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अयोध्या का महंत दुष्कर्म केस में गिरफ्तार: प्राण-प्रतिष्ठा से पहले खबर को लोग कर रहे वायरल – सनातन को बदनाम करने की साजिश या फेक न्यूज, जानिए सच

राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के दिन जिस तरह नजदीक आ रहे हैं वैसे-वैसे विरोधी दल लगातार सनातन धर्म को बदनाम करने में लगे हैं। इसी क्रम में खोज-खोजकर पुरानी खबरें सोशल मीडिया पर शेयर की जा रही हैं। हाल में देखा गया कि एक अयोध्या के एक महंत के गिरफ्तार होने की खबर फैलाने का काम हुआ।

खबर की हेडलाइन है- अयोध्या के चंद्रहरि मंदिर का महंत कृष्णकांताचार्य दुष्कर्म में गिरफ्तार।

इस खबर की तस्वीर को उस प्रतीक पटेल ने शेयर किया है जो खुद को ओबीसी समाज की आवाज बताता है।

प्रतीक पटेल ने प्राण प्रतिष्ठा से पहले फैलाई पुरानी खबर

उसके एक्स अकॉउंट पर मौजूद जानकारी से पता चलता है कि उसका झुकाव जदयू की तरफ है। उसके बायो में उसने खुद को नीतीश कुमार का सैनिक बता रखा है और जनता दल यूनाटिड में खुद को सोशल एक्टिविस्ट कहा है।

प्रतीक पटेल का एक्स अकॉउंट पर मौजूद जानकारी

इस खबर को खुद को विचारक, इतिहास पाठक, सामाजिक कार्यकर्ता, मानवतावादी, समाजवादी, कर्पूरीवादी, मंडलवादी, अंबेडकरवादी बताने वाले और नीतीश सरकार के प्रति खास झुकाव रखने वाले भानू नंद ने भी बड़ी चालाकी के साथ इस खबर को फैलाने का काम किया।

भानू नंद का एक्स पर बायो

भानू नंद ने पोस्ट में लिखा, “खबरदार जो किसी ने कुछ उल्टा सीधा लिखा! अंधभक्तों की भावनाएँ बहुत जल्दी आहत हो जाती हैं, हम उनकी भावनाओं का पूरा ख्याल रखेंगे। क्या आप लोग उनकी भावनाओं का ख्याल रखेंगे?”

तथाकथित बुद्धिजीवी की हरकत

अपने आपको वकील बताने वाले शैलेश वर्मा ने इस खबर को साझा करते हुए लिखा- “मामला अयोध्या के महंत कृष्णकांतचार्य का है जिनकी उम्र लगभग 60 वर्ष है। इस मामले में अंधभक्तों की भावनाएं कभी आहत नही होंगी क्योंकि अंधभक्तों के घर वाले ही ऐसे बाबाओं को ज्यादा पसंद करते है। अब रामराज स्थापित हो रहा है तो सारे भक्त चुप्पी मार जाएँगेl”

वरिष्ठ वकील बताने वाले शैलेश ने फैलाई पुरानी खबर

5 साल पुरानी खबर की जा रही प्राण-प्रतिष्ठा से पहले शेयर

तमाम कुत्सित मानसिकता के लोग हैं जो राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा से पहले इस खबर से ऐसा दिखाने का प्रयास कर रहे हैं कि जिस अयोध्या में राम मंदिर बन रहा है, वहाँ वर्तमान समय में महंत पद पर पैदा शख्स बलात्कार मामले में गिरफ्तार हो रहा है। नीचे खबरों की तारीख देख सकते हैं कि सारी 1 जनवरी 2019 की है।

जबकि, हकीकत तो यह है कि ये मामला साल 2018-19 का है, जिसे घटिया मंशा के साथ आज के समय में प्रासंगिक बनाकर पेश करने का प्रयास हो रहा है। ऐसी हरकतों के विरुद्ध सोशल मीडिया पर अयोध्या पुलिस को शिकायत दी जा रही है। कहा जा रहा है कि 5 साल पुरानी तस्वीरें अभी किस खास मकसद से शेयर हो रही हैं इसका पता लगाया जाए और माहौल खराब करने में जुटे लोगों पर एक्शन हो।

26 साल की ‘कच्ची उम्र’ का मर्द, लड़की 13 साल की… महिला जज ने इनके बीच सेक्स को नहीं माना वासना, कहा प्रेम में बने यौन संबंध

बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ ने 13 साल की एक नाबालिग लड़की से बलात्कार के आरोप में गिरफ्तार शख्स को जमानत दे दी। कोर्ट ने तर्क दिया कि नाबालिग लड़की के साथ 26 वर्षीय आदमी ने इसलिए यौन संबंध बनाए, क्योंकि दोनों के बीच प्रेम प्रसंग था, ना कि वासना। वहीं, विरोधी पक्ष ने कहा कि चूँकि लड़की नाबालिग है, इसलिए यौन संबंधों के लिए उसकी सहमति कोई मायने नहीं रखती।

मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति उर्मिला जोशी फाल्के ने कहा कि मौजूदा हालात में लड़की नाबालिग थी, फिर भी पुलिस को दिए गए बयान में लड़की ने अपनी मर्जी से माता-पिता का घर छोड़ा था। नाबालिग लड़की ने पुलिस को दिए गए बयान में आरोपित व्यक्ति के साथ अपने ‘प्रेम संबंध’ को स्वीकार किया था।

अदालत ने यह भी कहा कि नाबालिग लड़की आरोपित के साथ विभिन्न स्थानों पर रही और उसने कोई शिकायत नहीं की कि उसे जबरदस्ती ले जाया गया। कोर्ट ने आगे कहा कि इससे स्पष्ट है कि नाबालिग प्रेम संबंधों के कारण आरोपित के साथ गई, जो कि 26 साल की कच्ची उम्र (Tender Age) का है। ऐसे प्रेम संबंधों के कारण वे एक हो गए।

जस्टिस जोशी फाल्के ने कहा, “आवेदक की 26 साल की कच्ची उम्र का है और प्रेम संबंध के कारण वे एक साथ आए। ऐसा लगता है कि यौन संबंध की कथित घटना दो युवाओं के बीच आकर्षण के कारण है और ऐसा नहीं है कि आवेदक ने ऐसा ‘वासना के कारण पीड़िता पर यौन हमला किया’।”

