Home Blog Page 1354

सवाल- क्या गैर मुस्लिम से करवा सकते हैं मेहंदी-मेकअप, बुर्के वाली का जवाब- गीले हाथों से काफिर जहाँ टच करे उसे पाक करें: Video वायरल

सोशल मीडिया पर एक मुस्लिम महिला का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एक बुर्कानशीं महिला बाकी मुस्लिम महिलाओं को सलाह दे रही है कि उनके शरीर के जिस भी हिस्से को कोई गैर-मुस्लिम छू दे उसे अच्छे से साफ़ करो। यह नसीहत मेहंदी और मेकअप किसी गैर-मुस्लिम व्यक्ति से करवाने के सवाल पर दी गई। इस वीडियो को @RightWingBoy_ नाम के हैंडल ने सोमवार (27 नवंबर, 2023) को शेयर किया है।

लगभग 17 सेकेंड के इस वीडियो में बड़े फ्रेम का चश्मा लगाए एक मुस्लिम लड़की माइक के आगे बैठी दिख रही है। महिला ने चेहरे को छोड़ कर अपने पूरे शरीर को काले लिबास से ढक रखा है। वीडियो की शुरुआत में महिला खुद से ही सवाल करती है कि क्या गैर मुस्लिम से मेहंदी, मेकअप या वैक्स करवा सकते हैं? बाद में वो अपने सवाल का खुद ही जवाब देने लगी। महिला ने शुरू में तो कहा, “आप ये तमाम अमल एक नॉन मुस्लिम से भी करा सकते हैं। इसमें कोई प्रॉब्लम नहीं है।” हालाँकि, अगली ही लाइन में उसने नसीहत देना शुरू कर दिया।

महिला ने वीडियो में 10 वें सेकेंड से आगे कहा, “लेकिन बाद में आपको उन तमाम एरिया या पार्ट्स को पाक करना होगा। जिस भी जगह को एक काफिर ने गीले हाथों से टच किया था।” यहाँ ये जानना जरूरी है कि काफिर गैर-मुस्लिमों के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक अमानवीय शब्द है।

ऑपइंडिया की पड़ताल में यह सलाह देने वाली इस मुस्लिम महिला ने इस वीडियो के पूरे अंश को 19 नवंबर को इंस्टाग्राम हैंडल ‘शियाफिक’ पर शेयर किया था। वहीं खबर लिखे जाने तक इस वीडियो पर 3512 लाइक्स मिल चुके हैं। वीडियो को शेयर करने वाले इंस्टाग्राम चैनल ‘शियाफिक’ पर 638 से अधिक पोस्ट हैं। इसके 2.29 लाख फॉलोअर्स भी हैं। इस इंस्टाग्रम हैंडल के कई अन्य वीडियो में भी बुर्का पहने महिलाओं को गैर-मुस्लिमों के लिए भेदभाव वाली बातों को करते हुए सुना जा सकता है। साथ ही इस हैंडल को फॉलो करने वाले कई मुस्लिमों को इसकी विचारधारा का समर्थन करते भी देखा जा सकता है।

दीपिका पादुकोण का JNU जाना, गुमसुम गुड़िया बन ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ को देखना… ‘छपाक’ को हुआ नुकसान, ‘सैम बहादुर’ से पहले छलका दर्द

एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण के 2020 की फिल्म ‘छपाक’ की रिलीज से पहले जेएनयू पहुँचने से इस फिल्म को नुकसान झेलना पड़ा था। इस बात का खुलासा फिल्म की निर्देशक मेघना गुलजार ने किया है। दरअसल, इस फिल्म की रिलीज से ठीक 3 दिन पहले ‘बाजीराव मस्तानी’ फेम एक्ट्रेस जेएनयू पहुँची थी। वहाँ वह CAA के विरोध में प्रदर्शन करने वाले टुकड़े-टुकड़े गैंग के साथ एकजुटता दिखाई थी। जिसके बाद सोशल मीडिया पर उनकी खूब आलोचना हुई थी और फिल्म के बहिष्कार की माँग ट्रेंड होने लगी थी।

बता दें कि ‘छपाक’ फिल्म एसिड अटैक सर्वाइवर और एसिड अटैक पीड़ितों के हकों के लिए आवाज उठाने वाली लक्ष्मी अग्रवाल की जिंदगी पर बनी थी। फिल्म का डायरेक्शन मेघना गुलज़ार ने किया था। हालाँकि, इसके बाद भी ‘छपाक’ बॉक्स ऑफिस पर कोई खास कमाल नहीं दिखा पाई थी।

अब फिल्म की डायरेक्टर मेघना गुलजार ने सोमवार (27 अक्टूबर, 2023) को एक्सप्रेस अड्डा में स्वीकार किया है कि फिल्म की रिलीज से ठीक तीन दिन पहले दीपिका की विवादास्पद जेएनयू यात्रा ने फिल्म पर असर डाला। उन्होंने माना कि दीपिका के जेएनयू जाने से फिल्म को देखने वाले दर्शकों ने इसे लेकर पहले ही धारणाएँ बना लीं। इस वजह ने फिल्म के बिजनेस को नुकसान हुआ।

मेघना ने आगे कहा, “मुझे यकीन है कि जवाब बिल्कुल साफ है। हाँ, बिल्कुल, इसने फिल्म पर असर डाला। क्योंकि बातचीत एसिड हिंसा से कहीं और चली गई, तो जाहिर तौर पर इसका असर फिल्म पर पड़ा। इसमें कोई शक नहीं है।”

बता दें कि 2020 के जेएनयू हमले और नागरिकता (संशोधन) अधिनियम के जवाब में छपाक की रिलीज़ से तीन दिन पहले, 7 जनवरी, 2020 को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में एक विरोध प्रदर्शन में दीपिका पादुकोण ने हिस्सा लिया था।

