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अयोध्या में मस्जिद की बुनियाद रखेंगे मक्का के इमाम, दावा- ताज महल से भी खूबसूरत होगा: खाड़ी देशों से भी आएगा पैसा, हिंदू भी दे रहे चंदा

अयोध्या के धन्नीपुर में जो मस्जिद बननी है, उसकी बुनियाद का पत्थर रखने के लिए मक्का से इमाम आएँगे। अरबी स्टाइल में बनने वाली यह मस्जिद मुहम्मद बिन अब्दुल्ला के नाम पर होगी। दावा किया जा रहा है कि यह मस्जिद ताजमहल से भी ज्यादा खूबसूरत होगी। खाड़ी देशों से इसके लिए पैसा जुटाया जाएगा।

टाइम्स ऑफ की रिपोर्ट में बताया गया है कि मक्का के काबा स्थित पाक मस्जिद इमाम-ए-हरम में नमाज पढ़ाने वाले इमाम धन्नीपुर में बुनियाद रखेंगे। यह भारत की सबसे बड़ी मस्जिद होगी। यह जानकारी हाजी अराफात शेख के हवाले से दी गई है।

मुंबई के बीजेपी नेता हाजी अराफात को मस्जिद मुहम्मद बिन अब्दुल्ला विकास समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। उन्होंने बताया है कि मस्जिद की ऊँचाई 21 फीट और चौड़ाई 36 फीट होगी। परिसर में मस्जिद के अलावा कैंसर अस्पताल, स्कूल-कॉलेज, संग्रहालय, पुस्तकालय और एक पूरी तरह से शाकाहारी रसोईघर भी होगी। इस रसोईघर में मुफ्त भोजन परोसा जाएगा।

हाजी अराफात ने बताया है कि वजू खाना के पास एक बड़ा सा एक्वेरियम होगा, जिसमें मर्दों और औरतों के लिए अलग-अलग खंड होंगे। उन्होंने कहा कि यह ताज महल से भी अधिक सुंदर होगा। साथ ही सभी धर्मों के लोग इसे देखने आ सकेंगे।

उल्लेखनीय है कि नवंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था कि जिस जगह पर मुगल अक्रांता बाबर के नाम पर ढाँचा खड़ा कर दिया गया था, वह रामजन्मभूमि ही है। इसके बाद धन्नीपुर में मस्जिद के लिए 5 एकड़ जमीन मुस्लिमों को मुहैया कराई गई थी। यह जगह रामजन्मभूमि से करीब 22 किलोमीटर दूर है। रामजन्मभूमि पर बन रहे भव्य मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी 2024 को होनी है।

नवंबर 2022 में एक खबर आई थी कि अयोध्या में बनने वाली मस्जिद के लिए जो चंदा इकट्ठा हुआ है, उसमें 40 फीसदी पैसा हिंदुओं का है। ​अब लाइव हिंदुस्तान ने एक रिपोर्ट में बताया है कि मस्जिद के लिए खाड़ी देशों से भी पैसा जुटाया जाएगा। इसके लिए सुन्नी वक्फ बोर्ड के चेयरमैन जुफर फारुकी जल्द ही खाड़ी देशों की यात्रा करने वाले हैं। उन्होंने बताया है कि विदेश से चंदा लेने के लिए फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेग्यूलेशन एक्ट (FCRA) का प्रावधान करवाया जाएगा। साथ ही मई 2024 से इस मस्जिद का निर्माण शुरू होने की उम्मीद जताई है।

फारुकी के अनुसार निर्माण कार्यो पर करीब अस्सी करोड़ रुपए खर्च होंगे। नवंबर 2022 में मस्जिद ट्रस्ट के सचिव अतहर हुसैन ने बताया था, “अगस्त, 2020 में हमने मस्जिद निर्माण में सहयोग के लिए बैंक डिटेल जारी किए थे। अब तक हमारे पास 40 लाख रुपए का डोनेशन आ चुका है। डोनेशन का करीब 30% हिस्सा कॉर्पोरेट से आया है, 30% मुस्लिम समुदाय से आया है बाकी 40% हिस्सा हिंदू समुदाय की तरफ से आया है।”

इस मस्जिद के निर्माण के लिए जुलाई 2020 को इंडो-इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन ट्रस्ट की स्थापना की गई थी। ट्रस्ट की अक्टूबर 2022 में मुंबई में हुई बैठक में मस्जिद की डिजाइन बदलने का फैसला किया गया था। अब मध्य-पूर्व और अरब देशों की तर्ज पर मस्जिद का निर्माण होगा। मस्जिद में 5 मीनारें होंगी जो इस्लाम की 5 बुनियाद कलमा, नमाज, रोजा, हज और जकात का प्रतीक होंगी।

राजस्थान में रुका, सबका फोन जलाया और फिर सरेंडर: लोकसभा में घुसपैठ का मास्टरमाइंड ललित झा गिरफ्तार; संसद धुआँ-धुआँ करने के लिए बनवाए थे खास जूते

संसद सुरक्षा चूक मामले में दिल्ली पुलिस ने साजिशकर्ता ललित झा को गिरफ्तार कर लिया है। ललित झा ने विजय पथ पुलिस स्टेशन में आकर खुद को सरेंडर किया। उस पर आरोप है कि वो संसद के बाहर मचे हड़कंप की वीडियो बनाने के बाद वहाँ से फरार हो गया था। फरार रहने के दौरान उसने चारों आरोपितों के फोनों को नष्ट कर दिया और सबूत मिटाने का प्रयास किया। पुलिस को शक हैं कि उसने जाँच को भटकाने के लिए ऐसा किया है।

जानकारी के मुताबिक, घटना को अंजाम देने से पहले चारों आरोपितों ने अपने अपने फोन ललित झा को सौंपे थे क्योंकि उन्हें पता था कि ये कारनामा करने के बाद वो लोग पकड़े जाएँगे। ऐसे में पुलिस के हाथ कोई सबूत न लगे इसलिए उन्होंने अपने फोन ललित को दे दिए थे। ललित घटना के वक्त तक संसद के बाहर खड़ा था लेकिन बाद में वो वहाँ से निकल निकल गया। उसने राजस्थान के कुचामन में जाकर अपने दोस्त महेश के साथ सभी आरोपितों के फोन को जलाया।

बताया जा रहा है कि पुलिस ने ललित झा को पकड़ने से पहले महेश के चचेरे भाई को हिरासत में लिया था। कैलाश ने ही उन्हें बताया कि ललित और महेश दिल्ली गए थे। दिल्ली पुलिस का कहना है- ललित झा खुद ही थाने आया था, जिसेक बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया और पूछताछ शुरू कर दी।

कैसे हुआ ललित झा गिरफ्तार

बुधवार को संसद के बाहर ललित झा अपने साथियों के साथ आया था। उसने वहाँ संसद के बाहर नीलम और अमोल की नारे लगाते हुए वीडियो भी बनाई। इसके बाद वह फरार हो गया। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने उसे पकड़ने के लिए एनजीओ को संपर्क किया जिससे झा जुड़ा था।

गुरुवार को दिल्ली पुलिस उसे पकड़ने के प्रयासों में थी ही कि तब तक ललित झा ने खुद आकर सरेंडर कर दिया। जिसके बाद देर रात कई घंटे तक 2 डीसीपी और एडिशनल सीपी सहित स्पेशल सेल के कई इंस्पेक्टर्स ने पूछताछ की। उसने पूछताछ में यही बताया कि वो न्यूज के जरिए पुलिस मूवमेंट की जानकारी ले रहा था। उसके मुताबिक वो यहाँ से भागकर राजस्थान के नागौर गया था वहाँ वह दो लोगों से मिला और होटल में रुका।

