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हिंदू नेताओं की हत्या की साजिश रचना आतंकी अपराध नहीं… मद्रास हाईकोर्ट ने उस आसिफ को दी जमानत, जो होना चाहता था IS में शामिल

क्या हिंदू नेताओं की टारगेट किलिंग की साजिश रचना आतंकवादी घटना में आ सकता है या नहीं…? ये सवाल उठाया है मद्रास हाईकोर्ट ने। कोर्ट ने आसिफ मुस्तहीन नाम के शख्स की जमानत को मंजूर करते हुए यह प्रश्न किया। कोर्ट ने इसे बहस का मुद्दा बताया कि हिंदू नेताओं की हत्या की साजिश आतंकी कृत्य में होगा या नहीं।

जस्टिस एसएस सुंदर और सुंदर मोहन की खंडपीठ ने इस दौरान यह तो माना कि आसिफ हिंदू नेताओं पर हमला करने की साजिश रच रहा था। लेकिन इस बात से राजी नहीं हुए इस साजिश को आतंकी कृत्य की श्रेणी में रखा जा सकता है।

पूरा मामला है 13 दिसंबर का, जब मद्रास हाईकोर्ट में आसिफ को जमानत देने के लिए सुनवाई हुई। इसी दौरान हाईकोर्ट ने हिंदू धार्मिक नेताओं की टारगेट किलिंग को आतंकी घटना मानने से फिलहाल के लिए इनकार किया और पूरे मुद्दे को एक बहस का विषय बताया। इस टिप्पणी के साथ उन्होंने आईएस में शामिल होने की इच्छा रखने वाले आसिफ को जमानत दे दी।

बता दें कि आसिफ पर आरोप था कि उसने भारतीय जनता पार्टी और आरएसएस से जुड़े हिंदू धार्मिक नेताओं को मारने की साजिश रची। उसका सपना था कि वो आतंकी संगठन आईएस में शामिल हो। लेकिन इन सबके बावजूद कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों द्वारा पेश किए गए सबूतों से ये तो पता चल गया कि आसिफ हिंदू नेताओं को मारना चाहता था, मगर अधिकारी ये नहीं बता पाए कि इसे टेररिस्ट एक्ट कैसे माना जाए जैसा कि यूएपीए की धारा 15 के तहत परिभाषित किया गया है।

अभियोजन पक्ष से असहमत होने के कारण हाईकोर्ट ने आसिफ को सशर्त जमानत दे दी। कोर्ट ने आसिफ से कहा उसे अगली सूचना तक इरोड में रहना होगा और रोजाना सुबह 10:30 बजे ट्रायल कोर्ट में हाजिरी लगानी होगी। उसे साथ ही यह भी कहा कि आसिफ के खिलाफ मिले सबूत भारत की एकता, अखंडता, सुरक्षा, आर्थिक सुरक्षा या संप्रभुता को खतरे में डालने या लोगों में आतंक पैदा करने के इरादे को स्थापित नहीं करते हैं।

उल्लेखनीय है कि आरोपित आसिफ को राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ने 26 जुलाई 2022 को यूएपीए के तहत गिरफ्तार किया था। उसकी जमानत याचिकाओं को ट्रायल कोर्ट, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था। पिछले 17 महीने जेल में काटने के बाद मद्रास हाईकोर्ट से उसे बेल मिली। कोर्ट ने कहा कि जो सबूत दिए गए हैं वो ये साबित नहीं कर पा रहे हैं कि आरोपित इस्लामिक स्टेट का सदस्य था या उसका साथी उस संगठन से जुड़ा था।

सारा खान ने ब्वॉयफ्रेंड शांतनु राजे से किया ब्रेकअप, बिग बॉस के भीतर ही अली मर्चेंट से निकाह कर ले लिया था तलाक

‘विदाई’ टीवी सीरियल फेम और बिग बॉस 4 का हिस्सा रही टीवी एक्ट्रेस सारा खान ने लंबे वक्त से ब्वॉयफ्रेंड रहे शांतनु राजे से ‘विदाई’ ले ली है… मतलब ब्रेकअप कर लिया है। दोनों तीन साल से अधिक वक्त से रिलेशनशिप में थे और साल 2023 में सारा ने राजे से शादी करने के ख्वाब भी देखे थे।

मोहित चौहान के वीडियो ‘बारिश बनके आना’ के माध्यम से सारा खान और शांतनु राजे ने अपने रिश्ते को दुनिया के सामने जाहिर किया था। हालाँकि अब इस रिश्ते की राहें एक-दूसरे जुदा हो गई हैं।

शांतनु राजे से इस ब्रेकअप को लेकर सारा ने सोशल मीडिया पर लिखा, “आपसी समझ के आधार पर, मैंने और मेरे पार्टनर ने अलग होने और अपनी-अपनी जिंदगी में अलग-अलग आगे बढ़ने का फैसला किया है। हम एक-दूसरे की बहुत सराहना करते हैं और अनुरोध करते हैं कि हमारी निजता का सम्मान किया जाए। समझने के लिए धन्यवाद।”

