Home Blog Page 1238

मंदिर वहीं पर बन रहा, अयोध्या की तरह मथुरा-काशी की तारीख भी ‘तय’: CM योगी ने बताई प्रभु इच्छा, राहुल गाँधी को पढ़ाया इतिहास

राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मथुरा-काशी को लेकर अपना पक्ष साफ कर दिया है। उन्होंने बताया है कि अयोध्या को लेकर कहा गया था- रामलला हम आएँगे, मंदिर वहीं बनाएँगे, तो अब मंदिर वहीं पर बन रहा है। उन्होंने कहा कि जिस तरह अयोध्या के लिए कानून लड़ाई लड़ी गई वैसे ही मथुरा-काशी के लिए न्यायालय के सामने सबूत दिए जाएँगे, फिर जो फैसला होगा उसे माना जाएगा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ये सारी बातें आजतक को दिए इंटरव्यू में कहीं। यहाँ वह अयोध्या को एक नगरी न मानकर पूरे विश्व की राजधानी बताते दिखे। वहीं उन्होंने उद्धव ठाकरे गुट के संजय राउत के आरोपों का भी जवाब दिया जिसमें कहा जा रहा था कि राम मंदिर का गर्भगृह ठीक स्थान पर नहीं बना है। सीएम योगी ने राउत के सवालों पर कहा कि प्रभु राम का मंदिर ठीक उसी जगह पर बनाया है जहाँ उसे होना चाहिए था।

सीएम योगी बोले कि संजय राउत और उद्धव ठाकरे तो खुद इसके दर्शन कर चुके हैं। अगर उन्हें ऐसा कुछ लगा था तो उन्होंने पहले सुझाव क्यों नहीं दिया। अब अंगूर खट्टे हैं तो कोई भी बोल सकता है। सीएम योगी ने ये भी कहा कि हमारी पूरी लड़ाई वही थी- रामलला हम आएँगे, मंदिर वहीं बनाएँगे। अब मंदिर वहीं उसी जगह बन रहा है। वेदों में अयोध्या को सप्तपुरियों में से प्रथम पुरी के रूप में सम्मानित किया गया है, अयोध्या उसी रूप में सुसज्जित हो रही है।

उन्होंने अयोध्या में आए बदलाव की बात करते हुए कहा कि 10 साल पहले तक कोई सोचता भी नहीं था कि यहाँ फोर लेन सड़क बनेगी। मगर आज शहर के पास सुख सुविधाओं से लैस रेलवे स्टेशन है, जो कि एक समय में छोटी सी रेल लाइन हुआ करता था। यहाँ अयोध्या में इंटरनेशनल एयरपोर्ट भी बनकर तैयार है। सरयू नदीं पर पहले सरकारे गोलियाँ चलवाती थीं, अब यहाँ क्रूज चलते हैं।

मथुरा काशी पर जब सीएम से सवाल हुआ तो उन्होंने कहा, “ये विषय अभी न्यायालय में है। हमने रामलला के लिए 500 सालों तक संघर्ष किया। हमने मर्यादित ढंग से ही न्याय और सत्य की विजय प्राप्त करने के बाद ही रामलला का मंदिर बना रहे हैं। ऐसे ही हम इस मामले को भी न्यायालय के जरिए ही हल करेंगे। हम हर सबूत कोर्ट के सामने रखेंगे और अपनी लड़ाई लड़ेंगे।”

जब उनसे कृष्ण मंदिर की तारीख पूछी गई तो इस पर सीएम योगी ने कहा सब कुछ कानूनी तरीके से किया जाएगा। प्रभु की तारीख हम कैसे तय कर सकते हैं। जब प्रभु की इच्छा होगी तब ये सब हो जाएगा।

राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस द्वारा प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम को पॉलिटिकल इवेंट बताने पर सीएम योगी ने कहा कि अगर ये पॉलिटिकल इवेंट है तो कॉन्ग्रेस को ऐसा करने से किसने रोका था। 1948 से एक लंबे समय तक देश में सरकारें चलाई हैं। उन्होंने ऐसा कोई इवेंट क्यों नहीं किया। राहुल गाँधी तो 2004 से सांसद हैं और काफी समय से सरकार पीछे से चलाते आए हैं, उन्हें ऐसा इवेंट करने से किसने मना किया था। सीएम योगी ने कहा कि राहुल गाँधी हमेशा बस भारत के संविधान का अपमान करने वाले इवेंट करते आए हैं।

पाकिस्तान के मस्जिद पर ईरान ने दागी मिसाइल, आतंकी संगठन के ठिकाने किए तबाह: 2 बच्चों की मौत, 3 बच्चियाँ घायल

ईरान ने पाकिस्तान के भीतर घुस कर एक आतंकी समूह पर हमला किया है। यह हमला 16-17 जनवरी, 2024 की रात को ईरान ने बलूचिस्तान के एक क्षेत्र में किया। ईरान ने पाकिस्तान के भीतर यह हमला जैश-अल-अदल नाम के एक इस्लामी आतंकी समूह के ठिकानों को निशाना बनाने के लिए किया।

ईरान की अर्ध सरकारी न्यूज एजेंसी तस्नीम ने इस हमले की जानकारी दी है। तस्नीम ने बताया है कि ईरानी सेना ने ड्रोन और मिसाइल हमले के जरिए बलूचिस्तान प्रांत में कोह-सब्ज इलाके में यह हमला किया जिसमें जैश-अल- अदल के आतंकी ठिकाने तबाह किए गए।

ईरान का कहना है कि बलूचिस्तान का यह इलाका आतंकियों के लिए पनाहगाह का काम कर रहा है। पाकिस्तानी मीडिया ने स्थानीय सूत्रों के हवाले से बताया है कि ईरान का यह हमला बलूचिस्तान के अंदर एक मस्जिद पर हुआ। ईरान ने अभी इस हमले में मारे गए लोगों के विषय में कोई जानकारी नहीं दी है।

