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22 जनवरी को पूरी होगी अयोध्या के एक संत की 22 साल से चल रही तपस्या, एक वक्त भोजन और सिले कपड़े नहीं पहनने का लिया था संकल्प

अयोध्या में राममंदिर के निर्माण के लिए साधु-संतों ने अनोखे संकल्प लिए थे। किसी ने रामलला के मंदिर के गर्भगृह में विराजने तक विवाह न करने का संकल्प लिया तो किसी ने पगड़ी और जूते नहीं पहनने की प्रतिज्ञा की। इसी तरह करपात्री जी महाराज ने पिछले 22 सालों से केवल एक समय भोजन करने की शपथ ली और वो भी सिर्फ 18 कौर खाने की। उन्होंने सिले हुए कपड़े नहीं पहनने की भी शपथ ले रखी है।

अब जब रामलला 22 जनवरी 2024 को अयोध्या के राम मंदिर में विराजने जा रहे हैं तो इस संत का संकल्प भी पूरा होता दिख रहा है। अब वो 22 जनवरी 2024 को भगवान राम की आज्ञा लेकर भरपेट भोजन करेंगे। इस संत ने ‘द राजधर्म’ यूट्यूब चैनल से हुई बातचीत में इसकी जानकारी दी।

प्रभु राम के अयोध्या भवन प्रवेश तक कर में भोजन

अपने नाम का मतलब बताते हुए करपात्री महाराज कहते हैं कि जिसका कर (हथेली) ही पात्र हो, वो करपात्री है। वो कहते हैं, “आज से 22 साल पहले मैंने ये संकल्प लिया था कि मैं अयोध्या में कुछ कर नहीं सकता हूँ, लेकिन जब-तक मेरे प्रभु राम जी अयोध्या के अपने भवन में प्रवेश नहीं कर पाते, तब तक मैं अपने कर में ही भोजन करूँगा। कर ही में जल ग्रहण करूँगा। मेरा भोजन केवल 18 कौर का होगा। और दिन में एक बार होगा।”

उन्होंने आगे कहा, “मैंने संकल्प लिया कि सिला हुआ कपड़ा नहीं पहनूँगा। खड़ाऊ पहनूँगा। तब तक ऐसे ही रहूँगा। तब से मेरी तपस्या चल रही है। 22 तारीख को जब मेरे परमात्मा अपने गृह में स्थापित हो जाएँगे, तब उनसे अनुमति माँगकर भरपेट भोजन करूँगा। सिला हुआ कपड़ा पहनना प्रारंभ कर दूँगा, क्योंकि हमारी प्रतिज्ञा हमारे परमात्मा ने पूरा किया है।”

करपात्री जी आगे कहते हैं, “वैष्णव संप्रदाय का सर्वोच्च पद मेरे पास है। रामानुजाचार्य, जगतगुरु, जीयर स्वामी, करपात्री जी महाराज… पूरे विश्व में ये जगतगुरु से भी ऊँचा पद होता है। हम आपको पूरा नाम नहीं बता सकते हैं। अभी केवल करपात्री महाराज के नाम से ही हमें पूरा विश्व जान रहा है।”

18 पुराण और 4 वेद का सम्मेलन है 22 तारीख

रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के लिए 22 जनवरी 2024 का दिन तय करने को लेकर करपात्री महाराज ने कहा कि रामलला का मंदिर में जाने का एक स्वरूप है। रामजी का स्वरूप वेद-पुराण से है। इसके लिए उन्होंने रामचरितमानस की चौपाई ‘सुमति भूमि थल हृदय अगाधू। बेद पुरान उदधि घन साधू॥ बरषहिं राम सुजस बर बारी। मधुर मनोहर मंगलकारी॥’ का हवाला दिया। उन्होंने कहा, “18 पुराण और 4 वेद मिलकर 22 होता है। तिथि 22 इसलिए रखी गई है कि 18 पुराण और 4 वेद मिलकर राम का विग्रह बनता है।”

वो आगे कहते हैं, “इस दिन परमात्मा आ रहे हैं। मेरे ठाकुर जी आ रहे हैं। कह रहे हैं कि अब कोई बरी नहीं होगा। हम सबके साथ जाएँगे। अब कोई ‘जनबरी’ नहीं होगा। इसलिए वो ‘जनवरी’ में आ रहे हैं।” जनवरी महीने को ‘जनबरी’ के रूप में समझाते हुए वो कहते हैं, “हमारे हिंदी साहित्य में जन कहा जाता है व्यक्ति को और बरी का मतलब होता कोई अलग न हो पाए कोई व्यक्ति अकेला न रहे।”

प्रभु राम के उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, “शायद आपको पता नहीं होगा कि जब राम चतुर्भुज स्वरूप में आए तो रोने लगे। बहुत रोए। तब कौशल्या माँ ने कहा कि अब तो रोना बंद करो। बच्चे हो। सब ठीक है। सब शुभ हो गया। तब प्रभु राम ने कौशल्या माँ से कहा कि जब तक संसार में मैं नही आया था लोग रो रहे थे। मैं अब संसार में आ गया हूँ। अब कोई नहीं रोएगा। इस नाते मैं रोना शुरू किया हूँ।”

इसके बाद करपात्री महाराज ने ‘सुनि बचन सुजाना रौदन ठाना, होई बालक सुर भूपा’ गाते हुए बताया कि प्राण प्रतिष्ठा के नाते ये तिथि और जो अभिजीत मुहूर्त 88 सेकेंड चुना गया है, उसमें प्राण प्रतिष्ठा हो जाएगी। उन्होंने कहा कि वे प्राण प्रतिष्ठा का उत्सव 15 तारीख से ही प्रारंभ कर देंगे और प्राण प्रतिष्ठा तक लगातार चलेगा।

पीएम मोदी को लेकर उन्होंने कहा, “हमारे यशस्वी पीएम मोदी आएँगे। वो जब आएँगे तो सबसे पहले सरयू में स्नान करेंगे। इस स्नान से शरीर में किसी तरह का दोष हो तो सब मुक्त हो जाते हैं। उससे पहले वो उपवास रखेंगे। उपवास में ही स्नान करेंगे। उप का मतलब होता है सानिध्य और वास का मतलब होता है मन के पास। इस तरह से परमात्मा के पास जाने के लिए उपवास रखा जाता है।”

