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बस इतना कहा था कूड़ा साफ कर दो…पत्नी ने गुस्से में काट खाया पति का कान: दिल्ली के सुल्तानपुरी की घटना, FIR दर्ज​

दिल्ली के सुल्तानपुरी में एक महिला ने गुस्से में आकर अपने पति का कान दाँत से काट डाला। घटना की जानकारी हाल में पुलिस को दी गई। पीड़ित पति ने बताया कि उसकी पत्नी की इस हरकत के कारण उसका दाहिना कान का ऊपरी हिस्सा कट गया था और इस वजह से उसे सर्जरी करानी पड़ी। इलाज के बाद उसने पत्नी के विरुद्ध थाने में शिकायत दी।

पुलिस ने बताया कि पीड़ित पति की शिकायत के बाद आईपीसी की धारा 324 के तहत महिला के विरुद्ध एफआईआर हुई है। अब मामले की जाँच चल रही है। पति ने पुलिस को दी शिकायत में बताया, “मैं 20 नवंबर को सुबह करीब 9:20 बजे अपने घर के बाहर कूड़ा फेंकने गया था। मैंने अपनी पत्नी से घर की सफाई करने के लिए कहा। जैसे ही मैं घर लौटा, मेरी पत्नी ने बेकार के मुद्दे को लेकर मुझसे लड़ना शुरू कर दिया। मैंने उसे समझाने की कोशिश की। मगर तब वो मुझे मारने को आगे आने लगी।”

पीड़ित ने बताया, “मैं उसे ढकेल कर घर से बाहर जा रहा था, तभी उसने मुझे पीछे से पकड़ लिया और गुस्से में आकर मेरा दाहिना कान इतनी जोर से काटा कि मेरे कान का ऊपरी हिस्सा कट गया। मेरा बेटा मुझे इलाज के लिए मंगोलपुरी के संजय गाँधी अस्पताल ले गया। बाद में मेरी सर्जरी जयपुर गोल्डन अस्पताल में हुई।”

पुलिस ने बताया कि उन्हें घटना की जानकारी 20 नवंबर को हुई थी। इसके बाद उन्होंने मामले की जाँच की। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि जब उन्होंने पीड़ित से संपर्क किया तब पीड़ित की हालत खराब थी वो बयान नहीं दे सकता ता। उसने पुलिस ने अनुरोध किया कि वो थाने आकर खुद ही शिकायत दे देगा। इसके बाद 22 नवंबर को इस संबंध में लिखित शिकायत हुई और एफआईआर करके मामले में जाँच शुरू हुई। उसने पुलिस को य बताया कि उसकी पत्नी ने उससे घर बेचकर हिस्सा देने के लिए भी कहा था ताकि वह बच्चों के साथ अलग रह सके।

गौरतलब है कि इस घटना के मीडिया में आने से कुछ दिन पहले ही एक ऐसी खबर ने सबके होश उड़ा दिए थे जब पुणे की रहने वाली महिला ने सिर्फ अपने पति को मुक्का मारकर इसलिए मारा डाला क्योंकि वो उसे जन्मदिन पर दुबई नहीं ले जा रहा था। इस झगड़े में पति की जान चली गई थी।

तमिलनाडु के रिटायर्ड IAS और चर्चे ओडिशा के अगले CM बनने के, कौन हैं वीके पांडियन जिन्हें बताया जा रहा BJD में नवीन पटनायक का उत्तराधिकारी

पूर्व IAS अधिकारी वीके पांडियन ने आधिकारिक तौर पर मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के बीजू जनता दल की सदस्यता ले ली है। इससे पहले अक्टूबर, 2023 में उन्होंने IAS से त्यागपत्र दे दिया था। वह पटनायक के निजी सचिव थे। वहीं अब उनकी चर्चा ओडिशा के अगले CM और नवीन पटनायक के अगले उत्तराधिकारी के रूप में हो रही है।

वह एक दशक से नवीन पटनायक के साथ काम कर रहे हैं। उन्हें ओडिशा में नवीन पटनायक का दाहिना हाथ समझा जाता है। पांडियन का दबदबा सरकार से लेकर बीजू जनता दल तक रहा है। उन्हें पिछले महीने ओडिशा सरकार के 5T और नबीनओडिशा प्रोग्राम का मुखिया बनाया गया था।