वहीं ईरान का कहना है कि जैश-अल-अदल इस्लामी आतंकी समूह ने दिसम्बर, 2023 में ईरान के हिस्से में पड़ने वाले बलूचिस्तान प्रांत में एक पुलिस थाने पर हमला किया था। इस हमले में 11 पुलिसकर्मी मारे गए थे। पाकिस्तान के भीतर किया गया हमला इसी के बाद सामने आया है।

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने ईरान के इस कृत्य पर विरोध जताया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इस सम्बन्ध में एक बयान जारी किया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा, “पाकिस्तान ईरान द्वारा उसके हवाई क्षेत्र के उल्लंघन की कड़ी निंदा करता है, इस हमले में दो बच्चों की मौत हुई है जबकि तीन बाच्चियाँ घायल हुई हैं।”

आगे पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने लिखा, “पाकिस्तान की संप्रभुता का उल्लंघन अस्वीकार्य है और इसके बुरे अंजाम हो सकते हैं। यह सबसे अधिक चिंता की बात है कि ईरान ने यह तब किया है जब पाकिस्तान और उसके बीच बातचीत के कई चैनल मौजूद हैं।”

पाकिस्तान ने इस मामले में ईरान से अपना विरोध दर्ज करवाया है। उसने ईरान के राजदूत को भी विदेश मंत्रालय तलब किया है। पाकिस्तान का कहना है कि इस इलाके में आतंकवादी घटनाएँ सबके लिए खतरा हैं। इसका जो भी अंजाम होगा उसके लिए ईरान जिम्मेदार होगा।

जिस आतंकी समूह जैश-अल-अदल को ईरान ने निशाना बनाया है, उसने बताया कि ईरान ने 6 ड्रोन के माध्यम से यह हमला किया। यह आतंकी समूह ईरान के सिस्तान और बलूचिस्तान प्रांत की आजादी के लिए लड़ने का दावा करता है। यह सुन्नी इस्लामी आंतकी समूह है जबकि ईरान शिया बहुल राष्ट्र है।

2012 में बनाया गया यह आतंकी समूह जब तब ईरान के भीतर हमला करता है। इसका निशाना ईरान के वह शहर होते हैं जिनकी सीमा पाकिस्तान से लगती है। वह यहाँ सुरक्षा बलों पर हमला करके पाकिस्तान भाग जाते हैं। पाकिस्तान और ईरान के बीच सीमा कई जगह पर हुई है, इससे तस्करी और आतंकियों का प्रसार होता रहता है।

गौरतलब है कि पाकिस्तान पर ईरान ने यह हमला ऐसे समय में किया है जब भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ईरान के दौरे पर गए हुए थे। जयशंकर ने 15 जनवरी, 2024 को ईरान के राष्ट्रपति इब्राहीम रईसी से मिले और 16 जनवरी की देर रात ईरान ने पाकिस्तान में घुस कर हमला कर दिया।

‘बाइबिल में छिपाई पिस्टल, ईसाइयों की भावना हो रही आहत’: हाई कोर्ट ने फटकारा, कहा- अंग्रेजी सिनेमा में यह काफी पहले से चल रहा

केरल हाई कोर्ट ने एक याचिका खारिज कर दी है, जिसमें फिल्म ‘एंटनी’ के एक दृश्य को चुनौती दी गई थी। इस दृश्य में एक बंदूक को ईसाइयों के धार्मिक किताब बाइबिल में छिपाया गया था। याचिकाकर्ता जोजी वर्गीस ने तर्क दिया था कि यह दृश्य ईसाई धर्म की अवमानना ​​करता है। उन्होंने कहा था कि बाइबिल एक पवित्र किताब है और इसे इस तरह नहीं दिखाया जाना चाहिए।

जोजी वर्गीस बनाम केरल राज्य केस की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति देवन रामचंद्रन ने मौखिक रूप से कहा, “क्या हमें इतना असहिष्णु होना चाहिए कि किसी पुस्तक के एक संक्षिप्त संदर्भ पर भी आपको आपत्ति उठानी पड़े? भले ही वह बाइबल ही क्यों न हो, क्या आपको आपत्ति जताने के लिए किसी नकारात्मक सन्दर्भ या अर्थ की आवश्यकता नहीं है?”

न्यायमूर्ति देवन रामचंद्रन ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि दृश्य केवल कुछ क्षणों का था और ये फिल्म की कहानी के लिए आवश्यक था। इस दृश्य को अन्य फिल्मों में भी इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने कहा, “बाइबिल में बंदूक रखना एक ऐसी चीज है जो 60 और 70 के दशक में अंग्रेजी सिनेमा में कई बार किया गया है। मलयाली ये काम अब कर रहे हैं।”

न्यायमूर्ति देवन रामचंद्रन ने मौखिक रूप से कहा, “बाइबिल का उपयोग बंदूक छिपाने के लिए किया जाता है, इसलिए ईसाई नाराज हो जाएँगे। अगर गीता में छिपाया जाए तो हिंदू नाखुश होंगे। यदि यह कुरान है तो मुस्लिम नाखुश होंगे।” उन्होंने कहा कि फिल्म को पहले ही सेंसर बोर्ड पास कर चुका है और इसमें बाइबिल को ब्लर करके दिखाया गया है।

जज ने कहा, “इस याचिका से सिर्फ फिल्म निर्माताओं को ही फायदा होगा। क्या उन्होंने आपसे यह याचिका दायर करने के लिए कहा था? यह कौन सी फिल्म है? एंटनी? क्या किसी ने इसे देखा है? इस फिल्म की जाँच सेंसर बोर्ड पहले ही कर चुका है।” जज ने पूछा कि क्या याचिकाकर्ता को विश्वास है कि दिखाई की किताब बाइबिल ही है। अब इस मामले में दो सप्ताह बाद सुनवाई होगी।