दमन के प्राचीन शिव मंदिर में रातों-रात बना दी मजार, हिंदुओं के विरोध के बाद हटाई गई: वीडियो वायरल

गुजरात से सटे केंद्रशासित प्रदेश दमन के एक प्राचीन शिव मंदिर में रातों-रात सीमेंट से मजार बना दी गई। नानी दमन में स्थित इस प्राचीन मंदिर में हिंदू देवी-देवताओं की प्राचीन मूर्तियों के बदल में एक कोने में मजार बनाया गया। विरोध के बाद ये मजार अचानक गायब भी हो गई। इसका वीडियो भी वायरल हुआ है। इस मामले में हिंदुओं की एकजुटता को देखते हुए प्रशासन भी सक्रिय हुआ।

ये मामला दमन के देवका इलाके का है, जहाँ प्राचीन शिव मंदिर में ऐसी दुस्साहस की गई। एक युवक ने इस मजार का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाला और लोगों से एकजुट होने की अपील की तो यह लोगों के ध्यान में आया। वीडियो वायरल हुआ तो स्थानीय लोग भी इसको लेकर सजग हो गए।

जानकारी के मुताबिक, वायरल वीडियो दमन का है और इसे अलग-अलग यूजर्स द्वारा शेयर किया जा रहा है। हालाँकि, यह साफ नहीं हो पाया है कि यह वीडियो किसने बनाया है। 2 मिनट 20 सेकंड के इस वीडियो में एक व्यक्ति को हिंदी में यह कहते हुए सुना जा सकता है, “देखो, यहाँ महादेवजी का शिवलिंग है। ये नंदीजी महाराज हैं। वहाँ नंदीजी और गणेश की मूर्तियाँ एक ही पत्थर से बनी हुई हैं।”

वीडियो अपलोड करने वाले शख्स ने मंदिर में स्थापित देवी माँ की मूर्ति भी दिखाई है। मूर्ति की बनावट के आधार पर वह व्यक्ति अंदाजा लगा रहा है कि मूर्ति पौराणिक है। सभी देवी-देवताओं की मूर्तियों को दिखाने के बाद बगल में हरे रंग की शीट पर चाँद और सितारों वाले रखे गए कई चादर को दिखाया गया। वीडियो बनाने वाले व्यक्ति ने शीट के कोने को भी उठाया और सीमेंट से बनाए गए मजार को दिखाया।

इस वीडियो में टेम्पलेट के ऊपर कुछ इस्लामिक तस्वीरें भी लगी देखी जा सकती हैं। शून्य नाम के एक्स हैंडल ने ये वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “यह विडियो नानी – दमण गुजरात का है, जो फेमस पिकनिक स्पॉट भी है। यहाँ के पुराने मंदिर में एक मजार बना दी गई है।” शून्य ने अधिकारियों को टैग करते हुए कार्रवाई की माँग की।

सोशल मीडिया पर इस वीडियो के वायरल होने के दो दिन बाद एक और वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वह मजार नजर नहीं आ रहा है। कथित मजार वाली जगह खाली दिख रही है, लेकिन ये साफ दिख रहा है कि यहाँ कुछ तो बनाया गया था। दोनों वीडियो को काजल हिंदुस्तानी ने शेयर किया है।

काजल हिंदुस्तानी ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा, “वीडियो 1- गुजरात के दमण से एक भाई ने ये विडियो बनाया था, जो कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर बहुत तेज़ी से वायरल हो रहा है। इसमें एक हिंदू मंदिर के अंदर ‘अवैध ढाँचे’ का निर्माण किया गया था। वीडियो 2- दमण के स्थानिक नागरिकों ने अपनी एकता दिखाई तथा मंदिर के अंदर बने इस ‘अवैध ढाँचे’ को हटा दिया है। हर हर महादेव???”

इस मामले के सामने आने के बाद दमन के मेयर ने भी इसका संज्ञान लिया है। उन्होंने कलेक्टर को पत्र लिखकर इस कृत्य को करने वाले के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की बात कही है।

दमन के मेयर का पत्र

इस पूरे मामले में एक बात तो साफ है कि दमन के इस प्राचीन मंदिर में मजार जैसी संरचना बनाई गई थी, जिसे अब हटा लिया गया है। हालाँकि अज्ञात आरोपित अभी तक पुलिस की पकड़ से बाहर हैं, ऐसे में देखना ये है कि पुलिस ऐसे लोगों पर शिकंजा तब तक कस पाती है।

बीच में छूट गई पढ़ाई या कोर्स नहीं हुआ पूरा… अब चिंता नहीं: जानें मोदी सरकार की ABC योजना, 3 करोड़ छात्र कर चुके हैं रजिस्टर

लगातार पढ़ाई करने वाले छात्र-छात्राओं के लिए कई योजनाएँ सरकारें हमेशा से लेकर आती रही थीं, लेकिन जिन छात्र-छात्राओं की शिक्षा किसी कारणवश बीच में छूट जाती थी उस पर कोई ध्यान नहीं देता था। किसी को मतलब नहीं होता था कि जो पढ़ाई करते-करते बीच में किसी कारण से रह गई उसका कोई हिसाब होगा या नहीं। लेकिन मोदी सरकार में ये सिस्टम बदला। एक ऐसा प्लेटफॉर्म आया जिसमें छात्र-छात्रों के साल तो साल, सेमेस्टर की भी गिनती रखनी शुरू हुई।

मोदी सरकार नई एजुकेशन पॉलिसी 2020 के साथ इस डिजिटल व्यवस्था को लेकर आई थी, जिसके तहत हर छात्र की मेहनत का डिजिटल रिकॉर्ड रखा जाना शुरू हुआ और मौका दिया गया कि जो पढ़ाई उसने छोड़ी है उसे वो दोबारा कंटिन्यू करे बिना किसी परेशानी के। इस स्कीम का नाम- एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (ABC) हैं। हाल में इसमें देश भर के 3 करोड़ छात्रों ने पंजीकरण कर लिया और आने वाले समय में ये संख्या और बढ़ने के अनुमान है।

