Home Blog Page 1389

वर्ल्ड कप में पाकिस्तान की बेइज्जती के बाद कप्तान बाबर आजम ने दिया इस्तीफा, PCB के जिस मुखिया ने लीक किया था चैट, उनसे मुलाकात के बाद ऐलान

ICC वनडे वर्ल्ड कप 2023 में लीग फेज से ही बाहर होने वाली पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के कप्तान बाबर आजम ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। पाकिस्तानी टीम को वतन-वापसी के बाद उन्होंने इस्तीफे का ऐलान किया। बाबर आजम ने बुधवार (15 नवंबर, 2023) को ये घोषणा की। उन्होंने सभी फॉर्मेट में टीम की कप्तानी से इस्तीफा दे दिया है। बाबर आजम ने पाकिस्तानी क्रिकेट बोर्ड (PCB) की अंतरिम मैनेजमेंट कमिटी के अध्यक्ष ज़का अशरफ के साथ बैठक के बाद ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर इस्तीफे का ऐलान किया।

बाबर आजम ने अपने बयान में कहा कि उन्हें वो क्षण अच्छी तरह याद है जब 2019 में PCB की तरफ से फोन आया था और उन्हें पाकिस्तानी क्रिकेट टीम का नेतृत्व करने के लिए कहा गया था। उन्होंने कहा कि पिछले 4 वर्षों के दौरान उन्होंने मैदान से बाहर और भीतर काफी अच्छे और बुरे समय देखे हैं, लेकिन उन्होंने अपने पूरी मन से और जोश के साथ क्रिकेट की दुनिया में पाकिस्तान के गौरव और सम्मान को बनाए रखने के लिए प्रयास किया।

बाबर आजम ने अपने बयान में लिखा, “व्हाइट बॉल क्रिकेट (वनडे-T20) में नंबर एक तक पहुँचने के पीछे सभी खिलाड़ियों, कोचों और प्रबंधन की सामूहिक मेहनत थी। लेकिन, मैं पाकिस्तान के जोशीले क्रिकेट फैंस के प्रति कृतज्ञता जाहिर करना चाहूँगा जिन्होंने इस यात्रा में लगातार हमारा साथ दिया। आज मैं सभी फॉर्मेट में पाकिस्तानी क्रिकेट टीम की कप्तानी से इस्तीफा दे रहा हूँ। ये एक कठिन निर्णय है, लेकिन मुझे लगता है कि यही सही समय है

बाबर आजम ने आगे लिखा कि एक खिलाड़ी के रूप में वो तीनों फॉर्मेट (टेस्ट, वनडे टी20) में पाकिस्तानी टीम का प्रतिनिधित्व करते रहेंगे। साथ ही उन्होंने वादा किया कि वो टीम और नए कप्तान का अपनी प्रतिबद्धता और अनुभव से साथ देने के लिए मौजूद रहेंगे। उन्होंने कप्तानी को एक महत्वपूर्ण दायित्व बताते हुए उन्हें सौंपे जाने के लिए PCB को धन्यवाद दिया। बयान का अंत उन्होंने ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के साथ किया। वहीं अब अटकलें चालू हो गई हैं कि पाकिस्तान का अगला कप्तान कौन होगा।

बता दें कि बाबर आजम को पहले 2019 में T20 की कप्तानी दी गई थी, फिर अगले ही साल उन्हें वनडे और टेस्ट की कप्तानी सौंपी गई। हालिया वर्ल्ड कप में पाकिस्तानी टीम ने 9 में से 5 मैच गँवा दिए। ICC (अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद) ने इसे पाकिस्तान के लिए एक युग की समाप्ति करार दिया है। बाबर आजम ने इस्तीफे से पहले PCB प्रमुख से लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम स्थित मुख्यालय में मुलाकात की थी। पाकिस्तानी टीम ऑस्ट्रेलिया दौरे पर भी जाने वाली है।

सियालकोट की सड़क पर थी कार, भीतर बैठा था लश्कर कमांडर मोहम्मद मुज्जमिल: बाइक से आए ‘अज्ञात’ और ठोक कर चले गए

पाकिस्तान के आतंकी अब ‘अज्ञात हमलावर’ से खौफ में हैं। वहाँ एक के बाद एक आतंकवादियों को मौत के घाट उतारा जा रहा है। ताजे मामले में सियालकोट में अज्ञात हमलावरों ने अपने काम को फिर अंजाम दिया है। कश्मीर समेत पूरे भारत में कई आतंकी वारदातों को अंजाम देने वाले आईएसआई के पिट्ठू आतंकी संगठन लश्कर ए तोएबा के कमांडर को मौत के घाट उतार दिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मारे गए लश्कर आतंकी का नाम मोहम्मद मुजम्मिल है। वो अपने साथी नईम-उर-रहमान के साथ कार में सियालकोट के पसरूर तहसील इलाके में कहीं जा रहा था। उसी दौरान खोखरण चौक के पास बाइक सवार हमलावरों ने कार को रोक लिया। इसके बाद ताबड़तोड़ गोलियाँ बरसाकर मुजम्मिल और उसके साथी को मौत के घाट उतार दिया।

स्थानीय प्रशासन ने इसे जमीन के विवाद में हुई वारदात करार दिया है। हालाँकि, पिछले कुछ समय से पाकिस्तान के कई हिस्सों में अज्ञात हमलावरों ने भारत विरोधी काम करने वाले आतंकी संगठनों के कमांडरों को मौत के घाट उतारा है। कुछ दिन पहले ही कराची में जैश के एक कमांडर को भी मौत के घाट उतार दिया गया था।

12 नवंबर को मसूद अजहर के करीबी की हत्या

कराची में 12 नवंबर 2023 को जैश ए मोहम्मद के संस्थापक और भारत के टॉप दुश्मनों में से एक मसूद अजहर के करीबी और जैश कमांडर मौलाना तारिक रहीम उल्लाह तारिक को गोली मार दी गई थी। हत्या के समय मौलाना तारिक भारत विरोधी एक रैली में हिस्सा लेने जा रहा था। भारत विरोधी कट्टरपंथियों ने रैली का ऐलान किया था।

