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ब्लैक ड्रेस में नहीं आईं जैकलीन फर्नांडिस तो नाराज़ हो गया सुकेश: चैट से खुलासा, महाठग ने लिखा था – बड़ी फिल्म दिला रहा हूँ, गिफ्ट समझ लेना

जेल में बंद महाठग सुकेश चंद्रशेखर ने एक बार फिर से अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिस को कई मैसेज भेजे हैं। वो 200 करोड़ रुपए की मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में जेल में बंद है। अब पता चला है कि उसने जेल में से ही जैकलीन फर्नांडिस को फेक व्हाट्सएप्प नंबर के जरिए कई मैसेज भेजे। इनमें से एक मैसेज में उसने अभिनेत्री से कहा कि वो सुनवाई के दौरान अदालत में काले रंग की ड्रेस पहन कर आए। हालाँकि, जब वो ब्लैक ड्रेस में कोर्ट में नहीं पहुँचीं तो सुकेश चंद्रशेखर नाराज़ हो गया था।

उसने जैकलीन फर्नांडिस को भेजे गए मैसेज में लिखा था, “बेबी, मैं जानता हूँ तुम ट्रॉल्स के कारण फिर से नाराज़ हो जो तुम्हारे नाम में एक अतिरिक्त E जोड़ रहे हैं। लेकिन वावा, तुम चिंता मत करो। जो तुम्हें ट्रॉल कर रहे हैं वो किसी लायक नहीं हैं, गंदगी हैं। तुम मेरी राजकुमारी हो और रॉकस्टार हो। तुम एक सुपरस्टार बनने जा रही हो।” जब जैकलीन फर्नांडिस ब्लैक ड्रेस पहन कर कोर्ट के समक्ष नहीं पेश हुईं तो सुकेश ने उन्हें लिखा कि वो उन्हें नज़रअंदाज़ कर रही हैं।

साथ ही उसने लिखा था कि वो हमेशा अभिनेत्री के साथ है और किसी भी ज़रूरत की पूर्ति के लिए तैयार है। बता दें कि जैकलीन को जिस सुनवाई में उसने काले रंग का कपड़ा पहनने के लिए कहा था, वो वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई थी। उसने लिखा था, “तुम अब अगली सुनवाई में कोई भी कपड़ा पहनो, एक बहुरंगी कुर्ती पहनो या फिर सिर्फ एक सफ़ेद शर्ट जिस पर कोई डिजाइन नहीं हो। मुझे पता है तुमने ये मैसेज देख लिया है। मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूँ।”

एक अन्य मैसेज में उसने दावा किया था कि फिल्म निर्देशक लव रंजन एक प्रोजेक्ट के लिए जैकलीन फर्नांडिस से संपर्क करेंगे। उसने लिखा था, “अगले एकाध सप्ताह में लव रंजन अपनी एक फिल्म के लिए तुमसे संपर्क करेंगे। ये बहुत बड़ा प्रोजेक्ट होने वाला है। इसे मेरी तरफ से गिफ्ट समझ लो। बेबी गर्ल, मैंने लिली की फूलों के साथ तुम्हें एक मैसेज कार्ड भेजा है। आशा है तुमने इसे देखा होगा।” एक अन्य मैसेज में उसने जैकलीन फर्नांडिस को ‘हनी बी’ कहते हुए लिखा था कि वो शर्माना बंद करे।

वहीं जैकलीन फर्नांडिस ने सुकेश चंद्रशेखर द्वारा बार-बार उसके नाम पत्र जारी किए जाने को प्रताड़ना बताते हुए इसके खिलाफ याचिका दायर की थी। इस पर जवाब देते हुए महाठग ने कोर्ट से कहा है कि अगर उसके भेजे एक भी पत्र का कोई भी कंटेंट धमकी वाला या फिर प्रताड़ना देने वाला साबित हुआ तो वो कोई भी सज़ा भुगतने को तैयार है। जैकलीन फर्नांडिस ने अपनी याचिका में कहा था कि सुकेश चंद्रशेखर द्वारा बार-बार उनसे संपर्क करने की कोशिश करना गवाहों के साथ छेड़छाड़ के समान है।

‘बच्चों के सामने पीएम मोदी और सीएम योगी को देते हैं गंदी-गंदी गालियाँ’: देवरिया के स्कूल में ‘जय हिंद’ कहने पर शिक्षक की पिटाई मामले में खुलासा

उत्तर प्रदेश के देवरिया के एक स्कूल में प्रार्थना सभा के दौरान ‘जय हिंद’ कहने को लेकर शिक्षक की पिटाई के मामले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पीड़ित शिक्षक अरुण कुमार सिंह ने बताया कि स्कूल में कुछ शिक्षक गुट बनाकर रहते और ना ही बच्चों को बढ़ाते हैं और ना स्कूल के किसी कार्यक्रम में भाग लेते हैं। उन्होंने कहा कि ये शिक्षक पीएम नरेंद्र मोदी और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ को बच्चों के सामने गंदी-गंदी गालियाँ देते हैं।

दरअसल, लार विकास खंड के धरहरा कंपोजिट विद्यालय में शनिवार (23 दिसंबर, 2023) को प्रार्थना सभा के दौरान ‘जय हिंद’ बोलने पर धर्मेंद्र कुमार वर्मा, अनय कुमार, संजय कुमार ने शिक्षक अरुण कुमार सिंह की पिटाई कर दी थी। इस घटना में अरुण सिंह को गंभीर चोटें आई हैं। प्रभारी प्रिंसिपल राम विलास भी घटना के दौरान मूकदर्शक बने रहे।

दैनिक भास्कर से बात करते हुए पीड़ित शिक्षक ने कहा कि ये स्कूल में गुट बनाकर रहते हैं और जातिवाद दलित-सवर्ण को जातिवाद करते रहते हैं। उनका कहना है कि वे स्कूल में छात्रों को पढ़ाते भी नहीं हैं और गुट बनाकर स्कूल में बैठे रहते हैं। 8वीं तक के इस स्कूल में सिर्फ कुछ ही कक्षाएँ चलती हैं। इस मामले में सभी चारों शिक्षकों को निलंबित कर दिया गया है।