वहाँ वो खुलकर वामपंथी छात्रों के समर्थन में उतरी थीं। उन्होंने जेएनयू के विरोध प्रदर्शन में भी भाग लिया था। पादुकोण ने यहाँ तक कह डाला था कि उन्हें इस बात से गर्व होता है कि आज लोग बगैर-डरे अपनी आवाज़ उठ रहे हैं।

इसने सोशल मीडिया पर हंगामा मच गया था। तब ट्विटर पर हैशटैग #BoycottChhapaak और #BlockDeepika अच्छा खासा ट्रेंड किया था। इसे लेकर अच्छा खासा बवाल होने के एक साल बाद ही दीपिका पादुकोण ने 2021 में नए साल के पहले ही दिन अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स के सभी पोस्ट डिलीट कर दिए गए थे।

गौरतलब है कि फॉक्स स्टार स्टूडियोज, गोविंद सिंह संधू और मेघना गुलज़ार के साथ सह-निर्माता के तौर पर दीपिका पादुकोण ने ‘छपाक’ के साथ फिल्म प्रोडक्शन में पहला कदम रखा था। ये फिल्म 50 करोड़ रुपए की लागत से बनी थी, लेकिन ये अपनी लागत वसूल करने में भी नाकाम रही। इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर महज 55.44 करोड़ रुपए की कमाई की थी।

शायद उस वक्त दीपिका को लगा हो कि जेएनयू जाने से उनकी इस फिल्म को फायदा पहुँचेगा, लेकिन उनकी ये रणनीति फिल्म पर ही भारी पड़ गई। फिल्म की निर्देशक मेघना गुलजार के खुलासे से तो यही साबित हो रहा है।

बता दें कि मेघना गुलज़ार की आगामी फिल्म फिल्म ‘सैम बहादुर’ 1 दिसंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए तैयार है और यह रणबीर कपूर की एनिमल से टकराएगी। इस फिल्म में विक्की कौशल फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ की भूमिका में हैं। फिल्म 1971 के युद्ध के दौरान भारत की जीत में मानेकशॉ के अहम किरदार को दिखाती है। इस जंग के बाद ही बांग्लादेश पाकिस्तान से अलग होकर एक नया देश बना।

उत्तरकाशी की सुरंग से 16 दिन बाद निकाले जा रहे मजदूर: जिस तकनीक को बताया अवैध, जब मशीनें हुईं फेल तो वही आया काम

आखिरकार 16 दिनों बाद सिलक्यारा सुरंग में फँसे श्रमिकों को निकालने की प्रक्रिया सफल हो पाई है। ये मजदूर 12 नवंबर से ही अंदर फँसे हुए थे। इन्हें एक-एक कर निकाला जा रहा है। मजदूरों के परिजनों को पहले से ही कपड़े और बैग्स तैयार रखने को कह दिया गया था। स्ट्रेचर भी मँगा लिए गए थे, जिसके सहारे श्रमिकों को बाहर निकाला गया। पाइप के जरिए एक-एक कर मजदूरों को बाहर निकाला गया। इस दौरान CM पुष्कर सिंह धामी और केंद्रीय सड़क एवं परिवहन और नागरिक विमानन मंत्री जनरल (रिटायर्ड) VK सिंह वहाँ मौजूद रहे।

उन श्रमिकों को ऋषिकेश स्थित AIIMS ले जाया जा सकता है, जिनका इलाज उत्तरकाशी स्थित जिला अस्पताल में नहीं हो पाएगा। एम्स ऋषिकेश के ट्रॉमा सेंटर में इसके लिए तैयारियाँ हैं। मजदूरों को इन दोनों से पहले भी चिन्यालीसौर के कम्युनिटी हेल्थ सेंटर में लाया गया। वहाँ 41 बेड्स पहले से ही तैयार रखे गए थे।

उत्तरकाशी के सुरंग में फँसे 41 मजदूरों को सफलतापूर्वक बाहर निकाला जा रहा है और इसकी प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। श्रमिकों को बाहर निकालने के लिए सबसे पहले टनल में पाइप डालने का काम पूरा किया गया। सबसे पहले खुदाई की गई और NDRF की टीम के जवान पाइप के जरिए फँसे हुए श्रमिकों तक पहुँचे। फिर उन्हें बाहर निकाला गया। जब 55.30 मीटर पाइप अंदर डाली जा चुकी थी, उसके बाद अंदर एक और पाइप डाली गई और फिर काम हो गया।

वेल्डिंग के लिए अंतिम पाइल डालने में ही 2-3 घंटे का समय लग गया। सुरंग से श्रमिकों को निकालने के लिए गद्दे भी पहुँचाए गए। श्रमिकों को अस्पताल ले जाया जा रहा है, जिसके लिए पहले से ही एंबुलेंसों को तैयार रखा गया था। कुल दूरी 59 मीटर की थी, जिसके लिए पाइपों की आवश्यकता पड़ी। इसके कुछ ही देर पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को फोन कॉल कर के सुरंग में फँसे श्रमिकों के राहत एवं बचाव कार्यों की जानकारी ली थी।

सुरंग के बाहर एक अस्थायी मंदिर भी बनाई गई थी, जिसमें अंतरराष्ट्रीय रेस्क्यू टीम के मुखिया अरनॉल्ड डिक्स ने पुजारी के साथ पूजा-अर्चना की। रैट होल खनन तकनीक माइनर्स के माध्यम से खुदाई की प्रक्रिया पूरी की गई। 800 mm के व्यास वाले पाइपों को अंदर डाला गया था। इसी के सहारे मजदूरों को बाहर लाया गया। बता दें कि 48 मीटर की ड्रिलिंग के बाद ऑगर मशीन फँस गई थी। इसके बाद मैन्युअल माइनिंग के लिए 2 टीमों को लगाया था, एक में 5 एक्सपर्ट्स थे और एक में 7 एक्सपर्ट्स।

