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‘यहाँ मत निकालिए हार का गुस्सा’: संसद के शीतकालीन सत्र से पहले PM मोदी की विपक्ष को सलाह, जाएगी महुआ मोइत्रा की सदस्यता?

संसद का शीतकालीन सत्र आज से चालू हो रहा है। सत्र के चालू होने से पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मीडिया से बातचीत की है। उन्होंने अपने संबोधन में चार राज्यों के चुनावी नतीजों की चर्चा की और नए संसद भवन के विषय में बात की। यह सत्र नए संसद भवन में हो रहा है।

संसद का यह शीतकालीन सत्र सोमवार (4 दिसम्बर, 2023) से चालू होकर 22 दिसम्बर, 2023 तक चलेगा। इस बीच कई महत्वपूर्ण बिल पेश होंगे और बाकी विधायी कार्य होंगे। पहले दिन की कार्यवाही चालू होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद पहुँचे।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “अगर मैं वर्तमान चुनाव नतीजों के आधार कहूँ तो विपक्ष में बैठे साथियों के लिए यह सुनहरा मौका है, इस सत्र में पराजय का गुस्सा निकालने की योजना बनाने की बजाय इस पराजय से सीख कर के पिछले 9 वर्षों से नकारात्मकता की प्रवृत्ति को छोड़ कर इस सत्र में सकारात्मकता के साथ आगे बढ़ेंगे तो देश उनकी तरफ देखने का दृष्टिकोण बदलेगा। उनके लिए यहाँ से नए द्वार खुल सकते हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “अगर वो विपक्ष में हैं तो भी अच्छी सलाह दे रहा हूँ, सकारात्मक विचार के साथ आइए, अगर हम 10 कदम चल रहे हैं तो आप 12 कदम चलने का फैसला लेकर आइए। हर किसी का भविष्य उज्ज्वल है, निराश होने की जरूरत सबके लिए अवसर हैं, लेकिन कृपा करके बाहर की पराजय का गुस्सा सदन में मत उतारना। हताशा-निराशा होगी, आपके साथियों को दम दिखाने के लिए आपको कुछ ना कुछ करना पड़ेगा लेकिन कम से कम लोकतंत्र के मंदिर को वो मंच मत बनाइए।”

प्रधानमंत्री मोदी ने इन पार्टियों को सलाह दी कि वह अपना रुख बदलें और सिर्फ विरोध करने के लिए विरोध ना करें। देशहित में सकारात्मक चीजों का साथ दें। उन्होंने विपक्ष से कहा कि इससे देश में जो आपके प्रति नफरत पैदा हो रही है वह मोहब्बत में बदल जाए। प्रधानमंत्री ने कहा कि आपका भला भी इसी में है कि आप सकारात्मक बनें। प्रधानमंत्री ने अपील की कि नए संसद भवन में जो कमियाँ रह गई हों वो उन्हें बताएँ।

संसद की कार्यवाही से पहले भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि आज उनकी जिन्दगी का सबसे महत्वपूर्ण दिन है। बता दें कि उन्होंने TMC सांसद महुआ मोइत्रा के खिलाफ ‘सवाल के बदले घूस’ का मामला उठाया था, जिस पर संसद में कार्रवाई फिर से चालू होगी। इस मामले में संसद की आचार समिति की रिपोर्ट संसद के पटल पर रखी जाएगी।

केंद्र सरकार इस सत्र में 19 विधेयक लेकर आ रही है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण चुनाव आयुक्त की नियुक्ति से जुड़ा विधेयक है। गौरतलब है कि बीते दिनों सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर एक कानून बनाने को कहा था। इसके अतिरिक्त इस सत्र में नई दंड संहिताओं पर भी चर्चा होगी।

शिव जीत गया… कौन है 26 साल का वह लड़का जिसकी जीत के लिए पाकिस्तान में भी हुई प्रार्थना, जो BJP की जीत में निर्दलीय होकर भी लूट रहा चर्चे

3 दिसंबर 2023 को मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और तेलंगाना विधानसभा चुनावों के नतीजे आए। तीन राज्यों में बीजेपी तो तेलंगाना में कॉन्ग्रेस को जीत मिली। कॉन्ग्रेस को बेदखल कर बीजेपी राजस्थान की सत्ता में वापसी करने में सफल रही है। लेकिन बीजेपी की इस शानदार जीत के बीच भी 26 साल का एक युवक चर्चे लूट रहा है।

इस युवक का नाम है, रविंद्र सिंह भाटी। बीजेपी से टिकट नहीं मिले पर उन्होंने शिव सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा था। जितनी चर्चा उनकी बगावत, उनके चुनाव लड़ने के तरीकों, प्रचार के दौरान उन्हें मिल रहे समर्थन की हुई, उससे कहीं ज्यादा चर्चे अब शिव विधानसभा सीट से उनकी जीत के हैं।

रविंद्र सिंह भाटी का जलवा ऐसा है कि निर्दलीय होने के बाद भी चुनाव प्रचार के दौरान ही उन्हें अलग-अलग दलों से जुड़े लोगों और आम जनता का भारी समर्थन सोशल मीडिया पर मिल रहा था। विशेषकर युवा वर्ग से। उन्होंने फतेह खान को 3950 वोटों से हराया है। फतेह खान भी निर्दलीय मैदान में थे। रविंद्र सिंह भाटी को कुल 79495 वोट मिले हैं।

