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राम मंदिर के जिस मुख्य पुजारी को जाति से जोड़ रहे मूढ़, जानिए उस मोहित पाण्डेय को ही क्यों चुना रामलला का सेवक

अयोध्या में भगवान राम के भव्य मंदिर के लिए पुजारियों का चयन किया गया है। इसके लिए लोगों से बाकायदा आवेदन माँगे गए थे, जिसमें 3000 लोग शामिल हुए। पुजारियों के लिए कुछ मापदंड भी निर्धारित किए गए थे, साथ ही उन्हें कड़ी चयन प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। इस पूरी प्रक्रिया में 200 आवेदकों का साक्षात्कार हुआ, जिसमें से 50 अभ्यर्थियों को पुजारी पद के लिए चुना गया।

इस बीच, सोशल मीडिया पर खबर तेजी से फैली कि मोहित पाण्डेय को मुख्य पुजारी के तौर पर चुना गया है। वहीं सवाल ये भी उठे कि इस पद के लिए ब्राह्मण का ही चयन क्यों हुआ?

कुछ चर्चित लोगों ने मोहित पाण्डेय का नाम सुनते ही सोशल मीडिया पर एससी और ओबीसी कार्ड खेलना शुरू कर दिया, जिसमें उनके चयन को ब्राह्मणवाद से जोड़ा जाने लगा। मूकनायक जैसे दलित पोर्टल ने पोस्ट किया है कि “राम मंदिर के पुजारी बनेंगे मोहित पांडे!” – क्या दलितों का पुजारी बनना मना है?

दिलीप मंडल नाम के वरिष्ठ पत्रकार ने लिखा, “ये मंदिर भारत सरकार का ट्रस्ट बना रहा है। किसी के बाप की संपत्ति नहीं है। मंदिर मैनेजमेंट में रिज़र्वेशन न दिया गया तो आंदोलन होना चाहिए। दक्षिणा सब देंगे और सिर्फ सारा पैसा एक जाति के लोग निकालेंगे, ये नहीं चलेगा।”

सूरज यादव नाम के एक्स यूजर ने तंज भरे अंदाज में लिखा, “हिन्दू है तो चयनित हुआ। दलित, पिछड़े, आदिवासी हिन्दू नहीं हैं, यह ध्यान रहे। शूद्र, अति शूद्र, जाति प्रथा से बाहर लोगों को न तो ट्रस्ट में स्थान है और न ही पूजा स्थल में। और यह उन यादवों के लिए खास तौर से जो मनुवाद या ब्राह्मणवाद के समर्थक हैं।”

खास बात ये है कि मोहित पाण्डेय के रामलला मंदिर के पुजारी बनने पर जो लोग उंगली उठा रहे हैं, उन्हें न तो प्रक्रिया का पता है और न ही इस बात की जानकारी है कि मोहित पाण्डेय को किस योग्यता के चलते मुख्य पुजारी के पद चयनित किया गया है।

दरअसल, रामलला के मंदिर में पुजारी बनने के लिए आवश्यक शर्त रखी गई थी कि उम्मीदवार को किसी मान्यता प्राप्त गुरुकुल से वेद, शास्त्र और संस्कृत का अध्ययन करना चाहिए। उम्मीदवार को रामानंदीय परंपरा में दीक्षित होना चाहिए। ऐसे में सभी पुजारियों के चयन के दौरान हुए साक्षात्कार में वेद, कर्मकांड और वैदिक मंत्रों के ज्ञान पर ध्यान दिया गया। इसके लिए उम्र सीमा अधिकतम 30 वर्ष तय की गई थी।

भले ही उनका चयन मुख्य पुजारी के तौर पर हुआ है, फिर भी मुख्य पुजारी की भूमिका निभाने से पहले उन्हें लंबे प्रशिक्षण से गुजरना होगा, जिसकी अवधि 6 माह है। अब प्रशिक्षण के दौरान उन्हें वेद, कर्मकांड, वैदिक मंत्रों और रामायण के ज्ञान की गहन शिक्षा दी जाएगी। इस प्रशिक्षण के बाद ही पुजारी रामलला की पूजा-अर्चना का कार्य कर सकेंगे।

किस आधार पर हुआ चयन?

अब चूँकि, रामलला की पूजा अर्चना के लिए नियुक्त किए जा रहे पुजारियों के लिए उक्त मापदंड निर्धारित किए गए थे, जिसमें रामनंदीय परंपरा का विद्वान होना जरूरी था, साथ ही उन्हें वेद, शास्त्र और संस्कृत में विशेषज्ञता रखना जरूरी था… ऐसे में जाहिर है कि सभी अभ्यर्थियों की परीक्षा हुई होगी। अब अगर इस परीक्षा में मोहित पाण्डेय उत्तीर्ण हुए तो इसमें जाति-धर्म का कोई मामला कैसे आया, उनका चयन तो काबिलियत के आधार पर हुआ है न।

जानकारी के लिए बता दें कि मोहित पाण्डेय ने गाजियाबाद के दूधेश्वर वेद विद्यापीठ में सात साल तक अध्ययन किया है। उन्होंने तिरुपति स्थित तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम से संबद्ध श्री वेंकटेश्वर वैदिक विश्वविद्यालय से शास्त्री (स्नातक) की उपाधि हासिल की। इसी साल (2023 में ही) उन्होंने सामवेद का अध्ययन करते हुए मास्टर डिग्री हासिल की है। वह रामानंदीय परंपरा के विद्वान भी हैं और उन्हें वेद, शास्त्र और संस्कृत में विशेषज्ञता भी प्राप्त है।

इसी तरह से अन्य चुने गए पुजारियों में उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के युवा शामिल हैं। सभी पुजारी रामानंदीय परंपरा से संबंधित हैं और उन्हें वेद, शास्त्र और संस्कृत में विशेषज्ञता प्राप्त है।