इस काम के लिए उन्हें त्यागपत्र के तुरंत बाद ओडिशा सरकार में कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया था। बता दें कि पांडियन तमिलनाडु मूल के हैं और वर्ष 2000 बैच के ओडिशा कैडर के अफसर हैं। वह 2012 के बाद से नवीन पटनायक के साथ काम कर रहे हैं। उन्हें पटनायक के उत्तराधिकारी के तौर पर भी देखा जा रहा है।

48 वर्षीय पांडियन के प्रभाव के चलते उन्हें विपक्ष की आलोचना भी झेलनी पड़ रही थी। नवीन पटनायक के निजी सचिव रहते हुए उनके लोगों से मिलने, रैलियों को संबोधित करने और मुख्यमंत्री का प्रतिनधि बन कर जाने को लेकर कई बार प्रश्न उठे थे। विपक्ष का कहना था कि क्या कोई सेवायत अफसर एक राजनीतिक व्यक्ति की तरह व्यवहार कर सकता है?

पांडियन ने इन आरोपों के बीच अक्टूबर 2023 में त्यागपत्र दिया था और अब उन्होंने बीजू जनता दल की सदस्यता भी ले ली है। पांडियन के पार्टी की सदस्यता लेते समय मुख्यमंत्री नवीन पटनायक समेत पार्टी के कई बड़े नेता मौजूद रहे।

बता दें कि पांडियन को वर्तमान में ओडिशा की राजनीति में सबसे ताकतवर व्यक्ति समझा जाता है। चूँकि, राज्य के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की जनता के बीच काफी कम ही तस्वीरें सामने आती हैं और वह कम ही लोगों से मिलते भी हैं। उनसे मिलने के लिए भी पांडियन से सम्पर्क रखना होता है।

गौरतलब है कि नवीन पटनायक वर्ष 2000 से ओडिशा के मुख्यमंत्री बने हुए हैं। प्रत्येक चुनाव के साथ उनकी पार्टी की स्थिति राज्य में मजबूत होती गई है। 147 सीटों वाली ओडिशा विधानसभा में उनकी पार्टी की 111 सीटें हैं। बता दें कि ओडिशा में अगले विधानसभा चुनाव लोकसभा चुनावों के साथ ही होंगे।

लोकसभा और राज्य के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पांडियन का अपनी IAS सेवा छोड़ कर सीधे राजनीति में उतरना बड़ा संकेत दे रहा है। यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि यदि राज्य में पुनः पार्टी को जीत मिलती है तो क्या 77 वर्षीय नवीन पटनायक, पांडियन को और बड़ी जिम्मेदारी देंगे?

‘मार्च 2024 तक तैयार हो जाएँगे CAA के नियम-कायदे’: केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा ‘टेनी’ ने बता दिया समय, अब तक 8 बार बढ़ाई जा चुकी है अवधि

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा ‘टेनी’ ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के संबंध में बयान दिया है। उन्होंने कहा कि CAA को लागू करने में हमारी सरकार की तरफ से कोई दिक्कत नहीं है। उन्होंने कहा कि जैसे ही हमारी सरकार बनी, हमने 2016 में इसे संसद में रखा और संयुक्त संसदीय समिति में ये गई। 7 जनवरी, 2019 को इसकी रिपोर्ट आई और अगले ही दिन लोकसभा में इसे पारित कर दिया गया। लेकिन, राज्यसभा में NDA का बहुमत न होने के कारण इसे पारित नहीं कराया जा सका।

अजय मिश्रा ‘टेनी’ ने याद किया कि 2019 में लोकसभा चुनाव होने के साथ ही ये अधिनियम रद्द हो गया क्योंकि इसे फिर से दोनों सदनों में पारित कराए जाने की ज़रूरत थी। 2019 में सरकार बनने के साथ ही 9 दिसंबर को इसे लोकसभा में रखा गया और अगले ही दिन ये लोकसभा में पास हो गया। 11 दिसंबर को इसे राज्यसभा में पास करा दिया गया और 12 को ये कानून बन गया। 10 जनवरी, 2020 को देश में CAA को लागू कर दिया गया। याद हो कि CAA के खिलाफ जम कर आंदोलन किया गया था और शाहीन बाग़ में मुस्लिम महिलाओं ने लंबा धरना दिया था।