बता दें कि एंटनी फिल्म 1 दिसंबर 2023 को रिलीज हुई थी। इस फिल्म का निर्देश जोजीय ने किया है। वो मलयालम सिनेमा के बड़े डायरेक्टरों में शुमार हैं। इस फिल्म में जोजू जॉर्ज, कल्याणी प्रियदर्शन, चेम्बन विनोद जोसे जैसे सितारे मुख्य भूमिका में हैं। इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर कोई खास बिजनेस नहीं किया है।

60 km पैदल चले 600 कमांडो, 24 घंटे में बना दी पुलिस चौकी: नक्सलियों के गढ़ में 1947 के बाद पहली बार बनी स्थायी चौकी

महाराष्ट्र पुलिस ने सोमवार (15 जनवरी 2024) को गढ़चिरौली जिले के गार्डेवाड़ा में एक पुलिस चौकी स्थापित की। यह चौकी छत्तीसगढ़ के दांतेवाड़ा जिले में स्थित माओवादियों के गढ़ अबूझमाड़ से सिर्फ 5 किलोमीटर की दूरी पर है। इस पूरी प्रक्रिया में बारूदी सुरंगों और एंबुश (घात लगाकर किए जाने वाले हमलों) से बचते हुए और रास्ते को सुरक्षित बनाते हुए करीब 600 कमांडो ने गार्डेवाड़ा तक पहुँचने के लिए 60 किलोमीटर की दूरी पैदल ही तय की।

साल 1947 में भारत को आजादी मिलने के बाद से महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ में फैले इस सुदूर क्षेत्र में ऐसा पहली बार हुआ है कि इस इलाके में सुरक्षाबलों ने स्थाई कैंप स्थापित किया है। कमांडो ने 60 किलोमीटर की पैदल यात्रा में कई नदियों और नालों को पार किया। इस अभियान का उद्देश्य माओवादियों की गतिविधियों पर अंकुश लगाना और क्षेत्र के लोगों को सुरक्षा प्रदान करना है। गार्डेवाड़ा माओवादियों का एक प्रमुख गढ़ है। इस क्षेत्र में माओवादी अक्सर पुलिस और सुरक्षाकर्मियों पर हमले करते हैं।

इस पूरे अभियान के दौरान करीब 1500 कर्मचारियों ने एक ही दिन के भीतर पुलिस चौकी की स्थापना भी कर दी। इस दौरान कमांडों के साथ ही पुलिस एवं अन्य कर्मचारी मौजूद रहे। जिस जगह पर ये चौकी बनी है, वो जगह नक्सलियों के मुख्य केंद्र अबूझमाड़ से करीब 5 किलोमीटर की ही दूरी पर है। इस इलाके में नक्सली कैडर ट्रेनिंग लेते हैं और अन्य कामों को अंजाम देते हैं।

गार्डेवाड़ा में कई बड़े हमले कर चुके थे नक्सली

बता दें कि साल 2019 में लोकसभा चुनाव के दौरान नक्सलियों ने मतदान को प्रभावित करने के लिए तीन IED धमाके किए थे। ये इलाका ऐसे विषम क्षेत्र में है, जहाँ बारिश के समय ताडगुडा नाला बाढ़ के कारण पूरे इलाके को 6 माह के लिए काट देता है। गढ़चिरौली के एसपी नीलोत्पल ने कहा कि महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ को जोड़ने के लिए गट्टा-गार्डेवाड़ा-तोरगाटे-वांगेटुरी-मेंठरी-पनावर को जोड़ने के लिए 38 किलोमीटर लंबा स्टेट हाइवे बनाया जा रहा है।

इस स्टेट हाइवे का 20 किलोमीटर हिस्सा बनकर तैयार हो गया है। इस चौकी के बनने के बाद इस हाइवे का निर्माण कार्य जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा। इस पुलिस चौकी के बन जाने से 730 वर्ग किमी के इलाके में सुरक्षाकर्मियों की निगरानी बढ़ जाएगी।

आयु: 5 साल, ऊँचाई: 51 इंच, वजन: 200 किलो… जानिए भगवान रामलला की मूर्ति की हरेक बात, आप के लिए ट्रस्ट लेकर आया है खास हैशटैग

अयोध्या में भगवान राम के भव्य मंदिर में रामलला की जिस मूर्ति को प्राण प्रतिष्ठित किया जा रहा है, उस मूर्ति को कर्नाटक के मशहूर मूर्तिकार अरुण योगीराज ने बनाया है। कृष्णशिला पर बनाई गई इस मूर्ति का वजन 150 से 200 किलोग्राम है। इस बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने भक्तों से अपील की है कि सभी लोग भगवान राम के प्राण प्रतिष्ठा से जुड़ी अपनी भावनाओं का वीडियो बनाएँ।

ट्रस्ट ने लोगों से यह भी कहा है कि उस वीडियो को सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर #ShriRamHomecoming हैशटैग के साथ शेयर करें। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बताया, “कर्नाटक के प्रसिद्ध मूर्तिकार अरुण योगीराज द्वारा कृष्णशिला पर निर्मित मूर्ति का चयन भगवान श्री रामलला सरकार के श्री विग्रह के रूप में प्रतिष्ठित होने हेतु किया गया है।”

रामलला की जिस मूर्ति को चुना गया, जानिए उसकी खास बातें

मैसूर (कर्नाटक) के मूर्तिकार अरुण योगीराज ने पाँच वर्षीय रामलला की 51 इंच ऊँची श्यामल (सांवली) मूर्ति बनाई थी। इसे श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के 11 ट्रस्टियों ने सर्वसम्मति से चुना है। हालाँकि, अब तक रामलला की ये तस्वीर बाहर नहीं आई है। उम्मीद है कि सारी दुनिया रामलला को 22 जनवरी 2023 को ही देख पाएगी।