मोहित पाण्डेय के चुनाव पर सही

श्री वेंकटेश्वर वैदिक विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर रानी सदाशिव मूर्ति ने द न्यू इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत की और मोहित पाण्डेय के श्रीराम लाल मंदिर के मुख्य पुजारी के पद पर चयन पर प्रसन्नता जताई। उन्होंने कहा, “विश्वविद्यालय के कई छात्र विभिन्न मंदिरों में पुजारी और आचार्य के रूप में काम करते हैं। एक मृदुभाषी व्यक्ति, पाण्डेय के स्वभाव, ध्यान और पढ़ाई के प्रति समर्पण ने उन्हें प्रतिष्ठित अयोध्या राम मंदिर में भगवान राम की सेवा करने का अवसर दिलाया।”

राम लला के मुख्य पुजारी के पद पर चयनित मोहित पाण्डेय की गाजियाबाद से तिरूपति और अब अयोध्या तक की यात्रा उनके समर्पण और कठोर प्रशिक्षण का प्रमाण है। उनके चयन में आध्यात्मिक क्षमताओं वाले व्यक्तित्व को तैयार करने गाजियाबाद के दूधेश्वर वेद विद्यापीठ और श्री वेंकटेश्वर वैदिक विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों ने भी अहम भूमिका निभाई है। ऐसे में जो लोग उनके चयन पर उंगली उठा रहे हैं, वो न सिर्फ संक्रमित मानसिकता के व्यक्तित्व वाले लोग हैं, बल्कि समाज में गलत विचारों का प्रवाह कर उसमें जहर घोलने का काम कर रहे हैं।

खैर, जब उंगली विवाद हो ही रहा है तो यहाँ ये बताना जरूरी है कि भारत के विभिन्न राज्यों में स्थित मंदिरों में न सिर्फ दलित पुजारी हैं, महिला पुजारी हैं, बल्कि दलित महिला पुजारी भी अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं। ऑपइंडिया ने इस पर विशेष लेख प्रकाशित कर बताया था कि किन मंदिरों में महिलाएँ और दलित महिलाएँ पुजारी का दायित्व निभा रही हैं। इस पूरी रिपोर्ट को पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

(नोट: मोहित पाण्डेय की मुख्य पुजारी के तौर पर नियुक्ति का श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने खण्डन किया है। आप इस लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं)

जब अयोध्या में ध्वस्त हुआ बाबर का निशान तब ABVP के कार्यकर्ता थे MP के मोहन, अब CM बन देखेंगे राम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा

मोहन यादव मध्य प्रदेश के नए मुख्यमंत्री होंगे। सक्रिय राजनीति में आने से पहले उन्होंने सालों राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और उसकी छात्र ईकाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के लिए काम किया है। विभिन्न स्तरों पर अलग-अलग दायित्वों का निवर्हन कर चुके हैं।

1990 के दौर में जब बिहार और उत्तर प्रदेश में लालू प्रसाद यादव तथा मुलायम सिंह यादव में मुस्लिमों का तुष्टिकरण करने की होड़ लगी थी, तब मध्य प्रदेश के युवा मोहन यादव अभाविप से जुड़कर ज्ञान, शील, एकता की अलख जगा रहे थे। जब राम मंदिर निर्माण के लिए सोमनाथ से अयोध्या तक रथ लेकर निकले लाल कृष्ण आडवाणी को बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के आदेश पर 23 अक्टूबर 1990 को समस्तीपुर में गिरफ्तार किया गया था, तब युवा मोहन अभाविप की मध्य प्रदेश ईकाई के मंत्री थे।

1990 का ही साल था जब उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के आदेश पर अयोध्या में रामभक्तों पर फायरिंग हुई थी। उस साल 2 नवंबर को अयोध्या में रामधुन में रमे भक्तों पर फायरिंग हुई थी। अयोध्या की गलियों में रामभक्तों को दौड़ा-दौड़ा कर निशाना बनाया गया था। 3 नवंबर 1990 को जनसत्ता में छपी एक रिपोर्ट में लिखा गया, “राजस्थान के श्रीगंगानगर का एक कारसेवक, जिसका नाम पता नहीं चल पाया है, गोली लगते ही गिर पड़ा और उसने अपने खून से सड़क पर लिखा सीताराम। पता नहीं यह उसका नाम था या भगवान का स्मरण। मगर सड़क पर गिरने के बाद भी सीआरपीएफ की टुकड़ी ने उसकी खोपड़ी पर सात गोलियाँ मारी।”

2 नवंबर 1990 को ही कोठारी बंधुओं की हत्या हुई थी। 20 साल के शरद कोठारी को घर से बाहर निकाल सड़क पर बिठाया गया और उनके सिर को गोली से उड़ा दिया। छोटे भाई के साथ ऐसा होते देख 22 साल के रामकुमार कोठारी भी कूद पड़े। एक गोली रामकुमार के गले को भी पार कर गई। उस दिन अयोध्या में किसी भी रामभक्त के पैर में गोली नहीं मारी गई थी। सबके सिर और सीने में गोली लगी थी। तुलसी चौराहा खून से रंग गया था। राम अचल गुप्ता का अखंड रामधुन बंद नहीं हो रहा था तो उन्हें पीछे से गोली मारी गई।

रामनंदी दिगंबर अखाड़े में घुसकर साधुओं पर फायरिंग की गई। कोतवाली के सामने वाले मंदिर के पुजारी को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया गया। रामबाग के ऊपर से एक साधु आँसू गैस से परेशान लोगों के लिए बाल्टी से पानी फेंक रहे थे। उन्हें गोली मारी गई और वह छत से नीचे आ गिरे। फायरिंग के बाद सड़कों और गलियों में पड़े रामभक्तों के शव बोरियों में भरकर ले जाए गए।

