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‘सिद्धेश्वर मंदिर मेले में मुस्लिमों को ना दी जाए दुकान, ये सनातन संस्कृति का नहीं करते सम्मान’: कर्नाटक में हिंदू संगठनों ने दी चेतावनी

कर्नाटक के विजयपुरा में हिंदू संगठनों ने कोप्पल गविसिद्धेश्वर मेले में मुस्लिम दुकानदारों के स्टॉल लगाने और उनके द्वारा सामानों की बिक्री पर रोक लगाने की माँग की है। संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी माँगें नहीं मानी जाती हैं तो वे इसका कड़ा विरोध करेंगे।

दरअसल, विजयपुरा में लगने वाला हिंदू धार्मिक मेला कोप्पल गविसिद्धेश्वर जात्रे 100 साल से भी अधिक पुराना है। हर साल मकर संक्रांति पर यह मेला लगता है। इस मेले में लाखों लोग पहुँचते हैं। इस ऐतिहासिक मेले की तैयारियाँ अभी जोर-शोर से चल रही हैं।

इस मेले में मुस्लिमों द्वारा स्टॉल लगाने और सामान बेचने को लेकर श्रीराम सेना एवं अन्य हिंदू समूहों ने विरोध किया है। इन्होंने माँग की है कि हिंदू समुदाय के इस त्योहार में मुस्लिम समुदाय को शामिल होने की मंजूरी नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर उनकी माँग नहीं मानी गई तो वे कड़ा विरोध करेंगे।

हिंदू समूह अपनी माँग के समर्थन में शहर के सिद्धेश्वर मंदिर के बाहर इकट्ठे हुए थे। उन्होंने कहा कि मुस्लिम दुकानदार देश के कानून और हिंदू संस्कृति का सम्मान नहीं करते। मुस्लिम समुदाय ने बार-बार हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाई है। उनका दावा है कि गोहत्या, गोमांस बिक्री और लव जिहाद, हिंदू महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार एवं उनकी हत्या के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।

हिंदू कार्यकर्ताओं ने कहा कि राज्य में मुस्लिम दुकानदारों को हिंदू मंदिर परिसरों और धार्मिक मेलों में व्यापार करने की अनुमति नहीं है। श्री सिद्धेश्वर मंदिर मेले में भी इसका पालन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वे इस मुद्दे पर बीजेपी विधायक बसनगौड़ा पाटिल यतनाल को एक ज्ञापन दे चुके हैं और उनकी तरफ से उन्हें अच्छी प्रतिक्रिया मिलने की उम्मीद है।

इसके अलावा मंदिर मठों और धार्मिक संगठनों के महा संघ और हिंदू जन जागृति संघ ने कहा है कि गैर-धार्मिक लोगों के हिंदू मंदिर मेलों में कारोबार करने पर प्रतिबंध है। इस साल अगस्त में कर्नाटक राज्य हिंदू जात्रा व्यापार संघ ने राज्य सरकार से अपील कर चुका है कि बंदोबस्ती विभाग के तहत मेलों या मंदिरों के सालाना उत्सवों के दौरान गैर-हिंदुओं को दुकानें लगाने की अनुमति न दी जाए।

संघ के अध्यक्ष महेश दास ने कर्नाटक हिंदू धार्मिक संस्थान और धर्मार्थ बंदोबस्ती अधिनियम की धारा 31 (12) का हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि मंदिर के पास स्थित भूमि, भवन या स्थल सहित कोई भी संपत्ति गैर-हिंदू लोगों को पट्टे पर नहीं दी जानी चाहिए।

बताते चलें कि अक्टूबर में मंगलुरु पुलिस ने हिंदू मंदिरों में त्योहारों के दौरान मुस्लिम व्यापारियों के बहिष्कार की अपील करने पर दक्षिण कन्नड़ जिला वीएचपी के संयुक्त सचिव शरण पंपवेल पर मामला दर्ज किया था।

गौरतलब है कि 13 दिन पहले ही 7 दिसंबर 2023 को मंगलुरु में व्यापारियों के एक संगठन के अध्यक्ष बीके इम्तियाज ने कथित तौर पर उपायुक्त एमपी मुल्लई मुहिलन को एक ज्ञापन दिया था। इसमें इल्जाम लगाया था कि 14 दिसंबर के ‘षष्ठी महोत्सव’ में मंदिर के बाहर मुस्लिम विक्रेताओं को स्टॉल लगाने की इजाजत नहीं दी जा रही।

इसमें आरोप लगाया गया था कि एक समूह ने मंदिर के अधिकारियों को धमकी देकर मुस्लिम कारोबारियों को स्टॉल आवंटित करने को लेकर चेतावनी दी थी। इसी वजह से मुस्लिम समुदायों के दुकानदारों को ‘षष्ठी महोत्सव’ के दौरान कुडुपु अनंतपद्मनाभ मंदिर में स्टॉल नहीं लगाने दी जा रहीं।

इम्तियाज ने ये भी कहा था कि 6 दिन के मेले के दौरान गरीब मुस्लिम कारोबारियों से उनकी कमाई का मौका छीना जा रहा है। उधर दक्षिण कन्नड़ और उडुपी जिला धार्मिक मेला कारोबारियों की समन्वय समिति ने कहा था कि कई हिंदू मंदिरों ने धार्मिक त्योहारों के दौरान मुस्लिमों को मंदिरों के पास स्टॉल के लिए बोली लगाने पर प्रतिबंध लगा दिया है।

उनका कहना है कि हिंदू धार्मिक रैलियों, त्योहारों और भक्तों पर बिना किसी वजह के अक्सर मुस्लिम समूहों द्वारा हमले किए जाते रहते हैं। इसके अलावा शरिया कानून के मुताबिक, जो कोई भी शरिया के दायरे से बाहर आता है उसे ‘काफिर’ माना जाता है जिसका अनुवाद ‘नास्तिक’ यानी अल्लाह को न मानने वाला होता है।