रविन्द्र सिंह भाटी ने फ़तेह खान को हराया है।
रविन्द्र सिंह ने फ़तेह खान को हराया है।

ऐसा भी नहीं है कि भाटी को समर्थन केवल शिव में ही मिल रहा था। सोशल मीडिया पर राजस्थान सहित देश भर से लोगों ने उनका समर्थन किया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान में भी उनकी जीत के लिए प्रार्थना हुई।

दरअसल, शिव विधानसभा क्षेत्र पाकिस्तान की सीमा से सटा इलाका है। रविंद्र, भाटी राजपूत हैं। इस समाज के लोग पाकिस्तान में भी हैं। आज भी इस समाज के दोनों तरफ के लोगों के बीच रोटी-बेटी का रिश्ता है। लिहाजा पाकिस्तान में रहने वाले इस समाज के लोग भी रविंद्र की जीत चाहते थे।

रविंद्र सिंह ने शिव का 70 साल का रिकॉर्ड तोड़ा है। वह इससे पहले भी रिकॉर्ड तोड़ने के लिए ही जाने जाते रहे हैं। 2019 में राजस्थान के जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय के वे छात्रसंघ अध्यक्ष चुने गए थे। छात्रसंघ के 57 साल के इतिहास में वे पहले निर्दलीय अध्यक्ष थे।

रविंद्र सिंह का छात्र राजनीति से लेकर विधानसभा पहुँचने का सफ़र काफी दिलचस्प रहा है। वे बाड़मेर जिले के रहने वाले हैं, जिसके अंतर्गत यह शिव विधानसभा आती है। वे यहाँ के दुधौड़ा गाँव के निवासी हैं। उनका परिवार राजनीति से नहीं जुड़ा हुआ है। वह अपने घर के पहले ऐसे व्यक्ति हैं जो राजनीति में सक्रिय हुए हैं।

रविंद्र सिंह भाटी के पिता अध्यापक हैं। उनकी राजनीतिक सक्रियता की शुरुआत वर्ष 2016 से प्रारम्भ हुई, जब वह जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय पहुँचे। यहाँ छात्र नेताओं के सम्पर्क में आने के बाद वह भी छात्र राजनीति में सक्रिय हो गए। 2019 में उन्होंने भारतीय विद्यार्थी परिषद से छात्रसंघ अध्यक्ष का चुनाव लड़ने के लिए टिकट माँगा था। लेकिन नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने यह चुनाव निर्दलीय लड़ा और जीत भी गए। उन्होंने NSUI और ABVP दोनों के उम्मीदवारों को हराया था।

वह 2019 से लेकर 2022 तक जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय के छात्रसंघ अध्यक्ष रहे। इस दौरान दो वर्ष तक चुनाव कोरोना के कारण टलते रहे। इसके पश्चात रविंद्र दलीय राजनीति में आ गए। वे बीजेपी के टिकट पर शिव से विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने नवम्बर 2023 में भाजपा की सदस्यता भी ली। लेकिन भाजपा ने इस सीट से स्वरुप सिंह खारा को टिकट दे दिया। इसके बाद रविंद्र सिंह भाटी ने निर्दलीय लड़कर इतिहास रच दिया है।

कौन हैं भगवाधारी प्रताप पुरी जिन्होंने गाजी फकीर का गढ़ ढहाया: कभी कहलाता था ‘सरहद का सुल्तान’, कॉन्ग्रेस सरकारों में बोलती थी तूती

राजस्थान विधानसभा चुनावों में इस बार कई जाने-माने चेहरे हार गए। राजस्थान के जैसलमेर जिले की पोखरण सीट से भाजपा के महंत प्रताप पुरी ने कॉन्ग्रेस के उम्मीदवार सालेह मोहम्मद को हराया है। सालेह मोहम्मद अशोक गहलोत की सरकार में मंत्री भी थे। महंत प्रताप पुरी को इस सीट पर 1,12,925 वोट मिले और उन्होंने 35,427 वोटों के अंतर से सालेह को हराया। महंत से हारने वाले सालेह, जैसलमेर के गाजी फ़कीर के बेटे हैं। जैसलमेर के गाजी फ़कीर को यहाँ समानांतर सत्ता चलाने के लिए जाना जाता था, उसका निधन 2021 में हो गया था।

पोकरण से गाजी फ़कीर के बेटे सालेह मोहम्मद को महंत प्रताप पुरी ने हराया
पोखरण से गाजी फ़कीर के बेटे सालेह मोहम्मद को महंत प्रताप पुरी ने हराया

गाजी फ़कीर इस इलाके में सिन्धी मुस्लिमों का बड़ा मजहबी उलेमा था और उसका इतना रसूख था कि जो भी पुलिस अधिकारी उसके अपराधों की फाइल खोलता था उसका ट्रांसफर हो जाता था। गाजी फ़कीर पर ही हाथ डालने के कारण आईपीएस पंकज चौधरी का भी 2013 में ट्रांसफर कर दिया गया था।

गाजी फ़कीर अशोक गहलोत का करीबी था। जब भी राज्य में कॉन्ग्रेस की सरकार आई तब-तब उसके परिवार का रसूख बढ़ता चला गया और उसके परिवार के अनेकों लोग सरकार में कई महत्वपूर्ण पदों पर काबिज हो गए। उसके इस इलाके में प्रभाव का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उसका बेटा सालेह मोहम्मद जैसलमेर से राज्य सरकार में मंत्री बनने वाला पहला विधायक था। सालेह को गाजी फ़कीर ने कम उम्र से ही राजनीति में एंट्री दिलवा दी थी। उसे 23 की उम्र में ही पंचायत समिति का प्रधान बनवा दिया गया था।

