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एक पूर्व CRPF जवान, एक के बेटे को इस्लामी कट्टरपंथियों ने मार डाला… कॉन्ग्रेस के 2 मंत्रियों को हराया, छत्तीसगढ़ की 2 सीटें जहाँ ‘आम आदमी’ ने खिलाया कमल

छत्तीसगढ़ में 2023 विधानसभा चुनाव की मतगणना अपने अंतिम चरण में आ चुकी है। अब तक के रुझानों में भारतीय जनता पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिलता दिख रहा है। यहाँ की कुल 90 सीटों पर हुए मतदान में भाजपा 54 और कॉन्ग्रेस 35 पर या तो आगे चल रही है या जीत दर्ज कर चुकी है। इस दौरान साजा विधानसभा से भाजपा के ईश्वर साहू और सीतापुर विधानसभा से राजकुमार टोप्पो की जीत खासतौर पर चर्चा में रही।

सजा विधानसभा से जीते ईश्वर साहू, बेटे की हो गई थी हत्या

छत्तीसगढ़ के साजा विधानसभा से भारतीय जनता पार्टी ने ईश्वर साहू को अपना प्रत्याशी बनाया था। ईश्वर साहू बेमेतरा जिले के गाँव बिरनपुर में हुई सांप्रदायिक हिंसा में मारे गए 22 वर्षीय युवक भुवनेश्वर साहू के पिता हैं। ईश्वर साहू का इस सीट पर मुकाबला कॉन्ग्रेस के रविंद्र चौबे से था। रवींद्र चौबे 6 बार से लगातार विधायक और भूपेश बघेल की निवर्तमान सरकार में कैबिनेट मंत्री थे। 8 वें राउंड की समाप्ति के बाद ईश्वर साहू कॉन्ग्रेस के रविंद्र चौबे से 4566 वोटों से आगे चल रहे थे।

9वें राउंड की गिनती के दौरान थोड़े समय के लिए EVM मशीन में कुछ खराबी आई थी। हालाँकि बाद में हुई मतगणना के बाद ईश्वर साहू ने रवींद्र चौबे के खिलाफ लगभग 19 हजार वोटों की निर्णायक बढ़त बना ली है।

गौरतलब है कि बताते चलें कि 8 अप्रैल 2023 को छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में आने वाले गाँव बिरनपुर में अलग-अलग समुदाय के 2 स्कूली बच्चों की साइकिल टकरा गई थी। इस मामूली विवाद में मुस्लिम भीड़ ने हिन्दू छात्र के परिजनों और समर्थकों पर तलवार से हमला किया था। हमले का आरोप अब्दुल, अकबर, इस्माइल समेत 11 आरोपितों पर लगा था। इस भीड़ द्वारा हुए हमले की चपेट में आ कर भुनेश्वर साहू की मौत हो गई थी। विवाद में 3 पुलिसकर्मियों सहित लगभग 1 दर्जन लोग घायल हुए थे।

सीतापुर: CRPF के पूर्व जवान ने कॉन्ग्रेसी मंत्री को हराया

छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में सरगुजा जिले की सीतापुर विधानसभा सीट से कॉन्ग्रेस के अमरजीत भगत को हराने वाले भाजपा के रामकुमार टोप्पो भी खासी चर्चा में हैं। 36 वर्षीय टोप्पो CRPF की QAT (क्विक एक्शन टीम) में हेडकॉन्स्टेबल के पद पर तैनात थे। कई आतंकवाद विरोधी अभियानों में शामिल रहे रामकुमार टोप्पो को तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पुलिस मेडल फॉर गेलेंट्री अवॉर्ड से नवाजा था। रामकुमार टोप्पो ने नौकरी से इस्तीफा दे कर भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था।

आखिरकार टोप्पो के कॉन्ग्रेस की भूपेश बघेल सरकार में खाद्य मंत्री रहे अमरजीत भगत को 16,954 वोटों से हरा दिया। इस बार हार गए अमरजीत भगत भी लगातार 4 बार के विधायक रह चुके हैं।

कमारेड्डी डिपो में बची केवल KVR की बस, KCR और रेवंत रेड्डी दोनों के टायर पंक्चर: एक CM तो दूसरे के CM बनने के चर्चे, पर भाजपाई क्षत्रप के सामने दोनों ने टेके घुटने

तेलंगाना में कमारेड्डी सीट पर भाजपा के प्रत्याशी कटिपल्ला वेंकटरमन्ना रेड्डी (KVR रेड्डी) ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चन्द्रशेखर राव और कॉन्ग्रेस प्रदेश अध्यक्ष रेवंत रेड्डी को हरा दिया है। उनकी इस जीत के चर्चे पूरे देश में और सोशल मीडिया पर हो रहे हैं।