उस दिन मरने वाले कारसेवकों की संख्या को लेकर अलग-अलग आँकड़े दिए जाते हैं। कारसेवकों द्वारा जारी की गई सूची में 40 कारसेवकों के मारे जाने की बात कही गई थी और उनके नामों की सूची भी प्रकाशित की गई थी। मुलायम ने बताया था कि अटल बिहारी वाजपेयी ने उनसे 56 लोगों के मारे जाने की बात कही थी। वरिष्ठ पत्रकार हेमंत शर्मा अपनी क़िताब ‘युद्ध में अयोध्या‘ में लिखा है कि उन्होंने 25 लाशें देखी थी। केंद्र सरकार ने 15 कारसेवकों के मारे जाने का आँकड़ा दिया था, जबकि विश्व हिन्दू परिषद ने 59 लोगों के मारे जाने की बात कही थी।

लालू राम रथ को रोक देने का दंभ भरते हुए जीवन भर बिहार में मुस्लिमों के वोट बटोरते रहे। उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव ‘मुल्ला मुलायम’ का तमगा हासिल कर इतराते रहे। तब मध्य प्रदेश के उज्जैन का युवा मोहन राष्ट्रसेवा की अपनी धुन में रमा रहा। 1992 में जब अयोध्या में विवादित ढाँचा ध्वस्त हुआ था तब वे अभाविप में राष्ट्रीय मंत्री का दायित्व सँभाल रहे थे।

राम की कृपा देखिए महाकाल का वही भक्त मोहन यादव अब मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। वह भी उस समयकाल में जब अयोध्या के भव्य राम मंदिर में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा होने को है। दूसरी तरफ राजनीति में बेटे से ही मात खाकर मुलायम दिवंगत हो चुके हैं और लालू पूरे कुनबे के साथ बिहार की राजनीति में प्रासंगिक बने रहने के लिए अब ‘जाति’ के भरोसे बैठे हैं।

‘शराब का धंधा कॉन्ग्रेस सांसद का… मगर फंडिंग ओडिशा की BJD को’ : भाजपा ने लगाया आरोप; जेपी नड्डा बोले- जवाब तो देना होगा

झारखंड में कॉन्ग्रेस सांसद धीरज साहू के अलग-अलग ठिकानों पर चल रही आईटी विभाग की तलाशी अभी जारी है। सबसे ज्यादा कैश ओडिशा से बरामद हुआ है। जो कैश से भरी अलमारी की फोटो आपने देखी वो भी बालांगीर में बलदेव साहु एंड सन्स लिमिटेड ऑफिस की है। इसके अलावा जो ज्यादा कैश मिला है वो भी संबलपुर, तितिलागढ़ जैसे क्षेत्रों से बरामद हुआ है।

ऐसे में सुंदरगढ़ से भाजपा की सासंद कुसुम तेते ने इस पूरे भ्रष्टाचार के मामले को राज्य की सत्ताधारी पार्टी बीजेडी से जोड़ा है और स्थानीय मीडिया ने भी आरोप लगाया है कि भले ही इस पूरे भ्रष्टाचार को करने वाले कॉन्ग्रेस सांसद हैं लेकिन इसका फायदा बीजू जनता दल को हो रहा है।

धीरज साहू और BJD कनेक्शन

एक ओर जहाँ खबरें आ रही हैं कि अब तक आईटी रेड में मिला पैसा 400 करोड़ रुपए और 60 किलो सोना तक पहुँच गया है। वहीं भाजपा की कुसुम तेते ने कहा कि उन्होंने धीरज साहू का शराब कारोबार, जो ओडिशा में फैला हुआ है, उसका कनेक्शन ओडिशा की बीजू जनता दल से है।

उन्होंने कहा कि उन्होंने विधानसभा में कई बार मुद्दे को उठाया था लेकिन कभी किसी ने ध्यान नहीं दिया। उन्होंने कहा कि बीजेडी के पूर्व विधायक जोगेश सिंह के धीरज साहू के कारोबार से कनेक्शन है। उनके मुताबिक ओडिशा की ये शराब मैनुफैक्चरिंग यूनिट पहले सिंह की माँ के नाम पर थीं। इस संबंध में उन्होंने कई बार बताया भी मगर कार्रवाई नहीं हुई।

भाजपा ने उठाए सवाल

इसके बाद भाजपा ने भी इस संबंध में भुवनेश्वर में प्रेस कॉन्फ्रेंस की और प्रदेश प्रवक्ता लेखाश्री सामंतीसिंगार ने बीजेडी के कुछ नेताओं और मंत्रियों का नाम लेकर कहा कि भले ही कंपनी धीरज साहू की है, लेकिन उसे मैनेज बीजेडी द्वारा किया जाता है।

उन्होंने कहा, “झारखंड के कॉन्ग्रेस सांसद भले ही कंपनी के मालिक हैं। लेकिन ओडिशा में बीजेडी सरकार इसे मैनेज कर रही थी। जब कंपनी इतनी संपत्ति इकट्ठा कर रही थी तो विजिलेंस, क्राइम ब्रांच, एक्साइज, ईओडब्ल्यू क्या कर रही थी और राज्य सरकार को इसकी जानकारी कैसे नहीं थी? यह शराब का कारोबार चुनाव के दौरान बीजेडी के लिए पैसे का स्रोत है।”

स्थानीय चैनलों पर भी ऐसी खबरें चलाकर दावा किया जा रहा है कि ये शराब का धंधा राज्य में पॉलिटिकल फंडिंग का प्रमुख स्त्रोत था। कुछ लोगों ने आरोप लगाया है कि ओडिशा सरकार ने पिछले 25 वर्षों में शराब की दुकानों के लिए नए टेंडर जारी नहीं किए हैं। कुछ चुनिंदा व्यापारी हर साल लाइसेंस का नवीनीकरण कराते रहे हैं। आरोप लगाए गए हैं कि नवीन पटनायक सरकार की शराब नीति देशी शराब के निर्माताओं को फायदा पहुँचाने के लिए बनाई गई है, क्योंकि इन व्यवसायों के पैसे से सत्ताधारी पार्टी को फंड मिलता है।