सालेह मोहम्मद (बाएँ, फूल माला के साथ) और गाजी फ़कीर (बैठे हुए)
सालेह मोहम्मद (बाएँ, फूल माला के साथ) और गाजी फ़कीर (बैठे हुए)

देशद्रोह सहित कई मामलों में आरोपित गाज़ी कई वर्षों से भारतीय एजेंसियों के पकड़ में नहीं आ पाया क्योंकि उसके ख़िलाफ़ सबूत ही नहीं होते थे। पुलिस हिस्ट्रीशीट में उसका नाम 1965 से ही आता रहा है लेकिन कॉन्ग्रेस में उसके वर्चस्व के कारण कोई उसका बाल भी बाँका नहीं कर सका।

पंकज चौधरी ने कहा था कि उनके पूर्ववर्तियों ने गाज़ी के बारे में फाइल्स में कई भयानक बातें लिख रखी थी। उन्होंने उसका अधिक विवरण देने से इनकार कर दिया था लेकिन उनके इस बयान से स्थिति की गंभीरता को समझा जा सकता है। उसके ख़िलाफ़ जुलाई 1965 के एक तस्करी वाले मामले को फिर से खोला गया था।

स्थानीय प्रशासन में उसकी पकड़ इतनी मजबूत थी कि ऊपर से आदेश के बावजूद उसको छुआ तक नहीं जा सका। उसके ख़िलाफ़ तैयार की गई फाइल 1984 में गायब हो गई। उस समय राज्य में कॉन्ग्रेस की सरकार थी।

1990 में एक एसपी सुधीर प्रताप सिंह आए जिन्होंने गाज़ी पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया। लेकिन, एसपी सुधीर प्रताप सिंह को राजस्थान सरकार ने चुपचाप ट्रांसफर कर दिया। 2011 में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सरकार ने फिर से उस हिस्ट्रीशीट को बंद करवा दिया। इसके बाद दृश्य में पंकज चौधरी की एंट्री हुई जिन्होंने गाज़ी पर नकेल कसी।

उनका कार्य भी अधूरा रह गया और इससे पहले कि वे किसी नतीजे पर पहुँच पाते, उनका भी ट्रांसफर करवा दिया गया। गाज़ी के बारे में सबसे बड़ी बात श्रीकांत घोष की पुस्तक ‘Pakistan’s ISI: Network of Terror in India‘ में कही गई थी। इस पुस्तक के पृष्ठ संख्या 55 पर गाज़ी फ़क़ीर का जिक्र किया गया है।

उन्होंने सीमा क्षेत्र में सक्रिय एक इस्लामी संस्था तबलीग-ए-जमात का जिक्र करते हुए लिखा है कि इलाक़े में सैयाद शाह मर्दान शाह-II यानी पीर पगारो का प्रभाव बढ़ रहा है। पीर पगारो पाकिस्तान मुस्लिम लीग (एफ) का अध्यक्ष है। इसके आगे श्रीकांत घोष ने लिखा था कि जैसलमेर निवासी गाज़ी फ़क़ीर पाकिस्तान की सीमा पर की जा रही आतंकी गतिविधियों में उसकी मदद करता है। इसके अलावा वह पाकिस्तानी एजेंटों को भारतीय सीमा पर स्थित गाँवों में बसाने में मदद करता है।

जब अप्रैल 2021 में गाजी फ़कीर की मौत हुई थी तब भी उसका इस इलाके में प्रभाव दिखा था। उसकी मौत के वक्त कोरोना से सम्बंधित बंदिशें लागू थीं। उसकी मौत से चार दिन पहले ही उसका बेटा सालेह मोहम्मद कोरोना पॉजिटिव पाया गया था। लेकिन इन सब बातों को नजरंदाज करते हुए उसके जनाजे में बड़ी भीड़ इकट्ठा की गई थी और कोविड नियमों की धज्जियाँ उड़ाई गईं थी।

बता दें कि सालेह पहली बार 2008 में विधायक बने थे और 2013 में भाजपा के शैतान सिंह से हार गए थे। 2018 में पुनः विधायक बन कर वह मंत्री बने। लेकिन अब इन चुनावों में उन्हें महंत प्रताप पुरी ने एक बार फिर पटखनी दी है।

40 सीट, 174 प्रत्याशी, 80% वोटिंग: मिजोरम में चल रही वोटों की गिनती, 6 साल पुरानी पार्टी 62 साल पुरानी MNS से आगे: पूर्व IPS बोले- कॉन्ग्रेस से गठबंधन नहीं

मिजोरम की 40 विधानसभा सीटों के लिए 7 नवंबर को राज्य में 80.66% वोटिंग हुई थी। आज 4 दिसंबर मतगणना का दिन है। यहाँ किसी भी पार्टी को बहुमत पाने के लिए 21 सीटें जीतनी होंगीं।

पहले यहाँ अन्य प्रदेशों की तरह रविवार (3 दिसंबर 2023) को ही मतगणना होनी थी, हालाँकि स्थानीय लोगों की माँग के बाद चुनाव आयोग ने यह तारीख बदलकर 4 दिसंबर कर दी।

