Home Blog Page 1361

21 साल की लड़की को 31 टुकड़ों में काटा, फिर नमक डाल दफना दिया: ओडिशा पुलिस ने एक कपल को हिरासत में लिया

ओडिशा के में पिछले चार दिनों से लापता एक युवती की 31 टुकड़ों में कटी लाश मिली है। नवरंगपुर जिले में अंजाम की गई इस वारदात में युवती की लाश को दफना दिया गया था। इसके साथ ही लाश जल्दी गल जाए, इसके लिए उस पर नमक भी डाल दिया गया था। पुलिस ने शक के आधार पर एक दंपति को गिरफ्तार किया है।

मामला नवरंगपुर जिला के राईघर थाना अंतर्गत बाघबेड़ा गाँव का है। युवती बुधवार (22 नवंबर 2023) से ही अपने घर से लापता थी। परिजनों का कहना है कि लड़की उनसे स्थानीय बाजार में जाने की बात कहकर घर से निकली थी। देर शाम तक भी जब वह नहीं लौटी तो परिजनों को चिंता होने लगी।

घर से लापता हुई 21 साल की तिलावती गोंड के घर-परिवार वालों ने उसे कई जगह खोजा, लेकिन वह नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने थाने में इसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। लड़की के पिता लुडुराम गोंड की शिकायत के आधार पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया और आगे की कार्रवाई शुरू कर दी।

मामला दर्ज होने के बाद पुलिस युवती की खोजबीन में जुट गई। इसी दौरान शनिवार (25 नवंबर 2023) की सुबह पुलिस को मुरुमडिही गाँव के पास स्थित जंगल में हाल ही में दफनाए गए एक शव का पता चला। पुलिस ने साइंटिफिक टीम को बुलाकर दफनाए गए शव की जाँच की तो वहाँ 31 टुकड़े बरामद हुए।

शव को बेरहमी से टुकड़ों में काटा गया था और उसमें नमक डालकर जंगल में दफना दिया था। पुलिस ने इस शव की स्थानीय लोगों से पहचान करवाई। इसके बाद शव की पहचान लापता युवती के रुप में हुई। पुलिस ने घटनास्थल से एक कटारी भी जब्त की है। शायद इसी से शव को काटा गया था।

इस मामले में जाँच को आगे बढ़ाने के बाद पुलिस ने संदेह के आधार पर एक दंपत्ति को हिरासत में लिया है। इस मामले में पापड़ाहांडी के सीडीपीओ आदित्य सेन ने बताया कि सच्चाई का पता लगाने के लिए पुलिस संदिग्ध दंपती से गहन पूछताछ कर रही है। अभी तक हत्या के कारणों का पता नहीं चला है।

हालाँकि, इस संबंध में एक स्थानीय ग्रामीण ने बताया, “चंद्र राउत नाम के एक व्यक्ति और उसकी पत्नी ने गुरुवार (23 नवंबर) की रात को तिलावती की हत्या कर दी। लड़की चंद्र से प्यार करती थी और उसे पत्नी के रूप में स्वीकार करने के लिए दबाव डालती थी। वह आदमी शादीशुदा था, इसलिए वह नजरअंदाज करना शुरू कर दिया।”

उसने आगे बताया, “उस दुर्भाग्यपूर्ण दिन वह चंद्र के घर आई और उसके साथ रहने की जिद करने लगी। दंपति ने उससे छुटकारा पाने के लिए उसकी हत्या कर दी और आसानी से फेंकने के लिए उसके शरीर के टुकड़े कर दिए।” ग्रामीण ने दोषियों को ऐसी सजा देने की माँग की कि लोग ऐसी वारदात करने से पहले सोचे।

राजस्थान में 68% मतदान के साथ संपन्न हुआ चुनाव: कहीं गोलीबारी तो कहीं हुई पत्थरबाजी, हमले में पुलिसकर्मी भी हुए घायल

क्षेत्रफल के हिसाब से भारत के सबसे बड़े राज्य राजस्थान में शनिवार (25 नवंबर, 2023) को विधानसभा चुनाव के मतदान संपन्न हुआ। शाम 5 बजे तक राजस्थान में 68% मतदान हुआ। वहाँ मुख्य मुकाबला सत्ताधारी कॉन्ग्रेस पार्टी और मुख्य विपक्षी दल भाजपा के बीच में है। सीकर, धौलपुर और डीग क्षेत्रों में पत्थरबाजी और हिंसा की वारदातें हुईं। सीकर में 7 लोगों को हिरासत में लिया गया है। CAPF (सेंटर आर्म्ड पुलिस फोर्सेज) टीमों को वहाँ तैनात किया गया है।

हालाँकि, पुलिस स्थिति के नियंत्रण में होने का दावा कर रही है। उधर धौलपुर में भी पत्थरबाजी हुई लेकिन गोलीबारी की नौबत नहीं आने पाई। कुछ व्यक्तिगत गाड़ियाँ क्षतिग्रस्त हुई हैं, लेकिन बारी जिले के डीएम ने मतदान बूथों के सुरक्षित होने का दावा किया है। प्रशासन का कहना है कि स्थिति शांतिपूर्ण है। डीग के कामन इलाके के साँवलेर इलाके में एक पुलिसकर्मी सहित 2 लोग जख्मी हुए हैं। डीग में भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को 12 राउंड गोलीबारी करनी पड़ी।