शांतनु राजे पेशे से पायलट, सोशल मीडिया इंन्फ्लुएंसर और रेस्त्रा कारोबारी हैं। सारा खान एक भारतीय मॉडल और एक्ट्रेस हैं। दोनों ने जनवरी 2023 में अपनी शादी को लेकर कहा था, “इंशाअल्लाह इस साल 2023 में, क्योंकि अभी हम काम पर फोकस कर रहे हैं।”

सारा खान ने 2007 में मिस भोपाल का खिताब जीता था। इसके बाद सारा ने एक्टिंग की दुनिया में कदम स्टार प्लस के मशहूर शो ‘सपना बाबुल का… बिदाई’ से रखा था। इस शो में साधना के किरदार से उन्हें पहचान मिली थी।

साल 2010 में बिग बॉस 4 में उन्होंने इस शो का हिस्सा रहे अली मर्चेंट से शो में ही शादी कर ली थी। हालाँकि उनकी ये शादी साल 2011 में ही टूट गई थी। इसके बाद दोनों ने एक दूसरे की खासी लानत- मलानत की थी।

दोनों ने यह तक कह डाला था कि बिग बॉस में उन्हें शादी का ड्रामा करने को कहा गया था, लेकिन बिग बॉस के आयोजकों ने उनके आरोपों को सिरे से नकार दिया था। इसके बाद सारा खान साल 2020 में शांतनु से मिली थीं।

शांतनु के साथ अपने रिश्ते को लेकर सारा ने कहा था, “हाँ, मुझे समझने में थोड़ा वक्त लगा, लेकिन जब आपके पास सही साथी होता है, जो आपको एहसास कराता है कि हर कोई बुरा नहीं होता है तो आपके लिए फैसला लेना आसान हो जाता है। शांतनु के साथ, मुझे वास्तव में ज्यादा सोचने की जरूरत नहीं पड़ी, क्योंकि उन्होंने हमेशा हमारे रिश्ते में विश्वास को साबित किया है और मुझे जिंदगी में हमेशा प्रेरित किया है।”

असम सरकार ने बंद किए 1281 मदरसे, अब उनकी जगह चलेंगे इंग्लिश स्कूल: बांग्लादेश सीमा पर बसे जिले में सबसे बड़ी कार्रवाई

असम की हिमंता बिस्वा सरकार ने राज्य में सरकारी मदद से चलाए जा रहे 1281 मदरसे बंद करके उनकी जगह इंग्लिश स्कूल खोल दिए हैं। इसके लिए सरकार ने आदेश भी जारी कर दिए हैं। अब इन मदरसों में इस्लामी शिक्षा की जगह सामान्य विषयों की पढ़ाई होगी।

असम सरकार के 1281 मदरसों को बंद करने के निर्णय को बताते हुए राज्य के शिक्षा मंत्री रनोज पेगू ने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “सभी सरकारी और प्रांतीय मदरसों के स्कूलों में SEBA (असम सेकेंडरी एजुकेशन बोर्ड) के तहत आज असम शिक्षा विभाग ने 1281 माध्यमिक शिक्षा मदरसों को माध्यमिक शिक्षा स्कूलों में बदलने को लेकर नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है।

असम सरकार द्वारा जारी की गई लिस्ट के अनुसार सर्वाधिक मदरसे असम-बांग्लादेश सीमा पर बसे जिले धुबरी में बंद किए गए हैं। इनकी संख्या 268 है। इसके अलावा बारपेटा, नोगाँव और गोलपाड़ा आदि में भी बड़ी सँख्या में मदरसे बंद किए गए हैं। इन जिलों में बांग्लादेश से आने वाले अवैध घुसपैठियों की भी भरमार रही है।

राज्य के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा पहले ही कह चुके हैं कि वह राज्य के सभी मदरसे बंद करना चाहते हैं क्योंकि नए भारत में लोगों को स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों की आवश्यकता है जो कि डॉक्टर, इंजीनियर और प्रोफेशनल्स बनाएँ ना कि मदरसों की।

असम में इससे पहले 600 मदरसों को बंद किया गया था। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कर्नाटक चुनावों के दौरान आयोजित एक रैली में कहा था कि वह राज्य में 600 मदरसे बंद कर चुके हैं और सभी मदरसों को बंद करने की इच्छा रखते हैं।

इसी वर्ष मई में भी असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा था कि वह 300 मदरसे बंद करेंगे। असम के मुख्यमंत्री ने इसे पुलिस और कौमी संगठनों के बीच बातचीत का नतीजा बताया था। गौरतलब है कि असम सरकार राज्य में अवैध घुसपैठियों और कट्टरपंथ को लेकर काफी सख्त रवैया अपना रही है।

