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अभी हुए लोकसभा चुनाव तो BJP को कितनी सीटें? – देखें ताज़ा ओपिनियन पोल के आँकड़े, अभिनेता नाना पाटेकर बोले – शानदार काम हुआ है, पौने 400 सीटें आएँगी

मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में भी I.N.D.I. गठबंधन नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी और NDA के आगे फेल होती नजर आ रही है। लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर एबीपी न्यूज-सी वोटर की ओर से किए गए पहले ओपिनियन पोल में एनडीए को तीसरी बार प्रचंड बहुमत मिलता दिख रहा है। इस ओपिनियन पोल की मानें तो एनडीए 335 सीटों तक पर जीत हासिल करती दिख रही है। हालाँकि, लोकसभा चुनाव में हर बार एनडीए ओपिनियन पोल्स से कहीं बेहतरीन जीत दर्ज करती रही है।

एबीपी-सी वोटर ओपिनियन पोल के मुताबिक, अगर आज चुनाव होते हैं, तब भी लोकसभा की कुल 543 सीटों में से एनडीए 295 से लेकर 335 सीटों पर जीत दर्ज करने की हालत में है। वहीं, I.N.D.I. एलायंस आधे से भी कम सीटों पर सिमटती दिख रही है। इंडी एलायंस को अधिकतम 165 से लेकर 205 सीटों पर ही जीत पाने का अनुमान है। वहीं, अन्य की बात करें तो 30-35 सीटों पर अन्य दल भी जा सकते हैं, जिसमें बीजू जनता दल जैसी पार्टियाँ हैं।

बीजू जनता दल केंद्र में न तो एनडीए के साथ है और न ही इंडी गठबंधन के, लेकिन किसी भी महत्वपूर्ण मौके पर वोटिंग के समय वो एनडीए की तरफ खड़ी दिखती है।

देश में वोटिंग के पैटर्न को समझने के लिए अगर उसे चार हिस्सों में बाँट दिया जाए, तो भी उत्तर, पूर्व और पश्चिम जोन में बीजेपी और एनडीए को बंपर जीत मिलती दिख रही है। सिर्फ दक्षिण जोन में बीजेपी थोड़ी कमजोर दिखती है, लेकिन राज्यों का आँकड़ा जोड़ा जाए तो कर्नाटक में 52 प्रतिशत वोटों के साथ बीजेपी यहाँ भी शीर्ष पर दिखती है। उत्तर जोर में तो बीजेपी 180 सीटों में से 160 तक सीटों पर जीत दर्ज करती दिख रही है। दक्षिण जोन में ये आँकड़ा 132 सीटों में से 20-30 का ही है, लेकिन पूर्वी जोन में 153 सीटों में से 80-90 सीटों पर बीजेपी और एनडीए आगे दिखती हैं, तो पश्चिम जोन में 89 में से 45-55 सीटों पर जीत दर्ज कर एनडीए बहुमत से बहुत आगे निकलती दिख रही है।

इस बीच, बॉलीवुड एक्टर नाना पाटेकर ने केंद्र सरकार के काम को बेहद शानदार बताया। उन्होंने उम्मीद जताई कि बहुत शानदार तरीके से बीजेपी जीतेगी। नाना पाटेकर ने विकल्प न होने की भी बात कही।

एक पत्रकार ने उनसे जब पूछा गया कि अब 2024 लोकसभा चुनाव है और चुनाव को लेकर क्या देखते हैं? इस सवाल पर नाना पाटेकर ने भी अपनी राय रखी है। उन्हें बिना लाग लपेट के साफ बात कहने के लिए जाना जाता रहा है।

नाना पाटेकर ने सीधे सपाट शब्दों में कहा, “देख लेना, इतने बड़े तरीके से बीजेपी आ जाएगी। अब कौन सी (सीटें) आती है, क्या आते हैं, वो नहीं। लेकिन तुम्हारे पास कोई विकल्प है नहीं है, और इतना बेहतरीन काम हुआ है। साढ़े तीन सौ, पौने चार सौ तक जाएगा। मुझे कोई ताज्जुब नहीं होगा।”

दें कि नरेंद्र मोदी की अगुवाई में साल 2014 और साल 2019 के आम चुनाव यानी लोकसभा चुनाव में बीजेपी और एनडीए का प्रदर्शन बेहद शानदार रहा है। बीजेपी ने अकेले दम पर दोनों ही बार बहुमत के आँकड़े को पार किया और साथी पार्टियों के साथ प्रचंड बहुमत की सरकार बनाई। साल 2019 में तो बीजेपी ने अब तक का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए अकेले ही तीन सौ का आँकड़ा पार करते हुए 303 सीटों पर जीत हासिल की थी। इस बार के ओपिनियन पोल भी साफ साफ बता रहे हैं कि नरेंद्र मोदी की अगुवाई में बीजेपी और एनडीए स्पष्ट तरीके से प्रचंड बहुमत के साथ जीत की हैट्रिक लगाने जा रहे हैं।

सलाखों के पीछे भी चाहिए बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ! जेल में मेडिकल केयर को लेकर HC के आदेश पर समिति गठित, कैदियों के चिकित्सा अधिकार और चुनौतियाँ

जेल प्रणाली के भीतर स्वास्थ्य देखभाल के गंभीर मुद्दे को संबोधित करने के लिए एक अभूतपूर्व कदम में, दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक विशेष समिति का गठन करके सक्रिय रुख अपनाया है। इस समिति को जेल में बंद व्यक्तियों के लिए चिकित्सा सुविधाओं में सुधार के उपायों का मूल्यांकन और सिफारिश करने की कठिन जिम्मेदारी सौंपी गई है।

