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‘कन्हैयालाल की तरह तेरा भी सर तन से जुदा कर देंगे’: श्री कृष्ण जन्मभूमि के लिए जो लड़ रहे केस, उनको मिली धमकी, एक्शन में UP पुलिस

श्री कृष्ण जन्मभूमि को उसका हक दिलाने के लिए जो सत्यम पंडित कोर्ट तक पहुँचे, उन्हें अब ‘सर तन से जुदा’ करने की धमकी दी गई है। सत्यम पंडित ने एक लेटर दिखा कर दावा किया है कि पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) की तरफ से उन्हें यह धमकी दी गई है। उनको यह पत्र गाजियाबद में अपने ऑफिस खोलने के दौरान शनिवार (2 दिसंबर 2023) को मिला। इसमें लिखा गया है:

“तू श्रीकृष्ण जन्मभूमि बनाम शाही मस्जिद ईदगाह मथुरा केस में पैरवी करना बंद कर दे। वरना अल्लाह का वास्ता, राजस्थान के कन्हैयालाल की तरह तेरा भी सर तन से जुदा कर देंगे, माशाल्लाह।”

सत्यम पंडित को ‘सर तन से जुदा’ की धमकी मामले के संबंध में गाजियाबाद घंटाघर कोतवाली में एफआईआर दर्ज की गई है। एसीपी निमिष पाटिल के मुताबिक, शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर लिया गया है और आगे जाँच की जा रही है। पीड़ित के ऑफिस के आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं।

पीड़ित सत्यम पंडित ने शनिवार सुबह धमकी के तौर पर मिले PFI के इस पत्र को अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर शेयर किया है। उन्होंने जब शनिवार को गाजियाबाद के अपने ऑफिस का शटर उठाया तो वहाँ उन्हें एक कागज पड़ा मिला। इसमें उन्हें पीएफआई ने ‘सर तन से जुदा’ करने की धमकी दी है।

सत्यम पंडित ब्राह्मण एकता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और श्री कृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट में केंद्रीय मंत्री के पद पर भी हैं। उन्होंने ट्रस्ट की तरफ से लगभग ढाई साल पहले कृष्ण जन्मभूमि की जमीन को विवादित शाही मस्जिद से खाली कराने के लिए सिविल कोर्ट मथुरा में केस दर्ज किया था।

पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) नाम की ओर आए इस धमकी के बावजूद सत्यम पंडित ने कहा है कि वो इस केस में पैरवी करना जारी रखेंगे। उन्होंने कहा, “एक बार फिर जान से मारने की धमकी मिली। मैं बता देना चाहता हूँ कि मैं डरने वाला नहीं।”

‘राहुल गाँधी पनौती है’: MP, राजस्थान और छत्तीसगढ़ की हार के बाद कॉन्ग्रेस को उसका ही किया-धरा लौटा रहे लोग, भारी पड़ी PM मोदी पर आपत्तिजनक टिप्पणी

मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कॉन्ग्रेस पार्टी एक बुरी हार की तरफ आगे बढ़ रही है। चुनाव प्रचार के दौरान कॉन्ग्रेस नेताओं ने बार-बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्हें ‘पनौती’ तक बताया गया। यहाँ तक कि जब भारत ODI वर्ल्ड कप का फाइनल हारा तो इसका ठीकरा भी पीएम मोदी पर फोड़ा गया, क्योंकि वो दर्शक दीर्घा में मौजूद थे। अब सोशल मीडिया पर लोग राहुल गाँधी को उनका ही किया लौटा रहे हैं।

सोशल मीडिया पर ट्रेंड हो रहा है – ‘राहुल गाँधी पनौती है।’ दिल्ली भाजपा महिला मोर्चा की स्टेट जनरल सेक्रेटरी वैशाली पोद्दार ने एक तस्वीर शेयर की, जिसमें राहुल गाँधी एक हुडी पहने हुए हैं और उस पर लिखा हुआ है – ‘पNAUTI’. बता दें कि ये एडिटेड तस्वीर है, लेकिन लोग इस पर खूब मजे ले रहे हैं।

वहीं सम्राट जितेंद्र सिंह नामक व्यक्ति ने राहुल गाँधी की संसद की एक तस्वीर शेयर की, जिसमें वो हाथ गाल पर रख कर उदास बैठे हुए हैं। उन्होंने लोगों से कहा कि अगर आप सब राहुल गाँधी को पनौती मानते हैं तो इस ट्वीट को रीट्वीट करें।

हार्दिक ढेबर नामक इजर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की धोती में तस्वीर शेयर की। साथ ही लिखा कि अब ये शीशे की तरह साफ़ हो गया है कि राहुल गाँधी पनौती हैं, जबकि कॉन्ग्रेस के लोग इसे मानने को तैयार नहीं हैं। साथ ही उन्होंने लिखा कि भारत में और दुनिया भर में सिर्फ मोदी की गारंटी चलती है।

चन्दन शर्मा नाम यूजर ने लिखा कि अब इसमें कोई शक नहीं है कि राहुल गाँधी पनौती हैं। साथ ही उन्होंने राहुल गाँधी की एक तस्वीर शेयर की, जिसमें वो कुर्सी पर उदास बैठे हुए हैं।

