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हमास को खत्म करने के लिए इजरायल को पाकिस्तान कर रहा 155 मिमी गोले की आपूर्ति: Pak मीडिया ने ही किया दावा, कहा- ‘खून से सने हैं इस्लामाबाद के हाथ’

हमास के आतंकी ढाँचे को खत्म करने के लिए इजरायली सेना को पाकिस्तान 155 मिमी के गोले की आपूर्ति कर रहा है। ऐसा दावा किया जा रहा है। ऐसे में यह घटनाक्रम इस दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण है कि पाकिस्तान लम्बे समय से फिलिस्तीन का समर्थक रहा है, यहाँ तक कि वह इजरायल के अस्तित्व से भी इनकार करता है।

दरअसल, पीपल टॉक शो नाम के पाकिस्तानी मीडिया संगठन के एक्स (ट्विटर) अकाउंट ने फ्लाइट-ट्रैकिंग डेटा का विश्लेषण करने के बाद यह दावा किया। यूजर ने दावा किया कि ब्रिटिश वायु सेना के एक विमान ने बहरीन से पाकिस्तान के रावलपिंडी में नूर खान बेस के लिए उड़ान भरी थी। बाद में, यह ओमान के माध्यम से साइप्रस में एक सहयोगी अड्डे पर पहुँच गया।

पीपल टॉक शो ने पोस्ट किया, ”पाकिस्तान इजरायल को 155 मिमी के गोले निर्यात कर रहा है। वैश्विक आपूर्ति की कमी के कारण इन हथियारों को इजरायल को निर्यात किया गया है। ब्रिटिश एयरफोर्स आरआरआर6664/5 ने बहरीन से रावलपिंडी पीएएफ नूर खान बेस तक, नूर खान बेस से बहरीन के लिए उड़ान भरी। इजरायल को आपूर्ति करने के लिए बहरीन से डुकम ओमान और डुकम ओमान से साइप्रस तक मित्र देशों के अड्डे तक इसे पहुँचाया गया।”

इसने पाकिस्तान के हाथ फिलिस्तीनी नागरिकों के खून से सने होने का आरोप लगाया। पोस्ट में कहा गया है, “फिलिस्तीनी नागरिकों और बच्चों का खून पाकिस्तानी सशस्त्र बलों के हाथ में है, इस्लामाबाद के हाथ में है।”

एक अन्य ट्वीट में, इसने एक लेख का लिंक संलग्न किया जिसमें अक्रोटिरी बेस पर वायु सेना के ट्रैफिक रूट को दिखाया गया है जो उनके दावे के समर्थन में भी है।

ब्रिटिश एयरफोर्स RRR6664/5 एक बोइंग C-17A ग्लोबमास्टर, एक सैन्य परिवहन विमान है। जबकि उड़ान ट्रैकिंग मैप दिखा रहा है कि रॉयल एयर फ़ोर्स का विमान पाकिस्तान में उतरा, हालाँकि, यह ज्ञात नहीं है कि ऐसे में यह दावा करने वाले ने कैसे निर्धारित किया कि विमान पर गोला-बारूद, विशेष रूप से 155 मिमी के गोले लोड किए गए थे।

गौरतलब है कि ब्रिटिश रॉयल एयर फोर्स का साइप्रस में अक्रोटिरी बेस एक अंतरराष्ट्रीय सैन्य केंद्र के रूप में सामने आया है। इसका इस्तेमाल हमास के खिलाफ युद्ध के बीच इजरायल को हथियार और गोला-बारूद की आपूर्ति करने के लिए किया जा रहा है। इजरायली अखबार हारेत्ज़ की रिपोर्ट के अनुसार, 40 से अधिक अमेरिकी परिवहन विमान, 20 ब्रिटिश परिवहन विमान और सात भारी परिवहन हेलीकॉप्टर उपकरण, हथियार और सेना का सामान लेकर साइप्रस में आरएएफ अक्रोटिरी बेस के लिए उड़ान भरी थी।

हारेत्ज़ रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि नेगेव रेगिस्तान के पास दक्षिणी इज़रायल में स्थित नेवातिम वायु सेना बेस पर उतरने वाले अमेरिकी विमानों ने इज़रायल की सेना के लिए हथियार पहुँचाएँ हैं। अमेरिकी विमान अन्य चीजों के अलावा बख्तरबंद वाहन लेकर तेल अवीव के बेन गुरियन हवाई अड्डे पर भी उतरे हैं।

इस रिपोर्ट को इस तथ्य से बल मिला कि पाकिस्तान जमीनी हमलों के लिए आवश्यक बुनियादी हथियारों का निर्माता है। सितंबर 2023 में, द इंटरसेप्ट रिपोर्ट में दावा किया गया था कि पाकिस्तान ने अमेरिका को गुप्त हथियार बेचने की साजिश रची, जिससे उसे अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से बहुप्रतीक्षित बेलआउट पैकेज हासिल करने में मदद मिली।

कथित तौर पर हथियारों की बिक्री का सौदा यूक्रेनी सेना को अन्य हथियारों के साथ 155 मिमी के गोले की आपूर्ति के लिए किया गया था। हालाँकि, इस्लामाबाद ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया था और दावा किया कि वह रूस-यूक्रेन युद्ध में तटस्थता की नीति बनाए हुए है।

हालाँकि, यूक्रेन को 155 मिमी के गोले से लैस करने की रिपोर्टों के समान ही पाकिस्तान ने उन दावों को भी खारिज कर दिया है कि वह इज़राइल को इजरायली सशस्त्र बलों के लिए जमीनी हमले के लिए आवश्यक गोला-बारूद की आपूर्ति कर रहा है।

इजरायल के प्रति पाकिस्तान का रुख

गौरतलब है कि पाकिस्तान दुनिया के उन कुछ देशों में से है जो इजरायल को एक देश के रूप में मान्यता नहीं देता है। 1947 में, इज़रायल के निर्माण के समय, पाकिस्तान ने फिलिस्तीन के लिए संयुक्त राष्ट्र विभाजन योजना के खिलाफ मतदान किया था।

फ़िलहाल, पाकिस्तान द्वारा इज़रायल को 155 मिमी के गोले की कथित आपूर्ति को भी पश्चिमी शक्तियों द्वारा किसी पिछले दरवाजे से हथियारों की सप्लाई के रूप में देखा जा रहा है।

‘न पुलिस ने किया गिरफ्तार, न यूनिवर्सिटी ने कोई कार्रवाई की’: BHU में हिंदू विरोधी नारेबाजी करने वाले अब तक आजाद, 17 पर हुई थी FIR

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में रविवार (5 नवंबर, 2023) को बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) के अंदर हिंदुत्व विरोधी और आज़ादी के नारे लगे थे। ABVP कार्यकर्ताओं का आरोप था कि जब उन्होंने नारेबाजी रोकने का प्रयास किया तब उन पर हमला किया गया। पुलिस ने इस मामले में कुल 17 नामजद सहित अन्य अज्ञात लोगों पर FIR दर्ज की है। आरोपित छात्र वामपंथी AISA (आइसा) से जुड़े बताए गए थे। ऑपइंडिया ने इस मामले में वर्तमान हालातों की जानकारी ली।

