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NIT श्रीनगर की वेबसाइट हैक? पैगंबर मुहम्मद के ‘अपमान’ को लेकर हिंदू छात्र पर FIR, कट्टर इस्लामी भीड़ का प्रदर्शन

जम्मू कश्मीर के श्रीनगर स्थित ‘राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT)’ कॉलेज की वेबसाइट का होमपेज हैक हो गया है। NIT श्रीनगर की वेबसाइट ‘nitsri.ac.in’ को खोलने पर होमपेज पर लिखा हुआ आ रहा है – “हम तुरंत वापस आएँगे। असुविधा के लिए खेद है लेकिन हम इस समय कुछ मेंटेनेंस की प्रक्रिया में लगे हुए हैं। अगर आपको ज़रूरत है तो आप हमेशा हमसे संपर्क कर सकते हैं, अन्यथा हम तुरंत ऑनलाइन वापस आएँगे। – CSC वेब टीम।”

साफ़ है, NIT श्रीनगर की वेबसाइट का होमपेज हैक हो गया है। दूसरी बात यह भी ध्यान देने लायक है कि वेबसाइट पर अन्य पेज खुल रहे हैं, लेकिन ये समस्या होमपेज पर ही है। वेबसाइट हैक होने के इस मामले पर ऑपइंडिया ने संस्थान को मेल कर जानकारी माँगी है। उनका रिप्लाई अभी तक नहीं आया है।

NIT श्रीनगर अभी चर्चा में है, क्योंकि वहाँ मुस्लिम भीड़ प्रदर्शन कर रही है। पैगंबर मुहम्मद के कथित अपमान का आरोप एक हिंदू छात्र पर लगाया गया है। उक्त छात्र के खिलाफ पुलिस ने मुस्लिम समाज की भावनाओं को आहत करने के लिए FIR भी दर्ज कर ली है। नीग्रीन पुलिस थाने में ये मामला दर्ज किया गया है।

इस मामले में पुलिस ने आम लोगों को भी सावधान किया है कि वो अफवाहों से बचें। प्रदर्शन में शामिल कट्टर मुस्लिम छात्रों ने आरोपित छात्र को ‘बाहरी’ बताते हुए उसके खिलाफ कार्रवाई की माँग की है। ‘लब्बैक या रसूल अल्लाह’ के नारे लगाते हुए कट्टरपंथी भीड़ ने प्रदर्शन किया।

इस मामले पर राजनीति भी हो रही है और पूर्व मेयर शेख इमरान ने पुलिस पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाया है। NIT की अनुशासनात्मक समिति ने उक्त हिंदू छात्र को कॉलेज से 1 साल के लिए निकाल दिया है।

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जम्मू कश्मीर स्थित NIT श्रीनगर की वेबसाइट का होमपेज हैक

कॉलेजों की वेबसाइट हैक करने का ये पहला मामला नहीं है। गाजियाबाद के जिस इंजीनियरनिंग कॉलेज ABSE में जय श्री राम के नारे बोलने पर छात्र को मंच से उतारा गया था, वहाँ की वेबसाइट हैक हो गई थी। इसी तरह दिल्ली के जिस स्कूल में छात्रों ने ‘जय श्री राम’ बोलने पर खुद को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था, उसकी वेबसाइट हैक हो गई थी। अब नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, श्रीनगर की वेबसाइट का होमपेज हैक हो गया है।

41 मजदूरों के रेस्क्यू ऑपरेशन पर बॉलीवुड बना पाएगी ‘The 33’ जैसी फिल्म, या सरसों के खेत वाले गाने ठूँस मसाला-मूवी तक ही रहेगा इनका दायरा?

उत्तराखंड के उत्तरकाशी में स्थित सिल्कयारा की निर्माणाधीन सुरंग में पिछले 17 दिनों से फँसे 41 श्रमिकों को सकुशल बाहर निकाल लिया गया है। इस रेस्क्यू ऑपरेशन बेहद जटिल था, जिसे भारत और उत्तराखंड की सरकार ने सफलतापूर्वक अंजाम दिया। यह देश के सबसे कठिन बचाव अभियानों में एक था। आमतौर पर 17 दिनों तक इस ऑपरेशन के बारे में सुन-पढ़कर इसकी गंभीरता का अंदाजा लगा पाना आम लोगों के लिए आसान नहीं है।

सुरंग में क्षैतिज रूप से 80 मीटर नीचे और 60 मीटर अंदर की ओर फँसे इन श्रमिकों को निकालना भौगोलिक रूप से पहाड़ी होने के कारण और जटिल बन गया। ये सिर्फ रेस्क्यूर टीम के लिए ही नहीं, बल्कि अंदर फँसे मजदूरों के धैर्य की भी परीक्षा था। 60 मीटर अंदर फँसे मजदूरों की मानसिक और शारीरिक स्थिति को समझना तो आम लोगों को हॉलीवुड की फिल्म ‘The 33’ देखना चाहिए।

फिल्म द 33 चिली देश में हुए एक सोने की खदान धँसने की वास्तविक घटना पर आधारित फिल्म है। चिली के रेगिस्तान में स्थित सैन जोस के कैपियापो खदान 5 अगस्त 2010 में ढह गया था, जिसके कारण 33 श्रमिक अंदर फँसकर गए थे। उनके पास सीमित खाना और पीने का पानी था। अमेरिका के नासा आदि संस्थाओं की सहयोग के बावजूद इन श्रमिकों को निकालने में 69 दिन लग गए थे।

जिस तरह से सिल्कयारा सुरंग में फँसे श्रमिकों को गब्बर सिंह नेगी मजदूरों को मानसिक रूप पर मजबूत करते रहे। इसी तरह सैन जोस खदान में फँसे श्रमिकों को लुईस उरुज संबल देते रहे। उनकी लीडरशिप के कारण सैन जोस खदान में फँसे सभी 33 सैनिक 69 दिनों तक सरवाइव करने में सफल रहे थे।