अरुण सिंह के अनुसार, “मैं इस स्कूल में पिछले 3 साल से पढ़ा रहा हूँ। पहले स्कूल की हालत बहुत खराब थी। यहाँ आने के बाद मैंने पढ़ाई का स्तर थोड़ा सुधारा तो आरोपित टीचर मुझे धमकाने लगे। ऐसा करने से मुझे रोका गया। जब मैं बच्चों को प्रार्थना के बाद राष्ट्रगान करवाता हूँ तो ये लोग तेज-तेज हँसते हैं। स्कूल के किसी भी कार्यक्रम में ये शामिल नहीं होते, चाहे प्रार्थना हो या पूजा।”

अरुण सिंह ने कहा, “इन लोगों को पता नहीं क्यों हिंदू धर्म से इतनी नफरत है? देश के प्रधानमंत्री, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, सरकार की योजनाओं आदि का ये लोग मजाक बनाते रहते हैं। मैं बच्चों को स्कूल में प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री के बारे में बताता हूँ तो ये लोग बच्चों के सामने उन्हें गंदी-गंदी गालियाँ देते हैं। सरकारी योजनाओं को लेकर कहते हैं, हमें पता है वो लोग क्या काम करते हैं?”

अरुण कुमार ने कहा कि हाल में ही चंद्रयान लॉन्च किया गया था और जब वे स्कूल में चंद्रयान लॉन्च होने का वीडियो बच्चों को दिखाने की कोशिश की तो इन शिक्षकों ने उसे दिखाने नहीं दिया। उन्होंने कहा कि क्लास में बच्चों को इसलिए चंद्रयान लॉन्च का वीडियो दिखाना चाहते थे, ताकि बच्चे कुछ सीख सकें।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इन शिक्षकों को हिंदू धर्म से भी नफरत है। स्कूल में हर पूजा को ये लोग रोकने की कोशिश करते हैं और भगवान की मूर्ति के साथ खिलवाड़ करते हैं। पीड़ित शिक्षक ने कहा कि ये तीनों शिक्षक स्कूल में कभी आते हैं और कभी चले जाते हैं। क्लास में पीछे की सीटों को जोड़कर सोते रहते हैं और मना करने पर गाली देने लगते हैं।

BSA शालिनी श्रीवास्तव ने कहा कि मामले में जाँच की जा रही है और गलत पाए जाने वाले शिक्षकों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए 2 सदस्यीय टीम का गठन कर कर दिया गया है। शालिनी श्रीवास्तव ने यह भी कहा कि स्कूल में बच्चों से उन शिक्षकों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। आरोपित शिक्षकों का रिकॉर्ड खराब ही मिला है। उन पर एक्शन लिया गया है।

बताते चलें कि BSA ने आरोपित शिक्षकों के साथ-साथ पीड़ित शिक्षक को भी निलंबित कर दिया गया है। वहीं, घटना की सूचना मिलने के बाद स्कूल पहुँची पुलिस ने तीनों आरोपित शिक्षकों- अनय कुमार, असिस्टेंट टीचर धर्मेंद्र वर्मा, टीचर संजय कुमार को हिरासत में लेकर थाने लेकर चली गई।

‘1 साल से नहीं मिला, 3 महीने से हर जगह से ब्लॉक’: तलाक के बाद शिखर धवन ने मार्मिक पोस्ट के जरिए बेटे को विश किया जन्मदिन, बोले – तुम्हें रोज लिखता हूँ मैसेज

क्रिकेटर शिखर धवन और उनकी पत्नी आयशा मुखर्जी अलग हो चुके हैं। दोनों के तलाक की खबरें मीडिया में भी चर्चा का विषय बनी थीं, क्योंकि ये मामला खासा विवादित हुआ था। अब शिखर धवन ने अपने बेटे जोरावर के साथ वीडियो कॉल पर बात करते हुए तस्वीर शेयर की है और मार्मिक पोस्ट लिखा है। ये तस्वीर पुरानी है। उन्होंने बताया है कि उन्हें उनके बेटे से मिले 1 साल हो गए। उन्होंने ये भी बताया कि पिछले 3 महीने से उनका उनके बेटे से कोई संपर्क नहीं है।

उन्हें हर जगह से ब्लॉक कर के रखा गया है। जोरावर के जन्मदिन पर उसे बधाई देते हुए शिखर धवन ने ये पोस्ट लिखा। उन्होंने अपने बेटे को संबोधित करते हुए लिखा कि वो भले ही उससे सीधे नहीं जुड़ पा रहे हैं, लेकिन मानसिक रूप से वो उससे जुड़े हुए हैं। उन्होंने लिखा कि वो अपने बेटे पर गर्व करते हैं, और उन्हें पता है कि वो अच्छे से बड़ा हो रहा है, अच्छा कर रहा है। शिखर धवन ने जोरावर के लिए लिखा कि पिता उसे हमेशा मिस करते हैं और प्यार करते हैं।

शिखर धवन ने जोरावर को संबोधित करते हुए लिखा, “तुम्हारे पापा हमेशा सकारात्मक रहते हैं और वो उस क्षण का इंतजार कर रहे हैं जब भगवान की कृपा से हम दोनों फिर मिलेंगे। नटखट बनो, लेकिन विध्वंसकारी नहीं। हमेशा देने वाले बनो, विनम्र रहो और दयालु, धैर्यवान और मजबूत बनो। तुम्हें न देखने के बावजूद मैं तुम्हें रोज मैसेज लिखता हूँ। इसमें मैं तुमसे तुम्हारे रोजमर्रा के जीवन के बारे में पूछता हूँ। बताता हूँ कि मैं क्या कर रहा हूँ और मेरे जीवन में क्या नया है।”