केवीआर रेड्डी से चुनाव में शिकस्त पाने वाले केसीआर जहाँ राज्य के वर्तमान मुख्यमंत्री हैं तो वहीं रेवंत रेड्डी के विषय में यह कयास लगाए जा रहे हैं कि वह राज्य के अगले मुख्यमंत्री हो सकते हैं। वह अभी राज्य के कॉन्ग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हैं।

केवीआर रेड्डी के सामने मुख्यमंत्री केसीआर दूसरे और रेवंत तीसरे नम्बर पर रहे हैं। केवीआर रेड्डी को कुल 66,652 वोट मिले हैं। उन्होंने सीएम केसीआर को 6741 वोटों के अंतर हराया है। केसीआर को यहाँ 59,911 और रेवंत रेड्डी को 54,916 वोट मिले हैं।

केवीआर रेड्डी जीत गए हैं।

54 वर्षीय केवीआर रेड्डी कमारेड्डी के ही रहने वाले हैं। यहाँ उनके जीतने का सबसे बड़ा फैक्टर उनका स्थानीय होना ही है। उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान अपने एक भाषण में कहा था, “कमारेड्डी डिपो की बसें कमारेड्डी में ही रहेंगी और बाहर की बसें वापस चली जाएँगी।”

उनका इशारा इस दौरान रेवंत रेड्डी और सीएम केसीआर पर था। दोनों ही कमारेड्डी में बाहरी प्रत्याशी थे। रेड्डी, पेशे से एक कारोबारी हैं और वह कामारेड्डी में शिक्षण संस्थानों से जुड़े हुए हैं। वह भाजपा से पहले केसीआर की पार्टी बीआरएस और कॉन्ग्रेस से भी जुड़े रहे हैं। केवीआर रेड्डी कमारेड्डी में जिला परिषद के अध्यक्ष भी रहे हैं।

केवीआर रेड्डी पिछले चुनाव में भी भाजपा की तरफ से कामारेड्डी सीट से लड़े थे लेकिन वह चुनाव हार गए थे। हालाँकि, इस हार के बाद उन्होंने अपनी तैयारी चालू कर दी थी और स्थानीय स्तर पर अपना गढ़ मजबूत करने में जुटे हुए थे। केवीआर रेड्डी ने कामारेड्डी के भीतर गाँवों का दौरा किया। जो भी व्यक्ति उनसे मदद माँगने आया उसे मदद दी और क्षेत्र में कई सामुदायिक भवन बनवाए। इस कारण से उनका जनता में अच्छा प्रभाव बना। स्थानीय होने और जनता से जुड़ाव के कारण वह इन दोनों बड़े नेताओं को हराने में सफल रहे।

उनकी इस सफलता के साथ ही भाजपा ने भी तेलंगाना में अब तक सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है। तेलंगाना में भाजपा इस बार के चुनाव में 8 सीटें जीतने में सफल रही है। वह इस बार राज्य में तीसरी सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी है। 2018 चुनावों में भाजपा ने तेलंगाना में मात्र 1 सीट जीती थी।

तन पर वर्दी, हाथ में गुलदस्ता और झुके कंधे: तेलंगाना DGP भागे-भागे गए कॉन्ग्रेस अध्यक्ष रेवंत रेड्डी को बधाई देने, EC ने किया सस्पेंड

चुनाव आयोग ने तेलंगाना के डीजीपी अंजनी कुमार को निलंबित कर दिया है। डीजीपी अंजनी को चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन के कारण निलंबित किया गया है। वह सुबह तेलंगाना कॉन्ग्रेस अध्यक्ष और प्रदेश के अगले मुख्यमंत्री माने जा रहे रेवंत रेड्डी से मिलने पहुँचे थे।

आज (3 दिसंबर 2023) तेलंगाना समेत चार राज्यों के चुनावों की मतगणना हो रही है। मतगणना के दौरान ही जब रुझानों में कॉन्ग्रेस, तेलंगाना की भारत राष्ट्र समिति को पीछे छोड़ती दिखी तो डीजीपी अंजनी कुमार अन्य कुछ अधिकारियों के साथ रेवंत रेड्डी से मिलने पहुँच गए और बाकायदा उन्हें गुलदस्ता देते हुए फोटो भी खिंचवाई।

थोड़ी देर में डीजीपी की रेवंत रेड्डी के साथ तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई और लोग उनकी आलोचना करने लगे। लोगों ने कहा कि एक सेवारत अधिकारी कैसे चुनाव के अंतिम नतीजों को जाने बिना एक दल के मुखिया से मिलने पहुँच गया।

जानकारी के मुताबकि, रेवंत रेड्डी के साथ ही राज्य के नोडल पुलिस अफसर संजय जैन और चुनावी खर्चों का देखरेख करने वाले अधिकारी महेश भागवत भी रेवंत रेड्डी के पास मिलने पहुँचे थे