1984 के बाद से नॉर्थ ईस्ट के राज्य में प्रमुख रूप से (22 अक्टूबर 1961 को अस्तित्व में आई) मिजो नेशनल फ्रंट और कॉन्ग्रेस पार्टी चुनावों में आमने-सामने रही थी। लेकिन 2017 में पूर्व आईपीएस लालदुहोमा के नेतृत्व में बनी नई राजनीतिक पार्टी इन्हें टक्कर देने अस्तित्व में आई। पार्टी का नाम ‘जोरम पिपुल्स मूवमेंट’ है।

इन तीनों पार्टियों ने 40 सीटों पर अपने सारे-सारे उम्मीदवार उतारे हैं। वहीं भाजपा ने मिजोरम में 23 सीटों पर, आम आदमी पार्टी ने 4 सीटों पर अपने प्रत्याशियों को खड़ा किया है। इनके अलावा 27 निर्दलीय उम्मीदवार भी खड़े हुए हैं। कुल 174 उम्मीदवार इस बार मिजोरम में चुनाव लड़ रहे हैं।

शुरुआती रुझानों में एमएनएफ ने अपनी बढ़त तो बनाई थी लेकिन जेडपीएम पार्टी ने मतगणना शुरू होने के थोड़ी देर बाद ही उन्हें अच्छी खासी सीटों के फासले से पीछे कर दिया।

खबर लिखने तक MNF जहाँ रुझानों में 8 सीट पाई है वहीं ZPM को 28 सीट मिली है। कॉन्ग्रेस इस रेस में 1 सीटों पाई है जबकि भाजपा को तीन सीटें लेते दिखाया गया है।

एक्जिट पोल्स की बात करें तो मिजोरम में इस बार जेडपीएम को ही उभरती पार्टी दिखाया गया था। उसके अध्यक्ष लालदुहोमा भी अपनी पार्टी की जीत को लेकर बेहद आश्वस्त थे।

उन्होंने दावा किया हुआ है कि मिजोरम में इस बार उनकी सरकार बनने से कोई भी दल नहीं रोक सकता। कॉन्ग्रेस से गठबंधन के लिए वो बिलकुल साफ मना कर चुके हैं। पिछले साल इसी पार्टी को चुनावों में मात्र 8 सीटों से संतोष करना पड़ा था।

गौरतलब है कि मिजोरम के अलावा इस बार चार और राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए थे। मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना। इन राज्यों में वोट की काउंटिंग 3 दिसंबर को हुई।

2023 के विधानसभा चुनाव के नतीजे-

  • मध्यप्रदेश की 230 सीटों पर भारतीय जनता पार्टी ने 163 सीट पाकर बहुमत हासिल किया, जबकि कॉन्ग्रेस को 66 सीट आई और अन्य को 1।
  • राजस्थान की 199 विधानसभा सीटों पर भाजपा ने 115 सीटें जीतीं, कॉन्ग्रेस को 69 सीट मिली, बसपा के हिस्से 2 आईं और अन्य को 13 सीट मिली।
  • इसी तरह छत्तीसगढ़ में 90 सीट में से 54 सीट बीजेपी ने अपने नाम की जबकि कॉन्ग्रेस को 35 पर संतुष्ट होना पड़ा। अन्य के खाते में 1 आई।
  • तेलंगाना में कॉन्ग्रेस ने बाजी मारी। 119 सीट में 64 जीतकर उन्होंने बीआरएस को सत्ता से हटा दिया। भाजपा ने भी पिछले सालों के मुकाबले यहाँ बढ़त बनाते हुए 8 सीटें हासिल की।

मुस्लिम फकीर से खाए दनादन चप्पल, फिर भी 60 हजार वोटों से हार गए कॉन्ग्रेस उम्मीदवार: काम नहीं आई ‘दुआ’

मध्य प्रदेश चुनावों में एक मुस्लिम फ़कीर की चप्पलों वाली दुआ लेने के बाद भी कॉन्ग्रेस प्रत्याशी पारस सकलेचा हार गए। बीते दिनों उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था जिसमें वह सड़क किनारे एक मुस्लिम पीर से खुद को चप्पल रसीद करवा रहे थे। चप्पलों की ये मार दुआ के रूप में ली जा रही थीं।

पारस सकलेचा रतलाम शहरी सीट से चुनाव लड़ रहे थे। उनको भाजपा के चेतन कश्यप ‘भैयाजी’ ने हराया है। चेतन कश्यप को 1,09,656 लाख वोट मिले हैं जबकि सकलेचा को 48,948 वोट मिले हैं। वह 60,708 वोट के अंतर से हारे हैं। परिणाम में दिख रहा है कि मुस्लिम फ़कीर की चप्पलों का कोई असर सकलेचा के चुनावी नतीजे पर नहीं पड़ा।

चप्पल रूप आशीर्वाद लेने वाले सकलेचा को भाजपा उम्मीदवार ने हरा दिया है।
चप्पल के रूप में दुआ लेने वाले पारस सकलेचा को भाजपा उम्मीदवार ने हरा दिया है

पारस सकलेचा का यह वीडियो चुनाव प्रचार के दौरान वायरल हुआ था। वीडियो में देख सकते हैं कि पारस सकलेचा को वीडियो में नजर आ रहे फकीर बाबा कभी पीठ पर कभी कंधे पर, कभी मुँह पर चप्पल मारते हैं। और ऐसा नहीं कि ये कि वो एक बार मारकर रुकते हैं, देख सकते हैं कि किस तरह वीडियो में वो ताबड़तोड़ चप्पल मारते ही रहते हैं। पीछे से कोई व्यक्ति कहता भी है ‘बस बाबा बस’, लेकिन फकीर बाबा नहीं रुकते। इस दौरान कॉन्ग्रेस नेता हँसते-हँसते बस उनकी पैर छूते रहते हैं।