कुछ मिनटों के लिए मतदान में भी व्यवधान आया। जहाँ पाली जिले में एक पोलिंग एजेंट की वहीं उदयपुर में एक उम्मीदवार की ही कार्डियक अरेस्ट की वजह से मौत हो गई। 199 विधानसभा क्षेत्रों में लगभग 51,000 बूथों पर मतदान संपन्न हुआ। सुबह के 7 बजे मतदान शुरू हुआ, वहीं शाम के 6 बजे ये खत्म हो गया। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा है कि भाजपा प्रचंड बहुतमत से राजस्थान की सत्ता में आ रही है।

सीकर जिले के फतेहपुर में बीजेपी और कांग्रेस के समर्थक आमने-सामने हो गए। हंगामा करते हुए लोगों ने पथराव किया। लक्ष्मणगढ में एक पोलिंग बूथ पर पुलिसकर्मी ने टोका तो बीजेपी प्रत्याशी पुलिस से भिड़ गए। प्रत्याशी सुभाष महरिया और पुलिस के बीच झड़प हुई। जयपुर के पास कोटपूतली विधानसभा क्षेत्र में एक प्रत्याशी के समर्थकों और पुलिस में झड़प हो गई। भरतपुर जिले के कामां में भी फर्जी वोटिंग की शिकायत सामने आई।

बेटियाँ जो ब्याही जाएँ मुड़ती नहीं हैं… : काश! हर लड़की की किस्मत अमिताभ बच्चन की बेटी श्वेता नंदा जैसी होती और मिल पाता इसका जवाब

सदी के महानायक अमिताभ बच्चन ने अपनी जायदाद का सबसे खास बंगला ‘प्रतीक्षा’ बेटी श्वेता बच्चन नंदा के नाम किया कर दिया है। इस बंगले की डील साइन करने के लिए उन्होंने 8 नवंबर, 2023 को 50.65 लाख रुपए रजिस्ट्रेशन और स्टैंप ड्यूटी के दिए और बंगला श्वेता का हो गया।

पर्दे के एंग्री मैन का ये कदम अपने पीछे कई सवाल छोड़कर गया है। मसलन दुनिया में ऐसी कितनी बेटियाँ होती हैं जिन्हें श्वेता जैसी किस्मत नसीब होती हैं और कितने ऐसे पिता हैं जो ऐसी सोच रखते हैं या फिर ऐसा कदम उठाते है जो ये दिखाती है कि बेटा और बेटी केवल और केवल संतान हैं।

एक जेंडर के तौर पर वो अपने बच्चों में हर तरह की समानता के पक्षधर होते हैं जिसमें अचल संपत्ति भी शामिल होती है। शायद इस सवाल का जवाब हमारे समाज में हमेशा ही पूरी ईमानदारी से नहीं दिया गया या फिर उसकी कोशिश ही नहीं की जाती, क्योंकि इसका एहसास मुझे शायद 3-4 साल की उम्र में ही बहुत शिद्दत के साथ हो गया था।

मेरे दिमाग में ये सवाल 70 के दशक से ही घूमता रहा कि क्यों मेरी आमा यानी दादी अपने पिता के घर में हमेशा नहीं रह सकती? मसला ये था कि मेरे दादा जी लोहाघाट जो अब उत्तराखंड के चंपावत जिले में पड़ता है के एक गाँव के थे। वो बचपन में अनाथ हो गए।

उनकी एक दीदी थी जिनकी शादी हुई और वो अपने ससुराल चली गईं। उनके मामा उन्हें अल्मोड़ा ले आए। शादी मेरी दादी से हुई थी और घर बार न होने की वजह से उनके ससुर यानी मेरी दादी के पिता ने उन्हें अपना घर रहने को दिया। आमा कहती थी कि उनके बोज्यू यानी पिता कहते थे,”रेबा तू यहीं रहना।”

इसी घर में मैं भी पैदा हुई। मेरे पैदा होने तक आमा के बोज्यू स्वर्ग सिधार गए थे। लेकिन जब से मैंने होश संभाला तो उस घर में रहने के दौरान हर वक्त ये जताया जाता कि जैसे हमें वहाँ रहने देने से आमा के भाई और उनका परिवार हम पर कोई एहसान कर रहे हों।

मुझे भी होश संभालने के बाद हर पल एहसानों के इस बोझ का एहसास हमेशा होता रहा। रहते तो हम आमा के पिता के घर में थे, लेकिन उनके भाई के परिवार के रवैये से हर वक्त ऐसा एहसास होता रहता कि जैसे हम किराए के घर में हैं, जबकि मेरी आमा भी उसी पिता की संतान थी जिनके उनके भाई थे।

इससे बालमन पर ऐसा असर पड़ा कि मैं सोचा करती कि मैं कभी शादी नहीं करूँगी। मुझे लगता था कि शादी के बाद लड़कियाँ पिता के घर में वैसे नहीं रह पाती जैसे शादी से पहले रहती थी। आमा से अक्सर पूछा करती थी कि आमा ये तो आपके पिता का घर फिर क्यों आप यहाँ नहीं रह सकती जब आपके पिता आपको यहाँ रहने को कह गए हैं।

आमा का हर वक्त यही जवाब होता, “रूचूलि ब्याह के बाद लड़कियाँ मायके में नहीं रहती ससुराल ही उनका घर होता है।” खैर इस बात को तीन दशक हो गए। हमारा अपना घर भी मेरे पापा-चाचा ने बना लिया और हम आमा के पिता का घर छोड़कर अपने घर आ गए, लेकिन पापा की अप्रैल 2020 में मौत के बाद ये सवाल फिर से मेरे आगे आकर खड़ा हो गया।