गौरतलब है कि 119 सीटों पर हुए तेलंगाना चुनावों में कॉन्ग्रेस 64 सीटों पर आगे है जिनमें से कुछ सीटों पर वह जीत भी चुकी है। इसके प्रदेश अध्यक्ष व तेलंगाना के अगले मुख्यमंत्री माने जा रहे रेवंत रेड्डी, कोडंगल सीट से जीते हैं और एक अन्य सीट कामारेड्डी से हार गए हैं। इस कामारेड्डी सीट पर उन्हें भाजपा के केवी रेड्डी ने हराया है। इसी कमारेड्डी सीट पर अब तक सत्तारूढ़ बीआरएस के मुखिया और राज्य के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव भी हार गए हैं।

वहीं, अंजनी कुमार 1990 बैच के आईपीएस अफसर हैं। वह दिसम्बर 2022 में तेलंगाना के डीजीपी बने थे। इससे पहले हैदराबाद के पुलिस कमिश्नर रहे थे। उनका नक्सल विरोधी अभियान में काफी अनुभव रहा है, वह इनसे लड़ने के लिए बनाई गई यूनिट ‘ग्रेहाउंड्स’ के मुखिया थे।

3 राज्य जीत PM मोदी ने ‘4 जाति’ को सशक्त करने का दोहराया संकल्प, चुनावी वादों को शत-प्रतिशत पूरा करने की दी गारंटी: कहा – ‘भारत माता की जय’ हमारा मंत्र

मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भाजपा की बड़ी जीत को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईमानदारी, पारदर्शिता और सुशासन की जीत करार दिया। उन्होंने कहा कि तेलंगाना में भी भाजपा के प्रति समर्थन लगातार बन रहा है। उन्होंने कहा कि इस चुनाव में देश को जातियों में बाँटने की बहुत कोशिशें हुईं, लेकिन वो लगातार कह रहे थे कि उनके लिए देश में 4 जातियाँ हैं – नारी शक्ति, युवा शक्ति, किसान और गरीब परिवार। उन्होंने कहा कि इन 4 जातियों को सशक्त करने से ही देश सशक्त होगा।

उन्होंने कहा कि आज बड़ी संख्या में हमारे OBC, जनजातीय समाज के साथी इसी वर्ग में आते हैं। उन्होंने कहा कि इन चारों जातियों ने भाजपा की योजनाओं और रोडमैप को लेकर बहुत उत्साह दिखाया है। उन्होंने कहा कि आज हर गरीब, वंचित, किसान, फर्स्ट टाइम वोटर और जनजातीय समाज के लोग, महिलाएँ, युवा ये सोच कर खुश हैं कि ये उनकी अपनी विजय है। उन्होंने कहा कि हर वो नागरिक इसे अपनी सफलता समझ रहा है जो 2047 में भारत को एक विकसित राष्ट्र के रूप में देखना चाहता है।

उन्होंने विशेष रूप से देश की नारी-शक्ति का अभिनन्दन करते हुए याद दिलाया कि वो रैलियों में कहते थे कि नारी-शक्ति भाजपा का परचम लहराने के लिए शान से निकली है। उन्होंने कहा कि जब नारी शक्ति किसी का कवच बन जाए तो उसे कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ का जिक्र करते हुए कहा कि आज हर बहन-बेटी को साफा-साफ़ लगता है कि भाजपा नारी सम्मान एवं सुरक्षा की सबसे बड़ी गारंटी है, भाजपा सरकार में ही उसे प्रतिनिधित्व मिल रहा है।

उन्होंने बताया कि महिलाओं ने देखा है कि 10 वर्षों में भाजपा ने उन तक पानी, बिजली, गैस और शौचालय सहित अन्य बुनियादी सुविधाएँ पहुँचाईं, उन्हें रोजगार-स्वरोजगार देने के लिए निरंतर भाजपा काम कर रही है। उन्होंने कहा कि महिलाओं ने इस पूरे चुनाव में भाजपा की जीत की जिम्मेदारी उठा ली थी। उन्होंने महिलाओं से को आश्वासन दिया कि ये मोदी की गारंटी है कि उनसे किए गए वादे शत-प्रतिशत पूरे होंगे – ये मोदी की गारंटी है और इसका अर्थ है गारंटी पूरा होने की गारंटी।

