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केरल में ऊँट पर बारात! अरब के लोगों की नकल कर निकाह करने चला रिजवान, हाइवे को कर दिया जाम: पुलिस ने लाठी फटकार कर छुड़ाया जाम

भारत में अरबी लोगों की नकल करने का एक अजीब नमूना सामने आया है। केरल के कन्नूर में रिजवान नाम के एक शख्स ने अपने निकाह में ऊँट पर बैठकर बारात निकाली। इसकी वजह से पूरा ट्रैफिक जाम हो गया। इसके बाद पुलिस ने मोर्चा संभाल लिया और दूल्हे समेत 26 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर लिया है।

वैसे तो भारत में अरब के मुस्लिमों की नकल करने के अनेक उदाहरण मौजूद हैं, लेकिन स्थान और परिस्थिति देखने के बावजूद ऐसा करने की यह घटना अपने आप में अनूठा है। घुटने तक पजामा, सिर पर अरबियों की तरह का खास स्कार्फ और अन्य चीजें लेकर केरल जैसे घनी आबादी वाले इलाके में ऊँट पर बारात निकलना अपने आप में अचंभित करने वाला है।

यह मामला बीते रविवार (14 जनवरी 2024) का है। कन्नूर के वरम इलाके में दूल्हा बना रिजवान अपनी बारात ऊँट पर निकाली। यहाँ बाकायदा बैंड-बाजे के साथ बारात दुल्हन के घर जा रही थी। मेन हाईवे पर जब बारात पहुँची तो कन्नूर इंटरनेशनल एयरपोर्ट वाले रोड पर जाम लग गया। ऊँट पर बैठे दूल्हे के टशन को देखने के लिए लोग रुक जा रहे थे।

इसके कारण हाईवे पर लंबी जाम लग गई। मामला जब हद से बाहर हो गया तो स्थानीय पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। पुलिस ने रोकने की कोशिश की, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। इसके बाद पुलिस ने बारातियों को तितर-बितर करने के लिए लाठियाँ भाँजनी पड़ी। तब जाकर बाराती और भीड़ तितर-बितर हुए और ट्रैफिक शुरू हुआ।

कन्नूर की चक्कराक्कल पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज की है। पुलिस ने दूल्हे रिजवान समेत 26 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। सोशल मीडिया पर इसको लेकर तंज कसे जा रहे हैं कि केरल जैसे प्राकृतिक सौंदर्य वाली जगह पर ऊँट पर बारात निकालने की क्यों जरूरत पड़ी।

भाजपा सांसद निरंजन ज्योति की गाड़ी की अपहरण की कोशिश, गनर को धक्का देकर गाड़ी लेकर युवक ने भागने की कोशिश की: यूपी में मामला दर्ज

बीजेपी सांसद एवं केंद्रीय राज्यमंत्री साध्वी निरंजन ज्योति के अपहरण की कोशिश का मामला सामने आया है। आरोपित साध्वी निरंजन ज्योति की गाड़ी से गनर को धक्का देने के बाद उनकी गाड़ी को लेकर भागने की कोशिश कर रहा था। बाद में सुरक्षाकर्मियों ने घेर लिया और आखिरकार पकड़ लिया। इस बाबत बंथरा पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई है।

ये मामला लखनऊ का है, जहाँ मंगलवार (16 जनवरी 2023) को पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं फतेहपुर की मौजूदा सांसद साध्वी निरंजन ज्योति दिल्ली से लखनऊ पहुँची थीं। उन्हें रिसीव करने के लिए उनकी फ्लीट लखनऊ एयरपोर्ट आ रही थी। जब फ्लीट लखनऊ के बंथरा थाना इलाके में स्थित न्यू प्रधान ढाबा के पास चाय पीने के लिए उतरी तो उनकी गाड़ी पर कब्जे की कोशिश की गई।

भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपित ने गाड़ी में बैठे गनर को धक्का देकर बाहर गिरा दिया और गाड़ी लेकर भागने लगा। इसके बाद सुरक्षाकर्मियों ने गाड़ी को घेरकर आरोपित को पकड़ लिया और उसे पुलिस को सौंप दिया। साध्वी निरंजन ज्योति के ड्राइवर चेतराम ने बताया कि जिस समय यह घटना हुई, उस समय गाड़ी में सुरक्षाकर्मी और और अन्य स्टाफ बैठे हुए थे।

हालाँकि, घटना के समय निरंजन ज्योति गाड़ी में नहीं थीं। बंथरा थाने के प्रभारी हेमंत राघव ने बताया कि साध्वी निरंजन ज्योति के चालक की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई है। इस मामले में युवक को हिरासत में ले लिया गया है। पुलिस ने आरोपित का मानसिक संतुलन ठीक नहीं होने की बात कही है।

साध्वी निरंजन ज्योति ने कहा कि आरोपित ने जबरदस्ती गाड़ी का अपहरण करने की कोशिश की। वो पूरा हट्टा-कट्टा है। उसे काबू करने के लिए 5-6 लोगों की जरूरत पड़ी। उसके गले में सोने की चेन थी, और वो सफेद कपड़े पहने था। ये तो अब जाँच के बाद ही पता चलेगा कि वो क्या चाहता था।

राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह पर हमले की साजिश का पर्दाफाश: यूपी ATS ने ISIS के इनामी आतंकी फैज़ान को दबोचा, AMU से कर रहा था पढ़ाई

इस्लामी आतंकी संगठन ISIS से जुड़े एक संदिग्ध आतंकवादी को उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ से गिरफ्तार किया गया है। यूपी एटीएस ने आतंकी फैजान बख्तियार को गिरफ्तार किया है। फैजान पर 25 हजार रुपए का ईनाम रखा गया था। फैजान अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) से पढ़ाई कर रहा था। वो यहाँ AMU के कट्टरपंथी छात्र संगठन सामू (SAMU) के साथ ही ISIS से भी जुड़ा था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, फैजान बख्तियार ISIS के अलीगढ़ मॉड्यूल का हिस्सा है। वो AMU से मास्टर डिग्री की पढ़ाई कर रहा है। यहाँ उसने मास्टर ऑफ सोशल वर्क में एडमिशन लिया था और वो स्टूडेंट्स ऑफ अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (SAMU) से जुड़कर आईएसआईएस के के काम को आगे बढ़ा रहा था। उसने रिजवान के जरिए आईएसआईएस के प्रति निष्ठा की भी शपथ (बैयत) ली थी।

