Home Blog Page 1315

जन्मदिन पर राजस्थान के CM बने भजनलाल शर्मा, माता-पिता के चरण पखार ली शपथ: दीया कुमारी और प्रेमचंद बैरवा डिप्टी CM

भाजपा नेता भजनलाल शर्मा ने शुक्रवार (15 दिसंबर, 2023) को राजस्थान के 14वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। उनके अलावा 2 उप-मुख्यमंत्रियों प्रेमचंद बैरवा और दीया कुमारी ने भी शपथ ली। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की तरह यहाँ भी अन्य मंत्रियों की नियुक्ति और विभागों का बँटवारा बाद में होगा। समारोह स्थल पर 2 मंच तैयार किए गए, जिनमें से एक पर देश भर से आए नेताओं को बैठाया गया तो दूसरे पर साधु-संतों को बिठाया गया। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी मंच पर मौजूद रहे।

बता दें कि भजनलाल शर्मा का आज जन्मदिन भी है। वो 56 वर्ष के हो गए हैं। शपथ लेने से पहले उन्होंने अपने माता-पिता के चरण धोकर उनकी पूजा की। चंबल पॉवर गेस्ट हाउस में उनका परिवार रुका हुआ है, जहाँ उनका जन्मदिन भी मनाया गया। शपथ से पहले उन्होंने गोविंद देव जी मंदिर में दर्शन किया। दीया कुमारी भी उस मंदिर में दर्शन करने पहुँचीं। वहीं प्रेमचंद बैरवा ने मोती डूंगरी गणेश मंदिर में पूजा-अर्चना की, जहाँ एक दिन पहले भजनलाल शर्मा भी पहुँचे थे।

भजनलाल शर्मा की माँ गोमती देवी ने अपने बेटे को बहुत सारा प्यार देने के लिए जनता को धन्यवाद दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी धन्यवाद कहा। गोमती देवी ने कहा कि अब राजस्थान का विकास होना चाहिए। अपने बेटे को लेकर गोमती देवी ने कहा कि भजनलाल शर्मा अब तक जैसी मेहनत करते आए हैं, उन्हें आगे भी करनी चाहिए। कई राज्यों के मुख्यमंत्री व उप-मुख्यमंत्री इस कार्यक्रम में मौजूद रहे। जगद्गुरु रामभद्राचार्य भी शपथग्रहण समारोह में उपस्थित रहे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी इस शपथग्रहण समारोह के साक्षी बने। भजनलाल शर्मा के मुख्यमंत्री बनने पर उनके पिता किशन स्वरूप शर्मा ने कहा कि सब भगवान की लीला है, बेटा एकदम बढ़िया कार्य करेगा। उन्होंने कहा कि सब बहुत बढ़िया है। उन्होंने गिनाया कि कैसे भजनलाल शर्मा सरपंच रह चुकें हैं, जिला अध्यक्ष रहे हैं और 4 बार प्रदेश महामंत्री भी रहे हैं। उन्होंने कहा कि भगवान अपने-आप सबको बढ़ाते हैं।

‘जब चाहे मालिक करेगा सेक्स, गुलाम को झुकना पड़ेगा’ : CEO ने महिला कर्मचारी से साइन कराया कॉन्ट्रैक्ट, सजा देने के नाम पर खून निकाला

सैन फ्रांसिस्को टेक कंपनी ‘Tradeshift’ के सीईओ क्रिश्चियन लैंग पर आरोप लगा है कि वो अपने असिस्टेंट से एक कॉन्ट्रैक्ट साइन करवाकर उसका यौन उत्पीड़न करते थे। आरोप है कि क्रिश्चियन ने अपनी एग्जिक्यूटिव असिस्टेंट को हायर करने के कुछ महीने बाद ही गुलाम बनाने का ये कॉन्ट्रैक्ट साइन करवाया था।

पीड़िता का नाम कोर्ट डॉक्यूमेंट में जेन डो कहा गया है। उसने अपनी शिकायत में कहा कि उसका रेप सालों से किया जा रहा था। पीड़िता ने कहा कि उसे विभिन्न तरीरकों से शारीरिक दर्द दिए गए। कभी उसके ऊपर पेशाब किया गया तो कभी विदेशी चीजों को उसके प्राइवेट पार्ट में डाला जाता था।

कॉन्ट्रैक्ट के अनुसार ‘स्लेव’ को हमेशा अपने मालिक के लिए सेक्सुअल फेवर देने के लिए उपलब्ध रहना था, जब भी उसके मालिक को सेक्स की जरूरत लगती तो कॉन्ट्रैक्ट के हिसाब से वो उन्हें नहीं मना कर सकती थीं चाहे उसका मन हो या नहीं। इतना ही नही कॉन्ट्रैक्ट के मुताबिक लड़की को ये भी करने को कहा गया था कि वो जब भी अपने मालिक को अकेले में देखें तो घुटनों पर झुककर उनसे पूछे कि वो उनके लिए क्या कर सकती है।

साभार: NYTimes

दस्तावेज में कहा गया था महिला को गुलाम बनाकर दी जाने सजाओं का भी जिक्र था। इसमें लिखा था कि मालिक जो चाहे वो सजा गुलाम को दे सकता है। लेकिन मालिक की ये जिम्मेदारी होगी कि वो सजा देते समय महिला को जान से नहीं मारेगा औक न उसे पर्मानेंट इंजरी देगा। इतना ही नहीं कॉन्ट्रैक्ट में ये भी था गुलाम कैसे भी करके इन सजाओं को पाकर नाराज नहीं हो सकती थी और न ही अपने मालिक से नाराजगी जाहिर कर सकती थी।

महिला ने शिकायत में कहा कि उसे लैंग ने खून निकालने तक मारा और निर्जीव वस्तुओं के जरिए उसका उत्पीड़न किया। उसे कॉन्ट्रैक्ट में कहा गया था कि वो हमेशा ढंग से तैयार होकर रहे और खुद का वजन 130 से 155 पाउंड रखे। इसके अलावा गुलाम का समर्पण मालिक के प्रति हर प्रकार से रहना चाहिए। उसका शरीर मालिक का होना चाहिए। वो अगर उसे फिट देखना चाहता है तो शरीर को फिट ही होना चाहिए।

साभार: NYTimes

कोर्ट में दी शिकायत के अनुसार, महिला को अपनी जॉब Tradeshift में प्यारी थी इसलिए उसे ये सब करना पड़ा। बाद में उसने शारीरिक प्रताड़नाओं से तंग आकर शिकायत दी। इस शिकायत के बाद ट्रेडशिफ्ट ने अपने ऊपर लगाए इल्जामों को नकारा और कड़ा निर्णय लेते हुए क्रिश्चियन को उसके पद से टर्मिनेट कर दिया। मेल में कंपनी ने कहा कि लैंग के विरुद्ध बहुत सारी शिकायतें मिल रही थीं।

