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झोपड़ी में घुसे जवान, ग्रेनेड का पिन निकालने वाला था आतंकी… 25 साल पहले साथियों की जान बचाने वाला सैनिक कश्मीर में बलिदान

जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तानी फौज ने सीजफायर का उल्लंघन करके गुरुवार (9 नवंबर 2023) को बेवजह हमला किया। इस हमले में बीएसएफ के बहादुर जवान लाल फैम कीमा बलिदान हो गए।

2021 में बॉर्डर पर सीजयफायर लागू होने के बाद के बाद ये पहली कैजुएलटी है जो कश्मीर के सांबा जिले में हुई। गोली लगने से कीमा के काफी चोटें आई थीं ऐसे में उन्हें अस्पताल ले जाया गया लेकिन वहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया

50 वर्षीय कीमा मिजोरम के एजवाल के रहने वाले थे। उनके पीछे उनकी पत्नी और 3 बच्चे रह गए हैं। इसके अलावा जो उनके पीछे छूटा है वो उनकी बहादुरी का किस्सा है जिसमें उन्होंने आतंक विरोधी अभियान में एक दर्जन साथियों की जान बचाई थी।

ये किस्सा 1998-99 का है। एक ऑपरेशन के दौरान पीर पंजाल रेंज के ऊपर गूल गाँव में एक मिट्टी के घर के अंदर आतंकी छिपे थे, तब लाल फैम उसी टीम का हिस्सा थे जिन्हें आतंकियों का सामना करना था। उस समय वो कीमा ही थे जिन्होंने अपने साथियों की रक्षा करने के लिए एक आतंकी पर ताबड़तोड़ अपनी लाइट मशीन गन चलाई थी।

कीमा के जाने के बाद उनकी ये कहानी उनके तत्कालीन कमांडिंग ऑफिसर ने शेयर की है। जिसकी चर्चा मीडिया में है। रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने बताया कि उस समय आतंकी एक मिट्टी के घर में थे और सभी जवानों को मारने के लिए आतंकियों ने गोलीबारी और ग्रेनेड से हमला करके खुद को उड़ा लिया था। उस समय घर के अंदर से धुआँ निकल ही रहा था कि बीएसएफ की टीम झोपड़ी के अंदर पहुँच गए। उन्हें 3 आतंकी मृत मिले। लेकिन लाल फैम ने देख लिया था कि एक आतंकी अपने ग्रेनेड से पिन निकाल रहा है। ऐसे में वो चिल्लाए- तुम ग्रेनेड का पिन निकालेगा… और इसके बाद वो ताबड़तोड़ फायरिंग करते रहे।

सीओ याद करते हैं कि कैसे उस घर में घुसकर सारे जवान तलाशी में व्यस्त हो गए थे लेकिन सिर्फ कीमा की सतर्कता के कारण वहाँ दर्जनों जवानों की जान बची थी। अगर वो नहीं देखते तो उस दिन न जाने क्या होता, कितने सैनिकों को अपनी जान गँवानी पड़ती।

गौरतलब है कि पाकिस्तान ने 8-9 नवंबर की आधी रात गोली बारी की थी। बीएसएफ डीजी नितिन अग्रवाल ने कहा कि सीमा पर तैनात जवानों ने सीजफायर उल्लंघन का कड़ा जवाब दिया है जिससे पाकिस्तानी फौजियों का भी काफी नुकसान हुआ है। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान लगातार सीजफायर का उल्लंघन कर रहा है। अब तक वह 2-3 बार ऐसा कर चुका है।

कंगाल पाकिस्तान के पास पासपोर्ट छापने के लिए पेपर भी नहीं, बोले आकाश चोपड़ा- कुदरत का निजाम काम नहीं कर रहा

कंगाल पाकिस्तान में लेमिनेशन वाले कागज की भी कमी हो गई है। जिससे पाकिस्तानियों को विदेश जाना मुश्किल हो गया है। आर्थिक संकट से जूझ रहा ये मुल्क इस कागज की कमी होने से पासपोर्ट नहीं बना पा रहा है जिससे वहाँ अब इसके लिए भी अफरा-तफरी मची हुई है और नए पासपोर्ट पर पूरी तरह रोक लगी हुई है।

आलम ये है कि पाकिस्तान के आव्रजन और पासपोर्ट महानिदेशालय (डीजीआई एंड पी) के अधिकारी इस मसले पर जनता को जवाब नहीं दे पा रहे हैं। केवल हालात के जल्द सही होने की बात कह कर वो लोगों को टाल रहे हैं।

इसे लेकर सोशल मीडिया पर पाकिस्तान की खिल्ली भी उड़ रही है। लोग चुटकी ले रहे हैं । वहीं क्रिकेटर आकाश चोपड़ा ने भी पाकिस्तान के मजे लेते हुए लिखा, “विमान उड़ाने के लिए ईंधन नहीं। पासपोर्ट प्रिंट करने के लिए लेमिनेशन पेपर नहीं। क़ुदरत का निज़ाम खास तौर से अच्छा काम नहीं कर रहा है।”

दरअसल, मसला ये है कि पाकिस्तानी पासपोर्ट बनाने के लिए ये लेमिनेशल पेपर फ्रांस से आयात किया जाता है। अब पाकिस्तान के आर्थिक हालात तो जग जाहिर है उधारी के चक्कर में कंगाल हो चुका है।

ऐसा भी हुआ कि विदेशों से माल लेकर आए कंटेनर बंदरगाहों में ही फँस गए क्योंकि पाकिस्तान के पास कंटेनरों के लिए पैसा ही चुकाने को नहीं था। दूर जाने की जरूरत नहीं इस साल के शुरुआती महीने में ही विदेशों से माल लेकर पाकिस्तानी बंदरगाहों पर पहुँचे 9000 से अधिक कंटेनर फँस गए थे।

कुछ ऐसा ही हाल पासपोर्ट में इस्तेमाल होने वाले लेमिनेशन पेपर की कमी को देख कर भी लग रहा है। पाकिस्तान के आव्रजन और पासपोर्ट महानिदेशालय (डीजीआई एंड पी) के मुताबिक, पासपोर्ट में इस्तेमाल होने वाले लेमिनेशन पेपर की कमी है और ये आमतौर पर फ्रांस से आयात किया जाता है। इसी वजह से देश भर में विदेशी यात्रा पर जाने वाले दस्तावेज़ की कमी हो गई है।

गौरतलब है कि पाकिस्तान में ये पहली घटना नहीं है। यहाँ 2013 में भी DGI & P के प्रिंटरों को पैसा न देने और लेमिनेशन पेपर्स की कमी की वजह पासपोर्ट की छपाई ऐसे ही रुक गई थी।

द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के मुताबिक, डीजीआईएंडपी के पेरेंट् मंत्रालय, आंतरिक मंत्रालय के मीडिया महानिदेशक कादिर यार तिवाना कहते हैं कि सरकार संकट से निपटने की पूरी कोशिश कर रही है।

उन्होंने कहा, “हालात जल्द ही काबू में होंगे और पासपोर्ट जारी करना सामान्य रूप से जारी रहेगा। विभाग ने पहले ही बैकलॉग (पहले से पासपोर्ट बनाने के लिए आए आवेदन) में लगातार कमी देखी गई है।”

वहीं, जोनल ऑफिस सदर, कराची में निदेशक पासपोर्ट और आव्रजन, सईद अहमद अब्बासी से जब पासपोर्ट बनने के वक्त के बारे में पूछा गया तो उन्होंने इस मामले पर कुछ भी कहने से इंकार करते हुए कहा कि आधिकारिक तौर पर वह जवाब देने की स्थिति में नहीं हैं।

मौके की नजाकत इस दौरान पेशावर के पासपोर्ट कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के बयान ने साफ कर दी। इस अधिकारी ने नाम न लेने की शर्त पर कहा कि वो पहले के 3,000 से 4,000 पासपोर्ट के मुकाबले हर दिन अब केवल 12 से 13 पासपोर्ट बना पा रहे हैं।

अब वहाँ आलम ये है कि पासपोर्ट की कमी ने विदेश यात्रा पर जाने का मंसूबा पाले हजारों पाकिस्तानियों को प्रभावित किया है। सबसे अधिक प्रभावित विदेश में रोजगार या पढ़ाई के लिए जाने वाले पाकिस्तानी युवाओं पर पड़ा है।