ISIS के अलीगढ़ मॉड्यूल से जुड़े आतंकियों की धरपकड़ के बाद उसका नाम सामने आया था, लेकिन वो फरार हो गया था। उस पर यूपी एटीएस ने 25 हजार का ईनाम भी रखा था। अब्दुल समद मलिक पर भी 25 हजार का ईनाम घोषित है। दोनों के नाम अब्दुल्ला अर्सलान और माज बिन तारिक की गिरफ्तारी के बाद सामने आए थे। 24 साल का फैजान मूल रूप से प्रयागराज का रहने वाला है।

ये सभी आतंकी अयोध्या में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह में विघ्न डालना चाहते थे। उन्होंने देश के कई इलाकों में आतंकी हमलों की साजिश रची थी। इसके लिए उन्होंने कई इलाकों की रेकी भी कर रखी थी। हालाँकि, पहले से ही सतर्क सुरक्षा एजेंसियों ने पिछले साल अक्टूबर-नवंबर से इनकी गिरफ्तारियाँ शुरू कर दी थी। इसके बाद यह पूरा मॉड्यूल ध्वस्त हो गया।

फैज़ान और अब्दुल हैं मुल्जिम नंबर 7 और 8

ऑपइंडिया ने अपनी रिपोर्ट में अब्दुल समद और फैजान बख्तियार दोनों के बारे में बताया था। ऑपइंडिया ने 13 नवंबर 2023 की रिपोर्ट में अब्दुल समद मलिक और फैज़ान बख्तियार का जिक्र किया था। फैज़ान बख्तियार और अब्दुल समद मलिक के खिलाफ UP ATS ने 3 अक्टूबर 2023 को लखनऊ में FIR दर्ज करवाई थी। इस FIR में 10 आरोपित नामजद हैं, जबकि 11 वें नंबर पर अन्य दर्ज किया गया है।

अब्दुल समद मलिक इस केस में 6वें और फैज़ान बख्तियार 7वें नंबर के आरोपित हैं। इन दोनों का पता अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) के ‘वीएम हॉल’ बताया गया है। इन सभी आतंकियों पर IPC की धारा 121- A, 122 के साथ विधि विरुद्ध क्रिया कलाप निवारण अधिनियम 1967 के तहत कार्रवाई की गई है।

ATS की FIR के मुताबिक, फैज़ान बख्तियार और अब्दुल समद मलिक सोशल मीडिया के साथ कई अन्य माध्यमों से ISIS की विचारधारा का प्रचार-प्रसार कर रहे थे। ये दोनों अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर कई युवाओं को कट्टरपंथ की राह पर धकेलने की कोशिशों में जुटे थे। इस मॉड्यूल के 8 आतंकियों को अभी तक गिरफ्तार किया जा चुका है।

इस गैंग की सक्रियता ख़ास कर अलीगढ़, संभल, प्रयागराज, लखनऊ, रामपुर और कौशाम्बी आदि जिलों में थी। अन्य आतंकियों के साथ अब्दुल समद और फैज़ान बख्तियार भी कई ऐप के माध्यम से पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं के फरमान पर भारत विरोधी काम कर रहे थे। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

ATS ने अपनी FIR में माना है कि फैज़ान और अब्दुल सहित इसके बाकी SAMU ग्रुप के साथ भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने जैसी साजिश रच रहे थे। इस साजिश को अंजाम देने के लिए घातक हथियार भी जमा करने में जुटे हुए थे। इनके निशाने पर देश के कई हिस्से थे, जहाँ ये अपनी आतंकी करतूतों को अंजाम दे सकें।

तेलंगाना में सरकार बनते ही कॉन्ग्रेस ने अडानी से किया करार, ₹12400 करोड़ के निवेश के लिए डील: पत्रकार ने पूछा सवाल तो खिसिया कर चिदंबरम ने खिसका दी माइक

राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस के अन्य नेता गौतम अडानी को भला-बुरा कहते रहते हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनका नाम गलत तरीके से पेश करते हैं। वहीं अब उनकी ही पार्टी की सरकार अडानी के साथ डील कर रही है, निवेश के लिए अडानी के साथ हाथ मिला रही है। तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की अडानी समूह के चेयरमैन गौतम अडानी के साथ तस्वीर भी सामने आई है। अडानी समूह और तेलंगाना की कॉन्ग्रेस सरकार के बीच 4 MoU पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

‘वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम, 2024’ में हुए इन करारों के तहत अडानी समूह तेलंगाना में 12,400 करोड़ रुपए का निवेश करेगा। बुधवार (17 जनवरी, 2024) को कंपनी ने एक बयान जारी कर के ये जानकारी दी। बता दें कि WEF का मौजूदा संस्करण स्विट्जरलैंड के दावोस में हो रहा है। तेलंगाना में 100 MW का एक डेटा सेंटर बन रहा है, जिसमें अडानी समूह 5000 करोड़ रुपए का निवेश करेगा। ये 5-7 तक रिन्यूवेबल इनर्जी से चलता रहेगा।

कंपनी ने कहा है कि इसके माध्यम से वो लगभग 600 लोगों के लिए प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष रोजगार का सृजन भी करेगी। इसके अलावा ‘अडानी ग्रीन एनर्जी’ ने भी 5000 करोड़ रुपए का निवेश का निर्णय लिया है। 2 स्टोरेज प्रोजेक्ट्स की स्थापना की जाएगी। ये 850 MW और 500 MW के होंगे। इन्हें क्रमशः कोयाबस्तगुडेम और नचाराम में स्थापित किया जाएगा। वहीं ‘अम्बुजा सीमेंट्स’ भी 1400 करोड़ रुपए की लागत से 6 MTPA प्लांट्स स्थापित करेगा, जिससे 4000 लोगों को रोजगार भी मिलेगा।