जेल स्वास्थ्य सेवा की स्थिति पर हाल ही में हुई सुनवाई से निकला यह निर्णय, कैदियों के कल्याण और अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए न्यायपालिका की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। समिति, जिसमें कानूनी विशेषज्ञ, चिकित्सा पेशेवर और मानवाधिकार संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हैं, का उद्देश्य दिल्ली की सुधार सुविधाओं के भीतर मौजूदा स्वास्थ्य देखभाल प्रावधानों की व्यापक समीक्षा करना है।

दिल्ली की जेलों में स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार के तरीके सुझाने के लिए दिल्ली स्वास्थ्य सचिव के अधीन यह विशेष समिति गठित की है। अमनदीप सिंह ढल बनाम प्रवर्तन निदेशालय वाले मामले में ये फैसला सुनाया गया हाउ। अदालत ने दिल्ली सरकार के गृह सचिव और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सचिव को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि जेल के कैदियों की स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताएँ पूरी की जाएँ और जेलों में बुनियादी ढाँचा बनाए रखा जाए।

महानिदेशक (जेल), दिल्ली जेल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी, जिला अदालतों के दो वरिष्ठ जेल विजिटिंग न्यायाधीश, दिल्ली राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण के सचिव के साथ-साथ वकील संजय दीवान और गायत्री पुरी भी समिति के सदस्य होंगे।

उपरोक्त प्रतिबद्ध इस अदालत को एक महीने की अवधि के भीतर जेलों में स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं में सुधार और सभी कैदियों को समान स्वास्थ्य देखभाल को बढ़ावा देने के तरीकों के संबंध में सुझाव देंगे। समिति अदालत को यह भी विशेष रूप से सूचित करेगी कि क्या जेल अस्पताल में आपातकालीन स्थितियों जैसे कार्डियक अरेस्ट, रक्तस्राव आदि से निपटने के लिए सुविधाएँ उपलब्ध हैं, क्योंकि ऐसी स्थिति में पहले कुछ मिनट किसी व्यक्ति की जान बचाने के लिए महत्वपूर्ण होते हैं।

समिति का एक प्राथमिक उद्देश्य कैदियों के लिए उपलब्ध चिकित्सा बुनियादी ढाँचे, स्टाफिंग स्तर और स्वास्थ्य सेवाओं की समग्र गुणवत्ता की पर्याप्तता का आकलन करना भी है। इस पहल से जेल प्रणाली के भीतर चिकित्सा देखभाल की पहुँच और मानकों के बारे में लंबे समय से चली आ रही चिंताओं का समाधान होने की उम्मीद है।

समिति को स्वास्थ्य सेवा वितरण को बढ़ाने के लिए चिकित्सा प्रौद्योगिकी में प्रगति का लाभ उठाते हुए नवीन समाधान तलाशने का भी काम सौंपा गया है। इसमें दूरस्थ परामर्श की सुविधा के लिए टेलीमेडिसिन कार्यक्रमों की व्यवहार्यता की जाँच करना शामिल है, जिससे कैदियों को बाहरी चिकित्सा सुविधाओं तक पहुँचाने से जुड़ी तार्किक चुनौतियों को कम किया जा सके। कानूनी विशेषज्ञों का सुझाव है कि ऐसी समिति का गठन स्वास्थ्य देखभाल के संवैधानिक अधिकार की मान्यता का प्रतीक है, यहाँ तक ​​कि हिरासत में मौजूद लोगों के लिए भी।

यह कदम अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के अनुरूप है जो सभी व्यक्तियों को उनकी कानूनी स्थिति की परवाह किए बिना पर्याप्त चिकित्सा देखभाल प्रदान करने के महत्व पर जोर देता है। जैसे ही समिति ने अपना काम शुरू किया है, परिवर्तनकारी सिफारिशों के लिए प्रत्याशा अधिक है जो संभावित रूप से दिल्ली में जेल स्वास्थ्य सेवा के परिदृश्य को नया आकार दे सकती है।

यह बदलाव न केवल नैतिक विचारों से प्रेरित है बल्कि कानूनी आदेशों से भी प्रेरित है जो कैदियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के दायित्व को रेखांकित करता है। प्रमुख पहलों में जेलों के भीतर व्यापक चिकित्सा सुविधाओं की स्थापना शामिल है, जो विभिन्न स्वास्थ्य मुद्दों से निपटने के लिए सुसज्जित हैं। ऑन-साइट स्वास्थ्य देखभाल की दिशा में इस कदम का उद्देश्य उपचार में देरी को कम करना और समग्र पहुँच में वृद्धि करना है। इसके अतिरिक्त, यह जेल में बंद व्यक्तियों के सामने आने वाली अनूठी स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों, जैसे संचारी रोगों और मानसिक स्वास्थ्य स्थितियों, का समाधान करना चाहता है। नवोन्मेषी टेलीमेडिसिन कार्यक्रम भी शुरू किए गए हैं, जो कैदियों को दूर से ही स्वास्थ्य पेशेवरों से परामर्श करने में सक्षम बनाते हैं।

