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उत्तरकाशी में टनल के बाहर बना मंदिर, रेस्क्यू के लिए नई मशीनें इंदौर से आईं: 40 नहीं सुरंग में फँसे हुए हैं 41 मजदूर

उत्तरकाशी के सिलक्यारा से डंडालगाँव के बीच निर्माणाधीन सुरंग में फँसे मजदूरों को निकालने की कोशिशें लगातार जारी हैं। इस बीच पता चला है कि अंदर फँसे श्रमिकों की संख्या 40 नहीं 41 है। इन सभी मजदूरों को बचाने के लिए कल तक सुरंग में ड्रिलिंग का काम हो रहा था। हालाँकि आज के अपडेट में पता चला कि जो अमेरिकी मशीन वहाँ ड्रिल कर रही थी वो काम करना बंद कर दी थी, इस कारण बचाव कार्य को रोकना पड़ा।

कुछ रिपोर्ट्स ने यह भी जानकारी दी है शनिवार (18 नवंबर 2023) को बचाव कार्य पर रोक इसलिए लगाई गई है क्योंकि सुरंग से कुछ चटकने की आवाज आई थी। जिसके बाद ये डर फैल गया कि कहीं सुरंग का कोई और हिस्सा न धँस जाए। इस आवाज के आने के बाद सरकार की हाईवे और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी ने बयान दिया कि सुरंग के और धँसने की आशंका के चलते बचाव अभियान को रोक दिया गया है।

सबसे ज्यादा ध्यान 2 पाइपों को आपस में जोड़ते वक्त देना पड़ रहा है। केवल इसी काम में डेढ़ से 2 घंटे लग रहे हैं। वहीं सुरंग में भी जब ऑगर मशीन डाली जा रही है तो उसके कंपन से संतुलन बिगड़ रहा है इसलिए काम रुक-रुक के हो रहा है। अमेरिकी मशीन के करीब होने के बाद वायु सेना की मदद से इंदौर से देहरादून करीब 22 टन महत्तवपूर्व उपकरणों को पहुँचाया गया है। इस मशीन को बैकअप के लिए इस्तेमाल किया जाना है।

वहीं रेस्क्यू ऑपरेशन में मदद देने के लिए रेल विकास निगम लिमिटेड की ऑस्ट्रेलिया की कंसल्टेंसी कंपनी के एक्सपर्ट भी उत्तरकाशी पहुँचे हैं। नॉर्वे से भी मदद माँगी गई है। इधर प्रदेश मुख्यमंत्री लगातार अधिकारियों से रेस्क्यू मिशन की पल-पल की जानकारी ले रहे हैं तो वहीं PMO के डिप्टी सेक्रेटरी स्तर के अधिकारी रेस्क्यू वाली जगह पर भी पहुँचे और अभियान के बारे में जानकारी ली। सुरंग में फँसे लोगों के लिए बाहर एक मंदिर भी बनाया गया है।

PMO के पूर्व सलाहकार भास्कर खुलबे ने कहा, “हम कोई भी रास्ता तलाशने की एक भी संभावना नहीं छोड़ेंगे क्योंकि जो लोग यहाँ कई दिनों से फँसे हुए हैं उन तक पहुंचना हमारी प्राथमिकता है। हमारे पास किसी भी संसाधन, विकल्प और विचारों की कमी नहीं है, हमें बस कुछ समन्वित कार्रवाई की जरूरत है और हम कोशिश कर रहे हैं टीमें बनाएँ और किसी तरह वहाँ पहुँचें…हम वर्टिकल ड्रिलिंग का विकल्प भी तलाश रहे हैं…हमें विदेशी सलाहकारों से भी मदद मिल रही है…पीएम मोदी का संदेश है कि यह ऑपरेशन जल्द से जल्द किया जाए।”

ऑफिस में बम है… TCS ने महिला को नहीं दी नौकरी, एक कॉल से बेंगलुरु के दफ्तर में मचा दिया हड़कंप: पुलिस ने किया गिरफ्तार

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के होसुर रोड स्थित ‘टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज’ (TCS) के दफ्तर में मंगलवार (14 नवंबर, 2023) को हड़कंप मच गया। दरअसल, इस ऑफिस के B ब्लॉक को फोन पर पूरे ऑफिस को बम से उड़ाने की धमकी मिली थी। इससे वहाँ हड़कंप मच गया।

सूचना मिलते ही पुलिस आनन-फानन में बम स्क्वॉड समेत मौके पर पहुँची। इसके बाद जाँच-पड़ताल शुरू हुई। आखिर में जाँच में सामने आया कि फोन पर बम से उड़ाने की ये फर्जी कॉल थी। बेंगलुरु पुलिस की छानबीन में TCS की छँटनी में निकाली गई एक्स कर्मचारी बी श्रुति शेट्टी का नाम सामने आया। इसके बाद पुलिस ने बुधवार (15 नवंबर, 2023) को उसे उसके घर बेलगावी से गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस की जानकारी के मुताबिक, आरोपित पूर्व कर्मचारी श्रुति शेट्टी ने BBM किया है। उसने एमबीए करने के लिए टीसीएस से इस्तीफा दे दिया था। उसे गुस्सा था कि कंपनी ने इसके बाद फिर से उसे जॉब पर नहीं रखा। उसे जब लगा की कंपनी उसे दोबारा नौकरी पर नहीं रखेगी तो उसे कंपनी पर बहुत गुस्सा आया। उसने गुस्से के चलते बगैर कुछ सोचे-समझे मंगलवार को TCS के ट्रांसपोर्ट हेल्पडेस्क में फोन लगाया। उसने कहा कि बेंगलुरु ऑफिस में बम है। इसके बाद ऑफिस के सब लोग दहशत में आ गए।

