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8 घंटे 20 मिनट के बाद खाना, बुजुर्ग-बच्चों को पानी तक नहीं: IndiGo पायलट के मार खाने वाले मामले में फ्लाइट-क्रू की अभद्रता की आँखोंदेखी

दिल्ली से गोवा जा रही इंडिगो फ्लाइट में पैसेंजर द्वारा पायलट को थप्पड़ रसीद करने के मामले में नया मोड़ आया है। दरअसल, फ्लाइट में सवार एक रशियन मॉडल और एक अन्य यात्री का आरोप है कि फ्लाइट के घंटों लेट होने पर भी इंडिगो के पायलट और केबिन क्रू का बर्ताव यात्रियों के साथ अच्छा नहीं था।

रूसी मॉडल और एक्टर एवगेनिया बेल्सकिया इंडिगो की इसी फ्लाइट नंबर 6E 2175 में सवार थी। इसी फ्लाइट के 28 साल के एक पैसेंजर सतीश कटारिया ने को-पायलट अनूप कुमार पर हमला किया था।

बेल्सकिया का कहना है कि अधिकतर पैसेंजर टेकऑफ़ में लगातार देरी की वजह से गुस्से में थे। उन्हें शुरू में बताया गया था कि फ्लाइट अपने तय समय से दो घंटे बाद रवाना होगी। हालाँकि, बाद में उन्हें बताया गया कि फ्लाइट 10 घंटे की देरी से उड़ेगी और बाद में इसमें 3 घंटे की और देरी हो गई।

बेल्सकिया के मुताबिक, इतने घंटे की देरी की वजह से कई पैसेंजर ने क्रू और पायलटों से सवाल करना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि को-पायलट अनूप कुमार ने पैसेंजर से कहा कि वो बहुत सारे सवाल पूछ रहे थे और यही वजह है कि फ्लाइट में देरी हुई।

बेल्सकिया ने आरोप लगाया कि को-पायलट के अभद्र तरीके से बात करने पर पैसेंजर सतीश कटारिया गुस्से में आ गए और उन्होंने पायलट पर हमला कर दिया। उन्होंने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर वीडियो शेयर कर लिखा, “मैं इस स्थिति को थोड़ा स्पष्ट करना चाहती हूँ। पायलट ने पैसेंजर्स के साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया और इस देरी के लिए उन्हें दोषी ठहराया, क्योंकि वो भी कई सवाल पूछ रहे थे। साथ ही क्रू भी अच्छा नहीं था! उन्होंने लोगों को खाना पानी तक नहीं दिया। पायलट को मारना गलत है। लेकिन क्रू बिल्कुल भी अच्छा नहीं था, इसलिए ऐसा हुआ।”

बेल्सकिया ने आगे कहा कि इंडिगो टीम कह रही थी कि फ्लाइट में एक घंटे लेट थी, लेकिन यह कम से कम 10 घंटे तक लेट हुई थी जब तक कि हमें प्लेन में चढ़ने की मंज़ूरी नहीं दी गई। रूसी मॉडल ने कहा, “मेरी टीम अपनी फ्लाइट के लिए 10 घंटे तक इंतजार करती रही थी, तभी एक शख्स तंग आ गया और इसके बाद उन्हें और इंतजार करना पड़ा। पुलिस उस आदमी को ले गई और उन्हें पायलट भी बदलना पड़ा।”

इसी वजह से 14 जनवरी, 2024 सुबह 7:40 बजे रवाना होने वाली इंडिगो की फ्लाइट आखिरकार रविवार शाम 6 बजे रवाना हुई। वहीं इस फ्लाइट में सवार एक अन्य पैसेंजर सनल विज ने भी अपने एक्स हैंडल पर लिखा, “मैं हिंसा का समर्थन नहीं करता, लेकिन इंडिगो ने फायदा उठाया और हमला करने वाले पैसेंजर ने जो किया उसकी आड़ में अपने सभी कुप्रबंधन और गलतियों को छुपाया।”

उन्होंने कहा कि उड़ान 6E2175, जो सुबह 7:40 बजे रवाना होने वाली थी वो कई घंटे की देरी का सामना करने के बाद शाम 05:35 बजे रवाना हुई। विज ने आगे कहा कि एक को पैसेंजर के तौर पर घटना का प्रत्यक्षदर्शी होने की वजह से वो अपना अनुभव शेयर करना जरूरी समझते हैं।

उन्होंने कहा, “लगभग 186 पैसेंजर्स जिनमें शिशु, छोटे बच्चे और बुजुर्ग शामिल थे, सबकी दोपहर 12:20 बजे (खराब मौसम की वजह से 5 घंटे की देरी के बाद) बोर्डिंग शुरू हुई, करीब 12:40 बजे तक बोर्डिंग पूरी करने के बावजूद फ्लाइट के डोर दोपहर 2:50 बजे तक खुले रहे थे।” विज ने कहा, “ग्राउंड स्टाफ ने देरी के लिए ATC (हवाई यातायात नियंत्रण) को भीड़ के वजह से फ्लाइट रवाना होने के लिए मंजूरी नहीं देने के लिए जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि पायलट ने दोपहर 1:30 बजे ऐलान किया कि वे क्रू मेंबर्स का इंतजार कर रहे हैं और फ्लाइट शीघ्र ही रवाना होगी।”

विज ने कहा कि इससे साफ हो गया कि ग्राउंड स्टाफ और क्रू ने गलत सूचना दी। उन्होंने आरोप लगाया कि क्रू के सदस्यों को गैर-पेशेवर रवैया अपनाते देखा गया। ये लोग ग्राउंड स्टाफ के साथ लंबी बातचीत में मशगूल थे। विज ने यह भी दावा किया कि पानी के लिए बुजुर्ग यात्रियों ने कई बार कहा, लेकिन इन लोगों ने इसे अनदेखा कर दिया क्योंकि वे अपनी बातचीत में मशगूल थे। उन्होंने आगे बताया कि क्रू के सदस्य देरी से दोपहर 2:40 बजे के करीब पहुँचे और प्लेन के दरवाजे बंद हो गए।