इस रैली में भारत में प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद के टॉप आतंकवादी मौलाना रहीम उल्लाह तारिक को मुख्य अतिथि के तौर पर बुलाया गया था। रैली में हजारों भारत विरोधियों की भीड़ थी। इस रैली में शामिल होते ही भीड़ में मौजूद किसी अज्ञात हमलावर ने उसे गोली मार दी। पुलिस का कहना है कि गोली बेहद करीब से मारी गई है। हमलावरों को अज्ञात बताया जा रहा है।

9 नवंबर को अकरम खान उर्फ अकरम गाजी की हत्या

9 नवंबर 2023 को भारत में वांछित एक इस्लामी आतंकी अकरम खान उर्फ अकरम गाजी की हत्या कर दी गई थी। अकरम लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का पूर्व कमांडर था। उसके सिर में गोली मारी गई थी। आतंकी अकरम गाजी ने साल 2018 से 2020 तक लश्कर भर्ती सेल का नेतृत्व किया था।

वह पाकिस्तान में भारत के विरोध में भड़काऊ भाषण देता था और युवाओं को दहशतगर्दी की राह पर धकेलता था। इसके साथ ही वह उन्हें कश्मीर में घुसपैठ कराकर भारत में आतंक फैलाता था। वह लंबे समय से चरमपंथी गतिविधियों में शामिल था। उसकी हत्या पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में की गई है। 

रविवार (5 नवंबर 2023) को साल 2018 में जम्मू-कश्मीर के सुंजवान में हुए आतंकी हमले के मास्टरमाइंड में से एक ख्वाजा शाहिद की हत्या कर दी गई थी। ख्वाजा शाहिद का पहले अपहरण कर लिया गया था। इसके बाद पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में नियंत्रण रेखा के पास उसका सिर कटा हुआ मिला था। इस घटना में भी अज्ञात हमलावर शामिल थे।

इसी साल अक्टूबर में पठानकोट हमले के मास्टरमाइंड शाहिद लतीफ की पाकिस्तान में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। साल 2016 में जम्मू-कश्मीर के पठानकोट वायुसेना स्टेशन में आतंकी हमला हुआ था। इस आतंकी घटना में शामिल चार आतंकवादियों का वह हैंडलर था। वहीं, दूसरा आतंकी और ISI का एजेंट मुल्ला बाहौर उर्फ होर्मुज को भी अज्ञात लोगों ने गोली मार दी।

इससे पहले सितंबर में अज्ञात बंदूकधारियों ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के रावलकोट में लश्कर-ए-तैयबा के एक शीर्ष आतंकवादी कमांडर रियाज अहमद उर्फ अबू कासिम की गोली मारकर हत्या कर दी थी। रियाज अहमद कोटली से नमाज अदा करने के लिए अल-कुदुस मस्जिद आया हुआ था। वहीं, हमलावरों ने घुसकर उसके सिर में गोली मार दी। वह भी LeT में लोगों की भर्ती करता था।

उससे पहले पिछले माह ‘लश्कर ए तैयबा’ के प्रमुख हाफिज सईद के करीबी अबु कासिम को रावलकोट में गोली मारी गई थी। खालिस्तान कमांडो फोर्स का दुर्दांत आतंकी और भारत में मोस्ट वॉन्टेड परमजीत सिंह पंजवाड़ की भी पाकिस्तान में अज्ञात लोगों ने गोली मारकर हत्या की थी।

जैश का खूंखार आतंकी जहूर मिस्त्री की भी हत्या हुई थी। जहूर मिस्त्री कंधार विमान अपहरण कांड में शामिल था। वहीं, आतंकी बशीर अहमद मीर उर्फ इम्तियाज आलम को रावलपिंडी में गोली मार दी गई थी। हिजबुल मुजाहिदीन ने उसे लॉन्च पैड सँभालने की जिम्मेदारी थी और वह पाकिस्तान से जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ कराता था।

वहीं, पाकिस्तान के उत्तरी वजीरीस्तान में दाऊद मलिक को अज्ञात बंदूकधारियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तरी वजीरीस्तान के मिराली एरिया में कुछ नकाबपोश बंदूकधारियों ने दाऊद मलिक को उस समय गोली मारकर हत्या कर दी, जब वह एक क्लिनिक में गया था। नकाबपोश वहाँ पहले से ही उसका इंतजार कर रहे थे।

वहीं, पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में ही आतंकी सैयद नूर शालोबार की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। शनिवार (04 मार्च 2023) को अज्ञात हमलावरों ने कश्मीर में कई आतंकवादी घटनाओं के लिए जिम्मेदार शालोबार को गोलियों से भून डाला था। नूर शालोबार पाकिस्तानी सेना और ISI के साथ मिलकर कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने का काम कर रहा था।

नूर शालोबार से पहले सैयद खालिद राजा, एजाज अहमद अहंगर और बशीर अहमद नाम के आतंकियों की भी गोली मार कर हत्या हो चुकी है। मारे गए चारों आतंकी भारत में मोस्ट वांटेड थे। इनमें से एक को अफगानिस्तान में ढेर किया गया जबकि 3 का शिकार पाकिस्तान में ही बनाया गया।

छात्र AMU के, तालीम आतंकवाद की… जिहाद की ‘बैयत’ पूरा करने में जुटा था ISIS का मॉड्यूल: एप के जरिए कनेक्ट थे आतंकी, जमा कर रहे थे हथियार

उत्तर प्रदेश पुलिस की ‘आतंकवाद निरोधक शाखा’ (ATS) ने नवंबर 2023 में अलीगढ़ में फल-फूल रहे ISIS मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है। अब तक कुल 7 आतंकियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। 3 नवम्बर 2023 को ATS ने इस मामले में 10 नामजदों सहित कुछ अज्ञात आरोपितों के खिलाफ FIR दर्ज करवाई है। अब तक दिल्ली और UP पुलिस ने मिला कर 7 आतंकियों को गिरफ्तार कर लिया है। नेटवर्क में नामजद अन्य फरार चल रहे हैं। अधिकतर ‘अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी’ (AMU) से जुड़े इन आतंकियों ने जिहाद की कसम खाई थी।

