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ऐसा कोई सगा नहीं, जिसे महुआ ने ठगा नहीं: कभी राहुल की सिपाही थीं, ‘मेरा भारत जवान’ के बाद ममता से होते हुए अनंत तक पहुँचीं मोइत्रा

महुआ मोइत्रा पिछले काफी समय से चर्चा में हैं। कभी अपने बड़बोलेपन के लिए, तो कभी पासवर्ड शेयरिंग के लिए। फिर संसद से सदस्यता गँवाने की वजह से और इस बीच अपने प्रेम संबंधों के लिए। कभी वकील, तो कभी बिजनेसमैन। कभी राजनेता तो कभी कोई और। ऐसा हाल फिलहाल का मामला नहीं है। जी हाँ, जय अनंत देहद्राई हो या सुहान मुखर्जी, वो अपने ही खास लोगों पर नजर रखने के लिए जानी जाती हैं। वैसे, महुआ मोइत्रा आज भले ही ममता बनर्जी के साथ हैं, लेकिन कभी वो राहुल गाँधी की बेहद करीबी हुआ करती थीं। जी हाँ, साल 2010 तक महुआ मोइत्रा कॉन्ग्रेस पार्टी में थी और बेहद अहम काम संभाल रही थी। फिर कुछ ऐसा हुआ कि महुआ मोइत्रा ने राहुल गाँधी को धोखा दे दिया और ममता बनर्जी का साथ पकड़ लिया।

राहुल गाँधी की टीम से महुआ मोइत्रा का करीबी जुड़ाव

महुआ मोइत्रा ने साल 2008 में नौकरी छोड़ी थी और सीधे यूथ कॉन्ग्रेस ज्वॉइन कर लिया था। उन्होंने राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस की विचारधारा से खुद को जुड़ा पाया था। महुआ मोइत्रा ने कहा था कि देश में दो ही राजनीतिक पार्टियाँ हैं, चूँकि कॉन्ग्रेस पार्टी उस समय केंद्र में सत्ता में थी, ऐसे में उन्होंने कॉन्ग्रेस का ही चुनाव किया था। कॉन्ग्रेस उस समय पश्चिम बंगाल में विपक्ष में थी।

महुआ मोइत्रा पर ‘आम आदमी के सिपाही’ कार्यक्रम की कमान थी। उन्हें नादिया जिले के 9 ब्लॉकों का जिम्मा दिया गया था। महुआ मोइत्रा पर एक स्टोरी इंडिया टुडे ने की थी, जिसमें महुआ मोइत्रा ने बताया था कि वो कॉन्ग्रेस से क्यों जुड़ी और क्यों उन्होंने जेपी मोर्गन जैसे संस्थान में काम छोड़कर पॉलिटिक्स में कदम रखा था। वो राुल गाँधी जैसे युवा नेता से बेहद प्रभावित थीं। तब वो राहुल गाँधी के सिपाही कार्यक्रम से प्रभावित थीं, ‘मेरा भारत जवान’ के सपने देखती थीं।

…फिर साल 2010 में बदल ली निष्ठा

महुआ मोइत्रा हमेशा अपने फायदे को ऊपर रखने में विश्वास रखती हैं। उन्होंने दो सालों में देख लिया कि पश्चिम बंगाल में कॉन्ग्रेस कभी ऊपर नहीं जा सकती। उन्होंने ममता बनर्जी की मौजूदगी में कोलकाता में टीएमसी पार्टी को ज्वॉइन कर लिया। ममता ने उनके पार्टी में जुड़ने के समय एक लाइन ही कहा था, “हमारी युवा महुआ मोइत्रा तृणमूल कॉन्ग्रेस से जुड़ रही हैं।” उस समय महुआ मोइत्रा ने कहा था कि पश्चिम बंगाल के लिए ऐसा करना जरूरी है।

टाइम्स ऑफ इंडिया ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि ममता बनर्जी महुआ मोइत्रा जैसे चेहरों की ‘पहचान’ का फायदा उठाने और पूँजीपतियों के साथ संपर्क स्थापित करने के लिए टीम में चुना है, इसीलिए शुरुआत में उन्हें कोई पद नहीं दिया जा रहा।

और 2023 में बताया टीएमसी को बीजेपी का विकल्प, कॉन्ग्रेस-राहुल गाँधी पर बोला हमला

महुआ मोइत्रा संसद से अब सस्पेंड हुई हैं। लेकिन वो दिल्ली में कॉन्ग्रेस पार्टी के साथ टीएमसी का कोर्डिनेशन भी देखती थीं। लेकिन फरवरी के आखिरी दिनों में जब मेघालय विधानसभा चुनाव के दौरान राहुल गाँधी ने टीएमसी को बीजेपी का बी टीम कहते हुए आरोप लगाया था कि मेघालय में टीएमसी सिर्फ वोट काटकर बीजेपी को फायदा पहुँचाने के लिए चुनाव लड़ रही हैं, तो महुआ मोइत्रा राहुल गाँधी पर बरस पड़ी थीं।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, महुआ मोइत्रा ने टीएमसी को बीजेपी का एकमात्र विकल्प बताया था। उन्होंने कहा था, “कॉन्ग्रेस पार्टी में बीजेपी को हराने का दम होता, तो टीएमसी यहाँ चुनाव ही नहीं लड़ रही होती। लेकिन कॉन्ग्रेस खत्म हो चुकी है। वो बीजेपी को टक्कर देने की स्थिति में नहीं है। ऐसे में टीएमसी ही बीजेपी को हराने का दम रखती है और हम मजबूती से बीजेपी के सामने खड़े भी हैं। क्या हम घर पर बैठकर कॉन्ग्रेस की एक राज्य से दूसरे राज्य में होती हार को देखते रहें या बीजेपी को हराने के मैदान में उतरें।”

महुआ मोइत्रा ने नॉर्थ शिलॉन्ग में प्रचार करते हुए कॉन्ग्रेस पर जमकर निशाना साधा था। उस चुनाव में बीजेपी को 2 सीटें मिली थी, तो कॉन्ग्रेस और तृणमूल कॉन्ग्रेस दोनों ने ही पाँच-पाँच सीटों पर जीत हासिल की थी। ये अलग बात है कि जिस सीट पर महुआ मोइत्रा ने चुनाव प्रचार किया था, वो सीट न तो कॉन्ग्रेस ही जीत पाई और न ही तृणमूल कॉन्ग्रेस। उस सीट पर नई पार्टी वीपीपी ने जीत दर्ज की और बीजेपी दूसरे नंबर पर रही थी।

