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SP भी सस्पेंड, साथ में 6 पुलिस अधिकारी भी: फ्लाईओवर पर PM मोदी का रुका काफिला और खड़े NSG कमांडो मामले में अब एक्शन

पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पंजाब यात्रा के दौरान उनकी सुरक्षा के उल्लंघन के मामले में सात पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। जिन अधिकारियों को निलंबित किया गया है, उनमें फिरोजपुर जिले के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक के अलावा दो डीएसपी रैंक के अधिकारी भी शामिल हैं।

मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने फिरोजपुर के तत्कालीन पुलिस प्रमुख और अब बठिंडा के एसपी गुरबिंदर सिंह को पहले निलंबित कर दिया गया था। 22 नवंबर 2023 के आदेश में कार्रवाई का सामना करने वालों में छह और पुलिसकर्मियों के नाम हैं।

राज्य सरकार के गृह विभाग के आदेश के अनुसार, डीएसपी रैंक के अधिकारी पारसन सिंह और जगदीश कुमार, इंस्पेक्टर जतिंदर सिंह और बलविंदर सिंह, सब-इंस्पेक्टर जसवंत सिंह और सहायक सब-इंस्पेक्टर रमेश कुमार को भी निलंबित कर दिया गया है।

आदेश में कहा गया है कि सभी सात पुलिसकर्मियों को पंजाब सिविल सेवा (दंड और अपील) नियम, 1970 के नियम 8 के तहत कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। इन नियमों के तहत दिए जाने वाले दंड में पदोन्नति रोकने से लेकर सेवा से बर्खास्तगी तक हो सकता है।

बता दें कि इससे पहले साल मार्च 2023 में पंजाब सरकार ने राज्य के तत्कालीन डीजीपी सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय, फिरोजपुर के तत्कालीन डीआईजी इन्द्रबीर सिंह, तत्कालीन एसएसपी हरमनदीप हंस के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने के आदेश दिए थे। 

प्रधानमंत्री की सुरक्षा में हुई चूक के मामले में केंद्र ने मार्च के पहले सप्ताह में पंजाब सरकार से कार्रवाई में हुई देरी को लेकर जवाब माँगा था। इसके बाद पंजाब सरकार हरकत में आई थी। सरकार ने पूर्व डीजीपी, पूर्व डीआईजी और एसएसपी के खिलाफ कार्रवाई का आदेश देने के अलावा कुछ अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया था।

इनमें तत्कालीन एडीजीपी लॉ एंड ऑर्डर नरेश अरोड़ा, तत्कालीन एडीजीपी साइबर क्राइम जी नागेश्वर राव, तत्कालीन आईजीपी पटियाला रेंज मुखविंदर सिंह, तत्कालीन आईजी काउंटर इंटेलिजेंस राकेश अग्रवाल, तत्कालीन डीआईजी फरीदकोट सुरजीत सिंह और मोगा के तत्कालीन एसएसपी चरणजीत सिंह का नाम शामिल थे।

इन सभी अधिकारियों को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी कर के पूछा गया था कि जाँच समिति की सिफारिश के अनुसार उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही क्यों नहीं शुरू की जानी चाहिए? बाद में इन अधिकारियों ने सरकार को अपने जवाब भेज दिए थे।

गौरतलब है कि इस मामले की जाँच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने रिटायर्ड जस्टिस इंदु मल्होत्रा की अगुवाई में 5 सदस्यों की एक समिति गठित की थी। इस समिति ने 6 महीने पहले ही अपनी जाँच रिपोर्ट पेश कर चुकी है। समिति ने अपनी रिपोर्ट में राज्य के तत्कालीन मुख्य सचिव अनिरुद्ध तिवारी, डीजीपी सिद्धार्थस चट्टोपाध्याय समेत अन्य अधिकारियों को पीएम की सुरक्षा में चूक के लिए जिम्मेदार ठहराया गया था।

दरअसल, 5 जनवरी 2022 को पीएम मोदी का विमान बठिंडा में लैंड हुआ था, जहाँ से उन्हें हैलीकॉप्टर से हुसैनीवाला स्थित ‘नेशनल मार्टियर्स मेमोरियल’ जाना था। वहाँ उन्हें ‘राष्ट्रीय शहीदी स्मारक’ में बलिदानी क्रांतिकारियों भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को श्रद्धांजलि अर्पित करनी थी।

बारिश और विजिबिलिटी कम होने के कारण उन्हें मौसम के ठीक होने के लिए 20 मिनट तक इंतजार करना पड़ा। जब मौसम ठीक नहीं हुआ तो निर्णय लिया गया कि सड़क मार्ग से ही प्रधानमंत्री हुसैनीवाला तक का सफर तय करेंगे। जब प्रधानमंत्री का काफिला एक फ्लाईओवर पर पहुँचा तो वहाँ पता चला कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने रास्ता जाम कर के रखा हुआ था।

हुसैनीवाला से 30 किलोमीटर दूर पीएम मोदी का काफिला फँसा रहा। लगभग 15-20 मिनट तक पीएम मोदी वहाँ फँसे रहे। यह प्रधानमंत्री की सुरक्षा में एक बड़ी सेंध था। सड़क मार्ग से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा दो घंटे में तय होनी थी, जिसके लिए पंजाब के पुलिस महानिरीक्षक (DGP) को ज़रूरी प्रबंधन करने के निर्देश दे दिए गए थे।

चिकन फ्राई के लिए पैसे नहीं दिए तो दर्जी शाहिद हुसैन ने बीवी को मार डाला, गर्दन में घोंप दी कैंची