नारेबाजी को चीफ प्रॉक्टर ने भी स्वीकारा

इस मामले में BHU के चीफ प्रॉक्टर शिव प्रकाश सिंह का भी बयान मीडिया में आया है। उनका कहना है कि धरना देने वालों में AISA के साथ NSUI से जुड़े छात्र भी थे। चीफ प्रॉक्टर ने आगे बताया कि AISA द्वारा पुतला दहन के बाद हालात खराब हुए। पुतला दहन के ही बीच सुरक्षा गार्डों ने AISA कार्यकर्ताओं को रोकने का प्रयास किया जिसके जवाब में उन्होंने अभद्रता और नारेबाजी की। AISA की इस करतूत का ABVP ने विरोध किया और मारपीट हो गई। बकौल शिव प्रकाश सिंह शाम को NSUI के छात्रों ने भी धरना दिया था लेकिन समझाने पर वो वापस चले गए थे।

छुट्टियाँ खत्म होते ही आंदोलन को देंगे धार

ऑपइंडिया ने इस मामले में ABVP के वाराणसी पदाधिकारी अभय प्रताप सिंह से बात की। अभय प्रताप ने हमें बताया कि इस बीच में दीपावली की छुट्टियाँ पड़ गईं जिसके चलते BHU कैम्पस अधिकतर बंद रहा। इस दौरान वामपंथियों के हमले की शिकार ABVP की छात्राएँ बेहतर देखभाल और छठ पूजा आदि के लिए अपने घर भी चली गईं हैं। बकौल अभय प्रताप कैम्पस फिर से खुलने और पीड़िताओं के वापस आने के बाद आरोपित वामपंथियों पर कार्रवाई के लिए आंदोलन को फिर से धार दी जाएगी।

यूनिवर्सिटी प्रशासन की तरफ से भी कोई ठोस एक्शन नहीं

ABVP पदाधिकारी अभय प्रताप का कहना है कि पुलिस तो दूर अभी तक आरोपित छात्रों के खिलाफ यूनिवर्सिटी प्रशासन ने भी कोई ठोस एक्शन नहीं लिया। उन्होंने बताया कि यूनिवर्सिटी प्रशासन यह अच्छे से जानता है कि वामपंथियों ने कैम्पस के अंदर हिंदुत्व विरोधी नारे लगाए हैं लेकिन फिर भी वो न जाने क्यों और किसके दबाव में कोई कार्रवाई नहीं कर रहा। बकौल अभय वो जब भी विश्वविद्यालय प्रशासन से सवाल करते हैं तो जवाब में कमेटी गठित कर के जाँच किए जाने की जानकारी दी जाती है। हालाँकि अभय को आशंका है कि ये सब जाँच के नाम पर सिर्फ समय बिताने के लिए हो रही कार्रवाई है।

अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं

ऑपइंडिया ने अब तक हुई कानूनी कार्रवाई की जानकारी के लिए वाराणसी में SHO लंका को कॉल किया। थाना प्रभारी लंका ने हमें बताया कि फ़िलहाल अभी तक मामले में किसी भी आरोपित की गिरफ्तारी नहीं हुई है। जिस मामले में ABVP के दलित छात्र को पीटा गया था उस मामले की जाँच ACP भेलूपुर प्रवीण कुमार कर रहे हैं। जब हमने ACP प्रवीण कुमार से सम्पर्क करने का प्रयास किया तब उन्होंने फोन नहीं उठाया। ACP का पक्ष आने के बाद उसे खबर में अपडेट किया जाएगा। फिलहाल बकौल थाना प्रभारी अभी तक केस में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है और मामले की जाँच तथ्यों व सबूतों के आधार पर की जा रही है।

आरोपितों के हाईकोर्ट जाने की तैयारी

ABVP पदाधिकारी अभय ने हमें आगे बताया कि उनको विश्वस्त सूत्रों से ये पता चला है कि आरोपित छात्र छुट्टी और बीच में मिल रहे समय का फायदा उठा कर हाईकोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं। हाईकोर्ट में FIR को रद्द करने की माँग भी की जा सकती है। हालाँकि SHO लंका ने आरोपित छात्रों द्वारा हाईकोर्ट जाने जैसी कोई जानकारी मिलने या उच्च न्यायालय की तरफ से कोई नोटिस आदि से इंकार किया है। अभय का दावा है कि आरोपित छात्रों में अधिकतर पहले सरस्वती शिशु मंदिरों में पढ़े थे और बचपन में संस्कारी थी लेकिन बाद में उनको वामपंथियों ने ब्रेनवॉश कर के अपने साथ मिला लिया। उदहारण के तौर पर अभय ने केस में आरोपित रोशन पांडेय का नाम लिया।

वामपंथी छात्रों के हॉस्टलों में बाहरी लोग

ABVP के अभय प्रताप ने दावा किया कि BHU कैम्पस में हुए प्रदर्शन के साथ अन्य कई अराजक कार्यों में कैम्पस के वामपंथी छात्रों के साथ बाहरी तत्वों की संलिप्तता रही है। उन्होंने कहा कि ABVP ने बाहरी तत्वों के खिलाफ आवाज उठाई तो यूनिवर्सिटी प्रशासन ने हॉस्टलों की जाँच करवाई। जाँच में अभय ने अपना दावा सही होने की बात कही। अभय का आरोप है कि वामपंथी छात्रों का हॉस्टल में बाहरी लोग मिले हैं जिन्हे फिलहाल निकाल दिया गया है।

FIR को वामपंथियों ने बताया झूठा

इस मामले में वामपंथी छात्रों के समर्थन में उनकी विचारधारा के कुछ लोग सामने आए हैं। बताया गया है कि नारेबाजी करने वाले वामपंथी छात्रों के कुछ समर्थक खुद को स्थानीय नागरिक बताते हुए ACP भेलूपुर पहुँचे। उन्होंने AISA वालों को निर्दोष और ABVP के छात्रों को हमलावर बताया। एक ज्ञापन के माध्यम से लगभग 7 लोगों के इस प्रतिनिधि मंडल ने वामपंथी छात्रों पर दर्ज FIR निरस्त करते हुए ABVP से जुड़े छात्रों की गिरफ्तारी की माँग की। इस पत्र को FIR में नामजद मुख्य अरोपिता आकांक्षा आज़ाद ने अपने फेसबुक पर शेयर किया है।

अफगान शरणार्थियों को सिर्फ भगा ही नहीं रहे, बेईमान पाकिस्तानियों ने रख लिया उनका पैसा भी: नहीं लौटा रहे गरीबों और अनपढ़ों के लाखों रुपए

पाकिस्तान से अफगान शरणार्थियों को निकालने के निर्णय के बाद अब इसके परिणाम सामने आ रहे हैं। अफगान शरणार्थी व्यापारियों का उधार पैसा पाकिस्तानी नहीं लौटा रहे हैं। अफगानी कुछ दिनों में वापस चले जाएँगे, ऐसा जान कर वह बहाने बना रहे हैं।

