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माइक से मारा हाथ पर, फोन छीन दूर फेंका: सिंगर आदित्य नारायण ने कॉन्सर्ट में की फैन से बदसलूकी, Video देख लोग कह रहे- घमंडी

बॉलीवुड सिंगर और टीवी होस्ट आदित्य नारायण की एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। इस वीडियो में आदित्य नारायण अपने ही कॉन्सर्ट में एक फैन को माइक से मार रहे हैं और उसका फोन फेंकते दिखाई दे रहे है। आदित्य नारायण का ऐसा बर्ताव देख लोग उनसे नाराज हैं। उन्हें समझाया जा रहा है कि जिन फैन्स की वो इज्जत नहीं कर रहे, आज उन्हीं के वजह से उनको पूछा जाता है।

घटना छत्तीसगढ़ के भिलाई की है। वहाँ कॉलेज इवेंट में आदित्य नारायण का कॉन्सर्ट रखा गया था। आदित्य स्टेज पर ‘डॉन’ फिल्म का गाना ‘आज की रात होना है क्या’ गाना गा रहे थे और उनके फैन्स नीचे खड़े हो उसे एन्जॉय कर रहे थे। साथ ही उनकी वीडियो बना रहे थे। इसी दौरान न जाने आदित्य नारायण को क्या हुआ कि वो स्टेज के किनारे पर आए। एक फैन को माइक से मारा और उसके बाद उसका मोबाइल छीनकर उसे दूर फेंक दिया।

आदित्या का यह रवैया कॉन्सर्ट में शामिल लोगों को बिलकुल समझ नहीं आया। वहीं जब वीडियो सोशल मीडिया पर डाली गई तो अलग अलग रिएक्शन आने लगे। कुछ यूजर्स ने कहा कि आदित्य नारायण के पिता बहुत दयालु हैं, लेकिन इनका व्यवहार बिलकुल अलग है।

एक यूजर ने कहा कि ऐसे मामलों में तो पर्सनल प्रॉपर्टी को क्षति पहुँचाने मामले में एफआईआर हुई है। ऐसे गैर जिम्मेदाराना बर्तावों के लिए कानून है।

यूजर्स पूछ रहे हैं कि आदित्य नारायण की उपलब्धियाँ आखिर हैं क्या तो वो इतना घमंड से पब्लिक प्लेस पर बात करते हैं। लोग उन्हें घमंडी, बद्तमीज आदित कह रहे हैं।

आदित्य नारायण के लिए किए जा रहे कमेंट

लोगों का कहना है कि जिस बच्चे का फोन उठाकर फेंका है उसने या उसके माता-पिता ने भी मेहनत से कमाकर वो फोन लिया होगा। लेकिन आदित्य नारायण ने अपने गुरूर में कुछ नहीं सोचा। ऐसे लोग बिलकुल फैन्स को डिजर्व नहीं करते हैं।

इस्लामी देश में 14 फरवरी को हिंदू मंदिर का उद्घाटन करेंगे PM मोदी: प्रधानमंत्री के प्रयास से 1997 का सपना हुआ पूरा, जानिए पीछे की कहानी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की राजधानी अबू धाबी में स्वामीनारायण मंदिर का उद्घाटन करेंगे। इस सिलिसिले में प्रधानमंत्री मोदी 13 और 14 फरवरी 2024 को UAE में रहेंगे। अपने दो दिवसीय दौरे पर प्रधानमंत्री मोदी UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ द्विपक्षीय बातचीत भी करेंगे।

बता दें कि पिछले 8 महीने में पीएम मोदी की UAE की यह तीसरी यात्रा है। स्वामीनारायण मंदिर के उद्घाटन के अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 फरवरी 2024 को ‘अहलान मोदी’ कार्यक्रम में भारतीय प्रवासियों को भी संबोधित करेंगे। UAE मेें भारतीय राजदूत संजय सुधीर के अनुसार, इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए 65000 से अधिक लोगों ने अपना पंजीकरण कराया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मंदिर का उद्घाटन 14 फरवरी 2024 को करेंगे। इसके बाद 1 मार्च 2024 से यह मंदिर आम लोगों के लिए खोल दिया जाएगा। मंदिर परिसर में एक विजिटर केंद्र, प्रार्थना कक्ष, प्रदर्शनियाँ, लर्निंग सेंटर, बच्चों और युवाओं के लिए खेल क्षेत्र, उद्यान, पानी की सुविधाएँ, फूड कोर्ट, पुस्तक एवं उपहार की दुकानों के साथ अन्य सुविधाएँ भी होंगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस दौरे को लेकर भारत में संयुक्त अरब अमीरात के राजदूत अब्दुल नासिर अल शाली ने कहा कि दोनों देश सहिष्णुता और स्वीकार्यता के मूल्यों के चलते अपनी दोस्ती को और मजबूत कर पा रहे हैं। दुबई में आयोजित हो रहे वर्ल्ड गवर्नमेंट समिट 2024 में प्रधानमंत्री ‘गेस्ट ऑफ़ ऑनर’ के तौर पर शामिल होंगे और समिट को संबोधित करेंगे।

जिस मंदिर का प्रधानमंत्री उद्घाटन होंगे, वह अबू धाबी में पहला हिंदू मंदिर है। यह मंदिर संयुक्त अरब अमीरात के अमीर द्वारा उपहार में दी गई 27 एकड़ भूमि पर बना है। स्वामीनारायण मंदिर के निदेशक प्रणव देसाई ने इस मंदिर के लिए संयुक्त अरब अमीरात और भारतीय नेतृत्व को आभार जताया है।