संकीर्ण सुरंगों में या सैकड़ों फ़ीट निचे उतरने के लिए माइनर्स इसी तकनीक का इस्तेमाल करते हैं और कोयला खनन में ये प्रभावी रहा है। मेघालय में इसका विशेष तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। हालाँकि, NGT (राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण) ने इस पर प्रतिबंध लगाया हुआ है, लेकिन ये तकनीक अब भी जारी है। उत्तरकाशी के जिला मुख्यालय से 30 किलोमीटर दूर ब्रह्मखाल-यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर बन रही 4.5 किलोमीटर की ये सुरंग सिलक्यारा में स्थित है, जो ‘चारधाम ऑल वेदर रूट’ का हिस्सा है।

बैकफुट पर नीतीश सरकार, अब बिहार में उर्दू और गैर-उर्दू स्कूलों में अलग-अलग छुट्टी: बिहार के मंत्री बोले- गलती हुई, CM लेंगे एक्शन

बिहार के सरकारी स्कूलों में छुट्टियों को लेकर आया महागठबंधन सरकार के फरमान को मुस्लिम तुष्टिकरण के रूप में देखा जा रहा है, जिसके तहत हिन्दुओं की छुट्टियों में कटौती की गई थी और मुस्लिमों की छुट्टियों को बढ़ा दिया गया था। इस मामले में अब दूसरा कैलेंडर सामने आया है। उर्दू स्कूलों के लिए अलग कैलेंडर है जबकि गैर-उर्दू स्कूलों के लिए अलग। ऐसा पहली बार हुआ है। इससे पहले राज्य का शिक्षा विभाग दोनों के लिए एक ही कैलेंडर जारी किया करता था।

इस कैलेंडर में कम से कम वर्ष में 220 दिन के अध्यापन वाली बात कही गई है। इसे सन् 2024 के लिए जारी किया गया है। इसमें 27 छुट्टियाँ हैं – गुरु गोविंद सिंह जयंती, गणतंत्र दिवस, वसंत पंचमी, संत रविदास जयंती, शब-ए-बरात, महाशिवरात्रि, बिहार दिवस, होली, गुड फ्राइडे, ईद-उल-फितर, भीमराव आंबेडकर जयंती, 1 महीने का ग्रीष्मकालीन अवकाश, जानकी नवमी, बुध पूर्णिमा, ईद-उल-जोहा, कबीर जयंती, मुहर्रम, स्वतंत्रता दिवस, चेहल्लुम, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, हजरत मुहम्मद जयंती, दुर्गा पूजा (3 दिन की 2 छुट्टियाँ), दीपावली, चित्रगुप्त पूजा, छठ, क्रिसमस।

उर्दू स्कूलों के लिए ईद का 3 दिन का अवकाश रखा गया है, जबकि गैर-उर्दू स्कूलों के लिए 1 दिन का। बकरीद पर भी ऐसा ही किया गया है। उर्दू स्कूलों में महाशिवरात्रि, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी और जानकी नवमी की छुट्टी नहीं होगी। जबकि चेहल्लुम की छुट्टी दोनों में एक दिन की रहेगी। दोनों में 60-60 दिन की छुट्टी साल में रखी गई है। मुहर्रम पर उर्दू स्कूलों में 2 दिन की छुट्टी होगी जबकि गैर-उर्दू स्कूलों में 1 दिन की। गैर-उर्दू स्कूलों में भी रक्षाबंधन, तीज और जितिया की कोई छुट्टी नहीं होगी।

केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री गिरिराज सिंह ने तो ये तक सलाह दे दी थी कि अब नीतीश कुमार और लालू यादव को अपने नाम में ‘मोहम्मद’ लगा लेना चाहिए। जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा था कि शिक्षा विभाग विवाद पर स्पष्टीकरण देगा। राज्य के भवन निर्माण मंत्री अशोक चौधरी ने भी माना है कि परंपरा का पालन किया जाना चाहिए और छुट्टियों वाला कैलेंडर गलत है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के संज्ञान में आते ही इसमें सुधार किया जाएगा, ऐसा एक बार और हुआ था।

बता दें कि इससे पहले सितंबर में छुट्टियों में कटौती कर 23 से 11 कर दिया गया था, लेकिन विरोध के बाद इसे वापस लेना पड़ा था। अब नए कैलेंडर की सरकारी स्तर पर फिर से समीक्षा की बात कही जा रही है। राज्यसभा सांसद सुशील कुमार मोदी ने भी इसे तुगलकी फरमान करार दिया है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने कहा – “तुष्टिकरण के सरदार, बिहार के कुर्सी कुमार।” जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने भी माना है कि रक्षाबंधन की छुट्टी न दिया जाना गलत है।

भारत में अब इस्तेमाल हो रहे 99.2% स्मार्टफोन ‘मेड इन इंडिया’, 9 साल में 20 गुना बढ़ा प्रोडक्शन: जानिए कैसे मोदी सरकार ने बदल दी तस्वीर

भारत में इस समय बिक रहे 99.2% स्मार्टफोन ‘मेड इन इंडिया’ हैं। बीते 9 साल में देश में स्मार्टफोन का प्रोडक्शन करीब 9 गुना बढ़ा है। मोबाइल फोन प्रोडक्शन इंडस्ट्री 44 बिलियन डॉलर (करीब 3.5 लाख करोड़ रुपए) तक पहुँच चुकी है। यह जानकारी केंद्रीय आईटी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दी है।