गौरतलब है कि पाकिस्तान ने हाल ही में देश से अफगानी शरणार्थियों को निकालने का निर्णय लिया है। यह अफगानी शरणार्थी 1979 पिछले 4.5 दशक में अस्थिर अफगानिस्तान से भाग कर पाकिस्तान आए हैं। बड़ी संख्या 1980 के दशक में आने वालों की है। पाकिस्तान की सरकार ने 17 लाख अफगानियों को पाकिस्तान छोड़ने को कहा है। पाकिस्तान ने इन अफगानियों को कहा है कि वह अपने साथ केवल 50,000 पाकिस्तानी रुपए ही लेकर जा सकते हैं। अब तक लगभग 2 लाख अफगानी पाकिस्तान छोड़ चुके हैं।

पाकिस्तान ने यह कदम अफगानिस्तान की तालिबान सरकार पर दबाव बनाने के लिए उठाया है। पाकिस्तान का आरोप है कि तालिबान, आतंकी समूह तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रहा और वह अफगानिस्तान की जमीन का उपयोग पाकिस्तान पर हमलों के लिए कर रहे हैं।

पाकिस्तान के कराची शहर के अल आसिफ इलाके में रहने वाले हाजी मुबारक शिनवारी एक अफगानी शरणार्थी और व्यापारी हैं। उनके ट्रांसपोर्ट से लेकर कपड़े और सूदखोरी समेत कई व्यापार हैं। उन्होंने बड़ी रकम पाकिस्तानियों को भी उधार दे रखी है।

हाजी मुबारक का कहना है चूँकि अब हमारे यहाँ रुकने पर तलवार लटक रही है इसलिए पाकिस्तानी अब हमारा रुपया देने में आनाकानी कर रहे हैं। उन्हें अब उधार लौटाने की चिंता नहीं है। एक अन्य अफगानी व्यापारी शरीफुल्ला जान का 52 लाख रुपया पाकिस्तानियों के पास उधार है। उन्हें भी अपने पैसे वापस नहीं मिल रहे। इन व्यापारियों के पैसे मिलना दूर, अब पाकिस्तान की पुलिस और उनके दलाल इनके इलाकों में आकर अवैध वसूली भी कर रहे हैं। इसी कारण से जिन इलाकों में अफगानी शरणार्थी रहते हैं, वहाँ पर दुकान धंधे बंद हैं।

अफगानिस्तान से पाकिस्तान आने वाले अधिकांश शरणार्थी गरीब और अनपढ़ हैं। हालाँकि, उनमें से कुछ ऐसे हैं जिन्होंने समय के साथ पाकिस्तान में अपने व्यापार कर लिए थे। यह पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा हैं। एक रिपोर्ट बताती है हाजी इकबाल जैसे अनेकों शरणार्थी इस बात का इंतजाम कर रहे हैं कि वह पाकिस्तान में बनाई गई अपनी संपत्तियाँ कैसे वापस लेकर जाएँ। अफगान महिलाओं ने पाकिस्तान की सरकार के इस निर्णय के खिलाफ प्रदर्शन किए हैं।

पाकिस्तान में रहने वाले एक अन्य अफगान शरणार्थी रहमत खानजादा का कहना है कि यह कुछ वैसी ही स्थिति है जैसी हिन्दुओं को भारत के विभाजन के समय पाकिस्तान में देखनी पड़ी थी। एक अन्य व्यापारी अहमद का कहना है कि उन्हें 15 लाख रूपए का माल आधी कीमत पर बेचना पड़ा है।

मोहम्मद आसिफ नाम का शख्स जो पाकिस्तान की मच्छर कॉलोनी में रहा उसे अपनी दुकान मात्र 0.3 मिलियन (88,590 पाकिस्तानी रुपए) में बेचनी पड़ी। जब उससे पूछा गया कि वो अच्छे सौदे के लिए क्यों नहीं रुका इसपर उसने जवाब दिया कि उसे डर है कि पाकिस्तान की पुलिस उसे गिरफ्तार कर लेगी।

पाकिस्तान के इस कदम की अंतरराष्ट्रीय मंच पर आलोचना भी हुई है। हालाँकि, सेना के दबाव के चलते उसकी अंतरिम सरकार अफगान शरणार्थियों को अपने देश से बाहर निकालने पर आमादा है।

वर्ल्ड कप फाइनल के बीच मैदान में घुसा फिलिस्तीन समर्थक शख्स, विराट कोहली को पकड़ लिया: कुछ ही देर बाद क्लीन बोल्ड हो गए ‘किंग’, सुरक्षा में बड़ी चूक

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच आईसीसी क्रिकेट विश्व कप फाइनल के दौरान लाइव एक्शन के बीच अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में सुरक्षा उल्लंघन हुआ। बड़े पैमाने पर सुरक्षा उल्लंघन में, एक फिलिस्तीनी समर्थक ने मैदान पर अतिक्रमण किया और भारत की पारी के 14वें ओवर के दौरान विराट कोहली को गले लगा लिया, हालाँकि सुरक्षाकर्मियों ने उसे तुरंत हटा दिया। ऐसा तब हुआ, जब मैदान में सुरक्षा की जिम्मेदारी के लिए 6000 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है।

पुलिस ने मैदान में घुसने वाले प्रशंसक को हिरासत में ले लिया है और उससे पूछताछ कर रही है। इस घटना के कुछ ही देर बाद विराट कोहली क्लीन बोल्ड हो गए।

जैम्पा फेंक रहे थे 14वाँ ओवर

मैदान पर 13 ओवर और 3 गेंदे फेंकी जा चुकी थी, जब ये घटना हुई। मैच का 14वाँ ओवर एडम जैम्पा फेंक रहे थे, उन्होंने तीन गेंदे डाली थी, जिसपर 3 सिंगल रन बने थे। विराट कोहली 29 रन बनाकर खेल रहे थे, तब ये व्यक्ति मैदान के बीचो-बीच घुस गया। इस घटना के तुरंत बाद सुरक्षा कर्मियों ने मोर्चा संभाला और मैदान में घुसने वाले व्यक्ति को हिरासत में ले लिया गया। उसे चाँदखेड़ा पुलिस स्टेशन ले जाया गया है, जहाँ उससे पूछताछ की जा रही है।

मैदान पर 6000 हजार से ज्यादा पुलिसकर्मी, 23 डीसीपी और 39 एसीपी भी तैनात

मैदान पर घुसपैठ की घटना तक हुई, जब सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। इस फाइनल मैच के लिए 6000 से ज्यादा सुरक्षाकर्मी मैदान पर ड्यूटी कर रहे हैं, जो 4 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी, आईजी, और डीआईजी को भी मैदान की सुरक्षा जिम्मेदारी सौंपी गई है। इनके अलावा 23 डीएसपी को भी फाइनल मैच के दौरान मैदान की सुरक्षा करने को कहा गया है। 39 असिस्टेंट कमिशनर ऑफ पुलिस भी तैनात हैं। इसके बावजूद ऐसी घटना सुरक्षा को लेकर बड़ी चिंता पैदा करने वाली है।