संसद की नींव हिलाने वालों को देंगे 10 लाख रुपए, खालिस्तानी पन्नू का ऐलान: दिल्ली पुलिस ने 6 को पकड़ा, UAPA के तहत केस दर्ज

संसद की बरसी के मौके पर संसद भवन में घुसकर हंगामा करने वाले लोगों को ‘सिख फॉर जस्टिस’ के गुरपतवंत सिंह पन्नू ने 10 लाख रुपए की कानूनी सहायता देने का ऐलान किया है। उसने संदेश में कहा है 13 दिसंबर को संसद की नींव हिल गई और खालिस्तान जनमत संग्रह के लिए मतदाता रजिस्ट्रेशन शुरुआत के साथ हिलती रहेगी। इससे पहले पन्नू ने कहा था कि भारतीय एजेंसियों की साजिश उसे मार देने की विफल हो गई और इसका जवाब वह संसद पर हमला करेगा देगा।

बता दें कि बुधवार (13 दिसंबर 2023) को संसद में जीरो ऑवर के दौरान हुए तमाशे में शामिल 7 लोगों में से पुलिस ने 6 लोगों (विशाल-वृंदा, नीलम देवी, अमोल शिंदे, सागर शर्मा, डी मनोरंजन) को गिरफ्तार कर लिया है। ये छह के छह आरोपित एक दूसरे को 4 सालों से जानते थे और पिछले कुछ समय से इस घटना को अंजाम देने का प्लान बना रहे थे। कहा ये भी जा रहा है कि इन्होंने संसद में ये कारनामा करने से पहले रेकी की हुई थी।

इन सबके खिलाफ दिल्ली पुलिस ने अनलॉफुल एक्टिविटीज (प्रीवेंशन) एक्ट (UAPA) के तहत केस दर्ज कर लिया है। पुलिस ने छानबीन में पता लगाया है कि ये सारे के सारे भगत सिंग फैन क्लब के जरिए एक दूसरे से जुड़े थे। सागर शर्मा नाम के आरोपित संसद की सिक्योरिटी चेक के बारे में जाना था। वहीं अमोल शिंदे वो आरोपित है जो महाराष्ट्र से जाकर स्मोक कनस्तर लेकर आया था, जिसे उसने अपने साथियों को इंडिया गेट पर बाँटा।

कथिततौर पर इन सबकी प्लानिंग थी कि ये सारे संसद में घुसते। लेकिन सिर्फ सागर शर्मा और मनोरंजन को ही पास मिल पाए थे इसलिए अमोल और नीलम बाहर ही थे। इनकी एंट्री के बाद ही लोकसभा के जीरो ऑवर में अफरा-तफरी देखी गई। विजिटर गैलरी से सांसदों के बीच कूदने वाला सागर शर्मा था। बताया जा रहा है कि जैसे ही सागर वहाँ कूदा तो मनोरंजन ने पीछे से वो स्मोग पैकेट खोल दिए। इतनी देर में नीलम और अमोल ने लोकसभा के बाहर ये काम कर दिया और तानाशाही बंद करो के नारे लगाए जाने लगे।

इस पूरे हड़कंप के बाद 6 आरोपितों को दिल्ली पुलिस की एंटी टेरर सेल ने पकड़ा है। लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला ने आश्वासन दिया है कि इस मामले में जाँच कराई जाएगी। वहीं गृह मंत्रालय ने भी संसद की सुरक्षा में हुई चूक के खिलाफ जाँच करने के आदेश दिए हैं। सीआरपीएफ के डीजी अनीष दयाल सिंह के नेतृत्व में एंक्वायरी कमेटी बिठाई गई है। ये कमेटी पता लगाएगी कि आखिर किस स्तर पर इतनी बड़ी चूक हुई है और कैसे संसद की सुरक्षा को और बेहतर किया जा सकता है।

अयोध्या में वाटर मेट्रो, PM मोदी करेंगे उद्घाटन: रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के साथ ही तुलसीदास घाट से गुप्तार घाट के बीच शुरू हो जाएगी सेवा

अयोध्या में वाटर मेट्रो सेवा शुरू होने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 22 जनवरी 2024 को इस सेवा का उद्घाटन कर सकते हैं। इसी दिन अयोध्या में रामलला के भव्य मंदिर में भगवान राम के बाल स्वरूप की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। इस खास वाटर मेट्रो सेवा के लिए दो बड़ी बोट का इस्तेमाल किया जाएगा। दोनों बोट कोचीन शिपयार्ड से बनकर अयोध्या पहुँच चुकी हैं। ये उत्तर प्रदेश में पहली वाटर मेट्रो सेवा होगी।

भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण व मिनिस्ट्री ऑफ पोर्ट शिपिंग एंड वाटरवेज गवर्नमेंट ऑफ इंडिया की ओर से दो फ्लोटिंग जेटी भी भेजे गए हैं। इसमें से एक तुलसीदास घाट पर रहेगी, तो दूसरी को गुप्तार घाट पर लगाया जाएगा। जानकारी के मुताबिक, 9 नवंबर 2023 को अयोध्या में हुई सीएम योगी कैबिनेट की बैठक में जल मार्ग प्राधिकरण के गठन का प्रस्ताव पास किया गया था। उसी कड़ी में अयोध्या को पहली सौगात वाटर मेट्रो के रूप में मिली है।

सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद वाटर मेट्रो की सवारी भी कर सकते हैं, इसके लिए प्रशासनिक तैयारियाँ भी चल रही हैं। इस वाटर मेट्रो के लिए खास तौर पर वो बड़ी ऑटोमेटिक नावें लगाई जाएँगी, जिसमें एसी केबिन की व्यवस्था भी होगी। वाटर मेट्रो पर एक साथ करीब 100 लोग सवार हो सकते हैं और सरयू नदी में मेट्रो की सवारी कर पूरी अयोध्या नगरी को निहार सकते हैं। जानकारी के मुताबिक, कलकत्ता से वाटर मेट्रो अयोध्या पहुँच गई है। इसे संत तुलसीदास घाट पर रोका गया है। 16 नाविक इसे लेकर कोलकाता से आए हैं।

भारत के सबसे पवित्र शहरों में से एक अयोध्या में यह वाटर मेट्रो तुलसीदास घाट से गुप्तार घाट तक चलेगी। वाटर मेट्रो का उद्देश्य अयोध्या में पर्यटन को बढ़ावा देना और शहर के भीतर आवागमन को आसान बनाना है। यह शहर के प्रदूषण को कम करने में भी मदद करेगा। वाटर मेट्रो सेवा अयोध्या के विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यह शहर को एक आधुनिक और टिकाऊ परिवहन प्रणाली प्रदान करेगी।

गौरतलब है कि अयोध्या के श्रीराम मंदिर में 22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा होगी। इसके लिए तैयारियाँ जोरों-शोरों से हो रही हैं। इस अवसर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी उपस्थित रहेंगे। इनके अतिरिक्त 3000 वीआईपी समेत 7000 लोगों को निमंत्रण भेजे गए हैं। इनमें उन कारसेवकों के परिवार भी हैं, जिन्होंने राम मंदिर के लिए अपना बलिदान दिया। ट्रस्ट का कहना है कि आयोजन में 10000 से 15000 लोगों के आने का इंतजाम होगा।

ये भी मालूम हो कि रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा 86 साल के पंडित लक्ष्मीकांत मथुरानाथ दीक्षित कराएँगे। बता दें कि जब महाराष्ट्र के ब्राह्मणों ने छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक करने से मना कर दिया था, तब पंडित दीक्षित के पूर्वजों ने उनका राजतिलक किया था।

लाउडस्पीकरों का अनियंत्रित इस्तेमाल होगा बंद: CM बनते ही एक्शन में मध्य प्रदेश के मोहन यादव, कहा – खुले में मांस की बिक्री स्वीकार नहीं

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बुधवार (13 दिसंबर 2023) को धार्मिक और सार्वजनिक स्थानों पर लाउडस्पीकर के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया। इस आदेश के तहत, धार्मिक स्थलों और सार्वजनिक स्थानों पर लाउडस्पीकर का उपयोग केवल अनुमति के बाद ही किया जा सकेगा। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद अपने पहले बड़े फैसले के तहत इसका आदेश जारी किया गया। यही नहीं, खुले में मांस की बिक्री पर भी रोक लगाने का आदेश जारी कर दिया गया है।

खुले में मांस के व्यापार पर पाबंदी, सरकार लाएगी कानू

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने पहली कैबिनेट बैठक के बाद मीडिया संबोधित किया। उन्होंने साफ कहा कि खुले में मांस की बिक्री अस्वीकार्य है। उन्होंने कहा, “आज हमने पहली कैबिनेट बैठक में कई चर्चाएं की हैं। हमने आज कैबिनेट बैठक में खुले में मांस की बिक्री का मुद्दा उठाया है और इसके लिए नियम लाने का प्रस्ताव रखा है।”