चुनाव आयोग की वेबसाइट की मानें तो जहाँ मध्य प्रदेश में जहाँ भाजपा 161 सीटों पर आगे चल रही है, वहीं कॉन्ग्रेस को मात्र 66 सीटें मिलती हुई दिख रही हैं। वहीं राजस्थान की बात करें तो भाजपा 113 और कॉन्ग्रेस 70 सीटों पर जीतती हुई दिख रही है। छत्तीसगढ़ में कॉन्ग्रेस पार्टी 36 सीटों पर आगे चल रही है जबकि भाजपा 53 सीटों के साथ बहुमत लाती हुई दिख रही है। वहीं तेलंगाना में कॉन्ग्रेस पार्टी सरकार बनाती हुई दिख रही है। वहाँ वो 65 सीटों पर आगे है, जबकि सत्ताधारी BRS 39 पर।

पहले हिंदुत्व की आड़ ले लो, फिर करो सेकुलर राजनीति: आरफा खानम ने दिया सत्ता में घुसने का ज्ञान, खुद को बताया- सच्चा-ईमानदार पत्रकार

विधानसभा चुनावों के शुरुआती रुझान आने के बाद से मीडिया में चर्चाएँ जारी हैं। इसी बीच एक चर्चा द वायर की आरफा खानम शेरवानी ने भी अपनी कुछ साथियों के साथ मिलकर की। इसमें उन्होंने कॉन्ग्रेस को सिखाना चाहा कि कैसे सेकुलर पार्टियाँ हिंदुत्व की आड़ लेकर पहले सत्ता में घुस सकती हैं और उसके बाद सेकुलर राजनीति कर सकती हैं।

आरफा खानम शेरवानी ने चुनावी चर्चा के दौरान न्यूजलॉन्ड्री के अतुल चौरसिया से बात करते हुए कहा हिंदुत्व का दबाव भारत की राजनीति पर इतना है कि आदर्शवादी राजनीति नहीं हो जाती, क्योंकि इधर भी खुश करना पड़ता है। ऐसे में वो समझाती हैं कि क्यों नहीं एक बार हिंदुत्व की आड़ लेकर सत्ता में आया जाए और उसके बाद सेकुलर राजनीति की जाए।

इस पर अतुल चौरसिया उन्हें समझाते हैं कि ये बहुत स्लिपरी स्लोप है। ऐसा नहीं किया जा सकता कि पहले व्यवहारिक होकर हिंदुत्व का कार्ड खेल लिया जाए और उसके बाद कहें कि सेकुलर राजनीति करेंगे, क्योंकि चुनावों के बाद स्टेक होल्डर जवाब माँगता है। उन्होंने समझाया कि कर्नाटक के मुकाबले देखें तो इन चुनावों में देखें तो कम्युनल एंगल इतना नहीं था जितना वेल्फेयर का मुद्दा उठाया गया था

बता दें कि आरफा खानम के साथ इस शो में न्यूज लॉन्ड्री के अतुल चौरसिया, कारवां के हरतोष सिंह बल, स्क्रॉल से शोएब दानियाल शामिल हुए थे। शो की शुरुआत आरफा खानम ने खुद को सच्चा-ईमानदार पत्रकार बताने से की थी। उन्होंने कहा, “आपने सत्ता का चुनावी गठबंधन तो बहुत सुना होगा, लेकिन ये मीडिया का गठबंधन है। उन्होंने कहा कि लोग उनसे कहते हैं कि क्यों नहीं गोदी मीडिया के खिलाफ आप तमाम सच्चे ईमानदार पत्रकार एक हो जाइए तो हमने आपकी बात सुन लीं और हम आपके बीच हाजिर हैं।”

कन्हैया लाल की हत्या, हिंदू त्योहारों पर प्रतिबंध: नेता जोड़ने निकले थे इंडिया को… भारत के लोगों ने दिया ‘सनातन जवाब’

हाल में संपन्न हुए पाँच विधानसभा चुनावों में से चार राज्यों में आज रविवार (3 दिसंबर 2023) मतगणना जारी है। इसमें भाजपा राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में सरकार बनाती दिख रही है। वहीं, तेलंगाना में सत्ताधारी BRS से आगे कॉन्ग्रेस है। राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कॉन्ग्रेस की सरकार थी और अब वहाँ भाजपा लीड कर रही है। वहीं, मध्य प्रदेश में भाजपा वापसी कर रही है।

इन सब चुनावों में राजस्थान का चुनाव बेहद ही खास था। यहाँ मुकाबला काँटे का बताया जा रहा है। कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना था कि प्रदेश में अशोक गहलोत के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस सरकार फिर से वापसी करेगी और हर पाँच साल पर सरकार बदलने का यहाँ का पुराना रिवाज टूटेगा। हालाँकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजस्थान की एक रैली में कॉन्ग्रेस की सरकार को उखाड़ फेंकने का आह्वान किया था।

राजस्थान के चुनाव में आतंकी हमले के शिकार हुए टेलर कन्हैया लाल का मुद्दा भी उछला था। राजस्थान कॉन्ग्रेस की सरकार में महिला उत्पीड़न और हिंदुओं पर हमलों हुए लगातार हमलों ने कॉन्ग्रेस सरकार को बैकफुट ला दिया था। प्रदेश में आतंकियों के मनोबल ने इतना बढ़ा था कि वे खुलेआम हमले कर रहे थे और सरकार भी हिंदुओं के रामनवमी और हनुमान जयंती त्योहार में शोभायात्रा निकालने पर प्रतिबंध लगा रही थी।

कॉन्ग्रेस सरकार की मुस्लिम तुष्टिकरण की पुरानी नीति ने राजस्थान में हिंदुओं को उद्वेलित किया और एक बार फिर पुरानी राजनैतिक पार्टी को दोहराते हुए भाजपा की वापसी का रास्ता साफ किया। सामने आ रहे रूझानों से साफ पता चल रहा है कि राजस्थान में कन्हैयालाल की हत्या वाले फैक्टर ने बहुत बड़ा काम किया है। हालाँकि, ‘लाल डायरी’, परीक्षा पत्र का आउट होना, भर्तियों में भ्रष्टाचार, महिलाओं के प्रति हिंसा आदि ने भी इसमें महत्वपूर्ण रोल निभाए।

