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दिशा बदली, एजेंडा बदला, वाहन बदला, पर नहीं बदली कॉन्ग्रेस की नीयत का ‘चीनी खोट’: राहुल गाँधी की पूर्व से पश्चिम की ‘भारत न्याय यात्रा’ में अरुणाचल नहीं

2024 के आम चुनावों से पहले कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी एक और यात्रा पर निकलेंगे। इसका नाम ‘भारत न्याय यात्रा’ रखा गया है। 67 दिनों की यह यात्रा 14 राज्यों से गुजरेगी। उत्तर पूर्व के मणिपुर से शुरू होकर पश्चिम के मुंबई में खत्म होगी।

पूर्व से पश्चिम की दूरी नापने के इस क्रम में कॉन्ग्रेस की यह यात्रा अरुणाचल प्रदेश से नहीं गुजरेगी। अरुणाचल वह राज्य है जिसके हिस्सों पर चीन दावा ठोकता रहा है। यह भी दिलचस्प है कि कॉन्ग्रेस पर चीन के सुर में देश विरोधी प्रलाप करने के आरोप लगते रहे हैं।

27 दिसंबर 2023 को कॉन्ग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल और जयराम रमेश ने मीडिया को भारत न्याय यात्रा के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मणिपुर से मुंबई तक की करीब 6200 किलोमीटर की यह लंबी यात्रा 14 जनवरी 2024 को शुरू होगी। इसका समापन 20 मार्च को होगा। इस दौरान यात्रा 14 राज्यों से गुजरेगी।

वेणुगोपाल ने बताया कि यह यात्रा मणिपुर, नागालैंड, असम, मेघालय, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र में होगी। इन राज्यों के 85 जिलों से यात्रा गुजरेगी। इस यात्रा को भारत जोड़ो यात्रा की अगली कड़ी बताया जा रहा है। लेकिन इस बार कई बदलाव भी दिखेंगे। मसलन यह पूरी तरह पद यात्रा नहीं होगी। राहुल गाँधी एक विशेष बस के जरिए सफर करेंगे। इसमें वह कहीं कहीं पैदल भी चलेंगे और लोगों से मुलाक़ात करेंगे।

इसी तरह इस यात्रा का एजेंडा भी भारत जोड़ो यात्रा से अलग होगा। जयराम रमेश ने बताया कि भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल गाँधी ने 3 मुद्दे उठाए थे। ये थे- आर्थिक विषमता, सामाजिक ध्रुवीकरण और राजनीतिक तानशाही। लेकिन भारत न्याय यात्रा का मुद्दा आर्थिक न्याय, सामाजिक न्याय और राजनीतिक न्याय होगा।

भारत न्याय यात्रा को हरी झंडी कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडगे दिखाएँगे। इस यात्रा का निर्णय 21 दिसंबर 2023 को कॉन्ग्रेस वर्किंग कमिटी की बैठक में लिया गया था। राहुल गाँधी ने कॉन्ग्रेस वर्किंग कमिटी की इच्छा के चलते यह यात्रा करने का निर्णय लिया है।

गौरतलब है कि ‘भारत जोड़ो यात्रा‘ सितम्बर 2022 में तमिलनाडु से शुरू होकर 30 जनवरी 2023 को कश्मीर में खत्म हुई थी। 4500 किलोमीटर लंबी इस यात्रा के काफी हिस्सा मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे चुनावी राज्यों से होकर गुजरा था। लेकिन हाल में इन राज्यों के जब चुनावी नतीजे आए तो पता चला कि यात्रा कॉन्ग्रेस की स्थिति में सुधार लाने में कामयाब नहीं रही। राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनावों में पार्टी को करारी शिकस्त झेलनी पड़ी है। राजस्थान और छत्तीसगढ़ में उसे सत्ता खोनी पड़ी है तो मध्य प्रदेश में उसका सूपड़ा साफ हो गया है।

‘लाल तिलक भड़काऊ है’: टीका लगा कर स्कूल पहुँचे छात्र तो शिक्षक ने धुलवाया माथा, अभिभावकों और हिन्दू कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन

उत्तर प्रदेश के मेरठ के एक प्राइवेट स्कूल के शिक्षक पर छात्रों के माथे से तिलक हटवाने का आरोप लगा है। इस पर स्थानीय ‘बजरंग दल’ के कार्यकर्ताओं ने एतराज जताया और विरोध किया। तब कहीं जाकर स्कूल प्रबंधन ने माना कि स्टाफ से गलती हुई है और उसे समझाया जाएगा। स्कूल के माफी माँगने के बाद फिलहाल विवाद शांत हो गया है।

मामला मेरठ के सरूरपुर थाना क्षेत्र में भूनी चौराहे के कदम पब्लिक स्कूल का है। छात्रों के परिवारवालों के मुताबिक, शनिवार (23 दिसंबर, 2023) को छात्र माथे पर तिलक लगाकर स्कूल गए थे। परिवारवालों का आरोप है कि वहाँ स्कूल के पीटी शिक्षक ने छात्रों से माथा में लगे तिलक को धो कर आने को कहा। इस बात का विरोध करने पर शिक्षक ने छात्रों को धमकी दी।