महुआ मोइत्रा का राजनीतिक सफर

  • साल 2008 में कॉन्ग्रेस से जुड़ी, पश्चिम बंगाल में तैनाती
  • नादिया जिले में कॉन्ग्रेस के ‘आम आदमी का सिपाही’ कार्यक्रम को किया लीड
  • साल 2010 में टीएमसी से जुड़ीं महुआ मोइत्रा
  • साल 2011 में टीएमसी ने जीता पश्चिम बंगाल में चुनाव
  • ममता की पहली सरकार के दौरान पार्टी की प्रवक्ता
  • साल 2016 में विधानसभा चुनाव लड़ा, करीमपुर विधानसभा सीट से विधायक बनी
  • साल 2019 में कृष्णा नगर लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर सांसद बनी
  • साल 2023 में संसद की सदस्यता गँवाई

महुआ ने अपने फायदे के लिए सभी को दिया दगा

महुआ मोइत्रा जब राजनीति में आई थीं, तो उनका कोई गॉडफादर नहीं था। कॉन्ग्रेस ने उन्हें सहारा दिया और राजनीतिक पहचान दी। इसके बाद उन्होंने ममता बनर्जी का दामन थामा और लगातार आगे बढ़ती गईं। महुआ आजकल अपने एक्स बॉयफ्रेंड की वजह से मुश्किलों में हैं, जिसका उन्होंने नींद-चैन तो चुराया ही था, कुत्ता तक चुरा लिया था। उन पर पैसे लेकर संसद में सवाल पूछने के आरोप लगे। उनका संसद का लॉगिन आईडी एक बिजनेसमैन इस्तेमाल करता था। अब वो संसद की सदस्यता खो चुकी हैं। इस साल लोकसभा चुनाव में पार्टी उन्हें टिकट दे या न दें, अपने 15 साल के राजनीतिक करियर में महुआ मोइत्रा ने दिखा दिया है कि वो कितनी चतुर नेता हैं। तभी तो, जब फायदे का मामला लगा तो राहुल गाँधी से भी जुड़ीं, कभी अभिषेक बनर्जी के साथ होकर ममता से जुड़ीं और कभी हीरानंदानी से जुड़कर अडाणी के पीछे पड़ीं। वाह रे महुआ, तेरे क्या कहने…

कॉन्ग्रेस नेता मेवाराम की 2 गंदी वीडियो (7:11 और 18:45 मिनट) वायरल: रेप पीड़िता ने कहा – ‘प्राइवेट पार्ट में डाला डंडा, माँगता था बच्चियाँ’

राजस्थान के बाड़मेर के कॉन्ग्रेस नेता व तीन बार के पूर्व विधायक मेवाराम जैन की अश्लील वीडियो सामने आई है। इस वीडियो में वह महिला के साथ गंदी हरकत करते दिख रहे हैं। वीडियो खुद महिला ने बनाई है।

वीडियो में देख सकते हैं कि मेवाराम जैन के कमरे में घुसते ही एक महिला अलमारी की रैक में अपना मोबाइल कैमरा चालू करके रख देती है। इसके बाद पूर्व विधायक कमरे में आते हैं, थोड़ी बात करते हैं, पानी पीते हैं और फिर महिला के साथ अश्लील हरकतें करना शुरू कर देते हैं।

मेवाराम की दो वीडियोज सोशल मीडिया पर वायरल है। एक 7 मिनट 11 सेकेंड की है और दूसरी 18 मिनट 45 सेकेंड की। उनकी वीडियो के स्क्रीनशॉट के साथ उनका नाम ट्रेंड कर रहा है।

अभी पिछले महीने ही मेवाराम सहित 9 के खिलाफ पॉक्सो एक्ट में केस दर्ज हुआ था। पीड़िता ने शिकायत दी थी कि न केवल उनका बल्कि उनकी सहेली का भी रेप हुआ और उनकी नाबालिग बेटी का भी यौन शोषण किया गया।

पीड़िता ने अपनी शिकायत में कहा था कि जब मेवाराम और उसका साथी रामस्वरूप उनका रेप कर करके थक गए तो उन्होंने पीड़िता से 15-16 साल की लड़कियों को लाने को कहा। पुलिस ने इस मामले में पूछताछ पीड़िता की सहेली से की तो कहानी और भयावह निकली। सहेली ने बताया कि उसे तो प्राइवेट पार्ट में डंडा डालकर प्रताड़ित किया गया था।

महिला के आरोपों के बाद मेडिकल करवाया गया था और बयान भी दर्ज हुए थे। वहीं मेवाराम ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था जिसके बाद 25 जनवरी तक उसकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी गई थी। हालाँकि आगे कोर्ट में कोई और सुनवाई होती मेवाराम की यह वीडियोज वायरल हो गईं जिससे समाज में उनकी थू-थू हो रही है।

बता दें कि साल 2022 में भी इसी वीडियो से जुड़े तीन स्क्रीनशॉट वायरल हुए थे। जिसके बाद बाड़मेर कोतवाली थाने में सेक्सटॉर्शन का केस दर्ज हुआ था और 2 महिलाओं सहित वकील और अन्य की गिरफ्तारी हुई थी। इनके ऊपर आरोप लगाए गए थे कि ये अश्लील वीडियो दिखाकर मेवाराम के साथी रामस्वरूप से 5 करोड़ रुपए माँगे गए। मामला 50 लाख में तय हुआ लेकिन फिर उनसे 1 करोड़ रुपए माँगे जाने लगे। इसके बाद पुलिस में शिकायत देकर 2 महिलाओं सहित 5 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया।

अजय श्रीवास्तव ने महाराष्ट्र में खरीदी दाऊद इब्राहिम की प्रॉपर्टी, खोलेंगे सनातन स्कूल: 15000 रुपए के प्लॉट के लिए चुकाए 2 करोड़ रुपए

दाऊद इब्राहिम की सारी डॉनगिरी हवा हो चुकी है। लोगों के जेहन से उसका डर पूरी तरह से मिट चुका है। इसकी बानगी तब दिखी, जब महाराष्ट्र के रत्नागिरी में स्थित उसकी प्रॉपर्टी की नीलामी हुई। इस दौरान उसका एक प्लॉट 2 करोड़ रुपए की कीमत में बिका। नीलामी में इस प्लॉट की न्यूनतम बोली सिर्फ 15 हजार रुपया रखी रखी गई थी।

