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‘न मोदी से डरना न शाह से, सिर्फ जमीन-ओ-आसमान को बनाने वाले अल्लाह से डरो’: राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले ओवैसी ने मुस्लिमों को भड़काया

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने मुस्लिमों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से न डरने की सलाह दी है। हैदराबाद से सांसद औवेसी ने अपने एक्स हैंडल से बुधवार (17 जनवरी, 2024) को जारी 36 सेकेंड्स की वीडियो क्लिप में ये ऐलान किया है।

ओवैसी ने कहा, “हम सिर्फ ज़मीन-ओ-आसमान को बनाने वाले से डरते हैं, बाकी किसी से भी नहीं डरते हैं। मैं गुनाहगार हूँ, खताकार हूँ, सियाकार हूँ, मैं क्या हूँ, मेरे रब को मालूम है। मगर मैं सिर्फ अल्लाह से डरता हूँ।”

वो आगे कहते हैं, “और तुमको भी बोलने आया हूँ कि न मोदी से डरना, न शाह से डरना, न हुकूमत से डरना, किसी से नहीं डरना, सिर्फ अल्लाह से डरना।” बताते चलें कि इससे पहले औवेसी अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (AAP) पर भी निशाना साध चुके हैं।

उन्होंने आप संस्थापक और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल पर तंज किया था कि वो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के छोटे रिचार्ज है। औवेसी का ये तंज केजरीवाल सरकार के मंगलवार (16, जनवरी, 2024) को दिल्ली में सुंदरकांड का पाठ कराने के लेकर आया था।

इस कार्यक्रम को लेकर औवेसी ने दावा किया था कि ये सब सीएम केजरीवाल ने राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह को ध्यान में रखते हुए किया था। उन्होंने कहा, “जब मैंने ये देखा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री उनकी सरकार ये तय की है। हर मंगलवार को वो सुंदरकांड करवाएँगे, हनुमान चालीसा पढ़वाएँगे। इस पर मैंने कहा कि आप बीजेपी से कैसे अलग है। आप में बीजेपी और आरएसएस में कोई फर्क नहीं है।”

उन्होंने कहा था, “इनका पाखंड देखिए, कोई कह रहा कि मैं सरयू नदी में जाऊँगा, आप कह रहे हैं शिक्षा में ये पढ़ाया जाएगा। आप तो नरेंद्र मोदी पर चल रहे हैं। फिर आप कैसे अलग है। मैं फिर से कह रहा हूँ कि इस देश में बहुसंख्यकों के वोट को कैसे हासिल किया जाए इसका कॉम्पीटिटर हिंन्दुत्व हो रहा है।”

दरअसल सीएम केजरीवाल की अगुवाई में सीएम केजरीवाल ने दिल्ली सभी 70 विधानसभा में मंगलवार को सुंदरकांड का पाठ करवाया था। खुद सीएम केजरीवाल पत्नी सहित रोहिणी के एक मंदिर में ‘सुंदर कांड’ पाठ कार्यक्रम में शामिल हुए और भगवान राम और हनुमान से आशीर्वाद माँगा।

बताते चलें की औवेसी आए दिन पीएम मोदी, बीजेपी और हिंदुत्व पर हमलावर रहते हैं। इससे पहले वो मथुरा ईदगाह मामले में RSS पर निशाना साध चुके हैं। ओवैसी ने अपने लोगों को संघ के डिजाइनों के लिए सचेत रहने के लिए कहा। उन्होंने कहा था कि संघ कृष्णजन्मभूमि मामले पर भी आरएसएस हिंसक मुहिम शुरू करेगी।

‘जो राम-कृष्ण को नहीं मानता, वो सच्चा भारतीय मुसलमान नहीं’: पुरातत्वविद KK मुहम्मद का वीडियो, कहा था- सच बोलने के कारण मुझे किया गया निलंबित

अयोध्या में 22 जनवरी 2024 को नवनिर्मित राम मंदिर में भगवान रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होने वाली है। इससे पहले एक वीडियो वायरल हो रहा है। यह वीडियो पुरातत्व विशेषज्ञ केके मुहम्मद का है। केके मुहम्मद बाबरी ढाँचे में हुई खुदाई में शामिल थे। राम मंदिर के सच को बाहर लाने में उनका बड़ा योगदान माना जाता है।

केके मुहम्मद का जो वीडियो वायरल हो रहा है, वह लगभग चार साल पुरानी है। उन्होंने साल 2019 में एक लिट फेस्ट में बोलते हुए राम मंदिर में हुई खुदाई के साथ ही देश में मंदिरों को तोड़कर बनाई गईं कई मस्जिदों के बारे में बताया था। इस दौरान उन्होंने कहा था कि कैसे वामपंथी इतिहासकार इस पर बोलने का कभी साहस नहीं जुटा सके।

केके मुहम्मद ने बताया था कि हिंदुत्व में कोई भी व्यक्ति किसी भी तरीके से रह सकता है। उन्होंने कहा था, “मैं मुस्लिम विद्वानों से बताता हूँ कि पाकिस्तान नाम का मुस्लिम देश बनाने के बाद भी भारत सेक्युलर है तो ये हिन्दुओं के कारण ही संभव है।” केके मोहम्मद ने इस वीडियो में भारतीय मुस्लिमों के भारतीय संस्कृति से सम्बन्ध के विषय में भी बात की।

उन्होंने कहा कि यदि भारत में मुस्लिमों के लिए राम और कृष्ण उनके लिए हीरो नहीं हैं तो वे परफेक्ट मुस्लिम नहीं हैं। उन्होंने कहा था कि मलेशिया और इंडोनेशिया में भी मुस्लिम राम और कृष्ण को मानते हैं, जबकि वे उनके देश में नहीं हुए। इसी तरह भारत के मुस्लिमों को भी यही करना था, लेकिन वे समझ नहीं पाए।

