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योग कैंप में करवाता था हस्तमैथुन, 1000 कुँवारी लड़कियों से सेक्स का था टारगेट: पेरिस में सनकी योगा टीचर गिरफ्तार

फ्रांस में ग्रेगोरियन बिवोलारू नाम का एक सनकी योगा टीचर गिरफ्तार हुआ है। उसका मकसद 1000 वर्जिन महिलाओं के साथ सेक्स करना था। फ्रांस पुलिस ने उसे बलात्कार, मानव तस्करी और अपहरण के मामले में गिरफ्तार किया। कथिततौर पर ग्रेगोरियन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध योग शिक्षक और लेखक है।

द सन की रिपोर्ट्स के मुताबिक, फ्रांसीसी न्यायिक अधिकारी ने उसे पकड़ने के लिए उसकी संस्था ‘मूवमेंट फॉर स्पिरिचुअल इंटीग्रेशन इनटू द एब्सोल्यूट (MISA)’ के खिलाफ छापा मारा और बड़े पैमाने पर अभियान चलाकर इस योग टीचर समेत 41 लोगों को गिरफ्तार किया।

इसके बारे में कहा जाता है कि अध्यात्म की इंतेहा तक पहुँचने के लिए 1000 वर्जिन लड़कियों के साथ सेक्स करने की इच्छा रखता था। महिलाओं ने इसके खिलाफ इल्जाम लगाया था कि ये उनकी इच्छा के बिना उन्हें बंदी बनाता था। इसके अलावा आरोप थे कि ये लोगों से जबरन सेक्स करवाता था और पोर्न फिल्म में परफॉर्म करने के लिए उनके ऊपर दबाव बनाता था। फिनलैंड में इस पर मानव तस्करी के आरोप लगे थे जबकि भारत में और अर्जेंटीना में इस पर पोर्नोयोगा का आरोप लगा था।

बता दें कि इससे पहले इस योग टीचर के ऊपर 2013 में नाबालिग से सेक्स करने का आरोप लगा था। सजा के वक्त वह फ्रांस में था। हालाँकि बाद में उसे उसके गृह देश में प्रत्यर्पित कर दिया गया। मौजूद जानकारी बताती है कि ये योग टीचर 17 साल की उम्र से योग टीचिंग करने लगा था। वह तांत्रिक ज्ञान देने के बदले 15 साल से कम उम्र की वर्जिन लड़कियों संग सेक्स की माँग करता था। अब उसके योग सेंटर 30 से ज्यादा देशों में हो गए हैं। भारत में उसके योग संस्थान का नाम ‘सत्या’ है।

15 साल की उम्र में इस कथित योग गुरु के साथ सेक्स करने वाली एक लड़की ने बताया कि तांत्रिक ज्ञान के उच्चतम स्तर को पाने के लिए उसने योग टीचर के साथ सेक्स किया था। उसी लड़की ने यह भी बताया कि अपार्टमेंट में लगातर लड़कियाँ आती हैं। उसका (योग गुरु) मानना है कि अगर वो 1000 वर्जिन लड़कियों के साथ सोएगा तो उसे मोक्ष प्राप्त हो जाएगा।

रिपोर्ट्स बताती हैं कि इस योग गुरु की संस्था MISA गर्मियों में समर कैंप आयोजित करता था। इसमें मिस शक्ति कंपीटिशन कराया जाता था जिसकी एक एक्टिविटी वीडियो कैमरे के सामने खड़े होकर हस्तमैथुन करने की थी। रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया कि इस योग गुरु के कैंप में जाने से पहले सिफलिस और एचआईवी का टेस्ट अनिवाकर्य होता है।

जर्मनी से बैंकॉक जा रहा था विमान, पति-पत्नी के झगड़े ने दिल्ली में कराई इमरजेंसी लैंडिंग: पाकिस्तान ने नहीं दी उतरने की इजाजत

पति-पत्नी के झगड़े के कारण एक विमान को दिल्ली के इंदिरा गाँधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी। लुफ्थांसा एयरलाइन का यह विमान जर्मनी के म्युनिख से थाइलैंड की राजधानी बैंकॉक जा रहा था। झगड़े के बाद फ्लाइट क्रू ने पहले पाकिस्तान में आपातकालीन लैंडिंग की अनुमति माँगी। लेकिन इजाजत नहीं मिलने के बाद विमान को दिल्ली एयरपोर्ट पर उतारा गया।

रिपोर्ट के मुताबिक, लुफ्थांसा एयरलाइन्स की फ्लाइट LH772 ने बुधवार (29 नवंबर 2023) को म्युनिख से बैंकॉक के लिए उड़ान भरी। विमान के टेकऑफ करने के बाद ही इसमें सवार मियाँ-बीवी में झगड़ा शुरू हो गया। एक जर्मन यात्री और उसकी थाई पत्नी के बीच तीखी बहस हुई। पति ने खाना फेंक दिया। सिगरेट लाइटर से कंबल जलाने की कोशिश की। पत्नी ने प्लेन के पायलट से पति के इस व्यवहार को लेकर शिकायत की।