पाँच साल के बाल रूप में रामलला
रामलला की मूर्ति की ऊँचाई 51 इंच है
रामलला की मूर्ति का वजन करीब 200 किलो
श्यामल वर्ण के हैं रामलला
योगीराज ने 9 माह में बनाई रामलला की प्रतिमा

पाँच पीढ़ियों से मूर्ति बनाता है योगीराज परिवार

अरुण योगीराज का परिवार पाँच पीढ़ियों से मूर्तिकला के क्षेत्र में है। उन्होंने केदारनाथ में लगी आदि शंकराचार्य की मूर्ति को भी बनाया है। वहीं, दिल्ली में लगी नेताजी सुभाषचंद्र बोस की मूर्ति को भी उन्होंने ही बनाया है। उनके परिवार द्वारा संरक्षित इस मूर्तिकला को मैसूर राजपरिवार का आश्रय प्राप्त रहा है।

अरुण योगीराज शुरू में मूर्ति बनाने को ही जीवन-यापन का जरिया नहीं बनाना चाहते थे। ऐसे में उन्होंने एमबीए की शिक्षा प्राप्त की और फिर कुछ समय प्राइवेट नौकरी भी की। हालाँकि, कुछ ही समय में उनका मन प्राइवेट नौकरी से हट गया और उन्होंने परिवार की परंपरा को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया।

राम तीर्थ क्षेत्र ने की खास अपील

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने एक अपील सभी लोगों से की है। आधिकारिक एक्स हैंडल पर लिखा गया है, “प्रभु श्री राम अपनी जन्मस्थली पर पाँच शताब्दियों के पश्चात पुन: पधार रहे हैं। इस पावन अवसर का साक्षी बनने के लिए सम्पूर्ण ब्रह्मांड उत्सुकता से प्रतीक्षा में है। प्रभु श्री राम के स्वागत की भव्यता को बढ़ाने के लिए हम दुनिया भर के सभी रामभक्तों से एक लघु वीडियो के माध्यम से इस ऐतिहासिक आयोजन के बारे में अपने विचार और भावनाएँ व्यक्त करने का आग्रह करते हैं।”

पोस्ट में आगे कहा गया है, “आप ये वीडियो अपने पूरे नाम, जगह और संक्षिप्त व्यक्तिगत नोट के साथ #ShriRamHomecoming लिखकर सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट कर सकते हैं। आइए, सभी मिलकर सामूहिक रूप से एकता के सबसे बड़े सूत्रधार भगवान श्रीराम के आगमन का उत्सव मनाएँ।”

बता दें कि आज (16 जनवरी 2024) से रामलला के मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम की शुरुआत हो गई है। अयोध्या में भगवान राम के जन्मभूमि पर भव्य मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम की शुरुआत प्रायश्चित पूजा के साथ शुरू हुई। उसके बाद कर्मकूटि पूजन हुआ। 17 जनवरी को रामलला की मूर्ति को मंदिर परिसर में लाया जाएगा। इसके बाद 22 जनवरी 2024 को 12.20 बजे से प्राण प्रतिष्ठा का मुख्य कार्यक्रम होगा।

प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत जैसे गणमान्य लोग भी उपस्थित रहेंगे। वहीं, ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कहा है कि भगवान राम की जिस मूर्ति की अभी पूजा हो रही है, उनकी भी पूजा जारी रहेगी। उन्हें मूल मूर्ति के साथ ही गर्भगृह में स्थापित किया जाएगा।

रातभर लाशों को रौंदती रही गाड़ियाँ, सुबह ऊँगली और कान से पता चला ये भी मानव थे: सड़क से खुरचकर निकालने पड़े अवशेष

सोमवार (15 जनवरी 2024) तक वे भी हमारी-आपकी तरह ही हाड़-माँस के इंसान थे। उनकी भी एक पहचान थी। लेकिन मंगलवार की सुबह तक कुछ नहीं बचा था, क्योंकि रात भर गाड़ियाँ इनकी लाशों को रौंदती रही। ऊँगली और कान देखकर लोगों को सुबह पता चला कि सड़क से चिपक गए अवशेष किन्हीं इंसानों के ही हैं। पुलिस को इन अवशेषों को खुरच-खुरचकर सड़क से उठाना पड़ा।

ये कौन थे इसका पता लगाना तो बाद की बात है। ये लाशें पुरुषों की है या महिलाओं की यह भी पोस्टमार्टम से ही पता चल पाएगा। यह भी कि मरने वाले की उम्र क्या थी। इनमें से एक घटना गाजियाबाद की है तो दूसरी आगरा की।

एक लाश गाजियाबाद-हापुड़ हाइवे से बरामद की गई है। रिपोर्ट के अनुसार वेव सिटी थाना क्षेत्र में सद्भावना कट के नजदीक यह दुर्घटना हुई थी। मंगलवार की सुबह सैर करते कुछ लोगों की नजर सड़क पर गई तो दुर्घटना का पता चला। करीब जाने पर ऊँगलियों से पता चला कि रात के समय दुर्घटना में किसी व्यक्ति की मौत हो गई थी। माना जा रहा है कि एक्सीडेंट के बाद इस व्यक्ति की लाश को रात भर वाहन रौंदते रहे, क्योंकि कोहरा घना था।

वेव सिटी पुलिस के अनुसार मौके से कुछ सिर के बाल, एक ऊँगली और कान का टुकड़ा मिला है। इसे भी खुरचकर सड़क से उठाना पड़ा। मृतक के शरीर का कोई भी हिस्सा पूरा नहीं मिला है। यहाँ तक कि कपड़े भी नहीं। पुलिस के अनुसार कोहरे के कारण CCTV फुटेज से भी कुछ पता नहीं चल रहा। अब शिनाख्त के लिए आसपास के थानों से मिसिंग लोगों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।

इसी तरह आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर भी दुर्घटना हुई। मरने वाले को रातभर गाड़ियों ने इस तरह रौंदा कि मंगलवार की सुबह शव के अवशेष सड़क से चिपके हुए थे। बताया जा रहा है कि सड़क पर 10 मीटर तक शव के अवशेष बिखरे पड़े थे।फावड़े से खुरचकर अपशेष इकट्ठे किए।