प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जोधपुर में चुनावी प्रचार के दौरान 12 नवंबर 2023 को कन्हैया लाल को लेकर बेतुका दावा किया था। उन्होंने अपनी सरकार की खामियों को दबाने के लिए कन्हैया लाल की हत्या करने दोनों आरोपितों- रियाज और गौस मोहम्मद को ‘बीजेपी के लोग‘ बता दिया था। दरअसल, पीएम नरेंद्र मोदी ने भी 10 नवंबर 2023 को उदयपुर में एक रैली में इस हत्याकांड का जिक्र किया था।

अशोक गहलोत ने कहा था, “कन्हैया लाल की हत्या करने वाले कौन लोग थे? ये बीजेपी के लोग थे। उन्हें (मोदी) इस बारे में जानकारी नहीं दी गई होगी। जब उन्हें (आरोपितों को) से 4-5 दिन पहले एक मामले में पुलिस स्टेशन ले जाया गया तो यह भाजपा के लोग ही थे जिन्होंने उन्हें जमानत दिलाई थी। क्या वह ये नहीं जानते? फिर वह (मोदी) कैसे बोल सकते हैं?”

उल्लेखनीय है कि 28 जून 2022 को उदयपुर के कन्हैयालाल का गला उनके ही दुकान में घुसकर मोहम्मद रियाज और गौस मोहम्मद ने काट दिया था। उनकी अस्थियों को आज भी विसर्जन का इंतजार है, क्योंकि हत्यारों को आज तक सजा नहीं हुई है। कन्हैयालाल की बर्बर हत्या के बाद हत्यारों ने इसका वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था।

पीएम मोदी ने चितौड़गढ़ की एक जनसभा को संबोधित करते हुए 2 अक्टूबर को कहा था, “यहाँ अशोक गहलोत सोते-जागते मुख्यमंत्री की कुर्सी बचाने में लगे थे और आधी कॉन्ग्रेस उनकी कुर्सी गिराने में जुटी थी। जनता को अपने हाल पर छोड़कर ये लोग आपसी लड़ाई में व्यस्त रहे। कॉन्ग्रेस ने राजस्थान को लूटने में कोई कमी नहीं छोड़ी।”

उन्होंने आगे कहा था, “5 साल में कॉन्ग्रेस सरकार ने राजस्थान की साख को तबाह कर दिया है। मैं बहुत दुखी मन से कहता हूँ कि जब अपराध, दंगे, महिलाओं-दलितों पर अत्याचार की बात होती है तो राजस्थान टॉप पर आता है। मैं बहुत दुःख के साथ आपने पूछता हूँ कि क्या 5 साल पहले आपने इसलिए राजस्थान को वोट दिया था?”

पीएम मोदी ने कहा था कि उदयपुर में जो हुआ उसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। लोग कपड़े सिलवाने के बहाने आते हैं और बिना किसी डर या खौफ के दर्जी का गला काट देते हैं, इस मामले में भी कॉन्ग्रेस को वोट बैंक नजर आया। उन्होंने कॉन्ग्रेस से पूछा कि उदयपुर दर्जी हत्याकांड में कॉन्ग्रेस पार्टी ने क्या किया, वोट बैंक की राजनीति की?

दरअसल, कन्हैया लाल की हत्या करने वाले दोनों इस्लामी कट्टरपंथियों के भाजपा होने का दावा सिर्फ अशोक गहलोत ने ही नहीं किया था, बल्कि कॉन्ग्रेस की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने भी किया था। उन्होंने कहा था कि दोनों आतंकी भाजपा के अल्पसंख्यक मोर्चा के सदस्य थे और उनके कई भाजपा नेताओं के साथ फोटो और वीडियो हैं।

हालाँकि, कॉन्ग्रेस का यह दावा पूरी तरह झूठ है। रियाज और गौस मोहम्मद भाजपा के कार्यक्रमों में जाकर फोटो जरूर खींचवा लेते थे, लेकिन वे भाजपा के सदस्य नहीं थे और ना ही उन्हें आधिकारिक तौर कार्यक्रमों में बुलाया जाता था। वे दोनों के भाजपा की हिंदुत्व वाली नीतियों के मुखर आलोचक भी थे। ये कई मीडिया रिपोर्ट में कहा जा चुका है। फिर भी कॉन्ग्रेस झूठे दावे करके प्रदेश की जनता को गुमराह करने की कोशिश पूरे चुनाव के दौरान की।

ढाह दी गई शत्रु संपत्ति काबुल हाउस: 40 साल से फर्जी दस्तावेजों के सहारे रह रहे थे कब्जेदार, पाकिस्तान से है कनेक्शन

देहरादून के बीचों बीच ईस्ट कैनाल पर शत्रु संपत्ति घोषित ऐतिहासिक काबुल हाउस को जिला प्रशासन ने शनिवार (2 दिसंबर 2023) की सुबह ध्वस्त कर दिया। इसमें कई दशकों से साल 1947 के बंटवारे का बाद 17 परिवार रह रहे थे। दो दिन पहले ही इन परिवारों से ये जगह खाली करवा ली गई थी। मौजूदा वक्त में यह 400 करोड़ रुपए की संपत्ति है।