हालाँकि, हम चार बहनें हैं हमारा चाचा का बेटा है, लेकिन घरवालों की सोच चेलियाँ (बेटियाँ) तो ब्याह के चली गई। अब उनका ससुराल ही उनका घर है उन्हें मायके की अचल संपत्ति की क्या जरूरत। मेरी सास भी कहती हैं कि शादी में बेटियों का हिस्सा दे दिया जाता है।

क्या वो हिस्सा ऐसा होता है कि कोई होनी-अनहोनी होने पर एक पंछी लंबी उड़ान की तरह बेटी अपने उस आरामदायक घोसले में उसी आराम से रह पाएँ। कुछ अपवादों को छोड़ दें तो हम सब जानते हैं कि अमूमन ऐसा नहीं हो पाता।

लेकिन मेरी समझ में आजतक ये बात नहीं आई कि कैसे जिस घर में बचपन, जवानी गुजारी वो शादी के बाद बेगाना क्यों हो जाता है? क्यों बेटियाँ शादी के बाद मेहमान बन जाती हैं?

क्यों बेटियाँ पिता के घर और संपत्ति में बराबर की हिस्सेदार नहीं हो सकती? ये समाज का दबाव है या सोच जो हमें पिता की संपत्ति पर पुरजोर हक जताने से रोकती है।

हर पिता अक्सर फक्र से कहते हैं कि मेरी बेटी मेरा अभिमान, लेकिन बेटी के शादी के बाद ये अभिमान पराया क्यों हो जाता है। क्यों बेटी पर इतना नैतिक दवाब होता है कि अपने ही पिता के घर में शादी के बाद चार दिन से अधिक रह लें तो आस-पड़ोस की नाते-रिश्तेदारों की नजरें ऐतराज जताने लगती हैं, सवाल करने लगती है।

क्यों शादी के बाद मायके की संपत्ति सदा के लिए भाई के लिए छोड़ जाने का नैतिक दबाव बेटियों को ही झेलना होता है? कहते हैं न कि समाज जैसा होता है सिनेमा उसका ही प्रतिबिंब होता है।

तभी तो आए दिन फिल्मों में ‘बेटियाँ जो ब्याही जाएँ मुड़ती नहीं हैं… बाबा मैं तेरी मलिका, टुकड़ा हूँ तेरे दिल का, एक बार फिर से दहलीज़ पार करा दे, बाबुल का ये घर गोरी कुछ दिन का ठिकाना है, भैया तेरे अँगना की, मैं हूँ ऐसी चिड़िया रे, रात भर बसेरा है, सुबह उड़ जाना है’ जैसे गाने सुनाई पड़ते हैं।

हर कोई जैसे मान के बैठा हो कि शादी के बाद बेटी के लिए पिता का घर उसका अपना नहीं था। बस कुछ दिन का ही ठिकाना था। कितने माँ और पिताओं को इतनी हिम्मत होती है कि वो खुलेआम अपनी जायदाद बेटा और बेटी में बराबर बाँट सकें।

इसका खुलेआम ऐलान कर सकें जैसे कि अमिताभ बच्चन ने ये साल 2017 में ट्वीट कर किया था, “जब मैं मरूँगा, जो भी जायदाद मैं अपने पीछे इस दुनिया में छोड़कर जाऊँगा वो मेरे बेटे और बेटी के बीच बराबर बाँटा जाएगा, क्योंकि हम एक हैं।”

मैं यहाँ अमिताभ बच्चन का महिमा मंडन नहीं कर रही, लेकिन उन्होंने बेटा-बेटी को एक समझने की बात केवल हवा में नहीं कही। उसे साबित करके भी दिखाया। वहीं कितने भाईयों में ये जिगरा होता है कि वो अभिषेक बच्चन की तरह अपने पिता के बेटी को जाददाद देने का फैसला बगैर किसी नाखुशी के मंजूर कर पाएँ। ये मान पाएँ कि उनकी बहन केवल लड़की नहीं बल्कि उन्ही जैसी उनकी एक इंसान है।

शायद ऐसे माँ-पिता और भाई समाज में अँगुलियों पर गिनने लायक ही हों, क्योंकि बहन-बेटियों की सोशल कडिशनिंग ही समाज में ऐसे की जाती है कि वो दिल-दिमाग से ये मानने लगती हैं कि उन्हें पिता की जायदाद में क्योंकर हिस्सा चाहिए बस भाई का परिवार चलना चाहिए, फिर भले ही वो लाख मुश्किलों का सामना कर ससुराल में रह रही हों या भयकंर आर्थिक तंगी झेल रही हों।

लड़कियों के जायदाद के मामले में मैंने इतने साल में बस यही बदलाव देखा कि भले ही बहन-बेटियाँ पिता की जायदाद पर हक न जता सकें, लेकिन वो अपने पिता के सरनेम पर पूरा हक जताती हैं। जैसे कि मैं पूरे हक से लिखती हूँ- ‘रचना वर्मा बंजारा’ दरअसल ‘बंजारा’ मेरे पिता का तखल्लुस है जिससे वो अपनी साहित्यिक रचनाओं और अपनी बनाई कलाकृतियों और पेंटिंग में दर्ज किया करते थे और वर्मा उनका सरनेम था।

