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₹83 लाख में दी SFJ आतंकी पन्नू की सुपारी, ‘हिटमैन’ था पुलिस का ‘खबरी’: अमेरिका का दावा, CC-1 और निखिल गुप्ता को बताया साजिश के पीछे

अमेरिका ने पिछले दिनों दावा किया था कि उसने अपनी जमीन पर खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू को मार गिराने की साजिश को नाकाम कर दिया है। इस दावे की जाँच के लिए भारत ने एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया है। अब अमेरिकी न्याय विभाग ने एक बयान जारी कर दावा किया है कि 1 लाख डॉलर (करीब 83 लाख रुपए) में पन्नू की सुपारी दी गई थी। पन्नू आतंकी संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) का सरगना है।

बयान में दावा किया गया है कि इस साजिश के पीछे एक भारतीय अधिकारी और निखिल गुप्ता थे। कथित तौर पर जिस ‘हिटमैन’ को सुपारी दी गई, वह अमेरिकी पुलिस का ‘खबरी’ था। पूरी साजिश में चार लोगों को शामिल बताया गया है। दावा है कि यह साजिश इस साल मई-जून के आसपास रची गई थी।

अमेरिकी न्याय​ विभाग ने अपने बयान में साजिश में शामिल भारतीय अधिकारी की पहचान का खुलासा नहीं किया है। उसे CC1 नाम दिया गया है। 52 साल के निखिल गुप्ता को मास्टरमाइंड बताया गया है। साजिश में शामिल तीसरे और चौथे व्यक्ति की पहचान क्रमश: CS और US के तौर पर बताई गई है। ये दोनों ही अमेरिका के एजेंट हैं। कथित तौर पर पन्नू को मारने के लिए CS ने निखिल गुप्ता से US को मिलवाया था।

अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट का दावा है कि CC1 ने निखिल को पन्नू को मारने का आदेश दिया। निखिल ने US को इसके लिए सुपारी दी थी। पन्नू को मारने के लिए 1 लाख डॉलर में US के साथ डील हुई है। इसमें 15,000 डॉलर का उसे अग्रिम भुगतान किया गया था। US को यह पैसे CC1 और निखिल ने न्यूयॉर्क में दिलवाए। इसकी कुछ तस्वीरें भी बाहर आई हैं। जस्टिस डिपार्टमेंट का कहना है कि निखिल गुप्ता को अमेरिकी सरकार के कहने पर चेक रिपब्लिक ने गिरफ्तार कर लिया है।

गौरतलब है कि भारत ने इस मामले में जाँच के लिए एक उच्च स्तरीय कमिटी का गठन किया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक प्रेस रिलीज जारी कर कहा है कि अमेरिका द्वारा दी गई जानकारी को भारत गंभीरता से लेता है और इस विषय में जाँच कर रहा है। जाँच कमिटी का गठन 18 नवम्बर 2023 को किया गया था।

अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट के इस दस्तावेज में 18 जून 2023 को कनाडा में हुई खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का भी जिक्र है। निज्जर की हत्या का आरोप कनाडा ने भारत पर लगाया था, जिसे भारत ने बकवास बताया था।

जिस पाकिस्तानी मौलवी ने दिया ‘सर तन से जुदा’ का नारा, जिसे सुन टीचर से लेकर नेता तक की हुई हत्या; उसका ही फैन है लारेब हाशमी

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 24 नवंबर 2023 को सरकारी बस कंडक्टर पर ‘चापड़’ से हमला करने वाला बी.टेक छात्र लारेब हाशमी (20) पाकिस्तान के कट्टरपंथी मौलवी खादिम हुसैन रिजवी का फैन निकला। पुलिस जाँच में सामने आया कि वो मौलवी खादिम हुसैन रिजवी की वीडियोज को सुनता था।

उसने हमले के बाद बनाए गए वीडियो में भी इस मौलवी का जिक्र किया था। उसका कहना था कि हरिकेश विश्वकर्मा ने इस्लाम का अपमान किया इसलिए उसने उसे मारा। हालाँकि प्रत्यक्षदर्शी ड्राइवर मंगल प्रसाद ने बताया था कि लारेब ने किराए को लेकर हुई बहस के बाद जानलेवा हमला किया।

खादिम हुसैन रिजवी का दीवाना था लारेब हाशमी

प्रयागराज के यूनाइटेड कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड रिसर्च में हाशमी बीटेक छात्र था। अपनी वीडियो में लारेब ने बोला था, “वो (हरिकेश विश्वकर्मा) मुस्लिम को गाली दे रहा था। मैंने उसे मारा है इंशाअल्लाह वो बचेगा नहीं, ए खादिम हुसैन रिज़वी, आपने कहा था, अल्लाह के नाम पर निकलो, फरिश्ते आएँगे, इस्लाम के दुश्मनों की लाशों का ढेर लगा दो।”

रिजवी से प्रेरित लारेब कह रहा था, “आपने (रिज़वी) हमसे कहा था कि अगर हम अल्लाह के रास्ते पर चलेंगे तो फ़रिश्ते आएँगे। आपने कहा है कि न केवल एक शख्स को मार डालो बल्कि इस्लाम के दुश्मनों की लाशों का ढेर लगा दो।”

जिस मौलाना रिज़वी का ये लारेब हाशमी जिक्र कर रहा था। वो पाकिस्तान के कट्टर इस्लामिक संगठन तहरीक-ए-लब्बैक (TLP) का संस्थापक था। इस कुख्यात इस्लामिक मौलवी की 1955 से लेकर 2020 तक पाकिस्तान में तूती बोलती थी।

इसने वहाँ सख्त ईशनिंदा कानूनों को संरक्षित करने के लिए एक अभियान चलाया था। वह वहाँ खासा मशहूर था खासकर पाकिस्तान के सबसे अधिक आबादी वाले प्रांत पंजाब में वो खासा सक्रिय था। रिज़वी 19वीं सदी के इस्लामिक उपदेशक, बरेलवी दीन की नींव रखने वाले इमाम अहमद रज़ा खान बरेलवी का चेला था।

‘ईशनिंदा’ के नाम पर काटा था खासा बवाल

रिजवी को पाकिस्तान में हिंसक विरोध प्रदर्शनों के लिए जाना जाता है। साल 2017 में उनके किए प्रदर्शनों में कम से कम छह लोगों की जान गई और 200 लोग घायल हो गए थे।

ये प्रदर्शन महज इस बात पर किए गए थे कि पाकिस्तानी सरकार ने चुनावों में ली जाने वाली कसम में एक मामूली बदलाव किया था, जिसका संबंध पैगंबर मुहम्मद से जुड़ा था। इस बदलाव से अहमदी संप्रदाय को लाभ पहुँचने वाला था।

जनता के गुस्से को भाँपते हुए पाकिस्तानी सरकार ने इसे ‘क्लर्क की गलती’ मानते हुए तुरंत अपना फैसला रद्द कर दिया। इसके बाद भी विरोध जारी रहा और तत्कालीन कानून मंत्री के इस्तीफा सौंपने के बाद ही इसे बंद किया गया।

रिजवी की छत्रछाया में साल 2018 में टीएलपी ने पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट के आसिया बीबी को बरी किए जाने के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। उन पर ईशनिंदा का झूठा आरोप लगाया गया और उन्हें 8 साल मौत की सजा के इंतजार में जेल में बिताने पड़े।