अगले 5 वर्षों में इस यूनिट की स्थापना कर दी जाएगी। इसके लिए 70 एकड़ जमीन का आवंटन किया जाएगा। वहीं ‘अडानी डिफेन्स सिस्टम एन्ड टेक्नोलॉजीज’ अभी अगले 10 वर्षों में, रिसर्च, डेवलपमेंट, डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग और ‘अडानी ऐरोस्पेस पार्क’ में काउंटर ड्रोन मिसाइल सिस्टम के इंटीग्रेशन सहित अन्य कार्यों के लिए 1000 करोड़ रुपए का निवेश करेगी। इसमें भी 1000 रोजगार का सृजन होगा। इस तरह अडानी समूह तेलंगाना के विकास में योगदान देगा।

वहीं जब पूर्व केंद्रीय मंत्री P चिदंबरम से इस सम्बन्ध में सवाल पूछा गया तो उन्होंने माइक सुप्रिया श्रीनेत की तरफ खिसका दिया। पी चिदंबरम से पूछा गया कि कॉन्ग्रेस नेता अडानी पर सवाल उठा रहे हैं और तेलंगाना की सरकार अडानी के साथ MoU साइन कर रही है। चिदंबरम द्वारा माइक खिसकाने के बाद सुप्रिया श्रीनेत कहने लगीं कि ये मैनिफेस्टो लॉन्च को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस है और सवाल इसी पर केंद्रित रखे जाने चाहिए, ये एक बड़ी चीज है।

चेहरा महिला MLA का, न्यूड वीडियो किसी और का… ऋतु बनावत हुईं डीपफेक का शिकार, अश्लील क्लिप वायरल: कहा- यह मेरा चरित्र हनन

हाल ही में राजस्थान कॉन्ग्रेस के पूर्व विधायक मेवाराम जैन का अश्लील वीडियो वायरल हुआ था। अब राज्य की एक महिला विधायक का अश्लील क्लिप वायरल हो रहा है। यह विधायक हैं ऋतु बनावत। उन्होंने खुद को डीपफेक का शिकार बताते हुए वीडियो वायरल करने वालों पर कार्रवाई की माँग की है।

बयाना की निर्दलीय विधायक ऋतु बनावत ने इसको लेकर भरतपुर के एसपी से शिकायत की है। उन्होंने इस संबंध में विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी को भी पत्र लिखा है। रिपोर्ट के अनुसार बनावत का फेक वीडियो करीब 5 दिनों से सोशल मीडिया में चल रहा है। यह संज्ञान में आने के बाद उन्होंने पुलिस में मामला दर्ज कराया है।

ऋतु बनावत ने इसे अपना ​चरित्र हनन करार दिया है। कहा है कि फेक वीडियो के जरिए उनकी राजनीतिक और सामाजिक छवि को धूमिल करने की को​शिश की जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार जो वीडियो वायरल हो रहा है उसमें एक महिला की न्यूड फोटोज पर डीपफेक की मदद से बनावत की तस्वीर लगा दी गई है।

बनावत ने कहा है कि जब डीपफेक की मदद से उन जैसी महिला के साथ इस तरह की गंदी हरकत की जा रही है तो सामान्य महिलाओं की स्थिति को लेकर सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। गौरतलब है कि बनावत हालिया विधानसभा चुनावों में जीत दर्ज कर पहली बार विधानसभा पहुँची हैं। 2018 में वह चुनाव हार गईं थी। इस बार बीजेपी ने उनको टिकट नहीं दिया था। इसके बाद वह निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरीं। उन्होंने कॉन्ग्रेस के अमर सिंह जाटव को 40 हजार से अधिक वोटों से हराया था। चुनाव जीतने के बाद उन्होंने बीजेपी सरकार को समर्थन देने का ऐलान किया था। शपथ लेने के लिए वे खुद ट्रैक्टर चलाकर विधानसभा पहुंची थी। इसके कारण भी वह पिछले दिनों सुर्खिंयों में थीं।

उल्लेखनीय है कि डीपफेक की मदद से फेक वीडियो वायरल करने का यह पहला मामला नहीं है। सचिन तेंदुलकर भी पिछले दिनों इसके शिकार हुए थे। अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए सचिन ने कहा था, “टेक्नोलॉजी का इस प्रकार का दुरुपयोग बिल्कुल गलत है। आप सब से विनती है कि ऐसे वीडियो या एप या विज्ञापन आपको अगर नजर आए तो उन्हें तुरंत रिपोर्ट करें।”

इसके बाद केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने ऐसे मामलों को कठोरता से निपटने के लिए जल्द कानून लाने की बात कही थी। उन्होंने कहा था, “AI द्वारा संचालित DeepFakes और गलत सूचनाएँ भारतीय उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा और विश्वास के लिए खतरा हैं। ये नुकसान पहुँचाती हैं और कानून का उल्लंघन करती हैं। इन्हें प्लेटफॉर्म को रोकना और हटाना ही होगा।”

‘श्रीकृष्ण की है मथुरा, जन्मभूमि पर होना चाहिए भव्य मंदिर’: अयोध्या पहुँचीं हेमा मालिनी की दो टूक, बोलीं – जो प्राण प्रतिष्ठा में नहीं आ रहे ये उनका नुकसान

मथुरा से भाजपा सांसद हेमा मालिनी का कहना है कि मथुरा श्रीकृष्ण की है और वहाँ भगवान का भव्य मंदिर ज़रूर होना चाहिए। उनसे पूछा गया था कि क्या मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर एक भव्य कृष्ण मंदिर होना चाहिए? अयोध्या में हेमा मालिनी ने ये बयान दिया।

