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बेच दिया, बर्बाद कर दिया… जिस LIC पर मोदी सरकार को कोसते थे विपक्षी, वो बनी भारत की सबसे बड़ी सरकारी कंपनी: ₹5.60 लाख करोड़ से ज़्यादा की हुई वैल्यू

भारत सरकार की बीमा कम्पनी जीवन बीमा निगम (LIC) बुधवार (17 जनवरी 2024) को देश की सबसे अधिक बाजार पूँजीकरण वाली सरकारी कम्पनी बन गई। LIC ने अब तक भारत की सबसे बड़ी सरकारी कंपनी रही भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को पीछे छोड़ दिया। LIC के सबसे बड़ी कम्पनी बनने के साथ ही उन आलोचकों को जवाब मिल गया, जो इसके विनिवेश को लेकर सवाल उठा रहे थे।

दरअसल, 17 जनवरी 2024 को शेयर बाजार में LIC के एक शेयर का भाव चढ़कर ₹918 तक पहुँच गया। इससे इसका बाजार पूँजीकरण ₹5.6 लाख करोड़ को पार कर गया। इसी के साथ LIC ने ₹5.5 लाख करोड़ के पूँजीकरण वाली सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक को भी पीछे छोड़ दिया। SBI अब तक सबसे अधिक बाजार पूँजीकरण वाली सरकारी कंपनी थी।

LIC एक सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम है अर्थात इसमें 50% से अधिक हिस्सेदारी सरकार के पास है। LIC में वर्तमान में 96.5% हिस्सेदारी केंद्र सरकार की है, जबकि 3.5% हिस्सा निवेशकों को पास है। मई 2022 में यह शेयर बाजार में सूचीबद्ध हुई थी। LIC देश की सबसे बड़ी सरकारी कम्पनी होने के साथ ही देश की सबसे बड़ी बीमा कम्पनी भी है। वर्तमान में इसके 25 करोड़ पॉलिसीधारक हैं।

LIC के देश की सबसे बड़ी सरकारी कम्पनी बनने के साथ ही उन आलोचकों को भी जवाब मिल गया, जो LIC और इसके निवेश करने के तरीके पर प्रश्न उठा रहे थे। जनवरी 2023 से कॉन्ग्रेस के नेताओं ने LIC पर आरोप लगाए थे कि LIC अडानी के शेयर खरीद रही है, जबकि उस पर हिंडनबर्ग ने आरोप लगाए हैं। उनका दावा था कि अडानी समूह में पैसे लगाने के कारण हो LIC को नुकसान हो गया।

कॉन्ग्रेस ने आरोप लगाया था कि LIC के जरिए केंद्र सरकार अडानी समूह को पैसा मुहैया करवा रही है। कॉन्ग्रेस ने मई 2023 में ये भी कहा था कि अडानी में निवेश के कारण LIC का बाजार पूँजीकरण कम हो गया। मई 2023 में LIC का बाजार पूँजीकरण लगभग ₹3.6 लाख करोड़ था। अमेरिकी शॉर्टसेलर हिंडनबर्ग ने एक रिपोर्ट प्रकाशित किया था, जिससे अडानी के शेयर गिर गए थे।

LIC अडानी समूह ही नहीं देश की कई सारी कम्पनियों में पैसा लगाती है। ऐसा वह अपने पॉलिसीधारकों को अच्छा रिटर्न देने के लिए करती है। हालाँकि, कॉन्ग्रेस के आरोप गलत साबित हुए हैं। बीते 6 माह में LIC के शेयर लगभग 43% बढ़ चुके हैं। अडानी समूह भी उबर चुका है। जो कॉन्ग्रेस अडानी समूह के विरुद्ध प्रचार में लगी थी, उसकी ही तेलंगाना सरकार अडानी से समझौते कर रही है।

जिसे पाकिस्तानी कहते हैं अपना सबसे खतरनाक गेंदबाज, उसकी 14 गेंदों पर 6 छक्का: T-20 का वर्ल्ड रिकॉर्ड

पाकिस्तान की क्रिकेट टीम ऑस्ट्रेलिया के बाद न्यूजीलैंड के दौरे पर है। यहाँ पाकिस्तानी टीम को न्यूजीलैंड ने लगातार तीसरे मैच में धो डाला। तीसरे टी-20 बार मैच में ओपनर फिन एलन ने पूरी टीम की धज्जियाँ उड़ा दी। फिन एलन ने पाकिस्तान के सबसे तेज गेंदबाज हैरिस रऊफ पर 6 छक्के जड़ डाले और पूरे मैच में कुल 16 छक्के। ये विश्व रिकॉर्ड की बराबरी भी है। डुनेडिन में खेले गए तीसरे टी-20 मैच में न्यूजीलैंड ने पाकिस्तान को 45 रनों से हरा दिया है, जिसमें फिन एलन ने 137 रनों की विस्फोटक पारी खेली।

इस मैच में पाकिस्तान ने टॉस जीतकर पहले गेदबाजी का फैसला लिया था, जो उल्टा पड़ गया। शुरु में चौथे ओवर में हैरिस रऊफ को सफलता जरूर मिली थी, जब उन्होंने डेवोन कॉनवॉय को 7 रनों के स्कोर पर आउट किया था, लेकिन इसके बाद फिन एलन ने मैच को एकतरफा तरीके से आगे बढ़ाया। फिन एलन ने मैच में 62 गेंदों पर 137 रनों की पारी खेली, जिसमें 16 छक्के शामिल थे। इसके जवाब में पाकिस्तानी टीम बाबर आजम के लगातार तीसरे अर्धशतक के बावजूद 7 विकेट के नुकसान पर 179 रन ही बना सकी और लगातार तीसरा मैच गँवा दिया और सीरीज में 3-0 की बढ़त बना ली।

इससे पहले के दोनों मैचों में न्यूजीलैंड ने 21 और 46 रनों से जीत हासिल की थी। इस मैच में फिन एलन ने कई रिकॉर्ड्स तोड़े।

अब नजर डालते हैं इस मैच में बने रिकॉर्ड्स पर

फिन एलन ने एक पारी में 16 छक्के लगाकर अफगानिस्तानी ओपनर हजरतुल्लाह जाजई की बराबरी कर ली। जाजई ने 2019 में देहरादून में आयरलैंड के खिलाफ 62 गेंदों पर 162 रनों की नाबाद पारी खेली थी और 16 छक्के लगाए थे। दूसरे नंबर पर हंगरी के प्लेयर जीशान कुकीखेल हैं, जिन्होंने 2022 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 137 रनों की पारी में 15 छक्के लगाए थे। ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान एरोन फिंच तीसरे नंबर पर हैं, उन्होंने 2013 में इंग्लैंड के खिलाफ 156 रनों की पारी में 14 छक्के लगाए थे।

