवाह’ किया और बाद में प्रेगनेंट हुई। इसके बाद कुछ पोस्ट भी सामने आए जिसके जरिए महिला बताती रही कि उसके जरीवाला के साथ संबंध हैं। उसने आरोप लगाया कि जरीवाला को जब उसके गर्भवती होने का पता चला तो वो उसे अकेले छोड़ गया।

मनीष सिसोदिया को मिली अंतरिम जमानत, भतीजी की शादी में जाएँगे लखनऊ: जेल से बाहर निकलेंगे शराब घोटाले में फँसे पूर्व डिप्टी CM

दिल्ली के पूर्व उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को 3 दिनों के लिए जमानत मिली है। इस दौरान वो उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में अपनी भतीजी की शादी में हिस्सा ले सकेंगे। राउज एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें ये राहत दी है। AAP नेता मनीष सिसोदिया शराब घोटाला मामले में फँसे हुए हैं। इसी मामले में उन्हें अंतरिम बेल मिली है। मंगलवार (13 फरवरी, 2024) से लेकर गुरुवार (15 फरवरी, 2024) तक मनीष सिसोदिया जेल से बाहर रहेंगे और भतीजी की शादी का हिस्सा बनेंगे।

मनीष सिसोदिया ने जमानत के लिए अदालत में अर्जी दी थी। स्पेशल जज MK नागपाल इस मामले की सुनवाई कर रहे थे। भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में फँसे मनीष सिसोदिया के मामले की जाँच ED और CBI दोनों जाँच एजेंसियाँ कर रही हैं। उन्हें 26 फरवरी, 2023 को गिरफ्तार किया गया था। उन्हें जेल में रहते 1 साल हो गया था। दिल्ली की शराब नीति 2021-22 में घपला हुआ था। हालाँकि, इस शराब नीति को निरस्त कर दिया गया।

पहले मनीष सिसोदिया को CBI ने गिरफ्तार किया था, उसके बाद उन्हें ED ने भी गिरफ्तार किया था। AAP नेता को तिहाड़ जेल में रखा गया है। वो पटपड़गंज विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। इससे पहले उन्हें और उनकी ही पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह को दिसंबर 2023 में बेल नहीं मिली थी, जिसके बाद उनका नया साल जेल में ही गुजरा था। तब कोर्ट ने AAP नेता मनीष सिसोदिया के वकीलों के वकीलों को फटकार लगाते हुए कहा था कि वे जान बूझकर मामले की सुनवाई में देरी करना चाह रहे हैं। 

कुछ महीने पहले ही मनीष सिसोदिया को अदालत ने उनकी पत्नी से मिलने की इजाजत दी थी, जिसके बाद पुलिस उन्हें लेकर उनके घर गई थी। वहीं संजय सिंह को भी कोर्ट में पेश किए जाने का वीडियो सामने आया था। पार्टी दिल्ली और पंजाब में प्रदूषण के खतरनाक स्तर पर पहुँचने और पराली जलाए जाने को कंट्रोल न कर पाने के कारण भी विवादों में है। शराब घोटाले के बाद प्रदूषण के मुद्दे पर उसे अपने ही गठबंधन के साथियों का सहयोग नहीं मिल रहा है।