2009 में शिखर धवन ने 10 वर्ष छोटी आयशा मुखर्जी से सगाई की थी और 2012 में दोनों ने शादी कर ली थी। अक्टूबर 2023 में ही दोनों के तलाक को मंज़ूरी मिली थी। आयशा मुखर्जी भारतीय सलामी बल्लेबाज से शादी के पहले से ही 2 लड़कियों की माँ थीं। कोर्ट में सुनवाई के दौरान पता चला था कि धवन ने आयशा को 8 वर्षों में 13 करोड़ रुपए भेजे थे। दोनों बेटियों पर भी धवन ने करोड़ों रुपए खर्च किए। तलाक के रकम के रूप में भी आयशा ने धवन से 13 करोड़ रुपए माँगे थे

ललन सिंह के JDU अध्यक्ष पद छोड़ने के चर्चे, क्या बदलने वाली है बिहार की सियासी हवा: 29 दिसंबर को पर्दा उठा सकते हैं नीतीश कुमार

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JDU) से एक बड़ी खबर सामने आई है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। यह सब ऐसे समय में हुआ है, जब पार्टी की राष्ट्रीय बैठक 29 दिसंबर 2023 को दिल्ली में होनी थी। इसके पीछे क्या तर्क दिया गया है, इसका अभी खुलासा नहीं हुआ है।

सूत्रों के हवाले से मीडिया में कहा जा रहा है कि ललन सिंह ने अपना इस्तीफा नीतीश कुमार को सौंपते हुए पद से मुक्त करने का आग्रह किया है। हालाँकि, आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं हुई है। माना जा रहा है कि नीतीश कुमार खुद राष्ट्रीय अध्यक्ष बनेंगे। यह भी कहा जा रहा है कि नीतीश कुमार किसी दूसरे नजदीकी को पार्टी अध्यक्ष बनाएँगे और ललन सिंह लोकसभा चुनावों की तैयारी करेंगे।

राजनीतिक गलियारे में यह भी चर्चा चल रही है कि ललन सिंह कुछ वजहों से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से नाराज चल रहे हैं। इसलिए वो पद छोड़ने की लगातार पेशकश कर रहे थे। यह भी कहा जा रहा है कि नीतीश कुमार उन्हें मनाने में जुटे थे। रिपोर्ट्स में यह भी कहा जा रहा है कि नीतीश कुमार ने ललन सिंह को लोकसभा चुनावों तक कार्यवाहक अध्यक्ष बने रहने का आग्रह किया है।

बता दें कि नीतीश कुमार 23 दिसंबर की शाम की अचानक ललन सिंह के पटना स्थित आवास पर मिलने के लिए पहुँचे थे। इस दौरान ही अटकलें लगने लगी थीं कि जदयू में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चर्चा की गई है। इससे पहले सीएम आवास पर नीतीश कुमार, ललन सिंह और विजय चौधरी की मुलाकात हुई थी।

इस बैठक के बाद नीतीश कुमार ललन सिंह को उनके घर छोड़ने के लिए गए थे। हालाँकि, दोनों के बीच किसी तरह खटास नहीं बताई जा रही है। उधर भाजपा नेता सुशील मोदी ने दावा किया था कि ललन सिंह की लालू यादव के साथ नजदीकी बढ़ी। इससे नीतीश कुमार ललन सिंह से नाराज हैं और उन्हें पद से हटाने वाले हैं।

जानकारों का कहना है कि जब-जब JDU की राष्ट्रीय कार्यकारिणी और राष्ट्रीय परिषद की बैठक साथ हुई है, तब-तब उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष बदले गए हैं। जब सुशील मोदी ने ललन सिंह को हटाने जाने की अटकलें लगाई थीं तो सीएम नीतीश कुमार ने इस बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि जिसको जो मन में आता है, वही बोल देता है।

इसको लेकर 25 दिसंबर के दिए गए बयान में सीएम नीतीश ने कहा था, “कौन क्या बोलता है, इसको हम ध्यान नहीं दे रहे हैं। आजकल कुछ लोगों को जो मन में आता है, वो बोलते रहते हैं, ताकि उनको फायदा मिले। हालाँकि, इससे किसी को कोई लाभ नहीं मिलने वाला है। हमारी पार्टी में कोई इधर-उधर नहीं है, सब एकजुट हैं।”

‘मेरा रेसलिंग से कोई लेना-देना नहीं, मैंने संन्यास ले लिया है’: WFI विवाद पर बोले पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह – नई फेडरेशन के काम से मैं पूर्णतः अलग

बजरंग पूनिया, साक्षी मलिक और विनेश फोगाट जैसे खिलाड़ियों की आपत्ति और पहलवानों के विरोध प्रदर्शन के बाद बृजभूषण शरण सिंह को WFI (भारतीय कुश्ती संघ) के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना पड़ा था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर फिर से चुनाव हुआ और बृजभूषण शरण सिंह के करीबी संजय सिंह अध्यक्ष चुने गए। इसके बाद फिर से विरोध चालू हो गया। अंततः केंद्रीय खेल मंत्रालय ने नवगठित पैनल के कामकाज पर रोक लगा दी और जूनियर चैंपियनशिप भी रद्द कर दी।

वहीं बृजभूषण शरण सिंह ने इस प्रकरण पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि उनका इन सबसे कोई वास्ता नहीं है। कैसरगंज से भाजपा सांसद ने कहा कि उन्होंने कुश्ती से संन्यास ले लिया है, और रेसलिंग अब उनका कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने ये भी कहा कि भविष्य में भी रेसलिंग से उनका कोई जुड़ाव नहीं रहेगा, अच्छा या बुरा लेकिन 12 वर्ष उन्होंने काम किया। भाजपा नेता ने कहा कि अब वो इस विवाद से हट गए हैं, नई फेडरेशन भी बन गई है।

बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि क्या करना है और क्या नहीं करना है, ये नई फेडरेशन का काम है, वो इन सबसे पूर्णतः अलग है। बता दें कि संजय सिंह की जीत के बाद फूल-माला के साथ स्वागत किए जाते हुए उनके साथ नए अध्यक्ष की तस्वीर आई थी। क्या WFI की गतिविधियों को रोके जाने का ये भी एक कारण है? इस पर पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि फेसबुक पर उनके कितने फॉलोवर्स हैं और संजय सिंह कई वर्षों से रेसलिंग से जुड़े हुए हैं।

उन्होंने कहा कि कुश्ती से जुड़ा हर व्यक्ति उन्हें जानता ही है। वो पहले भी कह चुके हैं कि वो क्षत्रिय हैं और संजय सिंह भूमिहार, ऐसे में उन्हें उनका संबंधी बताया जा रहा है जो गलत है। बृजभूषण सिंह ने पूछा कि उन पर आरोप लगाने वाले यही पहलवान अपने घर के कार्यक्रमों में उन्हें नहीं बुलाते थे? भाजपा के आला नेताओं से मुलाकात के विषय में उन्होंने कहा कि रेसलिंग के मुद्दे पर चर्चा नहीं हुई है। भाजपा सांसद ने कहा कि उन्हें निशाना बनाया गया, टुकड़े-टुकड़े गैंग और प्रियंका गाँधी जैसे लोग प्रदर्शनकारियों के साथ आ गए।

मोदी सरकार में रुपया भी हुआ ग्लोबल, UAE को पहली बार कच्चे तेल के बदले भारतीय मुद्रा में किया भुगतान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के नेतृत्व में भारत अपनी मुद्रा रुपए की वैश्विक स्वीकार्यता बढ़ाने पर लगातार काम कर रहा है। इसके तहत भारत ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से खरीदे गए कच्चे तेल (Crude Oil) का भुगतान वैश्विक मुद्रा के रूप में स्वीकृत अमेरिकी डॉलर के बजाय रुपए में किया है। कच्चे तेल के लिए UAE को भारत द्वारा रुपए में किया गया यह पहला भुगतान है।

भारत दुनिया तीसरा का सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता देश है। इस तरह वैश्विक स्तर पर स्थानीय मुद्रा को बढ़ावा देकर भारत ने एक रणनीतिक कदम उठाया है। भारत का यह कदम तेल आपूर्तिकर्ताओं में विविधता लाने, लेनदेन की लागत में कटौती करने और रुपए को व्यापार निपटान मुद्रा के रूप में स्थापित करने के भारत द्वारा किए जा रहे व्यापक प्रयासों का यह हिस्सा है।

बताते दें कि 11 जुलाई 2022 को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने आयातकों को रुपए में भुगतान करने और निर्यातकों को स्थानीय मुद्रा में भुगतान करने की अनुमति दी थी। हालाँकि, अधिकारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीयकरण एक सतत प्रक्रिया है और वर्तमान में इसका कोई विशेष लक्ष्य नहीं है।

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने पिछले तीन वर्षों में सीमा पार भुगतान में रुपए के उपयोग को बढ़ावा देने के अपने प्रयास में एक दर्जन से अधिक अंतरराष्ट्रीय बैंकों को रुपए में व्यापार करने की अनुमति दी है। RBI ने अब तक 22 देशों के साथ रुपए में व्यापार की सहमति बना चुका है।

दरअसल, जुलाई में भारत ने रुपए में निपटान के लिए संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के साथ एक समझौता किया था। इसके तहत इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC) को अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) से दस लाख बैरल कच्चे तेल की खरीद के लिए भारतीय रुपए में भुगतान करना पड़ा। इसके अतिरिक्त, कुछ रूसी तेल आयात का निपटान भी रुपए में किया गया है।

अपनी तेल की जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत उसका 85 प्रतिशत से अधिक तेल आयात करता है। इसको देखते हुए भारत ने एक रणनीति अपनाई है, जिसमें सबसे अधिक लागत प्रभावी आपूर्तिकर्ताओं से सोर्सिंग, आपूर्ति स्रोतों में विविधता लाने और अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का पालन करने पर जोर दिया गया है। रूसी तेल आयात में वृद्धि के दौरान देश को इस रणनीति से अरबों डॉलर की बचत हुई।

हालाँकि, कुछ देशों के साथ ही गैर-तेल व्यापार समझौतों में व्यापार का निपटान रुपए में करने में सफलता मिली है, लेकिन तेल निर्यातक देश रुपए में लेनदेन से संकोच करते रहे हैं। अब रूस के बाद संयुक्त अरब अमीरात द्वारा इस दिशा में आगे बढ़ने के बाद स्थानीय मुद्रा को वैश्विक स्तर पर स्वीकार करने में सफलता मिलेगी।

उधर, संसद की स्थायी समिति को संबोधित करते हुए तेल मंत्रालय ने इस बात पर जोर दिया कि नियामक दिशानिर्देशों का पालन करने वाले आपूर्तिकर्ताओं को कच्चे तेल का भुगतान भारतीय रुपए में किया जा सकता है। मंत्रालय ने कहा कि भारतीय रुपए का उपयोग करके भुगतान करने में बहुत अधिक अंतरराष्ट्रीय रुचि नहीं है, क्योंकि आपूर्तिकर्ता धन के प्रत्यावर्तन और उच्च लेनदेन लागत से सावधान हैं।

वित्तीय वर्ष 2022-23 (अप्रैल 2022 से मार्च 2023) में भारत ने 232.7 मिलियन (2.32 करोड़) टन कच्चे तेल के आयात पर 157.5 बिलियन डॉलर (लगभग 13 लाख करोड़ रुपए) खर्च किए। भारत को कच्चा तेल निर्यात करने वाले प्रमुख देशों में इराक, सऊदी अरब, रूस और संयुक्त अरब अमीरात हैं। इनका पश्चिम एशिया की कुल आपूर्ति में 58 प्रतिशत का योगदान है। ।

‘आज मैं मुसलमान बन गया’: हिंदू युवक का वीडियो, पत्नी ने कहा- शबाना खान ने मेरे पति से जबरन कबूल करवाया इस्लाम

