ईरान ने जब से पाकिस्तान के आतंकी संगठन जैश-अल-अदल के ठिकानों पर बम बरसाए हैं तब से पाकिस्तान बिलबिलाया हुआ है। उसने ईरान को जवाब देने के लिए उनके इलाके में मिसाइल-ड्रोन से हमला किया है। वहीं मीडिया में कहा है कि ये बलूच विद्रोहियों पर की गई कार्रवाई है। घटना में 7 लोग खत्म हो गए। इनमें 3 महिलाएँ और 4 बच्चे शामिल हैं। ये अटैक सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत के एक सीमावर्ती गाँव पर हुआ।
हमले को लेकर पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि आज सुबह पाकिस्तान ने ‘मार्ग बार सर्माचार’ नाम का अभियान चलाकर ईरान में शरण लेकर रह रहे आतंकवादियों को निशाना बनाया है।
बयान में कहा गया, “गुरुवार सुबह पाकिस्तान ने ईरान के सिस्तान-ओ-बलूचिस्तान प्रांत में आतंकवादियों के चिह्नित ठिकानों पर सुनियोजित हमले किए है। ख़ुफ़िया जानकारी के आधार पर चलाए गए ‘मार्ग बार सर्माचार’ नाम के अभियान में कई आतंकवादी मारे गए हैं।”
बता दें कि इस हमले से पहले मंगलवार को ईरान ने पाकिस्तान में बेस बनाकर बैठे आतंकी संगठन के ठिकानों को मिसाइल हमलों से तबाह किया था। ईरान ने साफ किया था कि उन्होंने अपने दोस्त और भाई जैसे शहर के नागरिकों पर हमला नहीं किया। लेकिन, पाकिस्तान ने भी बलूच विद्रोहियों के नाम पर अपनी कार्रवाई कर डाली। इससे पहले उन्होंने ईरान को एयरस्ट्राइक के गंभीर परिणाम भुगतने को कहे थे।
राजदूत को पाकिस्तान ने वापस बुलाया
पाकिस्तान की खुंदस का इस बात से अंदाजा लगा सकते हैं कि उन्होंने ईरान से अपना राजदूत वापस बुलवा लिया है और तेहरान के राजदूत को इस्लामाबाद आने से मना कर दिया है। पाकिस्तान विदेश कार्यालय की प्रवक्ता मुमताज ज़हरा बलूच ने टेलीविजन पर प्रसारित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बयान दिया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने बताया है कि पाकिस्तान में ईरानी राजदूत, जो वर्तमान में ईरान का दौरा कर रहे हैं, वो फिलहाल यहाँ वापस नहीं आ सकते हैं।
? “Last night’s unprovoked and blatant breach of Pakistan’s sovereignty by Iran is a violation of international law…Pakistan reserves the right to respond to this illegal act.”
*Statement by the Spokesperson on Last Night’s Violation of Pakistan’s Sovereignty by Iran* pic.twitter.com/w2ZlTsmNDe
प्रवक्ता ने कहा, “हमने अपना संदेश ईरानी सरकार को दे दिया है। हमने उन्हें सूचित किया है कि पाकिस्तान ने ईरान से अपने राजदूत को वापस बुलाने का फैसला किया है और पाकिस्तान में ईरानी राजदूत, जो वर्तमान में ईरान का दौरा कर रहे हैं, फिलहाल वापस नहीं आ सकते हैं।”
ईरान के अधिकारियों की हत्या
इतना ही नहीं पाकिस्तान-ईरान सीमा से सटे आतंकवादी समूह जैश उल-अदल भी अपने ऊपर हुए हमले से तिलमिलाया है। उसके आतंकियों ने ईरान के एक सैन्य अधिकारी और उनके दो सुरक्षाकर्मियों की गोली मार कर हत्या कर दी।
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कोर (IRGC) के सैन्य अधिकारी और उनके सुरक्षाकर्मियों पर ये जानलेवा हमला पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमा से लगे अशांत दक्षिणपूर्वी प्रांत में किया गया। ईरानी समाचार एजेंसी आईआरएनए ने बुधवार (17 जनवरी 2024) को ये जानकारी दी। हमलावारों की पहचान करने और उनका पीछा करने की कोशिशें जारी हैं।
आतंकवादी समूह जैश उल-अदल (Jaish al-Adl) ने 17 जनवरी 2024 को ही इस हमले की जिम्मेदारी भी ले ली। यह वही आतंकी समूह है, जिसके ठिकानों को बर्बाद करने के लिए ईरान की वायुसेना ने पाकिस्तान में घुस कर बमबारी की।
भारत और चीन बोले पाकिस्तान-ईरान के विवाद पर
वहीं भारत ने इस मामले पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि वो ईरान की कार्रवाई का कारण समझ सकते हैं। ऐसा सेल्फ डिफेंस में किया गया है। भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा, “यह ईरान और पाकिस्तान के बीच का मामला है। जहाँ तक भारत का सवाल है, आतंकवाद के प्रति हमारा रुख बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करने का है। हम उन कार्रवाइयों को समझते हैं जो देश अपनी आत्मरक्षा में करते हैं।”
वहीं चीन के विदेश मंत्रालय ने इस मुद्दे पर कहा कि दोनों देशों को संयुक्त राष्ट्र के सिद्धांतों का पालन करना चाहिए। हर देश को दूसरे देशों की संप्रभुता, स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता का ईमानदारी से सम्मान करना चाहिए। ईरान और पाकिस्तान पड़ोसी और इस्लामिक मुल्क हैं। इसलिए दोनों को संयम बरतना चाहिए। हम दोनों देशों से तनाव बढ़ाने वाली कार्रवाइयों से बचने का आह्वान करते हैं।
कलकत्ता हाईकोर्ट ने ममता बनर्जी सरकार की पुलिस का निर्णय पलट दिया है। हाईकोर्ट ने 22 जनवरी को दक्षिण कोलकाता में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा को बड़ी स्क्रीन पर दिखाने और भजन-कीर्तन की अनुमति दे दी है। इससे पहले बंगाल पुलिस ने राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम दिखाने की अनुमति नहीं दी थी। यह आयोजन बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के घर से कुछ ही दूर पर होना था। कलकत्ता हाईकोर्ट ने यह निर्णय 17 जनवरी, 2024 को ‘कालीघाट बहुमुखी सेवा समिति’ की याचिका को सुनते हुए दिया।
कोर्ट ने कहा कि समिति दक्षिण कोलकाता के देशप्राण सशमल पार्क में ब्रॉडकास्ट, भजन-कीर्तन और भोग वितरण सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक कर सकती है। गौरतलब है कि समिति पहले 22 जनवरी, 2024 को दक्षिण कोलकाता के नेपाल भट्टाचार्जी पार्क में यह आयोजन करना चाहती थी। इसे लेकर संगठन ने काफी दिन पहले कोलकाता पुलिस से अनुमति माँगी थी। हालाँकि, कोलकाता पुलिस ने इसकी अनुमति उन्हें नहीं दी थी। साथ ही में कोलकाता के नगर निगम ने भी इस पर आपत्ति दर्ज कराई थी।