लेकिन ये बदलाव हकीकत में हो तो बात बनें जब लड़कियों, बहन, बेटियों को बगैर कहें, बगैर किसी कानूनी दाँव-पेंच के उनके पिता की जायदाद में ही नहीं बल्कि समाज में एक इंसान की तरह लिया जाए। न कि उनके जेंडर के आधार पर उनको तोला जाएँ।

दुनिया मान लें कि एक इंसान के तौर पर उनकी भी आर्थिक और अन्य तरह कि जरूरतें हो सकती हैं। तब कहीं जाकर हमें ये नहीं कहना पड़ेगा, फसलें जो काटी जाएँ, उगती नहीं हैं, बेटियाँ जो ब्याही जाएँ, मुड़ती नहीं हैं…’

आज़ाद रियाजुद्दीन ने भगवान गणेश पर की अपमानजनक टिप्पणी, फेसबुक पर कर डाली आपत्तिजनक पोस्ट: कोर्ट ने सुनाई 3 साल की सज़ा

वलसाड की एक अदालत ने फेसबुक पर भगवान गणेश के बारे में अभद्र टिप्पणी करने के आरोप में एक मुस्लिम युवक को 3 साल जेल की सजा सुनाई है। यह मामला पाँच साल पुराना है। इस मामले में आजाद रियाजुद्दीन अंसारी नाम के युवक ने 2018 में गणेशोत्सव के दौरान फेसबुक पर एक अभद्र पोस्ट डालकर भगवान गणेश का अपमान किया था। मामले में शिकायत दर्ज होने के बाद वलसाड में ही मामला दर्ज किया गया था। वहीं अब इस मामले में फैसला आ गया है। 

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अपराधी आजाद रियाजुद्दीन अंसारी वलसाड के शालीमार अपार्टमेंट का रहने वाला है। 34 वर्षीय आज़ाद ने 17 सितंबर, 2018 को सोशल मीडिया पर भगवान गणेश की एक अपमानजनक तस्वीर साझा की। फोटो के साथ, उसने भगवान गणेश के बारे में आपत्तिजनक और अभद्र टिप्पणी की। दरअसल, रियाजुद्दीन ने ‘गणेशजी की पूजा करता कुत्ता’ जैसे कैप्शन के साथ भगवान गणेश की मूर्ति को चाटते हुए एक कुत्ते की एडिटेड तस्वीर साझा की थी।

आज़ाद अंसारी के इस हरकत से स्थानीय हिंदू समाज और संगठनों की धार्मिक भावनाएँ आहत हुईं। जब भगवान के अपमान की घटना की जानकारी वलसाड शहर में गौरक्षकों बकुल राजगोर, हेमंत खेरनार और संगठन के अन्य कार्यकर्ताओं को हुई तो वे उसकी दुकान पर पहुँचे और विरोध दर्ज कराया।

बताया जा रहा है कि इस दौरान आक्रोशित हिंदुओं ने अपराधी आजाद रियाजुद्दीन अंसारी को जूते की माला पहनाई और जुलूस निकाला। लेकिन, ये मामला ऐसे ही नहीं सुलझ गया। बाद में आजाद अंसारी के खिलाफ भगवान गणेश का अपमान करने के आरोप में पुलिस स्टेशन में शिकायत भी दर्ज कराई गई।

पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज होने के बाद, वलसाड सिटी पुलिस ने 18 सितंबर, 2018 को आईपीसी की धारा 153 (ए), 295 (ए), 114 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 के तहत अंसारी को गिरफ्तार कर लिया।

फिर मामला वलसाड की अतिरिक्त मजिस्ट्रेट कोर्ट में गया, जहाँ जाँच के दौरान कोर्ट में अंसारी की हरकतें साबित हो गईं. बहस के अंत में अदालत ने पुलिस की शिकायत, गवाहों और सबूतों पर विचार करते हुए आरोपित को दोषी ठहराया।

गौरतलब है कि 5 साल की अदालती कार्रवाई के बाद, वलसाड की अतिरिक्त न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत ने अंततः अंसारी को सीआरपीसी की धारा 248 (2) और आईपीसी की धारा 153 (ए), 295 (ए) और आईटी अधिनियम की धारा 67 के तहत दोषी ठहराया और अंसारी को 3 साल की सजा सुनाई। कोर्ट ने अंसारी  पर 50 हजार का जुर्माना भी लगाया है। बता दें कि कोर्ट के आदेश की प्रति ऑपइंडिया के पास उपलब्ध है।

‘बिग बॉस का घर छोड़ो, जाकर कमरा ले लो…’ : ईशा-समर्थ की ‘चुम्माचाटी’ पर सेलीब्रिटी भी भड़के, नेटीजन्स बोले- ये शो फैमिली के साथ नहीं देख सकते

‘बिग बॉस 17’ के घर में आए दिन कोई न कोई विवाद खड़ा होता रहता है। अभी ताजा विवाद ईशा मालवीय और समर्थ जुरेल के कोजी मोमेंट को लेकर भड़का है। खुलेआम चुम्माचाटी और लपक-झपक जैसे दृश्यों के कारण बिग बॉस को पारिवारिक शो मानने वालों को गहरा झटका लगा है। वहीं चैनेल जमकर उस वीडियो को प्रमोट कर रहा है जिसमें ईशा और समर्थ के विवादस्पद दृश्य हैं।

