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झारखंड के रोजगार मंत्री के बेटे को मिली कोर्ट में चपरासी की नौकरी, भतीजा का नाम भी है लिस्ट में

झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार में श्रम और रोजगार मंत्री सत्यानन्द भोक्ता के बेटे मुकेश भोक्ता को एक कोर्ट में चपरासी की नौकरी मिली है। उनके भतीजे रामदेव भोक्ता का नाम अभी इसी नौकरी के लिए वेटिंग लिस्ट में रखा गया है।

जानकारी के अनुसार, झारखंड के चतरा सिविल कोर्ट में चपरासी, कोषागार प्रबन्धक, दफ्तरी और चौकीदार जैसे पदों के लिए अगस्त 2023 में भर्ती निकाली गई थी। झारखंड सरकार में मंत्री सत्यानन्द भोक्ता के पुत्र मुकेश भोक्ता और भतीजे रामदेव भोक्ता ने भी इसमें आवेदन किया था

इन पदों के लिए आवदेन ऑफलाइन तरीके से किए गए थे और अभ्यर्थियों को अपना आवेदन प्रभारी न्यायाधीश, व्यवहार न्यायालय को भेजना था। इसके पश्चात इसमें से अभ्यर्थियों का साक्षात्कार किया गया और सफल अभ्यर्थियों की अंतिम सूची तैयार की गई। यह साक्षात्कार जिला चयन समिति के माध्यम से किए गए थे।

अब इसकी अंतिम सूची में हेमंत सोरेन सरकार में मंत्री सत्यानंद भोक्ता के बेटे मुकेश भोक्ता और प्रतीक्षारत अभ्यर्थियों की सूची में उनके भतीजे रामदेव भोक्ता का नाम है। मुकेश भोक्ता का नाम इस सूची में 13वें स्थान पर है। भतीजे रामदेव भोक्ता का नाम प्रतीक्षारत अभ्यर्थियों की सूची में 11वें स्थान पर है।

चयनित अभ्यर्थियों की सूची में मुकेश भोक्ता का नाम
चयनित अभ्यर्थियों की सूची में मुकेश भोक्ता का नाम

मुकेश भोक्ता के चपरासी की नौकरी लेने पर अब कई लोग प्रश्न भी उठा रहे हैं। हालाँकि, मुकेश का कहना है कि उनके पिता भले ही राजनीति करते हैं लेकिन वह यह नौकरी करेंगे और उनके पिता भी उन्हें यह करने से रोक नहीं सकेंगे।

मुकेश का कहना है कि उनके पिता मंत्री हैं क्योंकि उन्हें जनता ने चुना है और वह चपरासी की नौकरी इसलिए करेंगे क्योंकि उन्हें यह मिली है। मुकेश के पिता सत्यानन्द भोक्ता चतरा सीट से ही राजद के विधायक हैं और हेमंत सोरेन की गठबंधन सरकार में मंत्री हैं। सत्यानंद पहले भाजपा में थे लेकिन बाद में वह दल-बदल कर राजद में आ गए थे।

हिन्दू महिला का बच्चा पैदा होते ही बेचा मुस्लिम नेता को: ‘डॉक्टर’ अकरम और हफीजुर्रहमान गिरफ्तार, अस्पताल पर लगा ताला

उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में एक निजी अस्पताल के अंदर एक नवजात हिन्दू बच्चे को मुस्लिम के हाथों बेचे जाने का मामला सामने आया है। 26 नवंबर 2023 को बच्चे की माँ की तहरीर पर पुलिस ने अकरम जमाल और हफीजुर्रहमान नाम के 2 ‘झोलाछाप’ डॉक्टरों के खिलाफ केस दर्ज किया था। दोनों पर आरोप था कि उन्होंने पीड़िता के बच्चे को निसार नाम के सभासद को बेच दिया था। अपनी इस करतूत को छिपाने के लिए दोनों ने पीड़िता को बताया कि उनका बच्चा जन्म के 24 घंटे बाद मर गया। पुलिस ने दोनों आरोपित डॉक्टरों को गिरफ्तार कर लिया है। जाँच के दौरान अकरम जमाल का अस्पताल अवैध निकला जिसे सील कर दिया गया है।

यह मामला बलरामपुर जिले के थानाक्षेत्र पचपेड़वा का है। यहाँ की रहने वाली पुष्पा देवी ने 26 नवंबर 2023 को पुलिस में FIR दर्ज करवाई। इस FIR में उन्होंने बताया कि 1 माह पहले जब वो गर्भवती थीं तब डिलीवरी के लिए पचपेड़वा स्थित बलरामपुर मिशन अस्पताल गई थीं। यहाँ पुष्पा की मुलाक़ात डॉ अकरम जमाल से हुई। अकरम जमाल ने पड़ोसी जिले सिद्धार्थनगर के बढ़नी इलाके में रूबी नर्सिंग होम चलाने वाले डॉ हफीजुर्रहमान को बुला कर पीड़िता का बच्चा ऑपरेशन से पैदा करवाया। अस्पताल में पीड़िता लगभग 1 हफ्ते रही।

