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‘हिन्दू के लिए नहीं बोलूँगा तो क्या बाबर और औरंगज़ेब के लिए बोलूँगा’: प्रियंका गाँधी को राजस्थान में CM हिमंता ने दिया करारा जवाब, बोले – जब तक साँस रहेगी…

राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 के लिए मतदान 25 नवंबर को होगा, इसके लिए सभी पार्टियों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। कॉन्ग्रेस हो या भाजपा, सभी दलों ने अपने स्टार कैंपेनर्स को मैदान में उतार दिया है और एक-दूसरे पर ताबड़तोड़ हमले बोले जा रहे हैं। इसी कड़ी में कॉन्ग्रेस की नेता प्रियंका गाँधी वाड्रा ने असम के मुख्य हिमंता बिस्वा सरमा पर आरोप लगाए कि वो हिंदुओं की ही बात करते हैं, जिस पर अब हिमंता बिस्वा सरमा ने जोरदार पलटवार किया है। सरमा ने कहा कि वो हिंदू हैं, तो हिंदुओं की बात करते हैं, इसमें गलत क्या है?

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने जयपुर में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि “अगर मैं भारत में हिंदू के लिए दो शब्द नहीं बोलूँगा तो क्या बाबर और औरंगज़ेब के लिए बोलूँगा? भारत में हिंदू के हित का मतलब क्या है? हिंदू कहता है कि पूरा विश्व मेरा कुटुम्ब है। अगर आप ऐसी संस्कृति का जयगान नहीं करोगे तो किसका जयगान करोगे? आप प्रियंका गाँधी को बोलिए कि जब तक हमारी साँस रहेगी तब तक हम हिंदुओं का जयगान करेंगे।”

बता दें कि राजस्थान पहुँची कॉन्ग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा ने बीजेपी पर चुनाव के समय धर्म के नाम पर वोट माँगने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा कि भाजपा हमेशा धर्म, मंदिर और मस्जिद के नाम पर लोगों को बांटकर कर वोट की राजनीति करती है, ऐसे में भाजपा के बहकावे में न आकर पक्की गारंटी वाली सोच के साथ आगे बढ़ने वाली कांग्रेस को भरपूर समर्थन देकर परम्परा को तोड़ कर प्रदेश में फिर से कॉन्ग्रेस की सरकार रिपीट करें। उनके इसी आरोप पर हिमंता ने जनसभा में जमकर वार किया।

इससे पहले, हिमंता ने मदरसों को बंद करने की बात दोहराई थी। उन्होंने कहा था कि सरकार से पैसा और वेतन पाने वाले सभी मदरसों को बंद कर देना चाहिए। अगर कोई समुदाय स्वतंत्र रूप से इसे चलाता है, तो यह एक अलग मुद्दा है। सरकारी वेतन वाले मदरसे बंद होने चाहिए। बता दें कि असम में सरकारी सहयोग से चलने वाले मदरसों का ऑडिट भी कराया जा रहा है, साथ ही अनियमितता मिलने पर कठोर कार्रवाई भी की जा रही है। हिमंत बिस्वा सरमा के आदेश के बाद असम में बहुविवाह करने वालों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जा रही है और अब तक सैकड़ों लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा चुकी है। इस मामले में बहुत सारे लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है। इस मामले में सरकार कानून भी ला रही है।

बता दें कि राजस्थान में मौजूदा समय में कॉन्ग्रेस की सरकार है। राजस्थान में अशोक गहलोत मुख्यमंत्री हैं। ये राज्य लगातार 5 साल तक राजनीतिक अस्थिरता और आपसी-सिरफुटौव्वल के चलते चर्चा में रहा। चुनाव के समय अशोक गहलोत और उनके कॉन्ग्रेस पार्टी के ही प्रतिद्वंदी सचिन पायलट में कुछ समय के लिए युद्ध विराम सा हुआ है। वहीं, भाजपा अपनी पूरी ताकत से राजस्थान में सरकार बनाने के लिए चुनाव लड़ रही है। राजस्थान की सभी 200 विधानसभा सीटों पर 25 दिसंबर को मतदान कराया जाएगा, जिसके लिए चुनाव प्रचार की आखिरी तारीख 23 दिसंबर रहेगी। राजस्थान में भी 4 अन्य राज्यों के साथ 3 दिसंबर को चुनाव परिणामों की घोषणा की जाएगी।

अब एल्विश यादव के खिलाफ कोर्ट पहुँचीं मेनका गाँधी: फरीदाबाद से बरामद हुए 2 और कोबरा साँप, दूसरे राज्यों से मँगा कर गोदाम में रखे जाते थे

नोएडा के सेक्टर-51 में आयोजित रेव पार्टी में साँपो के जहर की सप्लाई मामले में पुलिस रिमांड पर लिए गए राहुल ने कई राज बताए हैं। इसके बाद पुलिस ने हरियाणा के फरीदाबाद से दो और कोबरा साँप भी बरामद किए हैं। पूछताछ में पता चला है कि पकड़े गए साँपो को रखने के लिए फरीदाबाद में गोदाम बनाया गया था और वहीं पर साँपों का जहर निकाला जाता था। वहीं मेनका गाँधी भी एल्विश यादव पर FIR दर्ज करवाने के लिए कोर्ट पहुँची हैं।

इस बीच राहुल के पास से बरामद लाल डायरी भी चर्चा में है, जिसमें कई नाम और पते कोड में लिखे गए हैं। पुलिस इन्हें डिकोड कर रही है। हालाँकि, नोएडा पुलिस इस पर कुछ भी बोलने से बच रही है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, नोएडा के थाना सेक्टर-20 की पुलिस की अर्जी पर गौतमबुद्धनगर कोर्ट ने राहुल को 24 घंटे की रिमांड पर भेजा था। शुक्रवार (17 नवंबर, 2023) की दोपहर 12 बजे तक मिले रिमांड में पुलिस की अलग-अलग टीमों ने राहुल से गहन पूछताछ की। वहीं रिमांड अवधि पूरी होने के बाद राहुल को कड़ी सुरक्षा में लुक्सर जेल भेज दिया गया है।

अभी तक कि पूछताछ में पता चला कि हरियाणा के फरीदाबाद के एक गाँव में स्थित एक गोदाम में सांपों को रखा जाता था और गोदाम में ही साँपो का जहर निकाल कर रेव पार्टियों में सप्लाई किया जाता था। इन दोनों साँपो का मेडिकल परीक्षण कराए जाने के बाद वन विभाग की टीम को सौंप दिया जाएगा।

राजस्थान, झारखंड से भी लाए जाते थे साँप 

पुलिस पूछताछ में राहुल ने बताया कि कुछ प्रजाति के साँप बदरपुर के गाँव में नहीं मिलते। ऐसे में साँप राजस्थान, झारखंड और अन्य राज्यों से लाकर गाँव के गोदाम में रखे जाते थे। जहाँ उनका जहर निकाला जाता था। हालाँकि, अभी तक की जाँच के दौरान पुलिस को एल्विश यादव के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिला है। 