वहीं, लड़की पक्ष ने कहा कि आरोपित नाबालिग लड़की के पड़ोस में रहता था और जिस समय यह घटना हुई उस समय वह सिर्फ 13 साल की थी। दरअसल, 23 अगस्त 2020 को लड़की अपने सहपाठी से किताब लाने के बहाने घर से निकली, लेकिन वह लौटकर नहीं आई। परिजनों ने आसपास खोजा, लेकिन उसका पता नहीं चला।

थक-हारकर नाबालिग के परिजनों ने अमरावती जिले के अंजनगाँव सुर्जी पुलिस स्टेशन में इस संबंध में FIR दर्ज कराई। पुलिस ने आरोपित शख्स के खिलाफ भारतीय दंड संहिता के तहत बलात्कार और POCSO के तहत मुकदमा दायर कर लिया। पुलिस जाँच में पता चला कि लड़की आरोपित के साथ घर से भागी है और दोनों बेंगलुरु में रह रहे हैं।

आखिरकार पुलिस ने आरोपित को 30 अगस्त 2020 को गिरफ्तार कर लिया गया। तब से वह हिरासत में था। वहीं, आरोपित ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की सुनवाई के दौरान दलील दी कि लड़की ने अपनी मर्जी से घर छोड़ा था और यौन संबंध बनाने में कोई जबरदस्ती नहीं हुई।

दूसरी ओर राज्य सरकार ने दलील दी कि मामला जघन्य है, क्योंकि वो नाबालिग है। इसलिए यौन संबंध के लिए उसकी सहमति अमान्य है। हालाँकि, न्यायालय ने इन तथ्यों को ध्यान में रखा और यह भी कहा कि मुकदमे में अभी कोई प्रगति नहीं हुई। हालाँकि, इस मामले में आरोप पत्र साल 2020 में ही दायर किया गया था।

एक तरफ पकड़ौआ ब्याह, दूसरी ओर प्रेम विवाह वाले बेटी-दामाद-नातिन की एक साथ हत्या: कितना ढोंगी है बिहार का समाज

बिहार में प्यार करके शादी करने, घर बसाने के लिए सजा के तौर पर न सिर्फ पति-पत्नी को मौत की नींद सुलाई जाती है बल्कि 2 साल की उनकी बेटी को भी मार डाला जाता है। वहीं दूसरी ओर लड़के को उठा कर जबरन किसी लड़की से पकड़ौआ विवाह करा देना इसी समाज को स्वीकार हो जाता है। बिहार के जमुई और नौगछिया के हालिया मामले यहाँ के समाज के दोहरे रवैये की ओर इशारा करते हैं।

भागलपुर जिले के नौगछिया में तीन साल बाद चंदन कुमार की उसके ससुर ने पूरे परिवार सहित इसलिए हत्या कर दी क्योंकि उन्होंने उनकी बेटी के साथ प्यार करने के बाद शादी कर परिवार बसाया था। उधर दूसरी तरफ जमुई में BPSC शिक्षक मुकेश कुमार वर्मा का पकड़ौआ विवाह करा डाला।

समाज का ये कैसा रवैया है? यहाँ एक लड़की का परिवार मना करने वाले शख्स से जबरन अपनी बेटी का विवाह करवा कर खुश हो जाता है, लेकिन उनकी बेटी से प्यार कर शादी करने वाले दामाद के खून का प्यासा हो जाता है।

नवगछिया में चंदन कुमार नाम के दामाद को उनके ससुर पप्पू सिंह ने बेटी चांदनी और दो साल की नातिन सहित मौत के घाट उतार डाला। पप्पू सिंह ने चंदन के सिर पर लोहे की रॉड से वार किया और इसके बाद उसने बेटे धीरज कुमार को बुलाकर तीनों पर गोलियाँ बरसा दीं।

इस मामले में साल 2021 में चांदनी और चंदन दोनों गाँव से चले गए थे और दोनों ने शादी कर ली थी। तीन साल बाद चंदन अपने बीमार पिता को देखने परिवार सहित गाँव लौटे थे। इसी दौरान अपने नए घर वापस जाते समय उनके सुसराल वालों ने पूरे परिवार को मौत की सजा दी।

चंदन के बड़े भाई केदार नाथ सिंह ने कहा, “मेरे भाई को चांदनी से प्यार हो गया और उसने उससे शादी कर ली। वो दोनों एक साथ खुश थे। गोली लगने से कुछ देर पहले मेरा भाई, उसकी पत्नी और उनकी बेटी हमारे बीमार पिता को देखने आए थे। मेरी भाभी के पिता और भाई ने उन्हें मार डाला और मौके से भाग गए।”

इस घटना पर नौगछिया के एसपी सुशांत कुमार सरोज ने कहा कि दोनों ने 2021 में भागकर शादी कर ली थी क्योंकि चांदनी के परिवार ने उनके रिश्ते को कभी मंजूरी नहीं दी थी। दोनों एक ही गाँव के थे और दोनों को 20 साल की उम्र में एक-दूसरे से प्यार हो गया था। पुलिस के अनुसार उन्हें 11 जनवरी 2024 की शाम 4 बजे इस हत्याकांड की खबर मिली।

दूसरी घटना बिहार के ही जमुई जिले के गिद्धौर की है। यहाँ बुधवार (10 जनवरी, 2024) की रात गिद्धौर के ऐतिहासिक पंच शिव मंदिर में गाँव वालों ने BPSC शिक्षक मुकेश कुमार वर्मा का पकड़ौआ विवाह करा डाला।

जानकारी के मुताबिक, चकाई प्रखंड के बेलदारी गाँव के रहने वाले सत्यनारायण वर्मा के पुत्र मुकेश की दो साल पहले पूर्णिमा कुमारी उर्फ सपना नाम की लड़की से शादी तय हुई थी। बताया जा रहा है कि दोनों साल 2015 से एक-दूसरे के प्यार करते थे। इसी वजह से परिवार वालों ने दोनों के विवाह का फैसला लिया था। लेकिन अब BPSC शिक्षक मुकेश कुमार वर्मा का पकड़ कर विवाह कर दिया गया… मतलब बिहारी शब्दावली में उनका पकड़ौआ विवाह किया गया।