ऑस्ट्रेलिया ने टॉस जीतकर चुनी है बल्लेबाजी

बता दें कि नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खचाखच भरे शोर के बीच ऑस्ट्रेलिया के कप्तान पैट कमिंस ने विश्व कप फाइनल में भारत के खिलाफ टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। भारतीय टीम 10 गेम खेलने के बाद फाइनल में अजेय रही, पांच मैचों में लक्ष्य का पीछा करते हुए लक्ष्य का बचाव किया है। आज पहले बल्लेबाजी के बाद भारतीय टीम को लक्ष्य का बचाव करना है।

ऐसी हैं दोनों टीमों की प्लेइंग इलेवन

भारत: रोहित शर्मा (कप्तान), शुबमन गिल, विराट कोहली, श्रेयस अय्यर, केएल राहुल (विकेटकीपर), सूर्यकुमार यादव, रवींद्र जडेजा, मोहम्मद शमी, जसप्रित बुमरा, कुलदीप यादव, मोहम्मद सिराज।

ऑस्ट्रेलिया: ट्रैविस हेड, डेविड वार्नर, मिशेल मार्श, स्टीवन स्मिथ, मार्नस लाबुशेन, ग्लेन मैक्सवेल, जोश इंगलिस (डब्ल्यू), मिशेल स्टार्क, पैट कमिंस (सी), एडम ज़म्पा, जोश हेज़लवुड।

झारखंड में सोने के साथ-साथ मिला लिथियम का भी विशाल भंडार: इलेक्ट्रिक से लेकर अंतरिक्ष सेक्टर तक में आएगी क्रांति, देश के आएगा काम

झारखंड के कोडरमा जिले में हाल ही में किए गए एक सर्वेक्षण में स्वर्ण भंडार के साथ ही लिथियम के भंडार की भी खोज की गई है। इस खोज से भारत को कार्बनिक ऊर्जा को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण हथियार मिल गया है। लिथियम एक महत्वपूर्ण धातु है जिसका उपयोग इलेक्ट्रिक वाहनों, लैपटॉप और मोबाइल फोन जैसी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की बैटरी में किया जाता है। लिथियम का उपयोग अंतरिक्ष उद्योग में भी किया जाता है, जैसे कि रॉकेट ईंधन के रूप में।

जानकारी के मुताबिक, कोडरमा के माइका बेल्ट में लिथियम की खोज के लिए आगे के चरण की तैयारी की जा रही है। अभी शुरुआती खोज में लिथियम का पता चला है, लेकिन ये कितना बड़ा भंडार है, इसका पता नहीं लगाया जा सकता है। पर ये माना जा रहा है कि ये लिथियम भंडार काफी बड़ा है। चूँकि भारत में अभी लिथियम निकालने की तकनीकी का विकास नहीं हो पाया है, ऐसे में माना जा रहा है कि इसकी निकासी के लिए विदेशी कंपनियों की मदद भी ली जा सकती है।

जीएसआई के महानिदेशक जनार्दन प्रसाद के मुताबिक, साल 2050 तक देश में बैट्री पर निर्भरता बढ़ने वाली है। इसके लिए लिथियम सबसे जरूरी तत्व है। इसलिए लिथियम की खोज पर फोकस किया जा रहा है। कोडरमा में मिला यह भंडार भारत को दुनिया के सबसे बड़े लिथियम उत्पादक देशों में से एक बना सकता है।

राँची के तमाड़ में 2 स्वर्ण भंडार

इस बीच, झारखंड में सोने के दो नए भंडार का पता चला है। जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (जीएसआई) ने राज्य सरकार से राँची के तमाड़ ब्लॉक स्थित इन दोनों गोल्ड रिजर्व की नीलीमी की प्रक्रिया शुरू करने से संबंधित रिपोर्ट सौंप दी है। ये स्वर्ण भंडार राँची जिले के तमाड़ ब्लॉक के बबाईकुंडी और सिंदौरी-घनश्यामपुर में मिले हैं। बबाईकुंडी में अनुमानित 510 किलो और और सिंदौरी में अनुमानित 767 किलो सोना मिलने की उम्मीद है।

राँची में पहले भी मिले हैं स्वर्ण भंडार

भारत में सोने का सबसे बड़ा भंडार राँची में ही है। राँची के तमाड़ स्थित परासी में देश का सबसे बड़ा स्वर्ण भंडार मिला है, जिसकी खदान विकसित की जा रही है। यहाँ अनुमानत: 70 हेक्टेयर के क्षेत्र में 9894 किलो सोना मिलने की उम्मीद है। इस स्वर्ण भंडार के खनन के लिए रूंगटा माइंस ने नीलामी में सफलतापूर्वक बोली लगाई थी, लेकिन साल 2017 में खदान हासिल के बावजूद अभी तक यहाँ स्वर्ण उत्खनन शुरू नहीं हो सकता है।

वहीं, अब कोडरमा में लिथियम का भंडार मिलने से विशेषज्ञों को नई उम्मीद भी जगी है।

क्या है लिथियम?

लिथियम एक रासायनिक तत्व है जिसका प्रतीक Li और परमाणु संख्या 3 है। यह आवर्त सारणी का तीसरा तत्व है और यह सबसे हल्की धातु और सबसे कम घनत्व-वाला ठोस पदार्थ है। रासायनिक दृष्टि से यह क्षार धातु समूह का सदस्य है और अन्य क्षार धातुओं की तरह अत्यंत अभिक्रियाशील है, यानि अन्य पदार्थों के साथ तेज़ी से रासायनिक अभिक्रिया कर लेता है।

लिथियम के भौतिक गुण

यह एक चांदी जैसी सफेद धातु है।

यह बहुत नरम है और इसे चाकू से आसानी से काटा जा सकता है।

यह पानी के साथ तेजी से अभिक्रिया करता है और हाइड्रोजन गैस और लिथियम हाइड्रॉक्साइड का निर्माण करता है।

यह हवा में जल जाता है और लिथियम ऑक्साइड का निर्माण करता है।

लिथियम के रासायनिक गुण

यह एक बहुत ही प्रतिक्रियाशील तत्व है।

यह पानी के साथ तेजी से अभिक्रिया करता है और हाइड्रोजन गैस और लिथियम हाइड्रॉक्साइड का निर्माण करता है।

यह हवा में जल जाता है और लिथियम ऑक्साइड का निर्माण करता है।

यह अन्य धातुओं के साथ आसानी से मिश्र धातु बनाता है।

लिथियम के उपयोग

यह इलेक्ट्रिक बैटरी में उपयोग किया जाता है, विशेष रूप से इलेक्ट्रिक वाहनों और लैपटॉप में।

यह धातुओं के मिश्र धातुओं में उपयोग किया जाता है, जैसे कि अलुमिनियम-लिथियम मिश्र धातु, जो हल्के और मजबूत होते हैं।