केंद्रीय मंत्री वैष्णव ने बताया है कि भारत ने 2025-26 तक 300 बिलियन डॉलर की इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री बनाने का लक्ष्य तय कर रखा है। उनका कहना है कि भारत की तरक्की और इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री में निर्यात का बड़ा योगदान हो सकता है।

गौरतलब है कि भारत में बीते एक दशक में स्मार्टफोन निर्माण में काफी तेजी आई है। बीते 9 साल में भारत के स्मार्टफोन उत्पादन में 20 गुना वृद्धि देखी गई है। वर्ष 2014-15 में यह मार्केट लगभग ₹19,000 करोड़ का ही था। अब यह बढ़ कर ₹3.5 लाख करोड़ से ऊपर जा चुकी है।

भारत में स्मार्टफोन निर्माण
भारत में स्मार्टफोन निर्माण

ऐसा नहीं है कि भारत में बने हुए स्मार्टफोन केवल भारत के ही बाजार में बेचे जा रहे हैं। भारत लगभग 11 बिलियन डॉलर के स्मार्टफोन निर्यात भी कर रहा है। स्मार्टफोन निर्माता कम्पनी एप्पल भी भारत में लगातार अपने फोन का निर्माण बढ़ा रही है। भारत अब विश्व में दूसरा सबसे बड़ा स्मार्टफोन निर्माता है।

एक रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2022-23 में एप्पल ने 5 बिलियन डॉलर से अधिक इलेक्ट्रॉनिक भारत में निर्मित करके बाहर निर्यात किए। यह सिलसिला लगातार जारी है। जितना निर्यात एप्पल ने 2022-23 के पूरे वर्ष में किया था, उससे अधिक 2023-24 के पहले सात महीनों में ही कर चुका है।

एप्पल भारत से 2023-24 के पहले 7 माह में 5 बिलियन डॉलर से अधिक का निर्यात कर चुका है। भारत के स्मार्टफोन निर्यात में एप्पल का लगभग 62% हिस्सा है। एप्पल के अलावा अब कोरियन स्मार्टफोन निर्माता कम्पनी सैमसंग भी भारत के निर्यात में बड़ी हिस्सेदार है। सैमसंग ने 2022-23 के दौरान 4 बिलियन डॉलर से अधिक के स्मार्टफोन निर्यात किए।

अब गूगल भी अपना स्मार्टफ़ोन पिक्सल भारत में बनाने की योजना पर काम कर रहा है। एप्पल अपनी क्षमता को बढ़ा रहा है। एप्पल, ताईवानी कम्पनी फॉक्सकॉन और पेगाट्रोन के साथ मिलकर भारत में अभी आईफोन बना रही है। एप्पल आने वाले दिनों में टाटा के साथ मिलकर आइफोन भी बनाने जा रहा है। इसके लिए फैक्ट्री बन रही है।

इनके अलावा भारत के बाजार में बड़ा हिस्सा रखने वाली शाओमी, ओप्पो और वनप्लस जैसे ब्रांड भी भारत में ही निर्माण कर रहे हैं। पहले यह सभी ब्रांड भारत में चीन से मँगाकर स्मार्टफ़ोन बेचते थे। प्रोडक्शन के क्षेत्र में आए इस बदलाव का एक बड़ा कारण केंद्र सरकार की नीतियाँ भी रही हैं।

केंद्र सरकार की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम भारत में स्मार्टफोन बनाने वाली कम्पनियों को कई रियायतें देने के लिए बनाई गई है। यह स्कीम स्मार्टफ़ोन के अलावा भारत में पूरे इलेक्ट्रॉनिक निर्माण क्षेत्र के लिए लाई गई है। इसका असर भी दिखा है।

जिन राज्यों में स्मार्टफोन या अन्य इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं को बनाने की फैक्ट्रियाँ लग रही हैं, वहाँ की राज्य सरकारें भी इन्हें जमीन और बिजली में रियायतों जैसी सुविधाएँ दे रही हैं। भारत में बनने वाले स्मार्टफोन में विदेशी कंपोनेंट भी कम हो रहे हैं और भारतीय कंपोनेंट का प्रतिशत बढ़ रहा है।

एक रिपोर्ट के अनुसार, PLI के तहत केंद्र सरकार भारत में मैन्युफैक्चरिंग करने वाली कंपनियों की बढ़ती हुई सेल के हिसाब से उन्हें सब्सिडी देगी। यह सब्सिडी अलग-अलग कैटेगरी के लिए अलग-अलग रखी गई है। PLI के अलावा कई राज्यों ने अपने श्रम कानूनों में बदलाव करना चालू कर दिया है, जिससे कम्पनियों को सस्ती और स्किल्ड लेबर मिल सके।

वर्ष 2018-19 में देश से जहाँ ₹61,090 करोड़ के इलेक्ट्रॉनिक्स का निर्यात हुआ था, वहीं 2022-23 में ₹1.9 लाख करोड़ के इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों का निर्यात हुआ। यह पाँच वर्षों में लगभग 3 गुना की वृद्धि है। वर्ष 2023-24 में इसके और भी अधिक होने की संभावना है।

योग कर पार्क से लौट रहीं थी महिलाएँ, जबरन पोर्न वीडियो दिखाने लगा मोइन खान: विरोध करने पर दी गालियाँ, इंदौर पुलिस ने किया गिरफ्तार