सरकार द्वारा काबुल हाउस को शत्रु संपत्ति घोषित होने के बाद इसके रखरखाव की जिम्मेदारी देहरादून जिला प्रशासन के जिम्मे थी। बताते चलें कि देहरादून प्रशासन की इस जगह को खाली कराने के लिए इन परिवारों के साथ 1984 से ही कानूनी लड़ाई चल रही थी। आखिरकार 40 साल बाद प्रशासन को इसमें कामयाबी मिल गई।

गौरतलब है कि अक्टूबर में ही जिला अदालत ने काबुल हाउस में रह रहे परिवारों को इस परिसर को खाली करने का आदेश दिया था। इसके बाद यहाँ रहने वाले परिवारों ने जिला अदालत के इस फैसले को नैनीताल हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।

नैनीताल हाई कोर्ट ने काबुल हाउस के कब्जाधारियों को जगह छोड़ने के लिए 1 दिसंबर तक का वक्त दिया था। कोर्ट के आदेश के बाद देहरादून प्रशासन ने काबुल हाउस के घरों को आंशिक तौर से सील कर दिया था।

फोटो साभार: aajtak.in

1879 बना कॉबुल हाउस

दरअसल काबुल हाउस कभी अफगानिस्तान के राजा याकूब खान का महल हुआ करता था। इसे आज मंगला देवी कॉलेज कहते हैं। राजा को यहाँ से निर्वासित कर भेजा गया था। इसे याकूब खान ने 1879 में बनवाया था। 1947 के बंटवारे के बाद उसके वशंज पाकिस्तान चले गए। इसके बाद कई लोगों ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर इस पर कब्जा कर लिया था। इसे खाली कराने को लेकर देहरादून प्रशासन 40 साल से कानूनी लड़ाई लड़ रहा था।

क्या है शत्रु संपत्ति

दरअसल शत्रु संपत्तियाँ उन लोगों से जुड़ी संपत्ति को कहा जाता है, जो लोग बंटवारे के दौरान और 1962 और 1965 के युद्ध के बाद भारत छोड़ने के बाद पाकिस्तान और चीन की नागरिकता ले चुके हैं। संसद ने मार्च 2017 में शत्रु संपत्ति (संशोधन और मान्यकरण) अधिनियम 2016 पारित किया था।

इसमें युद्ध के बाद पाकिस्तान और चीन चले गए लोगों की छोड़ी गई संपत्ति पर उत्तराधिकार के दावों को रोकने के प्रावधान किए गए थे। दरअसल दो देशों में युद्ध छिड़ने पर ‘शत्रु देश’ के नागरिकों की संपत्ति सरकार कब्जे में ले लेती है ताकि शत्रु युद्ध के दौरान उसका लाभ न उठा सके।

इसी के तहत भारत ने भी 1962 में चीन, 1965 और 1971 में पाकिस्तान से युद्ध छिड़ने पर भारत सुरक्षा अधिनियम के तहत इन देशों के नागिरकों की संपत्तियों पर कब्जा कर लिया था। इस संपत्ति के तहत ज़मीन, मकान, सोना, गहने, कंपनियों के शेयर और शत्रु देश के नागरिकों की किसी भी दूसरी अन्य तरह की संपत्ति को सरकार अपने अधिकार में ले सकती है।

सरकार के सामने ऐसे कई मामले आए थे, जब शत्रु संपत्ति का बेजा इस्तेमाल किया गया था। शत्रु संपत्ति को लेकर साल 2023 फरवरी में गृह मंत्रालय (एमएचए) के एक अधिकारी ने बयान जारी किया था, “भारत के शत्रु संपत्ति संरक्षक (सीईपीआई) ने शत्रु संपत्तियों का निपटान कर कुल 3,407.98 करोड़ रुपए कमाए हैं।”

जिन 7 कश्मीरी छात्रों ने मनाया था भारत की हार का जश्न, पुलिस ने उनके ऊपर से UAPA हटाई: महबूबा मुफ्ती खुश होकर बोलीं- छात्रों का भविष्य बच गया

विश्व कप के फाइनल में भारत की हार का जश्न मनाने और आपत्तिजनक नारेबाजी करने वाले 7 कश्मीरी छात्रों को कश्मीर की एक अदालत से जमानत मिल गई है। पुलिस ने इन्हें UAPA के तहत गिरफ्तार करके जेल में बंद किया था। लेकिन कुछ समय पहले इनके ऊपर से ये धारा हटा दी गई और इन्हें जेल से रिहाई मिली।

ये सातों छात्र शेर-ए-कश्मीर यूनिवर्सिटी के थे। सूत्रों के हवाले से मीडिया खबरो में बताया गया है कि इन सातों छात्र के ऊपर से इसलिए यूएपीए हटाई गई क्योंकि इनके अभिभावकों ने गलती को स्वीकार कर लिया था। इंडिया टुडे की रिपोर्ट में कहा गया कि चूँकि इन सातों के माता-पिता ने मान लिया था कि इनके बच्चों ने भारत की हार का जश्न मनाकर गलत किया और लिखित में ये आश्वासन दिया कि वो दोबारा ऐसा नहीं करेंगे इसलिए इनके बच्चों के ऊपर से यूएपीए की धारा को हटाया गया।

हालाँकि, ऐसा नहीं है कि इन सातों छात्रों के खिलाफ जाँच भी बंद हो गई, पुलिस के अनुसार अभी ये जाँच चल रही है कि कहीं इनका कोई पाकिस्तानी कनेक्शन तो नहीं है, अगर ऐसा हुआ तो दोबारा से यूएपीए लगाया जा सकता है। इसके अलावा इनके ऊपर आईपीसी की धारा 505 और 506 के तहत केस दर्ज ही है।