फिन एलन की 137 रनों की पारी न्यूजीलैंड की ओर से टी-20 क्रिकेट में किसी भी बल्लेबाज की सबसे बड़ी पारी है। उन्होंने पूर्व कप्तान ब्रेंडन मैक्कुलम का रिकॉर्ड तोड़ा। मैक्कुलम ने बांग्लादेश के खिलाफ 2012 में 123 रनों की पारी खेली थी। तीसरे नंबर पर भी मैक्कुलम ही हैं, जिन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 2010 में नाबाद 116 रनों की पारी खेली थी।

इस मैच में एलन फिन ने हैरिस रऊफ की 14 गेंदों का सामना किया और 6 छक्के लगाए। टी-20 इंटरनेशनल क्रिकेट के इतिहास में सिर्फ तीन बल्लेबाजों ने किसी गेंदबाज को एक मैच में 6 छक्के मारे हैं। युवराज सिंह ने 2007 में स्टुअर्ट ब्रॉड के एक ही ओवर में 6 छक्के जड़ने का कारनामा किया था। कीरोन पोलार्ड ने 202 में श्रीलंकाई गेंदबाज अकिला धनंजय की गेंदों पर 6 छक्के जड़े थे, तो जोश इंग्लिश ने भारतीय स्पिनर रवि बिश्नोई की गेंदों पर 2023 में 6 छक्के लगाए थे।

इस मैच में फिन एलन ने टी-20 इंटरनेशनल क्रिकेट में 1000 रन भी पूरे कर लिए। उन्होंने 611 गेंदों पर ये आँकड़ा छुआ, जो तीसरा सबसे तेज है। इस लिस्ट में पहला नाम सूर्यकुमार यादव का है, उन्होंने 573 गेंदों पर 1000 रन बनाए थे। दूसरे नंबर पर ग्लेन मैक्सवेल हैं, जिन्होंने 604 गेंदों में 1000 रनों के आँकड़े को छुआ था।

हैरिस रऊफ ने इस मैच में अपने 4 ओवर के कोटे में 60 रन दे दिए। ये उनके करियर का सबसे महँगा स्पेल रहा। इससे पहले भी 4 बार वो 50 से ज्यादा रन दे चुके थे, लेकिन वो पाकिस्तान सुपर लीग के मैचों में था। उन्होंने इंटरनेशनल क्रिकेट में कभी 50 से ज्यादा रन नहीं दिए थे।

ये वही हैरिस रऊफ हैं, जिनकी दो गेंदों पर 2 छक्के मारकर विराट कोहली ने टीम इंडिया को पाकिस्तान पर जीत दिलाई थी। विराट कोहली का स्ट्रेट सिक्स आज भी लोग याद करते हैं।

हैरिस रऊफ को पाकिस्तान में मौजूदा समय का सबसे खतरनाक तेज गेंदबाज माना जाता है। वो लगातार 150 से ज्यादा की स्पीड से गेंदबाजी करते हैं। लेकिन विराट कोहली के उन 2 छक्कों के बाद से बल्लेबाजों के मन में रऊफ का हौव्वा खत्म सा हो गया है। एलन ने रऊफ के एक ओवर में 27 रन कूट दिए। ऐसे में फिन एलन ने इस बार रऊफ की जो हालत की है, वो इस कहानी को पूरा करने के लिए काफी है।

‘अयोध्या जा रहा था पटाखों से भरा ट्रक, लगी आग’ : प्राण-प्रतिष्ठा से पहले मीडिया ने चलाई खबर, UP पुलिस ने खोली पोल

राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा से पहले कई भ्रामक जानकारी मीडिया में आ रही हैं। 17 जनवरी 2024 को भी एक ऐसी खबर मीडिया ने चलाई जिसमें बताया गया कि आतिशबाजी के लिए एक ट्रक में पटाखे भरकर अयोध्या की ओर ले जाया जा रहा था, लेकिन उन्नाव में उसमें आग लग गई और सारे पटाखे वहीं जल गए। वीडियो में देख सकते हैं कि घटना के बाद ट्रक धूँ-धूँ करके जलता है और आसमान में रॉकेट बम छूटते दिखते हैं।

इस खबर को एनडीटीवी समेत कई मीडिया संस्थानों ने किया है। हालाँकि पुलिस ने घटना को लेकर जो सच्चाई बताई है वो खबरों में किए जा रहे दावों से अलग है।

पुलिस का पक्ष जानने से पहले देख सकते हैं कि एनडीटीवी ने इस पर रिपोर्ट की और हेडलाइन में स्पष्ट तौर पर ‘अयोध्या’ लिखा।

ट्रक के अयोध्या जाने की बात NDTV में

इसी तरह रिपब्लिक इंडिया ने भी इसी दावे के साथ अपनी रिपोर्ट पब्लिश की।

ट्रक के अयोध्या जाने की बात रिपब्लिक टीवी में

लाइव मिंट ने भी ‘अयोध्या’ लिखकर रिपोर्ट पब्लिश की।

ट्रक के अयोध्या जाने की बात लाइव मिंट में

इसके अलावा सोशल मीडिया पर भी इसे राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा से जोड़कर कहा जाने लगा कि राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के वक्त आतिशबाजी होगी… उसी लिए ये ट्रक अयोध्या जा रहा था।

ममता त्रिपाठी ने अपने ट्वीट में कहा कि उन्नाव के पास ट्रक में आग लगी, सारा ट्रक जलकर ख़ाक हो गया। लोगों को लगा कि अचानक पाकिस्तान बार्डर पर पहुँच गए। कोहरे में भी दूर दूर तक आतिशबाजी देखी गई।

सोशल मीडिया पर शेयर हो रहे पोस्ट

अब प्राण-प्रतिष्ठा से पहले ऐसी खबरें क्यों फैलाई जा रही ये किसी से छिपा नहीं है कि ये अयोध्या को लेकर डर फैलाने का प्रयास है। इस पर उन्नाव पुलिस ने ट्वीट भी किया है। यूपी पुलिस ने ट्वीट के नीचे कहा, “पुलिस एवं दमकल द्वारा आग को पूरी तरह बुझा दिया गया है तथा कोई जनहानि नहीं हुई है। यातायात सुचारू रूप से चल रहा है। उक्त ट्रक तमिलनाडु से बहराइच जा रहा था, जिसमें दुकान की सप्लाई हेतु आतिशबाजी, बच्चों के पोस्टर, फिल्मी कलाकारों एवं धार्मिक पोस्टर लदे थे।”