उसने बताया कि उसने नहीं सोचा था कि वो इतनी बुरी तरह से घिर जाएगा। जब पुलिस गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही थी तो वो घबरा गया और उसने अपने कुछ दोस्तों से पूछा था कि क्या करना चाहिए, जिसके बाद वो राजस्थान से दिल्ली वापस पहुँच गया।

धुएँ की केन छिपाने के लिए बनवाए थे विशेष जूते

इसके अलावा एक जानकारी जो हैरान करने वाली सामने आई है वो ये है कि आरोपितों ने इस घटना के लिए लखनऊ के एक मोची से विशेष जूते बनवाए थे। जिनके तलवे में 2.5 इंच गहरी जगह थी। धुएँ के केन इसी स्पेस में छिपाकर संसद में लाए गए। इनका प्रयास था कि जो 1929 में भगत सिंह ने ब्रिटिश शासन के साथ किया था वो भारत की सरकार के साथ कर दें। हालाँकि सांसदों की तेजी के कारण ये पकड़े गए। इनके पास से पर्चे बरामद हुए जिनपर लिखा था- प्रधानमंत्री लापता है जो उन्हें ढूँढेगा उन्हें स्विस बैंक से पैसा मिलेगा।

संसद में रेकी करके दिया घटना को अंजाम

बता दें कि बुधवार को संसद में हुई घटना को अंजाम देने के लिए ललित झा और उसके साथी काफी समय से प्लानिंग कर रहे थे। उन्होंने संसद भवन की 2 बार रेकी भी की थी। संसद भवन की रेकी सागर और मनोरंजन ने इसी साल के मार्च और जुलाई महीने में की थी। इन्हें पहली बार में ही बड़ी सफलता मिल गई थी और वो संसद में घुसने में कामयाब भी हो गए थे। सभी आरोपित फेसबुक पेज के माध्यम से एक-दूसरे से मिले थे और करीब संसद में घुसने की प्लानिंग कर रहे थे। वो लोग आपस में कई बार मिले थे और आखिरी बार गुरुग्राम में विशाल के फ्लैट में एक साथ रहे भी।

पुलिस सूत्रों ने कहा कि छह लोगों ने साज़िश रचकर और अच्छी तरह से किए गए समन्वय के जरिए घटना को अंजाम दिया और ये सभी इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया मंचों के जरिए एक-दूसरे के संपर्क में थे, जहाँ उन्होंने साज़िश रची थी। यही नहीं, ये सभी 6 लोग संसद के अंदर जाना चाहते थे, लेकिन केवल दो को ही पास मिल पाया था।

BJP कार्यकर्ता का हाथ काटने वाले फारुख के घर पर चला बुलडोजर, एक्शन में CM मोहन यादव: उज्जैन में मीट दुकानों को किया जमींदोज

मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री बनने के बाद से मोहन यादव एक्शन में हैं। उन्होंने गुरुवार (14 दिसंबर 2023) को उज्जैन में महाकाल मंदिर के पास बिना अनुमति से चल रही मांस की 10 दुकानों पर बंद करवा दिया और सड़क किनारे बनी कुछ दुकानों को ध्वस्त भी किया गया। कार्रवाई नागझिरी इलाके में हुई। इसके अलावा सीएम यादव ने भाजपा कार्यकर्ता पर हमला करने वाले फारूक के घर भी बुलडोजर चलाने का आदेश दिया।

उनके आदेश के बाद गुरुवार को प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई करते हुए भोपाल बीजेपी भाजपा कार्यकर्ता की हथेली काटने वाले बदमाशों के घर पर बुलडोजर चला दिया। इस कार्रवाई से पूरे प्रदेश में सनसनी फैल गई है। मोहन यादव सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत आरोपितों पर यह कार्रवाई की।

जानकारी के मुताबिक, भोपाल में बीजेपी कार्यकर्ता देवेंद्र सिंह ठाकुर पर 5 दिसंबर को कुछ बदमाशों ने हमला किया था। बदमाशों ने उनकी की हथेली काट दी थी। इस हमले में भाजपा कार्यकर्ता गंभीर रूप से घायल हो गए थे। वरिष्ठ भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय उनसे अस्पताल में मिलने पहुँचे थे और कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिलाया था। इस मामले में फारुख राइन और उसके 4 (असलम, शाहरुख, बिलाल और समीर) साथी शामिल थे, जिन्हें पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

खुद मुख्यमंत्री ने दिए थे बुलडोजर एक्शन के आदेश

घटना की सूचना मिलने के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस मामले की जाँच के आदेश दिए थे। जाँच में पता चला कि इस हमले को देवेंद्र के राजनीतिक विरोधियों ने अंजाम दिया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बदमाशों के घर पर बुलडोजर चलाने का आदेश दिया। बुलडोजर ने बदमाशों के घर को जमींदोज कर दिया। जानकारी के मुताबिक, फारुख राइन का घर भोपाल की जनता कॉलोनी में था, जिसे प्रशासन ने ढहा दिया है।

इस कार्रवाई से पूरे प्रदेश में सनसनी फैल गई है। लोगों का कहना है कि यह कार्रवाई अपराधियों को सख्त संदेश देती है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएँगे। उन्होंने कहा कि अपराधियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

मुख्यमंत्री बनते ही कड़े कदम उठा रहे मोहन यादव

बता दें कि मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के तुरंत बाद मोहन यादव ने दो बड़े फैसले लिए। उन्होंने बुधवार (13 दिसंबर 2023) को ही धार्मिक और सार्वजनिक स्थानों पर लाउडस्पीकर के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने का आदेश दे दिया। इस आदेश के तहत, धार्मिक स्थलों और सार्वजनिक स्थानों पर लाउडस्पीकर का उपयोग केवल अनुमति के बाद ही किया जा सकेगा। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद अपने पहले बड़े फैसले के तहत इसका आदेश जारी किया गया। यही नहीं, खुले में मांस की बिक्री पर भी रोक लगाने का आदेश जारी कर दिया गया। सीएम यादव ने कहा कि खुले में मांस की बिक्री अस्वीकार्य है। उन्होंने कहा, “आज (13 दिसंबर 2023) हमने पहली कैबिनेट बैठक में कई चर्चाएँ की हैं। हमने कैबिनेट बैठक में खुले में मांस की बिक्री का मुद्दा उठाया है और इसके लिए नियम लाने का प्रस्ताव रखा है।”

4 साल से संपर्क में थे 6 आरोपित, 2 बार की थी संसद भवन की रेकी, कोर्ट ने एक हफ्ते के लिए रिमांड में भेजा: अमित शाह ने बताया कब आएगी जाँच कमिटी की रिपोर्ट

संसद की सुरक्षा चूक के मामले में पकड़े गए 5 लोगों को दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में पेश किया। दिल्ली पुलिस ने कोर्ट को बताया है कि संसद की सुरक्षा में सेंध लगाने वाले सभी लोग एक दूसरे से 4 साल से संपर्क में थे और काफी प्लानिंग के बाद इस काम को अंजाम दिया गया। यही नहीं, आरोपितों ने पहले संसद की रेकी भी की थी। पुलिस ने कहा है कि इसे संसद में हमला ही माना जाए। दिल्ली पुलिस ने सभी आरोपितों को NIA की स्पेशल कोर्ट में पेश किया और 15 दिन की रिमांड माँगी थी। हालाँकि, कोर्ट ने सभी आरोपितों को 7 दिनों के लिए रिमांड मंजूर कर ली।