पीएम मोदी ने कहा, “कॉन्ग्रेस सरकारें भर्ती लीक और पेपर घोटालों में घिरी थी। अब इन तीनों राज्यों के सत्ताधारी दल सरकार से बाहर हैं। युवाओं में भरोसा बढ़ रहा है कि भाजपा उनकी आकांक्षाएँ समझती हैं, उनके लिए काम करती है। देश का युवा जनता है कि भाजपा सरकार उनके लिए नए अवसर बनाती है। जनजातीय समाज भी अब खुल कर अपनी बात रख रहा है। वो कॉन्ग्रेस की नीतियों की वजह से 7 दशक तक पीछे रहा। आज इनकी जनसंख्या 10 करोड़ है। गुजरात में हमने देखा कि कॉन्ग्रेस ने इस समाज को पूछा तक नहीं।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि राजनीति के इतने वर्षों में वो हमेशा भविष्यवाणियों से दूर रहे, लेकिन इस बार उन्होंने इसे तोड़ा और ये कहा था कि राजस्थान में कॉन्ग्रेस सरकार लौट कर नहीं आएगी। उन्होंने कहा कि राजस्थान की जनता पर उनका भरोसा था। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश ने भी दिखाया है कि भाजपा के सेवा भाव का कोई विकल्प नहीं है। छत्तीसगढ़ पर उन्होंने याद किया कि वहाँ की पहली सभा में ही उन्होंने कहा था कि वो कुछ माँगने नहीं आए हैं, बल्कि शपथग्रहण समारोह में निमंत्रण देने आए हैं।

उन्होंने कहा कि हर चुनाव में तेलंगाना में भाजपा का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि तेलंगाना की जनता की सेवा में उनकी पार्टी कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेगी। उन्होंने कहा कि ये चुनाव परिणाम दुनिया भर के निवेशकों को एक नया भरोसा देगा। उन्होंने कहा कि आज दुनिया भारतीय लोकतंत्र और जनता की परिपक्वता देख रही है, जो पूर्व बहुमत वाली स्थिर सरकार के लिए वोट कर रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने सेवा-सुशासन का नया मॉडल पेश किया है, जिसके केंद्र में देश और देशवासी है, ‘भारत माता की जय’ इसका मन्त्र है।

AAP ने उतारे 215 उम्मीदवार, मिली 0 सीट, 1% वोट भी नहीं मिला: मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ की जनता ने अरमानों पर फेरा झाड़ू

भारतीय जनता पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए तीनों हिन्दी भाषी राज्यों में जीत दर्ज की है। मध्य प्रदेश में उसने सत्ता वापस हासिल करने में सफलता पाई है तो वहीं राजस्थान और छतीसगढ़ से उसने कॉन्ग्रेस को बाहर कर दिया है। कॉन्ग्रेस भी तेलंगाना जीतने में सफल रही है। लेकिन इन चुनावों में हिस्सा लेने वाली आम आदमी पार्टी की हालत अब भी खराब है।

आम आदमी पार्टी ने इनमें से मध्य प्रदेश, छतीसगढ़ और राजस्थान में अपने 215 उम्मीदवार उतारे थे। राजस्थान और मध्य प्रदेश में पार्टी मुखिया और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने भी जम कर प्रचार किया था। हालाँकि, इन राज्यों के चुनावी नतीजों में AAP (खबर लिखने तक) कहीं नहीं दिख रही है।

राजस्थान में आम आदमी पार्टी ने 88 सीट पर अपने उम्मीदवार खड़े किए थे जिनमें से एक भी जीत हासिल नहीं कर सका है। राजस्थान में पार्टी का वोट प्रतिशत भी 0.3% रहा है। इसके अधिकांश उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई है। कई जगह AAP के उम्मीदवारों से अधिक वोट NOTA (इनमें से कोई नहीं) के विकल्प को मिले हैं।

कमोबेश ऐसी ही हालत AAP की मध्य प्रदेश में भी है। यहाँ AAP ने 70 उम्मीदवार उतारे थे। मध्य प्रदेश में सिंगरौली और दमोह सीट पर इसके उम्मीदवारों की बड़ी चर्चा हुई थी। सिंगरौली में AAP की प्रदेश अध्यक्ष और वर्तमान मेयर रानी अग्रवाल जबकि दमोह से चर्चित टीवी एक्ट्रेस चाहत पांडे को टिकट मिला था। चाहत पांडे के कई वीडियो भी वायरल हुए थे।

चाहत पांडे दमोह में मात्र 11 राउंड की गिनती के बाद 1,418 वोट पा सकी हैं और चौथे स्थान पर रही हैं। चाहत पांडे की सीट पर भाजपा के उम्मीदवार जयंत मलैया 60 हजार वोट पा चुके हैं। रानी अग्रवाल भी अपनी सीट सिंगरौली के मुकाबले में चौथे स्थान पर रही हैं। उन्हें कुल 8,008 वोट मिले हैं। इस सीट पर भी भाजपा उम्मीदवार राम निवास शाह आगे हैं।

AAP को मध्य प्रदेश के भीतर 0.4% वोट मिला है। यहाँ भी इसके अधिकांश उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई है।

इन दोनों राज्यों के अलावा 90 विधानसभा वाले छत्तीसगढ़ में भी AAP 57 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। यहाँ भी इसके कोई उम्मीदवार जीतने में नहीं कामयाब हो सके हैं। यहाँ इसके कई उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई है। छतीसगढ़ में AAP को लगभग 0.9% वोट मिले हैं।