इस वीडियो को देखने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने कॉन्ग्रेस नेता का बहुत मजाक उड़ाया था। कोई कह रहा था कि कॉन्ग्रेस है ही चप्पल खाने लायक तो कोई चुटकी लेते हुए कह रहा है कि बाबा ने दुआ देने में कोई कमी नहीं रखी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कॉन्ग्रेस नेता को चप्पल-चप्पल मारने वाला व्यक्ति कमाल रजा नाम का फकीर है।

वह महू नीमच रोड पर घूमते हैं और अपने पास मुराद लेकर आने वाले लोगों को चप्पलों से पीटकर दुआ देते हैं। अपनी फरियाद लेकर तमाम लोग नई चप्पलें लेकर आते हैं ताकि उन्हें उसी से पीटकर कमाल रजा अपनी दुआ दे सकें। कॉन्ग्रेस नेता समेत तमाम लोगों का मानना था कि इस तरह की दुआ जिन फरियादियों को कमाल रजा ने दी, उनके जीवन में उन्हें सफलता मिली। पारस सकलेचा भी इस बार चुनावी मैदान में थे तो अपनी जीत के लिए उन्होंने ये हथकंडा आजमाया था, जो कि फेल हो गया।

पारस सकलेचा वही नेता हैं जिन्होंने भोपाल की सांसद साध्वी प्रज्ञा को ‘डायन’ कहा था। यह विवादित बयान उन्होंने 2019 चुनावों के दौरान दिया था। वह मध्य प्रदेश के व्यापम घोटाले के व्हिसलब्लोअर भी हैं।

स्कूटी सीख रही थी लड़की, खींचकर ले गए और किया गैंगरेप: UP पुलिस ने मोहम्मद जुनैद के पाँव में मारी गोली, 4 अन्य की तलाश

उत्तर प्रदेश की गाजियाबाद पुलिस की रविवार (3 दिसंबर, 2023) को बदमाशों के साथ मुठभेड़ हुई है। इस मुठभेड़ में मोहम्मद जुनैद नाम के एक आरोपित को के पैर में गोली लगी है। मुठभेड़ के दौरान जुनैद के 4 अन्य साथी फरार होने में सफल रहे जिनकी तलाश की जा रही है। जुनैद पर अपने 2 साथियों संग मिल कर गुरुवार (30 नवंबर, 2023) को एक लड़की के साथ गैंगरेप का आरोप है।

यह मामला गाजियाबाद जिले के थाना क्षेत्र ट्रोनिका सिटी का है। ACP लोनी ने एक बयान में बताया कि 30 नवंबर, 2023 को गाजियाबाद के ट्रोनिका सिटी क्षेत्र में एक लड़की के साथ दुष्कर्म का मामला दर्ज हुआ था। इस मामले में पुलिस टीमों का गठन कर के आरोपितों की तलाश की जा रही थी। इस बीच 3 दिसंबर को मुखबिर द्वारा पुलिस को ट्रोनिका सिटी क्षेत्र में आने वाले खानपुरा के जंगलों में कुछ संदिग्धों की मौजूदगी की सूचना मिली। सूचना के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुँची।

पुलिस के मुताबिक सूचना सही पाई गई। खानपुरा के जंगलों में मौजूद संदिग्धों ने पुलिस को देखते ही गोलीबारी शुरू कर दी। जवाबी और आत्मरक्षा में पुलिस ने भी गोलियाँ चलाईं। इस गोलीबारी में जुनैद नाम के एक संदिग्ध के पैर में गोली लग गई। गोलीबारी के बीच जुनैद के बाकी साथी भाग निकले। पुलिस ने जुनैद को अस्पताल में भर्ती करवाया और पूछताछ की। पूछताछ में जुनैद ने 30 नवंबर को ट्रोनिका सिटी थाने में हुई गैंगरेप की घटना में अपनी संलिप्तता कबूल की।

ACP ने बताया कि जुनैद ने कबूल किया कि उसने अपने 2 अन्य साथियों के साथ पीड़िता के साथ गैंगरेप की घटना को अंजाम दिया था। वहीं जुनैद के साथ 2 अन्य साथी भी घटनास्थल पर थे। ये पीड़िता की सहेली के साथ गैंगरेप करना चाहते थे लेकिन इस प्राइवेट कार आ जाने के चलते वो दोनों अपने मंसूबों में सफल नहीं हुए और डर से भाग गए। पुलिस टीमें जुनैद के बयान में सामने आए 4 अन्य फरार आरोपितों की तलाश में जुटी हुईं हैं।

क्या था मामला

यह मामला गुरुवार (30 नवंबर, 2023) का है। तब दिल्ली की रहने वाली एक युवती ने गाजियाबाद पुलिस को अपने साथ हुए गैंगरेप की सूचना दी। पीड़िता ने बताया कि वो गाजियाबाद के ट्रोनिका सिटी स्थित एक फैक्ट्री में नौकरी करती है। घटना के दिन पीड़िता की सहेली अपने एक पुरुष साथी के साथ स्कूटी सीखने एक सुनसान सड़क पर गई थी। पीड़िता भी इनके साथ गई थी। इसी दौरान ऑटो से कुछ लोग उतरे और उन्होंने पीड़िता को झाड़ियों में ले जा कर गैंगरेप किया। पुलिस ने इस मामले में पीड़िता की सहेली के पुरुष मित्र से भी पूछताछ की थी।