इसके बाद ही रिज़वी को लेकर पाकिस्तानी सरकार हरकत में आई और उसे हिरासत में लिया गया। उस पर देशद्रोह और राजद्रोह का मामला दर्ज किया गया। इसी इस्लामिक मौलवी रिजवी ने ‘पैगंबर मुहम्मद कार्टून प्रतियोगिता’ का ऐलान करने वाले डच राजनेता गीर्ट वाइल्डर्स के खिलाफ प्रदर्शन किया था।

तब उसने डच राजदूत को देश से निष्कासित करने और नीदरलैंड के साथ सभी राजनयिक संबंधों को खत्म करने की भी माँग की थी। यही नहीं 2020 में फ्रांसीसी स्टायरिकल मैग्जीन शार्ली एब्दो के पैगंबर मोहम्मद के कार्टून छापने पर फ्राँस के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में रिज़वी सबसे आगे रहा था।

तब रिजवी ने फ्राँसीसी उत्पादों के बहिष्कार का भी आह्वान किया था। इसके अलावा उसने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान से इस्लामाबाद से फ्राँसीसी राजदूत को वापस भेजने की माँग भी की थी।

इन विरोध प्रदर्शनों के दौरान यूरोपीय देश ने कट्टरपंथी इस्लामी आतंकवाद से लड़ने की कसम खाई थी। इसके बाद रिज़वी ने पाकिस्तान को ‘इस्लामोफोबिया’ के कथित कृत्य के लिए फ्रांस के खिलाफ परमाणु हमले शुरू करने को कहा था।

उसकी मौत के बाद भी टीएलपी ने ईशनिंदा के नाम पर खादिम रिज़वी की हिंसा की विरासत को संभाल के रखा है। अब उसका बेटा साद हुसैन रिज़वी कट्टरपंथी इस्लामी पार्टी का नेतृत्व कर रहा है और मुल्क को अंधकार युग में धकेल रहा है।

गैर-मुस्लिम रिजवी नजर में इंसान नहीं

कट्टरपंथी रिजवी ने अपने जिंदा रहते क्रूर हिन्दू और सिख विरोधी बयानबाजी को खासा बढ़ावा दिया था। इस वजह से पाकिस्तान में इन मजहबी समुदायों को हाशिए पर धकेल कर उनका बहिष्कार किया गया।

एक बगैर तारीख के वीडियो में खादिम हुसैन रिज़वी को ‘काफ़िरों’ की तुलना (गैर- मुस्लिमों के लिए बेइज्जती भरा लफ्ज) लैट्रिन से करते देखा गया था। उसने कहा था, “एक मुस्लिम का काफिर से रिश्ता लैट्रिन की तरह ही एक दायित्व है। जैसे आप लैट्रिन में जाते हैं क्योंकि आपको इसकी जरूरत है। आप वहाँ दुर्गंध सूंघने के लिए नहीं जाते हैं।”

एक अन्य वीडियो में रिजवी को सोमनाथ मंदिर लूटने वाले महमूद गजनवी की तारीफ करते सुना जा सकता। उसने यह भी दावा किया था कि इस्लामिक आक्रमणकारी के घोड़ों की टापों को सुनकर हिन्दू महिलाओं का गर्भपात हो जाता था।

पाकिस्तान अनटोल्ड के एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में खादिम हुसैन रिज़वी को हिंदुओं पर हमलों, मंदिरों और मूर्तियों के अपमान को जायज ठहराते हुए देखा गया था।

उसने कहा था, “महमूद गजनवी ने जब सोमनाथ की मूर्ति को तोड़ना शुरू कर दिया। हिन्दू उसके पास गए और इसरार किया- हे महमूद! हमारे भगवान को मत तोड़ो। हम आपको इस मूर्ति के भार से भी अधिक सोना देंगे। महमूद ने जवाब दिया था, मेरे पैगम्बर ने मुझे मूर्तियाँ तोड़ना सिखाया। उन्होंने मुझे उन्हें बचाना नहीं सिखाया।”

उसे पाकिस्तान में सिख तीर्थस्थल ‘करतारपुर साहिब’ को ‘गंदा’ करार देते और सिख समुदाय के खिलाफ नफरत भरा भाषण देते हुए भी देखा गया था। ऐसे में हैरानी की बात नहीं कि प्रयागराज का हमलावर लारेब हाशमी खादिम हुसैन रिज़वी का मुरीद था।

ईशनिंदा हत्याओं को ठहराया जायज

बता दें कि खादिम हुसैन रिज़वी ने पाकिस्तान के प्रमुख राजनेता और पंजाब के तत्कालीन गवर्नर सलमान तासीर के हत्यारे के समर्थन में रैली की थी। तासीर ने ईशनिंदा के झूठे केस में फँसाई गई आसिया बीबी को सार्वजनिक तौर से अपना समर्थन दिया था।

उनके ‘मुर्तद’ होने का ऐलान कर उनके अंगरक्षक मुमताज कादरी ने उन्हें गोली मार दी। रिज़वी और उसके समर्थकों ने कादरी का समर्थन किया और उसे ‘हीरो’ कहा। दिलचस्प बात यह है कि कादरी की फाँसी के बाद ही इस्लामी उपदेशक रिजवी टीएलपी की नींव रखी थी।

इतना ही नहीं खादिम रिज़वी ने तनवीर अहमद नामक पाकिस्तानी को भी अपना समर्थन दिया था। अहमद ने स्कॉटलैंड के ग्लासगो शहर में ईशनिंदा के आरोप में एक अहमदी दुकानदार की हत्या कर दी थी।

अहमद को 27 साल की जेल की सजा सुनाए जाने के बाद रिजवी ने कहा, “मुझे इस बात पर फख्र है कि हम संपर्क में हैं और यह फख्र फैसले के दिन और उससे आगे तक बना रहेगा।”

बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन ने बताया था कि कैसे खादिम रिज़वी उनकी किताब ‘लज्जा’ के जरिए ईशनिंदा करने के लिए उन्हें फाँसी पर चढ़ाना चाहते थे। उन्होंने एक ट्वीट में कहा, “यह मजहबी नेता मुझे मारना चाहता था और उसने इस्लाम के नाम पर लाखों पाकिस्तानी आंतकवादियों को मुझे मारने के लिए उकसाया है। उसने दावा किया कि उसने मेरी किताब पढ़ी, लेकिन पक्के तौर पर उसने ऐसा नहीं किया। उसने झूठ बोला।”

ईशनिंदा के हत्यारों के लिए प्रेरणा

कथित ईशनिंदा करने वालों की हत्याएँ करने वाले कई अपराधियों के लिए खादिम हुसैन रिज़वी प्रेरणा रहा। खतीब हुसैन नाम के एक मुस्लिम छात्र ने मार्च 2019 में पाकिस्तान के बहावलपुर शहर में अपने अंग्रेजी प्रोफेसर पर ईशनिंदा का झूठा आरोप लगाने के बाद उसे चाकू मार दिया था। ये भी रिज़वी के वीडियो से प्रेरित था और शायद सोशल मीडिया के जरिए कट्टरपंथी बना।

इससे पहले पाकिस्तान के चारसद्दा शहर में 2018 में अन्य छात्र ने अपने स्कूल के प्रिंसिपल पर ईशनिंदा का आरोप लगाकर गोली मारकर उसकी हत्या कर दी।

