Home Blog Page 1276

‘राहुल गाँधी बड़े नेता नहीं’: दिग्विजय सिंह के भाई ने कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष की बताई ‘औकात’, मीडिया से कहा- आप भी उन्हें इतना भाव मत दीजिए

कॉन्ग्रेस के नेता हैं लक्ष्मण सिंह। उनके भाई दिग्विजय सिंह केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री भी। राहुल गाँधी के वो सबसे नजदीकी सलाहकारों में से हैं। राहुल गाँधी ही नहीं, पूरी गाँधी फैमिली उन्हें खूब भाव देती है। लेकिन दिग्विजय सिंह के विधायक रह चुके भाई लक्ष्मण सिंह राहुल गाँधी को कोई भाव देने के मूड में नहीं दिखते। उनका कहना है- “राहुल गाँधी कॉन्ग्रेस के एक सामान्य कार्यकर्ता हैं, उन्हें इतना भाव मीडिया क्यों दे? मैं तो उन्हें बड़ा नेता मानता ही नहीं, आप भी मत मानिए।”

लक्ष्मण सिंह अपनी साफगोई के लिए जाने जाते हैं, हालाँकि अपने बयानों की वजह से वो विवादों में भी रहे हैं। इस बार उन्होंने मीडिया से बातचीत में राहुल गाँधी के लिए ऐसी बात कह दी, जो शायद ही किसी कॉन्ग्रेसी को पसंद आए। लक्ष्मण सिंह ने कहा, “राहुल गाँधी न तो पार्टी के अध्यक्ष हैं और न ही कोई बड़े नेता। वो सामान्य सांसद हैं, जैसे पार्टी के दूसरे और भी सांसद हैं।”

बता दें कि लक्ष्मण सिंह पहले विधायक थे लेकिन मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में चचौरी में इस बार उन्हें भाजपा प्रत्याशी प्रियंका से हारना पड़ा। इसके बाद वह अब चर्चा में आए। उन्होंने रविवार (31 दिसंबर 2023) को प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान मीडिया ने राहुल गाँधी की उन चिंताओं (जिसमें राहुल संसद में बोलते समय कैमरा घुमा दिए जाने का आरोप लगाते हैं) पर सवाल पूछा था, साथ ही जन्म के आधार पर प्रिविलेज्ड होने के मामले पर भी सवाल पूछा था। इस सवाल के जवाब में लक्ष्मण सिंह ने अपने दिल की बात कही।

लक्ष्मण सिंह बोले, “राहुल गाँधी एक सांसद हैं। वो अध्यक्ष नहीं हैं। और एक कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ता हैं। इसके अलावा राहुल गाँधी कुछ नहीं हैं। राहुल गाँधी को इतना हाईलाइट आप लोग भी इतना मत करिए, न हम करें। राहुल गाँधी एक सांसद हैं, जैसे अन्य सांसद होते हैं। कोई जन्म से नहीं हो जाता, अपने कर्म से होता है। राहुल गाँधी को आप इतना बड़ा नेता मत मानिए, मैं तो नहीं मानता हूँ। साधारण सांसद हैं, उनको हाईलाइट करें या न करें, मुझे कोई समस्या नहीं है।”

बता दें कि दिग्विजय सिंह के भाई लक्ष्मण सिंह अक्सर अपनी अलग राय के लिए जाने जाते हैं। एक बार उन्होंने कहा था कि ज्योतिरादित्य सिंधिया की बहुत याद आती है। अगर वो पार्टी में होते, तो पार्टी की ये हालत नहीं होती। इसके अलावा इससे पहले वो ये भी कह चुके हैं कि किसानों की कर्जमाफी संभव नहीं है, राहुल गाँधी को वादा ही नहीं करना चाहिए था।

4 बार के MLA, अब राजस्थान के मंत्री… लेकिन घर आज भी कच्चा: पुनिया ने दिखाई बाबूलाल खराड़ी की सादगी, कहा – ये RSS से मिले संस्कार

राजस्थान में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के मंत्रिमंडल का विस्तार शनिवार (30 दिसंबर, 2023) को हुआ। इसमें 22 नए मंत्री मनाए गए। इनमें से 12 कैबिनेट मंत्री बने। इन कैबिनेट मंत्रियों में से झाड़ोल से जनजातीय समुदाय से आने वाले बीजेपी विधायक बाबूलाल खराड़ी भी एक रहे। अब उनका एक वीडियो वायरल हो रहा है, जो एक साल पहले राजस्थान में भाजपा के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने शेयर किया था। बाबूलाल खराड़ी को मंत्री बनाए जाने के बाद ये वीडियो फिर से चर्चा में है।

उनके नाम का ऐलान कैबिनेट के मंत्री के तौर पर होते ही वो सुर्खियों में आ गए। आपको जानकर हैरानी होगी इसके पीछे उनका पद नहीं बल्कि उनका व्यक्तित्व है। खराड़ी के कैबिनेट मंत्री बनने के पहले साल 2022 में खुद राजस्थान बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष रहे सतीश पूनिया उनके घर गए थे।

इसे लेकर उन्होंने अपने एक्स हैंडल पर 23 दिसंबर, 2022 को एक वीडियो पोस्ट किया है। इसमें पूनिया कहते नजर आ रहे हैं, “इस समय उपलाथला जो कोटड़ा तहसील के उदयपुर जिले के गाँव में हूँ। मेरे साथ में बाबूलाल खराड़ी हैं। कद में छोटे लग रहे होंगे, लेकिन इनका काम बड़ा है।”

बीजेपी नेता पूनिया आगे कहते हैं, “मुझे बड़ी उत्सुकता थी बहुत बरसों से कि मैं बाबूलाल जी के गाँव आऊँ आज मुझे सौभाग्य मिला और परिवार का भी मैं ऋृणी हूँ कि उन्होंने मुझे मक्के की रोटी और उड़द की दाल खिलाई।”

वो आगे कहते हैं, “इस दौरान मुझे उत्सुकता हुई की बाबू लाल जी का मकान तीन बार विधायक बनने के बाद भी ऐसा क्यों है? तो मैं बाबू लाल जी से सवाल पूछ रहा था कि लोग राजनीति में ईमानदारी शुचिता की बात करते हैं तो आप इतने ईमानदार क्यों है?”