ये सारी बातें घर आकर छात्रों ने अपने परिवार वालों को बता दी। छात्रों के परिवार ने इस घटना की सूचना ‘बजरंग दल’ के प्रान्त विद्यार्थी प्रमुख अभिषेक चौहान को दी। इस घटना के विरोध में वो क्रिसमस के दूसरे दिन मंगलवार (26 दिसंबर, 2023) को ‘बजरंग दल’ कार्यकर्ताओं के साथ कदम पब्लिक स्कूल पहुँच गए।

अभिषेक चौहान की अगुवाई में ‘बजरंग दल’ के कार्यकर्ताओं ने छात्रों के माथे से तिलक हटाने को लेकर विरोध जताते हुए प्रिंसिपल का घेराव किया और नारेबाजी की। स्कूल प्रबंधन के साथ ‘बजरंग दल’ के कार्यकर्ताओं की अच्छी-खासी बहस हो गई। स्कूल की प्रिंसिपल पारुल चौधरी के माफी माँगने के बाद मामला शांत हुआ। उन्होंने माना कि उनके स्टाफ से गलती हुई है और बातचीत कर समस्या सुलझाई जाएगी।

अभिषेक का कहना है कि मामला उनके संज्ञान में आया था कि इस स्कूल के हिंदू छात्रों के तिलक लगाकर जाने पर शिक्षक इसका विरोध किया करते हैं। उन्होंने कहा कि ये गलत है क्योंकि जो हिंदू धर्म को मानता है वो तिलक लगाकर जाएगा। ये हमारी संस्कृति है। उन्होंने आगे कहा कि शिक्षक ने छात्रों के माथे से तिलक धुलवा कर हिंदू धर्म का अपमान किया है।

अभिषेक ने ऑपइंडिया से कहा कि स्कूल वाले लाल तिलक को भड़काऊ बताते हैं। आरोप उस खेल टीचर पर डाला जा रहा है जो घटना के दिन आया ही नहीं था। 9वीं कक्षा में पढ़ने वाले 3 हिन्दू छात्रों के साथ अब तक ऐसा हो चुका है। स्कूल ने इन छात्रों पर मामले को तूल न देने का भी दबाव बनाया था।

उन्होंने आगे कहा कि स्कूल प्रशासन का कहना है कि रोकटोक इसलिए की गई क्योंकि छात्रों के बीच तिलक लगाने का मुकाबला शुरू हो गया था। विरोध बढ़ने पर स्कूल ने माफी माँगी। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि हिन्दू संगठनों का ज्ञापन तैयार है। चेताया गया है कि अब किसी के भी छात्र के साथ ऐसा हुआ तो DM ऑफिस पर सीधे धरना होगा।

वहीं दूसरी तरफ स्कूल के प्रबंधक संजीव चौधरी का कहना है कि तिलक हटाने जैसी कोई बात नहीं है। छात्रों को स्कूल में लिपस्टिक और सिंदूर लेकर आने से रोका गया था। छात्रों के बैग से सिंदूर और लिपस्टिक मिली थी। उनका कहना है कि छात्रों ने अपने अभिभावकों गलत जानकारी दी। इस बारे में उन्हें बता दिया गया है।

सियासत की तरह अखाड़े में भी चित हुए राहुल गाँधी, जिन पहलवानों से मिलने पहुँचे उनके सामने ही बजरंग पुनिया ने पटक दिया: गन्ना-मूली लेकर लौटे

नेहरू-गाँधी परिवार की विरासत के बावजूद राहुल गाँधी अब तक की अपनी राजनीतिक यात्रा में कॉन्ग्रेस के लिए बोझ ही साबित हुए हैं। कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने अब तक जितने भी सियासी प्रयोग किए हैं, उनमें उनको पटखनी मिली है। 2024 के आम चुनावों से पहले कॉन्ग्रेस अखाड़े से राजनीतिक हित साधने की कोशिश कर रही है। लेकिन अखाड़े से भी तस्वीरें राहुल गाँधी के चित होने की ही आ रही है।

राहुल गाँधी बुधवार (27 दिसंबर 2023) की सुबह हरियाणा के झज्जर जिले के छारा गाँव पहुँचे। अखाड़े में पहलवानों से मुलाकात की। ये वही अखाड़ा है, जिससे दीपक और बजरंग पुनिया ने कुश्ती की शुरुआत की थी।

इस दौरान कॉन्ग्रेस नेता ने पहलवानों के साथ बातचीत की। एक्सरसाइज किया। कुश्ती के दांव-पेंच सीखे। मैट पर बजरंग पुनिया के साथ कुश्ती कर चित हुए। राहुल गाँधी ने पहलवानों के साथ बाजरे की रोटी और सरसों का साग भी खाया। रिपोर्ट के अनुसार लौटते समय गन्ने और मूली भी साथ ले गए।