इस अनाम छात्र ने कबूला था “मैंने यह हत्या की और मैंने इसे स्वीकार कर लिया। यह अल्लाह का दिया आदेश था।” इस छात्र नें 2017 में टीएलपी की बैठकों में शिरकत की थी।

ईशनिंदा, STSJ नारेबाजी और पाकिस्तानी

गौर देने वाली बात यह है कि ‘सर तन से जुदा (STSJ)‘ का जानलेवा नारा खादिम हुसैन रिज़वी की देन है। इसे भारत में इस्लामवादियों ने कमलेश तिवारी, यति नरसिघानंद सरस्वती और नूपुर शर्मा जैसे हिंदुओं के खिलाफ हथियार बनाया।

जब कादरी ने पंजाब के तत्कालीन गवर्नर सलमान तासीर की हत्या की थी। इसके बाद 2011 में रिज़वी ने हत्यारे के लिए समर्थन जुटाने के लिए एक मार्च निकाला था। इस जुलूस के दौरान दो नारे जमकर लगाए गए थे। एक था ‘रसूल अल्लाह, रसूल अल्लाह’ और दूसरा था, ‘गुस्ताख-ए-रसूल की एक ही सज़ा, सर तन से जुदा, सर तन से जुदा।’

रिज़वी सामूहिक प्रदर्शनों के दौरान लोगों से जब पूछता था, ‘गुस्ताख-ए-रसूल की एक ही सज़ा?’ तब जवाब में प्रदर्शनकारी ‘सर तन से जुदा, सर तन से जुदा’ कहकर जवाब देते थे।

रिज़वी की 2020 में मौत गई, लेकिन उसके नारे पाकिस्तान, भारत और बांग्लादेश में हत्यारे इस्लामवादियों के बीच आज भी जिंदा है। ये लोग लगातार ईशनिंदा करने वाले लोगों के सिर काटने की माँग करते हैं। इसके अलावा कई तो खुद ईशनिंदा करने वालों की हत्या पर मुहर लगाते हैं।

दो बच्चों को छोड़ प्रेमी से मिलने पाकिस्तान गई अंजू अब फातिमा बनकर लौटी, बोली- ‘मैं खुश हूँ’, नसरुल्लाह बोला- लौटेगी वापस

पाकिस्तान के रहने वाले नसरुल्लाह के प्यार में दिवानी बनी दो बच्चों की माँ अंजू 6 महीने बाद बुधवार (29 नवंबर 2023) को भारत वापस लौट आई है। वहाँ उसने नसरुल्लाह से निकाह कर लिया था और इस्लाम में धर्मांतरण करने के बाद फातिमा बन गई। वह पंजाब के बाघा-अटारी बॉर्डर के रास्ते भारत पहुँची।

अंजू को फिलहाल BSF कैंप में रखा गया है। वहाँ मीडिया से बात करने से मना कर दिया। हालाँकि, उसने इतना जरूर कहा कि ‘मैं खुश हूँ’। अंजू राजस्थान में अलवर जिले के भिवाड़ी में अपने पति अरविंद और दो बच्चों के साथ रहती थी। 35 साल की अंजू का 15 साल की एक बेटी और छह साल का एक बेटा है।

अरविंद के मुताबिक, उसका परिवार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया का रहने वाला है, जबकि अंजू मध्य प्रदेश के ग्वालियर की रहने वाली है। दोनों ने साल 2007 में शादी की थी। अरविंद ईसाई है, जबकि अंजू हिंदू है। अंजू ने शादी के बाद अपना धर्म बदल लिया था।

अंजू एक ऑटोमोबाइल कंपनी में काम करती थी, जबकि उसका पति अरविंद इंडो कंपनी में काम करता है। इसी दौरान साल 2020 में फेसबुक पर अंजू मुलाकात पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा के ऊपरी दीर जिले का रहने वाले नसरुल्लाह हुई। दोस्ती आगे बढ़ी तो दोनों ने एक-दूसरे का कॉन्टैक्ट नंबर लेकर वॉट्सएप पर बातचीत करने लगे।

करीब दो साल तक संपर्क में रहने के बाद अंजू और नसरुल्लाह ने मिलने का प्लान बनाया। नसरुल्लाह ने भारत आने में असमर्थता जताई तो अंजू पाकिस्तान आने को तैयार हो गई। इसके बाद अंजू ने अपना पासपोर्ट बनवा लिया और 21 जून 2023 को पाकिस्तान के वीजा के लिए आवेदन दिया।

वीसा मिलने के बाद अंजू ने 20 जुलाई 2023 को अपने पति अरविंद से यह कहकर निकली की वह अपनी सहेली से मिलने के लिए जयपुर जा रही है। इसके बाद वह पाकिस्तान पहुँच गई। इसके तीन दिन बाद यानी 23 जुलाई 2023 को मीडिया में खबरें आईं कि अंजू अपने प्रेमी नसरुल्लाह से मिलने पाकिस्तान पहुँच गई है।

मीडिया में जिस वक्त अंजू और नसरुल्लाह की प्रेम कहानी आई, उस समय भारत की मीडिया में पाकिस्तान से आई सीमा हैदर की कहानी चल रही थी। सीमा हैदर पाकिस्तान में अपने शौहर को छोड़कर बाल-बच्चों समेत नेपाल के रास्ते भारत आ गई थी और सचिन के साथ हिंदू रीति रिवाज के अनुसार रहने लगी थी।

इसी दौरान पाकिस्तान की मीडिया में अंजू और नसरुल्लाह की प्रेम और धर्मांतरण के बाद निकाह की खबर आई। दोनों की प्री-बेडिंग शूट और बाद में निकाह के रिसेप्शन की तस्वीरें भी सामने आई। उस समय अंजू ने कहा था कि वह पाकिस्तान में खुश है। बाद में अंजू ने कहा था कि उसे अपने बच्चों की बहुत याद आ रही है और वह भारत लौटना चाहती है।

हालाँकि, अंजू के पति अरविंद ने साफ कह दिया था कि वह अपने बच्चों को अंजू से नहीं मिलने देंगे और उन्हें अपने पास ही रखेंगे। इसको लेकर उन्होंने पुलिस में शिकायत भी दी है। नसरुल्लाह ने हाल ही में कहा था कि अंजू यह सोचकर नहीं आई थी कि वह पाकिस्तान में इतने लंबे समय तक रहेगी। इसलिए उसे जाना पड़ा है। अंजू के दस्तावेज तैयार हैं और भारत यात्रा के बाद पाकिस्तान लौट आएगी।

निकाह मुफ़्ती से, बेटे का नाम मौलाना पर… जो तबलीगी नेता करता है हूरों का बखान, उसकी कायल हुईं सना खान: कहता है- कोरोना का कारण महिलाओं की नग्नता

बॉलीवुड को अलविदा कहकर दीन की खिदमत के लिए एक मौलाना से निकाह करने वाली पूर्व अभिनेत्री सना खान ने पाकिस्तान के एक कट्टरपंथी मौलाना के नाम पर अपने बच्चे का नाम रखा है। सना और उसके शौहर अनस ने पाकिस्तानी मौलाना तारिक जमील के नाम पर अपने बच्चे का नाम रखा है। ये वही मौलाना जमील हैं, जिन्होंने जन्नत की हूरों की शारीरिक ढाँचे को परिभाषित किया था।