वहीं लैंग ने कहा कि उन दोनों के बीच बने संबंध रजामंदी के थे न कि किसी जोर जबरदस्ती के। उसने कोर्ट में डाली गई शिकायत पर को मानहानि करने वाला बताया। उसने कहा पूरा मुकदमा झूठा है। उसके मुताबिक सीईओ रहते हुए उसने किसी का यौन उत्पीड़न नहीं किया। महिला से संबंध थे लेकिन वो पहले के थे। उसके कंपनी ज्वाइन करने के बाद वो सब खत्म हो गया।

कई लोगों को क्रिश्चियन लैंग की हरकत देखने के बाद फिफ्टी शेड्स ऑफ ग्रे फिल्म की स्क्रिप्ट याद आ रही है। इस फिल्म में भी एक बिजनेसमैन ने महिला को सेक्स के लिए कॉन्ट्रैक्ट साइन करने को कहा था।

UCC पर बीजेपी अडिग, पीछे नहीं हटेंगे: अमित शाह ने बताए मोदी सरकार के इरादे, कहा- CAA देश का कानून, जरूर लागू होगा

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर बीजेपी अडिग है। पार्टी इससे दो कदम भी पीछे नहीं हटेगी। साथ ही नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर भी मोदी सरकार के इरादे स्पष्ट कर दिए हैं। इसे देश का कानून बताते हुए कहा है कि यह जरूर लागू होगा।

उन्होंने ये बातें गुरुवार (14 नवंबर,2023) को ‘एजेंडा आजतक’ में कही। शाह से पूछा गया कि आर्टिकल 370, राम मंदिर, यूसीसी बीजेपी के कोर मुद्दे रहे हैं। आर्टिकल 370 हट गया। राम मंदिर बन रहा है। लेकिन यूसीसी की बात बीजेपी राज्यों में कर रही है। इसे देश में लागू करने को लेकर पार्टी की सोच क्या है?

इस पर गृहमंत्री शाह ने कहा, “इसे आप बीजेपी के एजेंडे के रूप में देश की जनता के सामने प्रस्तुत मत करिए। ये संविधान सभा का देश के विधान मंडल और संसद को एक शासनादेश था। राज्य के नीति निर्देशक तत्व अनुच्छेद 44 में हमारी संविधान सभा ने कुछ ऐसी चीजे रखीं थीं जो आजादी के तुरंत बाद संविधान सभा लागू नही कर पाई थी तो उसे अनुच्छेद 44 के माध्यम से राज्य के नीति निर्देशक तत्व नीति में लिया गया और यूनिफॉर्म सिविल कोड उसमें से एक है।”

‘कॉन्ग्रेस ने वोट बैंक पॉलिटिक्स में इसे छोड़ा’

उन्होंने कहा, “ये बात अलग है कि बाद में वोट बैंक की पॉलिटिक्स में कॉन्ग्रेस ने इसको छोड़ दिया और संविधान सभा में ज्यादातर कॉन्ग्रेस के ही नेता थे। सबसे बड़े कॉन्ग्रेस के नेता उसमें बैठे थे और उन्होंने ही ये बनाया है परंतु बीजेपी ने इसको पकड़ कर रखा है, क्योंकि किसी भी धर्म निरपेक्ष शासन का सबसे बड़ा लक्षण ये है कि सब धर्मों के नागरिकों के लिए एक कानून हो। मगर कॉन्ग्रेस ने इसको भुला दिया। वोट बैंक की पॉलिटिक्स के कारण। भारतीय जनता पार्टी इसे नहीं मानती है। हमारे 1950 से जितने भी चुनावी संकल्प पत्र हैं इसका वादा है कि इस देश में बीजेपी यूसीसी लाने का प्रयास करेगी।”

‘यूसीसी पर अडिग है बीजेपी’

केंद्रीय गृहमंत्री शाह ने कहा, “जहाँ तक इसे राज्यों में लागू करने के प्रयासों की बात है तो देखिए कॉमन सिविल कोड बहुत बड़ा सामाजिक और लीगल परिवर्तन है। इस पर सबकी राय चाहिए तो एक राज्य, दो राज्य, तीन राज्य अगर इसको करते हैं, कमेटियाँ बनती हैं। इसकी सुनवाई होती है, लाखों लोगों से मिला जाता है और उसके अभिप्रायों के आधार पर एक कानून बनता है। इसकी लीगल स्क्रूटनी (कनूनी जाँच पड़ताल) भी होगी और उसके बाद में जो मैच्योर चीज होगी वो ऑटोमैटिकली सारा देश स्वीकार करेगा। इसका मुझे भरोसा है। मगर आप ये मानकर चलिए की भारतीय जनता पार्टी नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में यूसीसी लाने पर अडिग है और इसमें हम कहीं पर भी दो कदम भी पीछे हटने वालों में नहीं हैं।”

‘CAA देश का कानून, ये लागू होना तय है’

इस दौरान गृहमंत्री शाह नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (CAA) को लेकर कहा,” सीएए देश का कानून है और ये पार्टिशन यानी बँटवारे के बाद जो हिंदू भाई-बहन विशेषकर और बाकी 6 धर्मों के जितने भी मतावलंबी पाकिस्तान बांग्लादेश और अन्य देशों में रह रहे थे। इनके साथ जो धार्मिक प्रताड़ना हुई उससे न्याय दिलाने का एक इंस्ट्रयूमेंट यानी औजार है।”

उन्होंने आगे कहा,” मैं आज आपके कार्यक्रम के जरिए देश की जनता को कहना चाहता हूँ कि सीएए देश का कानून है। इसका जरूर इम्पीलिमेंटेशन (लागू) होगा और सीएए से किसी की नागरिकता नहीं जाने वाली। विशेषकर माइनोयरिटी में और विशेषकर मुस्लिमों में इसका अप्रचार किया गया कि इससे आपकी नागरिकता चली जाएगी। सीएए से किसी की नागरिकता नहीं जाती है। ये नागरिकता लेने का कानून नहीं है। ये नागरिकता देने का कानून हैं। ये निश्चित रूप से लागू होगा। उचित समय पर सीएए लागू होना स्पष्ट है। पर वो लागू होगा ही।”

