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5 तरफ से प्रयास, बाबा बौखनाथ से प्रार्थना, अभी और लगेगा समय… उत्तरकाशी में फँसे मजदूरों को निकालने के लिए अब तलाशे जा रहे नए रास्ते, वर्टिकल ड्रिलिंग के लिए प्रयास

उत्तराखंड के उत्तरकाशी की सिल्क्यारा सुरंग में फँसे 41 मजदूरों को बचाने के प्रयासों को एक सप्ताह हो गया है। अब मजदूरों को बचाने के लिए 5 तरफ से प्रयास किया जा रहा है। सुरंग के दोनों मुहानों और ऊपर से भी मजदूरों तक पहुँचने के प्रयास किए जा रहे हैं।

गौरतलब है कि 12 नवम्बर की सुबह 41 मजदूर उत्तरकाशी की इस सिल्क्यारा सुरंग में मलबा आ जाने की वजह से फँस गए थे। यह तब से वहीं फँसे हुए हैं। मजदूरों के पास मलबे के भीतर से सुरंग बना कर पहुँचने का प्रयास हो रहा है। इसके अलावा अब सुरंग के ऊपर से भी ड्रिलिंग करके मजदूरों को निकालने के प्रयास किए जा रहे हैं।

सबसे पहले यह निर्णय लिया गया था कि मलबा हटा कर मजदूरों को बचाया जाए लेकिन इसमें लगातार नया मलबा आने के कारण यह संभव नहीं हो सका। इसके पश्चात निर्णय लिया गया कि 900 मिलीमीटर व्यास वाली पाइप डाल मजदूरों को निकाला जाएगा।

इस काम को ऑगर मशीनों से किया जाना था। हालाँकि, इन मशीनों की ड्रिलिंग से पहाड़ में लगातार दरकने की आवाजें आ रही हैं जिससे काम प्रभावित हो रहा है। दिल्ली से नई ऑगर मशीन भी वायुसेना ने उत्तराखंड पहुँचाई थी। मलबे के भीतर से पाइप डालने के दौरान कई बार काम रुक रहा है। इसके अलावा मजदूरों तक पहुँचने के लिए अब नए रास्ते तलाशे जा रहे हैं।

एक टीम ने सिल्क्यारा के दूसरे मुहाने से ड्रिलिंग करने की संभावना जताई है। सुरंग के दूसरे मुहाने तक मशीनें पहुँचाने के लिए रोड बनाने का काम भी किया जा रहा है। सुरंग के ऊपर से वर्टिकल ड्रिलिंग के लिए जगह की पहचान की गई है। इस तक पहुँचने के लिए रास्ता बनाने का काम भारतीय सेना को सौंपा गया है। यहाँ तक पैदल पहुँचने के लिए रास्ता बनाया जाएगा।

इस रेस्क्यू आपरेशन में अब प्रधानमंत्री कार्यालय सीधे तौर पर जुड़ गया है। राज्य सरकार में सलाहकार भाष्कर खुलबे और पीएमओ में अफसर मंगेश घिल्डियाल घटनास्थल पहुँच हैं। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी भी आज उत्तरकाशी की सिल्क्यारा सुरंग वाली जगह पर पहुँच रहे हैं।

मजदूरों को खाना पानी और दवाइयाँ पहुँचाने का काम इस दौरान जारी है। सुरंग में पानी पहुँचाने वाले पाइप के जरिए यह काम किया जा रहा है। जानकारों का कहना है कि लगातार समस्या आने के कारण समय ज्यादा लग रहा है और अभी हो सकता है मजदूरों को निकालने में 4-5 दिन लग सकते हैं।

सुरंग के भीतर जिस 60 मीटर के इलाके में मलबा आया है, उसमें से 24 मीटर तक मशीनें पाइप डालने में सफल रही हैं। हालाँकि, इनकी रफ़्तार काफी कम है। मजदूरों ने बाहर मौजूद लोगों से बात भी की है। उत्तर प्रदेश के एक अधिकारी ने भी अंदर फंसे मजदूरों से बात की, उन्होंने कहा कि उन्हें जल्दी निकाला जाए।

सुरंग के बाहर स्थानीय देवता बाबा बौखनाग देवता का एक मंदिर भी स्थापित किया गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वह यहाँ के देवता हैं इसलिए मजदूरों को बचाने में उनका आशीर्वाद अति आवश्यक है।

भारत की जीत के लिए देश भर के मंदिरों में हवन-पूजन: ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मैच को लेकर देश भर में उत्साह, तेंदुलकर सहित कई हस्तियाँ पहुँचीं अहमदाबाद

विश्वकप 2023 का फाइनल मुकाबला आज (19 नवम्बर 2023) को अहमदाबाद के नरेन्द्र मोदी स्टेडियम में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेला जाएगा। इस मैच में भारत की जीत के लिए देश भर में व्रत, हवन-पूजन और प्रार्थनाओं का दौर चल रहा है। यह मैच दोपहर 2 बजे शुरू होगा। मैच के लिए एक दिन पहले से ही फैन्स स्टेडियम के बाहर जुटने लगे हैं। दोनों टीमें भी अहमदाबाद पहुँच चुकी हैं।

भारत की जीत के लिए देश भर में कई जगह हवन किया गया है। रतलाम, कानपुर, पंचकूला, मुंबई, ऋषिकेश समेत देश के तमाम शहरों में भारतीय टीम की जीत के लिए भारतीय टीम के खिलाडियों की तस्वीरों के साथ पूजा अर्चना की जा रही है। कहीं-कहीं सुन्दरकांड का पाठ किया जा रहा है।