दिल्ली पुलिस ने NIA की स्पेशल कोर्ट को बताया कि इस पूरी प्लानिंग की तह तक जाने के लिए उसे कई शहरों में जाना पड़ेगा। ऐसे में आरोपितों को 15 दिनों की रिमांड दी जाए। पुलिस सूत्रों का कहना है कि गिरफ्तार किए गए सभी लोग बेहद शातिर हैं और दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की पूछताछ में रटे-रटाए जवाब दे रहे हैं। इन सभी के ऊपर UAPA के तहत भी मामला दर्ज किया गया है। इस मामले में सागर शर्मा, मनोरंजन डी, नीलम और अमोल शिंदे के अलावा विशाल उर्फ विकी नाम के युवक को भी गिरफ्तार किया गया है, जबकि इनका एक साथी ललित झा अभी फरार है।

गुरुग्राम में तैयार हुई संसद की सुरक्षा में सेंध लगाने की प्लानिंग

दिल्ली पुलिस ने कोर्ट को बताया है कि संसद में सुरक्षा को सेंध लगाने के लिए काफी बारीकी से तैयारी की गई थी। उन्होंने बाकायदा सांसद से जारी होने वाले पास का इंतजाम भी किया था और अपने संपर्कों का इस्तेमाल किया था। ‘न्यूज 18’ की रिपोर्ट के मुताबिक, इस वारदात को 13 दिसंबर को अंजाम दिया गया लेकिन पुलिस सूत्रों की मानें तो 10 दिसंबर की रात को ही ललित झा गुरुग्राम स्थित विकी के घर आ गया था। अगली सुबह कर्नाटक के बेंगलुरु से मनोरंजन फ्लाइट पकड़कर वहाँ पहुँच गया।

इसके बाद तीन रात सभी लोग गुरुग्राम के फ्लैट में ही रहे और संसद की एंट्री पास के इंतजाम में लग गए। यहीं हुई मीटिंग में तय किया गया था कि सागर और मनोरंजन लोकसभा के अंदर घुसकर प्रदर्शन करेंगे और नीलम, अमोल और ललित संसद के बाहर रहेंगे।

संसद की दो बार रेकी

‘दैनिक जागरण’ की रिपोर्ट के मुताबिक, इस घटना को अंजाम देने के लिए संसद भवन की 2 बार रेकी की गई थी। संसद भवन की रेकी सागर और मनोरंजन ने इसी साल के मार्च और जुलाई महीने में की थी। इन्हें पहली बार में ही बड़ी सफलता मिल गई थी और वो संसद में घुसने में कामयाब भी हो गए थे। सभी आरोपित फेसबुक पेज के माध्यम से एक-दूसरे से मिले थे और करीब संसद में घुसने की प्लानिंग कर रहे थे। वो लोग आपस में कई बार मिले थे और आखिरी बार गुरुग्राम में विशाल के फ्लैट में एक साथ रहे भी।

पुलिस सूत्रों ने कहा कि छह लोगों ने साज़िश रचकर और अच्छी तरह से किए गए समन्वय के जरिए घटना को अंजाम दिया और ये सभी इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया मंचों के जरिए एक-दूसरे के संपर्क में थे, जहाँ उन्होंने साज़िश रची थी। यही नहीं, ये सभी 6 लोग संसद के अंदर जाना चाहते थे, लेकिन केवल दो को ही पास मिल पाया था।

गृहमंत्री अमित शाह ने दिया बयान

इस मामले में गृहमंत्री अमित शाह का बयान आया है। उन्होंने कहा कि ये एक बड़ा गंभीर मसला है, लोकसभा अध्यक्ष ने इसका गंभीर संज्ञान लिया है। विपक्ष इस पर राजनीति कर रहा है। अमित शाह ने कहा कि मैं ये नहीं कह रहा हूँ कि कहीं चूक नहीं हुई है। चूक निश्चित हुई है, तभी तो घटना हुई है। इस घटना पर लोकसभा अध्यक्ष ने ही संज्ञान लिया है, और उन्होंने इसकी कमेटी बनाकर इसकी जाँच की है। हमने एफ़आईआर भी दर्ज कर दी है। कमेटी भी बन रही है, 15-20 दिन में रिपोर्ट लोकसभा स्पीकर को सौंप दी जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इसमें दो राय नहीं होनी चाहिए कि संसदीय सुरक्षा को पुख्ता बनाने की दिशा में सभी कदम उठाए जाएंगे।

बता दें कि बुधवार (13 दिसंबर 2023) को दो लोगों ने संसद की सुरक्षा में सेंध लगाई थी और लोकसभा की कार्यवाही के दौरान बाधा पहुँचाई। दो लोगों सागर शर्मा और मनोरंजन डी ने लोकसभा के अंदर रंगीन गैस छोड़े थे और इसके लिए उन्होंने खास तौर पर अपने जूतों में बदलाव भी कराया था। इन दोनों के अलावा नीलम और अमोल शिंदे ने संसद भवन के बाहर रंगीन गैस छोड़े थे। सभी आरोपितों ने गिरफ्तारी के समय राजनीतिक नारे भी लगाए थे।

‘मैं हिंदू, राजनीति के लिए धर्म नहीं बदलूँगा’: आस्था पर हुआ सवाल तो विवेक रामास्वामी ने दिया करारा जवाब, पूछा था- आप ईसाई नहीं फिर कैसे बनेंगे अमेरिकी राष्ट्रपति

अमेरिकी राष्ट्रपति पद की रिपब्लिकन उम्मीदवारी हासिल करने की दौड़ में शामिल विवेक रामास्वामी ने कहा है कि उनका हिंदू होना उनके शीर्ष पद पर पहुँचने में बाधा नहीं है। उनसे उनकी आस्था को लेकर सवाल किया गया था। जवाब में खुद को हिंदू बताते हुए उन्होंने कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए वे फर्जी तरीके से अपना धर्म नहीं बदलेंगे।

आयोवा में सीएनएन टाउनहॉल कार्यक्रम के दौरान उनसे एक महिला ने पूछा कि कई लोगों का मानना है कि वे अमेरिका के राष्ट्रपति नहीं बन सकते, क्योंकि उनका धर्म वह नहीं है जो अमेरिका के संस्थापकों का था। बोलचाल की भाषा में कहे तो रामास्वामी से पूछा गया कि वे ईसाई नहीं है फिर अमेरिका के राष्ट्रपति कैसे बन सकते हैं।

अमेरिका में धार्मिक स्वतंत्रता का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि वे ईसाई धर्म का प्रचार-प्रसार करने के लिए सबसे योग्य उम्मीदवार नहीं हैं। लेकिन उनका मानना है कि यह अमेरिका राष्ट्रपति का काम नहीं है। वे उन मूल्यों के लिए काम करेंगे जिसके आधार पर अमेरिका की स्थापना हुई। वे उन यहूदी-ईसाई मूल्यों के लिए खड़े रहेंगे जो उन्होंने हिंदू होने के कारण सीखी है।

इस दौरान अपनी पर​वरिश का जिक्र करते हुए विवेक रामास्वामी ने कहा कि हिंदू होने के बावजूद उन्होंने एक क्रिश्चियन स्कूल सेंट जेवियर्स से पढ़ाई की है। उनका मानना है कि हिंदू और ईसाई धर्म के मूल सिद्धांत करीब-करीब एक जैसे हैं। उनका धर्म उन्हें सिखाता है कि ईश्वर ने सबको किसी न किसी उद्देश्य से भेजा है और उसे हासिल करना हर व्यक्ति का नैतिक कर्तव्य है।