इस मामले की FIR एटीएस के थाना गोमती नगर में दर्ज हुई है। शिकायतकर्ता ATS प्रभारी अलीगढ़ हैं। शिकायत की शुरुआत मुंबई के काला चौकी थाना क्षेत्र में साल 2023 की शुरुआत में दर्ज हुए एक FIR से हुई है। यह FIR फर्जी दस्तावेज, चोरी, आपराधिक काम करने के मकसद और आदि की धाराओं में दर्ज हुई थी। उत्तर प्रदेश ATS इस FIR में नामजद आरोपितों की जानकारियाँ जुटा रही थी। जाँच के दौरान ATS को झारखंड में हजारीबाग के शाहनवाज और दिल्ली में दरियागंज निवासी रिज़वान की जानकारी हासिल हुई।

ATS ने शाहनवाज़ और रिज़वान के फोन को सर्विलांस पर लिया। दोनों की बातचीत से पता चला कि वो आतंकी संगठन ISIS के सक्रिय सदस्य हैं। जब इन दोनों के बारे में पुलिस ने और जानकारी जुटाई तो पता चला कि शाहनवाज और रिज़वान अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के छात्र संगठन SAMU (स्टूडेंस ऑफ़ अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी) से जुड़े हुए हैं। SAMU के इन सदस्यों में मुख्य नाम वाज़ीउद्दीन, अब्दुल्ला अर्शलान, माज़ बिन तारिक, अब्दुल समद मलिक, फैज़ान बख्तियार, अरशद वारसी, मोहम्मद नावेद और रिज़वान अशरफ हैं। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

SAMU से जुड़े ये सभी आरोपित अलीगढ़, छत्तीसगढ़, संभल, प्रयागराजराज, दिल्ली और झारखंड के हैं। रिज़वान अशरफ AMU का छात्र नहीं है। ये पूरा समूह ISIS की विचारधारा से प्रभावित था। ATS अपनी जाँच कर रही थी कि रिज़वान अशरफ और अरशद वारसी को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 2 अक्टूबर, 2023 को गिरफ्तार कर लिया। शाहनवाज लम्बे समय से ISIS से जुड़ा था और अलीगढ़ में रह कर उसका नेटवर्क खड़ा कर रहा था। शाहनवाज़ के साथियों ने अलीगढ़ में ही उसका निकाह धर्मान्तरित खुदीजा कर करवाया। खुदीजा पहले हिंदू थी।

इन सबके अलावा मोहम्मद रिज़वान अशरफ ने SAMU के अन्य सदस्यों को जिहाद के लिए बैयत (कसम) दिलाई थी। ये सभी मिल कर जिहादी साहित्य बाँट रहे थे और अपने संगठन का विस्तार कर रहे थे। ये सभी AMU के अन्य छात्रों को भी ISIS से जोड़ रहे थे। इनके कार्यक्षेत्र रामपुर, कौशाम्बी, संभल, प्रयागराज, लखनऊ और अलीगढ़ आदि क्षेत्र थे। इनको ISIS के हैंडलर तमाम एप के जरिए दिशा निर्देश दिया करते थे। ATS के अनुसार ये सभी आरोपित भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ कर यहाँ शरिया कानून स्थापित करना चाहते थे।

ATS की शिकायत में इस बात का भी जिक्र है कि सभी आरोपित चोरी-छिपे हथियार भी जमा कर रहे थे। इनका मकसद किसी बड़ी आतंकी घटना को अंजाम देना था। पुलिस ने सभी 10 नामजद आरोपितों पर IPC की धारा 121- A और 122 के साथ विधि विरुद्ध क्रिया कलाप अधिनियम 1967 की धारा 13, 18, 18 बी और 38 के तहत कार्रवाई की गई है। फैज़ान बख्तियार और अब्दुल समद मालिक फिलहाल फरार चल रहे हैं। बाकी सभी नामजद व कुछ अन्य अज्ञात आरोपितों को दिल्ली और UP पुलिस ने अलग-अलग दिनों में दबिश दे कर गिरफ्तार कर लिया है।

शरिया को जिन्दगी से बढ़कर बताने वाली तहरीक मुस्लिम शब्बन का कॉन्ग्रेस को समर्थन, टाइगर राजा सिंह को हराने का मंसूबा

तेलंगाना चुनावों में तहरीक मुस्लिम शब्बन ने 14 नवम्बर 2023 को कॉन्ग्रेस को समर्थन देने का ऐलान किया। तहरीक के मुखिया मोहम्मद मुश्ताक मालिक ने हैदराबाद में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में समर्थन का ऐलान करते हुए 13 बिंदु का एक चार्टर भी पेश किया। इसमें उन्होंने तेलंगाना वक्फ आयोग की स्थापना, उसे न्यायिक शक्तियाँ देना और मुस्लिमों का आरक्षण देने की माँग की है।

कुछ रिपोर्ट्स में सामने आया है कि समर्थन के लिए कॉन्ग्रेस के तेलंगाना प्रभारी मानिकराव ठाकरे और सचिव मंसूर अली खान तहरीक के नेताओं से मिले थे। तहरीक मुस्लिम शब्बन का कहना है कि वह भाजपा के गोशामहल से प्रत्याशी टाइगर राजा सिंह को हराना चाहता है। तहरीक का कहना है कि वह ऐसा नफरत को कम करने के लिए करना चाहता है।

टाइगर राजा सिंह तेलंगाना में भाजपा के सबसे प्रमुख नेताओं में से एक हैं। वे इस्लामी हिंसा के खिलाफ लगातार आवाज भी उठाते रहे हैं। हालाँकि, तहरीक ने यह भी कहा कि वह राज्य की छह सीटों पर कॉन्ग्रेस को समर्थन नहीं देंगे। तहरीक ने चार्टर में विदेश जाने वाले मुस्लिमों को छात्रवृत्ति, समुदाय के विकास के लिए ₹500 करोड़, वक्फ आयोग की स्थापना और इसे न्यायिक शक्तियाँ देने की माँग की गई हैं।