हालाँकि, प्लेन कुछ देर तक वहीं रहा। इस वजह से यात्रियों ने पूछताछ शुरू की और क्रू मेंबर्स के साथ बहस भी हुई। दोपहर 3.20 बजे को-पायलट देरी की वजह में बताने के लिए कॉकपिट से बाहर आए। इसी दौरान उन पर हमला हुआ।

विज ने कहा कि हिंसा अस्वीकार्य है, लेकिन इंडिगो के कुप्रबंधन, गैरपेशेवर रवैये और 185 पैसेंजर्स के घंटों तक बगैर भोजन के फँसे रहने के बारे में क्या? उन्होंने कहा कि उन्हें शाम 4:00 बजे के बाद भोजन मुहैया कराया गया था। वहीं को-पायलट पर हमला करने वाले सतीश कटारिया को सुरक्षाकर्मी ने तुरंत मौके पर पहुँच पकड़ लिया। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। कटारिया को दिल्ली पुलिस स्टेशन ले जाया गया, जहाँ से बाद में उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया।

उनके खिलाफ IPC की धारा 323 (जानबूझकर चोट पहुँचाने के लिए सजा), 341 (गलत तरीके से रोकने के लिए सजा) और 290 (सार्वजनिक उपद्रव पैदा करने के लिए सजा) और विमान नियमों की धारा 22 के तहत केस दर्ज किया गया है और जाँच शुरू कर दी गई है।

घटना के बाद इस तरह के हंगामे से बचने के लिए एहतियाती कदम के तौर पर नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने नई गाइडलाइन्स जारी की। उन्होंने एयरलाइंस कंपनियों से कहा कि उड़ानों में देरी पर यात्रियों के अपडेट देते रहो या तो फिर फ्लाइट को कैंसल कर दो। हमले का जिक्र करते हुए इंडिगो ने आंतरिक कमेटी के साथ चर्चा के बाद एक बयान जारी करते हुए कटारिया का नाम नो फ्लाई लिस्ट श्रेणी में शामिल करने का प्रस्ताव दिया है।

गिड़गिड़ाता रहा युवक, निहंग ने बेअदबी के शक में मार दिया, पंजाब पुलिस ने दर्ज किया गैर इरादतन हत्या का मामला

पंजाब के फगवाड़ा में स्थित एक गुरुद्वारे में निहंग सिख द्वारा बेअदबी के शक पर एक युवक की हत्या करने के मामले में नए खुलासे हुए हैं। ये जानकारी सामने आई है कि पंजाब पुलिस ने उस निहंग पर हत्या की जगह गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया है। मृतक के मारे जाने से पहले का एक वीडियो भी सामने आया है।

दरअसल, 16 जनवरी 2024 को फगवाड़ा के चौड़ा खूह गुरुद्वारा में एक युवक की हत्या एक निहंग सिख ने कर दी थी। निहंग सिख का कहना था कि उसने यह हत्या इसलिए की, क्योंकि उसे शक था कि यह युवक गुरुद्वारे में बेअदबी करने आया था। हत्या से पहले युवक की वीडियो भी बनाई गई थी।

निहंग सिख का नाम रमनदीप सिंह मंगूमठ है। रमनदीप सिंह के ऊपर पहले से ही कई मामले दर्ज हैं। उसके ऊपर एक सप्ताह पहले ही एक महिला से मारपीट करने का मामला दर्ज किया गया था। इससे पहले उसके ऊपर अमृतसर में एक अन्य निहंग सिख से लड़ने के आरोप में मामला दर्ज हुआ था।

कपूरथला जिले के शहर फगवाड़ा में युवक की हत्या करने वाले रमनदीप सिंह को पुलिस ने बड़ी मशक्कत के बाद गिरफ्तार किया था। सिख संगठनों की माँग मानते हुए अब पुलिस ने हत्या करने वाले निहंग पर ‘गैर इरादतन हत्या’ का मामला दर्ज किया है। उस पर धारा 304 लगाई गई है ना कि 302।

घटना के विषय में यह जानकारी सामने आई है कि मृतक युवक 16 जनवरी 2024 की रात 10:30 बजे गुरुद्वारे में आया था और बाथरूम उपयोग करने जा रहा था। हालाँकि, वह जब बहुत देर तक बाथरूम के बाहर खड़ा रहा तो गुरुद्वारे के ग्रंथी ने उसे पकड़ लिया और एक कमरे में बंद कर दिया।

कमरे में उससे पूछताछ की गई। इसका वीडियो भी बनाया गया। वीडियो में युवक बताता है कि सुक्खी नाम के एक व्यक्ति ने उसे ₹2000-₹3000 देकर गुरुद्वारे में बेअदबी करने भेजा था। उसने बताया कि सुक्खी ने उसे यहाँ गालियाँ लिखने को कहा था। वह इस बीच यह भी कहता है कि उसे पैसा देकर भेजा जरूर गया था, लेकिन उसने कोई बेअदबी नहीं की।

इस दौरान युवक यह कहता रहा है कि वह एक मेहनतकश आदमी है और उसने कोई भी बेअदबी नहीं की। बताया गया कि युवक को बंद करके एक पदाधिकारी पुलिस को सूचना देने गए थे। इसी बीच रमनदीप सिंह ने उसकी बेअदबी के नाम पर किसी धारदार हथियार से हत्या कर दी। हालाँकि, पुलिस ने कहा है कि उसे गुरुद्वारे में बेअदबी के कोई भी निशान नहीं मिले हैं।

गुरुद्वारे के पदाधिकारियों ने दावा किया कि युवक ने निहंग सिख पर पहले हमले की कोशिश की थी। इसी कारण से खुद को बचाने के लिए निहंग ने हत्या की। हालाँकि, युवक को मारने से पहले निहंग ने कमरा बंद कर लिया था। पुलिस का कहना है कि यदि आगे की जाँच में यह सामने आता है कि निहंग ने जानबूझकर हत्या की है तो उस पर हत्या का मामला दर्ज करेंगे।

जिस बिहार पर ₹2.90 लाख करोड़ का कर्ज, बजट ₹2.6 लाख करोड़… वहाँ की नीतीश सरकार ने किया 90 लाख परिवारों को ₹2-2 लाख देने का वादा

