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रामजन्मभूमि दर्शन करने जा रहे थे राम अचल गुप्ता, रोका तो रामधुन में रम गए, फिर भी मार दी गोली: बलिदानी के परिवार ने की ‘शुजागंज’ का नाम बदलने की माँग

अयोध्या में 22 जनवरी 2024 को राम मंदिर में रामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा होनी है। इसको लिए पूरे देश में उत्साह है और दीपावली मनाने की तैयारी की जा रही है। पूरी दुनिया का हिन्दू समाज इस समय उन तमाम कारसेवकों को भी याद कर रहा है, जिन्होंने राम के लिए पर अपने प्राणों की आहुति दी। राम मंदिर के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले लोगों में एक नाम राम अचल गुप्ता का भी है।

अयोध्या जिले के रुदौली थाना क्षेत्र के निवासी राम अचल गुप्ता को 2 नवंबर 1990 को रामजन्मभूमि के पास गोली मार दी गई थी। उस दौरान यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के पिता मुलायम सिंह यादव के आदेश पर पुलिस ने कारसेवकों पर गोली चलाई थी। ऑपइंडिया ने राम अचल गुप्ता के घर जाकर वर्तमान हालात की जानकारी ली।

किराने की दुकान से होता है गुजारा

राम अचल गुप्ता का परिवार लखनऊ-अयोध्या रोड के पास शुजागंज बाजार में रहता है। गुजारा करने के लिए उनके परिजन किराने की दुकान चलाते हैं। दुकान का नाम संजय किराना स्टोर है। राम अचल को मात्र 26 वर्ष की उम्र में वीरगति प्राप्त हुई थी। वो 2 बेटों और 1 बेटी के पिता थे। फ़िलहाल उनके सभी बेटों-बेटी का विवाह हो चुका है।

राम अचल गुप्ता की पत्नी का नाम राजकुमारी गुप्ता है। वो अभी जीवित हैं और उनकी उम्र लगभग 55 वर्ष है। पति की मौत के बाद राजकुमारी गुप्ता ने ही बच्चों को पालन-पोषण किया। बच्चों की पढ़ाई-लिखाई अधिकतर उनके ननिहाल में हुई थी। राम अचल गुप्ता के बेटे संजय गुप्ता के मुताबिक, उनका बचपन बेहद अभाव में बीता है।

इसी दुकान से पल रहा है राम अचल गुप्ता का परिवार

बचपन से ही थे RSS के सदस्य

राम अचल गुप्ता के बेटे संजय गुप्ता ने ऑपइंडिया को बताया कि उनके पिता बचपन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े हुए थे। संघ की शाखा में कोसों दूर से लोग आते थे। परिजनों का कहना है कि जब भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी की रथ यात्रा शुरू की थी, उस दौरान भी राम अचल काफी सक्रिय थे।

उस समय राम अचल गुप्ता अपने घर से लगभग 5 किलोमीटर दूर रुदौली बाजार में पान की दुकान लगाते थे। बेहद कम उम्र में ही राम अचल का विवाह अयोध्या के खंडासा क्षेत्र की रहने वाली राजकुमारी गुप्ता से हो गया। उनके बेटे संजय का कहना है कि उनके पिता ने कभी भी धर्म से ऊपर अपने परिवार को नहीं रखा।

दर्शन कराने के नाम पर जमा किया, फिर मार डाला

राम अचल के भाई रामतेज ने बताया कि 28 नवंबर 1990 को कारसेवा में वे भी अपने भाई के साथ गए थे। कारसेवकों के इस समूह में आसपास के गाँवों के दर्जनों लोग शामिल थे। इन सभी ने पहले बाहर से आए रामभक्तों को खाना खिलाया और उनके आराम करने की व्यवस्था की। इसके बाद राम अचल मुख्य सड़क पर तैनात पुलिस वालों से बचते-बचाते खेतों के रास्ते साथियों सहित अयोध्या निकल गए।

30 अक्टूबर 1990 को अयोध्या में चली गोलियों में कई कारसेवक वीरगति को प्राप्त हुए थे। इसके बावजूद राम अचल गुप्ता अपने घर लौटने को तैयार नहीं हुए। रामतेज गुप्ता ने हमें आगे बताया कि 2 नवंबर 1990 को अयोध्या की मणिराम दास छावनी में वो अपने भाई राम अचल के साथ इकट्ठा हुए थे। वहाँ देश भर के हजारों कारसेवक पहले से मौजूद थे।

उनका कहना है कि प्रशासन के कुछ अधिकारी वहाँ आए और इस बात पर सहमति बन गई थी कि सभी कारसेवकों को जन्मभूमि का दर्शन करवा के उनके घर भेज दिया जाएगा। प्रशासन की इस सहमति पर अलग-अलग दिशाओं से कारसेवकों के जत्थे निकले और कड़ी सुरक्षा के बीच जन्मभूमि की तरफ बढ़े। तब रामजन्मभूमि की तरफ बढ़ रहे जत्थों को पुलिस ने अलग-अलग जगहों पर रोक दिया।

घटना को याद करते हुए रामतेज ने बताया कि जिस जत्थे में वे अपने भाई राम अचल के साथ जा रहे थे, उसे बड़ा डाकखाना के पास रोका दिया गया। यह जगह हनुमान गढ़ी से महज आधा किलोमीटर ही दूर है। जत्थे को रोके जाने से कारसेवक नाराज हो गए और सड़क पर बैठकर राम भजन गाने लगे। इसी बीच पुलिस की 2 टीमें वहाँ पहुँची। एक टीम के हाथों में लाठियाँ थीं और दूसरे के पास बंदूकें।