इस दौरान केंद्रीय गृहमंत्री ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर को वापस लेने का संकल्प भी दोहराया। उन्होंने कहा,” मैं मानता हूँ कि पीओके पर अनाधिकृत कब्जा है और ये भारत का एक हिस्सा है।”

अयोध्या में मस्जिद की बुनियाद रखेंगे मक्का के इमाम, दावा- ताज महल से भी खूबसूरत होगा: खाड़ी देशों से भी आएगा पैसा, हिंदू भी दे रहे चंदा

अयोध्या के धन्नीपुर में जो मस्जिद बननी है, उसकी बुनियाद का पत्थर रखने के लिए मक्का से इमाम आएँगे। अरबी स्टाइल में बनने वाली यह मस्जिद मुहम्मद बिन अब्दुल्ला के नाम पर होगी। दावा किया जा रहा है कि यह मस्जिद ताजमहल से भी ज्यादा खूबसूरत होगी। खाड़ी देशों से इसके लिए पैसा जुटाया जाएगा।

टाइम्स ऑफ की रिपोर्ट में बताया गया है कि मक्का के काबा स्थित पाक मस्जिद इमाम-ए-हरम में नमाज पढ़ाने वाले इमाम धन्नीपुर में बुनियाद रखेंगे। यह भारत की सबसे बड़ी मस्जिद होगी। यह जानकारी हाजी अराफात शेख के हवाले से दी गई है।

मुंबई के बीजेपी नेता हाजी अराफात को मस्जिद मुहम्मद बिन अब्दुल्ला विकास समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। उन्होंने बताया है कि मस्जिद की ऊँचाई 21 फीट और चौड़ाई 36 फीट होगी। परिसर में मस्जिद के अलावा कैंसर अस्पताल, स्कूल-कॉलेज, संग्रहालय, पुस्तकालय और एक पूरी तरह से शाकाहारी रसोईघर भी होगी। इस रसोईघर में मुफ्त भोजन परोसा जाएगा।

हाजी अराफात ने बताया है कि वजू खाना के पास एक बड़ा सा एक्वेरियम होगा, जिसमें मर्दों और औरतों के लिए अलग-अलग खंड होंगे। उन्होंने कहा कि यह ताज महल से भी अधिक सुंदर होगा। साथ ही सभी धर्मों के लोग इसे देखने आ सकेंगे।

उल्लेखनीय है कि नवंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था कि जिस जगह पर मुगल अक्रांता बाबर के नाम पर ढाँचा खड़ा कर दिया गया था, वह रामजन्मभूमि ही है। इसके बाद धन्नीपुर में मस्जिद के लिए 5 एकड़ जमीन मुस्लिमों को मुहैया कराई गई थी। यह जगह रामजन्मभूमि से करीब 22 किलोमीटर दूर है। रामजन्मभूमि पर बन रहे भव्य मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी 2024 को होनी है।

नवंबर 2022 में एक खबर आई थी कि अयोध्या में बनने वाली मस्जिद के लिए जो चंदा इकट्ठा हुआ है, उसमें 40 फीसदी पैसा हिंदुओं का है। ​अब लाइव हिंदुस्तान ने एक रिपोर्ट में बताया है कि मस्जिद के लिए खाड़ी देशों से भी पैसा जुटाया जाएगा। इसके लिए सुन्नी वक्फ बोर्ड के चेयरमैन जुफर फारुकी जल्द ही खाड़ी देशों की यात्रा करने वाले हैं। उन्होंने बताया है कि विदेश से चंदा लेने के लिए फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेग्यूलेशन एक्ट (FCRA) का प्रावधान करवाया जाएगा। साथ ही मई 2024 से इस मस्जिद का निर्माण शुरू होने की उम्मीद जताई है।

फारुकी के अनुसार निर्माण कार्यो पर करीब अस्सी करोड़ रुपए खर्च होंगे। नवंबर 2022 में मस्जिद ट्रस्ट के सचिव अतहर हुसैन ने बताया था, “अगस्त, 2020 में हमने मस्जिद निर्माण में सहयोग के लिए बैंक डिटेल जारी किए थे। अब तक हमारे पास 40 लाख रुपए का डोनेशन आ चुका है। डोनेशन का करीब 30% हिस्सा कॉर्पोरेट से आया है, 30% मुस्लिम समुदाय से आया है बाकी 40% हिस्सा हिंदू समुदाय की तरफ से आया है।”

इस मस्जिद के निर्माण के लिए जुलाई 2020 को इंडो-इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन ट्रस्ट की स्थापना की गई थी। ट्रस्ट की अक्टूबर 2022 में मुंबई में हुई बैठक में मस्जिद की डिजाइन बदलने का फैसला किया गया था। अब मध्य-पूर्व और अरब देशों की तर्ज पर मस्जिद का निर्माण होगा। मस्जिद में 5 मीनारें होंगी जो इस्लाम की 5 बुनियाद कलमा, नमाज, रोजा, हज और जकात का प्रतीक होंगी।

राजस्थान में रुका, सबका फोन जलाया और फिर सरेंडर: लोकसभा में घुसपैठ का मास्टरमाइंड ललित झा गिरफ्तार; संसद धुआँ-धुआँ करने के लिए बनवाए थे खास जूते

संसद सुरक्षा चूक मामले में दिल्ली पुलिस ने साजिशकर्ता ललित झा को गिरफ्तार कर लिया है। ललित झा ने विजय पथ पुलिस स्टेशन में आकर खुद को सरेंडर किया। उस पर आरोप है कि वो संसद के बाहर मचे हड़कंप की वीडियो बनाने के बाद वहाँ से फरार हो गया था। फरार रहने के दौरान उसने चारों आरोपितों के फोनों को नष्ट कर दिया और सबूत मिटाने का प्रयास किया। पुलिस को शक हैं कि उसने जाँच को भटकाने के लिए ऐसा किया है।

जानकारी के मुताबिक, घटना को अंजाम देने से पहले चारों आरोपितों ने अपने अपने फोन ललित झा को सौंपे थे क्योंकि उन्हें पता था कि ये कारनामा करने के बाद वो लोग पकड़े जाएँगे। ऐसे में पुलिस के हाथ कोई सबूत न लगे इसलिए उन्होंने अपने फोन ललित को दे दिए थे। ललित घटना के वक्त तक संसद के बाहर खड़ा था लेकिन बाद में वो वहाँ से निकल निकल गया। उसने राजस्थान के कुचामन में जाकर अपने दोस्त महेश के साथ सभी आरोपितों के फोन को जलाया।