आरोपितों में एक ऑटो चालक भी बताया जा रहा है। पुलिस घटना में प्रयोग हुए ऑटो की तलाश कर रही है।

एक पूर्व CRPF जवान, एक के बेटे को इस्लामी कट्टरपंथियों ने मार डाला… कॉन्ग्रेस के 2 मंत्रियों को हराया, छत्तीसगढ़ की 2 सीटें जहाँ ‘आम आदमी’ ने खिलाया कमल

छत्तीसगढ़ में 2023 विधानसभा चुनाव की मतगणना अपने अंतिम चरण में आ चुकी है। अब तक के रुझानों में भारतीय जनता पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिलता दिख रहा है। यहाँ की कुल 90 सीटों पर हुए मतदान में भाजपा 54 और कॉन्ग्रेस 35 पर या तो आगे चल रही है या जीत दर्ज कर चुकी है। इस दौरान साजा विधानसभा से भाजपा के ईश्वर साहू और सीतापुर विधानसभा से राजकुमार टोप्पो की जीत खासतौर पर चर्चा में रही।

सजा विधानसभा से जीते ईश्वर साहू, बेटे की हो गई थी हत्या

छत्तीसगढ़ के साजा विधानसभा से भारतीय जनता पार्टी ने ईश्वर साहू को अपना प्रत्याशी बनाया था। ईश्वर साहू बेमेतरा जिले के गाँव बिरनपुर में हुई सांप्रदायिक हिंसा में मारे गए 22 वर्षीय युवक भुवनेश्वर साहू के पिता हैं। ईश्वर साहू का इस सीट पर मुकाबला कॉन्ग्रेस के रविंद्र चौबे से था। रवींद्र चौबे 6 बार से लगातार विधायक और भूपेश बघेल की निवर्तमान सरकार में कैबिनेट मंत्री थे। 8 वें राउंड की समाप्ति के बाद ईश्वर साहू कॉन्ग्रेस के रविंद्र चौबे से 4566 वोटों से आगे चल रहे थे।

9वें राउंड की गिनती के दौरान थोड़े समय के लिए EVM मशीन में कुछ खराबी आई थी। हालाँकि बाद में हुई मतगणना के बाद ईश्वर साहू ने रवींद्र चौबे के खिलाफ लगभग 19 हजार वोटों की निर्णायक बढ़त बना ली है।

गौरतलब है कि बताते चलें कि 8 अप्रैल 2023 को छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में आने वाले गाँव बिरनपुर में अलग-अलग समुदाय के 2 स्कूली बच्चों की साइकिल टकरा गई थी। इस मामूली विवाद में मुस्लिम भीड़ ने हिन्दू छात्र के परिजनों और समर्थकों पर तलवार से हमला किया था। हमले का आरोप अब्दुल, अकबर, इस्माइल समेत 11 आरोपितों पर लगा था। इस भीड़ द्वारा हुए हमले की चपेट में आ कर भुनेश्वर साहू की मौत हो गई थी। विवाद में 3 पुलिसकर्मियों सहित लगभग 1 दर्जन लोग घायल हुए थे।

सीतापुर: CRPF के पूर्व जवान ने कॉन्ग्रेसी मंत्री को हराया

छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में सरगुजा जिले की सीतापुर विधानसभा सीट से कॉन्ग्रेस के अमरजीत भगत को हराने वाले भाजपा के रामकुमार टोप्पो भी खासी चर्चा में हैं। 36 वर्षीय टोप्पो CRPF की QAT (क्विक एक्शन टीम) में हेडकॉन्स्टेबल के पद पर तैनात थे। कई आतंकवाद विरोधी अभियानों में शामिल रहे रामकुमार टोप्पो को तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पुलिस मेडल फॉर गेलेंट्री अवॉर्ड से नवाजा था। रामकुमार टोप्पो ने नौकरी से इस्तीफा दे कर भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था।

आखिरकार टोप्पो के कॉन्ग्रेस की भूपेश बघेल सरकार में खाद्य मंत्री रहे अमरजीत भगत को 16,954 वोटों से हरा दिया। इस बार हार गए अमरजीत भगत भी लगातार 4 बार के विधायक रह चुके हैं।

कमारेड्डी डिपो में बची केवल KVR की बस, KCR और रेवंत रेड्डी दोनों के टायर पंक्चर: एक CM तो दूसरे के CM बनने के चर्चे, पर भाजपाई क्षत्रप के सामने दोनों ने टेके घुटने

तेलंगाना में कमारेड्डी सीट पर भाजपा के प्रत्याशी कटिपल्ला वेंकटरमन्ना रेड्डी (KVR रेड्डी) ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चन्द्रशेखर राव और कॉन्ग्रेस प्रदेश अध्यक्ष रेवंत रेड्डी को हरा दिया है। उनकी इस जीत के चर्चे पूरे देश में और सोशल मीडिया पर हो रहे हैं।

केवीआर रेड्डी से चुनाव में शिकस्त पाने वाले केसीआर जहाँ राज्य के वर्तमान मुख्यमंत्री हैं तो वहीं रेवंत रेड्डी के विषय में यह कयास लगाए जा रहे हैं कि वह राज्य के अगले मुख्यमंत्री हो सकते हैं। वह अभी राज्य के कॉन्ग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हैं।