मध्य प्रदेश की इंदौर पुलिस ने योग करने आने वाली महिलाओं को अश्लील वीडियो दिखाने के आरोप में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। 35 वर्षीय आरोपित का नाम मोईन खान है। शुक्रवार (24 नवंबर, 2023) को मोईन ने बगीचे से योग कर के लौट रहीं महिलाओं को तेज आवाज में अश्लील वीडियो दिखाने का प्रयास किया। इस दौरान आरोपित बाइक चला रहा था। पुलिस इस मामले में जाँच और कानूनी कार्रवाई कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह घटना इंदौर के थानाक्षेत्र पंढरीनाथ का है। यहाँ के अटल बिहारी उद्यान में कई महिलाएँ प्रतिदिन सुबह योग गुरु रत्नेश से योग सीखने आती हैं। शुक्रवार (24 नवंबर) को हर दिन की तरह महिलाएँ योग करके गार्डन से बाहर निकलीं। इसी दौरान पीछे से इंदौर के ही कटकपुरा का रहने वाला 35 वर्षीय मोईन खान बाइक से गुजरा। आरोप है कि उसने चलती बाइक पर तेज आवाज में कोई अश्लील वीडियो चला रखा था। इस वीडियो को मोईन ने महिलाओं को दिखाने का भी प्रयास किया।

बताया जा रहा है कि जब महिलाओं ने मोईन की इस हरकत का विरोध किया तो वो गाली-गलौज पर उतर आया। इसके थोड़ी देर बाद मोईन वहाँ से चला गया। पीड़िताओं ने आरोपित की बाइक का नंबर नोट कर लिया। अगले दिन हिन्दू संगठनों के साथ योग गुरु रत्नेश पंढरीपुर थाने पहुँचे। उन्होंने मोईन के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने आरोपित के खिलाफ FIR दर्ज करके उसके बाइक के नंबर प्लेट से उसकी पड़ताल शुरू की। आखिरकार आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया।

बताते चलें कि इससे पहले भी 13 अगस्त, 2021 में इंदौर के इसी पंढरीनाथ थानाक्षेत्र में दलित समुदाय की 2 लड़कियों के साथ मुस्लिम युवकों द्वारा छेड़छाड़ का मामला सामने आया था। इस दौरान पीड़िता के परिजन द्वारा विरोध करने पर आरोपितों द्वारा पिटाई भी की गई थी। साथ ही पुलिस पर भी हमला किया गया था। इसके अलावा 25 अगस्त, 2021 को इंदौर में ही चूड़ी बेचने आए तस्लीम ने गोलू नाम रख कर एक नाबालिग लड़की से छेड़खानी की थी। पुलिस ने तब तस्लीम को पॉक्सो एक्ट के तहत जेल भेजा था।

PM मोदी को कहा ‘युगपुरुष’ तो उप राष्ट्रपति पर पिल पड़े कॉन्ग्रेसी, लोगों ने हामिद अंसारी की याद दिला की बोलती बंद

उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘युगपुरुष’ करार दिया है। उन्होंने कहा कि महात्मा गाँधी पिछली सदी के महापुरुष थे लेकिन पीएम मोदी मौजूदा शताब्दी के ‘युगपुरुष’ हैं। उन्होंने कहा कि जहाँ महात्मा गाँधी ने सत्याग्रह और अहिंसा का इस्तेमाल कर के हमें गुलामी से मुक्ति दिलाई, वहीं भारत के सफल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमें प्रगति के उस रास्ते पर लेकर गए हैं जहाँ हम हमेशा से जाना चाहते थे। जैन संत श्रीमद राजचंद्र जी की जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने ये बातें कहीं।

इसके बाद भाजपा विरोधी उनकी आलोचना करने लगे। वो कहने लगे कि क्या एक उप-राष्ट्रपति को इस तरह का बयान देना चाहिए? वैसा इसमें गलत कुछ भी नहीं है क्योंकि नरेंद्र मोदी न सिर्फ लगातार दूसरा कार्यकाल पूरा कर के बतौर प्रधानमंत्री हैट्रिक लगाने जा रहे हैं, बल्कि देश के सबसे लोकप्रिय नेता भी हैं। वहीं इसके बाद सोशल मीडिया पर हामिद अंसारी ट्रेंड होने लगे। वही हामिद अंसारी, जो 10 वर्षों तक भारत के उप-राष्ट्रपति रहे और देश से इतना कुछ मिलने के बावजूद उनका रुख इस्लामी कट्टरपंथियों वाला है।

एक महिला यूजर ने याद दिलाया कि राहुल गाँधी के जो चमचे जगदीप धनखड़ के बयान से आक्रोशित हो रहे हैं, उन्हें हामिद अंसारी पसंद हैं जिन्होंने ईरान में भारत का राजदूत रहते भारतीय ख़ुफ़िया एजेंसी RAW के सेटअप को उजागर कर दिया था। उन्होंने एक पाकिस्तानी पत्रकार को आमंत्रित किया, जो वहाँ की ख़ुफ़िया एजेंसी ISI का एजेंट बन कर सूचनाएँ जुटाने आया था। उक्त यूजर ने लिखा कि कॉन्ग्रेस ने हमेशा अपने राजनीतिक फायदों के लिए देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया था।

वहीं रवीश नाम के यूजर ने हामिद अंसारी की उस इंटरव्यू का क्लिप शेयर किया, जिसमें पत्रकार अमन चोपड़ा ने उनसे पूछा था कि 10 वर्ष उप-राष्ट्रपति रहने के बावजूद उन्होंने अंत में ये क्यों कह दिया कि देश में मुस्लिम असुरक्षित हैं।

कुछ अन्य लोगों ने भी पूछा कि हामिद अंसारी जैसा उप-राष्ट्रपति चाहिए, जो मुस्लिमों के असुरक्षित होने की बातें करते थे?