पीड़िता का आरोप है कि अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान आरोपितों ने उनके बच्चे को किसी के हाथों बेच दिया था। पुष्पा के अनुसार जब उन्होंने अपना बच्चा माँगा तो वो लोग टाल मटोल करने लगे। ज्यादा पूछताछ की तो दोनों डॉक्टरों ने पुष्पा से बताया कि उनका नवजात बच्चा 24 घंटे में मर गया था जिसको दफना दिया गया है। पुष्पा ने इस मामले की शिकायत पुलिस में की। जिसके बाद पुलिस ने IPC की धारा 311 के तहत केस को दर्ज करके डॉ हफीजुर्रहमान और अकरम जमाल को गिरफ्तार कर लिया। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जाँच के दौरान बच्चा बढ़नी के वार्ड नंबर 2 सभासद निसार के पास बरामद हुआ। बच्चे को उसकी माँ को सुपुर्द कर दिया गया है। मामले में अपना नाम सामने आते ही बच्चा खरीदने वाला निसार फरार हो कर नेपाल चला गया। पुलिस का दावा है कि जल्द ही उसको गिरफ्तार कर लिया जाएगा। आरोपित के रिश्तेदार नेपाल के कृष्णानगर इलाके में रहते हैं।

निसार लोगों को बैंकों का लोन आदि दिलाने का काम करता है। पुलिस ने पूछताछ के लिए एक बैंक अधिकारी को भी बुलवाया है। वहीं मामला संज्ञान में आते ही स्वास्थ्य विभाग ने डॉ अकरम जमाल के अस्पताल की जाँच की। जाँच में बलरामपुर मिशन अस्पताल अवैध तौर पर चलता पाया गया। बुधवार (29 नवंबर 2023) को प्रशासन ने अस्पताल को सील कर दिया है।

बहुतेरे MP निकम्मे, फिर भी 2024 में अपना ही रिकॉर्ड तोड़ सकती है BJP: जानिए कैसे और गहरा हुआ मोदी मैजिक

बिहार का एक संसदीय क्षेत्र है- मधुबनी। BJP के अशोक यादव यहाँ से लोकसभा सांसद हैं। पहले उनके पिता हुकुमदेव नारायण यादव सांसद हुआ करते थे। जीवन भर हुकुमदेव अपनी गरीब पृष्ठभूमि की मार्केटिंग करते रहे और उनका परिवार समृद्ध होता रहा। लेकिन बाप-बेटे मिलकर भी मधुबनी शहर तक को नरकीय हालात से बाहर न निकाल सके।

मधुबनी से ही सटा है- दरभंगा। यहाँ से बीजेपी के सांसद सामान्य पृष्ठभूमि से आने वाले गोपाल जी ठाकुर हैं। एक बार विधायक बनने के बाद ठाकुर राजनीतिक बियाबान में चले गए थे। कीर्ति आजाद की बगावत ने उनके लिए मौका पैदा किया और वे संसद पहुँच गए। पर दरभंगा के दिन नहीं बदले। पार्टी के भीतर के ही लोग कहते हैं कि कितना भी खा लें उनका (ठाकुर जी)पेट नहीं भरता। पिछले 5 साल की उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि उन्हें जो भी गर्दन मिली, उसमें उन्होंने मखान की माला को लाद दिया।

मधुबनी जिले का ही एक संसदीय क्षेत्र है- झंझारपुर। यहाँ से जदयू के सांसद हैं- रामप्रीत मंडल। यह दूसरी बात है कि मंडल की ‘अति सक्रियता’ के कारण झंझारपुर के लोगों को भी अपने सांसद का नाम याद नहीं रहता है।

2019 में ये सभी मोदी के नाम पर जीते। लेकिन जीत के बाद इन्होंने अपने कर्मों से ‘अकर्मण्यता’ की नई गाथा लिखने का काम किया। ऐसा करने वाले केवल यही तीन सांसद नहीं हैं। ऐसा भी नहीं है कि ऐसे सासंद केवल बीजेपी में ही हैं। निशिकांत दुबे जैसे बहुत कम नाम हैं जो अपने संसदीय क्षेत्र में न केवल विकास योजनाएँ लेकर गए, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया कि वह जमीन पर समय से उतर भी जाए।

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इन सांसदों की अकर्मण्यता 2024 के आम चुनावों में बीजेपी को भारी पड़ने वाली है। इसका जवाब है- नहीं। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के चुनावी नतीजे बताते हैं कि इस अकर्मण्यता पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जादू भारी है। यह जादू लगातार मजबूत होता जा रहा है। यह जादू बीजेपी को 2024 में 2019 से भी बड़ा जनादेश दे सकती है।

PM मोदी के इस जादू का साल दर साल मजबूत होने का कारण वे लोककल्याणकारी योजनाएँ हैं, जिनका फायदा आम लोगों को सीधे बैंक खाते या घर की रसोई में दिखता है। साथ ही इस समय बीजेपी एकमात्र ऐसी पार्टी है जो चुनाव लड़ना भी जानती है और उसे जीतना भी।

2014 के आम चुनावों के बाद से बीजेपी की इस बात को लेकर लगातार प्रशंसा होती रही है कि उसकी मशीनरी हमेशा चुनाव लड़ने को तैयार रहती है। एक चुनाव जीतने के बाद उसके नेता जश्न मनाने को ठहरते नहीं, बल्कि दूसरे मोर्चे पर निकल पड़ते हैं। प्रशंसा इस बात को लेकर भी होती है कि स्थानीय चुनावों तक में बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व पूरी ताकत झोंक देता है और नतीजों की चिंता किए बिना चुनाव को किसी युद्ध की तरह लड़ता है।