उनके इस सवाल का जवाब बाबूलाल खराड़ी कुछ ऐसे देते हैं, “मुझे संघ की शाखा से जो संस्कार मिला है जिसके कारण से ये सारी चीजें मेरे खून में हैं।” इस पर पूनिया फिर उनसे सवाल करते हैं कि राजनीति में ईमानदार रह कर काम चल सकता है? तो खराड़ी उन्हें जवाब देते हैं, “चल सकता है। काफी लोग हैं जो आज भी देश में ईमानदारी से काम कर रहे हैं जैसे हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी, अटल बिहारी वाजपेयी जी, अडवाणी जी हमारा केंद्रीय नेतृत्व जो भी है।”

पूनिया फिर सवाल करते हैं कि ये सब आपकी प्रेरणा हैं जिनको आपने देखा होगा बचपन से तो बाबूलाल खराड़ी कहते हैं, “हाँ वो ही प्रेरणा है।” राजनीति में कब से हैं और क्यों है के सवाल पर कैबिनेट मंत्री खराड़ी का जवाब होता है, “संघ ने 1987 में मुझे कार्य से मुक्त करके मुझे राजनीति का दायित्व दिया था युवा मोर्चा का मंडल अध्यक्ष बना कर, तब से अब तक राजनीति में पार्टी के कहते हुए विभिन्न काम करते चल रहे हैं।”

बाबूलाल खराड़ी आगे कहते हैं, “पार्टी ने पाँचवी बार मुझे MLA का टिकट दिया, दो बार में हारा और तीन बार जीता हूँ। प्रधान भी रहा हूँ कोटड़ा का।” जब उनसे पूछा गया कि क्या वो राजनीति में सक्रिय रह कर और जनजातीय समाज व जनता के लिए काम कर के संतुष्ट हैं – तो उन्होंने कहा, “लोगों की सेवा, जनता की सेवा है, इससे में संतुष्ट हूँ, जनता का भी मुझे आशीर्वाद मिलता है, मान-सम्मान मिलता है और उससे मैं खुश हूँ।”

बाबूलाल खराड़ी चौथी बार MLA

ठेठ आदिवासी क्षेत्र से आने वाले खराड़ी झाड़ोल सीट से पहली बार कैबिनेट मंत्री बने, लेकिन इससे पहले उनका राजनीतिक सफर कम शानदार नहीं रहा है। उनकी सादगी को देखते हुए उन्हें आरएसएस के वनवासी कल्याण परिषद में सुपरवाइजर बनाया गया था। इसके बाद उन्हें आरएसएस के तहसील अध्यक्ष बनाया गया।

बीजेपी ने साल 1987 में उन्हें कोटड़ा मंडल युवा मोर्चा का अध्यक्ष बनाया। इसके बाद 1995 में जिला परिषद सदस्य के तौर पर चुनाव लड़े और साल 2000 में कोटड़ा के प्रधान बने। साल 1998 के विधानसभा चुनावों से उन्होंने राज्य स्तरीय राजनीति में कदम रखा, हालाँकि, इसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन बीजेपी नेतृत्व का विश्वास उन पर बना रहा।

दूसरी बार 2003 बीजेपी ने उन पर भरोसा जताया गया और उन्होंने उसका मान भी रहा और खराड़ी पहली बार विधायक बन राजस्थान विधानसभा में पहुँचे। दूसरी बार उन्होंने 2008 में भी विधानसभा चुनाव जीता। हालाँकि तीसरी बार 2013 में खराड़ी चुनाव हारे, लेकिन 2018 में फिर से बीजेपी ने पाँचवी बार उन पर दाँव लगाया और उन्होंने जीत हासिल की।

उनके जनता के लिए काम से उन्हें साल 2021 में राजस्थान विधानसभा का सर्वश्रेष्ठ विधायक चुना गया। साल 2023 में चौथी बार झाड़ोल से खराड़ी ने जीत हासिल की। इस विधानसभा चुनाव में खराड़ी ने 6488 वोट के अंतर से जीत हासिल की थी। उन्हें 76,537 वोट मिले थे। वहीं उनके मुकाबले कॉन्ग्रेस प्रत्याशी हीरालाल डरांगी को 70,049 वोट मिले थे।

अभी भी जीते हैं साधारण जीवन

बेहद साधारण जीवन जीने वाले बाबूलाल खराड़ी भी केलूपोश (झोपड़ी) में रहते हैं। उनका परिवार खेती करता है और वो खुद की खेती करते हैं। उनकी दो पत्नियाँ मणिदेवी और तेजूबाई हैं। संतानों में दो बेटे और दो बेटियाँ हैं।

उनके सभी बच्चों का विवाह हो चुका है। संतानों में सबसे बड़ा बेटा देवेन्द्र खराड़ी और प्रदु्मन खराड़ी दोनों खेती करते हैं। उनके पास एक ट्रैक्टर और एक गाड़ी है। अपनी सादगी की वजह से वो बीजेपी में खासे पसंद किए जाते हैं। सतीश पूनिया ही नहीं पार्टी की वरिष्ठ नेता विजया राहटकर भी उनकी तारीफ के पुल बाँध चुकी हैं।

‘प्राण-प्रतिष्ठा का न्योता केवल राम भक्तों को’: रामलला के मुख्य पुजारी ने उद्धव ठाकरे को लताड़ा, कहा था- नहीं मिला निमंत्रण