सोशल मीडिया में एक वीडियो वायरल है। इसमें दिख रहा युवक मुस्लिम बनने की बात कह रहा है। इस युवक की पहचान बरेली के 24 साल के आकाश मौर्य के तौर पर हुई है। आकाश की पत्नी लक्ष्मी का कहना है कि उसके पति से जबरन इस्लाम कबूल करवाया गया है।

15 सेकंड के इसे वीडियो में आकाश मौर्य इस्लामी टोपी पहने नजर आ रहा है। वीडियो के बैकग्राउंड गाना बज रहा है- ‘मेरा दिल तो मोहम्मद’ और साथ ही एक कैप्शन लिखा था – आज, मैं मुस्लिम बन गया हूँ।

वीडियो के सामने आने के तुरंत बाद, आकाश मौर्य की पत्नी ने परिवार के अन्य सदस्यों के साथ सुभाष नगर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। इसमें शबाना खान नाम की एक मुस्लिम महिला पर आकाश मौर्य को प्रेम जाल में फँसाने का आरोप लगाया है।

लक्ष्मी ने पुलिस को बताया कि आकाश मौर्य 21 दिसंबर 2023 से घर नहीं लौटा है। उसने कहा कि घर छोड़ते वक्त वह सोने और चाँदी के सिक्के और 23,000 रुपए नकद लेकर गया था। आकाश मौर्य एक कूरियर कंपनी में डिलीवरी बॉय का काम करता था।

शिकायत प्रति का स्क्रीनग्रैब

लक्ष्मी के मुताबिक, इज्जतनगर पुलिस स्टेशन के तहत आने वाले मठ लक्ष्मीपुर में डिलीवरी करते वक्त उसके पति की मुलाकात 21 साल की शबाना खान से हुई थी। कथित तौर पर आकाश बीते 4 महीने से शबाना से फोन पर बात करता रहा था। लक्ष्मी का आरोप है कि उसके पति आकाश को शबाना ने ही फँसाया है।

आकाश मौर्य का वीडियो सोशल मीडिया पर आने के बाद उनका परिवार स्तब्ध है। जानकारी के मुताबिक, शबाना खान कथित तौर पर वीडियो कॉल कर लक्ष्मी को बताया कि आकाश मौर्य ने इस्लाम अपना लिया है। बकौल लक्ष्मी उसने धमकी दी कि अगर उसने आकाश से संपर्क करने की कोशिश की तो वह उसे चोट पहुँचाएगी।

वहीं आकाश मौर्य की मां सपना ने बताया कि शबाना खान के संपर्क में आने के बाद से उनके बेटा कभी-कभार ही घर आता था। उन्होंने कहा कि आकाश को इस्लाम कबूल करने के लिए मजबूर किया गया है। उनका ये भी कहना था कि जब शबाना ने उनकी बहु लक्ष्मी को फोन किया तो उसने पीछे से आकाश को रोते हुए सुना था। हालात से मजबूर होकर परिवार ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।

वहीं इस मसले को लेकर पुलिस अधीक्षक राहुल भाटी का कहना है कि आकाश मौर्य सुभाष नगर पुलिस स्टेशन पहुँचा था। उसने अपना बयान दर्ज कराते हुए धर्मांतरण के आरोपों को खारिज किया है। मंगलवार (26 दिसंबर 2023) को इस मामले पर ऑपइंडिया से बात करते हुए आकाश मौर्य के पिता ने बताया कि उनका बीटा घर लौट आया है। धर्म परिवर्तन से जुड़े दावों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने आरोपों को सत्य बताया।

धर्म के लिए हुए बलिदान, मुगलों के सामने नहीं झुकने दी खालसा की शान: कहानी गुरु के उन साहिबजादों की जिनको समर्पित है ‘वीर बाल दिवस’

आज 26 दिसंबर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल के बाद से यह दिन वीर बाल दिवस के तौर पर मनाया जाता है। य​ह दिन समर्पित है गुरु गोविंद सिंह के साहिबजादों को। इन्होंने धर्म के लिए खुद को बलिदान कर दिया, लेकिन बर्बर मुगलों के सामने घुटने नहीं टेके।

गुरु गोविंद सिंह के बेटों फतेह सिंह और जोरावर सिंह को मुगलिया फौज के सेनापति वजीर खान ने दीवार में जिंदा चुनवा दिया था, लेकिन उनके मुँह से उफ तक नहीं निकली। माता गुजरी देवी और चार साहिबजादों के बारे में जानने से पहले, उन गुरु गोविंद सिंह को जानिए जिन्होंने ‘खालसा पंथ’ की स्थापना की। सिखों के 10वें गुरु गोविंद सिंह न सिर्फ एक संत एवं दार्शनिक, बल्कि एक कुशल योद्धा भी थे। उन्होंने बर्बर मुगल बादशाह औरंगजेब के विरुद्ध कई युद्ध लड़े। उनके पिता गुरु तेग बहादुर की औरंगजेब ने ही हत्या करवाई थी। इस कारण मात्र 9 वर्ष की उम्र में गोविंद सिंह को गुरु की पदवी सँभालनी पड़ी थी।

गुरु के पीछे औरंगजेब ने वजीर खान को लगाया

औरंगजेब ने गुरु गोविंद सिंह मुकाबला करने के लिए उनके पीछे वजीर खान को लगाया था। उसे सरहिंद का सूबेदार बना कर भेजा गया और सिखों का दमन की खुली छूट दी गई। गुरु गोविंद सिंह को उसके साथ कई युद्ध लड़ने पड़े। सतलुज से लेकर यमुना नदी के बीच के पूरे क्षेत्र पर वजीर खान का ही शासन चलता था। उसने गुरु गोविंद सिंह के 5 और 8 वर्षीय बेटों साहिबजादा फ़तेह सिंह और साहिबजादा जोरावर सिंह को ज़िंदा पकड़ लिया था। इस्लाम न अपनाने पर उसने दोनों को ही दीवार में ज़िंदा चुनवा दिया।