रिपोर्ट में प्रभारी निरीक्षक देवेंद्र सिंह के हवाले से बताया गया है कि टोल के आसपास के लोगों से पूछताछ में पता चला है कि 40 साल का एक विक्षिप्त युवक इस इलाके में घूमता था। ग्रामीण उसे खाने देते थे। माना जा रहा है कि रात में सड़क पार करते समय यही युवक किसी वाहन की चपेट में आ गया होगा।

जिस अयोध्या में जन्मीं अनुष्का शर्मा वहाँ से मुंबई उनके घर पहुँचा न्योता, प्राण-प्रतिष्ठा का निमत्रंण स्वीकार करते समय विराट कोहली भी थे साथ

भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली और उनकी अभिनेेत्री पत्नी अनुष्का शर्मा को 22 जनवरी 2024 को अयोध्या में होने वाली राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा का आमंत्रण मिला है। यह आमंत्रण कोहली के मुंबई स्थित आवास पर दिया गया। निमंत्रण-पत्र प्राप्त करने के लिए वह इंदौर से मुंबई पहुँचे थे। बताते चलें कि अनुष्का शर्मा का जन्म अयोध्या में ही हुआ है।

बताया जा रहा है कि राम मंदिर का आमंत्रण प्राप्त करने के लिए विराट कोहली विशेष रूप से मुंबई गए थे। वह आमंत्रण प्राप्त करने के बाद बेंगलुरु के लिए निकल गए। बेंगलुरु में वह भारत और अफगानिस्तान के बीच तीन मैचों की टी20 सीरिज में हिस्सा लेंगे।

विराट कोहली से पहले अन्य कई भारतीय क्रिकटरों को भी मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के लिए आमंत्रण दिया गया। अब तक सचिन तेंदुलकर और पूर्व भारतीय कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी को भी राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा में आने का आमंत्रण दिया गया है।

मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के लिए यह आमंत्रण विश्व हिन्दू परिषद और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पदाधिकारी लेकर पहुँच रहे हैं। आमंत्रण श्री रामजन्मभूमि तीर्थक्षेत्र की तरफ से दिए जा रहे हैं, जो इस निर्माणाधीन मंदिर के प्रबन्धन के लिए उत्तरदायी संस्था है।

एक ख़ास बात यह है कि अगर ये सेलिब्रिटी कपल मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा में शामिल होते हैं तो यह एक संयोग भी होगा। दरअसल, अनुष्का शर्मा का जन्म राम की नगरी अयोध्या में ही हुआ था। उनका जन्म यहाँ के सेना अस्पताल में वर्ष 1988 में हुआ था। दरअसल, अनुष्का के पिता भारतीय सेना के डोगरा रेजिमेंट में थे।

जब अनुष्का का जन्म हुआ था, तब उनके पिता अजय शर्मा की तैनाती अयोध्या में स्थित डोगरा रेजिमेंटल सेंटर में थी। भारतीय सेना के प्रसिद्ध डोगरा रेजिमेंट का मुख्यालय अयोध्या में ही है। इसका मुख्यालय पहले मेरठ में हुआ करता था, लेकिन बाद में वर्ष 1976 में इसे अयोध्या शिफ्ट कर दिया गया।

अयोध्या में 22 जनवरी के प्राण प्रतिष्ठा के कार्यक्रम की तैयारियाँ अंतिम चरण में हैं। प्राण प्रतिष्ठा के लिए होने वाली पूजा का आज (16 जनवरी, 2024) से प्रारम्भ भी हो गई है। 22 जनवरी को इस पूजा में प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी समेत तमाम साधु संत और बड़ी हस्तियाँ शामिल होंगी।

अभी तो अनुष्ठान शुरू हुआ है आरफा और तुम लगी छटपटाने

राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा को लेकर जब देश भर में हर्षोल्लास का माहौल है उस समय में कुछ लोग बिलबिलाए घूम रहे हैं। लोकतंत्र के नाम पर, संविधान की आड़ में इन्हें अपनी नफरत को जायज ठहराना है। जैसे, आरफा खानम शेरवानी को ही देख लीजिए। आजीवन निष्पक्ष पत्रकारिता के नाम पर इस्लाम की बात करने वाली आरफा अब प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम की तारीख नजदीक आते देख झुंझलाई हुई हैं।

उन्हें समस्या हो रही है इस बात से कि आखिर चारों ओर इतना राम का नाम लिया जा रहा है, क्यों मीडिया सिर्फ अयोध्या की कवरेज करने में लगा है, क्यों प्रधानमंत्री मोदी इस कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे हैं, क्यों बीजेपी इसका प्रचार कर रही है, क्यों हिंदू कार्यकर्ता अपनी रामभक्ति दिखा रहे हैं और क्यों उनका प्रोपगेंडा अब फल फूल नहीं रहा।

उनकी ये सब झुंझलुहाट द वायर पर डली उनकी वीडियो में देखने को मिली। यहाँ उन्होंने आवाज में दम लगाकर संविधान की प्रस्तावना पढ़ी और इसकी क्लिप शेयर करके फिर अपने ट्वीट में लिखा,

“ताकि सनद रहे: भारत एक संप्रभु,समाजवादी,धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य है जिसने सभी नागरिकों को सुरक्षित करने का संकल्प लिया है। विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास और पूजा की स्वतंत्रता देने वाला देश है। आज सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोग रामनामी चादर ओढ़कर संविधान की धज्जियाँ उड़ा रहे हैं।”