उन्नाव पुलिस ने घटना के संबंध में अलग से भी बताया। पुलिस ने जानकारी दी कि 17 जनवरी को सुबह 4 बजे थाना पुरवा ग्राम खरगीखेड़ा के पास एक ट्रक जिसमें पटाखे लदे थे, अज्ञात कारणों से उसमें आग लग गई। पुलिस ने सूचना पाते ही फायर ब्रिगेड बुलवाई और आग को पूरी तरह से बुझवाया गया। घटना में कोई जनहानि नहीं हुई। ट्रक को भी रोड से हटवा दिया गया। यातायात भी अब सुचारू रूप से चल रहा है। ट्रक के मालिक ने बताया है कि ये ट्रक तमिलनाडु से बहराइच जा रहा था, जिसमें सप्लाई हेतु आतिशबाजी, बच्चों के पोस्टर, फिल्मी कलाकारों के पोस्ट और धार्मिक पोस्टर लदे थे।

जब रामरथी आडवाणी के लिए सड़क पर उतर गईं प्रोफेसर शारदा सिन्हा, समस्तीपुर के सर्किट हाउस में ही छठ करने को तैयार थीं महिलाएँ

ओछी राजनीति ने समस्तीपुर पर दो कलंक लगा दिए। एक ​ललित नारायण मिश्रा की हत्या और दूसरी लाल कृष्ण आडवाणी की गिरफ्तारी।

80 साल के अखिलेश्वर प्रसाद नारायण सिंह यह बात 22 और 23 अक्टूबर 1990 की दरम्यानी रात बिहार के समस्तीपुर के सर्किट हाउस से लाल कृष्ण आडवाणी (LK Advani) को गिरफ्तार किए जाने की घटना को याद कर कहते हैं। मूल रूप से ​सीवान के रहने वाले सिंह उस समय समस्तीपुर के राम निरीक्षण आत्मा राम कॉलेज (RNAR College Samastipur) में ​इतिहास के प्राध्यापक थे। समस्तीपुर बीजेपी के अध्यक्ष थे।

ऑपइंडिया से बात करते हुए अखिलेश्वर प्रसाद नारायण सिंह ने कहा कि उम्र के कारण अब वे पुरानी बातें भूलने लगे हैं। लेकिन उन्हें वह आक्रोश आज भी याद है जो उस समय आडवाणी की गिरफ्तारी के बाद समस्तीपुर के आम लोगों में दिख रहा था। प्रोफेसर शारदा सिन्हा तो कहती हैं कि वह आक्रोश आज भी उनमें रोमांच भर देता है। सिन्हा भी समस्तीपुर वीमेंस कॉलेज में हिस्ट्री की प्राध्यापक रह चुकी हैं। फिलहाल अपनी बेटी के पास पंजाब के मोहाली में रहती हैं।

प्रोफेसर शारदा सिन्हा बताती हैं कि आडवाणी की गिरफ्तारी की खबर सुनते ही 23 अक्टूबर 1990 की सुबह बड़ी संख्या में महिलाएँ भी समस्तीपुर की सड़क पर उतर गईं थी। खुद सिन्हा दो छोटे बच्चों को घर पर छोड़ सर्किट हाउस तक दौड़ी आईं थी। उन्होंने ऑपइंडिया को बताया, “वह खरना का दिन था। मैं पहली बार छठ करने जा रही थी। महिलाओं ने तय किया कि वे घर नहीं जाएँगी। सर्किट हाउस में ही छठ मनाएँगी। इसके बाद प्रशासन के हाथ-पाँव फूल गए थे।”

सिन्हा के कहे की पुष्टि करते हुए अखिलेश्वर प्रसाद सिंह ने बताया कि सर्किट हाउस के बगल में उस समय लीची का एक बागान था। उसमें एक तालाब था, जिसमें महिलाओं ने छठ मनाने का फैसला किया था। बीजेपी नेता कैलाशपति मिश्र के समझाने के बाद महिलाएँ घर लौटने को तैयार हुईं थी।

सिंह के अनुसार उस समय संचार के साधन आज की तरह नहीं थे। जिसने जहाँ आडवाणी की गिरफ्तारी की खबर सुनी वह सर्किट हाउस दौड़ा आ गया। लोग सर्किट हाउस का गेट तोड़ देना चाहते थे। आडवाणी को गिरफ्तारी के बाद हेलिकॉप्टर से दुमका के मसानजोर डैम स्थित गेस्ट हाउस ले जाया गया था। लेकिन लोगों का आक्रोश बढ़ते जा रहा था। इसके बाद कैलाशपति मिश्र ने पटेल मैदान में एक सभा की घोषणा की।

उस सभा को याद करते हुए सिन्हा ने बताया, “सुबह के 8 बजते-बजते समस्तीपुर शहर में लोग ऐसे उमड़ पड़े थे जैसे कोई रैली हो। कैलाशपति मिश्र ने पटेल मैदान की सभा में लोगों को शांत कराया। कहा कि दोनों सरकारें (बिहार और केंद्र की) चाहती हैं कि कुछ हो जाए ताकि बीजेपी को बदनाम किया जा सके। कलंकित किया जा सके। इसके बाद ही लोग शांत हुए। महिलाएँ खरना करने के लिए पटेल मैदान से अपने घर चली गईं। लेकिन समस्तीपुर शहर में अगले कई दिनों तक इस मामले को लेकर गहमागहमी बनी रही। लोग इस गिरफ्तारी से आक्रोशित थे।”

उल्लेखनीय है कि आडवाणी को जब गिरफ्तार किया गया था, तब केंद्र में वीपी सिंह की और बिहार में लालू प्रसाद यादव की सरकार थी। आडवाणी 25 सितंबर 1990 को सोमनाथ से रथ लेकर अयोध्या के लिए निकले थे। लेकिन गंत्व्य तक पहुँचने से पहले ही 22 अक्टूबर की देर रात उन्हें समस्तीपुर के सर्किट हाउस से गिरफ्तार कर लिया गया था।

बिहार सरकार के इस फैसले से उपजे आक्रोश को याद करते हुए प्रोफेसर शारदा सिन्हा बताती हैं, “उस समय लालू यादव मिल जाते तो लोग क्या कर देते कल्पना नहीं की जा सकती है। लोग कह रहे थे ई पराछुत (नीच) सरकार है। इसको मोल तो चुकाना होगा।” अखिलेश्वर प्रसाद नारायण सिंह के अनुसार आडवाणी को 22 अक्टूबर के दिन में ही हाजीपुर से समस्तीपुर आना था। लेकिन वे रात के करीब एक बजे सर्किट हाउस पहुँचे थे। इसके बाद उनको गिरफ्तार कर लिया गया था। वे बताते हैं कि आडवाणी की उस यात्रा को लेकर उस समय लोगों में खासा उत्साह था। समाज हिंदू के तौर पर एकजुट हो रहा था। आडवाणी की प्रतीक्षा में समस्तीपुर उस दिन पूरी रात जागा रहा था।