छारा गाँव के इस अखाड़े को वीरेन्द्र आचार्य अखाड़ा कहते हैं। यह अखाड़ा पहलवान दीपक पूनिया का प्रशिक्षण केन्द्र रहा है। दीपक पूनिया कॉमनवेल्थ में स्वर्ण और एशियाई खेलों में रजत पदक भी जीत चुके हैं। राहुल गाँधी का आज रोहतक में भी एक अखाड़े में जाने का कार्यक्रम है।

बजरंग पूनिया ने इस मुलाक़ात के बाद बताया, “राहुल गाँधी हमारा जो रूटीन होता है रेसलिंग का वह देखने आए थे। उन्होंने कुश्ती और व्यायाम भी किया। वह यह देखने आए थे कि एक खिलाड़ी का जीवन कैसा होता है।” राहुल गाँधी ने इस दौरान कोच वीरेन्द्र आचार्य से भी मुलाक़ात की। वीरेन्द्र आचार्य का कहना था कि राहुल गाँधी सुबह 6:15 बजे बिना किसी को बताए पहुँचे थे।

गौरतलब है कि हाल ही में भारतीय कुश्ती महासंघ के चुनाव सम्पन्न हुए थे, जिसमें संजय सिंह की जीत हुई थी। वह कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के करीबी माने जाते हैं। इसके बाद पहलवान साक्षी मलिक ने कुश्ती से संन्यास लेने का निर्णय लिया था। बजरंग पुनिया ने पद्मश्री लौटा दिया था। इसके बाद साक्षी मालिक और बजरंग पूनिया ने कॉन्ग्रेस नेता दीपेंदर हुड्डा और प्रियंका गाँधी से मुलाकात भी की थी।

वैसे केंद्र सरकार ने कुश्ती महासंघ के नवनिर्वाचित अध्यक्ष संजय सिंह और उनकी पूरी टीम को काम करने से रोक दिया है। कुश्ती फेडरेशन का कामकाज एडहॉक कमेटी देखेगी। लेकिन कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष और सांसद बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले पहलवान इससे संतुष्ट नहीं हैं। 26 दिसंबर को इस कड़ी में विनेश फोगाट ने अपना खेल रत्न और अर्जुन पुरस्कार वापस कर दिया था।

गोवर्धन गिरिराज, 21 किमी की परिक्रमा: दंड प्रणाम कर आगे बढ़ रहे हैं राजस्थान के CM की पत्नी और बेटे, Video वायरल

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का परिवार गोवर्धन गिरिराज जी महाराज का अनन्य भक्त है। मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद भी उन्होंने पूरे परिवार के साथ गिरिराज जी का दर्शन किया था। अब सोशल मीडिया में एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें भजनलाल शर्मा की पत्नी गीता और बेटे गिरिराज जी की दंडवत परिक्रमा करते नजर आ रहे हैं।

गिरिराज जी की यह परिक्रमा करीब 21 किमी की है। 5 दिनों में मुख्यमंत्री की पत्नी और बेटे इसे पूरा करेंगे। रिपोर्ट के अनुसार मंगलवार (26 दिसंबर 2023) को तलहटी से विधि-विधान के साथ इन्होंने दण्डवती परिक्रमा शुरू की।

वायरल वीडियो में कड़ी सुरक्षा के बीच राजस्थान के सीएम की जीवनसंगिनी दंडवत परिक्रमा करती नजर आ रही हैं। बेटा कुणाल भी उनके साथ दिखाई पड़ रहा है। माँ-बेटा सड़क परिक्रमा पथ पर पर अन्य श्रद्धालुओं के साथ परिक्रमा करते दिख रहे हैं।

बताते चलें कि गिरिराज महाराज सीएम भजनलाल के इष्ट देव हैं। वे खुद भी करीब डेढ़ दशक से परिवार के साथ गिरिराज जी महाराज की परिक्रमा करते रहे हैं। लेकिन इस बार व्यस्तताओं के चलते मुख्यमंत्री खुद परिक्रमा नहीं कर रहे हैं। गिरिराज जी महाराज का मंदिर गोवर्धन में है।

राजस्थान के सीएम की पत्नी-बेटे की परिक्रमा की वजह से परिक्रमा पथ पर पहले से ही चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्थाओं को और बढ़ा दिया गया है। भरतपुर नदबई क्षेत्र के रहने वाले सीएम शर्मा का अपने इष्ट देव गिरिराज जी के ऊपर अटूट विश्वास और अनुराग है। उनका परिवार काफी धार्मिक है। वे अक्सर परिवार के साथ बंदरों, गायों की सेवा करते रहते हैं। भंडारा करवाते रहते हैं।

उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती में 3 वर्ष बढ़ाई गई आयु सीमा: CM योगी ने लिया निर्णय, सोशल मीडिया पर उठी थी आवाज