बताया जा रहा है कि पुलिस ने ललित झा को पकड़ने से पहले महेश के चचेरे भाई को हिरासत में लिया था। कैलाश ने ही उन्हें बताया कि ललित और महेश दिल्ली गए थे। दिल्ली पुलिस का कहना है- ललित झा खुद ही थाने आया था, जिसेक बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया और पूछताछ शुरू कर दी।

कैसे हुआ ललित झा गिरफ्तार

बुधवार को संसद के बाहर ललित झा अपने साथियों के साथ आया था। उसने वहाँ संसद के बाहर नीलम और अमोल की नारे लगाते हुए वीडियो भी बनाई। इसके बाद वह फरार हो गया। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने उसे पकड़ने के लिए एनजीओ को संपर्क किया जिससे झा जुड़ा था।

गुरुवार को दिल्ली पुलिस उसे पकड़ने के प्रयासों में थी ही कि तब तक ललित झा ने खुद आकर सरेंडर कर दिया। जिसके बाद देर रात कई घंटे तक 2 डीसीपी और एडिशनल सीपी सहित स्पेशल सेल के कई इंस्पेक्टर्स ने पूछताछ की। उसने पूछताछ में यही बताया कि वो न्यूज के जरिए पुलिस मूवमेंट की जानकारी ले रहा था। उसके मुताबिक वो यहाँ से भागकर राजस्थान के नागौर गया था वहाँ वह दो लोगों से मिला और होटल में रुका।

उसने बताया कि उसने नहीं सोचा था कि वो इतनी बुरी तरह से घिर जाएगा। जब पुलिस गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही थी तो वो घबरा गया और उसने अपने कुछ दोस्तों से पूछा था कि क्या करना चाहिए, जिसके बाद वो राजस्थान से दिल्ली वापस पहुँच गया।

धुएँ की केन छिपाने के लिए बनवाए थे विशेष जूते

इसके अलावा एक जानकारी जो हैरान करने वाली सामने आई है वो ये है कि आरोपितों ने इस घटना के लिए लखनऊ के एक मोची से विशेष जूते बनवाए थे। जिनके तलवे में 2.5 इंच गहरी जगह थी। धुएँ के केन इसी स्पेस में छिपाकर संसद में लाए गए। इनका प्रयास था कि जो 1929 में भगत सिंह ने ब्रिटिश शासन के साथ किया था वो भारत की सरकार के साथ कर दें। हालाँकि सांसदों की तेजी के कारण ये पकड़े गए। इनके पास से पर्चे बरामद हुए जिनपर लिखा था- प्रधानमंत्री लापता है जो उन्हें ढूँढेगा उन्हें स्विस बैंक से पैसा मिलेगा।

संसद में रेकी करके दिया घटना को अंजाम

बता दें कि बुधवार को संसद में हुई घटना को अंजाम देने के लिए ललित झा और उसके साथी काफी समय से प्लानिंग कर रहे थे। उन्होंने संसद भवन की 2 बार रेकी भी की थी। संसद भवन की रेकी सागर और मनोरंजन ने इसी साल के मार्च और जुलाई महीने में की थी। इन्हें पहली बार में ही बड़ी सफलता मिल गई थी और वो संसद में घुसने में कामयाब भी हो गए थे। सभी आरोपित फेसबुक पेज के माध्यम से एक-दूसरे से मिले थे और करीब संसद में घुसने की प्लानिंग कर रहे थे। वो लोग आपस में कई बार मिले थे और आखिरी बार गुरुग्राम में विशाल के फ्लैट में एक साथ रहे भी।

पुलिस सूत्रों ने कहा कि छह लोगों ने साज़िश रचकर और अच्छी तरह से किए गए समन्वय के जरिए घटना को अंजाम दिया और ये सभी इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया मंचों के जरिए एक-दूसरे के संपर्क में थे, जहाँ उन्होंने साज़िश रची थी। यही नहीं, ये सभी 6 लोग संसद के अंदर जाना चाहते थे, लेकिन केवल दो को ही पास मिल पाया था।

BJP कार्यकर्ता का हाथ काटने वाले फारुख के घर पर चला बुलडोजर, एक्शन में CM मोहन यादव: उज्जैन में मीट दुकानों को किया जमींदोज

मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री बनने के बाद से मोहन यादव एक्शन में हैं। उन्होंने गुरुवार (14 दिसंबर 2023) को उज्जैन में महाकाल मंदिर के पास बिना अनुमति से चल रही मांस की 10 दुकानों पर बंद करवा दिया और सड़क किनारे बनी कुछ दुकानों को ध्वस्त भी किया गया। कार्रवाई नागझिरी इलाके में हुई। इसके अलावा सीएम यादव ने भाजपा कार्यकर्ता पर हमला करने वाले फारूक के घर भी बुलडोजर चलाने का आदेश दिया।

उनके आदेश के बाद गुरुवार को प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई करते हुए भोपाल बीजेपी भाजपा कार्यकर्ता की हथेली काटने वाले बदमाशों के घर पर बुलडोजर चला दिया। इस कार्रवाई से पूरे प्रदेश में सनसनी फैल गई है। मोहन यादव सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत आरोपितों पर यह कार्रवाई की।

जानकारी के मुताबिक, भोपाल में बीजेपी कार्यकर्ता देवेंद्र सिंह ठाकुर पर 5 दिसंबर को कुछ बदमाशों ने हमला किया था। बदमाशों ने उनकी की हथेली काट दी थी। इस हमले में भाजपा कार्यकर्ता गंभीर रूप से घायल हो गए थे। वरिष्ठ भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय उनसे अस्पताल में मिलने पहुँचे थे और कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिलाया था। इस मामले में फारुख राइन और उसके 4 (असलम, शाहरुख, बिलाल और समीर) साथी शामिल थे, जिन्हें पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

खुद मुख्यमंत्री ने दिए थे बुलडोजर एक्शन के आदेश

घटना की सूचना मिलने के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस मामले की जाँच के आदेश दिए थे। जाँच में पता चला कि इस हमले को देवेंद्र के राजनीतिक विरोधियों ने अंजाम दिया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बदमाशों के घर पर बुलडोजर चलाने का आदेश दिया। बुलडोजर ने बदमाशों के घर को जमींदोज कर दिया। जानकारी के मुताबिक, फारुख राइन का घर भोपाल की जनता कॉलोनी में था, जिसे प्रशासन ने ढहा दिया है।

इस कार्रवाई से पूरे प्रदेश में सनसनी फैल गई है। लोगों का कहना है कि यह कार्रवाई अपराधियों को सख्त संदेश देती है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएँगे। उन्होंने कहा कि अपराधियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