इस चार्टर में तहरीक ने मुस्लिम महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने, मुस्लिमों को 8% आरक्षण देने, उर्दू को आगे बढ़ाने के अलावा पुलिस, न्यायपालिका और राजस्व विभाग में नौकरियाँ देने और इमामों एवं मुआज्ज़िमों को मासिक भत्ता देने जैसी कई माँगे की हैं। उसने मस्जिदों और कब्रगाहों की सुरक्षा देने का भी जिक्र किया है।

तहरीक मुस्लिम शब्बन का इतिहास

तहरीक मुस्लिम शब्बन काफी विवादित संगठन रहा है। हाल ही में चालू हुए इजरायल हमास युद्ध के बाद यह संगठन कई विरोध प्रदर्शन आयोजित कर चुका है। अक्टूबर 2023 में इसके मुखिया मुश्ताक मलिक को नजरबन्द कर दिया गया था। वह हमास के समर्थन में एक रैली निकालने वाले थे।

तहरीक मुस्लिम शब्बन ने हमास के हमलों को भी सही ठहराया था। जुलाई 2023 में तहरीक मुस्लिम शब्बन ने एक सर्वदलीय बैठक बुलाई थी, जिसका उद्देश्य यूनिफॉर्म सिविल कोड का विरोध करना था। इसके मुखिया ने इस दौरान ‘जान से बढ़कर शरियत’ का नारा दिया था।

वर्ष 2022 में भी मलिक के ऊपर FIR दर्ज की गई थी। मलिक ने एक फेसबुक पोस्ट के जरिए मुस्लिमों को एक धरने में जाने को कहा था। उन पर समाज में घृणा को बढ़ाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। मलिक ने यह धरना प्रदर्शन पूर्व भाजपा प्रवक्ता नुपुर शर्मा के विरुद्ध आयोजित किया था।

नुपुर शर्मा के खिलाफ तहरीक ने कैम्पेन चलाया था। उसने नुपुर की गिरफ्तारी की माँग की थी और ‘गुस्ताखी ना काबिल-ए-बर्दाश्त है’ जैसे नारे लगाए थे। जनवरी 2020 में भी तहरीक ने NRC और CAA के विरुद्ध कई प्रदर्शन भी आयोजित किए थे। मलिक ने CAA और NRC के विरुद्ध मुस्लिमों को भड़काया था। उन्होंने अपील की थी कि कोई भी मुस्लिम अपना कागज ना दिखाए।

गौरतलब है कि मलिक तेलंगाना के बड़े नेता और AIMIM के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी को भाजपा का एजेंट बताते हैं। शायद ऐसा इसलिए है, क्योंकि वह कॉन्ग्रेस के ज्यादा निकट हैं जबकि ओवैसी की कॉन्ग्रेस ने नहीं बनती है। असदुद्दीन औवैसी तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद से सांसद भी हैं।

(यह रिपोर्ट मूल रूप से अंग्रेजी में अनुराग ने लिखी है। इसे विस्तार से पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें।)

वानखेड़े में सचिन को सलाम, अनुष्का को चुम्मा… विराट कोहली के घर फिर से गूँजने वाली है किलकारी? बेबी बंप छुपाती नजर आईं पत्नी

वर्ल्ड कप 2023 में भारतीय क्रिकेट टीम के शानदार प्रदर्शन के साथ विराट कोहली को दोबारा से पिता बनने की खुशखबरी मिलने वाली है। बेंगलुरु में टीम इंडिया की दीवाली पार्टी तो कुछ ऐसा ही इशारा कर रही है। दरअसल इस पार्टी में अनुष्का शर्मा बेबी बंप छुपाते हुए नजर आई थीं। बता दें कि न्यूजीलैंड के खिलाफ सेमीफाइनल मैच में विराट कोहली ने वनडे में शतकों का अर्धशतक पूरा किया। इसके बाद उन्होंने ऑडिएंस में बैठी अपनी पत्नी अनुष्का शर्मा को किस दिया, और सचिन तेंदुलकर को सलाम किया।

अनुष्का शर्मा ने पिंक कलर के सूट पर प्याजी कलर के दुपट्टे वाला खूबसूरत सूट पहन रखा था तो विराट कोहली हरे रंग के कुर्ता पायजामा में थे। विराट ने उनके कंधे पर हाथ रखा था। इस दौरान पार्टी के वेन्यू में आते वक्त अनुष्का बार-बार अपना इस दुपट्टा आगे की तरफ सही करते दिखाई दे रही थीं।

वो कैमरे की तरफ देखते हुए मुस्कुरा रही थीं, लेकिन उनका फोकस अपने दुपट्टे पर अधिक था। उन्हें ऐसा करते देख लग रहा था कि जैसे कि वो बेबी बंप को छुपाने की कोशिश कर रहीं हों। इसे देख लग कयास लगाते दिखे की वो अपनी प्रेग्नेंसी छुपाने के लिए ऐसा कर रही थीं।

यहीं नहीं, उन्होंने टीम इंडिया के खिलाड़ियों के साथ जो ग्रुप फोटो खिंचवाया। उसमें उन्होंने सामने देखते हुए नहीं बल्कि थोड़ा सा तिरछी खड़ी होकर पोज दिया। जब वो पार्टी के लिए गेट से अंदर हॉल में आ रही थी तो उनकी चाल भी कुछ ऐसी नजर आ रही थी कि जैसे वो प्रेग्नेंट हो। हालाँकि, इस दौरान इसे लेकर दोनों की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं जारी किया गया है।

हालाँकि हिन्दुस्तान टाइम्स ने बीते महीने अक्टूबर में सूत्रों के हवाले से लिखा था कि विराट और अनुष्का के घर दूसरा नन्हा मेहमान आने वाला है और जल्द ही वो इसका आधिकारिक ऐलान करने वाले हैं।

क्रिकेट और बॉलीवुड जगत की ये दोनों मशहूर हस्तियाँ साल 2017 में इटली में शादी के बंधन में बंधी थीं। इस वक्त जहाँ इस वर्ल्ड कप में विराट कोहली का मैदान पर दमदार प्रदर्शन जारी है तो वहीं निजी जिंदगी में भी उनके लिए खुशियाँ बाँहे पसार रही हैं।