दाऊद के इस प्लॉट को जिस व्यक्ति ने खरीदा, उनका नाम है अजय श्रीवास्तव। अजय श्रीवास्तव एक वकील हैं। वे अब इस प्रॉपर्टी पर एक सनातन स्कूल खोलेंगे, जिसमें हिंदू धर्म से संबंधित विषयों की भी शिक्षा दी जाएगी। संजय श्रीवास्तव ने पहले भी दाऊद की तीन प्रॉपर्टी खरीदी थी, जिसमें उन्होंने सनातन धर्म पाठशाला खोला है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दाऊद इब्राहिम की चार जमीनों की नीलामी शुक्रवार (5 जनवरी 2024) को की गई। दाऊद के इस पैतृक कृषि भूमि की कीमत 19 लाख रुपए रखी गई थी। इनमें से 170 गज के प्लॉट का बेस प्राइज महज 15 हजार रुपए रखा गया था, लेकिन इसके लिए कई लोगों ने बोली लगाई। आखिरकार, इसके लिए 2 करोड़ रुपए तक बोली लग गई। वहीं, एक अन्य प्लॉट भी लिया है।

वकील अजय श्रीवास्तव को इन दोनों प्लॉट्स का मालिकाना हक मिल गया। वहीं, दो अन्य प्रॉपर्टी के लिए कोई खरीदार नहीं मिला। अजय श्रीवास्तव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि ये प्लॉट उम्मीद से ज्यादा महँगे पड़ गए, लेकिन उनके ज्योतिषी ने कहा था कि इस प्लॉट का नंबर उनके लिए भाग्यशाली रहेगा। इसलिए उन्होंने इसे खरीदने में पूरा जोर लगा दिया।

दाऊद इब्राहिम की ये दोनों ही प्रॉपर्टी रत्नागिरी जिले में स्थित हैं। ये दाऊद इब्राहिम की पैतृक संपत्तियाँ हैं। यहीं पर दाऊद के बचपन का भी घर हुआ करता था, जो मुंबाके गाँव में स्थित है। दाऊद का घर भी अजय श्रीवास्तव ने ही खरीदा था। अजय श्रीवास्तव ने दाऊद के घर के पते पर सनातन धर्म पाठशाला ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन कराया है। संजय श्रीवास्तव शिवसेना के नेता रह चुके हैं।

2 मिनट का गूगल मीट, 200 लोगों की नौकरी से छुट्टी: जो FrontDesk दूसरों को देती थी बसेरा, उसने अपने सभी कर्मचारियों की छीनी रोजी-रोटी

एक अमेरिकी कंपनी ने दो मिनट के गूगल मीट कॉल में पूरे स्टाफ की छंटनी कर दी है। फ्रंटडेस्क नाम की इस कंपनी ने 200 से अधिक कर्मचारियों को एक झटके में बाहर का रास्ता दिखा दिया। फ्रंटडेस्क के सीईओ ने कंपनी के कामकाज के लिए अमेरिकी सरकार से मदद माँगी है, ताकी कंपनी को दिवालिया होने से बचाया जा सके।

फ्रंटडेस्क के सीईओ जेसी डीपिंटो ने गूगल मीट कॉल के दौरान अपने कर्मचारियों को बताया कि कंपनी स्टेट रिसीवरशिप के लिए आवेदन कर रही है। दरअसल अमेरिका में यह प्रक्रिया दिवालियापन की वैकल्पिक व्यवस्था है। फ्रंटडेस्क एक स्टार्टअप है, जो अपार्टमेंट को किराए पर देने का काम करती है। कंपनी 30 से ज्यादा मार्केट में ऑपरेट करती है।

टेक क्रंच की रिपोर्ट के मुताबिक, फ्रंटडेस्क कंपनी ने जिन कर्मचारियों को निकाला है, उनमें फुलटाइम, पार्टटाइम और कॉन्ट्रैक्टर्स शामिल हैं। कंपनी की शुरुआत साल 2017 में हुई थी और यह कंपनी अमेरिका में 1200 से ज्यादा फर्निश्ड अपार्टमेंट मैनेज करती है। बीते कुछ समय से कंपनी बढ़ती लागत और डिमांड में भारी उतार-चढ़ाव के चलते चुनौतियों का सामना कर रही है।

फ्रंटडेस्क कंपनी ने निवेशकों से करीब 26 मिलियन डॉलर (लगभग 216 करोड़ रुपए) का निवेश हासिल किया था। इस कंपनी के निवेशकों में कई बड़े निवेशक भी शामिल हैं। यह कंपनी निवेशकों से और पैसे जुटाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन उसमें सफल नहीं हो पाई। ऐसे में कंपनी ने अपने स्टाफ की छंटनी का फैसला किया।

बता दें कि दो साल पहले भारतीय मूल के एक सीईओ ने जूम कॉल पर 900 कर्मचारियों का कॉन्फ्रेंस किया था। Better नाम की इस कंपनी के सीईओ विशाल गर्ग ने कॉन्फ्रेंस कॉल में शामिल सभी 900 कर्मचारियों को निकाल दिया था। उस समय वो कंपनी काफी चर्चा में रही थी। अब ऐसा ही कदम फ्रंटडेस्क कंपनी के सीईओ ने उठाया है।

अयोध्या में कारसेवकों पर फेंका बम, हवा में कैच कर बचाई सैकड़ों जिंदगी… कहानी राम मंदिर के लिए 19 साल की उम्र में बलिदान होने वाले अविनाश की

भगवान श्री रामलला का मंदिर बन रहा है। जिस काम के लिए मेरे बेटे ने बलिदान दिया था, वह काम अब पूरा हो रहा है। मेरे बेटे का बलिदान सार्थक हुआ।

यह कहना है ​72 साल की अक्षय माहेश्वरी का। वे और उनके 76 वर्षीय पति मानकचंद माहेश्वरी राजस्थान के अजमेर में रहते हैं। इन दिनों 22 जनवरी 2024 को अयोध्या में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा का साक्षी बनने की तैयारियाँ कर रहे हैं। यह बुजुर्ग दंपती राम मंदिर के लिए 19 साल की उम्र में बलिदान देने वाले अविनाश माहेश्वरी के माता-पिता हैं।

जिस रामजन्मभूमि पर इस्लामी आक्रांता बाबर के नाम पर एक गुंबद चढ़ा दिया गया था, उस पवित्र जगह को वापस पाने के लिए हिंदुओं के संघर्ष की कहानी करीब 500 वर्षों की है। इस दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों के कारसेवकों को अयोध्या में बलिदान तक देना पड़ा। अविनाश माहेश्वरी उसी 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में बलिदान हुए थे जिस दिन विवादित ढाँचा ढाह दिया गया था।