दुनिया भर के विश्वविद्यालयों में दाखिले का वक्त नजदीक होने से कई छात्रों ने इस संकट के लिए पाकिस्तान सरकार नाकाबिल और जिम्मेदार ठहराया है।

पेशावर की एक छात्रा हीरा ने कहा कि उसका इटली का छात्र वीजा हाल ही में मंजूर हुआ था और उसे अक्टूबर में वहाँ होना था। उन्होंने कहा, “हालाँकि, पासपोर्ट न मिलने से मुझसे वहाँ जाने का मौका छीन लिया गया।” उन्होंने कहा कि यह गलत है कि वह सरकारी विभाग की नाकाबिलियत की कीमत चुका रही हैं।

उधर दूसरी तरफ पेशावर के रहने वाले मुहम्मद इमरान ने कहा कि वह पासपोर्ट विभाग की लगातार देरी से थक गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग आवेदकों को सच्चाई बताने की जगह लगातार टाल रहा है।

बार-बार UAE जाना, दुबई से 47 बार लॉगइन: महुआ मोइत्रा हाजिर तो हुई पर जवाब देने में करती रही आनाकानी, एथिक्स कमिटी की रिपोर्ट की डिटेल

नकदी और महंगे उपहार लेकर संसद में सवाल पूछने वाली तृणमूल कॉन्ग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा की मुश्किलें बढ़ती जा रही है। 9 नवंबर 2023 को यह बात सामने आई कि लोकसभा की आचार समिति की मसौदा रिपोर्ट में महुआ मोइत्रा पर ‘अनैतिक आचरण’ का आरोप लगाते हेतु निष्कासन की सिफारिश की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि उन्होंने अपने लॉगिन से संबंधित जानकारी अनधिकृत व्यक्तियों के साथ साझा किए।

समिति के मसौदे में यह भी कहा गया है कि महुआ ने यूएई की कई बार यात्रा की और दुबई से 47 बार उनके अकाउंट में लॉगइन किया गया था। आचार समिति ने आईपी एड्रेस पर एक रिपोर्ट माँगी और सांसद के खिलाफ कानूनी परिणामों पर जोर दिया। महुआ के निष्कासन की सिफारिश करते हुए रिपोर्ट में सरकारी जाँच की गई है।

अपनी रिपोर्ट में आचार समिति ने महुआ मोइत्रा के व्यवहार को अनैतिक आचरण और सदन की अवमानना कहा। ऑपइंडिया ने रिपोर्ट के मसौदे का एक हिस्सा देखा, जिसमें समिति के सदस्यों की महुआ मोइत्रा और दानिश अली के साथ हुई बातचीत को शामिल किया गया है। समिति के सदस्यों की महुआ से बातचीत उनकी विदेश यात्रा और उनके रहने आदि को लेकर होती रही। इसमें सवालों की उपयुक्तता को लेकर नोंकझोंक भी हुई।

इस दौरान महुआ ने समिति के सदस्यों के सवालों को निजी मामलों में दखल देने वाला बताया और विक्टिम कार्ड खेलने की कोशिश की। उन्होंने कहा, “आचार समिति का ये काम बिल्कुल भी नहीं है।” उन्होंने आचार समिति के सदस्य और अध्यक्ष के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने की धमकी दी और कहा, “मैं आचार समिति और आपके खिलाफ शिकायत दर्ज करूँगी। मैं सांसद के रूप में शिकायत करूँगी।”

समिति में चर्चा के दौरान बहुजन समाज पार्टी (BSP) सांसद कुंवर दानिश अली, जदयू सांसद गिरिधर यादव, भाजपा सांसद सुनीता दुग्गल, भाजपा सांसद सुभाष रामराव भामरे और अन्य लोग उपस्थित थे। इस दौरान दखल देने वाले सवालों को लेकर यादव और अली के बीच तीखी नोंकझोंक हुई।

दानिश अली ने महुआ की यात्रा को लेकर पूछे गए सवालों की निंदा की और इसे एक महिला सांसद का अपमान बताया। दानिश अली ने कहा, “आप किसी महिला सांसद का इस तरह अपमान नहीं कर सकते।” उन्होंने समिति के सदस्यों पर स्क्रिप्ट फॉलो करने का आरोप लगाया। इतनी ही नहीं, अली ने पूछे गए प्रश्नों को लेकर समिति के अध्यक्ष की समझ पर भी सवाल उठाया।

इस दौरान सुनीता दुग्गल ने हस्तक्षेप करते हुए कहा, “जवाब देना या न देना उनका अधिकार है।” बातचीत जारी रही और अध्यक्ष विनोद सोनकर ने कार्रवाई की दिशा निर्धारित करने के लिए मतदान का प्रस्ताव रखा। हालाँकि, यादव ने इस पर आपत्ति जताई और कहा, “हम आपकी कोई भी बात नहीं सुनेंगे। आप एक घंटे से प्रश्न पूछ रहे हैं। आप 100 सवाल पूछेंगे, इसका मतलब क्या है?”

महुआ ने माना कि जानकारी साझा की

ऑपइंडिया ने बातचीत के जिन हिस्सों को देखा उनमें महुआ ने दो बार स्वीकार किया है कि उन्होंने उद्योगपति दर्शन हीरानंदानी के साथ अपनी गोपनीय जानकारी साझा की थी। तथाकथित ‘व्यक्तिगत सवालों’ से उत्तेजित होकर उन्होंने कहा, “हम यहाँ दो चीजें निर्धारित करने के लिए हैं। नंबर एक, क्या मैंने दर्शन हीरानंदानी को लॉगिन और पासवर्ड दिया था? मैं आपको पहले ही बता चुकी हूँ कि 2019 से उनके कार्यालय में एक व्यक्ति मेरे प्रश्न को टाइप कर रहा है। प्रश्न मेरे थे लेकिन अनधिकृत नहीं, क्योंकि यह मेरा ओटीपी था। इसलिए उनकी पहुँच नहीं थी। पहले प्रश्न का उत्तर पहले ही दिया जा चुका है।”

महुआ ने इस बात को मानने से साफ इनकार कर दिया कि उन्हें संसद में पूछे गए सवालों के बदले हीरानंदानी से रिश्वत मिली थी। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के वकील जय अनंत देहाद्राई का हवाला देते हुए दावा किया कि उन्हें रिश्वत मिलने का दावा उनके पूर्व प्रेमी की शिकायत पर आधारित था।

महुआ ने आगे कहा, “दूसरा सवाल, उन्होंने आपको क्या दिया? आप मुझे बताएँ कि आपके पास क्या सबूत है या उन्होंने (देहाद्राई ने) आपको क्या दिया है। मुझे इसका खंडन नहीं करना है। जो आपके पास है, उसका मुझे प्रमाण दीजिए। मैं यहाँ बैठकर उस लंबी सूची का उत्तर नहीं दूँगी, जो किसी पूर्व-प्रेमी ने आपको दी है। यह संसद की आचार समिति का काम नहीं है और किसी सांसद को इसका जवाब किसी के सामने नहीं देना पड़ता। आप मुझे बताएँ। यदि इस बात का सबूत है कि दर्शन हीरानंदानी ने मुझे ये-ये दिया है तो आप मुझसे एक स्पष्ट प्रश्न के लिए हाँ/नहा पूछें। मैं यहाँ बैठकर इसका जवाब नहीं दे सकती कि मैं कहाँ गई और किसके साथ रही।”

बता दें कि कुत्ता हेनरी को लेकर सांसद महुआ मोइत्रा और उनके पूर्व प्रेमी जय अनंत देहाद्राई के बीच विवाद पैदा हो गया। इसके बाद देहाद्राई ने दिल्ली पुलिस को पत्र लिखकर महुआ पर कई तरह के आरोप लगाए थे। इसी पत्र के आधार पर भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर कार्रवाई की माँग की थी। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ने मामले को आचार समिति के पास भेज दिया था।

बाय बाय जिंदाभाग… न्यूजीलैंड की जीत, पाकिस्तान की उड़ रही खिल्ली: सहवाग ने लिए मजे तो बोले यूजर्स- लाहौर छोड़ आऊँ क्या