इसको लेकर ‘कालीघाट बहुमुखी सेवा समिति’ ने कलकत्ता हाईकोर्ट के सामने याचिका दाखिल की थी। समिति ने कहा था कि पुलिस से काफी पहले अनुमति माँगी गई थी लेकिन फिर भी मना किया जा रहा है। इस मामले पर कलकत्ता हाईकोर्ट के जस्टिस जय सेनगुप्ता की पीठ ने सुनवाई की। सुनवाई के दौरान उन्होंने इस आयोजन की अनुमति दे दी। हालाँकि, पहले से प्रस्तावित आयोजन स्थल को बदल दिया गया। पहले जहाँ यह नेपाल भट्टाचार्जी पार्क में होना था जबकि अब यह आयोजन देशप्राण सश्मल पार्क में होगा।
कोर्ट के सामने कलकत्ता नगर निगम ने कहा कि जहाँ यह समिति राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के सम्बन्ध में आयोजन करना चाहती है, वहाँ शाम को बच्चे खेलने आते हैं। ऐसे में उन्हें समस्या होगी। हालाँकि, कोर्ट ने कहा कि समिति पूरे पार्क में नहीं बल्कि उसके आधे हिस्से में अपना आयोजन सुचारु रूप से कर ले।
गौरतलब है कि जहाँ राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम दिखाया जाएगा और भजन-कीर्तन होगा, वह बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आवास से मात्र 1 किलोमीटर दूर है। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस आयोजन में 60 से अधिक लोग शामिल ना हों और आयोजन के बाद पार्क को साफ़ कर दिया जाए।
क्या बिहार में वह दौर फिर से लौट आया है जब लालू प्रसाद यादव के नाम पर गुंडागर्दी होती थी? लालू यादव और उनकी पत्नी राबड़ी देवी के मुख्यमंत्री रहते करीब डेढ़ दशक तक चले इस दौर को ‘जंगलराज’ कहते हैं जो आज भी बिहार के लोगों को डराते हैं। अब राजधानी पटना में एक अधिकारी की इस कदर पिटाई की गई है कि उन्हें इलाज के लिए दिल्ली रेफर करना पड़ा है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार आरोपितों ने यह गुंडई लालू प्रसाद यादव का नाम लेकर अंजाम दी है।
रिपोर्टों के अनुसार पटना के बोरिंग रोड इलाके में खुद को लालू प्रसाद यादव का ‘पोता’ बताने वाले आरोपितों ने राज्य सरकार के एक अधिकारी को मार-मार कर अधमरा कर दिया है। अधिकारी वेंटिलेटर पर है और पटना से दिल्ली रेफर किया जा चुका है। आरोपितों के नाम तनुज और नयन यादव हैं। दोनों लालू यादव के भतीजे नागेंद्र यादव के बेटे हैं। नागेंद्र यादव पर खुद आधा दर्जन से अधिक गंभीर अपराध के मामले दर्ज हैं।
घटना मंगलवार (16 जनवरी 2024) की है। पीड़ित अधिकारी उप नगर आयुक्त अरविंद कुमार सिंह हैं। सिंह अपने चचेरे भाई और ड्राइवर के साथ जा रहे थे। बोरिंग रोड पर उनकी गाड़ी को कई लोगों ने रोक लिया। एक ने गाड़ी की चाबी लेने की कोशिश की। अरविंद कुमार सिंह ने जैसे ही गाड़ी से उतरकर उनसे सवाल-जवाब की कोशिश की, उन लोगों ने रॉड से हमला कर दिया। काफी देर तक सिंह को बुरी तरह से पीटा और फरार हो गए।
इस घटना के प्रत्यक्षदर्शी और पीड़ित अधिकारी के भाई विजय कुमार ने बताया है कि अरविंद कुमार सिंह गोपालगंज में तैनात हैं। वे निजी काम से पटना आए थे। बोरिंग रोड पर कुछ लोगों ने कार की चाबियाँ छीनने की कोशिश की। बीच-बचाव की कोशिश में उन्होंने अरविंद पर हमला कर दिया। उनमें से एक ने कहा, ”मेरा नाम तनुज यादव है और मैं नागेंद्र यादव का बेटा हूँ। जो उखाड़ना हो, उखाड़ लेना।” इंडिया टीवी की रिपोर्ट में विजय सिंह के हवाले से बताया गया है, “मारपीट के दौरान वे (आरोपित) चिल्लाकर बोल रहे थे कि मुझे नहीं पहचानते हो, मैं लालू प्रसाद यादव का पोता हूँ…तनुज यादव।”
बिहार की राजधानी पटना में उप नगर आयुक्त पर जानलेवा हमला हुआ है। जानलेवा हमला करने वाले नशे में धुत थे। आरोप है कि हमलावरों में एक खुद का नाम तनुज यादव बता रहा था। वह कह रहा था कि नागेंद्र यादव का बेटा हूं, जो उखाड़ना होगा उखाड़ लेना। pic.twitter.com/GRQIrBgQA0
लाइव हिंदुस्तान के मुताबिक, नागेंद्र यादव उर्फ नागेंद्र राय लालू प्रसाद यादव के भाई के बेटे यानी भतीजे हैं। नागेंद्र यादव पर आधा दर्जन मामले दर्ज हैं। उन पर उगाही, हत्या की कोशिश जैसे गंभीर मामले चल रहे हैं। पिछले साल मार्च में दानापुर के एक बिल्डर ने नागेंद्र पर 2 करोड़ की रंगदारी माँगने का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया था। ये एफआईआर 11 मार्च 2023 को दर्ज हुई थी।
अरविंद कुमार सिंह की हालत गंभीर
इस मामले में पीड़ित को पारस अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उनकी गंभीर हालत को देखते हुए दिल्ली के लिए रेफर कर दिया गया। अरविंद कुमार सिंह को एयर एंबुलेस उपलब्ध न होने की वजह की वजह से राजधानी एक्सप्रेस के साथ अटैच एंबुलेस से दिल्ली ले जाया गया है। अरविंद कुमार सिंह के चेहरे की अधिकांश हड्डियाँ टूट गई हैं। उनके दिमाग में खून का थक्का जम गया है। उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया है।
पुलिस बोली कार्रवाई हो रही, बीजेपी बोली-जंगलराज की वापसी
अरविंद कुमार सिंह के भाई विजय कुमार सिंह ने इस मामले में रूपसपुर थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। वहीं, पटना एसएसपी का प्रभार सँभाल रहे डीआईजी राजीव मिश्रा ने कहा कि तनुज यादव और नयन यादव मुख्य आरोपित हैं। पुलिस उनकी तलाश में छापेमारी कर रही है। कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की गई है।
इस मामले में बीजेपी ने बिहार में जंगल राज के लौटने की बात कही। बिहार बीजेपी के प्रवक्ता कुंतल कृष्ण ने आरोप लगाया कि हमलावर लालू यादव के परिवार से हैं, इसलिए उनके खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। ये जंगलराज नहीं तो और क्या है?