बता दें स्वामीनारायण संप्रदाय की वेबसाइट के अनुसार, इस संप्रदाय का हिंदू मंदिर UAE के अबू धाबी, दुबई, शारजाह और रुवैस शहर में स्थित हैं। ये मंदिर या तो बन गए हैं या फिर बन रहे हैं। अगर मीडिल स्थित की बात करें तो स्वामीनारायण मंदिर ओमान के मस्कट और सोहर तथा कुवैत एवं बहरीन में भी स्थित है।

दरअसल, स्वामीनारायण संप्रदाय के बोचासनवासी अक्षर पुरूषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (BAPS) के तत्कालीन अध्यक्ष स्वामी महाराज को 5 अप्रैल 1997 को UAE के शारजाह के एक रेगिस्तानी इलाके में गए। वहाँ पर स्वामी जी विश्व शांति और सभी धर्मों में एक-दूसरे के प्रति प्रेम के लिए प्रार्थना की। इसके साथ ही उन्होंने सभी देशों की प्रगति की भी कामना की।

इसके साथ ही उन्होंने अपनी इच्छा से अबू धाबी में एक मंदिर बनाने के लिए भी प्रार्थना भी की। अगले दो दशकों में स्वामीनारायण संप्रदाय के संतों एवं भक्तों ने स्वामी जी की कल्पना के अनुसार मंदिर बनाने के लिए UAE के लोगों एवं वहाँ के नेताओं से मुलाकात की और उनसे इसके लिए इजाजत माँगी। इसके साथ ही उन्होंने मंदिर बनाने के लिए जमीन की भी माँग की।

साल 2014 में केंद्र में भाजपा की सरकार आई और नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने। इसके बाद भारत और UAE के बीच आपसी विश्वास का माहौल बना और दोनों देशों के रिश्ते और मजबूत हुए। इसके बाद साल 2015 में UAE की सरकार ने हिंदू मंदिर के लिए जमीन आवंटित की थी। इसके बाद पीएम मोदी ने UAE सरकार की दिल खोलकर सराहना की थी।

TOI की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी ने अपने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा था, “मैं अबू धाबी में मंदिर बनाने के लिए भूमि आवंटित करने के फैसले के लिए संयुक्त अरब अमीरात सरकार का बहुत आभारी हूँ। यह एक महान कदम है।” मंदिर परियोजना के निर्माण, विकास और प्रशासन के लिए दोनों सरकारों ने स्वामीनारायण संस्था और मंदिर लिमिटेड को चुना।

इसके बाद अबू धाबी-दुबई राजमार्ग के नजदीक अबू धाबी-स्वीहान-अल ऐन रोड पर अल रहबा क्षेत्र के अबू मुरीखा में इस मंदिर का निर्माण कार्य शुरू हुआ। इस मंदिर में सात टावर हैं, जो संयुक्त अरब अमीरात में स्थित सात अमीरात का प्रतिनिधित्व करते हैं। इस मंदिर को बनाने की आधिकारिक घोषणा फरवरी 2018 में शाही दरबार में की गई थी और अप्रैल 2019 में शिलान्यास समारोह आयोजित किया गया था। मई 2023 में 30 से अधिक देशों के राजनयिकों ने निर्माणाधीन मंदिर का दौरा किया था।

मंदिर के प्रवक्ता के अनुसार, प्राचीन प्रथाओं का पालन करते हुए इस मंदिर के निर्माण में लोहे या स्टील का उपयोग नहीं किया गया है। यह विशाल मंदिर पूरी तरह से पत्थर से बनाया गया है। इसे बनाने के लिए 700 से अधिक कंटेनरों में 20,000 टन से अधिक पत्थर और संगमरमर अबू धाबी भेजा गया। नींव को भरने के लिए फ्लाई ऐश का उपयोग किया गया है, जिससे कंक्रीट मिश्रण में 55 प्रतिशत सीमेंट की जगह ली गई है।

इस मंदिर को पर्यावरण के अनुकूल बन गया है। इसके कार्बन फुटप्रिंट में भी कमी आई है। मंदिर की संरचना की निगरानी के लिए, दबाव, तापमान और भूकंपीय घटनाओं का लाइव डेटा हासिल करने के लिए विभिन्न स्तरों पर 300 से अधिक सेंसर लगाए गए हैं। गुजरात और राजस्थान के कारीगरों को बुलाकर मंदिर के खंभों एवं दीवारों पर मोर, घाथी, घोड़े, ऊँट, चंद्रमा आदि को उकेरा गया है।

भरतपुर के होटल में 350 लोगों को बनाया जा रहा था ईसाई, हिंदू संगठनों का हंगामा: दावा- महिलाओं को दिए 500-500 रुपए, ₹50 हजार देने का लालच

राजस्थान के भरतपुर के एक होटल में सैकड़ों लोगों का धर्मांतरण किए जाने की कोशिश का मामला सामने आया है। हिंदू संगठनों के हंगामे के बाद कुछ लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई है। इन संगठनों का दावा है कि ईसाई मिशनरी से जुड़े लोगों ने महिलाओं को 500-500 रुपए दिए थे। साथ ही ईसाई बनने पर 40-50 हजार रुपए खाते में डालने का प्रलोभन दिया गया था।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार भरतपुर में हाइवे के पास स्थित एक होटल में रविवार (11 फरवरी 2024) को प्रार्थना सभा के नाम पर सैकड़ों लोग जुटाए गए थे। जब हिंदू संगठनों को इसकी जानकारी मिली तो वे भी मौके पर पहुँच गए। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच झड़प हो गई। मौके पर पहुँचकर पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में लिया और हालात पर काबू पाया। इस संबंध में हिंदुवादी संगठनों की तरफ से स्थानीय अटल बाँध थाने में शिकायत दर्ज कराई गई है।

