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 ‘हीरो मोटोकॉर्प’ के चेयरमैन पवन मुंजाल पर कार्रवाई,  ED ने जब्त की ₹25 करोड़ की संपत्ति: ये है मामला 

दोपहिया वाहनों के क्षेत्र में बड़ी कंपनी ‘हीरो मोटोकॉर्प’ के सीएमडी और चेयरमैन पवन कांत मुंजाल की लगभग 24.95 करोड़ की संपत्ति प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जब्त की है। ईडी ने शुक्रवार (10 नवंबर, 2023) को मुंजाल की दिल्ली की इन तीन अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त किया है।

उन पर ये कार्रवाई मनी लॉन्डरिंग की जाँच को लेकर प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्डरिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत की गई है। ईडी की इस कार्रवाई के बाद हीरो मोटोकॉर्म के शेयरों में गिरावट देखी गई है। ईडी के मुताबिक जब्ती और कुर्की का कुल मूल्य लगभग 50 करोड़ रुपए है।

गौरतलब है कि ईडी ने अगस्त में मुंजाल और उनकी कंपनियों के खिलाफ पीएमएलए मामला दर्ज करने के बाद छापेमारी की थी। ये मामला राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) के आरोप पत्र का संज्ञान लेने के बाद दायर किया गया था।

इसमें पवन कांत मुंजाल पर अवैध तौर से भारत से विदेशी मुद्रा ले जाने का आरोप लगाया गया था। ईडी ने कहा, “अभियोजन पक्ष की शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 54 करोड़ रुपए के बराबर विदेशी मुद्रा अवैध तरीके से भारत से बाहर ले जाई गई थी।”

बता दें की ईडी की इस कार्रवाई के बाद हीरो मोटोकॉर्प के शेयर लाल निशान पर ट्रेड कर रहे हैं। इनमें 70 अंकों से अधिक की गिरावट दर्ज की जा चुकी है। गौरतलब है कि दोपहिया वाहनों के क्षेत्र में बड़ी कंपनी ‘हीरो मोटोकॉर्प’ के साल 2022 में 1000 करोड़ रुपए के फर्जी खर्च पकड़े गए थे।

गौरतलब है कि आयकर विभाग की छापेमारी (IT Raid) के बाद ये खुलासा हुआ था। इसके अलावा IT विभाग ने 100 करोड़ रुपए की अतिरिक्त गड़बड़ियाँ भी पकड़ी थी। इनमें दिल्ली के एक फार्महाउस के लिए किए गए ट्रांजैक्शन भी शामिल थे। आईटी विभाग ने बुधवार (23 मार्च, 2022) को इसे लेकर उनके कई ठिकानों पर छापेमारी अभियान चलाया था।

बच्चों ने कहा- ‘जय श्रीराम’ तो टीचर ने मंच पर बुलाकर पीटा, NCPCR ने माँगा जवाब: मध्य प्रदेश के कॉन्वेंट स्कूल की घटना

मध्य प्रदेश के विदिशा स्थित ‘भारत माता कॉन्वेंट स्कूल’ में छात्रों द्वारा ‘जय श्रीराम’ का नारा लगाने पर स्कूल प्रबंधन भड़क गया। स्कूल प्रबंधन ने बच्चों को मंच पर बुलाया और वहीं उनकी पिटाई कर दी। इसके बाद मामला गरम हो गया। सूचना पाकर मौके पर हिंदू संगठन भी पहुँचे और नारेबाजी शुरू कर दी, जिसके बाद पूरा स्कूल छावनी में तब्दील हो गया। इस दौरान पीड़ित बच्चों के परिजन भी मौके पर पहुँच गए।

जानकारी के मुताबिक, मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के गंजबासौदा में एक कॉन्वेंट स्कूल में गुरुवार (9 नवंबर 2023) को हंगामा मच गया। एक छात्र ने आरोप लगाया है कि जब उसने स्कूल में जय श्रीराम का नारा लगाया तो टीचर ने उसे थप्पड़ जड़ दिया। इस घटना के बाद स्कूल में जमकर हंगामा हुआ। मामला इतना तूल पकड़ गया कि छात्र संगठन भी स्कूल पहुँच गए। सूचना पर पुलिस भी पहुँची। कुछ ही देर में स्कूल छावनी में तब्दील हो गया।

घटना के समय स्कूल में कार्यक्रम चल रहा था। ऐसे में नारा सुन कॉन्वेंट स्कूल के प्रशासन को ये नागवार गुजरा और जिन छात्रों ने जय श्रीराम के नारे लगाए थे उनकी मंच पर बुलाकर पिटाई कर दी गई।

इस मामले पर गंजबासौदा एसडीएम और एसडीओपी समेत पुलिस भी सूचना मिलते ही भारी फोर्स के साथ मौके पर पहुँच गई थी। प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने मामले को शांत कराना शुरू किया। एसडीएम और एसडीओपी के सामने बयान लिए गए और मामले की जाँच शुरू की गई। उचित कार्रवाई की बात कहकर आक्रोशित लोगों को समझाकर शांत कराया गया।

गंजबासौदा के एसडीम विजय राय ने कहा, “हमने संबंधित अधिकारी को जाँच के निर्देश दिए हैं। जाँच के बाद नियम अनुसार कार्रवाई की जाएगी।” उन्होंने कहा कि स्कूल प्रशासन का भी बयान अभी दर्ज किया जाना है। इस मामले का राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने भी संज्ञान लिया है। आयोग के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने कलेक्टर और एसपी को नोटिस जारी किया है।