एक अधिकारी के मुताबिक, पत्नी ने पायलट से शिकायत में कहा था कि उसे धमकी दी जा रही है और वो उनसे दखल देने की माँग करती है। कपल के झगड़े को रोकने की केबिन क्रू ने भरसक कोशिश की। लेकिन पत्नी पर पति जोर से चिल्लाता रहा और क्रू से भी उलझने लगा। बहस बढ़ती देख केबिन क्रू ने फ्लाइट को डायवर्ट करने का फैसला लिया। पाकिस्तान द्वारा इमरजेंसी लैंडिंग का अनुरोध ठुकराए जाने के बाद फ्लाइट को दिल्ली में लैंड कराया गया। फ्लाइट LH772 सुबह 10:26 बजे इंदिरा गाँधी अंतरराष्ट्रीय (आईजीआई) हवाई अड्डे पर उतरी।

इसके बाद पायलटों ने एटीसी से संपर्क किया और उन्हें बेलगाम यात्रियों के बारे में बताया। पति के उग्र व्यवहार के चलते उसे एयरपोर्ट अधिकारियों के हवाले कर दिया गया। बताया जा रहा कि उसे केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के कर्मियों ने दिल्ली एयरपोर्ट पर ही उतार लिया था। वहीं उसकी थाई पत्नी ने बैंकॉक की अपनी यात्रा जारी रखने का फैसला किया, क्योंकि वह एक अलग टिकट पर यात्रा कर रही थी।

DGCA के एक अधिकारी के मुताबिक, एयरलाइंस इस यात्री को लेकर जर्मन दूतावास के साथ संपर्क में है। वही जर्मनी की लुफ्थांसा एयरलाइंस ने आधिकारिक बयान में कहा कि प्लेन को एक बेलगाम यात्री की वजह से डायवर्ट किया गया था। लुफ्थांसा ने कहा है, “इस केस से जुड़े लोगों को अधिकारियों को सौंप दिया गया है। बैंकॉक के लिए उड़ान मामूली देरी के साथ रवाना कर दी गई है। हमारे यात्रियों और चालक दल की प्लेन में सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।”

सबरीमाला मंदिर जाने वाले तीर्थयात्रियों को शौचालय के पानी में पका खाना खिला रहा था अब्दुल, रंगे हाथों पकड़ाया: CPIM का है नेता

केरल में सत्ताधारी CPIM के यूथ विंग के नेता अब्दुल शमीम पर सबरीमाला मंदिर जाने वाले तीर्थयात्रियों को शौचालय के पानी में पका हुआ भोजन परोसने का आरोप लगा है। अयप्पा सेवा संघ का दावा है कि शमीम को ऐसा करते हुए उसने रंगे हाथों पकड़ा है। राजस्व सतर्कता दस्ते और स्वास्थ्य विभाग ने आरोपित अब्दुल के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।

दरअसल एरुमेली में अब्दुल शमीम द्वारा एक फूड स्टॉल चलाया जा रहा था। यह फूड स्टॉल केरल के प्रतिष्ठित सबरीमाला मंदिर के रास्ते में हैं। जिस समय तीर्थयात्रा को लेकर भीड़ रहती है, उस समय बड़ी संख्या में तीर्थयात्री अब्दुल के फूड स्टॉल वाले रास्ते से गुजरते और यहाँ खाना भी खाते हैं।

रास्ते में पड़ने वाले इस इलाके का अयप्पा सेवा संघ ने जायजा लिया। संघ का दावा है कि इस स्टॉल में शौचालय के पानी में पका हुआ भोजन तीर्थयात्रियों को परोसा जा रहा है। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि ये फूड स्टॉल चाय और नींबू का जूस बनाने के लिए पानी का इस्तेमाल बगल के एक शौचालय से एक पाइप के जरिए कर रहा था।

अब्दुल शमीम के फूड स्टॉल में शौचालय से जा रहा पानी का पाइप (फोटो साभार: Republic)

रिपब्लिक टीवी के मुताबिक, बगल के बाथरूम से निकल कर नीले रंग की एक पाइप पेय पदार्थ बेचने वाले स्टॉल तक गई है। शुरू में स्टॉल के मालिक ने दावा किया कि शौचालय के पानी का इस्तेमाल केवल बर्तन धोने के लिए किया जाता था, खाना पकाने के लिए नहीं। वहीं, सामने आए सबूत कुछ और ही कह रहे थे।

अयप्पा सेवा संघ को इस फूड स्टॉल पर तब शक हुआ, जब आसपास के क्षेत्र में दुर्गंध फैलनी शुरू हो गई। संघ ने खुलासा किया कि फूड स्टॉल अब्दुल चला रहा था। अब्दुल इस इलाके में सीपीआईएम की युवा शाखा डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (डीवाईएफआई) का सचिव है।

यह भी पता चला कि आरोपित लगभग दो हफ्ते से भगवान अयप्पा के पास दर्शन के लिए आने वाले भक्तों को शौचालय के पानी का इस्तेमाल करके बनाया हुआ खाना परोस रहा था। इसके बाद, राजस्व और स्वास्थ्य विभाग ने मिलकर इस फूड स्टॉल का निरीक्षण किया।

निरीक्षण के बाद फूड स्टॉल को स्टॉप मेमो जारी किया गया है। एरुमेली के विशेष राजस्व दस्ते के प्रभारी अधिकारी एवं उप तहसीलदार बीजू जी नायर के मुताबिक, जाँच अभी जारी है। नायर ने कहा कि आने वाले दिनों में और निरीक्षण करने का प्लान किया गया है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस मामले में जवाबदेही फूड स्टॉल मालिक से आगे भी है। उप तहसीलदार नायर ने कहा कि इस मामले में उस ठेकेदार के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी, जिसने शौचालय के नल से पाइप कनेक्शन की मंजूरी दी थी।