रामतेज ने बताया कि बिना किसी चेतावनी के भजन गाते हुए धरना दे रहे कारसेवकों पर पुलिस ने हमला कर दिया। शुरुआत में लाठीचार्ज हुआ और बाद में गोलियाँ बरसा दी गईं। इसके चलते भगदड़ मच गई और रामतेज अपने भाई राम अचल से अलग हो गए। हर तरफ अफरा-तफरी का माहौल था और पुलिस बर्बरता पर उतर आई थी।

रामतेज गुप्ता का दावा है कि उन्होंने इस भगदड़ में देश के विभिन्न कोने से आए कारसेवकों को देखा कि वे अपने साथियों की लाशों को कंधों पर लाद कर इधर-उधर भाग रहे हैं। उन्होंने कहा कि आँसू गैस के गोले छोड़े जाने की वजह से हर तरफ धुँआ फ़ैल गया था और बीच-बीच में गोलियाँ आ रहीं थी और कारसेवक जमीन में गिर रहे थे।

राम अचल गुप्ता का पार्थिव शरीर

कोठारी बंधुओं के साथ रखा हुआ था शव

रामतेज गुप्ता ने ऑपइंडिया से बात करते हुए उस बीते मंजर को याद कर आक्रोशित हो गए। हालाँकि, खुद को सँभालते हुए उन्होंने कहा कि भगदड़ खत्म होने के बाद वो अपने भाई को खोजने लगे, लेकिन वो कहीं नहीं मिले। आखिरकार, मणिरामदास छावनी से घोषणा हुई कि उनके भाई राम अचल बलिदान हो गए हैं।

रामतेज गुप्ता ने आगे बताया कि जब वे शव को खोजते हुए मणिराम दास छावनी पहुँचे तो वहाँ उनके भाई राम अचल गुप्ता की लाश रखी हुई थी। वहाँ पर लगभग आधे दर्जन अन्य कारसेवकों की भी लाश रखी गई थी। इन आधे दर्जन बलिदानियों में कोठारी बंधु भी शामिल थे। गोली राम अचल के सीने पर लगी थी।

बलिदानी भाई की गाथा बताते रामतेज गुप्ता

शव देखकर रो पड़े SDM और छुए पैर

शुजागंज बाजार से राम अचल का शव लेने गए उनके कुछ परिचित लोगों से ऑपइंडिया ने बात की। उन्होंने बताया कि अयोध्या में मुलायम सिंह यादव द्वारा किए गए ‘परिंदा पर न मारने पाए’ के एलान के बाद प्रशासन सख्त हो गया था। हालाँकि, रुदौली में तैनात विशाल राय नाम के उप जिला मजिस्ट्रेट (SDM) ने इन लोगों की काफी मदद की थी। उन्होंने शव लेने गए लोगों के आने-जाने के लिए पास बनवाई थी।

राम अचल का शव लाने वालों ने हमें बताया कि जब बलिदानी की लाश शुजागंज आई, तब खुद SDM अंतिम संस्कार के समय मौजूद थे। लोगों ने दावा किया कि इस दौरान SDM विशाल राय फूट-फूट कर रोए थे और दाह संस्कार से पहले राम अचल के पैर छुए थे। विशाल राय पहले सेना में थे, जो रिटायरमेंट के बाद प्रशासनिक सेवा में आ गए थे। फ़िलहाल विशाल राय रिटायर हो चुके हैं।

जहाँ हुआ अंतिम संस्कार, वहीं बनी समाधि

राम अचल गुप्ता के परिजनों ने घर के सामने ही एक पौराणिक स्थल पर बड़ा मंदिर बनवा रखा है। इस मंदिर को भूमाफियाओं से बचाने के लिए उनके परिजनों ने लम्बी लड़ाई लड़ी है। इसी मंदिर के एक हिस्से में राम अचल का अंतिम संस्कार हुआ था। तब पुलिस और प्रशासन के तमाम अधिकारियों के अलावा हिन्दू संगठन के सदस्य और कई साधु-संत भी मौजूद थे। जिस जगह राम अचल गुप्ता का अंतिम संस्कार हुआ था, वहाँ एक समाधि और स्मारक बनाया गया है। परिजनों के मुताबिक, यह स्मारक आसपास के हिन्दुओं को धर्म के लिए लड़ने की प्रेरणा देता है।

समाधि को बम से उड़ाने की धमकी

राम अचल के घर वालों ने हमें बताया कि लगभग 10 साल पहले सिमी (SIMI) नाम के आतंकी संगठन की उन्हें धमकी मिली थी। यह धमकी समाधि के पास बने मंदिर में पर्चे फेंक कर दी गई थी। इस पर्चे में ‘हम इस जगह को बम से उड़ा देंगे’ लिखा हुआ था। बकौल संजय गुप्ता, तब उन्होंने इसकी शिकायत पुलिस में की थी और स्थानीय हिन्दुओं ने इस धमकी पर नाराजगी जताई थी। हालाँकि, इस मामले में तब पुलिस किसी को भी गिरफ्तार नहीं कर पाई थी।

इसी जगह हुआ था राम अचल गुप्ता का अंतिम संस्कार

पिता के बलिदान को मिले सम्मान और पूरे हों अधूरे वादे

दिवंगत राम अचल के बेटे संजय गुप्ता ने हमें बताया कि जब उनके पिता को वीरगति मिली थी, तब भाजपा की तरफ से उनकी माता को MLA के टिकट का ऑफर हुआ था। हालाँकि, तब पिता के दुःख में इसे मृतक के परिजनों ने अस्वीकार कर दिया था। संजय का यह भी दावा है कि उनके पिता के अंतिम संस्कार के दौरान मौजूद नेताओं ने शुजागंज का नाम बदल कर राम अचल नगर करने का एलान किया था।

संजय गुप्ता ने हमें आगे बताया कि इस एलान पर भी अभी तक कोई अमल नहीं हुआ है। शुजागंज का नाम अवध के पूर्व नवाब शुजाउद्दौला के नाम पर रखा गया है। बताया जाता है कि शुजागंज के ही रास्ते शुजाउद्दौला लखनऊ से तब के फैज़ाबाद (वर्तमान में अयोध्या) आया-जाया करता था। बाद में इसका नाम ही शुजागंज कर दिया गया।