मुकेश अम्बानी के स्वामित्व वाला रिलायंस Jio देश का सबसे मजबूत ब्रांड बन गया है। भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) जियो के बाद देश के सबसे मजबूत ब्रांड हैं। यह तीनों देश के ही नहीं बल्कि दुनिया के सबसे 25 मजबूत ब्रांड में शामिल हैं। यह रैंकिंग ब्रांड फाइनेंस ग्लोबल 500 की 2024 की वैश्विक ब्रांड वैल्यू रिपोर्ट में दी गई है।
रिलायंस जियो वैश्विक रूप से 17वाँ सबसे मजबूत ब्रांड है, भारत में यह नंबर एक पर है। LIC और SBI ने भी टॉप 25 में जगह बनाई है। यह क्रमशः 23वें और 24वें नम्बर पर रहे हैं। इसके अलावा इस 500 ब्रांड की लिस्ट में टाटा, इनफ़ोसिस, महिंद्रा समूह, रिलायंस समूह, एचडीएफसी, इंडियन ऑयल और बजाज समूह भी जगह बनाने में कामयाब रहे हैं।
जियो इस ब्रांड स्ट्रेंथ सूची में 17वें स्थान पर है
जियो पिछले वर्ष भी इस सूची में भारत की तरफ से सबसे उच्च स्थान पर था। टेलीकॉम सेक्टर में भारत की सबसे बड़ी कम्पनी जियो, देश के सबसे नए ब्रांड में से एक है जिसने इस सूची में स्थान बनाया है। जियो कम्पनी 2007 में बनी थी लेकिन इसने अपना प्रसार 2016 में चालू किया था।
जियो को दुनिया के सबसे मजबूत ब्रांड में रखे जाने के साथ इसे AAA की ब्रांड रेटिंग दी गई है। इसका ब्रांड वैल्युएशन 6.1 बिलियन डॉलर (लगभग ₹50,000 करोड़) है। यह वह मूल्य है जो जियो अपनी साख के दम पर कमा सकता है।
जियो के पास 46 करोड़ से अधिक ग्राहक भारत के भीतर हैं। यह भारत का सबसे बड़ा टेलिकॉम नेटवर्क होने के साथ ही विश्व का तीसरा सबसे बड़ा टेलिकॉम नेटवर्क है। जियो के अलावा LIC और SBI ने इसमें जगह बनाई है। LIC देश की सबसे बड़ी सरकारी कम्पनी बनी है। इसने हाल ही में SBI को पीछे छोड़ा है। LIC ₹5.60 लाख करोड़ की कम्पनी है जबकि SBI ₹5.50 लाख करोड़ वाली। LIC का इस सूची में टॉप 25 में स्थान होना दिखाता है कि LIC में देश के ग्राहकों का बड़ा विश्वास है।
जियो ने इस सूची में जगह बनाते हुए इन्स्टाग्राम, प्रोफेशनल सर्विस ब्रांड EY, फैशन ब्रांड शनेल (CHANEL) और बैंक ऑफ़ चाइना जैसे ब्रांड को पछाड़ा है। इस सूची में सबसे पहला स्थान चीन की वीचैट को मिला है। यूट्यूब और गूगल तीसरे स्थान पर हैं।
HDFC बैंक को इस सूची में 104वाँ स्थान मिला है। IT कम्पनी इनफ़ोसिस को इसमें 98वाँ स्थान मिला है। इस रिपोर्ट में वह ब्रांड अपना स्थान बनाते हैं जिनके नाम पर जनता का बड़ा हिस्सा विश्वास करता है और कम्पनी इसका मौद्रिक रूप से लाभ उठा सकती है।
धर्मनगरी अयोध्या भगवान राम की जन्मभूमि पर बन रहे भव्य मंदिर में मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा के लिए पूरी तरह से तैयार है। 22 जनवरी 2024 (सोमवार) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों गर्भगृह में रामलला की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा होगी। आक्रांता बाबर से लेकर अब तक 500 से अधिक समय तक चले इस संघर्ष में अनगिनत बलिदान हुए हैं। इस संघर्ष के कुछ जीवित गवाह भी मौजूद हैं, जिन्होंने राम के नाम पर स्वतंत्र भारत में भी मुगल काल से अधिक प्रताड़ना झेली है। उन्हीं में से हैं उत्तर प्रदेश के बस्ती निवासी रामकरन सिंह, हरिलाल सिंह व सांडपुर गाँव के कई अन्य ग्रामीण। ऑपइंडिया ने रामकरन सिंह के गाँव जाकर उन पर मुलायम सरकार के दौरान साल 1990 में किए गए अत्याचारों की जानकारी जुटाई।
रामकरन सिंह मूलतः बस्ती जिले के गाँव सांडपुर के निवासी हैं। 22 अक्टूबर 1990 को कारसेवकों के होने की सूचना पर स्थानीय दुबौलिया थाना पुलिस ने उनके गाँव में दबिश दी थी। इसी दबिश में पुलिस ने गोलियाँ बरसाईं थीं। इसमें राम चन्दर यादव, सत्यवान सिंह उसी समय और बाद में जयराज यादव बलिदान हो गए थे। तब पुलिस ने FIR दर्ज करके बचे ग्रामीणों को बेरहमी से टॉर्चर किया था।
उस FIR में मुख्य अभियुक्त रामकरन सिंह को बनाया गया था। आज भी बस्ती जिले की अदालत में अपराध संख्या 132/90 सरकार बनाम रामकरन सिंह चल रहा है। जब हम रामकरन सिंह से मिलने उनके गाँव गए, तब वो घर पर ही थे। उनकी अवस्था लगभग 70 वर्ष हो चुकी है लेकिन उन्हें सन 1990 की वो घटना ऐसे याद है, जैसे उसे बीते 34 साल नहीं बल्कि 34 मिनट हुए हों।
कारसेवकों की सेवा ही बना अपराध
रामकरन सिंह से बताया कि सांडपुर गाँव के ग्रामीणों का अपराध केवल इतना था कि वो देश के अलग-अलग हिस्सों से आए कारसेवकों की सेवा कर रहे थे। वैदिक सिद्धांत ‘अतिथि देवो भवः’ का पालन करने वाले गाँव सांडपुर में रामभक्तों के आराम करने, खाना-पीना के साथ उन्हें सुरक्षित अयोध्या पहुँचाने की कोशिशों में तमाम ग्रामीण एकजुट होकर लगे थे। रामकरन का दावा है कि तब मुलायम सिंह द्वारा कारसेवकों को पनाह देने वालों को भी अपराधी समझ कर एक्शन लेने के निर्देश दिए गए थे। यहाँ स्कूल बंद करके दुबौलिया इंटर कॉलेज में एक अस्थाई जेल भी बना दी गई थी।
ऑपइंडिया को 1990 का हाल बताते भुक्तभोगी रामकरन सिंह
बनियान पहने ग्रामीण को घसीट कर ले जा रहे थे थाने
रामकरन सिंह ने हमें आगे बताया कि 21 अक्टूबर 1990 को तत्कालीन थाना प्रभारी दुबौलिया उनके गाँव में आए और एक स्कूल के प्रबंधक राघवेंद्र सिंह को तब घसीट कर ले जाने लगे, जब वो सिर्फ लुंगी और बनियान में अपने घर बैठे थे। थानेदार ने राघवेंद्र सिंह पर कारसेवकों को पनाह देने का आरोप लगाया था।