राजस्थान पत्रिका ने भरतपुर के सीओ के हवाले से बताया है कि कुछ लोगों से पूछताछ चल रही है। दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी। राजस्थान तक के अनुसार फिलहाल किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। 20 लोगों को हिरासत में लिया गया है। पुलिस ने जाँच पूरी होने के बाद ही पूरे घटनाक्रम का खुलासा करने की बात कही है।

दैनिक भास्कर ने विश्व हिंदू परिषद के जिलाध्यक्ष लाखन सिंह के हवाले से बताया है कि वे लोग जब मौके पर पहुँचे तो ईसाई धर्म की चंगेजी सभा चल रही थी। ईसाई मिशनरी से जुड़े लोग हिंदू देवी-देवताओं के बारे में आपत्तिजनक बातें कर रहे थे और लोगों से कह रहे थे कि ईसामसीह के पास सभी समस्याओं का हल है। ईसाई धर्म अपनाने पर उनकी सभी समस्याओं का हल हो जाएगा।

उन्होंने बताया कि हिंदुवादी कार्यकर्ताओं ने जब इसका विरोध किया तो सभा में मौजूद लोगों ने मारपीट की कोशिश की। लाखन सिंह का यह भी दावा है कि सभा में आने के लिए महिलाओं को 500 रुपए दिए गए थे। बच्चों की शादी सहित कई अन्य कार्यों में उनकी मदद का वादा किया गया था। सभा में मौजूद लोगों की संख्या के बारे में अलग-अलग रिपोर्टों में अलग-अलग दावे किए गए हैं। 350 से लेकर करीब 500 लोगों के जुटान की बातें इन रिपोर्टों में कही गई है।

‘नाम पूछ-पूछ कर मार रहे थे हल्द्वानी के दंगाई, मुस्लिमों को छोड़ दिया’: जिस पत्रकार के हाथ और पाँव में आया फ्रैक्चर, उसका खुलासा – जान से मारना चाहते थे

उत्तराखंड के हल्द्वानी में स्थिति अब नियंत्रण में है, लेकिन इस्लामी कट्टरपंथी भीड़ ने जो किया उसका दंश कई महीनों तक लोगों को झेलना पड़ेगा। नैनीताल के हल्द्वानी स्थित बनभूलपुरा में अवैध कब्जे को हटाने के लिए प्रशासन क्या पहुँचा, भीड़ ने थाना और पेट्रोल पंप ही फूँक डाला। पुलिसकर्मियों को ज़िंदा जलाने की कोशिश की गई। लोगों को मारा-पीटा गया। पत्थरबाजी और गोलीबारी हुई। महिला पुलिसकर्मियों तक को नहीं छोड़ा गया, आरोप है कि उनके कपड़े तक फाड़े गए।

अब एक स्थानीय पत्रकार ने बताया है कि कैसे मुस्लिम नाम वालों को छोड़ दिया गया और उनसे मारपीट नहीं की गई। अस्पताल में इलाज कराने आए ‘HNN न्यूज़’ के घायल पत्रकार पंकज सक्सेना से ऑपइंडिया ने बातचीत की, जिन्होंने बताया कि भीड़ नाम पूछ-पूछ कर मार रही थी, मुस्लिम होने पर छोड़ दिया जा रहा था। उनके हाथ और पाँव में फ्रैक्चर हुआ है। उनके पाँव में जहाँ प्लास्टर लगा है, वहीं हाथ में भी उन्होंने बैंडेज पहन रखा गया। पंकज सक्सेना गुरुवार (8 फरवरी, 2024) वाली घटना में ही घायल हुए।

उन्होंने बताया कि बतौर पत्रकार वो मीडिया के अन्य साथियों के साथ अवैध मदरसा-मस्जिद को तोड़ने के लिए आई प्रशासन की टीम को कवर करने पहुँचे थे। उन्होंने बताया कि वहाँ पहले से साजिश रच कर 8-10 हजार लोग खड़े थे, जिन्होंने पत्थरबाजी शुरू कर दी और पेट्रोल बम फेंकने लगे। उन्होंने बताया कि फिर शाम को बिजली काट कर पत्थरबाजी शुरू की गई। पेट्रोल बम के जरिए जान से मारने का षड्यंत्र था। उन्होंने कहा कि जब गलियों से भाग रहे थे तब घायल हुए।

उन्होंने बताया कि दोनों तरफ से आगजनी कर के पीड़ितों को घेर लिया गया था। बकौल पंकज सक्सेना, घेरने के बाद भीड़ ने ऊपर से पत्थरबाजी शुरू की। उन्होंने इसकी पुष्टि की कि महिला पुलिसकर्मियों के साथ भी बदसलूकी की गई। पंकज सक्सेना इस दौरान बेहोश हो गए थे। उन्होंने अपनी जान बचाने के लिए गाँधीनगर वालों को धन्यवाद दिया। उनलोगों ने ही बचा कर उन्हें अस्पताल में पहुँचाया। गाँधीनगर वालों ने कई पुलिस वालों और मीडिया वालों को बचाया, महिला पुलिसकर्मियों को कपड़े दिए।