पहले भी विवादों में रहा है ये कॉन्वेंट स्कूल

जानकारी के मुताबिक, गंजबासौदा के भारत माता कॉन्वेंट स्कूल के प्रशासन पर पहले भी गंभीर आरोप लगे हैं। इसी स्कूल में छात्रों को तिलक लगाने, हाथ में कलावा बाँधने को लेकर प्रताड़ित किया जाता रहा है। यही नहीं, इस मिशनरी स्कूल पर छात्रों के धर्मांतरण का भी आरोप लग चुका है, जिसके बाद हिंदू संगठनों ने इस स्कूल में तोड़फोड़ भी की थी। स्थानीय प्रशासन ने पहले भी इस कॉन्वेंट स्कूल के खिलाफ कार्रवाई की बात कही थी, लेकिन अभी तक इसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

कुमार विश्वास की सुरक्षा में तैनात जवान बदले गए, डॉक्टर के साथ मारपीट की घटना को लेकर माँगनी पड़ी थी माफी

बुधवार (8 नवंबर, 2023) को हुए रोड रेज के एक मामले में कवि कुमार विश्वास की सुरक्षा से केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों को बदल दिया गया है। दरअसल, हिंसा की जाँच तक पहले के सुरक्षाकर्मियों को हटा दिया गया है। यह तब हुआ जब हाल ही में कुमार विश्वास की सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मियों और एक डॉ के बीच झड़प का मामला सामने आया था।

बता दें कुमार विश्वास को केंद्र सरकार की तरफ से वाई श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई है। ये सुरक्षा उन्हें दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल पर खालिस्तान समर्थकों का समर्थन करने के आरोप के बाद बीते साल दी गई थी। इसके तहत सीआरपीएफ की वीआईपी सुरक्षा इकाई का एक छोटा सा ‘वाई’ श्रेणी का सशस्त्र सुरक्षा कवर उन्हें दिया गया था।

आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक शुक्रवार (10 नवंबर, 2023) को कवि कुमार विश्वास की वीआईपी सुरक्षा यूनिट में तैनात सीआरपीएफ के कमांडो को दो दिन पहले हुई रोड रेज की कथित घटना की जाँच तक ड्यूटी से हटा दिया गया है। हालाँकि, इनके बाद इन कमांडो के दूसरे बैच ने उनकी जगह ले ली है।

इस मामले की समीक्षा के बाद सीआरपीएफ महानिदेशक एस एल थाओसेन ने कोर्ट ऑफ इंक्वायरी का आदेश दिया है। गौरतलब है कि रोड रेज की यह कथित घटना बुधवार को कुमार विश्वास के उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के वसुंधरा घर से अलीगढ़ जाते वक्त हुई थी।

जानकारी के मुताबिक, कवि डॉ. कुमार विश्वास के काफिले में शामिल सुरक्षाकर्मियों की कार को साइड देने के दौरान टकर लगने से मामला मारपीट तक जा पहुँचा था। इस दौरान एक डॉक्टर पल्लव वाजपेयी ने आरोप लगाया था कि कुमार विश्वास की सुरक्षा में तैनात सीआरपीएफ के जवानों ने उनके साथ मारपीट की थी।

वही दूसरी तरफ कुमार विश्वास ने आरोप लगाया था कि दूसरी कार में सवार शख्स ने यूपी पुलिस के सिपाही और केंद्रीय सुरक्षाकर्मियों पर हमला किया। वहीं पुलिस आयुक्त अजय कुमार मिश्र का कुमार विश्वास के लगाए हमले के आरोप पर प्रारंभिक जाँच में पुष्टि न होने का बयान आया।

उसके बाद इसे लेकर उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोल भी किया गया था। कुमार विश्वास ने इसके बाद सोशल मीडिया पर लंबा पोस्ट डालकर माफी माँग ली थी।

नीतीश कुमार के खाने में कौन मिला रहा है ‘विष’? जीतनराम मांझी ने गिनाए लक्षण, पासवान बोले- तेजस्वी यादव के CM बनने के बँटे लड्डू

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने जातीय गणना और उसके आधार पर आरक्षण बढ़ाने को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी तो भरे सदन में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उन्हें जलील कर दिया था। इतना ही नहीं, भाषाई मर्यादा को पार करते हुए सीएम नीतीश ने मांझी से तू-तड़ाक तक कर डाला था। अब मांझी ने कहा कि सीएम नीतीश कुमार की मानसिक हालत ठीक नहीं है।

राष्ट्रीय जनता दल और तेजस्वी यादव पर परोक्ष रूप से हमला करते हुए जीतनराम मांझी ने कहा कि एक साजिश के तहत सीएम नीतीश कुमार को पिछले कई दिनों से विषैला पदार्थ खिलाया जा रहा है, ताकि किसी को जल्दी मुख्यमंत्री बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि इसके लिए मुख्यमंत्री को विषैला पदार्थ खिलाया जा रहा है।

वहीं, भाजपा के विधायक लखेंद्र पासवान ने कहा कि बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव की साजिश है कि बहुत जल्द नीतीश कुमार जी को पागल करके पागलखाने भेज दें। पासवान ने कहा, राजद का विधायक लड्डू लेकर आया और कहा कि लड्डू खाइए, क्योंकि छठ के बाद बिहार के मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव होने वाले हैं।”

हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा सेक्युलर के संस्थापक मांझी ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पिछली तीन घटनाएँ बता रही हैं कि उनकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। उन्हें कोई विषैला पदार्थ खिला रहा है। पहली घटना को लक्षण के रूप में गिनवाते हुए मांझी ने कहा कि नीतीश कुमार ने अशोक चौधरी के पिता महावीर चौधरी पर माल्यार्पण करने की जगह अशोक चौधरी पर ही माल्यार्पण कर दिया।

दूसरी घटना को गिनवाते हुए उन्होंने कहा कि सदन में नीतीश कुमार ने महिलाओं के बारे में जो बयान दिया था, वह बेहद घटिया था। यह हद हो गई थी। मांझी ने आगे कहा, “उसके बाद गुरुवार (9 नवंबर 2023) को जिस तरह से उन्होंने मुझे जलील किया, उससे वे साबित करते हैं कि कहीं-न-कहीं नीतीश कुमार को विषैला खाना खिलाया जा रहा है।”

दरअसल, नीतीश कुमार द्वारा सदन में जलील होने के बाद मांझी ने इसे महादलितों का अपमान बताया है। नीतीश कुमार के विरोध में दलित समुदाय आ गया है और उनसे इस्तीफे की माँग की है। वहीं, मांझी ने इसको लेकर प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है और कहा है कि वे दिवाली बाद राष्ट्रपति से मिलेंगे और बिहार में राष्ट्रपति शासन लगाने की माँग करेंगे।

बता दें कि जीतनराम मांझी सदन में आरक्षण की व्यवस्था की खामियों को लेकर अपनी बात रख रहे थे, तभी नीतीश कुमार तमतमा कर उठे और जीतनराम मांझी को खरी खोटी सुनाने लगे। सीएम नीतीश कुमार ने तो यहाँ तक कह दिया कि ‘इसे (जीतनराम मांझी को) कोई सेंस नहीं है। इसे तो मैंने अपनी मूर्खता के चलते मुख्यमंत्री बना दिया था’।

बिहार विधानसभा के शीतकालीन सत्र के चौथे दिन सदन में नीतीश कुमार का व्यवहार चर्चा में है। मांझी को लेकर नीतीश कुमार ने कहा, “इसको कुछ आइडिया नहीं है। ये तो मेरी गलती है कि मैंने इस आदमी को बना दिया मुख्यमंत्री। इसको कोई सेंस नहीं है। अइसे ही बोलते रहता है। कोई मतलब नहीं है। हम कह रहे थे कि आप लोगों के साथ ही रहिए, भाग के चला आया 7 पार्टी में। यही जानकर हमने भगा दिया उधर।”

भाजपा विधायकों की तरफ से आवाज उठने पर भी नीतीश कुमार नहीं रुके। नीतीश कुमार ने आगे कहा, “अरे सुनो बैठो ना यार, बैठिए, भूलिए मत, जब 2013 में आप लोगों को छोड़ दिए थे… अरे चुप ना रहो यार। कुछ जानते हो? हम इसको (माँझी की तरफ इशारा करके) (मुख्यमंत्री) बना दिए। इसके बाद जितने लोग मेरा पार्टी के थे, सब हमको दो ही महीने में कहने लगा कि गड़बड़ है, इसको हटाइए। अंत में हमको बाध्य किया तो फिर हम सीएम बन गए। कहता रहता है कि ये भी मुख्यमंत्री था। ये क्या मुख्यमंत्री था? ये तो मेरी मूर्खता से मुख्यमंत्री बना।”

नीतीश कुमार ने पत्रकारों की तरफ इशारा करके कहा कि वो मांझी को भाव ना दिया करें। नीतीश कुमार बोले, “आप बिना मतलब के इसको (मांझी) को रोज पब्लिश करते हो। कोई सेंस है इसमें?” इस बीच जब भाजपा विधायक हंगामा करने लगे तो नीतीश कुमार ने कहा, “एक मेरा सुझाव है कि आप ही लोगों के पीछे ये (मांझी) घूम रहा है। ये गवर्नर बनना चाहता है। ये हम लोगों के साथ था तो भी उल्टा-पुल्टा बोलता था। लगा दीजिए गवर्नर इसको… यही बनना चाहता है ये।”

गुस्से में मानो नीतीश कुमार गुस्से में सब कुछ भूल बैठे हों। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष विजय कुमार चौधरी ने हस्तक्षेप किया और कहा कि क्यों नहीं एक महादलित को मुख्यमंत्री बना देते तो उन्होंने भाजपा को भी लपेटे में लेने की कोशिश की। उन्होंने अपील को अनसुना करते हुए कहा, “आप बनाए थे? कौन बनाया? तुम जानते हो, हम्हीं ने बनाया। अरे गर्वनर काहे नहीं बना देते।”

नीतीश ने आगे कहा, “यह गर्वनर बनने के चक्कर में ही रोज चक्कर लगाता है। इसके परिवार का लोग इसके खिलाफ है। आप जान लीजिए ये कोई काम का आदमी नहीं है। अरे इसको ले जाइए न। नारा लगा रहे हो? क्या जानते हो, इसको कौन मुख्यमंत्री बनाया। मैं चाहता हूँ कि तुम इन लोगों के साथ रहो।”