उन्होंने ईरान का उदाहरण देते हुए कहा कि ईरान के आज भी राष्ट्रीय हीरो रूस्तम और सोहराब हैं। ये दोनों पर्शिया, जो अब मुस्लिम शासन होने के बाद ईरान बन गया है, के हीरो थे। ये मुस्लिम भी नहीं थे, फिर भी इन्हें ईरान अपना नेशनल हीरो मानता है। इस बातचीत को आप यहाँ 14 मिनट के बाद सुन सकते हैं।

इस वीडियो में केके मुहम्मद को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि साल 1990 में राम मंदिर के विषय में सच बोलने के कारण उन्हें निलंबित कर दिया गया था। हालाँकि, बाद में निलंबन को स्थानांतरण में बदल दिया गया। उन्होंने कहा कि मुस्लिम पक्ष का दावा था कि बाबरी को खाली जमीन पर बनाया गया था, लेकिन बाद में हुए सर्वे ने स्पष्ट कर दिया कि यहाँ एक बड़ा मंदिर था।

उन्होंने बताया कि वहाँ कई स्तंभ मिले। ढाँचे वाली जगह से 263 मूर्तियाँ मिलीं। इनमें वराह समेत अन्य कई प्रतीक मिले, जो एक मस्जिद में से कभी नहीं मिल सकते। उन्होंने एक शिलालेख के विषय में भी बताया, जिसमें लिखा था कि यह मंदिर उस अवतार को समर्पित है, जिसने बालि को मारा था। उन्होंने यह भी कहा कि मुस्लिमों के लिए बाबरी कोई बहुत बड़े महत्व की नहीं थी।

केके मुहम्मद ने यह भी कहा कि यदि मुस्लिमों ने इस जगह को हिन्दुओं को दे दिया होता तो ये मामला शांति से निपट जाता। इस दौरान एक दर्शक ने उनसे पूछा कि राम जन्मभूमि पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद ऐसा दिखाया गया कि इसमें किसी की हार नहीं हुई है। हिन्दू-मुस्लिम एक है, लेकिन इसमें सबसे बड़ी हार मार्क्सवादियों की हुई। इस पर दर्शक ने उनकी राय पूछा।

केके मुहम्मद ने इसका जवाब देते हुए कहा कि 34-35 साल की लड़ाई के बाद मार्क्सवादी और वामपंथी इतिहासकारों की बड़ी हार हुई है। उन्होंने कुछ कम्युनिस्टों का उदाहरण देते हुए कहा कि ये लोग अच्छे होते हैं, मगर इरफान हबीब जैसे कुछ इतिहासकार बिल्कुल इसके विपरीत अपना नैरेटिव गढ़ते हैं, जो कि अब पूरी तरह से फेल हो चुका है।

रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा को हाई कोर्ट में चुनौती: कहा- 22 जनवरी के कार्यक्रम पर रोक लगे, निर्माणाधीन मंदिर में नहीं हो सकते विराजमान

अयोध्या में नवनिर्मित राममंदिर में 22 जनवरी 2024 को रामलला का प्राण प्रतिष्ठा समारोह होने जा रहा है। इस समारोह पर प्रतिबंध लगाने के लिए गाजियाबाद के भोला दास ने इलाहबाद हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की है। मंगलवार (16 जनवरी 2024) को दायर की गई इस जनहित याचिका में कार्यक्रम पर रोक लगाने की माँग की गई है।

याचिका में कहा गया है कि हिंदू कैलेंडर के अनुसार पौष माह में कोई भी धार्मिक कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जा सकता। इसके साथ ही याचिकाकर्ता दास ने कहा कि मंदिर अभी भी निर्माणाधीन है और इसमें देवता की प्रतिष्ठा नहीं हो सकती, क्योंकि यह सनातन परंपरा के हिसाब से असंगत होगा। कोई भी देवता ऐसी स्थिति में प्रतिष्ठित नहीं हो सकते हैं।

याचिका में कहा गया, “22 जनवरी 2024 को अयोध्या में एक धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन होने जा रहा है। निर्माणाधीन मंदिर में रामलला की मूर्ति स्थापित की जाएगी। यह समारोह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा किया जाएगा।” याचिका में आगे कहा गया है कि शंकराचार्यों को भी प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम पर आपत्ति है।

इसके अलावा इस याचिका में में बीजेपी पर आरोप लगाते हुए कहा गया है कि पार्टी आगामी लोकसभा चुनावों में राजनीतिक फायदे के लिए इस कार्यक्रम का आयोजन कर रही है। इससे पहले विपक्षी दलों ने दावा किया था कि अधूरे मंदिर में ‘प्राण प्रतिष्ठा’ समारोह पर आपत्ति जताने के बाद शंकराचार्यों ने 22 जनवरी 2024 के कार्यक्रम में शामिल न होने का फैसला किया है।

बताते चलें कि इलाहबाद हाई कोर्ट में एक याचिका 14 से 22 जनवरी तक धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करने के शासनादेश के खिलाफ भी दायर की गई है। ऑल इंडिया लॉयर्स एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष नरोत्तम शुक्ल और अधिवक्ता आशुतोष तिवारी सहित 6 लोगों ने पीआईएल दायर की है। हालाँकि, हाई कोर्ट ने इस पर तुरंत सुनवाई करने से इनकार कर दिया है।

वहीं, इस सबके बीच अयोध्या में रामलला के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के लिए वैदिक अनुष्ठान 16 जनवरी 2024 से ही शुरू हो गए हैं। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कहा कि 22 जनवरी को प्राण प्रतिष्ठा समारोह के बाद राम मंदिर आम लोगों के दर्शन के लिए 23 जनवरी 2024 से खुल जाएगा।