ये भी एक संयोग ही है कि वजीर खान का संहार करने वाले सिख योद्धा का नाम भी फ़तेह सिंह ही था, जो बन्दा सिंह बहादुर की सेना में थे। उन्होंने वजीर खान का सिर धड़ से अलग कर दिया था। इसे ‘चप्पर-चिड़ी’ के युद्ध के रूप में जाना जाता है। मई 1710 में सिखों ने वजीर खान को उसके किए की सज़ा दी थी। गुरु गोविंद सिंह ने सन् 1688 में भंगानी के युद्ध से लेकर 1705 ईस्वी में मुक्तसर के युद्ध तक दर्जनों युद्ध लड़े। उन्होंने अपने परिवार का बलिदान दे दिया, लेकिन मुगलों के सामने नहीं झुके।

गुरु गोविंद सिंह की सिख सेना की लड़ाई मुगलों के साथ-साथ पहाड़ी राजाओं के साथ भी थी। चमकौर के युद्ध में सिख सेना का काफी नुक़सान हुआ था, लेकिन मुगलों पर वो भारी पड़े थे। बौखलाए औरंगजेब ने वजीर खान और जबरदस्त खान के नेतृत्व में एक विशाल फ़ौज को सिखों को कुचलने के लिए भेज दी। इसके लिए औरंगजेब ने सरहिंद, लाहौर और जम्मू के सूबेदारों के अलावा लगभग दो दर्जन पहाड़ी राजाओं के साथ गठबंधन से एक बड़ी फ़ौज तैयार की और उसे गुरु गोविंद सिंह को पकड़ने के लिए आनंदपुर साहिब भेजा।

कुरान की कसम से पलटे मुगल किया गुरु पर हमला

गुरु गोविंद सिंह भी इस युद्ध के लिए तैयार थे और संख्या में कम होने के बावजूद खालसा सेना ने मुगलों के दाँत खट्टे कर दिए। शुरुआती झड़पों में मुगलों को अपनी पराजय स्पष्ट दिख रही थी। इसके बाद मुग़ल फ़ौज ने आनंदपुर साहिब को चारों ओर से घेर कर रसद-पानी की किल्लत पैदा कर दी। बाहर से क्षेत्र का सम्बन्ध टूटने के कारण भोजन-पानी का अभाव हो गया। मुगलों ने इस दौरान संधि का प्रस्ताव दिया और कहा कि अगर गुरु गोविंद सिंह दुर्ग छोड़ देते हैं तो उन्हें और उनके परिवार को सुरक्षित निकलने के लिए रास्ता दिया जाएगा।

इसके लिए मुग़ल सूबेदारों ने कुरान तक की कसम खाई। हालाँकि, उनमें कुछ सिख सैनिक ऐसे भी थे जो दुर्ग छोड़ कर चले गए लेकिन गुरु गोविंद सिंह ने पहले ही शर्त रख दी थी अगर वो ऐसा करते हैं तो गुरु-शिष्य का रिश्ता नहीं रहेगा। लगभग आठ महीने के समय तक आनंदपुर साहिब को मुगलों ने घेरे रखा। अंत में सिख सेना ने गुरु गोविंद सिंह, उनकी माँ गुजरी देवी और चारों साहिबजादों (अजीत सिंह, जुझार सिंह, जोरावर सिंह और फ़तेह सिंह) के साथ दुर्ग छोड़ने की योजना बनाई।

यही वो दिन था जब मुगलों ने कुरान की कसम को धत्ता बताते हुए खालसा सेना पर सरसा नदी के तट पर आक्रमण कर दिया। मौसम ठंड और बारिश का था। ऐसे मुश्किल वक्त में भी अजीत सिंह (19) और जुझार सिंह (14) को लेकर गुरु गोविंद सिंह किसी तरह चमकौर की गढ़ी तक पहुँचने में कामयाब रहे थे।

हालाँकि इस दौरान उनके परिवार के बाकी लोग उनसे बिछुड़ गए। जोरावर सिंह और फ़तेह सिंह के साथ उनकी दादी और गुरु गोविंद सिंह की माँ गुजरी देवी थीं। गुरु के एक पुराने रसोईए के गाँव में जाकर इन तीनों ने शरण ली। उसने गुरु से विश्वासघात करते हुए दोनों बच्चों को वजीर खान को सौंप दिया।

क्रूर वजीर खान ने इन दोनों साहिबजादों गिरफ्तार कर लिया। उसने इन दोनों साहिबजादों के सामने शर्त रखी कि वो इस्लाम अपना लें। लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया। दोनों छोटे बच्चों ने कहा कि वो अपना धर्म कभी नहीं छोड़ सकते। इस दौरान उन्होंने अपने दादा गुरु तेग बहादुर के बलिदान को याद करते हुए वजीर खान से दो टूक कह दिया कि हम गुरु गोविंद सिंह के पुत्र हैं। हम अपना धर्म कभी नहीं छोड़ सकते। फिर क्या था गुस्से से भरे वजीर खान ने उन दोनों को ज़िंदा दीवार में चुनवाने का आदेश दिया।

वजीर खान ने इन दोनों साहिबजादों को दीवार में चुनवाने के लिए मलेरकोटला के नवाब को सौंपना चाहा था। दरअसल नवाब का भाई सिखों के साथ युद्ध में मारा गया था। वजीर खान को लगा कि वो पहले कि आग में जल रहा होगा, लेकिन उसने ऐसा करने से इनकार करते हुए कहा कि उस युद्ध में इन दोनों बालकों का क्या दोष?