INDI गठबंधन से नाराज हुए नीतीश कुमार तो JDU ने बुलाई बड़ी बैठक, MP ने बताया- पहले समोसा मिलता था, इस बार सिर्फ चाय-बिस्कुट हुआ

INDI गठबंधन की हुई चौथी बैठक के बाद जनता यूनाइटिड दल के अध्यक्ष नाराज हैं। वहीं उनके एक सांसद ‘सुनील कुमार पिंटू’ ने विपक्षी बैठक को ‘बेनतीजा’ और ‘फ्लाप’ बताया है। उन्होंने कहा कि इस बैठक पर विपक्षी दलों की दृष्टि थी क्योंकि उन्हें लगा कि कोई मजबूत निर्णय निकलकर आएगा। लेकिन कल भी मीटिंग टांय-टांय फिस्स हो गई।

उन्होंने बताया पहले तो मीटिंग्स में चाय समोसे चलते थे पर अभी कॉन्ग्रेस ने खुद कह रखा है कि फंड की कमी है। लोग उन्हें डोनेट करें। जेडीयू सांसद ने कहा कि कल की मीटिंग तो बस चाय बिस्कुट पर रह हई समोसे भी नहीं आ पाए।

बता दें कि सीतामढ़ी से जदयू के सांसद सुनील कुमार पिंटू इससे पहले भी इंडी की बैठक के बारे में बोल चुके हैं कि वहाँ सिर्फ चाय समोसा पार्टी होती है। इसके अलावा उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी तारीफ की थी। तीन राज्यों में मिली भाजपा की जीत पर कहा था ‘मोदी है तो गारंटी है’ के नारे पर जनता ने मुहर लगाई है। वह नेहरू पर भी निशाना साध चुके हैं।

उनके इन्हीं बयानों से खफा नाराज होकर जदयू ने उनसे उनका इस्तीफा माँग लिया था। जदयू ने उनसे नाराजगी जताते हुए कहा था कि उन्होंने पार्टी के नाम पर वोट लिया और अब पार्टी लाइन से हटकर बयानबाजी कर रहे हैं। रिपोर्ट्स बता रही हैं कि जदयू अगली बार सीतामढ़ से देवेश चंद्र ठाकुर को चुनाव लड़ा सकती हैं।

गौरतलब है कि जदयू सांसद के बयान के अलावा यदि देखें तो इंडी गठबंधन की बैठक से नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव भी नजर आ रहे हैं। जदयू ने 29 दिसंबर को पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी (99 सदस्य) और राष्ट्रीय परिषद (200 सदस्य) की बैठक बुलाई है।

दरअसल, इंडी की बैठक को लेकर बताया गया है कि कल जब प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में कॉन्ग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खड़गे का नाम बढ़ाया गया तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव नाराज होकर बैठक से जल्दी निकल गए।

खड़गे के नाम को विपक्षी गठबंधन की बैठक में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आगे बढ़ाया था। जबकि इससे पहले लालू यादव ने बिहार के सीएम नीतीश कुमार का नाम इस पद के लिए आगे बढ़ाने पर समर्थन दिया था। लेकिन विपक्ष की बैठक में इस नाम पर सहमित नहीं बनी। अपना नाम आगे होने पर कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर कोई भी फैसला चुनाव के बाद किया जाएगा।

अब जेडीयू की बैठक में पार्टी ने राष्ट्रीय पदाधिकारियों, राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्यों, दोनों सदनों के सांसदों, जिलाध्यक्षों और समिति के सदस्यों को शामिल होने के लिए कहा है। पार्टी अध्यक्ष नीतीश कुमार के हाव-भाव देख मीडिया में कयास लगने लगे हैं कि शायद वो इन बैठकों में चौंकाने वाले निर्णय लें।

VP के अपमान पर सदन में 1 घंटे खड़े रहे BJP सांसद, जाटों के सबसे बड़े खाप ने बुलाई पंचायत: ‘किसान मोर्चा’ करेगा प्रदर्शन

तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) सांसद कल्याण बनर्जी के उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अपमान पर जाट समुदाय क्रोधित है। जाटों ने एक पंचायत बुला कर इस मामले में कल्याण बनर्जी से माफ़ी की माँग की है। वहीं भाजपा सांसदों ने उप-राष्ट्रपति के समर्थन में राज्यसभा में खड़े रह कर विरोध प्रदर्शन किया है।

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने भी उप-राष्ट्रपति से मुलाक़ात की है। गौरतलब है कि तृणमूल कॉन्ग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की नकल उतारी थी। उन्होंने उप-राष्ट्रपति के हावभाव की नक़ल उतारते हुए अभद्र तरीके से उनकी मिमिक्री की। इस दौरान राहुल गाँधी उनका वीडियो बनाते रहे जबकि अन्य सांसद भी उनका साथ देकर ठहाके लगाते रहे।

इस मामले में भाजपा के राज्यसभा सांसद उप-राष्ट्रपति के समर्थन में राज्यसभा में 20 दिसम्बर, 2023 को एक घंटा खड़े रहे। इसके द्वारा उन्होंने उप-राष्ट्रपति के साथ एकजुटता दिखाई। इस एक घंटे में सदन की कार्रवाई में भाजपा और इसके गठबंधन दलों के सांसद चलती हुई कार्रवाई में खड़े होकर हिस्सा लेते रहे।

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री प्रल्हाद जोशी (प्रहलाद जोशी) ने कहा, “दूसरे सदन के सदस्य राहुल गाँधी ने उप-राष्ट्रपति का अपमान किया है। पहली बार विपक्ष इस स्तर जा रहे हैं कि कोई हद ही नहीं है।” प्रल्हाद जोशी से कल्याण बनर्जी से माफ़ी की माँग भी की।