वहीं पुलिस तकनीकी सबूत और सर्विलांस के आधार पर एल्विश और फाजिलपुरिया की संलिप्तता के बारे में सबूत जुटाने का प्रयास कर रही है। फ़िलहाल, रिमांड पर लिए गए राहुल का पुलिस एल्विश यादव से आमना-सामना नहीं करा पाई है। जबकि अधिकारियों ने पहले यह दावा किया था कि राहुल को रिमांड पर लेकर एल्विश यादव से उसका आमना-सामना कराया जाएगा। 

FIR के लिए कोर्ट पहुँची मेनका गाँधी 

गौरतलब है कि मेनका गाँधी के एनजीओ पीएफए ने एल्विश यादव और गायक फजलपुरिया के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए कोर्ट का रुख किया है। वे एल्विश और गायक के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की धारा 9, 39, 49, 50 और 51, पशु क्रूरता निवारण अधिनियम की धारा 11 ए, पशु प्रदर्शन नियमों के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत मामला दर्ज कराने के लिए प्रयासरत है। 

याचिका में कहा गया है, “मुझे एक वीडियो मिला जिसमें एल्विश यादव द्वारा लुप्तप्राय प्रजातियों का इस्तेमाल किया गया था। मैंने इस संबंध में 15 अक्टूबर, 2023 को हरियाणा पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। जब कार्रवाई नहीं हुई तो मैं 6 नवंबर, 2023 को हरियाणा पुलिस आयुक्त से मुलाकात की। जब कोई कार्रवाई नहीं की गई तो मुझे इसे अदालत के समक्ष स्थानांतरित करने के लिए मजबूर होना पड़ा।”

बता दें कि मेनका गाँधी ने हाल ही में गुरुग्राम पुलिस कमिश्नर से बात की थी लेकिन तब भी एफआईआर दर्ज नहीं की गई थी। जिसके बाद उनके NGO ने याचिका दायर की है।

रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में एल्विश यादव का नाम नोएडा में शिकायत में दर्ज है। जिसके बाद नोएडा पुलिस ने एल्विश यादव को पूछताछ के लिए एक बार बुलाया था। वहीं दोबारा पूछताछ के लिए बुलाने पर एल्विश यादव तबीयत खराब होने की वजह से नहीं आए। 

पाकिस्तान में खोदा तो निकला तांबे के सिक्कों से भरा घड़ा, साढ़े 5 किलो है वजन: कुषाण काल से जुड़ा है इनका इतिहास, 93 वर्षों में सबसे बड़ी खोज

पाकिस्तान के पुरातत्वविदों को 93 साल बाद मोहनजोदड़ो में बड़ी खोज करने में कामयाबी मिली है। पुरातत्वविदों विशेषज्ञों की एक टीम ने गुरुवार (17 नवंबर, 2023) को मोहनजोदड़ो स्तूप के पश्चिमी किनारे पर डिवाइनिटी स्ट्रीट से तांबा के सिक्कों से भरे एक बर्तन मिलने का ऐलान किया।

ये 5000 साल पुराने इस शहर के अवशेषों में कलाकृतियों को खोजने की दिशा में 93 साल बाद पहली अहम खोज है। मोहनजोदड़ो के पुरातत्व निदेशक डॉ सैयद शाकिर शाह ने उस जगह पर खुदाई फिर से शुरू की थी।

एक महीने बाद पता चलेगा किस काल के हैं सिक्के

पुरातत्व निदेशक शाकिर शाह की इस खोज टीम में पुरातत्व संरक्षक गुलाम शब्बीर जोयो, सहायक संरक्षक इम्तियाज़ डोमकी, प्रयोगशाला सहायक रुस्तम अली भुट्टो और शोध विद्वान शेख जावेद सिंधी शामिल हैं। जानकारी के मुताबिक, जब कर्मचारी इस इलाके में संरक्षण का काम करने में मशरूफ थे।

तो इसी दौरान बुधवार (16 नवंबर, 2023) को उन्हें ताबों के सिक्कों से भरा ये घड़ा मिला था। उन्होंने इसे दोबारा से वहीं दबा दिया जहाँ से ये मिला था। इसके बाद पुरातत्व निदेशक शाह की खोज टीम ने लगातार वहाँ काम जारी रखा। लगभग तीन घंटे तक की मशक्कत के बाद मलबे में दबे तांबे के सिक्के वाले इस घड़े को सुरक्षित बाहर निकाला गया। सिक्कों को देखने से ऐसा लगता था कि उनमें मोटी जंग लग गई है और वे एक-दूसरे से चिपक गए हैं।

शाह के मुताबिक, लगभग साढ़े पाँच किलोग्राम वजन वाले सिक्कों के घड़े को बाद में साइट पर मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला में भेज दिया गया। शाकिर शाह ने मीडिया से कहा संभवतः ये सिक्के कुषाण काल के हो सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि सिक्कों पर शोध तभी शुरू होगा जब उन्हें प्रयोगशाला में खास प्रक्रिया से अलग और साफ कर लिया जाएगा। शोध पूरा होने के बाद इन सिक्कों को आगंतुकों के लिए मोहनजोदड़ो संग्रहालय में रखा जाएगा।

पुरातत्व निदेशक शाह ने आगे, “हालाँकि हमने फिलहाल सिक्कों को प्रयोगशाला में भेजा है। ये सिक्के किस काल और कितने पुराने है ये पता करने के लिए विशेषज्ञों को नियुक्त करेंगे जो सिक्कों पर अंकित शिलालेखों से ये पता करेंगे। हमें यह देखना होगा कि ये सिक्के कुषाण काल के किस राजवंश के हैं।”

उन्होंने कहा कि यह सभी के लिए अच्छी खबर है क्योंकि लगभग 100 साल के बाद साइट से इतनी बड़ी मात्रा में सिक्के मिले हैं। उन्होंने बताया कि जिस घड़े में सिक्के रखे गए थे वह टूटा हुआ था, लेकिन सिक्के सही सलामत थे। शाकिर शाह ने मीडिया से कहा कि संभवतः ये सिक्के कुषाण काल के हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि सिक्कों पर शोध तभी शुरू होगा जब उन्हें प्रयोगशाला में खास प्रक्रिया से अलग और साफ कर लिया जाएगा। शोध पूरा होने के बाद इन सिक्कों को आगंतुकों के लिए मोहनजोदड़ो संग्रहालय में रखा जाएगा।

उन्होंने आगे कहा, “हालाँकि हमने फिलहाल सिक्कों को प्रयोगशाला में भेजा है। ये सिक्के किस काल और कितने पुराने है ये पता करने के लिए विशेषज्ञों को नियुक्त करेंगे जो सिक्कों पर अंकित शिलालेखों से ये पता करेंगे। हमें यह देखना होगा कि ये सिक्के कुषाण काल के किस राजवंश के हैं।”