अयोध्या के टेढ़ा सर्कल पर इस दिन कारसेवकों पर बम फेंका गया था। अविनाश ने उस बम को हवा में ही कैच कर दूर फेंक दिया। लेकिन विस्फोट होने से छर्रे उनके चेहरे पर लग गए। उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया, पर उनकी जान नहीं बची। सैकड़ों रामभक्त की जिंदगी बचाकर वे खुद बलिदान हो गए।

एनडीटीवी को अविनाश के पिता मानक चंद माहेश्वरी ने बताया, “ढाँचा विध्वंस के दौरान एक कार सेवक जख्मी हो गया था। अविनाश अपने साथियों के साथ उन्हें अस्पताल ले जा रहे थे। इसी दौरान एक अन्य मजदूर के घायल होने की सूचना मिली। अविनाश अयोध्या के टेढ़ा सर्कल पर उतर गए। इसी समय राहत कार्य में लगे कारसेवकों पर बम फेंका गया। अविनाश ने इसे बम को कैच कर दूर फेंक दिया पर बम फटने से छर्रे उनके चहरे पर आकर लग गए।”

मानकचंद माहेश्वरी का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ाव रहा है। इस कारण 12 साल की उम्र में ही अविनाश भी संघ से जुड़ गए। वह नियमित रूप से शाखा जाने लगे। अक्षय माहेश्वरी बताती हैं कि 26 नवंबर 1992 को अविनाश उनसे अयोध्या जाने की जिद्द करने लगा। उन्होंने उसे मना किया तो वह रोते-रोते सो गया। 28 नवंबर की सुबह वह अपने दोस्त के साथ अयोध्या के लिए निकल गया।

अविनाश माहेश्वरी की तस्वीर के साथ उनके माता पिता (फोटो साभार: एनडीटीवी)

मानकचंद माहेश्वरी के अनुसार अयोध्या रवाना होने से पहले उनका बेटा उनकी डिस्पेंसरी पर मिलने आया था। उन्होंने अविनाश से कहा था, “जो भी तुम्हें काम दे, वह सब अच्छे से कर लेना।” माहेश्वरी के अनुसार उस समय अजमेर से अयोध्या के लिए 28 लोगों की एक टोली निकली थी।

नारे लग रहे थे अविनाश अमर रहे और बरस रहे थे डंडे

मानकचंद माहेश्वरी ने दैनिक भास्कर को बताया कि बेटे के बलिदान होने की जानकारी उन्हें आएसएस से संपर्क होने के कारण 6 दिसंबर 1992 को ही मिल गई थी। 7 दिसंबर को पूरे देश में कर्फ्यू लग दिया गया था। पत्नी को इसके बारे में उन्होंने 8 दिसंबर को तब बताया जब बेटे के शव की शिनाख्त के लिए बुलाया गया। 9 दिसंबर को संघ की तरफ से उन्हें अविनाश की अंतिम यात्रा जुलूस के रूप में निकालने का प्रस्ताव दिया गया। लेकिन कर्फ्यू के कारण उन्होंने मना कर दिया। बावजूद अंतिम दर्शन करने को भीड़ उमड़ पड़ी। इस दौरान एक तरफ ‘अविनाश अमर रहे’ के नारे लग रहे थे, दूसरी तरफ प्रशासन भीड़ पर डंडे बरसा रहा था। इस दौरान कई लोगों को चोटें भी आई थी।

बलिदान होने के बाद बहन को मिली चिट्ठी

अविनाश माहेश्वरी 6 दिसंबर को अयोध्या में बलिदान हो गए। 28 नवंबर को माता-पिता ने उन्हें आखिरी बार जीवित देखा था। 30 नवंबर को उनकी बड़ी बहन सुमन काबरा का जन्मदिन था। उन्होंने बहन को एक चिट्ठी लिखी थी, जो उनके बलिदान के तीन दिन बाद यानी 9 दिसंबर को सुमन को मिली। इसमें लिखा था;

मैं अयोध्या पहुँच गया हूँ। यहाँ सब अच्छा है। कोई टेंशन की बात नहीं है। जन्मदिन की शुभकामनाएँ। जल्द अगला लेटर लिखूँगा। अजमेर में माँ -पापा भी ठीक होंगे, उन्हें भी लेटर लिखूँगा। फूलों का तारों का सबका कहना है, एक हजारों में मेरी बहना है।

मानकचंद माहेश्वरी के अनुसार अविनाश के बलिदान के करीब एक महीने बाद विश्व हिंदू परिषद ने उन्हें 2 लाख रुपए का चेक देना चाहा था। लेकिन उन्होंने इसे लेने से इनकार कर दिया। इसके बाद उनके बेटे की स्मृति में अजमेर के भजनगंज में एक स्कूल खोला गया। 28 बच्चों से शुरू हुए इस स्कूल में आज 650 बच्चे पढ़ते हैं। अपना दर्द छिपाते हुए अक्षय और मानकचंद माहेश्वरी कहते हैं;

जिस काम के लिए हमारा बेटा वहाँ गया और अपना बलिदान दिया, वह काम अब पूरा हो रहा है। हमारे बेटे का बलिदान सार्थक हुआ। उसके बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता।

‘बहुत रामभक्त बनती है ना……’: घर में राम दरबार लगाने पर मुस्लिम महिला को कट्टरपंथियों की धमकी, पहले भी हो चुकी है फायरिंग, बेटी को लगी थी गोली

अलीगढ़ में राम भक्त एक मुस्लिम महिला को जान से मारने की धमकी मिली है। कट्टरपंथियों ने हिंदी में एक पत्र लिखकर महिला को धमकाया है और 72 घंटों के भीतर उसे पूरे परिवार सहित मारने की बात कही है। उस महिला का नाम रूबी आसिफ खान है और वह बीजेपी की कार्यकर्ता हैं। वर्तमान में वह अलीगढ़ जिले के जयगंज मंडल की उपाध्यक्ष हैं।

मामला अलीगढ़ के शाहजमाल के माबूद नगर का है। यहीं पर रूबी आसिफ खान अपने परिवार के साथ रहती हैं। गुरुवार (4 जनवरी 2024) की रात को किसी व्यक्ति उनके घर पर एक चिट्ठी फेंक दिया। जब उन्होंने इस चिट्ठी को देखा तो इसे देखकर वह हतप्रभ रह गईं। चिट्ठी में उन्हें परिवार सहित जान से मारने की धमकी दी गई है।