गौरतलब है कि यूएपीए के तहत छात्रों पर हुए केस के बाद राजनीतिक दलों ने इस मामले में कड़ी आलोचना की थी। ऐसे में जब उन्हें पता चला कि सातों छात्रों के ऊपर से यूएपीए हटा दिया गया है तो पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने इस पर खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा- “आखिरकार अच्छी समझ की जीत हुई।” उन्होंने लिखा- “खुशी है कि शेर-ए-कश्मीर यूनिवर्सिटी के छात्रों से यूएपीए चार्ज हटा दिए गए हैं। आखिरकार एक अच्छी सोच की जीत हुई। उनका भविष्य खतरे में जाने से बच गया।”

बता दें कि वर्ल्ड कप के बाद एक गैर कश्मीरी छात्र ने इन सातों कश्मीरियों के ऊपर उसे परेशान करने और भारत की हार का जश्न मनाने की शिकायत दी थी। इसी तहरीर पर पुलिस ने इनके खिलाफ यूएपीए की धारा 13 के तहत इनके विरुद्ध मामला दर्ज किया, जो किसी भी गैकानूनी गतिविधि को उकसाने या सलाह देने की शिकायत पर लगाई जाती है। इसके अतिरिक्त छात्रों के ऊपर 505 और 506 धारा भी लगाई गई, जिनके तहत दोषियों को पाँच साल तक की सजा हो सकती है।

कॉन्ग्रेस से छिनेगा छत्तीस-का-गढ़, राजस्थान में आएँगे भगवाधारी, कमल हुई MP में ‘लाडली’: अकेले तेलंगाना के दम पर होगा भारत जोड़ो?

हाल में पाँच राज्यों में संपन्न हुए मतदान वाले चार राज्यों में मतगणना का काम जारी है। अब तक सामने आए रुझानों में भाजपा तीन राज्यों में सबसे आगे चल रही है। वहीं, तेलंगाना में कॉन्ग्रेस ने सत्ताधारी BRS को पछाड़ दिया है। ‘राजस्थान के योगी’ कहे जाने वाले भाजपा के उम्मीदवार महंत बालकनाथ योगी भी अपने प्रतिद्वंद्वी इमरान खान से बहुत आगे चल रहे हैं।

बता दें कि हाल में मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम में मतदान की प्रक्रिया संपन्न हुई है। इनमें आज रविवार (3 दिसंबर 2023) को मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और तेलंगाना में मतगणना जारी है। वहीं, मिजोरम में रविवार को चर्च जाने लोगों को ध्यान में रखते हुए मतगणना का काम सोमवार (4 दिसंबर 2023) को होगा।

रविवार की सुबह 10:30 बजे सामने आए रुझानों में भाजपा राजस्थान, मध्य प्रदेश और राजस्थान में अपने प्रतिद्वंद्वी कॉन्ग्रेस से आगे चल रही है। भारतीय निर्वाचन आयोग के आँकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में भाजपा 143 सीटों पर लीड कर रही है, जबकि कॉन्ग्रेस 59 सीटों पर आगे है। वहीं, अन्य दो सीटों पर आगे है। मध्य प्रदेश में विधानसभा की कुल 230 सीटें हैं और बहुमत के लिए 116 सीटों की जरूरत है।

राजस्थान में भाजपा 98 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि कन्ग्रेस 76 सीटों पर लीड कर रही है। वहीं, सीपीएम को 2 सीटों पर आगे है, जबकि अन्य 13 सीटों पर आगे हैं। राजस्थान में विधानसभा की कुल 200 सीटें है, जिनमें 199 पर मतदान हुए थे। यहाँ बहुमत के लिए 100 सीटों की जरूरत है।

अगर छत्तीसगढ़ की बात करें तो यहाँ भाजपा 32 सीटों पर लीड कर रही है, जबकि कॉन्ग्रेस 29 सीटों पर आगे है। यहाँ सीपीआई एक सीट पर आगे है और अन्य के खाते में भी एक सीट है। छत्तीसगढ़ में विधानसभा की कुल 90 सीटें हैं और यहाँ बहुमत के लिए 46 सीटों की जरूरत है।

सबसे रोमांचक मुकाबला तेलंगाना है। यहाँ कॉन्ग्रेस 52 सीटों पर लीड कर रही है, जबकि सत्ताधारी BRS 29 सीटों पर आगे है। यहाँ भाजपा 6 और सीपीआई एक सीट पर आगे है। तेलंगाना विधानसभा में कुल 119 सीटें हैं और बहुमत के आँकड़े के लिए 110 के आँकड़े की जरूरत है।

राजस्थान के योगी भी आगे

राजस्थान के तिजारा सीट से चुनाव लड़ रहे अलवर से भाजपा सांसद महंत बालकनाथ योगी कॉन्ग्रेस के अपने प्रतिद्वंद्वी इमरान खान से लगभग 8500 वोटों से आगे चल रहे हैं। बालकनाथ उसी नाथ पंथ के योगी हैं, जिसके प्रमुख उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैं। बालकनाथ सीएम योगी के करीबी हैं। उन्हें ‘राजस्थान का योगी’ कहा जाता है।

महंत बालकनाथ की अलवर और उसके आसपास के इलाकों में मजबूत पकड़ मानी जाती है। उनकी छवि को देखते हुए राजस्थान भाजपा में उन्हें उपाध्यक्ष भी बनाया गया है। बालकनाथ ने साल 2019 में अपना पहला लोकसभा चुनाव जीता था। उन्होंने कॉन्ग्रेस के प्रभावशाली नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री भंवर जितेंद्र सिंह को 3 लाख से ज्यादा वोटों से मात दी थी।