उस दौरान जिस कंपनी के खदान में मजदूर फँसे थे, वह उन मजदूरों को निकालने को लेकर ज्यादा गंभीर नहीं थी। हालाँकि, चिली सरकार ने इन मजदूरों को निकालने का बीड़ा उठाया और अमेरिका से लेकर तमाम देशों से विशेषज्ञों को बुलाया। रेस्क्यू ऑपरेशन के जारी रहने के ऑगर मशी, ड्रिलिंग मशीन बार-बार टूट जा रही थी। हजारों क्विंटल के चट्टान रास्ते में आ रहे थे, लेकिन मजदूर कहाँ फँसे इसकी सही जानकारी नहीं मिल पा रही थी।

रेस्क्यू ऑपरेशन के कुछ दिन बाद एक ऐसा भी समय आया कि ऑपरेशन टीम ने इन श्रमिकों को निकालने का बंद करने का फैसला ले लिया। उन्हें लगा कि 17 दिन बीत जाने के बाद शायद ही कोई श्रमिक जिंदा होगा। सीमित खाना-पानी होने के बाद भी श्रमिकों के बीच फँसे मजदूरों को लुईस उरूज लगातार हौसला देते रहे। उन्हें विश्वास था कि कंपनी भले ही उन्हें छोड़ दे, लेकिन चिली की सरकार उन्हें मरने के लिए नहीं छोड़ेगी।

उरूज अपने साथियों को भरोसा दिलाते रहे कि एक दिन ऐसा वक्त आएगा, तब वे सभी अपने-अपने परिवारों के बीच रहेंगे। खाना-पानी को भी वे इस तरह मैनेज करते रहे कि अंदर फँसे लोग, अधिक से अधिक दिन तक जीवित रह सके। हालाँकि, उनके अधिकांश साथियों को उम्मीद नहीं थी कि वे फिर कभी सुरंग से बाहर निकल पाएँगे, लेकिन उरूज ऐसा नहीं मानते थे।

इन सब कोशिशों के रेस्क्यू टीम काम को बंद करना चाहती थी, लेकिन चिली की सरकार ने ऐसा करने से मना कर दिया। इस दौरान रेस्क्यू ऑपरेशन का लाइव प्रसारण चलता रहा और 55 लाख लोग हर समय इसे देखते रहे। चिली की मीडिया ने इन मजदूरों को एक सेकेंड के लिए भी नहीं छोड़ा। घटना के दिन से ही पल-पल की रिपोर्टिंग करते रहे। सरकारी हर फैसले की जानकारी देशवासियों तक पहुँचा रहे। वहाँ की मीडिया के लिए उस समय इन श्रमिकों से बड़ा कोई मुद्दा नहीं था।

आखिरकार, रेस्क्यू टीम ने प्लान को बदला और एक बार फिर से विदेशों से ड्रिलिंग मशीन को मंगाकर काम शुरू किया। टीम को पता नहीं था कि श्रमिक कहाँ हैं, लेकिन सौभाग्य और टीम के प्रयास से श्रमिकों तक ड्रिलिंग का काम पूरा हुआ। हालाँकि तब भी रेस्क्यू टीम सटीक लोकेशन और मजदूरों के जिंदा बचे होने को लेकर अनजान थी।

ऐसे में अंदर फँसे मजदूरों ने एक कपड़े पर सभी लोगों के जिंदा और सुरक्षित होने की जानकारी लिख कर ड्रिलिंग मशीन के एक छोर पर बाँध दी। ड्रिलिंग मशीन को जब ऊपर खींचा गया और उसमें श्रमिकों का संदेश मिला तो टीम का हौसला बढ़ गया।

इसके बाद उन लोगों को खाना, पानी, दवाई, कपड़े और कैमरा आदि अंदर भेजा गया और उनसे हर पल चिली सरकार कॉन्टैक्ट में रही। आखिरकार अगले 30 दिनों के बाद उन्हें एक कैप्सूल के जरिए सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। कैप्सूल के जरिए लोगों का रेस्क्यू किया गया और

इस तरह के रेस्क्यू ऑपरेशन में आने वाली समस्याओं को लेकर बनी The 33 फिल्म एक बेहद शानदार फिल्म है। इसमें सरकार की कोशिश, टीम के प्रयास और श्रमिकों के हौसले को बखूबी दिखाया गया है। भारत में इस तरह की फिल्में बनने की उम्मीद नहीं की जा सकती, क्योंकि यहाँ कमर्शियल और डॉक्यू-ड्रामा फिल्मों को मापने का मानदंड ही अलग है।

हालाँकि, पश्चिम बंगाल के रानीगंज के महाबीर खदान में 13 नवंबर 1989 को कोयले से बनी चट्टानों को विस्फोट करके तोड़ा जा रहा था। इसी दौरान में पानी भर गया और वहाँ से काम कर रहे 232 लोगों में से 6 श्रमिकों की मौके पर मौत हो गई। वहाँ कैप्सूल के जरिए श्रमिकों को बाहर निकाला गया। इस ‘रानीगंज’ फिल्म भी बनी है, लेकिन इस फिल्म में भी वो बात नहीं है।

उम्मीदों का ‘जनरल’… सिलक्यारा का सुरंग ही नहीं, यमन, सूडान, इराक और यूक्रेन में भी कमाल दिखा चुके हैं VK सिंह: जहाँ-जहाँ संकट, वहाँ-वहाँ पहुँचे

उत्तराखंड के उत्तरकाशी की सिलक्यारा सुरंग में फँसे 41 श्रमिकों को निकालने का रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा हो चुका है। सभी श्रमिकों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। इस पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन पर प्रधानमंत्री की सीधी नजर थी। प्रधानमंत्री की तरफ मौके पर केन्द्रीय राज्य सड़क और राजमार्ग मंत्री जनरल विजय कुमार सिंह भी पहुँचे थे।

चूँकि यह सुंरग प्रधानमंत्री मोदी की महत्वाकांक्षी परियोजना ऑल वेदर रोड के अंतर्गत बन रही है। ऐसे में यह मामला जनरल वीके सिंह के विभाग से भी जुड़ा हुआ था। हालाँकि, यह कोई पहली बार नहीं है कि जनरल वीके सिंह ऐसी जगह समस्या सुलझाने पहुँचे हैं जहाँ देश के नागरिक फँसे हों।

जनरल वीके सिंह इससे पहले गृहयुद्ध में फँसे यमन, सूडान, यूक्रेन और इराक़ से भारतीयों को वापस लाने के ऑपरेशन का जिम्मा संभाल चुके हैं। वीके सिंह ऐसे मुश्किल जगहों पर जाकर भारतीयों को निकाल कर लाए हैं। वह ऐसी समस्याओं में भेजे जाने के लिए मोदी सरकार के ‘गो टू पर्सन’ हैं।

क्यों VK सिंह को ही चुनती है सरकार?