11 जनवरी, 2021 को अनुष्का शर्मा ने बेटी को जन्म दिया। दोनों ने अपने प्यार को यादगार बनाने के लिए विराट और अनुष्का के नाम के संयुक्त नाम पर बेटी का नाम वामिका रखा। अनुष्का शर्मा शादी के बाद आखिरी बार फिल्म ‘जीरो’ में देखी गई थी। अब उनकी अगली फिल्म क्रिकेटर झूलन गोस्वामी के जीवन पर बनी बॉयोपिक चाकदा एक्सप्रेस है।

‘डबल सेंचुरी’ से भारत ने ठोके 397 रन, विराट कोहली ने सचिन को पीछे छोड़ा: न्यूजीलैंड की धुलाई रोहित ने शुरू की, राहुल ने किया खत्म

क्रिकेट विश्वकप 2023 के पहले सेमीफाइनल में भारत ने न्यूजीलैंड के सामने जीत के लिए 398 रनों का पहाड़ सरीखा लक्ष्य रखा है। भारत ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए निर्धारित 50 ओवरों में 4 विकेट खोकर 397 रन बनाए हैं। भारत के लिए विराट कोहली ने अपना रिकॉर्डतोड़ पचासवाँ शतक बनाया है। विराट कोहली ने 113 गेंदों पर 117 रनों का शानदार पारी खेली। विराट कोहली ने अपनी पारी में 9 चौके और 2 गगनचंबी छक्के लगाए। विराट कोहली के अलावा श्रेयस अय्यर ने भी शानदार शतकीय पारी खेली। श्रेयस अय्यर 105 रन बनाकर आउट हुए।

भारत के लिए के एल राहुल नाबाद 39 रन और शुभमन गिल नाबाद 80 रन बनाकर पवैलियन लौटे। इससे पहले, भारतीय टीम के कप्तान रोहित शर्मा ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला लिया। वानखेड़े के मैदान पर खेले जा रहे इस मैच में रोहित शर्मा और शुभमन गिल ने भारतीय टीम को शानदार शुरुआत दी। रोहित शर्मा के रूप में भारत का पहला विकेट कुल 71 रनों के स्कोर पर गिरा। रोहित शर्मा 29 गेंदों पर 47 रन बनाकर आउट हुए।

रोहित शर्मा ने अपनी पारी में 4 चौके और 4 छक्के लगाए। इसके बाद शुभमन गिल ने तेज बल्लेबाजी का जिम्मा अपने ऊपर लिया। शुभमन गिल 65 गेंदों पर 79 रन बनाकर रिटायर्ड हर्ट होकर पवैलियन लौटे थे, लेकिन पारी की पाँच गेंदे बाकी थी, तभी वो वापस मैदान पर लौट लाए और नाबाद लौटे।

भारतीय टीम का दूसरा विकेट 327 रनों के कुल स्कोर पर गिरा था। विराट कोहली इसी स्कोर पर पवैलियन लौटे थे। इसके बाद 381 रनों के कुल स्कोर पर श्रेयस अय्यर तीसरे विकेट के तौर पर आउट हुए। अय्यर ने अपनी 105 रनों की पारी में 4 चौके और 8 छक्के लगाए। टीम का चौथा विकेट आखिरी ओवर में सूर्या के तौर पर गिरा, वो 2 गेंदों पर 1 रन बनाकर आउट हो गए। न्यूजीलैंड के लिए टिम साउदी ने सर्वाधिक 3 विकेट लिए तो ट्रेंट बोल्ट को एक विकेट मिला।

विराट कोहली ने तोड़े कई रिकॉर्ड

विराट कोहली ने अपनी 117 रनों की पारी के दौरान कई रिकॉर्ड तोड़े। अब विराट कोहली के नाम वनडे क्रिकेट में सबसे ज्यादा 50 शतक हो गए हैं। उन्होंने मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर को पीछे छोड़ा। विराट कोहली ने 291मैच की 279वीं पारी में 50वाँ वनडे शतक लगाया। इस पारी के दौरान ही विराट कोहली ने किसी भी एक विश्वकप में सर्वाधिक रन बनाने का रिकॉर्ड भी सचिन तेंदुलकर से छीन लिया। सचिन तेंदुलकर ने साल 2002-2003 के विश्वकप में दक्षिण अफ्रीका में सर्वाधिक 673 रन बनाए थे। विराट कोहली इस विश्वकप में 711 रन बना चुके हैं। उनके पास इस रिकॉर्ड को और भी बेहतर करने का मौका है।

कश्मीर में 300 फीट गहरी खाई में गिरी बस, 36 की मौत: कई नाजुक, PM मोदी ने जताया दुख; मृतकों के परिजनों को ₹ 2 लाख

जम्मू-कश्मीर में बुधवार (15 नवंबर 2023) को हुए एक भयानक बस हादसे में 36 लोगों की जान चली गई, जबकि 19 लोग घायल हो गए हैं। घायलों में से 6 लोगों की हालत बेहद नाजुक बताई जा रही है। ये बस कश्मीर के किश्तवाड़ से जम्मू के लिए निकली थी। हादसा इतना भयानक था कि मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है।

जम्मू जाने के कारण बस डोडा जिले के असार क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त होकर 300 फीट गहरी खाई में जा गिरी। मौके पर मौजूद डोडा के डीसी हरविंदर सिंह के मुताबिक, घायलों को डोडा के सरकारी अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया है। घायलों को शिफ्ट करने के लिए हेलीकॉप्टर की मदद ली गई है।

इस हादसे पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, पीएम मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवदेना जताई है। पीएम ऑफिस ने एक्स पर पोस्ट कर कहा, “जम्मू-कश्मीर के डोडा में हुई बस दुर्घटना दुखद है। अपने प्रियजनों को खोने वाले परिवारों के प्रति मैं संवेदनाएँ व्यक्त करता हूँ। मैं घायलों के जल्द से जल्द स्वस्थ्य होने की प्रार्थना करता हूँ।”