आम आदमी पार्टी की तीनों राज्यों में इस करारी हार पर शिरोमणि अकाली दल के मुखिया सुखबीर सिंह बादल ने पंजाब सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा है कि भगवंत मान ने AAP को ₹500 करोड़ की मदद दी फिर भी वह इन चुनावों में एक सीट तक नहीं जीत सके।

AAP या फिर केजरीवाल की तरफ से इन चुनाव नतीजों और उनकी पार्टी के प्रदर्शन पर अभी कोई ट्वीट या आधिकारिक बयान नहीं आया है।

घी-चावल वाला अक्षत कलश, हल्दी, भगवान राम की तस्वीर… घर-घर पहुँच रहा अयोध्या मंदिर का निमंत्रण

अयोध्या में बन रहे श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा समारोह के लिए तैयारियाँ जोरों पर हैं। अब इसके लिए श्रीराम मंदिर से अक्षत को लोगों के घरों तक पहुँचाया जा रहा है। देश के अलग-अलग शहरों में इसके लिए अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से अक्षत पहुँच रहे हैं। वाराणसी में भी इसी क्रम में अक्षत कलश पहुँचे हैं। इन अक्षत कलशों में पहुँचे अक्षतों को अब 40 क्विंटल चावल और घी के साथ मिश्रित किया जाएगा। इसके पश्चात इन्हें वाराणसी के घर-घर बाँटा जाएगा। यह अक्षत विशेष कलशों में वाराणसी पहुँचे हैं, जिन्हें बाँटने की जिम्मेदारी ‘विश्व हिन्दू परिषद (VHP)’ को दी गई है।

‘विश्व हिन्दू परिषद’ के काशी विभाग के प्रभारियों को पाँच कलश सौंपे गए हैं। जब इनकी मात्र बढ़ा ली जाएगी तब इन्हें हल्दी और प्रभु श्रीराम की एक तस्वीर के साथ वाराणसी के घरों में बाँटा जाएगा। इसके जरिए लोगों को श्रीराम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा में आने का निमन्त्रण दिया जाएगा।

गौरतलब है कि अयोध्या में बन रहे श्रीराम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम 22 जनवरी को होना है। मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी शामिल होंगे। इस दिन से मंदिर को आधिकारिक तौर पर श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाएगा। अभी मंदिर निर्माण के आखिरी चरण का काम चल रहा है।

इस विषय में राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने PTI को दिए वीडियो इंटरव्यू में कहा था कि अयोध्या के भगवान राम के भव्य मंदिर में 22 जनवरी, 2024 को प्राण प्रतिष्ठा होगी। नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि भगवान राम के मंदिर का भूतल 31 दिसंबर, 2023 तक पूरी तरह से तैयार हो जाएगा। 31 दिसंबर तक भगवान रामलला की जिस मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा होगी, उसका भी अंतिम स्वरूप मिल जाएगा।

राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने लोगों से अपील की थी कि वे उस दिन अयोध्या न आएँ और अपने घर-गाँव में ही पूजा करें। लोग अपने गाँव में, शहर में, घरों में प्राण प्रतिष्ठा का उत्सव मनाएँ। प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम का टीवी पर प्रसारण भी होगा। ट्रस्ट का कहना है कि 22 जनवरी, 2024 को अयोध्या में भारी भीड़ होने की संभावना है, जिससे सुरक्षा और सुविधाओं में दिक्कतें आ सकती हैं।

कद को लेकर प्रियंका गाँधी ने कसा था तंज, MP में भाजपा की प्रचंड जीत के बाद बोले सिंधिया – ग्वालियर-मालवा ने दे दिया जवाब: पूरे चुनाव में कॉन्ग्रेस के निशाने पर थे ‘महाराज’

मध्य प्रदेश के विधानसभा नतीजों के बाद वहाँ सरकार का भारतीय जनता पार्टी की सरकार का बनना तय है। इस दौरान नतीजों के रुझानों में कॉन्ग्रेस के पिछड़ने पर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने प्रियंका गाँधी वाड्रा के साथ अपना पुराना हिसाब बराबर किया है।

सिंधिया ने कॉन्ग्रेस नेता प्रियंका गाँधी के उनकी लंबाई पर किए तंज का माकूल जवाब दिया है। ग्वालियर-मालवा क्षेत्र में भाजपा के शानदार प्रदर्शन पर एक सवाल का जवाब देते हुए सिंधिया ने कहा, “किसी ने मेरे कद के बारे में बात की थी। ग्वालियर-मालवा के लोगों ने दिखा दिया है कि उनका कद कितना बड़ा है।” दरअसल, बीते महीने दतिया में एक रैली में प्रियंका गाँधी ने कभी उनकी पार्टी में रहे अब प्रतिद्वंद्वी बने सिंधिया पर निशाना साधते हुए उन्हें गद्दार करार दिया था। प्रियंका ने ये भी कहा था कि उन्होंने लोगों के जनादेश के साथ विश्वासघात किया।