उनका 4 दशकों का सैन्य सेवा का अनुभव और एक दशक से अधिक का सार्वजनिक जीवन का अनुभव उन्हें ऐसे कठिन हालातों में समन्वय बनाने के लिए सबसे अच्छा विकल्प बनाता है। वह 1972 से लेकर 2012 तक सैन्य सेवा में रहे हैं। वह श्रीलंका में गृहयुद्ध में भी सेवाएँ दे चुके हैं।

सैन्य सेवा के साथ ही उनका ऐसे राहत बचाव ऑपरेशन में पुराना अनुभव है। 2005 में जम्मू कश्मीर में आए भूकम्प में भी उन्होंने वहाँ राहत बचाव ऑपरेशन का नेतृत्व किया था। यह काफी शक्तिशाली भूकम्प था और इसमें पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में भी भारी तबाही हुई थी। VK सिंह की इस विशेषज्ञता को देखते हुए उन्हें मोदी सरकार ने ऐसे ऑपरेशन के लिए शुरुआत से ही चुना है।

ऑपरेशन राहत – यमन

वर्ष 2015 में यमन में हूती विद्रोहियों और सरकार के बीच छिड़ी लड़ाई के कारण 4,000 से अधिक भारतीय फँस गए थे। लड़ाई गंभीर होने और सऊदी अरब जैसे देशों की बमबारी के कारण मानवीय संकट पैदा हो गया था। इन भारतीयों को यमन से सुरक्षित लाने के लिए जनरल वीके सिंह को मोदी सरकार ने जिबूती भेजा जो कि यमन के दूसरी और तट पर स्थित है। इस ऑपरेशन के तहत भारतीय वायु सेना और नौसेना ने 4,600 से अधिक भारतीयों को निकाला था।

जनरल वीके सिंह इस दौरान इस पूरे ऑपरेशन के कमांडर थे। प्रधानमंत्री मोदी ने भी जनरल वीके सिंह की तारीफ़ की, उन्होंने कहा था कि वह एक सैनिक तरह वहाँ खड़े रहे और भारतीयों को लेकर आए।

ऑपरेशन संकट मोचन – दक्षिणी सूडान

वर्ष 2016 में दक्षिणी सूडान में गृहयुद्ध छिड़ने के कारण 600 भारतीय फँस गए थे। इस ऑपरेशन को भी जनरल VK सिंह के हाथों में दिया गया था। इसमें 600 से अधिक भारतीयों को वायुसेना की सहायता से निकाला गया था। वीके सिंह इस ऑपरेशन के लिए खुद ही दक्षिणी सूडान गए थे।

इराक़ से शवों को वापस लाना

जनरल वीके सिंह वर्ष 2018 में इराक से 39 भारतीयों के शवों के अवशेषों को वापस लेकर आए थे। यह सभी इराक में इस्लामी आतंकी संगठन ISIS द्वारा मार दिए गए थे। इनके शवों को लाने के लिए वीके सिंह 2018 में वायुसेना के विशेष विमान द्वारा इराक गए थे।

ऑपरेशन गंगा – यूक्रेन

भारत ने फरवरी 2022 में चालू हुए यूक्रेन-रूस युद्ध के बाद अपने नागरिकों को, जिनमें सबसे बड़ी संख्या में छात्र थे, निकालने के लिए ‘ऑपरेशन गंगा’ चालू किया था। परिस्थितियाँ विपरीत होने के बाद भी जनरल वीके सिंह को पोलैंड भेजा गया जहाँ से छात्रों को निकाला गया।

जनरल सिंह ने इस ऑपरेशन में पोलैंड पहुँच कर छात्रों के भारत वापस आने को सुनिश्चित किया था। वह कई दिन तक पोलैंड में रहे थे और जब भारतीय छात्र घर आ गए तब वह वापस आए।

शाहनवाज़, शोएब, शाहरुख़, राशिद, आज़ाद, अशरफ अली, परवेज, फैज़ल राशिद… दिल्ली दंगों में दिनेश अग्रवाल की दुकान जलाने वाले 9 बरी, मिला ‘संदेह का लाभ’

दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने साल 2020 दंगो के एक मामले में 9 आरोपितों को बरी कर दिया है। इनके नाम मोहम्मद शाहनवाज़, शोएब, शाहरुख़, राशिद, आज़ाद, अशरफ अली, परवेज, मोहम्मद फैज़ल और राशिद उर्फ़ मोनू हैं। कोर्ट ने शनिवार (25 नवंबर, 2023) को दिए गए अपने आदेश में आरोपितों के खिलाफ पुलिस की गवाही को नाकाफी बताया है। बरी हुए आरोपितों पर पुलिस ने आगजनी और तोड़फोड़ की धाराएँ लगाईं थीं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस केस की सुनवाई एडिशनल सेशन जज पुलत्स्य प्रमचला की कोर्ट में हुई। उन्होंने अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें सुनीं। अपने आदेश में उन्होंने केस में नामजद मोहम्मद शाहनवाज़, शोएब, शाहरुख़, राशिद, आज़ाद, अशरफ अली, परवेज, मोहम्मद फैज़ल और राशिद उर्फ़ मोनू को संदेह का लाभ दे कर बरी कर दिया। उन्होंने कहा कि आरोपितों पर पुलिस अपने लगाए गए चार्ज पर्याप्त सबूतों के आधार पर साबित नहीं कर पाई।