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा ‘टेनी’ ने कहा, “लागू होने के बाद कानून के नियम-कायदे बनाए जाते हैं। उसके बाद ही कानून पूरी तरह लागू होता है। इसके नियम-कायदे बनाने के लिए दिए गए हैं। जो लोकसभा की विधान बनाने की समिति है उसने 9 जनवरी, 2024 और राज्यसभा की विधान बनाने की समिति ने 30 मार्च, 2024 की तारीख़ दी है। उस समय तक ये बन जाएगा। कानून जब संसद से पास होकर अधिनियमित हो गया है, उसे लागू होना ही होना है।”

इस दौरान उन्होंने याद किया कि कैसे भाजपा विरोधी तत्वों ने सुप्रीम कोर्ट में भी CAA को असंवैधानिक बता कर इसे चुनौती दी हुई है। उन्होंने बताया कि दिसंबर 2023 में इसकी सुनवाई की तारीख़ मुक़र्रर की गई है। बता दें कि अब तक 8 बार CAA के फाइनल ड्राफ्ट को पूरा किए जाने की अवधि आगे बढ़ाई जा चुकी है। पिछली बार अगस्त 2023 में इसे आगे बढ़ाया गया था। इसी तरह जनवरी 2023 में 7वीं बार इसे बढ़ाया गया था। इसके तहत पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के अल्पसंख्यक शरणार्थियों को भारत की नागरकता मिलनी है।

1 दिसंबर से बिना वीजा मलेशिया जा सकेंगे भारतीय, पासपोर्ट दिखाकर 30 दिनों तक रह सकेंगे: भारत से ही जाते हैं सबसे ज्यादा पर्यटक

दक्षिणपूर्व एशियाई देश मलेशिया ने भारतीय नागरिकों के लिए वीजा लेने की बाध्यता को हटा दिया है। यह नई व्यवस्था 1 दिसम्बर, 2023 से लागू होगी। मलेशिया में अब भारतीय केवल अपने पासपोर्ट के सहारे ही 30 दिन तक रह सकेंगे।

मलेशिया ने भारत के अलावा चीन के नागरिकों के लिए यही वीजा मुक्त व्यवस्था लागू की है। मलेशिया ने यह कदम अपने यहाँ पर्यटन के माध्यम से आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने के लिए उठाया है क्योंकि भारत और चीन दोनों बड़ी पर्यटक संख्या वाले देश हैं।

यह घोषणा मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहीम ने अपनी पार्टी की सालाना कॉन्फ्रेंस के दौरान पुत्राजाया में की। इब्राहिम इस कदम के जरिए आशा कर रहे हैं कि उनके देश की अर्थव्यवस्था में तेजी आएगी। गौरतलब है कि मलेशिया में सबसे अधिक पर्यटक चीन और भारत से ही पहुँचते हैं। वर्ष 2023 में केवल जनवरी से जून के बीच ही भारत से 2.8 लाख पर्यटक मलेशिया पहुँचे।

दक्षिणपूर्वी एशिया में स्थित अधिकांश देश अब अपने पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए ऐसी ही रियायते दे रहे हैं। हाल ही में थाईलैंड ने भी भारतीय नागरिकों के लिए वीजा मुक्त यात्रा की घोषणा की थी। थाईलैंड ने नवम्बर, 2023 और मई 2024 के बीच भारत से जाने वाले पर्यटकों के लिए वीजा की आवश्यकता को हटा दिया है।

थाईलैंड के अलावा श्रीलंका ने हाल ही में भारतीय पर्यटकों के लिए वीजा की शुल्क ना लेने का निर्णय लिया था। श्रीलंका का भी लक्ष्य अपने देश में पर्यटन को बढ़ाना है। इसके जरिए वह अपनी संकटग्रस्त अर्थव्यवस्था को मजबूत करना चाह रहा है।

एक अन्य दक्षिणपूर्व एशियाई देश विएतनाम भी भारतीयों के लिए वीजा की बाध्यता को खत्म करने पर विचार कर रहा है। विएतनाम के लिए भारत एक बड़ा पर्यटक स्रोत है। वियतनाम की एयरलाइन कम्पनियाँ भी लगातार अपनी सेवाएँ भारत में बढ़ा रही हैं।

विश्व के अलग-अलग देशों के पासपोर्ट की ताकत को बताने वाली हेनले इंडेक्स के अनुसार, भारत के नागरिक बिना वीजा के 57 देशों की यात्रा कर सकते हैं। अधिक देशों का किसी देश के नागरिकों को बिना वीजा के आने देना उसके प्रभाव को प्रदर्शित करता है।