वहीं, मनोरमा ऑनलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, राजस्व विभाग की एक सतर्कता टीम ने सबरीमाला तीर्थयात्रियों का खाना बनाने के पानी के लिए टॉयलेट के नल से पाइप जोड़ने के काम में फूड स्टॉल विक्रेता को पकड़ा था। स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत दखल देते हुए इस अस्थाई दुकान को बंद कर दिया और लाइसेंसधारक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी।

इस दुकान को गैर-खाद्य वस्तुएँ बेचने के लिए अस्थाई लाइसेंस दिया गया था। हालाँकि, ये विक्रेता उसका नियम का भी उल्लंघन कर रहा था। इसे लेकर पुलिस को बार-बार कॉल करने के बाद भी कोई मामला दर्ज नहीं किया गया।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस टीम मौके पर मौजूद थी, लेकिन मामला दर्ज नहीं किया गया। वहीं, भाजपा की स्थानीय इकाई ने आरोप लगाया कि सीपीआईएम और कॉन्ग्रेस दुकान मालिक को बचाने की कोशिश कर रहे हैं, जिसके कारण मामला दर्ज नहीं हो रहा है।

माँ की मौत के बाद शव के साथ एक साल से रह रहीं थीं दो बेटियाँ: दुर्गंध मिटाने के लिए घर में जलाती थीं अगरबत्ती, ऐसे हुआ मामले का खुलासा

उत्तर प्रदेश के वाराणसी से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ उषा त्रिपाठी नाम की एक महिला की मौत हो जाने के बाद उनकी दो जवान बेटियाँ पिछले एक साल से शव के साथ कमरे में रह रही थीं। शव बुरी तरह सड़कर कंकाल बचे हुए थे। पुलिस ने बहुत मशक्कत के बाद दोनों बेटियों को कंकाल से अलग किया।

दरअसल, पड़ोसियों ने काफी दिन तक महिला और उसकी बेटियों को बाहर निकलते नहीं देखा तो उन्हें कुछ आशंका हुई। इसके बाद पड़ोसियों ने महिला के रिश्तेदार को इसकी सूचना दी। सूचना मिलने के बाद पुलिस महिला के घर पर पहुँची तो दरवाजा अंदर से बंद था। बहुत कोशिश के बाद भी दरवाजा नहीं खुला तो पुलिस उसे तोड़कर अंदर दाखिल हुई।

अंदर का नजारा देखकर हर कोई हैरान रह गया। एक महिला की शव के साथ उसकी दो बेटियाँ सो रही थीं। शव कंकाल बन चुका था। जब दोनों बेटियों ने लोगों को अपने घर में देखा तो वे कंकाल से लिपट कर रोने लगीं। उन्होंने कंकाल को चादर और कंबल से ढक रखा था। इसके बाद पुलिस ने लोगों की सहायता से दोनों महिलाओं को कंकाल से अलग किया।

मामला बनारस के लंका थाना के मदरवा घाट का है। यहाँ 52 साल की ऊषा त्रिपाठी अपनी दो बेटियों- 27 साल की पल्लवी त्रिपाठी और 18 साल की वैश्वी त्रिपाठी के साथ रहती थी। करीब दो साल पहले ऊषा का अपने पति से मनमुटाव हो गया था। इसके बाद पति घर छोड़कर चला गया। इस बीच बीमारी के चलते 8 दिसंबर 2022 को ऊषा की मौत हो गई।

माँ की मौत के कारण बेटियों को आघात लगा। वह अपनी माँ के शव को कमरे में बंद करके रख दिया। ऊषा की बीमारी की खबर सुनकर जब रिश्तेदार मिलने आए तो बेटियों ने मिलने से मना कर दिया। उन्होंने रिश्तेदारों से कह दिया कि माँ बहुत ज्यादा बीमार और डॉक्टर ने किसी को मिलने से मना किया है।

लंका SO के मुताबिक, जहाँ पर इनका घर पर वहाँ पर आबादी अभी नहीं बसी है। उनके घर के आसपास भी कोई मकान नहीं है। इसके चलते महिला की मौत और उसके शव से निकलने वाले दुर्गंध का किसी को पता नहीं चल सका। दोनों युवतियाँ दुर्गंध रोकने के लिए घर में अगरबत्ती और धूपबत्ती जलाती थीं और ज्यादातर समय छत पर रहती थीं।

पुलिस ने बताया कि दोनों लड़कियों ने पूछताछ में बताया कि माँ की मौत के बाद शव सड़ने लगा और उसमें से कीड़े निकलने लगे थे। इसके बाद शव से निकलने वाले कीड़ों को वे लोग उठाकर बाहर फेंक देती थीं। वे खाना तो घर में बनाती थीं, लेकिन उसे छत पर ले जाकर खाती थीं। दोनों साथ ही बाहर भी आती-जाती थीं। 