उन्होंने बताया कि लोगों की नाराजगी देखकर प्रशासन कैलाशपति मिश्र के नेतृत्व में बीजेपी कार्यकर्ताओं को समस्तीपुर से बसों में भरकर मुजफ्फरपुर ले गई। वहाँ जेल में उनकी गिरफ्तारी दिखाकर छोड़ दिया गया था। लेकिन इससे लोगों का गुस्सा शांत नहीं हुआ। इस घटना के विरोध में अगले एक-दो दिन तक लोग गिरफ्तारी देते रहे थे।

उल्लेखनीय है कि आडवाणी की इस रथ यात्रा को 30 अक्टूबर को अयोध्या पहुँचना था। भले आडवाणी को गिरफ्तार कर इसके पहिए बीच रास्ते में रोक दिए गए थे, लेकिन इसने रामजन्मभूमि मुक्ति आंदोलन को घर-घर तक पहुँचा दिया। इसने राम मंदिर की ऐसी लौ जगाई कि रथ जिस रास्ते से गुजरता वहाँ की मिट्टी लोग सिर पर लगा लेते।

जब गिरफ्तार हुए आडवाणी तब नरेंद्र मोदी भी थे साथ

सोमनाथ से अयोध्या के लिए निकली उस यात्रा के रथी भले लाल कृष्ण आडवाणी, लेकिन सारथी वही नरेंद्र मोदी थे जो आज देश के प्रधानमंत्री हैं। उस समय वे गुजरात भाजपा के संगठन महामंत्री हुआ करते थे। असल में, राष्ट्रीय स्तर पर मोदी का अवतरण इसी रथ यात्रा के जरिए हुआ था।

जब आडवाणी को समस्तीपुर में गिरफ्तार किया गया, तब भी मोदी उनके साथ ही थे। हालाँकि गिरफ्तार कर केवल आडवाणी को दुमका के गेस्ट हाउस ले जाया गया था। प्रोफेसर शारदा ऑपइंडिया को बताया, “जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री बने थे तब लोगों ने कहा था कि गिरफ्तारी के समय वे भी आडवाणी के साथ थे। पर मुझे नहीं पता वे समस्तीपुर आए थे या नहीं। मैं न तो सर्किट हाउस के भीतर थी और न मोदी उस समय इतने पॉपुलर थे। मुझे हाथ से अपनी गिरफ्तारी का इशारा करते आडवाणी आज भी याद हैं।”

वहीं अखिलेश्वर प्रसाद नारायण सिंह ने बताया, “हमलोग तो उस समय पहचानते नहीं थे। लेकिन मोदी जी भी उनके साथ थे। जब मोदी राजनीति में स्थापित हुए तो यह बात सामने आई थी। लेकिन हमलोग उस समय उन्हें पहचानते नहीं थे।”

इस रथ यात्रा में नरेंद्र मोदी की भूमिका को लेकर पत्रकार हेमंत शर्मा ने अपनी किताब ‘युद्ध में अयोध्या’ में भी लिखा है। उन्होंने मोदी को इस यात्रा का रणनीतिकार और शिल्पी बताया है। उनके अनुसार यात्रा के मार्ग और कार्यक्रम को लेकर औपचारिक तौर पर सबसे पहले जानकारी भी मोदी ने ही 13 सितंबर 1990 को दी थी। कहा जाता है कि इस यात्रा की हर सूचना जिस एक शख्स के पास होती थी वे मोदी ही थे। कुछ जानकारियाँ तो आडवाणी को भी बाद में मिलती थी। ‘नरेंद्र मोदी: एक शख्सियत, एक दौर’ में नीलांजन मुखोपाध्याय ने मोदी के हवाले से लिखा है, “इस अनुभव से मुझे मेरी प्रबंधन क्षमता को विकसित करने का अवसर मिला।”

पिछले दिनों लालकृष्ण आडवाणी ने अपने एक लेख में इस यात्रा को याद करते हुए लिखा है, “उस समय (सितंबर 1990 में यात्रा शुरू होने के कुछ दिन बाद) मुझे लगा कि नियति ने तय कर लिया है कि एक दिन अयोध्या में एक भव्य राम मंदिर बनाया जाएगा… अब यह केवल समय की बात है।” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर प्रशंसा करते हुए इसमें कहा है कि भगवान राम ने अपने मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए नरेंद्र मोदी के रूप में अपना भक्त चुना, जिनकी देखरेख में मंदिर की इमारत बन रही है।

आडवाणी और मोदी ने सिखाया धर्म ही राजनीति है

स्वतंत्र भारत की राजनीति में दशकों तक उस जमात का प्रभुत्व रहा है, जिसने तुष्टिकरण की राजनीति को पाला-पोसा। जो अयोध्या से रामलला की मूर्ति को हटवाना चाहते थे। जिनके लिए इफ्तार सेकुलरिज्म है। इस जमात ने इस विचार को भी बड़े जोर-शोर से आगे बढ़ाया कि धर्म को राजनीति से दूर रहना चाहिए। लेकिन इस विचार ने देश का बेड़ा गर्क किया। धर्मनिरपेक्षता को विकृत किया। असल में धर्म और राजनीति दोनों का लक्ष्य सुशासन की स्थापना करना है। आडवाणी और मोदी की उस रथ यात्रा ने भारत को समझाया कि धर्म और राजनीति एक-दूसरे के पूरक हैं, न कि एक दूसरे के द्वेषी। उन्होंने बताया कि राजनीति का मर्म ही धर्म हैं।

यह हमारा सौभाग्य है कि आज का भारत उस विचार के साथ आगे बढ़ रहा है। यह उस पंरपरा का सौभाग्य है जिसने यह सुनिश्चित किया कि 22 जनवरी 2024 को अयोध्या के भव्य राम मंदिर में भगवान रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यजमान होंगे और आज की भारतीय राजनीति के भीष्म पितामह लाल कृष्ण आडवाणी इसके साक्षी बनेंगे।

‘न मोदी से डरना न शाह से, सिर्फ जमीन-ओ-आसमान को बनाने वाले अल्लाह से डरो’: राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले ओवैसी ने मुस्लिमों को भड़काया