जानकारी के मुताबिक, टीसीएस के ट्रांसपोर्ट हेल्पडेस्क के जिस कैब ड्राइवर को इस पूर्व महिला कर्मचारी ने ऑफिस में बम होने की धमकी का फर्जी कॉल किया था उसे वो कंपनी में जॉब के दौरान से ही जानती थी। इस एक्स कर्मचारी ने इस ड्राइवर को नशे की हालत में कॉल की थी।

गौरतलब है कि टीसीएस के हैदराबाद ऑफिस में इसी तरह का वाकया मई में पेश आया था। तब ऐसे ही किसी ने ऑफिस को बम से उड़ाने की फर्जी धमकी दी थी। बाद में जाँच में पाया गया था कि ये कॉल भी कथित तौर पर एक्स कर्मचारी ने की थी।

5 साल की बच्ची को कब्र से निकाला, साथ में सोता मिला मोहम्मद रफीक: फूल चढ़ाने आए पिता के उड़े होश, दरिंदगी की जताई आशंका

वाराणसी में मानवता को शर्मशार करने वाली एक सनसनीखेज घटना सामने आई हैं, जहाँ लक्सा पुलिस ने रेवड़ी तालाब कब्रिस्तान से एक मुस्लिम युवक को शर्मसार करने वाली हरकत करते गिरफ्तार किया है। युवक की पहचान मोहम्मद रफीक के रूप में हुई है। जो कब्रिस्तान में एक दिन पहले दफन की गई 5 साल की मासूम का शव निकालकर उसके साथ कब्रिस्तान के ही एक कोने में सो रहा था। वहीं से पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है। 

इस मामले की चर्चा सोशल मीडिया में भी है। लोग ऐसी दरिंदगी पर सख्त से सख्त कार्रवाई की माँग कर रहे हैं और कह रहे हैं कि मरने के बाद भी सुरक्षित नहीं हैं बेटियाँ?

क्या है पूरा मामला 

दरअसल, दशाश्वमेध क्षेत्र के सदानंद बाजार निवासी एक व्यक्ति की 5 साल की बेटी का इलाज के दौरान बुधवार (16 नवंबर, 2023) को हॉस्पिटल में मौत हो गई थी। रात करीब 9:30 बजे बच्ची का शव रेवड़ी तालाब के कब्रिस्तान में दफनाया गया। उसके बाद मैयत में आए लोग घर चले गए। अगले दिन जब बच्ची के पिता कब्र पर पानी डालने और फूल चढ़ाने गए तो उन्हें कब्र की मिटटी हटी हुई लगी।

उन्होंने कब्र को खुदवाया तो उसके अंदर से उनकी बेटी का शव गायब था। इस पर उन्होंने खोजबीन शुरू की तो कब्रिस्तान के ही एक कोने में उनकी बेटी के शव के साथ रेवड़ी तालाब निवासी मोहम्मद रफीक उर्फ छोटू सोया हुआ था। इस पर उन्होंने अपनी बेटी के शव के साथ अनहोनी की आशंका जताते हुए पुलिस को सूचना दी।

मौके पर पहुँची पुलिस ने पिता की शिकायत पर मोहम्मद रफीक को गिरफ्तार कर लिया है। साथ ही पुलिस ने शव को तत्काल अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। इस मामले में बच्ची के पिता ने बेटी के शव के साथ दुष्कर्म का आरोप भी लगाया। वहीं पुलिस जाँच के बाद कार्रवाई की बात कह रही है।

गौरतलब है कि इस संबंध में एसीपी दशाश्वमेध डॉ अवधेश पाण्डेय ने भी घटना की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि दशाश्वमेध थानाक्षेत्र के एक व्यक्ति की 5 साल की लड़की की मृत्यु बिमारी की वजह से हुई थी, जिसका शव रेवड़ी तालाब कब्रिस्तान में दफन किया गया था। वहाँ पर कब्र खोदने वाले मोहम्मद रफी उर्फ छोटू की मदद से कब्र खोदवाकर उसे दफन कर चल आए थे।

एसीपी ने बताया कि मोहम्मद रफी नशे का लती है और रात में दो बजे के करीब उसने मिट्टी हटाकर शव को बाहर निकाल लिया और अपने पास रखकर उसके पास लेट गया था। जिसकी सूचना पिता को अगले दिन लगी और उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। 

बता दें कि पुलिस ने जहाँ इस मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद कार्रवाई की बात कही वहीं स्थानीय लोगों ने कहा कि यदि मुस्लिम कंट्री में ऐसी घटना घाटी होती तो अब तक इसका गला काट दिया गया होता

टेस्टिंग थी बाक़ी, फिर भी आदित्य ठाकरे ने जबरन कर दिया पुल का उद्घाटन: लोगों की जान खतरे में डालने के लिए दर्ज हुई FIR, बिना अनुमति ब्रिज को कर दिया चालू

शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे के खिलाफ FIR दर्ज हुई है। उनके साथ कई अन्य नेताओं पर भी मामला दर्ज कराया गया है। ये FIR सरकारी कार्य में बाधा डालने, आम लोगों के जीवन को खतरे में डालने जैसे मामलों में दर्ज कराई गई है। BMC ने मुंबई के एनएम जोशी पुलिस स्टेशन में एक पुल के जबरन उद्घाटन के मामले में FIR दर्ज कराई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला डिलाइल रोड ब्रिज लेन के उद्घाटन के सिलसिले में दर्ज किया गया है। इसमें आदित्य ठाकरे के साथ MLC सुनील शिंद, पूर्व महापौर किशोरी पेडनेकर, पूर्व विधायक सचिन अहीर, स्नेहल अंबेडकर समेत 20 से अधिक नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया है। मुंबई के एनएम जोशी पुलिस स्टेशन में आईपीसी की धारा 143, 149, 326 और 447 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

डिलाइल पुल का जबरन कर दिया उद्घाटन

आदित्य ठाकरे और अन्य नेताओं ने डिलाइल ब्रिज को बिना परमिशन ही खोल दिया। अभी इस ब्रिज से जुड़ी कुछ अनापत्ति प्रमाण पत्र मिलने बाकी हैं। ऐसे में बीएमसी ने कहा है कि इस पुल पर कोई हादसा होता है, तो वो किसकी जिम्मेदारी होगी? अभी पुल की पूरी तरह से जाँच होनी है। इसके बाद इसे अनापत्ति प्रमाण पत्र मिलना था, और फिर इस माह के आखिर तक इसे खोले जाने की योजना थी। हालाँकि, अनापत्ति प्रमाण पत्रों (NOC) के न मिलने की वजह से इसके खुलने की तारीख अभी तय नहीं हुई थी।

वहीं, शिवसेना (उद्धव ठाकरे) गुट के नेताओं का कहना है कि आम लोगों को समस्याएँ हो रही हैं। ये पुल लंबे समय से बनकर तैयार है। ऐसे में उन्होंने BMC को समय दिया था कि वो तीन दिनों के अंदर अपनी सारी प्रक्रियाएँ पूरी कर ले, लेकिन बीएमसी ने ऐसा नहीं किया। जिसके बाद उन्हें खुद ही ये कदम उठाया पड़ा। इस बारे में आदित्य ठाकरे ने 16 नवंबर को एक्स पर पोस्ट भी किया था।

श्रेय लूटने की कोशिश कर रहे यूबीटी ग्रुप के लोग

शिवसेना (शिंदे गुट) के प्रवक्ता किरण पावस्कर ने कहा कि यूबीटी ग्रुप के लोग सिर्फ श्रेय लूटने की कोशिश कर रहे थे। जब वो सत्ता में थे, तब तक इस पुल पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। अब हमारी सरकार और प्रशासन ने पुल को पूरा कराया है, तो श्रेय लूटने की कोशिश में उन्होंने जल्दबाजी में पुल का उद्घाटन कर दिया है। इससे आम लोगों की जान को जोखिम में डाला गया। समय से पहले बिना NOC के ही पुल को खोल देना, जिसकी टेस्टिंग पूरी नहीं हुई है, वो किसी बड़ी दुर्घटना की वजह बन सकता है।

उत्तर प्रदेश में अब नहीं बिकेंगे हलाल प्रोडक्ट? CM योगी ने दिए कार्रवाई के निर्देश, लखनऊ में 9 कंपनियों पर FIR

उत्तर प्रदेश में हलाल सर्टिफिकेशन से जुड़े उत्पादों की बिक्री पर जल्द प्रतिबंध लग सकता है। बताया जा रहा है कि इस मामले पर खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लिया है। प्रदेश में हलाल सर्टिफिकेशन को धंधा बनाकर चलाने वाली उन कंपनियों पर कार्रवाई की शुरुआत हो गई है, जो तेल, साबुन, टूथपेस्ट, मधु समेत कई अन्य शाकाहारी उत्पादों को भी हलाल प्रमाण पत्र दे रही हैं।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, हलाल सर्टिफिकेशन देने वाली 9 कंपनियों पर लखनऊ में एफआईआर दर्ज कराई गई है। ये शिकायत शैलेंद्र शर्मा ने अज्ञात कंपनियों पर करवाई है। इनके विरुद्ध आईपीसी की धारा 120 b/ 153A/ 298/ 384 /420 /467/ 468 /471/ 505 के तहत केस दर्ज हुआ है।

एफआईआर में हलाल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड चेन्नई, जमीयत उलेमा हिन्द हलाल ट्रस्ट दिल्ली, हलाल काउंसिल ऑफ इंडिया मुम्बई, जमीयत उलेमा महाराष्ट्र मुम्बई आदि का नाम है। इन संस्थाओं पर आरोप है कि ये एक मजहब के नाम पर कुछ उत्पादों पर हलाल प्रमाणपत्र दे रहे हैं जबकि ये देने का उनका अधिकार नहीं है। खान-पान के उत्पादों की गुणवत्ता आदि के प्रमाण पत्र के लिए एफएसएसएआई व आईएसआई जैसी संस्थाओं को अधिकृत किया गया है।

शिकायतकर्ता ने आशंका जताई है कि इन सबके पीछे आपराधिक षड्यंत्र वजह हो सकती है। जहाँ हलाल सर्टिफिकेट के नाम पर इकट्ठा हो रही अवैध कमाई से आतंकवादी संगठन व राष्ट्र विरोधी गतिविधियों को फंडिंग की जा रही हैं। या फिर इसके जरिए उन कंपनियों को वित्तीय नुकसान पहुँचाने का प्रयास हो रहा है जो ऐसे हलाल सर्टिफिकेशन के साथ सामान नहीं बेचतीं।

हलाल क्या होता है?