प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी दोपहर 1 बजे तक पूरा होने की उम्मीद है। पीएम मोदी ने अयोध्या में श्री रामलला के मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के लिए 11 दिवसीय विशेष अनुष्ठान भी शुरू किया है। इस अवसर पर पीएम मोदी और सीएम योगी सहित अन्य गणमान्य लोग भी उपस्थित रहेंगे। परंपरा के अनुसार, 1000 टोकरियों में उपहार नेपाल के जनकपुर और मिथिला के क्षेत्रों से आए हैं।

केरल आए PM मोदी तो आस्था और विकास का हुआ समागम: गुरुवयूर और त्रिप्रयार मंदिर में की पूजा, ₹4000 करोड़ की विकास परियोजनाएँ, मलयालम सुपरस्टारों से भी मिले

केरल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आस्था और विकास के समागम का उदाहरण फिर से पेश किया है। केरल दौरे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुबह के समय श्रीगुरुवयूर और त्रिप्रयार श्री रामास्वामी मंदिर में पूजा अर्चना की, तो उसके बाद राज्य और देश को हजारों करोड़ रुपयों की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इस बीच, वो एक विवाह समारोह में भी शामिल हुए। पीएम मोदी का पूरा केरल दौरा एक तरह से आस्था और देश के विकास का अद्भुत संयोग बनाता दिखा।

पीएम मोदी ने की श्री गुरुवयूर मंदिर में पूजा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुबह 7:30 के आसपास मशहूर श्री गुरुवयूर मंदिर में पूजा अर्चना की। खुद पीएम मोदी ने इसकी तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर शेयर की है। पीएम मोदी ने लिखा, “पवित्र गुरुवायुर मंदिर में प्रार्थना की। इस मंदिर की दिव्य ऊर्जा अपार है। मैंने प्रार्थना की कि हर भारतीय खुश और समृद्ध रहे।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्री गुरुवयूर मंदिर में नव-विवाहित जोड़ों से भी मिले और उन्हें शुभकामनाएँ दी। इन जोड़ों में मलयालम सुपरस्टार और बीजेपी नेता सुरेश गोपी की बेटी और दामाद भी शामिल रहे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भले ही सुबह सुबह 7.30 मंदिर पहुँचे थे, लेकिन उनके स्वागत में बीजेपी कार्यकर्ता उमड़ पड़े। उन्होंने पीएम मोदी का जोरदार स्वागत किया। पीएम मोदी ने सभी कार्यकर्ताओं को धन्यवाद भी दिया। उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा, “सुबह का समय था लेकिन गुरुवयूर में लोग बड़ी संख्या में मुझे आशीर्वाद देने आए। मैं इस गर्मजोशी की सराहना करता हूँ और यह मुझे लोगों के लिए और भी अधिक मेहनत करने के लिए प्रेरित करता है।”

गुरुवयूर से त्रिप्रयार श्री रामास्वामी मंदिर पहुँचे पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवयूर मंदिर से निकल केरल में भगवान राम के मशहूर त्रिप्रयार श्री रामास्वामी मंदिर पहुँचे। ये मंदिर भी त्रिशूर में ही है। यहाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूजा अर्चना की। इस मंदिर का संबंध भगवान कृष्ण और द्वारका नगरी से भी है।

भगवान राम को समर्पित है त्रिप्रयार श्री रामास्वामी मंदिर

त्रिप्रयार श्री रामास्वामी मंदिर भगवान राम को समर्पित है। इस मंदिर में भगवान राम की 6 फुट ऊँची प्रतिमा है। इस मंदिर के मुख्य देवता राम हैं, जो विष्णु के सातवें अवतार हैं, जिनकी चार भुजाओं में शंख, चक्र, धनुष और माला हैं। भगवान राम यहाँ राजघराने के पीठासीन देवता हैं, जिन्हें ‘ब्रह्मांड में सभी देवताओं से ऊपर’ का स्थान दिया गया है।

भगवान राम को यहाँ पर त्रिप्रयार थेवर या त्रिप्रयारप्पा के रूप में भी जाना जाता है। यह मंदिर करुवन्नूर नदी के तट पर स्थित है, जिसे त्रिप्रयार से बहते हुए थेवरा नदी कहा जाता है। मंदिर परिसर में भगवान राम के साथ-साथ दक्षिणमुखी शिव, गणेश और कृष्ण के मंदिर स्थापित हैं। यहाँ हनुमान की भी पूजा होती है। इस मंदिर का संबंध द्वापर युग में भगवान कृष्ण से भी जोड़ा जाता है।

पीएम मोदी की मौजूदगी में त्रिप्रयार श्री रामास्वामी मंदिर में सांस्कृतिक प्रस्तुति भी दी गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने त्रिप्रयार श्री रामास्वामी मंदिर में ‘मलयालम रामायण’ और सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करने वाले कलाकारों को सम्मानित भी किया।

इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के विकास को गति देने वाले कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए निकल पड़े। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोच्चि में 4000 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य की तीन प्रमुख परियोजनाओं कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) में न्यू ड्राई डॉक (NDD), सीएसएल की इंटरनेशनल शिप रिपेयर फैसिलिटी (ISRF) और पुथुवाइपीन, कोच्चि में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड के एलपीजी आयात टर्मिनल का उद्घाटन किया। इनसे भारत के पत्‍तन, पोत परिवहन और जलमार्ग क्षेत्र में पूरी तरह बदलाव लाने और इसका क्षमता निर्माण कर इसे आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी।

इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “आज जब भारत वैश्विक व्यापार का केंद्र बन रहा है, तब हम अपनी समुद्री शक्ति बढ़ा रहे हैं। आज देश को अपना सबसे बड़ा ड्राई डॉक (एनडीडी) मिला। इसके अलावा, जहाज निर्माण, जहाज मरम्मत के बुनियादी ढाँचे और LPG आयात टर्मिनल का भी उद्घाटन किया गया है। इन नई सुविधाओं के साथ, शिपयार्ड की क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी। मैं केरल के लोगों को इन सुविधाओं के लिए बधाई देता हूँ।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंच से त्रिप्रयार श्री रामस्वामी मंदिर के बारे में भी बात की। पीएम मोदी ने कहा कि कुछ दिनों पहले मैंने अयोध्या में वाल्मीकि इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन करते समय भारत में भगवान राम से जुड़े 4 मंदिरों का जिक्र किया था। आज उसी पवित्र त्रिप्रयार श्री रामास्वामी मंदिर में आकर पूजा करने का सौभाग्य मिला है।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने संबोधनों में कई बार इस बात पर जोर डाल चुके हैं कि हमें अपनी जड़ों से जुड़कर विकास की यात्रा तय करनी है। हमें अपने गौरवशाली इतिहास को दरकिनार करने की जगह अपने पूर्वजों से आशीर्वाद लेकर विकास के पथ पर आगे बढ़ना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का केरल दौरा उनके इस कथन के अनुरूप ही प्रतीत होता है

दरगाह की आड़ में कब्जाई करोड़ों की जमीन, खड़ा किया मस्जिद: छत्तीसगढ़ में करबला कमेटी पर आरोप, अधिकारी ने ‘राजनैतिक दबाव’ को बताया कार्रवाई न करने की वजह

छत्तीसगढ़ के दुर्ग-भिलाई में सरकारी जमीन पर कब्जा करके उस पर मस्जिद बनाने की बात सामने आई है। ये भी पता चला है कि जमीन सिर्फ मस्जिद के लिए नहीं हड़पी गई बल्कि वहाँ आसपास बनी दुकानें भी कब्जाई गई जमीन पर ही बनी हैं, जिनसे अब किराया वसूला जाता है।

इस पूरे मामले पर हाल में दैनिक भास्कर ने रिपोर्ट प्रकाशित की है। हैरान करने वाली बात तो यह है कि जिस नगर निगम पर सरकारी जमीन को कब्जे से छुड़ाने की जिम्मेदारी है उसके कार्यालय के पास भी कुछ जगह जमीनों पर कब्जा हो चुका है

भास्कर के मुताबिक, पूरा मामला भिलाई के जोन कार्यालय का है। जहाँ मजार की आड़ में करोड़ों की जमीन पर कब्जा करके मस्जिद बना दी गई। इसके बाद मस्जिद और मजार की आड़ में सड़कों के दोनों तरफ दुकानें बनवा दी गईं। यहाँ मजहबी कार्यों की आड़ में बड़े पैमाने पर व्यवसाय भी किया जा रहा है।

इन अवैध कब्जों की शिकायत अब बीजेपी नेता एसके मोबिन उर्फ बाबर ने की है। उन्होंने अवैध कब्जे की शिकायत दुर्ग जिले के कलेक्टर, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेम प्रकाश पाण्डेय, वैशाली नगर के विधायक रिकेश सेन से भी की है। बाबर ने अपनी शिकायत में कहा है कि मुस्लिम समाज के लोगों ने सैलैनी बाबा की मजार से लगी सुपेला-भिलाई जीई रोड की बेशकीमती जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया है।

बाबर ने करबला कमेटी भिलाई के अध्यक्ष गुलाम सैलानी पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि उसने दरगाह की आड़ में करोड़ों की जमीन पर कब्जा कर दुकानें बनवा दी हैं और इसका किराया वसूलता है। इससे नगर निगम को भी नुकसान हो रहा है। बाबर ने कहा कि यहाँ मजार तो बहुत पहले से है, लेकिन बाकी के निर्माण कार्य कब्जा करके किए गए हैं। ऐसे में मजार को छोड़कर बाकी की सरकारी जमीन को कब्जामुक्त कर भूमाफिया पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।

रिपोर्ट के मुताबिक, यहाँ जोन कार्यालय के दोनों तरफ भी कब्जे कर लिए गए हैं। जोन कार्यालय से सुपेला की तरफ करबला कमेटी से जुड़े लोगों ने जमीन कब्जाई है, तो पावर हाउस की तरफ दूसरे लोगों ने मस्जिद-मजार की आड़ में काफी जमीन कब्जा ली है। इन शिकायतों पर जोन कमिश्नर अमिताभ शर्मा का कहना है कि 2 बार समाज के लोगों को नोटिस जारी किया जा चुका है। उन्होंने भवन अनुज्ञा अधिकारी को पत्र भी लिखा है। वहीं, एक अधिकारी ने कहा कि राजनीतिक दबावों के चलते अब तक कोई कार्रवाई नहीं हो पा रही थी।

साल 1957 से मुस्लिम समाज का कब्जा

इस मामले में करबला कमेटी के अध्यक्ष गुलाम सैलानी का भी बयान आया है। गुलाम सैलानी का दावा है कि उस जमीन पर 1957 से ही मुस्लिम समाज का कब्जा है। इससे जुड़ा केस भी चला है। यहाँ 78 डिसमिल जमीन कागजों पर है। हमने निगम के नोटिस पर उन्हें जवाब दे दिया है।

महाराज कंस के दरबार में हाजिरी लगाते हैं कलेक्टर और एसपी, देते हैं अपने कामों का ब्यौरा: जानिए ओडिशा की धनुयात्रा का महत्व

सोमवार (15 जनवरी 2024) को ओडिशा के बरगढ़ में सालाना होने वाली धनु यात्रा प्रारम्भ हुई। भगवान कृष्ण के बाल्यकाल को विशेष तरीके से मनाए जाने वाली यह यात्रा आमतौर पर खुले आसमान के नीचे होने वाला विश्व का सबसे बड़ा थिएटर माना जाता है। इस त्यौहार के 76वें संस्करण का उद्घाटन बारगढ़ के सांसद सुरेश पुजारी ने किया।