रास्ते में पुलिस को रामकरन सिंह मिले। उन्होंने टोका और कपड़े पहन लेने की अपील की तो थाना प्रभारी ने वर्दी के तैश में उनको भी गालियाँ देनी शुरू कर दी और कहा, “हम नंगे ले जाना चाहेंगे तो वैसे ही चलना पड़ेगा।” माना जा रहा है कि तब राघवेंद्र सिंह को टॉर्चर करके कारसेवकों के ठिकानों और उनके अयोध्या जाने के गुप्त रास्तों के बारे में जानकारी उगलवाने की तैयारी थी।
रामभक्तों को जिन्दा या मुर्दा पकड़ने के थे आदेश
रामकरन का दावा है कि ग्रामीणों का विरोध देख कर तब थाना प्रभारी ने राघवेंद्र सिंह को छोड़ दिया और सीधे बस्ती जिले के पुलिस अधीक्षक के पास गए। वहाँ SP द्वारा उन्हें गाँव में मौजूद रामभक्त और कारसेवकों को पनाह देने वाले ग्रामीणों को जिन्दा या मुर्दा गिरफ्तार करने के निर्देश दिए गए। इस काम के लिए पुलिस अधीक्षक ने ऊपर से मिले आदेश के बाद थानेदार को अतिरिक्त फ़ोर्स भी दी।
पुलिस टीम ने 22 अक्टूबर 1990 को सुबह 4 बजे भोर में दबिश दिया। तब महिलाओं, वृद्ध और बच्चों में जो भी मिला, उनको बेरहमी से पीटा गया। हालाँकि ग्रामीणों को पुलिस की दबिश की भनक पहले लग गई थी, इसलिए उन्होंने बाहर से आए कारसेवकों को गाँव से सुरक्षित निकाल दिया था।
अति हुई तो जुटे ग्रामीण
महिआओं को भी टॉर्चर करने के लिए पुरुष पुलिसकर्मी लगाए गए थे। इस काम में PAC, पैरामिलिट्री और 4 थानों की फ़ोर्स जुटी थी। रामकरन सिंह ने बताया कि भोर में ही गाँव सांडपुर से औरतों और बच्चों की चीख-पुकार उठने लगी। इससे आसपास के गाँवों के लोग भी जमा होने लगे।
ग्रामीणों का विरोध पुलिस को रास नहीं आया और उन पर गोलियाँ बरसा दी गईं। इन गोलियों से राम चन्दर यादव और सत्यवान सिंह मौके पर भी बलिदान हो गए। जयराज यादव और महेंद्र प्रताप सिंह को गोलियाँ लगीं और वो घायल हो गए।
गाँव से भागते ग्रामीणों को इसी जगह गोलियों से भून दिया था पुलिस ने
औरतों के गहने लूट ले गई पुलिस
रामकरन के अनुसार पहली पंक्ति में मौजूद पुलिस के जवानों ने गोलियाँ बरसा कर निहत्थे लोगों को मार डाला और कुछ को घायल कर दिया। तभी दूसरी पंक्ति के जवान आए। उन्होंने लाशों को परिजनों को देने के बजाय अपने कब्ज़े में ले लिया। साथ में वो घायलों को भी अपने साथ समेट ले गए, जिन्हें बिना बेहतर उपचार के जेल भेज दिया गया। 32 साल बाद जयराज यादव की मौत की वजह भी यही हरकत बनी।
इसके बाद तीसरी पंक्ति के पुलिस के जवान गाँव में घुसे। इन्होनें घरों में मौजूद बेगुनाहों को गिरफ्तार करना शुरू कर दिया। साथ ही तलाशी के नाम पर छिपा कर रखे गए औरतों के गहने तक लूट लिए। विरोध करने पर बीमार बुजुर्गों की चारपाई तक तोड़ डाली गई।
ग्रामीणों की कहीं नहीं हुई सुनवाई
थोड़ा रुक कर रामकरन सिंह ने बताया कि मुलायम सिंह की सरकार में हुए सांडपुर नरसंहार में ग्रामीणों को एकतरफा कार्रवाई का शिकार होना पड़ा। तब ग्रामीणों की हत्या के बावजूद पुलिस पर कोई भी एक्शन नहीं लिया गया।
रामकरन सिंह और अन्य ग्रामीणों ने मिल कर जिला प्रशासन पर कार्रवाई के लिए लखनऊ तक हर सक्षम अधिकारी और नेता को तहरीर दी। हालाँकि ये तमाम शिकायतें डस्टबिन में डाल दी गईं। उलटे अपने लोगों को गँवा चुके और गोली खाकर घायल 40 नामजद ग्रामीणों को कई अन्य अज्ञात के साथ मुल्जिम बना दिया गया।
इंसान तो दूर गाँव के जानवर भी हुए थे प्रताड़ित
सांडपुर के पड़ोसी गाँव रामनगर के स्थानीय जनप्रतिनिधि सुरेश कुमार पांडेय ने ऑपइंडिया को बताया कि वो 22 अक्टूबर 1990 की घटना से अच्छी तरह से वाकिफ हैं। तब वो इंटरमीडिएट के छात्र थे। उन्होंने कहा कि तब सड़क के मुख्य मार्ग तो दूर छोटी-मोटी पगडंडियों को भी सील कर दिया गया था।
सुरेश ने दावा किया कि तब पुलिस ने सांडपुर में घुस कर जो बर्बरता दिखाई थी, वो शायद गुलाम भारत में नहीं देखने को मिली होगी। बकौल सुरेश सिर्फ इंसान ही नहीं बल्कि पुलिसिया बर्बरता से गाँव में पाले गए जानवर भी कई दिनों तक भूखे रहे गए थे। उन्हें चारा खिलाने वाला भी कोई नहीं बचा था।
पड़ोसी गाँव के सुरेश कुमार पांडेय
चौपट हो गए युवाओं के करियर
सुरेश कुमार पांडेय का यह भी दावा है कि 22 अक्टूबर 1990 की घटना में पुलिस ने कई ऐसे युवा ग्रामीणों को भी नामजद कर दिया था, जो घटना के दिन गाँव में थे ही नहीं। केस में नामजद होने और जेल जाने की वजह से उन सभी नौजवानों का करियर भी चौपट हो गया।
सुरेश के अनुसार यह सारी निर्ममता तत्कालीन मुलायम शासन के आदेश पर हुई थी। तब नामजद ग्रामीणों की पैरवी करने जो भी थाने पर जाता था, उसे पीट कर कारसेवक बता दिया जाता था। लोगों को झूठे केस में जेल भेज दिया जाता था।
SC/ST, OBC, सामान्य वर्ग – सभी को टॉर्चर
इस पुलिसिया बर्बरता के शिकार कइयों की जमानतें इलाहबाद हाईकोर्ट से हुई। कुछ ने पुलिस के डर से लम्बे समय तक फरार रहने के बाद कोर्ट में सरेंडर कर दिया था। इस केस में पुलिस द्वारा मुख्य अभियुक्त रामकरन सिंह को बनाया गया था। अभियुक्त बना कर टॉर्चर किए गए ग्रामीणों में हिन्दू समाज के SC/ST, OBC और सामान्य वर्ग के लोग शामिल हैं।
रामकरन के अनुसार पुलिस द्वारा पीटे गए सुक्खू, राम सुमेर, दधिबल सिंह 6 महीने बिस्तर से भी नहीं उठ पाए थे। यह केस अभी भी बस्ती जिले की अदालत में चल रहा है। इसके सभी आरोपित अपनी जमीन-जायदाद बेच कर या गाढ़ी कमाई खर्च करके केस लड़ रहे हैं।
40 नामजद आरोपितों में से लगभग 20 ग्रामीणों की मौत अलग-अलग समय में भिन्न-भिन्न कारणों से हो चुकी है। ऑपइंडिया से बात करते हुए एक अन्य ग्रामीण हरिलाल सिंह ने बताया कि वो भी इसी केस में नामजद अभियुक्त बना दिए गए थे।