बता दें कि इस्लाम मजहब के अनुसार, हलाल का मतलब जायज होता है। खाद्य व सौंदर्य उत्पाद पर जब हलाल सर्टिफाइड लिखा जाता है तो उसका अर्थ होता है कि वो उत्पाद मुस्लिमों के इस्तेमाल योग्य है क्योंकि उसमें ऐसा कुछ नहीं डाला गया है जो उनके मजहब में हराम है।

इस्लामी देशों में कोई भी प्रोडक्ट एक्सपोर्ट करने के लिए ये हलाल सर्टिफिकेशन जरूरी होता है। हालाँकि भारत में शाकाहारी वस्तुओं पर इसका प्रयोग क्यों किया जा रहा, ये बात अब तक नहीं समझ आई है। पिछले दिनों भारतीय रेलवे में यात्रा करते वक्त एक यात्री ने इस पर सवाल खड़ा किया था कि उसकी चाय के पैकेट पर हलाल क्यों लिखा है। इस घटना की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी, उसी के बाद ये पूरा मुद्दा संज्ञान में आया।

आपके हर सवाल का पल भर में जवाब दे देता है जो ChatGPT, उसे बनाने वाली कंपनी की अंतरिम CEO बनीं मीरा मुराती: फाउंडर को पद से हटाया गया

दुनिया को मुफ्त और सुरक्षित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) देने के मकसद वाली अमेरिकन कंपनी ओपनएआई (OpenAI) ने शुक्रवार (17 नवंबर,2023) को 34 साल मीरा मुराती को कंपनी के अंतरिम मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) का पद सौंपा है। ये वही कंपनी है जिसने 30 नवंबर, 2022 को चैट GPT AI सिस्टम चैटबॉट से दुनिया को रुबरू कराया था। भाषा की दिशा में बातचीत को बेहतरीन बनाने वाले ये AI सिस्टम पल भर में आपके सवाल से जुड़ी हर जानकारी आपके सामने रख देता है।

दरअसल कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर ने इसके पूर्व सीईओ और को फाउंटर सैम ऑल्टमैन को उनके पद से हटा दिया। कहा जा रहा है कि OpenAI को ऑल्टमैन की काबिलियत पर यकीन नहीं रह गया था। इस वजह से उन्हें हटाने का फैसला लिया गया। इससे पहले मुराती कंपनी की मुख्य तकनीकी अधिकारी का पद भी सँभाल चुकी हैं। उन्होंने ChatGPT को बनाने में भी अहम भूमिका निभाई। कई साल तक मीरा मुराती ने चैटजीपीटी और डीएएल-ई जैसे क्रांतिकारी प्रोडक्ट्स के विकास और उन्हें बनाने में OpenAI के लिए काम किया।

अब कहीं जाकर वो अंतरिम सीईओ का पद मिलने से सुर्खियों में आई हैं। कंपनी ने उनको ये पद सौंपते हुए कहा कि मुराती कुशल और बहुत प्रतिभावान है। इससे ये भी साफ हो गया है कि आगे स्थाई सीईओ की नियुक्ति करते वक्त भी उनके नाम पर विचार हो सकता है।

हालाँकि पिछले साल से उन्हें चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर का पद सौंपा गया था। उनके बारे में OpenAI के मौजूदा और पूर्व कर्मचारियों का कहना है कि मुराती कंपनी के संचालन में इस दौरान भी अहम भूमिका निभा रही थीं। उन्होंने ये पक्का करने में बेहतरीन काम किया कि कंपनी के इंजीनियर तय वक्त पर ChatGPT बना लें।

यही नहीं उन्होंने माइक्रोसॉफ्ट के साथ कंपनी के रिश्तों को नई ऊंचाईयाँ दीं। यही वजह रही कि माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्या नडेला ने टाइम पत्रिका में उनके बारे में लिखा, “उनके पास तकनीकी विशेषज्ञता, व्यावसायिक कौशल और मिशन के महत्व की गहरी जानकारी के साथ टीम को साथ लाने की काबिलियत है। इसका नतीजा ये हुआ कि मीरा ने अब तक आई कुछ सबसे रोमांचक AI तकनीकों को बनाने में मदद की है।”

इतना ही नहीं वाशिंगटन और यूरोप में ओपनएआई की ऑर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक को आगे बढ़ाने में अहम योगदान दिया। अल्बानिया में साल 1988 में जन्मी और कनाडा में पढ़ी मीरा मुराती एक मैकेनिकल इंजीनियर हैं। ये उनकी तकनीकी कुशलता का ही उदाहरण है कि उन्होंने डार्टमाउथ कॉलेज में अपने ग्रेजुएशन के दौरान ही एक हाइब्रिड रेस कार बना डाली थी।

साल 2013 से 2016 तक उन्होंने एलन मस्क की कंपनी टेस्ला में मॉडल एक्स की सीनियर प्रोडक्ट मैनेजर का पद संभाला। साल 2018 में उन्होंने OpenAI का दामन थामा था। हालाँकि, उनके नाम को देखते हुए उनके भारतीय मूल से होने का भ्रम था, लेकिन उनका सरनेम उनके अल्बानिया से होने की गवाही देता है।