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में शाहिद हुसैन नाम के व्यक्ति ने अपनी बीवी की कैंची घोंप कर हत्या कर दी। कत्ल की वजह चिकन फ्राई मँगाने पर न लाना और बाद में खुद खरीद कर खा लेना बताया जा रहा है। आरोपित पेशे से दर्जी का काम करता है। पुलिस ने शाहिद हुसैन को गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया है। मामले की जाँच और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है। घटना शनिवार (25 नवंबर, 2023) की है।

गाजियाबाद पुलिस के मुताबिक, यह मामला लोनी थाना क्षेत्र का है। यहाँ मकदूम हुसैन का 50 वर्षीय बेटा शाहिद प्रेम नगर के 100 फुटा रोड के पास रहता है। वह पेशे से टेलर है और अपने ही घर से कपड़े सिलने का काम करता है। इसके लिए उसने घर में ही 3 मशीनें लगवा रखी हैं। शाहिद की बेटियाँ भी अपने अब्बा के काम में हाथ बँटाती हैं। शाहिद ने अपनी बीवी नूर बानो से धागा आदि खरीदने के लिए 600 रुपए उधार ले रखे थे। घटना शनिवार की है। इस दिन शाहिद को लोअर सिलने के लिए किसी की तरफ से ऑर्डर मिला था।

शाहिद ने लोअर पजामा का ऑर्डर देने वालों से 2000 रुपए एडवांस ले कर उसी से अपनी बीवी का 600 रुपए उधार चुकता कर दिया था। थोड़ी देर बाद टेलर शाहिद को चिकन फ्राई खाने का मन हुआ तो उसने अपनी बीवी नूर बानो से फिर पैसों की माँग की। नूर बानो ने अपने शौहर को पैसे देने से इंकार कर दिया जिस पर दोनों के बीच वाद-विवाद हुआ। थोड़े समय बाद नूर बानो ने खुद ही चिकन फ्राई मँगवा लिया। हालाँकि, इसे नूर बानो के बच्चों ने खाने से मना कर दिया। इसी बात को ले कर एक बार फिर से शाहिद और नूर बानो में झगड़ा शुरू हो गया।

पुलिस के आगे अपना गुनाह कबूलते हुए शाहिद ने बताया कि झगड़े के दौरान दोनों के बीच गाली-गलौज भी हुई। इसी के चलते शाहिद को गुस्सा आ गया। उसने घर में रखी कैंची को अपनी बीवी की गर्दन में घोंप दिया। घायल नूर बानो जब तड़पने लगी वो शाहिद मौके से फरार हो गया। नूर बानो के बेटे ने अपनी माँ को दिल्ली के GTB अस्पताल में भर्ती करवाया लेकिन वहाँ पीड़िता की मौत हो गई। पुलिस ने 25 नवंबर को ही शाहिद को खोज निकला और जरूरी कानूनी कार्रवाई के बाद उसे जेल भी दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मृतका के बेटों अरसलान और शाहनवाज ने अपने अब्बा पर घटना की रात शराब पी कर घर आने का आरोप लगाया है। साथ ही बताया कि उनकी अम्मी इस आदत से काफी परेशान भी रहती थीं।

तिरंगे से खूबसूरत कफ़न नहीं होता… 26/11 को हिन्दू आतंक साबित करने की थी साजिश: पूर्व क्रिकेटर वेंकटेश प्रसाद ने तुकाराम ओंबले के बलिदान को किया नमन

मुंबई में 26 नवंबर, 2008 को हुए आतंकी हमलों 15 साल हो गए हैं। मुंबई में ताज होटल, लियोपोल्ड कैफ़े, छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, ओबेरॉय ट्रिडेंट, कामा हॉस्पिटल, नरीमन हाउस, मेट्रो सिनेमा और सेंट जेवियर्स कॉलेज को निशाना बनाया गया था। इस हमले में 165 निर्दोष मारे गए थे और 9 आतंकियों को भी सुरक्षा बलों ने मार गिराया था। अब पूर्व क्रिकेटर वेंकटेश प्रसाद ने याद किया है कि कैसे इस हमले के सहारे हिन्दुओं को बदनाम करने की साजिश रच ली गई थी।

उन्होंने एक वीडियो को आगे बढ़ाते हुए ये टिप्पणी की। ये वीडियो बलिदानी कॉन्स्टेबल तुकाराम ओंबले को याद करते हुए अभिषेक नाम के यूजर ने शेयर किया था। वीडियो में एक पुलिस अधिकारी उनके बलिदान पर बात कर रहे हैं। इसमें वो कह रहे हैं, “आपने देखा होगा 55 वर्ष के एक ASI ओंबले अजमल कसाब से भिड़ जाते हैं, एक लाठी के साथ। 5 गोलियाँ पेट में लेते हैं। उसको पकड़ते हैं तो पकड़ ढीली नहीं होने देते हैं। ये है मुंबई पुलिस की साहस, ये है उनकी प्रतिबद्धता।”

पुलिस अधिकारी आगे ‘तिरंगे से खूबसूरत कफ़न नहीं होता’ वाली शायरी भी पढ़ते हैं। वीडियो में एक अन्य पुलिस अधिकारी बताते हैं कि कैसे अगर तुकाराम ओंबले ने सारीय गोलियाँ अपने ऊपर नहीं ली होतीं तो आज हम नहीं होते। वेंकटेश प्रसाद ने इस वीडियो पर टिप्पणी करते हुए कहा कि 15 वर्ष पहले एक साजिश नाकाम हो गई, एक ऐसी साजिश जिसके तहत एक भयानक आतंकी हमले को ‘हिन्दू आतंक’ साबित करना था। उन्होंने तुकाराम ओंबले के अद्वितीय साहस और धैर्य को नमन किया।

