Home Blog Page 1317

‘पहले केस पढ़ूँगा, तब सुनवाई’ : सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी तक टाली महुआ मोइत्रा की अर्जी, तत्काल सुनवाई की लगाई थी गुहार

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (15 दिसंबर, 2023) को तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) नेता महुआ मोइत्रा की याचिका पर सुनवाई 3 जनवरी 2024 तक के लिए टाल दी है। मोइत्रा ने ये याचिका अनैतिक आचरण के आरोप में लोकसभा से हाल ही में हुए अपने निष्कासन के खिलाफ डाली थी।

शुक्रवार को न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और एसवीएन भट्टी की पीठ मोइत्रा की भारतीय संसद के निचले सदन लोकसभा से निष्कासन को चुनौती देने वाली इस रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस दौरान न्यायमूर्ति खन्ना ने कहा, “डॉ. सिंघवी, मुझे सुबह फ़ाइल मिली और इसे स्कैन करने का वक्त मेरे पास नहीं था। क्या हम इसे 3 या 4 तारीख को रख सकते हैं? मैं पहले इसे पढ़ना चाहूँगा।”

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में कृष्णानगर लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व करने वाली सांसद महुआ मोइत्रा को 8 दिसंबर को एथिक्स कमेटी की रिपोर्ट के बाद संसद से निष्कासित कर दिया गया था। उनके खिलाफ कैश-फॉर-क्वेरी के आरोपों पर अनैतिक आचरण का आरोप लगा था।

TMC नेता महुआ मोइत्रा की पैरवी के लिए अदालत में सीनियर वकील एएम सिंघवी पेश हुए थे। इस दौरान सिंघवी ने अदालत में वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे की मौजूदगी पर ऐतराज जताया। साल्वे, मोइत्रा पर आरोप लगाने वाले बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे की तरफ से पेश हुए थे। बीजेपी सांसद दुबे की शिकायत के आधार पर ही मोइत्रा के खिलाफ संसद की एथिक्स कमेटी ने जाँच शुरू की थी।

बता दें कि शुक्रवार को टीएमसी नेता मोइत्रा की मुख्य याचिका के साथ अंतरिम राहत के लिए एक आवेदन पर भी ही सुनवाई होनी था, लेकिन पीठ ने आज मामले पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी सांसद की याचिका पर तत्काल सुनवाई करने से इंकार कर दिया था। सीनियर वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने मोइत्रा की ओर से इस याचिका को अर्जेंट लिस्टिंग में रखने की गुहार लगाई थी।

हालाँकि चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया डीवाई चंद्रचूड़ ने बुधवार (13 दिसंबर 2023) को टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा को दिलासा दिया था कि वह कैश फॉर क्वेरी केस में लोकसभा से उनके निष्कासन के खिलाफ उनकी याचिका की लिस्टिंग पर तवज्जो देंगे।

दरअसल मोइत्रा को लेकर विवाद तब सामने आया जब बीजेपी के सांसद निशिकांत दुबे ने सितंबर 2023 में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को महुआ के खिलाफ शिकायती पत्र लिखा था।

ये पत्र वकील जय अनंत देहाद्रई की एक शिकायत पर आधारित था। इसमें आरोप लगाया गया था कि मोइत्रा ने संसद में सवाल पूछने के लिए पैसे और फेवर लिया था। वहीं इसके बाद कारोबारी दर्शन हीरानंदानी ने संसद की आचार समिति को दिए एक हलफनामे में दावा किया कि मोइत्रा ने उन्हें अपने लोकसभा पोर्टल लॉगिन क्रेडेंशियल दिए थे।

आरोपों के मुताबिक, कारोबारी हीरानंदानी ने मोइत्रा की तरफ संसद में सवाल पूछने के लिए इसका इस्तेमाल किया और बदले में महुआ को नकद और तोहफे दिए। इन आरोपों को देखेते हुए केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) ने भी मामले में एफआईआर दर्ज की थी।

मोइत्रा पर सांसद दुबे के आरोपों के बाद अक्टूबर में उनके खिलाफ संसदीय जाँच शुरू की गई थी। जाँच पूरी करने के बाद संसद की आचार समिति ने 9 नवंबर को एक बैठक में ‘कैश-फॉर-क्वेरी’ घोटाले को लेकर सांसद को लोकसभा से निष्कासित करने की सिफारिश करने वाली रिपोर्ट दी थी।

हालाँकि, महुआ खुद पर लगे इन आरोपों से लगातार इनकार करती रहीं। टीएमसी नेता ने इस बात पर भी अफसोस जताया कि उन्हें एथिक्स पैनल की रिपोर्ट पर विचार के दौरान सदन में अपना बचाव करने या उनके अलग हुए साथी और उन पर आरोप लगाने वाले बीजेपी सांसद से जिरह करने का मौका नहीं दिया गया। इसके बाद 8 दिसंबर 2023 को मोइत्रा को संसद से निष्काषित कर दिया गया।

कौन है ललित झा, संसद में घुसपैठ का प्लान B भी कर रखा था तैयार: बिहार से लेकर कोलकाता तक कनेक्शन, जानिए मास्टरमाइंड के बारे में सब कुछ

संसद में घुसपैठ मामले के मास्टरमाइंड ललित झा की गिरफ्तारी के बाद कई खुलासे हो रहे हैं। इसी क्रम में एक जानकारी यह भी सामने आई है कि ललित झा ने संसद में हड़कंप मचवाने के 2 प्लान बनाए हुए थे। इसे नाम दिया गया था प्लान-A और प्लान-B का।