इस मामले में पुलिस के 2 जवान कॉन्स्टेबल विपिन और हेड कॉन्स्टेबल हरी बाबू बतौर गवाह दर्ज थे। दोनों ने आरोपितों को हिंसक हरकतें करते देखने का दावा किया था। कोर्ट ने दोनों पुलिसकर्मियों की गवाही पर सवाल खड़े किए। न्यायाधीश पुलत्स्य प्रमचला ने कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि चश्मदीद पुलिसकर्मी ने आरोपितों को सुबह 9 बजे से शाम के बाद रात होने तक साफ तौर पर देखा भी या नहीं। कोर्ट ने इस बात का भी जिक्र किया कि सिपाही विपिन घटना से पहले ही शाहनवाज और आज़ाद को जानता था।

सिपाही विपिन ने कोर्ट में बताया कि उन्होंने तीसरे आरोपित अशरफ को तब जाना जब वो अन्य केस में नामजद हो रहा था। न्यायाधीश पुलत्स्य ने यह भी कहा कि चश्मदीद शाहनवाज, अशरफ और आज़ाद को छोड़ कर पहले किसी को भी नहीं जानते थे।

क्या था मामला

28 फरवरी 2020 को दिल्ली के गोकुलपुरी थाने में SS ग्लास एन्ड प्लाईवुड कम्पनी के मालिक दिनेश अग्रवाल नाम के व्यक्ति ने लिखित तहरीर दी थी। तहरीर में उन्होंने बताया था कि 25 फरवरी 2020 को गोकुलपुरी स्थित उनकी दुकान में दंगाइयों ने आग लगा दी थी। इस आगजनी की चपेट में अग्रवाल का टेम्पू और बाइक भी आ गई थी। इसी मामले में मोहम्मद शाहनवाज़, शोएब, शाहरुख़, राशिद, आज़ाद, अशरफ अली, परवेज, मोहम्मद फैज़ल और राशिद उर्फ़ मोनू को पुलिस ने नामजद किया था।

वो अंत में निकले, मुस्कुराते हुए… जिनके जज्बे की बात अपने परिजनों से करते थे 40 मजदूर, उन गब्बर सिंह नेगी के PM मोदी भी हुए कायल: बेटे से कहा था – सबकी जिम्मेदारी मेरी

उत्तराखंड के उत्तरकाशी के सिलक्यारा सुरंग हादसे से 17 दिनों बाद वहाँ फँसे 41 मजदूर सकुशल बाहर निकल आए। लेकिन, पल-पल निराशा और आशा के बीच जूझते हुए उनका जो वक्त वहाँ गुजरा शायद वो उसे कभी भुला न पाएँ, इस सबके बीच ये सभी मजदूर गब्बर सिंह नेगी की ज़िंदादिली के भी ताउम्र के लिए कायल हो गए। गब्बर सिंह नेगी उन 41 श्रमिकों में शामिल थे, जो अंदर 17 दिनों तक फँसे रहे।

वो नेगी ही थे जिन्होंने मुश्किल की उन घड़ियों में जिंदगी जीने की उम्मीद इनके दिलों में जलाए रखी। यही वजह है कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी कोटद्वार के पहाड़ के गब्बर के लिए कहना पड़ा, “देखो गब्बर सिंह, मैं तुम्हें तो विशेष रूप से बधाई देता हूँ, क्योंकि मुझे डेली रिपोर्ट हमारे मुख्यमंत्री जी बताते थे कि आप दोनों ने जो लीडरशिप दी और जो टीम स्प्रिट दिखाई मुझे तो लगता है शायद किसी यूनिवर्सिटी को एक केस स्टडी तैयार करनी पड़ेगी।”

गब्बर ने दिया सब को हौसला

बचाव अभियान के दौरान वो गब्बर सिंह नेगी ही थे जो मजदूरों को मानसिक रूप पर मजबूत करते रहे। यही नहीं, उनके जरिए ही सीएम से लेकर सभी ने मजदूरों से संपर्क साधा। सब उनके इस सहज नेतृत्व की सराहना करते रहे हैं। और करें भी क्यों न? आसान नहीं होता मुश्किल में फँसे एक दो नहीं बल्कि पूरे 40 लोगों को दिलासा देना, हिम्मत देना। दीवाली की सुबह 12 नवंबर, 2023 को हादसे के दिन इस साइट पर 51 साल के गब्बर सिंह नेगी बतौर फोरमैन तैनात थे।

भूस्खलन की वजह से सुरंग में मलबा गिरने से कुछ देर पहले ही वो सुरंग में अंदर गए थे। उनके बेहद करीब आकर मलबा गिरा और वो वहीं फँसे रह गए। इन मुश्किल हालात में उन्होंने अपने साथ वहाँ फँसे 40 मजदूर साथियों को हादसे के बारे में बताया ही नहीं बल्कि उन्हें न घबराने और शांति बनाए रखने के लिए कहा।

वहीं थे जिन्होंने सुरंग से बाहर भी वॉकी-टॉकी के जरिए हादसे के बारे में सूचना दी थी। वो मजदूरों के साथ ही सुरंग में फँसे थे, लेकिन इस दौरान जब सुरंग में मजदूरों को एक-एक दिन पहाड़ सा भारी लगने लगा तो इस पहाड़ी गब्बर ने मोर्चा सँभाल लिया। वो बाहर बचाव टीम से भी लगातार संपर्क बनाए रहे थे।

वो इन 17 दिनों में सभी मजदूरों को दिलासा देते रहे, हिम्मत बँधाते रहें। यही वजह रही की मजदूर सुरंग के अंदर से अपने परिवारवालों से बात करने के दौरान भी गब्बर सिंह नेगी का जिक्र करना और उनकी तारीफ करना नहीं भूले।

सुरंग में फँसे मजदूरों के परिजनों ने की तारीफ

लखीमपुर खीरी के मजदूर मंजीत लाल के पिता चौधरी ने कहा कि गब्बर सिंह नेगी की वजह से उनके बेटे का मनोबल बना रहा। वहीं दूसरी तरफ मजदूर सबा अहमद के भाई नैयर अहमद भी उनकी तारीफ करते नहीं थकते, वो कहते हैं कि गब्बर सिंह सरल स्वभाव के अनुभवी शख्स रहे जो सबका हौसला बढ़ाते रहे।