आजतक एक्सिस माई इंडिया एग्जिट पोल में राजस्थान में सीएम पद के चेहरे को लेकर लोगों से राय पूछी गई थी। इसमें 10 प्रतिशत लोगों ने कहा था कि वे बालकनाथ को मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं। बालकनाथ ने भाजपा सरकार में मुख्यमंत्री रहीं वसुंधरा राजे और कॉन्ग्रेस सरकार में उपमुख्यमंत्री रहे सचिन पायलट को भी पीछे छोड़ दिया था।

इमरान खान को पहले बसपा ने टिकट दिया था। इसके बाद कॉन्ग्रेस ने उन्हें टिकट दे दिया तो उन्हें कॉन्ग्रेस सीट से तिजारा विधानसभा चुनाव में उतरना उचित समझा। तिजारा मिश्रित आबादी वाला क्षेत्र है। इमरान खान का सिविल कॉन्ट्रैक्ट का बड़ा काम है।

‘अल्लाह हू अकबर’ चिल्लाते हुए चाकू गोद की हत्या, फिलिस्तीन में हमले से नाराज था फ्रांस का कट्टरपंथी मुस्लिम: पुलिस को भी ‘अल्लाह हू अकबर’ से दी धमकी

फ्रांस की राजधानी पेरिस में शनिवार (3 दिसंबर 2023) को एक कट्टरपंथी मुस्लिम ने चाकू और हथौड़े से कई सैलानियों पर हमला कर दिया। प्रसिद्ध एफिल टावर के पास अंजाम दी गई इस घटना में एक जर्मन नागरिक की मौत हो गई है, जबकि दो लोग घायल हो गए हैं। पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। वह फिलिस्तीन में मुस्लिमों के मारे जाने से दुखी था।

हमले के बाद प्रधानमंत्री एलिज़ाबेथ बोर्न ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “हम आतंकवाद के आगे नहीं झुकेंगे।” वहीं, राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने कहा कि वह इस आतंकवादी हमले में मारे गए एक जर्मन के परिवार के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त कर रहे हैं। इस मामले की जाँच वहाँ की आतंकवाद रोधी एजेंसी कर रही है।

आरोपित ने जिस पर्यटक की चाकू गोदकर हत्या की, उसका जन्म 1999 में हुआ था। वहीं, जिन दो अन्य लोगों को उसने घायल किया है, उन पर आरोपित ने हथौड़े से हमला किया। इसके बाद उसने सीन नदी के दूसरी ओर भागने की कोशिश की। हालाँकि, बीर हकीम पुल के पास पुलिस ने उसे घेर लिया। यह क्षेत्र आमतौर पर पर्यटकों और स्थानीय लोगों से भरा रहता है।

गृहमंत्री डर्मैनिन के अनुसार, आरोपित ने एक जोड़े पर हमला किया था। यह जोड़ा फिलीपींस में पैदा हुए थे और वर्तमान में जर्मनी के नागरिक थे। जब एक टैक्सी ड्राइवर ने आरोपित को ऐसा करते हुए देखा तो उसे रोकने की कोशिश की। इसके बाद हमलावर ने दूसरों पर हमला करते हुए नदी पार किया। इस दौरान उसने एक वयक्ति को हथौड़े से घायल कर दिया।

पुलिस ने उसका पीछा किया और टेजर गन का इस्तेमाल करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया गिरफ्तारी के बाद वह ‘अल्लाह हू अकबर’ चिल्लाने लगा और पुलिस को बहुत हिंसक तरीके से धमकाने लगा। पुलिस ने बताया कि आरोपित को अफगानिस्तान और फिलिस्तीन में मुस्लिमों का मारा जाना बर्दाश्त नहीं था। इसलिए उसने यह हमला किया।

लोगों का कहना है कि उसने ‘अल्लाह हू अकबर’ चिल्लाते हुए लोगों पर हमले किए थे। स्थानीय अधिकारी हमलावर को एक कट्टरपंथी इस्लामवादी के रूप में जानते थे और उसकी मानसिक बीमारी का इलाज किया जा रहा था। 26 साल का आरोपित पेरिस के दक्षिण में एसोन्ने क्षेत्र में अपने अम्मी-अब्बू के साथ रहता था।

अधिकारियों का कहना है कि आरोपित हमलावर साल 1997 में पैदा हुआ था और वह फ्रांस का नागरिक है। उसे हत्या और हत्या के प्रयास के मामले में गिरफ्तार कर लिया गया है। इससे पहले उस शख्स ने साल 2016 में एक हमले को अंजाम देने की योजना बनाई थी। हालाँकि, इसमें वह विफल रहा था। इस मामले में उसे चार साल जेल की सजा हुई थी।

दरअसल, 7 अक्टूबर 2023 को इजरायल पर आतंकी संगठन हमास के हमले और बाद में इजरायल द्वारा गाजा पट्टी पर बमबारी को लेकर फ्रांस में यहूदी और मुस्लिम आबादी के बीच तनाव बढ़ गया है। इसको लेकर देश में अलर्ट भी जारी है।

नतीजे आने से पहले ही कॉन्ग्रेस को सताने लगा विधायकों के टूटने का डर: हॉर्स ट्रेडिंग रोकने के लिए शिवकुमार हैदराबाद रवाना