बिहार में राजद और जदयू के गठबंधन वाली सरकार ने निर्णय लिया है कि वह राज्य के 94 लाख गरीब परिवारों को ₹2-2 लाख की आर्थिक सहायता देंगे। इस फैसले को 16 जनवरी, 2024 को हुई कैबिनेट बैठक में सहमति दे दी गई। इस योजना के लिए अभी ₹1250 करोड़ की स्वीकृति दी गई है।

नीतीश सरकार यह लाभ हाल ही में संपन्न हुई जातिगत जनगणना के आँकड़ों के आधार पर देगी। बिहार सरकार की जातिगत जनगणना में राज्य में 94 लाख 33 हजार परिवार ऐसे पाए गए थे जो गरीब की श्रेणी में आते थे। बिहार सरकार ने ऐसे परिवारों को गरीब का दर्जा दिया है जिनकी मासिक आय ₹6000 से कम है।

नीतीश सरकार का कहना है कि वह अगले पाँच वर्षों में इन 94 लाख परिवारों के एक सदस्य को अपना कोई छोटा उद्यम करने के लिए ₹2 लाख की आर्थिक सहायता प्रदान करेगी। बिहार सरकार ने इसे ‘बिहार लघु उद्यमी योजना’ का नाम दिया है। यह धनराशि गरीब परिवारों को तीन किश्तों में दी जाएगी।

योजना के क्रियान्वन के लिए बिहार सरकार ने वित्त वर्ष 2023-24 में ₹250 करोड़ और वित्त वर्ष 2024-25 में ₹1000 करोड़ देने की घोषणा भी कर दी है। नीतीश सरकार का यह कदम लोकसभा चुनावों से पहले आया है और इसे वोटरों को लुभाने की तरकीब माना जा रहा है।

हालाँकि, इस योजना के ऊपर प्रश्न भी खड़े हो रहे हैं। बिहार सरकार ने हालिया जनगणना के हिसाब से ही बताया था कि उनके राज्य में लगभग 2.7 करोड़ परिवार रहते हैं। इसमें से 94 लाख यानी लगभग एक तिहाई ऐसे हैं जो कि गरीब की श्रेणी में आते हैं।

इन सभी परिवारों को यदि ₹2 लाख की सहायता दी जाएगी तो यह धनराशि ₹1.88 लाख करोड़ बनेगी जो कि एक बड़ी संख्या है। प्रश्न उठ रहे हैं कि बिहार सरकार यह धनराशि कहाँ से जुटाएगी।

बिहार सरकार ने यह योजना अगले पाँच वर्षों में पूरी करने की बात कही है। यदि बिहार सरकार सच में पाँच वर्षो में यह योजना पूरी करने का लक्ष्य रखती है तो भी यह स्कीम जमीन पर उतरने से दूर दिखाई पड़ती है। पाँच वर्षों में योजना पूरी करने के लिए बिहार सरकार को हर वर्ष लगभग ₹37000 करोड़ का आवंटन करना पड़ेगा। इस धनराशि का इंतजाम भी बिहार के लिए करना मुश्किल है।

बिहार सरकार का कुल बजट वित्त वर्ष 2023-24 में ₹2.62 लाख करोड़ था। ऐसे में ₹37,000 करोड़ आवंटित करने के लिए बजट में कम से कम 15% की बढ़ोतरी करनी पड़ेगी। बिहार को अपने यहाँ कर वसूली से इतना पैसे मिलता नहीं है और कर्ज से भी यह पैसा जुटाया नहीं जा सकता।

संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, बिहार पर पहले से ही लगभग ₹2.90 लाख करोड़ का कर्ज है। यह बिहार की कुल जीडीपी का लगभग 38% है। कर्ज लेने के लिए लागू होने वाले नियमों को देखा जाए तो बिहार का कर्ज पहले ही सीमा से अधिक है। ऐसे में और कर्ज बिहार सरकार कैसे ले सकती है।

इन सभी परिस्थितयों को देखते हुए, यह योजना भले ही कागजों और भाषणों में कुछ दिन चल जाए लेकिन आर्थिक रूप से देखा जाए तो लगभग 95 लाख परिवारों को ₹2 लाख देना काफी मुश्किल टास्क मालूम पड़ता है। ऐसे में बिहार के मुख्यमंत्री इस योजना का लक्ष्य वोट बटोरना ही लग रहा है ना कि गरीबी हटाना।

तीस्ता सीतलवाड़ की NGO को पैसा देता था मणिशंकर अय्यर की बेटी का थिंक टैंक, विदेशी फंडिंग में भी गड़बड़ी: FCRA लाइसेंस कैंसिल

केंद्र सरकार ने कॉन्ग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर की बेटी यामिनी पर बड़ी कार्रवाई की है। गृह मंत्रालय ने नियमों की अवहेलना करने के कारण यामिनी अय्यर के नेतृत्व में चलने वाले एक थिंक टैंक का फॉरेन कॉन्ट्रिब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (FCRA) रद्द कर दिया है। बता दें कि यामिनी सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च (CPR) नाम से एक थिंक टैंक संचालित करती हैं।

FCRA लाइसेंस निलंबित होने के बाद CPR अब विदेशों से फंड नहीं ले सकेगा। विदेशों से धन प्राप्त करने के लिए सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं को FCRA पंजीकरण कराना जरूरी होता है। सरकार को पता चला कि यह संस्था अनुदान हासिल करने में नियमों की लगातार अवहेलना कर रही है। CPR केंद्रीय एजेंसियों की रडार पर लंबे समय से रहा है।

यामिनी अय्यर सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च की अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) हैं। दरअसल, CPR का कार्यालय दिल्ली में है, जो 21वीं सदी की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए पॉलिसी से जुड़े मुद्दों पर कथित शोध का काम करता है। CPR को घरेलू तथा कई अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से भारी अनुदान मिलता है।

सितंबर 2022 में आयकर विभाग ने भी विदेशी फंडिंग को लेकर CPR का सर्वे किया था। मार्च 2023 में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने CPR के FCRA लाइसेंस को 6 महीने के लिए निलंबित कर दिया था। इतना ही नहीं, भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) सहित कई एजेंसियों द्वारा इस थिंक टैंक की नियमित तौर पर जाँच और ऑडिट की गई। इसके बाद आखिरकार संस्था के लाइसेंस को रद्द करने का निर्णय लिया गया।