उन्होंने बताया कि जिस घड़े में सिक्के रखे गए थे वह टूटा हुआ था, लेकिन सिक्के सही सलामत थे। ये इसलिए सुरक्षित बच गए क्योंकि वो सड़क से 15 फीट की ऊँचाई पर कच्ची ईंटों से बनी दीवारों के बीच दबे थे। उन्होंने आगे कहा, “93 साल बाद हुई मौजूदा खोज उल्लेखनीय है और इसका श्रेय मोहनजोदड़ो टीम को जाता है।” उन्होंने कहा कि यह सभी के लिए अच्छी खबर है क्योंकि लगभग 100 साल के बाद साइट से इतनी बड़े पैमाने पर सिक्के मिले हैं।

वहीं इस खोजी टीम के मिट्टी और जल परीक्षण प्रयोगशाला के प्रभारी रुस्तम भुट्टो ने कहा कि बुरी तरह से आपस में चिपके इन सिक्कों को अलग करने की प्रक्रिया में कम से कम एक महीने का समय लगेगा। इसके बाद ही इन सिक्कों पर लिखी भाषा और बनी आकृतियों को समझा और पढ़ा जा सकेगा।

पहले 1922 में मिले थे यहाँ ताँबे के सिक्के

साइट पर शोध में लगे शेख जावेद सिंधी ने डॉन अखबार को बताया, “1922 से 1931 तक RD बनर्जी, सर जॉन मार्शल और मैके ने मोहनजोदड़ो में खुदाई की थी। इस दौरान खुदाई में उन्हें 4348 तांबों के सिक्के खुदाई में मिले थे। ये सिक्के 2 से 5 शताब्दी ईस्वी तक के कुषाण काल के थे।”

वरिष्ठ संरक्षणवादी अली हैदर गाधी ने बताया, “1921-22 में मठ की खुदाई के दौरान बनर्जी की पहली नजर उन पर पड़ी। वो जब सबसे पुराने बौद्ध फुटपाथ पर एक जगह सबसे नीचे पहुँचे तो उन्हें 40 फीट नीचे दबे सिक्कों की सात अलग-अलग परतें दिखीं। ये सभी ताम्रपाषाण काल से जुड़ी थीं।”

अली हैदर गाधी ने आगे बताया कि यहाँ से बनर्जी ने लगभग 2000 सिक्के खोजे थे। इनमें से 338 कुषाण शासक वासुदेव-1 के काल के थे। इनके आगे के भाग पर पर खड़ी पोजिशन में शाही आकृति और पीछे भगवान शिव अंकित थे। तो वहीं 1,823 सिक्के बगैर कुछ लिखे मिले थे। इसके अलावा नौ सिक्के ऐसे थे जिनके आगे के भाग पर अग्नि वेदी और पीछे के भाग पर एक अनगढ़ी आकृति थी। उन्होंने आगे कहा, “हालाँकि बाद की जाँच में यहाँ सिंधु आधिपत्य और कुषाण काल होने के सुबूत नहीं मिले थे। लेकिन यह संभावना नहीं है कि इस ऊँची समतल और बाढ़ से बचाने वाली जगह को कभी भी पूरी तरह से छोड़ दिया गया हो।”

‘स्वामी प्रसाद मौर्या की शादीशुदा बेटी ने कर ली दूसरी शादी, छिपाई पहली शादी वाली बात’: ‘दामाद’ से मारपीट के मामले कोर्ट ने सपा सांसद को किया तलब, पत्रकार ने बयाँ किया दर्द

समाजवादी पार्टी के नेता स्वामी प्रसाद मौर्या की सांसद बेटी और उनके पूरे परिवार पर ‘दामाद’ से मारपीट और बिना तलाक के दूसरी शादी का आरोप है। उन पर लखनऊ के एक पत्रकार ने आरोप लगाया है कि उन्होंने खुद को चुनावी हलफनामे में अविवाहित दिखाया है, जबकि वो पहले से शादीशुदा थी और तलाक पर फैसला साल 2021 में आया था। संघमित्रा मौर्या पर आरोप लगाए हैं सुशांत गोल्फ सिटी के रहने वाले वादी दीपक कुमार स्वर्णकार ने, जो पेशे से पत्रकार बताए जा रहे हैं।

दीपक कुमार स्वर्णकार ने कोर्ट में बताया है कि संघमित्रा मौर्य ने न सिर्फ उन्हें धोखे में रखा, बल्कि चुनावी हलफनामे में भी उन्होंने बातों को छिपाया। इन गंभीर आरोपों में बिना तलाक लिए धोखाधड़ी करके दूसरी शादी करने वाली स्वामी प्रसाद मौर्य की पुत्री संघमित्रा के साथ ही मारपीट, गाली-गलौज, जान-माल की धमकी व साजिश रचने के आरोपों में स्वामी प्रसाद मौर्य, उनकी पत्नी व बेटे के खिलाफ कोर्ट में अपील की, जिसके बाद उन सभी को बतौर आरोपित कोर्ट में तलब किया गया है।

दीपक कुमार के वकील रोहित त्रिपाठी ने एएनआई से बातचीत में कहा, “2019 में उनकी शादी संघमित्रा से हुई थी। उन्होंने दावा किया कि संघमित्रा ने अपने पिछले पति से तलाक नहीं लिया था और अपनी पिछली शादी को छुपाया था। बाद में पता चला कि मुकदमा अभी भी लंबित था। जब संघमित्रा 2021 में सांसद बनीं तो उन्होंने मेरे वादी को घर से बाहर निकाल दिया। स्वामी प्रसाद मौर्य और कुछ लोगों ने उन्हें मारा और गालियां दीं।”

कौन हैं संघमित्रा और दीपक की क्या है कहानी?

दीपक स्वर्णकार का कहना है कि वो 2016 से संघमित्रा मौर्य के साथ लिव इन रिलेशनशिप में था। संघमित्रा ने बताया था कि उनका पहली शादी से तलाक हो चुका है. जिसके बाद साल 2019 में दीपक और संघमित्रा ने घर पर ही शादी कर ली थी, लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में संघमित्रा ने चुनाव आयोग को दिए हलफनामे में खुद को अविवाहित बताया। बाद में पता चला कि संघमित्रा का 2021 में तलाक हुआ था।

उनकी पहली शादी लखनऊ के मशहूर डॉक्टर डॉ नवल किशोर शाक्य से प्रेम विवाह के तौर पर हुई थी। दोनों एक साथ एमबीबीएस की पढ़ाई करते थे। दोनों ने साल 2010 में शादी कर ली थी। हालाँकि साल 2012 से ही दोनों में अलगाव की खबरें आने लगी। दोनों का एक बच्चा भी है। संघमित्रा मौर्य ने 21 दिसंबर 2017 को लखनऊ में तलाक के लिए दायर किया और उन्हें 19 जनवरी 2021 को तलाक दे दिया गया। अब दीपक का कहना है कि संघमित्रा ने पहले तलाक की झूठी कहानी उनके साथ शेयर की थी और साल 2016 से ही उनके साथ लिव इन में रह रही थी। सांसद बनने के बाद उसने दीपक को घर से निकाल दिया।