याद दिला दें कि रॉ के पूर्व अधिकारी एनके सूद ने 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर हामिद अंसारी के रोल की जाँच करने की माँग की थी। सूद ने 1991 में भारतीय अधिकारी संदीप कपूर के अपहरण का भी जिक्र किया था। इस मामले में हामिद अंसारी पर लापरवाही का आरोप भी लगा था। सूद ने बताया था कि रतन सहगल नाम का व्यक्ति हामिद अंसारी का सहयोगी था। उस दौरान वो आईबी में था। रतन सहगल ने ही वैज्ञानिक नाम्बी नारायणन को साजिश में फँसाया था और उनका कैरियर तबाह कर दिया।

सूद ने यह भी खुलासा किया था कि हामिद अंसारी का करीबी होने के कारण रतन सहगल अक्सर उन्हें डराया करता था। सने ही नाम्बी नारायणन को फँसाने के लिए जासूसी के आरोपों का जाल बिछाया। ऐसा उसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि बिगाड़ने के लिए किया। रतन जब आईबी में था तब उसे अमेरिकन एजेंसी सीआईए के लिए जासूसी करते हुए धरा जा चुका था। अब वह सुखपूर्वक अमेरिका में जीवन गुजार रहा है। 

एक महिला के 2 प्रेमी, दोनों से अपनी ही नाबालिग बेटियों का करवाया रेप: केरल कोर्ट ने 40 साल की सजा सुनाई

माँ इस कदर क्रूर भी हो सकती है शायद कोई कल्पना नहीं कर सकता, लेकिन केरल की एक औरत ने सारी हदें पार करते हुए अपने दो प्रेमियों से बच्चियों का यौन उत्पीड़न ही नहीं करवाया बल्कि उन्हें मानसिक यातनाएँ देने में भी कसर नहीं छोड़ी।

केरल की तिरुवनंतपुरम विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट ने सोमवार (27 नवंबर, 2023) को यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (POCSO) के तहत इस महिला को 40 साल के सख्त कारावास और 20,000 रुपए जुर्माने की सजा सुनाई।

इस केस में 22 गवाहों से पूछताछ की गई और 33 दस्तावेज़ कोर्ट के सामने पेश किए गए। बच्चियों के साथ हो रहे इस हैवानियत भरे व्यवहार का खुलासा चिल्ड्रेन होम्स की काउंसलिंग के दौरान हुआ। दरअसल, महिला का पति मानसिक रूप से बीमार था।

वो बीमार पति को छोड़कर अपने शिशुपालान (Shishupalan) नाम के प्रेमी के साथ रहने चली गई। वो अपनी कक्षा 1 में पढ़ने वाली 7 साल की बेटी को भी अपने साथ ले जाती रही। इस दौरान उसके प्रेमी शिशुपालान ने बच्ची का यौन उत्पीड़न किया। उसका कई बार बेरहमी से रेप किया। इतना की उसके प्राइवेट पार्ट में गहरे जख्म बन गए।

हैरानी की बात है कि उसकी माँ बार-बार बच्ची को प्रेमी के घर ले जाती रही। उसके ही सामने प्रेमी बच्ची का यौन उत्पीड़न करता रहा, लेकिन वो कुछ करना तो दूर प्रेमी के सामने मासूम बेटी का जिस्म परोसती रही। जब बच्ची की 11 साल की बहन घर आई तो उसने अपनी बड़ी बहन को ये बात बताई।

लेकिन महिला का वहशी प्रेमी शिशुपालान उसकी बड़ी बेटी को भी अपना हवस का शिकार बनाता रहा। वह दोनों बच्चियों को यौन उत्पीड़न की बात किसी को भी बताने पर धमकाता रहा।

इस दौरान मौका पाकर बड़ी बहन अपनी छोटी बहन को लेकर भागकर अपनी दादी के घर आ गई। बच्चियों ने दादी को अपने साथ हो रही दरिंदगी के बारे में बताया। इस पर बच्चियों की दादी ने महिला को प्रेमी को छोड़कर घर आने को कहा, लेकिन उसने घर आने को इंकार कर दिया।

इतना ही नहीं वो पहले प्रेमी को छोड़कर दूसरे युवक के साथ रहने चली गई। महिला के नए प्रेमी ने भी दोनों नाबालिग बच्चियों की माँ की इजाजत पर उनके साथ बलात्कार किया। बच्चियों ने इसकी जानकारी भी दादी को दी। इसके बाद दादी ने नजदीकी थाने में शिकायत दर्ज कराई।

बच्चियों की तहरीर के आधार पर पुलिस ने महिला के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। वहीं बच्चियों की दादी ने दोनों बच्चियों को चिल्ड्रेन होम के हवाले कर दिया। वहाँ काउसिलिंग के दौरान बच्चियों ने अपने साथ हुई दरिंदगी और हैवानियत के बारे में बताया।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, विशेष लोक अभियोजक आरएस विजय मोहन कहा, “इस अपराध के लिए माँ को 40 साल की सजा और 20 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई है। अपराध दो लड़कियों, आरोपित की बेटी के साथ दुर्व्यवहार का है। उनका यौन शोषण और उनके साथ क्रूरतापूर्वक व्यवहार किया गया है।”

उन्होंने आगे कहा, “पहले प्रेमी शिशुपालान ने लड़की के साथ तब बेरहमी से बलात्कार किया जब वह सात साल की थी और पहली कक्षा में पढ़ रही थी। उस वक्त पीड़ित बच्ची ने आरोपित माँ को पूरी घटना बताई थी, लेकिन उसने कुछ नहीं किया था। उलटा उसने दूसरे प्रेमी को पीड़िता के साथ दुर्व्यवहार करने में मदद की।