ज़हर से हिन्दू युवक की मौत के पीछे मुस्लिम लड़की, चैट से खुला राज़! अम्मी-अब्बू और मामा सहित अलीशा पर FIR दर्ज, पीड़ित पिता ने बयाँ किया दर्द

उत्तराखंड की देहरादून पुलिस ने अलीशा और उसके अब्बा इम्तियाज़, अम्मी रेशमा और मामा नदीम पर 21 साल के हिंदू युवक रोहित शर्मा को आत्महत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज किया है।

सब-इंस्पेक्टर सनोज कुमार के मुताबिक, ये केस रोहित शर्मा के पिता महिपाल शर्मा की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया। शिकायत में उन्होंने बेटे की ‘दोस्त’ अलीशा और उसके परिवार के सदस्यों पर उसे परेशान करने और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था।

उनका आरोप था कि इसी वजह से उनके बेटे को अपनी जान लेने जैसा कठोर कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा। ये वाकया देहरादून शहर के पटेल नगर मोहल्ले का है। कथित तौर पर 25 अक्टूबर, 2023 को कोई जहरीला पदार्थ खाने से रोहित शर्मा की 2 नवंबर को एक अस्पताल के ICU में इलाज के दौरान मौत हो गई थी।

‘रोहित को मानसिक तौर पर परेशान किया गया’

रोहित की मौत के बाद पिता महिपाल शर्मा ने 4 नवंबर को अलीशा, उसके अभिभावकों इम्तियाज़ और रेशमा और उसके मामा नदीम के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।

ऑपइंडिया के पास इस केस में दर्ज FIR की कॉपी है। परेशान पिता महिपाल शर्मा ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि पड़ोस पटेल नगर इलाके में ही अपने परिवार के साथ रहने वाली अलीशा ने उसके बेटे को प्यार के जाल में फँसाया। उन्होंने इसमें ये भी दावा किया कि अलीशा और उसके परिवार के सदस्य रोहित को परेशान कर रहे थे। मृतक रोहित के पिता ने ये भी कहा कि आरोपियों ने उनके बेटे से मारपीट भी की थी।

उनका आरोप है कि अलीशा और उसके परिवार के सदस्यों ने उनके बेटे को मानसिक तौर पर इतना परेशान कर दिया कि वो आत्महत्या जैसा कदम उठाने को मजबूर हो गया। इस केस को लेकर सब-इंस्पेक्टर सनोज कुमार ने कहा, “शिकायत के जवाब में चारों आरोपितों के खिलाफ आईपीसी की धारा 306 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया गया है।”हालाँकि, उन्होंने ये भी कहा कि अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।

ऑपइंडिया को मिली FIR की कॉपी

फोन चैट से खुला अलीशा संग अफेयर का राज

गौरतलब है कि ऑर्गेनाइजर वीकली ने 16 नवंबर को इस घटना पर एक खबर छापी थी। इसमें वेब पोर्टल के रिपोर्टर ने मृतक युवक के पिता के साथ हुई बातचीत के अंश शेयर किए। इसमें भी उन्होंने अलीशा और उसके परिवार के सदस्यों पर अपने बेटे की हत्या का आरोप लगाया। उन्होंने खुलासा किया कि वे 25 अक्टूबर, 2023 को बेटे रोहित के जहर खाने के दिन तक वो अलीशा के साथ अपने बेटे के रिश्ते से अनजान थे। महिपाल शर्मा ने अपने मृत बेटे और अलीशा के बीच व्हाट्सएप चैट के स्क्रीनशॉट भी ऑर्गनाइज़र के साथ शेयर किए।

फोटो साभार: ऑर्गेनाइजर वीकली

महिपाल शर्मा के हवाले से वेब पोर्टल ने लिखा, “25 अक्टूबर को कुछ खाने के बाद रोहित बोल नहीं पा रहा था। उसके फोन की जाँच करने पर हमें उसके और अलीशा के बीच एक चैट मिली, जहाँ आयशा ने लिखा था कि उसके परिवार को उनके रिश्ते के बारे में पता चल गया और वह उसका निकाह किसी और से करना चाहता था। रोहित जल्दी से उसके घर गया और वापस लौटने पर उसे उल्टी हुई और आखिरकार वह बेहोश हो गया। उसकी जेब से मेरी पत्नी को चूहे मारने वाली दवा का एक पैकेट मिला।”

मृतक रोहित के पिता ने अलीशा के परिवार पर बेटे की इस अचानक मौत में हाथ होने का आरोप लगाया है। उन्होंने आरोप लगाया, “इम्तियाज़ और उनके परिवार ने रोहित के जहर खाने वाले दिन ही अपना घर छोड़ दिया था। इससे उनके इसमें शामिल होने के बारे में हमारा संदेह गहरा हो गया।”

इस केस के जाँच अधिकारी सब-इंस्पेक्टर सनोज कुमार ने 16 नवंबर, 2023 को वेबपोर्टल को बताया कि आरोपित फिलहाल फरार हैं और पुलिस आरोपितों की तलाश कर रही है। उन्होंने इस बात की पुष्टि की कि पोस्टमॉर्टम जाँच की गई थी और इसके निष्कर्षों ने इस मामले में FIR स्वीकार करने का आधार बनाया।