घायल पत्रकार पंकज सेना ने बताया कि सरकार खर्च से उनका इलाज चल रहा है। उन्होंने बताया कि दंगाई कह रहे थे कि अपना नाम बताइए, कई पत्रकारों को छोड़ दिया गया क्योंकि वो उनकी बिरादरी से थे। पत्रकार ने बताया कि उनका एक 8 साल का बेटा भी है, अगर उन्हें बचा कर नहीं लाया जाता तो उनकी लाश ही आती। पंकज सक्सेना को चलने में भी तकलीफ है। उन्हें किसी का सहारा लेकर चलना पड़ रहा है। वो इस हमले में बुरी तरह जख्मी हुए हैं।

जॉनी सिन्स की सेक्सुअल समस्याओं को रणवीर सिंह ने सुलझाया, बीवी को संतुष्ट करने के लिए दिया किट : Video देख लोग नहीं रोक पा रहे हँसी

बॉलीवुड अभिनेता रणवीर सिंह ने पुरुषों की यौन समस्याओं से संबंधित एक विज्ञापन किया है। इस विज्ञापन में उनके साथ पोर्न इंडस्ट्री के जाने-माने नाम जॉनी सिन्स भी हैं। विज्ञापन को इंडियन सीरियल्स की तरह बनाया गया है जिसे देखने के बाद लोग हँस-हँस कर लोट-पोट हैं।

इस विज्ञापन के सीन में रणवीर सिंह डेली सोप वाले जेठ का रोल निभा रहे हैं और अपनी भाई (जॉनी सिन्स) की बीवी से पूछते हैं कि वो घर छोड़कर क्यों जा रही है। इस पर भाई की बीवी उन्हें अपने सारी समस्या के बारे में बताती है। कभी कहती है- डाली पर फूल नहीं खिलता। कभी- पप्पू कांट डांस साला जैसे डॉयलॉग मारती है।

इसके बाद ड्रामे वाले अंदाज में भाई की बीवी को बालकनी से नीचे गिरते दिखाया जाता है। तभी रणवीर सिंह, जॉनी सिन्स को वो बोल्डकेयर का डब्बा देते हैं और ऐसे दिखाया जाता है कि जैसे जॉनी उसका सेवन करने के बाद अपनी बीवी को संतुष्ट करके जमीन पर सुरक्षित उतार लेते हैं।

फिर, एड खत्म हो जाता है और रणवीर सिंह सामने आकर बोल्डकेयर किट की जरूरत और असर पर बात करते हैं।

अब इस विज्ञापन को देख सोशल मीडिया यूजर्स हँस-हँस कर बेहाल हैं। कुछ लोग रणवीर सिंह की इस बात पर भी तारीफ कर रहे हैं कि वो पुरुषों के सेक्शुअल मुद्दों को उठा रहे हैं और इसे दिखाने का साहस भी कर रहे हैं। तो कुछ कह रहे हैं कि ऐसे विज्ञापनों की उम्मीद रणवीर सिंह से की जा सकती है।

बता दें कि ये विज्ञापन ‘#TakeBoldCareOfHerCampaign’ का हिस्सा है। बोल्डकेयर के को-फाउंडर रणवीर सिंह ने कहा, “मैं यहाँ उस पॉजिटिव इम्पैक्ट का इस्तेमाल करने आया हूँ जो मेरे पास है, ताकि हम लोगों को जागरूक कर सकें। बोल्ड केयर कैंपेन किसी बातचीत से कहीं ज्यादा है। यह मेरा एक मिशन है, जिसमें मैं गहराई से शामिल हूँ, और मैं यहाँ पुरुषों के सेक्सुअल हेल्थ के बारे में संदेश पहुँचाने के लिए आया हूँ, ताकि हम एक असरदार समाधान ला सकें, ताकि देशवासियों के जीवन पर इसका बड़ा असर पड़ सके।”

मोदी सरकार के 3 मंत्रियों ने सँभाला मोर्चा, प्रदर्शनकारियों से कर रहे बात: ‘किसान आंदोलन 2.0’ को लेकर दिल्ली में धारा-144, बॉर्डरों पर सख्ती

पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और पश्चिमी यूपी से एक बार किसानों का हुजूम दिल्ली की ओर चल पड़ा है। गाड़ियों, ट्रैक्टरों में राशन लादे किसानों के काफिले कई जगहों से आगे बढ़ रहे हैं। किसानों ने 13 फरवरी को ‘दिल्ली चलो’ का नारा दिया है। इस बार के आंदोलन की अगुवाई मुख्य संयुक्त किसान मोर्चा नहीं कर रहा है, बल्कि संयुक्त किसान मोर्चा (अराजनैतिक) कर रहा है। हालाँकि दिल्ली की ओर बढ़ने की तैयारी कर रहे किसानों को रोकने के लिए हरियाणा पुलिस के साथ ही दिल्ली पुलिस ने भी व्यापक इंतजाम किए हैं। किसान आंदोलन को देखते हुए पूरी दिल्ली में 12 फरवरी से 12 मार्च तक धारा 144 लागू कर दी गई है। दिल्ली पुलिस कमिश्नर संजय अरोड़ा ने यह आदेश दिए हैं।