आरफा की यह चिंता अचानक नहीं जगी है। जब-जब हिंदुओं ने अपनी पहचान और धर्म के लिए आवाज उठाई है, तब-तब उन्हें चारों ओर डर का माहौल नजर आया है और अब जब हर दिशा में राम नाम की गूंज है तो वह ये सब कैसे बर्दाश्त कर लें… यही वजह है वह उस संविधान और लोकतंत्र की दुहाई देने लगीं, जिसके दम पर हिंदुओं ने भगवान श्रीराम का मंदिर बनवाया है मगर आरफा इस तथ्य को भूली बैठी हैं। आरफा को उस कानूनी लड़ाई का ख्याल नहीं है जो हिंदुओं ने दशकों तक लड़ी और तब जाकर अपने प्रभु को उनका उचित स्थान दिला पाए।

आरफा वीडियो में जोर देकर धर्म को निजी मामला बताती हैं लेकिन अजीब बात ये है कि यही आरफा ये वाकया इससे पहले दोहराती कभी नहीं दिखीं। चाहे कोई सड़क घेरकर नमाज पढ़े चाहे कोई ट्रेन रोककर। आरफा को वहाँ संविधान और लोकतंत्र की बात याद नहीं आती। लेकिन कोई अगर उन्हें ये सब करने से रोक दे तो उन्हें देश का अल्पसंख्यक जरूर खतरे में लगने लगता है।

आरफा खानम शेरवानी कभी लव जिहाद जैसे मुद्दों पर भी नहीं बोलतीं जहाँ साफ तौर पर धर्मांतरण पर जोर दिया जाता है, क्या तब आरफा जैसी मुस्लिम महिला पत्रकारों को ये ज्ञान नहीं देना चाहिए कि मजहब तो निजी मसला होना चाहिए और क्यों सैंकड़ों लड़कियों को धोखे से फँसाकर मुस्लिम बनाया जा रहा है।

उनको संविधान, कानून और धर्म- निजी आस्था का विषय जैसी बातें तब नहीं समझ आती हैं जब इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ हाथ में चाकू तलवार लेकर ‘सिर तन से जुदा’ के नारे लगाते हुए सड़कों पर आती है और फिर कभी दिल्ली दंगा होता है तो बेंगलुरु में हिंसा।

आरफा की आवाज का बेस उस समय भी गायब रहता है जब कोई सरकार, पार्टी, उसके नेता बड़ी-बड़ी इफ्तार पार्टियों का आयोजन करते हैं और इस्लामी टोपी पहन उसमें शिरकत करते हैं। क्या तब ये इतना बुद्धिजीवी होने के नाते दर्शकों को समझाना अनिवार्य नहीं होना चाहिए कि एक समुदाय को खुश करने के लिए आखिर क्या किया जा रहा है, इससे हिंदुओं की भावना आहत हो सकती है….या ये सारा ज्ञानभंडार केवल हिंदुओं के लिए, भाजपा के लिए, प्रधानमंत्री मोदी के लिए ही है।

आरफा खानम चाहती हैं कि इस राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा में पीएम मोदी भाग ही न लें। जबकि ऐसा वो क्यों करें इस बात का आरफा के पास जवाब नहीं है। राम मंदिर शुरू से ही भाजपा के लिए एक बड़ा मुद्दा रहा था। आज जब उनके कार्यकाल में वो कार्य पूरा हो रहा है तो वो इसमें क्यों न शामिल हों, क्यों अपनी खुशी न दिखाएँ।

वह खुद कहती हैं कि भारत देश धर्मनिरपेक्ष है और सबको पूजा का अधिकार है। तो, क्या इस देश के प्रधानमंत्री को अधिकार नहीं है कि वो अपने धर्म का अनुसरण करें। अगर पीएम मोदी को देश का ‘प्रधान’ मंत्री होने के नाते वहाँ पूजा पाठ करने का अवसर मिल रहा है तो क्या सिर्फ वो इसलिए छोड़ दें कि आरफा जैसे लोग नाराज हो जाएँगे। क्या प्रधानमंत्री देश के नागरिक नहीं हैं, उनकी कोई निजी आस्था नहीं है?

हर वीडियो में जब खुद को सच्चा, निष्पक्ष पत्रकार बताकर पूरे करियर भर इस्लाम की बातें कर सकती हैं, गलत को सही और सही को गलत होने के तर्क दे सकती हैं तो प्रधानमंत्री तो सिर्फ सनातन का पालन ही कर रहे हैं।

ज्यादा वक्त नहीं बीता है जब आरफा ने सीएए/एनआरसी विरोधी प्रदर्शनों की आग में घी डालने का काम किया था और मुस्लिमों को ज्ञान दिया था कि उन्हें अपनी स्ट्रैटेजी बदलने की जरूरत है। क्या उन्हें पत्रकार होने के नाते देश के हर नागरिक की आवाज नहीं बनना चाहिए था? वो क्यों एक ही समुदाय को उनकी स्ट्रैटेजी बदलकर बात मनवाने की तरकीब सिखा रही थीं?

दरअसल, आरफा जैसों के लिए परेशानी ये है कि आज के समय में जैसे-जैसे हिंदू अपने धर्म के लिए जागरूक हो रहा है उनके सेकुलर होने की परिभाषा भी उसके सामने स्पष्ट हो गई है। इतने सालों से खुद को ‘सेकुलर’ कहकर हर कट्टरपंथी कृत्य को धो-पोंछने का काम किया जा रहा था, और ऐसा माहौल बनाया जा रहा था कि हिंदू अपने हिंदू होने पर ही शर्मिंदा होने लगे।

अब वो वक्त बदला। हिंदू के मन में लालसा जगी ये जानने की आखिर अयोध्या का नाम फैजाबाद कैसे पड़ा, कैसे रामजन्मभूमि पर बाबरी का ढाँचा खड़ा हुआ तो इन्हीं आरफा जैसे लोगों का ये सेकुलरिज्म खतरे में आ गया। आज एक राम मंदिर बन जाने से मुस्लिमों की भावना आहत होने की बात करने वाली आरफा खानम, क्या तब हिंदुओं की भावनाएँ आहत नहीं हुईं होंगी जब इस्लामी आक्रांताओं ने हिंदुओं के मंदिर पर हथौड़े चलाए होंगे। उनके देवी-देवताओं की मूर्तियों को खंडित किया होगा।