गब्बर सिंह नेगी के बेटे आकाश सिंह नेगी का कहना था, ‘‘मुझे कुछ सेकेंड के लिए पाइप के जरिए अपने पिता से बात करने की मंजूरी मिली थी। इस पाइप से सुरंग में फँसे श्रमिकों को आक्सीजन दी जा रही थी। पापा ने कहा वे सभी सुरक्षित हैं। उन्होंने हमसे फ़िक्र न करने को कहा और कहा कंपनी उनके साथ है।”

गब्बर सिंह ने बेटे आकाश को ये भी बताया था कि वह सुरंग में अकेले नहीं हैं और अन्य साथियों की सुरक्षा का जिम्मेदारी भी उनकी ही है। वो अपने साथियों का हौसला बढ़ा रहे हैं। तब आकाश पिता की बात सुन भावुक हो उठे। गब्बर सिंह के इस जज्बे को उनके पूरे परिवार ने भी सराहा था।

वो लगातार अपने साथ फँसे मजदूरों से कहते रहे कि हम लोगों को जल्दी ही सुरक्षित बाहर निकाल लिया जाएगा। उन्होंने अपने साथ फँसे मजदूरों से कहा था कि मैं सबसे आख़िर में बाहर आऊँगा और ऐसा ही किया भी था। गब्बर के भाई जयमाल सिंह नेगी ने बताया, “वह सबसे आख़िर में निकले। बाहर आने पर वो मुस्कुरा रहे थे।”

25 साल सुरंग में काम करने का अनुभव

सिलक्यारा सुरंग बना रही कंपनी नवयुग इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड में गब्बर सिंह नेगी फोरमैन पद पर है। वो पौड़ी जिले के कोटद्वार नगर निगम क्षेत्र के तहत आने वाले विशनपुर में रहते हैं और बीते 25 साल से सुंरग निर्माण कर रही कंपनियों में काम करते आ रहे हैं।

उन्हें भूस्खलन की घटनाओं का खासा अनुभव है। पीएम मोदी से बातचीत के दौरान उन्होंने ऐसे अनुभव पर बताया था, “सर उस वक्त में सिक्किम में था। तब एक लैंड स्लाइड हुआ था तब हम फँसे हुए थे। काफी परेशानी आई थी।” जवाहर सुंरग के निर्माण में भी वो काम कर चुके हैं। सुरंग में रहने के दौरान भी गब्बर सिंह नेगी ने अपने साथ फँसे अन्य 40 मजदूरों को बताया था कि वो कुछ साल पहले भी इस निर्माण के दौरान सुरंग में फँस चुके हैं।

गब्बर सिंह के बड़े भाई जयमल नेगी भी पाइप के जरिए उनसे लगातार बात करते रहे थे। बकौल जयमल गब्बर सिंह को सभी मजदूरों की जिंदगी की फिक्र है। इसलिए वो सुरंग के अंदर मजदूरों को टहलने और योगाभ्यास करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। प्रेम पोखरियाल की भी सुरंग में फँसे मजदूरों से लगातार बात होती रही थी। उनका कहना था कि गब्बर सिंह काफी समझदार हैं। वो सभी का हौसला बनाए हुए हैं और सुरंग के अंदर डॉक्टरों की टीम के निर्देशों का पालन भी मजदूरों से वही करवा रहे हैं।

कल्लू खान और नाज़िम ने राजू को धोखे से बुलाया घर; सिर पर डंबल मार कर ले ली जान… लाश के टुकड़ों को 15 पन्नियों में भर के नाले में फेंका

मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एक व्यक्ति की हत्या करके शव को कई टुकड़ों में काटकर फेंके जाने का मामला सामने आया है। मृतक का नाम राजू है, जबकि आरोपित नाज़िम और कल्लू खान हैं। राजू की लाश को पॉलीथिन में भर के अलग-अलग जगहों पर फेंका गया था। शव के कुछ हिस्से नाले में मिलने के बाद यह घटना प्रकाश में आई। नाज़िम और कल्लू खान को गिरफ्तार कर लिया गया है। दोनों आरोपितों के बीच अब्बा-औलाद का रिश्ता है। घटना 21 सितंबर 2023 की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला ग्वालियर के जनकगंज थाना क्षेत्र का है। यहाँ 28 सितंबर 2023 को रामकुई पुलिया के पास से गुजर रहे राहगीरों को स्वर्ण रेखा नाले में इंसानी अंग दिखे। इसके बाद लोगों को इसकी जानकारी पुलिस को दी। पुलिस ने अंगों को समेट कर मृतक के पहचान की कोशिशें शुरू कर दीं। शव किसी पुरुष का था।

इसी बीच पुलिस को पता चला कि बहोडपुर का रहने वाला राजू खान 21 सितंबर से लापता है। राजू के परिजनों ने अपने स्तर पर शुरू में उसे खोजने का काफी प्रयास किया था लेकिन सफलता नहीं मिली थी। आखिरकार उसकी गुमशुदगी थाने में दर्ज करवा दी गई थी। पुलिस ने राजू के परिजनों को शिनाख्त के लिए बुलवाया। परिजनों ने लाश राजू की ही होने का दावा किया।

जनकगंज थाने ने अज्ञात हत्यारों के खिलाफ केस दर्ज करके जाँच शुरू कर दी। इसी दौरान राजू खान की लाश का DNA टेस्ट भी करवाया गया, जो उसके परिवार वालों से मैच कर गया। मृतक के परिजनों ने नाज़िम और कल्लू खान पर राजू की हत्या का शक जताया। हत्याकांड में नाम आते ही नाज़िम और उसके अब्बा कल्लू फरार हो गए। ग्वालियर पुलिस ने नाज़िम की लोकेशन ट्रेस की तो वो आगरा में एक किराए के मकान में मिला।

इसके बाद पुलिस नाज़िम को गिरफ्तार कर के ग्वालियर लेकर आ गई। नाज़िम से उसके अब्बा कल्लू के बारे में पूछताछ की गई। नाज़िम ने बताया कि हत्या के कुछ दिन बाद ही उसके अब्बा कल्लू को स्मैक की तस्करी से संबंधित एक केस में गिरफ्तार कर लिया गया और वह फिलहाल ग्वालियर जेल में बंद है। नाज़िम ने यह भी बताया कि उसे शंका थी कि राजू खान पुलिस की मुखबिरी करता है।