कुछ फैन्स ने भारत की जीत के लिए निर्जला व्रत तक रखा है। यूपी के मुजफ्फरनगर के 10 लड़कों ने भारत की जीत की कामना करते हुए निर्जला व्रत रखा है। उनका कहना है कि भारत के जीतने तक वे ना ही कुछ खाएँगे और ना ही कुछ पिएँगे।

देश के कई बड़े मंदिरों में भी भारत की जीत के लिए प्रार्थनाएँ हो रही हैं। उज्जैन के महाकाल मंदिर के पुजारी महेश शर्मा ने कहा है, “हम भारत को सभी क्षेत्र में विश्वगुरु बनते देखना चाहते हैं।” महाकाल मंदिर में भस्म आरती के दौरान भारत की जीत के लिए पूजा अर्चना की गई।

वाराणसी में कुछ मुस्लिम महिलाओं ने भारत की जीत के लिए नमाज पढ़ीं। वहीं, अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में भी भारत की जीत की कामना की गई। तमिलनाडु के सालेम स्थित पेरूमल मंदिर में जीत के लिए देशवासियों ने पूजा-अर्चना की।

आज होने वाले मुकाबले में ड्रोन शो, लेजर शो और कई कलाकारों की प्रस्तुतियाँ भी होंगी। फैन्स भारत की जीत के लिए कई पुराने मुकाबलों में हुई घटनाओं की भी इस बार से तुलना कर रहे हैं।

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच यह फाइनल मैच देखने के लिए कई बड़ी हस्तियाँ भी स्टेडियम पहुँच रही हैं। पूर्व क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर, अभिनेता मनोज जोशी समेत पूर्व में विश्वकप जीतने वाली टीमों के कप्तान समेत अन्य बड़े खिलाड़ी अहमदाबाद पहुँचे हैं।

जनवरी 2024 में भव्यता के साथ श्रद्धालुओं के लिए खुलने जा रहे अयोध्या के श्रीराम मंदिर के पुजारी ने भी रामलला से प्रार्थना की है। आचार्य सत्येन्द्र दास ने भारत की ऑस्ट्रेलिया के ऊपर जीत के लिए पूजा अर्चना की है। अयोध्या की हनुमान गढ़ी में भी प्रार्थनाएँ हो रही हैं।

हलाल सर्टिफिकेट के नाम पर हिंदू एवं अन्य समुदाय के व्यापारियों का बहिष्कार, आतंकियों को फंडिंग की आशंका: FIR में साजिशों का खुलासा

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 17 नवम्बर 2023 को हलाल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी और जमीयत उलेमा-ए-हिन्द सहित कुछ अन्य संस्थाओं एवं लोगों पर FIR दर्ज हुई थी। इस FIR में हलाल सर्टिफिकेट को हिन्दू आस्था पर आघात बताते हुए इससे जुड़े लोगों पर कार्रवाई करने की माँग की गई थी। केस दर्ज होने के बाद उत्तर प्रदेश शासन ने अगले दिन 18 नवम्बर को हलाल के बजाय FSSAI (Food Safety and Standards Authority of India) प्रमाण पत्र को मानकों के लिए उचित बताया।

ऑपइंडिया के पास मौजूद इस केस में दर्ज हुई FIR में हलाल इंडिया के चेन्नई और मुंबई कार्यालय के साथ जमीयत उलेमा ए हिन्द के दिल्ली और मुंबई ऑफिस को नामजद किया है। इसके अलावा हलाल सर्टिफिकेट को बढ़ावा देने वाली कुछ अज्ञात कम्पनियाँ, राष्ट्र विरोधी साजिश रचने वाले कुछ अन्य अज्ञात लोग, आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा दे रहे अज्ञात समूह और जनआस्था से खिलवाड़ करने के साथ दंगे करवाने की साजिश रच रहे कुछ अज्ञात लोगों को नामजद किया गया है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

शिकायतकर्ता शैलेन्द्र कुमार ने अपनी शिकायत में बताया है कि हलाल सर्टिफिकेट मजहब के नाम पर मजहब विशेष के लोगों द्वारा जारी किया जा रहा है। इस साजिश में एक मजहब विशेष के लोगों के सामानों की बिक्री बढ़ाने के लिए हलाल के नाम पर छल किया जा रहा है। FIR में कहा गया है कि जिन कंपनियों ने इनसे हलाल सर्टिफिकेट नहीं लिया है, उनकी बिक्री घटाने के लिए आपराधिक कृत्य किया जा रहा है।

शिकायत में हलाल सर्टिफिकेट को मुस्लिमों की अपनी तरफ आकर्षित करने का खास तरीका बताया गया है। FIR में आरोप है कि हलाल सर्टिफिकेट देने वाली कंपनियों ने सरकार के नाम का भी फर्जी कागजातों से दुरूपयोग किया है। हालात सर्टिफिकेट देने वाली कंपनियों के कागजातों में भी गड़बड़ी होने की बात कही गई है। इसके साथ ही गया है कि इसके जरिए समाज में विभाजन पैदा करने की कोशिश की जा रही है।

शिकायतकर्ता ने सभी आरोपितों पर समाज में विद्वेष फैलाने, आपराधिक कृत्य कर के करोड़ों रुपए कमाने, राष्ट्र विरोधी साजिश रचने के साथ हलाल सर्टिफिकेट से मिल रहे पैसे से आतंकियों को फंडिंग होने की आशंका जताई गई है। FIR में कहा गया है कि इससे होने वाले अनुचित लाभ को देश विरोधी गतिविधियों में इस्तेमाल किया जा रहा है।