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने मुस्लिमों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से न डरने की सलाह दी है। हैदराबाद से सांसद औवेसी ने अपने एक्स हैंडल से बुधवार (17 जनवरी, 2024) को जारी 36 सेकेंड्स की वीडियो क्लिप में ये ऐलान किया है।

ओवैसी ने कहा, “हम सिर्फ ज़मीन-ओ-आसमान को बनाने वाले से डरते हैं, बाकी किसी से भी नहीं डरते हैं। मैं गुनाहगार हूँ, खताकार हूँ, सियाकार हूँ, मैं क्या हूँ, मेरे रब को मालूम है। मगर मैं सिर्फ अल्लाह से डरता हूँ।”

वो आगे कहते हैं, “और तुमको भी बोलने आया हूँ कि न मोदी से डरना, न शाह से डरना, न हुकूमत से डरना, किसी से नहीं डरना, सिर्फ अल्लाह से डरना।” बताते चलें कि इससे पहले औवेसी अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (AAP) पर भी निशाना साध चुके हैं।

उन्होंने आप संस्थापक और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल पर तंज किया था कि वो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के छोटे रिचार्ज है। औवेसी का ये तंज केजरीवाल सरकार के मंगलवार (16, जनवरी, 2024) को दिल्ली में सुंदरकांड का पाठ कराने के लेकर आया था।

इस कार्यक्रम को लेकर औवेसी ने दावा किया था कि ये सब सीएम केजरीवाल ने राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह को ध्यान में रखते हुए किया था। उन्होंने कहा, “जब मैंने ये देखा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री उनकी सरकार ये तय की है। हर मंगलवार को वो सुंदरकांड करवाएँगे, हनुमान चालीसा पढ़वाएँगे। इस पर मैंने कहा कि आप बीजेपी से कैसे अलग है। आप में बीजेपी और आरएसएस में कोई फर्क नहीं है।”

उन्होंने कहा था, “इनका पाखंड देखिए, कोई कह रहा कि मैं सरयू नदी में जाऊँगा, आप कह रहे हैं शिक्षा में ये पढ़ाया जाएगा। आप तो नरेंद्र मोदी पर चल रहे हैं। फिर आप कैसे अलग है। मैं फिर से कह रहा हूँ कि इस देश में बहुसंख्यकों के वोट को कैसे हासिल किया जाए इसका कॉम्पीटिटर हिंन्दुत्व हो रहा है।”

दरअसल सीएम केजरीवाल की अगुवाई में सीएम केजरीवाल ने दिल्ली सभी 70 विधानसभा में मंगलवार को सुंदरकांड का पाठ करवाया था। खुद सीएम केजरीवाल पत्नी सहित रोहिणी के एक मंदिर में ‘सुंदर कांड’ पाठ कार्यक्रम में शामिल हुए और भगवान राम और हनुमान से आशीर्वाद माँगा।

बताते चलें की औवेसी आए दिन पीएम मोदी, बीजेपी और हिंदुत्व पर हमलावर रहते हैं। इससे पहले वो मथुरा ईदगाह मामले में RSS पर निशाना साध चुके हैं। ओवैसी ने अपने लोगों को संघ के डिजाइनों के लिए सचेत रहने के लिए कहा। उन्होंने कहा था कि संघ कृष्णजन्मभूमि मामले पर भी आरएसएस हिंसक मुहिम शुरू करेगी।

‘जो राम-कृष्ण को नहीं मानता, वो सच्चा भारतीय मुसलमान नहीं’: पुरातत्वविद KK मुहम्मद का वीडियो, कहा था- सच बोलने के कारण मुझे किया गया निलंबित

अयोध्या में 22 जनवरी 2024 को नवनिर्मित राम मंदिर में भगवान रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होने वाली है। इससे पहले एक वीडियो वायरल हो रहा है। यह वीडियो पुरातत्व विशेषज्ञ केके मुहम्मद का है। केके मुहम्मद बाबरी ढाँचे में हुई खुदाई में शामिल थे। राम मंदिर के सच को बाहर लाने में उनका बड़ा योगदान माना जाता है।

केके मुहम्मद का जो वीडियो वायरल हो रहा है, वह लगभग चार साल पुरानी है। उन्होंने साल 2019 में एक लिट फेस्ट में बोलते हुए राम मंदिर में हुई खुदाई के साथ ही देश में मंदिरों को तोड़कर बनाई गईं कई मस्जिदों के बारे में बताया था। इस दौरान उन्होंने कहा था कि कैसे वामपंथी इतिहासकार इस पर बोलने का कभी साहस नहीं जुटा सके।

केके मुहम्मद ने बताया था कि हिंदुत्व में कोई भी व्यक्ति किसी भी तरीके से रह सकता है। उन्होंने कहा था, “मैं मुस्लिम विद्वानों से बताता हूँ कि पाकिस्तान नाम का मुस्लिम देश बनाने के बाद भी भारत सेक्युलर है तो ये हिन्दुओं के कारण ही संभव है।” केके मोहम्मद ने इस वीडियो में भारतीय मुस्लिमों के भारतीय संस्कृति से सम्बन्ध के विषय में भी बात की।

उन्होंने कहा कि यदि भारत में मुस्लिमों के लिए राम और कृष्ण उनके लिए हीरो नहीं हैं तो वे परफेक्ट मुस्लिम नहीं हैं। उन्होंने कहा था कि मलेशिया और इंडोनेशिया में भी मुस्लिम राम और कृष्ण को मानते हैं, जबकि वे उनके देश में नहीं हुए। इसी तरह भारत के मुस्लिमों को भी यही करना था, लेकिन वे समझ नहीं पाए।

उन्होंने ईरान का उदाहरण देते हुए कहा कि ईरान के आज भी राष्ट्रीय हीरो रूस्तम और सोहराब हैं। ये दोनों पर्शिया, जो अब मुस्लिम शासन होने के बाद ईरान बन गया है, के हीरो थे। ये मुस्लिम भी नहीं थे, फिर भी इन्हें ईरान अपना नेशनल हीरो मानता है। इस बातचीत को आप यहाँ 14 मिनट के बाद सुन सकते हैं।

इस वीडियो में केके मुहम्मद को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि साल 1990 में राम मंदिर के विषय में सच बोलने के कारण उन्हें निलंबित कर दिया गया था। हालाँकि, बाद में निलंबन को स्थानांतरण में बदल दिया गया। उन्होंने कहा कि मुस्लिम पक्ष का दावा था कि बाबरी को खाली जमीन पर बनाया गया था, लेकिन बाद में हुए सर्वे ने स्पष्ट कर दिया कि यहाँ एक बड़ा मंदिर था।