यह औषधीय उत्पादों में उपयोग किया जाता है, जैसे कि एंटीडिप्रेंट और मनोविकाररोधी।

यह अंतरिक्ष उद्योग में उपयोग किया जाता है, जैसे कि रॉकेट ईंधन के रूप में।

इसके अलावा इसके और भी कई महत्वपूर्ण उपयोग हैं। यह इलेक्ट्रिक वाहनों और लैपटॉप जैसी नई तकनीकों के विकास के लिए महत्वपूर्ण है।

भारत जीते वर्ल्ड कप का फाइनल, इसीलिए पाकिस्तान से आईं सीमा हैदर ने रखा व्रत: पूजा-पाठ करती हुई दिखीं, बोलीं – खाली नहीं जाएगी मेरी प्रार्थना

आईसीसी क्रिकेट विश्वकप 2023 का फाइनल मुकाबला अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेला जा रहा है। इस महत्वपूर्ण मैच के लिए पाकिस्तान से आई सीमा हैदर भी भारत की जीत की दुआ कर रही हैं। उन्होंने बाकायदा व्रत भी रखा है और कहा है कि वो चाहती है कि भारत का परचम पूरी दुनिया में लहराए। उनकी दुआ कभी खाली नहीं जाती और इस बार भी ऐसा ही होगा।

सीमा हैदर ने भारत की जीत के लिए व्रत रखा है। सीमा हैदर का एक वीडियो सामने आया है जिसमें वह पूजा करते दिख रही है। इस दौरान सीमा हैदर ने कहा है कि आज उन्होंने उपवास रखा है, ऐसे में उनकी दुआ खाली नहीं जाएगी। उन्होंने बाकायदा छठ का व्रत भी रखा।

विवेक नाम के यूजर ने भी सीमा हैदर का वीडियो पोस्ट किया है।

बता दें कि अहमदाबाद में जारी क्रिकेट विश्वकप का फाइनल मुकाबला भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेला जा रहा है। ऑस्ट्रेलियाई टीम ने टॉस जीता और पहले बॉलिंग का फैसला किया। इसके बाद भारतीय टीम बल्लेबाजी कर रही है। इस महत्वपूर्ण मैच को देखने के लिए देश-विदेश से फैन अहमदाबाद पहुँचे हैं। ये मुकाबला नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेला जा रहा है, जो दर्शकों के बैठने की क्षमता के हिसाब से दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम है।

4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बना भारत, PM मोदी के सपने की तरफ बढ़ाया कदम: जापान-जर्मनी को पछाड़ेगी हमारी GDP

भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर वाली अर्थव्यवस्था बनाने का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना जल्द ही पूरा होने वाला है। भारत पहली बार 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था वाली क्लब में शामिल हो गया है। भारत ने 18 नवंबर 2023 को 4 ट्रिलियन डॉलर (4 लाख करोड़ रुपए) का आँकड़ा पार करते हुए सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के मामले में विश्व के शीर्ष पाँच देशों में बढ़त बना ली है।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा (IMF) के डाटा पर आधारित विश्व के सभी देशों के GDP की लाइव ट्रैकिंग का स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर खूब शेयर किया जा रहा है। भारतीय समय के अनुसार रविवार (19 नवंबर 2023) को भारतीय की इस रिमार्केबल सफलता पर नेटिजन्स एक दूसरे को खूब बधाइयाँ दीं।

RBI ने 16 नवंबर को एक लेख में कहा कि आर्थिक पूर्वानुमानों के आधार पर व्यापक सहमति है कि दूसरी तिमाही में वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि RBI के 6.5 प्रतिशत के अनुमान से बेहतर होगी।वित्तीय वर्ष के पहले तीन महीनों में भारत की अर्थव्यवस्था 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी है। RBI के गवर्नर शक्तिकांत दास ने हाल ही में घरेलू अर्थव्यवस्था पर भरोसा जताया।

दास ने 31 अक्टूबर को कहा, “आर्थिक गतिविधि की गति को देखते हुए, मुझे उम्मीद है कि नवंबर के अंत में आने वाले दूसरी तिमाही के जीडीपी आँकड़े आश्चर्यचकित करेंगे।” वहीं, लेख में कहा गया है कि सितंबर तिमाही के कॉर्पोरेट परिणामों से लगता है कि वास्तविक जीडीपी वृद्धि 6.5% से अधिक होगी।

वहीं, विश्व की प्रमुख रेटिंग एजेंसी एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने 16 नवंबर 2023 को कहा कि भारत की आर्थिक वृद्धि की संभावनाएँ मध्यम अवधि में मजबूत बनी रहनी चाहिए। वित्तीय वर्ष 2024-2026 में सकल घरेलू उत्पाद में सालाना 6-7.1 प्रतिशत की वृद्धि होगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक अनिश्चितताओं का भारतीय अर्थव्यवस्था पर कम असर पड़ेगा।

‘ग्लोबल बैंक्स कंट्री-बाय-कंट्री आउटलुक 2024’ शीर्षक वाली रिपोर्ट में एसएंडपी ने कहा कि स्वस्थ कॉर्पोरेट बैलेंस शीट, सख्त अंडरराइटिंग मानक और बेहतर जोखिम-प्रबंधन सहित संरचनात्मक सुधार के कारण बैंकिंग क्षेत्र के कमजोर ऋण 31 मार्च 2025 तक सकल अग्रिमों के 3-3.5 प्रतिशत तक कम हो जाएँगे।

बता दें कि भारत ने यह ऐतिहासिक उपलब्धि मजबूत आर्थिक उत्थान को दर्शाता है। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2025 तक भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनाने का लक्ष्य रखा है। हाल ही में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि भारत 2027 तक जापान और जर्मनी को पछाड़कर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा।

भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने को लेकर एक सवाल के जवाब में केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने अगस्त में कहा था कि सरकार के रोडमैप में समावेशी विकास पर ध्यान केंद्रित करना, डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना, फिनटेक, प्रौद्योगिकी-सक्षम विकास, ऊर्जा परिवर्तन और जलवायु कार्रवाई और निवेश और विकास के उपाय शामिल हैं।

विश्व में 200 से अधिक देश हैं। इनमें से सिर्फ 19 देशों की जीडीपी ही एक ट्रिलियन डॉलर से अधिक है। अमेरिका पहला देश था, जिसने सबसे पहले यानी 1969 में एक ट्रिलियन डॉलर के क्लब में कदम रखा था। भारत साल 2007 में एक ट्रिलियन डॉलर क्लब में शामिल हुआ था। आज देश की जीडीपी 4 ट्रिलियन डॉलर पहुँच गई है।

इस समय दुनिया में सबसे अधिक जीडपी वाला देश है अमेरिका है। उसके बाद दूसरे स्थान पर चीन और तीसरे स्थान पर जापान है। वहीं, चौथे स्थान पर जर्मनी और पाँचवें स्थान पर भारत है। अमेरिका का कुल जीडीपी 26.95 ट्रिलियन डॉलर है, जबकि चीन का कुल जीडीपी 17.7 अरब डॉलर है। जर्मनी की अर्थव्यवस्था 4.4 ट्रिलियन और भारत की 4.001 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर है।

‘हार जाए टीम इंडिया, यही चाहते हैं भारत के 16 करोड़ मुस्लिम’: पाकिस्तान की हीरोइन बोली, निकाह का देती रही है ऑफर