मुकेश 2023 में बीपीएससी परीक्षा पास कर गिद्धौर प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय बनझुलिया में सहायक शिक्षक बन गए। प्रेमिका पूर्णिमा का आरोप है कि इसी के बाद से मुकेश बदल गए। उनके अनुसार पहले घंटों बातें करने वाले मुकेश ने उनका फोन उठाना ही बंद कर दिया।

पूर्णिमा का कहना है कि मुकेश की शादी तोड़ने की जिद पर कई बार गाँव में पंचायत बुलाई गई, लेकिन वो शादी करने के लिए नहीं माने। प्रेमिका ने ये भी बताया कि दिसंबर 2023 में सुबूतों के साथ उसने पुलिस में मुकेश के खिलाफ शिकायत दर्ज की थी, लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

मजबूर होकर घरवालों ने बुधवार की रात मुकेश को पकड़कर पंच शिव मंदिर में हिंदू रीति रिवाज से उनकी शादी करा दी। दोनों की शादी का वीडियो वायरल है। इसमें मुकेश कह रहे हैं, “मुझे मार दीजिए, ये हमको ब्लैकमेल कर रही थी फोटो रखने की वजह से और अभी जब जॉब लगा तो शादी करने के लिए मेरे पीछे पड़ गई है।”

वो आगे कहते हैं, “2018 का फोटो दिखा रहा। आप लोगों को वही फोटो दिखा-दिखा कर हमें ब्लैकमेल किया। वो बर्थडे का फोटो था। हम इसके साथ खुश नहीं हैं। जबरदस्ती शादी करा भी देंगे तो कोई फायदा नहीं।”

व्रत, नियम और कठोर तपस्या… राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा से पहले PM मोदी करेंगे 11 दिन का अनुष्ठान: नासिक के पंचवटी से होगा आरंभ, जानें क्या है इसका महत्व

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा से पूरे 11 दिन पहले एक संदेश जारी किया है। इस संदेश में उन्होंने बताया कि वो मंदिर में रामलला की प्रतिष्ठा से पहले 11 दिन का अनुष्ठान करने जा रहे हैं। इस दौरान वह कुछ नियमों का पालन करेंगे। उनके इस अनुष्ठान की शुरुआत नासिक के पंचवटी से होगी जहाँ भगवान श्रीराम ने काफी समय बिताया था।

नमो एप पर अपना संदेश जारी करते हुए उन्होंने कहा, “प्रभु ने मुझे प्राण प्रतिष्ठा के दौरान सभी भारतवासियों का प्रतिनिधित्व करने का मौका दिया है। इसे ध्यान में रखते हुए मैं आज से 11 दिन का विशेष अनुष्ठान आरंभ कर रहा हूँ और मैं सभी जनता-जनार्दन से आशीर्वाद का आकांक्षी हूँ।”

प्रधानमंत्री ने भावुक होते हुए कहा, “इस समय मेरे लिए अपनी भावनाओं को शब्दों में कह पाना बहुत मुश्किल है, लेकिन मैंने अपनी तरफ से एक प्रयास किया है…हमारे शास्त्रों में कहा गया है कि ईश्वर के यज्ञ के लिए स्वयं में भी दैवीय चेतना जगानी होती है। इसके लिए व्रत और कठोर नियम बताए गए हैं। जिन्हें प्राण प्रतिष्ठा से पहले पालन करना होता है। इसलिए, आध्यात्मिक यात्रा की कुछ तपस्वी आत्माओं और महापुरुषों से मुझे जो मार्गदर्शन मिला है, उन्होंने जो यम-नियम सुझाए हैं, उसके अनुसार ये अनुष्ठान करूँगा।

पीएम ने बताया कि उनका ये अनुष्ठान नासिक के पंचवटी से आरंभ होगा। उन्होंने कहा, “मेरा ये सौभाग्य है कि 11 दिन के अपने अनुष्ठान का आरंभ, मैं नासिक धाम-पंचवटी से कर रहा हूँ। पंचवटी, वो पावन धरा है, जहाँ प्रभु श्रीराम ने काफी समय बिताया था।”

अपनी बात रखते हुए पीएम मोदी ने माँ हीराबेन को याद किया जो हमेशा राम नाम जपती रहती थीं। इस दौरान उन्होंने आज के दिन स्वामी विवेकानंद और जीजाबाई की जयंती होने को भी सुखद संयोग बताया।

नासिक के पंचवटी से होगा अनुष्ठान की शुरुआत, क्यों हैं इसका महत्व

पंचवटी महाराष्ट्र के नासिक में स्थित जगह है। जब भगवान राम को 14 वर्ष का वनवास हुआ तो उन्होंने कुछ समय इस जगह भी गुजारा था। आज यहाँ कालाराम मंदिर है जहाँ बड़े-बड़े बरगद के पेड़ हैं। माना जाता है कि सारे बरगद के पेड़ पाँच बरगद के पेड़ों से उत्पन्न हुए थे, इसलिए इस जगह का नाम पंचवटी रखा गया। इस शब्द में पंच तो 5 संख्या के लिए इस्तेमाल होता है जबकि वटी बरगद के पेड़ के लिए प्रयोग होती है। इसके अलावा इस जगह कहा जाता है कि माता की गुफा भी स्थित है।

इस जगह कालाराम मंदिर के अलावा कपालेश्वर मंदिर, गंगागोदावरी मंदिर, सुंदर नारायण मंदिर, तालकुटेश्वर मंदिर, नीलकंठेश्वर गोराराम मंदिर, मुरलीधर मंदिर, तिलभांडेश्वर मंदिर समेत बहुत सारे मंदिर हैं। इन मंदिरों की संख्या इतनी ज्यादा है कि लोग इसे पश्चिमी भारत का काशी कहते हैं। कात्या मारुति मंदिर, पंचमुखी हनुमान मंदिर, भद्रकाली मंदिर, कटपुरथला स्मारक भी पंचवटी और इसके आसपास के इलाकों में स्थित हैं।

पीएम मोदी अनुष्ठान के दौरान करेंगे व्रत

बता दें कि प्रधानमंत्री अपनी दिनचर्या में ब्रह्ममुहूर्त में जगना, साधना करना, सात्विक आहार करना जैसे नियमों का पालन करते हैं। लेकिन ये जो 11 दिन का अनुष्ठान वह करने वाले हैं उससे पहले उन्होंने बताया है कि इस दौरान वह शास्त्रों में बताए व्रत और कठोर नियमों का भी पालन करेंगे।