मैं भुइयाँ मुसहर, इसीलिए नीतीश कुमार ने किया जलील

इस घटना को लेकर सदन के बाहर पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, “मैं नीतीश कुमार से हर मामले में सीनियर हूँ, फिर भी उन्होंने हमारा अपमान किया। नीतीश कुमार ने अपनी लाज बचाने के लिए सीधे-साधे आदमी का इस्तेमाल किया। मैं मुसहर हूँ, इसलिए मुझे सदन में जलील किया गया।”

मांझी ने कहा, “नीतीश कुमार 1985 में विधायक बने। हम 1980 में विधायक बने। उनकी उम्र 74 साल है। मेरी उम्र 80 साल है। मैं उनसे सीनियर हूँ। इसके बावजूद वो तुम-ताम करते हैं। विधानसभा में तुम-ताम करना कहाँ तक उचित है। इसलिए मुझे लगता है कि वो मानसिक संतुलन खो बैठे हैं।”

नीतीश कुमार द्वारा गवर्नर बनाए जाने के ताने पर पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने कहा कि उन्हें साल 2017 में ही राज्यपाल बनने का ऑफर दिया गया था, लेकिन उन्होंने जनता के बीच में रहकर जनसेवा की राह चुनी थी। उन्होंने कहा कि उन्होंने गवर्नर बनने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था।

‘इस्लाम में 4 निकाह जायज, मेरी बेगम बनो’: शादीशुदा लड़की और उसकी बहन पर धर्मांतरण का दबाव बना रहा था रहीम खान

इंदौर में रहीम खान नाम के एक व्यक्ति ने अपनी हिंदू महिला दोस्त की शादीशुदा बेटी को ब्लैकमेल करते हुए उसका धर्म परिवर्तन कराने की कोशिश की है। रहीम खान ने शादीशुदा औरत से कहा कि अपने पति को छोड़ो और मेरी बेगम बन जाओ। इस्लाम में 4 शादियाँ जायज हैं। तुम अपनी 12 साल छोटी बहन का भी धर्मपरिवर्तन करा लो। यही नहीं, उसने पीड़ित का फोन चुरा लिया और उसके फोन से उसकी माँ की तस्वीरें सोशल मीडिया पर अपलोड कर भद्दी बातें लिखी हैं।

ये मामला इंदौर के कनाडिया थाना क्षेत्र के साईंनाथ कालोनी का है। पीड़ित महिला ने बताया कि उसकी माँ का मित्र रहीम खान छोटी बहन के जन्मदिन पर उसके घर आया था। ये मामला 23 अक्टूबर का है। यहाँ उसने चार्जिंग पर लगा उसका फोन उठा लिया और उसकी माँ की तस्वीरें अपने फोन में ले ली। उसने उसकी माँ की तस्वीरें सोशल मीडिया पर अपलोड कर भद्दी बातें लिखी।

महिला ने बताया कि आरोपित रहीम खान बड़ला (खजराना) का रहने वाला है। अब वो महिला पर दबाव डाल रहा है कि वो अपने पति को छोड़ दे और उसकी बेगम बन जाए। उसका कहना है कि इस्लाम में 4 शादियाँ जायज हैं, ऐसे में वो अपनी छोटी बहन का भी धर्म परिवर्तन करा दे।

पीड़िता ने बताया कि रहीम खान उससे शारीरिक संबंध बनाने के लिए दबाव बना रहा था। रहीम उस पर दबाव डाल रहा है कि वो अपने पति से तलाक ले ले और उसके साथ निकाह कर ले। पीड़िता का आरोप है कि आरोपित उसकी 12 वर्ष छोटी बहन को भी इस्लामअपनाने के लिए धमका रहा था।

कनाडिया पुलिस ने बताया कि इस मामले में आरोपित रहीम खान को गिरफ्तार कर लिया गया है। उसके खिलाफ जबरन मतांतरण के मामले में केस दर्ज किया गया है। इस मामले में एसीपी कुंदन मंडलोई ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है। अब पुलिस आरोपित से पूछताछ कर रही है।

झोपड़ी में घुसे जवान, ग्रेनेड का पिन निकालने वाला था आतंकी… 25 साल पहले साथियों की जान बचाने वाला सैनिक कश्मीर में बलिदान

जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तानी फौज ने सीजफायर का उल्लंघन करके गुरुवार (9 नवंबर 2023) को बेवजह हमला किया। इस हमले में बीएसएफ के बहादुर जवान लाल फैम कीमा बलिदान हो गए।

2021 में बॉर्डर पर सीजयफायर लागू होने के बाद के बाद ये पहली कैजुएलटी है जो कश्मीर के सांबा जिले में हुई। गोली लगने से कीमा के काफी चोटें आई थीं ऐसे में उन्हें अस्पताल ले जाया गया लेकिन वहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

50 वर्षीय कीमा मिजोरम के एजवाल के रहने वाले थे। उनके पीछे उनकी पत्नी और 3 बच्चे रह गए हैं। इसके अलावा जो उनके पीछे छूटा है वो उनकी बहादुरी का किस्सा है जिसमें उन्होंने आतंक विरोधी अभियान में एक दर्जन साथियों की जान बचाई थी।

ये किस्सा 1998-99 का है। एक ऑपरेशन के दौरान पीर पंजाल रेंज के ऊपर गूल गाँव में एक मिट्टी के घर के अंदर आतंकी छिपे थे, तब लाल फैम उसी टीम का हिस्सा थे जिन्हें आतंकियों का सामना करना था। उस समय वो कीमा ही थे जिन्होंने अपने साथियों की रक्षा करने के लिए एक आतंकी पर ताबड़तोड़ अपनी लाइट मशीन गन चलाई थी।