अयोध्या राम मंदिर के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने कहा है कि रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा का न्योता केवल राम भक्तों को दिया गया है। उन्होंने यह प्रतिक्रिया महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और शिवसेना (उद्धव गुट) के प्रमुख उद्धव ठाकरे की उस टिप्पणी पर दी है, जिसमें उन्होंने प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के लिए निमंत्रण नहीं मिलने की बात कही थी। रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा 22 जनवरी 2024 को होनी है।

न्यूज एजेंसी से बात करते हुए आचार्य सत्येंद्र दास ने कहा, “न्योता केवल उन लोगों को दिया जाता है जो राम भक्त हैं। यह कहना पूरी तरह से गलत है कि बीजेपी भगवान राम के नाम का इस्तेमाल कर रही है। हमारे प्रधानमंत्री का हर जगह सम्मान है। उन्होंने अपने कार्यकाल में काफी काम किया है। यह राजनीति नहीं, उनकी भक्ति है।”

आचार्य सत्येंद्र दास ने उद्धव ठाकरे की पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय राउत को भी लताड़ लगाई है। उन्होंने कहा, “संजय राउत को इतनी पीड़ा है कि वह बता तक नहीं पा रहे। यही लोग प्रभु राम के नाम पर वोट माँगते थे। जिन लोगों की प्रभु राम के प्रति श्रद्धा थी वे अब सत्ता में हैं। वह क्या बकवास कर रहे हैं? वह भगवान राम का अपमान कर रहे हैं।”

संजय राउत ने कहा था, “प्रधानमंत्री कार्यालय अयोध्या से चलेगा, सरकार अयोध्या से चलेगी क्योंकि काम कहाँ है? कभी पुलवामा के नाम पर, कभी राम के नाम पर। हमने भी राम मंदिर के लिए पसीना बहाया है। हमसे बड़ा रामभक्त कोई नहीं है। तो ये तो होगा, PMO बनेगा वहाँ, और मंत्रालय बनेंगे वहाँ, हम देश को पाँच हजार वर्ष पीछे ले जा रहे हैं।”

इससे पहले भी संजय राउत ने राम मंदिर और भाजपा पर विवादित बयान दिया था। उन्होंने निमन्त्रण के विषय में कहा था, “अभी इतना ऐलान 22 जनवरी, 2023 को भाजपा की तरफ से होना बाकी है कि हमारे अयोध्या से प्रत्याशी प्रभु श्रीराम हैं।” उन्होंने इससे पहले 22 जनवरी, 2023 को होने वाले कार्यक्रम को भाजपा का कार्यक्रम बता दिया था। उन्होंने कहा था कि यह राष्ट्रीय कार्यक्रम नहीं है। यह राजनीति है।

गौरतलब है कि 22 जनवरी 2023 को अयोध्या में श्रीराम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा का कार्यक्रम होगा। इस कार्यक्रम के लिए देश भर से लगभग 7000 लोगों को निमन्त्रण भेजा गया है। कई बड़े राजनीतिक चेहरों को यहाँ बुलाया गया है। हालाँकि, INDI गठबंधन में शामिल दल अभी इस कार्यक्रम में जाने को लेकर काफी पशोपेश में हैं।

जहाँ इतिहास में कभी नहीं हुआ किसी का अंतिम संस्कार, भरत ने वही जगह ढूँढ कर की राजा दशरथ की अंत्येष्टि: पुजारी बोले – पहले सब जर्जर था, मोदी-योगी ने बदल दिया

अयोध्या में निर्माणाधीन रामजन्मभूमि के गर्भगृह में 22 जनवरी, 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में रामलला की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। इस अवसर पर पूरे देश में दीपावली जैसा माहौल होगा। ऑपइंडिया की टीम दिसंबर 2023 के अंतिम हफ्ते से अयोध्या में है। अपनी ग्राउंड रिपोर्ट में हम लोगों को न सिर्फ गुमनाम बलिदानी बल्कि विस्मृत किए गए उन स्थलों के बारे में भी बताने का प्रयास कर रहे हैं जो भगवान राम से कहीं न कहीं संबंधित हैं। इन्हीं में से एक स्थान है राजा दशरथ समाधि स्थल।

यहीं पर वनवास गए राम के वियोग में प्राण त्यागने के बाद उनके पिता दशरथ का अंतिम संस्कार हुआ था। शनिवार (30 दिसंबर, 2023) को ऑपइंडिया की टीम ने दशरथ समाधि और उसके आसपास के क्षेत्रों का दौरा किया।

राजा दशरथ अंत्येष्टि स्थल अयोध्या-आज़मगढ़ रोड पर पूरा बाजार क्षेत्र में स्थित है। अयोध्या से इस जगह की लगभग दूरी 12 किलोमीटर है। पुराणों में इस जगह का नाम बिल्वहरि घाट बताया गया है। मुख्य हाइवे से लगभग डेढ़ किलोमीटर अंदर उत्तर दिशा की तरफ बना यह स्थान एक घनी मिश्रित आबादी से गुजरता है। इसी मंदिर के बाद माझा क्षेत्र शुरू हो जाता है। माझा क्षेत्र वह इलाका कहा जाता है जो नदी के बढ़ने पर उसके दायरे में आ जाता है और यहाँ की जमीन रेतीली होती है। मंदिर से सटा हुआ सरयू नदी का विस्तार क्षेत्र है।

राजा दशरथ समाधि स्थल प्रवेश द्वार

जहाँ रखा गया दशरथ का पार्थिव शरीर वहाँ बना है स्मारक

ऑपइंडिया ने पाया कि भगवा रंग में रंगी इस जगह की बाउंड्री की गई है। अंदर एक मंदिर है जिसमें बाकायदा विधि-विधान से पूजा-पाठ होता है। ऊँचाई पर चढ़ कर एक चबूतरानुमा स्मारक बना है। मंदिर के पुजारी व उत्तराधिकारी संदीप दास ने बताया कि जहाँ स्मारक है वहीं राजा दशरथ का पार्थिव शव रखा गया था और उनको मुखाग्नि दी गई थी। संदीप दास ने ऑपइंडिया को यह भी बताया कि तब सरयू नदी की मुख्य धारा मंदिर के ठीक बगल से गुजरती थी। हालाँकि, समय के साथ वह थोड़ी उत्तर दिशा में चली गई। अभी भी बरसात के मौसम में सरयू नदी मंदिर के बगल आ कर बहती है।