यह प्रौद्योगिकी-संचालित दृष्टिकोण न केवल स्वास्थ्य देखभाल वितरण की दक्षता में सुधार करता है बल्कि कैदियों को बाहरी चिकित्सा सुविधाओं तक ले जाने से जुड़े जोखिमों को भी कम करता है। महत्वपूर्ण रूप से, ये प्रयास चिकित्सा गोपनीयता और गोपनीयता बनाए रखने की प्रतिबद्धता के साथ हैं, यह सुनिश्चित करते हुए कि कैदियों को सामान्य आबादी के व्यक्तियों के समान गोपनीयता प्राप्त हो।

जेल की सेटिंग के भीतर डॉक्टर-रोगी की गोपनीयता की पवित्रता को बनाए रखने के उपायों के साथ, सुरक्षा चिंताओं और चिकित्सा अधिकारों के बीच संतुलन बनाना एक प्राथमिकता बनी हुई है। हालाँकि, प्रगति हो रही है, चुनौतियाँ बनी हुई हैं। अत्यधिक भीड़-भाड़ वाली सुविधाएँ और सीमित संसाधन स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव डाल सकते हैं, जिससे संभावित रूप से देखभाल की गुणवत्ता से समझौता हो सकता है।

वकालत समूह इन मुद्दों के समाधान के लिए चल रहे सुधारों के महत्व पर जोर देना जारी रखते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि कैदियों के चिकित्सा अधिकारों को न केवल मान्यता दी जाए बल्कि सक्रिय रूप से संरक्षित किया जाए। अधिक न्यायसंगत और मानवीय सुधारात्मक प्रणाली की खोज में, चिकित्सा अधिकारों पर ध्यान एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में खड़ा है। जैसे-जैसे जेल स्वास्थ्य देखभाल के बारे में बातचीत विकसित होती है, व्यापक लक्ष्य स्पष्ट रहता है: प्रत्येक व्यक्ति की गरिमा और भलाई को बनाए रखना, चाहे उनकी कैद की स्थिति कुछ भी हो।

मानवाधिकार अधिवक्ताओं और जेल सुधार संगठनों सहित हितधारक, घटनाक्रम की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं और आशावाद व्यक्त कर रहे हैं कि यह पहल व्यापक प्रणालीगत सुधारों के लिए उत्प्रेरक के रूप में काम करेगी। दिल्ली उच्च न्यायालय की निर्णायक कार्रवाई न केवल कानून की व्याख्या करने और उसे बनाए रखने में न्यायपालिका की भूमिका को रेखांकित करती है, बल्कि न्याय प्रणाली के भीतर व्यक्तियों के जीवन और कल्याण को प्रभावित करने वाले मुद्दों से सक्रिय रूप से जुड़ने में भी है। समिति के निष्कर्षों और उसके बाद की सिफारिशों का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है, इस उम्मीद के साथ कि वे दिल्ली में कैद आबादी के लिए बेहतर स्वास्थ्य देखभाल के एक नए युग की शुरुआत करेंगे।

‘मैं गलत समय में खेलती थी’: पूर्व एथलीट अंजू बॉबी जॉर्ज ने सुनाया कॉन्ग्रेस काल का कड़वा अनुभव, बोलीं – PM मोदी की अगुवाई में भारत बना खेल महाशक्ति

भारत की स्टार एथलीट रही अंजू बॉबी जॉर्ज ने पीएम मोदी की जमकर तारीफ की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में भारत खेलों की महत्वपूर्ण शक्ति बन गया है। जॉर्ज ने कहा कि हमारे समय में खिलाड़ी ही कम होते थे, अब के जैसा माहौल भी नहीं था। उन्होंने कहा कि पहले का माहौल खेलों के लिए बेहतर नहीं था। इतना प्रोत्साहन नहीं मिलता था। इसे कॉन्ग्रेस पर हमले की तरह देखा जा रहा है।

बता दें कि पीएम मोदी ने क्रिसमस के मौके पर ईसाई समुदाय द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया था। इसी कार्यक्रम में स्टार एथलीट रही अजूं बॉबी जॉर्ज भी मौजूद थीं। उन्होंने कहा, “एक खिलाड़ी के तौर पर 25 सालों से सबकुछ देख रही हूँ। पहले की तुलना अब काफी बदलाव देख रही हूँ। जब 20 साल पहले मैंने भारत के लिए विश्व स्तर पर पहला पदक जीता था तब मेरा विभाग मुझे पदोन्नति नहीं दे रहा था। वहाँ सब कह रहे थे कि हमारे यहाँ ऐसा नहीं होता है। उसके बाद जब नीरज चोपड़ा ने पदक जीता तो मैंने काफी बदलाव देखें। हमने, आपने और पूरे भारत ने जिस तरह जश्न मनाया, उससे मुझे काफी जलन हुई। मुझे लगता है कि मैं खेलों में गलत समय पर थी।”

पीएम मोदी की जमकर तारीफ

अंजू बॉबी जॉर्ज ने कहा, “खेलों इंडिया, फिट इंडिया के जरिए खेलों की बात अब सब जगह हो रही है। भारत अब फिटनेस को अपना रहा है और खेलों में आगे बढ़ रहा है। हमारे खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। हमारे समय एक या दो एथलीट होते थे। अब काफी खिलाड़ी हैं। यह आपके नेतृत्व के कारण हुआ है। महिला सशक्तिकरण अब सिर्फ शब्द नहीं है। भारत की लड़कियाँ सपना देख रही हैं। उन्हें पता है कि उनका सपना पूरा होगा। इस बात से काफी खुशी है कि हम 2036 ओलंपिक की मेजबानी के लिए तैयार हैं। ओलंपिक के लिए हमने तैयारियाँ शुरू कर दी हैं और उसके लिए बैठके हो रही हैं।”