लेकिन इन प्रशंसाओं के बीच बीजेपी के उन साहसिक फैसलों का जिक्र कम ही होता है, जिसे लेने में किसी भी राजनीतिक दल के साँस फूल जाए। मसलन, 2018 के दिल्ली नगर निगम चुनावों में पार्टी ने सभी पार्षदों का टिकट काट दिया था। इन पार्षदों के पारिवारिक सदस्यों को भी टिकट देने से इनकार कर दिया था। 2018 के विधानसभा चुनाव में बुरी तरह हारने के बाद छत्तीसगढ़ में लोकसभा चुनाव के दौरान सभी सांसदों के टिकट काट दिए थे। इनमें इस राज्य के पार्टी के सबसे बड़े नेता और लगातार तीन बार मुख्यमंत्री रहे रमन सिंह के सांसद बेटे भी शामिल थे। 2022 के गुजरात विधानसभा चुनाव के समय पार्टी ने कई हैवीवेट सहित 44 विधायकों को बेटिकट कर दिया था। इस बार मध्य प्रदेश और राजस्थान विधानसभा चुनाव में न केवल सांसदों, बल्कि मोदी मंत्रिमंडल के भी कुछ सदस्यों को उतारा गया।

साहसिक फैसले लेने वाली आज की बीजेपी अपने ही भूलों से सीखती भी दिखती है। सितंबर 2023 में ऑपइंडिया ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी कि कैसे तेलंगाना में लगातार आगे बढ़ रही बीजेपी के अचानक से पाँव उखड़ने लगे हैं और उसकी जगह को कॉन्ग्रेस भर रही है। 3 दिसंबर 2023 को आए तेलंगाना विधानसभा चुनाव के नतीजे भी बताते हैं कि बीजेपी ने इस राज्य में कई बड़ी रणनीतिक भूलें की। लेकिन गौर करने वाली बात यह है कि बीजेपी नेतृत्व को भी इस भूल का एहसास शायद हो चुका था। यही कारण है कि जिन परिस्थितियों के कारण उसने तेलंगाना से बंदी संजय को हटा लिया था, ठीक उसी तरह की परिस्थितियाँ तमिलनाडु में बनने के बाद भी के अन्नामलई को नहीं हटाया।

पर चुनाव केवल फैसलों और रणनीतियों से ही नहीं जीते जाते। सामान्य वोटरों को मतदान केंद्र तक लाने के लिए जरूरी होता है- उम्मीद। अच्छे दिनों की उम्मीद। यह उम्मीद चेहरा पैदा करता है। वो योजनाएँ पैदा करती हैं जिसका लाभ आम लोगों तक सीधे पहुँचता है और वे अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में उससे बदलाव महसूस करते हैं। भविष्य में और बेहतरी के सपने देखते हैं।

बीजेपी ने उम्मीद जगाने वाला चेहरा 13 सितंबर 2013 को ही खोज लिया था, जब उसने गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया। मोदी ने 2014 का आम चुनाव सामान्य लोगों के मन ‘अच्छे दिन आने वाले हैं’ की उम्मीद जगाकर जीता था। प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने अच्छे दिन लाने वाली योजनाओं की डिलिवरी की और इसका नतीजा 2019 के आम चुनावों में दिखा जब बीजेपी ने अकेले 303 सीटें जीती थी।

गरीबों को बैंकिंग सिस्टम में शामिल करने के लिए मोदी सरकार ‘जन धन योजना’ लेकर आई। जीरो बैलेंस पर यह अकाउंट खुलता है। चेक बुक, पासबुक, दुर्घटना बीमा के अलावा ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी की सुविधा मिलती है। ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी के कारण जनधन खाता धारक बैलेंस नहीं रहने पर भी अपने अकाउंट से 10 हजार रुपए निकाल सकते हैं। इस योजना से अब तक करीब 51 करोड़ लोग लाभ उठा चुके हैं। कोविड संकट जैसे समय में यह योजना गरीबों तक सीधे पैसे पहुँचाने के काम भी आई।

कोविड महामारी के दौरान फ्री राशन यानी ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना’ केंद्र सरकार ने शुरू की। इसे हाल ही में 2028 तक बढ़ाने का फैसला किया गया है। 80 करोड़ से अधिक लोगों को हर महीने इस योजना का लाभ मिलता है। इसके अलावा गरीबों की रसोई में गैस सिलिंडर पहुँचाने के लिए ‘उज्ज्वला योजना’ लाई गई। इस योजना में बीपीएल कार्ड वालों को मु्फ्त गैस कनेक्शन मिलता है। सब्सिडी पर एक साल में 12 गैस सिलिंडर मिलते हैं। सब्सिडी सीधे बैंक खाते में जमा होती है। 1 मार्च 2023 तक उज्ज्वला योजना का 9.60 करोड़ लोगों को लाभ मिल चुका है। अगले तीन साल में इस योजना के तहत 75 लाख नए कनेक्शन जारी करने का लक्ष्य है।

देश के छोटे, लघु और सीमांत किसानों को केंद्र सरकार ‘प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना’ के तहत सालाना 6 हजार रुपए की आर्थिक मदद देती है। करीब आठ करोड़ किसानों को इसका सीधा लाभ मिलता है। इसी तरह श्रमिकों के लिए ‘पीएम विश्वकर्मा योजना’ लाई गई है। 13000 करोड़ रुपए इस पर खर्च होंगे।

इसके अलावा 10 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण हो या फिर प्रधानमंत्री आवास योजना। घर-घर बिजली और पानी पहुँचाने की योजना हो या फिर गरीबों के इलाज के लिए लाई गई आयुष्मान भारत। या फिर प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना… बीते 9 साल में मोदी सरकार ने जितनी भी जनकल्याणकारी योजनाएँ शुरू की हैं, उसका सीधा लाभ आम लोगों को मिल रहा।