प्लान-A में यही था कि संसद के अंदर सागर शर्मा और मनोरंजन डी जाएँगे क्योंकि उनके पास बन गए थे। इसी प्लान के तहत संसद के बाहर अमोल और नीलम ट्रांसपोर्ट भवन की ओर से संसद के करीब जाएँगे और वहाँ कलर बम जलाएँगे।

प्लान-B में था कि किसी वजह से अगर नीलम और अमोल संसद के करीब नहीं पहुँच पाते तो उनकी जगह महेश और कैलाश दूसरी ओर से किसी तरह से संसद के करीब पहुँचते और मीडिया के कैमरों के आगे कलर बम जलाते और नारेबाजी करते।

बता दें कि संसद में घुसपैठ की लंबी चौड़ी प्लानिंग करने वाला मास्टरमाइंड ललित झा गुरुवार (14 दिसंबर 2023) को गिरफ्तार किया गया। अभी तक सामने आई जानकारी के अनुसार से यही पता चला है कि वह बिहार का रहने वाला है। लेकिन कुछ समय से पहले पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले में आदिवासी शिक्षा पर काम करने वाले एक गैर सरकारी संगठन, समयाबादी सुभाष सभा समूह का अध्यक्ष था। वह समूह के विभिन्न आंदोलनों में सक्रिय था।

इसके अलावा कुछ समय से वो एनजीओ नीलाक्ष आइच के लिए काम करता था। वहाँ वो जनरल सेक्रेट्री है। बंगाल में उसका ठिकाना बड़बाजार इलाके में एक किराए के मकान में था। उसकी तलाश जब शुरू हुई तो पुलिस ने बिहार पुलिस से संपर्क साधा। लेकिन उसके बारे में वहाँ से सूचना नहीं मिली। इसके बाद उस एनजीओ से संपर्क किया गया, जिसके लिए वह काम करता था मगर फिर भी कोई सूचना नहीं मिली।

बस इतना पता चला कि वह शहीद भगत सिंह से प्रेरित होने के नाम पर ये सब कर रहा था। केस के अन्य आरोपित सागर शर्मा, मनोरंजन, नीलम, अमोल शिंदे और ललित झा सब के सब डेढ़ वर्ष पहले सामाजिद मुद्दों को एक तरीके से उठाने के लिए इन्होंने मैसूर में बैठक की थी। इन सबके बीच आखिरी मुलाकात इंडिया गेट पर हुई थी।

13 दिसंबर को घटना को अंजाम देने से पहले चारों आरोपितों ने अपने अपने फोन ललित झा को सौंपे थे क्योंकि उन्हें पता था कि ये कारनामा करने के बाद वो लोग पकड़े जाएँगे। ऐसे में पुलिस के हाथ कोई सबूत न लगे इसलिए उन्होंने अपने फोन ललित को दे दिए थे। ललित घटना के वक्त तक संसद के बाहर खड़ा था, अमोल-नीलम की वीडियो बनाकर वो वहाँ से निकल गया।। उसने राजस्थान के कुचामन में जाकर अपने दोस्त महेश के साथ सभी आरोपितों के फोन को जलाया और फिर दिल्ली में आकर सरेंडर किया।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर मुस्लिम पक्ष को सुप्रीम कोर्ट से झटका, शाही ईदगाह के सर्वे पर रोक से किया इनकार: मथुरा पर VHP ने भरी हुंकार

मथुरा में भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली को लेकर चल रही अदालती लड़ाई में हिंदू पक्ष को बड़ी जीत मिली है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार (14 दिसंबर, 2023) को मथुरा के शाही ईदगाह के वैज्ञानिक सर्वे की अनुमति दी थी, जिसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट से माँग की गई थी कि वो हाई कोर्ट के फैसले पर स्टे लगाए, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने स्टे ऑर्डर देने से इनकार कर दिया। अब हाई कोर्ट द्वारा तय किए गए तरीकों से शाही ईदगाह का पूरा वैज्ञानिक सर्वे किया जाए।

इस वैज्ञानिक सर्वे से ये पता चलेगा कि जिन हिंदू प्रतीकों के होने का दावा हिंदू पक्ष कर रहा है, वो मिले या नहीं। हिंदू पक्ष का दावा है कि शाही ईदगाह को औरंगजेब के शासनकाल में हिंदुओं के पवित्र मंदिर को तोड़कर बनाया गया था, जो हमारे आराध्य भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली है। इस जगह पर हिंदू शताब्दियों से पूजा करते रहे हैं। ऐसे में शाही ईदगाह मस्जिद को मौके से हटाना चाहिए, ताकि हिंदुओं को अपने अराध्य की पूजा उनके जन्मस्थान पर करने का मौका मिल सके।

अपने दावे को साबित करने के लिए हिंदू पक्ष ने कोर्ट में पूरे शाही ईदगाह परिसर के वैज्ञानिक सर्वे की माँग की थी। हिंदू पक्ष का कहना है कि शाही मस्जिद को हिंदुओं के पवित्र मंदिरों को तोड़कर बनाया गया, जिसके निशान अब भी स्पष्ट तौर पर दिखते हैं। ‘लाइव लॉ’ की रिपोर्ट के मुताबिक, अब इस वैज्ञानिक सर्वे को मंजूरी मिल गई है।

इस बारे में हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले की जानकारी दी। उन्होंने कहा, “सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले के ट्रांसफर से जुड़े मामले में 9 जनवरी की तारीख तय की है। तब इलाहाबाद हाई कोर्ट का फैसला ही मान्य रहेगा। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले पर किसी तरह की कोई रोक नहीं लगाई है, ऐसे में हाई कोर्ट द्वारा तय किए गए निर्देशों के ध्यान में रखते हुए शाही ईदगाह का वैज्ञानिक सर्वे जल्द पूरा कर लिया जाएगा।”

इस खबर पर प्रतिक्रिया देते हुए हुए VHP (विश्व हिन्दू परिषद) के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा, “भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि की मुक्ति में बाधक और विदेशी आक्रांताओं सहयोगियों को अब सर्वोच्च न्यायालय ने भी जड़ा गहरा तमाचा! मथुरा में मंदिर परिसर का सर्वे अब हो कर ही रहेगा। आशा है अब न्याय और सत्य की अन्वेषण में कोई और बाधक नहीं बनेगा!”