वे अपने परिजनों को भी घर में नहीं आने देती थीं और बाहर से ही लौटा देती थीं। इस घटना के बाद भी सामान्य व्यवहार करती थीं। इससे लोगों को शक नहीं होता था। हालाँकि, पिछले एक सप्ताह से दोनों लड़कियाँ घर से नहीं निकल रही थीं। इसके कारण लोगों को अनहोनी की आशंका हुई और पुलिस के जरिए मामले का खुलासा हुआ।

पड़ोसियों ने बताया कि मृतका उषा त्रिपाठी दो साल पहले घाट पर श्रृंगार का दुकान चलाती थी। वहीं, पल्लवी त्रिपाठी ने मास्टर डिग्री की है, जबकि वैश्वी त्रिपाठी 10वीं में पढ़ती है। यह परिवार मूल रूप से बलिया के रहने वाला है। इस मकान को दोनों के पिता ने ही बनवाया था। लोगों का कहना है कि दोनों लड़कियाँ मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं।

सहरसा से दिल्ली जा रही थी स्पेशल ट्रेन, UP के एक स्टेशन पर रेलगाड़ी खड़ी कर भाग गया ड्राइवर: कहा- मेरी ड्यूटी खत्म, आगे नहीं चलाऊँगा

उत्तर प्रदेश के बुढ़वल जंक्शन पर एक रेलगाड़ी घंटों खड़ी रही क्योंकि उसे चलाने वाले लोको पायलट, सहायक लोको पायलट और गार्ड ने ये कह दिया था कि उनकी ड्यूटी का समय खत्म हो गया है। आगे वो गाड़ी नहीं लेकर जाएँगे। खबर है कि लोको पायलट का ऐसा रवैया देख यात्रियों ने काफी हंगामा किया।

जानकारी के अनुसार, बिहार के सहरसा से दिल्ली के लिए जा रही छठ पूजा स्पेशल ट्रेन (04021) दोपहर को लगभग सवा एक बुढ़वल जंक्शन पहुँची थी। यहाँ यह गाड़ी प्लेटफार्म संख्या 2 पर आकर रुकी। जहाँ से एक मालगाड़ी को भी क्रॉस होना था।

लोगों को लगा शायद मालगाड़ी क्रॉस होने तक गाड़ी रुकी है, लेकिन ट्रेन गुजरने के एक घंटे बाद भी जब गाड़ी नहीं चली तो यात्रियों ने ट्रेन चलाने में देरी की वजह पूछी। जानकारी करने पर पता चला कि लोको पायलट और सहायक लोको पायलट समेत गार्ड इसे खड़ी करके चले गए हैं और उन्होंने इसके पीछे यह कारण दिया है कि उनकी ड्यूटी का समय खत्म हो गया है।

इसी आधार पर उन्होंने इस रेलगाड़ी को आगे ले जाने से मना कर दिया। इस रेलगाड़ी में लगभग 2,500 यात्री सवार थे। यह यात्री जंक्शन पर उतरकर माँग करने लगे कि तुरंत ही उनकी रेलगाड़ी को आगे भेजा जाए। प्रदर्शन के दौरान गुस्साए यात्रियों ने पीछे से आ रही बरौनी-लखनऊ एक्सप्रेस को रोक लिया। लेकिन उस रेल के यात्री भी फँस गए क्योंकि उसके लोको पायलट का ड्यूटी टाइम भी पूरा गया था।

लोगों के जोरदार हल्ले के बाद यह रेलगाड़ी डेढ़ घंटे बाद रवाना हुई। जिस रेल को पहले रोका गया गया था। वह चार घंटे बाद 5:30 बजे रवाना की जा सकी वो भी तब जब इसके लिए पीछे गोंडा से नया लोको पायलट पहुँचा। इस रेलगाड़ी के कई घंटे जंक्शन पर रुके रहने के कारण यहाँ खाने पीने के सामान की भी समस्या हो गई।

लोको पायलट को लेकर क्या है नियम?

नियमानुसार, एक लोको पायलट से 12 घंटे की ड्यूटी ली जाती है। वह इसके बाद अगले स्टेशन पर दूसरे लोको पायलट को ट्रेन हस्तांतरित करके चले जाते हैं। जिस नए लोको पायलट को रेलगाड़ी मिलती है वह उसे आगे लेकर जाता है।

हालाँकि, एक लोको पायलट अपनी ड्यूटी के घंटे समाप्त होने के बाद रेलगाड़ी को ऐसे ही नहीं छोड़ सकता। यदि नया लोको पायलट नहीं आता है तो उसे गाड़ी को आगे ले जाना होता है। रेलगाड़ी के एक स्टेशन पर बिना किसी कारण के आधे घंटे से अधिक खड़े रहने पर रेलवे बोर्ड जवाब तलब करता है।

बुढ़वल स्टेशन पर इस रेलगाड़ी के रुकने के कारण अन्य कई रेलगाड़ियाँ भी प्रभावित हुईं। बुढ़वल स्टेशन गोंडा-लखनऊ रेल प्रखंड पर स्थित है, यहाँ से एक रेल लाइन सीतापुर जंक्शन से होते हुए दिल्ली और दूसरी लखनऊ की तरफ जाती है।

महिला किसानों को ड्रोन, 25000 जनऔषधि केंद्र, 5 साल मुफ्त अनाज: PM मोदी ने रखा विकसित भारत का लक्ष्य, 51000 लोगों को देंगे नियुक्ति पत्र