मुख्यमंत्री बनते ही कड़े कदम उठा रहे मोहन यादव

बता दें कि मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के तुरंत बाद मोहन यादव ने दो बड़े फैसले लिए। उन्होंने बुधवार (13 दिसंबर 2023) को ही धार्मिक और सार्वजनिक स्थानों पर लाउडस्पीकर के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने का आदेश दे दिया। इस आदेश के तहत, धार्मिक स्थलों और सार्वजनिक स्थानों पर लाउडस्पीकर का उपयोग केवल अनुमति के बाद ही किया जा सकेगा। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद अपने पहले बड़े फैसले के तहत इसका आदेश जारी किया गया। यही नहीं, खुले में मांस की बिक्री पर भी रोक लगाने का आदेश जारी कर दिया गया। सीएम यादव ने कहा कि खुले में मांस की बिक्री अस्वीकार्य है। उन्होंने कहा, “आज (13 दिसंबर 2023) हमने पहली कैबिनेट बैठक में कई चर्चाएँ की हैं। हमने कैबिनेट बैठक में खुले में मांस की बिक्री का मुद्दा उठाया है और इसके लिए नियम लाने का प्रस्ताव रखा है।”

4 साल से संपर्क में थे 6 आरोपित, 2 बार की थी संसद भवन की रेकी, कोर्ट ने एक हफ्ते के लिए रिमांड में भेजा: अमित शाह ने बताया कब आएगी जाँच कमिटी की रिपोर्ट

संसद की सुरक्षा चूक के मामले में पकड़े गए 5 लोगों को दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में पेश किया। दिल्ली पुलिस ने कोर्ट को बताया है कि संसद की सुरक्षा में सेंध लगाने वाले सभी लोग एक दूसरे से 4 साल से संपर्क में थे और काफी प्लानिंग के बाद इस काम को अंजाम दिया गया। यही नहीं, आरोपितों ने पहले संसद की रेकी भी की थी। पुलिस ने कहा है कि इसे संसद में हमला ही माना जाए। दिल्ली पुलिस ने सभी आरोपितों को NIA की स्पेशल कोर्ट में पेश किया और 15 दिन की रिमांड माँगी थी। हालाँकि, कोर्ट ने सभी आरोपितों को 7 दिनों के लिए रिमांड मंजूर कर ली।

दिल्ली पुलिस ने NIA की स्पेशल कोर्ट को बताया कि इस पूरी प्लानिंग की तह तक जाने के लिए उसे कई शहरों में जाना पड़ेगा। ऐसे में आरोपितों को 15 दिनों की रिमांड दी जाए। पुलिस सूत्रों का कहना है कि गिरफ्तार किए गए सभी लोग बेहद शातिर हैं और दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की पूछताछ में रटे-रटाए जवाब दे रहे हैं। इन सभी के ऊपर UAPA के तहत भी मामला दर्ज किया गया है। इस मामले में सागर शर्मा, मनोरंजन डी, नीलम और अमोल शिंदे के अलावा विशाल उर्फ विकी नाम के युवक को भी गिरफ्तार किया गया है, जबकि इनका एक साथी ललित झा अभी फरार है।

गुरुग्राम में तैयार हुई संसद की सुरक्षा में सेंध लगाने की प्लानिंग

दिल्ली पुलिस ने कोर्ट को बताया है कि संसद में सुरक्षा को सेंध लगाने के लिए काफी बारीकी से तैयारी की गई थी। उन्होंने बाकायदा सांसद से जारी होने वाले पास का इंतजाम भी किया था और अपने संपर्कों का इस्तेमाल किया था। ‘न्यूज 18’ की रिपोर्ट के मुताबिक, इस वारदात को 13 दिसंबर को अंजाम दिया गया लेकिन पुलिस सूत्रों की मानें तो 10 दिसंबर की रात को ही ललित झा गुरुग्राम स्थित विकी के घर आ गया था। अगली सुबह कर्नाटक के बेंगलुरु से मनोरंजन फ्लाइट पकड़कर वहाँ पहुँच गया।

इसके बाद तीन रात सभी लोग गुरुग्राम के फ्लैट में ही रहे और संसद की एंट्री पास के इंतजाम में लग गए। यहीं हुई मीटिंग में तय किया गया था कि सागर और मनोरंजन लोकसभा के अंदर घुसकर प्रदर्शन करेंगे और नीलम, अमोल और ललित संसद के बाहर रहेंगे।

संसद की दो बार रेकी

‘दैनिक जागरण’ की रिपोर्ट के मुताबिक, इस घटना को अंजाम देने के लिए संसद भवन की 2 बार रेकी की गई थी। संसद भवन की रेकी सागर और मनोरंजन ने इसी साल के मार्च और जुलाई महीने में की थी। इन्हें पहली बार में ही बड़ी सफलता मिल गई थी और वो संसद में घुसने में कामयाब भी हो गए थे। सभी आरोपित फेसबुक पेज के माध्यम से एक-दूसरे से मिले थे और करीब संसद में घुसने की प्लानिंग कर रहे थे। वो लोग आपस में कई बार मिले थे और आखिरी बार गुरुग्राम में विशाल के फ्लैट में एक साथ रहे भी।

पुलिस सूत्रों ने कहा कि छह लोगों ने साज़िश रचकर और अच्छी तरह से किए गए समन्वय के जरिए घटना को अंजाम दिया और ये सभी इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया मंचों के जरिए एक-दूसरे के संपर्क में थे, जहाँ उन्होंने साज़िश रची थी। यही नहीं, ये सभी 6 लोग संसद के अंदर जाना चाहते थे, लेकिन केवल दो को ही पास मिल पाया था।

गृहमंत्री अमित शाह ने दिया बयान

इस मामले में गृहमंत्री अमित शाह का बयान आया है। उन्होंने कहा कि ये एक बड़ा गंभीर मसला है, लोकसभा अध्यक्ष ने इसका गंभीर संज्ञान लिया है। विपक्ष इस पर राजनीति कर रहा है। अमित शाह ने कहा कि मैं ये नहीं कह रहा हूँ कि कहीं चूक नहीं हुई है। चूक निश्चित हुई है, तभी तो घटना हुई है। इस घटना पर लोकसभा अध्यक्ष ने ही संज्ञान लिया है, और उन्होंने इसकी कमेटी बनाकर इसकी जाँच की है। हमने एफ़आईआर भी दर्ज कर दी है। कमेटी भी बन रही है, 15-20 दिन में रिपोर्ट लोकसभा स्पीकर को सौंप दी जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इसमें दो राय नहीं होनी चाहिए कि संसदीय सुरक्षा को पुख्ता बनाने की दिशा में सभी कदम उठाए जाएंगे।