अयोध्या में राम मंदिर के आसपास 8 मस्जिदें और 4 कब्रिस्तान, मुस्लिम बहुल मोहल्ला भी… शान से निकलती है ताजिया: वो सच जिसे कॉन्ग्रेसी-वामपंथी छिपाते हैं अभी भी

अयोध्या में 22 जनवरी 2024 (सोमवार) को राम जन्मभूमि पर निर्माणाधीन मंदिर में मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा प्रस्तावित है। दुनिया भर का हिन्दू समाज 5 सदी के बाद आ रहे इस दिन को अपने लिए शुभ बता कर अभी से तैयारियों में जुटा है। वहीं समाजवादी पार्टी और कॉन्ग्रेस के कुछ नेताओं सहित कई कट्टरपंथी और वामपंथी तत्व इस कार्यक्रम का विरोध कर रहे हैं। हालाँकि राम के नाम में हर किसी का समावेश है लेकिन जानबूझ कर इस मामले को साम्प्रदायिक रंग देने के प्रयास किए जा रहे हैं। अयोध्या नाम से हिन्दुओं के खिलाफ कट्टरता का आभासी दृश्य बनाने की साजिश रचने वालों ने इन तथ्यों को छिपाया है कि राम मंदिर के आसपास अयोध्या धर्मक्षेत्र में अभी भी 8 मस्जिदें मौजूद हैं। यहाँ एक मुस्लिम बाहुल्य मोहल्ला भी है, जो खुल कर अपनी मजहबी मान्यताओं का पालन करते हैं।

विभिन्न सम्प्रदायों के 3400 से अधिक मंदिर, राम सबके आराध्य

ऑपइंडिया ने अयोध्या धर्मनगरी क्षेत्र के आँकड़े जुटाए। आधिकारिक तौर पर यह धर्मनगरी 10.24 वर्ग किलोमीटर में फैली है। अयोध्या में लगभग 3400 मंदिर हैं। ये स्थल सनातन धर्म के सभी अंगों व अलग-अलग पूजा पद्धतियों के मंदिर हैं। सभी मंदिर आसपास बने हुए हैं, जहाँ से ये संदेश जाता है कि विविधता के बावजूद हिन्दू धर्म का मूल एक है।

साथ ही हिन्दू धर्म के सभी सम्प्रदायों के ये मंदिर इस बात का भी प्रतीक हैं कि राम सनातन के हर अंग में पूज्यनीय रूप से स्वीकार्य हैं। 3400 से अधिक मंदिरों की यह अनेकता में एकता राम के समावेशी होने की गवाही देती है।

4 गुरुद्वारे और 2 जैन मंदिर भी धर्मक्षेत्र में

इसके अलावा अयोध्या धर्मक्षेत्र में 4 गुरुद्वारे भी मौजूद हैं। प्राचीन समय से मौजूद ये गुरुद्वारे हिन्दू और सिख धर्म के उस अपनेपन के प्रतीक हैं, जिसे वर्तमान समय के नए नवेले खालिस्तानी विचारधारा वाले कुछ लोग नकारने की साजिश रच रहे हैं।

इनके अलावा अयोध्या में 2 जैन मंदिर भी हैं। दुनिया भर से आने वाले हिन्दू श्रद्धालु गुरुद्वारे और जैन मंदिर में भी समान श्रद्धाभाव से जाते हैं। जैन और सिख मतों के धर्मस्थल भी इसकी तस्दीक करते हैं कि राम नाम से उनका पुराना संबंध है।

10 वर्ग KM में 8 मस्जिदें, 4 कब्रिस्तान

भगवान राम की जन्मभूमि अयोध्या की सबसे बड़ी खासियत ये है कि यहाँ हिन्दू धर्म को कुफ्र और शिर्क बताने वाली और स्वयं को सर्वश्रेठ व सर्वोत्तम घोषित करने वाली इस्लामी मत की भी इबादतगाहें मौजूद हैं। इसी धर्मनगरी क्षेत्र में 8 मस्जिदें और 4 कब्रिस्तान मौजूद हैं।

अयोध्या में कुछ मस्जिदें ऐसी भी हैं, जो रामजन्मभूमि अधिग्रहीत परिसर से महज 100 मीटर की दूरी पर हैं। इन पर बाकायदा लाउडस्पीकर बँधे हुए हैं, जिससे पाँचों टाइम अजान दी जाती है। इनके रंग-रोशन भी नियमित तौर पर हो रहे हैं। यहाँ तमाम मुस्लिम पूरी छूट के साथ अपनी मजहबी अक़ीदों का पालन करते हैं।

रामजन्मभूमि अधिग्रहीत परिसर के पास बनी मस्जिद में लगी माइक

इसके अलावा अयोध्या धाम जंक्शन से निकलते ही 100 मीटर से भी कम दूरी पर मस्जिद मौजूद है। इसके विशाल गुंबद दूर से हरे रंग में चमकता दिखाई पड़ेगा। यहाँ भी अक्सर अकीदतमंदों की भीड़ दिखाई देती है।

ऑपइंडिया की टीम ने धर्मक्षेत्र में विद्याकुंड के आसपास मौजूद 2 कब्रिस्तानों का दौरा किया। यहाँ हमें सैकड़ों की तादाद में पक्की कब्रें दिखीं। पक्की कब्रों पर बाकायदा अरबी भाषा में पत्थर भी लगे हुए हैं। यहाँ अभी भी आसपास के मुस्लिम इंतकाल हुए अपने परिजनों को दफनाने आते हैं। अयोध्या धर्मक्षेत्र में ऐसे कब्रिस्तानों की संख्या 4 से अधिक बताई जा रही है। राम नाम के सर्व समावेशी होने के इस प्रमाण को अभी तक वामपंथी या चरमपंथी विचारधारा रखने वालों ने स्वीकार नहीं किया।

अयोध्या धाम जंक्शन के बाहर 2 इबादतगाहें

मंदिर से सटा मुस्लिम बहुल मोहल्ला

अयोध्या में अधिग्रहीत परिसर से सटा एक मुस्लिम बहुल मोहल्ला है। इसका नाम कजियाना है। बाबरी मस्जिद का पक्षकार रहा इक़बाल अंसारी भी इसी मोहल्ले का निवासी है।