वहीं उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अपमान पर जाट समुदाय भी आक्रोशित हो गया है। देश की सबसे बड़ी खाप पंचायत के उपाध्यक्ष प्रधान सुरेन्द्र सोलंकी ने इस मामले पर पंचायत बुलाई है। उन्होंने कहा है कि कल्याण बनर्जी ने उप-राष्ट्रपति का अपमान करके किसान समुदाय का अपमान किया है। उन्हें जल्द ही माफ़ी माँगनी होगी वर्ना तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के सांसदों के घरों का घेराव किया जाएगा। उन्होंने राहुल गाँधी के व्यवहार की आलोचना भी की है। उन्होंने आगे बड़ी पंचायतों और विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से फोन पर बातचीत के बाद उप-राष्ट्रपति धनखड़ के साथ लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने भी मुलाक़ात की। उन्होंने कल्याण बनर्जी की हरकत पर दुःख जताया। उन्होंने राहुल गाँधी द्वारा इस घटना की वीडियो बनाए जाने पर भी आश्चर्य जताया। उन्होंने कहा कि यह नया निचला स्तर है लोकतंत्र में विश्वास करने वाले लोग इसकी कभी प्रशंसा नहीं करेंगे।

वहीं कल्याण बनर्जी ने अपने इस कृत्य पर माफ़ी माँगने से मना कर दिया है। उन्होंने कहा, “मिमिक्री एक कला है, इसीलिए मैं माफ़ी नहीं माँगूँगा।” उन्होंने कहा कि मेरा उनकी भावनाएँ आहत करने का इरादा नहीं था। उन्होंने कहा कि मिमिक्री एक कला है इसलिए वो माफ़ी नहीं माँगेंगे।

भाजपा ने इस मामले पर विपक्ष को घेरने का भी इरादा बना लिया है। भाजपा का किसान मोर्चा इस मामले में अब प्रदर्शन करेगा और कल्याण बनर्जी का पुतला फूँकेगा।

तमिलनाडु में बाढ़ से तबाही: सेना ने सँभाला मोर्चा, मछुआरों ने 10000 लोगों की बचाई जान; राज्य ने केंद्र से माँगा ₹19000 करोड़

दक्षिणी तमिलनाडु में मिचौंग तूफान के बाद हो रही भारी बारिश के चलते हर तरफ तबाही मची हुई है। थुथुकुडी, तिरुनेलवेली, तेनकासी और कन्याकुमारी जिले सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। इन जिलों में भारी बारिश की वजह से भयंकर बाढ़ आई हुई है और हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया है।

इन इलाकों में भारतीय नौसेना, तटरक्षक बल और सेना को बचाव एवं सहायता कार्यों में लगाया गया है। सेना नावों और हेलीकॉप्टरों के जरिए बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में फँसे हुए लोगों तक पहुँच रही है। वहीं, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने दिल्ली में पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और राहत कार्यों के लिए 19,000 करोड़ से ज्यादा की माँग की।

वायुसेना, नौसेना, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ राहत-बचाव कार्य में जुटीं

बचाव और राहत कार्यों के लिए 84 से अधिक नावों को तैनात किया गया है। इनके जरिए लोगों को निकाला भी गया। विभिन्न स्थानों पर स्थापित राहत शिविरों के माध्यम से 50,000 से अधिक प्रभावित व्यक्तियों को आवश्यक खाद्य आपूर्ति दी गई और रेलवे स्टेशन पर फँसे लोगों को एयरफोर्स ने भोजन पहुँचाया।

बाढ़ की वजह से हजारों घर और व्यवसाय पानी में डूब गए, जिससे संपत्ति और बुनियादी ढाँचे को व्यापक नुकसान हुआ। सड़कें और पुल बह गए, जिससे परिवहन और संचार नेटवर्क बाधित हो गया। इस बाढ़ की वजह से कृषि फसलों को भारी नुकसान हुआ है। इसके कारण किसानों की आजीविका प्रभावित हुई है।

सबसे ज्यादा तबाही तिरुनेलवेली में दिखी, जहाँ ताम्रपर्णी नदी के खतरे के निशान को पार करने के कारण काफी इमारतें पानी में डूब गईं। वहीं, सेना के जवानों ने थुथुकुडी के श्रीवैकुंडम रेलवे स्टेशन पर फँसे 500 लोगों को भोजन और अन्य राहत सामग्री वितरित की। इसके लिए वायुसेना ने तीन एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (एएलएच) को लगाया था।

तमिलनाडु के मुख्य सचिव शिवदास मीणा ने मंगलवार (19 दिसंबर 2023) को कहा कि पिछले दो दिनों में बारिश के कारण 10 लोगों की मौत हुई है। मुख्य सचिव ने कहा कि तिरुनेलवेली और तूतीकोरिन में रिकॉर्ड बारिश और बाढ़ आई है।

तिरुनेलवेली जिला कलेक्टर केपी कार्तिकेयन ने कहा है कि बाढ़ से 9 लोगों की मौत हुई है। भारी बारिश को देखते हुए तिरुनेलवेली और तेनकासी जिलों में स्कूलों और कॉलेजों में छुट्टी घोषित कर दी गई है। इसी तरह थुथुकुडी जिले में भी छुट्टी घोषित की गई है।

मछुआरों ने बचाई 10 हजार से अधिक की जान

अब भारी बारिश थम गई है, लेकिन कुछ क्षेत्रों में बाढ़ का पानी अभी भी जमा है। राहत और पुनर्वास के प्रयास जारी हैं, जो प्रभावित लोगों को भोजन, आश्रय और चिकित्सा सहायता प्रदान करने पर केंद्रित हैं। तमिलनाडु सरकार भी क्षतिग्रस्त बुनियादी ढाँचे की मरम्मत और बाढ़ के दीर्घकालिक प्रभाव का आकलन करने पर काम कर रही है, तो दक्षिणी तमिलनाडु में बाढ़ प्रभावित समुदायों को राहत और पुनर्वास सहायता प्रदान करने के लिए कई संगठन काम कर रहे हैं।

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, तिरुनेलवेली जिले के उवारी, कूथनकुली, इदिन्थाकराई और कूट्टापुली और कन्नियाकुमारी जिले के चिन्नामुट्टम और थूथूर के लगभग 400 मछुआरों ने सोमवार और मंगलवार को तिरुनेलवेली जिले में अपनी 72 नावों का उपयोग करके 10,000 से अधिक लोगों को बचाया।