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने युवाओं की माँग को मानते हुए पुलिस भर्ती में आयु सीमा को लेकर 3 वर्ष की छूट प्रदान की है। पहले इस भर्ती में आयु सीमा 22 वर्ष थी, जिसे अब बढ़ा कर 25 वर्ष कर दिया गया है। उत्तर प्रदेश के युवाओं ने इस काम के लिए मुख्यमंत्री योगी को धन्यवाद दिया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “युवाओं के हितों एवं उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए आपकी सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती में आरक्षी नागरिक पुलिस के पद पर भर्ती हेतु जारी प्रक्रिया में सभी वर्गों के अभ्यर्थियों के लिए उच्चतम आयु सीमा में तीन वर्ष की छूट देने का निर्णय लिया गया है।”

दरअसल, 22 दिसम्बर 2023 को उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड उत्तर प्रदेश पुलिस में कॉन्स्टेबल पदों के लिए 60,244 भर्तियाँ निकाली थीं। इसमें पुरुष अभ्यर्थियों के लिए आयु की उच्चतम सीमा 22 वर्ष जबकि महिला अभ्यर्थियों के लिए यह सीमा 25 वर्ष रखी गई थी।

इस भर्ती में आयु सीमा के कारण सामान्य वर्ग के युवाओं में काफी रोष था। दरअसल, सामान्य वर्ग के युवाओं को 22 वर्ष की ही आयु सीमा का पालन करना था जबकि अन्य पिछड़ा वर्ग और अनुसूचित जाति/जनजाति को इसमें 5 वर्षों तक की छूट थी।

सामान्य वर्ग के युवाओं का कहना था कि 22 वर्ष से ऊपर हो चुके युवाओं को एक भी मौका उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती का नहीं मिला है क्योंकि पिछली बार 2018 में पुलिस भर्ती लाई गई थी तब वह अंडरएज (वांछित आयु से कम) थे और अब उन्हें ओवरएज (वांछित आयु से अधिक) घोषित कर दिया गया है।

इस भर्ती में पहले 2 जुलाई 2001 के बाद जन्मे सामान्य वर्ग के अभ्यर्थी ही हिस्सा ले सकते थे। अब यह तिथि 2 जुलाई 1998 हो गई है। इससे अब 2018 वाली भर्ती से वंचित युवाओं को भी इसमें हिस्सा लेने का मौका मिलेगा। सामान्य वर्ग के युवाओं का कहना था कि यह भर्ती 2021 में ही आनी थी, जिससे इन्हें मौका मिल जाता लेकिन कोविड और अन्य कारणों से देर हुई, जिसके कारण यह बाहर हो गए। इसी को लेकर उत्तर प्रदेश में युवाओं ने ट्विटर समेत ज्ञापन अभियान चला कर सरकार से भर्ती में आयु सीमा में छूट देने की माँग की थी।

युवाओं ने इसको लेकर सत्तापक्ष के विधायकों से भी अपनी माँग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुँचाई थी। इसी को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 26 दिसम्बर 2023 को इसमें 3 वर्षों की छूट सभी वर्ग के युवाओं को देने का निर्णय लिया है।

आयु सीमा में छूट को लेकर उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड ने आधिकारिक सूचना भी जारी कर दी है। इस भर्ती के लिए आवेदन 27 दिसम्बर 2023 से चालू होकर 16 जनवरी 2024 तक लिए जाएँगे। फरवरी 2024 में इसके लिए परीक्षा करवाए जाने की संभावना जताई जा रही है।

दिल्ली में इजरायली दूतावास के पास धमाके का ‘अल्लाह हू अकबर’ कनेक्शन, जिहाद जारी रखने की धमकी

देश की राजधानी दिल्ली के चाणक्यपुरी इलाके में स्थित इजरायली दूतावास के पास 26 दिसम्बर 2023 की शाम को एक धमाका हुआ। धमाके के बाद मौके पर पहुँची दिल्ली पुलिस को यहाँ से एक पत्र बरामद हुआ है। इसमें जिहाद और अल्लाह हू अकबर जैसे नारों और गाजा में चल रहे युद्ध का जिक्र है।

जानकारी के अनुसार, नई दिल्ली के चाणक्यपुरी इलाके में स्थित इजरायली दूतावास के पास खाली पड़े एक प्लॉट में शाम 26 दिसम्बर 2023 की शाम 5 बजे एक धमाका हुआ। धमाके की सूचना के बाद दिल्ली पुलिस बम स्क्वाड और फॉरेंसिक टीम के साथ मौके पर पहुँची।

दिल्ली पुलिस ने इलाके को सील करके आसपास जाँच की और पाया कि यह धमाका कम आवृत्ति वाला था। दिल्ली पुलिस की जाँच टीम ने इसी प्लॉट से एक पत्र भी बरामद किया है। पत्र इजरायल के राजदूत को संबोधित करके लिखा गया है। पत्र की भाषा काफी अभद्र है और इसमें गालियों का भी उपयोग किया गया है।

यह पत्र एक पन्ने का है और इसे टाइप करके लिखा गया है। यह पत्र इजरायल के झंडे में लपेट कर यहाँ छोड़ा गया था। पत्र में गाजा पट्टी में हो रही इस्लामी आतंक विरोधी कार्यवाही रोकने की धमकी दी गई है। इसमें इस्लामी नारों जैसे कि ‘अल्लाह-हू-अकबर’ और ‘जिहाद’ जैसे शब्दों का उपयोग किया गया है।