सभी धार्मिक मूल्यों में समानता का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “भले ही ईश्वर हम सबके लिए अलग-अलग है। लेकिन हम बराबर हैं। ईश्वर हम सबमें रहता है। मुझे लगता है ये यहूदी-ईसाई मूल्य भी यही सिखाते हैं। मसलन, अपने माता-पिता का सम्मान करें। किसी की हत्या न करें। झूठ न बोलें। किसी को धोखा न दें। चोरी न करें। व्यभिचारी न बनें। इस तरह हिंदू धर्म के मूल्य भी ईसाई धर्म जैसे ही हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “मेरी परवरिश बहुत ही पारंपरिक तरीके से हुई। मेरे माता-पिता ने मुझे सिखाया, परिवार नींव है, विवाह पवित्र है, तलाक कोई विकल्प नहीं है .जब चीजें आपके अनुरूप नहीं होती हैं तो वो ऐसा नहीं है कि जैसे आप रेस्त्राँ में गए और मेनू में कुछ पसंद नहीं आया और बाहर निकल आए। शादी से पहले संयम एक रास्ता है, व्यभिचार गलत है। जीवन में अच्छी चीजों में त्याग शामिल होता है। क्या ये विदेशी मूल्य हैं? मुझे लगता है कि ये मूल्य ईसाई धर्म के मूल्यों से काफी मिलते-जुलते हैं।”

बताते चलें कि ये पहली बार नहीं है जब विवेक रामास्वामी ने गर्व से अपना हिंदू होना स्वीकार किया है। रामास्वामी ने 18 नवंबर 2023 को द डेली सिग्नल प्लेटफॉर्म के आयोजित द फैमिली लीडर फोरम कार्यक्रम में भी हिंदू धर्म को लेकर दिल को छूने वाली बात कही थी।

उन्होंने कहा था, “मैं हिंदू धर्म के बारे में बताने को लेकर आपका आभारी हूँ। मेरा हिंदू धर्म मुझे आजादी देता है। ये मेरा धर्म ही जिसने वास्तव में मुझे इस राष्ट्रपति उम्मीदवार अभियान में दावेदारी के लिए प्रेरित किया और सारे अभियान मैंने इसके बारे में बात की।”

रामास्वामी ने आगे कहा था, “मैं आपको आपको अपने धर्म के बारे में बताता हूँ। मैं हिंदू हूँ। मैं विश्वास करता हूँ कि एक सच भगवान ही है। भगवान ने ही हम सबको दुनिया में एक उद्देश्य देकर भेजा है। मेरा धर्म मुझे सिखाता है कि हम सबका एक नैतिक कर्तव्य है कि हम इस उद्देश्य को समझे। इसके लिए भगवान हमारे साथ हमेशा रहता है वो अलग-अलग तरीके से हमारा साथ देता है।”

बिना नंबर की गाड़ी से आया और बिट्टू बजरंगी के भाई को लगा दी आग, बताया- हिंदुओं को फँसाने के लिए अपनी ही दुकान जला चुका है अरमान खान

फरीदाबाद की डाबुआ कॉलोनी में बुधवार (13 दिसंबर, 2023) की रात हिंदूवादी कार्यकर्ता बिट्टू बजरंगी के परिवार को निशाना बनाया गया, जिसमें बिट्टू बजरंगी के भाई महेश पर थिनर डालकर आग लगा दिया गया। महेश पांचाल की हालत गंभीर है। महज कुछ घंटों के अंदर ही उन्हें तीसरे अस्पताल में ट्रांसफर किया गया है। महेश पांचाल 60 प्रतिशत से अधिक झुलस गए हैं और उनकी हालत बेहद नाजुक बताई जा रही है। डॉक्टरों का कहना है कि अगले 72 घंटे उनके लिए काफी महत्वपूर्ण हैं।

जानकारी के मुताबिक, महेश को जलाने वाले हमलावरों ने पहले तो महेश को पकड़ कर जलाने की कोशिश की, लेकिन वो सफल नहीं हुए। फिर उसके ऊपर थिनर डाल कर आग लगा दी। इसके बाद आरोपित भाग गए। महेश ने तुरंत नाले में कूद लगाई, लेकिन आग नहीं बुझी। इसके बाद उन्होंने 3-4 डुबकियाँ मारीं, तब जाकर आग बुझी। इसके बाद करीब 800 मीटर दूर स्थित घर खुद ही चल कर आए। किसी ने रास्ते में मदद नहीं की। महेश जब घर पहुँचे, तो खुद बिट्टू उन्हें लेकर अस्पताल गए।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अरमान की अगुवाई में हमलावरों ने पहले बिट्टू बजरंगी के भाई महेश पांचाल की बाकायदा पहचान सुनिश्चित की। उन्होंने महेश पांचाल से पूछा कि ‘क्या तुम बिट्टू बजरंगी के भाई हो?’ इस सवाल के जवाब में महेश ने जैसे ही हाँ कहा, उन लोगों ने उनके ऊपर थिनर डाला और आग के हवाले कर दिया। 

इस मामले में मुख्य आरोपित अरमान खान से पूछताछ किए जाने की पुलिस ने ​पुष्टि की है। हालाँकि उसे हिरासत में लेने या गिरफ्तार किए जाने से इनकार किया है। इस बीच, पुलिस ने क्राइम सीन का मुआयना किया है। जानकारी के मुताबिक, हमलावरों ने जिस सफेद रंग की वैगनआर का इस्तेमाल किया उस पर नंबर नहीं दर्ज था। उसके साथ संदिग्ध तौर पर 2 बाइकें भी घटनास्थल पर गई थीं।

बिट्टू बजरंगी ने बताया कि अब तक महेश को तीन अस्पतालों में ले जाया गया है। पहला सरकारी अस्पताल, संतोष अस्पताल और अब प्राची अस्पताल – डॉक्टर ने अगले 72 घंटे बहुत क्रिटिकल बताए हैं। इस मौके पर हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता भी अस्पताल पहुँचे, वहीं स्थानीय भाजपा विधायक भी महेश का हालचाल लेने पहुँचे।

बिट्टू का दावा है कि नूहं दंगा के दौरान अरमान फरीदाबाद में जूस बेचा करता था। उसने अपनी दुकान में खुद ही आग लगा कर हिंदुओं को फँसाने की कोशिश की थी। पुलिस की जाँच में वो पकड़ा गया था।

बिट्टू बजरंगी ने ये भी कहा कि उन्हें लंबे समय से जान से मारने की धमकी दी जा रही थी कि अपनी चप्पल लेकर जा। ‘चप्पल’ का कोड है – नूहं में जो चप्पल छोड़कर भागे थे, वो लेकर जाओ। क्योंकि नूहं में हिंदुओं पर जब हमले हुए थे, तब काफी लोगों के जूते-चप्पल मंदिर के बाहर ही छूट गए थे। ऐसे में उसे कोड की तरह इस्तेमाल किया जाता था।

खुद बिट्टू का ये दावा है कि जिन लोगों ने उनके भाई पर हमला किया, वो सब नूहं हिंसा से जुड़े हैं। उसके बाद से ही उन्हें और परिवार को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि परिवार हथियारों का लाइसेंस माँग रहा था, लेकिन प्रशासन ने लाइसेंस नहीं दिया। यही नहीं, बिट्टू ने एक पुलिस अधिकारी के हवाले से दावा किया है कि जो शख्स धमकियाँ देता था, उसने गुड़गाँव के बड़े व्यापारी से भी प्रोटेक्शन मनी माँगी थी। वो प्रोफेशनल अपराधी हैं।