मंत्रालय के मुताबिक, CPR को फोर्ड फाउंडेशन सहित कई विदेशी संस्थानों से फंडिंग मिली थी। इतना ही नहीं, गुजरात दंगे को लेकर देश में कई तरह की प्रोपेगेंडा फैलाने वाली तीस्ता सीतलवाड़ की एनजीओ को भी यामिनी अय्यर के थिंक टैंक CPR ने चंदा दिया था। गृह मंत्रालय ने साल 2016 में तीस्ता के एनजीओ सबरंग ट्रस्ट का FCRA लाइसेंस रद्द कर दिया था।

दरअसल, समाज सेवा एवं शोध आदि के नाम पर चलने वाले एनजीओ कई तरह की गड़बड़ी और भारत विरोधी रूख के कारण चर्चा में रहे हैं। इनमें पर कई संस्थानों पर सरकार ने कार्रवाई भी की है। इनमें ऑक्सफैम इंडिया, न्यूज वेबसाइट न्यूजक्लिक, बेंगलुरु स्थित मीडिया फाउंडेशन सहित कई संस्थान विदेशी फंडिंग को लेकर जाँच के दायरे में हैं। ऑक्सफैम इंडिया की FCRA लाइसेंस भी रद्द हो चुकी है।

सिर में गोली मारी, जेल में ठूँसा, टॉर्चर किया… 32 साल मौत से जूझने के बाद चल बसे कारसेवक जयराज यादव: बेटियाँ बोलीं – राम मंदिर पिता को सच्ची श्रद्धांजलि

अयोध्या में सोमवार (22 जनवरी, 2024) को निर्माणाधीन राम मंदिर में रामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा होनी है। रामजन्मभूमि के लिए हुए 5 सदी तक संघर्ष के बाद आए इस अवसर पर देश और दुनिया भर के हिन्दू दीपावली जैसा पर्व मनाने की तैयारी में हैं। ऐसे में हिन्दू समाज उन तमाम बलिदानी रामभक्तों को याद कर रहा है जिन्होंने मुगल काल से मुलायम काल के बीच राम के नाम पर खुद को बलिदान कर दिया। उन तमाम रामभक्तों में से एक थे जयराज यादव।

जयराज यादव को 22 अक्टूबर, 1990 में बस्ती जिले के गाँव सांडपुर में गोली लगी थी। वो कारसेवकों की तलाश में गाँव में घुस कर अत्याचार कर रही पुलिस टीम का विरोध कर रहे थे। तब से जयराज यादव लगातार अस्वस्थ चल रहे थे। आखिरकार मई 2023 में उन्होंने प्राण त्याग दिए। ऑपइंडिया ने जयराज यादव के घर जाकर उनके परिजनों के वर्तमान हालात की जानकारी जुटाई।

तंगहाली में गुजारा कर रहा परिवार

बलिदानी जयराज यादव मूलतः बस्ती जिले के गाँव हेंगापुर के रहने वाले हैं। अभी उनके परिवार में लगभग 50 वर्षीया विधवा राधा यादव के अलावा 2 बेटियों खुशबू और चंचल के साथ 1 बेटा दुर्गेश है। जयराज के सभी संतानों की उम्र 18 से 24 साल के बीच है। जब ऑपइंडिया की टीम उनके घर पहुँची तब राधा और दुर्गेश कहीं बाहर गए थे। घर पर दोनों बेटियाँ मौजूद मिलीं। जयराज का घर बेहद गरीबी की हालत में गुजारा कर रहा है।

घर के कई हिस्सों में प्लास्टर भी नहीं लगा है। फर्श की जगह ईंट के कंकड़ बिछे मिले। रसोई का सामान भी अस्त-व्यस्त था। हालात ये थे कि बाहर से आए आगंतुकों के लिए उनके पास सिर्फ पानी भर था जो एक टूटे ग्लास में दिया गया था।

सिर में मारी गई थी गोली

दिवंगत जयराज की छोटी बेटी खुशबू यादव ने हमें बताया कि उनकी माँ ने बचपन में ही उन्हें रामजन्मभूमि को लेकर उनके पिता द्वारा किए गए कार्यों की सच्ची घटना सुनाई थी। तब गाँव सांडपुर में देश के अलग-अलग हिस्सों से कारसेवक आ कर रुकते थे। यहाँ ग्रामीण उन्हें खाना-पीना देने के बाद नाव से नदी पार करवा कर अयोध्या पहुँचाते थे। इस बीच किसी ने पुलिस को मुखबिरी कर दी। 22 अक्टूबर, 1990 को उनके गाँव में पुलिस ने सुबह-सुबह दबिश मार दी।

जब कारसेवक न मिलने पर महिलाओं और बच्चों को तंग किया जाने लगा तब ग्रामीणों ने पुलिस कार्रवाई का विरोध शुरू कर दिया। इस विरोध में जयराज यादव भी शामिल थे। पुलिस बल को अपना यह विरोध नागवार गुजरा। पैरामिलिट्री के साथ पुलिस बल ने तब गोलियाँ बरसानी शुरू कर दी।

अपने पापा को याद कर के खुशबू यादव रो पड़ीं। खुद को सँभालते हुए उन्होंने आगे बताया कि पुलिस द्वारा चलाई गई गोली का छर्रा उनके पापा जयराज यादव के सिर में घुस गया। गोली लगते ही जयराज यादव घायल हो कर गिर पड़े। पुलिस टीम उन्हें उठा कर अपने साथ ले जाने के लिए बढ़ी। इस बीच कुछ ग्रामीणों ने घायल जयराज यादव को कंधे पर लादा और गोलीबारी से दूर ले जाने की कोशिश करने लगे। हालाँकि, पुलिस ने दौड़ा कर जयराज यादव को ग्रामीणों से छीन लिया।

घायल अवस्था में ही बिना बेहतर इलाज के जयराज यादव को जेल भेज दिया गया। परिजनों के मुताबिक, यहीं से सिर में घुसा गोली का छर्रा जयराज यादव के मस्तिष्क में मवाद बनाने लगा था। ग्रामीणों का यह भी दावा है कि घायल होने के बावजूद जयराज को थाने में बेरहमी से टॉर्चर किया गया था।