केवीआर रेड्डी के सामने मुख्यमंत्री केसीआर दूसरे और रेवंत तीसरे नम्बर पर रहे हैं। केवीआर रेड्डी को कुल 66,652 वोट मिले हैं। उन्होंने सीएम केसीआर को 6741 वोटों के अंतर हराया है। केसीआर को यहाँ 59,911 और रेवंत रेड्डी को 54,916 वोट मिले हैं।

केवीआर रेड्डी जीत गए हैं।

54 वर्षीय केवीआर रेड्डी कमारेड्डी के ही रहने वाले हैं। यहाँ उनके जीतने का सबसे बड़ा फैक्टर उनका स्थानीय होना ही है। उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान अपने एक भाषण में कहा था, “कमारेड्डी डिपो की बसें कमारेड्डी में ही रहेंगी और बाहर की बसें वापस चली जाएँगी।”

उनका इशारा इस दौरान रेवंत रेड्डी और सीएम केसीआर पर था। दोनों ही कमारेड्डी में बाहरी प्रत्याशी थे। रेड्डी, पेशे से एक कारोबारी हैं और वह कामारेड्डी में शिक्षण संस्थानों से जुड़े हुए हैं। वह भाजपा से पहले केसीआर की पार्टी बीआरएस और कॉन्ग्रेस से भी जुड़े रहे हैं। केवीआर रेड्डी कमारेड्डी में जिला परिषद के अध्यक्ष भी रहे हैं।

केवीआर रेड्डी पिछले चुनाव में भी भाजपा की तरफ से कामारेड्डी सीट से लड़े थे लेकिन वह चुनाव हार गए थे। हालाँकि, इस हार के बाद उन्होंने अपनी तैयारी चालू कर दी थी और स्थानीय स्तर पर अपना गढ़ मजबूत करने में जुटे हुए थे। केवीआर रेड्डी ने कामारेड्डी के भीतर गाँवों का दौरा किया। जो भी व्यक्ति उनसे मदद माँगने आया उसे मदद दी और क्षेत्र में कई सामुदायिक भवन बनवाए। इस कारण से उनका जनता में अच्छा प्रभाव बना। स्थानीय होने और जनता से जुड़ाव के कारण वह इन दोनों बड़े नेताओं को हराने में सफल रहे।

उनकी इस सफलता के साथ ही भाजपा ने भी तेलंगाना में अब तक सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है। तेलंगाना में भाजपा इस बार के चुनाव में 8 सीटें जीतने में सफल रही है। वह इस बार राज्य में तीसरी सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी है। 2018 चुनावों में भाजपा ने तेलंगाना में मात्र 1 सीट जीती थी।

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चुनाव आयोग ने तेलंगाना के डीजीपी अंजनी कुमार को निलंबित कर दिया है। डीजीपी अंजनी को चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन के कारण निलंबित किया गया है। वह सुबह तेलंगाना कॉन्ग्रेस अध्यक्ष और प्रदेश के अगले मुख्यमंत्री माने जा रहे रेवंत रेड्डी से मिलने पहुँचे थे।

आज (3 दिसंबर 2023) तेलंगाना समेत चार राज्यों के चुनावों की मतगणना हो रही है। मतगणना के दौरान ही जब रुझानों में कॉन्ग्रेस, तेलंगाना की भारत राष्ट्र समिति को पीछे छोड़ती दिखी तो डीजीपी अंजनी कुमार अन्य कुछ अधिकारियों के साथ रेवंत रेड्डी से मिलने पहुँच गए और बाकायदा उन्हें गुलदस्ता देते हुए फोटो भी खिंचवाई।

थोड़ी देर में डीजीपी की रेवंत रेड्डी के साथ तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई और लोग उनकी आलोचना करने लगे। लोगों ने कहा कि एक सेवारत अधिकारी कैसे चुनाव के अंतिम नतीजों को जाने बिना एक दल के मुखिया से मिलने पहुँच गया।

जानकारी के मुताबकि, रेवंत रेड्डी के साथ ही राज्य के नोडल पुलिस अफसर संजय जैन और चुनावी खर्चों का देखरेख करने वाले अधिकारी महेश भागवत भी रेवंत रेड्डी के पास मिलने पहुँचे थे।

गौरतलब है कि 119 सीटों पर हुए तेलंगाना चुनावों में कॉन्ग्रेस 64 सीटों पर आगे है जिनमें से कुछ सीटों पर वह जीत भी चुकी है। इसके प्रदेश अध्यक्ष व तेलंगाना के अगले मुख्यमंत्री माने जा रहे रेवंत रेड्डी, कोडंगल सीट से जीते हैं और एक अन्य सीट कामारेड्डी से हार गए हैं। इस कामारेड्डी सीट पर उन्हें भाजपा के केवी रेड्डी ने हराया है। इसी कमारेड्डी सीट पर अब तक सत्तारूढ़ बीआरएस के मुखिया और राज्य के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव भी हार गए हैं।

वहीं, अंजनी कुमार 1990 बैच के आईपीएस अफसर हैं। वह दिसम्बर 2022 में तेलंगाना के डीजीपी बने थे। इससे पहले हैदराबाद के पुलिस कमिश्नर रहे थे। उनका नक्सल विरोधी अभियान में काफी अनुभव रहा है, वह इनसे लड़ने के लिए बनाई गई यूनिट ‘ग्रेहाउंड्स’ के मुखिया थे।