पोस्ट में आगे कहा गया है, “इस बस दुर्घटना में जान गँवाने वाले हर मृतक के परिजन को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से दो लाख रुपए की अनुग्रह राशि दी जाएगी। वहीं, प्रत्येक घायल को 50 हजार रुपए की अनुग्रह राशि दी जाएगी।”

दुर्घटनाग्रस्त बस में 55 यात्री सवार थे। किश्तवाड़ से जम्मू की तरफ जाते वक्त ये बस डोडा जिले के असार इलाके में हाईवे पर मोड़ पर मुड़ने के दौरान संतुलन बिगड़ने से लुढककर तुंग्राल के पास गहरी खाई में गिर गई।

जम्मू-कश्मीर के एलजी मनोज सिन्हा ने दुख जताते हुए कहा, “डोडा के असर में दुखद बस दुर्घटना में लोगों की मौत से बेहद दुखी हूँ। शोक संतप्त परिवारों के प्रति मेरी हार्दिक संवेदनाएँ और दुर्घटना में घायल हुए लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूँ। प्रभावित लोगों को सभी आवश्यक सहायता प्रदान करने के लिए मंडलायुक्त एवं जिला प्रशासन को निर्देशित कर दिया गया है।”

स्टाफ रूम सार्वजनिक जगह नहीं, यहाँ ‘चमार’ कहना SC/ST एक्ट के तहत अपराध नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दो लोगों को किया दोषमुक्त

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा है कि दफ्तर के भीतर किसी को ‘चमार’ कहना अपराध नहीं है, क्योंकि यह एक सार्वजनिक स्थान नहीं है। यह निर्णय देते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दो व्यक्तियों को दोषमुक्त करार दे दिया।

वर्ष 2010 में एक व्यक्ति ने शहडोल के जैतपुर पुलिस थाने में यह मामला दर्ज करवाया था कि कमलेश शुक्ला और आशुतोष तिवारी ने एक स्कूल के स्टाफ रूम में एक मीटिंग के दौरान उसे ‘चमार’ कहा। इन दोनों के खिलाफ SC/ST अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था। दोनों व्यक्तियों पर SC/ST एक्ट की धारा 3(1)x के तहत मामला दर्ज किया गया था।

दोनों व्यक्तियों ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में यह याचिका डाली थी कि उनके विरुद्ध चल रहे इस मामले को खत्म कर दिया जाए। इस मामले की सुनवाई मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति विशाल धगट कर रहे थे। हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में सार्वजनिक और जगह की परिभाषा स्पष्ट करते हुए निर्णय दिया।

कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक स्थान कोई ऐसा स्थान होता है, जहाँ जनता आ जा सकती है। स्कूल का स्टाफ रूम कोई ऐसी जगह नहीं है, जहाँ आम जनता आ-जा सके। ऐसे में यह एक सार्वजनिक स्थान नहीं है। हाईकोर्ट ने कहा कि इसके सार्वजनिक स्थान ना होने के कारण मामला भी नहीं बनता और यहाँ यदि चमार कहा गया है तो यह अपराध की श्रेणी में नहीं आता।

कोर्ट ने कहा कि अश्लील गाने या कृत्य यदि सार्वजनिक स्थान पर नहीं हुए हैं तो उन पर भी दंड नहीं दिया जा सकता। ऐसे में दोनों व्यक्तियों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 294 के तहत मामला भी नहीं बनता है। इन दोनों व्यक्तियों पर आरोप था कि उन्होंने स्टाफरूम में अश्लील गाने बजाए हैं।

इन दोनों व्यक्तियों पर मामला दर्ज करवाने वाले ने यह भी कहा था उसे धमकी दी गई। कोर्ट ने इस पर कहा कि धमकी से ना ही शिकायतकर्ता को कोई नुकसान पहुँचा और ना ही वह चिंतित हुआ ऐसे में यह मामला भी नहीं बनता है।

जिस ‘थप्पड़’ के लिए नाना पाटेकर को बताया ‘बेहूदा’, कहा – इसकी फिल्म मत देखो; जानिए क्या है उस वायरल Video की सच्चाई

फिल्म अभिनेता नाना पाटेकर हाल ही में ‘द वैक्सीन वॉर’ में दिखे थे। अब वो उत्तर प्रदेश के वाराणसी पहुँचे हैं। वहाँ का एक वीडियो भी वायरल हुआ है, जिसे लेकर उनकी खासी आलोचना की जा रही है। वीडियो के आधार पर दावा किया जा रहा है कि एक युवक नाना पाटेकर के साथ सेल्फी लेने के लिए आया, जिसे उन्होंने थप्पड़ मार कर भगा दिया। इसके बाद उनके व्यवहार की आलोचना होने लगी। इस वीडियो को धड़ल्ले से शेयर किया जाने लगा।

नाना पाटेकर ने वाराणसी में फैन को मारा थप्पड़? शेयर हो रहे वीडियो

पत्रकार नरेंद्र नाथ मिश्रा ने इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखा, “नाना पाटेकर का उनका फ़ैन के प्रति व्यवहार देखें। इन स्टार को यह समझ नहीं होती है कि इनके जो लटके झटके हैं, इनका जो स्टारडम है,इनके पास जो शोहरत-पैसा है वह इन्हीं फैंस की बदौलत है जिसे वह तुच्छ समझते हैं।”

वहीं भारत समाचार’ ने भी इस वीडियो को चलाते हुए लिखा, “वाराणसी में नाना पाटेकर ने अपने फैंस को जड़ा थप्पड़। फिल्म की शूटिंग के दौरान सेल्फी लेने पहुँचा था फैन। नाना पाटेकर ने थप्पड़ जड़कर फैंस को भगाया। सोशल मीडिया पर वायरल हुआ थप्पड़ मारने का वीडियो। वाराणसी में नाना पाटेकर कर रहे हैं फिल्म ‘जर्नी’ की शूटिंग।”

पत्रकार अभिषेक ने आपत्तिजनक शब्द का इस्तेमाल करते हुए लिखा, “नाना पाटेकर बेहूदे इंसान हैं। ऐसे लोगों की फ़िल्में देखना बंद कीजिए।”