FIR में कहा गया है कि तेल, साबुन, टूथपेस्ट, शहद आदि तक के लिए हलाल सर्टिफिकेट दिए जा रहे हैं, जबकि इनके लिए हलाल सर्टिफिकेट की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि ये शाकाहारी वस्तुएँ हैं। शाकाहारी वस्तुओं के लिए हलाल सर्टिफिकेट की आवश्कयता नहीं होती। इसमें आगे कहा गया है कि एक विशेष वर्ग द्वारा प्रचार किया जा रहा है कि उन वस्तुओं का इस्तेमाल ना करो, जिन्हें हलाल सर्टिफिकेट नहीं दिया गया हो। इससे दूसरे वर्ग के व्यापारियों के हितों को नुकसान पहुँचाया जा रहा है।

हिंदू महिलाओं पर मदरसे से पथराव करने वालों में 9 से 12 साल के आरोपित: नूहं प्रशासन ने दो को भेजा बाल सुधार गृह और एक को रिहा किया

हरियाणा के नूहं में कुआं पूजन के लिए जा रही हिंदू महिलाओं पर गुरुवार (16 नवंबर 2023) की शाम मदरसे से पथराव किया गया था। इस पथराव में 8 महिलाएँ घायल हो गई थीं। इसके बाद इलाके में तनाव फैल गया था। महिलाओं पर पत्थर फेंकने वाले मुस्लिम समाज के तीन नाबालिगों में से दो को बाल सुधार गृह भेज दिया गया है। इन पर कार्रवाई सीसीटीवी फुटेज के आधार पर की गई है।

पुलिस ने शनिवार (18 नवंबर 2023) को कहा कि पत्थरबाजी को लेकर तीन नाबालिगों को पकड़ा गया था। इनमें से 9 साल के नाबालिग को बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया गया और फिर उसे जमानत दे दी गई। वहीं 12 साल के दो नाबालिगों को किशोर न्याय बोर्ड के सामने पेश किया गया। इसके बाद वहाँ से दोनों को बाल सुधार गृह भेजा गया।

नूहं पुलिस के प्रवक्ता कृष्ण कुमार के मुताबिक, “तीनों मदरसे के छात्र हैं और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर उन्हें पकड़ा गया। अभी अन्य लोगों की संलिप्तता सामने नहीं आई है, लेकिन मामले में आगे की जाँच चल रही है। अगर हमें जाँच के दौरान किसी अन्य के शामिल होने के सुबूत मिलते हैं तो कानून के मुताबिक उन पर कार्रवाई की जाएगी।”

इस मामले में पुलिस ने अज्ञात लोगों पर एफआईआर दर्ज करने के बाद तीनों नाबालिगों से उनकी अभिभावकों की मौजूदगी में पूछताछ के बाद उन्हें पकड़ा। रिपोर्ट के मुताबिक नूहं के वार्ड नंबर 10 में रहने वाले राम अवतार के यहाँ बेटा पैदा हुआ था। रिवाज के मुताबिक, उनके परिवार की महिलाएँ 16 नवंबर को कुआँ पूजन के लिए पास के शिव मंदिर में जा रही थी। इस दौरान रात करीब 8:20 उन पर मदरसे से पथराव किया गया।

घटना की सूचना पाकर नूहं पुलिस अधीक्षक नरेंद्र बिजारणिया पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँच गए। तब पथराव की घटना पर एसपी बिजारणिया ने कहा था, “महिलाओं की शिकायत पर एफआईआर दर्ज कर ली गई है। मदरसे से फुटेज आए थे जिसमें 3 लड़के खड़े दिख रहे थे। उसके आधार पर तीनों लड़कों की पहचान की गई है।”

उन्होंने आगे कहा था, “इन तीनों को राउंडअप कर लिया गया है और अब इन्हें कोर्ट में पेश किया जाएगा। 8 महिलाओं ने FIR दर्ज कराई है और इन्हें मामूली चोटें आई हैं। हम तीनों लड़कों से पूछताछ कर रहे हैं कि यह घटना क्यों हुई। तीनों बच्चे नाबालिग हैं। हम महिलाओं के लगाए गए सभी आरोपों की जाँच करेंगे। स्थिति नियंत्रण में है।”

नूहं की इस घटना को लेकर शुक्रवार को विश्व हिंदू परिषद की प्रेस कॉन्फ्रेंस में वीएचपी प्रदेशाध्यक्ष पवन कुमार ने उपद्रवियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की माँग की थी। बताते चले कि नूहं में इस साल 31 जुलाई को ब्रजमंडल यात्रा में शमिल हिंदू श्रद्धालुओं पर भी हमला किया गया था।

‘…मैं तृषा को बाहों में उठाकर बेडरूम में ले जाऊँगा और फिर… रेप सीन मेरे लिए नई बात नहीं’: मंसूर अली के बयान पर बोलीं ऐक्ट्रेस- यह नीच आदमी है

तमिल अभिनेता मंसूर अली खान को अभिनेत्री तृषा कृष्णन ने बेडरूम वाले सीन पर करारा जवाब दिया है। मंसूर अली खान ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा था कि हाल ही में आई लियो फिल्म में उन्हें तृषा के साथ बेडरूम सीन की आशा थी। तृषा ने कहा है कि मंसूर जैसे लोग मानवता पर धब्बा हैं।

मंसूर अली खान, तृषा कृष्णन और तमिल अभिनेता विजय ने अक्टूबर 2023 में रिलीज हुई फिल्म लियो में एक साथ काम किया था। विजय इस फिल्म में मुख्य किरदार में थे, जबकि मंसूर अली ने अन्य रोल निभाया था।