राम अचल गुप्ता के परिवार की यह भी इच्छा है कि कारसेवा में बलिदान हुए लोगों की अयोध्या में एक स्मारक बनाई जाए। राम मंदिर निर्माण से खुद को बेहद खुश बताते हुए संजय गुप्ता ने कहा कि इस कार्य में उनके पिता का योगदान उनके लिए गर्व की बात है। यह परिवार आज भी नियमित रूप से अयोध्या दर्शन करने जाता है।

एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति बने गौतम अडानी, रिलायंस वाले मुकेश अंबानी पीछे छूटे: दुनिया के टॉप 10 अमीरों में भारत से कोई नहीं

अडानी समूह के मालिक गौतम अडानी एक बार फिर भारत ही नहीं, बल्कि एशिया के सबसे धनी व्यक्ति बन गए हैं। हाल के दिनों में उद्योगपति गौतम अडानी की संपत्ति में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है और उन्होंने रिलायंस समूह के मालिक मुकेश अंबानी को पीछे छोड़ दिया है। विश्व रैंकिंग में गौतम अडानी शीर्ष 12 उद्योगपतियों में शामिल हो गए हैं, जबकि मुकेश अंबानी 13वें स्थान पर फिसल गए हैं।

ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स (Bloomberg Billionaires Index) के अनुसार, बीते दो दिनों में गौतम अडानी की नेटवर्थ में 7.67 बिलियन अमेरिकी डॉलर (63,797 करोड़ रुपए) की बढ़ोतरी हुई है। इसकी वजह से शुक्रवार (5 जनवरी 2024) को उनकी कुल नेटवर्थ 97.6 बिलियन डॉलर (8.12 लाख करोड़ रुपए) हो गई।

इस वृद्धि के साथ ही गौतम अडानी ने मुकेश अंबानी को पीछे छोड़ दिया है। मुकेश अंबानी अब भारत के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति हैं। मुकेश अंबानी की कुल नेटवर्थ 97 बिलियन डॉलर (8.07 लाख करोड़ रुपए) है। पिछले दो दिनों अंबानी की नेटवर्थ में 665 मिलियन डॉलर (5,529 करोड़ रुपए) की बढ़ोतरी हुई। दुनिया के शीर्ष अरबपतियों की सूची में गौतम अडानी 12वें नंबर पर आ गए हैं। वहीं, मुकेश अंबानी इस सूची में 12वें स्थान से खिसक कर 13वें स्थान पर आ गए हैं।

ब्लूमबर्ग बिलियनेयर इंडेक्स के मुताबिक, दुनिया के शीर्ष 50 अरबपतियों की सूची में गौतम अडानी और मुकेश अंबानी के अलावा दो अन्य भारतीय उद्योगपतियों ने भी जगह बनाई है। इनमें शापूर मिस्त्री 34.6 बिलियन डॉलर (2.88 लाख करोड़ रुपए) नेटवर्थ के साथ 38वें नंबर पर हैं। वहीं, HCL टेक्नॉलोजीज के को-फाउंडर शिव नाडर 33 बिलियन डॉलर (2.74 लाख करोड़ रुपए) की संपत्ति के साथ 45वें नंबर पर हैं।

बता दें कि अमेरिकी शॉर्टसेलर कंपनी हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट के बाद अडानी की शेयरों में काफी गिरावट आ गई थी। यह मामला SEBI और अदालत में गया, लेकिन दोनों जगहों पर अडानी के खिलाफ किसी तरह की गड़बड़ी नहीं पाई गई। इसके बाद पिछले दो दिनों में अडानी ग्रुप के शेयरों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। इसकी वजह से अडानी ग्रुप की कुल बाजार पूँजीकरण 15.60 लाख करोड़ रुपए के पार चली गई।

अगर दुनिया के शीर्ष अरबपतियों की बात करें तो इस सूची में शीर्ष पर सोशल मीडिया साइट X (पूर्व में ट्विटर), Starlink और टेस्ला के मालिक एलन मस्क हैं। उनकी नेटवर्थ 220 बिलियन डॉलर (18.30 लाख करोड़ रुपए) है। हालाँकि, इस साल उनकी नेटवर्थ में 9 बिलियन डॉलर (74849 करोड़ रुपए) की कमी आई है, इसके बावजूद वे शीर्ष बने हुए हैं। पिछले साल वे सबसे अधिक कमाई करने वाले अरबपति थे।

शीर्ष उद्योगपतियों की लिस्ट में दूसरे पायदान पर अमेजन के फाउंडर जेफ बेजोस हैं। इनकी कुल संपत्ति 169 बिलियन डॉलर (14.05 लाख करोड़ रुपए) है। जेफ बेजोस इस साल अपनी संपत्ति में से 28 बिलियन डॉलर (2.33 लाख करोड़ रुपए) गँवा चुके हैं। पिछले साल ये टॉप गेनर में से एक थे।

वहीं, लग्जरी फैशन ब्रांड LV के मालिक बर्नार्ड अरनॉल्ट दुनिया के शीर्ष बिलेनियर्स की सूची में तीसरे स्थान पर हैं। उनकी कुल नेटवर्थ 168 बिलियन डॉलर (लगभग 13.97 लाख करोड़ रुपए) है। बर्नार्ड की संपत्ति में भी 10.80 बिलियन डॉलर (89,820 करोड़ रुपए) की कमी आई है। इसके बावजूद ये तीसरे स्थान पर हैं।

TMC नेता शाहजहाँ के घर रेड मारने आई ED टीम, ईंट-पत्थर से लैस ‘भीड़’ ने कर दिया हमला: बंगाल में CRPF जवानों और पत्रकार को भी नहीं छोड़ा