बताते चलें कि 75 साल की अनुभवी अभिनेत्री बुधवार (17 जनवरी, 2024) को यहाँ राम मंदिर समारोह से पहले अयोध्या में ‘रामायण’ की थीम पर एक नृत्य नाटिका प्रस्तुत करने के लिए मौजूद रही।

सांसद हेमा मालिनी कहना हैं, “यह निश्चित रूप से वहाँ ये होना चाहिए। मथुरा और वृंदावन मंदिरों के शहर हैं। यहाँ बहुत सारे मंदिर हैं, लेकिन वर्षों पहले कृष्ण जन्मस्थान को नष्ट कर दिया गया था। और वहाँ एक मस्जिद बनाई गई थी। इसलिए लोगों को एतराज है।”

उन्होंने आगे कहा कि अच्छा होगा अगर इसका समाधान हो जाए क्योंकि यह भगवान कृष्ण का है। ‘जन्मस्थान’ भगवान कृष्ण की जगह है। वहाँ एक सुंदर मंदिर है। लेकिन अगर कुछ और किया जाए तो बहुत बेहतर होगा।

हेमा मालिनी ने विपक्ष के राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा को बीजेपी का कार्यक्रम कहे जाने को लेकर कहा, “उन्हें विपक्ष में रहते हुए कुछ न कुछ कहना था। वे राम मंदिर का विरोध करने के लिए भी तैयार हो गए। हम सभी भारतीय हैं और हमें इस पर गर्व होना चाहिए।”

उन्होंने आगे कहा कि इससे जुड़ना जरूरी है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि यह किसने किया। विपक्ष को इसका राजनीतिकरण नहीं करना चाहिए। बकौल हेमा मालिनी, अगर वे नहीं आ रहे हैं तो यह उनका नुकसान है। जो लोग आ रहे हैं उनके लिए यह अच्छा है और जो नहीं आ रहे हैं उनके लिए यह नुकसान है।

बताते चलें कि अयोध्या जन्मभूमि विवाद के बाद, हिंदू समुदाय अब वाराणसी में ज्ञानवापी और मथुरा में कृष्ण जन्म भूमि के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहा है। कृष्ण जन्म भूमि को लेकर 16 जनवरी, 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर स्थित शाही ईदगाह ढाँचे के सर्वे पर रोक लगा दी।

दरअसल, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 14 दिसम्बर, 2023 को फैसला देते हुए इस मामले में एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त करके सर्वे की इजाजत दी थी। मुख्य केस में शाही ईदगाह मस्जिद को हटाने की माँग की गई है, यह दावा करते हुए कि इसका निर्माण कृष्ण जन्मभूमि पर किया गया था।

इस स्थल को कृष्ण जन्मभूमि घोषित करने वाली एक अन्य जनहित याचिका 2022 में खारिज कर दी गई। याचिकाकर्ता या हिंदू पक्ष का दावा है कि 1618 में ओरछा के राजा वीर सिंह बुंदेला द्वारा निर्मित एक मंदिर को मुगल सम्राट औरंगजेब के आदेश के तहत 1670 में शाही ईदगाह मस्जिद के निर्माण के लिए ध्वस्त कर दिया गया था।

फरवरी 1670 का आधिकारिक अदालत बुलेटिन इन दावों का समर्थन करता है। उन्होंने कमल के आकार के स्तंभ की मौजूदगी पर ध्यान दिलाते हुए कहा कि आमतौर पर ये हिंदू मंदिरों में देखा जाता है। इसके साथ ही मस्जिद परिसर के अंदर हिंदू धार्मिक प्रतीकों और नक्काशी की तरफ ध्यान दिलाया है।

दूसरी तरफ प्रतिवादी शाही ईदगाह मस्जिद समिति और यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड का तर्क है कि मस्जिद विवादित भूमि के तहत नहीं आती है और ये मंदिर के अस्तित्व से संबंधित दावों पर विवाद की बात हैं।

बेच दिया, बर्बाद कर दिया… जिस LIC पर मोदी सरकार को कोसते थे विपक्षी, वो बनी भारत की सबसे बड़ी सरकारी कंपनी: ₹5.60 लाख करोड़ से ज़्यादा की हुई वैल्यू

भारत सरकार की बीमा कम्पनी जीवन बीमा निगम (LIC) बुधवार (17 जनवरी 2024) को देश की सबसे अधिक बाजार पूँजीकरण वाली सरकारी कम्पनी बन गई। LIC ने अब तक भारत की सबसे बड़ी सरकारी कंपनी रही भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को पीछे छोड़ दिया। LIC के सबसे बड़ी कम्पनी बनने के साथ ही उन आलोचकों को जवाब मिल गया, जो इसके विनिवेश को लेकर सवाल उठा रहे थे।

दरअसल, 17 जनवरी 2024 को शेयर बाजार में LIC के एक शेयर का भाव चढ़कर ₹918 तक पहुँच गया। इससे इसका बाजार पूँजीकरण ₹5.6 लाख करोड़ को पार कर गया। इसी के साथ LIC ने ₹5.5 लाख करोड़ के पूँजीकरण वाली सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक को भी पीछे छोड़ दिया। SBI अब तक सबसे अधिक बाजार पूँजीकरण वाली सरकारी कंपनी थी।

LIC एक सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम है अर्थात इसमें 50% से अधिक हिस्सेदारी सरकार के पास है। LIC में वर्तमान में 96.5% हिस्सेदारी केंद्र सरकार की है, जबकि 3.5% हिस्सा निवेशकों को पास है। मई 2022 में यह शेयर बाजार में सूचीबद्ध हुई थी। LIC देश की सबसे बड़ी सरकारी कम्पनी होने के साथ ही देश की सबसे बड़ी बीमा कम्पनी भी है। वर्तमान में इसके 25 करोड़ पॉलिसीधारक हैं।