एक अन्य पत्रकार प्रज्ञा मिश्रा ने भी वीडियो डालते हुए लिखा, “इन्हीं सेल्फी लेने वालों ने नाना पाटेकर को हीरो बनाया। इन्हीं ऑटोग्राफ लेने वालों ने नाना पाटेकर को हीरो बनाया। नाना जूस का धंधा करके हीरो नहीं बने। लोगों के प्यार की वजह से हीरो बने। बनारस में शूटिंग के दौरान सेल्फी लेने आए बच्चे को थप्पड़ जड़ दिया। बच्चे को हटाने का दूसरा तरीका भी हो सकता था। हिंसा निंदनीय है।”

इसी तरह कई अन्य हैंडलों से भी ऐसे ही दावे करते हुए इस वीडियो को शेयर किया गया और नाना पाटेकर की निंदा की गई। बता दें कि नाना पाटेकर को सीधा-सादा जीवन जीने के लिए जाना जाता है और वो बड़े-बड़े कार्यक्रमों में भी इसी सादे ड्रेस में पहुँचते हैं। जमीन पर बैठ कर भोजन करते हुए उनकी तस्वीर भी सामने आती है। साथ ही उन्हें किसानों के लिए महाराष्ट्र में कई काम करने के लिए जाना जाता है। सरकारी समाजिक कल्याण के कार्यक्रमों में वो बतौर अतिथि बुलाए जाते रहे हैं।

नाना पाटेकर केविरल वीडियो पर क्या बोले डायरेक्टर

इस वायरल वीडियो पर फिल्म निर्देशक अनिल शर्मा ने प्रतिक्रिया दी है। अनिल शर्मा ‘ग़दर’ और ‘ग़दर 2’ के अलावा ‘अपने’ जैसी सफल फिल्मों के निर्देशन के लिए जाने जाते हैं। सनी देओल के साथ उनकी जोड़ी खूब जमती है। अनिल शर्मा का कहना है कि वाराणसी का ये वीडियो उनकी ही फिल्म की शूटिंग के दौरान का है। उनकी मानें तो ये वीडियो वास्तविक नहीं है, बल्कि फिल्म की शूटिंग के दौरान का है और दृश्य ही कुछ ऐसा था।

दशाश्वमेध घाट के इस वीडियो पर ‘आज तक’ से बात करते हुए अनिल शर्मा बोले, “मुझे भी इस खबर के बारे में जानकारी मिली है। मैंने वीडियो देखा है। नाना पाटेकर ने किसी को नहीं मारा है। ये मेरी फिल्म का शॉट है। इस दृश्य में नाना पाटेकर को उनके पास आने वाले लड़के को सिर पर मारना होता है। शूटिंग चालू थी और ऐसा ही फिल्माया गया। भीड़ में मौजूद किसी व्यक्ति ने इस दृश्य को अपने फोन से शूट कर के लीक कर दिया।”

अनिल शर्मा ने कहा कि इस वीडियो के जरिए नाना पाटेकर की नकारात्मक छवि बनाई जा रही है, जो सरासर गलत है। उन्होंने लोगों से निवेदन किया कि फैंस इस वीडियो को समझें। साथ ही कहा कि ये फिल्म का शॉट है, नाना पाटेकर ने किसी को नहीं मारा है।

गुज्जरों की नाराजगी, खिसकता आधार, खिलता कमल… पोस्टर पर लौटे पायलट राजस्थान में कॉन्ग्रेस की बचा पाएँगे लाज?

राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 में हर तरफ कॉन्ग्रेस बैकफुट पर दिख रही है। टिकट को लेकर हर सीट पर लड़ाई है तो नेतृत्व को लेकर सालों से राजस्थान में चल रही कॉन्ग्रेसी लड़ाई से कौन वाकिफ नहीं है। इस चुनाव में सचिन पायलट और अशोक गहलोत ने अब तक एक भी रैली साथ में नहीं की है। ऐसे में माना जा रहा था कि दोनों ही नेता अपनी-अपनी ताकत अपनी मजबूत सीटों पर दिखा रहे हैं। सचिन को कॉन्ग्रेस खारिज नहीं कर सकी थी। यही वजह है कि सचिन ने अपने समर्थक सभी 19 विधायकों को इस बार भी टिकट दिलवा लिया है। कॉन्ग्रेस को लग रहा है कि सचिन को अलग-थलग करके काम नहीं चलेगा। ऐसे में उनकी कॉन्ग्रेस के पोस्टरों पर वापसी कराई गई है।

जयपुर में कॉन्ग्रेस की ओर से गृह लक्ष्मी गारंटी योजना के पोस्टर लगाए गए हैं। इन पोस्टरों के साथ ही करीब 4 साल बाद सचिन पायलट की कॉन्ग्रेस के पोस्टरों में वापसी हुई है। दरअसल, 12-13 जुलाई 2020 को जयपुर से जो तस्वीरें आई थीं, वो सचिन पायलट को नीचा दिखाने के लिए थीं। अशोक गहलोत मुख्यमंत्री थे, लेकिन संगठन की कमान तब भी सचिन पायलट के ही हाथों में थी। उस समय सचिन पायलट के जन्मदिन पर जयपुर स्थित पार्टी के कार्यालय में जब उनके समर्थकों ने पोस्टर लगाए थे तो उन्हें हटा दिया गया था।

पुरानी है लड़ाई, लेकिन अब क्यों याद आई?