पाकिस्तान की जिहादी सोच वाली हीरोइन सहर शिनवारी ने एक बार फिर भारत के खिलाफ ज़हर उगला है। ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच वर्ल्ड कप के फाइनल मैच से पहले सहर ने कहा कि भारत के सच्चे मुस्लिम चाहते हैं भारत हार जाए।

सहर शिनवारी ने लिखा है, “मेरी आखिरी उम्मीद ऑस्ट्रेलिया है। मैं इसकी आशा करती हूँ कि वह पाकिस्तान के 23 करोड़ लोगों, भारत के 16 करोड़ मुस्लिमों और बांग्लादेश के 16 करोड़ मुस्लिमों को आज निराश नहीं करेंगे।”

आए दिन ऊल-जलूल ट्वीट करने वाली सहर शिनवारी ने एक बार फिर भारत के मुस्लिमों को ढाल बना कर अपना एजेंडा आगे बढ़ाया है। सहर इससे पहले भी ट्विटर पर इंगेजमेंट इकट्ठा करने के लिए ऐसे ही ट्वीट करती रही है।

एक अन्य ट्वीट में सहर शिनवारी ने लिखा, ” मुझे इस बात पर पूरा विश्वास है कि भारत का हर सच्चा सच्चा भारत को हारते हुए देखना चाहता है।” पाकिस्तान के वर्ल्डकप से बाहर होने का सच नहीं पचा पा रही शिनवारी ने इसे फिक्स्ड वर्ल्डकप बताया है। इससे पहले एक ट्वीट में सहर ने कहा था कि भारत आज सु%र की तरह हारेगा।

सहर वर्ल्डकप में इससे पहले भी भारत के खिलाफ ज़हर उगलती रही है। वह अक्सर ऐसे ट्वीट करती है जिसमें भारत को क्रिकेट में हराने वाले देश के लड़के से निकाह का ऑफर होता है। वह श्रीलंका, बांग्लादेश और जिम्बाब्वे को यही ऑफर दे चुकी है। हालाँकि, वह अलग बात है कि जब भी वह पाकिस्तान या अन्य कोई टीम के समर्थन में ट्वीट करती हैं तो वह टीम अक्सर हार जाती है।

शिनवारी ने नरेंद्र मोदी के विरोध में और राहुल गाँधी के समर्थन में भी ट्वीट किए हैं। सितंबर 2022 में शिनवारी ने ट्वीट किया कि कैसे सिर्फ राहुल गाँधी ही भारत को बीजेपी और आरएसएस से बचा सकते हैं।

सहर शिनवारी पाकिस्तान के हैदराबाद शहर में पैदा हुई। कोहट के शिनवारी समुदाय से उनका ताल्लुक हैं। परिवार के एक्टिंग करियर के खिलाफ होने के बाद भी साल 2014 में वो इस पेशे में आई थी। उनका पहला कॉमेडी सीरियल ‘शेर सवा शेर’ था।

इंटरनेट की भाषा में कहें तो शिनवारी जो कर रही हैं, उसे ‘टट्टी पोस्टिंग’ और ‘बेटिंग’ कहा जाता है। आम तौर पर मशहूर होने के लिए, फॉलोअर्स की संख्या बढ़ाने के लिए या फिर किसी का रिएक्शन पाने के लिए ऐसे ट्वीट किए जाते हैं। सोशल मीडिया पर ‘वायरल’ होने के लिए यह एक आम हथकंडा है।

‘मेरा हिंदू धर्म देता है मुझे आजादी, इसी ने मुझे चुनाव लड़ने के लिए प्रेरित किया’: अमेरिका के राष्ट्रपति उम्मीदवार ने खुल कर कहा – मैं हिंदू हूँ, यहीं से सीखी नैतिकता

अमेरिकी मे चुनाव से पहले रिपब्लिकन पार्टी अपने राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को चुनने की प्रक्रिया से गुजर रही है। भारतीय मूल के विवेक रामास्वामी भी इनमें से एक हैं। उन्हें रिपब्लिकन पार्टी की तरफ से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों की रेस में मजबूत दावेदार माना जा रहा है।

रामास्वामी ने शनिवार (18 नवंबर,2023) को द डेली सिग्नल प्लेटफॉर्म के आयोजित द फैमिली लीडर फोरम कार्यक्रम में हिंदू धर्म को लेकर कुछ ऐसा कहा कि वो भारत के लोगों के दिल को छू गया।

जब उनसे पूछा गया कि आप हिंदू है और आपने अपने कैंपेन को ‘सच’ पर फोकस किया है। इस बात पर चर्चा है कि ये सच क्या है, आपने इसे कहाँ खोजा और पाया, कहाँ इसे जाना और आप इसे कैसे लागू करते हैं।

इस सवाल के जवाब को रामास्वामी ने अपने एक्स हैंडल पर शेयर करते हुए लिखा, “कल रात मुझसे मेरी हिंदू आस्था के बारे में पूछा गया। मैंने ईमानदारी से जवाब दिया।”

उन्होंने कहा, “इस सवाल के लिए मैं आभारी हूँ क्योंकि हम पूरे स्टेट में शायद सौ इंवेट्स में गए वहाँ पॉलिसी को लेकर बहुत सारे सवाल पूछे गए थे। तब हमने खुद को बहुत मुश्किल हालात में पाया, इसलिए मैं हिंदू धर्म के बारे में बताने को लेकर आपका आभारी हूँ। मेरा हिंदू धर्म मुझे आजादी देता है। ये मेरा धर्म ही जिसने वास्तव में मुझे इस राष्ट्रपति उम्मीदवार अभियान में दावेदारी के लिए प्रेरित किया और सारे अभियान मैंने इसके बारे में बात की।”

रामास्वामी ने आगे कहा, “मैं आपको आपको अपने धर्म के बारे में बताता हूँ। मैं हिंदू हूँ। मैं विश्वास करता हूँ कि एक सच भगवान ही है। भगवान ने ही हम सबको दुनिया में एक उद्देश्य देकर भेजा है। मेरा धर्म मुझे सिखाता है कि हम सबका एक नैतिक कर्तव्य है कि हम इस उद्देश्य को समझे। इसके लिए भगवान हमारे साथ हमेशा रहता है वो अलग-अलग तरीके से हमारा साथ देता है।”

उन्होंने आगे कहा, “हमारे धर्म का मूल है कि भगवान हम सब में हैं इसलिए हम सब एक हैं। मेरे पालन-पोषण की वजह से मेरे अंदर परिवार, विवाह और माता-पिता के लिए सम्मान पैदा हुआ है। मेरा घर काफी पारंपरिक था। मेरे माता-पिता ने मुझे सिखाया कि परिवार ही हमारी नींव है। हमें अपने माता-पिता का सम्मान करना चाहिए।”