झाँकी के पहले दिन कलाकार महाराज वासुदेव और महारानी देवकी के विवाह का अभिनय करते हैं। जिस दौरान कंस अपनी बहन का विवाह करा रहा होता है, उस दौरान उसे आकाशवाणी सुनाई देती कि देवकी का आठवाँ पुत्र ही उसका वध करेगा। इसके बाद क्रोधित कंस मथुरा में अपने पिता उग्रसेन का सिंहासन पलट देता है। उसके बाद अपनी बहन देवकी तथा वासुदेव को जेल में डाल देता है।

कृष्णलीला पर आधारित इस पूरे त्यौहार के दौरान बारगढ़ को मथुरा की तरह दिखाया जाता है। बारगढ़ के किनारे बहने वाली जीरा नदी को यमुना बनाया जाता है। इसके साथ ही लगे हुए अम्बापाली गाँव को गोप और वृन्दावन में बदला जाता है। इसी गाँव में बलदाऊ और भगवान कृष्ण का का जीवन नन्द और यशोदा के घर में बीता था।

बारगढ़ की यात्रा कई मायनों में ख़ास है। 11 दिनों तक चलने वाले इस त्यौहार के दौरान जो भी कलाकार कंस बनता है, उसे बारगढ़ का असली शासक भी बना दिया जाता है। इस दौरान वह कंस के रूप में डीएम, एसपी और अन्य सरकारी अधिकारियों को भी अपने पास बुलाकर उन्हें अपना काम सही से करने को कहता है।

इस त्यौहार के सम्मान में सरकारी कर्मचारी भी अपना भरपूर सहयोग देते हैं। वे महाराज कंस के दरबार में लगातार हाजिरी लगाते हैं और सरकारी कामों के बारे में उन्हें जानकारियाँ देते हैं। इस दौरान सरकारी अधिकारी कंस महाराज को बताते हैं कि वे उनके आदेश के तहत हर काम का सही से पालन कर रहे हैं।

यहाँ कृष्ण और बलराम को घर-घर बुलाकर पूजा की जाती है। जब वे मथुरा के लिए निकलते हैं तो वृन्दावन वाले दुखी होते हैं। कंस महाराज नगर में राजा की तरह अपनी यात्रा निकालते हैं और अपने दरबार में अतिथियों का स्वागत भी करते हैं। इस साल पूरे शहर में 14 अलग-अलग जगह पर मंच सजाया गया है। यहाँ पर कंस महाराज अपना दरबार लगाएँगे।

इस त्यौहार के अंतिम दिन कंस महाराज को कृष्ण भगवान के हाथों मरते दिखाया जाता है। इस वर्ष इस त्यौहार का समापन 25 जनवरी को होगा। इस यात्रा का मुख्य आकर्षण कंस महाराज बनने वाला कलाकार होता है। यह यात्रा 1947-48 में शुरू हुई थी। यात्रा को भारत की आजादी के जश्न के तौर पर शुरू किया गया था।

इस त्यौहार की ख़ास बात ये है कि यहाँ जो भी कलाकार कंस का रोल निभाता है, वह इसके समाप्त होने के बाद पुरी की यात्रा पर जाता है। वहाँ जाकर वह समुद्र में पवित्र डुबकी लगाता है और भगवान जगन्नाथ के मंदिर में जाकर उनसे माफ़ी माँगता है। वह माफ़ी इसलिए माँगता है क्योंकि कंस का अभिनय करने के दौरान उसे भगवान कृष्ण के विरुद्ध अपमानजनक भाषा का उपयोग करना पड़ता है।

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8 घंटे 20 मिनट के बाद खाना, बुजुर्ग-बच्चों को पानी तक नहीं: IndiGo पायलट के मार खाने वाले मामले में फ्लाइट-क्रू की अभद्रता की आँखोंदेखी

दिल्ली से गोवा जा रही इंडिगो फ्लाइट में पैसेंजर द्वारा पायलट को थप्पड़ रसीद करने के मामले में नया मोड़ आया है। दरअसल, फ्लाइट में सवार एक रशियन मॉडल और एक अन्य यात्री का आरोप है कि फ्लाइट के घंटों लेट होने पर भी इंडिगो के पायलट और केबिन क्रू का बर्ताव यात्रियों के साथ अच्छा नहीं था।

रूसी मॉडल और एक्टर एवगेनिया बेल्सकिया इंडिगो की इसी फ्लाइट नंबर 6E 2175 में सवार थी। इसी फ्लाइट के 28 साल के एक पैसेंजर सतीश कटारिया ने को-पायलट अनूप कुमार पर हमला किया था।

बेल्सकिया का कहना है कि अधिकतर पैसेंजर टेकऑफ़ में लगातार देरी की वजह से गुस्से में थे। उन्हें शुरू में बताया गया था कि फ्लाइट अपने तय समय से दो घंटे बाद रवाना होगी। हालाँकि, बाद में उन्हें बताया गया कि फ्लाइट 10 घंटे की देरी से उड़ेगी और बाद में इसमें 3 घंटे की और देरी हो गई।

बेल्सकिया के मुताबिक, इतने घंटे की देरी की वजह से कई पैसेंजर ने क्रू और पायलटों से सवाल करना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि को-पायलट अनूप कुमार ने पैसेंजर से कहा कि वो बहुत सारे सवाल पूछ रहे थे और यही वजह है कि फ्लाइट में देरी हुई।

बेल्सकिया ने आरोप लगाया कि को-पायलट के अभद्र तरीके से बात करने पर पैसेंजर सतीश कटारिया गुस्से में आ गए और उन्होंने पायलट पर हमला कर दिया। उन्होंने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर वीडियो शेयर कर लिखा, “मैं इस स्थिति को थोड़ा स्पष्ट करना चाहती हूँ। पायलट ने पैसेंजर्स के साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया और इस देरी के लिए उन्हें दोषी ठहराया, क्योंकि वो भी कई सवाल पूछ रहे थे। साथ ही क्रू भी अच्छा नहीं था! उन्होंने लोगों को खाना पानी तक नहीं दिया। पायलट को मारना गलत है। लेकिन क्रू बिल्कुल भी अच्छा नहीं था, इसलिए ऐसा हुआ।”