कीमा के जाने के बाद उनकी ये कहानी उनके तत्कालीन कमांडिंग ऑफिसर ने शेयर की है। जिसकी चर्चा मीडिया में है। रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने बताया कि उस समय आतंकी एक मिट्टी के घर में थे और सभी जवानों को मारने के लिए आतंकियों ने गोलीबारी और ग्रेनेड से हमला करके खुद को उड़ा लिया था। उस समय घर के अंदर से धुआँ निकल ही रहा था कि बीएसएफ की टीम झोपड़ी के अंदर पहुँच गए। उन्हें 3 आतंकी मृत मिले। लेकिन लाल फैम ने देख लिया था कि एक आतंकी अपने ग्रेनेड से पिन निकाल रहा है। ऐसे में वो चिल्लाए- तुम ग्रेनेड का पिन निकालेगा… और इसके बाद वो ताबड़तोड़ फायरिंग करते रहे।

सीओ याद करते हैं कि कैसे उस घर में घुसकर सारे जवान तलाशी में व्यस्त हो गए थे लेकिन सिर्फ कीमा की सतर्कता के कारण वहाँ दर्जनों जवानों की जान बची थी। अगर वो नहीं देखते तो उस दिन न जाने क्या होता, कितने सैनिकों को अपनी जान गँवानी पड़ती।

गौरतलब है कि पाकिस्तान ने 8-9 नवंबर की आधी रात गोली बारी की थी। बीएसएफ डीजी नितिन अग्रवाल ने कहा कि सीमा पर तैनात जवानों ने सीजफायर उल्लंघन का कड़ा जवाब दिया है जिससे पाकिस्तानी फौजियों का भी काफी नुकसान हुआ है। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान लगातार सीजफायर का उल्लंघन कर रहा है। अब तक वह 2-3 बार ऐसा कर चुका है।

कंगाल पाकिस्तान के पास पासपोर्ट छापने के लिए पेपर भी नहीं, बोले आकाश चोपड़ा- कुदरत का निजाम काम नहीं कर रहा

कंगाल पाकिस्तान में लेमिनेशन वाले कागज की भी कमी हो गई है। जिससे पाकिस्तानियों को विदेश जाना मुश्किल हो गया है। आर्थिक संकट से जूझ रहा ये मुल्क इस कागज की कमी होने से पासपोर्ट नहीं बना पा रहा है जिससे वहाँ अब इसके लिए भी अफरा-तफरी मची हुई है और नए पासपोर्ट पर पूरी तरह रोक लगी हुई है।

आलम ये है कि पाकिस्तान के आव्रजन और पासपोर्ट महानिदेशालय (डीजीआई एंड पी) के अधिकारी इस मसले पर जनता को जवाब नहीं दे पा रहे हैं। केवल हालात के जल्द सही होने की बात कह कर वो लोगों को टाल रहे हैं।

इसे लेकर सोशल मीडिया पर पाकिस्तान की खिल्ली भी उड़ रही है। लोग चुटकी ले रहे हैं । वहीं क्रिकेटर आकाश चोपड़ा ने भी पाकिस्तान के मजे लेते हुए लिखा, “विमान उड़ाने के लिए ईंधन नहीं। पासपोर्ट प्रिंट करने के लिए लेमिनेशन पेपर नहीं। क़ुदरत का निज़ाम खास तौर से अच्छा काम नहीं कर रहा है।”

दरअसल, मसला ये है कि पाकिस्तानी पासपोर्ट बनाने के लिए ये लेमिनेशल पेपर फ्रांस से आयात किया जाता है। अब पाकिस्तान के आर्थिक हालात तो जग जाहिर है उधारी के चक्कर में कंगाल हो चुका है।

ऐसा भी हुआ कि विदेशों से माल लेकर आए कंटेनर बंदरगाहों में ही फँस गए क्योंकि पाकिस्तान के पास कंटेनरों के लिए पैसा ही चुकाने को नहीं था। दूर जाने की जरूरत नहीं इस साल के शुरुआती महीने में ही विदेशों से माल लेकर पाकिस्तानी बंदरगाहों पर पहुँचे 9000 से अधिक कंटेनर फँस गए थे।

कुछ ऐसा ही हाल पासपोर्ट में इस्तेमाल होने वाले लेमिनेशन पेपर की कमी को देख कर भी लग रहा है। पाकिस्तान के आव्रजन और पासपोर्ट महानिदेशालय (डीजीआई एंड पी) के मुताबिक, पासपोर्ट में इस्तेमाल होने वाले लेमिनेशन पेपर की कमी है और ये आमतौर पर फ्रांस से आयात किया जाता है। इसी वजह से देश भर में विदेशी यात्रा पर जाने वाले दस्तावेज़ की कमी हो गई है।

गौरतलब है कि पाकिस्तान में ये पहली घटना नहीं है। यहाँ 2013 में भी DGI & P के प्रिंटरों को पैसा न देने और लेमिनेशन पेपर्स की कमी की वजह पासपोर्ट की छपाई ऐसे ही रुक गई थी।

द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के मुताबिक, डीजीआईएंडपी के पेरेंट् मंत्रालय, आंतरिक मंत्रालय के मीडिया महानिदेशक कादिर यार तिवाना कहते हैं कि सरकार संकट से निपटने की पूरी कोशिश कर रही है।