दिल्ली के सभी बॉर्डर पर सख्ती

संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) के 13 फरवरी को दिल्ली कूच की तैयारी को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने किसानों को रोकने की तैयारियों को अंतिम रूप दे रही है। इसके लिए सोनीपत-दिल्ली की सीमा पर स्थित कुंडली-सिंघु बॉर्डर पर संपर्क मार्ग को बंद कर दिया गया है। सड़क पर लोहे के कंटेनर रखकर उनमें मिट्टी भरी जा रही है। साथ ही भारी संख्या में लोहे व पत्थर के बैरिकेड लगा दिए गए हैं। अब दिल्ली में वाहनों का आना-जाना सिर्फ फ्लाईओवर के ऊपर से हो रहा है। फ्लाईओवर के ऊपर भी खाली कंटेनर, पत्थर व लोहे के बैरिकेड और कंटीले तार रखे गए हैं।

हरियाणा के मुख्यमंत्री ने कही ये बात

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने रविवार (11 फरवरी 2024) किसानों के लिए कहा था कि किसानों को दिल्ली जाने से कोई नहीं रोक रहा है। वह ट्रेन, बसों से जा सकते हैं लेकिन उन्हें ट्रैक्टरों में जाना है, हथियारों के साथ जाना है। ऐसा करना लोकतंत्र के लिए सही नहीं है। सीएम ने कहा कि अगर किसान ट्रैक्टर लेकर जाएंगे और हथियार आगे बांधकर जाएंगे तो कोई भी इन्हें जाने की इजाजत नहीं देगा।

तीन मंत्री कर रहे किसानों से बातचीत

इस बीच, भारत सरकार ने किसानों की माँगों को सुनने के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाई है। इसके तीनों सदस्य केंद्रीय मंत्री हैं। सोमवार को चंडीगढ़ में केंद्रीय कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और केंद्रीय राज्यमंत्री नित्यानंद राय किसानों के साथ बातचीत कर रहे हैं। ये दूसरे दौर की बातचीत होगी। इससे पहले 8 फरवरी को भी किसानों और सरकार के बीच बातचीत हो चुकी है।

चंडीगड़ में किसानों और सरकार के बीच बातचीत अगर असफल रहती है तो गाजीपुर बॉर्डर को पूरी तरह से सील किया जा सकता है। दिल्ली पुलिस टिकरी बॉर्डर पर ड्रोन के जरिए निगरानी कर रही है। वहीं, सिंघु बॉर्डर पर 3 लेयर सिक्योरिटी का प्लान बनाया गया है। बैरिकेडिंग के साथ-साथ पूरे सिंघु बॉर्डर से लेकर मुकरबा चौक तक 16 किलोमीटर के रास्ते को 8 जोन में बांटा गया है। वहीं, हरियाणा के फतेहाबाद में अस्थाई जेल बनाई गई है। इसके अलावा हरियाणा में वाटर कैनन और वज्र वाहनों को तैनात किया गया है। हरियाणा सरकार ने 11 से 13 फरवरी तक अंबाला, कुरूक्षेत्र, कैथल, जिंद, हिसार, फतेहाबाद और सिरसा समेत सात जिलों में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं और बल्क एसएमएस निलंबित कर दिए हैं।

क्या है किसानों की माँगे?

इस बार ‘दिल्ली चलो’ का नारा देकर कूच कर रहे किसान संगठनों की भी नही माँग है, जो पिछली बार थी। एमएसपी की गारंटी के साथ ही बिजली की दलों में छूट और कर्ज माफी की भी माँग है। किसानों ने पिछले आंदोलन के समय दर्ज हुए मुकदमों को भी तुरंत खारिज करने की माँग की है और लखीमपुर में मारे गए चार किसानों के परिवारों के लिए सरकारी नौकरी और आर्थिक मदद की माँग कर रहे हैं। किसान स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की माँग भी कर रहे हैं, जिसमें लागत की तुलना में एमएसपी को डेढ़ गुना करने की माँग है।

वैसे, 13 फरवरी को ‘दिल्ली चलो’ नारे के साथ दिल्ली कूच कर रहे किसानों की मोर्चेबंदी काफी कड़ी है। इस बार उन्होंने ट्रैक्टरों को मोडिफाई किया है और पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेडिंग को तोड़ने की भी रणनीति बनाई है। इस आंदोलन के तीन दिन बाद ही यानी 16 फरवरी को संयुक्त किसान मोर्चा ने भी भारत बंद का ऐलान किया है। इस दौरान दोपहर 12 बजे से 4 बजे तक देश के सभी नेशनल हाईवे को ब्लॉक करने की रणनीति बनाई गई है

महाराष्ट्र में कॉन्ग्रेस का तीसरा बड़ा विकेट गिरा, 2 बार CM रहे अशोक चव्हाण ने छोड़ी पार्टी: मिलिंद देवड़ा और बाबा सिद्दीकी भी दे चुके हैं झटका

महाराष्ट्र में कॉन्ग्रेस पार्टी को बड़ा झटका लगा है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने पार्टी को अलविदा कह दिया है। महाराष्ट्र में कुछ ही महीनों में न सिर्फ लोकसभा चुनाव, बल्कि उसके बाद विधानसभा चुनाव भी होने हैं। उन्होंने कॉन्ग्रेस पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। अशोक चव्हाण के बारे में ये भी अटकलें हैं कि वो पर्दे के पीछे भाजपा के साथ बातचीत कर रहे हैं। चर्चा ये भी है कि अशोक चव्हाण को राज्यसभा सांसद बनाया जा सकता है।

अशोक चव्हाण नांदेड़ के भोकर विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। 2009 में भी उन्होंने यहाँ से जीत दर्ज की थी, जबकि 2014 में उनकी पत्नी अमीता यहाँ से विधायक बनी थीं। वो 2 बार महाराष्ट्र के CM रहे हैं – एक बार दिसंबर 2008 से लेकर नवंबर 2009 तक और दूसरी बार दिसंबर 2019 से लेकर जून 2022 तक। उनके कार्यकाल में महाराष्ट्र में आदर्श सोसाइटी घोटाला भी सामने आया। आदर्श सोसाइटी बलिदानी सैनिकों के परिजनों को घर देने के लिए बनाई गई थी, जिसमें बड़ा घपला हुआ था।