LIC के देश की सबसे बड़ी सरकारी कम्पनी बनने के साथ ही उन आलोचकों को भी जवाब मिल गया, जो LIC और इसके निवेश करने के तरीके पर प्रश्न उठा रहे थे। जनवरी 2023 से कॉन्ग्रेस के नेताओं ने LIC पर आरोप लगाए थे कि LIC अडानी के शेयर खरीद रही है, जबकि उस पर हिंडनबर्ग ने आरोप लगाए हैं। उनका दावा था कि अडानी समूह में पैसे लगाने के कारण हो LIC को नुकसान हो गया।

कॉन्ग्रेस ने आरोप लगाया था कि LIC के जरिए केंद्र सरकार अडानी समूह को पैसा मुहैया करवा रही है। कॉन्ग्रेस ने मई 2023 में ये भी कहा था कि अडानी में निवेश के कारण LIC का बाजार पूँजीकरण कम हो गया। मई 2023 में LIC का बाजार पूँजीकरण लगभग ₹3.6 लाख करोड़ था। अमेरिकी शॉर्टसेलर हिंडनबर्ग ने एक रिपोर्ट प्रकाशित किया था, जिससे अडानी के शेयर गिर गए थे।

LIC अडानी समूह ही नहीं देश की कई सारी कम्पनियों में पैसा लगाती है। ऐसा वह अपने पॉलिसीधारकों को अच्छा रिटर्न देने के लिए करती है। हालाँकि, कॉन्ग्रेस के आरोप गलत साबित हुए हैं। बीते 6 माह में LIC के शेयर लगभग 43% बढ़ चुके हैं। अडानी समूह भी उबर चुका है। जो कॉन्ग्रेस अडानी समूह के विरुद्ध प्रचार में लगी थी, उसकी ही तेलंगाना सरकार अडानी से समझौते कर रही है।

जिसे पाकिस्तानी कहते हैं अपना सबसे खतरनाक गेंदबाज, उसकी 14 गेंदों पर 6 छक्का: T-20 का वर्ल्ड रिकॉर्ड

पाकिस्तान की क्रिकेट टीम ऑस्ट्रेलिया के बाद न्यूजीलैंड के दौरे पर है। यहाँ पाकिस्तानी टीम को न्यूजीलैंड ने लगातार तीसरे मैच में धो डाला। तीसरे टी-20 बार मैच में ओपनर फिन एलन ने पूरी टीम की धज्जियाँ उड़ा दी। फिन एलन ने पाकिस्तान के सबसे तेज गेंदबाज हैरिस रऊफ पर 6 छक्के जड़ डाले और पूरे मैच में कुल 16 छक्के। ये विश्व रिकॉर्ड की बराबरी भी है। डुनेडिन में खेले गए तीसरे टी-20 मैच में न्यूजीलैंड ने पाकिस्तान को 45 रनों से हरा दिया है, जिसमें फिन एलन ने 137 रनों की विस्फोटक पारी खेली।

इस मैच में पाकिस्तान ने टॉस जीतकर पहले गेदबाजी का फैसला लिया था, जो उल्टा पड़ गया। शुरु में चौथे ओवर में हैरिस रऊफ को सफलता जरूर मिली थी, जब उन्होंने डेवोन कॉनवॉय को 7 रनों के स्कोर पर आउट किया था, लेकिन इसके बाद फिन एलन ने मैच को एकतरफा तरीके से आगे बढ़ाया। फिन एलन ने मैच में 62 गेंदों पर 137 रनों की पारी खेली, जिसमें 16 छक्के शामिल थे। इसके जवाब में पाकिस्तानी टीम बाबर आजम के लगातार तीसरे अर्धशतक के बावजूद 7 विकेट के नुकसान पर 179 रन ही बना सकी और लगातार तीसरा मैच गँवा दिया और सीरीज में 3-0 की बढ़त बना ली।

इससे पहले के दोनों मैचों में न्यूजीलैंड ने 21 और 46 रनों से जीत हासिल की थी। इस मैच में फिन एलन ने कई रिकॉर्ड्स तोड़े।

अब नजर डालते हैं इस मैच में बने रिकॉर्ड्स पर

फिन एलन ने एक पारी में 16 छक्के लगाकर अफगानिस्तानी ओपनर हजरतुल्लाह जाजई की बराबरी कर ली। जाजई ने 2019 में देहरादून में आयरलैंड के खिलाफ 62 गेंदों पर 162 रनों की नाबाद पारी खेली थी और 16 छक्के लगाए थे। दूसरे नंबर पर हंगरी के प्लेयर जीशान कुकीखेल हैं, जिन्होंने 2022 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 137 रनों की पारी में 15 छक्के लगाए थे। ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान एरोन फिंच तीसरे नंबर पर हैं, उन्होंने 2013 में इंग्लैंड के खिलाफ 156 रनों की पारी में 14 छक्के लगाए थे।

फिन एलन की 137 रनों की पारी न्यूजीलैंड की ओर से टी-20 क्रिकेट में किसी भी बल्लेबाज की सबसे बड़ी पारी है। उन्होंने पूर्व कप्तान ब्रेंडन मैक्कुलम का रिकॉर्ड तोड़ा। मैक्कुलम ने बांग्लादेश के खिलाफ 2012 में 123 रनों की पारी खेली थी। तीसरे नंबर पर भी मैक्कुलम ही हैं, जिन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 2010 में नाबाद 116 रनों की पारी खेली थी।

इस मैच में एलन फिन ने हैरिस रऊफ की 14 गेंदों का सामना किया और 6 छक्के लगाए। टी-20 इंटरनेशनल क्रिकेट के इतिहास में सिर्फ तीन बल्लेबाजों ने किसी गेंदबाज को एक मैच में 6 छक्के मारे हैं। युवराज सिंह ने 2007 में स्टुअर्ट ब्रॉड के एक ही ओवर में 6 छक्के जड़ने का कारनामा किया था। कीरोन पोलार्ड ने 202 में श्रीलंकाई गेंदबाज अकिला धनंजय की गेंदों पर 6 छक्के जड़े थे, तो जोश इंग्लिश ने भारतीय स्पिनर रवि बिश्नोई की गेंदों पर 2023 में 6 छक्के लगाए थे।