2014 में उम्मीद जगाकर आए मोदी को साल दर साल मजबूत बनाने वाली ये योजनाएँ ही हैं, क्योंकि इसका असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी में दिख रहा है। उनका जीवन सरल हो रहा है। वे मुख्यधारा में शामिल हो रहे हैं। इन योजनाओं के बलबूते मोदी ने एक ऐसा वोट बैंक तैयार किया है, जिसके सामने जातीय/क्षेत्रीय/ मजहबी समीकरण दम तोड़ देते हैं। साल दर साल इन योजनाओं का असर बढ़ता जा रहा है। इसके कारण मोदी का जादू भी और असरदार होते जा रहा है। ऐसे में जब लोग वोट डालने जाते हैं तो वे अकमर्णय सांसदों को भूल जाते हैं, क्योंकि उनके सामने मोदी का चेहरा रहता है। वे उन राज्यों में भी बीजेपी को सत्ता दे देते हैं, जहाँ राजनीतिक पंडित उसे मुश्किल मुकाबले में बता रहे होते हैं या फिर बीजेपी के लिए संभावना ही नहीं देखते।

मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के नतीजे भी उम्मीदों का ही जनादेश हैं। ये जनादेश जिस तरह से आया है वह यह भी बताता है कि 2024 के आम चुनावों से कुछ महीने पहले मतदाताओं पर PM मोदी का प्रभाव अब तक के सर्वोच्च स्तर पर है।

सनातन धर्म का अपमान कॉन्ग्रेस को ले डूबा… अपनी ही पार्टी पर बरसे आचार्य प्रमोद कृष्णम, पूर्व क्रिकेटर वेंकटेश प्रसाद बोले – सनातन को गाली देने का नतीजा

देश के पाँच राज्यों में विधानसभा चुनाव 2023 के नतीजे आने शुरू हो गए हैं। रविवार (3 दिसंबर, 2023) को चार राज्यों के चुनाव नतीजों जारी किए जा रहे हैं। मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के रुझानों की मानें तो तीनों ही राज्यों में भाजपा सत्ता में आ रही है। इन चुनाव परिणामों के साथ ही कॉन्ग्रेस पार्टी को याद दिलाई जा रही है कि कैसे पार्टी ने सनातन धर्म का अपमान किया था, सनातन का अपमान करने वालों का जम कर साथ दिया।

मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कॉन्ग्रेस के पिछड़ने पर पार्टी नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा, “सनातन (धर्म) का विरोध करने से पार्टी डूब गई है। यह सनातन (धर्म) का विरोध करने का अभिशाप है।”

उन्होंने कहा, “भारत भावनाओं का देश है और सनातन का विरोध हमें ले डूबा। जातिवादी राजनीति को इस देश ने कभी स्वीकार नहीं किया है। 6 सितंबर, 1990 का राजीव गाँधी जी का भाषण हैं संसद में वो सुन लीजिएगा। देश अगर जातिवादी होता तो विश्वनाथ प्रताप सिंह को गाँव-गाँव पूजा जाता। विश्वनाथ प्रताप सिंह जी जब मंडल लाए थे उनसे बड़ा कोई जातिवाद का कार्ड खेलने वाला नहीं था और न हुआ, लेकिन विश्वनाथ प्रताप सिंह जी की हालत इस देश में क्या हुई ये सबके सामने है। इसीलिए, जातिवादी राजनीति और सनातन का विरोध ये हमें ले डूबे।”

उन्होंने आगे कहा, “मुझे लगता है ये कॉन्ग्रेस की हार नहीं है बल्कि वामपंथ की हार है। कुछ दिनों से कॉन्ग्रेस में कुछ ऐसे नेता घुस आए थे और घुस आए हैं और उनका बड़ा प्रभुत्व हैं। कॉन्ग्रेस के सभी फैसलों में उनकी बड़ी भूमिका है। और वो कुछ नेता कॉन्ग्रेस को महात्मा गाँधी के रास्ते से हटाकर वामपंथ के रास्ते पर ले जाना चाहते हैं और ले जा रहे हैं। जो कॉन्ग्रेस पार्टी महात्मा गाँधी के रास्ते पर चलकर यहाँ तक आई है।”

आचार्य प्रमोद कृष्णम ने आगे कहा, “महात्मा गाँधी जी के सभा की शुरुआत रघुपति राघव राजा राम, पतित पावन सीताराम से हुई थी। आज उस कॉन्ग्रेस को सनातन के विरोधी पार्टी के रूप में देखा जा रहा है। ये दुर्भाग्य है। कॉन्ग्रेस पार्टी ने अगर ऐसे नेताओं को नहीं निकाला तो पार्टी की हालत जल्द ही AIMIM जैसी हो जाएगी। कॉन्ग्रेस पार्टी के नेतृत्व को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।”

उन्होंने आगे कहा, “कॉन्ग्रेस को महात्मा गाँधी, पंडित नेहरू, इंदिरा गाँधी राजीव गाँधी की कॉन्ग्रेस रहने दिया जाए। पार्टी को महात्मा गाँधी के रास्ते से हटाकर मार्क्स के रास्ते पर ले जाने वाले जो नेता है। इनको बाहर का रास्ता दिखाना चाहिए।” आचार्य प्रमोद ने राजस्थान और मध्य प्रदेश की हार पर कहा, “इस हार का पूरा विश्लेषण होगा। फिलहाल तो इन राज्यों के पार्टी प्रभारियों को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए। अगर उनमें जरा सभी शर्म हो। तो खुद ऐसा करना चाहिए।”