पश्चिम बंगाल के राशन घोटाला केस में तृणमूल कॉन्ग्रेस नेता शाहजहाँ शेख के घर रेड मारने गई प्रवर्तन निदेशालय की टीम पर और सीआरपीएफ के जवानों पर 250-300 लोगों की भीड़ ने जानलेवा हमला किया। इस दौरान पत्रकारों पर भी अटैक हुआ और कई गाड़ियों में तोड़फोड़ भी हुई।

हमले में ईंट-पत्थर का इस्तेमाल हुआ। सामने आई तस्वीर में एक आदमी का सिर खून से लथपथ नजर आ रहा है। वो कपड़ा बाँधकर सुरक्षाकर्मियों के साथ खड़ा है। भीड़ में पुरुषों के साथ महिलाएँ भी थीं। सबने ईडी के खिलाफ नारेबाजी करते हुए उन्हें गालियाँ दीं, फिर हमला किया।

घटना बंगाल के 24 नॉर्थ परगना की है। इस दौरान न्यूज 18 के पत्रकार के साथ बदसलूकी हुई। उनकी कार पर तोड़फोड़ हुई और कैमरा भी तोड़ दिया गया।

भाजपा चीफ सुकंता मजूमदार ने घटना पर कहा, “उनके खिलाफ शिकायत है भ्रष्टाचार मामले में। ये सामान्य है कि ईडी तो एक्शन लेगी ही। ईडी पर संदेशखाली में हुआ हमला दिखाता है कि आखिर रोहिंग्या लॉ एंड ऑर्डर के साथ कर क्या रहे हैं।”

वहीं सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि राज्य में कानून व्यवस्था जर्जर है। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस से स्थिति का संज्ञान लेने और उचित कार्रवाई करने की अपील की है। उन्होंने ये भी माँग की है कि इस मामले की जाँच एनआईए को सौंपी जाए। अपने ट्वीट में उन्होंने इस हमले में रोहिंग्याओं का हाथ होने की आशंका जताई है।

बता दें कि कुछ दिन पहले ही ईडी ने राशन घोटाला का खुलासा करते हुए बताया था कि पश्चिम बंगाल में सार्वजनिक वितरण प्रणाली का का लगभग 30% राशन खुले बाज़ार में बेच दिया गया। राशन की कथित चोरी से जो फायदा हुआ, वो मिल मालिकों और PDS वितरकों के बीच बँट गया।

इसके अलावा किसानों के नाम पर फर्जी बैंक खाते खोलकर MSP की राशि भी आपस में बाँटी गई। ये काम डीलरों, वितरकों और राशन दुकान मालिकों का एक नेटवर्क बनाकर किया गया। इस नेटवर्क ने सहकारी समितियों के साथ मिलकर किसानों के नाम पर बैंक अकॉउंट खुलवाए और फिर MSP की रकम अपनी जेब में डाल ली।

ईडी का कहना है कि ये घोटाला सालों से चल रहा है। 2022 में इस मामले में एफआईआर हुई थी और अक्टूबर 14, 2023 को एक बकीबुर रहमान नाम का व्यापारी गिरफ्तार हुआ था। इसके बाद इस मामले में पश्चिम बंगाल की मंत्री ज्योति प्रिया मलिक भी गिरफ्तार हुई थीं। आरोप था कि उनके खाद्य मंत्री रहने के कार्यकाल (2011-2021) के दौरान राशन वितरण अनियमितताएँ हुई थीं।

जर्मन हथियार-गोली, 5kg सोना, ₹5 करोड़ नगद, देश-विदेशी में संपत्ति: INLD नेता दिलबाग सिंह के घर छापा, अवैध खनन मामले में कॉन्ग्रेस विधायक भी

प्रवर्तन निदेशालय ने गुरुवार (4जनवरी 2024) को हरियाणा में अवैध खनन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में छापेमारी की। ये छापेमारी कॉन्ग्रेस विधायक सुरेंद्र पंवार और इंडियन नेशनल लोक दल (INLD) के पूर्व MLA दिलबाग सिंह के ठिकानों पर की गई। इसके तहत दोनों नेताओं और उनसे जुड़े यमुनानगर, सोनीपत, मोहाली, फरीदाबाद, चंडीगढ़ के 20 ठिकानों में छापेमारी की गई। इसमें INLD नेता के घर से करोड़ों रुपए की नगदी और विदेशी हथियार मिले हैं।

ईडी की छापेमारी में INLD के पूर्व MLA दिलबाग सिंह और उसके सहयोगियों के ठिकानों से लगभग 5 करोड़ रुपए की नगदी बरामद की गई। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार बरामद की गई नगदी की गिनती अभी भी जारी है।

यहीं नहीं अवैध जर्मनी मेड हथियार, 300 कारतूस, 100 से अधिक शराब की बोतलें भी छापेमारी में मिलीं हैं। INLD नेता दिलबाग सिंह के घर से ईडी को जाँच के दौरान 4-5 किलो सोना के साथ-साथ भारत और विदेशों में चल-अचल संपत्ति से जुड़े दस्तावेज भी बरामद हुए हैं।

ईडी के मुताबिक, धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के प्रावधानों के तहत ये कार्रवाई की गई है। बताते चलें कि सुरेंद्र पंवार सोनीपत से कॉन्ग्रेस के विधायक हैं। जबकि दिलबाग सिंह यमुनानगर सीट से INLD के विधायक रह चुके हैं। मनी लॉन्ड्रिंग का ये केस हरियाणा पुलिस में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है।

खनन की लीज खत्म होने और अदालत के आदेशों को दरकिनार कर यमुनानगर और आसपास के जिलों में बोल्डर, बजरी और रेत के कथित अवैध खनन की जाँच के लिए FIR दर्ज की गई थी। इसी को लेकर अब ईडी की कार्रवाई की गई।