3 राज्य जीत PM मोदी ने ‘4 जाति’ को सशक्त करने का दोहराया संकल्प, चुनावी वादों को शत-प्रतिशत पूरा करने की दी गारंटी: कहा – ‘भारत माता की जय’ हमारा मंत्र

मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भाजपा की बड़ी जीत को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईमानदारी, पारदर्शिता और सुशासन की जीत करार दिया। उन्होंने कहा कि तेलंगाना में भी भाजपा के प्रति समर्थन लगातार बन रहा है। उन्होंने कहा कि इस चुनाव में देश को जातियों में बाँटने की बहुत कोशिशें हुईं, लेकिन वो लगातार कह रहे थे कि उनके लिए देश में 4 जातियाँ हैं – नारी शक्ति, युवा शक्ति, किसान और गरीब परिवार। उन्होंने कहा कि इन 4 जातियों को सशक्त करने से ही देश सशक्त होगा।

उन्होंने कहा कि आज बड़ी संख्या में हमारे OBC, जनजातीय समाज के साथी इसी वर्ग में आते हैं। उन्होंने कहा कि इन चारों जातियों ने भाजपा की योजनाओं और रोडमैप को लेकर बहुत उत्साह दिखाया है। उन्होंने कहा कि आज हर गरीब, वंचित, किसान, फर्स्ट टाइम वोटर और जनजातीय समाज के लोग, महिलाएँ, युवा ये सोच कर खुश हैं कि ये उनकी अपनी विजय है। उन्होंने कहा कि हर वो नागरिक इसे अपनी सफलता समझ रहा है जो 2047 में भारत को एक विकसित राष्ट्र के रूप में देखना चाहता है।

उन्होंने विशेष रूप से देश की नारी-शक्ति का अभिनन्दन करते हुए याद दिलाया कि वो रैलियों में कहते थे कि नारी-शक्ति भाजपा का परचम लहराने के लिए शान से निकली है। उन्होंने कहा कि जब नारी शक्ति किसी का कवच बन जाए तो उसे कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ का जिक्र करते हुए कहा कि आज हर बहन-बेटी को साफा-साफ़ लगता है कि भाजपा नारी सम्मान एवं सुरक्षा की सबसे बड़ी गारंटी है, भाजपा सरकार में ही उसे प्रतिनिधित्व मिल रहा है।

उन्होंने बताया कि महिलाओं ने देखा है कि 10 वर्षों में भाजपा ने उन तक पानी, बिजली, गैस और शौचालय सहित अन्य बुनियादी सुविधाएँ पहुँचाईं, उन्हें रोजगार-स्वरोजगार देने के लिए निरंतर भाजपा काम कर रही है। उन्होंने कहा कि महिलाओं ने इस पूरे चुनाव में भाजपा की जीत की जिम्मेदारी उठा ली थी। उन्होंने महिलाओं से को आश्वासन दिया कि ये मोदी की गारंटी है कि उनसे किए गए वादे शत-प्रतिशत पूरे होंगे – ये मोदी की गारंटी है और इसका अर्थ है गारंटी पूरा होने की गारंटी।

पीएम मोदी ने कहा, “कॉन्ग्रेस सरकारें भर्ती लीक और पेपर घोटालों में घिरी थी। अब इन तीनों राज्यों के सत्ताधारी दल सरकार से बाहर हैं। युवाओं में भरोसा बढ़ रहा है कि भाजपा उनकी आकांक्षाएँ समझती हैं, उनके लिए काम करती है। देश का युवा जनता है कि भाजपा सरकार उनके लिए नए अवसर बनाती है। जनजातीय समाज भी अब खुल कर अपनी बात रख रहा है। वो कॉन्ग्रेस की नीतियों की वजह से 7 दशक तक पीछे रहा। आज इनकी जनसंख्या 10 करोड़ है। गुजरात में हमने देखा कि कॉन्ग्रेस ने इस समाज को पूछा तक नहीं।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि राजनीति के इतने वर्षों में वो हमेशा भविष्यवाणियों से दूर रहे, लेकिन इस बार उन्होंने इसे तोड़ा और ये कहा था कि राजस्थान में कॉन्ग्रेस सरकार लौट कर नहीं आएगी। उन्होंने कहा कि राजस्थान की जनता पर उनका भरोसा था। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश ने भी दिखाया है कि भाजपा के सेवा भाव का कोई विकल्प नहीं है। छत्तीसगढ़ पर उन्होंने याद किया कि वहाँ की पहली सभा में ही उन्होंने कहा था कि वो कुछ माँगने नहीं आए हैं, बल्कि शपथग्रहण समारोह में निमंत्रण देने आए हैं।

उन्होंने कहा कि हर चुनाव में तेलंगाना में भाजपा का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि तेलंगाना की जनता की सेवा में उनकी पार्टी कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेगी। उन्होंने कहा कि ये चुनाव परिणाम दुनिया भर के निवेशकों को एक नया भरोसा देगा। उन्होंने कहा कि आज दुनिया भारतीय लोकतंत्र और जनता की परिपक्वता देख रही है, जो पूर्व बहुमत वाली स्थिर सरकार के लिए वोट कर रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने सेवा-सुशासन का नया मॉडल पेश किया है, जिसके केंद्र में देश और देशवासी है, ‘भारत माता की जय’ इसका मन्त्र है।