इसकी व्यवस्था की खास बात यह है कि इसमें पंजीकृत छात्र किसी भी कॉलेज में मल्टीपल एंट्री या एग्जिट कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें अलग-अलग जगह से कागज जुटाने की जरूरत नहीं है। एक क्लिक में दूसरे कॉलेज में काम उसी कोर्स में एडमिशन के जानकारी पहुँच जाएगी और छूटी हुई पढ़ाई में दोबारा वो सेमेस्टर पढ़ने की जरूरत नहीं होगी।

सरकार के इस पोर्टल पर स्टूडेंट्स का सारा डेटा सुरक्षित रहेगा। आसान भाषा में कहें तो ये प्लेटफॉर्म एक कमर्शियल बैंक की तरह काम करेगा, जिसके ग्राहक छात्र-छात्राएँ हैं और पैसे की जगह या कोर्स के क्रेडिट जमा होते हैं। जब छात्र-छात्राएँ इसे रिडीम करना चाहें तो वो भी आसानी से हो सकता है।

इस स्कीम का नियम है कि अगर कोई छात्र एक साल पूरा करके गया है तो ऐसा नहीं माना जाएगा उसने कोर्स बीच में छोड़ा, उसके सर्टिफिकेट दिया जाएगा। ऐसे ही दो साल करने पर उसे डिप्लोमा मिलेगा और तीन साल करने पर उसे डिग्री दी जाएगी।

इसके बाद आने वालों वर्ष में जब आपका पढ़ाई कंटिन्यू करने का मन करें तो आप वो कागज दिखाकर, क्रेडिट रीडीम करके आगे कंटिन्यू कर सकते हैं। लेकिन सबसे जरूरी ये है कि इस सुविधा के लिए छात्रों को एकैडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट स्कीम में रजिस्टर करना होगा।

इसके बाद छात्र को अपने डॉक्यूमेंट्स को लेकर निश्चिंत हो जाना है। इस पोर्टल के तहत अब तक 1500 से ज्यादा यूनिवर्सिटीज पंजीकृत हैं। इसके अलावा यूजीसी लगातार हर यूनिवर्सिटी से कह रही है कि वो छात्रों को इसपर पंजीकरण कराएँ और उनके डेटा पर बराबर ध्यान दें।

एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स की सुविधा का लाभ उठाने के लिए छात्रों को निम्नलिखित स्टेप फॉलो करने होंगे।

  • पहले www.abc.gov.in पर लॉग-इन करना है।
  • इसके बाद ABC साइट खुलते ही My Account पर क्लिक करें।
  • फिर डिजिलॉकर के जरिए अकॉउंट बनाएँ। इसके लिए आपको मोबाइल नंबर या फिर आधार नंबर की जरूरत होगी।
  • अगले चरण में आफको सिक्योरिटी पिन डालना होगा, जो आपके फोन पर आएगा।
  • आपका अकॉउंट बन जाएगा।
  • इसके बाद आपको यूनिक आईडी और पासवर्ड मिलेगा, जिससे कैंडिडेट्स कभी भी लॉग-इन कर सकते हैं।
  • आपको अपनी एबीसी आईडी देकर सारे कोर्स और उनके क्रेडिट स्कोर दिखने लग जाएँगे।
  • आपको इनमें से जिस कोर्स की जानकारी ट्रांसफर करने की आवश्यकता है आप उसे सरलता से चुनकर आगे शेयर कर सकते हैं।
  • आपके अकॉउंट में रखे गए क्रेडिट को आप सात वर्षों तक रिडी कर सकते हैं।
  • इसकी मदद से आपको आगे पढ़ाई करने में सरलता होगी।
  • एबीसी की इस व्यवस्था में स्टूडेंट को कोई डॉक्यूमेंट अपनी ओर से नहीं देना होगा। हायर इंस्टिट्यूट द्वारा दी गई जानकारी ही इसकी फीड में जाएगी।
  • इनके जरिए स्टूडेंट्स जिन कोर्सेस में एडमिशन ले सकते हैं उनमें ऑनलाइन और डिस्टेंट मोड कोर्स सब शामिल हैं। सबके क्रेडिट स्कोर प्लेटफॉर्म पर जुड़ते रहेंगे
  • इस पोर्टल पर यूजीसी से मान्य सभी हायर इंस्टीट्यूट के कोर्सेस के साथ-साथ इंजीनियरिंग, मेडिकल, डेंटल, लॉ और अन्य प्रोफेशनल कोर्सेस को भी कवर किया गया है।

पुरानी है योजना, चुनाव के साथ नहीं आई

बता दें कि साल 2020 में आई एजुकेशन पॉलिसी के बाद ही अगले वर्ष यानी कि 2021 में ABC को लॉन्च किया गया था जिसका कॉन्सेप्ट ही यही था कि छात्रों को एक प्लेटफॉर्म पर उनकी सारे क्रेडिट की जानकारी मिल सके। इस प्लेटफॉर्म की खास बात यह है कि अगर आपने ऑफलाइन कोर्स किया है तब भी और अगर ऑनलाइन कोर्स किया है तब भी आपको अलग से कुछ भी अपडेट करने की जरूरत नहीं है।

स्वंय आपका शैक्षणिक संस्थान इस पर आपके क्रेडिट स्कोर शेयर करेगा। अगर इस दौरान आप पढ़ाई छोड़ भी देते हैं तो आपको आपके क्रेडिट के हिसाब से डॉक्यूमेंट मिल जाएगा, जो आपको नेक्स्ट ईयर या सेमेस्टर में 7 सालों में एडमिशन लेने में मदद करेगा। खास बात ये है कि जरूरी नहीं आप एक ही जगह से अगला सेमेस्टर करें। अगर आपको लगता है कि एक सेमेस्टर के क्रेडिट स्कोर आपने दिल्ली यूनिवर्सिटी से किए हैं और अगले आप इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी से करने में सक्षम हैं तो आप ऐसा पाएँगे।