उन्होंने कहा, “हालात जल्द ही काबू में होंगे और पासपोर्ट जारी करना सामान्य रूप से जारी रहेगा। विभाग ने पहले ही बैकलॉग (पहले से पासपोर्ट बनाने के लिए आए आवेदन) में लगातार कमी देखी गई है।”

वहीं, जोनल ऑफिस सदर, कराची में निदेशक पासपोर्ट और आव्रजन, सईद अहमद अब्बासी से जब पासपोर्ट बनने के वक्त के बारे में पूछा गया तो उन्होंने इस मामले पर कुछ भी कहने से इंकार करते हुए कहा कि आधिकारिक तौर पर वह जवाब देने की स्थिति में नहीं हैं।

मौके की नजाकत इस दौरान पेशावर के पासपोर्ट कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के बयान ने साफ कर दी। इस अधिकारी ने नाम न लेने की शर्त पर कहा कि वो पहले के 3,000 से 4,000 पासपोर्ट के मुकाबले हर दिन अब केवल 12 से 13 पासपोर्ट बना पा रहे हैं।

अब वहाँ आलम ये है कि पासपोर्ट की कमी ने विदेश यात्रा पर जाने का मंसूबा पाले हजारों पाकिस्तानियों को प्रभावित किया है। सबसे अधिक प्रभावित विदेश में रोजगार या पढ़ाई के लिए जाने वाले पाकिस्तानी युवाओं पर पड़ा है।

दुनिया भर के विश्वविद्यालयों में दाखिले का वक्त नजदीक होने से कई छात्रों ने इस संकट के लिए पाकिस्तान सरकार नाकाबिल और जिम्मेदार ठहराया है।

पेशावर की एक छात्रा हीरा ने कहा कि उसका इटली का छात्र वीजा हाल ही में मंजूर हुआ था और उसे अक्टूबर में वहाँ होना था। उन्होंने कहा, “हालाँकि, पासपोर्ट न मिलने से मुझसे वहाँ जाने का मौका छीन लिया गया।” उन्होंने कहा कि यह गलत है कि वह सरकारी विभाग की नाकाबिलियत की कीमत चुका रही हैं।

उधर दूसरी तरफ पेशावर के रहने वाले मुहम्मद इमरान ने कहा कि वह पासपोर्ट विभाग की लगातार देरी से थक गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग आवेदकों को सच्चाई बताने की जगह लगातार टाल रहा है।

बार-बार UAE जाना, दुबई से 47 बार लॉगइन: महुआ मोइत्रा हाजिर तो हुई पर जवाब देने में करती रही आनाकानी, एथिक्स कमिटी की रिपोर्ट की डिटेल

नकदी और महंगे उपहार लेकर संसद में सवाल पूछने वाली तृणमूल कॉन्ग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा की मुश्किलें बढ़ती जा रही है। 9 नवंबर 2023 को यह बात सामने आई कि लोकसभा की आचार समिति की मसौदा रिपोर्ट में महुआ मोइत्रा पर ‘अनैतिक आचरण’ का आरोप लगाते हेतु निष्कासन की सिफारिश की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि उन्होंने अपने लॉगिन से संबंधित जानकारी अनधिकृत व्यक्तियों के साथ साझा किए।

समिति के मसौदे में यह भी कहा गया है कि महुआ ने यूएई की कई बार यात्रा की और दुबई से 47 बार उनके अकाउंट में लॉगइन किया गया था। आचार समिति ने आईपी एड्रेस पर एक रिपोर्ट माँगी और सांसद के खिलाफ कानूनी परिणामों पर जोर दिया। महुआ के निष्कासन की सिफारिश करते हुए रिपोर्ट में सरकारी जाँच की गई है।

अपनी रिपोर्ट में आचार समिति ने महुआ मोइत्रा के व्यवहार को अनैतिक आचरण और सदन की अवमानना कहा। ऑपइंडिया ने रिपोर्ट के मसौदे का एक हिस्सा देखा, जिसमें समिति के सदस्यों की महुआ मोइत्रा और दानिश अली के साथ हुई बातचीत को शामिल किया गया है। समिति के सदस्यों की महुआ से बातचीत उनकी विदेश यात्रा और उनके रहने आदि को लेकर होती रही। इसमें सवालों की उपयुक्तता को लेकर नोंकझोंक भी हुई।

इस दौरान महुआ ने समिति के सदस्यों के सवालों को निजी मामलों में दखल देने वाला बताया और विक्टिम कार्ड खेलने की कोशिश की। उन्होंने कहा, “आचार समिति का ये काम बिल्कुल भी नहीं है।” उन्होंने आचार समिति के सदस्य और अध्यक्ष के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने की धमकी दी और कहा, “मैं आचार समिति और आपके खिलाफ शिकायत दर्ज करूँगी। मैं सांसद के रूप में शिकायत करूँगी।”

समिति में चर्चा के दौरान बहुजन समाज पार्टी (BSP) सांसद कुंवर दानिश अली, जदयू सांसद गिरिधर यादव, भाजपा सांसद सुनीता दुग्गल, भाजपा सांसद सुभाष रामराव भामरे और अन्य लोग उपस्थित थे। इस दौरान दखल देने वाले सवालों को लेकर यादव और अली के बीच तीखी नोंकझोंक हुई।