हरिलाल का दावा है कि उनका विवाद से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं था लेकिन घर के आगे से उन्हें पुलिस ने उठा लिया और जेल भेज दिया था। तब 16 दिन तक जेल काटने के बाद हरिलाल सिंह जमानत पर बाहर आ पाए थे। बकौल हरिलाल पुरुषों के जेल जाने के बाद महिलाओं को उनके रिश्तेदार अपने घर लेकर चले गए थे और हालात ऐसे बन गए थे कि काफी समय तक तो गाँव में चिराग जलाने वाला भी कोई नहीं बचा था।
मुकदमे में नामजद हरिलाल सिंह ने खुद को बेगुनाह बताया
अच्छा हुआ पुलिस को कारसेवक नहीं मिले
रामकरन सिंह ने बताया कि 1990 में वो एक स्कूल में प्रिंसिपल थे। पुलिस की इस कार्रवाई से वो और उनका परिवार तबाह हो गया था। बहुत मेहनत और मुश्किल से पिछले 34 वर्षों में मेहनत करके रामकरन का परिवार को फिर से पटरी पर आने की जद्दोजहद कर रहा है। हालाँकि रामकरन सिंह को इस बात का संतोष है कि अच्छा हुआ तब पुलिस के हाथ बाहरी कारसेवक नहीं लगे वरना उनके साथ क्या अनहोनी होती, इसका कोई अनुमान ही नहीं लगा सकता।
आज भी राम के नाम पर बलिदान देने को तैयार
अपने गाँव में हुए पुलिसिया उपद्रव के बारे में रामकरन ने आगे कहा:
“जो मर गए, वो स्वर्ग सिधार गए। हम जैसे जो भी लोग जिन्दा हैं, वो जरूरत पड़ने पर राम के नाम पर अभी भी बलिदान होने को तैयार हैं।”
रामकरन सिंह को जरा सा भी अफ़सोस नहीं है कि कारसेवकों का गुस्सा अपने सिर पर लेने की वजह से उन्होंने और उनके परिवार न क्या-क्या झेला। रामजन्मभूमि पर भगवान राम का भव्य मंदिर बनने से रामकरन और उनका परिवार बेहद खुश है। वो इस बात को लेकर भी गौरवान्वित हैं कि इस काम में उनके परिवार का भी त्याग और बलिदान शामिल है।
जहाँ एक तरफ निर्माणाधीन राम मंदिर के गर्भगृह में रामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा होनी है और इस कारण पूरा देश राममय है, वहीं दूसरी तरफ मीडिया का एक धड़ा हिन्दू देवी-देवताओं का अपमान करने में लगा हुआ है। NewsLaundry ने अपने शो ‘NL टिप्पणी’ के अंतर्गत ‘रामनामी पत्रकारिता, कारसेवक पत्रकार और संविधान की मय्यत’ के शीर्षक से एक वीडियो YouTube पर डाला है, जिसमें ब्रह्मर्षि नारद जी का अपमान किया गया है। वीडियो में ‘न्यूज़ 18’ के पत्रकार अमीश देवगन को नारद के रूप में दिखाया गया है।
इस वीडियो में न्यूजलॉन्ड्री के पत्रकार अतुल चौरसिया ने ‘स्वर्ग की टपड़ी पर चाय पर चर्चा’ के नाम पर दिखाया गया कि जवाहरलाल नेहरू, राजेंद्र प्रसाद, वीर सावरकर और अटल बिहारी वाजपेयी खबर सुन रहे हैं। साथ ही रेडियो पर खबर सुनाई गई कि भारत के प्रधानमंत्री मंदिर-मंदिर घूम रहे हैं और सांसदों को संसद से फेंका जा रहा है। इसके बाद विभिन्न न्यूज़ चैनलों पर राम भजन चलते हुए दिखाया गया। साथ ही कहा गया कि नेहरू कह रहे हैं कि मीडिया की सामूहिक हत्या कर दी गई है। ‘राम तेरी मीडिया मैली’ कह कर न्यूजलॉन्ड्री हिन्दू विरोधी प्रोपेगंडा चला रहा है।
अतुल चौरसिया ने इस वीडियो में भारतीय मीडिया को ‘हिन्दू मीडिया’ करार दिया और उनके वैन की फुटेज दिखाई जिसमें मंदिर की तस्वीर बनाई गई थी। अतुल चौरसिया ने इसमें रोना रोया कि भारत के प्रधानमंत्री को संविधान की कोई फ़िक्र नहीं है। कारण – वो स्वदेशी ब्रीड के गायों को चारा खिला रहे हैं, मंदिर जा रहे हैं। इसके बाद शंकराचार्यों के नाम पर भी प्रोपेगंडा फैलाया गया। 2 शंकराचार्यों ने राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह का स्वागत किया है, लेकिन दावा किया गया कि चारों शंकराचार्य इसके खिलाफ है।
इसके बाद महात्मा गाँधी के हवाले से सब कुछ वीर मढ़ दिया गया और उनका अपमान किया गया। साथ ही महात्मा गाँधी की हत्या का आरोप भी उन्हीं पर लगा दिया गया। इसके बाद एक विदेशी संस्था के हवाले से भारत में फेक न्यूज़ को लेकर रोना रोया गया। न्यूजलॉन्ड्री की पूरी की पूरी चिंता इस बात को लेकर है कि राम मंदिर को, राम को कवरेज क्यों मिल रहा है। इसके बाद बाबरी ढाँचे के विध्वंस को लेकर प्रलाप किया गया। इसके बाद कॉन्ग्रेस द्वारा समारोह के बहिष्कार का बचाव किया गया।
न्यूजलॉन्ड्री ने घोषणा कर दी कि राम मंदिर वाला कार्यक्रम संपूर्ण भारतीय समाज का नहीं है। साथ ही इसे ‘मोदी का शो’ करार दिया गया, जहाँ अन्य भाजपा नेताओं के लिए भी कोई जगह नहीं है। हालाँकि, इस वीडियो का जो थंबनेल बनाया गया, उसमें हिन्दू देवी-देवताओं के अपमान से लोगों को समस्या है। इसमें ‘आज तक’ की अंजना ओम कश्यप को एक साध्वी की वेशभूषा में दिखाया गया है। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी एक साधु के रूप में चित्रित किया गया है।
Yes we are filing complaint against @newslaundry Team is getting the draft and other documents ready@HinduITCell
वहीं ‘हिन्दू आईटी सेल’ के संस्थापक रमेश सोलंकी ने Newslaundry के खिलाफ शिकायत दायर करने की घोषणा की है। उन्होंने बताया कि उनकी टीम शिकायत दाखिल करने के लिए ड्राफ्ट तैयार कर रही है और अन्य अन्य दस्तावेज भी तैयार कर रही है। वहीं मालदीव मामले को लेकर चर्चा में आए ‘मिस्टर सिन्हा’ ने कहा कि मजाक ठीक है, लेकिन हिन्दू देवी-देवताओं का मजाक बनाए जाने को सही साबित नहीं किया जा सकता। उन्होंने पूछा कि क्या न्यूजलॉन्ड्री अन्य मजहबों को लेकर ये सब कर सकता है?