मंसूर अली खान ने कहा, “मुझे जब मालूम हुआ कि मैं तृषा के साथ काम कर रहा हूँ तो मुझे लगा कि यह एक बेडरूम सीन होगा। मुझे लगा कि मैं फिल्म में तृषा को उठाकर बेडरूम में ले जाऊँगा जैसा मैंने और भी कई अभिनेत्रियों के साथ पहले फिल्मों में किया है। मैंने पहले भी कई रेप सीन किए हैं और मेरे लिए यह कोई नई बात नहीं है। लेकिन, इन लोगों ने कश्मीर में शूटिंग के दौरान मुझे तृषा को देखने तक नहीं दिया।”

तृषा कृष्णन दक्षिणी सिनेमा की काफी पॉपुलर अभिनेत्री हैं। खान के इस बयान पर अब तृषा कृष्णन और लियो फिल्म के डायरेक्टर लोकेश कंगराज ने उनकी आलोचना की है। सोशल मीडिया पर भी मंसूर को उनके इस स्त्री-विरोधी बयान के चलते भारी विरोध झेलना पड़ रहा है।

मंसूर अली खान को जवाब देते हुए कृष्णन ने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “मेरी जानकारी में एक वीडियो आया है, जिसमें मंसूर अली खान मेरे बारे में उल्टी सीधी बातें कर रहे हैं। मुझे यह बयान स्त्री-विरोधी, रूढ़िवादी, अश्लील और भद्दा लगा। मैं इसकी निंदा करती हूँ। वो मेरे साथ काम करने की उम्मीद करते रह सकते हैं, लेकिन यह मेरी खुशकिस्मती रही है कि मैंने उनके जैसे नीच आदमी के साथ कभी काम नहीं किया है और कोेशिश करुँगी कि भविष्य में भी ना करूँ। उनके जैसे लोग मानवता पर दाग हैं।”

फिल्म के डायरेक्टर लोकेश कंगराज ने भी मंसूर की आलोचना की। उन्होंने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “मैं मंसूर अली खान के बयान से आहत और क्रुद्ध हूँ। हमने एक ही टीम में काम किया है। किसी भी उद्योग में महिलाओं और साथ में काम करने वालों के लिए सम्मान आवश्यक है। मैं इस रवैये की निंदा करता हूँ।”

खान का महिलाओं पर ऐसे बयान देना कोई नई बात नहीं है। वह इससे पहले अभिनेता रजनीकांत की फिल्म जेलर के एक गाने ‘कावाला’ में अभिनेत्री तमन्ना भाटिया के डांस पर भी ऐसा ही बयान दे चुके हैं। अगस्त 2023 में मंसूर अली खान ने तमन्ना के इस गाने पर भद्दी टिप्पणियाँ की थीं, जिसके बाद उन्हें सोशल मीडिया पर लोगों ने काफी सुनाया था।

उत्तर प्रदेश में अब जेल भेजवा देगा ‘हलाल’: निर्माण, भंडारण, वितरण, खरीद-बेच सब पर योगी सरकार ने लगा दिया बैन, कहा- ये नियमों का उल्लंघन

उत्तर प्रदेश में अब हलाल सर्टिफिकेट के कोई मायने नहीं रह गए हैं, बल्कि ये हलाल सर्टिफिकेट वाले उत्पादों को रखने पर जेल की हवा खानी पड़ सकती है। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने तय किया है कि राज्य की सीमा के भीतर हलाल उत्पादों के उत्पादन, वितरण, भण्डारण पर संपूर्ण बैन लागू हो। इसके लिए आधिकारिक तौर पर आदेश भी जारी कर दिया गया है।

बता दें कि एक खास वर्ग हर सामान में ‘हलाल सर्टिफिकेट’ ढूँढता था, जिससे व्यापारिक वर्ग को वर्गीकृत ढंग से नुकसान उठाने पर मजबूर होना पड़ता था। अब ऐसा बिल्कुल नहीं चलने वाला है।

दरअसल, उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से जारी आदेश में कहा है कि हलाल सर्टिफिकेट किसी उत्पाद की गुणवत्ता से संबंधित नहीं है। ऐसे निशान गुणवत्ता को लेकर भ्रम की स्थिति ही पैदा करते हैं। जिन उत्पादों पर इस तरह के प्रतिबंध लगाए गए हैं, उनका उल्लेख राज्य सरकार द्वारा जारी पत्र में साफ तौर पर किया गया है।

इस पत्र में बताया गया है कि डेरी उत्पाद, चीनी, बेकरी उत्पाद, पिपरमिंट ऑयल, रेडी टू ईट सेवरीज व खाद्य तेल आदि के लेबल पर हलाल प्रमाणन का उल्लेख किया जा रहा है, जो कि गलत है। उत्तर प्रदेश सरकार का कहना है कि इन उत्पादों के लिए एफएसएसएआई (Food Safety and Standards Authority of India) प्रमाण पत्र ही काफी है।

उत्तर प्रदेश सरकार के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रसाधन विभाग की आयुक्त अनीता सिंह द्वारा जारी पत्र में साफ तौर पर लिखा गया है कि उत्तर प्रदेश राज्य की सीमा में हलाल प्रमाणन युक्त खाद्य उत्पादों के निर्माण, भण्डारण, वितरण एवं विक्रय पर (निर्यातक के लिए निर्यात हेतु उत्पादित खाद्य पदार्थ को छोड़कर) तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाया जाता है।

इसका मतलब है कि ये पदार्थ अगर दूसरे देशों में भेजे जाने के लिए उत्पादित किए जा रहे हैं, तब इन पर सरकार रोक नहीं लगाएगी, लेकिन ऐसे पदार्थ अगर राज्य की सीमा में मिले, तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी तय है।