आईसीसी वर्ल्ड कप 2023 में न्यूजीलैंड और श्रीलंका के बीच हुए मैच में न्यूजीलैंड की जीत के बाद पाकिस्तान के सेमीफाइनल में बने रहने की संभावना नाम मात्र रह गई है। ऐसे में भारत के पूर्व बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग ने उनका एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकॉउंट से मजाक उड़ाया और इसी क्रम में उन्होंने श्रीलंका और न्यूजीलैंड के मैच में न्यूजीलैंड की शानदार जीत होने के बाद 2 ट्वीट किए।

वीरेंद्र सहवाद ने पहले ट्वीट में लिखा- पाकिस्तान जिंदाभाग। घर वापसी के लिए आपकी सुरक्षित उड़ान हो।

अगले ट्वीट में वीरेंद्र सहवाग ने लिखा- पाकिस्तान की खास बात है कि जिस टीम को पाकिस्तान सपोर्ट करती है वो टीम पाकिस्तान की तरह खेलने लग जाती है। सॉरी श्रीलंका।

उनके इन ट्वीट्स के बाद नेटीजन्स ने भी पाकिस्तान की खिल्ली उड़ानी शुरू कर दी। बाबर आजम की तस्वीर लगा लगाकर कहा गया कि अभी तो और जलील होना बाकी है।

एक यूजर ने गदर फिल्म के डॉयलॉग को इस स्थिति से जोड़ा जिसमें सनी देओल कहते हैं- मैं आपको लाहौर छोड़ आऊँ?

उन लोगों के ट्वीट को इकट्ठा करके भी नेटीजन्स पाकिस्तान का मजाक उड़ा रहे हैं जिन्होंने वर्ल्ड कप से पहले ही कहा था कि ये कप इस बार बाबर आजम की कप्तानी में पाकिस्तान जीतेगी।

बता दें कि श्रीलंका से जीत के बाद न्यूजीलैंड प्वाइंट टेबल में 4 नंबर पर आ गया है। उन्होंने टूर्नामेंट में 9 में से 5 मैचों में जीत हासिल की है। वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान का अभी एक मैच खेलना बाकी है लेकिन उनके लिए सेमीफाइनल तक पहुँचना बहुत कठिन है।

पाकिस्तान को अगर ऐसा करना है तो उनको इंग्लैंड के खिलाफ जो मैच खेलना है उसमें उन्हें 287 रनों से ज्यादा के अंतर पर जीतना होगा या फिर 3 ओवर के अंदर इंगलैंड द्वारा दिए गए लक्ष्य को पाना होगा… ऐसा चूँकि अब तक क्रिकेट में कभी नहीं हुआ है इसलिए लोग ये लिखकर मजे ले रहे हैं कि जो पाकिस्तान मैचों से पहले इतने बड़े बोल रहा था उसका हाल क्या हुआ।

17 साल के हिंदू को बनाया मुस्लिम, स्कूल बैग में मिली जालीदार टोपी से खुला राज: इस्लामी धर्मांतरण में नाबालिग और उसके अब्बा पर केस

कर्नाटक में एंटी कन्वर्जन लॉ के तहत पहली बार एक नाबालिग के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इस मामले में नाबालिग के साथ ही उसके अब्बू के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया है। जानकारी के मुताबिक, पीड़ित नाबालिग जिस स्कूल में पढ़ता है, वहीं उसके साथ पढ़ने वाले सहपाठी ने अपने अब्बू के साथ मिलकर इस्लाम कबूल करा दिया। इस मामले में धर्मांतरित कराए गए नाबालिग छात्र के परिजनों को कभी पता ही नहीं चला, जब तक कि उसके बैग से जालीदार सफेद टोपी और इस्लामिक साहित्य नहीं मिल गया।

ये मामला कर्नाटक के चित्रदुर्ग जिले का है। यहाँ के स्थानीय कुरुबा समुदाय के नाबालिग छात्र का धर्मांतरण कराने का मामला सामने आया है। इस मामले में कर्नाटक पुलिस ने कर्नाटक प्रोटेक्शन ऑफ राइट टू फ्रीडम ऑफ रिलीजन एक्ट 2022 के तहत मामला दर्ज कर आरोपित पिता-पुत्र के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। ये कर्नाटक का ऐसा पहला मामला है, जिसमें किसी नाबालिग को धर्मांतरण विरोधी कानून के तहत आरोपित बनाया गया है। आरोपित के पिता का नाम ‘गरीब’ बताया जा रहा है, वहीं नाबालिग आरोपित का नाम कानूनी अड़चनों के चलते सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।

पुलिस को दी गई शिकायत में पीड़ित के पिता ने बताया है कि उनका बेटा 17 साल का है। वो चल्लाकरे तालुक के कॉलेज में पढ़ता है। उसने कुछ समय से पूजा-पाठ करना और ईश्वर की प्रार्थना करना तक बंद कर दिया था। यही नहीं, उसने हाल ही में दशहरा की पूजा में भी सम्मिलित होने से इनकार कर दिया था। इसके बाद जब शक होने पर उन्होंने अपने बेटे के स्कूल बैग की तलाशी ली, तो उसमें से इस्लामिक साहित्य और टोपी बरामद हुई। यही नहीं, उन्होंने जब अपने बेटे के फोन को खंगाला तो उसमें गाँजा और अन्य मादक पदार्थों से संबंधित चैट मिली।

छात्र के बैग से बरामद इस्लामिक साहित्य, फोटो साभार : पॉवर टीवी न्यूज

अपनी शिकायत में उन्होंने कहा, “मैंने जब इस बारे में पता किया, तो ये बात सामने आई कि आरोपित नाबालिग सहपाठी अपने अब्बू के साथ मिलकर मेरे बेटे को मस्जिद लेकर जाता था। वो उसे चित्रदुर्ग की कई मस्जिदों में लेकर गए थे और बिना उनकी अनुमति के ही उसे इस्लाम धर्म में परिवर्तित करा दिया।”

पुलिस अधिकारी के मुताबिक, आरोपित का पिता ‘गरीब’ एक साइकिल मरम्मत की दुकान चलाता है। हालाँकि, अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं की गई है, हालाँकि दोनों पक्षों के बयान दर्ज कर लिए गए हैं। इस मामले में आरोपित पिता-पुत्र के खिलाफ 2022 के धर्मांतरण विरोधी कानून के सेक्शन 5 के तहत केस दर्ज किया गया है। चित्रदुर्ग के एसपी धर्मेंद्र कुमार मीणा ने कहा है कि पुलिस इस मामले में जाँच कर रही है और पीड़ित के साथ ही आरोपित से भी कुछ जानकारियाँ प्राप्त करने की कोशिश कर रही है।

भारत का संविधान हराम, काफिरों को मारने का प्लान: NIA की चार्जशीट से सामने आए ISIS पुणे मॉड्यूल के मंसूबे, शरजील इमाम से जुड़े हैं तार

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने आतंकी संगठन आईएसआईएस (ISIS) के पुणे मॉड्यूल के खिलाफ चार्जशीट दायर की है। चार्जशीट में कहा गया है कि मॉड्यूल के सदस्य काफिरों (गैर-मुस्लिमों) की हत्या की योजना बना रहे थे और वे भारतीय संविधान को ‘हराम’ (गैर-इस्लामी) मानते हैं। आईएसआईएस के पुणे मॉड्यूल के सदस्यों के शरजील इमाम से संबंध थे, जो 2020 के दिल्ली दंगों के मास्टरमाइंडों में से एक होने का आरोपित है और अभी जेल में बंद है।

एनआईए की चार्जशीट में पुणे आईएसआईएस मॉड्यूल के सात सदस्यों की जानकारी दी गई है। इसमें बताया गया है कि इस आतंकवादी संगठन के सदस्य गैर-मुस्लिमों पर हमले की योजना बना रहे थे। ये लगातार विभिन्न तरीकों से गैर-मुस्लिमों को जान से मारने पर चर्चा कर रहे थे। इनका लक्ष्य मुस्लिम युवाओं को शिक्षा देकर देश में शरिया कानून स्थापित करना था।

चार्जशीट में यह भी कहा गया है कि इन आतंकियों ने मुस्लिमों के बीच यह धारणा बनाने की कोशिश की कि इस्लाम में लोकतंत्र ‘हराम’ है और केवल आईएसआईएस ही शरिया का पालन करता है। इसके अलावा उन्होंने सभी मुस्लिमों से आईएस का समर्थन करने का आह्वान किया था। चार्जशीट में गवाहों के दर्ज बयान के आधार पर कहा गया है कि ये वॉट्सऐप पर कट्टरपंथी ग्रुप से जोड़े गए थे, जिसमें मुस्लिमों पर अत्याचार की कहानियाँ बताकर उन्हें गैर-मुस्लिमों के खिलाफ भड़काया जा रहा था।