जिन बीजेडी नेताओं का नाम साहू परिवार से जुड़ा बताया जा रहा है उसमें तितिलागढ़ से मंत्री तुकुनी साहू, सोनपुर से निरंजन पुजारी, नौपाड़ा से राजेंद्र ढोकिया और बौद्ध से प्रदीप अमात का नाम आ रहा है.. ऐसा कहा जा रहा है शराब के धंधे से इन लोगों को भी फायदा था।

जेपी नड्डा ने धीरज साहू से कहा- जवाब तो देना होगा

भारतीय जनता पार्टी ने जहाँ राज्य स्तर पर प्रदर्शन शुरू करके बीजेडी नेताओं से जवाब माँगना शुरू कर दिया है। वहीं राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा भी खुलेआम मोर्चा खोल दिया है।

नड्डा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा, “बंधु जवाब तो देना पड़ेगा, तुमको भी और तुम्हारे नेता राहुल गाँधी को भी। ये नया भारत है, यहाँ पर राजपरिवार के नाम पर जनता का शोषण नहीं करने दिया जाएगा। भागते-भागते थक जाओगे, लेकिन कानून पीछा नहीं छोड़ेगा। अगर कॉन्ग्रेस भ्रष्टाचार की गारंटी है तो मोदी जी भ्रष्टाचार पर कार्यवाही की गारंटी हैं, जनता की लूटी हुई पाई- पाई लौटानी पड़ेगी।”

इसी तरह पीएम मोदी ने नोटो की गड्डियों की फोटो देख कहा था– देशवासी इन नोटों के ढेर को देखें और फिर इनके नेताओं को ईमानदारी के भाषणों को सुनें। पीएम ने लिखा था- जनता से लूटा है उसकी पाई-पाई लौटानी पड़ेगी, यह मोदी की गारंटी है।

जब उज्जैन में होता है सिंहस्थ कुंभ तब मध्य प्रदेश में होता है BJP का CM, इस बार उज्जैन के MLA को ही बीजेपी ने चुन लिया मुख्यमंत्री

डॉक्टर मोहन यादव मध्य प्रदेश के नए मुख्यमंत्री होंगे। मोहन यादव लगातार तीसरी बार उज्जैन दक्षिण विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए हैं। उनकी उम्र 58 वर्ष है। उन्होंने 2 जुलाई, 2020 को शिवराज सिंह चौहान की कैबिनेट में बतौर मंत्री शपथ ली थी। उन्हें उच्च शिक्षा विभाग सौंपा गया था। मीडिया नए CM के रूप में नरेंद्र सिंह तोमर और प्रह्लाद पटेल जैसे बड़े-बड़े नामों पर विचार कर रही थी, लेकिन भाजपा ने मोहन यादव को चुन कर सबको चौंका दिया।

छत्तीसगढ़ की तर्ज पर मध्य प्रदेश में भी भाजपा 2 उप-मुख्यमंत्रियों के फॉर्मूले पर चलेगी। यहाँ राजेंद्र शुक्ला और जगदीश देवड़ा को डिप्टी CM चुना गया है। 59 वर्षीय राजेंद्र शुक्ला रीवा से विधायक हैं। उन्होंने लगातार पाँचवीं बार इस पद पर चुना गया है। वहीं जगदीश देवड़ा मल्हारगढ़ से विधायक हैं। वो 8 बार विधानसभा के लिए चुने जा चुके हैं। वो शिवराज सिंह चौहान के मंत्रिमंडल में कमर्शियल टैक्सेज, प्लानिंग, इकोनॉमिक्स एंड स्टेटिस्टिक्स मंत्री थे।

वहीं भारत के पूर्व कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को विधानसभा अध्यक्ष के रूप में चुना गया है। भाजपा विधायक दल की बैठक में मोहन यादव पीछे बैठे रहे, उसके बाद उन्होंने अब तक मुख्यमंत्री रहे शिवराज सिंह चौहान से आशीर्वाद लिया। जहाँ मुख्यमंत्री OBC समाज से हैं, वहीं उनके डिप्टी के मामले में दलित और ब्राह्मण का समीकरण रखा गया है। मोहन यादव ने 1984 में ABVP से छात्र राजनीति की शुरुआत की थी। 1986 में उन्हें विभाग प्रमुख की जिम्मेदारी दी गई।

गौर करने लायक बात ये भी है कि मध्य प्रदेश में जिस-जिस साल सिंहस्थ कुम्भ लगता है, भाजपा का मुख्यमंत्री बनता रहा है। उदाहरण के तौर 1992 में सुंदरलाल पटवा, 2004 में उमा भारती और 2016 में शिवराज सिंह चौहान को ले लीजिए। वहीं 2028 में अगला सिंहस्थ कुंभ लगने वाला है। मोहन यादव ABVP के प्रदेश सह-मंत्री और राष्ट्रीय मंत्री भी रहे हैं। RSS के वो सह-खंड कार्यवाह और नगर कार्यवाह भी बने। 1997 में वो BJYM में आए।

वो ‘उज्जैन विकास प्राधिकरण’ के अध्यक्ष और ‘मध्य प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम’ के अध्यक्ष भी रहे हैं।

शौहर जमाल को तलाक देकर निकहत ने हिमांशु को चुना जीवनसाथी, मंदिर में ‘जय श्री राम’ और वेदमंत्रों के बीच घर-वापसी और शादी: कहलाएँगी ‘नेहा’