इस मैच में फिन एलन ने टी-20 इंटरनेशनल क्रिकेट में 1000 रन भी पूरे कर लिए। उन्होंने 611 गेंदों पर ये आँकड़ा छुआ, जो तीसरा सबसे तेज है। इस लिस्ट में पहला नाम सूर्यकुमार यादव का है, उन्होंने 573 गेंदों पर 1000 रन बनाए थे। दूसरे नंबर पर ग्लेन मैक्सवेल हैं, जिन्होंने 604 गेंदों में 1000 रनों के आँकड़े को छुआ था।

हैरिस रऊफ ने इस मैच में अपने 4 ओवर के कोटे में 60 रन दे दिए। ये उनके करियर का सबसे महँगा स्पेल रहा। इससे पहले भी 4 बार वो 50 से ज्यादा रन दे चुके थे, लेकिन वो पाकिस्तान सुपर लीग के मैचों में था। उन्होंने इंटरनेशनल क्रिकेट में कभी 50 से ज्यादा रन नहीं दिए थे।

ये वही हैरिस रऊफ हैं, जिनकी दो गेंदों पर 2 छक्के मारकर विराट कोहली ने टीम इंडिया को पाकिस्तान पर जीत दिलाई थी। विराट कोहली का स्ट्रेट सिक्स आज भी लोग याद करते हैं।

हैरिस रऊफ को पाकिस्तान में मौजूदा समय का सबसे खतरनाक तेज गेंदबाज माना जाता है। वो लगातार 150 से ज्यादा की स्पीड से गेंदबाजी करते हैं। लेकिन विराट कोहली के उन 2 छक्कों के बाद से बल्लेबाजों के मन में रऊफ का हौव्वा खत्म सा हो गया है। एलन ने रऊफ के एक ओवर में 27 रन कूट दिए। ऐसे में फिन एलन ने इस बार रऊफ की जो हालत की है, वो इस कहानी को पूरा करने के लिए काफी है।

‘अयोध्या जा रहा था पटाखों से भरा ट्रक, लगी आग’ : प्राण-प्रतिष्ठा से पहले मीडिया ने चलाई खबर, UP पुलिस ने खोली पोल

राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा से पहले कई भ्रामक जानकारी मीडिया में आ रही हैं। 17 जनवरी 2024 को भी एक ऐसी खबर मीडिया ने चलाई जिसमें बताया गया कि आतिशबाजी के लिए एक ट्रक में पटाखे भरकर अयोध्या की ओर ले जाया जा रहा था, लेकिन उन्नाव में उसमें आग लग गई और सारे पटाखे वहीं जल गए। वीडियो में देख सकते हैं कि घटना के बाद ट्रक धूँ-धूँ करके जलता है और आसमान में रॉकेट बम छूटते दिखते हैं।

इस खबर को एनडीटीवी समेत कई मीडिया संस्थानों ने किया है। हालाँकि पुलिस ने घटना को लेकर जो सच्चाई बताई है वो खबरों में किए जा रहे दावों से अलग है।

पुलिस का पक्ष जानने से पहले देख सकते हैं कि एनडीटीवी ने इस पर रिपोर्ट की और हेडलाइन में स्पष्ट तौर पर ‘अयोध्या’ लिखा।

ट्रक के अयोध्या जाने की बात NDTV में

इसी तरह रिपब्लिक इंडिया ने भी इसी दावे के साथ अपनी रिपोर्ट पब्लिश की।

ट्रक के अयोध्या जाने की बात रिपब्लिक टीवी में

लाइव मिंट ने भी ‘अयोध्या’ लिखकर रिपोर्ट पब्लिश की।

ट्रक के अयोध्या जाने की बात लाइव मिंट में

इसके अलावा सोशल मीडिया पर भी इसे राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा से जोड़कर कहा जाने लगा कि राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के वक्त आतिशबाजी होगी… उसी लिए ये ट्रक अयोध्या जा रहा था।

ममता त्रिपाठी ने अपने ट्वीट में कहा कि उन्नाव के पास ट्रक में आग लगी, सारा ट्रक जलकर ख़ाक हो गया। लोगों को लगा कि अचानक पाकिस्तान बार्डर पर पहुँच गए। कोहरे में भी दूर दूर तक आतिशबाजी देखी गई।

सोशल मीडिया पर शेयर हो रहे पोस्ट

अब प्राण-प्रतिष्ठा से पहले ऐसी खबरें क्यों फैलाई जा रही ये किसी से छिपा नहीं है कि ये अयोध्या को लेकर डर फैलाने का प्रयास है। इस पर उन्नाव पुलिस ने ट्वीट भी किया है। यूपी पुलिस ने ट्वीट के नीचे कहा, “पुलिस एवं दमकल द्वारा आग को पूरी तरह बुझा दिया गया है तथा कोई जनहानि नहीं हुई है। यातायात सुचारू रूप से चल रहा है। उक्त ट्रक तमिलनाडु से बहराइच जा रहा था, जिसमें दुकान की सप्लाई हेतु आतिशबाजी, बच्चों के पोस्टर, फिल्मी कलाकारों एवं धार्मिक पोस्टर लदे थे।”

उन्नाव पुलिस ने घटना के संबंध में अलग से भी बताया। पुलिस ने जानकारी दी कि 17 जनवरी को सुबह 4 बजे थाना पुरवा ग्राम खरगीखेड़ा के पास एक ट्रक जिसमें पटाखे लदे थे, अज्ञात कारणों से उसमें आग लग गई। पुलिस ने सूचना पाते ही फायर ब्रिगेड बुलवाई और आग को पूरी तरह से बुझवाया गया। घटना में कोई जनहानि नहीं हुई। ट्रक को भी रोड से हटवा दिया गया। यातायात भी अब सुचारू रूप से चल रहा है। ट्रक के मालिक ने बताया है कि ये ट्रक तमिलनाडु से बहराइच जा रहा था, जिसमें सप्लाई हेतु आतिशबाजी, बच्चों के पोस्टर, फिल्मी कलाकारों के पोस्ट और धार्मिक पोस्टर लदे थे।