राजा दशरथ की दाह संस्कार स्थली पर बना स्मारक

स्मारक के आसपास कई प्राचीन कालीन अस्त्र-शस्त्र रखे हुए हैं। संदीप दास का दावा है कि उन शस्त्रों पर सदियों से जंग नहीं लगा है। स्मारक के ऊपर प्रतीकत्मक तौर पर राम, लक्ष्मण, भारत द्वारा किया गया पिंडदान रखा हुआ है। इसी पर एक शिवलिंग भी बना हुआ है। बकौल पुजारी, राम ही नहीं उनके पूर्वज भी महादेव के भक्त रहे थे। संदीप दास के मुताबिक, अंतिम संस्कार के दौरान राजा दशरथ के पार्थिव शरीर में सिर का हिस्सा उत्तर नदी की तरफ और पैर दक्षिण की तरफ था। पैर की दिशा में स्मारक पर राजा दशरथ के चारों बेटों की चरण पादुकाएँ प्रतीकत्मक तौर पर बनी हुईं हैं।

यहाँ पहले किसी का नहीं हुआ था दाह संस्कार

राजा दशरथ का अंतिम संस्कार वहीं क्यों हुआ ? यह सवाल जब हमने पुजारी संदीप दास से पूछा तो उन्होंने इसकी कथा बताई। उन्होंने बताया कि पिता के देहांत के दौरान राम और लक्ष्मण माँ सीता वनवास काट रहे थे जबकि भरत और शत्रुघ्न अपने ननिहाल में थे। पिता के देहांत की खबर सुन कर भरत और शत्रुघ्न अयोध्या आए। तब राजा के रूप में काम कर रहे भरत ने अपने मंत्रिमंडल की सभा बुलाई। उन्होंने अपने पिता के दाह संस्कार के लिए ऐसी जगह तलाशने के लिए कहा जहाँ उस से पहले इतिहास में किसी और का अंतिम संस्कार न हुआ हो।

पुजारी संदीप दास के मुताबिक राजा भरत और उनके मंत्रिमंडल को ऐसी जगह तलाशने में काफी समय लगा। इस दौरान राजा दशरथ के पार्थिव शरीर को सुरक्षित रखा गया। आखिरकार लम्बी खोजबीन के बाद बिल्वहरि घाट पर वो जगह मिल ही गई जहाँ पहले इतिहास में किसी का भी अंतिम संस्कार नहीं हुआ था। आज जहाँ दशरथ समाधि है वह वही जगह है जहाँ इतिहास और वर्तमान मिला कर सिर्फ राजा दशरथ की ही अंत्येष्टि हुई है। संदीप दास का यह भी दावा है कि वनवास काट कर लंका विजय के बाद भगवान राम भी अपने पिता के अंत्येष्टि स्थल पर गए थे और उन्होंने वहाँ वैदिक विधि-विधान से आवश्यक क्रिया-कलाप किए थे।

राजा दशरथ की दाह स्थली

मंदिर में मौजूद है भगवान राम की वंशावली

ऑपइंडिया की टीम ने जब मंदिर का भ्रमण किया तो पाया कि परिसर में शनिदेव का एक अन्य मंदिर भी मौजूद है। मंदिर की दीवालों पर रामचरितमानस और रामायण के साथ विभिन्न देवी-देवताओं के चालीसा की पट्टिकाएँ मौजूद हैं। इन्ही पट्टिकाओं में भगवान राम की वंशावली भी दिखी। यह वंशावली भगवान ब्रह्मा से शुरू हुई है और राम पर खत्म हुई है। भगवान राम की वंशावली में उनके पहले क्रमशः दशरथ, अज, रघु, दीर्घवाहु, खष्ट्रवाड, विश्वास, विश्वसह, लिविल, दशरथ, मूलक, अश्मक, सौदास, सुदास, सर्वकाम, ऋतुपर्ण, अयुतायु, सिधुदीप, अम्बरीश, नाभाग, श्रुति, सुहोत्र, भगीरथ, दिलीप, अंशुमान, असमंजस, सगर, बाहु, वृक, रुरुक, विजय, चच्चू, हरीता, रोहिताश्व, हरिश्चंद्र, सत्यव्रत, त्र्यारुणि, त्रिधन्वा, सुमन, हरतस्य, हयश्व, पृषदश्व, अनरष्य, त्रसददस्यु, पुरुकुत्स्य, अमित, निकुम्भ, हर्यश्व, दद्धाश्व, कुवलयाश्व, वृहदश्व, शाश्वत, युवनाश्व, चांद्र, विष्टराश्व, पृथु, अनेनाः, कुकुत्स्थ, पुरंजय, विकुक्षि, ईक्षयाकु, वैवस्वत, विवस्वान, कश्यप मरीचि और भगवान ब्रह्मा के नाम हैं।

भगवान राम की वंशावली

इस पट्टिका के मुताबिक सूर्यवंश का आरम्भ शुरू से क्रम नंबर (पीढ़ी संख्या) 5 पर मौजूद राजा वैवस्वत के समय में हुआ। वहीं इसी सूची के मुताबिक रघुकुल की शुरुआत क्रम संख्या (पीढ़ी नंबर) 60 पर मौजूद राजा रघु के काल से हुई। राजा रघु को सूर्यवंश का सबसे प्रतापी राजा माना गया है। उनके ही नाम का जिक्र कई बार ग्रंथों में भी आया है। इसी नाम के आधार पर ‘रघुकुल रीति सदा चली आई, प्राण जाय पर वचन न जाई’ चौपाई बनाई गई है।