इस चार्जशीट में पुणे मॉड्यूल के दिल्ली दंगों से जुड़ाव को भी बताया गया है। मॉड्यूल के सदस्यों के शरजील इमाम से संबंध थे, जो 2020 के दिल्ली दंगों के मास्टरमाइंडों में से एक होने का आरोपित है। इससे जुड़े आईएसआईएस के तमाम आतंकवादियों की धरपकड़ जारी है, जिसमें हाल ही में दिल्ली, लखनऊ, मुरादाबाद, अलीगढ़ और छत्तीसगढ़ के दुर्ग से कई आतंकियों को पकड़ा गया है।

एनआईए चार्जशीट की खास बातें

एनआईए की चार्जशीट में कहा गया है कि पडघा गाँव निवासी जुल्फिकार अली बड़ौदावाला और पुणे निवासी जुबैर शेख ने साल 2015 में युवाओं को कट्टरपंथी बनाना शुरू कर दिया था। इसके लिए व्हाट्सऐप पर ग्रुप बनाकर आईएसआईएस के समर्थन में पोस्ट किए जाते थे। एनआईए ने एक गवाह के हवाले से विस्तार में इसकी जानकारी दी है कि कैसे वह 2011-2012 में जुबैर शेख के संपर्क में आया था, जिसे एनआईए ने एक अन्य मामले में गिरफ्तार किया है। एक गवाह ने कहा है कि साल 2014 में शेख ने उसे ‘यूनिटी इन मुस्लिम उम्मा’ और ‘उम्मा न्यूज’ नाम के व्हाट्सऐप ग्रुपों में जोड़ा था।

मिडडे की रिपोर्ट के मुताबिक, गवाह ने अपने बयान में कहा, “हमारी शुरुआती मुलाकातों में हमारी दोस्ताना और कैजुअल बातचीत हुई। हालाँकि, धीरे-धीरे जुल्फिकार उर्फ ​​लालाभाई, सिमाब काजी और तल्हा खान ने शिर्क, खलीफा, जिहाद, इस्लामिक स्टेट ऑफ सीरिया एंड इराक (आईएसआईएस) आदि विषयों पर चर्चा शुरू कर दी। कई बार उन्होंने मेरे सहित अन्य सदस्यों को भी आईएसआईएस में भर्ती करने की कोशिश की। यही नहीं, गैर-मुस्लिमों को मारने के बारे में भी इन ग्रुपों पर चर्चा होती थी। इसमें आईएसआईएस के आतंकी कहते थे कि हमें काफिरों को मारना है और इसके लिए हमारे पास सारी चीजें हैं। सही समय आएगा तब तुम्हें सब बता देंगे।”

आईएसआईएस के पुणे मॉड्यूल का दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों से कनेक्शन

पुणे आईएसआईएस मॉड्यूल का लिंक दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों से भी है। पुणे मॉड्यूल से जुड़े शाहनवाज और अरशद वारसी का शरजील इमाम से कनेक्शन सामने आ चुका है। इस पर ऑपइंडिया ने विस्तार से पूरी जानकारी दी है। दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों के बाद भी किस तरह से आईएसआईएस का पुणे मॉड्यूल दिल्ली से लेकर अलीगढ़ और प्रयागराज तक फैलता रहा, इसकी जानकारी भी इस रिपोर्ट में दर्ज है।

‘सुरक्षित देश’ वाली लिस्ट में भारत को शामिल करने जा रहा है ब्रिटेन, अब भगोड़ों को नहीं मिलेगी शरण: संसद में आएगा प्रस्ताव

अंग्रेजों के देश यानी यूनाईटेड किंगडम (ब्रिटेन) ने माना है कि भारत रहने के लिए एक सुरक्षित देश हैं और यहाँ रहने वालों को किसी दूसरे देश में आश्रय या शरण लेने की कतई जरूरत नहीं है। इसी को आधार बनाते हुए यूके अब भारत को अपने सुरक्षित देशों की लिस्ट में शामिल करने का प्लान बना रहा है।

इस फैसले का ऐलान बुधवार (8 नवंबर,2023) को यूके होम ऑफिस ने किया है। इस फैसले का मकसद परदेश में बसने के तौर-तरीकों को कारगर बनाने के साथ ही सीमा नियंत्रण के तरीकों को बढ़ावा देना है, ताकि ऐसे अवैध प्रवासियों को रोका जा सकें।

भारत के भगोड़े के लिए मुश्किल होगा यूके में रहना

यूके के इस कदम से देश यानी भारत से वहाँ जाकर शरण लेने वाले अवैध प्रवासियों के अधिकार सीमित हो जाएँगे। इसके साथ ही देश से चोरी-चुपके भागकर यूके जाने वाले भारतीयों की वापसी की प्रक्रिया तेज हो जाएगी और ब्रिटेन में शरण माँगने की उनकी संभावना खत्म हो जाएगी।

यूके के होम ऑफिस के मुताबिक, बीते साल, ब्रिटेन में भारत और जॉर्जिया से अवैध प्रवासियों की खासी बढ़ोतरी देखी गई थी। यही वजह रही कि यूके की सरकार को इन देशों के शरण चाहने वालें लोगों के लिए अपने नजरिए में बदलाव लाने के लिए दोबारा से सोचने के लिए मजबूर होना पड़ा।

बुधवार को ‘हाउस ऑफ कॉमंस’ में रखे गए मसौदा कानून में भारत और जॉर्जिया को लिस्ट में जोड़े जाने वाले देशों के तौर पर शामिल किया गया है।

गौरतलब है कि अब तक ब्रिटेन के सुरक्षित समझे जाने वाले अन्य देशों में अल्बानिया और स्विट्जरलैंड, यूरोपीय संघ (ईयू) और यूरोपीय आर्थिक क्षेत्र (ईईए) से जुड़े देश शामिल हैं।

ब्रिटेन की गृह मंत्री सुएला ब्रेवरमैन ने कहा, “हमें मूल रूप से सुरक्षित देशों से ब्रिटेन के खतरनाक और अवैध सफर करने वाले लोगों को रोकना चाहिए। इस लिस्ट को बढ़ाने से हमें उन लोगों को अधिक तेजी से हटाने में मदद मिलेगी जिनके पास यहाँ रहने का हक नहीं है।”

उन्होंने आगे कहा, “इससे साफ संदेश जाएगा कि यदि आप अवैध रूप से यहाँ आते हैं, तो आप यहाँ नहीं रह सकते। इसके लिए हम अपने अवैध प्रवास अधिनियम में बदलाव करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। ये अवैध प्रवास के खिलाफ लड़ाई में एक अहम भूमिका निभाएगा।”

यूके की सेफ लिस्ट में भारत के शामिल होने का मतलब

भारत के यूके की सेफ स्टेट्स यानी सुरक्षित देशों की लिस्ट में शामिल होने का मतलब होगा कि वहाँ कि सरकार हमारे देश को आम तौर पर सुरक्षित, स्थिर और मानवाधिकारों को मानने वाला मानती है। जहाँ मानवाधिकारों का उल्लंघन नहीं किया जाता।

इसका मतलब है कि यहाँ के नागरिकों की ब्रिटेन में शरण माँगने की संभावना खारिज हो जाएगी। नतीजन अवैध तौर पर भारतीयों की ब्रिटेन में शरण माँगने की संभावना कम हो जाएगी। यह ब्रिटेन में अवैध रूप से प्रवेश करने वाले लोगों को हिरासत में लेने और तेजी से उन्हें वापस भेजने की राह आसान करेगा। फिर चाहे उन्हें सीधे उनके देश या फिर किसी तीसरे सुरक्षित देश वापस भेजा जाए।