ऑपइंडिया की टीम भी मौके पर पहुँची और पाया कि अस्पताल में भारी मात्रा में पुलिस बल तैनात हैं। हिंदू संगठनों के लोग भी मौके पर मिले। किसी को भी पीड़ित से मिलने की अनुमति नहीं है। इस मामले में पुलिस ने धारा 147, 149, 307 और 326A समेत कई धाराएँ लगाई हैं।

‘नवा केरल’ में वामपंथी सरकार बिजी, फिर सबरीमाला की सुध कौन ले: भक्तों की भीड़ पर अव्यवस्था भारी, जागा हाई कोर्ट

केरल में भगवान अयप्पा के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर में हर दिन करीब एक लाख श्रद्धालु पहुँच रहे हैं। पिछले साल के मुकाबले इस बार श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ी है, इसकी वजह से काफी अव्यवस्थाओं का सामना करना पड़ रहा है। 18 घंटे तक लाइन में खड़े होने के बाद ही भक्त मंदिर में दर्शन कर पा रहे हैं। इसके कारण कई बार बैरिकेड्स टूटने और भगदड़ मचने की खबर आ चुकी है। 12 साल की एक बच्ची की दर्शन के लिए जाते समय मौत हो गई, तो तमिलनाडु से मंदिर पहुँची एक अन्य श्रद्धालु की पहाड़ की चढ़ाई के दौरान मौत हो गई।

रिपोर्ट के अनुसार, भक्तों को पिछले कुछ हफ्तों से जंगल में कष्ट उठाने पड़ रहे हैं। उन्हें घंटों तक बसों का इंतजार करना पड़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार इन क्षेत्र में लोगों के लिए ठहरने के लिए कोई टेंट या किसी प्रकार की छत मौजूद नहीं है।

हालात देखकर ऐसा लगता है कि केरल सरकार की इन भक्तों की कोई परवाह ही नहीं है। पुलिस के जवानों की संख्या की कमी से लेकर श्रद्धालुओं के मंदिर तक पहुँचने और पहाड़ी की चढ़ाई के दौरान उनके विश्राम करने जैसी कोई व्यवस्था नजर नहीं आती। हर तरफ अफरा-तफरी का माहौल है। उधर केरल के वामपंथी मुख्यमंत्री पी विजयन इस समय पूरे राज्य में संपर्क यात्रा निकाल रहे हैं, जिसे ‘नवा केरल सदस’ नाम दिया गया है। मुख्यमंत्री की संपर्क यात्रा और रैलियों के लिए भारी पुलिस बल की तैनाती दिख रही है। सबरीमाला में सुरक्षा बलों की कमी की एक वजह यह भी मानी जा रही है।

बता दें कि सबरीमाला में मंडलम-मकरविलक्कू का सीजन चल रहा है। इस साल 17 नवंबर से शुरू हुए इस सीजन में सबरीमाला मंदिर में भक्तों की भीड़ उमड़ रही है। हर रोज करीब 1.20 लाख श्रद्धालु दर्शन करने के लिए पहुँच रहे हैं।

सबरीमाला में अव्यवस्थाओं की लंबी लिस्ट

कुछ दिन पहले ही सबरीमाला से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इस वीडियो में एक बच्चा दिखता है, जो बस की खिड़की से रोता हुआ दिख रहा है, वो अपने पिता से बिछड़ गया था।

इसके अलावा सबरीमाला जाने के लिए जिस जगह से बस पकड़ी जाती है, उस निलक्कल बस स्टेशन से जुड़े कई वीडियो सोशल मीडिया पर भी दिख रहे हैं। बसों की बेहद कमी हैं और लोगों को घंटों तक इंतजार करना पड़ रहा है।

मंदिर में भगदड़, कई मौतें: 9 दिसंबर 2023 को 12 साल की बच्ची पद्मश्री की मौत हो गई। उसे बचपन से दिल से जुड़ी बीमारी भी थी। वो भीड़ में समूह के साथ ही चल रही थी, तभी कोलैप्स होकर गिर पड़ी। इसके बाद 13 दिसंबर को एक महिला, जो तमिलनाडु से आई थी, वो पारंपरिक रास्ते से मंदिर में प्रवेश के लिए जा रही थी तो गिर गईं। उनकी मौत की जानकारी सामने आने के बाद स्पेशल टीम को भेजना पड़ा, ताकि उनका शव वापस लाया जाए।

इस बीच, सबरीमाला मंदिर में ‘कुप्रबंधन’ को लेकर केरल में बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। बीजेपी युवा मोर्चा ने भी प्रदर्शन किए हैं, तो सबरीमाला मंदिर में पहुँचे श्रद्धालुओं ने भी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किए हैं। वहीं, सरकार का दावा है कि सब कुछ कंट्रोल में है।

बुनियादी सुविधाओं का अभाव, केरल हाई कोर्ट ने भी लिया संज्ञान

सबरीमाला मंदिर में दर्शन के दौरान यात्रियों को हो रही परेशानियों पर केरल हाई कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है। केरल हाई कोर्ट ने स्टेट रोडवेज की बसों को बढ़ाने का निर्देश दिया है, ताकि श्रद्धालुओं की तकलीफों को कम किया जा सके। इसके अलावा हाई कोर्ट ने व्यवस्थाओं को देखने के लिए एक कमेटी का भी गठन किया है। हालाँकि हाई कोर्ट को सरकार ने बताया है कि भीड़ की वजह से दिक्कतें नहीं हो रही हैं, बल्कि हालात नियंत्रण में हैं।

देवस्वोम मंत्री के राधाकृष्णन ने कहा कि वास्तव में भक्तों की संख्या में वृद्धि हुई है और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए हस्तक्षेप किया गया है। उन्होंने कहा कि तीर्थयात्रियों का सबसे बड़ा उद्देश्य पथिनेट्टमपदी पर चढ़ना है, जो थोड़ा कठिन है। उन्होंने कहा कि कुछ सीमाएँ भी हैं, क्योंकि वृद्ध व्यक्तियों, दिव्यांगों, महिलाओं, बच्चों आदि को इस पर चढ़ना पड़ता है और इसके लिए अधिक समय की आवश्यकता होती है। इसी वजह से दर्शन के समय को बढ़ाया गया है। मंदिर का पट अब तीर्थयात्रा सीजन के दौरान हर दिन दोपहर 3 बजे खुलेगा, जिससे तीर्थयात्रियों को 18 घंटे दर्शन का मौका मिलेगा। यह कदम तीर्थयात्रियों, सरकार, बोर्ड और अदालत की सभी भक्तों के लिए सुचारू दर्शन सुनिश्चित करने की माँग के जवाब में उठाया गया है।

वहीं, मुख्यमंत्री पी विजयन इस समय नवा केरल सदस नाम से रैलियाँ कर रहे हैं। 19 नवंबर से शुरू हुआ यह​ सिलसिला 24 दिसंबर तक चलेगा। उनकी रैलियों में प्रबंधन के लिए भारी संख्या में पुलिस वालों की तैनाती की जा रही है। हालाँकि मुख्यमंत्री पी विजयन ने विपक्ष द्वारा सरकार और त्रावणकोर देवास्वोम बोर्ड पर लगाए जा रहे भीड़ का प्रबंधन करने में विफल होने के आरोपों को खारिज कर दिया है। विजयन ने कहा कि अनियंत्रित भारी भीड़ की वजह से कुछ दुर्घटनाएँ हमारे नियंत्रण से बाहर हो जाती हैं। हम मामलों को अत्यधिक सावधानी से सँभाल रहे हैं और स्थिति को काबू करने के लिए सबरीमाला में 16,118 पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं।