सोशल मीडिया पर हंगामा

अवरिल द्विवेदी नाम के एक्स यूजर ने अपनी पोस्ट में लिखा है, “बाप तो नेवला था ही बेटी नागि% निकली। लखनऊ के दीपक कुमार स्वर्णकार नाम के युवक की अर्जी पर MP-MLA कोर्ट ने स्वामी प्रसाद की बेटी संघमित्रा मौर्य को धोखाधड़ी और स्वामी प्रसाद मौर्य समेत 5 को मारपीट धमकाने की धारा में 6 जनवरी को कोर्ट में तलब किया है। दीपक का आरोप है कि उसने संघमित्रा से शादी की थी और संघमित्रा ने बगैर उससे तलाक लिए दूसरा विवाह किया। उसने ये भी दावा किया कि संघमित्रा ने अपने चुनावी हलफनामे में खुद को अविवाहित बताया जो कि झूठ है। उसका आरोप है कि संघमित्रा के पिता स्वामी प्रसाद समेत अन्य ने उसके साथ मारपीट भी की।”

दीपक शुक्ला नाम के एक्स यूजर ने लिखा, “बधाई हो मौर्या जी, दामाद हुआ है।”

अनुपम मिश्रा नाम के यूजर लिखते हैं, “तो भाजपा सांसद संघमित्रा मौर्या 2019 के अपने चुनावी हलफ़नामे में जब अपने विवाहित होने की जानकारी छुपाती है, और सिर्फ़ पिता का नाम देती हैं, उस वक़्त वो कथित तौर पर एक नहीं बल्कि 2-2 व्यक्तियों से वैवाहिक संबंध में बंधी हुई थीं। उनके पहले पति डॉक्टर नवल किशोर शाक्य से तब तक उनका तलाक़ नहीं हुआ था और दीपक कुमार स्वर्णकार नामक पत्रकार ने लखनऊ की MP/MLA कोर्ट में सबूतों के साथ दावा किया है कि संघमित्रा ने उनसे 2019 में ही शादी कर ली थी। दिलचस्प बात ये है कि संगमित्रा से चुनाव हारे बदायूँ से सपा के पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव ने इस मामले को लेकर 2020 में इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका भी दायर की थी जो कि बाद में उन्होंने ‘बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों के मद्देनज़र’ वापस ले ली थी।”

मनोज शर्मा नाम के यूजर ने अपनी पोस्ट में लिखा, “लखनऊ के दीपक कुमार स्वर्णकार नाम के युवक की अर्जी पर एमपी-एमएलए कोर्ट ने स्वामी प्रसाद की बेटी संघमित्रा मौर्य को धोखाधड़ी और स्वामी प्रसाद मौर्य समेत 5 को मारपीट धमकाने की धारा में 6 जनवरी को कोर्ट में तलब किया है। दीपक का आरोप है कि उसने संघमित्रा से शादी की थी और संघमित्रा ने बगैर उससे तलाक लिए दूसरा विवाह किया। उसने ये भी दावा किया कि संघमित्रा ने अपने चुनावी हलफनामे में खुद को अविवाहित बताया जो कि झूठ है। उसका आरोप है कि संघमित्रा के पिता स्वामी प्रसाद समेत अन्य ने उसके साथ मारपीट भी की।”

इस मामले में अब एमपी-एमएलए कोर्ट के विशेष एसीजेएम अम्बरीश श्रीवास्तव ने आरोपियों को कोर्ट में पेश होने का आदेश देते हुए सुनवाई के लिए छह जनवरी 2024 की तारीख तय की है।

BPSC पास महिला टीचर, झोपड़ी में जमीन पर बैठ कर जॉइनिंग: बिहार के स्कूल के पास भवन तक नहीं, शिक्षा व्यवस्था का उड़ा मजाक

बिहार का एक वीडियो वायरल हो रहा है जहाँ बीपीएससी पास एक टीचर की जॉइनिंग किसी विद्यालय भवन में नहीं बल्कि झोपड़ी में हुई। दरअसल, यहाँ ना तो स्कूल की कोई बिल्डिंग है और ना ही कोई स्टूडेंट। दूर-दूर तक केवल जंगल ही जंगल दिखाई देता है। यहाँ पर दो-तीन झोपड़ी दिखाई दे रही है। बताया जा रहा है कि इस स्कूल में एक भी बच्चे पढ़ने नहीं आते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम चम्पारण जिले के एक विद्यालय में चयनित हुई एक शिक्षिका का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में दिख रहा है कि चार-पाँच लोग जमीन पर बैठकर  BPSC की नवनियुक्त शिक्षिका की जॉइनिंग करा रहे हैं। वहाँ बैठने के लिए कोई कुर्सी भी नहीं है। जमीन पर गमछा बिछाकर हेड मास्टर बैठे हुए हैं और नई टीचर का स्वागत जमीन पर बैठकर रहे हैं। इससे बिहार की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहा है। 

सोशल मीडिया X पर इस वीडियो को योगेश साहू नामक एक व्यक्ति ने शेयर किया है, जिसमें दिखाया जा रहा है कि बिहार के बेतिया जिले में जमीन पर बैठकर नवनियुक्त बीपीएससी शिक्षिका जॉइनिंग कर रही हैं। ये वीडियो गुरुवार (16 नवंबर, 2023) का बताया जा रहा है। इसमें दिख रहा है कि शिक्षिका जमीन पर बैठकर पेपर पर साइन कर रही है। अगल-बगल में कुछ दूसरे शिक्षक खड़े हैं।

वायरल वीडियो पश्चिमी चम्पारण जिले के बैरिया प्रखंड के सूरजपुर पंचायत के प्राथमिक विद्यालय गोबरही का बताया जा रहा है। नवनियुक्ति शिक्षिका जब जमीन पर बैठकर जॉइनिंग कर रही थी, तभी किसी ने घूम-घूम कर वहाँ का वीडियो बना लिया।

वीडियो के अनुसार, यह स्कूल शहरी क्षेत्र से बाहर है और इसमें सिर्फ दो झोपड़ियाँ हैं जिन्हें स्थानीय लोगों ने बनाया है. विद्यालय में कुल चार शिक्षक हैं, जिसमें एक महिला शिक्षिका भी हैं, लेकिन विद्यालय के 55 बच्चों में उपस्थिति शून्य है. स्कूल के प्रिंसिपल के अनुसार, नवनियुक्त शिक्षिका ने 16 नवंबर को विद्यालय का दौरा किया था। यह वीडियो उसी दिन का बताया जा रहा है। 