वेंकटेश प्रसाद ने याद किया कि कैसे तुकाराम ओंबले ने अपना बलिदान देकर कई जानें बचाईं। याद दिला दें कि गिरफ्तारी के बाद ही मालूम चला था कि पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई और आतंकी संगठन लश्कर ए तैयबा चाहते थे कि अजमल बतौर समीर चौधरी मरे। ताकि दुनिया हिंदुओं पर ऊँगली उठाए और इस पूरे हमले को भगवा आतंक करार दिया जा सके। अपने इसी इरादे को पूरा करने के लिए उस रात मुंबई में घुसने वाले दसों आतंकियों की कलाई पर भगवा और लाल रंग का कलावा बाँधा गया था। जिससे उनके हिंदू प्रतीत होने में कोई संदेह न रह जाए।

राकेश मारिया ने अपनी आत्मकथा लेट मी से इट नाउ (Let Me Say It Now) में मुंबई में 26/11 को हुए आतंकी हमले में एकमात्र जिंदा गिरफ्तार किए गए आतंकी अजमल कसाब को लेकर बड़े खुलासे किए थे। राकेश मारिया ने अपनी किताब में दावा किया है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने 26/11 हमले को हिंदू आतंकवाद का जामा पहनाने की भी कोशिश की थी। 10 हमलावरों को हिंदू साबित करने के लिए उनके साथ फर्जी आईकार्ड भेजे गए थे। कसाब के पास भी एक ऐसा ही आईकार्ड मिला था, जिस पर समीर चौधरी लिखा हुआ था।

26/11 बलिदानियों को श्रद्धांजलि, संविधान से लेकर शादी पर बात: PM मोदी ने ‘वोकल फॉर लोकल’ पर कहा- इस बार हुआ ₹4 लाख करोड़ का कारोबार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज (26 नवंबर 2023) मन की बात के 107 वें एपिसोड को संबोधित किया। इस एपिसोड की शुरुआत में पहले उन्होंने 26/11 के बलिदानियों को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद संविधान दिवस की देश को बधाई देते हुए इस बात पर खुशी जताई कि आजकल लोग स्वदेशी सामान खरीदने में उत्साह दिखा रहे हैं।

उन्होंने कहा, “आज 26 नवंबर की तारीख है, जिसे कभी भूला नहीं जा सकता है। आज के दिन ही हमारे देश पर सबसे जघन्य आतंकी हमला हुआ। आतंकियों ने मुंबई समेत पूरे देश को हिला दिया था। ये भारत का सामर्थ्य है कि हम उस हमले से उबरे और आज आतंक को कुचल रहे हैं।”

आगे पीएम मोदी ने संविधान दिवस की बधाई देते हुए इससे जुड़े फैक्ट्स बताए और जानकारी दी कि कैसे संविधान को अंतिम रूप देने से पहले उसमें 2000 से ज्यादा संशोधन किए गए थे। इसके अलावा अब तक सभी सरकारों ने अपने हिसाब से 106 बार संशोधन किया है।

उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य की बात ये है कि संविधान का पहला संशोधन ‘बोलने की आजादी’ और ‘अभिव्यक्ति की आजादी’ में कटौती करने के लिए हुआ था। इसी तरह 44वें संशोधन के जरिए आपातकाल के समय हुई गलतियों को सुधारा गया था। वह बोले कि ये भी बड़ी प्रेरक बात है कि संविधान सभा के कुछ सदस्य मनोनीत किए गए थे, जिसमें से 15 महिलाएँ थीं।

पीएम ने इस बात पर खुशी जताई कि पिछले महीने जो उन्होंने मन की बात वोकल फॉर लोकल होने पर जोर दिया था उसका असर दीवाली पर देखने को मिला। नतीजतन बीते कुछ दिनों के भीतर ही दिवाली, भैया दूज और छठ पर देश में चार लाख करोड़ से ज्यादा का कारोबार हुआ है। और इस दौरान भारत में बने उत्पादों को खरीदने का जबरदस्त उत्साह लोगों में देखा गया। वह बोले कि आजकल घर के बच्चे भी दुकान पर खरीदते समय यह देखते हैं कि उसपर मेड इन इंडिया लिखा है या नहीं।

इसके बाद पीएम मोदी ने इस मन की बात में एक विषय जो उठाया वो विदेश जाकर शादी करने का है। उन्होंने कहा कि विदेशों में जाकर शादी करने का जो नया ट्रेंड बन रहा है क्या वो जरूरी है। भारत की मिट्टी, यहाँ के लोगों के बीच अगर शादियाँ होंगी तो देश का पैसा देश में रहेगा। देश के लोग ही सेवा करेंगे। छोटे-छोटे गरीब लोग भी अपने बच्चों को शादी की बातें बताएँगे।

पीएम ने देश में बढ़ रही डिजिटल पेमेंट की माँग को भी सराहा। इसके साथ उन्होंने देश के युवाओं के इंटेलिजेंस, आइडिया और इनोवेशन पर लोगों का ध्यान केंद्रित कराया और कहा कि 2022 में भारत के पेटेंट आवेदन में 31 फीसदी से ज्यादा बढ़ोतरी हुई है। पीएम ने मन की बात में ‘जल सुरक्षा’ पर चर्चा की और कहा जल संरक्षण करना जीवन को बचाने से कम नहीं है।