महाराष्ट्र के नवी मुंबई में एक लड़के ने शक के कारण अपनी गर्लफ्रेंड की हत्या कर दी और बाद में खुद भी ट्रेन से कूद कर मर गया। शुरू में पुलिस इसके तार नहीं जोड़ पाई, लेकिन जब छानबीन बढ़ी तो दोनों का कनेक्शन सामने आया। पुलिस को लड़के के फोन से एक नोट भी मिला जिसमें उसने लड़की की लाश किस पेड़ के पास है इस बारे में लिखा था।
पुलिस ने उस कोड को खोजा और एक माह बाद जाकर लड़की का शव गली अवस्था में जंगलों से मिला।
जानकारी के अनुसार, वैष्णवी डेटा साइंस की छात्रा और कलंबोली की रहने वाली थीं। दिसंबर में जब वह अचानक गायब हुईं तो उनकी माँ अरुणा ने उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट 12 दिसंबर, 2023 को थाने में दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया था कि 12 दिसंबर की सुबह 10 बजे वो सायन में एसआईईएस कॉलेज के लिए निकली थीं, लेकिन घर वापस नहीं लौटी।
पुलिस ने बहुत कोशिश की लेकिन वैष्णवी का पता नहीं लग पाया। यही वजह रही कि ये केस 6 जनवरी,2024 को क्राइम ब्रॉन्च की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (एएचटीयू) के हवाले कर दिया गया था। इस बीच, नवी मुंबई के पुलिस आयुक्त मिलिंद भारम्बे ने केस की जाँच के लिए एक विशेष टास्क फोर्स बनाई।
इसके बाद AHTU ने जाँच-पड़ताल शुरू की। सबसे पहले मृतक छात्रा वैष्णवी बाबर के मोबाइल की टावर लोकेशन और सीसीटीवी फुटेज हासिल किया गया। इसमें पता चला कि बाबर और उसका 24 साल का ब्वॉयफ्रैंड वैभव बुरुंगले 12 दिसंबर को सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक खारघर पहाड़ियों में थे।
जाँच के दौरान पुलिस को पता चला कि कलंबोली के रहने वाले वैभव बुरुंगले ने 12 दिसंबर को शाम 5 बजे सानपाड़ा के जुईनगर रेलवे स्टेशन में चलती लोकल ट्रेन के सामने कूदकर आत्महत्या की थी। वाशी जीआरपी ने बुरुंगले की मौत के मामले में आकस्मिक मौत का केस दर्ज किया था।
आगे पड़ताल में पता चला कि दोनों में पाँच साल से रिश्ता था और मृतका के घरवाले दोनों के अलग जाति के होने से इस रिश्ते से खुश नहीं थे। इसी वजह से वो ब्वॉयफ्रैंड वैभव बुरुंगले से रिश्ता खत्म करना चाहती थी।
हालाँकि पुलिस को मिले बुरुंगले के खुदकुशी नोट में पता चला कि उसे वैष्णवी के दूसरे से डेटिंग का शक था। इसी वजह से उसने सामान पैक करने के लिए इस्तेमाल होने वाली सेल्फ-लॉकिंग नायलॉन केबल ज़िप से वैष्णवी का गला घोंट उसे मार डाला था।
एएचटीयू के सीनियर इंस्पेक्टर अतुल अहेर ने कहा, “बुरुंगले के फोन की जाँच करने पर, हमें एक नोट मिला था। इसमें कहा गया था कि उसने खारघर पहाड़ियों पर लड़की का गला घोंट दिया था और उसकी लाश को झाड़ियों में फेंक दिया था। उसने ऐसा इसलिए किया था क्योंकि उसे उस पर किसी और के संग डेटिंग का शक था।”
उन्होंने आगे बताया कि बुरुंगले ने अपने खुदकुशी नोट में एक खास कोड L01-501 का भी जिक्र किया था। ये कोड खारघर पहाड़ियों पर वृक्षारोपण संपदा में से एक में एक विशिष्ट पेड़ पर वन विभाग ने दर्ज किया था।
सीनियर इंस्पेक्टर अहेर के मुताबिक, इस कोड L01-501 को डिकोड करने के लिए टीम ने 6 जनवरी से पहाड़ियों की खोज शुरू की। इस खास कोड के पेड़ को खोजने के लिए रोजाना सुबह 8 बजे से रात 8 बजे के बीच टीम खारघर पहाड़ियों के जंगलों में जाती थी।
अहेर ने आगे बताया कि यही नहीं टीम ने पहाड़ियों की झाड़ियों और घाटियों में इस कोड को खोजने के लिए ड्रोन का भी इस्तेमाल किया। आखिरकार, घटना के 34 दिनों बाद 16 जनवरी, 2024 को वैष्णवी बाबर की लाश खारघर तलहटी में ओवे कैंप के पास कोड नंबर L01-501 पेड़ के नीचे मिली।
उन्होंने बताया कि लाश की पहचान मृतका बाबर के माता-पिता ने उसके लापता होने वाले दिन पहनी पोशाक और उसके कॉलेज के आईडी कार्ड की डोरी और कलाई घड़ी से की। पुलिस ने बाबर की लाश की तलाश के लिए लोनावाला के स्वैच्छिक बचाव दल की मदद ली थी।
इसके साथ ही फायर ब्रिगेड, सिडको और वन विभाग का भी सहयोग लिया गया था। मृतका बाबर के परिवार में उसके स्कूल बस चालक पिता, गृहिणी माँ, दुबई में नौकरी करने वाली एक बड़ी बहन और एक 10 साल का छोटा भाई है। सीनियर इंस्पेक्टर अहेर के मुताबिक, बुरुंगले ने एचएससी तक पढ़ा था और छोटी-मोटी नौकरियाँ करता था। वह अपने माता-पिता और बड़े भाई के साथ रहता था।
पाकिस्तानी क्रिकेट टीम इन दिनों न्यूजीलैंड में हैं। वहाँ उन्होंने टी-20 सीरीज में 3-0 से हारकर खुद की फजीहत कराई है। वहीं न्यूजीलैंड ने उनके खिलाड़ी का बीच मैदान पर मजाक बनाया है।
एक वीडियो सामने आई है जिसमें पाकिस्तानी क्रिकेटर आजम खान मैच खेलने के लिए पिच पर आ रहे हैं। इस दौरान पीछे से उनके मोटापे का मजाक उड़ाते हुए बिग शो का थीम सॉन्ग बजता दिखाई देता है।