उत्तर प्रदेश के औरैया जिले में शुक्रवार (8 दिसंबर, 2023) को एक मुस्लिम महिला ने घर-वापसी की है। यहाँ की निकहत सनातन धर्म स्वीकार कर के अब नेहा बन चुकीं हैं। इसी के साथ निकहत ने हिमांशु नाम के एक हिन्दू युवक से शादी भी कर ली है। यह विवाह एक मंदिर में हिन्दू विधि-विधान से वेदमंत्रों और ‘जय श्री राम’ के उद्घोष के बीच हुआ है। निकहत पहले से शादीशुदा और एक बच्चे की माँ हैं। हिमांशु से शादी करने से पहले उन्होंने अपने शौहर को तलाक दे दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हिमांशु मूल रूप से कन्नौज जिले के छिबरामऊ थाना क्षेत्र के रहने वाले हैं। उनका काफी समय से अपने ही गाँव के पास स्थित सैयदबाड़ा आना-जाना था। शादीशुदा और 1 बच्चे की अम्मी निकहत सैयदबाड़ा में रहती थीं। 2 साल पहले हिमांशु और निकहत में बातचीत शुरू हुई और बाद में उन्होंने आपस में फोन नंबर भी साझा कर लिए। थोड़े ही समय बाद निकहत और हिमांशु एक-दूसरे से प्यार करने लगे। दोनों ने शादी कर के साथ रहने का फैसला कर लिया। हालाँकि, इस रिश्ते में निकहत का विवाहिता और दोनों का अलग-अलग मजहब से होना सबसे बड़ी समस्या थी।

किसी भी हाल में हिमांशु के साथ रहने की जिद कर चुकी निकहत ने सबसे पहले अपने शौहर जमाल मुस्तफा को तलाक दे दिया। जमाल से निकहत का निकाह 7 साल पहले हुआ था। दोनों का एक बच्चा रिहान भी है। हालाँकि, जमाल को तलाक देने के बावजूद निकहत के घर वाले उनकी शादी हिमांशु से करने को तैयार नहीं हुए। इस बीच हिमांशु निकहत से शादी करने के लिए रास्ते तलाशता रहा। आखिरकार हिमांशु ने औरैया के रहने वाले अपने एक दोस्त से मदद माँगी।

हिमांशु के साथी ने उसे औरैया बुलवाया। शुक्रवार को हिमांशु अपने घर से औरैया के लिए निकला। निकहत भी रास्ते में हिमांशु से मिल गईं। निकहत के साथ उनका बेटा रिहान भी था। ये प्रेमी जोड़ा सबसे पहले विधूना तहसील पहुँचा जहाँ दोनों ने अपने बालिग होने का सबूत दे कर शपथ पत्र बनवाया। शुक्रवार को ही दोनों कन्नौज के विधूना बाजार में मौजूद माँ दुर्गा के मंदिर पहुँचे। यहाँ निकहत ने शुद्धीकरण के बाद हिन्दू धर्म अपनाया। घर-वापसी के बाद उनका नया नाम नेहा पड़ा।

इसके बाद हिमांशु और निकहत ने एक दूसरे को वरमाला पहनाई। वैदिक विधि-विधान से हुई इस शादी के दौरान हिमांशु ने निकहत के गले में मंगलसूत्र डाला। मंदिर में मौजूद लोगों ने ‘जय श्री राम’ के नारे लगाए। विवाह के बाद अपने एक बयान में निकहत ने हिमांशु से शादी और अपनी घर-वापसी का फैसला अपना खुद का बताया। निकहत ने यह भी बताया कि उन्होंने यह फैसला अपनी ख़ुशी से बिना किसी के दबाव में लिया है। शादी के बाद निकहत अपने पति हिमांशु के साथ चली गईं।

‘शराब पीकर गुरुद्वारे जाते हैं पंजाब के CM, पत्नी को पीटते हैं’: बेटी ने भगवंत मान को ‘पिता’ कहने से किया इनकार, पूछा- 2 बच्चों को छोड़ा, तीसरा क्यों कर रहे

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की बेटी ने अपने पिता के ऊपर गंभीर आरोप लगाए हैं। बेटी ने वीडियो जारी कर रहा है कि उसके पिता भगवंत मान ने अपने राजनैतिक करियर के लिए बीवी-बच्चों को छोड़ दिया और अब वो तीसरे बच्चे के पिता बनने जा रहे हैं। बेटी ने वीडियो में यह भी दावा किया कि मान शराब पीकर संसद, विधानसभा और गुरुद्वारे जाते हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने एक बार अपने बेटे को भी सीएम हाउस से निकाल दिया था। उनकी ऐसी ही हरकत के बाद उनकी पहली पत्नी और बेटी विरोध में उतरे और पंजाब सीएम को बेपर्दा करने की बात कही।

बेटी ने तो 5 मिनट 19 सेकेंड की वीडियो शेयर कर कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान तीसरी बार बाप बनने वाले हैं। ये बात उन लोगों को दूसरों से पता चली है, भगवंत मान ने इस संबंध में उन्हें कुछ नहीं बताया। सीरत पूछती हैं कि भगवंत मान ने अपने पहले दो बच्चों की तो जिम्मेदारी निभाई नहीं, अब वो तीसरे बच्चे को ला रहे हैं, इसके पीछे क्या कारण है।

सीरत ने दावा किया कि उन्हें और उनके भाई को उनके पिता द्वारा नजरअंदाज किया गया है, जिन्होंने अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों के बजाय अपने राजनीतिक करियर को प्राथमिकता दी है। कौर ने आगे आरोप लगाया कि उनके भाई दिलशान को भगवंत मान ने उनके घर से बाहर भी निकाल दिया था, क्योंकि उसने उनसे मिलने की कोशिश की थी। हालाँकि इस मामले में आम आदमी पार्टी ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है और इसे पारिवारिक मामला बताया है।

सीरत मान ने वीडियो में कहा, “मैं सीरत कौर मान हूँ। मैं पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की बेटी हूँ। मैं शुरुआत में ही साफ कर दे रही हूँ कि इस वीडियो में मैं उन्हें मिस्टर मान या सीएम साहब ही कहूँगी, क्योंकि उन्होंने मुझसे पापा शब्द सुनने का अधिकार बहुत पहले ही खो दिया था। मैं साफ कर दूँ कि इस वीडियो के पीछे कोई पॉलिटिकल मोटिव (राजनीतिक मकसद) नहीं छिपा है।”