सफेद धोती, भगवा अंगवस्त्र, माथे पर टीका… PM ने तिरुपति बालाजी के किए दर्शन, 140 करोड़ भारतीयों की समृद्धि के लिए की प्रार्थना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (27 नवंबर 2023) को हर भारतीय के लिए तिरुपति बालाजी मंदिर में पूजा अर्चना की। उनके अकॉउंट से इस पूजा की तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी शेयर की गई।

फोटो में पीएम मोदी वेंकटेश्वर मंदिर के अंदर पंडितों के आगे सफेद धोती, भगवा अंगवस्त्र और टीका लगाए दिखाई दे रहे हैं। तस्वीर साझा करते हुए ट्वीट में उन्होंने लिखा, “तिरुमाला के श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में 140 करोड़ भारतीयों के अच्छे स्वास्थ्य, कल्याण और समृद्धि के लिए प्रार्थना की।”

बता दें कि प्रधानमंत्री के तिरुपति बालाजी मंदिर जाने से पहले तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम बोर्ड ने एक बयान जारी कर बताया था कि पीएम मोदी 26 नवंबर की शाम में तिरुपति पहुँचेंगे, जहाँ वह रात में रुकेंगे और उसके बाद 27 नवंबर की सुबह भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन कर आशीर्वाद लेंगे। 

प्रधानमंत्री मंदिर में पूजा पाठ के बाद काफी समय वहीं रहे। इसके बाद वह तेलंगाना के लिए रवाना हो गए। लेकिन उनके अकॉउंट्स से डाली गई फोटोज को देख सोशल मीडिया यूजर्स काफी इमोशनल हो गए। 

चंद्रभूषण नाम के एक्स अकॉउंट ने पीएम मोदी को भगवान का आदमी बताया।

वहीं कुछ ने कहा कि भले ही प्रधानमंत्री ने 140 करोड़ भारतीयों के लिए पूजा पाठ की, लेकिन इनमें से कई लोग ऐसे हैं जो उन्हें सिर्फ गाली देने में, उनके किए कार्यों को नीचा दिखाने में व्यस्त रहते हैं।

एक यूजर कहता है- प्रभु बालाजी आपको स्वस्थ जीवन दें और ताकत दें। भारत को आपके नेतृत्व की जरूरी है। आपकी ऐसी भक्ति ही आपकी सच्ची शक्ति है।

बता दें कि तिरुपति बालाजी का मंदिर आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में तिरुमला पर्वत पर स्थित है। यह मंदिर भगवान विष्णु के अवतार श्री वेंकटेश्वर स्वामी को समर्पित है। भारत में होने के बावजूद इस मंदिर से दुनियाभर के लोगों की आस्था जुड़ी है।

‘कुरान शरीफ से बड़ी कोई किताब नहीं, NCERT के सिलेबस में शामिल करें’: सपा MP शफीकुर्रहमान बर्क ने रामायण-महाभारत की पढ़ाई का किया विरोध

संसार में कुरान शरीफ से बड़ी कोई किताब नहीं है। इसे NCERT के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए। यह कहना है उत्तर प्रदेश के संभल से समाजवादी पार्टी के सांसद शफीकुर्रहमान बर्क का। उन्होंने यह बात रामायण महाभारत की पढ़ाई का विरोध करते हुए कही।

उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों मीडिया में यह खबर आई ​थी कि एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम में रामायण और महाभारत को शामिल किया जा सकता है। हालाँकि एनसीईआरटी ने अपनी ओर से इस तरह की कोई सिफारिश करने से इनकार किया था।

शफीकुर्रहमान बर्क ने इस विषय में प्रश्न पूछे जाने पर कहा कि वे पाठ्यक्रम में रामायण और महाभारत को शामिल करने का विरोध करते हैं। इन दोनों धर्मग्रंथों की जगह पर कुरान को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए, क्योंकि यह दुनिया की सबसे बड़ी किताब है और अल्लाह का कलाम है।

शफीकुर्रहमान ने कहा है कि यह इस वक्त की सियासत की कमी है कि बच्चों में देशभक्ति की कमी है। उनका कहना है कि दुनिया की किसी भी शिक्षा में देशभक्ति की कोई कमी नहीं है। वह इससे पहले भी कई बार विवादित बयान दे चुके हैं।