मोदी सरकार के छोटे प्रयास से बदल रहा भारत

गौरतलब है कि ऐसे समय में जब लोकसभा चुनाव नजदीक हैं और विपक्ष लगातार मोदी सरकार की नीतियों में खोट ढूँढने के प्रयास कर रहा है, तब जानने की जरूरत है कि नरेंद्र मोदी सरकार ने सिर्फ बड़ी-बड़ी परियोजनाओं की शुरुआत करके ही देश को विकसित नहीं किया है बल्कि उन्होंने ऐसे छोटे-छोटे कदम उठाकर भी देश के युवाओं को मजबूत बनाने का काम किया है।

व्यवहारिक तौर पर आज एबीसी के इस्तेमाल को देखें तो ऐसी योजना के जरिए वो महिलाएँ अपनी शिक्षा पूरी कर सकती हैं जिनपर शादी का दबाव बनाकर उनसे उनकी पढ़ाई बीच में छुड़वा दी गई। या, इसका फायदा वो पुरुष उठा सकते हैं जिनका सपना उच्च शिक्षा ग्रहण करने का था लेकिन पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते उन्हें नौकरी की ओर अपना राह मोड़नी पड़ी। वो युवा भी इसका लाभ उठा सकते हैं जो आसपास के माहौल के कारण एक उम्र में भ्रमित होकर शिक्षा छोड़ देते हैं और बाद में उन्हें एहसास होता है कि अगर पढ़ाई पूरी की होती तो शायद जीवन में कुछ बेहतर कर रहे होते।

शौहर को छोड़ प्रेमी संग भागी अफसाना, लोग मरा हुआ समझे इसलिए सहेली जीनत को जिंदा जला दिया: अब जेल में कटेगी पूरी जिंदगी

मेरठ के बहुचर्चित जीनत हत्याकांड में उसकी सहेली अफसाना को उम्र कैद की सजा सुनाई गई है। उसे साल 2024 के पहले ही दिन यानी 1 जनवरी को सजा सुनाई गई। जीनत को 2019 में जिंदा जलाकर मार दिया गया था। जब उसकी हत्या की कहानी सामने आई तो हर कोई हैरान रह गया।

मेरठ के लिसाड़ीगेट थाना इलाके से जुड़ा ये मामला अप्रैल 2019 का है। 1 अप्रैल 2019 को जीनत गायब हो जाती है। अगले दिन (2 अप्रैल 2019) को दूसरे मोहल्ले के एक घर में आग लगने की खबर मिलती है। किराए के इस कमरे में आग लगने के बाद एक महिला का शव मिलता है। मृत महिला की पहचान अफसाना के तौर पर की जाती है।

अफसाना के परिजन उसके पति के खिलाफ दहेज हत्या का मामला दर्ज कराते हैं। इधर जीनत का भाई भी उसके पति के खिलाफ दहेज के लिए मारपीट का आरोप लगाते हुए गुमशुदगी का मामला दर्ज करवाता है। दोनों मामलों की जाँच के दौरान पुलिस को पता चला कि जीनत और अफसाना पक्की सहेली थी। एक-दूसरे के घर आना-जाना था। पूछताछ और सीसीटीवी से पता चला कि जीनत 1 अप्रैल को अफसाना के घर गई थी, लेकिन वहाँ से लौटी नहीं।

इसके बाद 24 अप्रैल 2019 को खुद को निशा बताते हुए एक महिला थाने पहुँचती है। खुद को गर्भवती बताते हुए कहती है कि पति प्रवीण ने उसे छोड़ दिया है। लेकिन थाने में मौजूद एक पुलिस वाले को लगता है कि उसने निशा को कहीं देखा है। असल में इस पुलिस वाले ने कुछ दिन पहले ही अफसाना की मौत के मामले की जाँच फाइल देखी थी। उसे लगा कि ​जो महिला खुद को निशा बता रही है वह अफसाना की ती दिखती है। ऐसे में निशा की कहानी पर विश्वास करने की जगह वह अफसाना की माँ को बुलवाता है और उसकी पहचान कराता है।

28 अप्रैल 2019 पुलिस निशा और उसके कथित प्रेमी प्रवीण कुमार को गिरफ्तार कर लेती है। पुलिस पूछताछ में अफसाना उर्फ निशा ने पूरी कहानी उगल दी। उसने बताया कि वह अपने शौहर को छोड़कर प्रेमी प्रवीण के साथ रहना चाहती थी। इसलिए जीनत की हत्या कर उसे जला दिया ताकि लोगों को लगे कि वह मर गई है।

अफसाना ने बताया कि 1 अप्रैल को जीनत उसके घर आई थी। उसने उसे नशीला पदार्थ खिला दिया। बेहोश होने के बाद छोटे गैस सिलेंडर को लीक आग लगा दी और खुद बाहर निकल गई। हर तरफ अफसाना के मारे जाने का हल्ला मच गया और अफसाना खुद प्रेमी प्रवीण के पास चली गई।

उसने यह भी बताया कि प्रवीण को उसने अपना नाम निशा बता रखा था। जब वह शौहर को छोड़कर आई तो प्रवीण को उसके अफसाना होने का पता चला। साथ ही वह गर्भवती भी थी। इसके बाद प्रवीण ने उससे पीछा छुड़ा लिया। इससे बौखलाई अफसाना पुलिस के पास निशा बनकर पहुँच गई। लेकिन यह उसे भारी पड़ गया। उसकी पहचान, उसकी साजिश सब कुछ दुनिया के सामने आ गई।

क्रिकेट अकादमी खोलने के नाम पर MS धोनी संग हुई 15 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी, कैप्टन कूल ने पूर्व बिजनेस पार्टनर्स के खिलाफ दर्ज कराया क्रिमिनल केस

क्रिकेट के दिग्गज खिलाड़ी महेंद्र सिंह धोनी के साथ कारोबार के नाम पर करोड़ों रुपए की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। इस पर ‘कैप्टन कूल’ के नाम से मशहूर धोनी का पारा चढ़ गया और उन्होंने दो पूर्व बिजनेस पार्टनर्स के खिलाफ झारखंड की राजधानी राँची की एक अदालत आपराधिक केस दायर करा दिया है।