बता दें कि बुधवार (13 दिसंबर 2023) को दो लोगों ने संसद की सुरक्षा में सेंध लगाई थी और लोकसभा की कार्यवाही के दौरान बाधा पहुँचाई। दो लोगों सागर शर्मा और मनोरंजन डी ने लोकसभा के अंदर रंगीन गैस छोड़े थे और इसके लिए उन्होंने खास तौर पर अपने जूतों में बदलाव भी कराया था। इन दोनों के अलावा नीलम और अमोल शिंदे ने संसद भवन के बाहर रंगीन गैस छोड़े थे। सभी आरोपितों ने गिरफ्तारी के समय राजनीतिक नारे भी लगाए थे।

‘मैं हिंदू, राजनीति के लिए धर्म नहीं बदलूँगा’: आस्था पर हुआ सवाल तो विवेक रामास्वामी ने दिया करारा जवाब, पूछा था- आप ईसाई नहीं फिर कैसे बनेंगे अमेरिकी राष्ट्रपति

अमेरिकी राष्ट्रपति पद की रिपब्लिकन उम्मीदवारी हासिल करने की दौड़ में शामिल विवेक रामास्वामी ने कहा है कि उनका हिंदू होना उनके शीर्ष पद पर पहुँचने में बाधा नहीं है। उनसे उनकी आस्था को लेकर सवाल किया गया था। जवाब में खुद को हिंदू बताते हुए उन्होंने कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए वे फर्जी तरीके से अपना धर्म नहीं बदलेंगे।

आयोवा में सीएनएन टाउनहॉल कार्यक्रम के दौरान उनसे एक महिला ने पूछा कि कई लोगों का मानना है कि वे अमेरिका के राष्ट्रपति नहीं बन सकते, क्योंकि उनका धर्म वह नहीं है जो अमेरिका के संस्थापकों का था। बोलचाल की भाषा में कहे तो रामास्वामी से पूछा गया कि वे ईसाई नहीं है फिर अमेरिका के राष्ट्रपति कैसे बन सकते हैं।

अमेरिका में धार्मिक स्वतंत्रता का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि वे ईसाई धर्म का प्रचार-प्रसार करने के लिए सबसे योग्य उम्मीदवार नहीं हैं। लेकिन उनका मानना है कि यह अमेरिका राष्ट्रपति का काम नहीं है। वे उन मूल्यों के लिए काम करेंगे जिसके आधार पर अमेरिका की स्थापना हुई। वे उन यहूदी-ईसाई मूल्यों के लिए खड़े रहेंगे जो उन्होंने हिंदू होने के कारण सीखी है।

इस दौरान अपनी पर​वरिश का जिक्र करते हुए विवेक रामास्वामी ने कहा कि हिंदू होने के बावजूद उन्होंने एक क्रिश्चियन स्कूल सेंट जेवियर्स से पढ़ाई की है। उनका मानना है कि हिंदू और ईसाई धर्म के मूल सिद्धांत करीब-करीब एक जैसे हैं। उनका धर्म उन्हें सिखाता है कि ईश्वर ने सबको किसी न किसी उद्देश्य से भेजा है और उसे हासिल करना हर व्यक्ति का नैतिक कर्तव्य है।

सभी धार्मिक मूल्यों में समानता का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “भले ही ईश्वर हम सबके लिए अलग-अलग है। लेकिन हम बराबर हैं। ईश्वर हम सबमें रहता है। मुझे लगता है ये यहूदी-ईसाई मूल्य भी यही सिखाते हैं। मसलन, अपने माता-पिता का सम्मान करें। किसी की हत्या न करें। झूठ न बोलें। किसी को धोखा न दें। चोरी न करें। व्यभिचारी न बनें। इस तरह हिंदू धर्म के मूल्य भी ईसाई धर्म जैसे ही हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “मेरी परवरिश बहुत ही पारंपरिक तरीके से हुई। मेरे माता-पिता ने मुझे सिखाया, परिवार नींव है, विवाह पवित्र है, तलाक कोई विकल्प नहीं है .जब चीजें आपके अनुरूप नहीं होती हैं तो वो ऐसा नहीं है कि जैसे आप रेस्त्राँ में गए और मेनू में कुछ पसंद नहीं आया और बाहर निकल आए। शादी से पहले संयम एक रास्ता है, व्यभिचार गलत है। जीवन में अच्छी चीजों में त्याग शामिल होता है। क्या ये विदेशी मूल्य हैं? मुझे लगता है कि ये मूल्य ईसाई धर्म के मूल्यों से काफी मिलते-जुलते हैं।”

बताते चलें कि ये पहली बार नहीं है जब विवेक रामास्वामी ने गर्व से अपना हिंदू होना स्वीकार किया है। रामास्वामी ने 18 नवंबर 2023 को द डेली सिग्नल प्लेटफॉर्म के आयोजित द फैमिली लीडर फोरम कार्यक्रम में भी हिंदू धर्म को लेकर दिल को छूने वाली बात कही थी।

उन्होंने कहा था, “मैं हिंदू धर्म के बारे में बताने को लेकर आपका आभारी हूँ। मेरा हिंदू धर्म मुझे आजादी देता है। ये मेरा धर्म ही जिसने वास्तव में मुझे इस राष्ट्रपति उम्मीदवार अभियान में दावेदारी के लिए प्रेरित किया और सारे अभियान मैंने इसके बारे में बात की।”

रामास्वामी ने आगे कहा था, “मैं आपको आपको अपने धर्म के बारे में बताता हूँ। मैं हिंदू हूँ। मैं विश्वास करता हूँ कि एक सच भगवान ही है। भगवान ने ही हम सबको दुनिया में एक उद्देश्य देकर भेजा है। मेरा धर्म मुझे सिखाता है कि हम सबका एक नैतिक कर्तव्य है कि हम इस उद्देश्य को समझे। इसके लिए भगवान हमारे साथ हमेशा रहता है वो अलग-अलग तरीके से हमारा साथ देता है।”

बिना नंबर की गाड़ी से आया और बिट्टू बजरंगी के भाई को लगा दी आग, बताया- हिंदुओं को फँसाने के लिए अपनी ही दुकान जला चुका है अरमान खान