सीरत कौर मान ने आगे कहा, “इस वीडियो को बनाने के पीछे सिर्फ इतनी सी बात है कि मैं चाहती हूँ कि हमारी कहानी भी दुनिया के सामने आए। अभी तक लोगों ने जो कुछ भी सुना है, वो सबकुछ सीएम साहब की तरफ से ही कहा गया है। उसके चलते हमें बहुत कुछ सुनना और झेलना पड़ा है, जिसे मैं पूरी तरह से बयान भी नहीं कर सकती। आज तक मेरी माँ और हम सभी ने चुप रहकर सबकुछ सहा है, लेकिन ऐसा लगता है कि हमारी चुप्पी को हमारी कमजोरी समझ लिया गया। उन्हें (भगवंत मान को) इस बात का अहसास तक नहीं है कि हमारी चुप्पी की वजह से वो इस गद्दी (मुख्यमंत्री पद) पर बैठे हैं।”

सीरत कौर मान ने आगे कहा, “मान साहब ने मेरी (सीरत कौर मान-उम्र 23 वर्ष) और मेरे छोटे भाई (दिलशान मान-उम्र 19) के प्रति अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों को निभाया तक नहीं है। मेरा भाई पिछले साल 2 बार उनसे मिलने सीएम हाउस गया, लेकिन उसे सीएम हाउस में घुसने तक नहीं दिया गया। एक बार उसे अंदर जाने भी दिया गया, तो ये बहाना बनाकर रात में निकाल दिया गया कि वो रात में यहाँ (सीएम हाउस में) नहीं रुक सकता।”

सीरत कौर ने सवालिया लहजे में पूछा, “जो व्यक्ति अपने बच्चों की ज़िम्मेदारी नहीं उठा सकता, वह पंजाब के लोगों की ज़िम्मेदारी कैसे उठा सकता है?” उन्होंने कहा, “भगवंत मान एक अहसान कर दें कि जिन पंजाब के नाम पर उन्होंने हम सभी को छोड़ा, वो उसी पंजाब की माँ-बेटियों का भला कर दें, तो शायद रब उन्हें माफ कर दे।” सीरत कौर मान ने आरोप लगाया है कि भगवंत मान विधानसभा में, संसद में, गुरुद्वारे तक में शराब पीकर जाते हैं। वो हमारे साथ मारपीट तक करते हैं।

इस मामले में सीरत कौर की माँ इंदरप्रीत ने कहा है- “मैं अभी तक चुप थीं, लेकिन अब भगवंत मान के शराबियों वाले वीडियो शेयर करके मैं उसे नंगा कर दूँगी।” इंदरप्रीत ने आरोप लगाया कि सीरत के वीडियो को भगवंत मान की पीआर टीम इंटरनेट से हटाने की कोशिश कर रही है और इसके लिए तमाम तरह से दबाव डाला जा रहा है। उनके फेसबुक कमेंट को अकाली दल के प्रवक्ता परमबंस सिंह ने एक्स पर शेयर किए हैं।

बता दें कि भगवंत मान की पहली पत्नी का नाम इंदरप्रीत कौर है। वो अपने दोनों बच्चों के साथ अमेरिका में रहती है। दोनों ने साल 2015 में तलाक के लिए अर्जी दी थी, जिसे कोर्ट ने मंजूरी दे दी थी। भगवंत मान ने दावा किया था कि वो पंजाब के लिए अपना परिवार छोड़ रहे हैं। हालाँकि उन्होंने साल 2022 में पंजाब का मुख्यमंत्री बनने के कुछ माह के भीतर ही अपनी डॉक्टर गुरप्रीत कौर से ही शादी कर ली थी। शादी के समय भगवंत मान 48 साल के थे, जबकि गुरप्रीत कौर 32 साल की। वहीं, उनकी बेटी सीरत उस समय 22 साल की थी, तो बेटा दिलशान 18 साल का। मान के दोनों बच्चे उनके सीएम बनने के बाद शपथ ग्रहण समारोह में पहुँचे थे।

महिला को पूरे गाँव में नग्न घुमाया, बिजली के खम्भे से बाँध कर पीटा: कर्नाटक में जहाँ हुई हैवानियत, वहाँ से 30 किलोमीटर दूर बैठी है कॉन्ग्रेस सरकार

कर्नाटक के बेलगावी में एक वीभत्स घटना सामने आई है। यहाँ वन्मुतारी गाँव में एक महिला को गाँव भर में नग्न कर घुमाया गया और उसे एक बिजली के खम्भे से बाँधा गया। इस मामले में 7 आरोपित गिरफ्तार हो गए हैं। महिला को इसलिए नंगा घुमाया गया और मारपीट की गई क्योंकि उसका बेटा एक लड़की को लेकर भाग गया था।

जानकारी के अनुसार, बेलगावी के वन्तामुरी गाँव में रहने वाले डुंडप्पा अशोक नाइक गाँव में रहने वाली प्रियंका बसप्पा नाइक के साथ भाग गया था। दोनों के बीच पहले से प्रेम सम्बन्ध था लेकिन प्रियंका के परिवार वालों ने उसकी शादी कहीं और तय कर दी थी। यह घटना 10-11 दिसम्बर की रात की बताई जा रही है। जिस दिन प्रियंका और अशोक ने यह कदम उठाया, उसी दिन प्रियंका की शादी थी। इस बात से गुस्सा होकर प्रियंका के परिजनों ने रात में अशोक की माँ को रात में उसके घर से निकाल लिया और मारा पीटा, इसके बाद उनको नंगा करके पूरे गाँव में घुमाया और फिर एक बिजली के खम्भे में बाँध कर पिटाई की।