प्रधानमंत्री ने ‘मन की बात’ में झारखण्ड, ओडिशा और बंगाल के जन-जातीय इलाकों में एक बहुत प्रसिद्ध नृत्य छऊ का जिक्र किया। और फिर तमिलनाडु के कोयम्बटूर में रहने वाले लोगानाथन का जिक्र किया और बताया कि कैसे वो बचपन में गरीब बच्चों के फटे कपड़ों को देखकर वे अक्सर परेशान हो जाते थे। इसके बाद उन्होंने ऐसे बच्चों की मदद का प्रण लिया और अपनी कमाई का एक हिस्सा इन्हें दान देना शुरू कर दिया। जब पैसे की कमी पड़ी तो लोगानाथन जी ने Toilets तक साफ़ किए, ताकि जरूरतमंद बच्चों की मदद हो सके।

20 साल पहले भी CM गहलोत को जनता ने मतदान प्रतिशत बढ़ा सत्ता से किया था बेदखल, इस बार भी बढ़ा है वोटिंग %… खिलेगा कमल!

राजस्थान में 199 सीटों के लिए शनिवार (25 नवंबर 2023) को मतदान हो गया। हालाँकि, एक सीट पर कॉन्ग्रेस प्रत्याशी की मौत के बाद इस सीट पर बाद में चुनाव कराया जाएगा। इस बार राज्य में कुल 74.96 प्रतिशत मतदान हुआ। इसमें से 0.83 प्रतिशत वोटिंग डाक मतपत्रों के जरिए हुई। इस बार का मतदान पिछले विधानसभा चुनावों के मतदान से लगभग 1 प्रतिशत अधिक हुई है।

साल 2018 के विधानसभा चुनावों में राजस्थान में 74.06 प्रतिशत वोटिंग हुई थी। पिछली बार की तुलना में इस बार हुई अधिक मतदान, क्या राज्य में सरकार परिवर्तन का संकेत है, इसको लेकर चुनाव विशेषज्ञ और तमाम लोग चर्चा कर रहे हैं। दरअसल, अंतिम रैली में भी पीएम मोदी ने राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए लोगों से अधिक-से-अधिक संख्या में मतदान करने के लिए कहा था।

अगर राजस्थान में पुरानी सरकारों पर नजर डालें तो पता चलता है कि वहाँ हर पाँच साल में जनता सरकार को बदल देती है। अगर भाजपा की सरकार है तो अगली बार कॉन्ग्रेस की सरकार आती है और अगर कॉन्ग्रेस की सरकार है तो अगली बार भाजपा की सरकार आती है। अगर मानकर चला जाए कि यह ट्रेंड इस बार भी जारी रहता है तो राज्य में भाजपा की सरकार बनने की गुंजाइश दिखाई देती है।

इससे अलग हटकर अगर वोटिंग ट्रेंड पर नजर डालें तो एंटी इंकम्बैंसी (सत्ता विरोधी लहर) की स्थिति में वोटिंग प्रतिशत में वृद्धि देखने को मिलती है। इस बार भी वोटिंग प्रतिशत में वृद्धि सत्ताधारी कॉन्ग्रेस के लिए चिंता का विषय है। इसके पीछे कई कारण भी हैं। राज्य की अशोक गहलोत की सरकार भले आम लोगों की भलाई की बात करें, लेकिन उनके शासनकाल में भ्रष्टाचार, परीक्षा प्रश्न पत्र का आउट हो जाना, महिलाओं के खिलाफ अपराध में वृद्धि जैसे तमाम मसले रहे हैं, जिससे राज्य सरकार के खिलाफ जनता में आक्रोश दिखा था।

‘लाल डायरी’ जैसे आरोप, जिसमें पार्टी के शीर्ष नेताओं तक को कठघरे में खड़ा किया गया है, ने भी जनता को चिंतन पर मजबूर किया है। इससे अलग, पार्टी में ही अंदरुनी फूट भी एक बड़ा कारण हैं। सीएम अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच खींचतान जैसे कारण पार्टी के प्रदर्शन पर सीधा प्रभाव डाले हो सकते हैं।

पिछले 20 सालों के चुनाव नतीजों को गौर करें तो पाएँगे कि जब-जब मतदान प्रतिशत में गिरावट आई है, तब-तब कॉन्ग्रेस फायदा पहुँचा है। वहीं, मतदान प्रतिशत में वृद्धि का लाभ भाजपा को मिला है। हालाँकि, ये ट्रेंड जारी रहता है या टूटता है, इसका पता 3 दिसंबर को मतगणना के दिन पता चल जाएगा।

अगर साल 1998 के चुनावी नतीजों को देखें तो उस समय लगभग 63.40 प्रतिशत मतदान हुआ था। इसके बाद कॉन्ग्रेस की सरकार बनी थी और अशोक गहलोत पहली बार मुख्यमंत्री बने थे। उसके ठीक बाद साल 2003 के चुनाव में मतदान प्रतिशत बढ़कर 67.18 प्रतिशत हुआ। इसका सीधा फायदा भाजपा को मिला और उसकी सरकार बनी।

साल 2008 के विधानसभा चुनावों में फिर वोटिंग पर्सेंट गिरकर 66.25 प्रतिशत रह गया और फिर से कॉन्ग्रेस की सरकार बनी। साल 2013 के विधानसभा चुनावों में 75 प्रतिशत मतदान हुआ और भाजपा को सत्ता मिली। इस दौरान भाजपा को 167 सीटें मिलीं और कॉन्ग्रेस को सिर्फ 21 सीटें मिलीं।