बता दें कि अंजू बॉबी जॉर्ज ने साल 2003 में विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता था। ऐसा करने वाली वो पहली एथलीट बनीं थी। उस समय खिलाड़ी जो कुछ भी बन रहे थे, अपने दम पर। उनका इशारा इसी तरफ था। अंजू को कर्णम मल्लेश्वरी की श्रेणी में रखा जाता है, जिन्होंने अपने दम पर इतिहास रचा था।

जिन्हें ‘रैट माइनर्स’ बता कर मिले अरविंद केजरीवाल और लूटी वाहवाही, वो निकले फर्जी: 41 मजदूरों की जान बचाने वालों ने कहा – हमें खुद सोशल मीडिया से पता चला

दिल्ली के मुख्यमंत्री और सत्ताधारी पार्टी ‘आम आदमी पार्टी’ (AAP) ने इस माह की शुरुआत में इस बात का दावा किया था कि अरविंद केजरीवाल ने सिल्क्यारा सुरंग हादसे में फँसे 41 मजदूरों को निकालने वाले रैट माइनर्स से मुलाकात की है। अब इस दावे पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि सुरंग हादसे में फँस लोगों के लिए जिन 12 रैट माइनर्स ने मेहनत की थी, उन्होंने कहा है कि अरविंद केजरीवाल ने उनमें से एक से भी मुलाकात नहीं की है। उनका दावा फर्जी है। रैट माइनर वकील हसन ने तो अरविंद केजरीवाल के सभी दावों चाहें वो राजनीतिक हो या सरकारी काम के, सभी पर संदेह की उंगली उठा दी और कहा कि अब उन्हें अरविंद केजरीवाल के किसी काम पर भरोसा नहीं है।

आजतक से बातचीत में वकील हसन ने कहा, “हम में से किसी भी व्यक्ति से अरविंद केजरीवाल ने मुलाकात नहीं की है।” खजूरी खास इलाके में रहने वाले वकील हसन ने अरविंद केजरीवाल से बेहतर हमारे स्थानीय सांसद मनोज तिवारी जी ने दूसरे ही दिन हम सबसे मुलाकात की थी और हमारा हौसला बढ़ाया था।

वकील हसन ने कहा कि सबसे पहले मैंने सोशल मीडिया पर अरविंद केजरीवाल के रैट माइनर्स से मिलने की खबर देखी, हमें लगा कि ये कोई फेक न्यूज होगी। फिर ये खबर हर तरफ फैलने लगी, जो कि पूरी तरह से गलत थी। हमसे न तो दिल्ली जलबोर्ड और न ही अरविंद केजरीवाल के किसी भी व्यक्ति ने मुलाकात की। मैं इस बात से आहत हूंँ।

वकील हसन से जब ये कहा गया कि उन्होंने उत्तराखण्ड सरकार की ओर से घोषित किए गए 50 हजार की राशि को क्यों ठुकराया? उन्होंने कहा कि अंदर फँसे लोगों को 1-1 लाख दिए गए, हमें 50 हजार ही क्यों? इस मामले में उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हमसे कहा कि वो जल्द ही कोई अच्छा समाधान निकालेंगे।

बता दें कि शुक्रवार (1 दिसंबर, 2023) को दिल्ली की मंत्री आतिशी ने कहा था कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने उत्तराखण्ड के सिल्क्यारा टनल मामले में 41 मजदूरों की जान बचाने वाले रैट माइनर्स से मुलाकात की है। उन्होंने बताया था कि इस दौरान सीएम केजरीवाल ने रैट-होल माइनर्स की टीम को सम्मानित भी किया। उन्होंने दिल्ली और देश के लोगों की तरफ से पूरी टीम को धन्यवाद कहा। रैट-होल माइनर्स की टीम ने इस मौके पर सुरंग हादसे में फंसे मजदूरों को किस तरह निकाला गया, इसका पूरा वाकया सुनाया। हालाँकि अब इस दावे को ओरिजिनल रैट माइनर्स ने खारिज कर दिया है।

‘सनातन धर्म और हिंदीभाषियों के खिलाफ बयान पर राहुल गाँधी चुप क्यों?’: पूर्व मुख्यमंत्री KCR की बेटी ने उठाए सवाल, कहा – PR स्टंट थी ‘भारत जोड़ो यात्रा’

तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी DMK सांसद दयानिधि मारन ने विवादस्पद टिप्पणी करते हुए उत्तर भारतीयों को शौचालय साफ़ करने से जोड़ा, जिसके बाद बवाल मचा हुआ है। अब इसे लेकर भारत राष्ट्र समिति (BRS) नेता K कविता ने राहुल गाँधी पर निशाना साधा है।

उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी की शुरू की गई ‘भारत जोड़ो यात्रा’ एक पीआर स्टंट जैसी थी। इसके साथ ही बीआरएस महिला नेत्री ने डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन सनातन धर्म पर की गई टिप्पणियों पर राहुल गाँधी की चुप्पी पर भी सवाल उठाया।

बताते चलें कि कॉन्ग्रेस और डीएमके विपक्षी इंडिया गुट में सहयोगी हैं। बीजेपी को हराने के लिए एकजुट हुआ ये गठबंधन खुद ही बिखरा हुआ नजर आ रहा है।

‘कॉन्ग्रेस पार्टी का डीएनए – जो बोलते करते नहीं’