बता दें कि गुरुवार (14 दिसंबर, 2023) को मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर स्थित शाही ईदगाह के सर्वे के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अनुमति दी थी। कोर्ट ने इस सम्बन्ध में दायर याचिका को मंज़ूरी देते हुए इस पूरे परिसर की जाँच के लिए एक एडवोकेट कमिश्नर की नियुक्ति की माँग को माना है। इसी की देखरेख में सर्वे पूरा होगा। यह याचिका हिन्दू पक्ष की तरफ से श्रीकृष्ण विराजमान और वकील विष्णु शंकर जैन समेत 7 लोगों द्वारा लगाई गई थी।

हिन्दू पक्ष का दावा है कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म राजा कंस के कारागार में हुआ था और यह जन्मस्थान शाही ईदगाह के वर्तमान ढाँचे के ठीक नीचे है। सन् 1670 में मुगल आक्रांता औरंगज़ेब ने मथुरा पर हमला कर दिया था और केशवदेव मंदिर को ध्वस्त करके उसके ऊपर शाही ईदगाह ढाँचा बनवा दिया था और इसे मस्जिद कहने लगे। मथुरा का मुद्दा नया नहीं है।

अदालत में इस मामले में याचिकाएँ दाखिल की गई हैं और उन पर सुनवाई होती रही है। 13.37 एकड़ जमीन पर दावा करते हुए हिन्दू यहाँ से शाही ईदगाह ढाँचे को हटाने की माँग करते रहे हैं। 1935 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने वाराणसी के हिन्दू राजा को भूमि के अधिकार सौंपे थे।

‘इजरायल पर अल्लाह का कहर बरपेगा’ कहते ही मुस्लिम सांसद को आया हार्ट अटैक, 2 दिन बाद अस्पताल में हो गई मौत

तुर्किए (Turkey) के सांसद हसन बित्मेज की मौत हो गई है। 12 दिसंबर 2023 को एक संसदीय संबोधन के दौरान उन्हें हार्ट अटैक आया था। इसके बाद उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया था। 53 साल के बित्मेज को हार्ट अटैक अपने भाषण में इजरायल को कोसने के बाद आया था।

तुर्किए के स्वास्थ्य मंत्री फहार्तिन कोका ने गुरुवार (14 दिसंबर 2023) को एक्स/ट्विटर पर किए पोस्ट में सांसद बित्मेज की मौत की जानकारी दी है। उन्होंने लिखा, “अंकारा बिल्केंट सिटी अस्पताल की इंटेंसिव केयर यूनिट में हसन बित्मेज का इलाज चल रहा था। सभी कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका और आज रात 11:50 बजे उनकी मौत हो गई। अल्लाह हमारे डिप्टी पर रहम करें, मैं उनके परिवार और उनके सभी प्रियजनों के लिए अपनी संवेदनाएँ व्यक्त करता हूँ। रूह को चैन मिले।”

बित्मेज तुर्की इस्लामिक फेलिसिटी पार्टी के सांसद थे। अपना आखिरी भाषण उन्होंने इजरायल के गाजा में चल रहे अभियान को लेकर दिया था। इस दौरान उन्होंने यहूदी राष्ट्र को बद्दुआ देते हुए कहा था कि उस पर अल्लाह का कहर बरसेगा।

उअपने भाषण का अंत उन्होंने ‘इजरायल पर अल्लाह का कहर बरपेगा और वह इससे बच नहीं सकेगा, मैं आप सबको सलाम करता हूँ’ कह कर किया था। इसके तुरंत बाद उन्हें हार्ट अटैक आया और वह जमीन पर गिर गए। हसन के गिरने के बाद वहाँ मौजूद अन्य सांसद उन्हें उठाने के लिए दौड़े। वहीं मौजूद एक अन्य सांसद डॉ. तुहान कोमेज ने उन्हें सीपीआर दी थी। लेकिन, बित्मेज की हालत में सुधार नहीं आया और उन्हें स्ट्रेचर पर लादकर अस्पताल ले जाया गया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक हसन बित्मेज डायबिटीज के मरीज भी थे। इस्लामी आतंकी संगठन हमास ने 7 अक्टूबर, 2023 को इजरायल पर हमला किया था। इसके बाद इजरायल गाजा में हमास के आतंकियों के खिलाफ सैन्य अभियान चला रहा है। इजरायल की इस कार्रवाई पर कई मुस्लिम देश खासे नाराज है।

गाना गाते आया हार्ट अटैक, स्टेज पर ही गिरकर हो गई सिंगर की मौत: श्रेयस तलपड़े शूटिंग के दौरान हुए बेहोश, अस्पताल में हुई सर्जरी