एक बार कल्लू खान भी पकड़ा गया था। नाजिम ने बताया कि 21 सितंबर 2023 को दोनों ने साजिश के तहत राजू को समझौते के लिए बुलवाया। वहाँ दोनों ने राजू के सिर पर जोर से डंबल मारा, जिससे वो अचेत हो गया। बाद में इन्होंने बाक़ा और छुरी से राजू की लाश के कई टुकड़े कर दिए। किसी को शक न हो, इसके लिए दोनों ने मिल कर 15 अलग-अलग पॉलीथिन में शव भर कर फेंक दिए।

क्लास में मुख से संभोग सिखाने वाला प्रोफेसर इफ्तिखार अहमद निलंबित, केरल की यूनिवर्सिटी में क्लासरूम को बना दिया था सेक्स और यौन आनंद का अड्डा

केरल सेंट्रल यूनिवर्सिटी ने सहायक प्रोफेसर इफ्तिखार अहमद बी को मंगलवार (28 नवंबर, 2023) को निलंबित कर दिया। उनके खिलाफ ये कार्रवाई दो हफ्ते पहले उन पर छात्रों के यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने के बाद की गई।

उन पर अंग्रेजी और तुलनात्मक साहित्य विभाग के पहले सेमेस्टर के PG छात्रों ने ये आरोप लगाए थे। सहायक प्रोफेसर के निलंबन पर प्रभारी कुलपति प्रोफेसर बैजू केसी ने कहा कि छात्रों के लगाए गए आरोपों के आधार पर डॉ इफ्तिखार अहमद के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही पर विचार किया जा रहा है। इसलिए, उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। छात्रों ने सहायक प्रोफेसर इफ्तिखार अहमद बी पर 7 सितंबर, 2023 को उनकी कक्षाओं के शुरु होने पर कविता और साहित्य की व्याख्या की आड़ में सेक्स, यौन आनंद और अन्य तरह के शारीरिक आनंद को प्रमुखता देने का आरोप लगाया था।

छात्रों का आरोप था कि प्रोफेसर अहमद ने इरोटिक प्रोएट्री की क्लास को सेक्सुअल कमेंट और अश्लील चर्चा का आधार बना दिया था। इस दौरान ने प्रोफेसर ने महिलाओं को यौन तृप्ति की वस्तु के तौर पर दिखाया।

छात्रों ने सहायक प्रोफेसर अहमद की सारी हदें पार करने के बाद यूनिवर्सिटी की आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) से संपर्क साधा था। दरअसल प्रोफेसर ने 13 नवंबर, 2023 को आंतरिक परीक्षा दे रही एक छात्रा के बेहोश होने पर उसके साथ कथित तौर पर छेड़छाड़ की थी।

इसके बाद 14 नवंबर, 2023 को छात्रों ने समिति की पीठासीन अधिकारी प्रोफेसर जर्मिना केए और अंग्रेजी और तुलनात्मक साहित्य विभाग की प्रमुख डॉ आशा एस को प्रोफेसर अहमद के गलत व्यवहार के 31 कथित उदाहरणों की लिस्ट सहित सात पन्नों की शिकायत दी थी। इसके बाद 16 नवंबर, 2023 को प्रोफेसर बैजू ने प्रोफेसर अहमद को छात्रों से दूर रहने का निर्देश दिया था। जिस विभाग के तहत प्रोफेसर अहमद काम कर रहे थे उसकी विभागाध्यक्ष डॉ आशा ने भी उन्हें चेताया था।

डॉ आशा ने प्रोफेसर को भेजे नोट में लिखा था, “छात्रों से मिली कुछ शिकायतों को देखते हुए कुलपति ने मुझे छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी बंदोबस्त करने का निर्देश दिया है। इसलिए, मैं आपसे अनुरोध कर रही हूँ कि कृपया अगली सूचना तक शिक्षण, मूल्यांकन और मार्गदर्शन की जिम्मेदारियों से दूर रहें।”

डॉ आशा के मुताबिक, नोटिस के बावजूद, इफ्तिखार अहमद विभाग में घूमते रहे और अपने संचालित पाठ्यक्रमों के व्हाट्सएप्प ग्रुप में नियमित तौर से संदेश पोस्ट करते रहे। इस वजह से छात्र असहज हो गए।

गौरतलब है कि यूनिवर्सिटी कैंपस के सभी छात्र संगठनों ने सहायक प्रोफेसर इफ्तिखार अहमद के निकाने जाने की माँग की थी। वहीं एक छात्र संगठन चाहता था कि उनके खिलाफ की गई शिकायत को आपराधिक जाँच के लिए पुलिस के पास भेजा जाए। ‘ऑनमनोरमा’ ने 25 नवंबर, 2023 को पूर्व छात्रों की गवाही और चिकित्सा अधिकारी की गवाही पर एक विस्तृत रिपोर्ट छापी थी। इसमें चिकित्सा अधिकारी ने बताया था कि उन्होंने प्रोफेसर इफ्तिखार अहमद को स्वास्थ्य केंद्र में छात्र को गलत तरीके से छूते हुए देखा था।

ऑनमनोरमा के मुताबिक, प्रभारी कुलपति प्रोफेसर बैजू ने बताया कि आंतरिक शिकायत समिति की पेश की गई अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर सहायक प्रोफेसक अहमद को निलंबित कर दिया गया है। जब उनसे ये सवाल किया गया कि क्या आईसीसी की अंतरिम रिपोर्ट में उन्हें प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया है तो उन्होंने कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

बौखनाग देवता के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन हुआ सफल: जानिए उस देव को जिनके आगे आर्नोल्ड डिक्स से लेकर हर किसी ने झुकाया सिर, सुरंग के पास अब बनेगा भव्य मंदिर

उत्तराखंड के उत्तरकाशी की सिलक्यारा सुरंग में 12 नवम्बर 2023 से फँसे 41 श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। सारे श्रमिक स्वस्थ हैं और उनसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बात भी की है। इस पूरे ऑपरेशन के दौरान से लेकर इसके खत्म होने के बाद भी सिलक्यारा सुरंग के बाहर स्थापित किए गए बौखनाग देवता के मंदिर में पूजा-अर्चना जारी है।