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार (30 नवंबर 2023) को एक वर्चुअल कार्यक्रम में महिला किसान ड्रोन केंद्र का उद्घाटन किया। दरअसल, केंद्र सरकार महिला सहायता समूहों को 15 हजार ड्रोन देगी। इसके अलावा, उन्होंने देवघर एम्स में 10,000वें औषधि केंद्र का भी उद्घाटन किया है। जन औषधि केंद्रों को 25,000 तक किया जाएगा। पीएम मोदी ने विकसित भारत संकल्प यात्रा के लाभार्थियों से भी बातचीत की।

दरअसल, यह केंद्र महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को ड्रोन प्रदान करेगा, ताकि इस तकनीक का उपयोग आजीविका सहायता के लिए कर सकें। अगले तीन वर्षों के दौरान महिला स्वयं सहायता समूहों को 15,000 ड्रोन उपलब्ध कराए जाएँगे। महिलाओं को ड्रोन उड़ाने और इसे उपयोग करने के लिए जरूरी प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। यह पहल कृषि में प्रौद्योगिकी के उपयोग को प्रोत्साहित करेगी।

इसके साथ ही स्वास्थ्य देखभाल को किफायती और सुलभ बनाने के लिए भारत सरकार ने स्वस्थ भारत के दृष्टिकोण को अपनाया है। इसके लिए सरकार सस्ती कीमतों पर दवाएँ उपलब्ध कराने के लिए जन औषधि केंद्र की स्थापना रही है। प्रधानमंत्री ने देवघर AIIMS में ऐतिहासिक 10,000वें जनऔषधि केंद्र को समर्पित किया।

इसके साथ ही उन्होंने देश में जनऔषधि केंद्रों की संख्या 10,000 से बढ़ाकर 25,000 करने के कार्यक्रम की भी शुरुआत की। बता दें कि महिला स्वयं सहायता समूहों को ड्रोन देने और जनऔषधि केंद्रों की संख्या 10,000 से बढ़ाकर 25,000 करने की घोषणा प्रधानमंत्री ने इस साल अपने स्वतंत्रता दिवस के भाषण में की थी।

इसके साथ ही प्रधानमंत्री मोदी ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना को अगले पाँच वर्ष के लिए बढ़ाने की मंजूरी दी है। इस पर 11.80 लाख करोड़ रुपए खर्च किए जाएँगे। इस योजना के तहत आने वाले परिवारों को हर महीने मुफ्त अनाज मिलता रहेगा।

इसके साथ ही प्रधानमंत्री गुरुवार की शाम को रोजगार मेला को वर्चुअली संबोधित करेंगे। इसमें वे विभिन्न सरकारी विभागों से जुड़े देश भर के 51,000 युवाओं को नियुक्ति पत्र देंगे। इसका आयोजन शाम को लगभग 4 बजे किया जाएगा।

रोजगार मेला देश भर में 37 स्थानों पर आयोजित किया जाएगा। इस पहल का समर्थन करने वाले केंद्र सरकार के विभागों के साथ-साथ राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेशों में भर्तियाँ हो रही हैं। देश भर से चुने गए नए कर्मचारी राजस्व विभाग, गृह मंत्रालय, उच्च शिक्षा विभाग, स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, वित्तीय सेवा विभाग, रक्षा मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और श्रम और रोजगार मंत्रालय सहित विभिन्न मंत्रालयों/विभागों में सरकार में शामिल होंगे।

इन नवनियुक्त लोगों को आईजीओटी कर्मयोगी पोर्टल पर एक ऑनलाइन मॉड्यूल ‘कर्मयोगी प्रारंभ’ के माध्यम से खुद को प्रशिक्षित करने का भी अवसर मिलेगा। इस पोर्टल पर ‘कहीं भी किसी भी डिवाइस से’ सीखने के प्रारूप के लिए 800 से अधिक ई-लर्निंग पाठ्यक्रम उपलब्ध कराए गए हैं।

मणिपुर में जहाँ अर्जुन ने किया था चित्रांगदा से विवाह, वहीं मैतेई महिला के साथ रणदीप हुड्डा ने की शादी: परंपरा पर मोहित हुए नेटिजन्स

बॉलीवुड अभिनेता रणदीप हुड्डा ने मणिपुर की मैतई समाज से आने वाली एक्ट्रेस लिन लैशराम से पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए विवाह कर लिया है। रणदीप हुड्डा ने अपनी विवाह की कुछ झलकियाँ सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए लिखा- “आज से हम दोनों एक हैं।”

उनके विवाह की तस्वीरें अब सोशल मीडिया पर वायरल हैं। दोनों के पहनावे को देख लोग उनकी तारीफ करते नहीं थक रहे हैं।

लिन की फोटो देखने के बाद कुछ लोगों ने कहा कि आज तक सिर्फ और सिर्फ स्कूल की किताबों में मणिपुर की ड्रेस को दिखाया गया था। लेकिन आज रणदीप और लिन के कारण लोग देख पाए कि वाकई ऐसे पारंपरिक परिधानों की आज भी कदर की जाती है।

हर्षा कुमारी ने लिखा- “वाओ, खूब सुंदर। स्कूल में सोशल स्टडीज की किताब में ही पढ़ा था मणिपुर वालों के ड्रेस के बारे में। आज देखा भी बहुत सुंदर है।