इस मामले में केंद्रीय एजेंसी ईडी ‘ई-रावण’ योजना में कथित धोखाधड़ी की भी जाँच कर रही है। दरअसल ये एक ऑनलाइन पोर्टल है, जिसे रॉयल्टी और करों के संग्रह को आसान बनाने और खनन क्षेत्रों में कर चोरी को रोकने के लिए 2020 में हरियाणा सरकार लेकर आई थी।

लक्षद्वीप में PM मोदी और टूरिज्म vs युद्धपोत से राजीव गाँधी का ‘फैमिली टूर’ और अंग्रेज की बीवी के लिए नेहरू का फूल भेजना: 36 साल में ऐसे बदला सरकारी तंत्र

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लक्षद्वीप दौरा खबरों में है। तस्वीरों में दिख रहा है कि पीएम ने इस ट्रिप का काफी आनंद लिया। उन्होंने समुद्र की गहराइयों में जाकर ‘Snorkelling’ का अनुभव किया, तो किनारे बैठ वहाँ की खूबसूरती को भी निहारा। इसके अलावा उन्होंने लक्षद्वीप के स्थानीयों से भी मुलाकात की और कहा कि उनका मकसद लक्षद्वीप के लोकल कल्चर को संरक्षित रखते हुए वहाँ लोगों को बेहतर स्वास्थ्य, इंटरनेट और पेयजल की सुविधा देना है।

उन्होंने बताया कि जितना वह लक्षद्वीप की खूबसूरती देख खुश हुए उतना ही वहाँ के लोगों के स्वागत से भी। उन्होंने इस दौरे के वक्त अगत्ती, बंगारम और कवरत्ती में लोगों से मुलाकात की। लौटकर सारी तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कीं।

उनकी यह तस्वीरें देखने के बाद लोगों ने लक्षद्वीप जाने की तो इच्छा जताई ही। साथ ही एक और चर्चा भी शुरू हो गई। ये चर्चा है पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी के लक्षद्वीप ट्रिप की, जिन्होंने मीडिया की नजरों से छिपछिपाकर अपनी फैमिली ट्रिप के लिए देश के युद्धपोत INS विराट का दुरुपयोग पर्सनल वाहन की तरह किया था और बड़े लैविश ढंग से छुट्टियाँ मनाई थीं।

राजीव गाँधी की लक्षद्वीप में फैमिली ट्रिप

उनकी इस ट्रिप पर इंडियन एक्सप्रेस और इंडिया टुडे ने स्टोरी की थी, जिसका खामियाजा मीडिया संस्थानों को भुगतना पड़ा। इंडियन एक्सप्रेस के दफ्तर तो कई बार रेड पड़ी। वहीं संस्थान पर कस्टम ड्यूटी से बचने जैसे फर्जी आरोप लगाए गए। दफ्तर के बाहर दिल्ली पुलिस सीआरपीएफ के सिपाही तैनात किए गए।

इस प्रताड़ना का कारण बस ये था कि इंडियन एक्सप्रेस ने उनकी इन छुट्टियों पर कार्टून के जरिए सवाल किया था। कार्टून में राजीव गाँधी नारियल के पेड़ के नीचे बैठकर नारियल पी रहे थे और कह रहे थे,“Ah! To get away from it all!” और देश उनसे पूछ रहा था “कब?”

इसी तरह इंडिया टुडे की अनिता प्रताप ने भी राजीव गाँधी की इस ट्रिप पर स्टोरी की थी। इस रिपोर्ट में बताया गया था कि गाँधी परिवार की इस ट्रिप के लिए भरकर शराब ट्वीप की राजधानी में पहुँचाई गई थी। इसके अलावा 100 चिकन से भरा एक पोल्ट्री फार्म सेट हुआ था। मछलियों के साथ वहाँ द्वीप के ताजे फल जैसे पपीता, छोटे पीले केला, अमरूद भेजे गए थे। मक्खन और ब्रेड गई थी। कोल्डड्रिंप की 40 क्रेट, 300 मिनरल वाटर की बोतल, अमूल चीज, नींबू पानी आदि चीजें गई थीं।

राजीव गाँधी की यह ट्रिप 26 दिसंबर 1987 से 6 जनवरी 1988 तक की थी। मेहमानों की सूची में राहुल और प्रियंका के चार दोस्त, सोनिया गाँधी की बहन, बहनोई और उनकी बेटी, उनकी विधवा माँ आर. मैनो, उनके भाई और एक मामा शामिल थे। साथ ही पूर्व सांसद अमिताभ बच्चन, उनकी पत्नी जया और उनके बच्चे अभिषेक और श्वेता भी मौजूद थे। अमिताभ के भाई अजिताभ की बेटी, जिनकी विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम के संदिग्ध उल्लंघन के लिए जाँच की जा रही थी, वह भी साथ में गई थी। इसके आलावा अन्य भारतीय मेहमानों में पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण सिंह के भाई बिजेंद्र सिंह की पत्नी और बेटी थीं। और दो अन्य विदेशी भी थे।

1998 और 2024 की हो रही तुलना

यही कारण है कि सोशल मीडिया पर पीएम मोदी के फोटोज डालने के बाद कहा जा रहा है कि एक नरेंद्र मोदी हैं जो लक्षद्वीप की तस्वीरें साझा करके यहाँ के टूरिज्म को बढ़ावा देना चाहते हैं और एक राजीव गाँधी थे जिन्होंने इसे पर्सनल पिकनिक स्पॉट की जगह बना दी थी।