भारत और जॉर्जिया को यूके की सेफ स्टेट्स लिस्ट में शामिल होने का प्रस्ताव लागू होने से पहले इस पर संसद के दोनों सदनों में बहस होगी। यूके की सरकार ये नया बदलाव अवैध प्रवासन अधिनियम 2023 के तहत कर रही है। इसका मकसद कानून में बदलाव करके ‘अवैध प्रवासियों’ को रोकना है ताकि अवैध रूप से ब्रिटेन में घुसने वाले लोगों को हिरासत में लिया जा सके और फिर तेजी से सुरक्षित तीसरे देश या उनके गृह देश में वापस भेजा जा सके।

असम में 200 साल पुराने मंदिर को लगाई आग, करीमगंज के रतबारी में तनाव: परिसर में मिले 3 बड़े गैलन, इनमें ही पेट्रोल लाए जाने की आशंका

असम के करीमगंज के रतबारी इलाके में 200 साल पुराना एक मंदिर जलकर राख हो गया है, जिससे स्थानीय लोगों में तनाव फैल गया है। यह घटना रतबारी के सुदूर आदिवासी गाँव दामसरा में हुई है जो रतबारी के ररेसरा गाँव में स्थित है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, रात के अंधेरे में शरारती तत्वों ने सदियों से प्रतिष्ठित प्राचीन मंदिर में आग लगा दी। ऐसा माना जाता है कि 1800 के दशक की शुरुआत में, स्वर्गीय देवी राम बर्मन ने आदिवासी गाँव में इस मंदिर की स्थापना की थी, जहाँ शिव पार्वती और लक्ष्मी नारायण की मूर्तियाँ श्रद्धा का स्थान थीं। पीढ़ियों से यह पवित्र स्थान जनजातीय पूजा का केंद्र रहा है।

करीमगंज के रतबारी में जलाई गई मूर्तियाँ (साभार-seven sisters of assam)

वहीं इस मामले में गाँव की परेशान महिलाओं का आरोप है कि उपद्रवियों ने आदिवासी हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के लिए जानबूझकर मंदिर में आग लगाई है और वे दोषियों के लिए उचित सजा की माँग कर रही हैं। इसके साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि पहले भी दो समुदायों के बीच भूमि विवाद के कारण रतबारी क्षेत्र में सांप्रदायिक तनाव रहा है और दोनों समूह उस भूमि पर अपना दावा करते हैं तो पुलिस इस एंगल से भी जाँच कर रही है।

मंदिर को जलाए जाने की खबर जैसे ही प्रशासन को हुई जिला आयुक्त और पुलिस अधीक्षक सहित पुलिस अधिकारी घटनास्थल पर पहुँच गए। इसके साथ ही व्यवस्था और सुरक्षा बनाए रखने के लिए अर्धसैनिक बलों को तैनात किया गया है।

बता दे कि यहाँ आदिवासी वन विभाग की अनुमति से सदियों से गाँव में निवास कर रहे हैं। हालाँकि, स्थानीय लोगों के अनुसार, हाल के वर्षों में तनाव बढ़ गया है क्योंकि अन्य समुदायों के लोग कथित तौर पर जबरन जमीन पर दावा करना चाहते हैं। ऐसे में अज्ञात उपद्रवियों द्वारा भगवान शिव और भगवान लक्ष्मी नारायण का मंदिर में आग लगाने से आदिवासी लोग परेशान हैं। 

इस मामले में दुल्लाबचेरा मंडल में भाजपा पार्टी का नेतृत्व करने वाले जीतेंद्र लाल रॉय ने कहा कि यह कृत्य बहुत गलत है। उन्होंने आरोपितों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने के साथ ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए काम करने प्रयास करने की बात कही।  साथ ही भाजपा के जिला अध्यक्ष सुब्रत भट्टाचार्य ने कहा कि मंदिर तोड़ने वाले लोगों को जल्द से जल्द पकड़ा जाना चाहिए। उन्होंने पुलिस प्रमुख पार्थ प्रतिम दास से इस मामले में कार्रवाई करने को कहा। 

वहीं पुलिस को मंदिर में तीन बड़े डिब्बे मिले हैं। जिससे ऐसा अनुमान लगाया जाता है कि इन डिब्बों में मंदिर को जलाने के लिए पेट्रोल लाया गया था। पुलिस इस पर हर तरफ से नजर रख रही है और इसमें शामिल सभी लोगों को पकड़ने की कोशिश कर रही है। 

एसपी पार्थ प्रतिम दास ने कहा कि वे हर चीज की सावधानीपूर्वक जाँच कर रहे हैं। उन्होंने सभी से कहा कि जो कुछ हुआ उसके बारे में कोई भी अफवाह न फैलाएँ।

SAMU का ‘अमीर’ धराया तो दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों से जुड़ा ISIS का तार: शरजील इमाम- AMU छात्र नेताओं का आतंकी कनेक्शन आया सामने

दिल्ली क्राइम ब्राँच, एनआईए व अन्य एजेंसियों से मिले इनपुट पर यूपी एटीएस आतंकवादियों के खिलाफ लगातार अभियान चला रही है। इसी कड़ी में यूपी एटीएस ने छत्तीसगढ़ के दुर्ग से आईएसआईएस (ISIS) समूह के एक और आतंकी वजीहुद्दीन अली खान को गिरफ्तार किया है। वजीहुद्दीन अली खान उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में पीएचडी कर रहा है। इसके साथ ही वह छात्रों को पढ़ाता भी है। उससे जुड़े दो छात्रों को यूपी एटीएस ने कुछ समय पहले ही अलीगढ़ से पकड़ा था। अब वजीहुद्दीन को दुर्ग से गिरफ्तार किया, जहाँ वो छिपने के लिए भागा हुआ था।

ऑपइंडिया को पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, गिरफ्तार आतंकी वजीहुद्दीन मूल रूप से छत्तीसगढ़ के दुर्ग का रहने वाला है। वो एएमयू में पीएचडी करने के साथ ही जूनियर छात्रों को सामाजिक विज्ञान विषय (इतिहास, भूगोल और नागरिक शास्त्र) पढ़ाता था। उसके छात्रों में हिंदू छात्र भी शामिल हैं। खास बात ये है कि उसकी विचारधारा से जुड़े हुए लोग वजीहुद्दीन को ‘अमीर’ कहते थे। इसका मतलब ‘शासक’ होता है।

यूपी एटीएस ने इस सप्ताह की शुरुआत में एएमयू से वजीहुद्दीन के दो सहयोगियों- अब्दुल्ला अर्शलान और माज़ बिन तारिक को गिरफ्तार किया था। ये दोनों ISIS के पुणे मॉड्यूल से जुड़े थे। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जब एटीएस अर्शलान और तारिक से पूछताछ कर रही थी तो वजीहुद्दीन का नाम सामने आया था। एटीएस ने बताया है कि वजीहुद्दीन लगातार अपने आईएसआईएस हैंडलर के संपर्क में था और वो आतंकी हमलों की योजना बना रहा था। उस पर और अधिक मुस्लिमों को जिहाद के लिए प्रोत्साहित करने और उन्हें आईएसआईएस से जोड़ने की जिम्मेदारी भी थी।

यूपी एटीएस का दावा है कि एएमयू में वजीहुद्दीन ही आईएसआईएस का मुख्य आतंकी था, जिसने दोनों को ISIS आतंकी बनने के लिए तैयार किया था। वो आईएसआईएस के लिए ओजीडब्ल्यू (ओवर ग्राउंड वर्कर) के तौर पर भी काम कर रहा था। इसमें से अर्शलान पेट्रोलियम और केमिकल इंजीनियरिंग में बीटेक है और तारिक बीकॉम कर रहा है।

अर्शलान और माज बिन तारिक की गिरफ्तारी के बाद यूपी एटीएस ने जब प्रेस रिलीज जारी की तो उसमें साफ तौर पर बताया गया था कि पुणे आईएसआईएस मॉड्यूल से जुड़े आतंकियों- शाहनवाज आलम उर्फ शफी उज्जमा और रिजवान का एएमयू के SAMU (स्टूडेंट्स ऑफ एएमयू) ग्रुप के साथ गहराई से जुड़ाव था। कट्टरपंथी मुस्लिम युवाओं के ग्रुप सामू (SAMU) से जुड़ा शाहनवाज और रिजवान आईएसआईएस के लिए भर्तियाँ कर रहे थे। SAMU ग्रुप का मुखिया वजीहुद्दीन था। उसे सामू से जुड़े इस्लामिक कट्टरपंथी ‘अमीर’ कहते थे।