एक बार सोच के देखिए भारत में इस्लामी आक्रांताओं के आने से पहले यहाँ सनातन का स्वर्णिम इतिहास था जिसे मिटाने का काम होता रहा। आपसे कोई पूछे कि आप क्यों नहीं आवाज उठातीं उस समय हिंदुओं पर हुई बर्बरता पर तो आप क्या जवाब देंगी…

ये सारी बातें सिर्फ इसलिए याद दिलाईं है ताकि आपको भी सनद रहे हिंदुओं ने राम मंदिर कानूनी लड़ाई से लिया है। वो संविधान और लोकतंत्र के दायरे में रहकर अपने प्रभु के मंदिर बनने का उत्सव मना रहे हैं। मथुरा-काशी अभी शेष हैं और शेष हैं वो सारे धर्मस्थल… जिनका नामों-निशान एक जमाने में मिटाने का प्रयास हुआ, और देश का तथाकथित सेकुलर आजादी के बाद उसपर चुप रहा। हिंदू अपनी आस्था से जुड़ी हर बात साबित करने के लिए कोई गैर लोकतांत्रिक कदम नहीं उठा रहा उनका हर तरीका कानून के दायरे में रहकर है इसके लिए इतनी तिलमिलाहट अच्छा नहीं है।

आंध्र प्रदेश के लेपाक्षी मंदिर पहुँचे पीएम मोदी, किया दर्शन और सुनी चौपाइयाँ: जानिए अयोध्या से इस स्थान का क्या है कनेक्शन

अयोध्या में नवनिर्मित भगवान राम के मंदिर में 22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होने जा रही है। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आंध्र प्रदेश के लेपाक्षी में स्थित वीरभद्र मंदिर में दर्शन करने पहुँचे। रामायण में महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले इस मंदिर में प्रधानमंत्री काफी देर तक रुके। प्रधानमंत्री मोदी ने मंदिर में जाने के बाद रामायण के तेलुगु स्वरुप रंगनाथ रामायण से चौपाइयाँ भी सुनीं।

लेपाक्षी शहर आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले में स्थित है और कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु से लगभग 120 किलोमीटर दूर है। लेपाक्षी धार्मिक एवं ऐतिहासिक वैभव से भरपूर एक नगर है। यह भारत की समृद्ध वास्तुकला और आध्यात्मिक विरासत को दर्शाता है। वाल्मीकि रामायण के अनुसार, यह वही स्थान है जहाँ भगवान श्रीराम लगभग मृतप्राय जटायु से मिले थे।

राक्षस रावण वह माता सीता को अपहृत करके लंका ले जा रहा था, उस दौरान जटायु ने बड़ी वीरता से लड़ाई लड़ी थी। बताया जाता है कि लेपाक्षी में ही जटायु ने प्रभु राम और उनके छोटे भाई लक्ष्मण को बताया था कि माता सीता का अपहरण कर रावण लंका ले गया है। जटायु ने प्रभु राम से कहा था कि उन्हें माता सीता के पास पहुँचने के लिए समुद्र तट की तरफ बढ़ना चाहिए।

लेपाक्षी में स्थित जटायु की एक मूर्ति (चित्र साभार: NDTV)
लेपाक्षी में स्थित जटायु की एक मूर्ति (चित्र साभार: NDTV)

इस नगर का नाम लेपाक्षी तेलुगु भाषा का शब्द है। इसका अर्थ होता है, ‘उठो हे पक्षी’। यह जटायु को एक श्रद्धांजलि है, जिन्होंने माता सीता को राक्षस रावण द्वारा अपहरण किए जाने से बचाने के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी। इस नगर में कई हिन्दू मंदिर हैं। यह मंदिर पौराणिक महत्व के हैं।

यहाँ भगवान शिव, विष्णु, पापनाथेश्वर, रघुनाथ श्रीराम और अन्य देवताओं के मंदिर हैं। यहाँ मंदिरों पर की गई नक्काशी और इनकी विहंगमता देखकर श्रद्धालु चकित हो जाते हैं। वीरभद्र मंदिर के खम्भों पर महीन नक्काशी हो या फिर दुनिया के सबसे बड़े नंदी की मूर्ति, विजयनगर राजवंश के कारीगरों का शिल्प कौशल यहाँ की शोभा बढ़ा रहा है।

वीरभद्र मंदिर (चित्र साभार: The Hindu)
वीरभद्र मंदिर (चित्र साभार: The Hindu)

लेपाक्षी में आकर्षण का मुख्य केंद्र वीरभद्र मंदिर है, जिसे सामान्यतः लेपाक्षी मंदिर के नाम से ही जाना जाता है। यह मंदिर भारत की अद्भुत शिल्पकला के इतिहास का प्रमाण है। यह मंदिर चट्टानों को काटकर बनाया गया है। यह विजयनगर साम्राज्य की भव्यता को भी दिखाता है।

लेपाक्षी मंदिर तब की कला का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। यह मंदिर उत्कृष्ट भित्तिचित्रों से भी सुसज्जित है। मंदिर परिसर का एक हिस्सा एक चट्टानी पहाड़ी पर स्थित है, जिसे कुर्मासैलम के नाम से जाना जाता है। यह हिस्सा कछुए के आकार की तरह दिखता है।

हवा में झूलता स्तम्भ (चित्र साभार: Anicient Origins)
हवा में झूलता स्तम्भ (चित्र साभार: Anicient Origins)

मंदिर के महत्वपूर्ण आकर्षणों में से एक ‘हवा में झूलता स्तम्भ‘ है। यह मंदिर के अन्य स्तम्भों जैसा ही है, लेकिन यह भूमि को नहीं छूता है। इस मंदिर में माता सीता के पदचिह्न मिलने की भी बात कही जाती है। यह मंदिर विजयनगर साम्राज्य की भव्यता को दर्शाता है, जो कि कभी दक्षिण के बड़े हिस्से पर राज किया करता था। विजयनगर साम्राज्य ने अपने पूरे राज्य में मंदिर बनवाए थे।