बीआरएस नेता के कविता ने कहा कि जब सनातन धर्म का अपमान किया जाता है कई करोड़ लोगों आहत होते हैं, पूरे देश में कई करोड़ लोगों की भावनाएँ आहत होती वो (राहुल गाँधी) कभी प्रतिक्रिया नहीं देते। वो इस देश के लोगों के लिए जवाबदेह हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री KCR की बेटी ने आगे कहा, “मैं उन्हें चुनाव गाँधी कहती हूँ क्योंकि वो केवल चुनावों के वक्त काम करते हैं। एक पार्टी के, एक नेता के तौर पर उनकी भारत जोड़ो यात्रा पीआर जैसी है। कॉन्ग्रेस पार्टी का डीएनए ऐसा है कि वो जो बोलते हैं वो करते नहीं।”

बीआरएस नेता के कविता ने यहाँ तक कह डाला कि अब देश की जनता को फैसला लेना है कि उन्हें कॉन्ग्रेस पार्टी का साथ देना है या नहीं। देश के कई पार्टियों के नेता के आपत्तिजनक बयान आए हैं और ये सब कुछ खास लोगों के वोट हासिल करना चाहते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि वो इस तरह के बयान देते हैं जिनसे देश ऐसे बँट जाए जिसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते हैं। जब पार्टियाँ सनातन धर्म के बारे में बात करती हैं, जब पार्टियाँ कुछ राज्यों को ‘गौमूत्र राज्य’ कहती हैं। जब वो मजदूरों की बेइज्जती करते हैं जो टॉयलेट आदि में काम करते हैं। इस तरह के बयानों को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।

बीआरएस नेता के कविता ने कहा कि जब राहुल गाँधी भारत जोड़ो यात्रा की बात करते हैं वो देश को एक करने की बात करते हैं, लेकिन काश उन्होंने शुरू से ही ऐसे बयानों को संजीदगी से लिया होता जब सनातन धर्म की बेइज्जती की जा रही थी। राहुल गाँधी ने कभी प्रतिक्रिया नहीं दी अगर उन्होंने उस वक्त इस पर प्रतिक्रिया दी होती तो वो ऐसा बयान नहीं देते।

उन्होंने अपनी बात आगे बढ़ाते हुए कहा कि जब इतने बड़े गठबंधन की पार्टी इस तरह के बयान दे रही है और इस गठबंधन के मुखिया राहुल गाँधी जो पूरा नेतृत्व कर रहे हैं वो कुछ नहीं बोल रहे हैं। वो इस देश के लोगों के लिए जवाबदेह हैं। उन्होंने कहा, “मैं उनसे अनुरोध करती हूँ कि लोकसभा चुनाव नज़दीक हैं आप लोगों को जवाब देना क्यों नहीं शुरू करते। कम से कम आपको लोगों को बताना चाहिए कि आप हिंदुओं के लिए अशिष्ट नहीं है। लोगों को बताइए कि आप मजदूरों के लिए अपमान नहीं करते।”

हिंदी पर क्या कहा था डीएमके सांसद दयानिधि मारन ने

दरअसल डीएमके सांसद दयानिधि मारन द्वारा हिंदीभाषियों को लेकर दिए गए आपत्तिजनक बयान का एक वीडियो क्लिप इन दिनों खास वायरल है। ये क्लिप साल 2019 के एक कार्यक्रम की बताई जा रही है।

डीएमके सांसद दयानिधि मारन इस कार्यक्रम के दौरान कहा था कि उत्तर प्रदेश और बिहार से जो हिंदी भाषी तमिलनाडु आते हैं। वो वहाँ निर्माण कार्य करते हैं या सड़कों और शौचालयों की सफाई करते हैं। इस क्लिप के सामने आने से खासा विवाद पैदा हो गया है।

पुरानी क्लिप में मारन ने अंग्रेजी शिक्षा के महत्व पर जोर दिया था। उन्होंने केवल अंग्रेजी और केवल हिंदी सीखने वाले लोगों की तुलना करते हुए कहा है कि जिन्होंने केवल अंग्रेजी सीखी वो इज्जतदार आईटी क्षेत्र में चले गए और जिन्होंने केवल हिंदी सीखी थी वो केवल छोटी नौकरियाँ ही पा सके।

देश में कोरोना के एक्टिव मामले 4000 पार, 77% अकेले केरल से: स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कितना खतरनाक है नया वैरिएंट JN.1

देश के कोरोना के एक्टिव मामले 4000 से अधिक हो गए हैं। इनमें 77% से अधिक मामले केरल में हैं। इसके अलावा कोरोना के नए वैरिएंट जेएन.1 के 63 नए मामले भी सामने आए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने जेएन.1 को अब ‘वैरिएंट ऑफ़ इंटरेस्ट’ घोषित कर दिया है।

देश में कोरोना के मामलों को बताने वाली वेबसाइट के अनुसार, देश में वर्तमान में 4054 मामले हैं। इनमें से 3100 से अधिक मामले अकेले केरल में हैं। रविवार को 600 से अधिक नए मामले सामने आए। इसके नए वैरिएंट के मामलों में भी बढ़ोतरी देखी गई है। नए वैरिएंट के 34 मामले गोवा से सामने आए हैं। इसके अलावा 9 मामले महाराष्ट्र, 8 मामले कर्नाटक, 6 मामले केरल से सामने आए हैं।

केरल में एक मौत भी कोरोना के कारण हो गई है। हालाँकि नए वेरिएंट को लेकर ख़ास चिंता की आवश्यकता नहीं है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि नया वैरिएंट विशेष खतरनाक नहीं है और इससे प्रभावित रोगी घर पर पर ही ठीक हो रहे हैं। विशेषज्ञों कहना है कि इस नए वेरिएंट के लिए विशेष दवा की आवश्यकता नहीं है बल्कि इसके ऊपर कोरोना की वैक्सीन प्रभावी है।