चार राज्यों में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों की आज रविवार (3 दिसंबर 2023) को मतगणना जारी है। इस बीच कॉन्ग्रेस अति आत्मविश्वास में डूब गई। नतीजे आने से पहले ही उसने अपने विधायकों के टूटने का डर सताने लगा है। कहा जात रहा है कि तेलंगाना में संभावित विधायकों को दल-बदल से रोकने के लिए कॉन्ग्रेस हाईकमान ने कर्नाटक के मंत्रियों को तेलंगाना भेजा है। इनमें डीके शिवकुमार का नाम भी शामिल है।

हाईकमान ने जिन नेताओं को हैदराबाद पहुँचने के लिए कहा है, उनमें डीके शिवकुमार के अलावा कैबिनेट मंत्री जमीर अहमद खान, बी नागेंद्र और एनएस बोसराजू हैं। TOI की रिपोर्ट में कहा गया है कि उपमुख्यमंत्री शिवकुमार ने कहा था, “हमें जानकारी मिली है कि BRS हमारे संभावित विधायकों से संपर्क साधने की कोशिश कर रही है। हमें विश्वास है कि हमें स्पष्ट जनादेश मिलेगा और हमारी सरकार बनेगी।”

उधर बोसराजू ने कहा, हम कम से कम 65 सीटें जीतेंगे। हम अपने विधायकों पर नजर रखने के लिए हैदराबाद नहीं जा रहे, बल्कि परिणामों के बाद की व्यवस्थाओं के लिए जा रहे हैं।” उन्होंने कहा कि राज्य में सरकार बनाने के लिए कॉन्ग्रेस को किसी के समर्थन की जरूरत नहीं है।

कॉन्ग्रेस ने सभी चार राज्यों में अपने विधायक दल की बैठकों के समन्वय के लिए पर्यवेक्षक भी नियुक्त किए हैं। राजस्थान में पार्टी ने हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, मधुसूदन मिस्त्री, मुकुल वासनिक और शकील अहमद खान को पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया। छत्तीसगढ़ के लिए अजय माकन, रमेश चेन्निथला और प्रीतम सिंह को पर्यवेक्षक बनाया गया है।

तेलंगाना में कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, दीपादास मुंशी, अजय कुमार, के. मुरलीधरन और के. जे. जॉर्ज को पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। जबकि मध्य प्रदेश के लिए अधीर रंजन चौधरी, पृथ्वीराज चव्हाण, राजीव शुक्ला और चंद्रकांत हंडोरे को नियुक्त किया गया है।

इससे पहले कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा था कि वे सभी पाँच राज्यों के कॉन्ग्रेस उम्मीदवारों को ठहरने की व्यवस्था करेंगे। संभवत: टूट से बचाने के लिए उन्होंने अपने रिसोर्ट में इन उम्मीदवारों को रखने की बात कही थी। हालाँकि, बाद में उन्होंने कहा कि इसके लिए उन्हें किसी कॉल नहीं आया और ना ही इसकी जिम्मेदारी गई।

विधानसभा चुनाव में जीतने वाले कॉन्ग्रेस उम्मीदवारों को कर्नाटक के रिसॉर्ट और होटलों में ठहराने की व्यवस्था करने को लेकर शिवकुमार ने कहा, “कोई विधायक कहीं नहीं जाएगा।” उन्होंने कहा, “किसी ने ना तो मुझे इसकी जिम्मेदारी दी और ना ही मुझे कॉल किया। मुझे विश्वास है कि हम सभी राज्यों में जीत हासिल करेंगे।”

उन्होंने यह भी कहा कि अगर गुजरात जैसी स्थिति उत्पन्न होती है तो पार्टी उनसे जो कुछ भी करने को कहेगी, वह करेंगे। दरअसल, अगस्त 2017 में राज्यसभा चुनाव के दौरान खरीद-फरोख्त से बचाने के लिए गुजरात के 44 नवनिर्वाचितों के ठहरने का प्रबंध करने के लिए उनसे कहा गया था।

7.6% रही GDP, विदेशियों ने कहा था 6%… कोर इंडस्ट्री भी 14 महीने में सबसे तेज: 5 आँकड़ों से जानिए भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार को

भारत की अर्थव्यवस्था लगातार तेजी से बढ़ रही है, इसका प्रमाण फिर से एक बार नए आँकड़ों ने दिया है। अर्थव्यवस्था की पूरी बढ़त से लेकर देश के उद्योग धंधे तेजी से बढ़ रहे हैं तो सरकार की कमाई भी तेजी से बढ़ रही है। भारत, दुनिया में आई अस्थिरता के बाद भी आर्थिक मोर्चे पर बढ़िया प्रदर्शन कर रहा है और इस समय विश्व की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था है। भारत पर यूक्रेन-रूस और इजरायल-हमास के बीच चल रहे युद्ध का भी उतना असर नहीं पड़ा है।

देश की अर्थव्यस्था की बढ़ने की रफ़्तार चालू वित्त वर्ष 2023-24 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितम्बर) में 7.6% रही है। GST का संग्रह एक बार फिर ₹1.6 लाख करोड़ पार कर गया है। अर्थव्यवस्था की रीढ़ समझी जाने वाली इंडस्ट्री जैसे कि सीमेंट, बिजली, कच्चा तेल और गैस आदि में भी बढ़त दिखाई पड़ी है। दिसम्बर माह में आए आँकड़ों से अब पूरी तस्वीर साफ़ हो गई है। भारत की अर्थव्यवस्था कैसे आगे बढ़ रही है, इसको समझने के लिए हाल ही में सामने आए इन पाँच आँकड़ों को समझना होगा।

जीडीपी वृद्धि दर: अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा सूचकांक