गोली भी मारी और मुल्जिम भी बना दिया

जयराज यादव पर मुलायम सिंह यादव की सरकार उस समय दोहरी मार तब पड़ी जब उन्हें गाँव में पुलिस द्वारा किए गए उपद्रव में मुल्जिम बना दिया गया। यह मुकदमा तत्कालीन थाना प्रभारी दुबौलिया की तहरीर पर 23 अक्टूबर, 1990 को दर्ज हुआ था। लगभग हर जाति और वर्ग के कई अन्य ग्रामीणों के साथ जयराज यादव पर भी IPC की धारा 147, 149, 307, 332, 333, 353 और 336 के साथ 7 क्रिमिनल एक्ट लगाया गया था।

पहले से ही बीमार हालत में पड़े जयराज यादव को जब इसकी जानकारी हुई थी तब उनकी तबीयत और बिगड़ गई थी। हालाँकि, उनके साथ गिरफ्तार हुए अन्य ग्रामीणों द्वारा दी गई हिम्मत के बाद वो कुछ हद तक सामान्य हुए थे।

1990 में जयराज यादव पर दर्ज FIR में उन्हें बताया गया मुल्जिम

घायल अवस्था में ही जयराज यादव को लगभग 1 माह तक जेल में रखा गया था। घर वालों ने ग्रामीणों के सहयोग से जैसे-तैसे उनकी जमानत करवाई। बेटे के ऊपर हुए अत्याचार से दुखी मुन्नीलाल यादव भी कुछ दिनों बाद कई बीमारियों से घिर गए। आखिरकार लगभग 20 साल पहले जयराज यादव के पिता मुन्नीलाल ने दम तोड़ दिया।

32 साल तक हर दिन लड़ी मौत से जंग

जयराज की बड़ी बेटी चंचल यादव ने हमें बताया कि सन 1990 में जब उनके पिता को गोली लगी थी तब से जयराज का इलाज लगातार चल रहा था। उन्होंने बताया कि गोली के कुछ छर्रे सिर में फँसे रह गए थे। इसी के चलते खोपड़ी के एक हिस्से में मवाद बन गई थी। बहुत इलाज के बाद भी जयराज पूरी तरह से कभी नहीं ठीक हो पाए। वो लगभग 32 साल जीवित रहे लेकिन कभी सामान्य रूप में नहीं आ सके।जयराज का इलाज बस्ती से ले कर लखनऊ तक हुआ लेकिन सिर में लगी गोली ने कभी उन्हें सामान्य नहीं होने दिया।

जयराज की छोटी बेटी खुशबू यादव ने हमें बताया, “पापा का लगभग हर दिन सिर जोर से दर्द करने लगता था। वो दर्द से चीखने लगते थे। कई बार तो बेहोश भी हो जाते थे। इसी वजह से उन्हें कहीं अकेले नहीं भेजा जाता था। होश में आने के बाद वो थोड़े समय नॉर्मल रहते थे लेकिन बाद में फिर अचानक दर्द उठने लगता था।” खशबू के मुताबिक, तमाम दवाएँ उनके पिता के इलाज में बेअसर रहती थीं। आखिरकार लम्बे समय तक मौत से लड़ते हुए जयराज यादव का 29 मई, 2023 को देहांत हो गया।

दिवंगत पिता को याद कर के आज भी रोने लगती हैं चंचल और खुशबू यादव

इलाज और मुकदमे में बिक गए गहने और खेत

दिवंगत जयराज यादव की छोटी बेटी खुशबू ने हमें बताया कि इस समय उनके परिवार की माली हालत बद से भी बदतर है। घर में खाने तक के लाले पड़े हैं। लगभग 30 साल तक चले जयराज के इलाज और चल रहे मुकदमे की वजह से परिवार के गहने और खेत भी बिक गए। इसके अलावा लाखों रुपए का कर्ज अलग से सिर पर चढ़ा है। कर्जदार आए दिन घर आते हैं और पैसे माँगते हैं। थोड़े बहुत खेत और एक घर बचा है जयराज यादव के आश्रितों के पास। परिवार का कहना है कि अगर उसे भी बेचने कि नौबत आई तो उन्हें सड़क पर सोना पड़ेगा।

जयराज यादव के घर के अंदर का दृश्य

बनना चाहती थीं डॉक्टर, पर छोड़ दी पढ़ाई

जयराज यादव की तीनों संतानों ने पढ़ाई छोड़ दी है। बेटा दुर्गेश यादव कहीं से छोटे-मोटे काम कर के परिवार की माली हालात सुधारने का प्रयास कर रहा है। वहीं दोनों बेटियों चंचल और खुशबू ने भी पैसों की तंगी से स्कूल जाना छोड़ दिया है। खुशबू यादव ने हमें बताया कि वो बचपन से ही डॉक्टर बनने का सपना पाल कर रखीं थीं लेकिन हालातों ने उन्हें स्कूल से ही दूर कर दिया। खुशबू ने बताया कि अब उनकी पहली प्राथमिकता माँ का हाथ बँटाना है। हालाँकि किसी मदद के मिलने के बाद दिवंगत जयराज यादव की बेटियाँ आज भी पढ़ कर अपने सपनों को पूरा करने के लिए मानसिक तौर पर तैयार हैं।

दिवंगत जयराज यादव का परिवार आज ही भगवान राम का उपासक है। अयोध्या में बन रहे राम मंदिर को ले कर यह परिवार काफी खुश है। खुशबू और चंचल यादव ने कहा कि रामजन्मभूमि के लिए उनके पिता ने बलिदान दिया था। आज मंदिर निर्माण को जयराज यादव की बेटियाँ अपने पिता को सच्ची श्रद्धांजलि मानती हैं।

हवाई जहाज के सीट पर नहीं… कमोड पर बैठ किया 1 घंटे 40 मिनट सफर: SpiceJet के टॉयलेट का नहीं खुला गेट