नए वैरिएंट से सामने आया खतरा भी तुलनात्मक रूप से कम है। भारत में कोविड-19 के उप स्वरूप जेएन.1 का पहला मामला 8 दिसंबर को केरल में सामने आया था। हालाँकि, पीड़ित महिला रोगी अब पूरी तरह से ठीक हो चुकी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, मेडिकली देखा जाए तो इनमें से अधिकांश केस हल्के लक्षण के होते हैं और उनमें से अधिकतर किसी बड़ी दवा के बगैर ही ठीक हो जाते हैं, हालाँकि इसे लेकर सतर्कता बरतनी जरूरत है।

जानकारी के मुताबिक भारतीय SARS-CoV-2 जीनोमिक्स कंसोर्टियम (INSACOG) ने कोविड केसों की निगरानी के तहत केरल में कोविड के इस नए सब वैरिएंट JN.1 का पता लगाया था। भारतीय SARS-CoV-2 जीनोमिक्स कंसोर्टियम (INSACOG) जीनोमिक प्रयोगशालाओं का एक नेटवर्क है। ये जीनोमिक तरीके से देश में कोरोनो वायरस केसों पर नजर रख रहा है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) इस कॉन्सॉर्टियम का एक हिस्सा है।

कहाँ से आया कोरोना का सब वैरिएंट जेएन.1

कोविड-19 का JN.1 सब वैरिएंट पहली बार लक्ज़मबर्ग में पहचाना गया था और तब से यह कई देशों में फैल गया है। यह पिरोला वेरिएंट (BA.2.86) का ही अगला रूप है। इसका पहला केस पहली बार सितंबर 2023 में अमेरिका में सामने आया था।

चीन में 15 दिसंबर,2023 को इस खास सबवैरिएंट के 7 मामले मिले थे। इस JN.1 वैरिएंट के केस अब तक संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, आइसलैंड, स्पेन, पुर्तगाल और नीदरलैंड जैसे देशों में मिले हैं। भारत की बात करें तो सिंगापुर हवाई अड्डे पर हुई जाँच में कुछ भारतीयों में JN.1 सब वैरिएंट पाया गया था।

‘जय हिन्द’ के उद्घोष पर भड़के 3 शिक्षकों ने अपने साथी टीचर को ही पीटा: स्कूल में मच गया हंगामा, छात्रा घायल

देवरिया का एक स्कूल शिक्षकों के बीच जूतमपैजार का अड्डा बन गया। यहाँ ‘जय हिंद’ कहने को लेकर शुरू हुआ विवाद स्कूल में ही भयानक मारपीट की स्थिति तक पहुँच गई। इसमें तीन शिक्षकों ने मिलकर एक शिक्षक को जमकर पीटा। इस दौरान बच्चों में भगदड़ मच गई, जिसमें एक छात्रा गंभीर रूप से घायल हो गई। वहीं, पूरे स्कूल में अराजकता की स्थिति बनी रही।

ये मामला लार विकास खंड के कंपोजिट विद्यालय धहरहा का है। यहाँ शनिवार (23 दिसंबर, 2023) को प्रार्थना सभा के दौरान ‘जय हिंद’ बोलने को लेकर शिक्षकों के बीच लड़ाई हो गई। अफरातफरी की वजह से छात्र-छात्राएँ स्कूल से भागने लगे। इसमें एक छात्रा घायल भी हो गई।

इस मामले में बीईओ की रिपोर्ट पर बीएसए ने चार सहायक शिक्षकों को निलंबित कर दिया है और उन्हें दूसरे स्कूल से संबद्ध कर दिया है। इसके साथ ही प्रभारी प्रधानाध्यापक रामविलास और एक सहायक शिक्षक को कड़ी चेतावनी दी गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस स्कूल में 218 बच्चे पढ़ते हैं। इसके लिए अरुण कुमार सिंह, धर्मेंद्र कुमार वर्मा, अनय कुमार, संजय कुमार समेत 9 शिक्षकों की तैनाती है। छात्रों ने शिक्षा विभाग की जाँच के दौरान बताया कि अरुण कुमार सिंह ही छात्रों से प्रार्थना और पीटी जैसी चीजें कराते हैं। वहीं बाकी के तीन शिक्षक इन सब चीजों से दूर रहते हैं। यहाँ तक कि राष्ट्रगान के समय भी खड़े नहीं होते।

बच्चों का कहना है कि ये सारा विवाद प्रार्थना के समय ‘जय हिंद’ की उद्घोषणा से जुड़ा है, जो बाकी के तीन शिक्षकों को पसंद नहीं आता। छात्रों का कहना है कि शिक्षक अरुण कुमार सिंह ने प्रार्थना सभा के बाद जब ‘जय हिंद’ का नारा जब लगवाया, तभी तीनों बौखला गए और उनकी पिटाई शुरू कर दी। छात्रों ने प्रभारी प्रधानाध्यापक पर हस्तक्षेप न करने का आरोप भी लगाया।

बीएसए शालिनी ने कहा कि ऐसे मामलों से शिक्षा विभाग का नाम खराब हो रहा है। विभागीय जाँच के लिए दो सदस्यीय टीम का गठन कर दिया गया है। रिपोर्ट आने के बाद कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, शिक्षा विभाग की शुरुआत जाँच में ये बात सामने आई है कि शिक्षकों में राजनीतिक बहस होती रहती है, इसी वजह से ये अप्रिय घटना सामने आई।