उन्होंने कहा कि विवाह पवित्र है। शादी से पहले संयम रखना जरूरी है। व्याभिचार गलत हैं। हमारे वहाँ विवाह पुरुष-महिला के बीच होने वाला भावनात्मक रिश्ता होता है और तलाक को आप प्राथमिकता नहीं दे सकते हैं, इसलिए जब आप विवाह करते हैं तो वो भगवान के समक्ष करते हैं। भगवान के सामने अपने परिवार के सामने शपथ लेते हैं, क्योंकि जिंदगी में अच्छी चीजें त्याग माँगती हैं।

उन्होंने आगे कहा, “हमारा धर्म बताता है कि बगैर उद्देश्य के जिंदगी में वक्त व्यर्थ है और हम उस उद्देश्य पर चलते हैं। उन्होंने समझाया कि ये मान्यताएं और मूल्य अजीब नहीं है क्योंकि ये सब जगह है। अमेरिका में भी कहीं भी चले जाएँ आपको ये देखने को मिलेगा। उन्होंने कहा, “मैं साझा मूल्यों के लिए हमेशा खड़े रहूँगा। मैं क्रिश्चियन हाई स्कूल में पढ़ा। वहाँ मैंने ईश्वर के 10 आदेशों को जाना। हमने बाइबल पढ़ी है।”

गौरतलब है कि रामास्वामी ने 21 फरवरी 2023 को फॉक्स न्यूज के एक शो में 2024 के राष्ट्रपति पद के चुनावों के लिए रिपब्लिकन पार्टी के राष्ट्रपति पद की दौड़ के उम्मीदवारों में अपनी दावेदारी का ऐलान किया था। उस वक्त उन्होंने कहा था कि वे नए अमेरिका के ख्वाब को पूरा करने के लिए सांस्कृतिक आंदोलन शुरू करने के पक्षधर हैं।

एलन मस्क ने भी उनके तारीफ के पुल बाँध चुके हैं। टेस्ला के सीईओ एलन मस्क ने 18 अगस्त, 2023 को ट्वीट कर अमेरिकी रिपब्लिकन पार्टी (GOP) के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों की रेस में शामिल भारतीय अमेरिकी राजनेता रामास्वामी का दिल खोलकर समर्थन किया था। उन्होंने अपने पहले ट्वीट में कहा कि 2024 के राष्ट्रपति पद की दावेदारी के लिए रामास्वामी बहुत होनहार उम्मीदवार हैं।

जब धर्मराज युधिष्ठिर को भी करना पड़ा छठ… जिन्हें वेदों ने बताया ब्रह्मांड का नेत्र, महाभारत में भी उनकी उपासना: इस इतिहास में अध्यात्म और विज्ञान दोनों

लोक आस्था के महापर्व छठ को लेकर आजकल तरह-तरह के सवाल पूछे जाते हैं। अब ये केवल बिहार में मनाया जाने वाला स्थानीय पर्व नहीं रहा, बल्कि वैश्विक हो चुका है। इसी बीच छठ को लेकर पूछा जाता है कि क्या ये हिन्दू धर्म में एक सर्व-स्वीकार्य त्योहार है? क्या इसका इतिहास सचमुच बहुत पुराना है? शास्त्रों में इसका कहाँ जिक्र है? यहाँ हम इन सबका जवाब तलाशने का प्रयास करेंगे, साथ ही एक बड़ी ही रोचक कथा को भी आप तक लेकर आएँगे।

छठ पर्व में होता क्या है? अस्ताचलगामी और उदयीमान सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया जाता है, जल में खड़े होकर। निर्जला उपवास का व्रत रखा जाता है। ये भगवान सूर्य की उपासना का पर्व है। सूर्य वैदिक देवता हैं। वेदों में उन्हें ब्रह्माण्ड का नेत्र कहा गया है, अर्थात उनके बिना प्राणी देखने को असमर्थ होंगे। चूँकि वो प्रकाश के स्रोत हैं, समस्त जन-जीवन के संचालन के लिए उनका होना ज़रूरी है – इसीलिए कृतज्ञ भाव से वेदों में उनकी स्तुति की गई है।

ऋग्वेद के प्रथम मंडल के 7वें सूक्त के तीसरे मन्त्र को देखिए – ‘इन्द्रो॑ दी॒र्घाय॒ चक्ष॑स॒ आ सूर्यं॑ रोहयद्दि॒वि। वि गोभि॒रद्रि॑मैरयत्॥’, जिसमें बताया गया है कि परमेश्वर ने सूर्य का निर्माण किया, ताकि हम सभी पदार्थों को देख सकें। इसमें स्पष्ट लिखा है कि सूर्य ही पृथ्वी पर से जल को ऊपर खींच कर पवन के द्वारा स्थापित करते हैं और संसार में वर्षा बरसाते हैं। सोचिए, आज हम वॉटर सायकल पढ़ते हैं और ये चीजें बताई जाती हैं। हमारे ऋषियों ने हजारों वर्ष पहले वेदों में ये चीजें लिख दी थीं।

ये तो सिर्फ एक उदाहरण था, वेदों में कई बार भगवान भास्कर का जिक्र है। छठ का पर्व 4 दिनों का होता है – नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और प्रातः अर्घ्य। पहले दिन व्रती महिलाएँ (ये व्रत पुरुष भी करते हैं) सुबह स्नान कर के सामान्यतः चावल और लौकी की सब्जी कहती हैं। दूसरे दिन उपवास के बाद शाम को गुड़ और साठी के चावल की खीर का भोग लगाया जाता है और व्रती भगवान सूर्य का ध्यान धरती हैं। फिर प्रसाद ग्रहण करती हैं। संध्या अर्घ्य वाले दिन भी निर्जला उपवास होता है।

यानी, व्रती जल भी ग्रहण नहीं कर सकतीं। शाम के समय जल में खड़े होकर अस्त होते सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया जाता है। अगले दिन सुबह उदित हो रहे सूर्य को अर्घ्य के साथ पर्व का समापन होता है और लोगों में प्रसाद का वितरण किया जाता है। ये व्रत निर्जला होने के कारण कठिन है, कई लोग दण्डवत करते हुए भी नदी के घाट तक जाते हैं। तालाब या पानी के छोटे पोखर बना कर भी व्रत किए जाते हैं। छठी मैया के गीत गए जाते हैं, जिन्हें भगवान सूर्य की बहन माना गया है।

महाभारत में एक कथा है, जो छठ पर्व की तरफ इशारा करती है। असल में जुए में सब कुछ हारने के बाद पाँचों पांडव अपनी पत्नी द्रौपदी और माँ कुंती के साथ वन को जाने को उद्यत थे, उस दौरान कुछ ब्राह्मण भी स्नेहवश उनके साथ लग गए। धर्मराज युधिष्ठिर बड़े भाई थे, अतः उन्हें ये चिंता खाए जा रही थी कि जंगल में वो अपने भाइयों और माँ-पत्नी का भरण-पोषण कैसे करेंगे। अन्न कहाँ से लाएँगे। राजमहल से अचानक वन वाला जीवन आसान नहीं होता, रहने-खाने की समस्या खाती है, वन में साँप, कीड़े-मकोड़े और जानवरों का खतरा होता है।