गौरतलब है हाल ही में कुछ मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया था कि NCERT के पाठ्यक्रम में रामायण और महाभारत को भारत के इतिहास विषय में शास्त्रीय काल के अंतर्गत रखा जाएगा। इसके लिए एक कमिटी की सिफारिश का हवाला दिया गया था।

मीडिया रिपोर्ट में पैनल अध्यक्ष और इतिहासकार रिटायर्ड प्रोफेसर सीआई आईजैक का हवाला देते हुए कहा गया था कि पैनल ने यह प्रस्ताव भी रखा है कि स्कूल की हर क्लास में दीवार पर संविधान की प्रस्तावना भी लिखी जाए। इसके साथ ही यह प्रस्तावना क्षेत्रीय भाषा में होनी चाहिए।

मीडिया रिपोर्ट में बताया गया था कि पैनल ने इतिहास के पाठयक्रम को चार कालों शास्त्रीय काल, मध्यकालीन काल, ब्रिटिश काल और आधुनिक भारत में बाँट कर पढ़ाने की सिफारिश की है। अभी, भारतीय इतिहास को स्कूली किताबों में तीन कालों प्राचीन, मध्यकालीन और आधुनिक के तहत पढ़ाया जाता है।

हालाँकि इस खबर के बाद NCERT ने ऐसे किसी भी पैनल और उसकी सिफारिशों से इनकार किया था। NCERT ने कहा था कि ऐसी कोई कमेटी नहीं है और प्रोफेसर आईजैक ने जो कुछ भी कहा है वह उनकी निजी राय है। शिक्षा निकाय ने उनके ऐसे दावों पर सख्त एतराज जताते हुए इसे सिरे से नकार दिया था।

जिस उदयपुर में कन्हैया लाल का गला रेता, वहाँ अब BJP वर्कर का सिर पत्थर से कुचला: दिनभर चुनाव में लगे थे, सुबह शव मिला

राजस्थान के उदयपुर में कन्हैया लाल का इस्लामी कट्टरपंथियों ने गला रेत दिया था। इस बार विधानसभा चुनावों में यह एक बड़ा मुद्दा था। अब इसी उदयपुर से एक बीजेपी कार्यकर्ता की निर्मम हत्या की खबर आई है। उनकी हत्या 25 नवंबर 2023 को हुई। इसी दिन विधानसभा चुनाव के लिए वोट डाले गए थे।

रिपोर्टों के अनुसार बीजेपी वर्कर कांतिलाल की हत्या के बाद पत्थर से सिर कुचल दिया गया था। उदयपुर की झाड़ोल विधानसभा के फलासिया थाना क्षेत्र में 45 वर्षीय इस बीजेपी कार्यकर्ता की हत्या की गई। वे मतदान के बाद अपने छोटे भाई मुकेश के घर गए हुए थे। उसके बाद रात के करीब 9 बजे अपने घर जाने के लिए निकले थे।

दिनभर पार्टी की तरफ से मतदान की प्रक्रिया में व्यस्त रहे कांतिलाल का शव 26 नवंबर की सुबह बेटे को सड़क पर मिला। घर जाने के दौरान रास्ते में अज्ञात हमलावरों ने उनकी हत्या कर दी। सर को पत्थरों से कुचल दिया। उनका चेहरा काफी चोटिल था और शव को पहचानना भी मुश्किल था।

कांतिलाल मतदान के दिन मतदाताओं को उनके घर से लाकर मत डलवा रहे थे। लेकिन मतदान का समय खत्म होने के बाद भी जब वह काफी देर तक घर नहीं लौटे तो उनकी तलाश शुरू हुई। कांतिलाल के बेटे सुनील ने कपड़ों से उनकी पहचान की। शव का पोस्टमार्टम कराया गया है।

इस मामले में अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। जिस विधानसभा क्षेत्र में यह घटना हुई है, वहाँ वर्तमान में भाजपा के बाबूलाल खराड़ी विधायक हैं। वह इस विधानसभा चुनाव में भी प्रत्याशी हैं। कांतिलाल उनके लिए ही काम कर रहे थे। मृतक का एक पुत्र गुजरात के अहमदाबाद में काम करता है।