दानिश अली ने महुआ की यात्रा को लेकर पूछे गए सवालों की निंदा की और इसे एक महिला सांसद का अपमान बताया। दानिश अली ने कहा, “आप किसी महिला सांसद का इस तरह अपमान नहीं कर सकते।” उन्होंने समिति के सदस्यों पर स्क्रिप्ट फॉलो करने का आरोप लगाया। इतनी ही नहीं, अली ने पूछे गए प्रश्नों को लेकर समिति के अध्यक्ष की समझ पर भी सवाल उठाया।

इस दौरान सुनीता दुग्गल ने हस्तक्षेप करते हुए कहा, “जवाब देना या न देना उनका अधिकार है।” बातचीत जारी रही और अध्यक्ष विनोद सोनकर ने कार्रवाई की दिशा निर्धारित करने के लिए मतदान का प्रस्ताव रखा। हालाँकि, यादव ने इस पर आपत्ति जताई और कहा, “हम आपकी कोई भी बात नहीं सुनेंगे। आप एक घंटे से प्रश्न पूछ रहे हैं। आप 100 सवाल पूछेंगे, इसका मतलब क्या है?”

महुआ ने माना कि जानकारी साझा की

ऑपइंडिया ने बातचीत के जिन हिस्सों को देखा उनमें महुआ ने दो बार स्वीकार किया है कि उन्होंने उद्योगपति दर्शन हीरानंदानी के साथ अपनी गोपनीय जानकारी साझा की थी। तथाकथित ‘व्यक्तिगत सवालों’ से उत्तेजित होकर उन्होंने कहा, “हम यहाँ दो चीजें निर्धारित करने के लिए हैं। नंबर एक, क्या मैंने दर्शन हीरानंदानी को लॉगिन और पासवर्ड दिया था? मैं आपको पहले ही बता चुकी हूँ कि 2019 से उनके कार्यालय में एक व्यक्ति मेरे प्रश्न को टाइप कर रहा है। प्रश्न मेरे थे लेकिन अनधिकृत नहीं, क्योंकि यह मेरा ओटीपी था। इसलिए उनकी पहुँच नहीं थी। पहले प्रश्न का उत्तर पहले ही दिया जा चुका है।”

महुआ ने इस बात को मानने से साफ इनकार कर दिया कि उन्हें संसद में पूछे गए सवालों के बदले हीरानंदानी से रिश्वत मिली थी। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के वकील जय अनंत देहाद्राई का हवाला देते हुए दावा किया कि उन्हें रिश्वत मिलने का दावा उनके पूर्व प्रेमी की शिकायत पर आधारित था।

महुआ ने आगे कहा, “दूसरा सवाल, उन्होंने आपको क्या दिया? आप मुझे बताएँ कि आपके पास क्या सबूत है या उन्होंने (देहाद्राई ने) आपको क्या दिया है। मुझे इसका खंडन नहीं करना है। जो आपके पास है, उसका मुझे प्रमाण दीजिए। मैं यहाँ बैठकर उस लंबी सूची का उत्तर नहीं दूँगी, जो किसी पूर्व-प्रेमी ने आपको दी है। यह संसद की आचार समिति का काम नहीं है और किसी सांसद को इसका जवाब किसी के सामने नहीं देना पड़ता। आप मुझे बताएँ। यदि इस बात का सबूत है कि दर्शन हीरानंदानी ने मुझे ये-ये दिया है तो आप मुझसे एक स्पष्ट प्रश्न के लिए हाँ/नहा पूछें। मैं यहाँ बैठकर इसका जवाब नहीं दे सकती कि मैं कहाँ गई और किसके साथ रही।”

बता दें कि कुत्ता हेनरी को लेकर सांसद महुआ मोइत्रा और उनके पूर्व प्रेमी जय अनंत देहाद्राई के बीच विवाद पैदा हो गया। इसके बाद देहाद्राई ने दिल्ली पुलिस को पत्र लिखकर महुआ पर कई तरह के आरोप लगाए थे। इसी पत्र के आधार पर भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर कार्रवाई की माँग की थी। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ने मामले को आचार समिति के पास भेज दिया था।

बाय बाय जिंदाभाग… न्यूजीलैंड की जीत, पाकिस्तान की उड़ रही खिल्ली: सहवाग ने लिए मजे तो बोले यूजर्स- लाहौर छोड़ आऊँ क्या

आईसीसी वर्ल्ड कप 2023 में न्यूजीलैंड और श्रीलंका के बीच हुए मैच में न्यूजीलैंड की जीत के बाद पाकिस्तान के सेमीफाइनल में बने रहने की संभावना नाम मात्र रह गई है। ऐसे में भारत के पूर्व बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग ने उनका एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकॉउंट से मजाक उड़ाया और इसी क्रम में उन्होंने श्रीलंका और न्यूजीलैंड के मैच में न्यूजीलैंड की शानदार जीत होने के बाद 2 ट्वीट किए।

वीरेंद्र सहवाद ने पहले ट्वीट में लिखा- पाकिस्तान जिंदाभाग। घर वापसी के लिए आपकी सुरक्षित उड़ान हो।

अगले ट्वीट में वीरेंद्र सहवाग ने लिखा- पाकिस्तान की खास बात है कि जिस टीम को पाकिस्तान सपोर्ट करती है वो टीम पाकिस्तान की तरह खेलने लग जाती है। सॉरी श्रीलंका।

उनके इन ट्वीट्स के बाद नेटीजन्स ने भी पाकिस्तान की खिल्ली उड़ानी शुरू कर दी। बाबर आजम की तस्वीर लगा लगाकर कहा गया कि अभी तो और जलील होना बाकी है।

एक यूजर ने गदर फिल्म के डॉयलॉग को इस स्थिति से जोड़ा जिसमें सनी देओल कहते हैं- मैं आपको लाहौर छोड़ आऊँ?