ये घटना है 17 जनवरी 2024 को ड्यूनडिन में खेले गए तीसरे टी-20 मैच की है। पाकिस्तानी क्रिकेटर को मैदान में आते देखा जा सकता है और पीछे जो गाना बजता है वो बिग शो का एंट्री सॉन्ग्र है।
इस थीम सॉन्ग को सुनने के बाद पाकिस्तानी बहुत आहत हुए। उन्होंने इस हरकत को घटिया बताया। और न्यूजीलैंड को टैग कर करके पूछा कि उनके खिलाड़ी के साथ इस तरह का व्यवहार क्यों किया गया है।
मालूम हो कि पाकिस्तानी फैन्स जिस मैच में हुई इस हरकत से नाराज हैं उसमें आजम खान ज्यादा देर टिक भी नहीं पाए। 10 रन के बाद उन्हें आउट कर दिया गया। वहीं पूरी पाकिस्तान टीम 20 ओवर में 179 रन बना पाई जबकि टारगेट 224 का था।
गौरतलब है कि आजम खान को लगातार उनके हेवी शरीर के कारण ट्रोल किया जाता है। कोई आलू कहता है, कोई लड्डू, कोई हाथी कहता है। इस बार उनकी तुलना बिग शो से कर दी गई, जिनका असली नाम पॉल डोनाल्ड वाइट-2 है। उन्हें उनके बड़े आकार के कारण जाना जाता है।
उनकी हाइट 7 फीट 2 इंच है और वजन 230 किलो। जब भी वह WWE में आते थे तो उनके लिए एक थीम सॉन्ग बजता था जो काफी मशहूर था। न्यूजीलैंड-पाकिस्तान क्रिकेट सीरीज के दौरान वही सॉन्ग आजम के लिए बजा।
अजीब बात ये है कि एक ओर जहाँ क्रिकेट में फिट रहने को सबसे जरूरी बताया जाता है। वहीं आजम के ट्रेनर शहजर मोहम्मद कहते हैं कि अगर आजम खान ने अपना वजन एकदम से गिरा लिया तो वो बॉल हिट करने की पावर खो देंगे। इससे उन्हें ताकत मिलती है।
बता दें कि पहली बार नहीं है जब क्रिकेट पिच पर इस तरह WWE का कोई थीम सॉन्ग बजा हो। इससे पहले जब 2022 में न्यूजीलैंड के ग्लेन फिलिप्स पाकिस्तान के खिलाफ मैच में मैदान पर आए थे तो उनके लिए जॉन सेना का थीम सॉन्ग बजा था।
पाकिस्तान-ईरान सीमा से सटे आतंकवादी समूह जैश उल-अदल के आतंकियों ने ईरान के एक सैन्य अधिकारी और उनके दो सुरक्षाकर्मियों की गोली मार कर हत्या कर दी। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कोर के कर्नल हुसैन अली जवीदंफर (Colonel Hossein Ali Javidanfar) और उनके साथ के 2 सुरक्षाकर्मियों की हत्या ईरान द्वारा पाकिस्तान के अंदर घुस कर आतंकी ठिकानों को नष्ट करने के लिए की गई एयरस्ट्राइक के ठीक एक दिन बाद की गई है।
Jaish al-Adl has claimed responsibility for the attack that killed IRGC's Colonel Hossein Ali Javedanfar. Jaish claims that Colonel Hossein Ali was travelling with his 2 bodyguards and they were targeted as well. (Their condition remains unknown) #Iranhttps://t.co/ZloqCS4a98
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कोर (IRGC) के सैन्य अधिकारी और उनके सुरक्षाकर्मियों पर ये जानलेवा हमला पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमा से लगे अशांत दक्षिणपूर्वी प्रांत में किया गया। ईरानी समाचार एजेंसी आईआरएनए ने बुधवार (17 जनवरी 2024) को ये जानकारी दी। हमलावारों की पहचान करने और उनका पीछा करने की कोशिशें जारी हैं।
आतंकवादी समूह जैश उल-अदल (Jaish al-Adl) ने 17 जनवरी 2024 को ही इस हमले की जिम्मेदारी भी ले ली। यह वही आतंकी समूह है, जिसके ठिकानों को बर्बाद करने के लिए ईरान की वायुसेना ने पाकिस्तान में घुस कर बमबारी की।
दरअसल ईरान ने पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत में आतंकवादी समूह जैश उल-अदल के दो ठिकानों पर एक दिन पहले ही हवाई हमला किया था। ईरान के हमलों को अवैध बताते हुए पाकिस्तान ने तेहरान में ईरानी विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के सामने विरोध दर्ज कराया था। साथ ही गंभीर नतीजे भुगतने की चेतावनी भी जारी की थी।
इस हमले की बौखलाहट में पाकिस्तान ने उसकी संप्रभुता का उल्लंघन कर हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल करने का हवाला देकर तेहरान से अपने राजदूत को वापस बुला डाला और इस्लामाबाद से ईरानी राजदूत को भी निष्काषित कर डाला है।
क्या है जैश उल-अदल (Jaish al-Adl), कहाँ है इसका ठिकाना
ईरान का कहना है कि पाकिस्तान की सीमा का इस्तेमाल बलूचिस्तान प्रांत से ऑपरेट करने वाला आतंकवादी समूह जैश उल-अदल कर रहा है। साल 2012 में बना ये आतंकी संगठन अपनी अधिकांश आतंकी गतिविधियों का संचालन पाकिस्तान से करता है। ईरान के अनुसार जैश-उल-अदल आतंकवादी समूह का बलूचिस्तान के सीमावर्ती शहर पंजगुर में ठिकाने हैं।
अमेरिकी राष्ट्रीय खुफिया निदेशक के मुताबिक, जैश अल-अदल सिस्तान-बलूचिस्तान में सक्रिय बेहद सक्रिय और प्रभावशाली सुन्नी आतंकवादी समूह है। रिपोर्ट के मुताबिक, जैश उल-अदल नाम के आतंकी संगठन ने पहले पाकिस्तान से सटे सीमा क्षेत्र में ईरानी सुरक्षा बलों पर हमले किए थे।
यह वही इस्लामी आतंकी समूह है, जिसने दिसम्बर 2023 में ईरान के हिस्से में पड़ने वाले बलूचिस्तान प्रांत में एक पुलिस थाने पर हमला किया था। इस हमले में 11 पुलिसकर्मी मारे गए थे। पाकिस्तान के भीतर घुस कर किया गया हवाई हमला इसी की प्रतिक्रिया में ईरानी वायुसेना ने किया है।