जो काम योगी सरकार ने किया वो पहले कभी नहीं हुआ

मंदिर के पुजारी संदीप दास ने हमें बताया कि उनकी कई पीढ़ियाँ राजा दशरथ की अंत्येष्टि स्थल की रखरखाव और पूजा-पाठ करती आ रहीं है। स्थान को पवित्र और पौराणिक बताते हुए उन्होंने पिछली सरकारों द्वारा इसकी उपेक्षा का आरोप लगाया। संदीप दास का कहना है कि दशरथ समाधि के लिए जो काम मोदी और योगी सरकार ने कर दिया वो पहले करना तो दूर किसी ने सोचा भी नहीं था। पहले मंदिर में न सिर्फ पर्याप्त उजाले और पानी की दिक्कत थी बल्कि आने और जाने के लिए सड़क बेहद जर्जर हालत में थी।

मंदिर के पुजारी संदीप दास

अब मंदिर परिसर में एक छोटी सी धर्मशाला आदि बनवाई गई है। यह जगह मांगलिक आयोजनों के साथ धार्मिक सभा और कोई विकल्प न होने पर यात्रियों के ठहरने में काम आ रही है। फिलहाल दशरथ समाधि के बगल से गुजर रही सड़क जल्द ही चौड़ी की जाएगी। संदीप का कहना है कि वर्तमान सरकार मंदिर का जीर्णोद्धार करवाएगी और इसे भव्यता देगी। संदीप दास ने भावुक हो कर मंदिर परिसर से मोदी और योगी को आशीर्वाद भी दिया।

बताते चलें कि ऑपइंडिया की टीम दिसंबर 2023 के अंतिम सप्ताह से अयोध्या में है। यहाँ से हम आपको न सिर्फ रामजन्मभूमि आंदोलन के गुमनाम बलिदानी, विस्मृत घटनाएँ बल्कि अयोध्या के कई अनसुने लेकिन पवित्र स्थानों के बारे में विस्तार से बताएँगे। पिछली 2 रिपोर्ट में हमने पाठकों को रामजन्मभूमि मुक्ति आंदोलन के गुमनाम बलिदानियों के परिवार से परिचित करवाया है। इस कड़ी की अगली खबर जल्द ही प्रकाशित होगी।

सबा नकवी के लिए राम मंदिर बकवास चीज: कहा- सब अयोध्या में माथा टेक रहे, हमारा मजाक बन रहा

स्वयंभू पत्रकार सबा नकवी ने राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम को और टीवी पर श्रीराम की तस्वीरों को ‘बकवास’ चीज कहा है। उनकी इच्छा है कि न्यूज चैनलों पर गाजा की हालत दिखाई जानी चाहिए, लेकिन दिखाया जा रहा है कि कोई कैसे मंदिर में माथा टेक रहा है। इस वीडियो में सबा नकवी की बौखलाहट देखते ही बनती है। उन्होंने ये कुंठा ‘सत्य हिंदी’ पर आशुतोष के साथ चर्चा करते हुए निकाली। इस चर्चा में राम मंदिर का नाम आने से उन्होंने अपने मित्र आशुतोष के शो की भी आलोचना की।

सबा की बात को 22 मिनट के स्लॉट के बाद सुना जा सकता है। यहाँ आशुतोष उनसे सवाल करते हैं कि अगर कॉन्ग्रेस को खुद को हिंदू विरोधी नहीं साबित करना है तो क्यों वो राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में जाने से बच रहे हैं? इस पर सबा ने कहा कि आशुतोष के चर्चा का फॉर्मेट थोड़ा अलग है लेकिन गोदी मीडिया वाला है। जैसे ये पूछना- आप राम मंदिर क्यों नहीं जा रहे हो, हिंदू विरोधी हो। सबा ने आशुतोष को कहा- “बस आप राम के दृश्य नहीं दिखा रहे हैं कि ये भक्ति चैनल बन गया है।”

उन्होंने कहा कि कोई संविधान की बात नहीं कर रहा है। लेकिन वो संविधान की बात करेंगी। उन्होंने ये पढ़ा है कि हिंदुस्तान धार्मिक मुल्क नहीं है। लेकिन अब इसे ऐसा बनाया जा रहा है। उन्होंने आशुतोष की किताब हिंदू राष्ट्र के नए संस्करण पर सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कॉन्ग्रेस नेता कमलनाथ घबराते हैं कि इस पार रहें या उस पार, इसलिए हो सकता है कि वो चले जाएँ या कोई प्रतिनिधि मंडल जाए लेकिन सवाल है कि ये लोग जाएँ ही क्यों? उन्होंने कहा कि बेचारा मुसलमान वोटर तो बहुत कमजोर हो गया है। जहाँ है वहाँ भी उसके नाम वोटर लिस्ट से गायब हो रहे हैं।

वह आशुतोष को बोलीं- “मैं दोस्ती में आपके चैनल की आज आलोचना कर रही हूँ। आपने जो टॉपिक उठाया है कि वो गोदी मीडिया वाला है। जहाँ पूछा जा रहा है कि आप क्यों नहीं अयोध्या जा रहे।”

उन्होंने कहा- “देखो तो हिंदू क्या है मुस्लिम क्या है हमारा मुल्क क्या है आशुतोष, क्या था क्या हमने सोचा। पूरे मुल्क को इतनी बकवास में फँसाया गया है। वहाँ एक बड़ा सा युद्ध हो रहा है गाजा में। दुनिया बदल रही है। हम राम मंदिर, अयोध्या जाकर माथा टेक रहे हैं। हम मजाक बन रहे हैं। हम बस जाकर धर्म-आस्था-500 साल इसमें लगे हैं…टीवी की हेडलाइन बता रही हूँ मैं।”

उन्होंने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि साध्वियों के साक्षात्कार हो रहे हैं। आडवाणी को सब भूल गए हैं। ये राजनैतिक खेल है जिसे बीजेपी जीत चुकी है। अब भाजपा के फँक्शन में जाकर कहोगे हम भी हिंदू हैं। सिर्फ इसलिए कहीं हिंदू नाराज न हो जाए?