फरीदाबाद की डाबुआ कॉलोनी में बुधवार (13 दिसंबर, 2023) की रात हिंदूवादी कार्यकर्ता बिट्टू बजरंगी के परिवार को निशाना बनाया गया, जिसमें बिट्टू बजरंगी के भाई महेश पर थिनर डालकर आग लगा दिया गया। महेश पांचाल की हालत गंभीर है। महज कुछ घंटों के अंदर ही उन्हें तीसरे अस्पताल में ट्रांसफर किया गया है। महेश पांचाल 60 प्रतिशत से अधिक झुलस गए हैं और उनकी हालत बेहद नाजुक बताई जा रही है। डॉक्टरों का कहना है कि अगले 72 घंटे उनके लिए काफी महत्वपूर्ण हैं।

जानकारी के मुताबिक, महेश को जलाने वाले हमलावरों ने पहले तो महेश को पकड़ कर जलाने की कोशिश की, लेकिन वो सफल नहीं हुए। फिर उसके ऊपर थिनर डाल कर आग लगा दी। इसके बाद आरोपित भाग गए। महेश ने तुरंत नाले में कूद लगाई, लेकिन आग नहीं बुझी। इसके बाद उन्होंने 3-4 डुबकियाँ मारीं, तब जाकर आग बुझी। इसके बाद करीब 800 मीटर दूर स्थित घर खुद ही चल कर आए। किसी ने रास्ते में मदद नहीं की। महेश जब घर पहुँचे, तो खुद बिट्टू उन्हें लेकर अस्पताल गए।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अरमान की अगुवाई में हमलावरों ने पहले बिट्टू बजरंगी के भाई महेश पांचाल की बाकायदा पहचान सुनिश्चित की। उन्होंने महेश पांचाल से पूछा कि ‘क्या तुम बिट्टू बजरंगी के भाई हो?’ इस सवाल के जवाब में महेश ने जैसे ही हाँ कहा, उन लोगों ने उनके ऊपर थिनर डाला और आग के हवाले कर दिया। 

इस मामले में मुख्य आरोपित अरमान खान से पूछताछ किए जाने की पुलिस ने ​पुष्टि की है। हालाँकि उसे हिरासत में लेने या गिरफ्तार किए जाने से इनकार किया है। इस बीच, पुलिस ने क्राइम सीन का मुआयना किया है। जानकारी के मुताबिक, हमलावरों ने जिस सफेद रंग की वैगनआर का इस्तेमाल किया उस पर नंबर नहीं दर्ज था। उसके साथ संदिग्ध तौर पर 2 बाइकें भी घटनास्थल पर गई थीं।

बिट्टू बजरंगी ने बताया कि अब तक महेश को तीन अस्पतालों में ले जाया गया है। पहला सरकारी अस्पताल, संतोष अस्पताल और अब प्राची अस्पताल – डॉक्टर ने अगले 72 घंटे बहुत क्रिटिकल बताए हैं। इस मौके पर हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता भी अस्पताल पहुँचे, वहीं स्थानीय भाजपा विधायक भी महेश का हालचाल लेने पहुँचे।

बिट्टू का दावा है कि नूहं दंगा के दौरान अरमान फरीदाबाद में जूस बेचा करता था। उसने अपनी दुकान में खुद ही आग लगा कर हिंदुओं को फँसाने की कोशिश की थी। पुलिस की जाँच में वो पकड़ा गया था।

बिट्टू बजरंगी ने ये भी कहा कि उन्हें लंबे समय से जान से मारने की धमकी दी जा रही थी कि अपनी चप्पल लेकर जा। ‘चप्पल’ का कोड है – नूहं में जो चप्पल छोड़कर भागे थे, वो लेकर जाओ। क्योंकि नूहं में हिंदुओं पर जब हमले हुए थे, तब काफी लोगों के जूते-चप्पल मंदिर के बाहर ही छूट गए थे। ऐसे में उसे कोड की तरह इस्तेमाल किया जाता था।

खुद बिट्टू का ये दावा है कि जिन लोगों ने उनके भाई पर हमला किया, वो सब नूहं हिंसा से जुड़े हैं। उसके बाद से ही उन्हें और परिवार को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि परिवार हथियारों का लाइसेंस माँग रहा था, लेकिन प्रशासन ने लाइसेंस नहीं दिया। यही नहीं, बिट्टू ने एक पुलिस अधिकारी के हवाले से दावा किया है कि जो शख्स धमकियाँ देता था, उसने गुड़गाँव के बड़े व्यापारी से भी प्रोटेक्शन मनी माँगी थी। वो प्रोफेशनल अपराधी हैं।

ऑपइंडिया की टीम भी मौके पर पहुँची और पाया कि अस्पताल में भारी मात्रा में पुलिस बल तैनात हैं। हिंदू संगठनों के लोग भी मौके पर मिले। किसी को भी पीड़ित से मिलने की अनुमति नहीं है। इस मामले में पुलिस ने धारा 147, 149, 307 और 326A समेत कई धाराएँ लगाई हैं।

‘नवा केरल’ में वामपंथी सरकार बिजी, फिर सबरीमाला की सुध कौन ले: भक्तों की भीड़ पर अव्यवस्था भारी, जागा हाई कोर्ट

केरल में भगवान अयप्पा के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर में हर दिन करीब एक लाख श्रद्धालु पहुँच रहे हैं। पिछले साल के मुकाबले इस बार श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ी है, इसकी वजह से काफी अव्यवस्थाओं का सामना करना पड़ रहा है। 18 घंटे तक लाइन में खड़े होने के बाद ही भक्त मंदिर में दर्शन कर पा रहे हैं। इसके कारण कई बार बैरिकेड्स टूटने और भगदड़ मचने की खबर आ चुकी है। 12 साल की एक बच्ची की दर्शन के लिए जाते समय मौत हो गई, तो तमिलनाडु से मंदिर पहुँची एक अन्य श्रद्धालु की पहाड़ की चढ़ाई के दौरान मौत हो गई।

रिपोर्ट के अनुसार, भक्तों को पिछले कुछ हफ्तों से जंगल में कष्ट उठाने पड़ रहे हैं। उन्हें घंटों तक बसों का इंतजार करना पड़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार इन क्षेत्र में लोगों के लिए ठहरने के लिए कोई टेंट या किसी प्रकार की छत मौजूद नहीं है।