गौरतलब है कि वीडियो वायरल होने के बाद जहाँ बिहार की शिक्षा व्यवस्था का सोशल मीडिया पर मजाक उड़ाया जा रहा है वहीं कहा जा रहा है कि प्रिंसिपल हर साल विद्यालय बनाने के लिए विभाग को आवेदन पत्र देते हैं। 2009 में एक बार, विद्यालय बनाने के लिए विभाग ने पैसा भी भेजा था, लेकिन नदी के किनारे स्थित विद्यालय के कारण प्रिंसिपल ने तब उस पैसे को वापस भेज दिया था। उसके बाद से अब तक, विद्यालय बनाने के लिए कोई अन्य पैसा नहीं आया है। जिससे विद्यालय झोपड़ियों के सहारे नाम का खड़ा है जहाँ न कोई भवन है और कोई छात्र। 

10वीं के छात्र से जबरन यौन संबंध बनाने की कोशिश, ईसाई धर्मांतरण कराना चाहती थी शिक्षिका: पीड़ित पिता ने बयाँ किया दर्द, वायरल हुए चैट्स के स्क्रीनशॉट

उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक मिशनरी स्कूल की शिक्षिका पर 10वीं कक्षा के छात्र के साथ शारीरिक संबंध बनाने और फिर ईसाई धर्मांतरण के लिए ब्रेनवॉश करने का मामला सामने आया है। छावनी थाने में इसे लेकर गुरुवार (16 नवंबर, 2023) को 4 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। मामला सेंट एलाईयसिस (Aloysius) स्कूल का है। 16 वर्षीय छात्र के पिता ने शिकायत में कहा है कि परिवार को बच्चे की चैट के माध्यम से आता चला कि शिक्षिका ईसाई मजहब अपनाने और शारीरिक संबंध बनाने के लिए दबाव बना रही थी।

पिता ने बताया है कि जब विद्यालय में इस संबंध में शिकायत की गई तो अध्यापिका ने अपने कृत्य को स्वीकार कर लिया और फिर उसके बाद बच्चे को परेशान करने के लिए उसका पता निकलवाने लगी, ताकि मामला न्यायालय तक न पहुँचे। शिक्षिका के भाई ने भी जान-माल को नुकसान पहुँचाने की धमकी दी थी। FIR में आरोपित शिक्षिका ओलिब रोहित पर आरोप लगा है कि उन्होंने अन्य छात्र-छात्राओं का भी स्कूल में धर्मांतरण कराया है। साथ ही विरोधी पक्ष और कुछ मीडिया पोर्टलों पर पीड़ित बच्चे की तस्वीर वायरल करवाने का आरोप भी लगा है।

दोनों के चैट भी वायरल हुए हैं। फेसबुक मैसेंजर के एक चैट में लड़का पूछ रहा है कि आप 7:10 में क्यों आओगी, जिस पर शिक्षिका जवाब दे रही है कि हमें उसी समय पर बुलाया गया है। इसके बाद लड़का कहता है कि आओ जब भी आना है। इसके बाद अन्य चैट्स में बैकग्राउंड दिल की इमोजी वाला दिख रहा है। इसमें शिक्षिका ‘मिस यू, वॉन्ट यू’ लिख रही है, वहीं लड़का भी ‘आई लव यू’ लिख रहा है। एक चैट में हग करने की बात हो रही है। एक चैट में लड़का गुस्सा रहा है, क्योंकि महिला टीचर ने किसी अन्य लड़के की तस्वीर लाइक की है।

फिर वो सफाई देती है कि जिसका पोस्ट उसने लिखे किया है वो उसके भाई जैसा है। इधर लड़का धमकी देता है कि वो भी हर लड़की के पोस्ट पर लाइक-कमेंट करेगा। एक चैट में महिला खुद का दिल टूटा हुआ बता रही है और हमेशा के लिए चली जाने की बात कर रही है। साथ ही वो कहती है कि उसका दिल रो रहा है। वो लिखती है, “तुमने मुझे जीरो बना दिया, मैं बहुत अच्छा था।” उक्त स्कूल केंट कानपुर में स्थित है। कोर्ट ने भी विश्लेषण में पाया कि पीड़ित परिवार वाले दिए गए साक्ष्य और शिक्षिका के फोन में मिले सबूत मेल खा रहे थे।

पीड़ित पिता ने ‘JMD News’ और ‘SP News 365’ के खिलाफ भी पुलिस में प्रार्थना पत्र देते हुए कहा है कि इन्होंने बच्चे की तस्वीर वायरल कर दी। इस बारे में बात करते हुए बच्चे के पिता ने बताया कि जब तक वो अपने बेटे को न्याय नहीं दिला देते, तब तक वो अपनी शिखा नहीं बाँधेंगे। उन्होंने बताया कि उनका एक बेटा और एक बेटी है। जहाँ बेटा छोटा है, वहीं बेटी बड़ी है। उन्होंने पुलिस पर आरोपित शिक्षिका से घूस लेने का भी आरोप लगाया।

उन्होंने आरोप लगाया कि 9 नवंबर को कोर्ट का आदेश आया, जबकि पुलिस ने FIR दर्ज करने में एक सप्ताह की देरी कर दी। उन्होंने SHO पर आरोप लगाया कि उनके खिलाफ जाँच रिपोर्ट तैयार की गई और उन पर ही उल्टा आरोप लगा दिया कि वो महिला के साथ संबंध बनाना चाहते हैं। पिता ने बताया कि थाना प्रभारी अजय सिंह ने इसके बाद शिक्षिका की तरफ से ही शिकायत ले ली। उन्होंने थाने में अपने और अपनी पत्नी से अभद्रता का भी आरोप लगाया।

पीड़ित पिता ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी पत्र भेज कर मामले की जानकारी दी है। उन्होंने ऑपइंडिया से बात करते हुए बताया कि मामला खत्म करने के लिए SHO ने उन पर दबाव बनाया और कई मुकदमों में फर्जी फँसाने की धमकी दी। आरोपित शिक्षिका की उम्र 43 साल बताई जा रही है। एक लोकेश नाम के शिक्षक का भी नाम सामने आया है, जिसके बारे में पीड़ित पिता ने कहा कि आरोपित शिक्षिका एप पति को छोड़ कर उसके साथ कुछ महीने रही है।

लोकेश ने भी बच्चे के पिता को फोन कर के धमकाया। स्कूल के व्हाट्सएप्प ग्रुप में बच्चे और उसके परिवार की पहचान वायरल करने का आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि लिंक दिए जाने के बावजूद थाना प्रभारी ने कोई सबूत न मिलने की बात कही। उन्होंने कहा कि ऐसे पुलिस अधिकारी सीएम योगी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बदनाम कर रहे हैं, ताकि जनता उनसे त्रस्त हो जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि आरोपित शिक्षिका की तरफ से मोटा पैसा पुलिस ने लिया है।