वजीहुद्दीन और बाकी दोनों गिरफ्तार आतंकियों के पास से आईएसआईएस के जिहादी साहित्य बरामद हुए हैं। इसे वो अन्य छात्रों के साथ शेयर कर रहे थे। बता दें कि पुणे आईएसआईएस मॉड्यूल में गिरफ्तार शाहनवाज, रिजवान और अरशद वारसी अयोध्या, अक्षरधाम मंदिर और चाबड़ हाउस पर आतंकी हमले की योजना बना रहे थे। ये सभी एक-दूसरे के संपर्क में थे। शाहनवाज, रिजवान और अरशद की गिरफ्तारी के बाद ही यूपी एटीएस ने एएमयू से जुड़े उनके कनेक्शन की जाँच तेज कर दी थी।

ISIS का पुणे मॉड्यूल और दिल्ली दंगों का कनेक्शन: आतंकी अरशद और शरजील इमाम

NIA ने 3 अक्टूबर 2023 को जिन तीन जिहादियों को गिरफ्तार किया था, वो आईएसआईएस के पुणे मॉड्यूल से जुड़े थे। इसमें शाहनवाज पुणे से भागकर दिल्ली में छिपा हुआ था। उसे छिपाया था अरशद वारसी ने, जो शरजील इमाम का साथी है। शाहनवाज झारखंड के हजारीबाद का रहने वाला है। वो आईएसआईएस के हैंडलर के साथ मिलकर देश के अलग-अलग हिस्सों में हमलों की तैयारी कर रहा था। इसके लिए उसने पूरी टीम तैयार कर ली थी। पुणे से भागने के बाद उस पर 3 लाख का ईनाम भी घोषित किया गया था। हिंदू लड़की से शादी करने वाले शाहनवाज के पास से बम और आईईडी बनाने में लगने वाले सामान भी बरामद हुए थे।

शाहनवाज (31) पहली बार 2016 में दिल्ली आया था। वो हिज्ब-उत-तहरीर नाम के रेडिकल संगठन से जुड़ा था और शाहीन बाग जाकर उसकी तकरीरें सुना करता था। शाहीन बाग में आने के बाद वो आईएसआईएस से जुड़ गया। यहाँ पर वह रिजवान से मिला और दोनों दोस्त बन गए। खास बात ये है कि शाहनवाज को पनाह देने वाला अरशद वारसी भी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से बी.टेक की पढ़ाई करने के बाद साल 2016 में ही दिल्ली आया था। फिर दोनों दोस्त बन गए।

अरशद वारसी जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी से ‘प्रबंधन में इस्लामी सिद्धांत’ पर पीएचडी कर रहा था। वो शरजील इमाम के साथ दिल्ली दंगों की प्लानिंग में भी शामिल रहा था। उसने शाहनवाज को पनाह दी थी और दोनों एएमयू के आईएसआईएस मॉड्यूल के साथ जुड़े थे। दोनों के पाकिस्तानी हैंडलर भी एक थे और आईएसआईएस का भी हैंडलर एक ही था। दिल्ली पुलिस ने 2020 के हिंदू विरोधी दिल्ली दंगों में 2700 पन्नों की चार्जशीट में 700 पन्नों पर सिर्फ इन दंगों से इनके जुड़ाव की क्रोनोलॉजी ही समझाई है।

ये क्रोनोलॉजी ऐसे समझें कि- 4 दिसंबर 2019 को सिटिजनशिप एमेंडमेंट बिल (सीएबी) को संसद के दोनों सदनों में रखा गया। इसके अगले ही दिन यानी 5 दिसंबर 2019 को शरजील इमाम ने मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑफ जेएनयू (MSJ) नाम का ग्रुप बनाया। इस पूरे ग्रुप को बनाने का आईडिया भी उसी का था। इस ग्रुप की चैट दिल्ली पुलिस ने हासिल की है, जिसमें साफ पता चला है कि शरजील इमाम और अरशद वारसी (जामिया का ही पीएचडी स्टूडेंट) दोनों लगातार संपर्क में थे। वहीं, शरजील इमाम स्टूडेंट्स ऑफ जामिया (SOJ) नाम के ‘रेडिकल कम्युनल ग्रुप’ से भी जुड़ा था।

दिल्ली जंगों की जाँच और चार्जशीट दायर करने के दौरान भी लगा कि अरशद वारसी एक ‘भटका हुआ मासूम नौजवान’ छात्र है, जो संगत की वजह से ऐसे खूँखार आतंकियों के बीच रह रहा हो। हालाँकि अब साफ हो चुका है कि अरशद वारसी कोई मासूम लड़का नहीं, बल्कि खुद ही आईएसआईएस का खूँखार आतंकी है, जो दिल्ली दंगों की प्लानिंग और हिंसा से जुड़ी चीजों के कोर्डिनेशन में शुरुआत से ही जुड़ा हुआ था।

दिल्ली दंगों को लेकर चार्जशीट में शरजील इमाम और अरशद की चैट शामिल है, इसे यहाँ पढ़ सकते हैं

कौन है वजीहुद्दीन खान, जिसे यूपी एटीएस ने छत्तीसगढ़ से पकड़ा?

आतंकी वज़ीउद्दीन मूलतः छत्तीसगढ़ के दुर्ग का ही रहने वाला है और वह AMU से पीएचडी कर रहा था। वज़ीउद्दीन अलीगढ़ में अपने जूनियर छात्रों को सामाजिक विज्ञान (इतिहास, भूगोल, नागरिक शास्त्र) विषय पढ़ाता था। इनमें हिंदू छात्रों की भी अच्छी तादाद होती थी। वज़ीउद्दीन को उसकी विचारधारा से जुड़े लोग ‘अमीर’ कह कर पुकारते थे। अमीर शब्द मुस्लिमों में बादशाह की उपाधि माना जाता है।

ऑपइंडिया ने मई 2023 में ‘अल हया मिन अल्लाह’ नाम के एएमयू ग्रुप के साथ उसके संबंधों को दुनिया के सामने रखा था। वो अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी और जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्रों को एक साथ मिलकर ‘अल्लाह के रास्ते’ पर चल रहा था। ये ग्रुप 2019 में बना और विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में ‘हया’ कार्यक्रम के जरिए छात्रों को इस्लाम की शिक्षा दे रहा था, जिसमें पुरुषवादी सोच, सर्वोच्चतावादी और घोर सांप्रदायिक एजेंडा शामिल था। यह एक महीना लंबा कार्यक्रम था, जिसमें लोकतंत्र की खिलाफत की जाती थी।

वजीहुद्दीन पर ऑपइंडिया की बड़ी स्टोरी यहाँ पढ़ें, जो मई 2023 में ही प्रकाशित की गई थी। वजीहुद्दीन ‘हया’ के नाम पर छात्रों को उत्तेजित करता था और ‘अल्लाह’ के दिखाए रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित करता था। वह कुरान को ही मुस्लिमों का संविधान बताता था। उसी स्पीच की सामू के फेसबुक पेज पर भी शेयर किया गया था। ये वो समय था, जब दिल्ली में सीएए के खिलाफ कथित प्रदर्शन चल रहे थे। वो एंटी-सीएए प्रदर्शनों में जोर-शोर से शामिल होता था। यही नहीं, वो पीएफआई और शरजील इमाम का भी समर्थक है। 26 सितंबर 2022 की उसकी ये पोस्ट काफी कुछ कहती है।

वजीउद्दीन का फेसबुक पोस्ट

वजीहुद्दीन और अरशद वारसी का कनेक्शन

वजीहुद्दीन का फेसबुक प्रोफाइल अभी या तो लॉक्ड है या फिर उसे यूपी एटीएस की छापेमारी के दौरान बंद कर दिया गया, लेकिन उसका और अरशद वारसी का कनेक्शन साफ तौर पर दिखता है। अरशद वारसी उसे अपने कई पोस्ट में ‘अमीर’ के तौर संबोधित करता है और उसे समर्थन देता है।

अरशद वारसी का फेसबुक पोस्ट, जिसमें वो वजीहुद्दीन को अमीर कहकर संबोधित कर रहा है।

अरशद वारसी ने 6 दिसंबर को वजीहुद्दीन अली खान की स्पीच को शेयर किया और SAMU की तारीफ की। ये वीडियो 6 दिसंबर 2019 का है, जो बाबरी विध्वंस की बरसी का दिन होता है। उसके खिलाफ एएमयू में प्रदर्शन किया गया था। यहाँ पर हिंदुओं के खिलाफ नारेबाजी भी हुई थी और भड़काऊ पोस्ट के मामले में 2 छात्रों पर कार्रवाई भी की गई थी।