9 SC-ST, 12 ओबीसी और 7 जनरल… MP में हुआ CM मोहन यादव की कैबिनेट का विस्तार, कैलाश विजयवर्गीय समेत 28 BJP नेता मंत्री बने

मध्य प्रदेश में सोमवार (दिसंबर 25, 2023) को नव निर्वाचित सरकार के मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ। प्रदेश की राजधानी भोपाल में कुल 28 बीजेपी नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली। इसमें कैलाश विजयवर्गीय, प्रद्युम्न सिंह तोमर, प्रह्लाद सिंह पटेल और विश्वास सारंग समेत 18 नेता कैबिनेट मंत्री बनाए गए। वहीं 6 नेता स्वतंत्र प्रभार मंत्री और 4 नेता राज्य मंत्री के रूप में शपथ ली।

मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार में जिन 28 मंत्रियों ने सोमवार को शपथ ली, उनमें कुल 12 मंत्री ओबीसी कोटे से हैं। इसके अलावा जनरल कैटेगरी से 7, अनुसूचित जाति (SC) से 5 और अनुसूचित जनजाति (ST) से 4 विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली है।

सभी को प्रदेश के राज्यपाल गर्वनर मंगूभाई पटेल ने पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस मौके पर सीएम मोहन यादव ने कहा, “यशस्‍वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के कुशल मार्गदर्शन एवं नेतृत्‍व में हम सभी मिलकर मध्यप्रदेश को विकसित एवं समृद्ध प्रदेश बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।”

उन्होंने आगे कहा, “मुझे पूर्ण विश्वास है कि आदरणीय प्रधानमंत्री मोदी जी के मार्गदर्शन में हम सभी प्रदेश की उन्नति एवं प्रगति के समस्त संकल्पों को सिद्ध करने में सफल होंगे।”

ये बने सीएम मोहन यादव के कैबिनेट मंत्री

सीएम मोहन यादव की कैबिनेट में कैलाश विजयवर्गीय, प्रद्युमन सिंह तोमर, तुलसी सिलावट, एंदल सिंह कंसाना, नारायण सिंह कुशवाहा, विजय शाह, राकेश सिंह, प्रह्लाद पटेल, विश्वास सारंग, गोविंद सिंह राजपूत, करण सिंह वर्मा, इंदर सिंह परमार, संपतिया उईके, उदय प्रताप सिंह, राकेश शुक्ला, निर्मला भूरिया, नागर सिंह चौहान और चैतन्य कश्यप को कैबिनेट मंत्री की शपथ दिलाई गई।

इसमें कृष्णा गौर, धर्मेंद्र लोधी, दिलीप जायसवाल, गौतम टेटवाल, लेखन पटेल और नारायण पवार ने स्वतंत्र प्रभार मंत्री की शपथ ली। वहीं राधा सिंह, प्रतिमा बागरी, दिलीप अहिरवार और नरेन्द्र शिवाजी पटेल को राज्य मंत्री की शपथ दिलाई गई।

दिल्ली में लगी नामों पर मोहर

बता दें कि मध्य प्रदेश कैबिनेट में शामिल होने वाले नामों पर आखिरी मोहर दिल्ली से लगाई गई। प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कैबिनेट में शामिल होने वाले विधायकों की सूची लेकर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से रविवार (24 दिसंबर, 2023) को मिले थे। प्रदेश में कैबिनेट विस्तार पर पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने शुभकामनाएँ दी।

उन्होंने कहा, “मुझे पूरा विश्वास है कि जो सरकार ‘गुड गवर्नेंस डे’ के मौके पर संपूर्ण आकार ले रही है। वो पीएम मोदी के नेतृत्व और सीएम मोहन यादव की अगुवाई में अपने सभी साथियों के साथ एमपी को सुशासन देगी और एमपी को विकास की नई ऊँचाईयों तक लेकर जाएगी।” इस मुलाकात के बाद कैबिनेट विस्तार की तारीख तय हुई।

बताते चलें कि मध्य प्रदेश में बीते महीने हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 230 में से 163 सीटों पर जीत हासिल की थी। वहीं कॉन्ग्रेस महज 66 सीटों पर ही सिमट गई। इसके बाद बीजेपी ने मोहन यादव को मुख्यमंत्री और राजेंद्र शुक्ला-जगदीश देवड़ा को उपमुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई थी।

‘किसान चाहते हैं हर साल सूखा पड़े, ताकि उनका लोन माफ हो’: कर्नाटक के कॉन्ग्रेसी मंत्री का विवादित बयान, BJP ने माँगा इस्तीफा

कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार में मंत्री शिवानंद पाटिल ने एक विवादित बयान दिया है। पाटिल का कहना है किसान हर साल सूखा पड़ते देखना चाहते हैं ताकि उनका कर्ज माफ़ हो जाए। वह इससे पहले भी किसानों की आत्महत्या पर विवादित बयान दे चुके हैं।

शिवानंद पाटिल ने कर्नाटक के बेलगावी में एक कार्यक्रम में कहा, “कृष्णा नदी का पानी मुफ्त है, अब बिजली भी मुफ्त और मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने मुफ्त बीज और कीटनाशक भी दे दिए। किसान चाहेंगे कि बार-बार सूखा पड़े ताकि उनका लोन माफ़ हो जाए। आप लोगों को यह इच्छा नहीं रखनी चाहिए। आप लोग नहीं भी चाहोगे तो हर 3-4 साल में सूखा पड़ेगा।”