इस पत्र में लिखा है, “रूबी आसिफ खान तू बहुत बड़ी राम भक्त बनती है न, 72 घंटे में तुझे परिवार सहित जान से मार देंगे।” इसके बाद उन्होंने नजदीकी थाने रोरावर में जाकर इसकी शिकायत दर्ज कराई है। इसके बाद पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज शुरू कर दिया। एक फुटेज में एक कट्टरपंथी ये पत्र फेंकता हुआ देखा गया है। पुलिस उसकी तलाश कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूबी आसिफ खान पर पहले भी हमले हो चुके हैं। उनकी बेटी को मारी गई जा चुकी है। इसलिए इस बार वो धमकियों को लेकर बेहद गंभीर हैं। रूबी ने कहा कि उनकी पूजा में पहले भी विघ्न डाले जा चुके हैं। उनके खिलाफ कट्टरपंथी मौलाना फतवा भी जारी कर चुके हैं। इसके बावजूद वह अपने निश्चय पर अटल रही हैं।

बता दें कि रूबी आसिफ खान ने 27 दिसंबर 2023 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर सूचना दी थी कि वो 1 जनवरी 2024 से 22 जनवरी 2024 तक अपने आवास पर भगवान राम का दरबार स्थापित कर पूजा अर्चना करेंगी। उन्होंने घर में राम दरबार सजाकर पूजा शुरू कर दी है। रूबी पहले भी भगवान गणेश और माता दुर्गा की प्रतिमा अपने घर में स्थापित कर चुकी हैं।

सीएम योगी को लिखे पत्र में रूबी ने कहा था, “कुछ जेहादी टाइप मुल्ला मेरी पूजा में कई बार विघ्न डाल चुके हैं। मेरे ऊपर गोली भी चला चुके हैं। एक बार मेरी बेटी के पेट में गोली लगी थी। मेरे खिलाफ फतवा भी जारी हो चुके हैं। मेरे मोहल्ले में पोस्टर तक लगा दिए थे कि यह हिंदू बन गई है। इसे पूरे परिवार सहित जिंदा जला दो।” उन्होंने आशंका जाहिर की है कि इस बार भी ऐसी घटना हो सकती है।

सनातन के प्रति उनकी अगाध आस्था को देखकर कट्टरपंथियों भड़क उठे। वो उनके निशाने पर आ गई हैं। कट्टरपंथी अक्सर उन्हें धमकी देते रहते हैं। उनके खिलाफ कई मौलवियों ने फतवा भी जारी किया था और कहा था कि वह सच्चा मुस्लिम नहीं हैं। कट्टरपंथियों ने एक मुस्लिम द्वारा मूर्ति पूजा को शिर्क बताकर रूबी की आलोचना की थी।

22 जनवरी को पूरी होगी अयोध्या के एक संत की 22 साल से चल रही तपस्या, एक वक्त भोजन और सिले कपड़े नहीं पहनने का लिया था संकल्प

अयोध्या में राममंदिर के निर्माण के लिए साधु-संतों ने अनोखे संकल्प लिए थे। किसी ने रामलला के मंदिर के गर्भगृह में विराजने तक विवाह न करने का संकल्प लिया तो किसी ने पगड़ी और जूते नहीं पहनने की प्रतिज्ञा की। इसी तरह करपात्री जी महाराज ने पिछले 22 सालों से केवल एक समय भोजन करने की शपथ ली और वो भी सिर्फ 18 कौर खाने की। उन्होंने सिले हुए कपड़े नहीं पहनने की भी शपथ ले रखी है।

अब जब रामलला 22 जनवरी 2024 को अयोध्या के राम मंदिर में विराजने जा रहे हैं तो इस संत का संकल्प भी पूरा होता दिख रहा है। अब वो 22 जनवरी 2024 को भगवान राम की आज्ञा लेकर भरपेट भोजन करेंगे। इस संत ने ‘द राजधर्म’ यूट्यूब चैनल से हुई बातचीत में इसकी जानकारी दी।

प्रभु राम के अयोध्या भवन प्रवेश तक कर में भोजन

अपने नाम का मतलब बताते हुए करपात्री महाराज कहते हैं कि जिसका कर (हथेली) ही पात्र हो, वो करपात्री है। वो कहते हैं, “आज से 22 साल पहले मैंने ये संकल्प लिया था कि मैं अयोध्या में कुछ कर नहीं सकता हूँ, लेकिन जब-तक मेरे प्रभु राम जी अयोध्या के अपने भवन में प्रवेश नहीं कर पाते, तब तक मैं अपने कर में ही भोजन करूँगा। कर ही में जल ग्रहण करूँगा। मेरा भोजन केवल 18 कौर का होगा। और दिन में एक बार होगा।”

उन्होंने आगे कहा, “मैंने संकल्प लिया कि सिला हुआ कपड़ा नहीं पहनूँगा। खड़ाऊ पहनूँगा। तब तक ऐसे ही रहूँगा। तब से मेरी तपस्या चल रही है। 22 तारीख को जब मेरे परमात्मा अपने गृह में स्थापित हो जाएँगे, तब उनसे अनुमति माँगकर भरपेट भोजन करूँगा। सिला हुआ कपड़ा पहनना प्रारंभ कर दूँगा, क्योंकि हमारी प्रतिज्ञा हमारे परमात्मा ने पूरा किया है।”

करपात्री जी आगे कहते हैं, “वैष्णव संप्रदाय का सर्वोच्च पद मेरे पास है। रामानुजाचार्य, जगतगुरु, जीयर स्वामी, करपात्री जी महाराज… पूरे विश्व में ये जगतगुरु से भी ऊँचा पद होता है। हम आपको पूरा नाम नहीं बता सकते हैं। अभी केवल करपात्री महाराज के नाम से ही हमें पूरा विश्व जान रहा है।”

18 पुराण और 4 वेद का सम्मेलन है 22 तारीख

रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के लिए 22 जनवरी 2024 का दिन तय करने को लेकर करपात्री महाराज ने कहा कि रामलला का मंदिर में जाने का एक स्वरूप है। रामजी का स्वरूप वेद-पुराण से है। इसके लिए उन्होंने रामचरितमानस की चौपाई ‘सुमति भूमि थल हृदय अगाधू। बेद पुरान उदधि घन साधू॥ बरषहिं राम सुजस बर बारी। मधुर मनोहर मंगलकारी॥’ का हवाला दिया। उन्होंने कहा, “18 पुराण और 4 वेद मिलकर 22 होता है। तिथि 22 इसलिए रखी गई है कि 18 पुराण और 4 वेद मिलकर राम का विग्रह बनता है।”