इसमें कोई हैरानी की बात नहीं है कि चीन के पैसों पर चलने वाला वेबसाइट न्यूजक्लिक, वामपंथी एजेंडा पोषित स्क्रॉल, वायर जैसे संस्थानों ने SAMU के प्रदर्शन का बचाव किया था, जिसमें वजीहुद्दीन ने भाषण दिया था और अरशद वारसी ने जिसे शेयर किया था। फिलहाल दोनों आईएसआईएस आतंकवादी के तौर पर गिरफ्तार किए जा चुके हैं।

खास बात ये है कि अरशद वारसी इन प्रदर्शनों से पहले भी 4 मई 2019 को वजीहुद्दीन की तारीफ करने वाले पोस्ट फेसबुक पर कर चुका था। ये प्रोफाइल अभी एक्सेस नहीं की जा सकती, लेकिन वारसी ने इसका समर्थन किया था, जिसमें हिंदुओं और यहूदियों को ‘काफिर’ के तौर पर ट्रीट करने की बात कही गई थी।

अरशद वारसी और वजीहुद्दीन सीएए विरोधी प्रदर्शनों से पहले से संपर्क में थे। साल 2018 में वारसी ने वजीहुद्दीन की फेसबुक प्रोफाइल ब्लॉक करने की शिकायत की थी और इसके पीछे की वजह बताई थी कि उसने ‘संघी आतंकवाद’ के खिलाफ जुमा खुतबा का वीडियो शेयर किया था।

मई 2018 में एएमयू में जिन्ना की तस्वीर का मामला सामने आया था, जिसके खिलाफ प्रदर्शन हुए थे और एएमयू में कट्टरपंथियों की पकड़ इतनी है कि उन्होंने प्रदर्शन कर रहे जिन्ना विरोधी छात्रों पर हमला किया था। इसी दौरान एएमयू में ‘आजादी’ वाले आपत्तिजनक नारे लगाए गए थे। वजीहुद्दीन एएमयू के अंदर साप्ताहिक ‘दावा’ मीटिंग में सालों तक शामिल होता रहा है।

ये सारे तथ्य इस बात को चीख-चीख कर बताते हैं कि वजीहुद्दीन और अरशद वारसी सालों से एक-दूसरे से जुड़े हुए थे, कम से कम 2018 से तो खुले तौर पर। दोनों आईएसआईएस के ऑपरेटिव हैं और दोनों ही सीएए-विरोधी आंदोलनों में एएमयू और जामिया में शामिल थे।

वजीहुद्दीन-अरशद वारसी और दिल्ली दंगों का लिंक

उपरोक्त जानकारियों से ये साफ है कि अरशद वारसी दिल्ली में हिंसा की शुरुआत से शरजील के साथ रहा। वो 6 दिसंबर को वजीहुद्दीन के पोस्ट शेयर करता है। ये वही समय है, जब दिल्ली दंगों का बीज बोया जा रहा था। अरशद का पोस्ट ये बताता है कि वो न सिर्फ वजीहुद्दीन का समर्थन कर रहा था, बल्कि वो पर्सनल लेवल पर भी उससे जुड़ा था। यही नहीं, वजीहुद्दीन के दो साथियों- अर्शलान और माज की गिरफ्तारी के दौरान यूपी एटीएस भी इस लिंक को जोड़ चुकी है कि शाहनवाज और अरशद से मिले लिंक के बाद एएमयू और सामू से जुड़े आईएसआईएस आतंकियों की गिरफ्तारी की गई है।

उदाहरण के तौर पर इस लिंक का जुड़ाव इस बात से समझें कि 7 दिसंबर 2019 को शरजील इमाम ने कहा कि वो ‘यूनाइटेड अंगेस्ट हेट’ द्वारा बुलाए गए प्रदर्शनों में शामिल होगा। इसका खुलासा अरशद वारसी के साथ उसकी वॉट्सऐप चैट से भी हुआ है। वैसे प्रदर्शन में शामिल होना गलत नहीं है, लेकिन यहाँ पर 7 दिसंबर को ही शरजील इमाम कहता है कि वो अगले सप्ताह कुछ ‘बड़ा’ प्लान कर रहा है और इसके लिए उसे दिल्ली यूनिवर्सिटी, एएमयू और अन्य जगहों से छात्रों को एमएसजे की मदद से इकट्ठा करना होगा।

इसी के बाद अरशद वारसी टेफला ढाबा पर एमएसजे ग्रुप की कोर कमेटी के सदस्यों की बैठक के मिनट्स शेयर करता है। इसमें सिंपल बात कही गई थी कि यूनाइटेड अगेंट्स हेट के प्रदर्शन को पूरी तरह से सफल बनाना है और इसमें मुस्लिमों के साथ ही गैर-मुस्लिम छात्रों को भी जुटाना है। यहाँ ये ध्यान देने वाली बात है कि उसी सप्ताह जामिया से दंगों की शुरुआत हुआ, तो दिल्ली के अन्य हिस्सों के साथ ही उत्तर प्रदेश तक फैल गई।

हिंसा के दौर की शुरुआत 15 दिसंबर को दिल्ली में हुई, जब मुस्लिमों की भीड़ की अगुवाई ओखला से आम आदमी पार्टी का विधायक और दिल्ली वक्फ बोर्ड का अध्यक्ष अमानतुल्लाह खान ने किया। इस दौरान ‘हिंदुओं से आजादी’ के नारे भी लगाए गए। हिंसक प्रदर्शनों के दौरान बसों को फूँक दिया गया। उसी रात दिल्ली पुलिस ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया के कैंपस में घुसकर ऑपरेशन चलाया और हिंसक तत्वों को वहाँ से निकलने पर मजबूर कर दिया।

दिल्ली में हिंदू विरोधी दंगा-2020 में शरजील इमाम, आईएसआईएस, जामिया, एएमयू और आईएसआई कनेक्शन की पूरी क्रोनोलॉजी

इसके दो दिन बाद सीलमपुर में भीषण दंगे भड़क उठे। दिल्ली पूरे युद्ध के मैदान में तब्दील हो गई। स्कूल बसों पर हमले किए गए और उन्हें आग के हवाले कर दिया गया। भीड़ ने पुलिस पर पत्थरबाजी की और अंकित जैसे आईबी अधिकारी को दर्दनाक तरीके से मौत के घाट उतार दिया गया।

खास बात ये है कि 8 दिसंबर को शरजील इमाम, योगेंद्र यादव और अन्य लोगों की एक अंडरग्राउंड मीटिंग हुई थी, जिसके बारे में चार्जशीट में पूरी जानकारी दी गई है। इसमें बताया गया है कि मीटिंग में चक्का जाम करने की योजना को अंतिम रूप दिया गया। यहीं पर ये तय हुआ कि शरजील इमाम दिल्ली और दिल्ली से बाहर के छात्रों के साथ सड़कों पर उतरेगा। इस मीटिंग का खुलासा भी शरजील इमाम और अरशद वारसी की चैट से ही हुई।

इसी मीटिंग के दिन ‘CAB TEAM’ नाम से एक वॉट्सऐप ग्रुप बनाया गया, जिसमें योगेंद्र यादव, उमर खालिद, शरजील इमाम, नदीम खाम, परवेज आलम जैसे लोग थे। इसी के बाद दिल्ली में लगभग हर दिन हिंदुओं के खिलाफ हिंसा बढ़ती चली गई, जिसकी परिणति दिल्ली के साल 2020 के हिंदू-विरोधी दंगों के रुप में हुई।

इस मामले में अभी तक की जानकारी के मुख्य अंश

  1. एनआईए ने 3 अक्टूबर 2023 को तीन आईएसआईएस आतंकवादियों को गिरफ्तार किया – झारखंड के हजारीबाग के निवासी शाहनवाज आलम (31); लखनऊ से मोहम्मद रिज़वान अशरफ (28); और झारखंड के गढ़वा जिले से मोहम्मद अरशद वारसी।