उन्होंने कहा, “मिशनरियों के पास पैसे की कोई कमी नहीं है। मेरे बेटे के जाल में फँसने के बाद उसके व्यवहार में बदलाव आने लगा था। मेरी पत्नी शाम को पूजा करती थी तो वो आपत्ति जताता था। मंदिर में जाती थी तो रिएक्ट करने लगा था। हम बच्चे को स्कूल नहीं भेज रहे, उसका साल खराब हो रहा है। इस पर पुलिस-प्रशासन कुछ नहीं कर रहा। बच्चा वहाँ नहीं पढ़ पाएगा। हमारे अनुरोध के बावजूद DM को SHO को पत्र नहीं लिखा। दूसरे स्कूल में स्थानांतरित करने की हमारी माँग नहीं मानी गई।”

प्रकरण से जुड़ा वीडियो भी सामने आया है, जिसमें पुलिस पीड़ित बच्चे के माता-पिता से कह रही है कि हमसे मत उलझिए। साथ ही परिवार पर झूठ बोलने का आरोप लगाया गया। पुलिस ने कहा कि आप मुझसे ऐसे बात नहीं कर सकते हो। इस दौरान पीड़ित के पिता कहते हैं कि हाथ क्यों लगा रहे हो। साथ ही जाँच अधिकारी (सब-इंस्पेक्टर) का एक स्टिंग भी सामने आया है, जिसमें वो कहता दिख रहा है कि अधिकारियों के कहने पर सबको कमरे से निकाल कर बच्चे का बयान लिया।

इसमें रोहित नाम का अधिकारी आगे कहता है, “माता-पिता के बिना बयान रिकॉर्ड करना अधर्म नहीं है। कानून अलग चीज है, धर्म-अधर्म अलग चीज है। हमें अधिकारियों द्वारा दिए गए आदेश का पालन करना है और इसमें कुछ गलत हो जाता है तो कोई पाप नहीं है। मेरे पास सारे साक्ष्य हैं कि किसने क्या कहा। बच्चे के साथ गलत हुआ है, उसकी भी एक हद है। मैं माफ़ी माँगता हूँ। जब सारी चीजें हो चुकी हैं तो फोन मैंने नहीं लिया।” ऑपइंडिया के पास वीडियो, FIR कॉपी और अन्य दस्तावेज मौजूद हैं।

जब रिकी पोंटिंग ने शरद पवार को की उँगली, ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी ने धकिया कर मंच से भगा दिया: वर्ल्ड कप से पहले वायरल हुई 17 साल पुरानी Video

सोशल मीडिया पर ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट टीम का एक पुराना वीडियो वायरल हो रहा है। ये वीडियो साल 2006 का है। इस वीडियो में चैंपियंस ट्रॉफी की चैंपियन बनी ऑस्ट्रेलियाई टीम को उस समय बीसीसीआई के अध्यक्ष रहे शरद पवार विजेता ट्रॉफी देने मंच पर पहुँचे थे, जिसमें ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों ने घमंड में चूर होकर उनकी घनघोर बेईज्जती कर दी थी।

ऑस्ट्रेलियाई टीम के उस समय के कप्तान रहे रिकी पोटिंग ने सबके सामने शरद पवार को बुलाकर उनसे विजेता ट्रॉफी छीन ली थी। यही नहीं, इसके बाद जीत के नशे में चूर ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों ने उन्हें पीछे से धक्का देकर मंच से हटा दिया था।

शरद पवार को धक्के मारने वाला वही वीडियो सोशल मीडिय पर 17 साल बाद अब फिर से वायरल है। ट्रेंडुलकर नाम के एक यूजर ने एक्स पर वो वीडियो शेयर कर लोगों को शरद पवार की पुरानी बेईज्जती की याद दिलाई है।

ट्रेंडुलकर ने लिखा है, “भारत को विश्वकप के फाइनल को जीतना इसलिए भी जरूरी है, ताकि ऐसा काम पैट कमिंस जय शाह के नाथ न कर सकें।”

इस वीडियो में साफ तौर पर पोंटिंग और पूरी ऑस्ट्रेलियाई टीम की बदतमीजी साफ-साफ दिख रही है।

इस वीडियो में 30 नंबर की जर्सी पहने डेमियन मार्टिन की बदतमीजी दिखती है, जिसमें वो शरद पवार को पीछे से धक्का देकर मंच से हटा देते हैं।

याद दिला दें कि साल 2006 में हुई चैंपियंस ट्रॉफी में टीम इंडिया सुपर-4 में भी क्वालिफाई नहीं हुई थी। मगर, तब भारत होस्ट था, इसलिए ट्रॉफी देने का काम उस समय बीसीसीआई के चीफ रहे शरद पवार को करना था। जब शरद पवार ये ट्रॉफी देने गए तो ऑस्ट्रेलियाई टीम ने उनकी ये बेइज्जती की, जिसे आजतक क्रिकेट प्रेमी नहीं भुला पाए हैं।

इस वायके के बाद शरद पवार काफी नाराज भी हुए थे। एनसीपी के कार्यकर्ताओं ने मुंबई समेत देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन भी किया था। शरद पवार उस समय बीसीसीआई के अध्यक्ष ही नहीं, बल्कि केंद्रीय कृषि मंत्री भी थे। शरद पवार पर आरोप लगते थे कि देश में किसानों की आत्महत्याओं के मामले में बढ़ रहे हैं, लेकिन उन्हें क्रिकेट से फुरसत भी नहीं थी।

शरद पवार ने इस घटना के बाद ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटरों को बदतमीज कहा था और अड़ गए थे कि उनसे माफी माँगी जाए। बीसीसीआई ने धमकी भी दी थी कि ऑस्ट्रेलियाई टीम की शिकायत आईसीसी से की जाएगी।

इस विवाद के बाद रिकी पोंटिंग पर दबाव बनाकर क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने फोन पर माफी मँगवा दी गई थी और मामले को रफा-दफा कर दिया गया था। भले ही शरद पवार इस बात को अब भुलाने की बात कहते हों, पर हकीकत यही है कि इस क्लिप को देखकर आज भी भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के मन में टीस उठती है।

‘हमास आतंकी संगठन नहीं, नेतन्याहू को गोली मार देनी चाहिए’: इजरायली PM की हत्या के लिए कॉन्ग्रेस MP ने उकसाया, फिलस्तीन के समर्थन में रैली

केरल के कॉन्ग्रेस सांसद ने इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू को गोली मारने की बात कही। दरअसल, कॉन्ग्रेस सांसद ने राजमोहन उन्नीथन ने इज़राइल-हमास युद्ध के बीच केरल के कासरगोड में फिलिस्तीन और हमास के समर्थन रैली में हिस्सा ले रहे थे। इस रैली कॉन्ग्रेस नेता ने हमास की निंदा तो छोड़िए उल्टा इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू एक युद्ध अपराधी बताते हुए उन्हें बिना मुकदमे के सीधे गोली मारने की बात कही।