सबरीमाला मंदिर में दर्शन के लिए अपनाई जाती है ये प्रक्रिया

केरल में 18 पहाड़ियों के बीच बसा 800 साल पुराना सबरीमाला मंदिर भगवान अयप्पा को समर्पित है। ये मंदिर पथानामथिट्टा जिले के रन्नी तालुक के भीतर रन्नी-पेरुनाड गाँव में स्थित है। यह मंदिर भारत के सबसे प्रसिद्ध हिंदू मंदिरों में से एक है। सबरीमाला मंदिर में दर्शन के लिए कुछ नियम और शर्ते हैं, जिनका पालन करना सभी श्रद्धालुओं के लिए अनिवार्य है। सबरीमाला मंदिर में दर्शन के लिए ऑनलाइन या ऑफलाइन पंजीकरण किया जा सकता है। पंजीकरण के बाद, श्रद्धालुओं को दर्शन का समय बुक करना होता है। नियमों में श्रद्धालुओं को 41 दिनों का सादगी भरा जीवन जीना होता है। ब्रह्मचर्य का पालन करना होता है।

बंगाल के जमालुद्दीन के रामलला नहीं होंगे राम मंदिर में विराजमान, अयोध्या में 3 मूर्तिकार कर रहे प्रतिमा तैयार: न्यूज 24 कर रहा है गुमराह

अयोध्या में बन रहे भव्य राम मंदिर में 22 जनवरी, 2024 को प्राण-प्रतिष्ठा का कार्यक्रम होगा। जैसे-जैसे इसकी तारीख नज़दीक आते जा रही है, मीडिया में भी कई तरह की खबरें आ रही हैं। अब ‘News 24’ ने एक भ्रामक ट्वीट डाल कर दावा किया कि रामलला की मूर्तियों का निर्माण मुस्लिम कर रहे हैं। ‘न्यूज़ 24’ ने अपने ट्वीट में लिखा, “जनवरी में अयोध्या के राम मंदिर में विराजने के लिए रामलला तैयार हैं। मूर्तियों को बंगाल के मोहम्मद जमालुद्दीन और उनके बेटे बिट्टू ने किया तैयार। पिता-पुत्री की जोड़ी लंबे समय से शिल्पकारी कर रहे हैं।”

साथ ही मीडिया संस्थान ने जमालुद्दीन का ये बयान भी छापा, “धर्म एक निजी चीज होती है। हमारे देश में कई धर्मों को मानने वाले लोग रहते हैं। एक कलाकार के तौर पर भाईचारे की संस्कृति मेरा सन्देश है।” ये ट्वीट मीडिया संस्थान ने गुरुवार (14 दिसंबर, 2023) को पोस्ट किया। इस पोस्ट के जरिए एक तरह से ये बताने की कोशिश की गई है कि राम मंदिर में रामलला की मुख्य प्रतिमा का निर्माण मुस्लिम कर रहे हैं। ये पूरी तरह भ्रामक है और गलत सन्देश देने वाला है।

मुस्लिम बना रहे रामलला की प्रतिमा – ‘News 24’ की खबर भ्रामक

दूसरे मीडिया संस्थानों की खबरों को खँगालने पर पता चलता है कि राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के लिए जो समारोह होगा, उसमें सजाने के लिए जो मूर्तियाँ बन रही हैं – उन्हें जमालुद्दीन और उसका बेटा बिट्टू बना रहे थे। ये आदमकद मूर्तियाँ फाइबर की बनाई जा रही हैं, जिन्हें मंदिर परिसर में लगाया जाएगा। भगवान राम की कई मूर्तियाँ अयोध्या के मुख्य स्थलों पर लगाने की भी तैयारी है, उन्हें गढ़ने में जमालुद्दीन और उसका बेटा शामिल हैं। ये लोग मुख्य प्रतिमा नहीं बना रहे।

फाइबर की प्रतिमाओं को मुख्यतः सजावट के लिए उपयोग में लाया जाता है, उन्हें मंदिर के भीतर स्थापित नहीं किया जाता। जहाँ भारत में अधिकतर मंदिरों में पत्थर की प्रतिमाएँ स्थापित की जाती हैं, वहीं त्योहारों के दौरान मिट्टी की मूर्तियाँ बनाई जाती हैं जिन्हें बाद में विसर्जित कर दिया जाता है। अयोध्या में रामलला की 3 मुख्य प्रतिमाएँ बन रही हैं, शिल्पकार अलग-अलग हैं। इन्हीं में से एक को गर्भगृह में स्थापित किया जाएगा और प्राण-प्रतिष्ठा का कार्यक्रम होगा।

वहीं जमालुद्दीन और उसका बेटा ऐसी मूर्तियाँ बना रहे जिन्हें मंदिर से बाहर लगाया जाना है और उन्हें बनाने में फाइबर का इस्तेमाल किया जाता है ताकि वो हर मौसम और परिस्थिति को बर्दाश्त कर सकें। नॉर्थ 24 परगना के रहने वाले बाप-बेटों को ये काम ऑनलाइन खोजने पर मिला था और फिर अयोध्या से उन्हें ऑर्डर मिला। अपने ही नाम से वर्कशॉप चलाने वाले बिट्टू का कहना है कि एक आदमकद प्रतिमा बनाने में एक-डेढ़ महीने लगते हैं और इसमें 30-35 लोग मेहनत करते हैं। इन मूर्तियों को अयोध्या ले जाया जाएगा।

जहाँ तक रामलला की मुख्य प्रतिमा की बात है, ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ के महासचिव चंपत राय ने बताया था कि गणेश भट्ट, कर्नाटक के अरुण योगीराज और जयपुर के सत्यनारायण पांडेय ये प्रतिमाएँ बना रहे हैं। 2 मूर्तियाँ कर्नाटक और एक राजस्थान के पत्थर से बन रहे हैं। नेपाल, ओडिशा और महाराष्ट्र से भी पत्थर आए थे, लेकिन उन्हें मुख्य प्रतिमा के लिए उपयुक्त नहीं पाया गया। गणेश भट्ट नेल्लिकारु रॉक (कृष्ण शिला) से मूर्ति बना रहे हैं। वहीं अरुण योगीराज केदारनाथ में शंकराचार्य की प्रतिमा गढ़ने के लिए जाने जाते हैं, जिसका लोकार्पण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था।

बिहार में मृत्युभोज को लेकर हत्या, सोशल मीडिया में राजस्थान के एक्ट पर बहस: जानिए क्या है मौत के बाद भोजन कराने की परंपरा, क्या कहता है कानून

62 साल के कमलेश्वरी मंडल को पहले बाँधकर पीटा। फिर गर्दन मरोड़कर हत्या कर दी। मंडल ने अपने जीजा की मृत्यु के बाद भोज का आयोजन अपने घर पर किया था, क्योंकि उनकी बहन मायके में रहती थी। कथित तौर पर इससे उनके जीजा के परिजन और रिश्तेदार नाराज थे।

बिहार के पूर्णिया में मृत्युभोज को लेकर हत्या की यह खबर ऐसे समय में आई है, जब सोशल मीडिया में राजस्थान के मृत्युभोज निवारण अधिनियम 1960 को लेकर बहस छिड़ी हुई है। इस बहस की शुरुआत 13 दिसम्बर 2023 को राजस्थान पुलिस के एक सोशल मीडिया पोस्ट से हुई।