इसी तरह साल 2018 के विधानसभा चुनावों में 0.98 प्रतिशत कम वोटिंग हुई और 74.06 प्रतिशत मतदान के कारण कॉन्ग्रेस की सरकार बनी। इस बार कॉन्ग्रेस को 92 सीटें मिलीं। इस बार भी मतदान प्रतिशत में पिछली बार के मुकाबले 0.90 प्रतिशत अधिक वोटिंग हुई है और भाजपा की सरकार बनने की आशा व्यक्त की जा रही है।

हालाँकि, अशोक गहलोत इसे कॉन्ग्रेस के पक्ष में वोटिंग बता रहे हैं, जबकि भाजपा दावा कर रही है कि इस बार राजस्थान में उसकी सरकार बनेगी। देखना है कि दोनों प्रमुख पार्टियों में से किसके दावे इस बार सही होते हैं। इस बार के चुनाव में शामिल कुल 5.25 करोड़ मतदाता 1863 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे।

भारत के पास दुनिया का चौथा सबसे बड़ा विदेशी मुद्रा भंडार, एक सप्ताह में हुई 5 बिलियन डॉलर (41657 करोड़ रुपए) की बढ़त

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार पिछले एक सप्ताह में 5 बिलियन डॉलर (लगभग 41,657 करोड़ रुपए) से अधिक बढ़ कर 595.4 बिलियन डॉलर (लगभग 49,60,560 करोड़ रुपए) हो गया है। यह बीते लगभग 3 महीने में सबसे ऊँचा स्तर है। भारत के पास दुनिया का चौथा सबसे बड़ा विदेशी मुद्रा भंडार है। बीते चार माह में विदेशी मुद्रा भंडार में यह सबसे बड़ी बढ़त है। इससे पहले के सप्ताह में यह लगभग 462 मिलियन डॉलर घट गया था।

यह जानकारी भारतीय रिज़र्व बैंक ने दी है। भारत से अधिक विदेशी मुद्रा भंडार केवल चीन, जापान और स्विटज़रलैंड के पास हैं। चीन के पास 3.1 ट्रिलियन डॉलर जबकि जापान के पास 1.1 ट्रिलियन डॉलर के विदेशी मुद्रा भंडार हैं। स्विटज़रलैंड के पास 809 बिलियन डॉलर से अधिक के भंडार हैं।

विदेशी मुद्रा भंडार का मजबूत स्थिति में होना उसकी बढ़ती अर्थव्यस्था को दिखाते हैं। जिन देशों की अर्थव्यवस्था गड़बड़ होती है, वह अधिकांश समय विदेशी मुद्रा भंडार की कमी से जूझ रहे होते हैं, पड़ोसी देश पाकिस्तान इसका एक उदाहरण है।

क्या होता है विदेशी मुद्रा भंडार?

विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश या उसके केन्द्रीय बैंक के पास संचित ऐसी धनराशि होती है, जिसका उपयोग कर वह विदेशों में अपनी खरीददारी का भुगतान कर सके। किसी भी राष्ट्र का विदेशी मुद्रा भंडार उसकी आर्थिक स्थिति को प्रदर्शित करता है।

इसमें कमी आने पर विदेशों को किए जाने वाले भुगतान में समस्या आती है, जिससे अर्थव्यवस्था बिगड़ जाती है। इसका हालिया उदाहरण पाकिस्तान और श्रीलंका हैं। भारत के साथ ऐसी स्थिति वर्ष 1991 में हुई थी, जब देश का सोना गिरवी रखना पड़ा था।

भारत के विदेशी मुद्रा भंडार के 4 कंपोनेंट – विदेशी मुद्रा, सोना, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स और IMF में रिज़र्व पोजीशन होते हैं। इनमें सबसे मुख्य दूसरे देशों की मुद्रा का रिज़र्व है। इसके अंतर्गत भारत डॉलर, यूरो, पाउंड और येन जैसी करेंसी संचित करता है। इसमें भी सबसे प्रमुख अमेरिकी डॉलर है।

भारत के पास वर्तमान में 526 बिलियन डॉलर मुद्रा भंडार है, जबकि 46 बिलियन डॉलर का सोना है। स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स के अंतर्गत भारत के पास 18 बिलियन डॉलर हैं। भारत जब चाहे इन्हें उपयोग में ला सकता है। रिजर्व पोजीशन, IMF के पास जमा देश का पैसा होता है।

अक्टूबर 2021 में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार अपने सर्वकालिक उच्च स्तर 645 बिलियन डॉलर पर पहुँचा था। इसके पश्चात फरवरी 2022 में यूक्रेन-रूस युद्ध चालू होने के कारण डॉलर मजबूत हुआ, जिससे भारत का विदेशी मुद्रा भंडार कम हो गया। कच्चे तेल के महँगे होने का असर भी इस पर पड़ा।

इस विदेशी मुद्रा भंडार का उपयोग व्यापार के अतिरिक्त, देश की मुद्रा को स्थिर करने में भी किया जाता है। यदि रुपया अधिक कमजोर हो रहा है तो रिजर्व बैंक अपने रिज़र्व से डॉलर बाजार में बेच कर उसकी कीमत को स्थिर रखती है।

विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने का सबसे बड़ा माध्यम विदेशों से व्यापार होता है। भारत, कच्चे तेल का आयातक होने के कारण बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा देता है। जो देश आयात पर अत्यधिक निर्भर होते हैं, उन्हें विदेशी मुद्रा भंडार की समस्याएँ बनी रहती हैं।

जिस कुत्ते को बचाने में चली गई बाइकर की जान, अब वो ‘पश्चताप’ करने उसके घर पहुँचा: माँ की गोद में सिर रख जताया दुख, देखें Video