बेल्सकिया ने आगे कहा कि इंडिगो टीम कह रही थी कि फ्लाइट में एक घंटे लेट थी, लेकिन यह कम से कम 10 घंटे तक लेट हुई थी जब तक कि हमें प्लेन में चढ़ने की मंज़ूरी नहीं दी गई। रूसी मॉडल ने कहा, “मेरी टीम अपनी फ्लाइट के लिए 10 घंटे तक इंतजार करती रही थी, तभी एक शख्स तंग आ गया और इसके बाद उन्हें और इंतजार करना पड़ा। पुलिस उस आदमी को ले गई और उन्हें पायलट भी बदलना पड़ा।”

इसी वजह से 14 जनवरी, 2024 सुबह 7:40 बजे रवाना होने वाली इंडिगो की फ्लाइट आखिरकार रविवार शाम 6 बजे रवाना हुई। वहीं इस फ्लाइट में सवार एक अन्य पैसेंजर सनल विज ने भी अपने एक्स हैंडल पर लिखा, “मैं हिंसा का समर्थन नहीं करता, लेकिन इंडिगो ने फायदा उठाया और हमला करने वाले पैसेंजर ने जो किया उसकी आड़ में अपने सभी कुप्रबंधन और गलतियों को छुपाया।”

उन्होंने कहा कि उड़ान 6E2175, जो सुबह 7:40 बजे रवाना होने वाली थी वो कई घंटे की देरी का सामना करने के बाद शाम 05:35 बजे रवाना हुई। विज ने आगे कहा कि एक को पैसेंजर के तौर पर घटना का प्रत्यक्षदर्शी होने की वजह से वो अपना अनुभव शेयर करना जरूरी समझते हैं।

उन्होंने कहा, “लगभग 186 पैसेंजर्स जिनमें शिशु, छोटे बच्चे और बुजुर्ग शामिल थे, सबकी दोपहर 12:20 बजे (खराब मौसम की वजह से 5 घंटे की देरी के बाद) बोर्डिंग शुरू हुई, करीब 12:40 बजे तक बोर्डिंग पूरी करने के बावजूद फ्लाइट के डोर दोपहर 2:50 बजे तक खुले रहे थे।” विज ने कहा, “ग्राउंड स्टाफ ने देरी के लिए ATC (हवाई यातायात नियंत्रण) को भीड़ के वजह से फ्लाइट रवाना होने के लिए मंजूरी नहीं देने के लिए जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि पायलट ने दोपहर 1:30 बजे ऐलान किया कि वे क्रू मेंबर्स का इंतजार कर रहे हैं और फ्लाइट शीघ्र ही रवाना होगी।”

विज ने कहा कि इससे साफ हो गया कि ग्राउंड स्टाफ और क्रू ने गलत सूचना दी। उन्होंने आरोप लगाया कि क्रू के सदस्यों को गैर-पेशेवर रवैया अपनाते देखा गया। ये लोग ग्राउंड स्टाफ के साथ लंबी बातचीत में मशगूल थे। विज ने यह भी दावा किया कि पानी के लिए बुजुर्ग यात्रियों ने कई बार कहा, लेकिन इन लोगों ने इसे अनदेखा कर दिया क्योंकि वे अपनी बातचीत में मशगूल थे। उन्होंने आगे बताया कि क्रू के सदस्य देरी से दोपहर 2:40 बजे के करीब पहुँचे और प्लेन के दरवाजे बंद हो गए।

हालाँकि, प्लेन कुछ देर तक वहीं रहा। इस वजह से यात्रियों ने पूछताछ शुरू की और क्रू मेंबर्स के साथ बहस भी हुई। दोपहर 3.20 बजे को-पायलट देरी की वजह में बताने के लिए कॉकपिट से बाहर आए। इसी दौरान उन पर हमला हुआ।

विज ने कहा कि हिंसा अस्वीकार्य है, लेकिन इंडिगो के कुप्रबंधन, गैरपेशेवर रवैये और 185 पैसेंजर्स के घंटों तक बगैर भोजन के फँसे रहने के बारे में क्या? उन्होंने कहा कि उन्हें शाम 4:00 बजे के बाद भोजन मुहैया कराया गया था। वहीं को-पायलट पर हमला करने वाले सतीश कटारिया को सुरक्षाकर्मी ने तुरंत मौके पर पहुँच पकड़ लिया। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। कटारिया को दिल्ली पुलिस स्टेशन ले जाया गया, जहाँ से बाद में उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया।

उनके खिलाफ IPC की धारा 323 (जानबूझकर चोट पहुँचाने के लिए सजा), 341 (गलत तरीके से रोकने के लिए सजा) और 290 (सार्वजनिक उपद्रव पैदा करने के लिए सजा) और विमान नियमों की धारा 22 के तहत केस दर्ज किया गया है और जाँच शुरू कर दी गई है।

घटना के बाद इस तरह के हंगामे से बचने के लिए एहतियाती कदम के तौर पर नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने नई गाइडलाइन्स जारी की। उन्होंने एयरलाइंस कंपनियों से कहा कि उड़ानों में देरी पर यात्रियों के अपडेट देते रहो या तो फिर फ्लाइट को कैंसल कर दो। हमले का जिक्र करते हुए इंडिगो ने आंतरिक कमेटी के साथ चर्चा के बाद एक बयान जारी करते हुए कटारिया का नाम नो फ्लाई लिस्ट श्रेणी में शामिल करने का प्रस्ताव दिया है।

गिड़गिड़ाता रहा युवक, निहंग ने बेअदबी के शक में मार दिया, पंजाब पुलिस ने दर्ज किया गैर इरादतन हत्या का मामला