सोशल मीडिया पर भी ईशा मालवीय और समर्थ जुरेल के क्लिप पर बवाल हो रहा है। दरअसल, दोनों का एक वीडियो क्लिप वायरल हुई है, जिसमें दिखाया गया है कि समर्थ ईशा को जबरन किस कर रहे थे, जबकि ईशा हँस रही थी और उन्हें दूर धकेल रही थी। साथ ही दोनों का एक रजाई वाला मोमेंट भी सामने आया है। जिसमें दोनों कम्बल के अंदर ऐसी हरकते कर रहे हैं जिस पर लोग आपत्ति जता रहे हैं।

इसी वीडियो पर अब ‘बिग बॉस’ का हिस्सा रह चुकी एक्ट्रेस काम्या पंजाबी का भी रिएक्शन सामने आया है। वहीं सोशल मीडिया पर आम लोग भी आलोचना कर रहे हैं। 

ईशा-समर्थ के इसी वायरल वीडियो पर चिंता जताते हुए अधिवक्ता आशुतोष दुबे लिखते हैं, “पारिवारिक शो माने जाने वाले बिग बॉस भारत में युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हैं। हाल ही में, हमने 10वीं और 11वीं कक्षा के छात्रों को ट्रेन में बिग बॉस शो देखते देखा। इसका उन पर क्या प्रभाव पड़ेगा?”

वहीं एक्ट्रेस काम्या पंजाबी ईशा मालवीय और समर्थ जुरेल के कोजी मोमेंट्स को देखते हुए एक पोस्ट कर इसकी आलोचना की। ईशा-समर्थ की हरकतों को अश्लील बताते हुए काम्या ने लिखा, ”ईशा और समर्थ को धन्यवाद। अब मैं अपना पसंदीदा शो अपने परिवार के साथ नहीं देख सकती। कृपया हमें बख्श दें, इस घर को छोड़ दें और एक कमरा ले लें। शायद इसके बाद हम शो देख सकें और आप अपनी पसंदीदा हरकत कर सकें।”

कई यूजर्स ने भी अभिनेत्री के ट्वीट का रिप्लाई किया। एक यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा, “हाँ, बहुत अजीब हो गया था परिवार के साथ देखने में।”

वहीं दूसरे यूजर ने लिखा, ”निर्माता गाली को म्यूट कर सकते हैं और मुख्य एपिसोड के कई हिस्सों को एडिट कर सकते हैं, लेकिन वे अभी भी इन सीन्स को क्यों दिखा रहे हैं क्योंकि वे इसे टीआरपी के लिए दिखाना चाहते हैं।”

गौरतलब है कि समर्थ वाइल्डकार्ड एंट्री के तौर पर अपनी गर्लफ्रेंड के पीछे-पीछे घर में आ गए हैं। उन्हें अक्सर ईशा के साथ कोजी होते या किस करते हुए कैमरे में कैद किया जाता है। हाल ही में, एक और क्लिप वायरल हो रही है, जिसमें दिखाया गया कि समर्थ ईशा को जबरन किस कर रहे थे, जबकि ईशा हंस रही थी और उन्हें दूर धकेल रही थी।

मुस्लिम आरक्षण संविधान विरोधी…इसे खत्म कर देंगे: तेलंगाना में गृहमंत्री अमित शाह और CM योगी ने भरी हुंकार, कहा- पिछड़े वर्ग को रिजर्वेशन देंगे

तेलंगाना में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के ‘मिशन तेलंगाना’ में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘मुस्लिम आरक्षण’ पर अपना रुख साफ कर दिया है। शुक्रवार (24 नवंबर,2023) को चुनावी प्रचार करने पहुँचे गृहमंत्री शाह ने कहा कि अगर बीजेपी यहाँ सत्ता में आई तो वो मुस्लिम आरक्षण खत्म कर देगी। वहीं शनिवार (25 नवंबर,2023) को वहाँ पहुँचे सीएम योगी ने कुमुरम भीम आसिफाबाद की रैली में कहा कि मुस्लिम आरक्षण संविधान विरोधी है। किसी भी स्थिति में इसे लागू नहीं होने देना चाहिए।

दरअसल, केंद्रीय मंत्री शाह ने शुक्रवार (24 नवंबर 2023) को निजामाबाद में चुनावी जनसभा की। इसके बाद उन्होंने चुनावी राज्य तेलंगाना में रोड शो किए। इस दौरान एक रोड शो में केंद्रीय गृह मंत्री और भाजपा नेता शाह ने कहा, “हमने बहुत सारे वादे किए हैं। उनमें से एक ये है कि सीएम पिछड़ा वर्ग से बनाया जाएगा। हम मुस्लिम आरक्षण खत्म कर एससी, एसटी और ओबीसी को आरक्षण देंगे। हमने मडिगा समुदाय को शीर्ष आरक्षण का भी वादा किया है।”

उन्होंने आगे कहा, ”हमने राज्य की गरीब महिलाओं को एक साल में चार गैस सिलेंडर मुफ्त देने का भी वादा किया है। जितना भी भ्रष्टाचार हुआ है उस पर हम एक जाँच आयोग बिठाएँगे और भ्रष्टाचार के लिए जिम्मेदार लोगों को सजा देंगे।”

वहीं, शनिवार (25 नवंबर 2023) को सीएम योगी ने कुमुरम भीम आसिफाबाद और वेमुलावाड़ा में बीजेपी प्रत्याशियों के समर्थन में की गई रैली में कहा कि भाजपा मुस्लिम आरक्षण को खत्म करने और इस चार फीसदी आरक्षण को एससी/एसटी और ओबीसी वर्गों के कल्याण के लिए देने के लिए प्रतिबद्ध है। तेलंगाना के वेमुलावाड़ा में लोगों ने सकारात्मक बदलाव के वादे को पहचानते हुए बीजेपी को अपना समर्थन देने का वादा किया है।