प्रियंका ने कहा था, “उनके (भाजपा के) सभी नेता थोड़े अजीब हैं। पहले – हमारे सिंधिया। मैंने उनके साथ यूपी में काम किया है, दरअसल, उनका कद थोड़ा छोटा है लेकिन अहंकार में ‘वाह भाई वाह’ है।” प्रियंका ने ये भी कहा था,”हमारे कार्यकर्ता सिंधिया के पास जाया करते थे और उन्हें बताया करते थे कि कैसी दिक्कतें आती थीं। वे कहते थे कि हम उन्हें महाराज कहते हैं तो सुनवाई होती है। ऐसा नहीं कहते तो बात ही नहीं सुनी जाती।”

यही नहीं, प्रियंका गाँधी सिंधिया के परिवार पर भी तंज कसा था। उन्होंने कहा था कि ज्योतिरादित्य सिंधिया अपनी पारिवारिक परंपरा को ही आगे बढ़ा रहे हैं। गद्दारी बहुत से लोगों ने की, लेकिन सिंधिया ने ग्वालियर और चंबल की जनता से गद्दारी की और सरकार ही गिरा दी। दरअसल, प्रियंका गाँधी ने 1857 के विद्रोह के दौरान सिंधिया शाही परिवार के अंग्रेजों का साथ देने को लेकर ही इसे उनकी परंपरा कहा था। बताते चले कि यह 2020 में सिंधिया के नेतृत्व में राजनीतिक विद्रोह के चलते मध्य प्रदेश में कमल नाथ के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार गिर गई थी।

इसके बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया को नरेंद्र मोदी सरकार में राज्यसभा सदस्य और केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री बनाया गया। साल 2023 का विधानसभा चुनाव एक तरह से सिंधिया का इम्तिहान था। इसमें उनके ग्वालियर क्षेत्र में प्रभाव पर बीजेपी की नजर थी और चुनावी नतीजे सिंधिया को यहाँ पास दिखा रहे हैं।

एमपी चुनावों में बीजेपी के मौजूदा प्रदर्शन को देखते हुए सिंधिया ने कहा, “मैंने कहा था कि भाजपा जीतेगी। मैं मध्य प्रदेश के मतदाताओं को धन्यवाद देना चाहता हूँ जिन्होंने हमें इतना बड़ा बहुमत दिया। प्रधानमंत्री मोदी का नेतृत्व काम आया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा का मार्गदर्शन भी काम आया।” इस दौरान सिंधिया ने मौजूदा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को जन-कल्याणकारी योजनाएँ लाने को भी इसका श्रेय दिया। उन्होंने कहा कि ये योजनाएँ हर दरवाजे तक पहुँचीं और पार्टी को जीत दिलाने में मदद मिली।

भाजपा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि उनके चुनावी अभियान के दौरान कॉन्ग्रेस के नेताओं ने लगातार उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया। उन्होंने कहा, “मैंने बीते तीन साल में मुझ पर लगाए गए सभी आरोपों और बुरी बातों को स्वीकार कर लिया। मैंने कोई जवाब नहीं दिया।”

दरअसल एग्जिट पोल को धत्ता साबित करते हुए मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों 2023 के नतीजों में 230 सीटों में से भाजपा 43 सीटें जीत चुकी थी और 122 सीट पर आगे चल रही है। पार्टी को 165 सीट मिलने की संभावना है। वहीं कॉन्ग्रेस 64 सीटों पर सिमट सकती है तो वहीं अन्य को 1 सीट मिलती दिख रही है।

EVM पर मंथन करना जरूरी, जरूरत हो तो इसे हटाया जाए: 3 राज्यों के नतीजे देख कॉन्ग्रेस प्रवक्ता को सताई लोकतंत्र की चिंता, तेलंगाना पर चुप्पी

मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के विधानसभा चुनावों के रुझानों में करारी हार के बाद कॉन्ग्रेस पार्टी ने EVM (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) पर सवाल खड़े किए हैं। उत्तर प्रदेश के कॉन्ग्रेस प्रवक्ता ने रविवार (3 दिसंबर 2023) को हार का ठीकरा EVM के माथे पर फोड़ते हुए इस पर आत्ममंथन को जरूरी बताया। हालाँकि इसी प्रकार के मतदान के बाद कॉन्ग्रेस पार्टी तेलंगाना में पूर्ण बहुमत से जीत दर्ज करती नजर आ रही है। लेकिन इस पर अंशु अवस्थी ने कुछ नहीं बोला।

उत्तर प्रदेश कॉन्ग्रेस प्रवक्ता अंशू अवस्थी ने यह बयान 44 सेकेंड का एक वीडियो जारी करके दिया है। उन्होंने कहा, “हम बार-बार ये कह रहे हैं कि EVM पर चिंता करने की जरूरत है। मंथन करने की जरूरत है। देश के जनमानस में यह बात है कि EVM में फेर-फेर होता है। हम कहीं भी जीतें या हारें लेकिन EVM पर चिंतन होना चाहिए।”