सोशल मीडिया में आजकल हार्ट अटैक और इससे होने वाली अचानक मौतों को लेकर सोशल मीडिया में तरह-तरह की चर्चाएँ कई दिनों से चल रही हैं। अब 2 बड़े सेलेब्रिटियों को हार्ट अटैक आने की खबर है। इनमें से एक भारत के हैं तो एक ब्राजील के। जहाँ अभिनेता श्रेयस तलपड़े ‘वेलकम टू जंगल’ फिल्म की शूटिंग के बाद अचानक से गिर कर बेहोश हो गए, वहीं गायक पेड्रो हेनरिक अपने एक स्टेज परफॉर्मेंस के दर्जन अचानक से गिर पड़े और उनकी मौत हो गई।

श्रेयस तलपड़े को हार्ट अटैक, अस्पताल में भर्ती

अभिनेता श्रेयस तलपड़े ‘वेलकम’ फिल्म की तीसरी क़िस्त ‘वेलकम टू जंगल’ की शूटिंग में व्यस्त थे। गुरुवार (24 दिसंबर, 2023) की शाम को उन्हें अचानक से हार्ट अटैक आ गया, जिसके बाद उनका अस्पताल में इलाज चल रहा है। मुंबई के अँधेरी क्षेत्र में स्थित Bellevue अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। अस्पताल प्रशासन ने कहा है कि वो अब ठीक हैं। उनकी एंजियोप्लास्टी कराई गई है, ये सर्जरी सफल रही।

अस्पताल ने बताया कि उन्हें रात 10 बजे भर्ती कराया गया। ‘वेलकम टू जंगल’ की शूटिंग के दौरान ही वो असहज महसूस करने लगे थे। 2005 की स्पोर्ट्स फिल्म ‘इक़बाल’ से लोकप्रियता बटोरने वाले श्रेयस तलपड़े 47 साल के हैं। अल्लू अर्जुन की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘पुष्पा’ में तलपड़े ने उन्हें हिंदी में आवाज़ दी। ‘ओम शांति ओम’ (2007) और ‘गोलमाल’ सीरीज में उनका अभिनय काफी सराहा गया। कंगना रनौत की आपातकाल पर आने वाली फिल्म ‘इमरजेंसी’ में वो पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के किरदार में दिखाई देंगे।

स्टेज परफॉर्मेंस के दौरान ब्राजील के गायक पेड्रो हेनरिक की मौत

ब्राजील के गायक पेड्रो हेनरिक स्टेज परफॉर्मेंस के दौरान अचानक से गिर पड़े और उनकी मौत हो गई है। वो गॉस्पेल (जीसस क्राइस्ट की कहानी वाला गाना) गायक भी थे। उनके रिकॉर्ड लेबल ‘Todah Music’ ने उनके निधन की पुष्टि की है। बुधवार (13 दिसंबर, 2023) को हुई इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया है। उनकी उम्र मात्र 30 वर्ष थी। मौत से पहले वो ‘Vaj Ser Tao Lindo’ गाने पर परफॉर्म कर रहे थे, जो उनका फेमस गाना है।

‘Todah Music’ ने अपने बयान में कहा कि जीवन में कई ऐसी कठिन परिस्थितियाँ आ जाती हैं जिनका कोई स्पष्टीकरण नहीं होता। कंपनी ने कहा कि ईश्वर की इच्छा सर्वोपरि है और कंपनी ने पेड्रो हेनरिक को एक खुशमिजाज युवा करार दिया, जो सबके दोस्त थे। वो अपने माँ-बाप के एकमात्र बेटे थे। शादी के बाद वो पिता भी बन गए थे। कंपनी ने कहा कि ईसाई संगीत जगत शोक में है। बहिया स्थित पोर्टो सेगरो में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

कंडक्टर बस दौड़ाता रहा, ड्राइवर आरिफ तेज़ म्यूजिक बजा कर करता रहा रेप: हाइवे पर चलती बस में युवती से बलात्कार, चीख-पुकार सुन सवारियों ने पकड़ा

उत्तर प्रदेश के कानपुर से राजस्थान के जयपुर के लिए बस में सवार हुई 19 साल की लड़की को बस ड्राइवर आरिफ ने चलती बस में अपनी हवस का शिकार बना डाला। लड़की को आरिफ ने ये कहते हुए अपने केबिन में सोने के लिए कहा कि उसकी केबिन के आसपास शराबी लड़के हैं। लेकिन, रात में उसने बस की स्टेयरिंग कंडक्टर को थमा दी और म्यूजिक सिस्टम में तेज आवाज में गाने बजा दिए। इसके बाद वो केबिन में घुस गया और लड़की के साथ रेप को अंजाम दिया। इस बीच, लड़की की चीख-पुकार सुनकर सवारियों ने बस को रुकवा लिया और ड्राइवर को पकड़कर उसकी जमकर पिटाई की।

‘दैनिक भास्कर’ की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में सवारियों ने जैसे ही बस को रुकवाया, कंडक्टर बस से उतर कर फरार हो गया। जब सवारियों ने केबिन को जबरन खुलवाया, तब जाकर लड़की के साथ हैवानियत का पता चला। इसके बाद पीड़ित लड़की ने कानोता थाने में बस ड्राइवर आरिफ के खिलाफ FIR दर्ज कराई है, जिसकी जाँच की कमान बस्सी के एसीपी फूलचंद संभाल रहे हैं।