धोनी ने ये केस अरका स्पोर्ट्स एंड मैनेजमेंट लिमिटेड के मिहिर दिवाकर और सौम्य विश्वास के खिलाफ दायर किया है। इसमें धोनी ने दावा किया है कि उनके दोनों पूर्व बिजनेस पार्टनर्स ने क्रिकेट अकादमियों को खोलने के कॉन्ट्रेक्ट की धज्जियाँ उड़ाते हुए उन्हें 15 करोड़ रुपए से अधिक का चूना लगाया है।

मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक, दिवाकर ने कथित तौर पर विश्व स्तर पर एक क्रिकेट अकादमी स्थापित करने के लिए 2017 में महेंद्र सिंह धोनी के साथ एक समझौता किया था। हालाँकि, समझौते में निर्धारित की गईं शर्तों का पालन करने में दिवाकर और सौम्य नाकाम रहे।

समझौते की शर्तों के मुताबिक, अरका स्पोर्ट्स फ्रेंचाइजी शुल्क का भुगतान करने और लाभ को साझा करने के लिए बाध्य थी, लेकिन कंपनी ने ऐसा नहीं किया। क्रिकेटर धोनी ने अपनी शिकायत में कहा है कि कई कोशिशों के बावजूद समझौते में दिए नियमों और शर्तों की अवहेलना की गई।

इस वजह से महेंद्र सिंह धोनी ने 15 अगस्त 2021 को अरका स्पोर्ट्स को दी गई ऑथिरिटी लेटर को रद्द कर दिया और कई कानूनी नोटिस भेजे। हालाँकि, इसका कोई फायदा नहीं हुआ। धोनी के दोस्त सिमंत लोहानी, जिन्हें चित्तू के नाम से जाना जाता है, ने भी दोनों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। चित्तू ने कहा कि अरका स्पोर्ट्स के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के बाद दिवाकर ने उन्हें धमकी दी।

विधि एसोसिएट्स की तरफ से एमएस धोनी का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील दयानंद सिंह का कहना है कि अरका स्पोर्ट्स ने उन्हें धोखा दिया और ठगा है। इस धोखे की वजह से महेंद्र सिंह धोनी को 15 करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान झेलना पड़ा है।

एमएस धोनी हाल ही में दुबई में नया साल बिताने के बाद घर लौटे हैं। इस यात्रा के दौरान भारत के विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत भी धोनी के साथ नजर आए थे। एमएस धोनी और ऋषभ पंत दोनों के आईपीएल 2024 के दौरान एक्शन में लौटने की उम्मीद जताई जा रही है। ये कैश-रिच लीग से धोनी का विदाई सीजन हो सकता है।

‘मुझे डराते हैं ये… रात भर सोने नहीं देते’ : ओरी ने पूछा ‘ओरी कल्चर’ पर सवाल, एक्ट्रेस ने दिया करारा जवाब

बॉलीवुड अभिनेत्री सुचित्रा कृष्णमूर्ति ने अपने पोस्ट में डिजाइनर कपड़े पहनकर उसका लेबल दिखाने वाले चलन का विरोध किया। साथ ही इस बात पर गौर करवाया कि आजकल के बच्चे ‘ओरी कल्चर’ के फैन हैं जो महंगे कपड़े और बैग लेकर सेलिब्रिटीज के साथ फोटो लेना चाहते हैं, लेकिन भूल जाते हैं कि जिसके साथ वो फोटो खिंचा रहे हैं वो सेलेब्रिटी है न कि वो खुद हैं।

अपनी पोस्ट में सुचित्रा ने बताया कि वो ब्रांड को वैल्यू नहीं देतीं। उन्हें लगता है कि किसी कलाकार का कैलिबर ही ब्रांड होता है। आजकल प्राइज टैग दिखाना स्टेटस सिंबल हो गया है। जो अमीर लोग करते हैं वो इनसिक्योर होने के नाेते दिखावा करते हैं।

उन्होंने पोस्ट में बताया कि वो ये बात अपनी एक पुरानी ट्रेनर से मिलने के बाद कह रही हैं जो कभी कर्ज लेकर महंगे कपड़े और बैग लेती थी। लेकिन अब इन सबसे दूरी बना ली है। हाल में जब वो सुचित्रा से मिलीं तो सुचित्रा ने उनसे उनके पुराने शौक का जिक्र किया।

इस पर ट्रेनर बोली कि वो अब ऐसा नहीं करती है क्योंकि उनका बेटा उनकी क्लाइंट्स के साथ फोटो माँगने लगा था। वह बोली- “ये सब क्या बकवास है। मैं उसे ओरी कल्चर में नहीं जाने देना चाहती। ये खतरनाक है। उसे अपने दम पर कुछ करना होगा। एहसास करना होगा कि सिर्फ फोटोज पोस्ट करना उसे सेलीब्रिटी जैसा नहीं बनाता।”

उनके इस पोस्ट के बाद ओरी ने उन्हें जवाब दिया, “यह महिला कौन है और ओरी कल्चर क्या है? क्या हो रहा है? वह मेरे बारे में क्यों बात कर रही है? मैं अभी बहुत कश्मकश में हूँ। मैं उससे कभी नहीं मिला। किसी के दोस्त की कही बात सुर्खियाँ क्यों बन रही है? ये वे प्रश्न हैं, जो मुझे परेशान करते हैं और पूरी रात जगाए रखते हैं!”