यहाँ आसपास हर समय लाखों श्रद्धालु रामभक्तों और हजारों संत-महंतों की मौजूदगी रहती है लेकिन इसके बावजूद यहाँ अकेली मुस्लिम महिला को अपने बच्चे के साथ खरीदारी करते और किसी भी समय निश्चिन्त हो कर अपना काम करते देखा जा सकता है। इसी के साथ मोहल्ले में रहने वाले पुरुष पूरे इस्लामी परिधान में अपनी नौकरी व कारोबार आदि करते हैं। संतों के समावेशी व्यवहार ने इन्हें कभी भी पराया नहीं समझा।

विद्याकुंड क्षेत्र में बना कब्रिस्तान

अरुंधति कॉम्प्लेक्स में मुस्लिमों की भी दुकानें

ऑपइंडिया से बात करते हुए महंत महेश दास ने बताया कि भगवान राम ने सबको आत्मसात किया था। उनके नाम को साम्प्रदायिकता से जोड़ने वालों को स्वयं अयोध्या आकर जमीनी जानकारी जुटानी चाहिए। एक अन्य महंत अजय दास ने भी ऑपइंडिया को बताया कि वो वामपंथी और चरमपंथी ताकतें राम के नाम को बदनाम करने में जुटी हैं, जो अपनी नफरती सोच के चलते कभी अयोध्या आईं ही नहीं।

स्थानीय निवासी विमलेंद्र श्रीवास्तव ने हमें बताया कि धर्मक्षेत्र टेढ़ी बाजार में बने नए बहुमंजिला शॉपिंग काम्प्लेक्स अरुंधति में मुस्लिमों को भी दुकानें आवंटित हुई हैं। इनमें जूते का कारोबार करने वाले बाबू भाई उर्फ़ मोईन अहमद शामिल हैं। ये कॉम्प्लेक्स खासतौर पर उन कारोबारियों के लिए बनाया गया है, जिनके प्रतिष्ठान नगर के नवनिर्माण के दायरे में आ गए थे।

अरुंधति शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में मुस्लिमों को भी आवंटित हुई हैं दुकानें

पिछले साल निकाली गई थी कई ताजिया

अयोध्या में तैनात रहे एक पुलिस अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया साल 2023 में राम मंदिर से सटे कजियाना मोहल्ले में धूमधाम से ताजिया जुलूस निकले गए थे। तब अधिग्रहीत परिसर की बॉउंड्री से सटा कर लगभग आधे दर्जन ताजिया ढोल और ताशे बजा कर निकाली गई थी। इस दौरान मुस्लिमों ने पूरी शिद्द्त से अपने मजहबी नारे लगाए थे। तब अयोध्या में मौजूद हजारों श्रद्धालुओं ने अल्प समय के लिए सड़क आदि पर लगे जाम आदि पर कोई भी आपत्ति नहीं जताई थी। स्थानीय साधु-संतों ने इस आयोजन में प्रशासन का पूरा सहयोग किया था।

अयोध्या के धर्मक्षेत्र में रहने वाले अधिकतर मुस्लिम कारपेंटिंग, सैलून, जूते-चप्पल और सिलाई जैसे कारोबार से जुड़े हैं। अयोध्या के विकास के साथ इनके कारोबार में भी चार चाँद लगे हैं। कजियाना मोहल्ले के पास वशिष्ठ कुंड पर मौजूद कुछ लोगों ने भी बताया कि यहाँ हर साल मुस्लिम समुदाय के लोग अपने सभी त्यौहार धूमधाम से मनाते हैं।

उच्चशिक्षा के लिए कजियाना मोहल्ले से लगभग सटा ही साकेत डिग्री कॉलेज है। यहाँ भी इतिहास में मुस्लिम वर्ग से ताल्लुक रखने वाले कई छात्रनेता छात्रसंघ के पदाधिकारी बने हैं। कॉलेज में छात्रों की तादाद हिन्दू बहुल होने के बावजूद यहाँ कभी किसी मुस्लिम छात्र या छात्रा से मजहबी आधार पर भेदभाव जैसी घटना सामने नहीं आई। पूर्व छात्रसंघ पदाधिकारी ध्रुवराज इसे भगवान राम द्वारा मिले समावेशी संस्कार बताते हैं।

AirIndia की फ्लाइट, जैन महिला के शाकाहारी खाने में परोसा चिकन: बवाल होने पर एयरलाइन ने पैसेंजर से कहा – ट्वीट डिलीट करो

एयर इंडिया की फ्लाइट में एक शाकाहारी पैसेंजर के वेज खाने में चिकेन के टुकड़े परोस दिए गए। नॉन वेज देख पैसेंजर खासी नाराज हुईं। उन्होंने इसकी शिकायत केबिन क्रू से की, लेकिन मामले पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। अंत में पैसेंजर ने इस घटना को सोशल मीडिया पर शेयर किया।

वीरा जैन नाम की इस पैसेजर ने अपने एक्स हैंडल पर एयर इंडिया के शाकाहारी बिरयानी के साथ चिकन के टुकड़ों की फोटो शेयर कर अपनी परेशानी बयाँ की। उन्होंने लिखा, “मुझे एयर इंडिया फ्लाइट AI582 में चिकन के टुकड़ों के साथ शाकाहारी भोजन परोसा गया! मैं कालीकट एयरपोर्ट से फ्लाइट में सवार हुई थी। ये फ्लाइट शाम 6:40 बजे की थी, लेकिन 7:40 बजे रवाना हुई।”

वीरा ने इसके साथ ही अपना पी.एन.आर. – 6NZK9R और सीट संख्या 10E, 10F भी शेयर की है। उन्होंने अपनी इस पोस्ट में नागरिक उड्डयन मंत्रालय, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय, केंद्रीय नागरिक उड्डयन एवं इस्पात मंत्री ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया सहित प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो को टैग किया है।

उन्होंने आगे लिखा, “पहले देरी, फिर मेरे शाकाहारी भोजन में मांसाहार। यह बेहद निराशाजनक है और इससे मेरी भावनाएँ आहत हुई हैं। मैं एयर इंडिया से अपनी खानपान सेवाओं और देरी के लिए सख्त कार्रवाई करने को कहती हूँ।”