दोनों साहिबजादों में जोरावर सिंह बड़े थे। जब उनको चिनवाने के लिए बनाई जा रही दीवार ऊपर उठने लगी तो उनकी आँखों में आँसू आ गए। इस पर छोटे भाई फतेह सिंह ने उनसे पूछा कि क्या वो बलिदान देने से डरकर रो रहे हैं? तब जोरावर सिंह ने छोटे भाई को जवाब दिया कि ऐसी बात नहीं हैं। वो तो ये सोच कर दुःखी हैं कि छोटा होने की वजह से फ़तेह सिंह की दीवार पहले बन जाएगी और वो पहले उसमे समा जाएँगे और उनकी मौत पहले होगी। उन्होंने कहा कि दुःख यही है कि मेरे से पहले बलिदान होने का अवसर तुम्हें मिल रहा है। उन्होंने कहा कि मैं मौत से नहीं डरता, वो मुझसे डरती है।

आनंदपुर साहिब का युद्ध और साहिबजादों का बलिदान

किसी युद्ध में बच्चों के साथ इस तरह की अमानवीयता का उदाहरण पहले शायद ही कहीं मिलता है। फिर चमकौर की गढ़ी में भी युद्ध हुआ, जिसमें वीरता का प्रदर्शन करते हुए गुरु गोविंद सिंह के बाकी दोनों बेटों अजीत सिंह और जुझार सिंह भी बलिदान हो गए।

एक और बात जानने लायक है कि जिन 40 सिखों ने मुगलों के घेरने पर आनंदपुर साहिब छोड़ा था। बाद में उन सिखों ने ही गुरु के पीछे सेना संगठित करने में बड़ी भूमिका निभाई और अपने प्राण देकर प्रायश्चित किया।

यही युद्ध वो वक्त था, जब औरंगजेब ने गुरु गोविंद सिंह में दिलचस्पी लेनी शुरू की। जब उसे युद्ध के मैदान में सिखों के फायदे में रहने की जानकारी हुई तो उसने गुरु गोविंद सिंह के व्यक्तित्व से लेकर उनके युद्ध कौशल के बारे में भी जानकारियाँ जुटाई।

मुग़ल सैनिकों ने जब गुरु की प्रशंसा की तो औरंगजेब ने उन्हें अपने सामने लाने का आदेश दे डाला। युद्ध में जब दूर-दूर से सिख पहुँचे तो वो खुश थे और एक-दूसरे को बधाई दे रहे थे कि उन्हें गुरु और धर्म के लिए मृत्यु के वरण का मौका मिल रहा है।

ये सही बात थी कि आनंदपुर साहिब ऊँची जगह पर था और सिख सेना को मुगलों की गतिविधियों का पता चल रहा था, लेकिन वो खुले में भी थे और युद्ध के दौरान गड्ढे में भी गिर रहे थे। इस दौरान गुरु गोविंद सिंह ने मुगलों की तरफ तोप से वार का आदेश दिया। इस दौरान मुग़ल फ़ौज उन हथियारों को जब्त करने के लिए आगे बढ़ीं। लेकिन, सिखों की गरजती बंदूकों ने उन्हें रोक दिया। फिर तीरों की बौछार हुई और मुगलों के घोड़े और फौजी एक-दूसरे के ऊपर ही गिरने लगे।

मुगलों को लगता था कि किले में होने की वजह से सिखों को फायदा है। सिखों की दो बड़ी तोपें गरजी और मुग़ल फ़ौज सहित पहाड़ी राजा भी भाग खड़े हुए। उस दिन सिखों की जीत हुई। यही वो दिन था, जब बौखलाए मुगलों ने आनंदपुर साहिब आने-जाने के रास्तों को बंद करने का फैसला लिया।

गुरु गोविंद सिंह की माँ गुजरी भी सैनिकों की हालत देखते हुए किले को छोड़ने के पक्ष में थीं। कहते हैं अपने दोनों पोतों की मौत की खबर सुनते ही उन्हें ऐसा सदमा लगा था कि उनका भी निधन हो गया था।

यही वजह है कि दिसंबर महीने का सिख पंथ में एक अलग स्थान है। ये चार साहिबजादों का बलिदान ही था कि आगे के सिखों में वीरता और बहादुरी कई गुनी हो गई और उनका साहस आसमान छूने लगा। बाबा बंदा सिंह बहादुर महाराष्ट्र के नांदेड़ से से पंजाब आए, ताकि वो इस क्रूर नरसंहार का बदला ले सकें। इसी बलिदान का परिणाम था कि आगे चल कर महाराजा रणजीत सिंह के नेतृत्व में एक बड़े सिख साम्राज्य का उदय हुआ था।

‘जिन्होंने बदला धर्म उनको ST से बाहर करो’: अब दिल्ली आने को तैयार हैं जनजातीय समाज के लोग, क्रिसमस से पहले राँची में हुआ था जुटान

डी लिस्टिंग यानी धर्मांतरण कर ईसाई अथवा मुस्लिम बनने वाले जनजातीय समाज के लोगों को अनुसूचित जनजाति (ST) के दायरे से बाहर करने को लेकर देशव्यापी आंदोलन चल रहा है। फरवरी 2024 में जनजातीय समाज के लोग अपनी माँगों के समर्थन में दिल्ली में जुट सकते हैं। क्रिसमस से ठीक पहले 24 दिसंबर 2023 को झारखंड की राजधानी राँची में जुटान कर वह अपना इरादा जता चुके हैं।

अनुसूचित जनजाति के लोगों का यह अभियान जनजाति सुरक्षा मंच (JSM) के बैनर तले चल रहा है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार इस अभियान को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और अन्य हिंदुवादी संगठनों का भी समर्थन हासिल है। इसी रिपोर्ट में देशभर के जनजातीय समाज के लोगों का दिल्ली में फरवरी में जुटान होने की बात कही गई है। हालाँकि इसकी तारीख अभी तय नहीं हुई है।

जनजातीय समाज के लोगों का कहना है कि धर्मांतरण करने वाले लोग ST का लाभ उठाकर उनके अधिकार को छीन रहे हैं। उनके अनुसार ईसाई बनने वाले ST बीते 75 साल से अनुसूचित जनजाति को मिलने वाले आरक्षण लाभ का 80 फीसदी फायदा उठा रहे हैं। जेएसएम का कहना है कि ईसाइयों अथवा मुस्लिमों का एसटी आरक्षण पर अधिकार नहीं हैं। लेकिन वे जनजातीय समाज के लोगों को मिले संवैधानिक अधिकारों का अतिक्रमण कर रहे हैं।