जब रामरथी आडवाणी के लिए सड़क पर उतर गईं प्रोफेसर शारदा सिन्हा, समस्तीपुर के सर्किट हाउस में ही छठ करने को तैयार थीं महिलाएँ

ओछी राजनीति ने समस्तीपुर पर दो कलंक लगा दिए। एक ​ललित नारायण मिश्रा की हत्या और दूसरी लाल कृष्ण आडवाणी की गिरफ्तारी।

80 साल के अखिलेश्वर प्रसाद नारायण सिंह यह बात 22 और 23 अक्टूबर 1990 की दरम्यानी रात बिहार के समस्तीपुर के सर्किट हाउस से लाल कृष्ण आडवाणी (LK Advani) को गिरफ्तार किए जाने की घटना को याद कर कहते हैं। मूल रूप से ​सीवान के रहने वाले सिंह उस समय समस्तीपुर के राम निरीक्षण आत्मा राम कॉलेज (RNAR College Samastipur) में ​इतिहास के प्राध्यापक थे। समस्तीपुर बीजेपी के अध्यक्ष थे।

ऑपइंडिया से बात करते हुए अखिलेश्वर प्रसाद नारायण सिंह ने कहा कि उम्र के कारण अब वे पुरानी बातें भूलने लगे हैं। लेकिन उन्हें वह आक्रोश आज भी याद है जो उस समय आडवाणी की गिरफ्तारी के बाद समस्तीपुर के आम लोगों में दिख रहा था। प्रोफेसर शारदा सिन्हा तो कहती हैं कि वह आक्रोश आज भी उनमें रोमांच भर देता है। सिन्हा भी समस्तीपुर वीमेंस कॉलेज में हिस्ट्री की प्राध्यापक रह चुकी हैं। फिलहाल अपनी बेटी के पास पंजाब के मोहाली में रहती हैं।

प्रोफेसर शारदा सिन्हा बताती हैं कि आडवाणी की गिरफ्तारी की खबर सुनते ही 23 अक्टूबर 1990 की सुबह बड़ी संख्या में महिलाएँ भी समस्तीपुर की सड़क पर उतर गईं थी। खुद सिन्हा दो छोटे बच्चों को घर पर छोड़ सर्किट हाउस तक दौड़ी आईं थी। उन्होंने ऑपइंडिया को बताया, “वह खरना का दिन था। मैं पहली बार छठ करने जा रही थी। महिलाओं ने तय किया कि वे घर नहीं जाएँगी। सर्किट हाउस में ही छठ मनाएँगी। इसके बाद प्रशासन के हाथ-पाँव फूल गए थे।”

सिन्हा के कहे की पुष्टि करते हुए अखिलेश्वर प्रसाद सिंह ने बताया कि सर्किट हाउस के बगल में उस समय लीची का एक बागान था। उसमें एक तालाब था, जिसमें महिलाओं ने छठ मनाने का फैसला किया था। बीजेपी नेता कैलाशपति मिश्र के समझाने के बाद महिलाएँ घर लौटने को तैयार हुईं थी।

सिंह के अनुसार उस समय संचार के साधन आज की तरह नहीं थे। जिसने जहाँ आडवाणी की गिरफ्तारी की खबर सुनी वह सर्किट हाउस दौड़ा आ गया। लोग सर्किट हाउस का गेट तोड़ देना चाहते थे। आडवाणी को गिरफ्तारी के बाद हेलिकॉप्टर से दुमका के मसानजोर डैम स्थित गेस्ट हाउस ले जाया गया था। लेकिन लोगों का आक्रोश बढ़ते जा रहा था। इसके बाद कैलाशपति मिश्र ने पटेल मैदान में एक सभा की घोषणा की।

उस सभा को याद करते हुए सिन्हा ने बताया, “सुबह के 8 बजते-बजते समस्तीपुर शहर में लोग ऐसे उमड़ पड़े थे जैसे कोई रैली हो। कैलाशपति मिश्र ने पटेल मैदान की सभा में लोगों को शांत कराया। कहा कि दोनों सरकारें (बिहार और केंद्र की) चाहती हैं कि कुछ हो जाए ताकि बीजेपी को बदनाम किया जा सके। कलंकित किया जा सके। इसके बाद ही लोग शांत हुए। महिलाएँ खरना करने के लिए पटेल मैदान से अपने घर चली गईं। लेकिन समस्तीपुर शहर में अगले कई दिनों तक इस मामले को लेकर गहमागहमी बनी रही। लोग इस गिरफ्तारी से आक्रोशित थे।”

उल्लेखनीय है कि आडवाणी को जब गिरफ्तार किया गया था, तब केंद्र में वीपी सिंह की और बिहार में लालू प्रसाद यादव की सरकार थी। आडवाणी 25 सितंबर 1990 को सोमनाथ से रथ लेकर अयोध्या के लिए निकले थे। लेकिन गंत्व्य तक पहुँचने से पहले ही 22 अक्टूबर की देर रात उन्हें समस्तीपुर के सर्किट हाउस से गिरफ्तार कर लिया गया था।

बिहार सरकार के इस फैसले से उपजे आक्रोश को याद करते हुए प्रोफेसर शारदा सिन्हा बताती हैं, “उस समय लालू यादव मिल जाते तो लोग क्या कर देते कल्पना नहीं की जा सकती है। लोग कह रहे थे ई पराछुत (नीच) सरकार है। इसको मोल तो चुकाना होगा।” अखिलेश्वर प्रसाद नारायण सिंह के अनुसार आडवाणी को 22 अक्टूबर के दिन में ही हाजीपुर से समस्तीपुर आना था। लेकिन वे रात के करीब एक बजे सर्किट हाउस पहुँचे थे। इसके बाद उनको गिरफ्तार कर लिया गया था। वे बताते हैं कि आडवाणी की उस यात्रा को लेकर उस समय लोगों में खासा उत्साह था। समाज हिंदू के तौर पर एकजुट हो रहा था। आडवाणी की प्रतीक्षा में समस्तीपुर उस दिन पूरी रात जागा रहा था।