इस पत्र में इजरायल के खिलाफ जिहाद जारी रखने की धमकी दी गई है। गौरतलब है कि 7 अक्टूबर 2023 को इस्लामी आतंकी संगठन हमास ने इजरायल पर हमला कर दिया था। इसके बाद इजरायल गाजा में लगातार आतंक विरोधी अभियान चला रहा है। यह धमाका इसी की प्रतिक्रिया में बताया जा रहा है।

इजरायली दूतावास ने इस बम धमाके की पुष्टि की है। भारत में इजरायल के उपराजदूत ओहाद नकश कायनार ने कहा, “आज शाम (26 दिसम्बर 2023) को शाम पाँच बजे के कुछ मिनटों के बाद दूतावास के पास में एक धमाका हुआ। हमारे सारे कर्मचारी और राजनयिक सुरक्षित हैं। हमारी सुरक्षा एजेंसियाँ दिल्ली पुलिस के साथ सहयोग कर रही हैं और मामले की आगे जाँच की जा रही है।” इजरायल के भारत में राजदूत नाओर गिलोन ने स्पष्ट किया है कि धमाके के समय वह दूतावास में नहीं थे।

दिल्ली पुलिस के अलावा धमाके वाली जगह की जाँच राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (NIA) ने भी की है। जाँच में धमाके वाली जगह पर कोई अवशेष नहीं मिले हैं, इसलिए अभी शुरूआती तौर पर इसे एक रासायनिक धमाका माना जा रहा है। हालाँकि, पूरी जानकारी जाँच के बाद ही सामने आएगी।

धमाका करने वालों की तलाश के क्रम में आसपास के सीसीटीवी कैमरों की जाँच की जा रही है। दिल्ली पुलिस को अभी सीसीटीवी में दो लोग दिखे हैं, जिन पर धमाके का शक जताया जा रहा है। दिल्ली पुलिस सीसीटीवी के सहारे इन्हें पहचान कर इनकी तलाश में जुटी है।

उधर इजरायल की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने इजरायली दूतावास के बाहर हुए इस हमले के बाद अपने नागरिकों के लिए यात्रा सलाह जारी की है। सुरक्षा परिषद इसे एक संभावित आतंकी हमला मान कर चल रही है। इसने अपने नागरिकों से भारत और विशेष कर दिल्ली में भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचने की सलाह दी है। साथ ही ऐसे जगहों पर जाने से बचने को कहा है जो कि इजरायली और यहूदी समुदाय के आने जाने वाली जगहें मानी जाती हैं। सुरक्षा परिषद ने अपनी सलाह में इजरायली नागरिकों ने भारत में सतर्कता बरतने की सलाह दी है।

हालाँकि यह पहली बार नहीं है जब नई दिल्ली में स्थित इजरायली दूतावास को निशाना बनाया गया हो। इससे पहले जनवरी 2021 में भी इजरायली दूतावास के बाहर एक धमाका हुआ था। इस धमाके में जान माल की कोई क्षति नहीं हुई थी लेकिन कुछ गाड़ियाँ क्षतिग्रस्त हो गईं थी। दिल्ली पुलिस ने इजरायली दूतावास और यहूदियों के धार्मिक स्थलों समेत अन्य जगह पर सुरक्षा को धमाके के बाद बढ़ा दिया है।

‘मुझे पुरस्कारों से अब घिन आती है…’: बजरंग पुनिया के बाद महिला पहलवान विनेश फोगाट ने अवॉर्ड लौटाने की घोषणा की, PM मोदी को चिट्ठी भी लिखी

बजरंग पुनिया के बाद अब महिला पहलवान विनेश फोगाट ने अपने पुरस्कार लौटाने की घोषणा की है। विनेश ने कहा, “मैं अपना मेजर ध्यानचंद खेल रत्न और अर्जुन अवार्ड वापस कर रही हूँ। इस हालत में पहुंचाने के लिए ताकतवर का बहुत बहुत धन्यवाद।” बता दें कि बजरंग पूनिया ने अपना पद्मश्री पुरस्कार लौटा दिया है।

सोशल मीडिया X (ट्विटर) पर इस घोषणा के साथ ही उन्होंने एक पत्र भी साझा किया है। इस पत्र को उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखा है। विनेश से पहले बजरंग पूनिया ने इसी तरह अपना पद्मश्री पुरस्कार वापस लौटाया था। वहीं, साक्षी मलिक भी कुश्ती से संन्यास का एलान कर चुकी हैं। 

पीएम मोदी को लिखे इस पत्र में उन्होंने कहा है, “माननीय प्रधानमंत्री जी, साक्षी मलिक ने कुश्ती छोड़ दी है और बजरंग पूनिया ने अपना पद्मश्री लौटा दिया है। देश के लिए ओलंपिक पदक मेडल जीतने वाले खिलाड़ियों को यह सब करने के लिए किस लिए मजबूर होना पड़ा, यह सब सारे देश को पता है। आप देश के मुखिया हैं तो आप तक भी यह मामला पहुँचा होगा।”