सना खान ने 5 जुलाई 2023 को एक बेटे को जन्म दिया था। हाल ही में सना खान और उनके शौहर मुफ्ती अनीस ने “तारिक जमील से मुलाकात की थी। सना खान ने अपने बेटे के साथ मौलाना तारिक जमील से मुलाकात का वीडियो भी शेयर किया है।

इस वीडियो में सना खान ने लिखा है, जूनियर तारिक जमील का सीनियर हजरात मौलाना तारिक जमील साब से मुलाकात। मौलाना को देखकर वाकई अल्लाह याद आते हैं। वह अंदर से खूबसूरत इंसान हैं। अल्लाह हमेशा उनकी रक्षा करें और उन्हें अच्छा स्वास्थ्य दें।”

सना ने आगे लिखा, “उन्होंने मुझे हमेशा बेटी कहा है और अपने ज्ञान के शब्दों से मुझे बहुत कुछ दिया है। लोग आपको तोड़ने की कोशिश कर सकते हैं और अपने मफ़ाद के लिए आपको निशाना बना सकते हैं, लेकिन हमें मजबूत होना होगा और यह अल्लाह की ओर से एक परीक्षा भी है।”

ये वही मौलाना तारिक हैं, जिनकी उटपटांग और महिला विरोधी बातों को लेकर दुनिया भर में उनकी मजम्मत हो चुकी है। इस साल जून में मौलाना तारिक का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें वह जन्नत के हूरों के बारे में बता रहे थे। उस वीडियो में उन्होंने कहा था कि जन्नत में हूरें एक नहर से पैदा होती हैं और उनकी लंबाई 130 फीट होती हैं।

वीडियो में जमील कहते हैं, “जन्नत में मोतियों से ढँकी एक नहर है। उसके अंदर मुश्क और जाफरान बहता है। जब अल्लाह जन्नत की किसी लड़की को बनाता है तो उस पर अपना नूर डालता है और 130 फीट की लड़की निकलकर बाहर आ जाती है। जन्नत हूरें माँ की पेट से पैदा नहीं होतीं। तुम पाँच फीट के जन्नत में चले गए तो हूरें तुम्हें अपनी जेब में डाल लेंगी। लिहाजा, अल्लाह हमें भी 130 फीट का बना देगा।”

हूरों के बारे में बताते हुए कट्टरपंथी तबलीगी जमात के सदस्य तारिक जमील ने आगे कहा था, “अल्लाह के हुक्म पर हूरें जन्नत में गीत सुनाती हैं। जब हूरें अपनी जुल्फें बिखराती हैं तो रंग-बिरंगी रौशनी जलने लगती हैं और पूरी जन्नत रौशनी से भर जाती है।”

उन्होंने जन्नत में मिलने वाली शराब का भी खूब वर्णन किया था। वायरल एक अन्य वीडियो में मौलाना ने कहा था, “जन्‍नत में शराब पीने के तीन दर्जे होते हैं। पहले दर्जे में लोग खुद के हाथों से शराब निकालकर पीते हैं। यह सबसे निचला दर्जा होता है। दूसरा दर्जा किसी मिडिल क्लास की तरह होता है, जिनको शराब परोसने के लिए नौकर, पत्‍नी, हूरें और फरिश्‍ते होते हैं।”

जन्नत के सबसे ऊँचे दर्जे के बारे में बताते हुए मौलाना ने कहा था, “यह किसी VVIP की तरह होता है। इस दर्जे में अल्‍लाह खुद शराब पिलाते हैं। अगर इस धरती पर लोग शराब को न कर दें तो जन्नत में खुद अल्लाह उन्हें शराब पिलाते हैं।”

साल 2020 में जब देश-दुनिया में कोरोना महामारी फैला था, तब भी मौलाना जमील ने कहा था कि कोरोना वायरस के रूप में दुनिया अल्लाह के कोप का सामना कर रही है। इस कोप की वजह बढ़ती अश्लीलता और नग्नता है। जब समाज में अश्‍लीलता आम बात हो गई है तो अल्लाह नाराज हो गए हैं। उन्होंने कहा था, “जहाँ लड़कियाँ नाच रही हों और कम कपड़े पहनती हों, उस पर कोरोना जैसी विपत्ति आनी ही है।”

भारत के विभाजन के लिए जिम्मेवार मुहम्मद अली जिन्ना को लेकर एक बार उन्होंने कहा था, “एक दफा मैंने ख्वाब में देखा तो मैंने (जिन्ना से) पूछा कि आपका क्या हाल है। कहने लगे कि मैं बड़ी ‘राहत’ में हूँ। उन्होंने अपनी दो उँगलियाँ मेरी तरफ कीं कि ये चूस लो। उनकी दो उँगलियाँ मैंने मुँह में डाली तो उसमें से गाढ़ा-मीठा शहद निकल-निकल कर मेरे मुँह में आना शुरू हुआ। उसके साथ ही मेरी आँख खुली तो उसकी मिठास मेरे मुँह में बाकी थी।”

तारिक जमील तब्लीगी जमात का सदस्य है। तब्लीगी जमात भले ही खुद को सुन्नी मुसलमानों का सबसे बड़ा संगठन बताता हो, लेकिन दिसंबर 2021 में सऊदी अरब ने इसे ‘आतंकवाद का एंट्री गेट’ करार देते हुए बैन कर दिया था। वहीं, भारत में कोरोना महामारी के दौरान जमात लगाने और पुलिसकर्मियों पर थूकने की घटनाओं के बाद यह संगठन चर्चा में आया था।

1 दर्जन से अधिक कंपनियाँ-संस्थाएँ, कैंप करते PMO अधिकारी, विशेष उड़ानें, ऑक्सीजन प्लांट… यूँ ही नहीं हुआ सुरंग से 41 मजदूरों का रेस्क्यू, PM मोदी की थी नज़र

उत्तरकाशी के सिलक्यारा स्थित सुरंग से 41 मजदूरों को बचा कर सुरक्षित निकाल लिया गया है। सुरंग ध्वस्त होने के कारण ये मजदूर 12 नवंबर, 2023 को सुरंग में फँसे थे, जिन्हें 28 नवंबर, 2023 को वापस निकाला गया। 17 दिनों तक ये मैराथन प्रयास चला। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्यमंत्री जनरल VK सिंह ने वहाँ कैंप किया। PMO के अधिकारी वहाँ मजजूद रहे। संसाधन की किसी भी प्रकार की कमी नहीं रहने दी गई।

तभी तो अमेरिकी मशीन तक मँगाई गई। ये अलग बात है कि वो काम नहीं आई। अरनॉल्ड डिक्स के नेतृत्व में कई विदेशी विशेषज्ञ लगातार लगे रहे। बाबा बौखनाग का अस्थायी मंदिर बनाया गया और वहाँ पूजा-अर्चना चलती रही। कई मजदूर भी बचाव कार्य में लगे रहे। अंदर गब्बर सिंह नेगी फँसे हुए साथी मजदूरों का हौसला बढ़ाते रहे, उन्हें योग-व्यायाम कराते रहे। अंत में रैट माइनर्स की सहायता से पाइप डालने का काम हुआ और इसके सहारे सभी मजदूरों को वापस बुलाया गया।