श्रमिकों के सफलतापूर्वक निकाले जाने के बाद उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ऐलान किया था कि सरकार अब यहाँ बौखनाग देवता का मंदिर बनवाएगी। दरअसल, सुरंग में दुर्घटना होने के पश्चात स्थानीय लोगों ने बताया था कि जहाँ सुरंग बन रही है, वहाँ पर पहले बौखनाग देवता का एक स्थान था। इस स्थान को निर्माण कम्पनी ने तोड़ दिया था।

स्थानीय लोगों का मानना है कि इसी कारण से देवता क्रोधित हो गए और यह हादसा हुआ। उनका मानना है कि रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान आईं बाधाएँ भी बौखनाग देवता के गुस्से के कारण ही हुई थीं। इस बात की जानकारी रेस्क्यू ऑपरेशन की टीम को हुई तो उन्होंने सुरंग के ठीक बाहर बौखनाग देवता के मंदिर की स्थापना करवाई।

सुरंग के बाहर स्थापित किए गए इस मंदिर में मुख्यमंत्री धामी, केन्द्रीय राज्यमंत्री जनरल वीके सिंह और घटनास्थल पर पहुँचे अंतरराष्ट्रीय सुरंग विशेषज्ञ अर्नाल्ड डिक्स ने भी पूजा अर्चना की है। अर्नाल्ड ने ऑपरेशन शुरू होने से पहले और उसके खत्म होने बाद आज भी मंदिर में पूजा की।

स्थानीय लोगों ने कहा कि मंगलवार (28 नवंबर 2023) को रेस्क्यू ऑपरेशन खत्म होने के तीन दिन पहले ही देवता ने रेस्क्यू ऑपरेशन करने वालों को संकेत दे दिया था कि इसमें अभी तीन दिन लगेंगे। रेस्क्यू ऑपरेशन एक्सपर्ट अर्नाल्ड डिक्स ने ऑपरेशन खत्म होने के बाद मंदिर में जाकर पूजा की है। उन्होंने कहा कि रेस्क्यू सफल रहा है, इसलिए वे देवता को धन्यवाद ज्ञापित करने गए थे।

कौन हैं बौखनाग देवता?

सुरंग से श्रमिकों को निकालने में जिन बौखनाग देवता की कृपा मानी जा रही है, वह यहाँ के खेत्रपाल देवता है। खेत्रपाल उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में उस क्षेत्र विशेष की रक्षा करने वाले देवता को कहा जाता है। खेत्रपाल शब्द ‘क्षेत्रपाल’ शब्द का स्थानीय गढ़वाली भाषा में रूपांतरण है, गढ़वाली में ‘क्ष’ अक्षर ‘ख’ बोला जाता है।

उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में हिन्दू देवी-देवताओं से इतर स्थानीय देवी-देवताओं की बड़ी मान्यता है। यहाँ वन की रक्षा करने वाले वन देवता, क्षेत्र की रक्षा करने वाले खेत्रपाल और अन्य स्थानीय देवताओं की पूजा की जाती है। हालाँकि, पूरे देश में क्षेत्र विशेष के देवता होते हैं, जिन्हें अलग-अलग नामों से जाना जाता है।

स्थानीय लोग बताते हैं यह आवश्यक नहीं है कि इन सभी देवताओं का एक निश्चित स्थान पर भव्य मंदिर बना हो। कहीं-कहीं स्थानीय देवता के नाम पर मात्र किसी पत्थर की भी पूजा हो सकती है। जहाँ पर यह सुरंग हादसा हुआ है, वहाँ भी कोई भव्य मंदिर नहीं बना था।

बौखनाग देवता के अलावा इस क्षेत्र में ऐसे कई देवता हैं, जिन्हें नागराजा और अन्य नामों से जाना जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नाग शब्द वाले देवताओं का संबंध भगवान विष्णु की शैया के रूप से सेवा देने वाले भगवान शेषनाग से है।

राजस्थान को पीछे धकेल देश का सबसे बड़ा दूध उत्पादक राज्य बना UP, देश की 16% जरूरत करता है पूरी: 5 सालों में देश के डेयरी में 23% की जबरदस्त वृद्धि

बीते पाँच वर्षों में देश में दूध के उत्पादन में लगभग 23% की वृद्धि देखी गई है। वहीं, उत्तर प्रदेश अब राजस्थान को पछाड़कर देश का सबसे बड़ा दूध उत्पादक राज्य बन गया है। केंद्रीय कृषि एवं पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन मंत्री परषोत्तम रूपाला ने इससे संबंधित ‘बेसिक एनिमल हसबैंड्री स्टैटिक्स’ जारी किया है।

इस रिपोर्ट में बताया गया है कि बीते एक वर्ष में देश में दूध, अंडा, मांस और ऊन का उत्पादन तेजी से बढ़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, देश में 50% से अधिक दूध की आपूर्ति केवल पाँच राज्य से हो रही है। यह भी सामने आया है कि देश में अब उत्तर प्रदेश सबसे अधिक दूध का उत्पादन कर रहा है। यूपी देश के 15.70% दूध की जरूरत को पूरा करता है।

उत्तर प्रदेश देश में सबसे अधिक दूध उत्पादित करता है। (BG साभार: The Statesman)
उत्तर प्रदेश देश में सबसे अधिक दूध उत्पादित करता है। (BG साभार: The Statesman)

उत्तर प्रदेश में 2017-18 के बाद से दूध के उत्पादन में लगभग 25% की बढ़ोतरी हुई है। यूपी ने 2022-23 में कुल 36.11 मिलियन (3.6 करोड़) टन दूध का उत्पादन किया है। वर्ष 2017-18 में यह 29.05 मिलियन (2.9 करोड़) टन था। उत्तर प्रदेश ने 2021-22 के दौरान देश के सबसे बड़े दूध उत्पादक राज्य होने का दर्जा खो दिया था। इस समय यूपी में 1.9 करोड़ गाय और 3.3 करोड़ भैंसें हैं।