इस चर्चा में सबा नकवी ने गाली देने की इच्छा भी जाहिर की। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में कुछ गालियाँ होती हैं न वो देनी चाहिए, लेकिन वो आशुतोष के शो में नहीं देंगी। आशुतोष के ज्यादा सवाल करने पर सबा ने कहा कि कॉन्ग्रेस को कमलनाथ को तो राम मंदिर भेज ही देना चाहिए क्योंकि उन्होंने ज्यादा खुद खुद को हिंदू हिंदू कहा था। उन्हें खास निमंत्रण देकर बुलाया जाना चाहिए।

पत्रकार ने जब सबा नकवी से पूछा कि क्या अगर सोनिया गाँधी और खड़गे राम मंदिर के कार्यक्रम में नहीं जाते हैं तो उनका वोटर नाराज हो जाएगा। इस पर सबा ने कहा कि यूपी बिहार में तो वैसे भी अब कॉन्ग्रेस को ज्यादा वोट नहीं मिलता। वहाँ बीजेपी को फायदा मिलता है। सबा पत्रकार से पूछती हैं कि क्या राम के दृश्य टीवी पर दिखाना ही अब हमारा मुल्क है।

घर में घुस कर सगी बहनों से गैंगरेप: अकरम, शाहरुख, जैद और तसलीम ने दबोचा, कट्टा सटाकर किया सामूहिक बलात्कार फिर वीडियो कर दिया वायरल

हरियाणा के पलवल में दो सगी बहनों से गैंगरेप का मामला सामने आया है। यहाँ पीड़ित परिवार जंगल में रहता है, जो दूध का काम करता है। आरोप है कि अकरम, शाहरुख, जैद और तसलीम ने मौका पाकर घर में ही दोनों के साथ गैंगरेप को अंजाम दिया और वीडियो बना लिया। इस वीडियो के दम पर वो लड़कियों को ब्लैकमेल कर रहे थे और फिर से संबंध बनाने की जिद कर रहे थे। दोनों बहनों ने जब मना कर दिया, तो छोटी बहन का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया।

ये वारदात पलवल जिले के उटावड़ थाना क्षेत्र का है। जहाँ पुलिस ने पीड़िता की तहरीर पर 5 नामजद लोगों के खिलाफ गैंगरेप समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीड़ित परिवार जंगल में घर बनाकर रहता है। यहाँ पर शेर खान का परिवार उनके घर से दूध लेता था। पीड़िता का आरोप है कि शेर खान दे बेटे अकरम और शाहरुख उसकी छोटी बहन पर गलत नीयत रखते थे। इस बीच उनके पिता बीमार हो गए तो सभी परिजन उन्हें लेकर अस्पताल गए।

इसके बाद रात करीब 9 बजे अकरम, शाहरुख, जैद और तसलीम उर्फ तस्सी उनके खेतों पर आए और दोनों बहनों को दबोच लिया। इस दौरान शाहरुख ने देसी कट्टा कनपटी पर तान दिया और सभी लोगों ने गैंगरेप को अंजाम दिया और वीडियो भी बना लिया।

उन्होंने किसी से बताने पर जान से मारने की धमकी दी। कुछ समय बाद आरोपितों ने दोनों बहनों को फिर से अपने पास बुलाया, जब उन्होंने मना कर दिया, तो उन लोगों ने वीडियो वायरल कर दिए। इस वीडियो के बारे में जब पीड़ितों के भाई को पता चला तो उसने विरोध किया, जिसके बाद उसके साथ आरोपितों ने मारपीट की और मुँह बंद रखने की चेतावनी दी।

उटावड़ थाना के प्रभारी टेक सिंह ने बताया कि पीड़ित की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया गया है और मामले की जाँच की जा रही है। उन्होंने बताया कि गैंगरेप के साथ अन्य जरूरी धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है।

1040 रेड, 625 गिरफ्तार, ISIS नेटवर्क पर वार: 2023 में NIA ने तोड़ी आतंक की कमर, भारतीय दूतावासों के दुश्मन भी पहचाने

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने वर्ष 2023 में भारत विरोधी आतंकी गतिविधियाँ करने वालों की कमर तोड़ दी है। NIA ने 2023 में 1000 से अधिक जगहों पर छापेमारी की। इस्लामिक स्टेट (ISIS) के पुणे मॉड्यूल का खुलासा किया। 500 से अधिक आतंकियों के खिलाफ चार्जशीट लगाई। विदेशों में भारतीय हितों को प्रभावित करने वालों पर भी शिकंजा कसा।

31 दिसम्बर, 2023 को NIA ने एक प्रेस रिलीज जारी कर 2023 में की गई कार्रवाई के विषय में बताया है। NIA ने बताया है कि उसने 2022 में जहाँ 957 जगह पर छापेमारी की थी, वहीं 2023 में 1040 जगह छापेमारी की और आतंक के ठिकानों का खुलासा किया।

NIA ने 2023 में 625 भारत विरोधी लोगों को पकड़ा। इसमें से 65 आतंकी ISIS और 114 अन्य जिहादी गतिविधियों से जुड़े हुए थे। NIA ने वामपंथी नक्सल आतंक की कमर भी तोड़ी। 2023 में NIA ने 76 नक्सली पकड़े। 2023 में गिरफ्तार किए गए 74 आतंकियों को आरोप सिद्ध कर सलाखों के पीछे पहुँचाया। 513 के विरुद्ध चार्जशीट दायर की। इस मामले में NIA का प्रदर्शन 94.7% का रहा है, जो कि अन्य जाँच एजेंसियों के मुकाबले कहीं बेहतर है।