उन्होंने आगे कहा, “तुष्टिकरण का सबसे गंदा खेल देखना हो तो तेलंगाना में देख सकते हैं। समाज को बाँटने के लिए और अपने स्वार्थ के लिए कोई सरकार किस हद तक गिर सकती है उदाहरण यहाँ पर मुस्लिम आरक्षण के रूप में हैं। इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी तेलंगानावासियों से एक वादा करती है कि भाजपा को जिताइए, मुस्लिम आरक्षण का खात्मा भारतीय जनता पार्टी करेगी।”

बता दें कि तेलंगाना में 119 विधानसभा क्षेत्रों के लिए 30 नवंबर को मतदान होगा और 3 दिसंबर को चुनाव के नतीजों का ऐलान होगा। इस राज्य में सत्तारूढ़ पार्टी बीआरएस, कॉन्ग्रेस और बीजेपी के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है। राज्य के कुल 3.17 करोड़ वोटर्स इन पार्टियों के भाग्य का फैसला करेंगे।

छोटे कपड़ों में बिस्तर पर लेट गई, हाथ-पैर हिला गंदे इशारे… बॉडी किसी का, चेहरा आलिया भट्ट का: डीपफेक का एक और हिरोइन बनी शिकार

पिछले दिनों कई बॉलीवुड अभिनेत्रियाँ DeepFake वीडियोज का शिकार बनीं थीं। इसी लिस्ट में अब आलिया भट्ट का नाम भी जुड़ गया है। हाल में उनका चेहरा इस्तेमाल करके एक अश्लील वीडियो बनाई गई। इस वीडियो में लड़की को अपने पैर और अपना शरीर हिलाकर गंदे इशारे करते देखा जा सकता है।

वीडियो में लड़की ने फ्लोरल प्रिंट वाली स्लीवलेस टॉप और शॉर्ट्स को पहना है। उसे क्लीवेज शो करते और बिस्तर पर हिलते वीडियो में देखा जा सकता है।

हालाँकि ये वीडियो देखने से ही फेक लग रही है। लेकिन फिर भी कुछ अंजान यूजर हो सकते हैं जो इसे सच समझ लें इसलिए जानना जरूरी है कि एआई जनरेटेड वीडियो में आलिया का चेहरा लगाया गया है जबकि बाकी वीडियो किसी और की है।

इस वीडियो को pauseshooter नाम के इंस्टा अकॉउंट ने अपने शेयर किया है। कैप्शन में लिख दिया गया है- ‘आलिया भट्ट मेक्स मी हॉर्नी’ इस अकॉउंट और भी अन्य महिलाओं की फोटो है।

बॉलीवुड एक्ट्रेस आलिया भट्ट के भी डीपफेक का शिकार होने से फिर से साइबर सिक्योरिटी का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है।

गौरतलब है कि सबसे पहले रश्मिका मंदाना का एक डीपफेक वीडियो सामने आया था। इस पर सबसे पहले अभिनेता अमिताभ बच्चन ने अपने ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर पोस्ट डालकर विरोध दर्ज करा कानूनी कार्रवाई की माँग उठाई थी।

तब सेंटर इलेक्ट्रॉनिक्स और टेक्नोलॉजी राज्यमंत्री राजीव चंद्रशेखर ने कहा था कि इस वीडियो को लेकर कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे सभी डिजिटल नागरिकों की सुरक्षा और भरोसे को कभी टूटने नहीं देगी।

हालाँकि, इसके बाद कटरीना कैफ, काजोल और सारा तेंदुलकर, टीवी एक्ट्रेस जन्नत जुबेर और अनुष्का सेन की भी डीपफेक वीडियो वायरल हुई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी डीपफेक पर फिक्र जताई थी।

इसके बाद IT मिनिस्टर अश्विनी वैष्णव डीपफेक पर 10 दिनों में कानून बनाने की बात कही। वहीं केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री राजीव चंद्रशेखर ने शुक्रवार (24 नवंबर, 2023) को डीपफेक की निगरानी के लिए एक अधिकारी को नियुक्त करने की बात कही। यह अधिकारी डीपफेक से जुड़े मामलों में FIR दर्ज कराने में आम लोगों की मदद करेगा।

डीपफेक है क्या

डीपफेक तकनीक से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल कर दो लोगों के चेहरे को आपस में बदला जाता है। हालाँकि इस काम में लंबा वक्त लगता है, क्योंकि जिस शख्स का चेहरा लगाना होता है उससे मिलते-जुलते हजारों फोटो वीडियो ‘एनकोडर’ नाम के एक AI प्रोग्राम पर चलाए जाते हैं।

इस तकनीक से दोनों चेहरों की बेहतरीन समानताओं को तलाशा जाता है। इसके बाद यह तकनीक इन चेहरों को सबसे बेस्ट समानता के आधार पर एक कंप्रेस्ड इमेज बनाती है। फिर इसके बाद AI तकनीक ‘डीकोडर’ से चेहरा तलाशने को कहा जाता है। तब कहीं जाकर डीपफेक वीडियो तैयार होती हैं।

दिव्य कपोल, मंद मुस्कान, नीले शरीर पर पीताम्बर… इंदिरा गाँधी को कर दिया था कभी आँख के लिए इनकार, अब स्वामी रामभद्राचार्य ने बताया भगवान राम का रूप