शिवानंद पाटिल कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार में मंडी विकास, गन्ना और कपड़ा मंत्री हैं। शिवानंद पाटिल के इस विवादित बयान का विरोध चालू हो गया है। कर्नाटक में विपक्षी भाजपा ने मुख्यमंत्री सिद्दारमैया से शिवानंद पाटिल का इस्तीफ़ा लेना चाहिए।

भाजपा ने कहा है कि कॉन्ग्रेस कर्नाटक के किसानों का मजाक उड़ा रही है। गौरतलब है कि कर्नाटक में इस बार सूखा पड़ रहा है और कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने इसको लेकर कर्जों में कुछ राहत का ऐलान भी किया है। कर्नाटक भाजपा के अध्यक्ष BY विजयेन्द्र ने कहा है कि कॉन्ग्रेस ने किसानों को गाली देने की संस्कृति और किसानों का जीवन खराब करने की नीति अपना ली है। यह जिम्मेदारी शिवानंद पाटिल को दी गई है।” उन्होंने शिवानंद पाटिल से तुरंत माफ़ी माँगने को कहा है।

शिवानंद पाटिल ने सितम्बर 2023 में भी किसानों पर विवादित बयान देते हुए कहा था कि किसान मुआवजे का पैसा लेने के लिए आत्महत्या कर लेते हैं। उन्होंने कहा था कि यह तबसे बढ़ा है जबसे सरकार ने मुआवजे की धनराशि बढ़ाई है।

उन्होंने संवेदनहीनता दिखाते हुए कहा था कि जिन किसानों की मौत प्रेम प्रसंगों, हृदय गति रुकने या फिर शराब पीने से हो रही है उनको भी किसान आत्महत्याओं में दिखाया जा रहा है ताकि मुआवजा पाया जा सके। उन्होंने कहा था कि ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि उनके लालची रिश्तेदार मुआवजे की धनराशि पाना चाहते हैं। यह मानव प्रकृति है कि गलत कारणों को दिखा कर मुआवजा लिया जाए।

जुटीं 37000 महिलाएँ, जीवंत हो उठी 5000 साल पुरानी परंपरा: द्वारका के नन्दधाम में महारास का Video वायरल

गुजरात के द्वारका में एक साथ 37,000 अहीर महिलाओं ने महारास रचाया। इस रास रचाने का वीडियो अब वायरल हो रहा है। महिलाओं के महारास रचाने से 5000 वर्ष पुरानी प्रभु श्रीकृष्ण काल की परम्परा पुनर्जीवित हो गई। इस कार्यक्रम में डेढ़ लाख से अधिक अहीर समुदाय के लोग शामिल हुए। यह आयोजन 24 दिसम्बर, 2024 को सुबह किया गया।

इस कार्यक्रम का आयोजन अखिल भारतीय यादव समाज और अहिरानी मंडल समाज द्वारा किया गया था। महिलाओं का नृत्य जहाँ आयोजित हुआ उस स्थान को नन्दधाम परिसर का नाम दिया गया था। इस नृत्य का ड्रोन वीडियो अब वायरल हो रहा है।

इस आयोजन में शामिल होने के लिए दुनिया भर से अहीर समाज की महिलाएँ शामिल हुई थीं। अहीर महिलाओं ने इस दौरान पारम्परिक लाल रंग की पोशाक पहनी हुई थी। इन महिलाओं ने मैदान में बीच में लगी श्रीकृष्ण प्रतिमा के चारों तरफ महारास रचाया। यह नृत्य बाणासुर की बेटी और भगवान कृष्ण की बहू ऊषा के महारास की स्मृति में आयोजित किया गया था।

टीवी 9 भारतवर्ष के अनुसार, मान्यता है कि कच्छ के व्रजवानी गाँव में एक ढोली ने जब ढोल बजाना शुरू किया, तब आहिर समाज की 140 महिलाएँ अपने कार्य को अधूरा छोड़कर महारास खेलने चली गई थीं। लोककथाओं के मुताबिक भगवान श्रीकृष्ण ने यह ढोल बजाया था और सभी महिलाएँ कृष्ण के साथ महारास रचाने गई थीं। यहाँ ढोल बजता रहा और महिलाएँ महारास खेलती गईं। अभी भी उस जगह पर सभी महिलाओं की समाधि है।

23 दिसंबर की शाम शुरू हुए अहिरानी महारास कार्यक्रम की शुरुआत में कार्यक्रम स्थल पर हस्तशिल्प उद्योग का बिजनेस एक्सपो और प्रदर्शनी आयोजित की गई थी। शाम को अहीर समाज के दानदाताओं, नेताओं, युवाओं, कार्यकर्ताओं की विशेष उपस्थिति में यहाँ पूजा शुरू हुई। 

महारास नृत्य समाप्त होने के बाद इन महिलाओं को श्रीमदभगवद्गीता पुस्तक उपहार में दी गई। इस आयोजन में जामनगर सांसद पूनमबेन माडम भी शामिल हुईं। उन्होंने पारम्परिक वेशभूषा में इन महिलाओं के साथ नृत्य किया। इस नृत्य का आयोजन नई पीढ़ी को परम्पराओं से अवगत करवाने के लिए किया गया था।

इस कार्यक्रम में सम्मान समारोह, पूजा-अर्चना, सामूहिक प्रसाद और राधा भाई अहीर सहित कलाकारों के भव्य लोक के साथ-साथ अहीर बहनों द्वारा तैयार किए गए सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए थे।