NIA ने सिर्फ आतंकियों को ही नहीं पकड़ा, बल्कि उनकी आर्थिक रूप से कमर भी तोड़ दी। NIA ने 2023 में ₹56 करोड़ से अधिक की सम्पत्ति अटैच की है। यह 2022 के मुकाबले पाँच गुना है। जाली नोट चलाने वालों पर भी NIA ने शिकंजा कसा है। साथ ही ड्रग्स पर भी एक्शन लिया है।

NIA ने 2023 में विदेशों में भारतीय दूतावासों पर हुए हमलों को गंभीरता से लेते हुए 43 संदिग्धों की पहचान की। 50 जगह छापेमारी की। इस मामले में 80 लोगों से भारत में भी पूछताछ हुई है। इसके जरिए NIA अमेरिका और ब्रिटेन में भारतीय दूतावासों पर हुए हमलों की साजिश को बेनकाब कर रही है।

NIA ने 2023 में अपना फोकस आतंकी और गैंगस्टर गठजोड़ पर लगाया है। ऐसे मामलों पर रोक लगाने के लिए NIA ने 2023 में 250 से अधिक जगह छापेमारी करके 55 लोगों के खिलाफ चार्जशीट लगाई है।

गौरतलब है कि NIA का गठन वर्ष 2008 के मुंबई हमलों के बाद आतंकी गतिविधियों को रोकने के लिए किया गया था। 2014 के बाद NIA को नई तकनीक और अधिक स्वतंत्रता के जरिए मजबूत किया गया है। NIA के गठन के बाद से देश में आतंकी घटनाओं में काफी कमी देखी गई है।

2024 की पहली सुबह इसरो ने भरी XPoSat उड़ान, पृथ्वी की कक्षा में सैटेलाइट स्थापित: न्यूट्रॉन तारों और ब्लैक होल का खोलेगा राज

भारतीय अन्तरिक्ष अनुसंधान संसथान (ISRO) ने 1 जनवरी, 2024 को सुबह 9:10 बजे अपने रिसर्च सैटेलाईट XPoSAT सैटेलाईट को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अन्तरिक्ष केंद्र से सफलतापूर्वक लॉन्च किया है। यह सैटेलाईट ISRO के PSLV C-58 रॉकेट से लॉन्च किया गया है। सैटेलाईट को सफलतापूर्वक उसकी कक्षा में स्थापित कर दिया गया है।

जानकारी के मुताबिक, इस सैटेलाईट को पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित किया गया है। यह सैटेलाईट अन्तरिक्ष में X किरणों के विषय में जानकारी इकट्ठा करेगा। इसके द्वारा भेजी गई जानकारी से ISRO, न्यूट्रॉन तारों और ब्लैक होल के बारे में शोध करेगा। इस तरह के शोध के लिए भेजा जाने वाला यह विश्व का दूसरा सैटेलाईट है।

इस सैटेलाईट में दो पेलोड लगे हैं। एक का नाम POLIX और दूसरे का नाम XSPECT है। यह मिशन 2017 में शुरू हुआ था, इसे लगभग ₹10 करोड़ की लागत में पूरा किया गया है। इस सैटेलाईट को रमन रिसर्च सेंटर ने डिजाइन किया है।

पोलिक्स 8-30 kEV एनर्जी बैंड के बीच की अन्तरिक्षीय ऊर्जा के शोध का काम करेगा। EV का मतलब इलेक्ट्रान वोल्ट होता है। K का मतलब हजार से है। यह किसी इलेक्ट्रान की ऊर्जा मापने का पैमाना है। पोलिक्स के लगभग पाँच वर्ष काम करने की आशा ISRO ने जताई है। इस दौरान यह 40 चमकीले खगोलीय स्रोतों से आने वाली ऊर्जा की जानकारी भेजेगा। यह मध्यम रेंज की खगोलीय X किरणों के शोध के लिए भेजा जाने वाला दुनिया का पहला पेलोड है।

XpoSAT सैटेलाईट, जिसे आज ISRO ने लाँच किया है
XpoSAT सैटेलाईट, जिसे आज ISRO ने लॉन्च किया है

वहीं XSPECT, दूसरे पेलोड POLIX की सहायता करेगा। यह विद्युत्चुम्बकीय किरणें छोड़ने वाले न्यूट्रॉन तारों, जिन्हें पल्सर कहा जाता है, उनके ऊपर शोध करेगा। यह इसके अलावा पोलिक्स से कम ऊर्जा बैंड के अन्य ऊर्जा स्रोतों पर शोध भी करेगा।

ISRO ने यह सैटेलाईट भेजने के लिए PSLV रॉकेट को चुना था। PSLV रॉकेट के DL वेरिएंट ने यह सैटेलाईट कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित किए हैं। इस रॉकेट की मुख्य बॉडी पर दो बूस्टर लगे होते हैं जो इसकी रेंज और स्पीड बढाने में मदद करते हैं। इनमें 12 टन ईंधन भरा होता है। यह लगभग 1250 किलो तक के सैटेलाईट ले जाने में सक्षम है। PSLV रॉकेट को सबसे पहले 1993 में सफलतापूर्वक लाँच किया गया था। चंद्रयान भी PSLV के ही जरिए लाँच किया गया था।

22 जनवरी को इबादत गाह भी सजाएँ, मस्जिद में 11 बार करें श्रीराम के नाम का जाप: मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के संरक्षक का अनुरोध, कहा- हमारे पूर्वज एक

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के मद्देनजर मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के संरक्षक और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य इन्द्रेश कुमार ने मस्जिदों में राम नाम का जाप करने की अपील की है। उन्होंने देश के चर्चों से भी यही करने को कहा है।