जीडीपी वृद्धि दर किसी भी देश की अर्थव्यवस्था की बढ़त को मापने का सबसे मूल साधन है। भारतीय अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2023-24 की दूसरी तिमाही में 7.6% की वृद्धि प्राप्त की है। यह अनुमानों से कहीं अधिक है। इसे पहले वैश्विक संस्थानों ने अनुमान लगाया था कि भारत की आर्थिक तरक्की की गति 6% से लेकर 7% के बीच में रहेगी। हालाँकि, इसने इन अनुमानों को पीछे छोड़ दिया है।

चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7.8% रही थी। इस प्रकार पहले छः महीनों में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7.7% रही है, जो कि किसी भी बड़ी वैश्विक अर्थव्यवस्था से कहीं अधिक है। नए आँकड़ों के अनुमानों से अधिक आने के कारण अब पूरे वित्त वर्ष 2023-24 के लिए अनुमानों में भी वृद्धि हो गई है।

अभी देश के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नाग्रेश्वरन ने कहा है कि उन्हें आशा है कि भारत 6.5% की दर से इस वर्ष बढ़े। उन्होंने इसमें वृद्धि की भी संभावनाएँ जताई हैं। जहाँ भारत की अर्थव्यस्था अनुमानों को पीछे छोड़ रही हैं, वहीं चीन की तरक्की की रफ़्तार धीमी पड़ रही है। चीन की अर्थव्यवस्था वर्ष 2023 की तीसरी तिमाही (जुलाई-सितम्बर) में मात्र 4.9% की धीमी रफ्तार से बढ़ी है।

GST के आँकड़े – अर्थव्यवस्था में वृद्धि से सरकार की कमाई भी बढ़ी

वित्त मंत्रालय हर माह की एक तारीख को पिछले माह में इकट्ठा किए गए वस्तु एवं सेवा कर के आँकड़े जारी करता है। इन आँकड़ों में बढ़त का मतलब होता है कि देश में उद्योग-धंधे तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। नवम्बर 2023 में देश का GST संग्रह ₹1.67 लाख करोड़ रहा है। यह बीते नवम्बर 2022 के मुकाबले 11.9% अधिक है, नवम्बर 2022 में यह ₹1.45 लाख करोड़ था। वित्त वर्ष 2023-24 में यह छठी बार है, जब GST संग्रह ₹1.6 लाख करोड़ के पार हुआ है। बढ़ा हुआ GST संग्रह यह दिखाता है कि देश में कारोबार तेजी से बढ़ रहा है।

पर्चेसिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI)

पर्चेसिंग मैनेजर्स इंडेक्स दिखाता है कि देश के उद्योग धंधों का रुख कैसा रहा है। यह उद्योग धंधों को मिलने वाले ऑर्डर, उनमें लगने वाली लागत और अन्य मानकों के स्तर पर तैयार होता है। इससे जुड़े प्रश्नों को देश की 400 बड़ी कम्पनियों के पर्चेसिंग मैनेजर्स को भेजा जाता है।

इसके पश्चात आए आँकड़ों को एकत्र करके सूचकांक तैयार होता है। इस सूचकांक में यदि किसी देश की अर्थव्यवस्था 50 से ऊपर का प्रदर्शन करती है तो यह अच्छा संकेत होती है। 50 से नीचे मंदी मानी जाती है। नवम्बर 2023 में भारत का PMI 56.0 रहा है। यह पिछले महीने 55.5 रहा था। इसका अर्थ है कि देश में उद्योग धंधे तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

आठ कोर इंडस्ट्री का सूचकांक

केंद्र सरकार हर माह देश की आठ कोर इंडस्ट्री का सूचकांक भी जारी करती है। यह इंडस्ट्री सीमेंट, स्टील, बिजली, उर्वरक, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद और कोयला हैं। इनमें अक्टूबर माह में 12.1% की वृद्धि हुई है। यह बीते 14 माह में सबसे तेज बढ़ोतरी है। इसमें बिजली क्षेत्र में 20.3% की वृद्धि, सीमेंट में 17.1% और कोयले में 18.4% की वृद्धि हुई है। प्राकृतिक गैस में भी 9.9% और इस्पात में 11% वृद्धि दर्ज की गई है। सीमेंट और बिजली क्षेत्र में बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि देश में निर्माण की गतिविधि में तेजी आई है।

वाहन बिक्री भी दिखाती है बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था

नवम्बर 2023 में कारों की बिक्री ने देश में नया रिकॉर्ड बनाया है। नवम्बर माह में देश में 3.91 लाख कारों की ब्रिक्री हुई है। इसके पीछे अर्थव्यवस्था की मजबूती और त्योहारी सीजन की माँग थी। नवम्बर 2022 में 3.36 लाख कारों की बिक्री हुई थी। इस प्रकार इस नवम्बर में कारों की बिक्री में 16% का उछाल आया है। देश की सबसे बड़ी कम्पनी मारुति सुजुकी ने 1.68 लाख जबकि हुंडई मोटर्स ने 55,128 गाड़ियों की बिक्री की है। टाटा मोटर्स ने 48,337 और महिंद्रा ने 43,708 गाड़ियों की बिक्री की है।

दुपहियों वाहनों की बिक्री में भी उछाल देखने को मिला है। देश की सबसे बड़ी दुपहिया निर्माता हीरो मोटो कोर्प ने 4.7 लाख जबकि दूसरे सबसे बड़े निर्माता होंडा ने 4.2 लाख दुपहिया वाहन बेचे हैं। TVS मोटर्स ने भी 2.87 लाख जबकि बजाज ने 2.18 लाख वाहनों की बिक्री की है। दुपहिया वाहनों की बिक्री में बढ़त दिखाती है कि देश में ग्रामीण बाजारों में भी रौनक आई है।