पंजाब के फगवाड़ा में स्थित एक गुरुद्वारे में निहंग सिख द्वारा बेअदबी के शक पर एक युवक की हत्या करने के मामले में नए खुलासे हुए हैं। ये जानकारी सामने आई है कि पंजाब पुलिस ने उस निहंग पर हत्या की जगह गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया है। मृतक के मारे जाने से पहले का एक वीडियो भी सामने आया है।

दरअसल, 16 जनवरी 2024 को फगवाड़ा के चौड़ा खूह गुरुद्वारा में एक युवक की हत्या एक निहंग सिख ने कर दी थी। निहंग सिख का कहना था कि उसने यह हत्या इसलिए की, क्योंकि उसे शक था कि यह युवक गुरुद्वारे में बेअदबी करने आया था। हत्या से पहले युवक की वीडियो भी बनाई गई थी।

निहंग सिख का नाम रमनदीप सिंह मंगूमठ है। रमनदीप सिंह के ऊपर पहले से ही कई मामले दर्ज हैं। उसके ऊपर एक सप्ताह पहले ही एक महिला से मारपीट करने का मामला दर्ज किया गया था। इससे पहले उसके ऊपर अमृतसर में एक अन्य निहंग सिख से लड़ने के आरोप में मामला दर्ज हुआ था।

कपूरथला जिले के शहर फगवाड़ा में युवक की हत्या करने वाले रमनदीप सिंह को पुलिस ने बड़ी मशक्कत के बाद गिरफ्तार किया था। सिख संगठनों की माँग मानते हुए अब पुलिस ने हत्या करने वाले निहंग पर ‘गैर इरादतन हत्या’ का मामला दर्ज किया है। उस पर धारा 304 लगाई गई है ना कि 302।

घटना के विषय में यह जानकारी सामने आई है कि मृतक युवक 16 जनवरी 2024 की रात 10:30 बजे गुरुद्वारे में आया था और बाथरूम उपयोग करने जा रहा था। हालाँकि, वह जब बहुत देर तक बाथरूम के बाहर खड़ा रहा तो गुरुद्वारे के ग्रंथी ने उसे पकड़ लिया और एक कमरे में बंद कर दिया।

कमरे में उससे पूछताछ की गई। इसका वीडियो भी बनाया गया। वीडियो में युवक बताता है कि सुक्खी नाम के एक व्यक्ति ने उसे ₹2000-₹3000 देकर गुरुद्वारे में बेअदबी करने भेजा था। उसने बताया कि सुक्खी ने उसे यहाँ गालियाँ लिखने को कहा था। वह इस बीच यह भी कहता है कि उसे पैसा देकर भेजा जरूर गया था, लेकिन उसने कोई बेअदबी नहीं की।

इस दौरान युवक यह कहता रहा है कि वह एक मेहनतकश आदमी है और उसने कोई भी बेअदबी नहीं की। बताया गया कि युवक को बंद करके एक पदाधिकारी पुलिस को सूचना देने गए थे। इसी बीच रमनदीप सिंह ने उसकी बेअदबी के नाम पर किसी धारदार हथियार से हत्या कर दी। हालाँकि, पुलिस ने कहा है कि उसे गुरुद्वारे में बेअदबी के कोई भी निशान नहीं मिले हैं।

गुरुद्वारे के पदाधिकारियों ने दावा किया कि युवक ने निहंग सिख पर पहले हमले की कोशिश की थी। इसी कारण से खुद को बचाने के लिए निहंग ने हत्या की। हालाँकि, युवक को मारने से पहले निहंग ने कमरा बंद कर लिया था। पुलिस का कहना है कि यदि आगे की जाँच में यह सामने आता है कि निहंग ने जानबूझकर हत्या की है तो उस पर हत्या का मामला दर्ज करेंगे।

जिस बिहार पर ₹2.90 लाख करोड़ का कर्ज, बजट ₹2.6 लाख करोड़… वहाँ की नीतीश सरकार ने किया 90 लाख परिवारों को ₹2-2 लाख देने का वादा

बिहार में राजद और जदयू के गठबंधन वाली सरकार ने निर्णय लिया है कि वह राज्य के 94 लाख गरीब परिवारों को ₹2-2 लाख की आर्थिक सहायता देंगे। इस फैसले को 16 जनवरी, 2024 को हुई कैबिनेट बैठक में सहमति दे दी गई। इस योजना के लिए अभी ₹1250 करोड़ की स्वीकृति दी गई है।

नीतीश सरकार यह लाभ हाल ही में संपन्न हुई जातिगत जनगणना के आँकड़ों के आधार पर देगी। बिहार सरकार की जातिगत जनगणना में राज्य में 94 लाख 33 हजार परिवार ऐसे पाए गए थे जो गरीब की श्रेणी में आते थे। बिहार सरकार ने ऐसे परिवारों को गरीब का दर्जा दिया है जिनकी मासिक आय ₹6000 से कम है।

नीतीश सरकार का कहना है कि वह अगले पाँच वर्षों में इन 94 लाख परिवारों के एक सदस्य को अपना कोई छोटा उद्यम करने के लिए ₹2 लाख की आर्थिक सहायता प्रदान करेगी। बिहार सरकार ने इसे ‘बिहार लघु उद्यमी योजना’ का नाम दिया है। यह धनराशि गरीब परिवारों को तीन किश्तों में दी जाएगी।

योजना के क्रियान्वन के लिए बिहार सरकार ने वित्त वर्ष 2023-24 में ₹250 करोड़ और वित्त वर्ष 2024-25 में ₹1000 करोड़ देने की घोषणा भी कर दी है। नीतीश सरकार का यह कदम लोकसभा चुनावों से पहले आया है और इसे वोटरों को लुभाने की तरकीब माना जा रहा है।