वैसे आपको फिर से याद दिला देते हैं कि राजस्थान में सचिन पायलट की अगुवाई में 2018 में जीत हासिल करने वाली कॉन्ग्रेस ने उन्हें सत्ता नहीं सौंपी तो सचिन पायलट ने कुछ महीनों के इंतजार के बाद बगावत का झंडा उठा लिया था। इसके बाद अशोक गहलोत की अगुवाई में कॉन्ग्रेस हाईकमान ने भी सचिन को किनारे लगा दिया। सचिन पायलट के डिप्टी सीएम पद पर रहते हुए बगावत को देखकर अशोक गहलोत के इशारे पर उनके पोस्टर फड़वा दिए गए, वो भी तब जब खुद सचिन पायलट ही राजस्थान प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी के अध्यक्ष थे।

इस घटना ने सचिन पायलट को इस कदर निराश कर दिया था कि उन्होंने अगले ही दिन डिप्टी सीएम का पद छोड़ दिया और खुलकर सरकार से अलग हो गए। अभी इस चुनाव की बात करें तो अब तक सचिन पायलट और अशोक गहलोत कॉन्ग्रेस पार्टी में दो ध्रुव की तरह काम करते दिख रहे हैं। इस चुनाव में दोनों की एक रैली तक साथ नहीं हुई है। अब जबकि मतदान से पहले चुनाव प्रचार के लिए सिर्फ एक सप्ताह का समय बचा है तो कॉन्ग्रेस पार्टी के पोस्टरों पर सचिन पायलट की वापसी हुई है।

कॉन्ग्रेस के पोस्टर पर सचिन पायलट की सवा तीन साल बाद वापसी (फोटो साभार : अमर उजाला)

पोस्टरों पर सचिन पायलट की वापसी हुई है तो उसके पीछे की वजह विशुद्ध राजनीतिक है। सचिन पायलट का राजस्थान के गुज्जर समुदाय पर पर मजबूत पकड़ माना जाता है। इस चुनाव में मीडिया रिपोर्ट्स ये बता रही हैं कि गुज्जर बहुल इलाकों में कॉन्ग्रेस का तीखा विरोध हो रहा है। गुज्जर अब भी ये बात पचा नहीं पा रहे हैं कि जिस सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाने के लिए पूरे समाज ने अपना जोर लगा दिया था, उसे मुख्यमंत्री बनाना तो दूर, कॉन्ग्रेस हाई कमान ने डिप्टी सीएम पद से भी हटा दिया था। ऐसे में अब जब प्रचार के लिए कॉन्ग्रेसी उम्मीदवार गुज्जर बहुल इलाकों में पहुँच रहे हैं तो उन्हें विरोध का सामना करना पड़ रहा है। कई इलाकों में स्थानीय गुज्जर नेताओं ने बकायदा भाजपा का झंडा उठा लिया है।

गुज्जरों का दबाव कर रहा काम?

राजस्थान की 200 विधानसभा सीटों में से 40-50 विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जिस पर सचिव पायलट का सीधा प्रभाव रहता है। इन सीटों पर गुज्जर समुदाय की अच्छी-खासी आबादी है। ये उत्तर प्रदेश और हरियाणा से भी सटी सीटें हैं। इन इलाकों में अशोक गहलोत ने एक भी रैली नहीं की है। अब चूँकि कॉन्ग्रेस अपने 7 वादों को लेकर जनता तक पहुँचने की कोशिश कर रही है तो उसे गुज्जर बहुल इलाकों में भी जाना ही होगा। ऐसे में नाराजगी कम करने के लिए अशोक गहलोत और कॉन्ग्रेस हाईकमान ने फैसला किया है कि सचिन पायलट को फिर से पोस्टरों पर जगह दी जाए, वर्ना बहुत देर हो जाएगी। क्योंकि, सचिन पायलट के पास इतना समय है कि वो अगले 5 साल इंतजार कर सकते हैं, लेकिन ये समय अब अशोक गहलोत के पास नहीं है।

अभी तक की रणनीति सफल रही, लेकिन आगे क्या?

अभी तक सचिन पायलट और अशोक गहलोत को एक साथ मंच पर न लाकर कॉन्ग्रेस ने समझदारी का ही परिचय दिया है। इसकी वजह साफ है कि सचिन पायलट का विरोध करने वाले गहलोत के समर्थकों को पायलट समर्थक सार्वजनिक तौर पर बेइज्जत कर चुके हैं। इसीलिए कॉन्ग्रेस की कोशिश रही है कि वो दोनों नेताओं को एक साथ एक मंच पर न लाएँ। ऐसे में कॉन्ग्रेस अब तक इस स्थिति को संभाल पाने में सफल रही है। यही नहीं, कॉन्ग्रेस ने दोनों ही नेताओं को एक-दूसरे के मजबूत इलाकों में भी जाने से रोक रखा है। हालाँकि, पूरे चुनाव में कॉन्ग्रेस ये बैलेंस बनाकर रख पाएगी, इस पर कुछ कहा नहीं जा सकता।

वैसे, अशोक गहलोत जानते हैं कि सचिन पायलट का साथ रहना कॉन्ग्रेस के लिए जरूरी है। दोनों साथ मिलकर ही भाजपा को टक्कर दे सकते हैं, सरकार भले ही न बना सके। इसलिए इतने समय बाद अशोक गहलोत ने एक तस्वीर अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर शेयर की है, जिसमें सचिन को सम्मानजनक तरीके से बैठा दिखाया गया है। हालाँकि, फोकस में वो खुद ही हैं और सचिन का चेहरा तक नहीं दिख रहा है। उन्होंने कैप्शन दिया है, “एक साथ, जीत रहे हैं फिर से…”

बहुत देर कर दी हुजूर आते-आते!

बहरहाल, सचिन पायलट की कॉन्ग्रेस के पोस्टरों पर वापसी को दोनों ही रूपों में देखा जा सकता है। एक ओर यह एक मजबूरी भी हो सकती है, क्योंकि कॉन्ग्रेस को राजस्थान में आगामी विधानसभा चुनावों में जीत हासिल करने के लिए पायलट की लोकप्रियता की जरूरत है। दूसरी ओर, यह कॉन्ग्रेस के लिए एक जरूरी कदम भी हो सकता है, क्योंकि इससे पार्टी एकता का संदेश देने में सफल हो सकती है।

वैसे, राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि कॉन्ग्रेस ने काफी देर कर दी है। जो संदेश आम जनता तक जाना था, वो पहले ही जा चुका है। ऐसे में कॉन्ग्रेस को इन पैतरों से क्या फायदा मिलेगा, आने वाले 3 दिसंबर को इसका पता चल ही जाएगा। इन सबके बीच महत्वपूर्ण बता ये है कि भाजपा को हर तरफ बढ़त हासिल होती दिख रही है।