बेलगावी में एक महिला के साथ यह वीभत्स घटना तब हुई जब घटना वाले गाँव से लगभग 28 किलोमीटर दूर ही विधानसभा का शीतकालीन सत्र चल रहा है जहाँ मुख्यमंत्री सिद्दारमैया, उप-मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार समेत राज्य के तमाम बड़े नेता और अधिकारी मौजूद है। जानकारी के अनुसार, इस मामले में पुलिस ने सुबह 4 बजे जाकर महिला को छुड़ाया। महिला ने इस मामले में महिला को नग्न घुमाने, उसे पोल में बाँध कर मारने वाले 7 आरोपितों को अभी तक गिरफ्तार किया है। घटना वाले गाँव में वर्तमान में माहौल तनावपूर्ण है।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने इस मामले पर बयान जारी किया है। उन्होंने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा है, “एक महिला को बेलगाम में नग्न करके घुमाया गया, पोल से बाँध कर मारा गया। यह घटना अमानवीय है। यह घटना समाज पर एक कलंक है। हमारी सरकार ऐसे कृत्यों को सहन नहीं करेगी। इस मामले में कई लोग गिरफ्तार किए गए हैं। यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम पीड़ित परिवार को न्याय दिलवाएँ।”

कर्नाटक के गृहमंत्री जी परमेश्वरा ने मीडिया को बताया है कि मामले में पुलिस ने महिला को साड़ी उपलब्ध करवाई और 7 आरोपितों को पकड़ा। पुलिस ने मारपीट के कारण घायल महिला को अस्पताल में भर्ती करवाया है। राज्य के गृह मंत्री ने कहा है कि वह महिला से अस्पताल जाकर मिलेंगे।

‘ये देश रामायण से नहीं चलता, लोग पत्थर को पूजते हैं’: यूपी के कॉलेज में छात्र ने आंबेडकर को बताया ‘सबसे बड़ा भगवान’, कहा – न राम ने कुछ दिया, न कृष्ण ने

उत्तर प्रदेश के बदायूँ जिले का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में एक छात्र को एक समूह के सामने हिन्दू देवी-देवताओं के साथ-साथ धर्मग्रंथों पर भी आपत्तिजनक टिप्पणी करता सुनाई दे रहा है। वीडियो के वायरल होने के बाद छात्र पर कार्रवाई की माँग उठ रही है। हालाँकि, पुलिस के मुताबिक, आरोपित छात्र ने लिखित माफ़ीनामा देकर अपने शब्दों पर खेद जताया है। वायरल वीडियो बुधवार (6 दिसंबर, 2023) को बनाया गया था।

मिली जानकारी के मुताबिक, यह मामला बदायूं जिले के थाना क्षेत्र सहसवान का है। यहाँ कछला रोड स्थित सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेज में 6 दिसंबर को डॉ भीमराव अंबेडकर की पुण्यतिथि के अवसर पर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में कई छात्र और कॉलेज के प्रोफेसर आदि मौजूद थे। इस मौके पर अलग-अलग छात्रों ने अपनी प्रस्तुतियाँ दीं। थोड़े समय बाद राम सेवक यादव नाम के छात्र की बारी आई। राम सेवक यादव ने अपना भाषण शेरो-शायरी के अंदाज में शुरू किया और भगवान राम के खिलाफ ही बयानबाजी शुरू कर दी।

रामसेवक के भाषण का 59 सेकेण्ड का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। इस वीडियो में उन्होंने कहा, “ये देश किसी रामायण किसी गीता से नहीं चलता, ये देश मेरे बाबा साहेब के बनाए हुए संविधान से चलता है। जय भीम से बड़ा कोई सम्मान नहीं है, जो भीम का नहीं है वो इंसान नहीं है। यूँ तो पूजते हैं लोग पत्थरों को, मगर मेरे बाबा साहेब से बड़ा कोई भगवान नहीं है। न राम ने कुछ किया है न श्री कृष्ण ने कुछ किया है, हमको जो कुछ भी दिया है बाबा साहेब आपके संविधान ने दिया है।”

राम सेवक यादव द्वारा बोली गई इन लाइनों के बाद हॉल की दर्शक दीर्घा में मौजूद बाकी छात्रों ने विरोध शुरू कर दिया। मंच पर मौजूद कुछ लोग भी उठ कर वहाँ से जाने लगे। कार्यक्रम का संचालन कर रहे व्यक्ति ने बाकी छात्रों से शांत रहने की अपील की। कुछ ही देर में यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। लोग पुलिस से राम सेवक पर कार्रवाई की माँग करने लगे। हालाँकि, पुलिस ने 9 दिसंबर को दिए गए अपने जवाब में बताया कि आरोपित छात्र ने माफ़ी लिखित तौर पर माँग ली है और कॉलेज के बाकी छात्रों ने उसे माफ़ भी कर दिया है।

पुलिस का कहना है कि अभी तक किसी भी पक्ष द्वारा मामले में शिकायत कॉपी थाने में नहीं प्रस्तुत की गई है। वहीं विवाद बढ़ता देख कर आरोपित छात्र राम सेवक यादव ने एक वीडियो भी जारी किया है। उन्होंने अपने शब्दों पर दुःख प्रकट करते हुए लोगों से क्षमा याचना की है।

‘मैं सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की तीसरी बीवी, पूरी बिरादरी जानती है’: करणी सेना अध्यक्ष की चिता की राख भी नहीं हुई ठंडी, संपत्ति को लेकर पत्नियों में छिड़ गई लड़ाई

राजस्थान की राजधानी जयपुर में मंगलवार (5 दिसंबर, 2023) को ‘श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना’ के अध्यक्ष सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की उनके ही घर में गोलियों से भून कर हत्या कर दी गई थी। हत्या के बाद अब सुखदेव सिंह गोगामेड़ी के निजी जीवन के कई राज निकल कर सामने आ रहे हैं। इसमें उनकी 3 पत्नियाँ और करोड़ों की सम्पत्ति का मालिक होना जैसी बातें प्रमुख हैं। अब सुखदेव सिंह की असली पत्नी होने के अधिकार को ले कर उनकी 2 पत्नियों में विवाद शुरू हो गया है। हालाँकि, तीसरी बीवी ने फिलहाल इस झगड़े से दूरी बना कर रखी है।

सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की पहली पत्नी शकुंतला चौधरी और दूसरी का नाम शीला शेखावत है। सपना सोनी ने भी सुखदेव की तीसरी बीवी होने का दावा किया है। हालाँकि, सपना के साथ सुखदेव ने औपचारिक विवाह नहीं किया था और दोनों के बीच ‘लिव इन’ रिलेशशिप था। घटना के समय सपना सोनी घर में मौजूद थीं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब शीला शेखावत और सपना सोनी के बीच तकरार शुरू हो चुकी है।

अलग-अलग बयानों के साथ सपना सोनी और शीला शेखावत मीडिया के सामने भी आ चुकी हैं। हालाँकि, शकुंतला चौधरी ने पत्रकारों से दूरी बना रखी है। वहीं एक इंटरव्यू में सपना सोनी ने कहा कि उन्हें न्याय के अलावा और कुछ नहीं चाहिए। एक इंटरव्यू में सपना सोनी ने कहा कि उन्हें नौकरी और मुआवजा नहीं बल्कि न्याय चाहिए। सपना ने इसी इंटरव्यू में आगे कहा, “सुखदेव जी इतना कुछ तो हमारे लिए छोड़ कर गए हैं।”

सपना ने इसी इंटरव्यू में आगे कहा कि उनको कोई कुछ भी समझे पर उनका रिश्ता उन्हें (सुखदेव सिंह) को पता था। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर वो कमा कर खा सकती है। इसी बयान में सपना ने यह भी कहा कि शीला शेखावत ही अकेले सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की पत्नी होने का दावा कर रहीं हैं जो सही नहीं है। सपना ने शीला शेखवात का जिक्र करते हुए यह भी कहा कि कागजातों में शकुंतला चौधरी बतौर सुखदेव सिंह की पत्नी दर्ज हैं।

NDTV को दिए गए इसी इंटरव्यू में सपना ने आगे दावा किया है कि पूरे राजपूत समाज को ये पता है कि वो सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की तीसरी बीवी हैं। उन्होंने कहा कि समाज के लोग बिरादरी की इज्जत की दुहाई दे कर इस मामले पर खुल कर बात नहीं कर रहे हैं। सपना का यह भी कहना है कि फ़िलहाल शकुंतला चौधरी के पास खाने के लिए रोटी भी नसीब नहीं है। साथ ही उन्होंने बताया कि वो इस मामले में न तो पैसा चाहती हैं और न ही राजनीति। उनका कहना है कि जिसे नाम, पैसे और राजनीति की शौक हो वही झूठ बोले।

सुखदेव से अपना 11 साल पुराना रिश्ता बताते हुए सपना चौधरी ने आगे बताया कि मामले में बाहर वाले ही नहीं बल्कि सुखदेव सिंह गोगामेड़ी के घर वाले भी राजनीति कर रहे हैं। सपना ने बताया कि सुखदेव से शादी के बाद शकुंतला चौधरी के कोई संतान नहीं है। वहीं शीला शेखावत के 2 और खुद सपना के 1 बेटा है। साथ ही शकुंतला की दिमागी हालत भी उन्होंने सही नहीं बताई। सपना ने अपने और शकुंतला के भविष्य को ले कर भी चिंता जताई। सपना ने खुद को एक आम लड़की बताते हुए लोगों से सुखदेव सिंह की 3 बीवियों का मजाक न उड़ाने की भी अपील की।

ये फैसला सिर्फ कानूनी नहीं, आशा की किरण है: 370 पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बोले PM मोदी, दिया नया जम्मू-कश्मीर का स्लोगन

आर्टिकल 370 पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए कहा जम्मू-कश्मीर के लोगों को बेहतर भविष्य का आश्वासन दिया। उन्होंने इस फैसले को आशा की किरण बताया।

पीएम मोदी ने ट्वीट में कहा, “अनुच्छेद 370 को निरस्त करने पर आज का सुप्रीम कोर्ट का फैसला ऐतिहासिक है। ये 5 अगस्त 2019 को भारत की संसद द्वारा लिए गए फैसले को संवैधानिक रूप से बरकरार रखता है। यह जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में हमारी बहनों और भाइयों के लिए आशा, प्रगति और एकता की एक शानदार घोषणा है। कोर्ट ने अपने गहन ज्ञान से, एकता के मूल सार को मजबूत किया है। सुप्रीम कोर्ट को हम भारतीय होने के नाते बाकी सब से ऊपर प्रिय मानते हैं और संजोते हैं।”

उन्होंने लिखा, “मैं जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोगों को आश्वस्त करना चाहता हूँ कि आपके सपनों को पूरा करने के लिए हमारी प्रतिबद्धता अटूट है। हम यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि प्रगति का लाभ न केवल आप तक पहुँचे, बल्कि इसका लाभ हमारे समाज के सबसे कमजोर और हाशिए पर रहने वाले वर्गों तक भी पहुँचे, जो अनुच्छेद 370 के कारण पीड़ित थे।”

प्रधानमंत्री ने अपने ट्वीट में ‘नया जम्मू-कश्मीर’ हैशटैग के साथ लिखा, “आज का फैसला सिर्फ कानूनी फैसला नहीं है; यह आशा की किरण है, उज्जवल भविष्य का वादा है और एक मजबूत, अधिक एकजुट भारत के निर्माण के हमारे सामूहिक संकल्प का प्रमाण है।”

बता दें कि जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर आज (11 दिसंबर 2023) सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। 5 जजों की संविधान पीठ की अध्यक्षता करने वाले मुख्य न्यायाधीश चंद्रजूड़ ने बताया कि 5 जजों की बेंच ने तीन अलग-अलग फैसले लिए हैं, लेकिन उनका निष्कर्ष एक ही है।

फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 370 को हटाने को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ताओं की दलीलें खारिज कर दीं। कहा गया कि जम्मू-कश्मी भारत का अभिन्न अंग है। ऐसे में नियम है कि केंद्र राष्ट्रपति शासन के तहत राज्य सरकार की शक्ति का प्रयोग कर सकता है और संसद/राष्ट्रपति उद्घोषणा के तहत राज्य की विधायी शक्तियों का प्रयोग कर सकता है।