सयानी गुप्ता ने लिखा- “उफ्फ!!! बिलकुल साँस थामने वाला है। कभी इतनी खूबसूरत दुल्हन नहीं देखी। लिनला तुम जादू हो। तुम दोनों को आशीर्वाद।”

अजय कटारिया ने लिखा- थैंक गॉड। कम से कम टिपिकल बॉलीवुड पिंक आउटफिट वाली शादियों से कुछ अलग देखने को मिला।

मृदुला ने लिखा- “वाह शुभकामनाएँ। मुझे सच में इस पर गर्व है। इस लड़की ने मनीष मल्होत्रा और सब्याची लहंगे के ट्रेंड को छोड़ कर अपने मणिपुरिया परंपरा से जुड़ी रही। मुझे इस लड़की की सादगी पसंद है। कोई शोबाजी नहीं। बिलकुल मणिपुर की ट्रेडिशनल वेडिंग। जो लोग रेसिस्ट कमेंट कर रहे हैं उनकी शायद पता नहीं मणिपुर भारत में है। लड़की भारतीय है।”

कुछ लोगों ने इस पारंपरिक परिधान में जोड़े को देख कहा कि बॉलीवुड आजतक हल्के रंगों में शादी की सुंदरता को फीका करता आ रहा था, उससे ये शादी थोड़ी अलग है।

बता दें कि रणदीप हुड्डा ने 29 नवंबर को अपनी लॉन्ग टाइम गर्लफ्रेंड रही लिन लैशराम संग शादी मणिपुर में की। शादी को मणिपुर रीति-रिवाजों से किया गया। शेयर की गई तस्वीरों में देख सकते हैं कि रणदीप हुड्डा ने Kokyet पगड़ी बाँधी थी। ये मणिपुर में दूल्हे की पारंपरिक पोशाक है। वहीं लिन ने जो पहना था उसे पोटलोई कहते हैं। ये मोटे कपड़े और बैंबू से बनता है। इसमें सिलेंड्रिकल स्कर्ट बनी होती है जिसे साटिन कपड़े से सजाया जाता है।

शादी से पहले रणदीप हुड्डा ने अपने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर करते हुए बताया था कि वो 29 नवंबर को शादी करने वाले हैं। उनके पोस्ट मे महाभारत का जिक्र था। उनके पोस्ट में लिखा था- “महाभारत की तर्ज पर जहाँ अर्जुन ने मणिपुरी योद्धा राजकुमारी चित्रांगदा से शादी की थी।वहीं पर हम भी दोस्तों और परिवार के आशीर्वाद से शादी कर रहे हैं।हमें यह बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि हमारी शादी 29 नवंबर 2023 को इम्फाल, मणिपुर में होगी।इसके बाद मुंबई में एक रिसेप्शन होगा।हम इस यात्राके लिए तैयार हैं।हम संस्कृतियों के इस मिलन के लिए आपका आशीर्वाद और प्यार चाहते हैं, जिसके लिए हम ताउम्र ऋणी और आभारी रहेंगे।लिन और रणदीप।”

2028 तक 81.35 करोड़ लोगों को मिलता रहेगा फ्री राशन, मोदी सरकार ने 5 साल के लिए बढ़ाई योजना: 11.80 लाख करोड़ रुपए होंगे खर्च

केंद्र की मोदी सरकार ने ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना’ यानी पीएमजीकेएवाई को 5 और साल के लिए आगे बढ़ाने का फैसला किया है। इसके तहत 1 जनवरी 2024 से 5 साल तक 81.35 करोड़ लोगों को फ्री राशन मिलेगा। इस पर केंद्र सरकार 11.80 लाख करोड़ रुपए खर्च करेगी।

कोविड महामारी के दौरान केंद्र सरकार ने गरीबों को राहत देने के लिए इस यो​जना की शुरुआत की थी। इस योजना में लाभार्थियों को चावल, गेहूँ और मोटा अनाज/पोषक अनाज दिया जाता है। यह दुनिया की सबसे बड़ी सामाजिक कल्याण योजनाओं में से एक है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स/ट्विटर पर किए एक पोस्ट में कहा है, “देश के मेरे परिवारजनों में से कोई भी भूखा नहीं सोए, हमारी सरकार इसके लिए प्रतिबद्ध है। अपनी इसी भावना को ध्यान में रखते हुए हमने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना को अगले 5 वर्षों तक बढ़ा दिया है। यानी मेरे गरीब भाई-बहनों के लिए वर्ष 2028 तक मुफ्त राशन की व्यवस्था निरंतर जारी रहेगी। इसका फायदा करीब 81 करोड़ देशवासियों को मिलेगा। मुझे विश्वास है कि हमारा यह प्रयास उनके जीवन को अधिक से अधिक आसान और बेहतर बनाएगा।”

ये फैसला देश की जनसंख्या की बुनियादी भोजन और पोषण जरूरतों को पूरा करने और उनके कल्याण के लिए पीएम मोदी की मजबूत प्रतिबद्धता का सुबूत है। केंद्रीय सूचना-प्रसारण और युवा मामले एवं खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने बताया कि बीते 5 साल में लगभग साढ़े 13 करोड़ भारतीय गरीबी रेखा से बाहर आए हैं। जो अपने आप में मोदी सरकार के कार्यक्रम और नीतियों की बहुत बड़ी उपलब्धि है।