मंत्री थंगम थेनारासु ने मछुआरों को धन्यवाद देते हुए कहा कि इन्होंने तिरुनेलवेली जंक्शन, कोक्कीराकुलम, जिला कलेक्टरेट, सिंधुपूनथुराई, सीएन किरामम, कुरुक्कुथुराई, नोचिकुलम, मुन्नीरपल्लम, चेरनमहादेवी और अंबासमुद्रम सहित विभिन्न स्थानों पर लोगों को बचाया। थेनारासु ने कहा, “उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों को राहत शिविरों में पहुँचाया।”

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने पीएम मोदी से की मुलाकात

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से राहत पहलों पर चर्चा करने और अतिरिक्त मदद माँगने के लिए मुलाकात की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से तमिलनाडु की मदद के लिए 19 हजार करोड़ रुपए से अधिक की माँग की।

उन्होंने मिचौंग तूफान और दक्षिणी जिलों में भारी बारिश से हुए नुकसान को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने और आपदा राहत कोष से मदद देने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि राज्य के दक्षिणी जिलों में पिछले 100 सालों में बारिश से इतना अधिक नुकसान नहीं हुआ था।

मुख्यमंत्री स्टालिन ने कहा, “मैंने पीएम से तत्काल राहत के लिए 7,033 करोड़ और स्थायी राहत के लिए 12,659 करोड़ रुपए की माँग की है। हमने बाढ़ से प्रभावित लोगों को राहत के रूप में 6000 रुपए देने की घोषणा की है। इसे बाँटा जा रहा है। 8 मंत्रियों और 10 आईएएस अधिकारियों को बचाव और राहत के लिए भेजा गया है।”

उन्होंने आगे कहा, “एसडीआरएफ की 15 टीमें और एनडीआरएफ की 10 टीमें अन्य बलों के साथ जमीन पर राहत एवं बचाव कार्य में लगी हुई हैं। अब तक 12,553 लोगों को बचाया गया है। उन्हें 143 राहत शिविरों में रखा गया है। बाढ़ वाले इलाकों में हेलीकॉप्टरों से भोजन बाँटा जा रहा है।”

चामुंडा माता मंदिर की बाउंड्री बनाने पर मुस्लिम पक्ष ने मचाया हंगामा, पुलिस पर भी किया पथराव: अब्दुल्ला-रहीस सहित 34 पर FIR, 5 गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में मंदिर की बाउंड्री के निर्माण को लेकर दो समुदाय आमने-सामने आ गए। इससे सांप्रदायिक तनाव फैल गया है। इस दौरान मामले को शांत कराने गई पुलिस पर भी पत्थरबाजी की गई। पुलिस ने अब्दुल्ला और रहीस सहित कुल 34 आरोपितों पर FIR दर्ज करके 5 लोगों को गिरफ्तार किया है। गाँव में तनाव को देखते हुए अतिरिक्त फ़ोर्स तैनात कर दी गई है। घटना मंगलवार (19 दिसंबर 2023) की बताई जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला मुरादाबाद के मूढ़ापांडे थाना क्षेत्र का है। यहाँ के रौंडा में माता चामुंडा देवी का मंदिर है, जो आसपास के हिन्दुओं की आस्था का प्रतीक है। मंदिर की चारदीवारी जर्जर है, जिसको बनवाने के लिए श्रद्धालु पिछले काफी समय से प्रयास कर रहे हैं। 25 नवंबर 2023 को जब चारदीवारी के निर्माण का काम हो रहा था, तभी मुस्लिम पक्ष आकर विरोध करने लगा। तब मौके पर पहुँची पुलिस ने निर्माण काम रुकवा दिया था।

इस बीच 19 दिसंबर 2023 (मंगलवार) को एक बार फिर से मंदिर की चारदीवारी का निर्माण काम शुरू किया गया। इसी दौरान भी मुस्लिम पक्ष के लोग वहाँ जमा हो गए। इन्होंने निर्माण का विरोध किया। विरोध करने वालों में मुस्लिम महिलाएँ भी शामिल थीं। उन्होंने मंदिर निर्माण को नहीं रोकने पर अपने मजहबी स्थल पर निर्माण शुरू करने का एलान कर दिया। इसके बाद हालत तनावपूर्ण हो गए। इसके बाद पुलिस मौके पर पहुँच गई।

आरोप है कि बातचीत के दौरान ही मुस्लिम पक्ष पत्थरबाजी करने लगा जिसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जब पुलिस ने बल प्रयोग करके उपद्रवियों को काबू करना चाहा तो पत्थरबाज पुलिस से ही भिड़ गए। पत्थरबाजी की चपेट में महिला कॉन्स्टेबल भी आईं। हालाँकि, पुलिस ने उपद्रवियों को काबू किया। चौकी इंचार्ज सब इंस्पेक्टर सुरेंद्र कुमार की तहरीर पर कुल 34 आरोपितों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई है।

इसमें अब्दुल्ला और रहीस के नाम प्रमुख हैं। इन सभी पर पुलिस टीम से अभद्रता, सरकारी कार्य में बाधा डालना और क्रिमिनल एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। अभी तक 5 आरोपितों की गिरफ्तारी की सूचना है। वहीं, कई आरोपित फरार हैं।

मामला 2 समुदायों से जुड़ा होने के चलते गाँव में अतिरिक्त पुलिस फ़ोर्स के साथ PAC बल तैनात कर दिया गया है। स्थानीय पत्रकार सुमित टंडन द्वारा ऑपइंडिया को भेजे गए वीडियो में मुस्लिम पक्ष की भीड़ इंस्पेक्टर से बहस करती दिख रही है। इस बहसबबाजी में कई महिलाएँ भी शामिल हैं। भीड़ इंस्पेक्टर पर भी कार्रवाई कराने की धमकी दे रही है। बहस करती भीड़ हिन्दू पक्ष की तरफ बढ़ने पर आमादा थी।