हालाँकि, इस योजना के ऊपर प्रश्न भी खड़े हो रहे हैं। बिहार सरकार ने हालिया जनगणना के हिसाब से ही बताया था कि उनके राज्य में लगभग 2.7 करोड़ परिवार रहते हैं। इसमें से 94 लाख यानी लगभग एक तिहाई ऐसे हैं जो कि गरीब की श्रेणी में आते हैं।

इन सभी परिवारों को यदि ₹2 लाख की सहायता दी जाएगी तो यह धनराशि ₹1.88 लाख करोड़ बनेगी जो कि एक बड़ी संख्या है। प्रश्न उठ रहे हैं कि बिहार सरकार यह धनराशि कहाँ से जुटाएगी।

बिहार सरकार ने यह योजना अगले पाँच वर्षों में पूरी करने की बात कही है। यदि बिहार सरकार सच में पाँच वर्षो में यह योजना पूरी करने का लक्ष्य रखती है तो भी यह स्कीम जमीन पर उतरने से दूर दिखाई पड़ती है। पाँच वर्षों में योजना पूरी करने के लिए बिहार सरकार को हर वर्ष लगभग ₹37000 करोड़ का आवंटन करना पड़ेगा। इस धनराशि का इंतजाम भी बिहार के लिए करना मुश्किल है।

बिहार सरकार का कुल बजट वित्त वर्ष 2023-24 में ₹2.62 लाख करोड़ था। ऐसे में ₹37,000 करोड़ आवंटित करने के लिए बजट में कम से कम 15% की बढ़ोतरी करनी पड़ेगी। बिहार को अपने यहाँ कर वसूली से इतना पैसे मिलता नहीं है और कर्ज से भी यह पैसा जुटाया नहीं जा सकता।

संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, बिहार पर पहले से ही लगभग ₹2.90 लाख करोड़ का कर्ज है। यह बिहार की कुल जीडीपी का लगभग 38% है। कर्ज लेने के लिए लागू होने वाले नियमों को देखा जाए तो बिहार का कर्ज पहले ही सीमा से अधिक है। ऐसे में और कर्ज बिहार सरकार कैसे ले सकती है।

इन सभी परिस्थितयों को देखते हुए, यह योजना भले ही कागजों और भाषणों में कुछ दिन चल जाए लेकिन आर्थिक रूप से देखा जाए तो लगभग 95 लाख परिवारों को ₹2 लाख देना काफी मुश्किल टास्क मालूम पड़ता है। ऐसे में बिहार के मुख्यमंत्री इस योजना का लक्ष्य वोट बटोरना ही लग रहा है ना कि गरीबी हटाना।

तीस्ता सीतलवाड़ की NGO को पैसा देता था मणिशंकर अय्यर की बेटी का थिंक टैंक, विदेशी फंडिंग में भी गड़बड़ी: FCRA लाइसेंस कैंसिल

केंद्र सरकार ने कॉन्ग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर की बेटी यामिनी पर बड़ी कार्रवाई की है। गृह मंत्रालय ने नियमों की अवहेलना करने के कारण यामिनी अय्यर के नेतृत्व में चलने वाले एक थिंक टैंक का फॉरेन कॉन्ट्रिब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (FCRA) रद्द कर दिया है। बता दें कि यामिनी सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च (CPR) नाम से एक थिंक टैंक संचालित करती हैं।

FCRA लाइसेंस निलंबित होने के बाद CPR अब विदेशों से फंड नहीं ले सकेगा। विदेशों से धन प्राप्त करने के लिए सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं को FCRA पंजीकरण कराना जरूरी होता है। सरकार को पता चला कि यह संस्था अनुदान हासिल करने में नियमों की लगातार अवहेलना कर रही है। CPR केंद्रीय एजेंसियों की रडार पर लंबे समय से रहा है।

यामिनी अय्यर सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च की अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) हैं। दरअसल, CPR का कार्यालय दिल्ली में है, जो 21वीं सदी की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए पॉलिसी से जुड़े मुद्दों पर कथित शोध का काम करता है। CPR को घरेलू तथा कई अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से भारी अनुदान मिलता है।

सितंबर 2022 में आयकर विभाग ने भी विदेशी फंडिंग को लेकर CPR का सर्वे किया था। मार्च 2023 में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने CPR के FCRA लाइसेंस को 6 महीने के लिए निलंबित कर दिया था। इतना ही नहीं, भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) सहित कई एजेंसियों द्वारा इस थिंक टैंक की नियमित तौर पर जाँच और ऑडिट की गई। इसके बाद आखिरकार संस्था के लाइसेंस को रद्द करने का निर्णय लिया गया।

मंत्रालय के मुताबिक, CPR को फोर्ड फाउंडेशन सहित कई विदेशी संस्थानों से फंडिंग मिली थी। इतना ही नहीं, गुजरात दंगे को लेकर देश में कई तरह की प्रोपेगेंडा फैलाने वाली तीस्ता सीतलवाड़ की एनजीओ को भी यामिनी अय्यर के थिंक टैंक CPR ने चंदा दिया था। गृह मंत्रालय ने साल 2016 में तीस्ता के एनजीओ सबरंग ट्रस्ट का FCRA लाइसेंस रद्द कर दिया था।

दरअसल, समाज सेवा एवं शोध आदि के नाम पर चलने वाले एनजीओ कई तरह की गड़बड़ी और भारत विरोधी रूख के कारण चर्चा में रहे हैं। इनमें पर कई संस्थानों पर सरकार ने कार्रवाई भी की है। इनमें ऑक्सफैम इंडिया, न्यूज वेबसाइट न्यूजक्लिक, बेंगलुरु स्थित मीडिया फाउंडेशन सहित कई संस्थान विदेशी फंडिंग को लेकर जाँच के दायरे में हैं। ऑक्सफैम इंडिया की FCRA लाइसेंस भी रद्द हो चुकी है।