मालूम हो कि 1950 में ही भारतीय नौसेना की संपत्ति का दुरुपयोग करने की परंपरा जवाहरलाल नेहरू के साथ शुरू हुई थी। जब एडविना की मृत्यु 1960 में हुई तो सरकारी खर्चे पर नेहरू ने भारतीय नौसेना के फ्रिगेट आईएनएस त्रिशूल को एस्कॉर्ट के रूप में भेजा। जब उनका शोक संतप्त परिवार हट गया, तो भारतीय फ्रिगेट आईएनएस त्रिशूल उस जगह पर आया और नेहरू के निर्देशों के अनुसार मैरीगोल्ड के फूलों से उस पूरे एरिया को आच्छादित कर दिया गया।

पाकिस्तान जाकर हथियारों की ट्रेनिंग केस में दिल्ली हाई कोर्ट ने दे दी जमानत, सुप्रीम कोर्ट ने पलटा फैसला, कहा – तुरंत हिरासत में लो

एक शख्स हथियारों के प्रशिक्षण के लिए सीमा पार कर पाकिस्तान जाने की योजना बना रहा था। उस पर गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत केस दर्ज किया गया। आरोपित शख्स को दिल्ली हाईकोर्ट ने डिफॉल्ट जमानत दे दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के इस फैसले को पलट दिया है। फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि आंतक संबंधित केसों को हल्के में नहीं लिया जा सकता।

दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर टिप्पणी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी भी जताई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों को अदालतों को हल्के में नहीं लेना चाहिए, क्योंकि ये आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े मामले हैं।

SC की जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस राजेश बिंदल की बेंच ने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट टाडा मामले में शीर्ष अदालत के 1994 के फैसले पर गलत तरीके से निर्भर रहा और उसने यूएपीए मामले में उसके 2019 के फैसले को नजरअंदाज किया।

सुप्रीम कोर्ट ने 2019 के इस फैसले में कहा था कि यूएपीए मामलों में जाँच के लिए अधिकतम 180 दिनों तक का वक्त लिया जा सकता है। दरअसल जिस आरोपित को दिल्ली हाईकोर्ट ने डिफॉल्ट जमानत दी गई थी, उस पर आईपीसी, यूएपीए और शस्त्र अधिनियम के कई प्रावधानों के तहत आरोप लगाए गए थे।

दिल्ली हाईकोर्ट ने इस केस में जाँच पूरी करने में हो रही देरी के आधार पर आरोपित को डिफ़ॉल्ट जमानत दे दी थी। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा, “एक और पहलू पर विचार किया जाना चाहिए कि अपराध आतंकवादी गतिविधियों की प्रकृति का है। इससे न केवल पूरे भारत पर असर पड़ता है बल्कि ये अन्य दुश्मन देशों के असर से भी जुड़ा है। मामले को इतने हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए था।”

इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने दिल्ली हाईकोर्ट की डिफॉल्ट जमानत पर रिहा आरोपित को तुरंत हिरासत में लेने का निर्देश दिया। बताते चलें कि दिल्ली पुलिस ने खालिस्तान समर्थन के आरोप में लवप्रीत के खिलाफ यूएपीए की धारा 13, 18, 20 के साथ ही आईपीसी की धारा 201/120 बी और अन्य कानूनों के तहत केस दर्ज किया था। इसी के तहत उसे गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उसे 90 दिन की हिरासत में भेजा गया था और इस हिरासत का वक्त खत्म होने के बाद जाँच अधिकारी ने विशेष अदालत में जाँच का वक्त बढ़ाने की अर्जी दी थी, जिसे मंजूर कर ली गई थी।

जब बढ़ाए गए वक्त के दौरान भी जाँच पूरी नहीं हुई तो लोक अभियोजक ने यूएपीए की धारा 43डी(2)(बी) के तहत अदालत में जाँच के वक्त को और बढ़ाने को लेकर फिर से अर्जी दी थी। इस अर्जी को भी विशेष अदालत ने मान लिया और जाँच के लिए वक्त बढ़ा दिया।

इसके बाद जाँच पूरी हुई और बढ़ा हुआ वक्त खत्म होने से पहले ही दिल्ली पुलिस ने सीआरपीसी की धारा (173)(2) के तहत रिपोर्ट पेश कर दी थी। लेकिन इस रिपोर्ट के पेश किए जाने से पहले ही आरोपित ने विशेष अदालत में डिफॉल्ट जमानत की याचिका दे दी थी। हालाँकि विशेष अदालत ने उसे डिफॉल्ट जमानत देने से इनकार कर दिया था।

इसके खिलाफ आरोपित ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दी थी। इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस की दलीलों को नजरअंदाज कर आरोपित को डिफॉल्ट जमानत दे दी थी। दिल्ली हाईकोर्ट के इसी फैसले के खिलाफ दिल्ली पुलिस सुप्रीम कोर्ट पहुँची थी।

अमेरिका में हिंदू मंदिर पर फिर से खालिस्तानी हमला, 14 दिन में दूसरी घटना: कालिख पोत बोर्ड पर लिखा- ‘मोदी आतंकवादी, खालिस्तान जिंदाबाद’

अमेरिका के कैलिफोर्निया में दूसरी बार हिंदू मंदिर पर हमला हुआ है। इस बार घटना हेवर्ड के शेरावाली मंदिर की है। 14 दिन में यह दूसरा अटैक है। इससे पहले नेवार्क के मंदिर पर हमला हुआ था।

इस हमले में खालिस्तानियों ने शेरावाली माँ के मंदिर के बोर्ड पर कालिख पोती और वहाँ खालिस्तान जिंदाबाद के नारे लिखे। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए अपशब्द लिखा। इसकी तस्वीर अमेरिका में हिंदुओं के लिए काम करने वाली संस्था हिंदू अमेरिका फाउंडेशन ने अपने एक्स अकॉउंट पर साझा की है