वीडियो में मुस्लिम पक्ष से जमा भीड़ में मारने-पीटने की बातें भी सुनी जा सकती हैं। मुस्लिम पक्ष की तरफ से जैबुन्निशा नाम की महिला वकील ने ये तो माना कि मंदिर पहले से बना है, लेकिन उनका आरोप है कि हिन्दू पक्ष मंदिर का विस्तार कर रहा है। जैबुन्निशा ने खुद को कानून की जानकर बताया है।

‘सा$ च%र, जान से मार देंगे’: जीशान-नासिर ने अंबेडकर तालाब पर दलित युवक को पटक कर पीटा, चाकू घोंपने की कोशिश – पीड़ित ने बताई प्रताड़ना की कहानी

उत्तर प्रदेश के लखनऊ में बच्चों के आपसी विवाद के बाद जीशान, अबूजर, नासिर और उसके साथियों ने रविवार (17 दिसंबर 2023) को एक दलित परिवार पर हमला कर दिया। पीड़ित का आरोप है कि ‘सा* च*र..’ कहकर जातिसूचक गालियाँ दी गईं और चाकू घोंपने की कोशिश की गई। पुलिस ने शांतिभंग की धाराओं में तीनों का चालान कर दिया है। ऑपइंडिया से बात करते हुए पीड़ित ने खुद को मुस्लिम बहुल इलाके का निवासी बताया है।

मामला लखनऊ के ठाकुरगंज थाना क्षेत्र का है। यहाँ बाड़ी बालागंज निवासी अनुसूचित जाति के आकाश कुमार ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में आकाश ने कहा कि उनके परिवार और जीशान के घर के बच्चों के बीच किसी बात को लेकर बहस हो गई थी। इस झगड़े को बातचीत के जरिए सुलझा लिया गया था। आकाश का कहना है कि वह घटना के दिन दोपहर लगभग 3:30 पर अम्बेडकर तालाब के पास खड़ा था।

शिकायत में आकाश ने आगे बताया कि इसी दौरान वहाँ जीशान, अबूजर और नासिर अपने कुछ साथियों के साथ पहुँच गए। आरोपितों ने उससे झगड़ा करना शुरू कर दिया। इसी बीच आकाश अपने घर की तरफ आ गया। तभी जीशान ने कहा, “सा$ तुम सब चमा$ को जान से मार देंगे।” जीशान के ललकारते ही उसके बाकी साथी आकाश पर टूट पड़े। उन्होंने लात-घूँसों से आकाश को बुरी तरह से पीटा।

जब आकाश ने आत्मरक्षा का प्रयास किया तब अबूजर और नासिर ने अपने पास छिपाकर लाए गए चाकू को निकाल लिया और उसे घोंपने का प्रयास किया। जीशान ने एक बार फिर से अपने साथियों को आकाश की हत्या के लिए ललकारा। इस घटना में आकाश को गंभीर चोटें आई हैं। इस शिकायत पर पुलिस ने जीशान, नासिर और अबूजर को नामजद करते हुए कुछ अज्ञात लोगों पर FIR दर्ज की है।

ऑपइंडिया के पास FIR की कॉपी मौजूद है। इन सभी आरोपितों पर IPC की धारा 147, 323, 504 और 506 के अलावा SC/ST एक्ट के सेक्शन 3(1)(द) व 3(1)(ध) के तहत केस दर्ज हुआ है। ऑपइंडिया से बात करते हुए SHO ठाकुरगंज ने बताया कि आरोपितों का धारा 151 के तहत चालान किया गया है। हालाँकि, उन्होंने कहा कि मामले की जाँच ACP सुनील कुमार शर्मा कर रहे हैं।

हम मुस्लिम बहुल इलाके के निवासी

ऑपइंडिया ने इस मामले में पीड़ित आकाश से बात की। आकाश ने बताया कि उनके घर के चारों तरफ मुस्लिमों की आबादी और वहाँ हिन्दू काफी कम संख्या में हैं। उनका आरोप है कि इस प्रकार की घटना पहली बार नहीं है, बल्कि आए दिन उन्हें मुस्लिमों की ओर से परेशानी का सामना करना पड़ता है।

बकौल आकाश, घटना के दिन उनके परिवार के एक छोटे बच्चे के सिर में भी काफी चोटें आईं थीं। आकाश का कहना है कि अगर घटना के दिन उनका हाथ समय से न बीच में आया होता तो हमलावरों की चाकू उनके पेट में घुस जाती। आकाश ने उम्मीद जताई है कि उनकी शिकायत पर पुलिस आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगी।

नेता सलीम बना रहा सुलह का दबाव

आकाश ने हमें आगे बताया कि सलीम नाम के इलाके का स्थानीय नेता उन्हें के बार-बार केस वापस लेने के लिए बोल रहा है। आकाश जिस जगह का निवासी है, वहीं से सलीम पार्षद का चुनाव लड़ता है। आकाश ने हमसे कहा कि उन्होंने सलीम को ये कहते हुए केस वापसी से मना कर दिया कि अगर उस दिन उनकी जान चली गई होती तो कैसा समझौता होता।

राष्ट्रपति ने जताया दुःख, PM मोदी फोन कर बोले – 20 सालों से ये सब झेल रहा: उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अपमान पर जाट समाज ने कहा – चुनाव में करेंगे हिसाब

उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने फोन करके उनके अपमान पर दुःख जताया है। उन्होंने कहा है कि वह इस प्रकार के अपमान पिछले 2 दशकों से झेल रहे हैं। प्रधानमंत्री ने इसे दुखद घटना करार दिया है। उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने इसे उनकी किसान पृष्ठभूमि और जाट समाज से होने को लेकर अपमान बताया था। मंगलवार (19 दिसम्बर, 2023) को विपक्ष के सांसदों ने संसद के बाहर उप-राष्ट्रपति की नक़ल उतारी थी और उनका मजाक उड़ाया था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी इस मामले पर दुःख जताया है।