बकौल अंशू अवस्थी लोगों का EVM पर नहीं बल्कि देश के लोकतंत्र में भरोसा होना जरूरी है। कॉन्ग्रेस नेता ने यह भी कहा कि वो अपनी चिंता चुनाव आयोग को बता चुके हैं। अंशू अवस्थी ने यह भी कहा कि जरूरत हो तो EVM को हटाया जाए।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इससे पहले भी विपक्ष के कई नेता ईवीएम पर सवाल उठा चुके हैं। 2 महीने पहले कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने भी EVM के बदले बैलेट चुनाव कराए जाने की माँग की थी।

EVM मशीन में हेराफेरी और छेड़छाड़ की आशंका जताते हुए मनीष तिवारी ने कहा था कि देश के लोकतंत्र को तकनीकी पर नहीं छोड़ा जा सकता है। वोटिंग के बाद जारी हुए एक्जिट पोल पर भी कॉन्ग्रेस ने तब सवाल उठाए थे। तब उसमें मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार बनते दिखाया गया था।

बताते चलें कि रविवार (3 दिसंबर 2023) को मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और राजस्थान विधानसभा चुनावों के लिए पड़े वोटों की गिनती हुई। अब तक मिले रुझानों के मुताबिक भाजपा ने न सिर्फ मध्य प्रदेश में अपना मुख्यमंत्री पद बरकरार रखा बल्कि छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भी शासन कर रही कॉन्ग्रेस को हरा दिया है। तेलंगाना चुनाव के रुझानों में कॉन्ग्रेस स्पष्ट बहुमत की तरफ बढ़ती दिखाई दे रही है।

जिस चुनाव को बताया था ‘भारत और पाकिस्तान का मैच’, उसे रोहतक के योगी ने जीता: बाबा बालकनाथ के तेज से तिजारा में बुझ गया कॉन्ग्रेस का इमरान

राजस्थान के तिजारा से भाजपा के महंत बालकनाथ योगी ने जीत दर्ज कर ली है। उन्होंने कॉन्ग्रेस के प्रत्याशी इमरान खान को 6173 वोटों से हरा दिया है। उन्हें 20 राउंड की गिनती पूरी होने के बाद 1,10,209 वोट मिले। वहीं उनके प्रतिद्वंद्वी इमरान खान को 1,04,036 वोटों से संतोष करना पड़ा, जो दूसरे स्थान पर रहे। महंत बालकनाथ नाथ संप्रदाय से आते हैं, जिससे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आते हैं। बालकनाथ यादव समाज से आते हैं और हिन्दू धर्म को लेकर खुल कर आवाज़ उठाते रहे हैं।

महंत बालकनाथ योगी के नामांकन के दौरान सीएम योगी भी पहुँचे थे। बाबा बालकनाथ को ‘राजस्थान का योगी’ भी कहा जाता है। वो फ़िलहाल अलवर से भी लोकसभा सांसद हैं। चुनाव से पहले उन्हें राजस्थान में पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष का पद भी दिया गया। वो भी भगवा वस्त्रों में ही रहते हैं। उनका जन्म 16 अप्रैल, 1984 को राजस्थान के अलवर स्थित कोहराना गाँव में हुआ था। महंत खेतानाथ के पास उन्हें 6 वर्ष की उम्र में ही अध्यात्म की शिक्षा के लिए भेज दिया गया था।

इसके बाद वो महंत चाँदनाथ के पास पहुँचे और उनसे दीक्षा ली। उनमें बालक जैसी प्रवृत्तियाँ देख कर उन्हें चाँदनाथ ने ही बालकनाथ नाम दिया। साथ ही उन्हें अपना उत्तराधिकारी भी चुना। इस तरह वो हरियाणा के रोहतक स्थित मस्तनाथ मठ (अस्थल बाहर) के महंत बने। साथ ही वो मस्तनाथ यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति भी हैं। महंत बालकनाथ मात्र 40 वर्ष के हैं, यानी राजनीति में युवा हैं। उनके गुरु चाँदनाथ भी अलवर से सांसद रहे थे। बालकनाथ ने इमरान खान को 2019 के लोकसभा चुनाव में भी हराया था।

जीत के बाद उन्होंने कार्यकर्ताओं की मेहनत को श्रेय देते हुए कहा कि अलवर की जनता का ऋण वो कभी नहीं चुका सकते। उन्होंने कहा कि चुनाव के भीतर देश विरोधी ताकतें जुटी थीं, कॉन्ग्रेस की मानसिकता भी वही हो चुकी है जिसके लोग मंच पर खड़े होकर सनातन धर्म को गाली देते हैं। उन्होंने राजस्थान में अशोक गहलोत की सरकार पर तुष्टिकरण की राजनीति और महिलाओं-किसानों से धोखे का आरोप लगाया। CM बनने के सवाल पर उन्होंने कहा कि उन्हें पार्टी ने तिजारा की जनता की सेवा का अवसर दिया है।