पत्र में उन्होंने आगे लिखा, “प्रधानमंत्री जी, मैं आपके घर की बेटी विनेश फोगाट हूँ और पिछले एक साल से जिस हाल में हूँ यह बताने के लिए आपको यह पत्र लिख रही हूँ। मुझे याद है साल 2016, जब साक्षी मलिक ओलंपिक में पदक जीतकर आई थी तो आपकी सरकार ने उन्हें ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ का ब्रांड एम्बेसडर बनाया था। आज जब साक्षी को कुश्ती छोड़नी पड़ी तबसे मुझे वह साल 2016 बार बार याद आ रहा है। क्या हम महिला खिलाड़ी सरकार के विज्ञापनों पर छपने के लिए ही बनी हैं। “

विनेश ने पत्र में बृजभूषण सिंह पर निशाना साधते हुए कहा, “कुश्ती की महिला पहलवानों ने पिछले कुछ सालों में जो कुछ भोगा है उससे समझ आता ही होगा कि हम कितना घुट घुट कर जी रही हैं। आपके वो फैंसी विज्ञापनों के फ्लेक्स बोर्ड भी पुराने पड़ चुके होंगे और अब साक्षी ने भी संन्यास ले लिया है। जो शोषणकर्ता है, उसने भी अपना दबदबा रहने की मुनादी कर दी है, बल्कि बहुत भौंडे तरीके से नारे भी लगवाए हैं। आप अपनी जिंदगी के सिर्फ पांच मिनट निकालकर उस आदमी के मीडिया में दिए गए बयानों को सुन लीजिए, आपको पता लग जाएगा कि उसने क्या क्या किया है।”

विनेश फोगाट द्वारा X पर शेयर किया गया पत्र

पत्र में आगे है, “उसने (बृजभूषण सिंह ने) महिला पहलवानों को मंथरा बताया है, महिला पहलवानों को असहज कर देने की बात सरेआम टीवी पर कबूली है और हम महिला खिलाड़ियों को जलील करने का एक मौका भी नहीं छोड़ा है। उससे ज्यादा गंभीर यह है कि उसने कितनी ही महिला पहलवानों को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया है। यह बहुत भयावह है। कई बार इस सारे घटनाक्रम को भूल जाने का प्रयास भी किया लेकिन इतना आसान नहीं है।”

विनेश ने आगे कहा, “बजरंग ने किस हालत में अपना पद्मश्री वापस लौटाने का फैसला लिया होगा मुझे नहीं पता, पर मैं उसकी वह फोटो देखकर अंदर ही अंदर घुट रही हूँ। अब मुझे भी अपने पुरस्कारों से घिन आने लगी है। मुझे मेजर ध्यानचंद खेल रत्न और अर्जुन अवार्ड दिया गया था, जिनका अब मेरी जिंदगी में कोई मतलब नहीं रह गया है। इसलिए प्रधानमंत्री सर, मैं अपना मेजर ध्यानचंद खेल रत्न और अर्जुन अवार्ड आपको वापस करना चाहती हूँ, ताकि सम्मान से जीने की राह में ये पुरस्कार हमारे ऊपर बोझ न बन सकें।”

भारतीय कुश्ती संघ के चुनाव 21 दिसंबर को हुए थे। इसमें संजय सिंह को अध्यक्ष चुना गया था। इसके बाद साक्षी मलिक ने यह कहते हुए कुश्ती से संन्यास ले लिया कि फिर से बृजभूषण जैसा ही चुना गया है तो क्या करें? इसके बाद बजरंग ने पद्म श्री लौटाया और अब विनेश ने अपना खेल रत्न लौटा दिया है। पैरा एथलीट वीरेंद्र सिंह भी अपना पद्म श्री लौटाने की बात कह चुके हैं।

पश्चिम बंगाल के स्कूलों में 8611 कर्मचारियों की नियुक्ति में हुआ घोटाला: WBSSC ने कलकत्ता हाईकोर्ट में भी माना, OMR शीट में गड़बड़ी कर के हुई थी भर्तियाँ

कलकत्ता उच्च न्यायालय में दायर किए गए एक एफिडेविट में शुक्रवार (22 दिसंबर, 2023) को ‘वेस्ट बंगाल स्टेट सर्विस कमीशन (WBSCC)’ ने कबूल किया है कि राज्य सरकार द्वारा संचालित स्कूलों में 8611 कर्मचारियों की नियुक्ति में अनियमितताएँ हुई हैं। संस्था ने माना है कि 2016 में इसके लिए हुई 3 परीक्षाओं में नियमों का उल्लंघन किया गया है। ये परीक्षाएँ कक्षा 9-10 को पढ़ने वाले शिक्षकों, ग्रुप C एवं D के कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए आयोजित की गई थीं।