पीड़ित लड़की ने पुलिस को बताया है कि इस प्राइवेट बस में वो 9 दिसंबर को कानपुर से चढ़ी थी। कानपुर से बस रवाना होने के करीब आधे घंटे बाद ड्राइवर ने अपनी चाल में फँसाने के लिए उससे कहा कि आपकी सीट के पास शराबी लड़के बैठे हैं, ऐसे में वो अपनी सीट की जगह ड्राइवर के ऊपर की केबिन में बैठ जाए। इस केबिन में चार लड़के और एक लड़की पहले से थे। रात करीब 11 बजे ड्राइवर के ऊपर वाली सीट पर लेटी लड़की उतर कर नीचे आ गई। इसके बाद उसने बस में चल रहे म्यूजिक सिस्टम में तेज आवाज में गाना बजा दिया और बस की स्टेयरिंग कंडक्टर को सौंप दी।

पीड़िता ने बताया कि वो उस समय सो रही थी, जब ड्राइवर आरिफ ऊपर की केबिन में आया और केबिन को बंद कर लिया। उसने लड़की के साथ रेप की कोशिश शुरू कर दी। उसने काफी शोर मचाया और उसके चंगुल से निकलने की कोशिश की, लेकिन आरिफ उस पर भारी पड़ा। इस दौरान सवारियों ने लड़की की आवाज सुनकर बस को कानोता में पेट्रोल पंप के पास जबरदस्ती रुकवाया और उसे बचाया। इसके बाद सवारियों ने आरोपित आरिफ की जमकर पिटाई की और पुलिस को सौंप दिया।

पीड़िता ने कानोता थाने में ड्राइवर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है, जिसके बाद पुलिस ने गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर उसका मेडिकल कराया है। इस मामले की जाँच बस्सी के ACP फूलचंद कर रहे हैं।

इस वारदात की जानकारी सामने आने के बाद लोगों में काफी गुस्सा दिख रहा है। सोशल मीडिया पर लोगों ने आरोपित के एनकाउंटर की माँग की है। ‘डॉ लाडला’ नाम के ‘X’ हैंडल ने लिखा, “जयपुर के हाइवे पर चलती बस में युवती से रेप, बस ड्राइवर आरिफ खान ने रेप किया। तेज आवाज में म्यूजिक चलाकर कंडक्टर बस दौड़ाता रहा। भजनलाल शर्मा के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद इन रेपिस्ट जिहादियों के एनकाउंटर की खबर आनी चाहिए।”

बता दें कि कुछ समय पहले ही निर्भया कांड जैसे मामले में जयपुर में एक महिला को अगवा कर उसके साथ हैवानियत की वारदात सामने आई थी। वो मामला 17 नवंबर का था, जिसमें पीड़ित के परिजनों ने पुलिस से उसके अगवा होने की शिकायत की थी, तो पुलिस ने मामले को अनसुना करके 24 घंटे बाद आने के लिए कहा था। बाद में महिला बेहोशी की हालत में सड़क पर मिली थी। पीड़ित ने बताया था कि बस के ड्राइवर ने उसे मारने की नियत से चलती बस से फेंक दिया था। उस मामले में पुलिस ने आरोपित ड्राइवर राजेंद्र को गिरफ्तार कर लिया था।

महिला जज ने CJI से माँगी ‘इच्छा मृत्यु’, पत्र लिख किया कोर्ट में यौन शोषण का दावा, कहा- रात को आने का बनाते हैं दबाव

भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ को एक महिला जज ने पत्र लिखकर अपने साथ हुए यौन उत्पीड़न के बारे में बताया है। दो पन्ने के पत्र में महिला जज ने इच्छामृत्यु की इजाजत माँगते हुए कहा है कि उन्हें न्याय नहीं मिल रहा है। सीजेआई को लिखा गया ये पत्र सोशल मीडिया में वायरल है।

बताया जा रहा है कि इस चिट्ठी के वायरल होने के बाद सीजेआई चंद्रचूड़ ने इस पर संज्ञान लिया है। उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट से मामले की रिपोर्ट माँगी है। सूत्रों के हवाले से दी गई खबर में बताया गया कि सेकेट्री जनरल ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को पत्र लिखकर महिला जज द्वारा दी गई सारी शिकायतों की जानकारी माँगी। इसके साथ ही शिकायत से निपटने वाली आतंरिक समिति से कार्यवाही की स्थिति के बारे में भी पूछा।

वायरल चिट्ठी में महिला जज ने बता रखा है कि एक पोस्टिंग के दौरान ज़िला जज और उनके करीबियों ने उनके साथ मानसिक और शरीरिक शोषण किया। दावा ये भी है कि जिला जज ने उनसे रात में मिलने का दबाव बनाया।

बांदा में तैनात महिला जज ने सीजेआई को लिखे अपने पत्र में कहा, “मेरे छोटे से कार्यकाल में मुझे प्रताड़ित होने का दुर्लभ सम्मान मिला। मेरे साथ हद पार यौन उत्पीड़न हुआ है। मेरे साथ कचरे जैसा बर्ताव किया गया। मुझे ऐसा महसूस हुआ जैसे कि मैं कोई कीड़ा हूँ। मुझे दूसरों को न्याय दिलाने की उम्मीद थी। मैं कितनी भोली थी।”

उन्होंने कार्यस्थलों पर महिला सुरक्षा को लेकर सवाल उठाते हुए कहा, “मैं भारत में काम करने वाली महिलाओं से कहना चाहती हूँ कि यौन उत्पीड़न के साथ जीन सीख लो। यह हमारे जीवन का सच है। पोश एक्ट हमसे कहा गया सबसे बड़ा झूठ है। कोई हमारी नहीं सुनता किसी को नहीं पड़ी। अगर तुम शिकायत दोगी तो तुम्हें प्रताड़ित किया जाएगा। और जब मैं कहती हूँ कि कोई नहीं सुनता इसमें सुप्रीम कोर्ट भी आता है। आपको 8 सेकेंड के लिए सुना जाएगा इसके बदले आपको धमकियाँ और जलालत मिलेगा। आप आत्महत्या करने को मजबूर हो जाओगे। अगर आप लकी रहीं तो पहले हीं प्रयास में सफल हो जाएँगी।”