जज आर रेखा ने पाया कि आरोपित का रवैया पूरी तरह से मातृत्व के लिए शर्म की बात है और वह माफी की हकदार नहीं है और उसे अधिकतम सजा दी गई। ट्रायल के दौरान पहले आरोपित शिशुपालन ने आत्महत्या कर ली। इसलिए मुकदमा सिर्फ माँ के खिलाफ ही चला। बच्चियाँ फिलहाल चिल्ड्रेन होम में रह रही हैं।

लगन हो तो ऐसी… 56 साल की उम्र में सिक्योरिटी गार्ड ने ली MSc गणित की डिग्री, 25 साल में 23 बार एक्जाम में हुए फेल फिर मिली कामयाबी

‘गिरते हैं शहसवार ही मैदान-ए-जंग में, वो तिफ्ल क्या गिरे जो घुटनों के बल चले’ की कहावत मध्य प्रदेश जबलपुर के सिक्योरिटी गार्ड राजकरन बरौआ पर सटीक बैठती है। वे गणित से MSc करने को लेकर इतने पक्के थे कि 25 साल तक कोशिश करते रहे। 23 बार फेल हुए। आखिरकार उन्होंने ये परीक्षा पास कर ही दम लिया।

राजकरन बरौआ के पास घर, परिवार, बचत और स्थायी नौकरी के नाम पर कुछ नहीं था। साथ था केवल MSc गणित की डिग्री हासिल करने का जुनून। बरौआ अब गर्व से कहते हैं, “लेकिन मेरे पास डिग्री है।” उन्होंने इसके लिए पहला एग्जाम 1977 में दिया था।

मौजूदा समय में राजकरन 56 साल के हैं। उन्होंने लगभग अपनी उम्र के आधे साल गणित में मास्टर डिग्री हासिल करने के अपने सपने को पूरा करने में लगा दिए। एक सुरक्षा गार्ड के तौर पर डबल शिफ्ट और कई तरह की मुश्किलों भरी नौकरियाँ करने के बाद भी उन्होंने पढ़ाई का जुनून नहीं छोड़ा।

आखिरकार साल 2021 में वो MSc गणित की परीक्षा पास करने में कामयाब हो गए। अपने एम्प्लायर को शर्मिंदा होने से बचाने के लिए उन्होंने चुपचाप कामयाबी का जश्न मनाया। राजकरन कहते हैं कि वे केवल बंद दरवाजों के पीछे ही जश्न मना सकते थे, क्योंकि उनके मालिक उनका उदाहरण देकर अपने बच्चों को ताना मारा करते थे।

वे कहते हैं कि उनके मालिक अपने बच्चों से कहते थे कि उनके दृढ़ संकल्प को देखें कि कैसे वो इस उम्र में भी मेहनत से पढ़ाई कर रहे हैं। राजकरण कहते हैं, ”मैं उन्हें शर्मिंदा नहीं करना चाहता था इसलिए मैंने चुपचाप जश्न मनाया और इसे अपने तक ही सीमित रखा। अब मैंने वह नौकरी छोड़ दी है, इसलिए मैं लोगों को बता सकता हूँ।”

राजकरन कहते हैं है कि 2015 में टीओआई की रिपोर्ट से उन्हें बहुत हौसला मिला। उन्होंने कहा, “मैं अपने 18वीं कोशिश में भी फेल हो गया था। बेहद उदास महसूस कर रहा था, लेकिन एक बार मेरे बारे में खबर छपने से लोगों ने मुझे अलग तरह से देखना शुरू कर दिया। टीवी चैनल मेरी तलाश में आए। यह प्रेरणा की एक बड़ी खुराक थी।”

राजकरन रात में सुरक्षा गार्ड का काम करते हैं। इसके लिए उन्हें हर महीने 5,000 रुपए मिलते हैं। वहीं बंगले में काम करने के बदले उन्हें रहना, खाना और 1,500 रुपये अलग से मिलते थे। उनका कहना है, “मैं मुश्किल से अपनी जीवन चला पाता हूँ, लेकिन पिछले 25 साल में मैंने परीक्षा पास करने के लिए किताबों, परीक्षा शुल्क और संबंधित चीजों पर 2 लाख रुपए खर्च किए हैं।”

शादी की बात पर राजकरन कहते है, “मुझसे शादी कौन करेगा जब मैंने अपनी शादी अपने सपने से कर ली थी।” गणित में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री को लेकर जुनूनी होने की वजह बताते हुए कहते है, “1996 में एमए करने के बाद, मैं एक स्कूल गया और वहाँ छात्रों से बातचीत की। मैंने जिस तरह से बच्चों को गणित पढ़ाया, शिक्षकों ने उसकी सराहना की। इससे गणित में पीजी करने का विचार आया।”

वो आगे बताते हैं, “उन दिनों, आपके पास एक वैकल्पिक विषय के साथ एमएससी करने का विकल्प था। मैंने 1996 में जबलपुर के रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में गणित में एमएससी के लिए आवेदन किया और उसे स्वीकार कर लिया गया।”

हालाँकि वो कहते हैं कि उन्होंने कभी ये अनुमान नहीं लगाया था कि ये इतना मुश्किल होगा। वो ये भी कहते हैं कि उन्हें पक्के तौर पर ये भी नहीं पता था कि उनके पास इसे करने के लिए इतना दृढ़ संकल्प होगा।

वे बताते है, “मैं 1997 में पहली बार एमएससी की परीक्षा में बैठा और असफल हो गया। अगले 10 साल तक मैं पाँच विषयों में से केवल एक में ही पास हो सका, लेकिन कभी हार नहीं मानी। मैंने इस बात की परवाह नहीं की कि लोग क्या कहते हैं और मैंने अपने सपने पर ध्यान केंद्रित किया।