मुंबई-बेंगलुरु स्पाइसजेट फ्लाइट में एक पैसेंजर को हवाई जहाज में टॉयलेट जाना भारी पड़ गया। यात्री को करीबन 1 घंटा 40 मिनट का सफर उसी टॉयलेट में बैठकर करना पड़ा। घटना मंगलवार (16 जनवरी, 2024) की है जब एक यात्री प्लेन के टॉयलेट में गया और उसका दरवाजा बंद किया।

बताया जा रहा है कि गेट बंद करते ही लॉक में कुछ खराबी आ गई जिसकी वजह से गेट ही नहीं खुल पाया। यात्री ने अंदर से केबिन क्रू को परेशान होकर आवाज दी। जब केबिन क्रू ने इसे सुना तो उन्हें टॉयलेट में यात्री फँसे होने के बारे में पता चला। क्रू की बेतहाशा कोशिशों के बाद भी टॉयलेट का दरवाजा नहीं खुला।

फ्लाइट के केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे (केआईए) पर लैंड होने के बाद आगे की कार्रवाई की गई। वहाँ इंजीनियरों की दो घंटे की मशक्कत के बाद टॉयलेट का दरवाजा तोड़ा गया। तब कहीं जाकर पैसेंजर की जान में जान आई। सदमे में आए पैसेंजर को तुरंत प्राथमिक उपचार के लिए ले जाया गया। फिलहाल पैसेंजर की पहचान जाहिर नहीं हो पाई है।

स्पाइसजेट ने भी इस घटना को लेकर कोई बयान जारी नहीं किया है। जानकारी के मुताबिक, यह वाकया फ्लाइट SG-268 में पेश आया। ये फ्लाइट मंगलवार सुबह 2 बजे मुंबई हवाई अड्डे से रवाना हुई थी। हालाँकि फ्लाइट का टेक ऑफ टाइम सोमवार 15 जनवरी, 2024 की रात 10.55 बजे का था।

केआईए ग्राउंड स्टाफ के एक सदस्य के मुताबिक, “यह पता था कि 14डी सीट पर बैठा यात्री प्लेन के टेक ऑफ करने और सीटबेल्ट साइन बंद होने के तुरंत बाद टॉयलेट गया था। दुख की बात है कि टॉयलेट का दरवाजा खराब होने की वजह से वह अंदर फँस गया।”

पैसेंजर की टॉयलेट से आ रही चिल्लाने की आवाजों ने क्रू का ध्यान खींचा। इसके बाद उन्होंने बाहर से दरवाजा खोलने की पुरजोर कोशिश की। जब क्रू को ये एहसास हो गया कि उनसे दरवाजा नहीं खुल पाएगा तो एयर होस्टेस ने कागज पर एक नोट लिख टॉयलेट के दरवाजे से इसे अंदर खिसका दिया।

नोट में लिखा था, “सर, हमने दरवाजा खोलने की पूरी कोशिश की, लेकिन हम नहीं कर सके। घबराओ नहीं। हम कुछ ही मिनटों में उतर रहे हैं, इसलिए कृपया कमोड का ढक्कन बंद कर दें और उस पर बैठ जाएँ और खुद को सुरक्षित कर लें। जैसे ही मेन दरवाजा खुलेगा, इंजीनियर आ जाएगा।”

फ्लाइट मंगलवार सुबह 3.42 बजे केआईए एयरपोर्ट पर लैंड हुई। फिर इसमें इंजीनियर चढ़े। उन्होंने दरवाज़ा तोड़ा और दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद पैसेंजर को बचाया। एक अधिकारी ने कहा, “यात्री क्लॉस्ट्रोफोबिया की वजह से पूरी तरह से सदमे में था।”

अयोध्या में बनने वाली मस्जिद में लगाएँगे मुलायम की खजूर खाते हुए मूर्ति, दरगाहों के पानी से करेंगे पाक: राष्ट्रीय हिन्दू दल

वाराणसी के राष्ट्रीय हिन्दू दल ने अयोध्या के धन्नीपुर में बन रही मस्जिद में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की मूर्ति लगाने का ऐलान किया है। दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने मस्जिद में मुलायम की मूर्ति स्थापित किए जाने के समय अखिलेश यादव से मौजूद रहने को लेकर पत्र भेजा है।

रोशन पाण्डेय ने अखिलेश यादव को भेजे गए पत्र में लिखा है कि उनके ‘जन्नती पिता मुलायम सिंह’ जिन्दगी भर मुस्लिम समुदाय के लिए संघर्ष करते रहे। उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर ना बने, इसके लिए पूरे जीवन संघर्ष किया और कारसेवकों की लाशें बिछा दी। आगे रोशन पाण्डेय ने कहा है कि राम मंदिर में भले ही मुलायम सिंह यादव का कोई योगदान ना हो लेकिन अयोध्या के धन्नीपुर में कोर्ट के निर्णय से बन रही मस्जिद के निर्माण में उनका योगदान जरूर है।

रोशन पाण्डेय ने इसी योगदान के चलते उनको श्रद्धांजलि देने के लिए उनकी एक मूर्ति इस मस्जिद में स्थापित करने की बात कही है। रोशन पाण्डेय ने कहा है कि इस मूर्ति का पत्थर किछौछा शरीफ दरगाह से मँगाया जाएगा। इसके बाद इस पत्थर को अजमेर शरीफ, हाजीअली, दारूल उलूम देवबंद और कलियर शरीफ जैसी दरगाहों के पानी से पाक किया जाएगा।

रोशन पाण्डेय ने कहा है कि इस दौरान वह उन मुस्लिम मौलानाओं को भी आमंत्रित करेंगे, जिनके साथ मुलायम सिंह यादव रोजा इफ्तारी करते थे। साथ ही रोशन पाण्डेय ने पूछा है कि यदि अखिलेश यादव चाहें तो दिल्ली की जामा मस्जिद से एक नमाजी टोपी मँगा कर भी मूर्ति के ऊपर रख दी जाएगी। पाण्डेय ने बताया है कि मुलायम सिंह की यह मूर्ति वैसी होगी, जैसे वह मुस्लिमों के साथ इफ्तारी में खजूर खाते हुए दिखते थे।