लाउडस्पीकर के अनियंत्रित इस्तेमाल पर रोक

वहीं, लाउडस्पीकर को लेकर जारी आदेश के अनुसार, धार्मिक स्थलों और सार्वजनिक स्थानों पर लाउडस्पीकर का उपयोग केवल सुबह 6 बजे से शाम 10 बजे के बीच ही किया जा सकेगा। लाउडस्पीकर का उपयोग केवल धार्मिक या सामाजिक आयोजनों के लिए किया जा सकेगा। इस आदेश का पालन नहीं करने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्हें जुर्माना या जेल की सजा हो सकती है। आदेश में कहा गया है कि, “धार्मिक स्थलों तथा अन्य स्थलों में अनियमित अथवा अनियंत्रित ध्वनि विस्तारक यंत्रों के उपयोग को नियंत्रित करने के लिए सम्बंधित अधिकारी कड़ी कार्रवाई करें।” सरकार ने इन लाउड स्पीकरों के इस्तेमाल के लिए पूर्व अनुमति को अनिवार्य भी किया है और इन विस्तारकों के ‘डेसिबेल’ की सीमा को भी निर्धारित किया है।

आदेश में जुलाई 2005 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया गया है, जिसमें रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर ध्वनि प्रदूषण के गंभीर प्रभावों का हवाला देते हुए सार्वजनिक स्थानों पर रात 10 बजे से सुबह 6 बजे (सार्वजनिक आपात स्थिति के मामलों को छोड़कर) के बीच लाउडस्पीकर और म्यूजिक सिस्टम के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। बता दें कि 28 अक्टूबर 2005 को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था कि साल में 15 दिन त्योहारों के मौके पर आधी रात तक लाउडस्पीकर के इस्तेमाल की इजाजत दी जा सकती है।

बता दें कि बुधवार (13 दिसंबर 2023) को उज्जैन दक्षिण से भाजपा विधायक मोहन यादव ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। 58 वर्षीय डॉ मोहन यादव को भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने पद की शपथ दिलाई। उनके शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और बीजेपी की टॉप लीडरशिप के साथ ही बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी शामिल हुए। शिवराज चौहान सरकार में मंत्री रहे मोहन यादव को सोमवार (11 दिसंबर, 2023) को एक बैठक में सर्वसम्मति से बीजेपी विधायक दल का नेता चुना गया था। 

किसान आंदोलन में शामिल थी संसद में घुसपैठ करने वाली नीलम, कॉन्ग्रेस के लिए माँगा था समर्थन: 42 साल की आंदोलनजीवी की रिहाई के लिए मैदान में उतरा ‘संयुक्त किसान मोर्चा’

संसद और संसद के बाहर कुल 6 लोगों ने हंगामा मचाने की योजना बनाई थी, जिसमें 4 गिरफ्तार कर लिए गए हैं, एक फरार है, जबकि एक व्यक्ति की पहचान की कोशिश की जा रही है। इसमें एक महिला नीलम भी है, जिसकी उम्र 42 साल है। उसके बारे में जानकारी मिल रही है कि वो काफी पढ़ी लिखी है, लेकिन अब पूरी तरह से आंदोलनजीवी बन चुकी है। वो तैयारी के नाम पर घर से बाहर हॉस्टल में रहती है और किसान आंदोलन जैसे तमाम मंचों पर सक्रिय रहती है। नीलम की गिरफ्तारी के बाद संयुक्त किसान मोर्चा उसके समर्थन में उतर गया है और नीलम की रिहाई की माँग की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, संसद भवन के बाहर हंगामा करने वाली 42 साल की महिला नीलम कौर हरियाणा की रहने वाली है। नीलम के परिवार में उसके भाई ने न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में कहा, “उनको इस बात की जानकारी नहीं थी कि नीलम दिल्ली में है। उसके हमें बताया था कि वो पढ़ाई के लिए हिसार में है। वो सोमवार को यहाँ आई थी और कल ही लौटी है। उसने बीए, एमए, बी.एड, एम.एड, एम.फिल की पढ़ाई की है, तो सीटीईटी और नेट भी पास आउट है। नीलम बेरोजगार है और किसानों के विरोध प्रदर्शनों में भी शामिल रही थी। वो 6 माह से हिसार से बाहर है।”

मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि नीलम किसान आंदोलन से लेकर दूसरे धरने और प्रदर्शनों में भी काफी एक्टिव रही हैं। चर्चा है कि नीलम प्रगतिशील आजाद युवा संगठन की संस्थापक है, लेकिन परिवार वालों का कहना है कि वह किसी संगठन से नहीं जुड़ी थी। वहीं, नीलम ने भी गिरफ्तारी के समय किसी संगठन से जुड़ाव को खारिज किया है। भारत सरकार हम जैसे युवाओं की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है।

नीलम की माँ का कहना है कि वो बेरोजगारी को लेकर चिंतित थी, उन्होंने उससे बात की थी लेकिन उसने उन्हें दिल्ली के बारे में कभी कुछ नहीं बताया था। बकौल नीलम की माँ, वह उनसे कहती थी वह इतनी उच्च योग्य है लेकिन उसके पास कोई नौकरी नहीं है, इसलिए मर जाना बेहतर है।