अशोक चव्हाण ने विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर से मिल कर विधायक पद से भी अपना इस्तीफा सौंप दिया है। इससे पहले मुंबई कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष रहे मिलिंद देवड़ा भी कॉन्ग्रेस छोड़ कर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के गुट वाली शिवसेना में शामिल हो चुके हैं। मिलिंद देवड़ा राजनीतिक परिवार से आते हैं और केंद्रीय मंत्री भी रहे हैं। इन दोनों के अलावा महाराष्ट्र में कॉन्ग्रेस के दिग्गज नेता बाबा सिद्दीकी भी पार्टी छोड़ कर अजीत पवार के गुट वाली NCP का दामन थाम चुके हैं।

महाराष्ट्र भाजपा के अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि महाराष्ट्र में कॉन्ग्रेस पार्टी के भीतर काफी अंतरकलह है। कई छोटे नेता-कार्यकर्ता भी भाजपा में शामिल हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गाँधी OBC को गाली देते हैं, इसे कैसे कोई सहन करेगा। उप-मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी कहा है कि कॉन्ग्रेस के कई अच्छे नेता भाजपा के संपर्क में हैं। उन्होंने कहा था कि जनता से जुड़े हुए नेता कॉन्ग्रेस में घुटन महसूस कर रहे हैं।

जिनको फाँसी से बचा लाई मोदी सरकार, उनको मरने देना चाहता था AAP से कुर्सी पाया जफरुल इस्लाम: कॉन्ग्रेस और चमचे पत्रकारों ने भी की थी देश-विरोधी लॉबिंग

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लगातार हस्तक्षेप के बाद आखिरकार कतर ने भारत के 8 पूर्व नौसेना अधिकारियों को रिहा कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने सोमवार (12 फरवरी 2024) को तड़के इसकी जानकारी दी। वहीं, कतर से लौटकर आए पूर्व अधिकारियों ने भी पीएम मोदी को धन्यवाद दिया है। दरअसल, कतर ने इन पूर्व अधिकारियों को इजरायल के लिए जासूसी के झूठे आरोप में मौत की सजा दी थी।

पूर्व अधिकारियों की वापसी के बाद उन नेताओं, कथित बुद्धिजीवियों, पत्रकारों और पत्रकारों के पोस्ट वायरल हो रहे हैं, जिन्होंने इन पूर्व अधिकारियों को दी गई मौत की सजा का समर्थन किया था। भारत सरकार द्वारा इन पूर्व अधिकारियों के पक्ष में कूटनीतिक प्रयास करने पर उन्होंने भारत सरकार और पीएम मोदी पर निशाना भी साधा था। इसके साथ ही कुछ लोगों ने इन पूर्व अधिकारियों को वापस नहीं लाने पर पीएम मोदी को असक्षम बताया था।

कतर द्वारा भारत के पूर्व अधिकारियों को दी गई मौत की सजा का जफरुल इस्लाम खान ने समर्थन किया था। दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष जफरुल इस्लाम ने सोशल मीडिया X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा था, “अगर ये पूर्व नौसेना अधिकारी सचमुच इजराइल के लिए जासूसी करते हैं तो कोई सहानुभूति नहीं होनी चाहिए। भारत को उनके बचाव में कूदने से पहले ठीक से जाँच करनी चाहिए।”

जफरुल इस्लाम मिल्ली गैजेट नाम के मीडिया संस्थान के संस्थापक है। ये वही संस्थान है, जिसने गोधरा में रामभक्तों को ट्रेन में ज़िंदा जलाए जाने वाली घटना का भी समर्थन किया था। इतना ही नहीं, जफरुल ने अप्रैल 2021 में ट्वीट कर कहा था कि कट्टर हिन्दुओं को शुक्र मनाना चाहिए कि भारत के समुदाय विशेष ने अरब जगत से कट्टर हिन्दुओं द्वारा हो रहे ‘घृणा के दुष्प्रचार, लिंचिंग और दंगों’ को लेकर कोई शिकायत नहीं की है और जिस दिन ऐसा हो जाएगा, उस दिन अरब के लोग एक आँधी लेकर आएँगे, एक तूफ़ान खड़ा कर देंगे।

जब इन अधिकारियों को मौत की सजा मिली थी तो प्रोपेगेंडा वेबसाइट AltNews चलाने वाले मोहम्मद जुबैर ने एक्स पर एक व्यंग्यात्मक पोस्ट करके पीएम मोदी का मजाक उड़ाने की कोशिश की थी। ये वही जुबैर है, जिसने भाजपा के पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा के खिलाफ अभियान चलाया था, जिसके बाद देश भर में हिंसा हुई थी। जुबैर ने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा था कि प्रधानमंत्री ने कतर को अपना दूसरा घर बताया था।

यूट्यूबर साक्षी जोशी ने भी कतर द्वारा पूर्व अधिकारियों को मौत की सजा देने पर यूट्यूबर साक्षी जोशी ने भी पीएम मोदी पर सवाल उठाया था। कॉन्ग्रेस समर्थक पूर्व पत्रकार साक्षी जोशी ने इस मामले पर 27 अक्टूबर 2023 को 10 मिनट का वीडियो बनाया और इसे ’56 इंच की विफलता’ कहा था। इन भारतीयों की रिहाई पर उन्होंने अभी तक अपनी खुशी व्यक्त नहीं की है। यही हाल प्रज्ञा मिश्रा यादव नाम की यूट्यूबर का है।