बाबूलाल खराड़ी ने इस हत्या पर दुःख जताते हुए कहा है कि प्रशासन को इस मामले की जाँच करनी चाहिए और दोषियों को गिरफ्तार किया जाए। उन्होंने इस हत्या को दुखद और लोकतंत्र लिए डरावना बताया है।

पैसे की ‘भीख’ माँग रहा पाकिस्तान का क्रिकेट बोर्ड: कहा- भारत चैंपियस ट्रॉफी में न आया तो होगा बड़ा नुकसान, मुआवजे का वादा करे ICC

पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) वर्ष 2025 में पाकिस्तान में आयोजित होने वाले चैम्पियंस ट्रॉफी को लेकर परेशानी में है। उसका कहना है कि भारत अगर इस टूर्नामेंट के लिए पाकिस्तान नहीं आता है तो उसका नुकसान हो जाएगा। उसने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट काउंसिल से इस संबंध में समझौते की माँग की है।

वर्ष 2025 में चैम्पियंस ट्रॉफी का आयोजन पाकिस्तान में होना है। लेकिन भारतीय टीम के पाकिस्तान जाने की संभावनाएँ बनती नहीं दिख रही इसलिए पीसीबी घबराया हुआ है। इससे पहले इसी वर्ष पाकिस्तान में आयोजित एशिया कप में भी खेलने के लिए पाकिस्तान नहीं गया था। इस कारण से इसका आयोजन हाइब्रिड मोड में श्रीलंका में हुआ था।

पीसीबी ने ICC से माँग की है कि यदि भारत 2025 चैम्पियंस ट्रॉफी को पाकिस्तान में खेलने से राजनीतिक या सुरक्षा कारणों के आधार पर खेलने से मना करता है तो इसके एवज में पीसीबी को मुआवजा दिया जाए। इसके लिए पीसीबी के कुछ अधिकारी ICC से मिले भी हैं।

जानकारी के अनुसार, जहाँ यह तय हो गया है कि 2025 की चैम्पियंस ट्रॉफी की मेजबानी पाकिस्तान ही करेगा, वहीं अभी इसके लिए ICC और पीसीबी के बीच समझौते पर हस्ताक्षर नहीं हुए हैं। इसके लिए पीसीबी के चेयरमैन ज़का अशरफ और सीओओ सलमान नसीर ने वर्ल्डकप के दौरान ICC के अधिकारियों से अहमदबाद में मुलाक़ात भी की थी।

भारत 2008 के 26/11 मुंबई हमले के बाद से एक भी बार पाकिस्तान क्रिकेट खेलने के लिए नहीं गया है। इसके लिए वह सुरक्षा और राजनीतिक कारणों का हवाला देता रहा है। भारत में क्रिकेट फैन्स की भावनाएँ भी पाकिस्तान में जा कर खेलने के खिलाफ हैं।

पीसीबी की माँग है कि यदि भारत सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए पकिस्तान में चैम्पियंस ट्रॉफी खेलने से मना करता है तो ICC को एक स्वतंत्र जाँच कमिटी का गठन करना होगा। यह कमिटी इस बात की जाँच रिपोर्ट देगी की सुरक्षा व्यवस्था कैसी है।

पीसीबी का कहना है कि बीते दो वर्षों में भारत के अलावा कई टीमों ने पाकिस्तान का दौरा किया है। इन टीमों ने सुरक्षा कारणों का हवाला नहीं दिया है। ऐसे में भारत यदि खेलने नहीं आता है तो पीसीबी को इसका मुआवजा मिलना चाहिए।

इस बात के कयास लगाए जा रहे हैं कि भारत 2025 चैम्पियंस ट्रॉफी के लिए किसी न्यूट्रल वेन्यू पर जोर देगा। कहा गया है कि ऐसी स्थिति में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) एक विकल्प हो सकता है। यहाँ भारत और पाकिस्तान दोनों ने पूर्व में मैच खेले हैं और इस देश से दोनों के सम्बन्ध भी अच्छे हैं।

हालाँकि, पीसीबी की तरफ से यह कोई नहीं माँग नहीं है। हाल ही में सम्पन्न हुए वर्ल्डकप 2023 से पहले भी पाकिस्तान ने ऐसी ही शर्त रखी थी। तब पीसीबी के चेयरमैन रहे नज़म सेठी ने कहा था कि पाकिस्तान भारत में वर्ल्डकप खेलने तभी आएगा जब भारत चैम्पियंस ट्रॉफी के लिए पाकिस्तान आने का वादा करे।