इसके साथ ही उन्होंने अन्य यात्रियों को सुझाव दिया। उन्होंने कहा “मैं हर किसी को सुझाव दूँगी कि कृपया पूरी तरह जाँच लें कि आप फ्लाइट में क्या खा रहे हैं। दो बहुत देरी से उड़ानों (4 जनवरी को मुंबई-कोझिकोड और 8 जनवरी को वापसी) और नॉनवेज परोसे जाने के बाद अब मेरा एयरलाइन के सभी खाने से भरोसा उठ गया है।”

वीरा ने लिखा है कि जब उन्होंने केबिन सुपरवाइजर को अपने खाने में मिले चिकेन के टुकड़ों के बारे में बताया तो उन्होंने माफी माँगी। वहीं केबिन क्रू ने उन्हें बताया कि उनके अलावा अन्य पैसेंजर्स की भी ऐसी शिकायतें आ चुकी हैं। वह कहती हैं कि जब शिकायतें आ गईं थीं फिर भी क्रू मेम्बर की तरफ से ऐसा शाकाहारी भोजन परोसा गया। दूसरे पैसेंजर्स को इस बारे में किसी तरह की कोई सूचना नहीं दी गई।

वीरा जैन की X पोस्ट पर एयर इंडिया ने उन्हें जवाब दिया, और साथ ही उनसे ट्वीट डिलीट करने का अनुरोध भी किया। एयर इंडिया ने लिखा, “प्रिय सुश्री जैन, हम आपसे अनुरोध करते हैं कि ओपन ट्वीट में दी गई जानकारी हटा दें, ताकि कोई दुरुपयोग न कर सके और अपनी शिकायत को PNR के साथ डायरेक्ट मैसेज करें।”

हालाँकि वीरा ने इसके बाद लिखा, “उन्होंने मुझसे केवल मैसेज के जरिए माफी माँगी है। मुझे समझ नहीं आता कि उन्हें इस बात का अहसास कैसे नहीं है कि यह भावनाओं को ठेस पहुँचाने का मसला है।”

बता दें कि इससे पहले साल 2022 में भी एयर इंडिया फ्लाइट में एक जैन दंपत्ति को शाकाहारी बताकर मछली खिलाने का मामला प्रकाश में आया था। दंपत्ति का आरोप था कि एयर इंडिया के दो मुस्लिम स्टाफ ने उनसे कहा कि उन्हें जो दिया गया है वो वेज खाना है और वो बिन चिंता के इसका आनंद लें। हालाँकि, बाद में किसी अन्य स्टाफ से फिर कन्फर्म पर सामने आया कि उन्हें मछली परोसी गई। जैन व्यक्ति ने इस घटना का वीडियो यूट्यूब, फेसबुक, ट्विटर समेत कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर डाला था। इसके बाद इस मुद्दे पर काफी बवाल हुआ था।

सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्या को जेल भेजो: बलिदानी कारसेवक के बेटे की माँग, बोले- ‘नकली फोर्स’ घुसवाकर की गई थी रामभक्तों की हत्या

1990 में अयोध्या में हुए गोलीकांड में मारे गए एक कारसेवक के पुत्र ने उत्तर प्रदेश सरकार से सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्या के खिलाफ कार्रवाई करने की माँग की है। बलिदानी कारसेवक राम अचल गुप्त के बेटे संजय कुमार ने कारसेवकों के नरसंहार को जायज बताने पर स्वामी प्रसाद मौर्या की गिरफ्तार करने की माँग की है। साथ में उन्होंने कुछ सोशल मीडिया हैंडल्स पर भी कारसेवकों को ‘अराजक तत्व’ बताने पर एक्शन लेने को कहा है।

संजय कुमार ने जिलाधिकारी अयोध्या को दिए गए एक पत्र में कहा है, “दिनाँक 10.01.2024 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर के हैंडल सूर्या समाजवादी ने एक घोर निंदनीय व आपत्तिजनक पोस्ट डाली है जिसमें 1990 में राम काज करते हुए बलिदानी कारसेवकों को अराजक तत्व कह कर संबोधित किया गया है। इसके अलावा समाजवादी पार्टी के नेता स्वामी प्रसाद मौर्या का एक अन्य वीडियो शेयर किया गया है जिसमें सन 1990 में राम भक्तो के नरसंहार को जायज बताते हुए साफ सुना जा सकता है।”

स्वामी प्रसाद कारसेवक
संजय द्वारा दी गई शिकायत की कॉपी

गौरतलब है कि स्वामी प्रसाद मौर्या ने 10 जनवरी, 2024 को उत्तर प्रदेश के कासगंज में तत्कालीन समाजवादी पार्टी सरकार द्वारा कारसेवकों पर गोली चलाने के आदेश को क्लीन चिट देते हुए कहा था, “जिस समय अयोध्या में राम मंदिर पर घटना घटी थी। वहाँ पर बिना किसी न्यायपालिका के निर्देश के, बिना किसी प्रशासनिक आदेश के बड़े पैमाने पर अराजत तत्वों ने तोड़फोड़ की थी। तत्कालीन सरकार ने संविधान की रक्षा के लिए, कानून की रक्षा के लिए, अमन चैन कायम करने के लिए उस समय जो गोली चलवाई थी वो सरकार का अपना कर्तव्य था। सरकार ने अपना कर्तव्य निभाया था।”

संजय कुमार ने अपने पत्र में आगे लिखा है, “मेरे पिता श्री राम अचल गुप्त 2 नवंबर 1990 को अयोध्या गोलीकांड में बलिदान हुए थे। मुझे 22 जनवरी राम मंदिर अयोध्या प्राण प्रतिष्ठा में निमंत्रित किया गया है। एक बलिदानी कारसेवक का पुत्र होने के नाते मैं स्वामी प्रसाद मौर्य के बयान व सूर्या समाजवादी के शब्दों से बुरी तरह आहत हूँ। साथ ही इन शब्दों से मेरे पिता श्री के साथ कारसेवा में गए कई जीवित कारसेवक और हिंदू समाज के अन्य लोग आक्रोशित हैं।”

संजय कुमार का कहना है कि स्वामी प्रसाद मौर्या और अन्य ऐसे ही लोग ऐसे बयान 22 जनवरी, 2024 को अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के पहले सामाजिक सद्भाव बिगाड़ना चाहते हैं। संजय कुमार ने इसके अलावा कुछ और आरोप भी अयोध्या गोलीकांड के विषय में लगाए हैं।