फोटो में देख सकते हैं लिखा है मोदी आतंकवादी है। खालिस्तान जिंदाबाद।

बता दें कि इससे पहले शिव दुर्गा मंदिर पर हमले की धमकी दी गई थी जिसके बाद शेरावाली मंदिर को निशाना बनाया गया। 22 दिसंबर 2023 को नेवार्क के स्वामीनारायण मंदिर पर हमला हुआ था। उस समय मंदिर की दीवारों पर भारत विरोधाी नारे लिखे गए थे। साथ ही दीवारों पर बने चित्रों को भी खराब किया गया था। घटना देखने के बाद हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन इस बात पर जोर दे रही थी कि घटना की जाँच पुलिस हेट क्राइम मानकर करे।

गौरतलब है कि सिर्फ अमेरिका में ही नहीं, बल्कि कनाडा में भी बहुत बार खालिस्तानी हिंदू मंदिरों को निशाना बना चुके हैं। पिछले दिनों उन्होंने सरे में एक मंदिर मं तोड़फोड़ की थी और बाद में उसी मंदिर के चीफ के बड़े बेटे के घर गोलियाँ चलाई थीं।

इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया में भी हिंदू मंदिर पर हमला करते हुए वहाँ के स्वामीनारायण मंदिर में पिछले साल तोड़फोड़ हुई थी। इस दौरान मंदिर के दरवाजे पर खालिस्तानी झंडे लटके मिले थे और पीएम मोदी के लिए आपत्तिजनक बातें।

न घर आई अस्थियाँ, न अपनों को मिला अंतिम दर्शन: कहानी उस कारसेवक की जो राम मंदिर के लिए दूधमुँही बेटियों को छोड़कर गए थे अयोध्या

इस समय हर तरफ अयोध्या के रामलला मंदिर की चर्चा है। 22 जनवरी 2024 को हिंदुओं के आराध्य भगवान राम अपने मंदिर में विराजमान होंगे। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री समेत कई गणमान्य लोगों को आमंत्रित किया गया है। उनमें उन हजारों कारसेवकों के परिवारों को भी आमंत्रित किया गया है, जिन्होंने भगवान राम के मंदिर के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। उन्हीं में से एक नाम है संजय कुमार सिंह का।

संजय कुमार सिंह ने 2 नवंबर 1990 को मुलायम सिंह यादव की सरकार द्वारा किए गए नरसंहार में स्वयं का बलिदान दे दिया था। संजय सिंह का अंतिम दर्शन तक परिवार नहीं कर पाया था। उन्हें उसी सरयू के तट पर मुखाग्नि दे दी गई थी, जिसके किनारे वो भगवान राम के मंदिर के लिए संघर्ष कर रहे थे। उनके साथी कारसेवकों ने उनकी अस्थियों को पवित्र सरयू में विसर्जित कर दिया था। अयोध्या से लौटा तो सिर्फ संजय सिंह की यादें।

राजस्थान के बाँसवाड़ा के दाहोद रोड पर रहने वाली उनकी 35 साल की बेटी स्मृति को रामलला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है। वो उन्हीं संजय सिंह की बेटी हैं, जो 2 नवंबर 1990 को 5 अन्य कारसेवकों के साथ अमर हो गए थे। स्मृति कभी अपने पिता के साथ बिहार के काँटी साइन यानी मुजफ्फरपुर में रहती थी। उनके पिता बीजेपी के मंडल उपाध्यक्ष थे।

भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, संजय कुमार सिंह 30 अक्टूबर 1990 को घर में दो दुधमुँही बच्चियों और अपनी पत्नी को छोड़कर चुपचाप घर से निकल गए थे। वो अपनी दुधमुँही बेटियों- स्मृति और कृति को पत्नी के पास छोड़कर चले आए थे। सरकार का पहरा था कि कोई कारसेवक अयोध्या न पहुँच सके। ऐसे में वो गोंडा पहुँचें और अन्य कारसेवकों के साथ खेत-खलिहानों से होते हुए अयोध्या पहुँचे थे।

अयोध्या में उनके दोस्त नरेश कुमार भी साथ थे। दोनों उमा भारती के नेतृत्व में अयोध्या पहुँचे कारसेवकों के जत्थे में शामिल हो गए। कारसेवकों ने हनुमानगढ़ी की ओर कूच किया। उधर, मुलायम सिंह यादव की सरकार ने गोली चलाने का आदेश दिया। कारसेवकों पर पीठ के पीछे से चलाई गई गोलियों से 5 कारसेवक वीरगति को प्राप्त हुए थे।

उस दिन जिन पाँच लोगों ने वीरगति प्राप्त की थी, उनमें से एक संजय कुमार सिंह भी थे। संजय कुमार सिंह का शव कभी उनके घर नहीं आया। उन्हें सरयू नदी के किनारे ही ससम्मान विदाई दे दी गई। उनकी अस्थियों का विसर्जन कर दिया गया। राम मंदिर के लिए आंदोलन चलता रहा। आखिरकार 6 दिसंबर 1992 को बाबरी को ढहा दिया गया।

अब संजय सिंह की पत्नी भी दुनिया में नहीं हैं। उनकी बड़ी बेटी स्मृति को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के कार्यक्रम में बुलावा आया है। वो पूरे परिवार के साथ इस कार्यक्रम में शामिल होंगी। वो कहती हैं कि छोटी बहन को भी अगर बुलावा आता तो वो भी सपरिवार शामिल होती। अभी संजय सिंह के पैतृक गाँव काँटी साइन में उनकी स्मृति में ट्रस्ट बनाया गया है।

संजय सिंह के गाँव में उनकी प्रतिमा लगी है। पार्क का भी निर्माण किया जा रहा है। राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के बाद इस पार्क का भी लोकार्पण किया जाएगा। संजय सिंह स्मृति ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉक्टर अरविंद कुमार सिंह का कहना है, “मेरे साथी का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा।” खुद अरविंद सिंह भी संजय सिंह के साथ राम मंदिर के कारसेवक रहे हैं।