इस बीच, अंकुर सिंह नाम के एक्स यूजर ने नीलम का एक वीडियो शेयर किया है, जो किसान आंदोलन के समय का लगता है। इस वीडियो में नीलम कॉन्ग्रेस और इनेलो के लिए समर्थन माँग रही है और बीजेपी का विरोध कर रही है।

इस बीच, संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य और किसान नेता आजाद पालवा इस बीच नीलम के घर पहुँचे। उन्होंने नीलम की रिहाई की माँग करते हुए कहा कि वे इस संबंध में किसान ‘संयुक्त किसान मोर्चा’ की मीटिंग भी बुला रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर नीलम को जल्द रिहा नहीं किया गया तो बड़ा कदम उठाया जाएगा।

बता दें कि बुधवार (13 दिसंबर 2023) को संसद पर साल 2001 में हुए हमले की 22वीं बरसी पर सुरक्षा चूक का मामला सामने आया। लोकसभा में कार्यवाही के दौरान दो प्रदर्शनकारी गैलरी से सदन में कूद गए, जिन्हें सांसदों ने ही पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया। लोकसभा में ये घुसपैठ ठीक 1 बजकर 1 मिनट पर हुई। उस समय सदन में पश्चिम बंगाल के मालदा उत्तर सीट से भाजपा के लोकसभा सांसद खगेन मुर्मू अपनी बात रख रहे थे।

इस बीच लोकसभा में मौजूद सांसदों ने सुरक्षा घेरा तोड़ने वाले दोनों युवकों को पकड़ लिया। वहीं, संसद के बाहर से नीलम और एक अन्य युवक को गिरफ्तार किया गया। दोनों ने स्मोक फैलाने वाले कनस्तर को फोड़कर अफरातफरी मचाने की कोशिश की थी और नारेबाजी की थी। इस मामले में क्राइम ब्रांच से लेकर अन्य सुरक्षा एजेंसियाँ जाँच में जुट गई हैं, तो चारों गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ भी की जा रही है।

अपने ही मिलिया स्कूल की शिक्षिकाओं के साथ मास्टर आमेर काजी का अश्लील वीडियो हुआ वायरल: बीवी ने ही बताया चरित्रहीन, आरोप – स्कूल प्रबंधन करता है सपोर्ट

महाराष्ट्र के बीड जिले में मिलिया सेकेंड्री स्कूल में पढ़ाने वाले एक टीचर का MMS कांड सामने आया है। आरोपित का नाम आमेर काजी है जो अलग-अलग MMS में 3 महिलाओं के साथ दिख रहा है। ये महिलाएँ स्कूल में पढ़ाने वाली महिला शिक्षिकाएँ हैं। इन MMS को पोर्न साइट पर अपलोड भी कर दिया गया था। स्कूल की प्रिंसिपल की शिकायत पर पुलिस ने आमेर क़ाज़ी के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। केस दर्ज होने के बाद आमेर काजी फरार है। वहीं स्कूल प्रशासन ने 3 महिला टीचरों को सस्पेंड भी कर दिया है। आमेर क़ाज़ी की बीवी भी सामने आई है और अपने शौहर पर चरित्रहीन होने का आरोप लगाया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला बीड जिले के थानाक्षेत्र सिटी कोतवाली का है। यहाँ अंजुमन इशत ए तालीम नाम की संस्था के अंतर्गत मिलिया स्कूल संचालित होता है। स्कूल में 23 महिला और लगभग 46 पुरुष टीचर नौकरी करते हैं। इसी स्कूल में आमेर काजी साल 2012 से टीचर के तौर पर नौकरी करता है। 16 साल पहले निकाह करने वाले बाल-बच्चेदार आमेर काजी की बीवी का आरोप है कि साल 2012 से ही उन्हें अपने शौहर की हरकतों पर शक था। शुरू में आमेर काजी ने अपनी बीवी को गुमराह किया लेकिन बाद में उसने अपनी करतूतों का कबूलनामा कर लिया।

आमिर काजी की बीवी का आरोप है कि एक दिन उसके शौहर ने खुल कर अपने कई लड़कियों से अवैध संबंध कबूल कर लिया। साथ ही अपनी बीवी को सब कुछ जान कर भी एडजस्ट करने की नसीहत दी। आमेर की बीवी अपने शौहर की करतूतों की शिकायत स्कूल प्रबंधन की महिला अधिकारी सबीहा से 1 साल से कर रही थीं। हालाँकि सबीहा आमेर की बीवी से ही सबूत माँगने लगती थीं। इस बीच आमेर के लैपटॉप से उसकी बीवी ने कई महिलाओं के साथ आपत्तिजनक हालत में अपने शौहर के फोटो-वीडियो अपनी पेन ड्राइव में सेव कर लिए।