कॉन्ग्रेस नेता ने कहा कि हमास बंदूक उठाकर केवल अपनी जमीन, वहाँ के लोगों की रक्षा कर रही है। हमास आतंकी नहीं है। यदि कोई हमास को आतंकी कहता है तो उसका कड़ाई से विरोध करना है। कॉन्ग्रेस नेता यहीं नहीं रुके उन्होंने आगे अमेरिका का उदाहरण देते हुए यह भी कहा, “यदि हमास आतंकी है तो हम सब भी आतंकी है।”

कॉन्ग्रेस नेता ने नेतन्याहू को गोली मारने को सही साबित करने के लिए कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद, न्यूरमबर्ग ट्रायल (Nuremberg trials) का उपयोग युद्ध अपराधों में शामिल लोगों के लिए किया गया था। इसमें युद्ध अपराधियों को बिना किसी मुकदमे के गोली मार दी गई थी।

कॉन्ग्रेस नेता ने कहा कि अब समय आ गया है कि न्यूरमबर्ग मॉडल का पुनः उपयोग किया जाए। बेंजामिन नेतन्याहू दुनिया के सामने युद्ध अपराधी बनकर खड़े हैं। नेतन्याहू को बिना किसी मुकदमे के गोली मारकर हत्या करने का समय आ गया है क्योंकि वह इस स्तर की क्रूरता कर रहे हैं।

कॉन्ग्रेस नेता खुलेआम फिलिस्तीन के समर्थन में बयानबाजी करते हुए नेतन्याहू के खिलाफ जहर उगला। उन्होंने कहा कि जिनेवा कन्वेंशन के सभी समझौतों को तोड़ने वालों को दंडित किया जाना चाहिए।

बता दें कि केरल की प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी (KPCC) 23 नवंबर इज़राइल-हमास युद्ध के बीच फिलिस्तीनी लोगों के साथ एकजुटता की घोषणा करने के लिए कोझिकोड समुद्र तट पर एक रैली आयोजित करने जा रही है। ऐसे में मीडिया रिपोर्ट में बताया जा रहा है कि अखिल भारतीय कॉन्ग्रेस कमेटी के महासचिव केसी वेणुगोपाल फिलिस्तीन समर्थक इस रैली का उद्घाटन करेंगे।

हालाँकि, केरल में हमास और फिलिस्तीन का समर्थन नया नहीं है। वहाँ वामपंथी पार्टियों के साथ ही कट्टरपंथी मुस्लिम भी खुलेआम आतंकियों के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। 

गौरतलब है कि इजरायल-हमास युद्ध 43वें दिन में प्रवेश कर गया है और अब तक हजारों लोग मारे जा चुके हैं। इस युद्ध की शुरुआत तब हुई जब फिलिस्तीनी आतंकवादी समूह, हमास ने इज़रायल पर हमला किया और 1400 से अधिक इजरायलियों को बेरहमी से मार डाला था। वहीं जवाबी कार्रवाई में इजरायली सेना ने गाजा पट्टी और फिलिस्तीन के कुछ हिस्सों पर हमले कर रही है। 

ससुर BCCI अध्यक्ष, बहू के कपड़े पर संग्राम: सुनील गावस्कर की ‘पैंट’ दिखा किया ट्रोल, बोलीं मयंती लैंगर- फाइनल में फुल सूट पहनूँगी

ICC वनडे क्रिकेट वर्ल्ड कप 2023 के फाइनल में रविवार (19 नबंबर, 2023) को भारत और ऑस्ट्रेलिया गुजरात के अहमदाबाद स्थित ‘नरेंद्र मोदी स्टेडियम’ में भिड़ने वाले हैं। ‘स्टार स्पोर्ट्स’ चैनल सैटेलाइट पर इन मैचों का प्रसारण कर रहा है। BCCI (भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड) के अध्यक्ष रोजर बिन्नी की बहू और पूर्व क्रिकेटर स्टुअर्ट बिन्नी की पत्नी मयंती लैंगर बतर एकत्र इस चैनल से जुड़ी हुई हैं। इसी तरह पूर्व सलामी बल्लेबाज सुनील गावस्कर भी बतौर कमेंटेटर एवं विशेषज्ञ इससे जुड़े हुए हैं।

एक मैच के दर्जन दोनों को मैदान पर साथ में देखा गया। इस दौरान मयंती लैंगर और सुनील गावस्कर बातचीत कर रहे थे और इसका सीधा प्रसारण किया जा रहा था। हालाँकि, इस दौरान लोगों ने दोनों के ड्रेस को लेकर मजाक उड़ाना शुरू कर दिया। जहाँ मयंती लैंगर ने ब्लू कोट पहन रखा था, वहीं सुनील गावस्कर ने सफ़ेद शर्ट के साथ ब्लू फुलपैंट। मयंती लैंगर क टाँगों को देख कर लोग कहने लगे कि उनका पजामा सुनील गावस्कर ने पहन लिया है। कुछ लोगों ने तो तस्वीर एडिट कर के मयंती लैंगर को पजामा पहना दिया और सुनील गावस्कर को हाफ पैंट।

लोगों की ट्रॉलिंग के बाद मयंती लैंगर ने इस पर प्रतिक्रिया दी है। इस तस्वीर में वो एक अन्य महिला के साथ एक कमरे में दिख रही हैं, जहाँ कपड़े और जूते पड़े हुए हैं। मयंती लैंगर इस तस्वीर में सेल्फी लेती हुई दिख रही हैं। कुछ लोग तंज कसते हुए ये भी कह रहे थे कि मयंती लैंगर के पास पैंट खरीदने के लिए पैसे नहीं हैं, इसीलिए उन्होंने सिर्फ कोट पहन रखा है। मयंती लैंगर ने अब लोगों से कहा है कि मैं आप सब की सच्ची चिंताओं को देख कर द्रवित हूँ।

उन्होंने लिखा, “आप सब की चिंताएँ, जिन्होंने मुझे अनगिनत पोस्ट्स में टैग किया है। मेरे परिवार और दोस्तों को बड़ी संख्या में जो तस्वीरें भेजी जा रही हैं। कुछ तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ की गई है, ब्लेजर ड्रेस की क्रूरता को कम कर के दिखाने के लिए। आप सब डरिए मत, मैं फाइनल मैच के लिए हमलोग फुल सूट पहन कर आने में समर्थ हैं।” बता दें कि फाइनल मैच में भी ‘स्टार स्पोर्ट्स’ की तरफ से मयंती लैंगर प्रेजेंटेशन देंगी। महिला स्पोर्ट्स एंकरों में वो काफी लोकप्रिय हैं।

मयंती लैंगर के पति स्टुअर्ट बिन्नी भी भारत के लिए खेल चुके हैं और वो ऑलराउंडर हुआ करते थे। वहीं उनके ससुर रोजर बिन्नी 1983 में वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम के सदस्य रहे हैं। वो भी ऑलराउंडर हुआ करते थे। दोनों ने सितंबर 2012 में शादी रचाई थी।