विजयनगर साम्राज्य ने ही वीरभद्र मंदिर की दीवालों पर भी भित्ति चित्र बनवाए थे। मंदिर की दीवालों पर बने भित्ति चित्र माता पार्वती, भगवान गणेश, भगवान शिव, संतों और संगीतकारों के चित्र दर्शाता है। मंदिर के अन्दर 70 स्तम्भ मौजूद हैं, जबकि इसके अंदर स्थित एक गुफा संत अगस्त्य का निवास स्थान मानी जाती है।

यहाँ साँप की एक प्रसिद्ध मूर्ति भी है, जिसे माना जाता है कि मूर्तिकारों के दोपहर के खाने के दौरान एक ही चट्टान से बनाया गया था। इसके अलावा, पास की पहाड़ियों पर पापनाथेश्वर, रघुनाथ, श्रीराम और दुर्गा के मंदिर बने हुए हैं। इन पहाड़ियों को कुर्मासैला के नाम से जाना जाता है।

केरल के त्रिप्रयार श्री रामास्वामी मंदिर में पूजा करेंगे पीएम मोदी, भगवान राम की 6 फीट ऊँची है प्रतिमा: द्वापर और द्वारका से है कनेक्शन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आंध्र प्रदेश और केरल के दौरे पर हैं। वे बुधवार (17 जनवरी 2024) को केरल पहुँचेंगे और सुबह त्रिशूर जिले के गुरुवयूर मंदिर में पूजा अर्चना करेंगे। इसके बाद वो त्रिप्रयार श्री रामास्वामी मंदिर जाएँगे। इस मंदिर में भगवान राम की की पूजा होती है और यहाँ उनकी 6 फुट ऊँची प्रतिमा स्थापित है, जिसका कनेक्शन भगवान कृष्ण, द्वारका और गुजरात से भी है।

गुरुवयूर मंदिर में सुबह करेंगे पूजा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सुबह 7.30 बजे त्रिशूर जिले में स्थित गुरुवयूर मंदिर में पूजा अर्चना करेंगे। भगवान विष्णु के कृष्णावतार को समर्पित इस मंदिर को वैष्णवों का खास तीर्थस्थल माना जाता है। इसमें गैर-हिंदुओं का प्रवेश भी वर्जित है। माना जाता है कि गुरुवयूर मंदिर को भूलोक वैकुंठ (पृथ्वी पर स्वर्ग) की संज्ञा दी जाती है। ये वैष्णवों के 108 अभिमान क्षेत्रों में से एक है। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी त्रिप्रयार श्री रामास्वामी मंदिर पहुँचेंगे।

भगवान राम को समर्पित है त्रिप्रयार श्री रामास्वामी मंदिर

त्रिप्रयार श्री रामास्वामी मंदिर भगवान राम को समर्पित है। इस मंदिर में भगवान राम की 6 फुट ऊँची प्रतिमा है। इस मंदिर के मुख्य देवता राम हैं, जो विष्णु के सातवें अवतार हैं, जिनकी चार भुजाओं में शंख, चक्र, धनुष और माला हैं। भगवान राम यहाँ राजघराने के पीठासीन देवता हैं, जिन्हें ‘ब्रह्मांड में सभी देवताओं से ऊपर’ का स्थान दिया गया है।

भगवान राम को यहाँ पर त्रिप्रयार थेवर या त्रिप्रयारप्पा के रूप में भी जाना जाता है। यह मंदिर करुवन्नूर नदी के तट पर स्थित है, जिसे त्रिप्रयार से बहते हुए थेवरा नदी कहा जाता है। मंदिर परिसर में भगवान राम के साथ-साथ दक्षिणमुखी शिव, गणेश और कृष्ण के मंदिर स्थापित हैं। यहाँ हनुमान की भी पूजा होती है। इस मंदिर का संबंध द्वापर युग में भगवान कृष्ण से भी जोड़ा जाता है।

मुख्य पुजारी थराननेल्लूर पदिनजारे मन पद्मनाभन नंबूथिरीपाद ने 1 जनवरी 2024 को पत्र लिखकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मंदिर आने के लिए आमंत्रित किया था। उन्होंने बताया कि भगवान कृष्ण द्वारा गुजरात के द्वारका में भगवान राम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न की मूर्तियों को समुद्र से निकालकर एक ही समय में स्थापित किया गया था। द्वारका के चारों कोनों पर भगवान राम के चारों भाइयों के मंदिर बनाए गए थे।

केरल का प्रमुख नालंबलम

केरल में नालंबलम का मतलब है कि एक खास क्षेत्र में राजा दशरथ के चारों पुत्रों के अलग-अलग मंदिर। इसमें त्रिप्रयार श्री रामास्वामी मंदिर से जुड़े समूह को प्रमुख माना जाता है। त्रिप्रयार से 20-22 किलोमीटर की दूरी पर इरिंजलाकुडा में कूडलमानिक्यम मंदिर है, जो राम के भाई भरत का मंदिर है। लक्ष्मण का मंदिर थिरुमुझिकुलम में है। वहीं, पायम्मल मंदिर को शत्रुघ्न का मंदिर माना जाता है।

कहा जाता है कि अगर मलयालम माह कड़कडकम के किसी भी एक दिन में कोई अगर इन मंदिरों में पूजा कर ले, वो बहुत किस्मत वाला होता है। चूँकि चारों मंदिरों की आपस में दूरी लगभग 20-22 किलोमीटर है। ऐसे में ये कठिन व्रत माना जाता है। केरल में 4 अन्य नालंबलम भी हैं। हालाँकि, वो अपेक्षाकृति कम मशहूर है।