एक कार्यक्रम में बोलते हुए इन्द्रेश कुमार ने कहा, “मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने अपील की है और मैं दोहरा रहा हूँ कि दरगाहों, मस्जिदों, मकतबों और मदरसों में 11 बार ‘श्री राम जय राम जय जय राम’ का जाप किया जाए।” उन्होंने यह 22 जनवरी, 2023 वाले दिन करने को कहा है, जिस दिन अयोध्या धाम में श्रीराम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा होनी है।

उन्होंने यह बयान कार्यक्रम में एक किताब ‘राम मंदिर, राष्ट्र मंदिर – एक साझा विरासत’ के विमोचन के बाद दिया। उन्होंने कहा, “देश के 99% मुस्लिम और गैर हिन्दुओं का देश से ही नाता है। हमारे पूर्वज एक हैं। इन लोगों ने केवल धर्म ही बदला है देश नहीं।” इन्द्रेश कुमार ने कहा, “हमारे पुरखे भी एक ही थे, हमारी शक्ल सूरत एक जैसी ही है, हमारी पहचान सम्बन्धी आकांक्षाएँ एक समान हैं। हम सभी का भारत से ही संबंध है, हमारा विदेशियों से कोई लेना देना नहीं है।”

इन्द्रेश कुमार ने कहा, “मैं गुरुद्वारों, चर्चों और सभी धार्मिक स्थानों से अपील करता हूँ कि वह 22 जनवरी, 2023 को 11-2 बजे के बीच अपने इबादत गाह और प्रार्थना कक्षों को भव्य रूप से सजाएँ और श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम को टीवी पर देखें। उन्होंने कहा, “भारत और दुनिया भर में शांति, सद्भाव और भाईचारे के लिए प्रार्थना करें।”

गौरतलब है कि 22 जनवरी, 2023 को अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम होगा। इस कार्यक्रम की तैयारियाँ जोरों पर हैं। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत लगभग 7000 लोग शामिल होंगे।

इसी कार्यक्रम में केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहा, “मर्यादा पुरूषोत्तम राम हमारी आवश्यकता हैं, ताकि हम अपने आने वाले नस्लों के चरित्र का निर्माण कर सकें।” उन्होंने आगे कहा, “यह महत्वपूर्ण नहीं है कि मेरा जन्म किस घर में हुआ। महत्वपूर्ण यह है कि मैं क्या करता हूँ। भारतीय संस्कृति के अनुसार और इस्लाम के अनुसार भी कर्म ही प्रधान है।”

BHU गैंगरेप में गिरफ्तार 3 लोगों को BJP ने किया निष्कासित, योगी सरकार के मंत्री बोले- कहीं का भी हो आरोपित, होगी सख्त कार्रवाई

आईआईटी बीएचयू में 2 माह पहले हुए गैंगरेप मामले में यूपी पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए तीन आरोपितों का भारतीय जनता पार्टी से कनेक्शन मिलने के बाद पार्टी ने तुरंत उन्हें निष्कासित किया है।

वाराणसी भाजपा जिलाध्यक्ष हंसराज विश्वकर्मा ने इस मामले पर सामने आकर कहा कि वो मामले से बिलकुल पल्ला नहीं झाड़ रहे। आरोपित भाजपा से थे अगर, तो उन्हें निष्कासित कर दिया गया है। आगे पार्टी के निर्देशानुसार कार्रवाई होगी।

बता दें कि 1 नवंबर 2023 को हुई इस घटना के बाद पुलिस ने आरोपितों को कल 31 दिसंबर को गिरफ्तार किया था। इसके बाद इन्हें कोर्ट में पेश किया गया जहाँ से इन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

पुलिस को इनके पास से बरामद बुलेट बाइक भी मिली। जानकारी के अनुसार, इनके नाम कुणाल पांडेय, अभिषेक चौहान और सक्षम पटेल हैं। इस गिरफ्तारी पर यूपी सरकार में स्टांप मंत्री रविंद्र जायसवाल ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी।

उन्होंने विपक्ष द्वारा उठाए सवालों पर संज्ञान लेते हुए साफ कहा कि आरोपित कोई हो। उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा, “आरोपित कहीं का भी हो, कहीं से भी आया हो, बीजेपी की शरण लिया हो, अगर दोषी है तो उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

गौरतलब है कि आईआईटी बीएचयू की एक छात्रा अपने क्लासमेट के साथ 1 नवंबर, 2023 की रात में हॉस्टल से बाहर निकलकर टहल रही थी। इसी दौरान उसके साथ दरिंदगी की बात सामने आई। इस मामले में मजिस्ट्रेट को दिए बयान में तीनों आरोपितों ने बंदूक से पहले डरा धमका कर छात्रा को निर्वस्त्र किया। उसके बाद आरोपितों ने छात्रा का वीडियो बनाया और उसके बाद तीनों ने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया था। पीड़िता ने तीनों आरोपितों के हुलिया के बारे में FIR में विस्तार से बताया था।

इस मामले में आईपीसी की धारा 354(ख), 506 और 66 आईटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज हुआ था, जिसमें बाद में गैंगरेप (IPC 376-D) और इलेक्ट्रॉनिक साधनों के जरिए यौन उत्पीड़न (IPC 509) जैसी धाराएँ बढ़ा दी गई थी। ये दोनों धाराएँ पीड़िता के मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज कराए गए बयान के बाद बढ़ाई गई थी।

तीनों आरोपितों की गिरफ्तारी करने के लिए काशी हिंदू विश्वविद्यालय के छात्रों द्वारा धरना प्रदर्शन किया गया था। इन प्रदर्शनों में 5 हजार से अधिक लोग शामिल हुए थे। प्रदर्शनकारियों में बीएचयू के छात्रों के साथ ही स्थानीय लोग भी शामिल हो गए थे। सबने इन पर कार्रवाई की माँग की थी।