बता दें कि उप-राष्ट्रपति राज्यसभा के सभापति भी होते हैं। उन्होंने सांसदों द्वारा अपमान किए जाने पर ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का फ़ोन कॉल आया। उन्होंने पवित्र संसद के भीतर कुछ माननीय सांसदों के ड्रामेबाजी पर व्यथा जताई। उन्होंने कहा कि वह इस प्रकार के अपमान पिछले 20 वर्षों से झेल रहे हैं लेकिन उप-राष्ट्रपति जैसी संवैधानिक संस्था के साथ ऐसा बर्ताव वह भी संसद के भीतर, दुर्भाग्यपूर्ण था।”

आगे उप-राष्ट्रपति ने लिखा, “मैंने प्रधानमंत्री को बताया कि कुछ लोगों की कलाकारियाँ मुझे मेरा कर्तव्य निभाने और हमारे संविधान में लिखे सिद्धांतों को बनाए रखने से रोक नहीं सकती। मैं उन मूल्यों के लिए ह्रदय से प्रतिबद्ध हूँ। कोई भी अपमान मेरा रास्ता नहीं रोक सकता।”

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी इस मामले पर दुःख जताया। उन्होंने लिखा, “जिस तरह उप-राष्ट्रपति का संसद भवन में अपमान किया गया, वह देखकर मैं चकित थी। जनप्रतिनिधियों को खुल कर उनकी बात रखनी चाहिए लेकिन यह सम्मानजनक तरीके से होना चाहिए। यह हमारी संसदीय परम्परा रही है और हमें इस पर गर्व है, भारत के लोग हमें इसे बनाए रखने की आशा करते हैं।”

उप-राष्ट्रपति का अपमान करने वाले सांसदों ने नई संसद के मकर द्वार पर धरना दिया था। इस धरने के दौरान तृणमूल कॉन्ग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की अपमानजनक तरीके से नक़ल उतारी और मजाक उड़ाया। इस दौरान कॉन्ग्रेस नेता और लोकसभा सांसद राहुल गाँधी कल्याण बनर्जी का वीडियो अपने फ़ोन से बनाते रहे और बाकी सांसद भी उप-राष्ट्रपति का मजाक उड़ाते रहे। इस घटना का वीडियो वायरल हुआ है।

उप-राष्ट्रपति ने संसद में इन घटनाओं पर अपना दुख और पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा था कि उनकी किसान और जाट पृष्ठभूमि को निशाना बनाए जाने से वह व्यक्तिगत रूप से आहत महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कॉन्ग्रेस नेता पी चिदंबरम से इस घटना पर दुख जताते हुए अपनी बात रखी थी। वहीं कई जाट संस्थाओं ने भी आंदोलन की चेतावनी देते हुए उनके अपमान पर दुःख जताया है। ‘द जाट एसोसिएशन’ ने कहा कि आने वाले लोकसभा चुनाव में जाट समाज कॉन्ग्रेसी तत्वों द्वारा जाट समाज के गौरव उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की खिल्ली उड़ाए जाने का हिसाब देगा।

उन्होंने कल इस मामले में सदन में कहा, “मैंने सदन स्थगित कर दी है। लोगों के मन में इस संस्था के ख़िलाफ़ किस तरह की प्रतिक्रिया है, इसका अंदाज़ा आपको नहीं है और हमें इसका सबसे निचला स्तर देखने का मौक़ा मिला। श्री चिदम्बरम यहाँ हैं। श्री चिदम्बरम, आप बहुत वरिष्ठ सदस्य हैं। कल्पना कीजिए कि मेरे दिल पर क्या बीत रही होगी जब आपके वरिष्ठ नेता एक संसद सदस्य का चेयरमैन के संस्थान का मजाक उड़ाते हुए वीडियो बनाते हैं, और एक व्यक्ति के रूप में मुझे निशाना बनाते हैं।”

आगे उन्होंने कहा, “किसान के रूप में मेरी पृष्ठभूमि को निशाना न बनाएँ, समुदाय के सदस्य के रूप में मेरी पृष्ठभूमि को निशाना न बनाएँ। चेयरमैन की संस्था को तबाह कर दिया गया है और वह भी एक राजनीतिक दल द्वारा जो इतनी दूर चला गया कि एक संसद सदस्य, एक वरिष्ठ सदस्य, दूसरे सदस्य की वीडियोग्राफी करता है। किस लिए? मैं आपको बताता हूँ, मुझे कष्ट हुआ था। इंस्टाग्राम पर, श्रीमान चिदम्बरम, आपकी पार्टी ने एक वीडियो डाला था जिसे बाद में वापस ले लिया गया। यह मेरे लिए शर्म की बात थी।”

नीलकंठ मंदिर को ध्वस्त कर बनाई गई जामा मस्जिद शम्सी: कोर्ट ने तय कर दी सुनवाई की तारीख़, होगा सर्वे?

उत्तर प्रदेश के बदायूँ जिले की जामा मस्जिद शम्सी और नीलकंठ मंदिर विवाद पर अदालत में अब 6 जनवरी, 2023 को सुनवाई होगी। जामा मस्जिद शम्सी का वैज्ञानिक सर्वे और वहाँ पूजा करने की अनुमति की माँग संबंधित विवाद पर अदालत में सुनवाई हुई थी।

दरअसल, इसे मामले को लेकर मंगलवार (19 दिसंबर, 2023) को ‘अखिल भारत हिंदू महासभा’ की तरफ से सिविल जज सीनियर डिवीजन (फास्ट ट्रैक) अदालत में अर्जी दी गई थी। अपनी अर्जी को सही साबित करने के लिए हिंदू महासभा की तरफ से गजटीय सुबूत भी पेश किए गए थे।