एएनआई द्वारा जारी यूपी सरकार के आदेश में कहा गया है, “सार्वजनिक स्वास्थ्य के हित में उत्तर प्रदेश में हलाल प्रमाणित खाद्य पदार्थों के उत्पादन, भंडारण, वितरण और बिक्री पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया गया है।”

योगी आदित्यनाथ की सरकार द्वारा ये आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। अब सूची में शामिल किसी भी वस्तु पर हलाल सर्टिफिकेट या ठप्पा मिला, तो उस पर कार्रवाई होनी तय है।

बसपा की वेबसाइट पर हिन्दू देवी-देवताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी, सनातन पर पेरियार का प्रलाप: भगवान राम को लेकर भी घृणित बातें

लम्बे समय से सनातन धर्म के खिलाफ अलग-अलग धड़ों या पार्टियों द्वारा अभियान चलाए जा रहे हैं। इसमें मिशनरीज के साथ-साथ नव बौद्ध और दलित आंदोलन से जुड़े दल और लोग भी शामिल हैं। यहाँ तक कि राजनीतिक मंचों से सामाजिक समरसता और न्याय की बात करने वाले बसपा जैसे कुछ कुछ भी धार्मिक विद्वेष फैलाकर लगातार हिन्दुओं के बीच खाई पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।

बसपा का सनातन विरोधी चेहरा

दैनिक जागरण की रिपोर्ट में मायावती की बसपा का सनातन विरोधी मिशन उजागर हुआ है। जो सनातन और हिन्दू धर्म के खिलाफ चुचाप लगातार अभियान चला रहा है। इसका प्रमाण हमें बसपा की अधिकृत वेबसाइट पर ‘सच्ची रामायण की चाभी’ जैसी कई किताबों से पता चलती है। यह किताब सीधे सनातन पर वार करती है। जिसमें भगवान विष्णु, श्रीराम, माता सीता आदि पर बेहद आपत्तिजनक टिप्पणियाँ की गई हैं।

यहाँ सर्वजन हिताय की राजनीति को अपना मन्त्र बताने वाली मायावती की बसपा का यहाँ असली चेहरा उजागर होता है जो सनातन विरोधी है। और कहीं न कहीं दलितों और आदिवासियों के बीच सनातन हिन्दू धर्म और उनके आख्यानों को लेकर भ्रम पैदा करने की कोशिश है।  रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी की अधिकृत वेबसाइट ‘बीएसपी इंडिया डॉट को डॉट इन’ बसपा की सनातन विरोधी तस्वीर दिखाती है।

इस वेबसाइट में  ‘अवर आइडियल’ नाम से एक कॉलम है। इसमें संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर और बसपा संस्थापक कांशीराम के साथ ही पेरियार ललई सिंह यादव का नाम भी है। इसमें उनकी उपलब्धियों के नाम पर ‘क्या है सच्ची रामायण और कैसे जीती कानूनी लड़ाई’ नाम से एक लेख है। इसमें बताया गया है कि पेरियार ईवी रामासामी नायकर की किताब सच्ची रामायण को पहली बार हिंदी में लाने का श्रेय ललई सिंह यादव को जाता है।

वेबसाइट पर बताया गया है कि 1968 में ही ललई सिंह ने ही पेरियार की किताब ‘द रामायना: ए ट्रू रीडिंग’ का हिंदी अनुवाद कराकर सच्ची रामायण नाम से प्रकाशित कराया। वेबसाइट पर सच्ची रामायण और सच्ची रामायण की चाभी पुस्तक का चित्र भी दिखाई देता है। इसी किताब में सनातन विरोधी तमाम बातें लिखी हुईं हैं जिसका कहीं न कहीं बसपा सीधे तौर पर प्रचार करती नजर आती है। 

इस लिंक को खोलते ही सामने आता है कि बसपा की वेबसाइट से किस तरह सनातन धर्म को नीचा दिखाने की कोशिश कर रहा है। इसमें रामायण को कल्पना बताया है। साथ ही अपने तरीके से रामायण की व्याख्या करते हुए भगवान विष्णु, राम, माता सीता, राजा दशरथ, जनक सहित कई पात्रों के लिए बहुत ही घृणित शब्दों का प्रयोग किया गया है। जिसे आप उस किताब में पढ़ सकते हैं। 

कौन हैं ललई सिंह

ललई सिंह यादव ने 1967 में हिंदू धर्म का त्याग करके बौद्ध धर्म अपना लिया था। बौद्ध धर्म अपनाने के बाद उन्होंने अपने नाम से यादव शब्द हटा दिया। तब से वह अपने नाम के साथ ललई सिंह पेरियार लगाने लगे।

यह कहीं न कहीं उसी सनातन विरोधी लहर है जिसकी फसल हाल ही में तमिलनाडु सरकार में मंत्री डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन सहित ऐसे कई नेताओं के सनातन विरोधी बयान के रूप में दिखाई दी। ऐसे सभी दलों और नेताओं का एक ही एजेंडा नजर आता है अपने राजनीतिक स्वार्थों के कारण सनातन में फूट डालने और अपमानित करने की कोशिश है। 

जिस मुल्क में 87% मुस्लिम, वहाँ शरणार्थियों के लिए कोई जगह नहीं: 250 रोहिंग्या मुस्लिमों को समंदर में भेज दिया