उन्होंने बताया कि लोगों की नाराजगी देखकर प्रशासन कैलाशपति मिश्र के नेतृत्व में बीजेपी कार्यकर्ताओं को समस्तीपुर से बसों में भरकर मुजफ्फरपुर ले गई। वहाँ जेल में उनकी गिरफ्तारी दिखाकर छोड़ दिया गया था। लेकिन इससे लोगों का गुस्सा शांत नहीं हुआ। इस घटना के विरोध में अगले एक-दो दिन तक लोग गिरफ्तारी देते रहे थे।

उल्लेखनीय है कि आडवाणी की इस रथ यात्रा को 30 अक्टूबर को अयोध्या पहुँचना था। भले आडवाणी को गिरफ्तार कर इसके पहिए बीच रास्ते में रोक दिए गए थे, लेकिन इसने रामजन्मभूमि मुक्ति आंदोलन को घर-घर तक पहुँचा दिया। इसने राम मंदिर की ऐसी लौ जगाई कि रथ जिस रास्ते से गुजरता वहाँ की मिट्टी लोग सिर पर लगा लेते।

जब गिरफ्तार हुए आडवाणी तब नरेंद्र मोदी भी थे साथ

सोमनाथ से अयोध्या के लिए निकली उस यात्रा के रथी भले लाल कृष्ण आडवाणी, लेकिन सारथी वही नरेंद्र मोदी थे जो आज देश के प्रधानमंत्री हैं। उस समय वे गुजरात भाजपा के संगठन महामंत्री हुआ करते थे। असल में, राष्ट्रीय स्तर पर मोदी का अवतरण इसी रथ यात्रा के जरिए हुआ था।

जब आडवाणी को समस्तीपुर में गिरफ्तार किया गया, तब भी मोदी उनके साथ ही थे। हालाँकि गिरफ्तार कर केवल आडवाणी को दुमका के गेस्ट हाउस ले जाया गया था। प्रोफेसर शारदा ऑपइंडिया को बताया, “जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री बने थे तब लोगों ने कहा था कि गिरफ्तारी के समय वे भी आडवाणी के साथ थे। पर मुझे नहीं पता वे समस्तीपुर आए थे या नहीं। मैं न तो सर्किट हाउस के भीतर थी और न मोदी उस समय इतने पॉपुलर थे। मुझे हाथ से अपनी गिरफ्तारी का इशारा करते आडवाणी आज भी याद हैं।”

वहीं अखिलेश्वर प्रसाद नारायण सिंह ने बताया, “हमलोग तो उस समय पहचानते नहीं थे। लेकिन मोदी जी भी उनके साथ थे। जब मोदी राजनीति में स्थापित हुए तो यह बात सामने आई थी। लेकिन हमलोग उस समय उन्हें पहचानते नहीं थे।”

इस रथ यात्रा में नरेंद्र मोदी की भूमिका को लेकर पत्रकार हेमंत शर्मा ने अपनी किताब ‘युद्ध में अयोध्या’ में भी लिखा है। उन्होंने मोदी को इस यात्रा का रणनीतिकार और शिल्पी बताया है। उनके अनुसार यात्रा के मार्ग और कार्यक्रम को लेकर औपचारिक तौर पर सबसे पहले जानकारी भी मोदी ने ही 13 सितंबर 1990 को दी थी। कहा जाता है कि इस यात्रा की हर सूचना जिस एक शख्स के पास होती थी वे मोदी ही थे। कुछ जानकारियाँ तो आडवाणी को भी बाद में मिलती थी। ‘नरेंद्र मोदी: एक शख्सियत, एक दौर’ में नीलांजन मुखोपाध्याय ने मोदी के हवाले से लिखा है, “इस अनुभव से मुझे मेरी प्रबंधन क्षमता को विकसित करने का अवसर मिला।”

पिछले दिनों लालकृष्ण आडवाणी ने अपने एक लेख में इस यात्रा को याद करते हुए लिखा है, “उस समय (सितंबर 1990 में यात्रा शुरू होने के कुछ दिन बाद) मुझे लगा कि नियति ने तय कर लिया है कि एक दिन अयोध्या में एक भव्य राम मंदिर बनाया जाएगा… अब यह केवल समय की बात है।” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर प्रशंसा करते हुए इसमें कहा है कि भगवान राम ने अपने मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए नरेंद्र मोदी के रूप में अपना भक्त चुना, जिनकी देखरेख में मंदिर की इमारत बन रही है।

आडवाणी और मोदी ने सिखाया धर्म ही राजनीति है

स्वतंत्र भारत की राजनीति में दशकों तक उस जमात का प्रभुत्व रहा है, जिसने तुष्टिकरण की राजनीति को पाला-पोसा। जो अयोध्या से रामलला की मूर्ति को हटवाना चाहते थे। जिनके लिए इफ्तार सेकुलरिज्म है। इस जमात ने इस विचार को भी बड़े जोर-शोर से आगे बढ़ाया कि धर्म को राजनीति से दूर रहना चाहिए। लेकिन इस विचार ने देश का बेड़ा गर्क किया। धर्मनिरपेक्षता को विकृत किया। असल में धर्म और राजनीति दोनों का लक्ष्य सुशासन की स्थापना करना है। आडवाणी और मोदी की उस रथ यात्रा ने भारत को समझाया कि धर्म और राजनीति एक-दूसरे के पूरक हैं, न कि एक दूसरे के द्वेषी। उन्होंने बताया कि राजनीति का मर्म ही धर्म हैं।

यह हमारा सौभाग्य है कि आज का भारत उस विचार के साथ आगे बढ़ रहा है। यह उस पंरपरा का सौभाग्य है जिसने यह सुनिश्चित किया कि 22 जनवरी 2024 को अयोध्या के भव्य राम मंदिर में भगवान रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यजमान होंगे और आज की भारतीय राजनीति के भीष्म पितामह लाल कृष्ण आडवाणी इसके साक्षी बनेंगे।