वो आगे कहते हैं, “इस दिन परमात्मा आ रहे हैं। मेरे ठाकुर जी आ रहे हैं। कह रहे हैं कि अब कोई बरी नहीं होगा। हम सबके साथ जाएँगे। अब कोई ‘जनबरी’ नहीं होगा। इसलिए वो ‘जनवरी’ में आ रहे हैं।” जनवरी महीने को ‘जनबरी’ के रूप में समझाते हुए वो कहते हैं, “हमारे हिंदी साहित्य में जन कहा जाता है व्यक्ति को और बरी का मतलब होता कोई अलग न हो पाए कोई व्यक्ति अकेला न रहे।”

प्रभु राम के उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, “शायद आपको पता नहीं होगा कि जब राम चतुर्भुज स्वरूप में आए तो रोने लगे। बहुत रोए। तब कौशल्या माँ ने कहा कि अब तो रोना बंद करो। बच्चे हो। सब ठीक है। सब शुभ हो गया। तब प्रभु राम ने कौशल्या माँ से कहा कि जब तक संसार में मैं नही आया था लोग रो रहे थे। मैं अब संसार में आ गया हूँ। अब कोई नहीं रोएगा। इस नाते मैं रोना शुरू किया हूँ।”

इसके बाद करपात्री महाराज ने ‘सुनि बचन सुजाना रौदन ठाना, होई बालक सुर भूपा’ गाते हुए बताया कि प्राण प्रतिष्ठा के नाते ये तिथि और जो अभिजीत मुहूर्त 88 सेकेंड चुना गया है, उसमें प्राण प्रतिष्ठा हो जाएगी। उन्होंने कहा कि वे प्राण प्रतिष्ठा का उत्सव 15 तारीख से ही प्रारंभ कर देंगे और प्राण प्रतिष्ठा तक लगातार चलेगा।

पीएम मोदी को लेकर उन्होंने कहा, “हमारे यशस्वी पीएम मोदी आएँगे। वो जब आएँगे तो सबसे पहले सरयू में स्नान करेंगे। इस स्नान से शरीर में किसी तरह का दोष हो तो सब मुक्त हो जाते हैं। उससे पहले वो उपवास रखेंगे। उपवास में ही स्नान करेंगे। उप का मतलब होता है सानिध्य और वास का मतलब होता है मन के पास। इस तरह से परमात्मा के पास जाने के लिए उपवास रखा जाता है।”

दमन के प्राचीन शिव मंदिर में रातों-रात बना दी मजार, हिंदुओं के विरोध के बाद हटाई गई: वीडियो वायरल

गुजरात से सटे केंद्रशासित प्रदेश दमन के एक प्राचीन शिव मंदिर में रातों-रात सीमेंट से मजार बना दी गई। नानी दमन में स्थित इस प्राचीन मंदिर में हिंदू देवी-देवताओं की प्राचीन मूर्तियों के बदल में एक कोने में मजार बनाया गया। विरोध के बाद ये मजार अचानक गायब भी हो गई। इसका वीडियो भी वायरल हुआ है। इस मामले में हिंदुओं की एकजुटता को देखते हुए प्रशासन भी सक्रिय हुआ।

ये मामला दमन के देवका इलाके का है, जहाँ प्राचीन शिव मंदिर में ऐसी दुस्साहस की गई। एक युवक ने इस मजार का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाला और लोगों से एकजुट होने की अपील की तो यह लोगों के ध्यान में आया। वीडियो वायरल हुआ तो स्थानीय लोग भी इसको लेकर सजग हो गए।

जानकारी के मुताबिक, वायरल वीडियो दमन का है और इसे अलग-अलग यूजर्स द्वारा शेयर किया जा रहा है। हालाँकि, यह साफ नहीं हो पाया है कि यह वीडियो किसने बनाया है। 2 मिनट 20 सेकंड के इस वीडियो में एक व्यक्ति को हिंदी में यह कहते हुए सुना जा सकता है, “देखो, यहाँ महादेवजी का शिवलिंग है। ये नंदीजी महाराज हैं। वहाँ नंदीजी और गणेश की मूर्तियाँ एक ही पत्थर से बनी हुई हैं।”

वीडियो अपलोड करने वाले शख्स ने मंदिर में स्थापित देवी माँ की मूर्ति भी दिखाई है। मूर्ति की बनावट के आधार पर वह व्यक्ति अंदाजा लगा रहा है कि मूर्ति पौराणिक है। सभी देवी-देवताओं की मूर्तियों को दिखाने के बाद बगल में हरे रंग की शीट पर चाँद और सितारों वाले रखे गए कई चादर को दिखाया गया। वीडियो बनाने वाले व्यक्ति ने शीट के कोने को भी उठाया और सीमेंट से बनाए गए मजार को दिखाया।

इस वीडियो में टेम्पलेट के ऊपर कुछ इस्लामिक तस्वीरें भी लगी देखी जा सकती हैं। शून्य नाम के एक्स हैंडल ने ये वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “यह विडियो नानी – दमण गुजरात का है, जो फेमस पिकनिक स्पॉट भी है। यहाँ के पुराने मंदिर में एक मजार बना दी गई है।” शून्य ने अधिकारियों को टैग करते हुए कार्रवाई की माँग की।

सोशल मीडिया पर इस वीडियो के वायरल होने के दो दिन बाद एक और वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वह मजार नजर नहीं आ रहा है। कथित मजार वाली जगह खाली दिख रही है, लेकिन ये साफ दिख रहा है कि यहाँ कुछ तो बनाया गया था। दोनों वीडियो को काजल हिंदुस्तानी ने शेयर किया है।

काजल हिंदुस्तानी ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा, “वीडियो 1- गुजरात के दमण से एक भाई ने ये विडियो बनाया था, जो कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर बहुत तेज़ी से वायरल हो रहा है। इसमें एक हिंदू मंदिर के अंदर ‘अवैध ढाँचे’ का निर्माण किया गया था। वीडियो 2- दमण के स्थानिक नागरिकों ने अपनी एकता दिखाई तथा मंदिर के अंदर बने इस ‘अवैध ढाँचे’ को हटा दिया है। हर हर महादेव???”