इन तस्वीरों और वीडियो में आमेर स्कूल की 3 टीचरों के साथ आपत्तिजनक हालत में दिख रहे थे। आमेर की बीवी का आरोप है कि सबीहा को तमाम सबूत देने के बावजूद उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की। यहाँ तक कि उन्होंने आमेर की बीवी को दूसरी बीवियों के साथ एडजस्ट करने की भी सलाह दे डाली। जब आमेर की बीवी आर्थिक तंगी में सबीहा से पैसे दिलाने की माँग करतीं थीं तब इसे घरेलू मामला बता कर पल्ला झाड़ लिया जाता था। आमेर की बीवी ने स्कूल पर भी गलत काम चलाने और गलत हरकतों का सपोर्ट करने का आरोप लगाया है।

आमेर की बीवी को इस बात की भी आशंका है कि स्कूल ही नहीं बल्कि उनके शौहर घर में भी लड़कियों को लाते थे। जब वो अपने शौहर की हरकतों का विरोध करती थीं तब उन्हें धमकियाँ दी जाती थीं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, सामने आए वीडियो आपसी सहमति से बनाए लग रहे हैं। आमेर द्वारा स्कूल में 3 महिला टीचरों के साथ न सिर्फ अश्लील हरकतें की गईं बल्कि शारीरिक संबंध भी बनाए गए। थोड़े समय बाद ये सभी वीडियो पोर्न साइट पर अपलोड कर दिए गए। यहाँ से वीडियो वायरल हो गए जो स्कूल की प्रिंसिपल की जानकारी में भी आए।

प्रिंसिपल ने बीड शहर थाने में आमेर काजी के खिलाफ केस दर्ज कराया। यह केस IPC की धारा 292 (2), 294, 500 के साथ IT एक्ट की धाराओं में केस दर्ज किया गया है। आशंका जताई जा रही है कि आमेर काजी अपने अश्लील वीडियो को पोर्न साइटों पर बेच देता था। केस दर्ज होने के बाद आमेर काजी फरार हो गया है जिसकी तलाश में पुलिस दबिश दे रही है। पुलिस इस बात की भी जाँच कर रही है कि आमेर काजी के अन्य कितनी महिलाओं से संबंध हैं। स्कूल प्रशासन ने भी वीडियो में दिख रहीं तीनों महिला टीचरों को सस्पेंड कर दिया है।

‘BJP ने मुझ जैसे सामान्य कार्यकर्ता को 18 साल CM बनाए रखा, अब पार्टी को लौटाने का वक्त’: बोले शिवराज सिंह चौहान – 2005 में उमा भारती की मेहनत से बनी थी सरकार

मध्य प्रदेश में डॉ मोहन यादव ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें शिवराज सिंह चौहान की जगह प्रदेश की कमान सौंपी है। इस बीच, शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार (12 दिसंबर, 2023) को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। उनसे पत्रकारों ने सवाल किया कि क्या बीजेपी ने उन्हें इतनी मेहनत कर पार्टी को बंपर जीत दिलाने की बाद भी मुख्यमंत्री न बनाकर अन्याय किया है? क्या वो बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व से नाराज है? इसके जवाब में शिवराज सिंह चौहान ने जो कुछ भी कहा, उसकी लोग तारीफ कर रहे हैं।

मध्य प्रदेश के 4 बार मुख्यमंत्री रह चुके शिवराज सिंह चौहान ने कहा, “मैं आज कह रहा हूँ, एक साधारण कार्यकर्ता को 18 साल तक मुख्यमंत्री बनाकर रखा भारतीय जनता पार्टी ने, कोई दूसरा पहलू नहीं देखते क्या? एक साधारण कार्यकर्ता को इतने साल भारतीय जनता पार्टी जिसने मुख्यमंत्री बनाकर रखा, सबकुछ दिया भारतीय जनता पार्टी ने, अब मुझे भारतीय जनता पार्टी को देने का वक्त आया है।”

शिवराज सिंह चौहान के बयान का मतलब एक साफ है। वो कहीं नहीं जा रहे हैं। वो बीजेपी संगठन में सक्रिय रहेंगे। अगर कोई उनके बारे में ये अंदाजा लगा रहा है कि वो बीजेपी ने नाराज होकर सक्रिय राजनीति ही छोड़ रहे हैं, तो वो अंदाजा गलत है। चूँकि भारतीय जनता पार्टी के वो राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी रहे हैं, ऐसे में हो सकता है कि मध्य प्रदेश में उन्हें भाजपा लोकसभा चुनाव में उतारे और फिर 2024 की मोदी सरकार में बड़ी जिम्मेदारी सौंपे। वैसे भी, शिवराज सिंह चौहान के पास 18 सालों के मुख्यमंत्री पद का जो अनुभव है, उसे बीजेपी यूँ ही तो जाया नहीं करने वाली, फिर शिवराज सिंह चौहान अभी महज 64 साल के हैं।