हिस्ट्रीशीटर अशोक यादव के घर पर UP पुलिस का बुलडोजर, 1 घंटे में मिट्टी में मिला दी तीन मंजिला इमारत: कॉन्स्टेबल की कर दी थी हत्या

उत्तर प्रदेश के कन्नौज में एक पुलिस कॉन्स्टेबल की हत्या करने वाले ईनामी हिस्ट्रीशीटर अशोक यादव उर्फ मुन्ना यादव के घर पर बुलडोजर चल गया है। गुरुवार (4 जनवरी 2024) को गिराए गए इस घर को लेकर प्रशासन ने कहा कि यह अवैध रूप से बनाया गया था। किलेनुमा बनाए गए इस घर का नक्शा पास नहीं कराया गया था।

इससे एक दिन पहले राजस्व विभाग की टीम ने धरनीधीरपुर नगरिया गाँव में स्थित अशोक यादव के बंकरनुमा घर से सारा सामान निकलवाकर बटाईदार को सौंप दिया गया था। बता दें कि 25 दिसंबर 2023 को एक नोटिस की तामील कराने गए पुलिस कॉन्स्टेबल सचिन राठी पर अशोक यादव और उसके बेटे ने फायरिंग कर दी थी। इसमें राठी की मौत हो गई थी।

इस मामले में पुलिस ने हिस्ट्रीशीटर अशोक यादव, उसकी पत्नी और नाबालिग बेटे को पहले ही गिरफ्तार करके जेल भेज दिया है। अशोक यादव ने अपने घर के चारों तरफ कई सीसीटीवी कैमरे लगवा रखे थे। वह इन्हीं सीसीटीवी कैमरों में देखकर ही उसने पुलिस बल पर गोलियाँ चला दी थी।

जिस दिन सचिन राठी पर फायरिंग की गई थी, उसी दिन कुछ देर बाद ही पुलिस ने मुन्ना यादव और उसके बेटे के पैर में गोली मारकर दोनों को पकड़ लिया था। इसके साथ ही उसकी पत्नी को भी गिरफ्तार कर लिया गया था। अशोक यादव और उसके बेटे को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बाद में बेटे को बाल सुधार गृह भेज दिया गया था।

अशोक यादव के घर पर बुलडोजर चलाने की कार्रवाई सिपाही सचिन राठी हत्याकांड के 11वें दिन की गई है। तीन मंजिल के इस घर को एक घंटे में गिरा दिया गया। बताते चलें कि सचिन राठी की दो महीने बाद ही शादी होने वाली थी। उनकी मंगेतर भी उत्तर प्रदेश पुलिस में सिपाही के पद पर तैनात हैं। घटना के बाद से मंगेतर और सचिन राठी के घरवालों का रो-रोकर बुरा हाल है।

कश्मीर के टॉप 10 आतंकियों में से एक, ₹10 लाख का इनाम: 26 जनवरी से पहले दिल्ली से पकड़ा गया जावेद अहमद मट्टू

26 जनवरी से ठीक पहले दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने आतंकी जावेद अहमद मट्टू को पकड़ा है। हिज्ब-उल-मुजाहिद्दीन से जुड़े मट्टू पर 10 लाख का इनाम है। वह A++ केटेगरी का आतंकी है। वह कश्मीर घाटी के 10 सबसे दुर्दांत आतंकियों में से एक है।

जावेद अहमद मट्टू कई आतंकवादी हमलों में शामि रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सके पास से पिस्टल और मैगजीन भी बरामद हुई है। वह दिल्ली में अपने हैंडलर से हथियार की डिलीवरी लेने आया था। वह नेपाल के रास्ते दिल्ली पहुँचा था। मुखबिर की सूचना पर स्पेशल सेल ने उसे निजामुद्दीन फ्लाईओवर से धर दबोचा।

जावेद अहमद मट्टू 14 साल से फरार था। वह सोपोर जिले का रहने वाला है। कई बार पाकिस्तान जा चुका है। पाकिस्तान को बेस बनाकर वह जम्मू-कश्मीर में आतंकी वारदातों को अंजाम दिया करता था। हिज्ब-उल-मुजाहिद्दीन में वह युवाओं की भर्ती भी कराता था। दिल्ली पुलिस के स्पेशल ने बताया कि मट्टू मोस्ट वांटेड आतंकियों में से एक है और उसकी तलाश एनआईए भी कर रही थी। उसके पास से चोरी की कार और अन्य सामान भी बरामद किए गए हैं।

बता दें कि बीते साल स्वतंत्रता दिवस के एक दिन पहले जावेद अहमद मट्टू के भाई रईस ने अपने घर पर तिरंगा लहराया था, जिसे सोशल मीडिया समेत मेनस्ट्रीम मीडिया में भी काफी जगह मिली थी। रईस ने कहा था कि उसने ऐसा अपनी मर्जी से किया है। उस पर इसके लिए किसी तरह का दबाव नहीं था। साथ ही उसने पूरे देश से लोगों से कश्मीर घाटी आने की अपील की थी।

मट्टू ने उस समय कहा था, “मैं दिल से तिरंगा फहरा रहा हूँ। मेरे ऊपर किसी तरह का दबाव नहीं है। यहाँ विकास हो रहा है। मैं पहली बार 14 अगस्त को अपनी दुकान पर बैठा हूँ, लेकिन पहले 2-3 दिनों तक सब कुछ बंद रहता था। पहले सत्ता में रहने वाली पार्टियाँ सिर्फ खेल खेलतीं थी। मेरा भाई 2009 में उनमें से एक (आतंकी) बन गया। हमें नहीं पता उसके बाद से कि वो कैसा है, कहाँ है। अगर वो जिंदा है, मैं उससे अपील करता हूँ कि वह वापस आ जाए। अब हालात बदल चुके हैं। पाकिस्तान कुछ नहीं कर सकता है। हम हिंदुस्तानी थे, हैं और रहेंगे।”