वहीं सुरंग में ही एक अस्थायी अस्पताल भी बनवा दिया गया था। फँसे हुए मजदूरों को निकाले जाने के बाद चिन्यालसौड़ स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ले जाया गया, जहाँ सीएम धामी भी पहुँचे। उत्तरकाशी के जिला अस्पताल ही नहीं, बल्कि उन्हें एयरलिफ्ट कर के ऋषिकेश स्थित एम्स में भी ले लाया गया जहाँ पहले से सारी तैयारियाँ कर के रखी गई थीं। हालाँकि, सभी श्रमिक स्वस्थ हैं। जिस तरीके से केंद्र एवं राज्य सरकार ने इस पूरे प्रकरण को सँभाला, उसके बाद उनकी तारीफ़ होनी स्वाभाविक है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधान सचिव PK मिश्रा और डिप्टी सेक्रेटरी मंगेश घिल्डियाल इसमें सीधे तौर पर लगातार जुड़े रहे। यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर सुरंग ध्वस्त होने की खबर जैसे ही पता चली, पीके मिश्रा ने पीएम मोदी को इसके बारे में बताया। इसके बाद से ही प्रधानमंत्री कार्यालय के अधिकारी इस रेस्क्यू ऑपरेशन की निगरानी में जुट गए। 27 नवंबर को तो PK मिश्रा खुद मौके पर पहुँचे और बचाव अभियान की समीक्षा की। अंदर फँसे मजदूरों से संपर्क के लिए संचार व्यवस्था भी बनाई गई थी।

इसी के जरिए पीके मिश्रा ने उन श्रमिकों से बात की और आश्वासन दिया कि उन्हें बाहर निकाल लिया जाएगा। जब तक ये ऑपरेशन सफल नहीं हो गया, मंगेश घिल्डियाल भी उत्तरकाशी में मौजूद रह कर इसकी निगरानी करते रहे। इसके अलावा पीएम नरेंद्र मोदी के पूर्व सलाहकार भास्कर खुल्बे से भी निवेदन किया गया कि वो मौके पर जाएँ। वो वहाँ प्रतिदिन की व्यवस्थाओं व कामकाज की निगरानी कर रहे थे। कई प्राइवेट कंपनियों और स्टार्टअप्स की भी इसमें मदद लेने की तैयारी थी।

‘इंडियन एक्सप्रेस’ ने अपने सूत्रों के हवाले से बताया है कि ये प्रधानमंत्री कार्यालय की ही सक्रियता का ही परिणाम था कि RVNL (रेल विकास निगम लिमिटेड), ONGC (ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन), SJVNL, THDC, DRDO (रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन), DST (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग), भारतीय सेना, भारतीय वायुसेना (IAF), BRO (सीमा सड़क संगठन), NDRF (राष्ट्रीय आपदा मोचन बल), NDMA (राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण), उत्तरकाशी जिला प्रशासन और उत्तराखंड सरकार इसमें समन्वय बना कर काम करती रही।

इन सभी के विषेशज्ञ एवं उपकरण इस रस्के ऑपरेशन का या तो हिस्सा बने, या फिर ये तैयार थे। सलाह, मानव संसाधन और उपकरण – इन सभी का इस्तेमाल किया गया। जब जहाँ जिसकी जैसी ज़रूरत पड़ी, उनसे सेवा ली गई। इन सभी संस्थाओं के मुखियाओं के साथ 20 नवंबर को ही प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव ने बैठक ली थी और उन्हें हर घंटे अपडेट्स लेते रहने को कहा गया था। केंद्रीय गृह मंत्रायल और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को निर्देश दे दिया गया था कि वो मशीनों एवं विशेषज्ञों की आवाजाही के लिए ग्रीन कॉरिडोर की व्यवस्था बनाए रखें।

देश के विभिन्न हिस्सों से मशीनरी आ रही थी और विशेषज्ञ पहुँच रहे थे। NDMA को भी कहा गया था कि वो समय-समय पर सारी जानकारी देते रहें। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी कह चुके हैं कि सरकार इस घटना से सीखेगी और सुरंगों की सेफ्टी ऑडिट के लिए सर्वश्रेष्ठ तकनीकों का सहारा लिया जाएगा। खासकर हिमालय के पत्थर और मिट्टी को ध्यान में रखते हुए काम लिए जाएगा। ये बड़ी बात है। आगे इस तरह की घटना न हो, सरकार ने इसके लिए अभी से ही कमर कस ली है।

माँ पर आस्था रखने की बात करते हुए भास्कर खुल्बे ने कहा कि वो हमेशा देवी को प्रणाम कर के जाते थे और अंतिम दिन उन्होंने दण्डवत किया। उन्होंने ख़ुशी की आँसू को सफलता की सबसे बड़ी भावना करार दिया। साथ ही कहा कि ऐसी विपदा और न आए, वो चाहेंगे। उन्होंने 41 श्रमिकों द्वारा दिखाए गए हौसले और मेहनत को प्रेरणा बताते हुए कहा कि विपत्ति में हमें हौसला नहीं खोना चाहिए। उन्होंने कहा कि इनके हौसले की बदौलत ही बाहर रेस्क्यू अभियान चला रहे लोग भी प्रेरित होते रहे।

मेजर जनरल (रिटायर्ड) हर्ष काकर ने भी इसकी प्रशंसा करते हुए बताया कि कैसे PMO के 5 अधिकारी दिन-रात 15 दिनों तक मौके पर कैंप करते रहे और कंटेनर में रहे, CM धामी रोज 3-4 घंटे वहाँ पर रहे, जनरल वीके सिंह और नितिन गडकरी वहाँ पहुँचे, स्लोवेनिया से ऑगर मशीन लाने के लिए हैदराबाद से विशेष विमान भेजा गया, दुनिया के बेस्ट रेस्क्यू एक्सपर्ट को बुलाया गया, अमेरिका से विशेष प्लाजमा कटर लाया गया और नए हेलीपैड के अलावा वर्टिकल ऑक्सीजन जनरेटर प्लांट तक स्थापित किया गया।

‘तेलंगाना में कॉन्ग्रेस को प्रचंड बहुमत, चुनाव से पहले ही IB ने गृह मंत्रालय को सौंप दी रिपोर्ट’: सोशल मीडिया पर वायरल हुआ किसको कितनी सीटें, जानें सच्चाई

गुरुवार (30 नवंबर, 2023) गुरुवार को होने जा रहे तेलंगाना विधानसभा चुनावों को ले कर सोशल मीडिया पर ‘इंटेलिजेंस ब्यूरो’ (IB) के नाम से एक लिस्ट वायरल की जा रही है। इस लिस्ट में विधानसभा चुनावों में कॉन्ग्रेस की जीत और पूर्ण बहुमत का दावा किया जा रहा है। इस लिस्ट को कॉन्ग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ उनके समर्थक भी अपने X हैंडल पर शेयर कर रहे हैं। कांफिडेंशियल का ठप्पा लगी इस लिस्ट में तारीख 23 नवंबर, 2023 की पड़ी हुई है।

क्या है इस लिस्ट में

लिस्ट को बाकायदा प्रेसनोट बता कर शेयर किया जा रहा है जो कि उसमें लिखा भी हुआ है। ऊपर अंग्रेजी के बड़े-बड़े शब्दों में ‘इंटेलिजेंस ब्यूरो’ लिखा होने के साथ बगल IB का आधिकारिक Logo भी लगा दिख रहा है। नीचे तेलंगाना राज्य विधानसभा चुनाव 2023 लिखा गया है। पहले पैराग्राफ में ही घोषणा कर दी गई है कि कॉन्ग्रेस पार्टी राज्य में प्रचंड बहुमत से आ रही है। साथ ही कॉन्ग्रेस को 44% वोट शेयर के साथ 72 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है।