‘हमास का खात्मा हमारा लक्ष्य, कोई रोक नहीं सकता’: गाजा पट्टी पहुँचे इजरायली PM नेतन्याहू, ‘युद्ध विराम’ बढ़ाने के लिए गिड़गिड़ाया इस्लामी आतंकी संगठन

इजरायल और हमास के बीच तकरीबन डेढ़ महीने तक चले युद्ध पर 4 दिन का विराम था। इस बीच इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गाजा पट्टी का दौरा किया। अपनी फौज से मिलकर उन्होंने यह साफ कर दिया कि भले ही अभी सीजफायर हो गया, लेकिन ये युद्ध आतंक के खात्मे तक जारी रहेगा।

इजरायल और हमास के बीच युद्धविराम समझौते की शुरुआत शुक्रवार (24 नवंबर 2023) से हुई थी। पहले दिन हमास द्वारा 24 बंधकों को रिहा किया गया। जिनमें 13 इजरायली, थाईलैंड के 10 और फिलीपिंस का एक नागरिक शामिल था।

इसके बाद तीसरे दिन 17 लोग हमास आतंकियों की चंगुल से रिहा हुए। इनमें 14 इजरायली और 3 थाईलैंड के नागरिक थे। हमास ने गाजा के एक अस्पताल में इन बंधकों को रेड क्रॉस इंटरनेशनल सोसायटी के वॉलंटियर्स के हवाले किया, जिन्होंने बाद में सभी को बंदियों को इजरायली सुरक्षा बलों को सौंप दिया।

इनकी रिहाई देखकर हमास से बचाए गए सैंकड़ों लोग खुशी मनाते दिखे। उन्होंने एक हॉल में पूरी रिहाई की खबर देश जश्न मनाया, जिसकी वीडियो भी सामने आई है।

बता दें कि इजरायल और हमास के बीच हुए युद्धविराम में कतर ने बिचौलिए की भूमिका निभाई। फैसला हुआ कि हमास 50 बंधकों को रिहा करेगा और फिलीस्तीन के भी 150 कैदी छोड़े जाएँगे। इस डील के बाद भले ही कुछ लोग घर लौट आए हैं, लेकिन अब भी खबर है कि 183 लोग अभी भी हमास द्वारा बंदी बनाकर रखे गए हैं। इनमें 18 बच्चे जबकि 43 तो महिलाएँ ही हैं।

हमास ने रविवार (26 नवंबर 2023) को एक बयान में सीजफायर बढ़ाने की भी माँग की। हालाँकि इजरायल ने शर्त रखी कि अगर हमास रोज 10 बंधक छोड़ेगा तो वह इस बात को मान लेंगे। इसी बीच इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बुलेटप्रूफ जैकेट पहनकर ऐसे माहौल में गाजा पट्टी का दौरा किया। उन्होंने अपने सैनिकों से मुलाकात करने के बाद यह साफ कर दिया कि गाजा पट्टी पर अब इजरायल का कब्जा है। उन्होंने सैनिकों की हौसला अफजाही करते हुए यहाँ तक कहा कि जब तक आतंक का सफाया नहीं होगा तब तक युद्ध नहीं रुकेगा।

सैनिकों के साथ खड़े होकर उन्होंने कहा, “हम अपने बंदियों को वापस लाने के लिए हर प्रयास करेंगे और अंततः हम उन सभी को वापस लाएँगे। नेतन्याहू ने कहा, “इस युद्ध में हमारे तीन लक्ष्य हैं- सभी बंधकों की वापसी, हमास का खात्मा और यह सुनिश्चित करना कि गाजा फिर कभी इजरायल के लिए खतरा ना बने।” उन्होंने आगे कहा, “कोई भी हमें नहीं रोक सकता है। हमारे पास ताकत है और हम लक्ष्यों को पाकर रहेंगे।”

उल्लेखनीय है कि ये चार दिन के युद्ध विराम के बाद और बेंजामिन नेतन्याहू की बातें सुनकर ऐसा लगता है जैसे बंधकों की अदला-बदली का काम पूरा होने के बाद हमास आतंकियों के खिलाफ इजरायल अपनी लड़ाई जारी रखेगा। उन्होंने पहले भी कहा था और अब भी इशारा किया है कि जब तक हमास है तब तक वो अपना युद्ध नहीं रोकेंगे।