उन्होंने कहा, “अगर कोई महिला सोचती है कि सिस्टम से लड़ेगी तो बता दूँ कि मैं नहीं लड़ पा रही। मैं जज हूँ। मेरे मामले में एक निष्पक्ष जाँच भी नहीं हो रही। मैं महिलाओं को सुझाव देती हूँ कि या तो खिलौना बन जाओ या निर्जीव वस्तु।”

उन्होंने लिखा, “मैं दूसरों को क्या न्याय दिलाऊँगी, जब मुझे ही कोई उम्मीद नहीं है। मुझे लगा था कि शीर्ष न्यायालय मेरी प्रार्थना सुनेगा। लेकिन रिट याचिका 8 सेकेंड में ही बगैर मेरी प्रार्थना सुने और विचार खारिज हो गई। मुझे लगता है कि मेरी जिंदगी मेरा सम्मान और मेरी आत्मा को खारिज कर दिया गया है। यह निजी अपमान की तरह लग रहा है।” पत्र में ये भी कहा, “मेरी और जीने की इच्छा नहीं है। बीते डेढ़ सालों में मुझे चलती फिरती लाश बना दिया गया है। बगैर आत्मा और बेजान शरीर को लेकर घूमने का कोई मतलब नहीं है।”

बता दें कि बाराबंकी में पदस्थ रहने के दौरान जज ने रीतेश मिश्रा और मोहन सिंह नाम के दो वकीलों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। उनके आरोप थे कि वकीलों ने अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। जुलाई में ही इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले की जाँच के लिए सीसीटीवी फुटेज खँगालने के आदेश दिए थे।

पुणे के कोंंढवा में जिस जगह रहते हैं हिंदू, जो सरकारी जमीन प्लेग्राउंड के लिए आवंटित, उस पर बनाया जा रहा कब्रिस्तान

महाराष्ट्र के पुणे जिले के कोंढवा से एक हैरान करने वाला मामले सामने आया है। यहाँ खेल का मैदान बनाने के लिए आवंटित की गई सरकारी जमीन को अब मुस्लिम कब्रिस्तान में बदला जा रहा है।

इस संबंध में एनसीपी के पूर्व विधायक चेतन तुपे और बीजेपी नेता योगेश टिलेकर ने पुणे नगर निगम (पीएमसी) को एक पत्र लिखा था। पत्र में हिंदू सोसायटीज के पास स्थित इस जमीन को कब्रिस्तान के लिए मुफीद बताया था। इसमें कहा गया था कि कोंढवा में मुस्लिमों की अच्छी-खासी आबादी है। करीब में कब्रिस्तान होना उनके लिए सहूलियत भरा होगा।

कई हिन्दू सोसायटी ने इस जगह (सर्वे नंबर 44) पर कब्रिस्तान बनाने पर एतराज जताते हुए पुणे नगर निगम (पीएमसी) से शिकायत की है। सर्वे नंबर का मतलब सरकारी आवंटित जमीन के टुकड़े की विशिष्ट आईडी संख्या है। ऐसी एक शिकायत रविराज कोलोराडो कॉपरेटिव हाउसिंग सोसायटी की है।

रविराज कोलोराडो कॉपरेटिव हाउसिंग सोसायटी का शिकायत पत्र

23 अक्टूबर 2023 की इस शिकायत में कहा गया है, “इस जमीन के आसपास कई हिंदू सोसायटी हैं। इस जगह पर हजारों हिंदू परिवार रहते हैं। इस क्षेत्र में कई हिंदू मंदिर भी हैं। यहाँ कब्रिस्तान बनाने से उनकी धार्मिक भावनाएँ आहत होंगी।” हालाँकि पीएमसी ने अभी तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं की है।

इसी तरह के शिकायत पत्र पीएमसी को अचलनगर सहकारी गृहरचना सोसायटी लिमिटेड और श्री वर्धमान नगर कॉपरेटिव हाउसिंग सोसायटी लिमिटेड ने लिखे हैं। इनमें कहा गया है कि इलाके में लगभग 12000 से 15000 हिंदू परिवार रहते हैं। ऐसे में प्लेग्राउंड के लिए आवंटित जगह पर कब्रिस्तान बनाना गलत होगा। ऑपइंडिया को मिले इन शिकायत पत्रों पर सोसायटी के सभी हिंदू सदस्यों के हस्ताक्षर हैं।

अचलनगर सहकारी गृहरचना सोसायटी लिमिटेड का शिकायत पत्र

NCP के MLA का दावा सर्वे नं. 44 की जगह मुस्लिम आबादी से घिरी

यह विवाद साल 2021 एनसीपी विधायक रहे चेतन तुपे पाटिल द्वारा पीएमसी को पत्र लिखने के बाद से ही चला आ रहा है। इसमें उन्होंने कोंढवा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर मुस्लिम बसावट का दावा करते हुए सर्वे नंबर 44 प्लॉट को मुस्लिम कब्रिस्तान बनाए जाने का सुझाव दिया था।