शुक्रवार (17 नवंबर 2023) को लगभग 250 रोहिंग्या शरणार्थियों को इंडोनेशिया के पश्चिमी हिस्से से वापस समुद्र में भेज दिया गया, जिससे रोहिंग्या लोगों के सामने खड़े मानवीय संकट को लेकर चिंता बढ़ गई है। हालाँकि स्थानीय लोगों ने उनके खाने-पीने की व्यवस्था नाव पर की और जरूरी सामान रखने के बाद उन्हें वापस समुद्र में भेज दिया।

जानकारी के मुताबिक, म्यांमार में उत्पीड़न से बचने वाले यह समूह गुरुवार को इंडोनेशिया के आचे प्रांत के तट पर पहुँचा था, लेकिन उन्हें अस्वीकृति का सामना करना पड़ा। ऐसा उस देश इंडोनेशिया में हुआ, जहाँ दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी बसती है और देश की जनसंख्या का 87 प्रतिशत जनसंख्या मुस्लिम है।

तीन सप्ताह पहले बांग्लादेश से रवाना हुई थी नाव

जानकारी के मुताबिक, रोहिंग्या लोगों से भरी ये नाव बांग्लादेश से तीन सप्ताह निकली थी। तमाम दुश्वारियों को पार कर ये लोग इंडोनेशिया के पश्चिमी हिस्से में पहुँचे थे। आचे प्रांत के तट के पास पहुँचने के बाद कई लोग तैर कर जमीन तक पहुँचे और थकान की वजह से बहोश होकर गिर गए, लेकिन स्थानीय लोगों ने उन्हें थोड़े समय बाद ही वापस नाव पर भेज दिया और नाव को समंदर में ले जाने के लिए मजबूर कर दिया।

ज्यादातर मुस्लिम रोहिंग्या अल्पसंख्यक समुदाय के हजारों लोग मलेशिया या इंडोनेशिया पहुँचने की कोशिश के लिए हर साल लंबी और महंगी समुद्री यात्रा पर अक्सर कमजोर नावों में अपनी जान जोखिम में डालते हैं। इस मामले में एएफपी से बातचीत में स्थानीय नेता सैफुल अफवादी ने कहा, “हम उनकी उपस्थिति से तंग आ चुके हैं क्योंकि जब वे जमीन पर आते थे, तो कभी-कभी उनमें से कई भाग जाते थे। कुछ प्रकार के एजेंट होते हैं जो उन्हें पकड़ लेते हैं। यह मानव तस्करी है।”

उत्तरी आचे के अफवाडी ने कहा कि पड़ोसी उली मैडन और कॉट ट्रुएंग गाँवों में स्थानीय लोगों ने शरणार्थियों को गुरुवार को उनकी नाव वापस समुद्र में ले जाने से पहले भोजन, कपड़े और गैसोलीन सहित आपूर्ति की। उन्होंने कहा कि रोहिंग्याओं ने नावों को नुकसान पहुँचाने की कोशिश की, ताकि उन्हें वापस न लौटाया जा सके, लेकिन स्थानीय लोगों ने उन नावों को मरम्मत करने के बाद उन्हें वापस भेजा।

रोहिंग्या अधिकार संगठन अराकान प्रोजेक्ट के निदेशक क्रिस लेवा ने कहा कि ग्रामीणों के विरोध की वजह से उन्हें लौटना पड़ा। वो तस्करों की मदद से यहाँ तक पहुँचे थे, जो मलेशिया से व्यापारिक रास्ते का फायदा उठाते हैं और लोगों की तस्करी करके अवैध तरीके से इंडोनेशिया भेजने की कोशिश करते हैं। उन्होंने बताया कि स्थानीय लोगों की नाराजगी रोहिंग्या लोगों से नहीं, बल्कि उन्हें यहाँ पर लाने वाले तस्करों और इन नावों को चलाने वालों से है। उन्होंने कहा कि यहाँ से जाने के बाद नाव को ‘ट्रैक’ नहीं किया जा सकता है, ऐसे में उन्हें पता कि नाव में बैठे लोग सुरक्षित हैं भी या नहीं।

एएफपी ने अपने फोटोग्राफर के हवाले से कुछ तस्वीरें भी जारी की है और लिखा है, “नाव से लोग मदद की गुहार लगा रहे हैं। हमारे फोटोग्राफर अमांडा जुफ़रियान ने इंडोनेशिया के आचे प्रांत के उली मैडन में रोहिंग्या शरणार्थियों की ये तस्वीरें खींचीं है। म्यांमार में उत्पीड़ित अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों को ले जा रही नाव तट के ठीक बाहर खड़ी थी और शरणार्थी मदद की गुहार लगा रहे थे। जब निवासियों ने उन्हें उतरने से मना कर दिया तो कुछ लोग किनारे की ओर भागने लगे, वे रेत में गिर पड़े और जहाज के थके हुए यात्रियों से उतरने की अनुमति देने की भीख माँगने लगे।”

बता दें कि एएफपी की 2020 की जाँच में बांग्लादेश के एक विशाल शरणार्थी शिविर से लेकर इंडोनेशिया और मलेशिया तक फैले करोड़ों डॉलर के लगातार विकसित हो रहे मानव-तस्करी अभियान का खुलासा हुआ, जिसमें रोहिंग्या समुदाय के सदस्य ही अपने लोगों की तस्करी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

गौतलब है कि सहायता के अनुरोधों के बावजूद शरणार्थियों को लैंडिंग करने से रोका गया और उन्हें समुद्र में अपनी खतरनाक यात्रा जारी रखने के लिए मजबूर किया गया। यह घटना रोहिंग्या समुदाय की दुर्दशा को उजागर करती है, जिन्हें अक्सर पड़ोसी देशों से वापस कर दिया जाता है और उन्हें असुरक्षित जल में अपनी जान जोखिम में डालने के लिए छोड़ दिया जाता है।