ओरी की चिंता

इस पर सुचित्रा ने जवाब दिया- “मेरे प्रिय ओरी। यह हेडलाइन उसी कारण से बन रही हैं, जिसके कारण तुम सुर्खियाँ बनते हैं – किसी का दोस्त होने के कारण। मैं भी तुमसे कभी नहीं मिली, लेकिन मैं तुम्हारी माँ से मिलना चाहूँगी!!! मेरी पोस्ट एक सामाजिक टिप्पणी है… अपना ध्यान रखें।”

बता दें कि ओरी सोशल मीडिया पर फेमस हैं, जहाँ वह अलग-अलग कपड़ों में अपने बॉलीवुड हीरो-हिरोइन के साथ फोटो डालते हैं। हाल में ये ट्रेंड भी चला था कि पता लगाओ ओरी करता क्या है। इस ट्रेंड ने ओरी को इतना फेमस किया कि वो बिग-बॉस हाउस में भी हो आया।

नवी मुंबई में सर्वे कर रहे डॉक्टर को मिली 12 साल की प्रेग्नेंट बच्ची, 29 साल का ‘पति’ बार-बार करता था रेप: गर्भपात कराने की भी की कोशिश

बाल विवाह एक दंडनीय अपराध है। बावजूद इसके महाराष्ट्र के नवी मुंबई से एक 12 साल की लड़की से 29 साल के युवक के शादी करने और बार-बार जिस्मानी संबंध बनाकर उसे गर्भवती करने का मामला सामने आया है।

मामले का खुलासा होने के बाद आरोपित के खिलाफ IPC, यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण एक्ट (POCSO) और बाल विवाह निषेध एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है। 5 जनवरी 2024 को उसे गिरफ्तार किया गया। आरोपित और पीड़िता दोनों मूल रूप से महाराष्ट्र के सितारा जिले के रहने वाले हैं।

मामले का खुलासा 4 जनवरी को हुआ था। नवी मुंबई के पनवेल इलाके में एक डॉक्टर सर्वे कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें 12 साल की यह बच्ची गर्भवती मिली। डॉक्टर ने जाँच की तो पता चला कि बच्ची चार महीने की गर्भवती है। इसके बाद डॉक्टर ने मामले की सूचना पुलिस को दी।

रिपोर्ट के अनुसार करीब 6 महीने पहले आरोपित ने इस बच्ची से शादी की थी। नाबालिग होने के बावजूद वह उसके साथ बार बार संबंध बना रहा था। इससे बच्ची गर्भवती हो गई। आरोपित बच्ची का गर्भपात कराने की भी कोशिश कर रहा था। खंडेश्वर पुलिस स्टेशन के अधिकारी ने आरोपित के खिलाफ मामला दर्ज किए जाने की पुष्टि की है।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार दिसंबर 2021 में बाल विवाह निषेध (संशोधन) विधेयक, 2021 लेकर आई थी। इसके जरिए ‘बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 (पीसीएमए)’ में संशोधन किया गया था। ताकि पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए विवाह की उम्र 21 वर्ष के बराबर की जा सके जो पहले पुरुषों के लिए 21 वर्ष और महिलाओं के लिए 18 वर्ष थी।

वैसे तो बाल विवाह को लेकर बनाया गया कानून हर समुदाय पर लागू होता है, लेकिन मुस्लिम पर्सनल लॉ को लेकर इसकी स्थिति अब तक स्पष्ट नहीं रही है। दिल्ली हाईकोर्ट ने 2012 में एक 15 साल की लड़की की अपनी मर्जी से शादी को वैलिड मानते हुए कहा था कि इस्लामिक कानून के मुताबिक लड़की मासिक धर्म शुरू होने के बाद अपनी इच्छा के मुताबिक शादी कर सकती है।

वहीं गुजरात हाई कोर्ट ने 2015 में कहा था कि बाल विवाह निषेध कानून 2006 के दायरे में समुदाय विशेष वाले भी आते हैं। अक्टूबर 2017 में सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस एमबी लोकुर और दीपक गुप्ता ने समुदाय विशेष के अलग विवाह कानून को पीसीएमए के साथ मजाक बताया था। सितंबर 2018 में पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने कहा था कि समुदाय विशेष पर यह कानून लागू नहीं होता। अदालत का कहना था कि मुस्लिम पर्सनल लॉ स्पेशल एक्ट है, जबकि पीसीएमए एक सामान्य एक्ट है।

दिल्ली के 7 मोहल्ला क्लीनिकों में सिर्फ 2 माह में 23000 फर्जी मरीज मिले: AAP सरकार में लैब टेस्टिंग के नाम पर सैकड़ों करोड़ का घोटाला, CBI करेगी जाँच

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की नेतृत्व वाली दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार जिस मोहल्ला क्लीनिक को दिल्ली का विकास मॉडल बताती है, उसमें घोटालों की झड़ी लग गई है। दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने मोहल्ला क्लीनिकों में फर्जी लैब टेस्ट की सीबीआई जाँच की सिफारिश की, इसके बाद शुक्रवार (5 जनवरी 2024) को केंद्र सरकार ने जाँच की अनुमति दे दी। ये घोटाला सैकड़ों करोड़ रुपए का है।

मोहल्ला क्लिनिकों में नकली दवाएँ देने की जाँच की सिफारिश के बाद यह इससे जुड़ा दूसरा मामला है, जिसमें उपराज्यपाल ने सीबीआई जाँच की सिफारिश की है। सामने आई जानकारी के अनुसार, मोहल्ला क्लिनिकों में हजारों टेस्ट ऐसे लोगों के किए गए, जो दुनिया में है ही नहीं। हम आपको इस घोटाले से जुड़ी हर बात आपको बताने जा रहे हैं।

दिल्ली सरकार ने मोहल्ला क्लीनिक में गंभीर बीमारियों की भी सुविधा उपलब्ध कराई गई। वैसे, तो मोहल्ला क्लीनिक की शुरुआत से ही उस पर गंभीर आरोप लगते रहे हैं, लेकिन ये आरोप ऐसे हैं कि कोई भी समझ जाएगा कि खेल आखिर क्या है। मोहल्ला क्लीनिक के माध्यम से जिन मरीजों के टेस्ट होते थे, उन टेस्ट को अंजाम देने की जिम्मेदारी सौंपी गई एगिलस डायग्नोस्टिक्स और मेट्रोपोलिस हेल्थ केयर को।

एलजी ऑफिस की तरफ से शुरुआत जाँच में ये सामने आया है कि करोड़ों रुपए के हजारों टेस्ट जो किए गए हैं, वो असल में हुए ही नहीं। उन टेस्ट को फर्जी मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल करके सिर्फ कागजों पर किया गया। ऐसे लोग ‘जो कभी थे ही नहीं’, उनके टेस्ट कराए गए। इसकी कई शिकायतें एलजी ऑफिस तक पहुँचीं। इसके बाद इन क्लिनिकों की औचक निरीक्षण में इसका खुलासा हुआ।