अगस्त 2022 में हिन्दू महासभा के प्रदेश संयोजक मुकेश पटेल ने बदायूँ की जिला अदालत में मस्जिद में पूजा पाठ करने की याचिका दायर दी थी। हिन्दू पक्ष ने बदायूँ की जामा मस्जिद शम्सी में पूजा के अधिकार और मस्जिद के ASI के सर्वेक्षण की माँग की थी। उन्होंने दावा किया था कि जामा मस्जिद शम्सी वाली जमीन पर अतीत में नीलकंठ महादेव मंदिर था। मुस्लिम शासकों ने इस मंदिर को ध्वस्त कर मस्जिद बना दी थी। वहाँ अभी भी मंदिर के अवशेष होने का तर्क देते हुए हिंदू पक्ष ने वहाँ पूजा की मंज़ूरी की माँगी थी।

बताते चलें कि इस केस में अदालती सुनवाई के दौरान जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी, जिला प्रशासन, वक्फ बोर्ड, पुरातत्व विभाग ने अपना-अपना पक्ष पेश कर चुका है। वहीं जामा मस्जिद शम्सी की तरफ से इस याचिका को खारिज करने की माँग की गई है।

मंगलवार को इस अदालत में सुनवाई के दौरान हिंदू महासभा के अधिवक्ता वेदप्रकाश साहू ने जामा मस्जिद शम्सी वैज्ञानिक सर्वे की अर्जी भी लगा दी। उनके मुताबिक, याचिका के समर्थन में अदालत को गजेटियर में मौजूद सुबूत दिए गए हैं। अब याचिका सुनवाई का इंतजार है। दावा किया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में अयोध्या, काशी और मथुरा के बाद बदायूँ की जामा मस्जिद शम्सी भी इस्लामी आक्रांताओं ने भगवान शंकर के मंदिर को नष्ट कर खड़ी की थी।

हिन्दू पक्ष ने दावा है कि इस जगह पर भारत में इस्लामी आक्रांताओं के आने से पहले भगवान शिव का नीलकंठ मन्दिर था। बदायूँ के सूबेदार रहने के दौरान भारत के पहले इस्लामिक शासक कुतुबुद्दीन ऐबक के दामाद इल्तुतमिश ने इस मंदिर को तोड़कर यहाँ जामा मस्जिद शम्सी बनवाई थी।

इसका पहला सुबूत पहला प्रमाण भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की साल 1875 से 1880 तक बदायूँ से लेकर बिहार तक किए गए सर्वेक्षण की 148 साल पुरानी ‘TOURS IN THE GANGETIC PROVINCES from Badaon to Bihar’ नाम की रिपोर्ट में मिलता है। इसे खुद ASI के नींव रखवे वाले अलेक्जेंडर कनिंघम ने तैयार किया था।

इस रिपोर्ट के पहले पेज पर ही बदायूँ की विवादित जामा मस्जिद शम्सी की सर्वेक्षण रिपोर्ट है। इस सर्वे रिपोर्ट में लिखा है कि बदायूँ में इस्लामिक आक्रांताओं के शासन से पहले यहाँ के राजा महिपाल ने हरमंदर नाम से एक हिन्दू मन्दिर बनवाया था। इसे जिसे मुस्लिम आक्रांताओं ने तोड़ दिया था और इसी जगह पर बदायूँ की जामा मस्जिद को बनवाया था।

फिजियोथेरेपिस्ट ने रसोई के चाकू से 18 बार ताबड़तोड़ वार कर पत्नी को मार डाला, लाश छिपाई, बच्चों को नशा देकर बेहोश किया: यूपी पुलिस ने दबोचा

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक पति ने अपनी पत्नी की बेरहमी से हत्या कर दी है। आरोपित का नाम आनंदेश्वर अग्रहरि है, जिसने अपनी बीवी पर चाकुओं के ताबड़तोड़ 18 वार किए। हत्या की वजह आनंदेश्वर के जुए की लत बताई जा रही है जिसका मृतका विरोध करती थी। घटना के दौरान कातिल पति ने अपने बेटों को नशीला पदार्थ पिला कर बेहोश कर दिया था। मंगलवार (5 दिसंबर, 2023) को इस हत्याकांड को अंजाम दे कर आनंदेश्वर कोलकता और वाराणसी घूमता रहा। आखिरकार सोमवार (18 दिसंबर, 2023) को उसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना लखनऊ पश्चिमी इलाके के ठाकुरगंज थाना क्षेत्र की है। यहाँ कई साल पहले आनंदेश्वर की शादी संध्या से हुई थी। आनंदेश्वर फिजियोथेरेपिस्ट के साथ में मेडिकल रिप्रेजेंटिव (MR) का भी काम करता है। इस शादी से संध्या 2 बच्चों की माँ बनी। इसमें बड़ा बेटा मूक-बधिर था। बताया जा रहा है कि आनंदेश्वर को जुआ खेलने और नशे की लत थी। वह आए दिन अपनी बीवी से पैसे माँगा करता था। पति-पत्नी एक दूसरे पर अवैध संबंधों का भी आरोप लगाया करते थे जिसकी वजह से आए दिन दोनों में झगड़े हुआ करते थे।

बताया जा रहा है कि 5 दिसंबर को एक बार फिर से पति-पत्नी में पैसों को लेकर फिर झगड़ा हुआ। इसी दौरान आनंदेश्वर ने रसोई में रखा चाकू उठा कर संध्या पर ताबड़तोड़ 18 वार किए। घटना के समय मृतका का छोटा बेटा स्कूल पढ़ने गया था जबकि बड़ा बेटा घर पर ही मौजूद था। मूक-बधिर होने के कारण उसे अपनी माँ की चीखें नहीं सुनाई दीं। हत्या के बाद आनंदेश्वर ने अपनी बीवी की लाश छिपा दी। जब छोटा घर आया तो आरोपित पति ने उसे भी नशीली दवा दे कर बेहोश कर दिया। इसके बाद आरोपित घटनास्थल से फरार हो गया।