हालात देखकर ऐसा लगता है कि केरल सरकार की इन भक्तों की कोई परवाह ही नहीं है। पुलिस के जवानों की संख्या की कमी से लेकर श्रद्धालुओं के मंदिर तक पहुँचने और पहाड़ी की चढ़ाई के दौरान उनके विश्राम करने जैसी कोई व्यवस्था नजर नहीं आती। हर तरफ अफरा-तफरी का माहौल है। उधर केरल के वामपंथी मुख्यमंत्री पी विजयन इस समय पूरे राज्य में संपर्क यात्रा निकाल रहे हैं, जिसे ‘नवा केरल सदस’ नाम दिया गया है। मुख्यमंत्री की संपर्क यात्रा और रैलियों के लिए भारी पुलिस बल की तैनाती दिख रही है। सबरीमाला में सुरक्षा बलों की कमी की एक वजह यह भी मानी जा रही है।

बता दें कि सबरीमाला में मंडलम-मकरविलक्कू का सीजन चल रहा है। इस साल 17 नवंबर से शुरू हुए इस सीजन में सबरीमाला मंदिर में भक्तों की भीड़ उमड़ रही है। हर रोज करीब 1.20 लाख श्रद्धालु दर्शन करने के लिए पहुँच रहे हैं।

सबरीमाला में अव्यवस्थाओं की लंबी लिस्ट

कुछ दिन पहले ही सबरीमाला से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इस वीडियो में एक बच्चा दिखता है, जो बस की खिड़की से रोता हुआ दिख रहा है, वो अपने पिता से बिछड़ गया था।

इसके अलावा सबरीमाला जाने के लिए जिस जगह से बस पकड़ी जाती है, उस निलक्कल बस स्टेशन से जुड़े कई वीडियो सोशल मीडिया पर भी दिख रहे हैं। बसों की बेहद कमी हैं और लोगों को घंटों तक इंतजार करना पड़ रहा है।

मंदिर में भगदड़, कई मौतें: 9 दिसंबर 2023 को 12 साल की बच्ची पद्मश्री की मौत हो गई। उसे बचपन से दिल से जुड़ी बीमारी भी थी। वो भीड़ में समूह के साथ ही चल रही थी, तभी कोलैप्स होकर गिर पड़ी। इसके बाद 13 दिसंबर को एक महिला, जो तमिलनाडु से आई थी, वो पारंपरिक रास्ते से मंदिर में प्रवेश के लिए जा रही थी तो गिर गईं। उनकी मौत की जानकारी सामने आने के बाद स्पेशल टीम को भेजना पड़ा, ताकि उनका शव वापस लाया जाए।

इस बीच, सबरीमाला मंदिर में ‘कुप्रबंधन’ को लेकर केरल में बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। बीजेपी युवा मोर्चा ने भी प्रदर्शन किए हैं, तो सबरीमाला मंदिर में पहुँचे श्रद्धालुओं ने भी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किए हैं। वहीं, सरकार का दावा है कि सब कुछ कंट्रोल में है।

बुनियादी सुविधाओं का अभाव, केरल हाई कोर्ट ने भी लिया संज्ञान

सबरीमाला मंदिर में दर्शन के दौरान यात्रियों को हो रही परेशानियों पर केरल हाई कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है। केरल हाई कोर्ट ने स्टेट रोडवेज की बसों को बढ़ाने का निर्देश दिया है, ताकि श्रद्धालुओं की तकलीफों को कम किया जा सके। इसके अलावा हाई कोर्ट ने व्यवस्थाओं को देखने के लिए एक कमेटी का भी गठन किया है। हालाँकि हाई कोर्ट को सरकार ने बताया है कि भीड़ की वजह से दिक्कतें नहीं हो रही हैं, बल्कि हालात नियंत्रण में हैं।

देवस्वोम मंत्री के राधाकृष्णन ने कहा कि वास्तव में भक्तों की संख्या में वृद्धि हुई है और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए हस्तक्षेप किया गया है। उन्होंने कहा कि तीर्थयात्रियों का सबसे बड़ा उद्देश्य पथिनेट्टमपदी पर चढ़ना है, जो थोड़ा कठिन है। उन्होंने कहा कि कुछ सीमाएँ भी हैं, क्योंकि वृद्ध व्यक्तियों, दिव्यांगों, महिलाओं, बच्चों आदि को इस पर चढ़ना पड़ता है और इसके लिए अधिक समय की आवश्यकता होती है। इसी वजह से दर्शन के समय को बढ़ाया गया है। मंदिर का पट अब तीर्थयात्रा सीजन के दौरान हर दिन दोपहर 3 बजे खुलेगा, जिससे तीर्थयात्रियों को 18 घंटे दर्शन का मौका मिलेगा। यह कदम तीर्थयात्रियों, सरकार, बोर्ड और अदालत की सभी भक्तों के लिए सुचारू दर्शन सुनिश्चित करने की माँग के जवाब में उठाया गया है।

वहीं, मुख्यमंत्री पी विजयन इस समय नवा केरल सदस नाम से रैलियाँ कर रहे हैं। 19 नवंबर से शुरू हुआ यह​ सिलसिला 24 दिसंबर तक चलेगा। उनकी रैलियों में प्रबंधन के लिए भारी संख्या में पुलिस वालों की तैनाती की जा रही है। हालाँकि मुख्यमंत्री पी विजयन ने विपक्ष द्वारा सरकार और त्रावणकोर देवास्वोम बोर्ड पर लगाए जा रहे भीड़ का प्रबंधन करने में विफल होने के आरोपों को खारिज कर दिया है। विजयन ने कहा कि अनियंत्रित भारी भीड़ की वजह से कुछ दुर्घटनाएँ हमारे नियंत्रण से बाहर हो जाती हैं। हम मामलों को अत्यधिक सावधानी से सँभाल रहे हैं और स्थिति को काबू करने के लिए सबरीमाला में 16,118 पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं।

सबरीमाला मंदिर में दर्शन के लिए अपनाई जाती है ये प्रक्रिया

केरल में 18 पहाड़ियों के बीच बसा 800 साल पुराना सबरीमाला मंदिर भगवान अयप्पा को समर्पित है। ये मंदिर पथानामथिट्टा जिले के रन्नी तालुक के भीतर रन्नी-पेरुनाड गाँव में स्थित है। यह मंदिर भारत के सबसे प्रसिद्ध हिंदू मंदिरों में से एक है। सबरीमाला मंदिर में दर्शन के लिए कुछ नियम और शर्ते हैं, जिनका पालन करना सभी श्रद्धालुओं के लिए अनिवार्य है। सबरीमाला मंदिर में दर्शन के लिए ऑनलाइन या ऑफलाइन पंजीकरण किया जा सकता है। पंजीकरण के बाद, श्रद्धालुओं को दर्शन का समय बुक करना होता है। नियमों में श्रद्धालुओं को 41 दिनों का सादगी भरा जीवन जीना होता है। ब्रह्मचर्य का पालन करना होता है।