उत्तर प्रदेश ने अब राजस्थान को पीछे छोड़ दिया है। राजस्थान अब 14.44% दूध उत्पादन के साथ दूसरे नंबर पर है। इन दोनों के बाद मध्य प्रदेश (8.73%), गुजरात (7.49%) और आंध्र प्रदेश (6.7%) देश के सबसे बड़े दूध उत्पादक राज्य हैं।

वहीं, देश भर में दूध उत्पादन की बात की जाए तो वर्ष 2018 से लेकर 2023 तक इसमें लगभग 23% की बढ़ोतरी हुई है। साल 2018 में देश में दूध का कुल उत्पादन 187 मिलियन (18.7 करोड़) टन था, जो बढ़कर अब लगभग 230 मिलियन (23 करोड़) टन हो गया है। वर्ष 2022-23 में दूध उत्पादन में 3.8% की वृद्धि हुई है।

इस कारण से अब देश में प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता भी बढ़ रही है। वर्ष 2013-14 में यह 303 ग्राम प्रति व्यक्ति प्रतिदिन थी। देश में दूध की उपलब्धता बढ़ने के साथ ही यह अब 452 ग्राम प्रति व्यक्ति प्रतिदिन हो चुकी है। 2013-14 से लेकर 2022-23 के बीच इसमें लगभग 50% की बढ़ोतरी हुई है।

दूध के अलावा देश में मांस, अंडा और ऊन के उत्पादन में भी बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2022-23 के दौरान देश में 13.8 हजार करोड़ अंडों का उत्पादन हुआ, जो कि बीते पाँच वर्षों में लगभग 33.3% की बढ़ोतरी है। 2018-19 के दौरान देश में 10.03 हजार करोड़ अंडों का उत्पादन हुआ था। आंध्र प्रदेश देश में अंडों का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है, यह कुल उत्पादन में 20.13% हिस्सा रखता है। तमिलनाडु, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल अन्य बड़े उत्पादक राज्य हैं।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि 2022-23 के दौरान देश में मांस का उत्पादन भी बढ़ा है। देश में 2022-23 के दौरान मांस का उत्पादन 9.77 मिलियन (97.7 लाख) टन रहा है। इसने पिछले पाँच वर्षों में 20.39% की वृद्धि हासिल की है। मांस के उत्पादन में उत्तर प्रदेश (12.2%) देश में आगे है। महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल भी बड़े मांस के बड़े उत्पादक राज्य हैं।

2022-23 में देश में ऊन का उत्पादन देश में 336 लाख किलोग्राम रहा है। इसके उत्पादन में कमी आई है। वित्त वर्ष 2018-19 में यह 400 लाख किलोग्राम से ऊपर था। राजस्थान (47.9%) और जम्मू-कश्मीर (22.6%) मिलकर देश की लगभग 70% ऊन का उत्पादन करते हैं।

जिस अभिनेत्री पर की बलात्कार वाली टिप्पणी, अब उसी पर केस ठोकने जा रहे एक्टर मंसूर अली खान: माफ़ी पर कहा – ये सबसे बड़ा मजाक

तमिल अभिनेता मंसूर अली खान ने हाल ही में अपने साथी अभिनेत्री तृषा कृष्णन के बारे में रेप से जुड़ा कॉमेंट करने पर उनसे माफी माँगी थी, लेकिन अब यही मंसूर अली इस मामले में तृषा पर केस दर्ज कराने जा रहे हैं और इस माफी को सबसे बड़ा मजाक करार दे रहे हैं।

तृषा कृष्णन को लेकर मंसूर अली खान अपनी विवादित टिप्पणी वायरल होने के बाद से ही सुर्खियाँ बटोर रहे हैं। अब तृषा से माफी माँगने के कुछ दिनों बाद ही उन्होंने अब खुलासा किया है कि वह तृषा के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करेंगे। ‘CNN News18‘ के साथ एक खास बातचीत में खान ने इस बात का खुलासा किया कि वो तृषा के खिलाफ मामला दर्ज करेंगे।

उन्होंने कहा, “हम आज यह (मानहानि का मामला दायर) कर रहे हैं। हमने सारे दस्तावेज तैयार कर लिए हैं। (मेरे) वकील अन्य सभी जानकारी आज शाम 4 बजे साझा करेंगे।” मंसूर अली खान ने कहा, ”वह प्रेस से मिलेंगे।” उनकी माफी के बारे में पूछे जाने पर खान ने कहा, ”यह सबसे बड़ा मजाक है।”

बताते चलें कि मंसूर अली खान ने कहा था, “मुझे जब पता चला कि मैं तृषा के साथ काम कर रहा हूँ तो मुझे लगा कि यह एक बेडरूम सीन होगा। मुझे लगा कि मैं फिल्म में तृषा को उठाकर बेडरूम में ले जाऊँगा, जैसा मैंने और भी कई अभिनेत्रियों के साथ पहले फिल्मों में किया है। मैंने पहले भी कई रेप सीन किए हैं और मेरे लिए यह कोई नई बात नहीं है। लेकिन, इन लोगों ने कश्मीर में शूटिंग के दौरान मुझे तृषा को देखने तक नहीं दिया।”

उनके इस बयान ने अच्छे खासे विवाद को जन्म दिया था। इसके बाद मंसूर ने अपने अभद्र बयान पर तृषा से माफी माँगने से इनकार कर दिया था। पुलिस ने मंसूर अली पर यौन उत्पीड़न के धारा 354 ए (यौन उत्पीड़न) और धारा 509 (शब्द, इशारा या महिला की गरिमा को ठेस पहुँचाने का इरादा) के तहत मामला दर्ज किया गया था। 

यही नहीं, चेन्नई के थाउजेंड लाइट्स ऑल वुमेन पुलिस स्टेशन ने मंसूर को एक नोटिस जारी किया। इस नोटिस को लेकर और अपने खिलाफ दर्ज मामले को पर सेशन कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया।

इसका बाद मंसूर अली खान वो बैकफुट पर आ गए और उन्होंने अपने इस अश्लील और अभद्र बयान को लेकर माफी माँगते हुए कहा था,  “मेरी को-स्टार तृषा, कृपया मुझे माफ कर दें। ईश्वर मुझे मौका दें कि मैं आपकी शादी में आशीर्वाद दे सकूँ। आमीन।”