उन्होंने बताया कि वहाँ कई स्तंभ मिले। ढाँचे वाली जगह से 263 मूर्तियाँ मिलीं। इनमें वराह समेत अन्य कई प्रतीक मिले, जो एक मस्जिद में से कभी नहीं मिल सकते। उन्होंने एक शिलालेख के विषय में भी बताया, जिसमें लिखा था कि यह मंदिर उस अवतार को समर्पित है, जिसने बालि को मारा था। उन्होंने यह भी कहा कि मुस्लिमों के लिए बाबरी कोई बहुत बड़े महत्व की नहीं थी।

केके मुहम्मद ने यह भी कहा कि यदि मुस्लिमों ने इस जगह को हिन्दुओं को दे दिया होता तो ये मामला शांति से निपट जाता। इस दौरान एक दर्शक ने उनसे पूछा कि राम जन्मभूमि पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद ऐसा दिखाया गया कि इसमें किसी की हार नहीं हुई है। हिन्दू-मुस्लिम एक है, लेकिन इसमें सबसे बड़ी हार मार्क्सवादियों की हुई। इस पर दर्शक ने उनकी राय पूछा।

केके मुहम्मद ने इसका जवाब देते हुए कहा कि 34-35 साल की लड़ाई के बाद मार्क्सवादी और वामपंथी इतिहासकारों की बड़ी हार हुई है। उन्होंने कुछ कम्युनिस्टों का उदाहरण देते हुए कहा कि ये लोग अच्छे होते हैं, मगर इरफान हबीब जैसे कुछ इतिहासकार बिल्कुल इसके विपरीत अपना नैरेटिव गढ़ते हैं, जो कि अब पूरी तरह से फेल हो चुका है।

रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा को हाई कोर्ट में चुनौती: कहा- 22 जनवरी के कार्यक्रम पर रोक लगे, निर्माणाधीन मंदिर में नहीं हो सकते विराजमान

अयोध्या में नवनिर्मित राममंदिर में 22 जनवरी 2024 को रामलला का प्राण प्रतिष्ठा समारोह होने जा रहा है। इस समारोह पर प्रतिबंध लगाने के लिए गाजियाबाद के भोला दास ने इलाहबाद हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की है। मंगलवार (16 जनवरी 2024) को दायर की गई इस जनहित याचिका में कार्यक्रम पर रोक लगाने की माँग की गई है।

याचिका में कहा गया है कि हिंदू कैलेंडर के अनुसार पौष माह में कोई भी धार्मिक कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जा सकता। इसके साथ ही याचिकाकर्ता दास ने कहा कि मंदिर अभी भी निर्माणाधीन है और इसमें देवता की प्रतिष्ठा नहीं हो सकती, क्योंकि यह सनातन परंपरा के हिसाब से असंगत होगा। कोई भी देवता ऐसी स्थिति में प्रतिष्ठित नहीं हो सकते हैं।

याचिका में कहा गया, “22 जनवरी 2024 को अयोध्या में एक धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन होने जा रहा है। निर्माणाधीन मंदिर में रामलला की मूर्ति स्थापित की जाएगी। यह समारोह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा किया जाएगा।” याचिका में आगे कहा गया है कि शंकराचार्यों को भी प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम पर आपत्ति है।

इसके अलावा इस याचिका में में बीजेपी पर आरोप लगाते हुए कहा गया है कि पार्टी आगामी लोकसभा चुनावों में राजनीतिक फायदे के लिए इस कार्यक्रम का आयोजन कर रही है। इससे पहले विपक्षी दलों ने दावा किया था कि अधूरे मंदिर में ‘प्राण प्रतिष्ठा’ समारोह पर आपत्ति जताने के बाद शंकराचार्यों ने 22 जनवरी 2024 के कार्यक्रम में शामिल न होने का फैसला किया है।

बताते चलें कि इलाहबाद हाई कोर्ट में एक याचिका 14 से 22 जनवरी तक धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करने के शासनादेश के खिलाफ भी दायर की गई है। ऑल इंडिया लॉयर्स एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष नरोत्तम शुक्ल और अधिवक्ता आशुतोष तिवारी सहित 6 लोगों ने पीआईएल दायर की है। हालाँकि, हाई कोर्ट ने इस पर तुरंत सुनवाई करने से इनकार कर दिया है।

वहीं, इस सबके बीच अयोध्या में रामलला के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के लिए वैदिक अनुष्ठान 16 जनवरी 2024 से ही शुरू हो गए हैं। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कहा कि 22 जनवरी को प्राण प्रतिष्ठा समारोह के बाद राम मंदिर आम लोगों के दर्शन के लिए 23 जनवरी 2024 से खुल जाएगा।

प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी दोपहर 1 बजे तक पूरा होने की उम्मीद है। पीएम मोदी ने अयोध्या में श्री रामलला के मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के लिए 11 दिवसीय विशेष अनुष्ठान भी शुरू किया है। इस अवसर पर पीएम मोदी और सीएम योगी सहित अन्य गणमान्य लोग भी उपस्थित रहेंगे। परंपरा के अनुसार, 1000 टोकरियों में उपहार नेपाल के जनकपुर और मिथिला के क्षेत्रों से आए हैं।

केरल आए PM मोदी तो आस्था और विकास का हुआ समागम: गुरुवयूर और त्रिप्रयार मंदिर में की पूजा, ₹4000 करोड़ की विकास परियोजनाएँ, मलयालम सुपरस्टारों से भी मिले

केरल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आस्था और विकास के समागम का उदाहरण फिर से पेश किया है। केरल दौरे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुबह के समय श्रीगुरुवयूर और त्रिप्रयार श्री रामास्वामी मंदिर में पूजा अर्चना की, तो उसके बाद राज्य और देश को हजारों करोड़ रुपयों की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इस बीच, वो एक विवाह समारोह में भी शामिल हुए। पीएम मोदी का पूरा केरल दौरा एक तरह से आस्था और देश के विकास का अद्भुत संयोग बनाता दिखा।