लिस्ट के दूसरे पैराग्राफ में भाजपा और AIMIM को वोट कटुआ पार्टी बताया गया है। इन दोनों पार्टियों पर BRS का वोट खा जाने का दावा किया गया है। भाजपा और अन्य दलों को 12 से नीचे सीटें मिलने का दावा इस लिस्ट में किया गया है। लिस्ट में BRS की हार की वजह किसानों का गुस्सा, सत्ता विरोधी लहर और राज्य में फैला भ्र्ष्टाचार बताया गया है। की पॉइंट में यह भी दावा किया गया है कि इस सर्वे को ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में किया गया है।

इन दावों के नीचे एक तालिका बनाई गई है। तालिका में BRS को 34 से 37, कॉन्ग्रेस को 71 से 74, भाजपा को 2 से 4 और अन्य को 6 से 8 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है। वोट शेयर के हिसाब से BRS को 34 से 37%, कॉन्ग्रेस को 43 से 46%, भाजपा को 7 से 9% और अन्य को 8 से 10% मत मिलने का अनुमान जताया गया है। इस तालिका के नीचे ‘की पॉइंट’ नाम से सबहेड दिया गया है जिसमें इस सर्वे को 7 से 22 नवंबर 2023 के बीच का बताया गया है। दावा किया गया है कि सर्वे के दौरान 17,850 लोगों से मिल कर उनकी राय ली गई।

खास बात ये है कि प्रेसनोट लिखे सबहेड में लिखा गया है कि ऊपर कही गई बातें आंतरिक जानकारी के लिए ही हैं। साथ ही पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट 23 नवंबर को ऑफिस में जमा करने का दावा किया गया है।

कॉन्ग्रेस पदाधिकारी और उसके कार्यकर्ता कर रहे हैं वायरल

इस लिस्ट को पूरे आत्मविश्वास के साथ कॉन्ग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता और उसके समर्थक शेयर कर रहे हैं। अपने ‘X’ हैंडल पर खुद को पुडुच्चेरी में कॉन्ग्रेस पार्टी का सोशल मीडिया विभाग का चेयरमैन बताने वाले कोरकाडू अशोक ने इस लिस्ट को IB की रिपोर्ट बता कर शेयर किया है।

तेलंगाना के नागार्जुन सागर से कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता अभिषेक बिक्कू ने यह लिस्ट शेयर करने के साथ यह भी दावा किया है कि इसे भारत सरकार के गृह मंत्रालय में जमा किया जा चुका है।

राहुल गाँधी की कवर फोटो और वेरिफाइड हैंडल वाली गीता ऐनाला ने भी इस लिस्ट को X हैंडल पर शेयर किया है। उन्होंने कैप्शन में BRS का गेम ओवर बताया है।

कॉन्ग्रेस के एक अन्य कार्यकर्ता तुम्मला नागेश्वर राव ने भी इसे शेयर करते हुए BRS की विदाई का दावा किया है।

इसके अलावा कॉन्ग्रेस पार्टी से जुड़े कई अन्य लोग भी है जो इस स्क्रीनशॉट को शेयर करने में जुटे हुए हैं। यह शेयरिंग मतदान से 1 दिन पहले 29 नवंबर को खासतौर पर जोर पकड़ चुकी है।

कॉन्ग्रेस जीत रही तेलंगाना, जानिये सच्चाई

ऑपइंडिया की पड़ताल में यह बात निकल कर आई है कि कॉन्ग्रेस पदाधिकारियों और उनके समर्थकों द्वारा इंटेलिजेंस ब्यूरो के नाम से शेयर की जा रही ये लिस्ट फर्जी है। इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) का काम राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों की सूचनाएँ जमा करना है। IB राजनैतिक मामलों से जुड़े इस प्रकार के एक्जिट पोल नहीं जारी करती है।

उत्तरकाशी सुरंग हादसे की सफलता में भी लिबरलों ने खोज ली सांप्रदायिक एंगल: टीम स्पिरिट को भूल हिंदू-मुस्लिम में बाँटने लगे

उत्तरकाशी की सिलक्यारा सुरंग में फँसे 41 मजदूर सफलतापूर्वक बाहर निकाल लिए गए हैं। इन मजदूरों को निकालने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय से लेकर उत्तराखंड के स्थानीय प्रशासन ने कदम से कदम मिलाकर काम किया। हालाँकि, इस सफलता के बीच भी लिबरल समुदाय मजहबी प्रोपेगैंडा चलाना नहीं भूला।

सिलक्यारा के निर्माणाधीन सुरंग में ये सभी 41 मजदूर 12 नवम्बर 2023 से इसमें फँसे थे। इन्हें निकालने के लिए 3 फीट व्यास वाला एक पाइप डाला गया था। सुरंग से निकालने के बाद स्वास्थ्य की जाँच के लिए उन्हें ऋषिकेश के AIIMS ले जाया गया। उधर, सीएम पुष्कर सिंह धामी ने इन मजदूरों के परिजनों के साथ 29 नवंबर 2023 की शाम को दिवाली मनाने की घोषणा की है।

कैसे हुआ सफल ऑपरेशन – सरकारी और निजी क्षेत्र का समन्वय लाया कामयाबी?

12 नवम्बर 2023 को सुबह 5:30 बजे इस सुरंग में काम चल रहा था। इसी दौरान इसमें मलबा गिरा और अंदर काम कर रहे 41 मजदूर फँस गए। इनको निकालने के लिए सबसे पहले मलबा हटाने का प्रयास किया गया। हालाँकि, नया मलबा आते रहने के कारण यह तरीका कामयाब नहीं हुआ।

इसके बाद मलबे के भीतर से ही पाइप अन्दर डालने की योजना बनाई गई। जहाँ रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए यहाँ काम कर रह निजी कम्पनी ने मोर्चा संभाला तो वहीं यह पाइप लाने के लिए प्रशासन जुट गया। सबसे पहले देहरादून से पाइप भेजवाए गए।

केंद्र सरकार ने मामले पर अपडेट लेते हुए वायुसेना को तुरंत एक्शन मोड में ला दिया और वायुसेना के हवाई जहाजों ने देश भर से नए पाइप घटनास्थल तक पहुँचाए। अन्दर फँसे श्रमिकों तक खाना पानी पहुँचाने के लिए निजी कम्पनी और प्रशासन, दोनों ने ही कमर कसी।

प्रशासन ने वह सारी व्यवस्था निजी कम्पनियों को करके दी, जो उसे रेस्क्यू में सहायता कर रही थीं। जब जब इन रेस्क्यू टीम को नई मशीनों या अन्य संसाधनों की आवश्यकता पड़ी तो वायु सेना से लेकर राज्य सरकार ने उपलब्ध करवाए। चाहे वह ऑगर मशीन लाना हो या फिर हैदराबाद से प्लाज्मा कटर जैसी मशीनें लाना हो।