इस घोटाले का पहला पता अगस्त 2023 में चला, जब दिल्ली के दक्षिण पश्चिम, शाहदरा, उत्तर-पूर्वी जिलों में फर्जी अटेंडेंस का मामला पकड़ में आया। इसमें मेडिकल इंचार्ज ऑफिसर रिकॉर्डेड वीडियो के माध्यम से हाजिरी दर्ज कराते पकड़े गए। उनकी अनुपस्थिति में अज्ञात लोग/डॉक्टर मरीजों को सलाह देते और दवाइयाँ लिखते देखे गए। इस मामले में एफआईआर दर्ज करा दी गई।

उपराज्यपाल ने लैब टेस्ट में घोटाले की जानकारी के लिए दोनों लैब की 3 महीने की टेस्ट की रिपोर्ट निकलवाई। इसमें जुलाई से सितंबर 2023 तक के आँकड़ों को शामिल किया गया। जब डेटा एकत्र किया गया तो पता चला कि इनमें से बहुत सारे लैब टेस्ट में फर्जी या फिर गलत नंबर डालकर रजिस्ट्रेशन किया गया। एक-एक मोबाइल नंबर पर कई-कई टेस्ट भी किए गए।

मोहल्ला क्लीनिक में फर्जीवाड़े के आँकड़े

एलजी ऑफिस की जाँच में इन 7 मोहल्ला क्लीनिक्स पर फोकस किया गया। हजारों की संख्या में कराए गए इन टेस्ट में से 11,657 लैब टेस्ट ऐसे रहे, जिसमें मोबाइल नंबर में सिर्फ 0 लिखा है। वहीं, 8251 लैब टेस्ट में मोबाइल नंबर लिखा ही नहीं गया। यही नहीं, 3092 लैब टेस्ट में मोबाइल नंबर 9999999999 दर्ज किया गया है। 400 लैब टेस्ट में मोबाइल नंबर 1,2,3,4,5 से शुरु हो रहे हैं, जो भारत में होते ही नहीं।

यही नहीं, 999 मामलों में एक ही मोबाइल नंबर का 15 या इससे ज्यादा बार इस्तेमाल हुआ। इसमें भी देखें तो अकेले 9810467129 मोबाइल नंबर से 185 लैब टेस्ट को अंजाम दिया गया। वहीं, 9855544543 नंबर से 165 लैब टेस्ट किए गए। एलजी ऑफिस की प्रारंभिक जाँच में 23 हजार से ज्यादा फर्जी मरीजों का पता चला है।

एक ही मोबाइल नंबर का इस्तेमाल कर किए गए लैब टेस्ट

फर्जी लैब टेस्ट के ये आँकड़े सिर्फ 7 जगजीत नगर मोहल्ला क्लीनिक, बिहारी कॉलोनी मोहल्ला क्लीनिक, जफर कलाँ मोहल्ला क्लीनिक, ढाँसा मोहल्ला क्लीनिक, उज्वा मोहल्ला क्लीनिक, शिकारपुर मोहल्ला क्लीनिक और गोपाल नगर मोहल्ला क्लीनिक के हैं। इन सात मोहल्ला क्लीनिक्स में 5 पर टेस्टिंग का जिम्मा एगिलस लैब का था, तो 2 का जिम्मा मेट्रोपोलिस का।

फरवरी 2023 से सितंबर 2023 के बीच इन मोहल्ला क्लीनिक्स पर 17,725 लैब टेस्ट कराए गए। इसमें से एगिलस ने 15,463 लैब टेस्ट किए और मेट्रोपोलिस ने 2262 टेस्ट किए। इसके बाद इन लैबों के पूरे डाटा को निकाला गया, जिसमें दिल्ली सरकार के पैसों पर अब तक 6 लाख 6 हजार 837 लैब किए गए हैं। इसमें से एगिलस ने 5,21,221 टेस्ट और मेट्रोपोलिस ने 85,616 लैब टेस्ट किए।

दिल्ली में एक ही नंबर का इस्लेमाल कर सैकड़ों लैब टेस्ट

जानकारी के बावजूद दिल्ली सरकार ने बंद रखे आँख-कान और मुँह

मोहल्ला क्लीनिक्स से जुड़ा ये घोटाला सामने आने के बाद एलजी ऑफिस ने 3 माह के अंदर मरीजों के ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की सुविधा तैयार करने को कहा था, जो आधार बेस्ड या बायोमेट्रेकि बेस्ड हो। एलजी ने राज्य सरकार से ये भी कहा था कि इन मोहल्ला क्लीनिक्स को चलाने वाली प्रक्रिया की जाँच की जाए और 6 माह के अंदर ये बताया जाए कि कैसे ये मोहल्ला क्लीनिक पहले से मौजूद स्वास्थ्य सुविधाओं से बेहतर योगदान दे रही हैं।

एलजी द्वारा दिए गए इन सुझावों पर दिल्ली सरकार ने चुप्पी साध ली। इसके बाद एलजी ने मोहल्ला क्लीनिक के मौजूदा प्रोजेक्ट डायरेक्टर, लैब टेस्ट को अंजाम देने वाली कंपनी (आउटसोर्स्ड लैब सर्विसेज) और अन्य लोगों के खिलाफ उनके निर्देशों को न मानने की वजह से कार्रवाई का सुझाव दिया। इसके साथ ही एलजी ने विजिलेंस जाँच का भी आदेश दे दिया।

इस जाँच में इस बात का पता लगाया जाना था कि घोटालों से कितना नुकसान हुआ और डॉक्टर/सपोर्ट स्टाफ किस तरह से उन प्राइवेट कंपनियों के साथ मिलकर ठगी का काम कर रहा था। इस जाँच रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि एलजी द्वारा गंभीर तरीके से दिए गए सुझावों को माना तक नहीं गया और आउटसोर्सिंग पर लैब टेस्ट के लिए रखी गई कंपनियों के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई।