एक्स/ट्विटर पर इस कानून के बारे में बताते हुए राजस्थान पुलिस ने लिखा है, “मृत्युभोज करना और उसमें शामिल होना कानूनन दंडनीय है। मानवीय दृष्टिकोण से भी यह आयोजन अनुचित है। आइए मिलकर इस कुरूति को समाज से दूर करें, इसका विरोध करें।”

इसके बाद राजस्थान पुलिस की आलोचना होने लगी। इसे कई पोस्ट में परंपराओं में गैर जरूरी दखल बताया और कुछ लोगों ने इस पोस्ट के भाजपा के नई सरकार के गठन से ठीक पहले किए जाने पर प्रश्न उठाए।

लोगों ने कहा कि मृत्युभोज में लोग अपने पितरों के मोक्ष के लिए करते हैं। कुछ यूजर्स ने पूछा कि इसे कुरीति कैसे कहा जा सकता है? लोगों ने राजस्थान पुलिस को औपनिवेशिक दिमाग वाला बाबू बताते हुए चोरों को पकड़ने की हिदायत दी। एक यूजर ने कहा कि एकाएक राजस्थान पुलिस इस विषय पर क्यों पोस्ट कर रही है, जबकि इस सम्बन्ध में कानून 1960 से ही है।

क्या राजस्थान पुलिस इस विषय में पहली बार पोस्ट कर रही है?

ऐसा पहली बार नहीं है जब राजस्थान की पुलिस ने मृत्युभोज और इससे सम्बंधित कानून पर पोस्ट किया हो। इससे पहले 2020, 2021, 2022 और 2023 में भी पोस्ट कर चुकी है। राजस्थान पुलिस के जिला स्तर के हैंडल भी इस विषय में ट्वीट करती आई है। हालाँकि 2020 से पहले का कोई पोस्ट नहीं है और इसका एक कारण है।

राजस्थान पुलिस द्वारा पूर्व में की गई पोस्ट
राजस्थान पुलिस द्वारा पूर्व में की गई पोस्ट
राजस्थान पुलिस द्वारा पूर्व में की गई पोस्ट
राजस्थान पुलिस द्वारा पूर्व में की गई पोस्ट
राजस्थान पुलिस द्वारा पूर्व में की गई पोस्ट
राजस्थान पुलिस द्वारा पूर्व में की गई पोस्ट

इस विषय में कानून भले ही 1960 में ही बन गया हो, लेकिन वर्ष 2020 से पहले तक राजस्थान में इस कानून का कड़ाई से पालन नहीं हो रहा था। इस कानून को कड़ाई से पालन करवाने की शुरुआत हुई 2020 में जब कोरोना महामारी आई।

राजस्थान सरकार ने कोरोना महामारी में लोगों के इकट्ठा होने पर रोक लगाई थी। इस दौरान राजस्थान सरकार ने आदेश दिए कि कोरोना गाइडलाइन्स का उल्लंघन ना होने पाए और मृत्युभोज जैसे आयोजन ना किए जाएँ, क्योंकि इनमें लोग इकट्ठा होते हैं। इस संबंध में कई शिकायतें भी आई थीं। इसके बाद कुछ मामले भी दर्ज हुए और जुर्माना भी लगा।

मृत्युभोज और मृत्युभोज कानून क्या है?

राजस्थान के सभी इलाकों और विशेष कर ग्रामीण अंचलों में यह परम्परा रही है कि किसी की मृत्यु के निश्चित दिनों के बाद उसके परिजन मृत्युभोज का आयोजन करते हैं। यह भारत में अन्य प्रदेशों में भी होता है। इस आयोजन में परिजनों के अलावा मृतक का परिवार अपने सम्बन्धियों तथा गाँव-मोहल्ले और समाज के लोगों को आमंत्रित करता है।

इसका उद्देश्य यह होता है कि जिस भी घर में मृत्यु हुई है, उसके यहाँ से आना-जाना पुनः सामान्य हो गया है और शोक का काल समाप्त हो गया है। हालाँकि, इस रीति में समस्या तब आई जब यह समाज में दबाव डाल कर करवाया जाने लगा। ऐसे में जो परिवार इस आयोजन में सक्षम नहीं थे उन पर कभी-कभी कर्जे का भी बोझ चढ़ जाता था। यह भी कहा गया कि जो व्यक्ति मृत्युभोज नहीं करवाते उनको समाज में हेय दृष्टि से देखा जाता था।

हालाँकि, ऐसा नहीं है कि हिन्दुओं में ही मृत्युभोज का आयोजन होता है, मुस्लिमो में चेहल्लुम का आयोजन किया जाता है। यह मृतक की मौत के 40 दिन के बाद आयोजित होता है जिसमें लोगों को खाने पर बुलाया जाता है।

इसको लेकर राजस्थान में राजस्थान मृत्युभोज निवारण अधिनियम वर्ष 1960 में आया। इसके अंतर्गत नुक्ता, मोसर और चेहल्लुम जैसे आयोजनों पर प्रतिबंध लगा दिया गया। हालाँकि, इसके अंतर्गत परिजनों, अपने जानने वालों और अन्य लोगों को भोज करवाने पर रोक नहीं थी।

राजस्थान मृत्युभोज निवारण कानून
राजस्थान मृत्युभोज निवारण कानून

इस कानून के तहत मृत्युभोज का आयोजन करने और उसमें भाग लेने, दोनों को गैरकानूनी घोषित किया गया। इसके उल्लंघन पर ₹1,000 और एक वर्ष तक सजा का प्रावधान किया गया। इस कानून में मृत्युभोज या अन्य ऐसे ही किसी आयोजन में कितने लोग शामिल हों, उसकी संख्या नहीं बताई गई है। राजस्थान सरकार का ही एक अन्य कानून कहता है कि 100 लोगों से अधिक के भोज का आयोजन नहीं किया जा सकता।

हालाँकि, यह कानून किसी भी तरह से लोगों को इस बात से नहीं रोकता कि वह अंतिम संस्कार से सम्बंधित रीति-रिवाजों में कोई बदलाव करें। इसका उद्देश्य यह था कि मृत्युभोज के कारण किसी परिवार पर आर्थिक बोझ ना पड़े। या किसी को कोई इसके लिए मजबूर न कर सके।

संसद में स्प्रे करने वाले लौंडे का लाठी से नहीं हुआ ‘स्वागत’ इसलिए छटपटा रहे हैं RJD के ‘लठैत’: कुटाई पर लिबरल प्रलाप ‘दुख’ नहीं, ‘दर्द’ है उनका

जब टीवी एलीट माना जाता था, तब उस पर एक प्रचार आता था। जिसमें उस दौर के बुजुर्ग अभिनेता अशोक कुमार और शम्मी कपूर यह समझाते नजर आते थे कि ‘स्वागत मतलब पान पराग’ होता है। उसी दौर में बिहार में एक मसीहा उभर रहा था, जिसे आमलोगों का नेता माना जाता था। यह दूसरी बात है कि बाद में वह ‘चाराखोर’ निकला और लोगों को यह भी पता चला कि उसके लिए ‘स्वागत’ का मतलब लाठी होता है।

जाहिर है कि जिनकी ट्रेनिंग ही लाठी वाले चरवाहा विद्यालय में हुई हो वे झोंटा पकड़कर खींचने, मुक्का मारने, जूतियाने… को तो ‘स्वागत’ नहीं ही मानेंगे। इसलिए लोकसभा में 13 दिसम्बर 2023 को कूदकर स्प्रे मारने वाले लौंडे की सांसदों वाली कुटाई कुछ लोगों को रास नहीं आई है। लेकिन यह उनका दुख नहीं (जैसा कुछ लोग समझ रहे हैं), बल्कि दर्द है।