उन्होंने आगे कहा, “इसके बाद फिर, मैंने दो विषयों में पास होना शुरू हुआ। आखिरकार, 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान, मैंने अपनी पहले साल की परीक्षा पास कर ली और 2021 में मैंने दूसरे साल की परीक्षा भी पास कर ली। मैं बहुत खुश था।” उन्होंने कहा, “इस सबसे मैंने सीखा कि कोशिश की जाए और धैर्य रखा जाए तो वो हमें सब कुछ हासिल करा देंगे।”

क्या है रैट होल माइनिंग, जिससे मजदूरों को बाहर निकालने के लिए उत्तरकाशी की सुरंग में बनाया जा रहा रास्ता

उत्तराखंड के उत्तरकाशी की सिलक्यारा सुरंग में फँसे 41 मजदूरों को जल्द ही बाहर निकाला जा सकता है। सुरंग में मजदूरों को निकालने में सामने आ रही सभी समस्याएँ सुलझ गई हैं और अब तेजी से खुदाई का काम चल रहा है। अब रैट होल माइनिंग का तरीका अपनाया जा रहा है।

इसके लिए रैट होल तकनीक के विशेषज्ञ परसादी लोधी पूरे बचाव अभियान को लीड कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह रेस्क्यू पाइपों में प्रवेश करेंगे और सुरंग से बाहर निकलने को अवरुद्ध करने वाले शेष मलबे को खोदने के लिए हाथ से काम करने वाले उपकरणों का उपयोग करते हुए रास्ता बनाएँगे। वह पिछले दस साल से दिल्ली और अहमदाबाद में इस तकनीक के जरिए काम कर रहे हैं।

बता दें कि मजदूर 12 नवम्बर 2023 की सुबह से सुरंग के भीतर मलबा आने के कारण फँसे हुए हैं। इन्हें निकालने के लिए मलबे के भीतर से 3 फीट व्यास वाला पाइप डाला जा रहा है। अब पाइप को मशीन की जगह हाथों से खुदाई करके आगे बढ़ाया जा रहा है। इस खुदाई के लिए रैट होल माइनिंग तरीके का उपयोग किया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, अब तक लगभग 51 मीटर खुदाई करके पाइप डाल दिया गया है और बाकी 5-6 मीटर को भी जल्द ही खोद लिया जाएगा। इससे पहले 46 मीटर पर ऑगर मशीन फँस गई थी जो कि 4 दिन बाद काट कर बाहर निकाली जा सकी थी। घटनास्थल पर राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी पहुँचे हैं।

मजदूरों को निकालने के लिए दूसरे विकल्पों पर भी लगातार काम चल रहा है। वहीं पहाड़ी के ऊपर से खुदाई में भी तेजी आई है। सतलुज जल विद्युत् निगम लगातार सीधी ड्रिलिंग कर रहा है। इसके लिए नई मशीन भी पहुँच गई है। जानकारी के अनुसार इस रास्ते से 40 मीटर तक खुदाई हो गई है।

सबसे अधिक उम्मीदें रैट होल माइनिंग तरीके से ही हैं। यहाँ हाथों से खुदाई करके फिर आगे पाइप को टुकड़ों में मजदूरों तक भेजा जा रहा है। सुरंग में रैट माइनिंग के 6 विशेषज्ञ कल ही पहुँच गए थे। अब जल्द से जल्द पाइप अन्दर धकेलने पर काम चालू है। आशा जताई जा रही है कि आज मजदूर बाहर निकल सकते हैं।

क्या होती है रैट होल माइनिंग?

रैट होल माइनिंग संकरे क्षेत्रों में गड्ढे बनाने की प्रक्रिया है। इसके नाम के अनुसार, इसमें चूहे के बिल जैसी सुरंग की खुदाई होती है जो कि मात्र इतनी चौड़ी होती है कि उसमें एक आदमी अन्दर जा सके। इस तरीके का मुख्य उपयोग कोयला निकालने में होता है।

ऐसी जगहों पर जहाँ कोयला जमीन के नीचे काफी छोटी मात्रा में हैं, वहाँ रैट माइनिंग करने वाले एक सीधा और छोटा सा गड्ढा बना कर नीचे खुदाई करते जाते हैं। इसमें आमतौर पर एक व्यक्ति के उतरने और कोयला निकालने के लिए पर्याप्त जगह होता है।

इस तकनीक में एक बार गड्ढे खोदने के बाद, वर्कर कोयले की परतों तक पहुँचने के लिए रस्सियों या बाँस की सीढ़ियों का उपयोग करके उतरते हैं। फिर कोयले को गैंती, फावड़े और टोकरियों जैसे आदिम उपकरणों का उपयोग करके मैन्युअल रूप से निकाला जाता है। ठीक इसी तकनीक का उपयोग करते हुए इस बार सिलक्यारा सुरंग में फँसे मजदूरों को निकालने पर तेजी से काम हो रहा है।

भारत में मेघालय में यह पद्धति अपनाई जाती है। यहाँ कोयले के छोटे-छोटे भंडारों में स्थानीय लोग खनन के लिए ऐसी छोटी सुरंगें बनाते हैं। इस तरह की सुरंगों में कोई सुरक्षा के इंतजाम ना होने के कारण कई बार हादसे भी होते रहे हैं।

हालाँकि, इस तकनीक की कुछ खामियाँ भी हैं जैसे सुरंग में पतला और एक ही रास्ता होने के कारण इनमें बारिश का पानी भर जाता है जिसमें कई बार मजदूर फँस जाते हैं। मेघालय से कई बार ऐसी घटनाएं सामने आई हैं। जिसके बाद राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (NGT) ने ऐसी सुरंगों पर 2014 में प्रतिबन्ध लगा दिया था।