जिस टीम के हाथों में वर्ल्ड कप देखना चाहता है पूरा भारत, उसकी जर्सी का रंग देख भड़क गईं CM ममता बनर्जी: कहा- हर चीज का हो रहा भगवाकरण

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) सुप्रीमो ममता बनर्जी या तो भगवा रंग ही पसंद नहीं करतीं या फिर उन्हें इस रंग से नाराजगी केवल भारतीय जनता पार्टी (BJP) की वजह से है ये तो वहीं बता सकती है। लेकिन, शुक्रवार (17 नवंबर, 2018) को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी टीम इंडिया के खिलाड़ियों को भगवा जर्सी में प्रैक्टिस करते हुए देख कर भड़क गईं और भाजपा पर निशाना साधने लगीं।

उनका बीजेपी पर ये ज़ुबानी हमला ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ होने वाले ODI विश्व कप 2023 के फाइनल से महज दो दिन पहले हो रहा है जब पूरे भारत के सिर पर क्रिकेट का बुखार सिर चढ़ कर बोल रहा है। सीएम को इस रंग से इतनी नाराजगी है कि उन्होंने आरोप लगा डाला है कि देश में हर चीज के भगवाकरण की कोशिश की जा रही है जो उन्हें मंजूर नहीं है। भाजपा पर तंज करते हुए सीएम ममता बनर्जी ने भारतीय क्रिकेट टीम की प्रैक्टिस जर्सी का हवाला देते हुए कहा कि सब कुछ भगवा हो गया है।

उन्होंने ये बातें शुक्रवार को मध्य कोलकाता के पोस्ता बाजार में जगधात्री पूजा के उद्घाटन के मौके पर कहीं। इस कार्यक्रम में सीएम बनर्जी ने कहा, “अब सब कुछ भगवा हो रहा है! हमें अपने भारतीय खिलाड़ियों पर गर्व है और मुझे विश्वास है कि वे विश्व चैंपियन बनेंगे, लेकिन जब वे अभ्यास करते हैं तो उनकी पोशाक भी भगवा हो गई है। वे पहले नीले रंग के कपड़े पहनते थे।”

बता दें कि टीम इंडिया की मैच की जर्सी नीले रंग की है और अभ्यास सत्र के दौरान टीम नारंगी किट पहनती है। उन्होंने आगे कहा, “हमारी टीम महान है और हम जीतेंगे, लेकिन भारत को श्रेष्ठता साबित करने के लिए भगवा जर्सी पहनकर अभ्यास करने की जरूरत नहीं है।” सीएम बनर्जी ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा, “हर चीज़ का नाम बदला जा रहा और हर चीज़ को भगवा रंग दिया जा रहा है।”

उन्होंने ये भी आरोप लगाया कि न केवल क्रिकेट टीम की प्रैक्‍टि‍स जर्सी, बल्‍क‍ि मेट्रो स्टेशनों की पेंटिंग को भी भगवा रंग से रंगा गया है जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता है। हालाँकि, सीएम बनर्जी ने बगैर किसी का नाम लिए ये बातें कहीं, लेकिन उनकी बातों से ये साफ था कि वो बीजेपी पर निशाना साध रही हैं। सीएम बनर्जी ने भगवा रंग को लेकर ये भी कहा कि ये पक्षपातपूर्ण राजनीति है।

इस दौरान वो बहुजन समाज पार्टी यानी बसपा (BSP) सुप्रीमो मायावती के बहाने पीएम मोदी पर निशाना साधने से नहीं चूकीं। सीएम बनर्जी ने कहा, “एक बार मैंने सुना था कि मायावती ने अपनी मूर्ति बनवाई है, लेकिन अब ये सामान्य बात हो गई है। अब हर चीज का नाम नमो के नाम पर रखा जा रहा है।” बनर्जी ने आगे कहा, “यह देश जनता का है, न क‍ि सिर्फ एक पार्टी के लोगों का।”

उनकी बात का समर्थन विवादों में घिरी TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने भी किया है। उन्होंने अपने ‘X’ (ट्विटर) हैंडल पर सीएम बनर्जी की तारीफ करते हुए लिखा, “अच्छी सोच को नमो-नमः।” इस दौरान सीएम बनर्जी ने केंद्र सरकार पर राज्य का फंड रोकने का आरोप लगाते हुए कहा कि हजारों मनरेगा मजदूर वंचित रह गए हैं। उन्होंने आगे कहा, “पहले मैंने CPI(M) से लड़ाई लड़ी थी और अब मुझे दिल्ली की सत्ता पर काबिज पार्टी से लड़ना पड़ रहा है।”

सीएम बनर्जी के इस तंज का जवाब देते पश्चिम बंगाल के बीजेपी अध्यक्ष राहुल सिन्हा ने कहा कि ममता बनर्जी बदले की भावना वाला नजरिया रखती हैं। बीजेपी नेता सिन्हा ने कहा, “कुछ दिनों के बाद वो हमारे राष्ट्रीय ध्वज में भगवा रंग होने पर भी सवाल कर सकती है। हम ऐसे बयानों पर प्रतिक्रिया देना भी सही नहीं समझते हैं।”

सरकारी जमीन पर जामा मस्जिद ने कर रखा है कब्जा, दिल्ली हाई कोर्ट ने MCD को लगाई फटकार: कहा- पब्लिक पार्क वापस लो, पुलिस चाहिए तो देंगे