पिछले 5 साल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ किसी भी टीम का सबसे बड़ा T20 स्कोर, भारतीय बल्लेबाजों ने जम कर की धुनाई: सीरीज में 2-0 से आगे टीम इंडिया

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच चल रही 5 T20 मैचों की सीरीज का दूसरा मैच रविवार (26 नवंबर, 2023) को तिरुवनंतपुरम स्थित ‘ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल स्टेडियम’ में खेला गया, जिसमें भारत ने ऑस्ट्रेलिया को 44 रनों से हरा दिया। ऑस्ट्रेलिया ने टॉस जीत कर गेंदबाज़ी का निर्णय लिया, जो उसके लिए एकदम गलत साबित हुआ। भारतीय टीम ने सामूहिक प्रयास से 235 रनों का बड़ा स्कोर खड़ा कर दिया। सीन अबॉट और ग्लेन मैक्सवेल की इस मैच में जम कर पिटाई हुई।

जहाँ ग्लेन मैक्सवेल को मात्र 2 ओवर में 38 रन पड़े वहीं सीन अबॉट को मात्र 3 ओवर में 56 रन पीट दिया गया। नाथन एलिस 4 ओवर में 45 रन देकर 3 विकेट झटक कर सबसे सफल गेंदबाज रहे। भारत की तरफ से यशस्वी जायसवाल ने धूम-धड़का शुरुआत दी और मात्र 25 गेंदों मर 53 रन जड़ दिए। पारी के चौथे ओवर में उन्होंने सीन अबॉट को 3 चौके और 2 छक्के – यानी कुल 24 रन जड़ डाले। दूसरे छोर ने ऋतुराज गायकवाड़ ने 43 गेंदों पर 58 रनों की एंकरिंग वाली पारी खेली।

ईशान किशन ने तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए 32 गेंदों पर 3 चौकों और 4 छक्कों की मदद से 52 रनों की पारी खेली। इस तरह शीर्ष तीनों बल्लेबाजों ने फिफ्टी किया। कप्तान सूर्यकुमार यादव 10 गेंदों पर 19 रन बना कर चलते बने। इसके बाद उतरे फिनिशर रिंकू सिंह ने मात्र 9 गेंदों में 31 रनों की पारी खेल डाली। उन्होंने 4 चौके और 2 छक्के जड़े। वो तिलक वर्मा के साथ नाबाद रहे, जिन्होंने 2 गेंदों में एक छक्के की मदद से 7 रन बनाए। भारत की पारी शुरू हुई तो स्पिनर रवि बिश्नोई ने पारी के तीसरे ओवर में मैथ्यू शॉर्ट को आउट कर पवेलियन भेजा।

वहीं पिछले मैच में शतक बनाने वाले जॉस इंग्लिस को भी उन्होंने सस्ते में चलता किया। इसके लिए तिलक वर्मा ने एक चमत्कारी कैच लिया। अक्षर पटेल ने ग्लेन मैक्सवेल को चलता किया। 6 ओवर बाद स्कोर 53/3 था। 8वें ओवर में प्रसीध कृष्णा ने स्टीवन स्मिथ के रूप में चौथा विकेट झाड़ा। हालाँकि, इसके बाद टीम डेविड और मार्कस स्टॉइनिस ने डराने वाली पार्टनरशिप की। दोनों ने मात्र 22 गेंदों पर 50 रनों की पार्टनरशिप कर दी, 10वें ओवर में मुकेश कुमार को 22 रन पड़े।

वो तो भला हो कि टीम डेविड (37 रन, 22 गेंद) को रवि बिश्नोई ने और फिर मार्कस स्टॉइनिस (45 रन, 25 गेंद) को मुकेश कुमार ने पवेलियन भेज दिया। दोनों ने 81 रन साथ में जोड़ दिए थे। बिश्नोई ने 4 ओवर में 32 रन देकर 3 विकेट झटके। प्रसीध कृष्णा ने भी 3 विकेट झटके। अंत में मैथ्यू वेड ने ऑस्ट्रेलिया के लिए संघर्ष किया, और 23 गेंदों पर नाबाद 42 रन बनाए। लेकिन, वो टीम को जीत नहीं दिला सके। अंतिम ओवर में जीत के लिए 55 रन चाहिए थे, लेकिन 10 रन ही लगे और ऑस्ट्रेलिया 9 विकेट पर 191 ही बना सकी।

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