‘कॉन्ग्रेस सबसे भ्रष्ट पार्टी, नहीं चाहिए इनसे सम्मान’ : सोशल वर्कर जसप्रीत कौर ने ठुकराया IYC का ‘इंदिरा प्रदर्शनी अवार्ड’ , बोलीं- ये सिख नरसंहार के जिम्मेदार​

दिल्ली की युवा सोशल वर्कर जसप्रीत कौर ने कॉन्ग्रेस की युवा विंग भारतीय युवा कॉन्ग्रेस (IYC) के दिए इंदिरा प्रियदर्शनी पुरस्कार को लेने से इनकार कर दिया। उनका कहना है कि कॉन्ग्रेस सबसे भ्रष्ट पार्टी है और सिख नरसंहार के लिए जिम्मेदार है।

कौर ने ये जानकारी शुक्रवार (17 नवंबर) को अपने एक्स हैंडल पर शेयर की। पोस्ट में उन्होंने एक स्क्रीनशॉट डाला जिसमें IYC के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीनिवास बीवी की ओर से उन्हें ईमेल आया था।

मेल के जवाब में कौर ने अपने एक्स पोस्ट में लिखा,”मैं इंदिरा प्रियदर्शनी पुरस्कार लेने से इनकार करती हूँ, क्योंकि यह भारतीय युवा कॉन्ग्रेस है, जो सबसे भ्रष्ट पार्टी है और पक्के तौर पर सिख नरसंहार के लिए जिम्मेदार हैं!”

गौरतलब है कि जसप्रीत कौर दिल्ली में ‘तेजस फॉर चेंज फाउंडेशन’ नाम से एक एनजीओ चलाती हैं। इस एनजीओ के जरिए वो वह गरीब, वंचितों और विकलांग बच्चों और युवाओं के लिए काम करती हैं।

उन्हें IYC के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीवी से मिले मेल में लिखा था, ”प्रिय पुरस्कार विजेताओं। हम आपको यह सूचित करते हैं कि भारतीय युवा कॉन्ग्रेस ने 18 नवंबर, 2023 को सुबह 11:00 बजे से जवाहर भवन, नई दिल्ली में ‘इंदिरा प्रियदर्शनी पुरस्कार’ समारोह का आयोजन किया है। आपसे अनुरोध है कि आप अपना कीमती वक्त दें और कार्यक्रम में भाग लें। युवा कॉन्ग्रेस के सदस्यों को मार्गदर्शन, प्रेरणा देने और उत्साह बढ़ाने के लिए अपनी मौजूदगी से इस अवसर की शोभा बढ़ाएँ।”

ऑपइंडिया से जसप्रीत कौर ने की बात

ऑपइंडिया से बात करते हुए जसप्रीत कौर ने कहा, “मैं दिल्ली में ‘तेजस फॉर चेंज फाउंडेशन’ नाम से अपना एनजीओ चलाती हूँ। मेरे एक जानने वाले भी दिल्ली में एक एनजीओ भी चलाते हैं। मैं उनसे जुड़ी थी। उन्होंने मुझसे कहा था कि वह इस इंदिरा प्रियदर्शनी पुरस्कार के लिए मेरा नाम देना चाहते हैं। उस वक्त मुझे नहीं पता था कि यह पुरस्कार कॉन्ग्रेस पार्टी देती है।”

उन्होंने आगे कहा, “कल (17 नवंबर) रात करीब 9:20 बजे मुझे कॉन्ग्रेस पार्टी की आईडी से इस पुरस्कार के लिए ईमेल आया। मैंने कॉन्ग्रेस का नाम पढ़ते ही तुरंत यह पुरस्कार लेने से इनकार कर दिया। मुझे मिले मेल में पुरस्कार पाने वाले लगभग 14 से 15 अन्य लोगों का भी जिक्र है। हालाँकि मैं उन्हें नहीं जानती।”

जसप्रीत कौर ने आगे कहा, ”मुझे पता है कि कॉन्ग्रेस पार्टी ने 1984 में जिस तरह से सिखों का नरसंहार किया था उसे देखते हुए अगर मैंने इस पार्टी से यह पुरस्कार लिया होता तो ये मेरे पूरे सिख समुदाय के लिए एक अपमानजनक बात होती। मैं किसी भी कीमत पर कॉन्ग्रेस से कुछ भी नहीं लेना चाहती।”

बताते चलें कि इंदिरा प्रियदर्शनी पुरस्कार भारतीय युवा कॉन्ग्रेस सामाजिक कल्याण के कामों, शिक्षा, कला, संस्कृति और खेल जैसे कई क्षेत्रों में योगदान देने वाले युवाओं को देती है। यह पुरस्कार 1995 में शुरू किया गया था और तब से यह हर साल दिया जाता है।

उन्होंने आगे कहा, “सोशल मीडिया पर कई लोग मुझे इसके लिए ट्रोल कर रहे हैं। वे कह रहे हैं कि मैंने पुरस्कार से इसलिए इंकार कर दिया क्योंकि मैं भाजपा से हूँ। मैं भाजपा से जुड़ी नहीं हूँ। लेकिन ट्रोलर्स मेरे पुराने ट्वीट्स (एक्स पर पोस्ट), पोस्ट के स्क्रीनशॉट और तस्वीरें उठा रहे हैं। मैं किसी पार्टी से नहीं हूँ। सच तो यह है कि मैं किसी भी हालात में यह पुरस्कार नहीं लेती फिर चाहे में किसी विशेष पार्टी का समर्थन करती हूँ या नहीं।”

ट्रोल होने के बारे में उन्होंने कहा, ”मैंने ‘मेरी माटी मेरा देश’ अभियान के एक कार्यक्रम में भाग लिया था। यह शिवाजी कॉलेज में आयोजित किया गया था। मुझे वहाँ एनजीओ सदस्य होने से गेस्ट के तौर बुलाया गया था। तजिंदर पाल सिंह बग्गा जी भी वहाँ मौजूद थे। वह राजनीतिक तौर से सक्रिय हैं। मैं नहीं हूँ, लेकिन सिर्फ इसलिए कि मैं एक तस्वीर में उनके जैसे किसी शख्स के साथ देखी थी तो लोगों ने दावा करना शुरू कर दिया कि मैं भाजपा से हूँ। मेरे पास भाजपा में कोई पद नहीं है। मैं उनकी कुछ नीतियों का समर्थन करती हूँ यह सच है, लेकिन मैं बीजेपी की सदस्य नहीं हूँ।”

जसप्रीत कौर पत्रकारिता और जनसंचार में ग्रेजुएट हैं। इसके अलावा वो फ्रेंच भाषा भी सिखाती हैं। उन्होंने दिल्ली में ‘तेजस फॉर चेंज फाउंडेशन’ की नींव दिसंबर 2022 में रखी थी। हालाँकि इसका काम 2023 में शुरू हुआ। यह एनजीओ विकलांग बच्चों और वंचित युवाओं के लिए खेल में उनकी भागीदारी बढ़ाने और उनकी शिक्षा के लिए काम करता है।