मृतका के मायके वालों का फोन बीच में आया पर दोनों बेटों के अचेत होने के चलते कोई उठा नहीं पाया। जब छोटे बेटे को होश आया तो उसने अपनी माँ की लाश देखी। वह चीखने लगा जिसे सुन कर आसपास के लोग जमा हो गए। इसी बीच मृतका के मायके वालों को सूचना दी गई। मायके से अमन साहू की शिकायत पर आरोपित आनंदेश्वर पर हत्या की FIR दर्ज कर ली गई। इस बीच आरोपित पुलिस से बचने के लिए कोलकाता और वाराणसी घूमता रहा।

हालाँकि, पुलिस ने उस पर नजर रखी। सोमवार को उसके लखनऊ में होने की सूचना पर पुलिस ने कृष्णानगर इलाके में दबिश दी जहाँ से आनंदेश्वर को गिरफ्तार कर लिया गया। मामले में जाँच और अन्य जरूरी कार्रवाई की जा रही है।

हिंदी राष्ट्रीय भाषा, देश का नाम ‘भारत’, प्रेस कॉन्फ्रेंस से नदारद: विपक्ष की बैठक में किसकी तरफ से थे नीतीश कुमार? मान-मनौव्वल करते रहे I.N.D.I. गठबंधन के नेता

दिल्ली में बुधवार (19 दिसम्बर, 2023) को आयोजित हुई I.N.D.I. गठबंधन की बैठक में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने DMK सांसद TR बालू को झिड़क दिया। उन्होंने बालू से कहा कि हिंदी राष्ट्रीय भाषा है और सभी को इसे सीखना चाहिए। बालू नीतीश के बयान का अनुवाद अंग्रेजी में करने की माँग कर रहे थे।

दिल्ली में आयोजित इस बैठक में नीतीश कुमार ने अंग्रेजी को एक औपनिवेशिक मानसिकता का परिचायक बताया और साथ ही देश का नाम ‘भारत’ किए जाने की भी माँग रख दी। नीतीश कुमार के हिंदी और भारत नाम को जोर देने पर बैठक में मौजूद बाकी विपक्षी नेता सन्न रह गए। इस बैठक में सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी, लालू प्रसाद यादव, अखिलेश यादव, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री MK स्टालिन और उनके सांसद TR बालू, बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, कम्युनिस्ट नेता सीताराम येचुरी और अन्य सभी नेता शामिल हुए थे।

विपक्ष की बैठक में ‘हिंदी बनाम अंग्रेजी’ पर विवाद

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नीतीश कुमार द्वारा इस बैठक में रखी गई बातों का अनुवाद द्रमुक सांसद टीआर बालू ने माँगा। नीतीश कुमार इस बैठक में हिंदी में बातचीत कर रहे थे। इस पर टीआर बालू ने उनकी बातों का अनुवाद अंग्रेजी में उपलब्ध करवाने की बात कही।

बैठक में यह काम राजद के सांसद मनोज झा कर रहे थे। वह हिंदी में बोलने वालों की बातों का अनुवाद अंग्रेजी में करके उन नेताओं को बता रहे थे। उन्होंने लालू प्रसाद यादव की बातों का अनुवाद भी किया। हालाँकि, नीतीश की बातों का अनुवाद TR बालू द्वारा माँगे जाने पर नीतीश भड़क गए।

नीतीश कुमार ने कहा टीआर बालू से कहा कि हिंदी हमारी राष्ट्रीय भाषा है और सभी को इसे सीखना चाहिए। उन्होंने अंग्रेजी को औपनिवेशिक मानसिकता का परिचायक बताया और कहा कि यह हम पर अंग्रेजों द्वारा लादी गई थी। उन्होंने मनोज झा से कहा कि वह टीआर बालू के लिए अनुवाद ना करें।

नीतीश कुमार के इस उखड़े रुख के बाद I.N.D.I. गठबंधन की बैठक में सन्नाटा छा गया और कुछ देर तक बाकी नेताओं को नीतीश कुमार की मान-मनौव्वल करनी पड़ी। इसके बाद कई नेताओं ने हिंदी और अंग्रेजी दोनों को मिलाकर अपनी बात रखी।

बैठक में ‘इंडिया बनाम भारत’ पर नीतीश कुमार ने छेड़ी चर्चा

नीतीश कुमार केवल हिंदी के अनुवाद माँगने पर ही नहीं भड़के बल्कि उन्होंने देश के आधिकारिक नाम की भी चर्चा छेड़ दी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने कहा कि देश का नाम इंडिया की बजाय ‘भारत’ ही होना चाहिए। उनके इस कथन से बाकी नेता काफी असहज हो गए। बीते दिनों चली इंडिया बनाम भारत की बहस में कई कॉन्ग्रेस नेताओं ने इंडिया नाम का समर्थन किया था। नीतीश कुमार बैठक के बाद हुई साझा कॉन्फ्रेंस में भी शामिल नहीं हुए।

इस बैठक में सब कुछ ठीक ना रहने के संकेत भी मिले हैं। बैठक से पहले जहाँ कॉन्ग्रेस ने अपनी ही एक चुनाव समिति बना ली तो वहीं बैठक के भीतर प्रधानमंत्री पद के चेहरे को लेकर बड़ा उलटफेर हो गया। बैठक में बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 2024 में प्रधानमंत्री के चेहरे के तौर पर कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का नाम प्रस्तावित कर दिया।

उनके इस प्रस्ताव का दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने समर्थन भी कर दिया। खड़गे ने कहा कि इस पर चुनाव के बाद बात करेंगे। इससे बैठक में भाग ले रहे कई नेता धर्मसंकट में पड़ गए। कॉन्ग्रेस के लिए यह गले की हड्डी वाली स्थिति बन गई।

वह खड़गे के नाम का खुले तौर पर विरोध भी नहीं कर पाए और समर्थन भी नहीं कर सके। कॉन्ग्रेस लगातार राहुल गाँधी को विपक्ष के संयुक्त उम्मीदवार के तौर पर आगे बढ़ाती रही है। वहीं इस गठबंधन के लिए दौड़भाग करने वाले नीतीश कुमार भी इससे असहज हो गए।