वहीं, पत्रकार से यूट्यूबर बने रवीश कुमार ने भी इस मामले पर पीएम मोदी और भारत सरकार पर निशाना साधते हुए एक वीडियो बनाया था। हालाँकि, इन पूर्व अधिकारियों की रिहाई के बाद रवीश कुमार ‘सदमे’ से उबर नहीं पाए होंगे। इस रिपोर्ट के प्रकाशित होने तक उन्होंने रिहाई को लेकर कोई बयान पोस्ट नहीं किया है।

कुछ ऐसा ही हाल कॉन्ग्रेस नेता जयराम रमेश का था। जयराम ने 6 अप्रैल 2023 को बयान जारी कर इन पूर्व अधिकारियों को वापस लाने में भारत सरकार की ‘अक्षमता’ पर सवाल उठाया था। एक्स पर एक पोस्ट में बयान को साझा करते हुए जयराम ने लिखा था, “एक ऐसा देश जिसके साथ मोदानी (पीएम मोदी और अडानी को लेकर अपमानजनक शब्द) के विशेष संबंध हैं। इस रिश्ते से अब तक पूर्व सैनिकों को मदद क्यों नहीं मिली?”

पीएम मोदी के विरोध में डूबे इन यूट्यूबर्स और नेताओं ने इन पूर्व अधिकारियों की सजा को अपनी प्रोपेगेंडा और राजनीति के लिए इस्तेमाल किया था। वहीं, जफरूल इस्लाम जैसे लोग इसलिए इन पूर्व अधिकारियों की मौत की सजा को जायज ठहरा रहे थे, क्योंकि उन पर इजरायल के लिए जासूसी का आरोप लगाया गया। बता दें कि अधिकांश मुस्लिम देश फिलिस्तीन को लेकर इजरायल से नफरत करते हैं।

जो अनंत सिंह के लिए ‘लौ# की सरकार’, उनके ही साथ हो गईं उनकी बीवी नीलम देवी: बिहार में RJD के तीन विधायक NDA सरकार के साथ

बिहार विधानसभा में आज (12 फरवरी 2024) नीतीश सरकार का बहुमत परीक्षण होना है। उससे ठीक पहले राजद खेमे के तीन विधायकों के एनडीए के साथ जाने की खबर आ रही है। इनमें से एक शिवहर के विधायक चेतन आनंद और दूसरी मोकामा विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाली नीलम देवी हैं। राजद ने अपने इन दोनों विधायकों को ‘बंधक’ बनाने का आरोप सत्ता पक्ष पर लगाया है। इनके अलावा राजद विधायक प्रह्लाद यादव भी विधानसभा में सत्ता पक्ष की बेंच पर बैठे नजर आए हैं।

नीलम देवी बाहुबली अनंत सिंह की पत्नी हैं। जेल में बंद अनंत सिंह को उनके समर्थक ‘छोटे सरकार’ कहते हैं। वे कभी नीतीश कुमार के करीबी माने जाते थे। लेकिन बाद में दोनों के रास्ते अलग हो गए। यहाँ तक कि एक मौके पर उन्होंने नीतीश कुमार की सरकार को ‘लौ# की सरकार’ भी कह दिया था। उनका यह बयान काफी वायरल हुआ था। बाद में वे राजद में शामिल हो गए थे।

वहीं चेतन आनंद बाहुबली आनंद मोहन सिंह के बेटे हैं। पिछले दिनों जब राजद के सांसद मनोज झा ने राज्यसभा में ‘ठाकुर का कुआँ’ नाम की कविता पढ़ी थी तो आनंद मोहन ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। उस समय लालू यादव ने मनोज झा का समर्थन करते हुए उन्हें ‘बुद्धिजीवी’ बताया था।

चेतन आनंद उन राजद विधायकों में भी शामिल थे जिन्हें पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के आवास पर रखा गया था। उनका क्रिकेट खेलते एक वीडियो भी सामने आया था। लेकिन 11 फरवरी 2024 को पटना पुलिस उन्हें तेजस्वी यादव के आवास से छुड़ाकर ले आई। असल में चेतन आनंद के लापता होने की शिकायत उनके छोटे भाई ने दर्ज कराई थी।

अपने इन दोनों विधायकों के सत्ता पक्ष में जाने पर राजद की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। राजद प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने कहा है, “राजद के दो विधायक चेतन आनंद और नीलम देवी को सत्ता पक्ष के लोगों ने सचेतक के कमरे में बिठा रखा है। उन्हें धमकी देकर जबर्दस्ती बैठाया गया है। उनके साथ क्या-क्या किया गया यह छिपा नहीं है।” उन्होंने सत्ता पक्ष पर सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए पूछा है कि यह किस तरह की ट्रेडिंग है?