जब ‘दर्द’ गहरा हो और पिटने वाला लौंडा ‘अपना’ हो तो लाठी बगैर उसका ‘स्वागत’ लोकतंत्र की सेहत के लिए खराब हो ही जाता है। यही कारण है कि बिहार को 15 साल तक जंगलराज के चरमसुख का भोग कराने वाली राष्ट्रीय जनता दल (RJD) को इस ‘स्वागत’ से ज्वर हो गया है। राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष (यदि वहाँ ऐसे किसी पद की औकात हो) शिवानन्द तिवारी ने कहा है कि वह यह मान नहीं सकते कि वह युवक संसद में हिंसा फैलाने के लिए कूदा था। उनका विचार है कि यह ‘छोटी-मोटी घटना’ है।

छोटी-मोटी घटना वाली उनकी बात में दम है, क्योंकि तेजाब से युवकों को नहलाने वाले शहाबुद्दीन को उनकी ही पार्टी उस लोकसभा में भेजा करती थी, जिसमें 13 दिसंबर को स्प्रे वाली घटना हुई है। वहीं राजद के बुद्धिजीवी होने का दावा करने वाले (यह दावा सिद्ध नहीं किया जा सकता) प्रोफेसर मनोज झा का कहना है कि सांसदों पर हमला करने आए युवकों की पिटाई ‘असंसदीय’ है और सांसदों की छवि (अगर उनकी छवि पहले से कुछ अच्छी है तो) को बिगाड़ता है।

भले प्रोफेसर झा स्वयंभू बुद्धिजीवी हों लेकिन उनकी यह बात मूर्खतापूर्ण लगती है।अपने ऊपर हमले से बचने के लिए प्रतिक्रिया करने का अधिकार देश का संविधान भी इस देश के लोगों को देता है। जाहिर है सांसदों ने संविधान का पालन किया है। (इसके लिए वह बधाई के पात्र हैं)

सांसदों ने अगर उस युवक को नियंत्रित करने के लिए पकड़ा और अपनी तथा सदन में मौजूद लोगों की जान बचाने के लिए उसे एकाध हाथ लगाए तो यह आत्मरक्षा ही कहा जाएगा। (नहीं भी कहोगे तो क्या कर लोगे?)

क्या प्रोफ़ेसर झा इस बात की गारंटी ले सकते हैं कि अगर उस युवक को पकड़ कर मारा ना गया होता तो वह किसी सांसद को नुकसान नहीं पहुँचाता?

वह बात अलग है कि उनकी पार्टी के मालिक यादव परिवार के छोटे बेटे (कम से कम कागजों के अनुसार) और बिहार के वन एवं पर्यावरण मंत्री (अगर उन्हें यह होने में कोई रूचि है) तेजप्रताप यादव ने एक बार एक दलित पत्रकार (जो कि वह व्यक्ति खुद को बताता है) को 2 मिनट बात करने (इसे कूटने के लिए पढ़ा जाए) के लिए ऐसा बुलाया था कि उसे अपनी जान बचाकर भागना पड़ा था। इसका वीडियो भी राजद समर्थकों ने खूब चटखारे लेकर शेयर किया था।

मेरे एक बॉस बताते हैं कि 1990 के आसपास लालू यादव के मुख्यमंत्री रहते हुए कोर्ट के आदेशानुसार हाईस्कूल शिक्षक भर्ती की दरख्वास्त लेकर गए थे और लालू यादव ने उनका ‘स्वागत’ करने के लिए लाठी मँगाई थी। इसके पीछे लालू का तर्क था कि कोई भूमिहार (यह एक जाति होती है और लालू की पार्टी के अनुसार यह होना एक अपराध है) कैसे शिक्षक की नौकरी माँगने उनके द्वार पर आ सकता है। लाठी से स्वागत का लालू मोह ऐसा है कि राजद ‘तेल पिलावन लाठी घुमावन रैला’ भी कर चुका है।

जब पार्टी की ‘विशेषज्ञता’ इतने आले दर्जे की हो तो उसके ‘लठैतों’ का हाथ से कुटाई पर पीड़ा छलक जाना तो बनता ही है। पीड़ा से कराह उठना इनके ‘मानस पुत्रों’ का भी बनता है। उन्होंने भी निराश नहीं किया है।

यही कारण है कि हाल ही में एक राष्ट्रीय चैनल से एंकर की नौकरी छोड़ कर लाल सलाम को मजबूत करने के लिए यूट्यूब पर लाल माइक को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे एक ‘पत्रकार’ को सांसदों की आत्मरक्षा का प्रयास ‘पैथेटिक’ यानी बहुत ही अशोभनीय लगा है। लाल माइक वाले महोदय का कहना है कि सांसदों को कानून को अपने हाथों में नहीं लेना चाहिए था।

हालाँकि, एंकर जी कुछ चूक गए हैं क्योंकि कुछ सांसदों ने पिटाई के दौरान कानून को पैरों में भी लिया था और संभवतः उस युवक को लातें भी पड़ी थी। यह वही महोदय हैं जिनके चैनल में काम करते समय इनके एक वरिष्ठ (जो इनसे पहले यूट्यूबर हो लिए) ने दिल्ली दंगों में पुलिस पर फायरिंग करने वाले शाहरुख की बन्दूक को बटुआ (इसे बटुआ ही पढ़ें) बता दिया था।

इन सबके अलावा कम्युनिस्ट पत्रकार इस बात से चिंतित हो गए हैं कि उनकी विरोध-प्रदर्शन की विधा को कोई और लौंडे-लपाड़ी लूट ले गए और सरकार के खिलाफ बोलने का तमगा भी कुछ एक हलकों में हासिल कर लिया। इसलिए सत्यहिंदी (असल में वह असत्यहिंदी है) पर एक रिटायर्ड (टायर्ड भी) पत्रकार ने कहा कि यह हमारे ही लोग थे।

वैसे उनकी बात पर विश्वास करना कुछ ख़ास कठिन नहीं है, क्योंकि 2001 की 13 दिसंबर को ही संसद पर हुए आतंकी हमले का मास्टरमाइंड अफजल गुरु भी कम्युनिस्टों के लिए अपना (अब्बा पढ़े) ही था। रिटायर्ड पत्रकार का कहना है, “पार्लियामेंट में अपने लोग गए थे, बस गलत तरीके से गए, लेकिन किसी को नुकसान नहीं पहुँचाया।”

कम्युनिस्ट पत्रकार यह देख कर खुद हैरान था कि अन्य कम्युनिस्टों की तरह संसद में गलत तरीके से जाना वाला कोई व्यक्ति नुकसान कैसे नहीं पहुँचा पाया। क्योंकि इससे पहले जितने भी कम्युनिस्ट बंगाल में चुनावी हिंसा के बाद संसद पहुँचे थे वह देश को कुछ ना कुछ नुकसान पहुँचाने में अवश्य सफल रहे हैं।

खैर, अब खबर यह है कि इस मामले में 6 लोग गिरफ्तार हुए हैं। दिल्ली पुलिस ने उनके साथ ‘अशोभनीय’ या ‘असंसदीय’ व्यवहार किया या नहीं, अभी स्पष्ट नहीं है। इन सब पर UAPA भी लगाया गया है। इससे भी कम्युनिस्टों को दर्द हो सकता है।