2. यूपी एटीएस ने कहा है कि शाहनवाज और रिजवान SAMU (एएमयू छात्र समूह) से करीबी तौर पर जुड़े हुए थे और आईएसआईएस के लिए भर्ती कर रहे थे।

3. ये तीनों- शाहनवाज, रिजवान और अरशद वारसी अयोध्या, अक्षरधाम मंदिर और चाबड़ हाउस में आतंकी हमले की योजना बना रहे थे।

4. अरशद वारसी के पास अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से बीटेक की डिग्री है और वर्तमान में वह जामिया मिलिया इस्लामिया (जेएमआई) से पीएचडी कर रहा है। वह ‘प्रबंधन में इस्लामिक सिद्धांत’ पर शोध कर रहा है। इसके चलते वो जामिया और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय दोनों से ही जुड़ा है।

5. अरशद वारसी पुणे मॉड्यूल के मास्टरमाइंड शाहनवाज से बेहद करीब से जुड़ा है। ये वारसी ही है, जिसने पुणे से फरार होने के बाद शाहनवाज को दिल्ली में छिपाया, जबकि एनआईए ने उसके सिर पर इनाम रखा था।

6. अरशद वारसी दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों के मास्टरमाइंडों में से एक शरजील इमाम से करीबी तौर पर जुड़ा हुआ था।

7. दिल्ली दंगों की चार्जशीट में शरजील इमाम और अरशद वारसी के बीच हुई व्हाट्सएप चैट को शामिल किया गया है।

8. शरजील इमाम और अरशद वारसी 5 दिसंबर 2019 से जुड़े हुए थे, जब सीएए के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई जा रही थी। वारसी के साथ इन चैट्स में इमाम ने “कुछ बड़ा करने” खासतौर पर हिंसा के लिए कहा था।

9. अरशद वारसी ने 6 दिसंबर 2019 को ही फेसबुक पर वजीहुद्दीन अली खान और SAMU की तारीफ की थी। ये दिन बाबरी विध्वंस की बरसी का दिन होता है।

10. शरजील इमाम और अरशद वारसी की ओर से जो पर्चे छपवाए जा रहे थे, उनमें इस्लाम और बाबरी को लेकर सांप्रदायिक संदेश भी थे।

11. अरशद वारसी और शरजील इमाम ने 7 दिसंबर 2019 को दिल्ली में हिंसा की योजना बनाने के लिए बैठक की थी।

12. दिल्ली में हिंसा फैलाने के लिए 8 दिसंबर को एक अंडरग्राउंड मीटिंग हुई थी जिसमें उमर खालिद, शरजील इमाम और योगेन्द्र यादव मौजूद थे। उस बैठक में यह निर्णय लिया गया कि शरजील इमाम चक्का जाम का आयोजन और नेतृत्व करेगा।

13. इसी के बाद 15 दिसंबर 2019 से दिल्ली में हिंसा भड़क उठी।

14. इसके बाद से लगभग हर रोज दिल्ली में हिंदुओं पर इस्लामिक कट्टरपंथियों ने हमले किए और फिर फरवरी 2020 में इस हिंसा ने वीभत्स रूप धारण कर लिया।

15. आईएसआईएस आतंकी के तौर पर जिस वजीहुद्दीन अली खान को अब गिरफ्तार किया गया है, वो कुछ समय पहले तक अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से जुड़ा था और पूरी तरह से सक्रिय था। ऑपइंडिया ने मई 2023 में ‘अल हया मिन अल्लाह’ नाम के एएमयू ग्रुप के साथ उसके संबंधों को दुनिया के सामने रखा था।

16. वजीहुद्दीन अली खान ने 26 सितंबर 2022 को भी अपने फेसबुक पोस्ट में शरजील इमाम का समर्थन किया था।

17. अरशद वारसी, वजीहुद्दीन अली खान और अन्य आतंकवादी आईएसआईएस और पाकिस्तान के आईएसआई हैंडलर्स से जुड़े रहे।

इन बातों से ये साफ है कि दिल्ली में हिंदू विरोधी दंगों के तार कई तरह से आईएसआईएस से जुड़ चुके हैं। अब आईएसआईएस आतंकवादी अरशद वारसी की गिरफ्तारी, आईएसआईएस आतंकवादी वजीहुद्दीन अली खान की गिरफ्तारी, उनके कनेक्शन और शरजील इमाम के लिंक जब सामने आ चुके हैं।

ऐसे में ये जरूरी हो जाता है कि दिल्ली पुलिस और एनआईए साल 2020 के हिंदू विरोधी दंगों में आतंकी कनेक्शन और आईएसआईएस की भागीदारी की जाँच करें। साल 2020 में दिल्ली दंगों में कई हिंदुओं ने अपनी जान गँवा दी थी।

मूल रूप से यह रिपोर्ट अंग्रेजी में नुपूर जे शर्मा द्वारा लिखी गई है। इसे पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें।

राज ठाकरे का दीपोत्सव, जावेद अख्तर भी बोले- जय सियाराम: कहा- मैं नास्तिक, पर राम-सीता में है आस्था…

बॉलीवुड गीतकार जावेद अख्तर दीवाली से पहले भगवान राम और माता सीता पर टिप्पणी करके चर्चा में आए हैं। इस बार उन्होंने भगवान राम और माता सीता को सांस्कृतिक विरासत बताया है।

गीतकार जावेद ने मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे द्वारा आयोजित दीपोत्सव कार्यक्रम में बोलते हुए कहा कि उन्हें राम और सीता की भूमि पर पैदा होने पर गर्व है। कार्यक्रम में वह बोले-

“राम और सीता केवल हिंदू देवी-देवता नहीं हैं। यह भारत की सांस्कृतिक विरासत है। हालाँकि मैं नास्तिक हूँ फिर भी मैं राम और सीता को इस देश की संपत्ति मानता हूँ इसलिए मैं यहाँ आया हूँ। रामायण हमारी सांस्कृतिक विरासत है। यह आपकी रुचि का विषय है। मुझे इस बात पर गर्व है कि मैं राम और सीता की भूमि पर पैदा हुआ हूँ, जब हम मर्यादा पुरुषोत्तम की बात करते हैं तो राम और सीता ही याद आते हैं। तो, आज से जय सियाराम।”

इसके बाद जावेद ने वहाँ मौजूद लोगों से 3 बार जय सियाराम के नारे लगवाए। उन्होंने बचपन के दिनों को याद करते हुए कहा कि वो लखनऊ से हैं, जहाँ बचपन में बातें किया करते थे कि ये गुडमॉर्निंग वगैरह बड़े लोगों की बात है। वहाँ तो सब लोग आते-जाते अभिवादन में जय सिया राम ही कहते थे। इसलिए सीता राम को अलग-अलग सोचना पाप है। ये शब्द प्रेम, एकता और गृहस्थ जीवन का प्रतीक है। इन्हें तो एक ने ही अलग किया उसका नाम रावण था। आज जो ऐसा करेगा वह रावण ही होगा।

आगे उन्होंने जनता से कहा- “आप मेरे साथ तीन बार जय सियाराम का नारा लगाए… जय सियाराम…जय सियाराम…जय सियाराम।”

हिंदू संस्कृति को बताया सहिष्णु

दीवाली पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने ये भी कहा कि भारत में यदि लोकतंत्र कायम है तो इसकी वजह हिंदू संस्कृति है। उन्होंने कहा कि असहिष्णुता बढ़ रही है। पहले भी कुछ लोग थे जो असहिष्णु थे पर हिंदू वैसे नहीं थे। इनकी सबसे बड़ी खासियत यही थी कि इनकी सोच विशाल थी। अगर इनकी यह खासियत खत्म हो गई तो वे भी दूसरे लोगों जैसे हो जाएँगे। ऐसा नहीं होना चाहिए। हमने तो आपसे ही जीना सीखा है…।

बता दें कि मनसे द्वारा आयोजित दीपोत्सव कार्यक्रम में जावेद अख्तर के साथ सलीम खान और एक्टर रितेश देशमुख भी नजर आए। कार्यक्रम की कई तस्वीरें सोशल मीडिया पर आई हैं लेकिन जो जावेद अख्तर द्वारा जय श्रीराम के नारे लगवाने की वीडियो हर जगह वायरल है। कुछ लोग इसे देख खुश हैं तो कुछ कह रहे हैं कि अच्छा है जावेद अख्तर की अक्ल ठिकाने आ गई।