उन्होंने कहा, “फैसला किया गया है कि जनवरी 2024 से पीएमजीकेएवाई को अगले पाँच साल के लिए बढ़ा दिया जाएगा। देश में जितने चिन्हित परिवार हैं उनको हर महीने 5 किलो खाद्यान मिलेगा। इस तरह से अंत्योदय के परिवारों को 35 किलो प्रतिमाह खाद्यान मुफ्त में मिलता रहेगा।”

1 जनवरी, 2024 से 5 साल के लिए पीएमजीकेएवाई के तहत मुफ्त दिए जाने वाले चावल, गेहूँ और मोटा अनाज भारत की गरीब आबादी की आर्थिक मुश्किलों में कमी लाएँगे। इस योजना के तहत वन नेशन वन राशन कार्ड (ओएनओआरसी) के जरिए योजना के लाभार्थी देश में किसी भी उचित मूल्य की दुकान से मुफ्त खाद्यान्न ले सकते हैं।

उस नोबेल पीस प्राइज विनर की मौत जिसके लिए इंदिरा गाँधी थीं ‘कुतिया’ और भारतीय ‘हरामी’, जिंदगी की पिच पर ‘सेंचुरी’ बनाकर हेनरी किसिंजर विदा

हेनरी किसिंजर की मृत्यु हो गई है। वे 100 साल के थे। वह साल 1973 से 1977 के बीच अमेरिका के विदेश मंत्री और 1969 से 1975 तक राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रहे। नोबल पीस प्राइज विनर किसिंजर को भले कई लोग ‘महान डिप्लोमेट’ मानते हैं, लेकिन वे अपनी कूटनीति से भारत पर प्रभाव नहीं डाल पाए। इस बौखलाहट में उन्होंने तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी और भारतीयों के लिए भद्दे शब्दों का इस्तेमाल किया था। 2005 में उन्होंने इसके लिए माफी भी माँगी थी।

अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन और जेराल्ड फोर्ड के कार्यकाल में किसिंजर विदेश मंत्री रहे थे। उन्हें अमेरिका के विदेश संबंधों में बड़ा नाम माना जाता है। 1973 में इजरायल और अरब राष्ट्रों के बीच योम किप्पुर युद्ध, वियतनाम युद्ध आदि में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। अमेरिका और चीन को करीब लाने का श्रेय भी उन्हें ही दिया जाता है। उनके लगातार एक देश से दूसरे देश जाकर कूटनीति करने के स्टाइल को ‘शटल डिप्लोमेसी’ का नाम दिया गया था।

किसिंजर की मृत्यु कनेक्टीकट स्थित उनके घर पर 29 नवंबर 2023 को हुई। उनकी मृत्यु का कारण स्पष्ट नहीं है। उनकी मौत को लेकर पूरी दुनिया से शोक सन्देश भेजे जा रहे हैं। कुछ जगह से उनकी मौत पर विपरीत प्रतिक्रिया भी आई हैं। किसिंजर, अमेरिका में काफी सम्माननीय थे. लेकिन भारत में उनको इतने अनुकूल रवैये से नहीं देखा जाता है। उनके भारतीय विरोधी बयान और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के लिए अभद्र भाषा इस्तेमाल करने को लेकर उनकी भारत में काफी आलोचना होती रही है।

किसिंजर ने भारतीयों और प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी को लेकर क्या कहा?

नवम्बर 1971 में भारत और पाकिस्तान के बीच पूर्वी पाकिस्तान (जो कि बाद में बांग्लादेश बना) को लेकर तल्खी बढ़ रही थी। इस दौरान भारत को जहाँ सोवियत संघ का साथ मिला हुआ था तो वहीं पाकिस्तान के लिए अमेरिका पूरा जोर लगा रहा था।

किसिंजर और निक्सन इस बात से खफा थे कि भारत मुक्ति वाहिनी (बांग्लादेश को आजाद करवाने के लिए बनाई गई गुरिल्ला फ़ौज) को ट्रेनिंग और अन्य सहायता दे रहा है। वह भारत पर दबाव बनाना चाहते थे कि वह बांग्लादेश से आ रहे शरणार्थियों को चुपचाप ले और पाकिस्तान के खिलाफ कोई भी एक्शन ना ले।

इंदिरा गाँधी के साथ हेनरी किसिंजर
इंदिरा गाँधी के साथ हेनरी किसिंजर (चित्र साभार: Bangla Tribune)

इसी समबन्ध में इंदिरा गाँधी अमेरिका से बातचीत करने के लिए 4 और 5 नवम्बर 1971 को अमेरिका के दौरे पर गईं। उनके दौरे के दूसरे दिन तत्कालीन राष्ट्रपति निक्सन और सुरक्षा सलाहकार किसिंजर बातचीत कर रहे थे। इस बातचीत का ब्यौरा अमेरिका के विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर मौजूद है।

इसी बातचीत के दौरान निक्सन ने कहा, “यही कारण है कि वह (इंदिरा गाँधी) एक कुतिया है।” इसके जवाब में किसिंजर कहते हैं, “कुछ भी हो भारतीय तो हरामी हैं ही।” इसके कुछ देर बाद बातचीत में किसिंजर कहते हैं, “यह बात जरूर है कि वह (इंदिरा गाँधी) एक कुतिया है, लेकिन हम जो चाहते थे वह हमें मिल गया।”