‘हमें राहुल द्रविड़ ने सँभाला, शमी को उतारने के पीछे भी उनका ही हाथ’: वर्ल्ड कप फाइनल से पहले कप्तान रोहित शर्मा ने दिल खोल कर की बात, बोले – 2 साल से कर रहे इसकी तैयारी

आईसीसी क्रिकेट विश्व कप के सबसे बड़े मैच का इंतजार पूरी दुनिया कर रही है। इस मैच को लेकर पूरी दुनिया में बज बना हुआ है। हर कोई जानना चाहता है कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच कौन सी टीम बाजी मारने वाली है। इस बीच भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान रोहित शर्मा ने कहा कि इस विश्वकप के लिए तैयारी काफी पहले से चल रही थी। रोहित शर्मा ने कोच राहुल द्रविड़ की जमकर तारीफ की और कहा कि इस टीम के यहाँ तक पहुँचने में राहुल द्रविड़ की बड़ी भूमिका है।

रोहित शर्मा ने कहा कि उन्होंने अपनी बल्लेबाजी में बदलाव टीम के हित को ध्यान में रखते हुए कहा है। कोच द्रविड़ ने सभी की भूमिका तय की है और सभी अपनी जिम्मेदारियों को पूरा कर रहे हैं। उन्होंने भारतीय टीम के दबाव में न बिखरने वाली मजबूती को राहुल द्रविड से जोड़ा और कहा कि उन्होंने टीम को मानसिक तौर पर मजूबत बनाया है।

रोहित शर्मा ने बताया कि जब भारतीय टीम बीच में संघर्ष कर रही थी, तो राहुल द्रविड़ ने उसे सँभाला। उन्होंने बताया कि शमी को मैदान में उतारने में भी राहुल द्रविड़ की सोच ने ही काम किया। जब हमने अपने महत्वपूर्ण खिलाड़ी हार्दिक पांड्या को खो दिया, तो द्रविड़ ने शमी को टीम में लेने की सलाह दी। टीम में आने के बाद शमी ने क्या किया है, ये किसी से छिपा नहीं है।

हम दो साल से कर रहे थे इस दिन की तैयारी

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेले जाने वाले फाइनल मुकाबले से एक दिन पहले रोहित शर्मा ने कहा है कि भारतीय टीम इस महामुकाबले के लिए 2 साल से तैयारी कर रही थी। हरेक बल्लेबाजी और गेंदबाजी क्रम पूरी तरह से तय है। रोहित शर्मा ने कहा कि इस विश्वकप के लिए 2 साल पहले से तैयारी चल रही थी। हर खिलाड़ी को उसके रोल के बारे में बेहद साफ तरीके से जिम्मेदारी दी गई है। हम हर डिपार्टमेंट को ध्यान में रख रहे हैं। हालाँकि उन्होंने साफ तौर पर ये नहीं कहा कि भारतीय टीम अंतिम एकादश में किसी तरह की बदलाव करेगी या नहीं, लेकिन माना जा रहा है कि वो विनिंग कॉम्बिनेशन से छेड़छाड़ नहीं करने वाली।

भारतीय टीम में बदलाव की कोई गुंजाइश नहीं

अहमदाबाद में खेले जाने वाले विश्वकप के फाइनल मुकाबले में भारतीय क्रिकेट टीम की ओर से किसी बदलाव के संकेत नहीं मिले हैं। हालाँकि परंपरागत रूप से अहमदाबाद की पिच को स्पिनरों की मददगार मानी जाती है। इस मैदान में भारत को तीन तेज गेंदबाजों और दो स्पिनर्स के साथ मैदान में उतरेगी। हालाँकि स्पिन डिपार्टमेंट को मजबूत करने के लिए मोहम्मद सिराज की जगह आर अश्विन को भी जगह दी जा सकती है, जो निचले क्रम में अच्छी बल्लेबाजी भी कर सकते हैं। वैसे, ये फैसला मैच शुरू होने के ठीक पहले लिया जाएगा।

वैसे, भारतीय टीम सिर्फ 2 तेज गेदबाजों के साथ खेलने का जोखिम भी नहीं उठाना चाहेगी। चूँकि ऑस्ट्रेलिया का टॉप ऑर्डर बाएं हाथ के बल्लेबाजों से भरा है, ऐसे में बदलाव के बारे में सोचा भी जा सकता है।

इस विश्व कप में अजेय रहा है भारत, तो ऑस्ट्रेलिया भी कम नहीं

इस विश्वकप में अब तक भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों ही टीमों का प्रदर्शन शानदार रहा है। भारत ने अभी तक सभी 10 मैचों में शानदार जीत दर्ज कर फाइनल तक का सफर तय किया है, तो ऑस्ट्रेलिया ने शुरूआती दो मैच गंवाने के बाद जोरदार वापसी की है और अगले सभी 8 मैचों में जोरदार जीत दर्ज करते हुए फाइनल तक का सफर तय किया है। अब ये फाइनल मुकाबला 19 नवंबर को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेला जाएगा। ये स्टेडियम दर्शकों के बैठने की क्षमता के हिसाब से दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम है।