इन्हीं माँगों के समर्थन में जनजातीय समाज के करीब 5000 लोगों का जुटान क्रिसमस से ठीक पहले 24 दिसंबर 2023 को राँची के मोरहाबादी मैदान में हुआ। उलगुलान आदिवासी डीलिस्टिंग नमक इस महारैली का आयोजन JSM की ओर से किया गया था। झारखंड के अलग-अलग हिस्सों से आए अनुसूचित जनजाति समाज के लोगों ने पारंपरिक पोशाकों और तीर-धनुष जैसे पारंपरिक हथियारों के साथ इस रैली में शिरकत की थी।

रैली की अध्यक्षता पूर्व केंद्रीय मंत्री और लोकसभा के पूर्व उपाध्यक्ष करिया मुंडा ने की। उनके अलावा बीजेपी के लोकसभा सांसद सुदर्शन भगत, राज्यसभा सदस्य समीर ओरांव, जेएसएम के राष्ट्रीय संयोजक गणेश राम भगत भी मौजूद थे। करिया मुंडा ने कहा, “झारखंड में ईसाई धर्म अपनाने वाले आदिवासियों का प्रतिशत लगभग 15-20% होगा, लेकिन अगर हम सरकारी नौकरियों और आईएएस सहित प्रथम श्रेणी के अधिकारियों को देखें, तो 80-90% वे हैं जो धर्मांतरित हैं।”

जनजातीय समाज के लोगों की डी-लिस्टिंग की डिमांड नई नहीं है। मुंडा ने बताया कि राँची की तरह ही नागपुर, नासिक, मुंबई जैसे कई जगहों पर इन्हीं माँगों को लेकर जनजातीय समाज के लोगों का जुटान हो चुका है। वहीं जेएसएम के राष्ट्रीय सह संयोजक राजकिशोर हांसदा ने कहा कि भारतीय संविधान के निर्माताओं ने देश के 700 से अधिक जनजातीय समूहों के अधिकारों की रक्षा के लिए बेहतरीन कोशिशें की थीं, लेकिन ये फायदा मुट्ठी भर उनलोगों को मिल रहा है जो धर्म बदल चुके हैं। जिन्हें चर्च का समर्थन हासिल है।

‘यदि मैं मर जाऊँ तो समझना यह मर्डर है’: मुंबई एयरपोर्ट से गिरफ्तारी का दावा कर KRK ने लिया सलमान खान का नाम, फिर डिलीट किया ट्वीट

विवादित बयानों से अक्सर चर्चा में रहने वाले कमाल राशिद खान उर्फ KRK ने एक पोस्ट में खुद की गिरफ्तारी का दावा किया। इसके लिए सलमान खान को जिम्मेदार बताया। कहा कि यदि पुलिस स्टेशन या जेल में उनकी मौत हो जाए तो इसे हत्या माना जाए। बाद में उन्होंने यह पोस्ट डिलीट कर लिया।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार केआरके ने 25 दिसंबर 2023 को एक्स/ट्विटर पर एक पोस्ट करते हुए दावा किया कि वे दुबई जा रहे थे, लेकिन मुंबई पुलिस ने उन्हें एयरपोर्ट से गिरफ्तार कर लिया। बताया कि कोर्ट में हर तारीख पर मौजूद रहने के बावजूद 2016 के एक मामले में उनकी गिरफ्तारी की गई है।

उन्होंने लिखा, “मैं पिछले एक साल से मुंबई में ही हूँ। मैं हर बार कोर्ट द्वारा दी गई तारीख पर मौजूद हो रहा हूँ। आज मैं नए साल के सेलिब्रेशन के लिए दुबई जा रहा था। लेकिन, मुंबई पुलिस ने मुझे एयरपोर्ट से ही गिरफ्तार कर लिया।”

केआरके ने पोस्ट में बताया, “पुलिस के मुताबिक मैं साल 2016 में दर्ज हुए केस में वांटेड हूँ। सलमान खान का कहना है कि उनकी फिल्म टाइगर-3 मेरी वजह से फ्लॉप हुई है। अगर मैं किसी भी वजह से पुलिस स्टेशन या फिर जेल के अंदर मर जाता हूँ तो आप सबको पता होना चाहिए कि मेरा कत्ल हुआ है। इतना ही नहीं, आप सबको ये भी पता है कि इसका जिम्मेदार कौन होगा।”

केआरके का वह ट्वीट जो उन्होंने बाद में डिलीट कर लिया (साभार: लाइव हिंदुस्तान)

इस पोस्ट में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को टैग भी किया था। हालाँकि बाद में केआरके ने यह पोस्ट डिलीट कर दिया। इसका कारण उन्होंने नहीं बताया है। न ही उनकी गिरफ्तारी की मुंबई पुलिस ने पुष्टि की है।

बता दें कि अलग तरीके से फिल्मों की समीक्षा करने के लिए पहचान बनाने वाले केआरके को साल 2022 में भी अरेस्ट किया गया था। उस समय दुबई से मुंबई आने पर गिरफ्तारी हुई थी। यह गिरफ्तारी 2020 के एक विवादास्पद सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर हुई थी। केआरके के खिलाफ कई केस दर्ज हैं।

मुंबई की एक अदालत ने 23 जून 2021 को सलमान खान द्वारा दायर मानहानि के मामले में केआरके को फिल्म अभिनेता पर कोई भी पोस्ट या वीडियो शेयर करने से अस्थायी तौर पर रोक दिया था। इसके बाद जब जनवरी 2023 में सलमान खान की फिल्म ‘किसी का भाई किसी की जान’ का टीजर आया तो इसका रिव्यू करने के लिए केआरके ने उनसे इजाजत भी माँगी थी