पीएम मोदी ने की श्री गुरुवयूर मंदिर में पूजा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुबह 7:30 के आसपास मशहूर श्री गुरुवयूर मंदिर में पूजा अर्चना की। खुद पीएम मोदी ने इसकी तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर शेयर की है। पीएम मोदी ने लिखा, “पवित्र गुरुवायुर मंदिर में प्रार्थना की। इस मंदिर की दिव्य ऊर्जा अपार है। मैंने प्रार्थना की कि हर भारतीय खुश और समृद्ध रहे।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्री गुरुवयूर मंदिर में नव-विवाहित जोड़ों से भी मिले और उन्हें शुभकामनाएँ दी। इन जोड़ों में मलयालम सुपरस्टार और बीजेपी नेता सुरेश गोपी की बेटी और दामाद भी शामिल रहे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भले ही सुबह सुबह 7.30 मंदिर पहुँचे थे, लेकिन उनके स्वागत में बीजेपी कार्यकर्ता उमड़ पड़े। उन्होंने पीएम मोदी का जोरदार स्वागत किया। पीएम मोदी ने सभी कार्यकर्ताओं को धन्यवाद भी दिया। उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा, “सुबह का समय था लेकिन गुरुवयूर में लोग बड़ी संख्या में मुझे आशीर्वाद देने आए। मैं इस गर्मजोशी की सराहना करता हूँ और यह मुझे लोगों के लिए और भी अधिक मेहनत करने के लिए प्रेरित करता है।”

गुरुवयूर से त्रिप्रयार श्री रामास्वामी मंदिर पहुँचे पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवयूर मंदिर से निकल केरल में भगवान राम के मशहूर त्रिप्रयार श्री रामास्वामी मंदिर पहुँचे। ये मंदिर भी त्रिशूर में ही है। यहाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूजा अर्चना की। इस मंदिर का संबंध भगवान कृष्ण और द्वारका नगरी से भी है।

भगवान राम को समर्पित है त्रिप्रयार श्री रामास्वामी मंदिर

त्रिप्रयार श्री रामास्वामी मंदिर भगवान राम को समर्पित है। इस मंदिर में भगवान राम की 6 फुट ऊँची प्रतिमा है। इस मंदिर के मुख्य देवता राम हैं, जो विष्णु के सातवें अवतार हैं, जिनकी चार भुजाओं में शंख, चक्र, धनुष और माला हैं। भगवान राम यहाँ राजघराने के पीठासीन देवता हैं, जिन्हें ‘ब्रह्मांड में सभी देवताओं से ऊपर’ का स्थान दिया गया है।

भगवान राम को यहाँ पर त्रिप्रयार थेवर या त्रिप्रयारप्पा के रूप में भी जाना जाता है। यह मंदिर करुवन्नूर नदी के तट पर स्थित है, जिसे त्रिप्रयार से बहते हुए थेवरा नदी कहा जाता है। मंदिर परिसर में भगवान राम के साथ-साथ दक्षिणमुखी शिव, गणेश और कृष्ण के मंदिर स्थापित हैं। यहाँ हनुमान की भी पूजा होती है। इस मंदिर का संबंध द्वापर युग में भगवान कृष्ण से भी जोड़ा जाता है।

पीएम मोदी की मौजूदगी में त्रिप्रयार श्री रामास्वामी मंदिर में सांस्कृतिक प्रस्तुति भी दी गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने त्रिप्रयार श्री रामास्वामी मंदिर में ‘मलयालम रामायण’ और सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करने वाले कलाकारों को सम्मानित भी किया।

इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के विकास को गति देने वाले कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए निकल पड़े। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोच्चि में 4000 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य की तीन प्रमुख परियोजनाओं कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) में न्यू ड्राई डॉक (NDD), सीएसएल की इंटरनेशनल शिप रिपेयर फैसिलिटी (ISRF) और पुथुवाइपीन, कोच्चि में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड के एलपीजी आयात टर्मिनल का उद्घाटन किया। इनसे भारत के पत्‍तन, पोत परिवहन और जलमार्ग क्षेत्र में पूरी तरह बदलाव लाने और इसका क्षमता निर्माण कर इसे आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी।

इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “आज जब भारत वैश्विक व्यापार का केंद्र बन रहा है, तब हम अपनी समुद्री शक्ति बढ़ा रहे हैं। आज देश को अपना सबसे बड़ा ड्राई डॉक (एनडीडी) मिला। इसके अलावा, जहाज निर्माण, जहाज मरम्मत के बुनियादी ढाँचे और LPG आयात टर्मिनल का भी उद्घाटन किया गया है। इन नई सुविधाओं के साथ, शिपयार्ड की क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी। मैं केरल के लोगों को इन सुविधाओं के लिए बधाई देता हूँ।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंच से त्रिप्रयार श्री रामस्वामी मंदिर के बारे में भी बात की। पीएम मोदी ने कहा कि कुछ दिनों पहले मैंने अयोध्या में वाल्मीकि इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन करते समय भारत में भगवान राम से जुड़े 4 मंदिरों का जिक्र किया था। आज उसी पवित्र त्रिप्रयार श्री रामास्वामी मंदिर में आकर पूजा करने का सौभाग्य मिला है।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने संबोधनों में कई बार इस बात पर जोर डाल चुके हैं कि हमें अपनी जड़ों से जुड़कर विकास की यात्रा तय करनी है। हमें अपने गौरवशाली इतिहास को दरकिनार करने की जगह अपने पूर्वजों से आशीर्वाद लेकर विकास के पथ पर आगे बढ़ना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का केरल दौरा उनके इस कथन के अनुरूप ही प्रतीत होता है

दरगाह की आड़ में कब्जाई करोड़ों की जमीन, खड़ा किया मस्जिद: छत्तीसगढ़ में करबला कमेटी पर आरोप, अधिकारी ने ‘राजनैतिक दबाव’ को बताया कार्रवाई न करने की वजह

छत्तीसगढ़ के दुर्ग-भिलाई में सरकारी जमीन पर कब्जा करके उस पर मस्जिद बनाने की बात सामने आई है। ये भी पता चला है कि जमीन सिर्फ मस्जिद के लिए नहीं हड़पी गई बल्कि वहाँ आसपास बनी दुकानें भी कब्जाई गई जमीन पर ही बनी हैं, जिनसे अब किराया वसूला जाता है।

इस पूरे मामले पर हाल में दैनिक भास्कर ने रिपोर्ट प्रकाशित की है। हैरान करने वाली बात तो यह है कि जिस नगर निगम पर सरकारी जमीन को कब्जे से छुड़ाने की जिम्मेदारी है उसके कार्यालय के पास भी कुछ जगह जमीनों पर कब्जा हो चुका है

भास्कर के मुताबिक, पूरा मामला भिलाई के जोन कार्यालय का है। जहाँ मजार की आड़ में करोड़ों की जमीन पर कब्जा करके मस्जिद बना दी गई। इसके बाद मस्जिद और मजार की आड़ में सड़कों के दोनों तरफ दुकानें बनवा दी गईं। यहाँ मजहबी कार्यों की आड़ में बड़े पैमाने पर व्यवसाय भी किया जा रहा है।