किसिंजर और निक्सन के बीच बातचीत का अंश (चित्र साभार: US State Department)
किसिंजर और निक्सन के बीच बातचीत का अंश (चित्र साभार: US State Department)

इसके बाद फिर से एक बार किसिंजर यही बात दोहराते हैं। वह कहते हैं, “हालाँकि, वो एक कुतिया है, लेकिन राष्ट्रपति जी आपको यह तथ्य नहीं भूलना चाहिए कि अपनी मर्जी का काम हो गया।” आगे वह कहते हैं, “वह एक कुतिया जरूर है, लेकिन मैं उसके साथ आज नरमी बरतूँगा।”

26/11 की बरसी पर पाकिस्तान ने तोड़ा शारदा पीठ, फौज के लिए बनाएगा कॉफी हाउस: UNESCO से शिकायत, कहा- मंदिर संरक्षण का काम अपने हाथ लें

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ की ‘दारा शिकोह फाउंडेशन’ ने कश्मीर में पाकिस्तान के हिंदू मंदिरों के तोड़े जाने पर संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन यानी यूनेस्को (UNESCO) को पत्र लिखा है। इसमें फाउंडेशन के अध्यक्ष मोहम्मद आमिर राशिद ने लिखा है कि कश्मीर में पाकिस्तानी सरकार ने हेरिटेज साइट हिंदू मंदिर ‘शारदा पीठ’ की दीवार को बगैर अदालती आदेश के ढहा दिया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी सरकार सांस्कृतिक विरासत हिंदू मंदिर ‘शारदा पीठ’ को जानबूझ कर निशाना बना रही है। वो वहाँ अपने फौजियों के लिए कॉफी हाउस बनाने पर आमादा है। उनका कहना है कि पाकिस्तान की नीलम वैली में शारदा पीठ हिंदू मंदिर के बचे हुए अवशेष हैं और शिक्षा का प्राचीन केंद्र हैं।

उन्होंने अपने इस पत्र में यूनेस्को के महानिदेशकों से पाकिस्तान सरकार के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की माँग की है। उन्होंने ये भी लिखा कि यूनेस्को को मंदिर के पुनर्वास और संरक्षण काम को अपने हाथ में लेना चाहिए। फाउंडेशन के अध्यक्ष राशिद ने इस पत्र में एक अन्य हिंदू मंदिर का भी हवाला दिया है जो बकायदा पाकिस्तान सरकार तोड़ रही है।

उन्होंने कहा, “हमने पत्र में माँग की है कि यूनेस्को महानिदेशक को स्थानीय प्रतिनिधि को बुलाना चाहिए और जब यूनेस्को ने खुद इसे सांस्कृतिक विरासत घोषित किया है तो इसे संरक्षित करने के लिए शारदा पीठ का पुनर्वास और पुनरुद्धार किया जाना चाहिए।”

राशिद के मुताबिक, ”हमने यूनेस्को के महानिदेशक को एक पत्र लिखा है, जिन्होंने हाल ही में उपाध्यक्ष की जगह पाकिस्तान को दी और शारदा पीठ के सांस्कृतिक विरासत होने का ऐलान किया। इसके बावजूद पाकिस्तानी सरकार ने पीओके के अंदर पाकिस्तानी सैनिकों के लिए बनाए जा रहे कॉफी हाउस को बढ़ाने के लिए जानबूझकर शारदा पीठ की कुछ दीवारों को नुकसान पहुँचाया है। जबकि अदालत का आदेश भी है कि उसे सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करना है, इसके बावजूद पाकिस्तानी सेना ने 26/11 की बरसी पर भारतीय लोगों की भावनाओं और खासकर देशभर के हिंदू लोगों की आस्था को जानबूझकर चोट पहुँचाई है।”

मोहम्मद राशिद का कहना है, ”इस घटना को खास तौर पर इसलिए अंजाम दिया गया है ताकि कहीं न कहीं उनकी कट्टरपंथी सोच को बढ़ावा मिले। कॉफी हाउस की आड़ में वे सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देशों के बावजूद शारदा पीठ को नुकसान पहुँचा रहे हैं। वहाँ हिंगलाज मंदिर भी है। तीन-चार हफ्ते के भीतर कई मंदिरों को बकायदा तोड़ा गया है।”

गौरतलब है कि पाकिस्तान सरकार ने हिंदू समुदाय पर अत्याचारों में इजाफा करते हुए सिंध प्रांत में एक प्रतिष्ठित हिंदू मंदिर को ध्वस्त किया था। चौंकाने वाली बात यह है कि पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा आदेश के बावजूद इस पर रोक लगाने के बावजूद विध्वंस को मंजूरी दे दी गई।

पाकिस्तान में हिंदू मंदिर के विध्वंस की ये अकेली घटना नहीं है। ये वहाँ धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए पाकिस्तान की असहिष्णुता का एक नमूना भर है। इस देश में मंदिरों का यह विध्वंस धरोहरों के अंतरराष्ट्रीय संरक्षण के कोशिशों को धत्ता बताता है।

ये इस मुल्क में सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहरों की रक्षा पर भी सवाल खड़े करता है। इस तरह के वाकये पाकिस्तान जैसे मुस्लिम बहुसंख्यक मुल्क में हिंदुओं के लगातार और बड़े पैमाने पर हो रहे उत्पीड़न को जाहिर करती है।