दिल्ली के जामा मस्जिद ने पास के एक पब्लिक पार्क पर अवैध कब्जा किया हुआ है। इसे लेकर मोहम्मद अर्सलान नाम के व्यक्ति ने याचिका दायर की थी। अब मामले पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने ये कब्जा वापस न ले पाने के लिए MCD को फटकारा है। कोर्ट ने कहा है- “हम ऐसी सदी में नहीं रह रहे हैं जहाँ कानून का शासन नहीं है फिर आखिर क्यों MCD ये कब्जा वापस नहीं ले पाई।”

सुनवाई के दौरान MCD ने हाईकोर्ट को बताया कि पब्लिक पार्क पर जामा मस्जिद की अथॉर्थी और शाही इमाम ने कब्जा कर रखा है। उन लोगों ने अवैध रूप से उसे अपने कब्जे में किया हुआ है और उस पर वे ताला भी लगा देते हैं। एमसीडी की ओर से पेश वकील ने हाईकोर्ट को बताया कि वजूखाने के पास बने पार्क में वह लोग एमसीडी अधिकारियों को प्रवेश नहीं करने देते और दिल्ली वक्फ बोर्ड भी पार्क को अपनी संपत्ति बताता है।

MCD की ओर से पेश वकील की बात सुनने के बाद एक्टिंग चीफ जस्टिस मनमोहन और मिनी पुष्कर्ण ने इस बात पर नाराजगी जाहिर की कि आखिर कैसे पब्लिक पार्क पर कब्जा कर लिया गया और अब एमसीडी इतनी मजबूर है कि उसे वापस भी नहीं ले पा रही। पीठ ने कहा-

“सार्वजनिक पार्कों पर कैसे भी कब्जा नहीं हो सकता…आप हमें 21वीं सदी में क्या बताने की कोशिश कर रहे हो? ये सब कैसे हो सकता है। हम हर दिन पर्यावरण की सुरक्षा के लिए कह रहे हैं। हम साँस नहीं ले पा रहे हैं, और आप पार्कों पर कब्ज़ा खो रहे हैं?आप इस पर कब्ज़ा नहीं खो सकते यदि आप पार्क के मालिक हैं, तो आप पार्क को दिल्ली के नागरिकों के लिए सार्वजनिक ट्रस्ट में रखते… ऐसा लगता है कि आपके अधिकारी किसी और दुनिया में रह रहे हैं… आप इस तरह सार्वजनिक पार्क का कब्जा नहीं खो सकते। हम ऐसे देश में नहीं रह रहे हैं, जहाँ कानून का शासन नहीं है…हम 21वीं सदी में रह रहे हैं।”

कोर्ट ने इस केस की सुनवाई करने के बाद कहा है कि MCD कानून के अनुसार सार्वजनिक पार्क पर कब्जा वापस पाने के लिए कदम उठाए। कोर्ट ने कहा कि अगर पुलिस की जरूरत होगी तो उनकी सहायता भी प्रदान की जाएगी। इस तरह पब्लिक पार्क पर प्रशासन पर अपना अधिकार नहीं छोड़ सकता।

बता दें कि जिस पार्क पर जामा मस्जिद के प्रशासन ने कब्जा किया हुआ है। वो नॉर्थ पार्क है। जहाँ एमसीडी को घुसने तक नहीं दिया जाता। उनके मुताबिक साउथ पार्क को भी लेकर विवाद है लेकिन वहाँ वह आ जा पाते हैं और पार्क की देख रेख कर पाते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार इस मामले में मोहम्मद अर्सलान नाम के व्यक्ति द्वारा याचिका दायर की गई थी।

ट्रेनों की भीड़ देखी, कोच घटाने का प्रलाप सुना, पर क्या आपने दिवाली-छठ पर भारतीय रेलवे की मेहनत देखी: प्रोपेगेंडा से अलग है सच्चाई

बिहार जैसे प्रदेशों से रोजगार की तलाश में देश के अलग-अलग हिस्सों में पलायन टुकड़ों में होता है। पर इस पलायित आबादी का एक बड़ा हिस्सा दिवाली और छठ पर एक साथ अपने घरों के लिए रवाना होता है। इसके कारण रेलवे स्टेशन हो या ट्रेन हर जगह भीड़ देखने को मिलती है।

हर साल इस त्योहारी सीजन में ट्रेनों में भीड़ की तस्वीरें, वीडियो वायरल होती है। इसका इस्तेमाल कुछ लोगों अपने एजेंडा को आगे बढ़ाने के लिए करते हैं। प्रोपेगेंडा फैलाते हैं ताकि भारतीय रेलवे को बदनाम किया जा सके।

इसी कड़ी में इस बार यह अफवाह फैलाई गई कि मुनाफा कमाने के लिए इस बार ट्रेनों में जनरल और स्लीपर डिब्बों की संख्या कम कर दी गई है। ट्रेनों में दिखी भीड़ की एक बड़ी वजह इसे बताई गई। लेकिन हकीकत से इसका कोई वास्ता नहीं है। न तो ट्रेनों में पहले के मुकाबले जनरल और स्लीपर डिब्बों में कमी की गई और न ही पिछले सालों के मुकाबले इस बार विशेष व्यवस्थाएँ करने में कोई कोताही बरती गई है। उलटे इस मोर्चे पर लगातार भारतीय रेलवे आगे ही बढ़ रही है।

क्या ट्रेनों में कम कर दिए जनरल और स्लीपर डिब्बे?