वहीं पूर्व क्रिकेटर वेंकटेश प्रसाद ने भी सनातन धर्म का विरोध करने वालों पर कॉन्ग्रेस को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने अपने एक्स हैंडल पर ट्वीट किया, “सनातन धर्म को गालियाँ देने वालों का बुरा नतीजा भुगतना पक्का था। प्रचंड जीत के लिए भाजपा को बहुत-बहुत बधाई। प्रधानमंत्री के अद्भुत नेतृत्व का एक और प्रमाण नरेंद्र मोदी जी और अमित शाह और जमीनी स्तर पर पार्टी कैडर के शानदार काम का नतीजा है ये चुनाव परिणाम।”

हिंदी बोलने वाले अनपढ़, भारत के लिए कोढ़, महिलाएँ बिकाऊ: जीत रही भाजपा, रो-रो कर गाली दे रहे लिबरल-वामपंथी-कॉन्ग्रेसी

भारतीय जनता पार्टी मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में शानदार जीत की तरफ बढ़ रही है। जहाँ उसने राजस्थान-छतीसगढ़ में कॉन्ग्रेस से सत्ता छीनने में सफलता पाई है तो वहीं मध्य प्रदेश में वह प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में दुबारा लौट रही है।

जनता का यह जनादेश अब लिबरलों और कॉन्ग्रेस समर्थकों को बर्दाश्त नहीं हो रहा है। कुछ समर्थक जहाँ उत्तर भारतीयों को अनपढ़ बता रहे हैं तो कुछ कॉन्ग्रेस नेतृत्व और कुछ राहुल गाँधी को कोस रहे हैं। चुनाव ना जीत पाने की यह खीझ अब एक्स (पहले ट्विटर) पर निकल रही है।

लिबरल पत्रकार सबा नकवी ने कॉन्ग्रेस के हारने का कारण मध्य प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की हिंदुत्व राजनीति को बता दिया। उनका कहना है कि लोगों ने असल हिन्दुत्व वालों को चुन लिया है। उन्हीं के एक चेले ने कहा कि अब कमलनाथ को बागेश्वर बाबा के पास जाना चाहिए।

एक और कॉन्ग्रेस समर्थक ने कहा है, “अक्सर लोग नकली के ऊपर असली चुनते हैं।” उनका निशाना कमलनाथ की तरफ था, जिन्होंने बीते दिनों हिन्दुत्व के समर्थन में कुछ टिप्पणियाँ की थी। एक अन्य समर्थक ने कहा कि राज्य में लोग कॉन्ग्रेस के साथ ही कमलनाथ के हारने की कामना कर रहे हैं।

एक अन्य यूजर ने कहा कि मध्य प्रदेश में कुछ नया नहीं हुआ है, महिलाओं ने पैसे और ‘बैड बॉय शिवराज को कमलनाथ के आगे चुना है।

उत्तर भारत के इन राज्यों में भाजपा की जीत पर फिर से यहाँ के लोगों को दोषी ठहराने का काम चालू हो चुका है। एक अन्य यूजर बता दिया कि यहाँ दो भारत हैं, जिनमें से एक पढ़ा लिखा दक्षिण भारत और एक बीमारू राज्यों वाला उत्तर भारत है।

एक कॉन्ग्रेस समर्थक ने कमलनाथ और दिग्विजय सिंह को मूर्ख बता दिया, उसने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड्गे से अपील की कि इन्हें हटाया जाए।

तीन राज्यों में भाजपा की जीत पर एक फिलिस्तीनी समर्थक ने हिंदीभाषियों को मूर्ख बता दिया।

एक अन्य यूजर ने भी हिंदीभाषियों को कोसा।

प्रमोद श्रीवास्तव नाम एक यूजर ने ‘काऊ बेल्ट’ (गाय पट्टी, हिंदी बोलने वाले लोगों का क्षेत्र) को कोसना चालू कर दिया। भाजपा को जिताने पर वह इन राज्यों को अनपढ़ और धर्मांध बताने लगा।

ताजा आँकड़ों के अनुसार, भाजपा मध्य प्रदेश 230 में से 162, छतीसगढ़ में 90 में से 53 और राजस्थान में 199 में से 111 सीट जीत रही है।

8 माह की गर्भवती महिला, 22 बार घोंपा चाकू: पेट में पल रहे बच्चे की भी मौत, फिलिस्तीनी भाई-अब्बा गिरफ्तार

इजरायल में एक फिलिस्तीन मूल की गर्भवती महिला की चाकू मार कर हत्या किए जाने का मामला सामने आया है। इस हमले में 20 वर्षीया महिला के पेट में पल रहे बच्चे की भी मौत हो गई। पुलिस इस मामले में संदेह के आधार पर मृतका के अब्बा और भाई को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। मृतका का नाम अयाह अबू हजाइज था। घटना का CCTV फुटेज भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है जिसमें हमले के दौरान अयाह अपने बचाव के लिए जूझती दिख रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना इजरायल के लोद शहर में 30 नवंबर 2023 को घटी। वहाँ गुरुवार को फिलिस्तीन मूल की मुस्लिम महिला अपने 2 बच्चों को स्कूल छोड़ने जा रही थी। इसी दौरान कार सवार एक युवक नीचे उतरा और महिला पर ताबड़तोड़ चाकू बरसाना शुरू कर दिया। अयाह ने अपने बचाव की पूरी कोशिश की लेकिन हमलावर ने उन्हें कई चाकू मारे जिससे वो घायल हो कर जमीन पर गिर पड़ीं। बाद में हमलावर पीड़िता को लहूलुहान हालत में सड़क पर ही छोड़ कर कार से फरार हो गया।