अयोध्या में राम मंदिर बनने पर हर जगह उत्साह है। लोग तैयारी में जुटे में हैं कि 22 जनवरी को जब प्रभु श्रीराम अपने धाम लौटेंगे तो घर-घर दीवाली मनेगी। लेकिन क्या आप जानते हैं प्रभु श्रीराम को उनका सही स्थान मिलना या उनका मंदिर बनना इतनी आसान बात नहीं थी। ये संभव हो पाया है सिर्फ कारसेवकों के बलिदान से।
कारसेवकों के साथ आज से 32 साल पहले कितनी वीभत्सता हुई होगी इसका हम लोग अंदाजा भी नहीं लगा सकते हैं। मीडिया रिपोर्टों में कई बातें प्रकाशित हैं जिन्हें पढ़कर उस समय का अंदाजा लगा सकते हैं लेकिन बर्बरता के बारे में यदि जानना है तो फिर प्रत्यक्षदर्शियों से पूछिए या फिर कारसेवकों के परिवारों से।
*वीडियो देख कर रोंगटे खड़े हो जाएंगे* समाजवादी सरकार ने अयोध्या में अनगिनत *कारसेवकों को गोली मार कर, मृत शरीर में रेत की बोरी बांध कर सरयू नदी में प्रवाहित कर दिया था* … बाद में लोगों ने अनेक शव निकाल कर अंतिम संस्कार किया था। लेकिन और कितने अभागे थे, जिन्हे चिता की अग्नि pic.twitter.com/I5TakePU33
पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर एक वीडियो बहुत वायरल है। इसमें दिखाया जा रहा है कि अयोध्या में कारसेवकों को गोलियों से छलनी कर करके सरयू नदी में बहा दिया गया था। बाद में उनका शव बड़ी मशक्कत के बाद निकला। कुछ शव पहचान आ रहे थे और कुछ इतने गल गए थे कि पता तक नहीं लग पा रहा था। वो एक कंकाल हो चुके थे। शेयर होती वीडियो बेहद डरावनी है और मन में सवाल छोड़ती है कि आखिर उन कारसेवकों के साथ हुआ क्या होगा।
करोड़ों हिंदू आज राम मंदिर बनता देख खुश हैं लेकिन करोड़ों हिंदुओं के बीच ही राम मंदिर के लिए संघर्ष करनेवाले योद्धाओं के साथ जो क्रूरता हुई वो कितनों को पता है? युवा पीढ़ी तो जानती भी नहीं पूरा सच। आज पाठशाला नें सच देखिए भी और दूसरों को दिखाइए भी। pic.twitter.com/O54n65Aac1
राम मंदिर आंदोलन से जुड़ी साध्वी ऋतंभरा ने हाल ही में इस संबंध में सुशांत सिन्हा के साक्षात्कार में खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि ये मंदिर सामान्य मंदिर नहीं है। 500 साल तक लगातार हिंदुओं ने एक जगह माथा टेका, वहाँ परिक्रमा की, मंदिर के लिए संकल्प लिए। ये भारतीयों के खंडित स्वाभिमान की पुन: स्थापना है।
उनसे जब पूछा गया कि जब कारसेवकों पर गोली चली तो क्या नहीं लगा कि ये तो चरम हो गया। इस पर साध्वी ऋतंभरा कहती हैं कि उनके सीने पर गोली उतारी गई थी। रेत की बोरियाँ भरकर उनके सरयू में डुबोया गया। गुरू भाई को उठाकर ले गए उसमें उन्होंने रुई बाँधी और फिर तेल डालकर उन्हें जला डाला गया, बेटियों के छाती में छल्ले दागे गए थे। साध्वी ऋतंभरा कहती हैं कि उन निहत्थों के साथ ऐसा नहीं होना चाहिए था। घर के चिराग जब घर को आग लगाते तब बहुत बुरा लगता है।
इसी तरह राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा की तारीख जैसे जैसे नजदीक आ रही है वैसे वैसे उन सभी लोगों के बयान प्रासंगित हो गए हैं जिन्होंने उस नरसंहार को करीब से देखा। राम मंदिर आंदोलन को करीब से रिपोर्ट करने वाले महेंद्र त्रिपाठी उन्हीं लोगों में से एक हैं। वो आज भी कारसेवकों की तस्वीर देखते-दिखाते रोने लगते हैं।
लल्लनटॉप से की बातचीत की एक छोटी क्लिप में वो कारसेवकों के साथ हुई बर्बरता की तस्वीरें दिखाकर कहते हैं- “मैंने ये सब खुद फोटो खींची थीं। सरदार परम सिंह भुल्लर को मैंने लिखा है- कारसेवकों का हत्यारा। जब मुझे किसी ने इसके बारे में बताया तो मैंने फोटो के साथ ये लिखकर रखा ताकि लोगों को पता रहे गोली कौन चलवाया।”
महेंद्र कहते हैं, “आज 32 वर्ष बीत गए हैं लेकिन जब-जब मैं ये बातें याद करता हूँ तो मेरे रौंगते खड़े हो जाते हैं। कई दिनों तक मैं सो नहीं पाता था। मुझे लगता था कारसेवकों को मेरे आगे गोली चल रही है। मैं उन्हें बचा रहा हूँ।” इतना कहकर वो फफक पड़ते हैं।
This is the journalist who captured the firing from the closest . It was Sardar Parmjeet Singh Bhullar,who was the crpf commandant, when kothari brothers nd other karsewaks where murdered….nd @MrSinha_ 's boss gave Mulayam Padma Vibhushan pic.twitter.com/OgxROcAI1J
मालूम रहे कि राम मंदिर वाकई कोई सामान्य मंदिर नहीं है। ये एक कई पूरी पीढ़ी का संघर्ष है जिसे आज चरितार्थ होते देखा जा रहा है। कारसेवकों का बलिदान है जिन्हें 32 वर्ष बाद जाकर सम्मान मिला है। उन परिवारों के आँसुओं का हिसाब है जो इस मंदिर के लिए लोगों ने बहाये। ऑपइंडिया उन लोगों के दर्द पर ग्राउंड रिपोर्ट्स भी कर रहा है। आप इस लिंक पर क्लिक कर उसे पढ़ सकते हैं।