इस मामले के सामने आने के बाद दमन के मेयर ने भी इसका संज्ञान लिया है। उन्होंने कलेक्टर को पत्र लिखकर इस कृत्य को करने वाले के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की बात कही है।

दमन के मेयर का पत्र

इस पूरे मामले में एक बात तो साफ है कि दमन के इस प्राचीन मंदिर में मजार जैसी संरचना बनाई गई थी, जिसे अब हटा लिया गया है। हालाँकि अज्ञात आरोपित अभी तक पुलिस की पकड़ से बाहर हैं, ऐसे में देखना ये है कि पुलिस ऐसे लोगों पर शिकंजा तब तक कस पाती है।

बीच में छूट गई पढ़ाई या कोर्स नहीं हुआ पूरा… अब चिंता नहीं: जानें मोदी सरकार की ABC योजना, 3 करोड़ छात्र कर चुके हैं रजिस्टर

लगातार पढ़ाई करने वाले छात्र-छात्राओं के लिए कई योजनाएँ सरकारें हमेशा से लेकर आती रही थीं, लेकिन जिन छात्र-छात्राओं की शिक्षा किसी कारणवश बीच में छूट जाती थी उस पर कोई ध्यान नहीं देता था। किसी को मतलब नहीं होता था कि जो पढ़ाई करते-करते बीच में किसी कारण से रह गई उसका कोई हिसाब होगा या नहीं। लेकिन मोदी सरकार में ये सिस्टम बदला। एक ऐसा प्लेटफॉर्म आया जिसमें छात्र-छात्रों के साल तो साल, सेमेस्टर की भी गिनती रखनी शुरू हुई।

मोदी सरकार नई एजुकेशन पॉलिसी 2020 के साथ इस डिजिटल व्यवस्था को लेकर आई थी, जिसके तहत हर छात्र की मेहनत का डिजिटल रिकॉर्ड रखा जाना शुरू हुआ और मौका दिया गया कि जो पढ़ाई उसने छोड़ी है उसे वो दोबारा कंटिन्यू करे बिना किसी परेशानी के। इस स्कीम का नाम- एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (ABC) हैं। हाल में इसमें देश भर के 3 करोड़ छात्रों ने पंजीकरण कर लिया और आने वाले समय में ये संख्या और बढ़ने के अनुमान है।

इसकी व्यवस्था की खास बात यह है कि इसमें पंजीकृत छात्र किसी भी कॉलेज में मल्टीपल एंट्री या एग्जिट कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें अलग-अलग जगह से कागज जुटाने की जरूरत नहीं है। एक क्लिक में दूसरे कॉलेज में काम उसी कोर्स में एडमिशन के जानकारी पहुँच जाएगी और छूटी हुई पढ़ाई में दोबारा वो सेमेस्टर पढ़ने की जरूरत नहीं होगी।

सरकार के इस पोर्टल पर स्टूडेंट्स का सारा डेटा सुरक्षित रहेगा। आसान भाषा में कहें तो ये प्लेटफॉर्म एक कमर्शियल बैंक की तरह काम करेगा, जिसके ग्राहक छात्र-छात्राएँ हैं और पैसे की जगह या कोर्स के क्रेडिट जमा होते हैं। जब छात्र-छात्राएँ इसे रिडीम करना चाहें तो वो भी आसानी से हो सकता है।

इस स्कीम का नियम है कि अगर कोई छात्र एक साल पूरा करके गया है तो ऐसा नहीं माना जाएगा उसने कोर्स बीच में छोड़ा, उसके सर्टिफिकेट दिया जाएगा। ऐसे ही दो साल करने पर उसे डिप्लोमा मिलेगा और तीन साल करने पर उसे डिग्री दी जाएगी।

इसके बाद आने वालों वर्ष में जब आपका पढ़ाई कंटिन्यू करने का मन करें तो आप वो कागज दिखाकर, क्रेडिट रीडीम करके आगे कंटिन्यू कर सकते हैं। लेकिन सबसे जरूरी ये है कि इस सुविधा के लिए छात्रों को एकैडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट स्कीम में रजिस्टर करना होगा।

इसके बाद छात्र को अपने डॉक्यूमेंट्स को लेकर निश्चिंत हो जाना है। इस पोर्टल के तहत अब तक 1500 से ज्यादा यूनिवर्सिटीज पंजीकृत हैं। इसके अलावा यूजीसी लगातार हर यूनिवर्सिटी से कह रही है कि वो छात्रों को इसपर पंजीकरण कराएँ और उनके डेटा पर बराबर ध्यान दें।

एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स की सुविधा का लाभ उठाने के लिए छात्रों को निम्नलिखित स्टेप फॉलो करने होंगे।

  • पहले www.abc.gov.in पर लॉग-इन करना है।
  • इसके बाद ABC साइट खुलते ही My Account पर क्लिक करें।
  • फिर डिजिलॉकर के जरिए अकॉउंट बनाएँ। इसके लिए आपको मोबाइल नंबर या फिर आधार नंबर की जरूरत होगी।
  • अगले चरण में आफको सिक्योरिटी पिन डालना होगा, जो आपके फोन पर आएगा।
  • आपका अकॉउंट बन जाएगा।
  • इसके बाद आपको यूनिक आईडी और पासवर्ड मिलेगा, जिससे कैंडिडेट्स कभी भी लॉग-इन कर सकते हैं।
  • आपको अपनी एबीसी आईडी देकर सारे कोर्स और उनके क्रेडिट स्कोर दिखने लग जाएँगे।
  • आपको इनमें से जिस कोर्स की जानकारी ट्रांसफर करने की आवश्यकता है आप उसे सरलता से चुनकर आगे शेयर कर सकते हैं।
  • आपके अकॉउंट में रखे गए क्रेडिट को आप सात वर्षों तक रिडी कर सकते हैं।
  • इसकी मदद से आपको आगे पढ़ाई करने में सरलता होगी।
  • एबीसी की इस व्यवस्था में स्टूडेंट को कोई डॉक्यूमेंट अपनी ओर से नहीं देना होगा। हायर इंस्टिट्यूट द्वारा दी गई जानकारी ही इसकी फीड में जाएगी।
  • इनके जरिए स्टूडेंट्स जिन कोर्सेस में एडमिशन ले सकते हैं उनमें ऑनलाइन और डिस्टेंट मोड कोर्स सब शामिल हैं। सबके क्रेडिट स्कोर प्लेटफॉर्म पर जुड़ते रहेंगे
  • इस पोर्टल पर यूजीसी से मान्य सभी हायर इंस्टीट्यूट के कोर्सेस के साथ-साथ इंजीनियरिंग, मेडिकल, डेंटल, लॉ और अन्य प्रोफेशनल कोर्सेस को भी कवर किया गया है।

पुरानी है योजना, चुनाव के साथ नहीं आई

बता दें कि साल 2020 में आई एजुकेशन पॉलिसी के बाद ही अगले वर्ष यानी कि 2021 में ABC को लॉन्च किया गया था जिसका कॉन्सेप्ट ही यही था कि छात्रों को एक प्लेटफॉर्म पर उनकी सारे क्रेडिट की जानकारी मिल सके। इस प्लेटफॉर्म की खास बात यह है कि अगर आपने ऑफलाइन कोर्स किया है तब भी और अगर ऑनलाइन कोर्स किया है तब भी आपको अलग से कुछ भी अपडेट करने की जरूरत नहीं है।