इस घटना के वायरल हुए वीडियो में देख सकते हैं कि मृतका पर पीछे से वार किया गया। इसके बाद मृतका के बच्चे और आसपास के लोग घटनास्थल से भागते दिखाई दिए। अयाह को कुल 22 बार चाकू घोंपे गए। स्थानीय लोगों ने गंभीर हालत में महिला को अस्पताल पहुँचाया। लेकिन वहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मेडिकल जाँच के दौरान पता चला कि मृतका 8 माह की गर्भवती थी। इस हमले में उसके पेट में पल रहे बच्चे की भी मौत हो गई।

पुलिस ने इसे पारिवारिक कलह के कारण की गई हत्या बताया है। फिलहाल मृतका का भाई और अब्बा को गिरफ्तार किया गया है। आगे पुलिस को हमलावर की तलाश है। इजरायल के अधिकारियों ने इस हमले को आतंकी वारदात की तरह बताया है। अब्राहम इनिशिएटिव द्वारा जारी एक आँकड़े के मुताबिक अयाह की हत्या के बाद साल 2023 में इजरायल में मरने वाले अरब के नागरिकों की तादाद 222 हो गई है। ये हत्याएँ अलग-अलग समय पर अलग-अलग लोगों द्वारा विभिन्न कारणों से हुईं थीं।

प्रचंड जीत के जश्न में भी भोपाल गैस त्रासदी को नहीं भूले CM शिवराज सिंह चौहान: श्रद्धांजलि अर्पित करने पहुँचे, कहा – प्रकृति से न करें खिलवाड़

मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव के परिणाम भाजपा के पक्ष में आ रहे हैं और पार्टी एक बड़ी जीत की तरफ बढ़ रही है, लेकिन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह 1984 की भोपाल गैस त्रासदी में जान गँवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित करना नहीं भूले। रविवार (3 दिसंबर, 2023) को देश में 4 राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजों का ऐलान किया जा रहा है।

मतों की गिनती के रुझानों में मध्य प्रदेश और राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी को बहुमत मिलता दिख रहा है। फाइनल नतीजे से पहले सीएम चौहान का पहला बयान भोपाल गैस पीड़ितों को लेकर आया है। ये इस बात की ताकीद करता है कि वो राज्य की जनता को प्रभावित करने वाले मुद्दों से गहरे जुड़े हैं। खबर लिखे जाने तक राज्य में भाजपा जहाँ 161 सीटें जीतती हुई दिख रही है, वहीं कॉन्ग्रेस पार्टी के खाते में महज 67 सीटें ही जाती हुई दिख रही हैं।

एक तरफ जहाँ उनके समर्थक जश्न में डूबे हुए थे, शिवराज सिंह चौहान भोपाल गैस त्रासदी के श्रद्धांजलि कार्यक्रम में पहुँचे हुए थे। उन्हें याद रहा कि राज्य में इस हादसे से लोगों ने भयावह यातना झेली और अब भी झेल ही रहे हैं। ये दिखाता है कि एक सीएम के तौर पर वो जनता के दर्द को अपना दर्द समझते हैं।

यही वजह हैं कि राज्य की जनता उनको सत्ता की कुर्सी पर काबिज देखना चाहती हैं। श्रद्धांजलि अर्पित करने के दौरान बोली गई उनकी बातें साबित करती हैं कि उन्हें जनता से दिली लगाव है। इस मौके पर सीएम शिवराज ने कहा, “आज भी जब वो 2 और 3 दिसंबर की दरमियानी रात याद आती है तो हम काँप उठते हैं। एमआईसी गैस के के रिसाव के कारण हजारों भाई बहन जिसमें हमारे छोटे-छोटे बच्चे शामिल थे उन्होंने अपनी जिंदगी खो दी और असमय काल के गाल में समा गए। भोपाल को वो दृश्य भूलता नहीं है।”

सीएम चौहान ने आगे कहा, “जब सड़कों पर अपनी जान बचाने अपने बच्चों को लेकर भाई-बहन दौड़ रहे थे। और वो भयानक दृश्य ऐसा था कि कई मवेशी-भैंसों के पेट फट गए थे। दौड़ते -दौड़ते कई लोग गिरे और हमेशा के लिए दुनिया छोड़ कर चले गए। मैं उन सब भाई-बहनों के चरणों में श्रद्धा सुमन अर्पित करता हूँ। लेकिन इस संकल्प के साथ कि फिर कोई शहर भोपाल न बने। ऐसी गैस ट्रेजडी फिर न दोहराई जाए। हम सब कुछ सोचना पड़ेगा।”

सीएम ने कहा, “केवल मध्य प्रदेश और देश की बात नहीं दुनिया को भी ये समझना होगा कि भौतिक प्रगति की अंधी चाह में हम प्रकृति के साथ ऐसा खिलवाड़ न करें कि प्रकृति हम को ही निगल ले। और इसलिए विकास और पर्यावरण में हमें संतुलन स्थापित करना पड़ेगा। ये धरती सबके लिए है। मनुष्यों के साथ कीट पंतगें, जीव-जन्तु, पशु-पक्षियों के लिए भी है। तो सबके लिए धरती सुरक्षित बने और आने वाली पीढ़ियों के रहने के लायक भी बने। ऐसे सारे प्रयास न कि हमको मध्य प्रदेश में बल्कि देश और दुनिया में सबको करने पड़ेंगे।”

उन्होंने कहा, “अभी दुबई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने धरती को बचाने के लिए जो आवश्यक कदम उठाने हैं उनका जिक्र किया था। भारत उस रास्ते पर चलेगा। मध्य प्रदेश भी हर संभव प्रयत्न करेगा कि पर्यावरण के साथ छेड़छाड़ न हो और आगे हम विकास को ऐसा संतुलित करें कि वो विकास हमारे लिए जानलेवा न बनें। मैं एक बार फिर जो नहीं रहे उनके चरणों में श्रद्धा के सुमन अर्पित करता हूँ जो हैं उनके कल्याण के काम हम करते रहेंगे और आगे फिर कोई ऐसी ट्रेजडी न हो इसके लिए हर संभव कोशिश करेंगे।”