अब जबकि इस घोटाले का खुलासा हो गया है तो भी इन 7 मोहल्ला क्लीनिकों से जुड़े स्टाफ के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके साथ ही सीडीएमओ डॉक्टर संदीप गौतम ने झूठा बयान दिया कि घोटाले के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी गई है। अब चूँकि एलजी ने मोहल्ला क्लीनिकों की जाँच के लिए सीबीआई सिफारिश कर दी और केंद्र ने इसकी स्वीकृति दे दी तो अन्य मामले भी जल्दी सामने आएँगे।

अंग्रेजी में लिखी गई मूल खबर को आप यहाँ पढ़ सकते हैं।

‘बिल क्लिंटन नपुंसक, उसने रेप करने के बाद खुद बताया’ : अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति पर महिला का आरोप, यौन अपराधी को बचाने का भी लगा इल्जाम

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन पर बलात्कार का आरोप लगाने वाली महिला जुआनिता ब्रॉडरिक ने नया दावा किया है। जुआनिता ने कहा कि बिल क्लिंटन ने उनका रेप करने के बाद कहा था कि वो नपुंसक हैं।

5 जनवरी 2024 को किए गए ट्वीट में जुआनिता ब्रॉडरिक ने लिखा, “बिल क्लिंटन ने मेरा रेप करने के बाद कहा- ‘फिक्र मत करो। मैं जब बच्चा था तब कंठ रोग के कारण मैं नपुंसक हो गया था।’ इसके बाद उसने मुझे मेरे सूजे और खून निकलते ओठों की ओर इशारा करके बोला- तुम्हारे लिए अच्छा होगा कि तुम इस पर बर्फ लगा लो’।”

इस पोस्ट के साथ महिला ने तंज भरे अंदाज में कहा- कुछ अच्छे आदमी होते हैं और फिर होते हैं बिल क्लिंटन जैसे। महिला ने ये ट्वीट यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन के यौन शोषण से जुड़े 19 दस्तावेजों की एक नई लिस्ट सामने आने के बाद किया। इसमें 300 पेज हैं। इस लिस्ट में एपस्टीन के करीबियों की पहचान का खुलासा किया गया। लिस्ट में कई हाई प्रोफाइल नाम शामिल हैं। जैसे प्रिंस एंड्रयू, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन, माइकल जैक्सन और डेविड कॉपरफील्ड।

इस डॉक्यूमेंट के बाहर आने के साथ ही ये भी पता चला कि बिल क्लिंटन ने जेफरी को बचाने का प्रयास किया था। उन्होंने वैनिटी फेयर में एप्सटीन के खिलाफ छपने वाले कहानी में अपने ‘अच्छे मित्र’ की सेक्स ट्रैफिकिंग की बात को छापने से मना किया था।

वैनिटी फेयर की एडिटर ग्रेडन कार्टर ने बताया कि जब वो इस केस की जाँच कर रहे थे तब उन्हें अपने घर के बाहर एक बिल्ली का कटा सिर मिला था। इसकी तरह विकी वार्ड, जो कि वैनिटी फेयर के रिपोर्टर थे, उन्होंने भी कहा कि 2011 में एप्सटीन के मामले में जाँच करते हुए उन्हें और उनके परिवार को धमकी दी गई थी।

HC ने कहा था- सेक्स की इच्छा पर काबू रखे लड़कियाँ, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- यह फैसला गलत और परेशान करने वाला

सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाई कोर्ट के उस फैसले को गलत और परेशान करने वाला बताया है जिसमें लड़कियों को यौन इच्छाओं पर काबू रखने की सलाह दी गई थी। शीर्ष अदालत स्वत: संज्ञान लेकर इस मामले की सुनवाई कर रही है।

गुरुवार (4 जनवरी 2024) को मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस अभय एस ओक और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने हाई कोर्ट के फैसले की वैधता पर सवाल उठाते हुए टिप्पणियों को ‘समस्याग्रस्त’ बताया। पिछली सुनवाई के दौरान भी सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले के कुछ हिस्सों को बेहद आपत्तिजनक और अनुचित बताया था। साथ ही कहा था कि न्यायाधीशो से यह उम्मीद नहीं की जाती कि वे अपने निजी विचार रखें या भाषण दें। यह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत किशोरों के अधिकारों का पूरी तरह उल्लंघन है।

पिछली सुनवाई के दौरान ही शीर्ष अदालत ने इस मामले में राज्य सरकार को नोटिस जारी कर इसके खिलाफ अपील दायर करने को लेकर जवाब माँगा था। गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने इस फैसले के खिलाफ अपील दायर करने की जानकारी दी। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने इस अपील के साथ स्वत: संज्ञान की कार्यवाही को जोड़ने के लिए भी कहा है।

हाई कोर्ट के जस्टिस चित्तरंजन दास और पार्थ सारथी सेन ने 18 अक्टूबर 2023 को नाबालिग से रेप के दोषी एक युवक को बरी करते यह टिप्पणी की थी। युवक को जिससे रेप का दोषी ठहराया गया था, उससे उसके ‘रोमांटिक सम्बन्ध’ रहे थे। हाई कोर्ट ने इस तरह के मामलों में यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम (POCSO) के इस्तेमाल पर भी चिंता व्यक्त की थी। 16 साल से अधिक उम्र के किशोरों के बीच सहमति से सेक्स की स्थिति में इसे अपराध की श्रेणी से हटाने का सुझाव दिया था।

हाई कोर्ट ने कम उम्र में यौन संबंधों को लेकर किशोरों को नसीहत भी दी थी। कहा था कि किशोर लड़कियों को यौन इच्छाओं पर नियंत्रण रखना चाहिए। दो मिनट के सुख के लिए सेक्स से बचना चाहिए। वहीं लड़कों से महिलाओं की गरिमा का सम्मान करने को कहा था।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा था, “हमें कभी यह नहीं सोचना चाहिए कि केवल एक लड़की ही दुर्व्यवहार का शिकार होती है। क्योंकि लड़के भी दुर्व्यवहार का शिकार होते हैं। माता-पिता के मार्गदर्शन के अलावा, इन पहलुओं और रिप्रोडक्टिव हेल्थ और हाइजीन पर जोर देने वाली यौन शिक्षा हर स्कूल के पाठ्यक्रम का हिस्सा होनी चाहिए।”