गौरतलब है कि बिहार विधानसभा की जो मौजूदा स्थिति है उसमें राजद, काॅन्ग्रेस और वाम दल मिलाकर 114 विधायक होते हैं। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम के इकलौते विधायक ने भी विपक्ष के समर्थन का ऐलान किया है। लेकिन बहुमत का आँकड़ा 122 है। सत्ताधारी बीजेपी, जदयू और जीतनराम मांझी की पार्टी HUM को मिलाकर 127 विधायक हैं। इन्हें निर्दलीय सुमित सिंह का भी समर्थन हासिल है, जो मंत्री पद की शपथ ले चुके हैं।

लेकिन अवध बिहारी चौधरी ने विधानसभा अध्यक्ष का पद छोड़ने से इनकार कर इस पूरे गणित को लेकर सस्पेंस बढ़ा दिया है। वे राजद के विधायक हैं। सोमवार को न केवल एनडीए का शक्ति परीक्षण होना है, बल्कि विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ भी अविश्वास प्रस्ताव आना है। मीडिया रिपोर्टों में सत्ता पक्ष के कुछ विधायकों के गायब होने का भी दावा किया जा रहा है। हालाँकि ऑपइंडिया इसकी पुष्टि नहीं करता है।

सागरिका घोष को गिरा-पड़ा के लात-मुक्कों से मारी थी, ‘गलत कार पार्किंग’ कर विदेशी महिला को दिखा रही थीं तेवर: ‘सांसदी’ के बाद खबर वायरल

वर्तमान में जो सागरिका घोष तृणमूल कॉन्ग्रेस की तरफ से राज्यसभा सांसद का टिकट पाने के कारण चर्चा में हैं, वहीं सागरिका बतौर पत्रकार कभी प्रोपेगेंडा फैलाने के लिए, कभी फर्जी खबरों को बढ़ावा देने के लिए चर्चा में रहती थीं। इसके अलावा एक बार तो वह भरे बाजार में पिटने की वजह से भी अखबारों की हेडलाइन बनी थीं।

घटना है 26 साल पहले की। 16 फरवरी 1998 को इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार सागरिका घोष अपने तीन साल के बेटे के साथ खान मार्केट शॉपिंग करने गईं थीं। लेकिन वहाँ उनके साथ कुछ ऐसा हुआ जो उन्होंने सोचा भी नहीं होगा।

दरअसल, उस दिन खान मार्केट में गाड़ी पार्क करने के विवाद पर सागरिका घोष को एक विदेशी महिला ने मुँह पर ताबड़तोड़ मुक्के मारे थे। ये महिला कोई और नहीं बल्कि अलजीरियाई दूतावास में बतौर काउंसलर काम करने वाले अब्दुल हामिद की पत्नी थी। सागरिका घोष उस समय आउटलुक वीकली में काम करती थीं।

तस्वीर साभार: Outlook

घटना वाले दिन वह मार्केट में अपनी मारूति कार लेकर गई थीं, जो उन्होंने अल्जीरियाई महिला की कार के सामने लगा दी थी। इसी पर विदेशी महिला ने आपत्ति जताते हुए कहा कि ऐसे तो उसके लिए बहुत कम जगह बचेगी निकलने की। ये सुन सागरिका ने उसे समझाने की कोशिश की। उन्होंने कहा- पागल मत बनो, तुम्हारे निकलने के लिए काफी जगह है।

मगर तब तक विदेशी महिला गुस्से में आ गई थी। वह अपनी कार से बाहर निकली। उसने सागरिका को उनकी मारूति से निकाला और रोड किनारे पटक दिया। इसके बाद वो वहीं बीच सड़क पर सागरिका घोष को झापड़, मुक्के, घूँसे मारती रही।

अजीब बात यह थी कि इस घटना के समय पास में पीसीआर थी लेकिन पुलिस ने घटनास्थल पर पहुँचकर मामला शांत कराने का प्रयास नहीं किया। वहीं सागरिका का बेटा यह सब देख रो रहा था। पुलिस से बाद में जब पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इस घटना को देख वह असमंजस में थे क्योंकि घटना में 2 महिलाएँ शामिल थीं।

हालाँकि, इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट बताती है कि इस झगड़े को रोकने के लिए एक पानवाला कूदा और उसने दोनों महिलाओं को अलग करने का प्रयास किया। उसे देख अन्य दुकानदार भी आए और विदेशी महिला की पकड़ से सागरिका को छुड़ाने में सफल हुए। दोनों महिलाओं को छुड़ाने वालों ने कहा- “वो बहुत ताकतवर थी। उसे हटाना बहुत मुश्किल था। “

उन्होंने यह भी बताया कि घटना के बाद भी महिला लगातार सागरिका को गाली दे रही थी। इस दौरान महिला ने चूँकि भारतीयों के लिए भी अपशब्द कहे थे इसलिए उस महिला से स्थानीय लोग भी नाराज थे। उसके पति के पहुँचने के बाद भी उन्होंने हामिद को वहाँ रोक लिया था और कहा था कि जब तक पुलिस केस रजिस्टर नहीं करेगी तब तक वह उसे नहीं छोड़ेंगे।

सागरिका घोष से हो रहे सवाल

बता दें कि 11 फरवरी को पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) ने ‘पत्रकार’ सागरिका घोष को राज्यसभा सांसद बनाए जाने की घोषणा की। ये काफी हैरान करने वाली बात थी क्योंकि सागरिका सोशल मीडिया पर कहती थीं कि वह कभी किसी राजनैतिक पार्टी की टिकट को स्वीकर नहीं करेंगी। इस दावे को करते हुए वह चुनौती भी देती थीं कि वो ये चीज लिख कर भी दे सकती हैं, या फिर उनके इस ट्वीट को सेव भी किया जा सकता है। अब इसके 6 साल बाद जब सागरिका घोष खुद को राज्यसभा सांसद बनाए जाने की TMC की घोषणा को रीट्वीट कर रही है, लोग उनसे पूछ रहे हैं कि क्या अब उनकी राय बदल गई है?