भगवान राम के स्वरुप को लेकर किसे जिज्ञासा नहीं होगी? हर कोई उस स्वरुप का निहारना चाहता होगा। भगवान राम के दिव्य स्वरुप पर मीडिया समूह आजतक के ‘साहित्य आजतक’ कार्यक्रम में शनिवार (25 नवंबर, 2023) के एक सेशन में वेद-वेदांत, शास्त्र मर्मज्ञ, राम मंदिर आंदोलन के पुरोधा जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य ने जनता के सामने अपने भाव प्रकट किए। 

इस कार्यक्रम में जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य ने राम मंदिर से चर्चा शुरू करते हुए कहा कि जनवरी में राम मंदिर का उद्घाटन होना है। इसे उन्होंने जीवन का सबसे महत्तम क्षण बताया। उन्होंने कहा कि उसी समय वे  75 साल के हो जाएँगे। उन्होंने राम मंदिर आंदोलन को मंच से याद करते हुए कहा, “1984 से अब तक राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़ा रहा और पुलिस के डंडे खाए। गवाही भी दी और हमको हमारी रामजन्म भूमि मिल गई।”

उन्होंने अपनी ख़ुशी जाहिर करते हुए कहा कि रामजन्म भूमि के इस आंदोलन के समय जब सभी पीछे हट गए थो तो उन्होंने कहा था, “मैंने भगवान राम का नमक खाया है मैं गवाही दूँगा।” लोगों ने कहा कि आपके पास आँखे नहीं हैं तो गवाही कैसे देंगे? ऐसे में उन्होंने कहा, “शास्त्र ही सबके नेत्र हैं जिसके पास शास्त्र नहीं वो अंधा है।”

इसलिए वह खुद को और उनके आस-पास के लोग कभी उन्हें अंधा नहीं मानते। हर कक्षा में 99 प्रतिशत अंक लाने वाले रामानंदाचार्य बिना आँखों के भी सब देख लेते हैं। क्योंकि शास्त्र को वह अपनी आँखें मानते हैं और वह तो उनकी जिह्वा से बहती है। जगद्गुरु रामानंदाचार्य ने इसी मंच से एक और घटना को याद करते हुए बताया कि एक बार तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने उनसे कहा था, “मैं आपकी आँखे ठीक करा सकती हूँ” तो उन्होंने बताया कि मैंने जवाब में कहा था, “मैं इस संसार को नहीं देखना चाहता हूँ।”

जो भीतर उतर गया हो, जिसने मन की आँखों से संसार को देखना सीख लिया हो वह अंतर्दृष्टि की ही बात करता है ऐसा उनके वक्तव्य से भी स्पष्ट होता है। 

जब उनसे पूछा गया- भगवान राम कैसे दिखते हैं?

‘साहित्य आजतक’ के इस कार्यक्रम में जब उनसे पूछा गया कि साधारण लोगों ने तो केवल तस्वीरें और मूर्तियाँ देखी हैं। आप बताएँ कि भगवान राम कैसे दिखते हैं? इसपर जगदगुरू स्वामी रामभद्राचार्य ने कहा, “मैंने भगवान राम को बहुत निकट से देखा है। मैं उन्हें रमणीकता से देखता हूँ, दिव्य कपोल, मंद मुस्कान, नीले शरीर पर पितांबर, मानो तिसी के फूल पर किसी ने सरसों का पराग लेप दिया हो।”

इसी मंच से उस घटना का भी उन्होंने जिक्र किया जब भगवान राम के बालस्वरूप ने उनका पथ-प्रदर्शन किया। उन्होंने उस घटना पर बात करते हुए कहा, “मैंने तो भगवान राम को देखा है। एक घटना बताता हूँ, कोई असत्य न समझे, मैं झूठ नहीं बोलता। उत्तर प्रदेश के उन्नाव में मेरी कथा थी तब टेंट में रहना पड़ता था। सुबह के समय सभी साथी काम में व्यस्त थे। तभी मैं लघुशंका को जाते हुए रास्ता भूल गया। वहाँ मैंने देखा कि 3 साल का बच्चा मुझे हाथ पकड़कर बाथरूम में ले गया और क्रिया संपन्न होने के बाद मुझे वापस लेकर आया। मैंने उसे पकड़ना चाहा तो वह पकड़ में नहीं आया। आज भी मैं उस राजाधिराज राम के चरणों में झुकना और उन्हें दुलारना चाहता हूँ।”

गाड़ी पर कंट्रोल न खोएँ, नहीं तो हो सकता है मोए-मोए… जानें भारत में क्यों वायरल है सर्बिया का ये गाना, दिल्ली पुलिस से लेकर इंस्टाग्राम तक पर रील्स की बाढ़

ट्विटर पर आज Moye-Moye गाना ट्रेंड पर है। लोग इस हैशटैग के अतर्गत अलग-अलग रील्स डाल रहे हैं। इनमें कुछ ओरिजनल कंटेंट हैं तो कुछ मीम आधारित। इस ट्रेंडिंग ऑडियो पर दिल्ली पुलिस ने भी एक वीडियो बनाई है। इसमें पुलिस ने एक बाइक स्टंट दिखाने वाली वीडियो शेयर की।

इस वीडियो को जनहित में जारी किया गया, लेकिन मजेदार ढंग से। दिल्ली पुलिस ने लिखा है- “गाड़ी पर कंट्रोल न खोएँ, नहीं तो हो सकता है मोए-मोए।”