उनके इस सुझाव के कुछ वक्त बाद पीएमसी की एमेनिटी स्पेस कमेटी ने सलाह दी कि सर्वे नंबर 18 और 19 एमेनिटी स्पेस में मुस्लिम कब्रिस्तान बनाया जाएगा और सर्वे नं 44 में खेल का मैदान यानी प्ले ग्राउंड बनाया जाए। इसके बाद मुस्लिम समुदाय के सदस्यों ने दबाव डाला कि सर्वे नंबर 44 की निकटतम दूरी को देखते हुए ये जगह बेहतर होगी और सर्वे नंबर 18 और 19 क्षेत्र में कथित कब्रिस्तान समुदाय के लिए आने-जाने में परेशानी होगी।

पीएमसी दस्तावेज़ जो मुस्लिम कब्रिस्तान के संचालन के लिए सर्वे नं 44 भूखंड को मंजूरी देता है

इसे लेकर नगरसेवक, वकील अब्दुल गफ़र पठान, परवीन हाजी फ़िरोज़ शेख और पूर्व एनसीपी विधायक चेतन तुपे पाटिल ने सर्वे संख्या 44 जगह की माँग को लेकर पीएमसी को कई पत्र भेजे थे। इनमें गलत दावा किया गया कि प्लॉट (सर्वे नंबर 44) के आसपास रहने वाली अधिकांश आबादी मुस्लिमों की थी और उनके लिए यहाँ कब्रिस्तान बनाना सहूलियत भरा होगा।

सर्वे नं. 44 पर क़ब्रिस्तान बनाने की वकालत करने एक ऐसा ही पत्र पीएमसी को 8 मई 2023 को भाजपा के योगेश टिलेकर ने भी भेजा था। इसमें कहा गया है कि सर्वे नं. 18 और 19 वाली जगह जहाँ कब्रिस्तान बनाने की बात की जा रही है वो कोंढवा में रहने वाले मुस्लिम इलाके से बहुत दूर है। इसके जगह पर सर्वे नं. 44 की जगह सही होगी। पीएमसी ने 16 मई को टिलेकर के पत्र के आधार पर सर्वे नं. 44 वाली जगह पर क़ब्रिस्तान बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।

अब टिलेकर ने ऑपइंडिया के साथ बातचीत में कहा है कि सर्वे नंबर 44 की जगह के आसपास की स्थिति को लेकर उन्हें गुमराह किया था। जमीनी हकीकत पता चलने पर उन्होंने उस जगह पर कब्रिस्तान का निर्माण नहीं होने देने की बात कही है। एक आरटीआई से यह बात भी सामने आई है कि इस जगह पर प्लेग्राउंड बनाने के लिए 49 लाख रुपए खर्च भी किए जा चुके हैं। आश्चयर्जनक तौर पर फिर भी यह जगह खाली है और अब कब्रिस्तान बनाने की कवायद चल रही है।

गौरतलब है कि आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट के पुणे मॉड्यूल से जुड़े कई लोगों की गिरफ्तारी कोंढ़वा से ही हुई है। यह बात भी सामने आई है कि कब्रिस्तान का विरोध करने पर हिंदू सोसायटीज में रहने वाले कई लोगों को धमकी भी दी गई है।

(ये रिपोर्ट मूल रूप से अंग्रेजी में सिद्धि सोमानी ने लिखी है। इस लिंक पर क्लिक कर आप पूरी रिपोर्ट पढ़ सकते हैं)

जन्मदिन पर राजस्थान के CM बने भजनलाल शर्मा, माता-पिता के चरण पखार ली शपथ: दीया कुमारी और प्रेमचंद बैरवा डिप्टी CM

भाजपा नेता भजनलाल शर्मा ने शुक्रवार (15 दिसंबर, 2023) को राजस्थान के 14वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। उनके अलावा 2 उप-मुख्यमंत्रियों प्रेमचंद बैरवा और दीया कुमारी ने भी शपथ ली। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की तरह यहाँ भी अन्य मंत्रियों की नियुक्ति और विभागों का बँटवारा बाद में होगा। समारोह स्थल पर 2 मंच तैयार किए गए, जिनमें से एक पर देश भर से आए नेताओं को बैठाया गया तो दूसरे पर साधु-संतों को बिठाया गया। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी मंच पर मौजूद रहे।

बता दें कि भजनलाल शर्मा का आज जन्मदिन भी है। वो 56 वर्ष के हो गए हैं। शपथ लेने से पहले उन्होंने अपने माता-पिता के चरण धोकर उनकी पूजा की। चंबल पॉवर गेस्ट हाउस में उनका परिवार रुका हुआ है, जहाँ उनका जन्मदिन भी मनाया गया। शपथ से पहले उन्होंने गोविंद देव जी मंदिर में दर्शन किया। दीया कुमारी भी उस मंदिर में दर्शन करने पहुँचीं। वहीं प्रेमचंद बैरवा ने मोती डूंगरी गणेश मंदिर में पूजा-अर्चना की, जहाँ एक दिन पहले भजनलाल शर्मा भी पहुँचे थे।