ये भी सामने आया है कि ग्रुप D के 2823 कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए हुई परीक्षाओं में लगभग 170 लोगों को सीधे नौकरी दे दी गई, उन्हें कोई रिकमेंडेशन लेटर तक इशू नहीं किया गया। साथ ही OMR (ऑप्टिकल मार्किंग रीडर) शीट्स में भी गड़बड़ी की गई थी। वहीं ग्रुप C के लिए 3800 कर्मचारियों की भर्ती की गई थी। इसमें भी गड़बड़ OMR शीट्स का इस्तेमाल किया गया। 77 को बिना किसी रिकमेंडेशन लेटर के ही नौकरी दे दी गई।

वहीं कक्षा 11-12 के विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए 907 लोगों को OMR में गड़बड़ी कर के नियुक्ति दी गई, वहीं 39 लोगों को सीधे ऊँचे रैंक की नौकरी दे दी गई। कक्षा 9-10 के शिक्षकों के लिए 183 लोगों को नौकरियाँ दी गईं। OMR फ्रॉड कर के इस तरह कुल 972 कर्मचारियों को नौकरी दी गई। पश्चिम बंगाल शिक्षक भर्ती घोटाला को SSC घोटाले के नाम से भी जाना जाता है, जिसके लिए ‘स्टेट लेवल सेकेलशन टेस्ट (SLST)’ के तहत परीक्षाएँ ली जाती हैं।

2014 में पश्चिम बंगाल SSC ने ही घोषणा की थी कि SLST के जरिए राज्य द्वारा संचालित स्कूलों में भर्तियाँ की जाएँगी। 2016 में हायरिंग की प्रक्रिया शुरू की गई। उस समय पार्था चटर्जी राज्य में उच्च शिक्षा मंत्री हुआ करते थे। हायरिंग की प्रक्रिया में अनियमितताओं को लेकर कलकत्ता उच्च न्यायालय में कई याचिकाएँ दायर की गई थीं। कम मार्क्स वाले कई अभ्यर्थियों को ऊँची रैंक दे दी गई। जो मेरिट लिस्ट में नहीं थे, उन्हें भी नियुक्ति पत्र मिल गया।

2016 में ‘स्कूल सर्विस कमीशन (SSC)’ द्वारा राज्य द्वारा संचालित एवं समर्थित स्कूलों में ग्रुप D कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए एक अलग अधिसूचना जारी की गई थी। रिक्रूमेंट 2019 में ही एक्सपायर हो गया था। लेकिन, आरोप है कि WBBSE ने 25 लोगों की नियुक्ति कर दी। सुनवाई के दौरान पता चला कि 25 नहीं बल्कि 500 लोगों की नियुक्ति उस पैनल ने कर दी जो एक्सपायर हो चुका था। CBI ने पश्चिम बंगाल के शिक्षा मंत्री परेश अधिकारी और उनकी बेटी अंकिता के खिलाफ मामला दर्ज किया था।

‘नीतीश को PM का सपना दिखाया, तेजस्वी को CM का’: RLJD चीफ उपेंद्र कुशवाहा ने बताया कैसे हर मोर्चे पर फेल होकर इस्तीफा दे रहे ललन सिंह, याद दिलाई भविष्यवाणी

बिहार की सत्ताधारी जनता दल यूनाइटेड (JDU) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह द्वारा अपने पद से इस्तीफा देने की चर्चा हो रही है। हालाँकि, ललन सिंह ने इससे इनकार किया है। इस बीच राष्ट्रीय लोक जनता दल (RLJD) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने नीतीश कुमार और ललन सिंह पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि ललन सिंह हर मामले में फेल साबित हुए हैं। इसलिए वे खुद इस्तीफा दे रहे हैं।

नीतीश कुमार के करीबी रहे उपेंद्र कुशवाहा ने मंगलवार (26 दिसंबर 2023) को कहा, “ललन सिंह नीतीश कुमार को बड़े-बड़े सपने दिखाए कि आप प्रधानमंत्री बन जाइएगा, लेकिन इंडिया गठबंधन की चार बैठक हुई और उन्हें कन्वीनर भी नहीं बनाया गया। इससे ललन सिंह हताश हैं और वह इस मामले में फेल हो गए हैं।” 

RLJD चीफ ने कहा, “सारी बातें साफ-साफ दिखने लगी हैं। हम तो उसी वक्त कहते थे कि RJD के साथ जाकर तेजस्वी के नाम की घोषणा नीतीश जी के द्वारा किया जाना आत्मघाती कदम है। अब ये साबित हो रहा है कि कैसे आत्मघाती कदम है। JDU अब कहीं का नहीं रहा। नीतीश जी की साख मिट्टी में मिल गई। इन लोगों का क्या? कुल मिला-जुलाकर वही साबित हो रहा है, जो हमने कहा था।”