रोशन पाण्डेय ने कहा है कि मस्जिद में इस मूर्ति को लगाने का कार्यक्रम अखिलेश यादव के दिए हुए समय पर ही किया जाएगा। उन्होंने यह भी अपील की है कि इस कार्यक्रम में फिलिस्तीन, बांग्लादेश, पाकिस्तान और फिलिस्तीन-गाजा जैसे मुस्लिम देशों से मुस्लिमों को बुलाकर जय समाजवाद का नारा लगाया जाए।

रोशन पाण्डेय ने साथ ही में आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) और जमीयत उलेमा उल हिन्द से मस्जिद के प्रांगण में मुलायम सिंह की मूर्ति लगाने की अनुमति माँगी है। उन्होंने कहा है कि वैसे तो वो खुद ही सारा खर्चा उठाएँगे लेकिन कोई कुछ सहयोग दें, तो भी अच्छा रहेगा।

मस्जिद में मूर्ति लगाने पर उन्होंने कहा है कि हो सकता है कि AIMPLB और जमीयत को इससे ऐतराज हो क्योंकि इस्लाम इसकी इजाजत नहीं देता। लेकिन इसका जवाबी तर्क भी खुद ही दे डाला। रोशन पाण्डेय ने तर्क दिया है कि मस्जिद में मुलायम सिंह की मूर्ति से कोई भी समस्या नहीं होनी चाहिए क्योंकि मुहम्मद अली जिन्नाह की तस्वीर AMU में लगी रहे, इसको लेकर काफी बवाल हुआ था। साथ ही उन्होंने कर्नाटक में टीपू सुल्तान की मूर्तियों का उदाहरण भी दिया। उन्होंने इन दोनों संगठनों से यह अपील भी की है कि वह इस मस्जिद का नाम ‘मुलायम मस्जिद’ रख दें।

जिस गाँव में पैदा हुए PM मोदी, वहाँ 2800 वर्ष पुरानी बस्ती: 8 साल खुदाई के बाद 1 लाख अवशेष बरामद: कार्बन डेटिंग से होंगे और खुलासे

गुजरात के वडनगर में ईसा से 800 साल पहले के मानवों के रहने के सबूत मिले हैं। वडनगर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का गृहनगर है। सामने आया है कि यहाँ आज से 2800 साल पहले भी मानव रहा करते थे। यह शोध भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI), जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU), फिजिकल रिसर्च लेबोरेट्री (PRL) ने किया है। इसकी कुछ तस्वीरें भी सामने आई हैं।

शोधकर्ताओ ने बताया है कि यहाँ की बसावट में सात सांस्कृतिक चरण होने की जानकारी मिली है। डॉ आनिन्द्य चक्रबर्ती ने मीडिया को बताया कि यहाँ 2016 से खुदाई चल रही है, अब तक उनकी टीम 20 मीटर की खुदाई कर चुकी है। चक्रबर्ती IIT खड़गपुर में भूगर्भ विज्ञान के प्रोफ़ेसर हैं।

वडनगर में मिली इस मानव बस्ती के विषय में एक विज्ञान पत्रिका में जानकारी दी गई है। शोधकर्ताओ ने बताया है कि यहाँ मौर्यकाल, इंडो-ग्रीक, शक-क्षत्रप, हिन्दू सोलंकी, सुल्तानी-मुग़ल और गायकवाड-ब्रिटिश कल के साथ ही आज के समय तक मानव रह रहे हैं। यहाँ एक बुद्ध मठ भी मिला है। शोधकर्ताओं ने बताया है कि इसी खुदाई के साथ ही वडनगर भारत की सबसे पुरानी बसावट बन गई है जो आज भी उसी तरह बसी हुई है। यहाँ से सोना, चाँदी, लोहा और ताम्बे की वस्तुओं के भी अवशेष मिले हैं।

शोधकर्ताओं का यह भी कहना है कि यहाँ मिले अवशेषों की कार्बन डेटिंग से पता चला है कि यह 3400 वर्ष पुराने तक हो सकते हैं। अगर यह बात पूरी तरह से सिद्ध हो जाती है तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि भारत में बीते 5000 सालों से सभ्यता लगातार चली आ रही है।

शोधकर्ताओं का कहना है कि यह बात सिद्ध हो जाने से कथित ‘डार्क एज‘ का दावा भी तोड़ा जा सकेगा। भारतीय इतिहास में सिन्धु घाटी सभ्यता के पतन और महाजनपद काल के उदय के बीच को डार्क एज बताया जाता है। इस काल में भारतीय भूभाग में क्या हुआ इसकी जानकारी काफी कम मिलती है।

शोधकर्ताओं ने बताया है कि भारत पिछले 2200 वर्षों में अनेकों बाह्य आक्रमण झेलता आया है। वडनगर में हुई खुदाई में इसके भी सबूत मिलते हैं। बताया गया है कि यहाँ पर 1 लाख से अधिक अवशेष प्राप्त हुए हैं और 30 से अधिक स्थानों पर खुदाई हुई है।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जन्म वडनगर में ही हुआ था। यहाँ वह बचपन में अपने पिता के साथ स्टेशन पर चाय बेचा करते थे। वडनगर प्रधानमंत्री के बचपन के समय काफी छोटा क़स्बा हुआ करता था, हालाँकि अब यह एक शहर बन गया है।

महुआ मोइत्रा तुरंत खाली करो सरकारी बंगला: मिला बेदखली नोटिस, ऐशो-आराम से रहने के लिए इसी बंगले को बिजनेसमैन से पैसे लेकर चमकाया था

तृणमूल कॉन्ग्रेस नेता महुआ मोइत्रा का कैश फॉर क्वेरी केस में सांसदी जाने के बाद भी दिल्ली के सरकारी बंगले का मोह छुटाए नहीं छूट रहा है। अब थक हारकर संपदा निदेशालय (डायरेक्टरेट ऑफ एस्टेट्स) ने मंगलवार (16 जनवरी,2024) को उन्हें सरकारी बंगले से बेदखल करने का नोटिस जारी किया।

केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय से मिली जानकारी के मुताबिक, पूर्व टीएमसी एमपी महुआ मोइत्रा से सांसद के तौर पर उन्हें आवंटित हुए सरकारी बंगले को तुरंत खाली करने को कहा गया है। बंगले को जल्द खाली कराने के लिए एक टीम बुधवार (17 जनवरी 2024) को उनके सरकारी आवास पर भेजी जाएगी।