संजय कुमार ने कहा है कि इस गोलीकांड के दौरान सांसद मुन्नन खान और उसके गुंडे नकली फ़ोर्स बना कर कारसेवकों की हत्या कर रहे थे। उन्होंने इस आरोप की जाँच की माँग की है। उनका कहना है कि 1987 में हाशिमपुरा कांड की जाँच करवाई जा सकती है तो फिर इसकी जाँच क्यों नहीं हो सकती। संजय कुमार ने यह कार्रवाई करने की माँग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उत्तर प्रदेश के डीजीपी विजय कुमार से की है।

संजय कुमार के पिता बलिदानी कारसेवक राम अचल गुप्त के विषय में में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

शिकायत नहीं, FIR के बाद ‘भगवान राम खाते थे मांस’ वाली फिल्म नेटफ्लिक्स से हटी: Zee स्टूडियोज ने माँगी माफी

तमिल फिल्म अभिनेत्री नयनतारा अभिनीत फिल्म ‘अन्नपूर्णानी (Annapoorani)’ को नेटफ्लिक्स से हटा दिया गया है। फिल्म को धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोपों के बाद हटाया गया। ये फिल्म 1 दिसंबर, 2023 को सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई थी और 29 दिसंबर, 2023 को नेटफ्लिक्स पर रिलीज़ हुई थी। फिल्म को समीक्षकों द्वारा मिश्रित समीक्षा मिली थी। इस फिल्म में हालाँकि हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत किया गया था, सोशल मीडिया पर लोग इसको लेकर आलोचना कर रहे थे।

इस फिल्म में नयनतारा (Nayanthara) एक ऐसी महिला की भूमिका निभाती है, जो एक मंदिर में पुजारी की बेटी होती है। फिल्म के कुछ दृश्यों में नयनतारा को मंदिर के कपड़ों में दिखाया गया है। साथ ही भगवान राम को मांसाहारी बताया गया है। इस फिल्म के खिलाफ शिकायत करने वाले लोगों ने कहा कि यह हिंदू धर्म के अनुष्ठानों और परंपराओं का अपमान करता है। उन्होंने फिल्म के खिलाफ पुलिस में भी शिकायत दर्ज कराई थी। फिल्म के निर्माताओं ने आलोचनाओं के बाद माफी माँगी है और कहा है कि वे फिल्म को संपादित करेंगे और इसे फिर से रिलीज करेंगे।

ज़ी स्टूडियोज ने विश्व हिंदू परिषद से माफी माँगी और कहा, “आपत्तिजनक सामग्री को हटाने के लिए एडिट होने तक फिल्म को प्लेटफॉर्म से हटा दिया जाएगा। फिल्म के सह-निर्माता के रूप में हमारा हिंदुओं और ब्राह्मण समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने का कोई इरादा नहीं है और हम संबंधित समुदायों की भावनाओं को हुई असुविधा और ठेस के लिए माफी माँगना चाहते हैं।”

इस फिल्म में दिखाया गया है कि एक हिंदू ब्राह्मण लड़की बिरयानी बनाने के लिए नमाज पढ़ने लगती है। फिल्म का हीरो उसे समझाता है कि श्रीराम भी मांस खाते थे। इस फिल्म के खिलाफ और इसे प्रमोट करने वाले नेटफ्लिक्स, ZEE के खिलाफ मुंबई में शिकायत दर्ज कराई गई। ये शिकायत नयनतारा, जय, नीलेश कृष्णा, निर्माता जतिन सेठी, आर रवींद्रन, पुनित गोयनका, ज़ी स्टूडियो के मुख्य व्यवसाय अधिकारी शारिक पटेल और नेटफ्लिक्स इंडिया की प्रमुख मोनिका शेरगिल के खिलाफ दर्ज की गई। इसके बाद फिल्म के निर्माताओं ने इसे प्रदर्शित किए जाने वाले OTT प्लेटफॉर्म से हटाने का फैसला किया।

यह खबर भारत में धार्मिक भावनाओं के बारे में एक महत्वपूर्ण बहस को जन्म दे रही है। कुछ लोगों का मानना है कि फिल्म के निर्माताओं को धार्मिक भावनाओं को आहत करने के लिए माफ नहीं किया जाना चाहिए।

देश के सबसे लंबे पुल ‘अटल सेतु’ का उद्घाटन आज, अब 2 घंटे का सफर 20 मिनट में होगा पूरा: PM मोदी महाराष्ट्र को देंगे ₹30 हजार करोड़ का तोहफा

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 12 जनवरी 2024 को महाराष्ट्र में होंगे। प्रधानमंत्री महाराष्ट्र में 30,500 करोड़ रुपए से अधिक लागत की कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन करके इन्हें राष्ट्र को समर्पित करेंगे और आधारशिला रखेंगे। ‘ईज ऑफ मोबिलिटी’ बढ़ाने के एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी सेवारी-न्हावा शेवा अटल सेतु का उद्घाटन करेंगे। लगभग 17,840 करोड़ रुपए की लागत से बना अटल सेतु भारत का सबसे लंबा पुल है, जो देश का सबसे लंबा समुद्री पुल भी है। दावा किया जा रहा है कि इस 22 किमी लंबे पुल से नवी मुंबई की दूरी तय करने में महज 20 मिनट लगेंगे।

अटल बिहारी वाजपेयी सेवारी – न्हावा शेवा अटल सेतु

प्रधानमंत्री का विज़न शहरी परिवहन बुनियादी ढाँचे और कनेक्टिविटी को मजबूत करके नागरिकों की ‘ईज़ ऑफ मोबिलिटी’ को बेहतर बनाना है। इस विज़न के अनुरूप, मुंबई ट्रांसहार्बर लिंक (एमटीएचएल) का नाम अब ‘अटल बिहारी वाजपेयी सेवारी-न्हावा शेवा अटल सेतु’ रखा गया है, जो अब तैयार हो गया है। इस पुल का शिलान्यास भी दिसंबर 2016 में प्रधानमंत्री मोदी ने किया था। आइए, जानते हैं इस पुल की खास बातें