स्वंय आपका शैक्षणिक संस्थान इस पर आपके क्रेडिट स्कोर शेयर करेगा। अगर इस दौरान आप पढ़ाई छोड़ भी देते हैं तो आपको आपके क्रेडिट के हिसाब से डॉक्यूमेंट मिल जाएगा, जो आपको नेक्स्ट ईयर या सेमेस्टर में 7 सालों में एडमिशन लेने में मदद करेगा। खास बात ये है कि जरूरी नहीं आप एक ही जगह से अगला सेमेस्टर करें। अगर आपको लगता है कि एक सेमेस्टर के क्रेडिट स्कोर आपने दिल्ली यूनिवर्सिटी से किए हैं और अगले आप इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी से करने में सक्षम हैं तो आप ऐसा पाएँगे।

मोदी सरकार के छोटे प्रयास से बदल रहा भारत

गौरतलब है कि ऐसे समय में जब लोकसभा चुनाव नजदीक हैं और विपक्ष लगातार मोदी सरकार की नीतियों में खोट ढूँढने के प्रयास कर रहा है, तब जानने की जरूरत है कि नरेंद्र मोदी सरकार ने सिर्फ बड़ी-बड़ी परियोजनाओं की शुरुआत करके ही देश को विकसित नहीं किया है बल्कि उन्होंने ऐसे छोटे-छोटे कदम उठाकर भी देश के युवाओं को मजबूत बनाने का काम किया है।

व्यवहारिक तौर पर आज एबीसी के इस्तेमाल को देखें तो ऐसी योजना के जरिए वो महिलाएँ अपनी शिक्षा पूरी कर सकती हैं जिनपर शादी का दबाव बनाकर उनसे उनकी पढ़ाई बीच में छुड़वा दी गई। या, इसका फायदा वो पुरुष उठा सकते हैं जिनका सपना उच्च शिक्षा ग्रहण करने का था लेकिन पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते उन्हें नौकरी की ओर अपना राह मोड़नी पड़ी। वो युवा भी इसका लाभ उठा सकते हैं जो आसपास के माहौल के कारण एक उम्र में भ्रमित होकर शिक्षा छोड़ देते हैं और बाद में उन्हें एहसास होता है कि अगर पढ़ाई पूरी की होती तो शायद जीवन में कुछ बेहतर कर रहे होते।

शौहर को छोड़ प्रेमी संग भागी अफसाना, लोग मरा हुआ समझे इसलिए सहेली जीनत को जिंदा जला दिया: अब जेल में कटेगी पूरी जिंदगी

मेरठ के बहुचर्चित जीनत हत्याकांड में उसकी सहेली अफसाना को उम्र कैद की सजा सुनाई गई है। उसे साल 2024 के पहले ही दिन यानी 1 जनवरी को सजा सुनाई गई। जीनत को 2019 में जिंदा जलाकर मार दिया गया था। जब उसकी हत्या की कहानी सामने आई तो हर कोई हैरान रह गया।

मेरठ के लिसाड़ीगेट थाना इलाके से जुड़ा ये मामला अप्रैल 2019 का है। 1 अप्रैल 2019 को जीनत गायब हो जाती है। अगले दिन (2 अप्रैल 2019) को दूसरे मोहल्ले के एक घर में आग लगने की खबर मिलती है। किराए के इस कमरे में आग लगने के बाद एक महिला का शव मिलता है। मृत महिला की पहचान अफसाना के तौर पर की जाती है।

अफसाना के परिजन उसके पति के खिलाफ दहेज हत्या का मामला दर्ज कराते हैं। इधर जीनत का भाई भी उसके पति के खिलाफ दहेज के लिए मारपीट का आरोप लगाते हुए गुमशुदगी का मामला दर्ज करवाता है। दोनों मामलों की जाँच के दौरान पुलिस को पता चला कि जीनत और अफसाना पक्की सहेली थी। एक-दूसरे के घर आना-जाना था। पूछताछ और सीसीटीवी से पता चला कि जीनत 1 अप्रैल को अफसाना के घर गई थी, लेकिन वहाँ से लौटी नहीं।

इसके बाद 24 अप्रैल 2019 को खुद को निशा बताते हुए एक महिला थाने पहुँचती है। खुद को गर्भवती बताते हुए कहती है कि पति प्रवीण ने उसे छोड़ दिया है। लेकिन थाने में मौजूद एक पुलिस वाले को लगता है कि उसने निशा को कहीं देखा है। असल में इस पुलिस वाले ने कुछ दिन पहले ही अफसाना की मौत के मामले की जाँच फाइल देखी थी। उसे लगा कि ​जो महिला खुद को निशा बता रही है वह अफसाना की ती दिखती है। ऐसे में निशा की कहानी पर विश्वास करने की जगह वह अफसाना की माँ को बुलवाता है और उसकी पहचान कराता है।

28 अप्रैल 2019 पुलिस निशा और उसके कथित प्रेमी प्रवीण कुमार को गिरफ्तार कर लेती है। पुलिस पूछताछ में अफसाना उर्फ निशा ने पूरी कहानी उगल दी। उसने बताया कि वह अपने शौहर को छोड़कर प्रेमी प्रवीण के साथ रहना चाहती थी। इसलिए जीनत की हत्या कर उसे जला दिया ताकि लोगों को लगे कि वह मर गई है।

अफसाना ने बताया कि 1 अप्रैल को जीनत उसके घर आई थी। उसने उसे नशीला पदार्थ खिला दिया। बेहोश होने के बाद छोटे गैस सिलेंडर को लीक आग लगा दी और खुद बाहर निकल गई। हर तरफ अफसाना के मारे जाने का हल्ला मच गया और अफसाना खुद प्रेमी प्रवीण के पास चली गई।

उसने यह भी बताया कि प्रवीण को उसने अपना नाम निशा बता रखा था। जब वह शौहर को छोड़कर आई तो प्रवीण को उसके अफसाना होने का पता चला। साथ ही वह गर्भवती भी थी। इसके बाद प्रवीण ने उससे पीछा छुड़ा लिया। इससे बौखलाई अफसाना पुलिस के पास निशा बनकर पहुँच गई। लेकिन यह उसे भारी पड़ गया। उसकी पहचान, उसकी साजिश सब कुछ दुनिया के सामने आ गई।