बताते चलें कि भोपाल गैस त्रासदी दुनिया के इतिहास में सबसे बड़े हादसों में से एक के तौर पर दर्ज है। साल 1984 की 2 और 3 दिसंबर की रात को यूनियन कार्बाइड केमिकल फैक्ट्री से जानलेवा गैस मिथाइल आइसोसाइनेट (MIC) का रिसाव हुआ था। जिसने सोते हुए ही आधे भोपाल को लील लिया था।

‘लाल डायरी’ में पुलिस वालों के नाम, बुरी तरह पिटाई वाली धमकी: जानिए कौन हैं वो, जिसने तेलंगाना में कॉन्ग्रेस को जिताया, नतीजों से पहले ही भागे-भागे पहुँचे DGP

5 राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के बाद अब सिर्फ एक ही राज्य से कॉन्ग्रेस पार्टी के लिए अच्छी खबर आ रही है और वो है तेलंगाना। तेलंगाना में जीत के लिए 60 सीटों की आवश्यकता होती है, कॉन्ग्रेस 65 सीटें अपने नाम करती दिख रही हैं। ये सत्ताधारी BRS और मुख्यमंत्री KCR के लिए भी एक बड़ा झटका है। रेवंत रेड्डी के घर की सुरक्षा बढ़ा दी गई है, जो अगले मुख्यमंत्री माने जा रहे हैं। वो राज्य में कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं। पुलिस महानिदेशक (DGP) खुद उनसे मिलने उनके आवास पर पहुँचे और उन्हें जीत की बधाई दी।

रेवंत रेड्डी को लेकर कॉन्ग्रेस पार्टी के भीतर कुछ नेताओं में नाराज़गी थी, लेकिन 54 वर्षीय नेता ने इसके बावजूद अपनी स्टाइल से राज्य में पार्टी का चुनाव प्रचार सँभाला। जुलाई 2021 में उन्हें राज्य में कॉन्ग्रेस की कमान दी गई थी। पार्टी ने उन पर भरोसा जताया और उन्होंने बड़ी-बड़ी रैलियाँ भी की। कामारेड्डी विधानसभा क्षेत्र भी वो जीतते हुए दिख रहे हैं। वहीं कोदंगल से भी वो जीत रहे हैं। कामारेड्डी BRS का गढ़ माना जाता है, ऐसे में वहाँ केसीआर के लिए पार्टी की हार बेइज्जती के समान होगी।

रेवंत रेड्डी के खिलाफ एक बात जाती है कि उन्होंने 2017 में ही पार्टी ज्वाइन की है, उससे पहले वो TDP में हुआ करते थे। अखंड आंध्र प्रदेश में TDP का अच्छा प्रभाव था, लेकिन तेलंगाना में नहीं है। 2018 के विधानसभा चुनाव के बाद उपचुनावों और स्थानीय निकाय के चुनावों में हार के बाद कॉन्ग्रेस की स्थिति भी उस समय ख़राब थी। कई नेताओं ने रेवंत रेड्डी को ‘तानाशाह’ बता कर कॉन्ग्रेस छोड़ भी दिया था। मलकाजगिरी से सांसद रेवंत रेड्डी महबूबनगर से आते हैं।

अगस्त 2023 में रेवंत रेड्डी के खिलाफ पुलिस को धमकी देने को लेकर 3 थानों में FIR दर्ज की गई थी। उन्होंने पुलिस अधिकारियों पर सत्ताधारी दल BRS (पूर्व में TRS) के लिए काम करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि ऐसे पुलिस वालों की जम कर पिटाई होगी और एक लाल डायरी में उनका नाम नोट किया जा रहा है ताकि कॉन्ग्रेस की सरकार बनने पर उन पर कार्रवाई की जा सके। उन्होंने कहा था कि इन पुलिस अधिकारियों को सब कुछ सूद समेत लौटाया जाएगा।

उन पर किसान विरोधी बयान देने के भी आरोप लगे थे। उन्होंने कहा था कि किसानों को प्रतिदिन सिर्फ 3 घंटे की बिजली की ही ज़रूरत है। इस पर BRS ने ये कहते हुए हमला बोला था कि रेवंत रेड्डी किसानों को 24 घंटे पॉवर सप्लाई दिए जाने के खिलाफ हैं। एक बार उन्होंने KCR को चुनौती देते हुए कहा था कि अगर वो गजवेल से नहीं लड़ते हैं तो उन्हें न पुरुष समझा जाएगा न महिला। उनकी इस टिप्पणी को समलैंगिक विरोधी कमेंट के रूप में देखा गया था।

पाकिस्तान में बस पर बरसी ताबड़तोड़ गोलियाँ, 2 फौजी समेत 9 की मौत: पेशावर में एक और कट्टरपंथी मौलाना ‘अज्ञात गोली’ का शिकार

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के गिलगित बाल्टिस्टान इलाके में शनिवार (2 दिसंबर 2023) को एक बस पर ताबड़तोड़ गोलियाँ बरसाई गईं। घटना में 9 लोगों की मौत हो गई जबकि 26 घायल हो गए। मरने वालों में दो पाकिस्तानी फौजी भी थे। वहीं दूसरी ओर पेशावर के खैबर पख्तूनख्वा में भी एक कट्टरपंथी मौलाना की गोली मारकर हत्या कर दी गई।