प्रशासन ने यहाँ देश विदेश से सुरंग के मामले के जानकारों को भी इकट्ठा किया और उन्हें व्यवस्थाएँ उपलब्ध करवाई। प्रधानमंत्री कार्यालय भी लगातार इस मामले में अपडेट लेता रहा। केंद्र की ओर से घटनास्थल पर केन्द्रीय राज्यमंत्री जनरल वीके सिंह और प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा भी पहुँचे।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी पूरे रेस्क्यू को निजी स्तर पर देखा है। सुरंग के अन्दर बेहतर तकनीक के लिए यहाँ काम कर रही निजी कम्पनियों के इंजिनियर लगे रहे और लगातार नए तरीके अपनाते रहे। श्रमिकों को बाहर निकालने के लिए NDRF और SDRF की टीम लगाई गईं, जो सफलतापूर्वक उन्हें बाहर निकाल कर लाई।

ऑपरेशन कामयाब, लिबरल परेशान

जहाँ 17 दिनों के बाद श्रमिकों को सफलतापूर्वक निकाले जाने से पूरा देश प्रसन्न है, वहीं लिबरल गैंग अपने प्रोपगैंडा को चलाने में व्यस्त हो गया है। उसके लिए इन मजदूरों को निकालने वालों को धर्म जानना बहुत जरूरी हो गया है। रेस्क्यू मिशन में लगे 2,000 लोगों में से इन प्रोपगैंडा करने वालों को कुछ ऐसे नाम मिले जो कि मुस्लिम थे।

कथित पत्रकार सागरिका घोष ने सबसे पहले इन रेस्क्यू करने वालों को धर्म के आधार पर बाँटा और उनमें प्रमुखता से मुस्लिम नामों को दोहराया। एंकर राजदीप सरदेसाई ने भी यही किया। कई प्रोपगैंडाबाजों ने यही तरकीब अपनाई और कुछ मुस्लिम रेस्क्यू पर्सनल को पूरा श्रेय देने का प्रयास किया।

हालाँकि, हर बात में हिन्दू-मुस्लिम ढूँढने वालों को एक्स पर ही कड़ा जवाब मिला। भारत के पूर्व विदेश सचिव कँवल सिब्बल ने इस पर प्रश्न पूछा कि यदि रेस्क्यू करने वाले सारे व्यक्ति हिन्दू होते तो क्या उनका नाम सम्मान से नहीं लिया जाता?

एक व्यक्ति ने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “विश्व में 99% आतंकी हमले मुस्लिम करते हैं, लेकिन आतंकियों का कोई धर्म नहीं होता। 2,000 रेस्क्यू करने वालों में 2 मुस्लिम हैं और ये अब कॉन्ग्रेसियों, वामपंथियों और लिबरलों के लिए हीरो बन गए हैं।”

एक्स पर इस सुरंग में रैट माइनिंग के जरिए मजदूरों को निकालने वाले रेस्क्यू पर्सनल का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वह भारत माता की जय के नारे लगाते दिखे हैं।

लोगों ने कहा कि यह बिना किसी धर्म-जाति में बँटे हुए ये नारे लगाए हैं, जबकि लिबरल इसमें लोगों को बाँट रहे थे।

सुरेंद्र राजपूत: 17 साल पहले जिन्होंने 5 साल के प्रिंस को निकाला था बोरवेल से, उनकी बनाई पुली ट्रॉली के कारण 41 मजदूरों के घर मनी दिवाली

दिल्ली के निजामुद्दीन के रहने वाले सुरेंद्र राजपूत की उत्तराखंड में सिलक्यारा सुरंग में फँसे 41 मजदूरों को बचाने में अहम भूमिका रही। आखिर सभी की कोशिशें रंग लाई और 17 दिनों बाद सब सही सलामत बाहर निकल आए।

दिवाली के दिन 12 नवंबर 2023 की सुबह लैंड स्लाइड से सुरंग में मलबा भरने के कारण वहाँ काम कर रहे ये 41 लोग वहीं फँस गए थे। बाहर आने के बाद उनके लिए और उनके परिवार के लिए तो मंगलवार (28 नवंबर,2023) का दिन एक तरह से दिवाली की रोशनी लेकर आया।

उनकी जिंदगियों में बगैर किसी स्वार्थ के उजाला भरने वालों में इस बचाव अभियान में वैसे तो कई लोग शामिल रहे। लेकिन आखिर में आज से 17 साल पहले 21 जुलाई 2006 को हरियाणा के कुरुक्षेत्र के हल्देहड़ी गाँव में 5 साल के प्रिंस के 50 फीट गहरे बोरवेल से निकालने वाली टीम का हिस्सा रहे सुरेंद्र राजपूत का तजुर्बा रंग लाया। रिपोर्ट्स के मुताबिक राजपूत 18 नवंबर को ही सिलक्यारा सुरंग पहुँच गए थे।

रैट माइनर्स के लिए बनाई पुली ट्रॉली

सिलक्यारा में सुरंग में फँसे 41 मजदूरों को बचाने में जब बड़ी-बड़ी आधुनिक मशीनें फेल हो गईं तो फिर रविवार यानी 26 नवंबर को साइट पर 6 ‘रैट होल’ माइनर्स की एंट्री हुई। झाँसी के जांबाज रैट माइनर्स परसादी लाल, राकेश और भूपेंद्र राजपूत वहाँ पहुँचे थे।

इन लोगों ने रैट माइनिंग के जरिए 21 घंटे में हाथ से ही 15 मीटर तक सुरंग खोद डाली। ये लोग शायद ये काम करने में सफल नहीं होते अगर इनके पास पुली ट्रॉली नहीं होती। और ये पुली ट्रॉली बगैर बुलाए वहाँ पहुँचे सुरेद्र राजपूत ने बना कर दी।

ट्राली से आसान हुआ मलबा निकालना

सुरेंद्र राजपूत के मुताबिक, उन्होंने मैनुअल ड्रिलिंग करने वाले रैट माइनर्स टीम के लिए 1.25 मीटर लंबी और 0.6 मीटर चौड़ी एक पुली ट्रॉली बनाई थी। चार बेयरिंग लगी इस ट्राली के जरिए ही मैनुअल ड्रिलिंग के बाद सुरंग के अंदर से मलबे को पाइप से बाहर निकाला गया।

एक बार में ही इस ट्रॉली से एक क्विंटल मलबा सुरंग से बाहर निकाला जाता था। इसके बाद ही सुंरग से मजदूरों के बाहर निकलने का रास्ता साफ हो पाया। राजपूत ये ट्रॉली इसलिए बना पाए क्योंकि उन्होंने 2006 में हरियाणा के कुरुक्षेत्र के हल्देहड़ी गाँव में प्रिंस को बचाने में भी अहम भूमिका निभाई थी।

तब पाँच साल का बच्चा प्रिंस अपने दोस्त के साथ खेलते हुए पास ही खुदे 60 फीट गहरे बोरवेल में जा गिरा था। तब राजपूत ने 60 मीटर गहरे कुएँ को दूसरे कुएँ से जोड़ने के लिए 10 फीट लंबी सुरंग बनाने का काम किया था। इसके बाद प्रिंस बोरवेल से सलामत बाहर आ पाया था।

सुरेंद्र राजपूत ने लगाई थी सिलक्यारा रेस्क्यू अभियान में शामिल होने की गुहार

सिलक्यारा सुरंग हादसे के 6 दिन बाद ही सुरेंद्र राजपूत सीधे दिल्ली से बचाव अभियान में सहयोग करने के लिए वहाँ पहुँच गए थे। वो बचाव एजेंसियों से अभियान में मदद करने का अनुरोध करते रहे।