उन लोगों के ट्वीट को इकट्ठा करके भी नेटीजन्स पाकिस्तान का मजाक उड़ा रहे हैं जिन्होंने वर्ल्ड कप से पहले ही कहा था कि ये कप इस बार बाबर आजम की कप्तानी में पाकिस्तान जीतेगी।

बता दें कि श्रीलंका से जीत के बाद न्यूजीलैंड प्वाइंट टेबल में 4 नंबर पर आ गया है। उन्होंने टूर्नामेंट में 9 में से 5 मैचों में जीत हासिल की है। वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान का अभी एक मैच खेलना बाकी है लेकिन उनके लिए सेमीफाइनल तक पहुँचना बहुत कठिन है।

पाकिस्तान को अगर ऐसा करना है तो उनको इंग्लैंड के खिलाफ जो मैच खेलना है उसमें उन्हें 287 रनों से ज्यादा के अंतर पर जीतना होगा या फिर 3 ओवर के अंदर इंगलैंड द्वारा दिए गए लक्ष्य को पाना होगा… ऐसा चूँकि अब तक क्रिकेट में कभी नहीं हुआ है इसलिए लोग ये लिखकर मजे ले रहे हैं कि जो पाकिस्तान मैचों से पहले इतने बड़े बोल रहा था उसका हाल क्या हुआ।

17 साल के हिंदू को बनाया मुस्लिम, स्कूल बैग में मिली जालीदार टोपी से खुला राज: इस्लामी धर्मांतरण में नाबालिग और उसके अब्बा पर केस

कर्नाटक में एंटी कन्वर्जन लॉ के तहत पहली बार एक नाबालिग के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इस मामले में नाबालिग के साथ ही उसके अब्बू के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया है। जानकारी के मुताबिक, पीड़ित नाबालिग जिस स्कूल में पढ़ता है, वहीं उसके साथ पढ़ने वाले सहपाठी ने अपने अब्बू के साथ मिलकर इस्लाम कबूल करा दिया। इस मामले में धर्मांतरित कराए गए नाबालिग छात्र के परिजनों को कभी पता ही नहीं चला, जब तक कि उसके बैग से जालीदार सफेद टोपी और इस्लामिक साहित्य नहीं मिल गया।

ये मामला कर्नाटक के चित्रदुर्ग जिले का है। यहाँ के स्थानीय कुरुबा समुदाय के नाबालिग छात्र का धर्मांतरण कराने का मामला सामने आया है। इस मामले में कर्नाटक पुलिस ने कर्नाटक प्रोटेक्शन ऑफ राइट टू फ्रीडम ऑफ रिलीजन एक्ट 2022 के तहत मामला दर्ज कर आरोपित पिता-पुत्र के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। ये कर्नाटक का ऐसा पहला मामला है, जिसमें किसी नाबालिग को धर्मांतरण विरोधी कानून के तहत आरोपित बनाया गया है। आरोपित के पिता का नाम ‘गरीब’ बताया जा रहा है, वहीं नाबालिग आरोपित का नाम कानूनी अड़चनों के चलते सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।

पुलिस को दी गई शिकायत में पीड़ित के पिता ने बताया है कि उनका बेटा 17 साल का है। वो चल्लाकरे तालुक के कॉलेज में पढ़ता है। उसने कुछ समय से पूजा-पाठ करना और ईश्वर की प्रार्थना करना तक बंद कर दिया था। यही नहीं, उसने हाल ही में दशहरा की पूजा में भी सम्मिलित होने से इनकार कर दिया था। इसके बाद जब शक होने पर उन्होंने अपने बेटे के स्कूल बैग की तलाशी ली, तो उसमें से इस्लामिक साहित्य और टोपी बरामद हुई। यही नहीं, उन्होंने जब अपने बेटे के फोन को खंगाला तो उसमें गाँजा और अन्य मादक पदार्थों से संबंधित चैट मिली।

छात्र के बैग से बरामद इस्लामिक साहित्य, फोटो साभार : पॉवर टीवी न्यूज

अपनी शिकायत में उन्होंने कहा, “मैंने जब इस बारे में पता किया, तो ये बात सामने आई कि आरोपित नाबालिग सहपाठी अपने अब्बू के साथ मिलकर मेरे बेटे को मस्जिद लेकर जाता था। वो उसे चित्रदुर्ग की कई मस्जिदों में लेकर गए थे और बिना उनकी अनुमति के ही उसे इस्लाम धर्म में परिवर्तित करा दिया।”

पुलिस अधिकारी के मुताबिक, आरोपित का पिता ‘गरीब’ एक साइकिल मरम्मत की दुकान चलाता है। हालाँकि, अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं की गई है, हालाँकि दोनों पक्षों के बयान दर्ज कर लिए गए हैं। इस मामले में आरोपित पिता-पुत्र के खिलाफ 2022 के धर्मांतरण विरोधी कानून के सेक्शन 5 के तहत केस दर्ज किया गया है। चित्रदुर्ग के एसपी धर्मेंद्र कुमार मीणा ने कहा है कि पुलिस इस मामले में जाँच कर रही है और पीड़ित के साथ ही आरोपित से भी कुछ जानकारियाँ प्राप्त करने की कोशिश कर रही है।