इन अवैध कब्जों की शिकायत अब बीजेपी नेता एसके मोबिन उर्फ बाबर ने की है। उन्होंने अवैध कब्जे की शिकायत दुर्ग जिले के कलेक्टर, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेम प्रकाश पाण्डेय, वैशाली नगर के विधायक रिकेश सेन से भी की है। बाबर ने अपनी शिकायत में कहा है कि मुस्लिम समाज के लोगों ने सैलैनी बाबा की मजार से लगी सुपेला-भिलाई जीई रोड की बेशकीमती जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया है।

बाबर ने करबला कमेटी भिलाई के अध्यक्ष गुलाम सैलानी पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि उसने दरगाह की आड़ में करोड़ों की जमीन पर कब्जा कर दुकानें बनवा दी हैं और इसका किराया वसूलता है। इससे नगर निगम को भी नुकसान हो रहा है। बाबर ने कहा कि यहाँ मजार तो बहुत पहले से है, लेकिन बाकी के निर्माण कार्य कब्जा करके किए गए हैं। ऐसे में मजार को छोड़कर बाकी की सरकारी जमीन को कब्जामुक्त कर भूमाफिया पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।

रिपोर्ट के मुताबिक, यहाँ जोन कार्यालय के दोनों तरफ भी कब्जे कर लिए गए हैं। जोन कार्यालय से सुपेला की तरफ करबला कमेटी से जुड़े लोगों ने जमीन कब्जाई है, तो पावर हाउस की तरफ दूसरे लोगों ने मस्जिद-मजार की आड़ में काफी जमीन कब्जा ली है। इन शिकायतों पर जोन कमिश्नर अमिताभ शर्मा का कहना है कि 2 बार समाज के लोगों को नोटिस जारी किया जा चुका है। उन्होंने भवन अनुज्ञा अधिकारी को पत्र भी लिखा है। वहीं, एक अधिकारी ने कहा कि राजनीतिक दबावों के चलते अब तक कोई कार्रवाई नहीं हो पा रही थी।

साल 1957 से मुस्लिम समाज का कब्जा

इस मामले में करबला कमेटी के अध्यक्ष गुलाम सैलानी का भी बयान आया है। गुलाम सैलानी का दावा है कि उस जमीन पर 1957 से ही मुस्लिम समाज का कब्जा है। इससे जुड़ा केस भी चला है। यहाँ 78 डिसमिल जमीन कागजों पर है। हमने निगम के नोटिस पर उन्हें जवाब दे दिया है।

महाराज कंस के दरबार में हाजिरी लगाते हैं कलेक्टर और एसपी, देते हैं अपने कामों का ब्यौरा: जानिए ओडिशा की धनुयात्रा का महत्व

सोमवार (15 जनवरी 2024) को ओडिशा के बरगढ़ में सालाना होने वाली धनु यात्रा प्रारम्भ हुई। भगवान कृष्ण के बाल्यकाल को विशेष तरीके से मनाए जाने वाली यह यात्रा आमतौर पर खुले आसमान के नीचे होने वाला विश्व का सबसे बड़ा थिएटर माना जाता है। इस त्यौहार के 76वें संस्करण का उद्घाटन बारगढ़ के सांसद सुरेश पुजारी ने किया।

झाँकी के पहले दिन कलाकार महाराज वासुदेव और महारानी देवकी के विवाह का अभिनय करते हैं। जिस दौरान कंस अपनी बहन का विवाह करा रहा होता है, उस दौरान उसे आकाशवाणी सुनाई देती कि देवकी का आठवाँ पुत्र ही उसका वध करेगा। इसके बाद क्रोधित कंस मथुरा में अपने पिता उग्रसेन का सिंहासन पलट देता है। उसके बाद अपनी बहन देवकी तथा वासुदेव को जेल में डाल देता है।

कृष्णलीला पर आधारित इस पूरे त्यौहार के दौरान बारगढ़ को मथुरा की तरह दिखाया जाता है। बारगढ़ के किनारे बहने वाली जीरा नदी को यमुना बनाया जाता है। इसके साथ ही लगे हुए अम्बापाली गाँव को गोप और वृन्दावन में बदला जाता है। इसी गाँव में बलदाऊ और भगवान कृष्ण का का जीवन नन्द और यशोदा के घर में बीता था।

बारगढ़ की यात्रा कई मायनों में ख़ास है। 11 दिनों तक चलने वाले इस त्यौहार के दौरान जो भी कलाकार कंस बनता है, उसे बारगढ़ का असली शासक भी बना दिया जाता है। इस दौरान वह कंस के रूप में डीएम, एसपी और अन्य सरकारी अधिकारियों को भी अपने पास बुलाकर उन्हें अपना काम सही से करने को कहता है।

इस त्यौहार के सम्मान में सरकारी कर्मचारी भी अपना भरपूर सहयोग देते हैं। वे महाराज कंस के दरबार में लगातार हाजिरी लगाते हैं और सरकारी कामों के बारे में उन्हें जानकारियाँ देते हैं। इस दौरान सरकारी अधिकारी कंस महाराज को बताते हैं कि वे उनके आदेश के तहत हर काम का सही से पालन कर रहे हैं।

यहाँ कृष्ण और बलराम को घर-घर बुलाकर पूजा की जाती है। जब वे मथुरा के लिए निकलते हैं तो वृन्दावन वाले दुखी होते हैं। कंस महाराज नगर में राजा की तरह अपनी यात्रा निकालते हैं और अपने दरबार में अतिथियों का स्वागत भी करते हैं। इस साल पूरे शहर में 14 अलग-अलग जगह पर मंच सजाया गया है। यहाँ पर कंस महाराज अपना दरबार लगाएँगे।

इस त्यौहार के अंतिम दिन कंस महाराज को कृष्ण भगवान के हाथों मरते दिखाया जाता है। इस वर्ष इस त्यौहार का समापन 25 जनवरी को होगा। इस यात्रा का मुख्य आकर्षण कंस महाराज बनने वाला कलाकार होता है। यह यात्रा 1947-48 में शुरू हुई थी। यात्रा को भारत की आजादी के जश्न के तौर पर शुरू किया गया था।

इस त्यौहार की ख़ास बात ये है कि यहाँ जो भी कलाकार कंस का रोल निभाता है, वह इसके समाप्त होने के बाद पुरी की यात्रा पर जाता है। वहाँ जाकर वह समुद्र में पवित्र डुबकी लगाता है और भगवान जगन्नाथ के मंदिर में जाकर उनसे माफ़ी माँगता है। वह माफ़ी इसलिए माँगता है क्योंकि कंस का अभिनय करने के दौरान उसे भगवान कृष्ण के विरुद्ध अपमानजनक भाषा का उपयोग करना पड़ता है।

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