ऐसे में युधिष्ठिर ने उनसे आग्रह किया कि वो उनका सत्कार नहीं कर सकते, ऐसे में उन्हें वापस लौट जाना चाहिए। इस पर ब्राह्मण कहने लगे कि वो अपने लिए भोजन की व्यवस्था करने में सक्षम हैं, वो तो बस साथ चल कर युधिष्ठिर और उनके परिवार को कथाएँ सुनाएँगे, उनका उत्साहवर्धन करेंगे। युधिष्ठिर असमंजस में पड़ गए। पहुँच गए अपने पुरोहित धौम्य के पास। इसी दौरान धौम्य ने उन्हें भगवान सूर्य की आराधना करने का उपदेश दिया, ताकि वन में उनके लिए अन्न और भोजन की समस्या नहीं रहे।

जिस घटना की हम बात कर रहे हैं, वो महाभारत के वन पर्व के तीसरे अध्याय में वर्णित है। पुरोहित धौम्य के पास जाकर युधिष्ठिर ने पूछा कि कई ब्राह्मण उनके साथ चल रहे हैं, ऐसे में वो उनके पालन-पोषण में सक्षम नहीं हैं, उन्हें क्या करना चाहिए? तब धौम्य ने उन्हें बताया कि प्राचीन काल में भगवान सूर्य ने भूख से व्याकुल जनता की समस्या का समाधान किया था। उन्होंने समझाया कि उत्तरायण में धरती का रस खींच कर सूर्य ने इन्हें दक्षिणायन में धरती पर बरसाया, जिससे फसलों-औषधियों का उत्पादन हुआ।

फिर वो इसमें चन्द्रमा के योगदान की भी बात करते हैं कि कैसे उसके माध्यम से आने वाली सूर्य की किरणें उन फसलों, औषधियों को पुष्ट करती हैं। उत्तरायण अर्थात जनवरी से लेकर जून, और दक्षिणायन अर्थात जून से जनवरी। दोनों 6-6 महीने का होता है। सूर्य की किरणें जब कर्क रेखा पर सीधी पड़ती हैं और जब मकर रेखा पर सीधी पड़ती हैं – इन दोनों के बीच की अवधि ही दक्षिणायन कहलाती है। वहीं उत्तरायण में सूर्य उत्तरी गोलार्ध में होते हैं।

उत्तरायण खत्म होते ही वृष्टि शुरू हो जाती है। बारिश के कारण फसलें अच्छी होती हैं। धरती को पोषण मिलता है, जमीन उपजाऊ बनती है। आज विज्ञान भी मानता है कि बारिश में एक प्रतिशत ही सही, लेकिन चन्द्रमा का भी योगदान है। धौम्य ने महाभारत में मेघ को सूर्य का तेज कहा है। आशय ये है कि सूर्य की गर्मी से धरती पर से उठ कर उच्च ऑल्टीट्यूड पर स्थित होने वाले बादल ही बरसते हैं। सूर्य के बिना ये संभव नहीं। धौम्य ने इस दौरान युधिष्ठिर को भगवान सूर्य के 108 नाम बताए और फिर उनकी आराधना की सलाह दी।

इसके बाद युधिष्ठिर स्नान कर के स्वयं को शुद्ध करते हैं, अपनी वाणी को वाणी को वश में किया, चित्त को एकाग्र किया, इन्द्रियों को संयमित किया और फिर सिर्फ वायु पीकर रहने लगे। अर्थात, निर्जला व्रत। सूर्य के सम्मुख खड़े होकर उन्होंने उपासना की। सूर्य की स्तुति करते हुए उन्होंने उन्हें प्राणियों की आत्मा और जगत का नेत्र बताया। वेदों में यही कहा गया है। युधिष्ठिर ने सूर्य को समस्त ज्योतियों का स्वामी बता कर और समस्त सात्विक गुणों का अधिष्ठाता बता कर उनकी स्तुति की है।

युधिष्ठिर ने सूर्य को सांख्य योगियों का प्राप्तव्य और कर्म योगियों का आश्रय बताया गया है। सांख्य एवं कर्म योगी बुद्ध के जन्म के हजारों वर्ष पूर्व से अस्तित्व में है और इन पर ऋषिगण शोध में रत रहते थे। पंच महाभूत से बनी प्रकृति और पुरुष अर्थात जीवात्मा – जड़ और चेतन के संयोग पर शोध सांख्य से ही निकला है। इस जगत के 3 गुणों सत्, रजस् तथा तमस् का अध्ययन कर के शंकाओं का समाधान किया गया। इसी तरह कर्म सिद्धांत कहता है कि हमारा स्वरूप बहुत व्यापक है और हम जन्म-जन्मांतर से कर्म-फल चक्र में फँसे हुए हैं।

महाभारत में पांडवों के पुरोहित धौम्य ने धर्मराज युधिष्ठिर को बताए भगवान सूर्य के 108 नाम

इसमें आत्मा के अमर होने का सिद्धांत दिया गया और हमारी क्रियाएँ आत्मा से चिपकी हुई हैं। युधिष्ठिर इसीलिए सूर्य की उपासना करते समय सांख्य और कर्म का जिक्र करते हैं। नवबौद्धों को समझ नहीं आएगा। अतः, साफ़ है कि सूर्य की उपासना का छठ पर्व वैदिक काल से ही अस्तित्व में है। युधिष्ठिर ने भी षष्ठी और सप्तमी को ही ये व्रत किया था, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें भगवान सूर्य ने तांबे का ‘अक्षय पात्र’ प्रदान किया, जिसके कारण जंगल में पांडवों को अन्न की समस्या नहीं आई।

आखिर ये अन्न का ‘अक्षय पात्र’ क्या हो सकता है? पांडव जहाँ भी जाते थे, वहाँ उन्हें खुद से अन्न उपजा कर खाना पड़ा होगा। 12 वर्षों का वनवास छोटी अवधि नहीं होती है। जंगल में वो जहाँ भी गए, वहाँ जमीन को उपजाऊ बना कर उस पर खेती की, अन्न उपजाया और खाया। सूर्य के सिद्धांत को समझना, चन्द्रमा के प्रकाश के महत्व को जानना और मौसम चक्र का ज्ञान – उत्तम कृषि के लिए पांडवों को धौम्य का ये ज्ञान ज़रूर काम आया। उन्होंने ऋषियों की सेवा की, खुद के लिए भी भोजन का इंतजाम किया।

सार ये कि सनातन धर्म के हर पर्व-त्योहार के पीछे विज्ञान है। छठ पर्व भी ऐसे समय में आता है जब ठंड का मौसम दस्तक दे रहा होता है। अर्घ्य में इस्तेमाल की जाने वाली चीजें मौसमी होती हैं। हम भगवान सूर्य से प्रार्थना करते हैं कि वो अपनी कृपा हम कर बनाए रखें। हम भोजन और प्रकाश के लिए उनके प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हैं। प्रकृति के सबसे करीब है हमारा धर्म, इसीलिए हमारे हर त्योहार में प्रकृति रची-बसी है। छठ का व्रत ठंड का मौसम आने से पहले शरीर को शुद्ध करने और नए मौसम के लिए ढालने के लिए भी तैयार करता है।