पालतू कुत्तों की वफादारी की कई कहानियाँ आपने अक्सर सुनीं होंगी लेकिन सड़क पर घूमने वाले आवारा कुत्ते में भी कितने इमोशन्स होते हैं ये समझने के लिए एक कर्नाटक की घटना के बारे में जानना बेहद जरूरी है।

कर्नाटक के दावणगेरे में पिछले दिनों एक आवारा कुत्ते की जान बचाने के चक्कर में तीपेश नाम के लड़के ने अपनी जान गवा दी थी। जवान लड़के के चले जाने से घर में मातम का माहौल था। ऐसे में नाते-रिश्तेदारों का घर आ आकर सांत्वना देना एक आम बात थी। लेकिन इन सबके बीच उसी कुत्ते का घर आना लोगों को चौंका गया जिसे बचाते हुए तीपेश की जान गई थी।

सोचिए ये कितना अचंभित करने वाला होगा कि एक सड़क पर घूमने वाला कुत्ता कई किलोमीटर दूर से चलकर उसी तीपेश के घर आ पहुँचा, जिसने उसकी जान बचाई थी। तीपेश की माँ तो बताती हैं कि वो कुत्ता उनके घर पर तभी से आने की कोशिश कर रहा था जब से उनके बेटे का अंतिम संस्कार हुआ था, मगर इलाके के कुत्ते उसे भगा दे रहे थे।

आखिर में कुछ दिन बाद वही कुत्ता अचानक तीपेश के घर आ पहुँचा और जाकर सीधे तीपेश की माँ यशोदम्मा की गोद में अपना सिर रख दिया। घरवालों को जरा देर भी नहीं लगी समझने में कि किस तरह वो कुत्ता उनके बेटे की मौत पर दुख जताने के लिए इतनी दूर से उनके घर आया है और ऐसी हरकत करके वो बताने की कोशिश कर रहा है कि उसे भी बहुत दुख है तीपेश के जाने का।

रिपोर्ट्स की मानें तो रिश्तेदारों का कहना है कि कुत्ता करीब 8 किलोमीटर तक चलने के बाद तीपेश के घर पहुँचा था। उसने उसी वाहन का पीछा करके घर का पता लगाया था जिसमें तीपेश के शव को लाया गया। अंतिम संस्कार के वक्त भी वो कुत्ता आसपास ही था और हैरानी तो सबको तब हुई जब वो 3 दिन बाद घर में घुसकर सीधे तीपेश की माँ के पास जाकर बैठ गया।

तिपेश के घरवालों का कहना है कि वो कुत्ते से नाराज नहीं है। हादसे में उन्होंने अपना बेटा-भाई खोया है। इसमें उस कुत्ते की क्या गलती। आज वो कुत्ता अपने व्यवहार के चलते तीपेश के घरवालों के साथ ही रहता है। हर मीडिया अखबार में उसकी चर्चा हो रही है।

सिंगर निकिता गाँधी की कन्सर्ट में भगदड़, 4 की मौत और 65 घायल: जानिए कोचीन यूनिवर्सिटी में भगदड़ में क्या हुआ था, कहाँ थी पुलिस

केरल के कोचीन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (CUSAT) में आयोजित वार्षिक कार्यक्रम में शनिवार (25 नवंबर 2023) को भगदड़ से चार लोगों की मौत हो गई। वहीं, इसमें 65 से अधिक लोग घायल हो गए हैं, जिनमें से कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है। केरल की सरकार ने जाँच के आदेश दे दिए हैं।

दरअसल, कोचीन यूनिवर्सिटी में हर साल तीन दिवसीय फेस्ट ‘दिशना’ का आयोजन किया जा रहा था। फेस्ट के दूसरे दिन यानी शनिवार (25 नवंबर 2023) को प्रसिद्ध प्लेबैक सिंगर निकिता गाँधी का कन्सर्ट रखा गया था। इसको लेकर भारी संख्या में भीड़ जुटी थी। हालाँकि, बाहरी एंट्री प्रतिबंधित थी, इसके बावजूद हजारों की संख्या में छात्र-छात्राएँ थीं।

इस कन्सर्ट का आयोजन खुले ऑडिटोरियम में किया गया था। इसके एक बिल्कुल बगल में कैंटीन और स्टूडेंट एमिनिटी सेंटर है। इसमें बुलाए गए लोगों की एंट्री के लिए शाम 5:30 बजे गेट खोल दिया गया। प्रवेश 7:30 बजे तक निर्धारित किया गया था। आमंत्रित किए गए लोगों का आना लगातार जारी था। इसमें बिना पास वाले लोग भी शामिल थे।

ओपन ऑडिटोरियम भरा हुआ था, लेकिन भीड़ को उचित तरीके से मैनेज नहीं किया जा रहा था। पूअर क्राउड मैनेज के बीच लगभग सात बजे अचानक बारिश शुरू हो गई। इसके बाद खुले में इकट्ठा हुए लोग इनडोर ऑडिटोरियम की ओर भागने लगे। इस दौरान ऑडिटोरियम की सीढ़ियों पर कुछ लोग लड़खड़ाकर गिर पड़े और फिर भगदड़ मच गई।

ये भी कहा जा रहा है कि वहाँ पर प्रवेश और निकास के लिए एक ही गेट का उपयोग किया जा रहा था। नगर निगम पार्षद प्रमोद ने कहा, “एक ही गेट से निकास और प्रवेश के कारण भगदड़ मच गई। इस दौरान जो लोग अंदर घुसने की कोशिश कर रहे थे, उन्होंने गिरे हुए लोगों को रौंद दिया।”