  • अटल सेतु को बनाने में आई 17,840 करोड़ रुपए से अधिक की लागत।
  • अटल सेतु की लंबाई लगभग 21.8 किलोमीटर है।
  • 6-लेन वाला ये पुल 16.5 किमी लंबा समुद्र के ऊपर और लगभग 5.5 किमी जमीन पर बना है।
  • यह भारत का सबसे लंबा पुल है, जो देश का सबसे लंबा समुद्री पुल भी है।
  • मुंबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे और नवी मुंबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे को जोड़ेगा।
  • मुंबई से पुणे, गोवा और दक्षिण भारत की यात्रा में लगने वाला समय बचेगा।
  • मुंबई बंदरगाह और जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह के बीच कनेक्टिविटी को बेहतर बनाएगा।

कई परियोजनाओं को शुरू करेंगे पीएम मोदी

प्रधानमंत्री ईस्टर्न फ्री-वे के ऑरेंज गेट को मरीन ड्राइव से जोड़ने वाली भूमिगत सड़क सुरंग की आधारशिला भी रखेंगे। प्रधानमंत्री रत्न और आभूषण क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम में, एसईईपीजेड एसईजेड में ‘भारत रत्नम’ और न्यू एंटरप्राइजेज एंड सर्विसेज टॉवर (एनईएसटी) 01 का उद्घाटन करेंगे। रेल और पेयजल से संबंधित कई परियोजनाएँ राष्ट्र को समर्पित की जाएँगी। महिला सशक्तिकरण की दिशा के एक अन्य प्रयास में, प्रधानमंत्री महाराष्ट्र में नमो महिला सशक्तिकरण अभियान भी शुरू करेंगे।

राष्ट्रीय युवा महोत्सव का उद्घाटन भी करेंगे पीएम मोदी

प्रधानमंत्री 27वें राष्ट्रीय युवा महोत्सव का उद्घाटन भी करेंगे। राष्ट्रीय युवा महोत्सव प्रत्येक वर्ष 12 से 16 जनवरी तक आयोजित किया जाता है। 12 जनवरी को स्वामी विवेकानन्द की जयंती है। इस वर्ष इस महोत्सव की मेजबानी महाराष्ट्र कर रहा है। इस महोत्सव की थीम – विकसित भारत@2047 : ‘युवा के लिए, युवा के द्वारा’ है।

राष्ट्रीय युवा महोत्सव एक ऐसा मंच बनाना चाहता है जहाँ भारत के विभिन्न क्षेत्रों के युवा एक भारत श्रेष्ठ भारत की भावना में अपने अनुभव साझा कर सकें और एकजुट होकर राष्ट्र की नींव मजबूत कर सकें। पूरे देश से लगभग 7500 युवा प्रतिनिधि नासिक में आयोजित इस महोत्सव में भाग लेंगे। सांस्कृतिक प्रदर्शन, स्वदेशी खेल, भाषण और विषयगत आधारित प्रस्तुति, युवा कलाकार शिविर, पोस्टर मेकिंग, कहानी लेखन, युवा सम्मेलन, खाद्य महोत्सव आदि सहित विभिन्न कार्यक्रम इस महोत्सव के दौरान आयोजित किए जाएँगे।

विदेशी रहने और बसने का नहीं कर सकते दावा, कभी भी निकाल सकता है भारत: दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा- नागरिकों के बराबर उनके अधिकार नहीं

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि विदेशी नागरिकों को भारत में रहने और बसने का अधिकार नहीं है। यह फैसला एक याचिका पर सुनवाई के बाद आया है, जिसमें एक विदेशी नागरिक ने भारत में रहने और बसने के अधिकार का दावा किया था। न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि भारत एक संप्रभु राज्य है और वह अपने नागरिकों और अन्य लोगों को देश में रहने और बसने के अधिकार देने के लिए स्वतंत्र है। न्यायालय ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 19 में निहित अधिकार विदेशी नागरिकों पर लागू नहीं होता है।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत और न्यायमूर्ति मनोज जैन की खंडपीठ ने कहा कि विदेशियों या संदिग्ध विदेशी के मौलिक अधिकार केवल भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत घोषित जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार तक ही सीमित हैं। दिल्ली हाईकोर्ट ने बांग्लादेशी नागरिक अज़ल चकमा के परिवार द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को खारिज कर दिया।

अजल को अक्टूबर 2022 में दिल्ली के इंदिरा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से पकड़ा गया था। उस पर यह आरोप लगाया गया था कि उसने पहले बांग्लादेशी पासपोर्ट पर भारत की यात्रा की थी, लेकिन बाद में धोखाधड़ी से भारतीय दस्तावेज (पासपोर्ट सहित) प्राप्त कर लिए। हालाँकि, बाद में भारतीय अधिकारियों ने उसके पासपोर्ट को रद्द कर दिया।

याचिकाकर्ता ने तर्क दिया था कि संविधान के अनुच्छेद 21 में जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार सभी नागरिकों को दिया गया है, जिसमें विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। हालाँकि, दिल्ली हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के तर्क को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि अनुच्छेद 21 में शामिल “सभी” शब्द का अर्थ केवल भारतीय नागरिक हैं। अदालत ने कहा कि विदेशी नागरिक भारत में केवल वीजा के आधार पर रह सकते हैं और उनका वीजा किसी भी समय रद्द किया जा सकता है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ई) में निहित स्वतंत्रता का अधिकार केवल भारतीय नागरिकों को लागू होता है। विदेशी नागरिकों को इस अधिकार का लाभ नहीं मिलता है। दिल्ली हाईकोर्ट ने हंस मुलर ऑफ नूरेनबर्ग बनाम सुप्रीटेंडेंट, प्रेसीडेंसी जेल, कलकत्ता मामले में सुप्रीम कोर्ट के 1955 के फैसले का भी हवाला दिया, जिसमें शीर्ष अदालत ने कहा था कि ‘विदेशियों को निष्कासित करने की भारत सरकार की शक्ति पूर्ण और असीमित है और इसमें कोई कमी नहीं है’।

न्यायालय ने कहा कि विदेशी नागरिक भारत में आने और रहने के लिए सरकार से अनुमति लेते हैं। यह अनुमति केवल एक निश्चित अवधि के लिए दी जाती है और इसे बाद में बढ़ाया जा सकता है या रद्द किया जा सकता है। इस फैसले का भारत में रहने वाले विदेशी नागरिकों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ने की संभावना है। यह फैसला यह स्पष्ट करता है कि विदेशी नागरिकों को भारत में रहने और बसने का कोई मौलिक अधिकार नहीं है।