बताते चलें कि उन्हें 8 दिसंबर, 2023 को लोकसभा से निष्कासित कर दिया गया था। इसके बाद संसद की हाउसिंग कमिटी ने महुआ को एक महीने के अंदर 7 जनवरी 2024 तक बंगला खाली करने को कहा था।

बकायदा महुआ को 11 दिसंबर 2023 को केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय ने पत्र भेजकर इस आदेश से अवगत कराया था। इसके बाद 12 दिसंबर को उन्हें तीसरा नोटिस दिया गया, लेकिन इस आदेश को चुनौती देने के लिए वो 18 दिसंबर 2023 को दिल्ली हाई कोर्ट जा पहुँची थीं।

दिल्ली HC में डाली गई याचिका में महुआ ने कहा था, ”उन्हें (महुआ को) सरकारी घर खाली करने का आदेश वक्त से पहले दिया गया है, क्योंकि याचिकाकर्ता के निष्कासन की वैधता अभी देश के सुप्रीम कोर्ट के सामने लंबित है।”

दिल्ली हाई कोर्ट को दी गई याचिका में महुआ ने डायरेक्टरेट ऑफ एस्टेट्स के 11 दिसंबर के आदेश को रद्द करने का अनुरोध किया था। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा नहीं हो सकता तो कम से कम उन्हें उनके सरकारी आवास में वैकल्पिक तौर पर 2024 लोकसभा चुनाव के नतीजे आने तक रहने की मंजूरी दी जाए।

हाई कोर्ट को दी गई याचिका में टीएमसी नेता महुआ ने ये तक कह डाला, “मुझे 2019 के आम चुनावों में पश्चिम बंगाल के कृष्णानगर निर्वाचन क्षेत्र से चुनकर पहली बार लोकसभा भेजा गया था। टीएमसी ने उन्हें 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए भी वहाँ से अपना उम्मीदवार बनाया है।”

इस पर हाई कोर्ट ने उन्हें 4 जनवरी 2024 को सुनवाई का वक्त दिया था। महुआ की अर्जी पर सुनवाई के बाद जज ने बताया कि केंद्र सरकार की संपत्ति के लिए निदेशालय में आवेदन किया जाना चाहिए, कोर्ट इसमें कुछ नहीं कर सकता।

इसके बाद महुआ के वकील ने केस वापस ले लिया था। ये वही बंगला है, जिसके लिए मोइत्रा ने कहा था कि इसके हालत खराब होने पर इसे ठीक कराने के लिए वो दर्शन हीरानंदानी से संपर्क साधी थीं। बताते चलें कि दर्शन हीरानंदानी ने कहा था कि महुआ मोइत्रा ने अपने सरकारी आवास की मरम्मत के लिए भी उनसे पैसे लिए थे।

अयोध्या में राम = तंबू में रखी गुड़िया, राम मंदिर पवित्र नहीं: कॉन्ग्रेसी मंत्री ने उगला जहर, कहा – BJP चुनाव के लिए बना रही मंदिर, लोगों को दे रही धोखा

अयोध्या में भगवान राम के भव्य मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम शुरू हो चुका है। इसके बावजूद इंडी गठबंधन और कॉन्ग्रेस पार्टी के नेता भगवान राम को अपमानित करने का एक भी मौका नहीं छोड़ रहे। इसी क्रम में अब कर्नाटक की सिद्दारमैया सरकार में मंत्री और कॉन्ग्रेस का बड़ा क्षेत्रीय नेता केएन राजन्ना का भी नाम जुड़ गया है। केएन राजन्ना ने कहा है कि बीजेपी भगवान राम के नाम पर लोगों को धोखा दे रही है। उन्होंने कहा कि वो अयोध्या जा चुके हैं और वहाँ मस्जिद में 2 गुड़ियों को राम कहा जा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 16 जनवरी को बेंगलुरु में एक कार्यक्रम के दौरान सहकारिता मंत्री केएन राजन्ना ने कहा कि बीजेपी भगवान राम के नाम पर लोगों को धोखा दे रही है। उन्होंने अपने बयान में भगवान राम की तुलना ‘तंबू में रखी गुड़िया’ से कर दी।

राजन्ना ने दावा किया कि जब 1991 में बाबरी ढाँचा ढहाया गया था, तब वो अयोध्या गए था। उन्होंने कहा, “हिंदुओं ने तंबू में गुड़िया रखी और उसे राम मंदिर कह दिया।” राजन्ना ने अयोध्या के मंदिर को पवित्र मानने से इनकार करते हुए कहा कि अयोध्या से ज्यादा पवित्र राम मंदिर अन्य जगहों पर हैं।

राजन्ना ने कहा, “हमारे देश में हजारों साल पुराने ऐतिहासिक राम मंदिर हैं, जो ज्यादा पवित्र हैं। अब बीजेपी चुनाव के लिए मंदिर बना रही है। बीजेपी लोगों को धोखा दे रही है।”

राजन्ना ने आगे कहा, “जब बाबरी को गिराया गया, तो मैं वहाँ गया था। उन लोगों ने तंबू में दो गुड़िया रख दी और उन्हें राम कहना शुरू कर दिया। हम जब राम मंदिर जाते हैं, तो एक पवित्र अहसास होता है, लेकिन अयोध्या में मुझे कुछ महसूस नहीं हुआ। ये टॉकीज में रखी गुड़िया को देखने जैसा था।”

इस मामले में बीजेपी की नेता मालविका अविनाश ने कॉन्ग्रेस पर जोरदार हमला बोला। मालविका अविनाश ने कहा कि कॉन्ग्रेस राजनीतिक और मानसिक तौर पर दिवालिएपन की शिकार हो चुकी है।

बता दें कि इंडी गठबंधन के नेता लगातार राम मंदिर को लेकर विवादित बयान दे रहे हैं। कुछ समय पहले ही शिवसेना नेता संजय राउत ने दावा किया था कि राम लला के जन्मस्थान पर मंदिर नहीं बन रहा है, बल्कि मूलस्थान से 4 किलोमीटर दूर मंदिर का निर्माण कराया जा रहा है।