हालाँकि, अब तक ये साफ नहीं हो पाया कि वहाँ पर भीड़ को मैनेज करने के लिए केरल पुलिस मौजूद थी या नहीं। अगर पुलिस मौजूद थी तो कितने पुलिस वाले थे और वे उस दौरान भीड़ को मैनेज करने में सफल क्यों नहीं हो पाए। वहीं, यूनिवर्सिटी के वीसी पीजी शंकरन का कहना है कि इस इवेंट के बारे में पुलिस को सूचित कर दिया गया था।

उन्होंने कहा कि कोच्चि में इंडियन सुपर लीग के केरला ब्लास्टर गेम का भी आयोजन किया जा रहा था। इस कारण से अधिकांश पुलिसकर्मी जवाहरलाल स्टेडियम इंटरनेशनल स्टेडियम में और उसके आसपास व्यस्त थे। वहीं, पुलिस के एक सीनियर अधिकारी का दावा है कि जिस वक्त भगदड़ हुई, उस वक्त ऑडिटोरियम का एक हिस्सा ही भरा था।

मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि इस आयोजन में भीड़ को नियंत्रित करने का काम पुलिस नहीं, बल्कि खुद छात्र-छात्राओं द्वारा किया जा रहा था। ये छात्र-छात्राएँ इवेंट के ऑर्गनाइजर थे। इसमें पुलिस की कहीं भूमिका नहीं दिखी।

वीसी शंकरन का कहना है कि 2000 लोगों की क्षमता वाले इस ऑडिटोरियम में संस्थान के 2500 छात्र-छात्राएँ मौजूद थे। इसके अलावा स्थानीय लोग और नजदीकी कॉलेजों के स्टूडेंट्स भी घटना के वक्त मौजूद थे। वहीं, इनडोर ऑडिटोरियम में घटना के वक्त लगभग 800 लोग मौजूद थे। इसलिए पुलिस का यह दावा कि ऑडिटोरियम का एक हिस्सा भी भरा था, प्रभावी नजर नहीं आ रहा।

इस घटना में जिन चार लोगों की मौत हुई है, उनकी पहचान कर ली गई है। इनके नाम- अतुल थांबी, अन रुफ्ता, सारा थॉमस है। ये सभी CUSAT में सेकेंड ईयर के स्टूडेंट थे। वहीं, चौथे व्यक्ति की पहचान पलक्कड़ के अल्विन जोसेफ के रूप में हुई है। अल्विन इस विश्वविद्यालय में नहीं पढ़ता था।

केरल सरकार ने घटना की जाँच के आदेश दे दिए हैं। एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया है कि राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री आर बिंदू ने उच्च शिक्षा के प्रमुख सचिव और कोचीन विश्वविद्यालय के कुलपति एवं रजिस्ट्रार सहित तीन सदस्यीय टीम का गठन किया है। यह टीम भगदड़ की घटना की जाँच करके रिपोर्ट सौंपेगी।

इस घटना पर निकिता गाँधी ने भी दुख व्यक्त किया। एक फेसबुक पोस्ट में उन्होंने कहा, “यह घटना परफॉर्मेंस के लिए कार्यक्रम स्थल के लिए मेरे रवाना होने से पहले ही घट गई। इस गहन दुःख को व्यक्त करने के लिए संभवतः कोई भी शब्द पर्याप्त नहीं हैं। मेरी प्रार्थनाएँ छात्रों के परिवारों के साथ हैं।”

17 बंधकों की ‘घरवापसी’: इस्लामी आतंकी हमास औकात में आया, कर रहा था आनाकानी – इजरायल को मिली तीसरी सूची

इस्लामी आतंकी संगठन हमास की कैद से 17 बंधक शनिवार (25 नवम्बर 2023) को रिहा किए गए। इजरायल ने भी जेलों में बंद 39 फिलिस्तीनियों को छोड़ा। दोनों के बीच यह अदला-बदली 4 दिवसीय सीजफायर के तहत हुई है। इससे पहले शुक्रवार को 13 बंधक छोड़े गए थे।

हमास की तरफ से छोड़े जाने वाले बंधकों में 4 थाईलैंड के छात्र भी हैं, जिन्हें 7 अक्टूबर 2023 के हमले के दौरान इजरायल के भीतर से बंधक बनाया गया था। हमास की कैद से छोड़े जाने वाले बंधकों में बच्चे और महिलाएँ हैं। उनकी अपने परिवार से मिलने की तस्वीरें और वीडियो सामने आ रही हैं।

गौरतलब है कि 7 अक्टूबर 2023 को इस्लामी आतंकी संगठन हमास ने इजरायल पर गाजा के भीतर से हमला कर दिया था। इस हमले में हमास ने 230 से अधिक लोगों को बंधक बना लिया था और 1,200 से अधिक लोगों को मार दिया था। इसके जवाब में इजरायल ने भी गाजा पर कब्जे के लिए सैन्य अभियान चला दिया है।

लगभग 7 सप्ताह की लड़ाई के बाद हाल ही में क़तर और मिस्र की मध्यस्तता से इजरायल और हमास के बीच 4 दिन के लिए सीजफायर समझौता हुआ है। इजरायल इस दौरान 150 फिलिस्तीनी कैदियों को रिहा करेगा जबकि हमास अपनी कैद से 50 बंधकों को छोड़ेगा। सीजफायर के आगे बढ़ने की आशाएँ व्यक्त की गई हैं।

हमास द्वारा छोड़े गए बंधक रेडक्रॉस द्वारा इजरायल लाए गए हैं। इजरायल को आगे छोड़े जाने वाले बंधकों की तीसरी सूची मिल गई है। इन्हें आज रविवार (26 नवम्बर 2023) को छोड़ा जाएगा। इन बंधकों के परिवार वालों को इसकी सूचना दे दी गई है।