भाजपा के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (NDA) में सीएम नीतीश के शामिल होने के सवाल पर उपेंद्र कुशवाहा ने कहा, “नीतीश कुमार के एनएडीए में वापसी के सवाल पर उपेंद्र कुशवाहा ने कहा, अगर वे NDA में आना चाहते हैं तो यह भारतीय जनता पार्टी को फैसला लेना है। सबसे बड़ी पार्टी भारतीय जनता पार्टी है। बीजेपी के साथ उनका गठबंधन रहा है, उनका संबंध रहा है। इसमें हम अपनी ओर से कोई टिप्पणी करें, यह सही नहीं है।”

नीतीश कुमार को NDA में शामिल कराने के सहयोग करने को लेकर उन्होंने कहा, “नीतीश जी अगर सार्वजनिक रूप से घोषणा करें कि RJD से उनका संबंध टूट गया। इसके बाद NDA गठबंधन में फिर से शामिल होने की बात होगी तो फैसला बीजेपी के लोग करेंगे, लेकिन नीतीश जी के लिए पैरवी हम जरूर कर देंगे।”

RLJD चीफ ने कहा कि ललन सिंह ने लालू यादव को आश्वासन दिया था कि वह जेडीयू का आरजेडी में विलय करवा देंगे। इसके बाद तेजस्वी यादव बिहार के मुख्यमंत्री बन जाएँगे। उन्होंने कहा कि ललन सिंह ने लालू यादव को जो सपना दिखाया था, उसमें वे फेल हो गए। अब लालू और नीतीश दोनों के मामले में ललन सिंह फेल हो गए तो वह अपनी प्रतिष्ठा बचाने के लिए इस्तीफा देने जा रहे हैं।

बता दें कि मंगलवार को खबर आई की जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। हालाँकि, आधिकारिक रूप से इसकी पुष्टि नहीं की गई। ललन सिंह ने भी एक न्यूज चैनल से कहा कि उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया है। उन्होंने कहा कि 29 दिसंबर को दिल्ली में JDU की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक होने जा रही है और उन्हें जो कुछ भी कहना होगा, उसी में वे कहेंगे।

मटन में नहीं थी नल्ली, बिना दुल्हन वापस लौट गए बाराती: तेलंगाना में शादी हुई रद्द, पुलिस के मान-मनौव्वल से भी नहीं बनी बात

तेलंगाना में लड़ाई-झगड़े के बाद एक शादी कैंसल हो गई और इसका कारण बना – मटन। ये हूबहू ऐसा ही हुआ, जो एक तेलुगू फिल्म में भी कभी दिखाया गया था। बाद में स्थिति ऐसी बन गई कि शादी ही रद्द करनी पड़ी। दरअसल, बाराती के स्वागत में दुल्हन के परिजनों ने मांसाहारी भोजन की व्यवस्था की थी। बारात में आए लोगों को मटन तो परोसा गया था, लेकिन उसमें बोन मैरो (हड्डी समेत मटन का वो पीस जिसे चूसा जा सके), जिसे नल्ली भी कहते हैं – वो मौजूद नहीं था।

मटन के साथ नल्ली न सर्व किए जाने के कारन बाराती भड़क गए। बारातियों को ये सब इतना बुरा लगा कि उन्होंने शादी ही कैंसल कर दी। तेलुगू फिल्म ‘बालागम’ में कुछ ऐसा ही दिखाया गया है। सबसे पहले इसे लेकर दूल्हा और दुल्हन के छोटे भाई के बीच विवाद हुआ। इसके बाद शादी ही रद्द हो गई। दुल्हन जहाँ निजामाबाद जिले की रहने वाली थी, वहीं दूल्हा जागतियाल जिले का है। दुल्हन के घर पर ही दोनों पक्षों के परिजनों की मौजूदगी में सगाई हुई थी।

इसके बाद दोनों परिवारों ने भव्य और परंपरागत तरीके से शादी की योजना बनाई। बारात के स्वागत के लिए मटन की व्यवस्था की गई थी। शादी में बाकी सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन अचानक से मटन के साथ बोम मैरो न मिलने के कारण विवाद पैदा हो गया। दोनों पक्षों में फिर झगड़ा शुरू हो गया। मामला थाने तक भी पहुँच गया। पुलिस ने दोनों पक्षों को समझाने के लिए हस्तक्षेप किया, लेकिन दूल्हा पक्ष अपने फैसले पर अड़ा रहा। दूल्हा पक्ष के लोगों का कहना था कि नल्ली वाला मटन न मिलना उनका अपमान है।

दूल्हे के घर वाले शादी रद्द कर के निकल गए। पुलिस भी इस बात से सन्न रह गई कि सिर्फ नल्ली वाले मटन के कारण शादी कैंसल हो गई। दूल्हा पक्ष का कहना था कि दुल्हन पक्ष ने जानबूझकर उनसे ये बात छिपाई कि मेनू में बोन मैरो नहीं है। बता दें कि मार्च 2023 में ही तेलुगू फिल्म ‘बालागम’ रिलीज हुई थी। इसमें भी कुछ ऐसा ही दिखाया गया है कि नल्ली वाला मटन नहीं मिलता है तो फिर शादी ही रद्द हो जाती है। अब वास्तविकता में कुछ ऐसा ही हुआ है।