वो उत्तराखंढ के प्रशासनिक अधिकारियों से मिले और इस फील्ड में अपने तजुर्बे के बारे में बताया। उनके बार-बार कहने पर अधिकारियों ने उनके बारे में पड़ताल की तो जानकारी मिली कि राजपूत हरियाणा के कुरुक्षेत्र व अंबाला के बीच एक गाँव में बोरवेल में गिरे बच्चे प्रिंस के बचाव अभियान में शामिल थे।

दरअसल हरियाणा सरकार की तरफ से तब राजपूत को उनके काम के लिए सम्मान दिया गया था। इन सब पर गौर करते हुए प्रशासन ने उन्हें अभियान में शामिल करने का फैसला लिया और ये फैसला सही साबित हुआ।

मणिपुर के सबसे पुराने उग्रवादी समूह ने डाले हथियार: अमित शाह ने लोकतांत्रिक व्यवस्था में किया स्वागत, नई दिल्ली में शांति समझौते पर हस्ताक्षर

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उत्तर-पूर्वी राज्य मणिपुर को लेकर बड़ी जानकारी शेयर की है। बता दें कि मणिपुर पिछले कई महीनों से अशांत रहा है, जहाँ महिलाओं को नग्न कर उनका जुलूस निकाले जाने और उनके सामूहिक बलात्कार तक के मामला सामने आए थे। आगजनी की तो कई घटनाएँ सामने आई थीं। अब अमित शाह ने बताया है कि मणिपुर में बड़ी संख्या में उग्रवादियों ने हिंसा का रास्ता त्याग कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला लिया।

उन्होंने तस्वीरें शेयर करते हुए बताया, “एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल हुई। पूर्वोत्तर में स्थायी शांति स्थापित करने के मोदी सरकार के अथक प्रयासों में एक नया अध्याय जुड़ गया है। यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट (UNLF) ने नई दिल्ली में बुधवार (29 नवंबर, 2023) को एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किया। मणिपुर की पहाड़ियों के सबसे पुराने सशस्त्र समूह UNLF ने हिंसा के रास्ते को छोड़ कर मुख्यधारा में आने के लिए हामी भरी है।”

अमित शाह ने उन सभी का लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्वागत करते हुए शांति एवं विकास के रास्ते पर उनकी उन्नति की कामना की। उन्होंने एक वीडियो भी शेयर किया, जिसमें UNLF के सभी उग्रवादी अपनी-अपनी बंदूकें सौंप रहे हैं। तस्वीरों में कई उग्रवादियों को पंक्ति में खड़े देखा जा सकता है। जबकि उनके हथियारों को भी जमीन पर रखा गया है। पिछले 59 वर्षों से मणिपुर में सक्रिय UNLF अलगाववादी विचारधारा वाला संगठन रहा है, जिसकी स्थापना 24 नवंबर, 1964 को हुई थी।

अरम्बम समरेंद्र सिंह ने इस समूह की स्थापना की थी। 70 एवं 80 के दशक में इसने जम कर भर्तियाँ की और अपना नेटवर्क बढ़ाया। 1990 के दशक में ये मणिपुर की कथित ‘आज़ादी’ की बातें करने लगा और इसने हथियार उठा लिए। 1990 में ही उसने ‘मणिपुर पीपल्स आर्मी’ भी बनाई थी। इसके अध्यक्ष राजकुमार मेघन उर्फ़ सना यैमा पर भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने का आरोप लगा था। हालाँकि, उसने दावा किया था कि वो भारत के खिलाफ नहीं है, मणिपुर में सेना की उपस्थिति के खिलाफ है।

बॉयफ्रेंड के कहने पर गर्ल्स हॉस्टल के बाथरूम में लगाया कैमरा, बनाती थी दूसरी लड़कियों का वीडियो: पुलिस ने दोनों को पकड़ा, मोबाइल जब्त

चंडीगढ़ के एक पेइंग गेस्ट हाउस (PG) में लड़कियों के बाथरूम में हिडेन कैमरा लगाने का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि पीजी की ही एक अन्य लड़की ने अपने बॉयफ्रेंड के कहने पर यह कैमरा लगाया था। पुलिस ने लड़की और उसके बॉयफ्रेंड के खिलाफ केस दर्ज करके उन्हें गिरफ्तार कर लिया है। उनके मोबाइल फोन भी जब्त कर लिए गए हैं। घटना रविवार (26 नवंबर 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना चंडीगढ़ के सेक्टर 22 की है। यहाँ संचिलात एक PG में 5 लड़कियाँ रहती हैं। इन्हीं में से एक लड़की मूलतः उत्तर प्रदेश की रहने वाली थी, जो IELTS की तैयारी कर रही थी। इन सभी लड़कियों का कॉमन बाथरूम था। 26 नवम्बर को एक लड़की नहाने गई तो अँधेरे में उसको गीजर के पीछे कुछ चमकता दिखाई पड़ा।

उसने बाकी लड़कियों को बुलाकर चेक करवाया तो वो एक हिडेन कैमरा निकला। इसके बाद लड़कियों ने इसकी जानकारी मकान मालिक को दी और उसने पुलिस में शिकायत दर्ज करवा दी। पुलिस ने 29 नवंबर 2023 को बताया कि 3 दिन पहले आई शिकायत पर पुलिस ने मौके पर जाकर जाँच की। जाँच में गीजर के पीछे हिडेन कैमरा रखने की पुष्टि हुई।

पुलिस ने बताया कि इस मामले में PG में रहने वाली एक लड़की को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई और उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया है। साथ ही उसने बताया कि 3 दिन पहले ही उसके बॉयफ्रेंड अमित हांडा ने एक कैमरा दिया था। पुलिस ने इस मामले में IPC की धारा 354C और 506 के साथ IT एक्ट की धारा 66 के तहत कार्रवाई की है।

अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि वीडियो बनाए गए हैं या नहीं और यदि बने भी हैं तो कितने। मामला सामने आने के बाद बाकी लड़कियों के परिजन उन्हें अपने साथ लेकर घर चले गए हैं। फिलहाल PG खाली किया जा चुका है। सेक्टर 17 थाना पुलिस ने दोनों आरोपितों के मोबाइल और कैमरा को जब्त कर जाँच के लिए फोरेंसिक लैब भेज दिया है।

दोनों आरोपितों को जमानत पर छोड़ दिया गया है। पुलिस का कहना है कि जो कैमरा छुपाया था वह वेब कैमरा था। पुलिस का कहना है कि उसकी रिकॉर्डिंग कहाँ हो रही थी, उसका कंट्रोल और स्टोरेज सेंटर कहा है, इसकी जाँच की जा रही है। ये भी जाँच की जा रही है कि कहीं ये वीडियो ऑनलाइन तो नहीं चल रहे थे।

बताते चलें कि 10 अक्टूबर 2023 को चंडीगढ़ के ही एक प्रइवेट स्कूल में 70 छात्राओं की तस्वीरों को AI की मदद से एडिट करने का मामला सामने आया था। इस घटना में स्कूल के क्लास 12 मे पढ़ने वाले एक छात्र की संलिप्तता बताई गई थी।