आईसीसी की तरफ से कमेंट्री टीम की घोषणा

आईसीसी ने 19 नवंबर को नरेंद्र मोदी स्टेडियम में आईसीसी क्रिकेट विश्व कप 2023 फाइनल के लिए दिग्गजों और विशेषज्ञों से भरे कमेंट्री पैनल की घोषणा की है। फाइनल मुकाबले के लिए कैस नायडू, रवि शास्त्री, रिकी पोंटिंग, इयान स्मिथ, संजय मांजरेकर, एरोन फिंच, नासिर हुसैन, हर्षा भोगले, दिनेश कार्तिक, मैथ्यू हेडन, इयोन मोर्गन, इयान बिशप, शेन वॉटसन, सुनील गावस्कर और मार्क हॉवर्ड जैसे दिग्गज कमेंट्री टीम में शामिल किए गए हैं। टॉस के समय जिम्मेदारी संभालेंगे रवि शास्त्री तो नासिर हुसैन और संजय मांजरेकर एक्सपर्ट के तौर पर पिच की रिपोर्ट देंगे।

अंपायरों के नाम भी घोषित

आईसीसी क्रिकेट विश्व कप 2023 के लिए आईसीसी ने अंपायरों और रेफरी के नाम की घोषणा कर दी है। आईसीसी ने फाइनल मुकाबले के लिए रिचर्ड इलिंगवर्थ और रिचर्ड केटलबोरो को मैदानी अंपायर के तौर पर जिम्मेदारी दी है, तो जोएल विल्सन तीसरे अंपायर होंगे। क्रिस गैफ़नी चौथे अंपायर होंगे, जबकि रेफरी के तौर पर एंडी पाइक्रॉफ्ट की नियुक्ति की गई है।

‘हिन्दू के लिए नहीं बोलूँगा तो क्या बाबर और औरंगज़ेब के लिए बोलूँगा’: प्रियंका गाँधी को राजस्थान में CM हिमंता ने दिया करारा जवाब, बोले – जब तक साँस रहेगी…

राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 के लिए मतदान 25 नवंबर को होगा, इसके लिए सभी पार्टियों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। कॉन्ग्रेस हो या भाजपा, सभी दलों ने अपने स्टार कैंपेनर्स को मैदान में उतार दिया है और एक-दूसरे पर ताबड़तोड़ हमले बोले जा रहे हैं। इसी कड़ी में कॉन्ग्रेस की नेता प्रियंका गाँधी वाड्रा ने असम के मुख्य हिमंता बिस्वा सरमा पर आरोप लगाए कि वो हिंदुओं की ही बात करते हैं, जिस पर अब हिमंता बिस्वा सरमा ने जोरदार पलटवार किया है। सरमा ने कहा कि वो हिंदू हैं, तो हिंदुओं की बात करते हैं, इसमें गलत क्या है?

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने जयपुर में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि “अगर मैं भारत में हिंदू के लिए दो शब्द नहीं बोलूँगा तो क्या बाबर और औरंगज़ेब के लिए बोलूँगा? भारत में हिंदू के हित का मतलब क्या है? हिंदू कहता है कि पूरा विश्व मेरा कुटुम्ब है। अगर आप ऐसी संस्कृति का जयगान नहीं करोगे तो किसका जयगान करोगे? आप प्रियंका गाँधी को बोलिए कि जब तक हमारी साँस रहेगी तब तक हम हिंदुओं का जयगान करेंगे।”

बता दें कि राजस्थान पहुँची कॉन्ग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा ने बीजेपी पर चुनाव के समय धर्म के नाम पर वोट माँगने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा कि भाजपा हमेशा धर्म, मंदिर और मस्जिद के नाम पर लोगों को बांटकर कर वोट की राजनीति करती है, ऐसे में भाजपा के बहकावे में न आकर पक्की गारंटी वाली सोच के साथ आगे बढ़ने वाली कांग्रेस को भरपूर समर्थन देकर परम्परा को तोड़ कर प्रदेश में फिर से कॉन्ग्रेस की सरकार रिपीट करें। उनके इसी आरोप पर हिमंता ने जनसभा में जमकर वार किया।

इससे पहले, हिमंता ने मदरसों को बंद करने की बात दोहराई थी। उन्होंने कहा था कि सरकार से पैसा और वेतन पाने वाले सभी मदरसों को बंद कर देना चाहिए। अगर कोई समुदाय स्वतंत्र रूप से इसे चलाता है, तो यह एक अलग मुद्दा है। सरकारी वेतन वाले मदरसे बंद होने चाहिए। बता दें कि असम में सरकारी सहयोग से चलने वाले मदरसों का ऑडिट भी कराया जा रहा है, साथ ही अनियमितता मिलने पर कठोर कार्रवाई भी की जा रही है। हिमंत बिस्वा सरमा के आदेश के बाद असम में बहुविवाह करने वालों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जा रही है और अब तक सैकड़ों लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा चुकी है। इस मामले में बहुत सारे लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है। इस मामले में सरकार कानून भी ला रही है।

बता दें कि राजस्थान में मौजूदा समय में कॉन्ग्रेस की सरकार है। राजस्थान में अशोक गहलोत मुख्यमंत्री हैं। ये राज्य लगातार 5 साल तक राजनीतिक अस्थिरता और आपसी-सिरफुटौव्वल के चलते चर्चा में रहा। चुनाव के समय अशोक गहलोत और उनके कॉन्ग्रेस पार्टी के ही प्रतिद्वंदी सचिन पायलट में कुछ समय के लिए युद्ध विराम सा हुआ है। वहीं, भाजपा अपनी पूरी ताकत से राजस्थान में सरकार बनाने के लिए चुनाव लड़ रही है। राजस्थान की सभी 200 विधानसभा सीटों पर 25 दिसंबर को मतदान कराया जाएगा, जिसके लिए चुनाव प्रचार की आखिरी तारीख 23 दिसंबर रहेगी। राजस्थान में भी 4 अन्य राज्यों के साथ 3 दिसंबर को चुनाव परिणामों की घोषणा की जाएगी।