भारतीय रेलवे ने बताया है कि ट्रेनों की संरचना में कोई बदलाव नहीं हुआ है। सभी ट्रेनों में पहले की तरह ही कोच लगे हैं। अलबत्ता अकेले पश्चिमी रेलवे ने 139 से ज्यादा स्पेशल ट्रेनें चलाई, जिसकी 1800 से अधिक ट्रिप भी हो चुकी हैं।

पश्चिमी रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (CPRO) सुमित ठाकुर का अनुसार रेलवे ने न तो कोच घटाए हैं और न ही ट्रेनों में किसी तरह का बदलाव किया है। उन्होंने बताया है कि अकेले मुंबई से ही ट्रेनों में 8 लाख से ज्यादा अतिरिक्त बर्थ लगाए गए हैं। स्टेशनों पर भी विशेष इंतजाम किए गए हैं। मुंबई डिवीजन के महत्वपूर्ण स्टेशनों पर 800 से अधिक जीआरपी जवानों की तैनाती की गई। खुद डीआरएम समेत वरिष्ठ अधिकारी स्टेशनों पर भीड़ को मैनेज कर रहे हैं।

सुमित ठाकुर ने बताया कि भीड़ को मैनेज करने के लिए भीड़भाड़ वाले स्टेशनों जैसे सूरत इत्यादि में स्टेशनों पर होल्डिंग एरिया भी क्रिएट किया गया है। टेंट वगैरह भी लगाए गए हैं। प्लेटफॉर्म टिकट की सेल को भी रोका गया है, ताकि अधिकृत यात्री ही स्टेशन के भीतर प्रवेश कर सकें। उन्होंने बताया कि त्योहार की वजह से टिकट सेल भी रेगुलेट की गई है। जितनी सीटें हैं, उतनी ही टिकट दी जा रही है।

दावा किया जा रहा था कि ज्यादा कमाई के लिए भारतीय रेलवे ने त्योहार को ध्यान में रखकर चलाई गईं स्पेशल ट्रेनों में जनरल और स्लीपर डिब्बे कम कर दिए गए हैं। इसके अनुसार 22 कोच के ट्रेन में जनरल डिब्बे 4 से घटाकर दो और स्लीपर डिब्बे 7 से घटाकर दो कर दिए गए हैं। इसके कारण उत्तर प्रदेश और बिहार जाने वाली ट्रेनों में भीड़ बढ़ गई है।

इंडिया टुडे ने भी अपनी पड़ताल में इस दावे को गलत पाया है। मीडिया संस्थान ने पाया है कि 22 कोच के ट्रेनों में पहले की तरह ही 6-7 स्लीपर और 4 जनरल कोच लगे हुए हैं। इनकी संख्या में कोई बदलाव नहीं किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार ऐसे ट्रेनों में 3AC कोच की संख्या 6 है, न कि 10 जैसा सोशल मीडिया में दावा किया जा रहा है। इसके अलावा पहले की तरह ही दो 2AC के और 1 1AC के कोच लगे हैं।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि दिसंबर 2023 तक 6754 ट्रेनों का परिचालन तय है। यह पिछले साले 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर के बीच चलाए गए स्पेशल ट्रेनों के ट्रिप के मुकाबले ढाई गुणा अधिक है। बीते साल इस समय अंतराल में स्पेशल ट्रेनों कर 2614 ट्रिप हुई थी। इस साल अब तक दिवाली और छठ को लेकर भारतीय रेलवे 2423 स्पेशल ट्रेनों का परिचालन कर चुका है।

गौर करने वाली बात यह है कि इस साल त्योहारी सीजन शुरू होने के बाद करीब 36 लाख लोग ट्रेन से सफर कर चुके हैं। पिछले साल के त्योहारी सीजन के मुकाबले यह करीब करीब दोगुना है।

आँकड़े यह भी बताते हैं कि अप्रैल से अक्टूबर 2023 तक 95.3 प्रतिशत यात्रियों ने सामान्य और स्लीपर कोच में यात्रा की, जबकि केवल 4.7 प्रतिशत ने एसी कोच में यात्रा की है। इस साल 372 करोड़ यात्रियों ने स्लीपर, नॉन-एसी और जनरल कोचों में यात्रा की, जो पिछले साल से 38 करोड़ अधिक है। इन 372 करोड़ यात्रियों में से 18.2 करोड़ ने एसी कोच में यात्रा की, जो पिछले साल की तुलना में 3.1 करोड़ अधिक है। यात्रियों की कुल संख्या बढ़कर 41.1 करोड़ हो गई। गैर-एसी यात्रियों (सामान्य और स्लीपर क्लास) में 92.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है।

रेलवे ने भीड़भाड़ से निपटने के लिए उठाए कई कदम

अब आप आसानी से समझ सकते हैं ट्रेनों में इतनी भीड़ क्यों देखने को मिल रही है। भारतीय रेलवे के इंतजाम बढ़ाने के बावजूद यात्रियों की संख्या का करीब दोगुना हो जाना इसका कारण है। भारतीय रेलवे ने भी कहा है कि वह इस समस्या से अवगत है और इसे दूर करने के लिए कदम उठा रहा है। रेलवे ने त्योहारी सीजन के दौरान चलाई जा रही विशेष ट्रेनों की संख्या में वृद्धि की है। यह मौजूदा ट्रेनों की क्षमता में सुधार करने के लिए भी काम कर रहा है।