भजनलाल शर्मा की माँ गोमती देवी ने अपने बेटे को बहुत सारा प्यार देने के लिए जनता को धन्यवाद दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी धन्यवाद कहा। गोमती देवी ने कहा कि अब राजस्थान का विकास होना चाहिए। अपने बेटे को लेकर गोमती देवी ने कहा कि भजनलाल शर्मा अब तक जैसी मेहनत करते आए हैं, उन्हें आगे भी करनी चाहिए। कई राज्यों के मुख्यमंत्री व उप-मुख्यमंत्री इस कार्यक्रम में मौजूद रहे। जगद्गुरु रामभद्राचार्य भी शपथग्रहण समारोह में उपस्थित रहे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी इस शपथग्रहण समारोह के साक्षी बने। भजनलाल शर्मा के मुख्यमंत्री बनने पर उनके पिता किशन स्वरूप शर्मा ने कहा कि सब भगवान की लीला है, बेटा एकदम बढ़िया कार्य करेगा। उन्होंने कहा कि सब बहुत बढ़िया है। उन्होंने गिनाया कि कैसे भजनलाल शर्मा सरपंच रह चुकें हैं, जिला अध्यक्ष रहे हैं और 4 बार प्रदेश महामंत्री भी रहे हैं। उन्होंने कहा कि भगवान अपने-आप सबको बढ़ाते हैं।

‘जब चाहे मालिक करेगा सेक्स, गुलाम को झुकना पड़ेगा’ : CEO ने महिला कर्मचारी से साइन कराया कॉन्ट्रैक्ट, सजा देने के नाम पर खून निकाला

सैन फ्रांसिस्को टेक कंपनी ‘Tradeshift’ के सीईओ क्रिश्चियन लैंग पर आरोप लगा है कि वो अपने असिस्टेंट से एक कॉन्ट्रैक्ट साइन करवाकर उसका यौन उत्पीड़न करते थे। आरोप है कि क्रिश्चियन ने अपनी एग्जिक्यूटिव असिस्टेंट को हायर करने के कुछ महीने बाद ही गुलाम बनाने का ये कॉन्ट्रैक्ट साइन करवाया था।

पीड़िता का नाम कोर्ट डॉक्यूमेंट में जेन डो कहा गया है। उसने अपनी शिकायत में कहा कि उसका रेप सालों से किया जा रहा था। पीड़िता ने कहा कि उसे विभिन्न तरीरकों से शारीरिक दर्द दिए गए। कभी उसके ऊपर पेशाब किया गया तो कभी विदेशी चीजों को उसके प्राइवेट पार्ट में डाला जाता था।

कॉन्ट्रैक्ट के अनुसार ‘स्लेव’ को हमेशा अपने मालिक के लिए सेक्सुअल फेवर देने के लिए उपलब्ध रहना था, जब भी उसके मालिक को सेक्स की जरूरत लगती तो कॉन्ट्रैक्ट के हिसाब से वो उन्हें नहीं मना कर सकती थीं चाहे उसका मन हो या नहीं। इतना ही नही कॉन्ट्रैक्ट के मुताबिक लड़की को ये भी करने को कहा गया था कि वो जब भी अपने मालिक को अकेले में देखें तो घुटनों पर झुककर उनसे पूछे कि वो उनके लिए क्या कर सकती है।

साभार: NYTimes

दस्तावेज में कहा गया था महिला को गुलाम बनाकर दी जाने सजाओं का भी जिक्र था। इसमें लिखा था कि मालिक जो चाहे वो सजा गुलाम को दे सकता है। लेकिन मालिक की ये जिम्मेदारी होगी कि वो सजा देते समय महिला को जान से नहीं मारेगा औक न उसे पर्मानेंट इंजरी देगा। इतना ही नहीं कॉन्ट्रैक्ट में ये भी था गुलाम कैसे भी करके इन सजाओं को पाकर नाराज नहीं हो सकती थी और न ही अपने मालिक से नाराजगी जाहिर कर सकती थी।

महिला ने शिकायत में कहा कि उसे लैंग ने खून निकालने तक मारा और निर्जीव वस्तुओं के जरिए उसका उत्पीड़न किया। उसे कॉन्ट्रैक्ट में कहा गया था कि वो हमेशा ढंग से तैयार होकर रहे और खुद का वजन 130 से 155 पाउंड रखे। इसके अलावा गुलाम का समर्पण मालिक के प्रति हर प्रकार से रहना चाहिए। उसका शरीर मालिक का होना चाहिए। वो अगर उसे फिट देखना चाहता है तो शरीर को फिट ही होना चाहिए।

साभार: NYTimes

कोर्ट में दी शिकायत के अनुसार, महिला को अपनी जॉब Tradeshift में प्यारी थी इसलिए उसे ये सब करना पड़ा। बाद में उसने शारीरिक प्रताड़नाओं से तंग आकर शिकायत दी। इस शिकायत के बाद ट्रेडशिफ्ट ने अपने ऊपर लगाए इल्जामों को नकारा और कड़ा निर्णय लेते हुए क्रिश्चियन को उसके पद से टर्मिनेट कर दिया। मेल में कंपनी ने कहा कि लैंग के विरुद्ध बहुत सारी शिकायतें मिल रही थीं।

वहीं लैंग ने कहा कि उन दोनों के बीच बने संबंध रजामंदी के थे न कि किसी जोर जबरदस्ती के। उसने कोर्ट में डाली गई शिकायत पर को मानहानि करने वाला बताया। उसने कहा पूरा मुकदमा झूठा है। उसके मुताबिक सीईओ रहते हुए उसने किसी का यौन उत्पीड़न नहीं किया। महिला से संबंध थे लेकिन वो पहले के थे। उसके कंपनी ज्वाइन करने के बाद वो सब खत्म हो गया।

कई लोगों को क्रिश्चियन लैंग की हरकत देखने के बाद फिफ्टी शेड्स ऑफ ग्रे फिल्म की स्क्रिप्ट याद आ रही है। इस फिल्म में भी एक बिजनेसमैन ने महिला को सेक्स के लिए कॉन्ट्रैक्ट साइन करने को कहा था।