उन्होंने विकास, प्रशासनिक व्यवस्था और कानून का राज़ स्थापित किए जाने को अगली भाजपा सरकार का मुख्य फोकस करार दिया। राजस्थान में बहुमत के लिए 100 सीटें चाहिए, जिसमें से भाजपा 115 सीटें जीतती हुई दिख रही हैं, वहीं कॉन्ग्रेस पार्टी 69 सीटों पर आगे है। महंत बालकनाथ योगी को लोग मुख्यमंत्री के पद का भी दावेदार बता रहे हैं। हालाँकि, उन्होंने इससे इनकार किया है। वसुंधरा राजे, दीया कुमारी और गजेंद्र सिंह शेखावत का नाम भी दावेदारों में है, लेकिन राजेंद्र राठौड़ और सतीश पूनियाँ हार गए हैं।

‘लुंगी पहनी थी इसलिए रेस्टोरेंट में घुसने तक नहीं दिया’: One8Commune में ‘तमिलों के अपमान’ का आरोप, फैन को लौटना पड़ा भूखे पेट

क्रिकेटर विराट कोहली की रेस्टोरेंट चेन One8 Commune पर एकबार फिर भेदभाव करने का आरोप लगा है। ये आरोप तमिलनाडु के एक शख्स ने लगाया है। व्यक्ति का कहना है कि उन्हें मुंबई के जुहू में स्थित One8commune रेस्टोरेंट में लुंगी पहन कर प्रवेश नहीं करने दिया गया।

बताते चलें कि इससे पहले भी साल 2021 में कोहली के रेस्टोरेंट पर LGBTQIA+ समुदाय के साथ भेदभाव करने का आरोप लग चुका है। अब सोशल मीडिया पर रेस्टोरेंट पर भेदभाव करने का आरोप लगाया गया है। शख्स ने इस पोस्ट पर विराट कोहली को भी टैग किया है।

शख्स का कहना है कि रेस्टोरेंट में महज इसलिए एंट्री नहीं दी गई क्योंकि उन्होंने शर्ट के साथ पारंपरिक पोशाक लुंगी (वेष्टी) पहनी थी। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु से मुंबई वो खास जुहू स्थित One8 Commune रेस्टोरेंट के लिए आए थे, लेकिन यहाँ उनके साथ हुए भेदभाव से वो आहत और निराश हैं।

उन्होंने कहा कि वो विराट कोहली के बहुत बड़े प्रशंसक हैं, इसलिए जुहू के जेडब्ल्यू मैरियट होटेल में चेक इन करने के तुरंत बाद वो बेहद उत्सुक होकर उस रेस्टोरेंट में पहुँचे थे। इस दौरान उन्होंने एक बड़े मशहूर ब्रांड रामराज कॉटन की शर्ट और लुंगी पहन रखी थी।

उन्होंने बताया कि रेस्टोरेंट के मैनेजमेंट ने शर्ट लुंगी में उन्हें देखकर उन्हें रेस्टोरेंट के अंदर ही नहीं घुसने दिया। मैनेजमेंट ने कहा कि उनकी पोशाक रेस्टोरेंट के ड्रेस कोड के मुताबिक नहीं है, इसलिए वो अंदर नहीं जा सकते। इसके बाद वो निराश होकर अपने होटल वापस आ गए।

विराट के इस प्रशंसक ने सोशल मीडिया पर कहा है कि उन्हें संदेह है कि विराट कोहली उनकी इस पोस्ट को देखने के बाद रेस्टोरेंट मैनेजमेंट के खिलाफ एक्शन लेंगे, लेकिन वो उम्मीद करते हैं कि ऐसा व्यवहार किसी के साथ न हो।

उन्होंने आगे कहा, “मैं तमिलनाडु की संस्कृति की सम्मानित पोशाक पहनकर वहाँ गया था। अगर उन्होंने मुझे 3/4 लेंथ की रंग-बिरंगी लुंगी या कोई कैजुअल ड्रेस पहने पर टोका होता तो और अंदर नहीं जाने दिया होता तो ईमानदारी से मैं इसे स्वीकार करता।”

वो कहते हैं कि वो इस वीडियो को बनाकर इसलिए पोस्ट कर रहे हैं क्योंकि रेस्टोरेंट ने तमिलों और उनकी पूरी संस्कृति का अपमान किया। उन्होंने कहा, “विराट कोहली के रेस्टोरेंट में उत्सुकता से जाने का ईनाम मुझको यही मिला कि मुझे वहाँ से भूखे पेट लौटना पड़ा।”