बता दें कि ‘मोए-मोए’ गाने को तेया डोरा ने गाया है। इसका असली उच्चारण ‘मोजे मोर’ है। इसको तेरा ने सर्बियाई रैपर स्लोबोदान वेल्कोविक कोबी की मदद से लिखा है। म्यूजिक वीडियो को अब तक 57 लाख से अधिक व्यूज मिल चुके हैं। एल्बम का नाम Dzanum है जोकि दर्द भरे इमोशन के साथ गाया गया था। मगर टिकटॉक और इंस्टा पर आते ही इसे मजाकिया अंदाज में शेयर किया जाने लगा।

दिल्ली पुलिस की तरह सामान्य यूजर्स भी इस गाने पर ताबड़तोड़ रील्स बना रहे हैं। जैसे वर्ड कप के मुद्दे पर ये रील बहुत वायरल हो रही है।

एक जुदाई फिल्म की क्लिप शेयर करके दिखाया जा रहा है कि इंजीनियर से शादी करने पर क्या हो सकता है।

कुछ लोग ट्विटर पर मोए-मोए गाने के पीछे शोले फिल्म के गब्बर को भी लगा रही है और कह रहे हैं कि यहाँ से ये ट्रेंड शुरू हुआ था।

जिन्हें नहीं पता है उन्हें बता दें कि ‘मोए-मोए’ गाने पर आजकल एक ही तरह की रील्स डाली जा रही हैं जिसमें मजाकिया अंदाज में दिखाया जाता है कि दूसरे व्यक्ति के पास कोई अंग नहीं है और इसका दुख दिखाने के लिए लोग मोए-मोए गाने पर नाचने लगते हैं।

इस ट्रेंड का हिस्सा होने के लिए कुछ लोग अश्लील वीडियो भी बनाते हैं।

दलित किन्नर पर इस्लाम कबूलने का दबाव, इनकार करने पर पिटाई: पूजा-पाठ से नाराज मुस्लिम किन्नरों का है मेवात कनेक्शन

उत्तर प्रदेश के मुज़फ्फरनगर जिले में दलित समाज से ताल्लुक रखने वाली मुस्कान नाम की एक किन्नर पर धर्मान्तरण का दबाव डालने का मामला सामने आया है। मुस्कान ने शुक्रवार (24 नवंबर 2023) को कौशर अली और गुड्डू नाम के 3 अन्य किन्नरों के खिलाफ पुलिस में नामजद तहरीर दी। शिकायत में इस्लाम कबूल करने से इंकार करने पर पीड़िता की पिटाई का भी आरोप है।

मामला मुजफ्फरनगर जिले के मंसूरपुर थाना क्षेत्र का है। गाँव नावला की रहने वाली मुस्कान ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए कहा कि वह हिन्दू है और हमेशा से सनातन धर्म के मुताबिक जीवन गुजरती आ रही है। उसका कहना है कि पूजा-पाठ से कुछ मुस्लिम किन्नर नाराज रहा करते थे। इसमें प्रीति, कौशर अली और गुड्डू नाम प्रमुख हैं।

पीड़िता मुस्कान ने बताया कि कौशर अली लोगों को अपना नाम गीता बताता है। वहीं, प्रीति मुस्लिम और मूलतः बिहार की रहने वाली है, लेकिन उसने भी अपना हिंदू नाम रखा हुआ है। मुस्कान का दावा है कि प्रीति पहले पुरुष था और उसके 2 बच्चे भी हैं। बाद में वो ऑपरेशन कराकर किन्नर बन गया। वहीं, गुड्डू मेवात का रहने वाला है।

मुस्कान का यह भी दावा है कि पिछले कई वर्षों से उस पर आरोपितों द्वारा इस्लाम कबूलने का दबाव बनाया जा रहा है। जब उसने ऐसा करने से मना किया तो उसके साथ अत्याचार किया जाने लगा। अपनी शिकायत में पीड़िता ने कहा कि शुक्रवार को कौशर अली, गुड्डू और प्रीति ने अपने कई साथियों के साथ मिलकर पीड़िता पर जानलेवा हमला कर दिया।

इस हमले में पीड़िता को गंभीर चोटें भी आई। पीड़िता का दावा है कि डॉक्टरों ने उसके सिर में टाँके भी लगाए हैं। इसके अलावा, बेहतर इलाज के लिए उसे मेरठ शिफ्ट किया जा रहा है। मुस्कान का दावा है कि हमलवारों ने उसके सारे गहने और अन्य जरूरी सामान भी छीन लिए।

शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने जाँच शुरू कर दी है। अभी तक किसी गिरफ्तारी की सूचना नहीं है। ऑपइंडिया से बात करते हुए मुस्कान ने बताया कि आरोपित कौशर अली आपराधिक सोच वाला है और उस पर पहले से ही कई मामले दर्ज हैं।

दूसरे पक्ष ने भी मुस्कान किन्नर के खिलाफ मंसूरपुर थाने में शिकायत दर्ज करवाई है। वादी किन्नर प्रीती ने अपनी शिकायत में मुस्कान पर साथियों सहित अपनी पिटाई का आरोप लगाया है। इस मामले में पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है और जाँच कर रही है।

प्रीति के बारे में पीड़िता मुस्कान ने बताया कि वो बिहार से मुज़फ्फरनगर आकर किराए के मकान में रहता है और रोज रात को उसके घर पर असामाजिक तत्व शराब आदि पीने के लिए जुटते हैं। मुस्कान के मुताबिक, आरोपित उसके इलाके पर कब्ज़ा करने की फिराक में भी हैं।