इस प्रेस कॉन्ग्रेस के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने कई अहम मुद्दों पर अपनी बात रखी थी। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि उन्हें इस बात की संतुष्टि है कि वो बीजेपी को शानदार जीत दिलाने के बाद पद से हटे हैं। अब तक की सबसे बड़ी जीत पार्टी को मिली है। फिर मैं पार्टी का एक अदना सा कार्यकर्ता हूँ, पार्टी जो भी आदेश देगी, उसे मानते हुए मैं अपने काम में जुट जाऊँगा।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार (12 दिसंबर, 2023) को कहा कि मैं बहुत संतुष्ट हूँ। उन्होंने कहा, “2005 में मैं सीएम बना, वह सरकार उमा भारती की मेहनत से बनी थी। अब भी मैं संतुष्ट हूँ। वर्तमान जीत में केंद्र और राज्य की अन्य योजनाओं के साथ लाडली बहना योजना का भी योगदान है।” इस दौरान उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री रहते हुए भी कभी जनता से मेरे मुख्यमंत्री वाले रिश्ते नहीं रहे, परिवार के रिश्ते रहे हैं। मामा का रिश्ता प्यार और भैया का रिश्ता विश्वास का होता है। प्यार और विश्वास के रिश्ते को जब तक मेरी साँस चलेगी, तब तक मैं टूटने नहीं दूँगा। जनता की सेवा भगवान की पूजा है। यह पूजा मैं सदैव करता रहूँगा। क्योंकि उन्होंने मुझे अपना ही माना, कोई दूसरा नहीं माना।”

64 वर्षीय नेता ने यह भी कहा कि उन्होंने नए मुख्यमंत्री से उन्हें सरकारी जमीन मुहैया कराने का अनुरोध किया है ताकि वह पेड़ लगाना जारी रख सकें। बता दें कि शिवराज सिंह चौहान प्रदेश में जहाँ भी रहे, प्रतिदिन एक पौधा लगाते थे।

छत्तीसगढ़ में विष्णुदेव साय ने ली मुख्यमंत्री पद की शपथ, अपनी माँ और PM मोदी का लिया आशीर्वाद: भूपेश बघेल और रमन सिंह भी मंच पर रहे मौजूद

छत्तीसगढ़ के नए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पद की शपथ ले ली। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत बीजेपी की टॉप लीडरशिप भी मौजूद रही। साय के शपथ ग्रहण समारोह में बीजेपी शासित राज्यों के सभी मुख्यमंत्री भी पहुँचे। वहीं कॉन्ग्रेस की तरफ से भूपेश बघेल भी शपथ ग्रहण समारोह में मौजूद रहे। इसी के साथ छत्तीसगढ़ में बीजेपी का नया दौर शुरू हो गया है। इस शपथ ग्रहण समारोह के दौरान ही राज्य के दोनों उप-मुख्यमंत्रियों अरुण साव और विजय शर्मा ने भी अपनी-अपनी जिम्मेदारियों को सँभाल लिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह रहे मौजूद

विष्णुदेव साय ने रायपुर के साइंस कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में शपथ ग्रहण किया। विष्णुदेव साय के साथ लोरमी से विधायक अरुण साव और कवर्धा से विधायक विजय शर्मा ने भी उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। शपथ ग्रहण के बाद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सीधे मंत्रालय पहुँचे और कार्यभार भी ग्रहण कर लिया। सभास्थल में शपथ लेने से पहले सीएम विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आशीर्वाद लिया। प्रधानमंत्री ने कुछ दिनों पहले अपनी छत्तीसगढ़ यात्रा में नारा दिया था कि हमने ही बनाया है और हम ही इसे सँवारेंगे।

मंच पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा भी मौजूद रहे, तो पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और विधानसभा अध्यक्ष के लिए चुने गए रमन सिंह भी मंच पर मौजूद रहे।

योगी आदित्यनाथ, हिमंता बिस्वा सरमा भी रहे मौजूद

विष्णुदेव साय के शपथ ग्रहण में बीजेपी शासित सभी राज्यों के मुख्यमंत्री पहुँचे। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और असम के फायरब्रांड मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा भी मंच पर साय के साथ ही मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से पहले विष्णुदेव साय ने अपनी माँ जसमनी देवी का आशीर्वाद लिया। वो विधायक दल की बैठक में जाने से पहले भी माँ का आशीर्वाद लेकर गये थे। यही नहीं, विष्णुदेव साय ने मुख्यमंत्री का कार्यभार सँभालने से पहले जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ के दर्शन किए। पूजा-अर्चना के बाद विष्णु देव साय ने कहा कि मुख्यमंत्री का पद बहुत महत्वपूर्ण और जिम्मेदारी वाला होता है। मेरी कोशिश होगी कि जनता की उम्मीदों पर खरा उतरूँ।