खबरों के मुताबिक, जिस बस पर हमला हुआ वो गिलगित से रावलपिंडी जा रही थी तभी चिलास में शाम 6:30 बजे बस पर अंधाधुंध गोलीबारी हुई। इसके बाद बस ड्राइवर ने बस का नियंत्रण खो दिया और बस सामने से आ रहे ट्रक से टक्कर खा गई।

डिप्टी कमिश्नर आरिफ अहमद ने कहा कि हमले में मारे गए लोगों में से अब तक 5 की पहचान हो चुकी है। 26 घायलों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराकर इलाज करवाया जा रहा है। मरने वालों में 2 पाकिस्तानी फौजी भी थे। इसके अलावा घायलों में भी एक विशेष सुरक्षा ईकाई का कर्मी था।

बस में अधिकतर लोग कोहिस्तान, पेशावर, घीजर, चिलास, राउंडू, स्कर्दू, मनसेहरा और स्वाबी क्षेत्रों के थे। इसके अलावा एक या दो लोग सिंध से थे। बताया जा रहा है कि कई घायलों की हालत गंभीर बनी हुई इसलिए मृतकों की संख्या बढ़ सकती है।

कट्टरपंथी मौलाना शेर बहादुर की हत्या

बता दें कि एक ओर जहाँ गिलगित बाल्टिस्टान में बस पर गोलियाँ बरसाई गईं। वहीं पाकिस्तान के पेशावर में भी जैश-ए-मोहम्मद का समर्थक मौलाना किसी अज्ञात द्वारा मारा गया है। मौलाना की पहचान शेर बहादुर के तौर पर हुई है। पुलिस इस मामले को दर्ज करके मामले की जाँच कर रही है।

शेर बहादुर की एक वीडियो भी सामने आई है जिसमें उसके शरीर पर गोलियों के निशान साफ देखने को मिल रहे हैं। खबरों के मुताबिक शेर बहादुर की हत्या पेशावर के खैबर पख्तूनवा में कर दी गई। उसके अलावा जैश के एक और आतंकी यूनूस खान जो कि आतंकी संगठन के लिए भर्तियाँ करता था, उसे भी गोली मारी गई है।

RJD वालों का ‘शुभ संकेत’ कॉन्ग्रेस के लिए हो गया अशुभ: छत्तीसगढ़ में ज़िंदा मछली लेकर जश्न मनाने पहुँचे लालू की पार्टी के नेता, फिर हारने लगी कॉन्ग्रेस

छत्तीसगढ़ में सत्ताधारी कॉन्ग्रेस पार्टी बुरी तरह हार रही है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को खुद अपनी पाटन पर अपने ही भतीजे से कड़ी टक्कर का सामना करना पड़ा, जो भाजपा के उम्मीदवार हैं। चुनाव आयोग की वेबसाइट की मानें तो जहाँ राज्य में भाजपा 54 सीटों पर आगे चल रही है, वहीं कॉन्ग्रेस मात्र 33 सीटों पर आगे है। बहुमत के लिए 46 सीटों की आवश्यकता होती है। राज्य में किसी भी एग्जिट पोल ने भाजपा पर भरोसा नहीं जताया था, लेकिन हो रहा है इसका उलटा।

जब रविवार (3 दिसंबर, 2023) को जब सुबह-सुबह शुरुआती रुझान आ रहे थे, तब छत्तीसगढ़ में कॉन्ग्रेस को आगे दिखाया जा रहा था। उस दौरान ‘राष्ट्रीय जनता दल’ (RJD) के नेता अति-उत्साह में जश्न मनाने लगे। बता दें कि राजद लालू यादव की पार्टी है जो बिहार में सत्ता की साझीदार है। लालू यादव के बेटे तेजस्वी उप-मुख्यमंत्री हैं। RJD भी I.N.D.I. गठबंधन का हिस्सा है। कॉन्ग्रेस की साथी पार्टी है। ऐसे में उसका जश्न मनाना स्वाभाविक था।

इतना ही नहीं, राजद नेता पार्टी दफ्तर के सामने ज़िंदा मछलियाँ लेकर जश्न मनाने लगे। उनका कहना था कि मछलियाँ शुभ होती हैं। इसका एक वीडियो भी समाचार एजेंसी PTI ने डाला, जिसमें 3 राजद कार्यकर्ता एक ज़िंदा मछली को पकड़े हुए हैं और कह रहे हैं, “ये I.N.D.I. गठबंधन की जीत है। पाँचों राज्यों में हमलोग जीत रहे हैं, इसी शुभ संकेत के लिए मछली है। भूपेश बघेल के लिए ये शुभ संकेत है।” इसके बाद उन्होंने ज़िंदाबाद-ज़िंदाबाद के नारे भी लगाए।

इस दौरान राजद कार्यकर्ता एक-दूसरे को मिठाई खिलाते हुए भी दिखे। वहीं ताज़ा ट्रेंड्स कहते हैं कि 46.04% वोट शेयर के साथ भाजपा लीड कर रही है, वहीं कॉन्ग्रेस का वोट शेयर इससे 4% कम है। तीसरे नंबर पर बसपा है, जिसका वोट शेयर 2.36% है खबर लिखे जाने तक। हालाँकि, ये अंतिम आँकड़े नहीं हैं। वैसे, इन चुनाव परिणामों के बाद अब I.N.D.I. गठबंधन के भविष्य पर भी सवाल खड़ा हो गया। बता दें कि मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस ने सपा को सीटें नहीं दी थीं, वहीं अब अखिलेश यादव ने कॉन्ग्रेस पर निशाना साधा है।