हमास की कैद से मुक्त होने वाले 17 व्यक्तियों में 8 बच्चे हैं। इनमें 4 ऐसी महिलाएँ हैं, जिनके छोटे बच्चे हैं। 1 युवती को भी रिहा किया गया है। इनमें 13 इजरायली नागरिक हैं। इसके अलावा 4 थाई नागरिक हैं, जिनके विषय में थाईलैंड के प्रधानमंत्री ने जानकारी दी है।

अब तक कुल 26 इजरायली नागरिक हमास की कैद से छोड़े जा चुके हैं। शुक्रवार को भी इन इजरायली नागरिकों के अलावा 10 थाई नागरिक और 1 फिलिपीन्स के नागरिक को छोड़ा गया था। हमास लगभग एक दर्जन नागरिकों को हर दिन छोड़ेगा, ऐसी उम्मीद की जा रही है।

हमास पहले तय हुई शर्तों के बाद भी बंधक छोड़ने में आनाकानी कर रहा है। शनिवार को उसने इजरायली बंधकों को तय समय पर छोड़ने में देरी की। उसने उत्तरी गाजा में सहायता वाले ट्रकों के पहुँचने पर बंधकों को छोड़ने की बात की। हालाँकि बाद में बंधकों को छोड़ दिया गया।

हमास द्वारा छोड़े गए बंधकों में ऐसे भी हैं, जिनके परिवार के लोग हमास द्वारा मार दिए गए हैं। छूटने वाले बंधकों में अधिकांश किब्बुत्ज़ बेरी इलाके के है, जहाँ हमास ने नरसंहार किया था। अभी हमास की कैद से छूटने वाले बंधकों में महिलाएँ और बच्चे हैं।

इजरायल द्वारा छोड़े जाने वाले फिलिस्तीनी छोटे-मोटे आरोपों में जेल में बंद थे। अधिकांश इनमें से इजरायली सुरक्षा बलों पर हमला करने के आरोपित हैं। एक फिलिस्तीनी महिला को भी छोड़ा गया है, जिसने एक कार में बम विस्फोट किया था।

अभी इजरायल और हमास के बीच समझौते का एक दिन बचा हुआ है। मध्यस्थता कर रहा कतर चाहता है कि यह आगे बढ़ जाए। इजरायल का कहना है कि प्रत्येक 10 बंधकों को छोड़ने पर वह अपनी सैन्य कार्रवाई को एक-एक दिन के लिए रोकता जाएगा। अभी भी हमास की कैद में लगभग 150 से अधिक बंधक हैं।

खाई में गिरी कार, अंदर फँसे लोग… मोहम्मद शमी ने ‘हीरो’ बनकर जान बचाई, लोग बोले- एक ही दिल है कितनी बार जीतोगे भाई

क्रिकेट विश्व कप 2023 के दौरान शानदार गेंदबाजी की वजह से हमेशा चर्चा में रहने वाले मोहम्मद शमी ने इंस्टा पर एक वीडियो शेयर की है। 31 सेकेंट इस वीडियो में वह खाई में कार सहित गिरे एक व्यक्ति की जान बचाते नजर आ रहे हैं।

उन्होंने वीडियो के साथ कैप्शन में बताया कि उन लोगों के सामने ये हादसा हुआ जिसके बाद उन्होंने कार में बैठे शख्स को सुरक्षित बचा लिया। उन्होंने लिखा- “ये लोग बहुत सौभाग्य वाले हैं कि भगवान ने इन्हें दूसरा जीवन दिया। इनकी कार मेरी कार के सामने ही नैनीताल में हिल रोड से गिर गई थी। हमने इन्हें सुरक्षित बचाया।”

इसके अलावा उन्होंने वीडियो के पर भी लिखा- “मैं बहुत खुश हूँ कि मैंने किसी की जान बचाई।”

इस वीडियो को देखने के बाद शमी के फैन उनके और दीवाने हो गए। लोगों ने उन्हें रियल लाइफ हीरो कहा।

एक यूजर ने लिखा- दुर्लभ दृश्य कि शमी किसी की विकेट बचा रहे हैं।

कुछ यूजर्स ने लिखा- भाई एक ही दिल है कितनी बार जीतोगे।

आरती सोनी ने कहा- आज मैं शमी साहब की कर्जदार हो गई हूँ बेटा। जब तक जिऊँगी आपकी अहसानमंद रहूँगी।

सोनाली ने कहा, “पिच पर भारतीय टीम को बचाया और यहाँ भारतीय नागरिक को।”

बता दें कि एक तरफ शानदार गेंदबाजी के कारण चर्चा में रहे मोहम्मद शमी वर्ल्ड कप के बाद छुट्टियों पर हैं तो वहीं उनकी पत्नी इंस्टा पर एक्टिव हैं। हाल में उन्होंने एक रील डाली जिसमें उनकी बीवी हसीन जहाँ ने अपनी वीडियो के पीछे ऑडियो लगाई जिसमें कहा जा रहा था- “मैं वो शहजादी हूँ जो महलों में नहीं अपने पति के दिल में राज करती हूँ।”

इस ऑडियो में हसीन जहाँ की वीडियो देखने के बाद लोगों ने अंदाजा लगाया कि शायद हसीन दोबारा से शमी के पास लौटना चाहती हैं। हालाँकि, कैप्शन में हसीन ने लिखा है कि भले ही नफरत से राज करती हूँ पर राज करती हूँ।